Author: NewseDay

  • अक्टूबर 2026 में इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मत, ग्रहों के बदलाव से धन लाभ के योग

     साल 2026 का अक्टूबर महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद उथल-पुथल और बड़े बदलावों वाला साबित हो रहा है. इस महीने एक के बाद एक कई प्रमुख ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्र में परिवर्तन कर रहे हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार, जहां कुछ ग्रहों की चाल बदल चुकी है, वहीं आने वाले दिनों में देवगुरु बृहस्पति, शनि, सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल जैसे शक्तिशाली ग्रह भी अपनी स्थिति में फेरबदल करने जा रहे हैं.

    अक्टूबर के इन बचे हुए 26 दिनों में होने वाले ये खगोलीय परिवर्तन देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालेंगे. प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, ग्रहों की इस बदलती चाल से 7 भाग्यशाली राशियों के लिए यह पूरा दौर 'गोल्डन पीरियड' जैसा साबित होने वाला है. आइए जानते हैं कि आने वाले 26 दिन किन राशियों के लिए मालामाल होने के योग बना रहे हैं.

    वृषभ राशि (Taurus)
    वृषभ राशि के लोगों के लिए अक्टूबर के शेष दिन बेहद शुभ परिणाम लेकर आ रहे हैं. इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से स्टेबल बनी रहेगी, जिससे पैसों को लेकर चल रही किसी भी प्रकार की चिंता से राहत मिलेगी.

    कर्क राशि (Cancer)
    कर्क राशि के लोगों के लिए आने वाले 26 दिन पूरी तरह से पॉजिटिव परिणाम लेकर आए हैं. इस अवधि में आपको किसी भी बड़ी सफलता को पाने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष या अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि कम मेहनत में ही आपको मनचाहे परिणाम हासिल हो जाएंगे.

    सिंह राशि (Leo)
    सिंह राशि के जातकों के लिए अक्टूबर के ये बचे हुए दिन बेहद लाभदायक रहने वाले हैं. इस दौरान आपको अपने भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा, जिससे आपके कई रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. इसके साथ ही आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं, जिससे आपकी तिजोरी मजबूत होगी.

    कन्या राशि (Virgo)
    कन्या राशि वालों के लिए अक्टूबर के आगामी दिन अत्यधिक फायदेमंद साबित होंगे. इस समयावधि में आपके सामने करियर या व्यापार से जुड़ा कोई नया और बेहतरीन मौका आ सकता है, जिसके जरिए आपके जीवन में धन का आगमन होने की पूरी संभावना है.

    तुला राशि (Libra)
    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय काफी अच्छा और उत्साहवर्धक माना जा रहा है. इस पूरे दौर में आप गजब के आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे, जिसके बल पर आप अपने कार्यक्षेत्र में और अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और लोगों को प्रभावित करेंगे.

    मकर राशि (Capricorn)
    मकर राशि के जातकों के लिए यह पूरा समय बेहद शानदार और सुखद रहने वाला है. इस दौरान घर-परिवार में किसी खास बात को लेकर प्रसन्नता का माहौल रहेगा और आपको अपनी संतान पक्ष से कोई बहुत अच्छी और सुकून देने वाली खबर सुनने को मिल सकती है.

    मीन राशि (Pisces)
    मीन राशि के जातकों के लिए आने वाले 26 दिन हर लिहाज से लाभकारी और प्रगतिशील रहेंगे. इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपको अपने दोस्तों और सहपाठियों/सहयोगियों का पूरा-पूरा सपोर्ट मिलेगा, जिससे कठिन से कठिन प्रोजेक्ट भी आसानी से पूरे हो जाएंगे.

  • दिल्ली में झुग्गीवासियों को मिलेंगे फ्लैट? सरकार कराएगी नया सर्वे, पुनर्वास की कट-ऑफ तारीख 2025 प्रस्तावित

    दिल्ली में झुग्गीवासियों को मिलेंगे फ्लैट? सरकार कराएगी नया सर्वे, पुनर्वास की कट-ऑफ तारीख 2025 प्रस्तावित

    नई दिल्ली
     दिल्ली सरकार 12 साल बाद झुग्गी-बस्तियों और जेजे क्लस्टर का नया सर्वे करने जा रही है। इसका मकसद ऐसी बस्तियों और परिवारों की संख्या का पता लगाना और अपने प्रस्तावित 'जहां झुग्गी, वहां मकान' (इन-सीटू पुनर्वास) प्रोग्राम के लिए लाभार्थियों की पहचान करना है, ताकि उन्हें बेहतर सुविधाएं दी जा सकें। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सर्वे के दो हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। यह साबित करने के लिए कि कोई व्यक्ति कट-ऑफ तारीख से पहले झुग्गी में रह रहा था और पुनर्वास के लिए योग्य है, वोटर ID कार्ड, राशन कार्ड और बिजली के बिल जैसे दस्तावेजों की जरूरत होगी।

    'इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल' के तहत दिए जाएंगे फ्लैट: आशीष सूद
    मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली की बीजेपी सरकार ने पुनर्वास के नियमों का दायरा बढ़ाया है ताकि 2014 के बाद झुग्गी में आए लोगों को भी सम्मानजनक घर मिल सकें। योग्य परिवारों को 'इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल' के तहत फ्लैट दिए जाएंगे, जिसका मतलब है कि उन्हें उसी जगह के पास बसाया जाएगा जहां वे अभी रह रहे हैं। दिल्ली सरकार के 2014 के पिछले बड़े सर्वे में लगभग 700 जेजे बस्तियों और करीब 3.3 लाख परिवारों की पहचान की गई थी। अभी सरकार के पास झुग्गी क्लस्टर या उनमें रहने वाले परिवारों की संख्या के बारे में कोई वेरिफाइड आंकड़े नहीं हैं।

    'जहां झुग्गी, वहां मकान' पॉलिसी
    एक अधिकारी ने कहा कि 'जहां झुग्गी, वहां मकान' पॉलिसी को लागू करने से पहले इस कवायद में बस्तियों की मैपिंग की जाएगी, परिवारों की संख्या का आकलन किया जाएगा और लाभार्थियों का वेरिफिकेशन किया जाएगा। दिल्ली विधानसभा ने हाल ही में 'दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (संशोधन) बिल, 2026' पास किया है। इसमें DUSIB एक्ट, 2010 में संशोधन करके झुग्गी क्लस्टर को जेजे बस्ती के तौर पर पहचानने के लिए कट-ऑफ तारीख एक जनवरी, 2006 को बदलकर एक जनवरी, 2025 करने का प्रस्ताव था

    मौजूदा कानून की बड़ी बातें
        मौजूदा कानून के तहत, किसी बस्ती को जेजे बस्ती के तौर पर तब मान्यता मिल सकती है जब उसमें कम से कम 50 घर हों और वह कुछ शर्तों को पूरा करती हो
        इनमें से एक शर्त यह है कि वह 1 जनवरी, 2006 से मौजूद रही हो, अभी दिल्ली में 675 मान्यता प्राप्त जेजे क्लस्टर हैं
        हालांकि अधिकारियों का अनुमान है कि असल संख्या लगभग 750 है
        2015 के बाद कई नई बस्तियां बसीं।
        जेजे क्लस्टरों में ड्राइवर, घरेलू कामगार, सब्जी बेचने वाले और ऑटो-रिक्शा चलाने वाले जैसे हजारों कामकाजी लोग रहते हैं, जो शहर की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।

    पुनर्वास के लिए कट-ऑफ तारीख अब 2025
    19 साल की इस समय-सीमा को बढ़ाने का मकसद पात्रता और तय शर्तों के आधार पर, बड़ी संख्या में नई बस्तियों को कानूनी पुनर्वास ढांचे के दायरे में लाना है। प्रस्तावित कट-ऑफ तारीख अब 2025 होने के कारण, अधिकारियों को उम्मीद है कि जिन बस्तियों और घरों का आकलन किया जाना है, उनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी।

     

  • रेलूराम परिवार हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, दोषियों की समयपूर्व रिहाई पर फैसला सुरक्षित

    रेलूराम परिवार हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, दोषियों की समयपूर्व रिहाई पर फैसला सुरक्षित

    हिसार
     पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के आठ सदस्यों की हत्या मामले में दोषी करार दिए गए सोनिया व संजीव कुमार की समय पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।

    पीड़ित परिवार के सदस्यों की तरफ से दायर याचिकाओं में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से दिसंबर 2025 में दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत दोषियों की समयपूर्व रिहाई के मामले पर पुनर्विचार करने और उन्हें अंतरिम जमानत देने का निर्देश दिया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा
    सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता आईना वर्मा खोवाल और लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोषियों के अपराध की गंभीरता, जेल में उनके आचरण, सुधार की वास्तविक स्थिति और समयपूर्व रिहाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं को न्यायालय के समक्ष रखा गया।

    उन्होंने बताया कि न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि केवल लंबे समय तक कारावास में रहने अथवा हाल के कुछ वर्षों के आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहाई का अधिकार स्वतः उत्पन्न नहीं होता।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने भी मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने और उसके बाद दोषियों की रिहाई से जुड़े व्यापक प्रश्न पर गंभीर टिप्पणी की।

    माफ कर देने वाले स्वभाव के कारण बढ़ रहे अपराध: सुप्रीम कोर्ट
    न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के माफ करने वाला स्वभाव के कारण देश आज अपराधों की स्थिति का सामना कर रहा है और इस क्षमाशील रवैये की भी कहीं न कहीं सीमा तय होनी चाहिए। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

    यह है मामला वर्ष 2001 में रेलूराम परिवार के आठ सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में एक बच्ची की उम्र लगभग डेढ़ माह थी

    यह है मामला
    वर्ष 2001 मेंरेलूराम परिवार के आठ सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में एक बच्ची की उम्र लगभग डेढ़ माह थी।

  • अरावली पर 30 नवंबर तक रिपोर्ट देगी कमेटी, राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में जुटाए जाएंगे जमीनी तथ्य

    अरावली पर 30 नवंबर तक रिपोर्ट देगी कमेटी, राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में जुटाए जाएंगे जमीनी तथ्य

     जयपुर
    अरावली हिल्स और रेंज की परिभाषा, पारिस्थितिक स्थिति और संरक्षण से जुड़े मामलों की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आ रही है। गुजरात के अरावली क्षेत्र का दौरा करने के बाद कमेटी 11 से 13 अक्टूबर तक डूंगरपुर और बांसवाड़ा में रहेगी। इस बार फोकस वागड़ के उन इलाकों पर है, जहां पहाड़ियों, जंगल, खनन और स्थानीय लोगों, खासकर आदिवासी समुदायों की आजीविका के बीच सीधा संबंध है।

    क्यों बनी कमेटी
    सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई, 2026 के आदेश में आइसीएफआरई के महानिदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एचपीसी गठित की थी। इसका मकसद पहले तैयार की गई अरावली की परिभाषा और उसके आधार पर होने वाले सीमांकन का स्वतंत्र और विशेषज्ञ मूल्यांकन करना है।

    दोनों जिलों में सरकार ने लगाया पूरा प्रशासन
    कमेटी के दौरे को लेकर राज्य सरकार ने भी संबंधित अधिकारियों को लगाया है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को फील्ड कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जबकि डूंगरपुर और बांसवाड़ा के उप वन संरक्षक और फील्ड स्टाफ कमेटी के साथ रहेंगे।

    रिपोर्ट पेश करेगी कमेटी
    कमेटी पहले भी राजस्थान के पांच दिवसीय दौरे पर आ चुकी है। उस दौरान विभिन्न स्थानों पर फील्ड विजिट और हितधारकों से संवाद किया गया था, लेकिन सभी संबंधित पक्षों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों की पर्याप्त भागीदारी नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में दोबारा जमीनी पड़ताल और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद की मांग उठी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी संबंधित हितधारकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर देना होगा। कोर्ट ने कमेटी को 30 नवंबर, 2026 तक व्यापक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    जमीनी तथ्य जुटाकर तैयार होगी रिपोर्ट
    राजस्थान के इस दौरे में कमेटी चयनित स्थलों पर खनन, क्वारी, स्टोन क्रशर, भूमि उपयोग, वन क्षेत्र, जलस्रोत और आसपास के पर्यावरणीय परिदृश्य का आकलन करेगी। जिलों में शाम को होने वाली बैठकों में पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों, खनन पट्टाधारकों, ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और आदिवासी समुदायों समेत अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे।

    11 को डूंगरपुर और 12 को बांसवाड़ा
    हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) 8 से 10 अक्टूबर तक गुजरात के अरावली क्षेत्रों का दौरा करेगी। 11 अक्टूबर को दक्षिणी राजस्थान में प्रवेश के बाद डूंगरपुर जिले के पालदेवल-सरकन क्षेत्र में फील्ड विजिट होगी। इसके बाद 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिले के केवड़िया-कोठारा क्षेत्र में पड़ताल की जाएगी। शाम को संबंधित हितधारकों से संवाद होगा। दोनों दिन शाम को करीब तीन घंटे तक स्थानीय लोगों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होगी।

  • Vastu Tips: हाथ से दीया, नमक या दूध गिरना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें मान्यताएं

    Vastu Tips: हाथ से दीया, नमक या दूध गिरना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें मान्यताएं

    Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में हमारे आसपास रखी हर छोटी-बड़ी वस्तु का संबंध हमारी सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा गया है. कई बार हम दैनिक जीवन में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं जैसे हाथ से किसी चीज का छूटकर गिर जाने को एक लापरवाही या इत्तेफाक मानकर टाल देते हैं. लेकिन, वास्तु और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ खास चीजों का बार-बार या अचानक हाथ से गिरना भविष्य में आने वाली परेशानियों या अशुभ घटनाओं का संकेत हो सकता है. आइए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं जिनका गिरना अशुभ माना जाता है.

    पूजा के दौरान हाथ से दीया गिरना
    हिंदू संस्कृति में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. यदि पूजा या आरती करते समय अचानक आपके हाथ से जलता हुआ दीपक या दीया छूटकर गिर जाए, तो इसे बेहद अशुभ माना जाता है. वास्तु के अनुसार, यह इस बात का संकेत हो सकता है कि भगवान आपकी पूजा से पूर्णतः संतुष्ट नहीं हैं या भविष्य में आपके घर पर कोई आर्थिक संकट या बड़ी विपत्ति आ सकती है.

    हाथ से नमक का गिरना
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर में इस्तेमाल होने वाला नमक सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका गहरा संबंध ज्योतिष में शुक्र और चंद्र ग्रह से माना जाता है. यदि आपके हाथ से नमक बार-बार नीचे गिरता है, तो इसे दरिद्रता और आर्थिक तंगी का संकेत माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, नमक का गिरना आपसी रिश्तों में खटास और पारिवारिक कलह का कारण भी बन सकता है.

    दूध का उबलकर गिरना या छलकना
    घर में दूध का उबलकर गैस पर गिरना या बर्तन से छलकना बहुत आम बात है, लेकिन ज्योतिषीय नजरिए से इसे शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि दूध का गिरना घर में मानसिक अशांति, नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश और धन-हानि का संकेत देता है. विशेषकर चंद्रमा के कमजोर होने पर इस तरह की घटनाएं अधिक होती हैं.

    तेल का जमीन पर गिरना
    भोजन पकाने में इस्तेमाल होने वाला सरसों या अन्य तेल यदि अचानक बर्तन से गिर जाए या शीशी टूट जाए, तो इसे बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है. वास्तु के मुताबिक, तेल का गिरना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आपको किसी गंभीर आर्थिक नुकसान या कार्यक्षेत्र में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है.

    पूजा की थाली या सामग्री का बिखरना
    अगर पूजा की थाली या उसमें रखी रोली, चावल, फूल आदि सामग्री अचानक आपके हाथों से बिखर जाए, तो यह घर के किसी सदस्य के अस्वस्थ होने या किसी अप्रिय घटना के घटने की ओर इशारा करता है. इसे घर की ऊर्जा में आए नकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है.

  • दुर्ग में शिक्षा सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा, 50 लाख की लागत से तैयार होगी आधुनिक लाइब्रेरी

    दुर्ग में शिक्षा सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा, 50 लाख की लागत से तैयार होगी आधुनिक लाइब्रेरी

    दुर्ग.

    दुर्ग जिले को सरकारी स्तर पर आधुनिक लाइब्रेरी की सौगात मिलने जा रही है। विद्यार्थियों को स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आधुनिक लाइब्रेरी निर्माण की पहल की है।

    लाइब्रेरी की सुविधा होने से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को मदद मिलेगी। लाइब्रेरी निर्माण के लिए 50 लाख का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग दुर्ग द्वारा प्रपोजल तैयार किया गया है। उनके इस प्रपोजल को जिला शिक्षा अधिकारी ने 6 अक्टूबर को लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को भेजा है। आधुनिक लाइब्रेरी के लिए जगह का चिन्हांकन किया जा चुका है। पद्मनाभपुर में मैथ्यू बुक डिपो के बाजू आंगनवाड़ी के समीप में रिक्त जमीन पर इसे बनाए जाने का प्रस्ताव है।

    प्रस्ताव के मुताबिक आधुनिक लाइब्रेरी में लड़के लड़कियों के लिए अलग-अलग रीडिंग रूम की व्यवस्था की गई है। ग्राउंड फ्लोर पर छात्रों के लिए रीडिंग रूम बनाई जाएगी। वही छात्राओं के लिए रीडिंग रूम की सुविधा फर्स्ट फ्लोर पर होगी। रीडिंग रूम में बैठकर वे शांतिपूर्वक पुस्तकें, समाचार पत्र और पत्रिकाएं पढ़ सकेंगे। वैसे रीडिंग रूम में विद्यार्थी तथा अन्य लोग शान्त वातावरण में बिना शोर-शराबे के अध्ययन करते हैं।

    ग्राउंड तथा फर्स्ट फ्लोर पर अलग-अलग टॉयलेट की व्यवस्था की गई है। सीनियर सिटीजन के लिए अलग से रीडिंग रूम बनाए जाने का प्रस्ताव है। डिलीवरी तथा स्टोर रूम का भी प्रावधान किया गया है। आधुनिक लाइब्रेरी में सामग्री के नाम पर दैनिक समाचार पत्र, साप्ताहिक / मासिक पत्रिकाएं, रोजगार समाचार, स्टडी मटेरियल और संदर्भ पुस्तकें उपलब्ध होती हैं यानी पुस्तकों का पूरा संग्रह होता है।

  • माता वैष्णो देवी के भक्तों को रेलवे की सौगात, दिल्ली से कटड़ा का सफर 13 घंटे में होगा पूरा

    माता वैष्णो देवी के भक्तों को रेलवे की सौगात, दिल्ली से कटड़ा का सफर 13 घंटे में होगा पूरा

    पठानकोट

    नवरात्र के दौरान श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तर रेलवे ने बड़ी राहत दी है। नई दिल्ली-कटड़ा के बीच दो फेरे फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया गया है। आरक्षित फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस यात्रियों को कंफर्म सीट के साथ दिल्ली से कटड़ा और कटड़ा से दिल्ली तक सफर की सुविधा देगी।

    ट्रेन संख्या 04083 नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा फेस्टिवल स्पेशल नौ और 16 अक्तूबर को दोपहर दो बजे नई दिल्ली से रवाना होगी। अगले दिन तड़के तीन बजे कटड़ा पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन 04084 कटड़ा-नई दिल्ली फेस्टिवल स्पेशल 10 और 17 अक्तूबर को सुबह 10 बजे कटड़ा से रवाना होकर उसी दिन रात 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। 

    जम्मू रेल मंडल की ओर से जारी शेड्यूल के मुताबिक, ट्रेन नंबर 04085/04086 (अप-डाउन) 10 अक्टूबर से और ट्रेन नंबर 04485/04486 (अप-डाउन) 11 अक्टूबर से शुरू होगी। जारी शेड्यूल के मुताबिक, दोनों जोड़ी ट्रेनें दिल्ली से कटड़ा तक का सफर 13 घंटे में तय करेंगी।

    दोनों जोड़ी ट्रेनें रास्ते में दोनों तरफ सोनीपत, पानीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला कैंट, जालंधर कैंट, पठानकोट कैंट, कठुआ, जम्मू तवी और शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर) स्टेशनों पर ठहराव करेंगी।

    10 और 11 अक्टूबर को होगी शुरुआत स्पेशल ट्रेन संख्या 04085 आगामी 10 अक्टूबर को नई दिल्ली से दोपहर 2 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 3 बजे कटड़ा पहुंचेगी, जबकि वापसी में ट्रेन संख्या 04086 11 अक्टूबर को कटड़ा से सुबह 10 बजे रवाना होकर उसी दिन रात 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी।

    इसी तरह ट्रेन संख्या 04485 11 अक्टूबर को नई दिल्ली से दोपहर 2 बजे चलकर अगले दिन सुबह 3 बजे कटड़ा पहुंचेगी और वापसी में ट्रेन संख्या 04486 12 अक्टूबर को कटड़ा से सुबह 10 बजे रवाना होकर रात 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। ये ट्रेनें मार्ग में सोनीपत, पानीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला कैंट, जालंधर कैंट, पठानकोट कैंट, कठुआ, जम्मू तवी और शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर) स्टेशनों पर ठहराव करेंगी।

    यात्रियों को मिलेगी सुविधा-सीनियर डीसीएम जम्मू मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) उचित सिंघल ने बताया कि इन ट्रेनों के चलने से त्योहारों पर घर जाने वाले लोगों को कन्फर्म टिकट आसानी से मिलेगी और नियमित ट्रेनों पर भीड़ का दबाव कम होगा। इसके साथ ही यात्रियों की मांग के अनुसार नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी अस्थायी रूप से जोड़े जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि यात्री सुविधा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है और त्योहारों के दौरान मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में चलाई गई स्पेशल ट्रेनों की तरह ही इन नई स्पेशल ट्रेनों से भी यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और आवश्यकतानुसार अधिक भीड़ वाले रूटों पर अतिरिक्त कोच भी लगाए जाएंगे।

    655 किलोमीटर का सफर, 22 एलएचबी कोच
    फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन में आधुनिक एलएचबी के कुल 22 कोच लगाए गए हैं। यह ट्रेन कुल 655 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। सोनीपत, पानीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला कैंट, डंडारी कलां, जालंधर कैंट, पठानकोट कैंट, कठुआ, जम्मूतवी और शहीद कैप्टन तुषार महाजन स्टेशनों पर ठहराव होगा। 

    26 तक एक और विशेष ट्रेन ट्रेन 04081/04082 का संचालन भी जारी है। यह ट्रेन 26 अक्तूबर तक चलेगी। जम्मू मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने कहा कि नवरात्र में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती है। उन्होंने यात्रियों से समय रहते यात्रा की योजना बनाने और आईआरसीटीसी की वेबसाइट अथवा रेलवे आरक्षण काउंटरों से टिकट बुक कराने की अपील की है।

  • स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

    स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

    भोपाल 
    स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पटवारियों को प्रशासन ने अब 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। खासकर परिवीक्षाधीन पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय-सीमा में अपने पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करें। ऐसा नहीं करने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं बिना किसी अतिरिक्त सूचना के समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

    मध्यप्रदेश में 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ गया है। पटवारियों के निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में साइन नहीं करने के फैसले के बाद प्रदेश में 102 पटवारियों पर बर्खास्त।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके बाद ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व काम का शटडाउन रखा है। देवास में पटवारी बुधवार देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे।

    इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में 12 पटवारियों को शासकीय कार्यों में लापरवाही पर आरोप-पत्र दिए गए हैं।

    सीएम तक पहुंचा मामला, PRC की बैठक बेनतीजा

    पटवारियों का विरोध और जिलों में कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। विरोध के बीच गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

    संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश
    प्रशासन ने सामूहिक अवकाश को अनधिकृत अनुपस्थिति मानते हुए संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अवकाश के लिए प्रत्येक कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना जरूरी है। संघ के माध्यम से सामूहिक अवकाश की सूचना देकर लगातार शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।

    अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का नहीं मिलेगा वेतन, 'ब्रेक इन सर्विस' की चेतावनी
    सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति सामूहिक अवकाश या हड़ताल में शामिल होने की अवधि का वेतन देय नहीं होगा। इस अवधि को अवकाश भी स्वीकृत नहीं किया जाएगा। संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का वेतन काटने की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पटवारी आगे भी अनधिकृत रूप से शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहते हैं तो संबंधित अवधि को 'सेवा में व्यवधान' (ब्रेक इन सर्विस) मानने संबंधी प्रस्ताव विभागाध्यक्ष को भेजे जाएंगे।

    पहले तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों पर हो चुकी कार्रवाई
    बता दें कि प्रशासन की सख्ती के बीच तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। इसके विरोध में जिलेभर के पटवारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में 1000 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे।

    डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक भी टली
    पटवारी प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में होने वाली बैठक भी टल गई। डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में पटवारियों की मांग और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

    पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाया नहीं जाता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहा है।

    50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का मामला
    मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।

    स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को रजिस्ट्री के जरिए मुफ्त में मालिकाना हक देने की प्रक्रिया की जा रही है।

    पटवारी संघ ने कहा- कोर्ट में घसीटे जांएगे

    पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के निष्पादक के रूप में काम करने से इनकार किया है। संघ का कहना है कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल होने से भविष्य में जमीन को लेकर विवाद होने पर उन्हें भी कानूनी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है।

     

  • CM भगवंत मान का बड़ा कदम, पंजाब में निवेश बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए नई पहल

    CM भगवंत मान का बड़ा कदम, पंजाब में निवेश बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए नई पहल

    चंडीगढ़
    कारोबार में सुगमता, पारदर्शिता और रोजगार पैदा करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए पंजाब निवेशकों के लिए प्राथमिकता वाले स्थान के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज इस दिशा में चंडीगढ़ में ‘हुनर पंजाब’ और ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टल लॉन्च किए। उन्होंने कहा कि ये नए पोर्टल 45 दिनों के भीतर सिंगल विंडो के माध्यम से सभी आवश्यक मंजूरियां सुनिश्चित करेंगे, निवेशकों को वित्तीय प्रोत्साहनों की पारदर्शी तरीके से निगरानी करने में सक्षम बनाएंगे और उद्योगों को कुशल युवाओं से सीधे जोड़ेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने वर्ष 2022 से अब तक 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की पहल का उद्देश्य राज्य के युवाओं के लिए पंजाब में ही रोजगार के अवसर पैदा करना और फिर से ‘रंगला पंजाब’ का निर्माण करना है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों के दौरान पंजाब में 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे 6.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं। निवेशकों के इस विश्वास को बनाए रखने के लिए हमने आज दो प्रमुख पोर्टल लॉन्च किए हैं। ‘हुनर पंजाब’ पोर्टल राज्य के युवाओं को उनके घरों के नजदीक रोजगार के अवसर प्रदान करने और उद्योगों को कुशल कामगार उपलब्ध करवाने के लिए शुरू किया गया है।

    इसके साथ ही निवेशकों को उपलब्ध सुविधाओं और वित्तीय रियायतों के बारे में पारदर्शी जानकारी प्रदान करने के लिए ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ का ‘फाइनेंशियल इंसेंटिव्स मॉड्यूल’ (पासबुक) लॉन्च किया गया है। हमारा लक्ष्य पंजाब के युवाओं को उनके अपने राज्य में रोजगार देना और पंजाब को एक बार फिर खुशहाल बनाना है। इंकलाब जिंदाबाद।”

    पोर्टल लॉन्च करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हुनर पंजाब और फास्ट-ट्रैक पंजाब की शुरुआत पंजाब के उद्योग और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम है। ‘हुनर पंजाब’ उद्योग और कुशल युवाओं के बीच की दूरी को कम करेगा और राज्य के भीतर हमारे युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करेगा।”

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हुनर पंजाब’ पोर्टल पर पहले ही लगभग 1,750 संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं और औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के लिए स्थानीय कुशल युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनियां अब इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुशल युवाओं से सीधे जुड़कर उन्हें नौकरी पर रख सकेंगी।

    उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने और सरकारी कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सभी विभागों में ई-ऑफिस और ऑनलाइन प्रणालियां लागू कर दी हैं। ये प्रणालियां अनावश्यक देरी को कम कर रही हैं और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक जवाबदेह बना रही हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब ने पिछले चार वर्षों में 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह पंजाब में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “हुनर पंजाब युवाओं की प्रतिभा, नेटवर्किंग और रोजगार तक पहुंच के लिए सिंगल प्लेटफॉर्म है। यह प्रमुख कमियों जैसे उपलब्ध प्रतिभा के बारे में जानकारी का अभाव, उद्योग और संस्थानों की अलग-अलग आवश्यकताएं, मांग और आपूर्ति के बीच संपर्क की कमी तथा निर्धारित जवाबी समय-सीमा के अभाव को दूर करता है।”

    उन्होंने आगे कहा, “‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ के साथ-साथ ‘हुनर पंजाब’ पोर्टल उद्योग के लिए कौशल विकास और रोजगार के प्रमुख केंद्र हैं। ये पोर्टल चार महत्वपूर्ण चरणों को एक ही मंच पर लाते हैं, जिनमें संस्थानों की खोज, भर्ती एवं रोजगार, इंटर्नशिप एवं औद्योगिक प्रशिक्षण तथा उद्योग-संस्थान सहयोग शामिल हैं।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “7 प्रशासनिक विभागीय श्रेणियों में 1,700 से अधिक संस्थान पहले ही इस पोर्टल का हिस्सा बन चुके हैं। इस व्यवस्था में निश्चित समय-सीमा और जवाबदेही तय की गई है, ताकि आवेदनों और अनुरोधों का निर्धारित समय के भीतर निपटारा किया जा सके।

    उद्योगों, संस्थानों और विभागों के लिए विशेष डैशबोर्ड तैयार किए गए हैं। यह प्लेटफॉर्म हेल्प-डेस्क सहायता के साथ-साथ सवालों और शिकायतों के निवारण की सुविधा भी प्रदान करेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया सभी हितधारकों के लिए आसान और अधिक पारदर्शी हो जाएगी।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “‘हुनर पंजाब’ पोर्टल उद्योगों, संस्थानों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों और विभागों की साझेदारी से शुरू से अंत तक इंटर्नशिप और औद्योगिक प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करेगा। यह युवाओं को वास्तविक रोजगार और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ने के लिए व्यवस्थित ढांचा उपलब्ध करवाएगा।”

    उन्होंने बताया, “यह पोर्टल एम.ओ.यू. आधारित उद्योग-संस्थान साझेदारी को औपचारिक रूप देगा, जिसमें गैस्ट लेक्चर, फैकल्टी विकास, ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, पाठ्यक्रम संबंधी सुझाव, बुनियादी ढांचे एवं तकनीकी सहायता तथा सी.एस.आर. सहयोग शामिल हैं।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सरकार शुरू से अंत तक की प्रक्रियाओं, अलग-अलग यूजर लॉगिन, राज्य स्तर पर टैलेंट मैनेजमेंट एवं प्लेसमेंट, प्रशिक्षण और सहयोग की विभागीय निगरानी के साथ सभी चार मॉड्यूल को पूरी तरह लागू करने की दिशा में काम कर रही है। पंजाब निवेशकों के लिए पसंदीदा स्थान के रूप में उभरा है, जहां सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से सभी आवश्यक मंजूरियां उपलब्ध हैं। ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने वाले निवेशकों को 45 दिनों के भीतर सभी मंजूरियां मिल जाएंगी।”

    उन्होंने कहा, “‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टल निवेशकों को मिलने वाली वित्तीय रियायतों के बारे में भी पारदर्शी जानकारी देगा। निवेशक विभिन्न कार्यालयों और प्रक्रियाओं पर निर्भर रहने के बजाय पोर्टल के माध्यम से ही इन रियायतों को ट्रैक कर सकेंगे।”

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारा एकमात्र उद्देश्य पंजाब के युवाओं को पंजाब के भीतर ही रोजगार उपलब्ध करवाना और पंजाब को फिर से ‘रंगला पंजाब’ बनाना है। सरकार चाहती है कि पंजाब की प्रतिभा को पंजाब में ही अवसर मिलें और वह राज्य की प्रगति में योगदान दे।”

    उन्होंने कहा, “यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब में वर्ष 2022 से अब तक 1.89 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे 6.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए हैं। यह उस विश्वास का परिणाम है जो निवेशक पंजाब पर जता रहे हैं।”

    पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकारें निवेश सम्मेलन करवाती थीं और केवल एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर करती थीं, लेकिन कंपनियां वास्तव में पंजाब में निवेश नहीं करती थीं। आज हमारी सरकार द्वारा तैयार की गई निवेश-हितैषी नीतियों और माहौल को देखकर कंपनियां निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं।”

    उन्होंने कहा, “‘हुनर पंजाब’ और ‘फास्ट-ट्रैक पंजाब’ पोर्टलों की शुरुआत पंजाब के औद्योगिक ढांचे को और मजबूत करेगी। ये पोर्टल राज्य में निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति देंगे।”

    इस दौरान उद्योग, वाणिज्य एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “ये दोनों पोर्टल विभाग के कामकाज में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों पर उद्योग एवं निवेश पंजाब अपने पूरे कामकाज का डिजिटलीकरण कर रहा है, ताकि निवेश परियोजनाओं की मंजूरी या अन्य संबंधित प्रक्रियाओं में कोई बाधा न आए।”

    उन्होंने कहा, “पंजाब की प्रगति और विकास में उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पोर्टल उद्योगों को कुशल मानव शक्ति तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेंगे कि पंजाब के युवाओं को उनके अपने राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर मिलें।”

    इस अवसर पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

     

  • उत्तर प्रदेश में 455 लेखपालों को मिली नई जिम्मेदारी, अब राजस्व निरीक्षक के पद पर करेंगे काम

    उत्तर प्रदेश में 455 लेखपालों को मिली नई जिम्मेदारी, अब राजस्व निरीक्षक के पद पर करेंगे काम

    योगी सरकार ने 455 लेखपालों को दी पदोन्नति, बने राजस्व निरीक्षक

    – राजस्व परिषद ने ऑनलाइन डीपीसी से पूरी की प्रक्रिया, जल्द जारी होंगे तैनाती के आदेश

    राजस्व निरीक्षक बनने से तहसील स्तर पर मजबूत होगा राजस्व कार्यों का पर्यवेक्षण

    लखनऊ
    योगी सरकार
    ने प्रदेश में राजस्व प्रशासन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड ने चयन वर्ष 2025-26 के तहत ऑनलाइन विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी करते हुए प्रदेश के 455 लेखपालों को राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के पद पर पदोन्नति प्रदान की है। पदोन्नत कार्मिकों की तैनाती के आदेश जल्द जारी किए जाएंगे।

    तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व कार्यों की निगरानी एवं पर्यवेक्षण और होगा प्रभावी
    उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड के चेयरमैन बीएल मीणा ने बताया कि पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न कराई गई। निर्धारित पात्रता मानकों और सेवा अभिलेखों के आधार पर कार्मिकों का परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद 455 लेखपालों को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया। ऑनलाइन डीपीसी के माध्यम से प्रक्रिया पूरी होने से विभागीय पदोन्नति में पारदर्शिता के साथ ही समयबद्धता को भी बढ़ावा मिला है। पदोन्नति से राजस्व निरीक्षक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी। इससे तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व कार्यों की निगरानी एवं पर्यवेक्षण और प्रभावी होगा। वहीं, भूमि संबंधी मामलों, पैमाइश, राजस्व अभिलेखों और अन्य राजस्व कार्यों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद है।

    राजस्व मामलों के निस्तारण पर जोर
    बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार राजस्व मामलों के त्वरित और न्यायसंगत निस्तारण के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। इसी क्रम में ऑनलाइन डीपीसी को कार्मिक प्रबंधन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।