Author: NewseDay

  • ‘राइज एंड फॉल 2’ एपिसोड 14 में बवाल, तख्तापलट टास्क रद्द; प्रियंका चाहर चौधरी से भिड़े शहजाद पूनावाला

    ‘राइज एंड फॉल 2’ एपिसोड 14 में बवाल, तख्तापलट टास्क रद्द; प्रियंका चाहर चौधरी से भिड़े शहजाद पूनावाला

    अमेजन प्राइम वीडियो के रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल 2' में इन दिनों खूब ड्रामा देखने को मिल रहा है. कभी कंटेस्टेंट्स के बीच तीखी बहस होती है, तो कभी टास्क के दौरान रिश्तों में खटास देखने को मिलती है. शो में हर दिन होने वाले नए ट्विस्ट और कंटेस्टेंट्स की बदलती दोस्ती दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं एपिसोड 14 में क्या-क्या धमाल हुआ.

    'राइज एंड फॉल 2' के लेटेस्ट एपिसोड में कंटेस्टेंट्स के बीच जमकर हंगामा देखने को मिला. तख्तापलट टास्क के दौरान घर का माहौल गरमा गया और कई कंटेस्टेंट्स के बीच तीखी बहस हुई. इस दौरान प्रियंका चाहर चौधरी की स्वरा भास्कर और शहजाद पूनावाला से जमकर भिड़ंत हुई. वहीं, इरियाना और निहारिका तिवारी के बीच भी जोरदार लड़ाई देखने को मिली.

    प्रियंका चाहर चौधरी ने शहजाद पूनावाला को कहा 'नेवला'
    पेंटहाउस के रूलर्स और बेसमेंट के वर्कर्स को तख्तापलट टास्क दिया गया. इस टास्क के जरिए वर्कर्स के पास रूलर बनने और शो में अपना रुतबा बढ़ाने का मौका था.

    राइज एंड फॉल 2' एपिसोड 14 रिव्यू: तख्तापलट टास्क हुआ रद्द, शहजाद पूनावाला से भिड़ीं प्रियंका चाहर चौधरी

    हालांकि, टास्क के दौरान खूब हंगामा हुआ. प्रियंका चाहर चौधरी की शहजाद पूनावाला और स्वरा भास्कर के साथ जमकर बहस हुई. प्रियंका ने शहजाद को 'नेवला' कहा और नेशनल टेलीविजन पर उनके सरनेम का मजाक भी उड़ाया.

    राइज एंड फॉल 2' एपिसोड 14 रिव्यू: तख्तापलट टास्क हुआ रद्द, शहजाद पूनावाला से भिड़ीं प्रियंका चाहर चौधरी

    फूट-फूटकर रो पड़ीं प्रियंका चाहर चौधरी
    इससे शहजाद काफी नाराज नजर आए और उन्होंने मेकर्स से इसकी शिकायत भी की. इसके बाद प्रियंका की स्वरा भास्कर के साथ भी तीखी बहस देखने को मिली.

    राइज एंड फॉल 2' एपिसोड 14 रिव्यू: तख्तापलट टास्क हुआ रद्द, शहजाद पूनावाला से भिड़ीं प्रियंका चाहर चौधरी

    हालांकि, बाद में ये टास्क रद्द कर दिया गया. इसके बाद बेसमेंट के वर्कर्स का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. प्रियंका चाहर चौधरी और कायरा अनु फूट-फूटकर रोती नजर आईं.

    राइज एंड फॉल 2' एपिसोड 14 रिव्यू: तख्तापलट टास्क हुआ रद्द, शहजाद पूनावाला से भिड़ीं प्रियंका चाहर चौधरी

    निहारिका तिवारी और इरियाना की लड़ाई में कूदीं स्वरा भास्कर
    पेंटहाउस में पहुंचने के बाद निहारिका तिवारी और इरियाना के बीच जमकर बहस हुई. लड़ाई के दौरान निहारिका ने इरियाना को हिंदी सीखने की सलाह दी और उनकी नेशनलिटी को लेकर भी टिप्पणी की.

    राइज एंड फॉल 2' एपिसोड 14 रिव्यू: तख्तापलट टास्क हुआ रद्द, शहजाद पूनावाला से भिड़ीं प्रियंका चाहर चौधरी

    इस पर स्वरा भास्कर ने कड़ी नाराजगी जताई और निहारिका को जमकर सुनाया. देखते ही देखते स्वरा भी इस लड़ाई में कूद पड़ीं. वहीं, इस पूरे विवाद से इरियाना का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. गुस्से में उन्होंने वहां रखे सामान की तोड़फोड़ शुरू कर दी और एक कुर्सी भी गिरा दी.

     

     

  • Hockey News: भारत-पाकिस्तान के बीच न्यूट्रल वेन्यू पर नहीं बनी बात, 27 अक्टूबर से शुरू होगी चैंपियंस ट्रॉफी

    Hockey News: भारत-पाकिस्तान के बीच न्यूट्रल वेन्यू पर नहीं बनी बात, 27 अक्टूबर से शुरू होगी चैंपियंस ट्रॉफी

    नई दिल्ली
     पाकिस्तान ने भारत में होने वाले हॉकी एशियंस चैंपियंस ट्रॉफी से अपना नाम वापस ले लिया है। पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मुकाबलों को न्यूट्रल वेन्यू पर कराने की मांग की थी। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान की इस मांग को ठुकरा दिया, जिस वजह से पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है। उनकी जगह अब बांग्लादेश को एंट्री मिली है।
    भारत ने ठुकराई पाकिस्तान की मांग

    पीएचएफ ने एशियन हॉकी फेडरेशन (AHF) से पाकिस्तान और भारत के बीच होने वाले मैचों को इंडिया से बाहर कराने की मांग की थी। मगर भारत ने न्यूट्रल वेन्यू पर मैच खेलने से पूरी तरह से इनकार कर दिया।

    भारत का कहना है कि टूर्नामेंट का आयोजन अपने शेड्यूल के हिसाब से ही होगा। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि उनके लिए खिलाड़ियों का सम्मान और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हालांकि भारत ने अपना रुख साफ कर दिया, जिस वजह से पाकिस्तान की जगह टूर्नामेंट में बा्ंग्लादेश को शामिल कर लिया गया है।

    27 अक्टूबर से शुरु होगी चैंपियंस ट्रॉफी
    एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत 27 अक्टूबर से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को होगा। मेजबान भारत के अलावा, मलेशिया, चाइना, जापान, साउथ कोरिया और बांग्लादेश टूर्नामेंट का हिस्सा होंगी। चैंपियंस ट्रॉफी के मैच जालंधर और मोहाली में खेले जाएंगे। जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में सभी लीग मैच आयोजित होंगे। वहीं मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में नॉकआउट मैच खेले जाएंगे।

    एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का रहा है दबदबा
    एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत साल 2011 से हुई थी। इसके बाद से भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा है। भारत ने कुल 5 बार चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया है। इसके अलावा साल 2018 में भारत ने बारिश की वजह से फाइनल रद होने के कारण पाकिस्तान के साथ ट्रॉफी शेयर की थी।

    भारत पिछले दो बार से अपनी ट्रॉफी डिफेंड करते हुए आ रहा है। पिछले साल टीम इंडिया ने साउथ कोरिया को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। फैंस को इस बार भी भारत से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी। हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम लगातार चौथी बार खिताब जीतने के इरादे से टूर्नामेंट में उतरेगी।

  • बुमराह-पंड्या समेत कई खिलाड़ी चोटों से परेशान, BCCI की रिपोर्ट में फिटनेस को लेकर चौंकाने वाले खुलासे

    बुमराह-पंड्या समेत कई खिलाड़ी चोटों से परेशान, BCCI की रिपोर्ट में फिटनेस को लेकर चौंकाने वाले खुलासे

    नई दिल्ली
    भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की इंजरी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं. लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ियों के कारण टीम मैनेजमेंट को अहम सीरीज के दौरानमुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की सालाना रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच भारतीय मेन्स टीम के 32 शीर्ष खिलाड़ियों को चोटों से उबरने के लिए रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा. इनमें 20 सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले और 12 इंडिया-ए या टारगेटेड कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल हैं.

    TOI की रिपोर्ट के अनुसार, आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 के बाद भी चोटों का सिलसिला जारी रहा और लगभग हर सीरीज में कम से कम दो खिलाड़ियों के चोटिल होने की स्थिति सामने आई. भारतीय की टेस्ट-वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर भी पिछले एक साल में खिलाड़ियों की फिटनेस संबंधी समस्याओं पर चिंता जता चुके हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि खिलाड़ियों को चोटों से बचाने और उनकी रिकवरी बेहतर करने के लिए मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाने चाहिए.

    चोटों के बढ़ते मामलों के बीच बीसीसीआई ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए खर्च बढ़ाने का प्रावधान किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीओई का अनुमानित बजट 127 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में वास्तविक खर्च करीब 92 करोड़ रुपये था. यानी बजट में लगभग 35 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इस खर्च में प्रशासनिक लागत, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और मैचों से जुड़े व्यय शामिल हैं. हालांकि, बढ़े हुए बजट का असर खिलाड़ियों की फिटनेस और चोटों की रोकथाम पर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा.

    सॉफ्ट टिश्यू इंजरी बनी समस्या
    रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 68 क्रिकेटर्स की चोटों का इलाज और प्रबंधन बीसीसीआई-सीईओ की स्पोर्ट्स साइंस मेडिसिन (SSM) टीम ने किया. इनमें महिला क्रिकेटर्स भी शामिल हैं. हालांकि, रिपोर्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के रिहैबिलिटेशन की संख्या या अवधि का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है. इन मामलों में सॉफ्ट टिश्यू इंजरी सबसे प्रमुख रही. इस श्रेणी में मांसपेशियों और उनसे जुड़े ऊतकों की चोटें आती हैं, जो खिलाड़ियों की दौड़ने, गेंदबाजी करने और मैदान पर तेजी से मूवमेंट करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं.
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    रिपोर्ट में इम्पैक्ट इंजरी के उदाहरण के तौर पर ऋषभ पंत का उल्लेख किया गया है. जुलाई 2025 में मैनचेस्टर टेस्ट के दौरान पैर में फ्रैक्चर होने के बाद ऋषभ को उपचार की जरूरत पड़ी थी. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रोहित शर्मा ने भी इस अवधि में सीओई में रिहैबिलिटेशन कराया था. बीसीसीआई ने उस समय उनके सेंटर में उपचार को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था. रिपोर्ट के अनुसार, रोहित ने आईपीएल 2026 के बाद हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण सीओई में रिपोर्ट किया था.
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    चोटों से प्रभावित खिलाड़ियों की सूची में कई प्रमुख नाम शामिल हैं. जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, हार्दिक पंड्या और प्रसिद्ध कृष्णा ऐसे खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिनके चोट संबंधी मामले बार-बार सामने आए. रिपोर्ट में बताया गया है कि हर्षित राणा, हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी ने पिछले 18 महीनों में कम से कम चार-चार महीने सीओई में बिताए हैं. इसके अलावा 30 सितंबर 2026 तक की सूची में विराट कोहली, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे सहित कई अन्य खिलाड़ियों को भी शामिल किया गया था.

    सोओई में SSM प्रमुख का पद खाली
    प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपलब्धता का सीधा असर टीम सेलेक्शन और कॉम्बिनेशन पर पड़ता है. तेज गेंदबाजों के मामले में यह चुनौती और अहम हो जाती है क्योंकि लगातार मैच खेलने और अभ्यास के बीच उनके वर्कलोड को संतुलित करना जरूरी होता है. रिपोर्ट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रशासनिक और तकनीकी कामकाज से जुड़ी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है. स्पोर्ट्स साइंस मेडिसिन प्रमुख नितिन पटेल ने मार्च 2025 में इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद यह पद लंबे समय तक खाली रहा. बीसीसीआई ने पिछले महीने इस पद के लिए भर्ती का विज्ञापन जारी किया. भारतीय टीम की एसएसएम इकाई और सीओई की एसएसएम टीम के बीच संवाद में भी कमी रही है. सीओई प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण दोनों के बीच संपर्क का मुख्य माध्यम बने हुए हैं.

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रॉक्सएड ने जून 2025 में खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट की प्रक्रिया में कुछ बदलाव सुझाए थे, लेकिन सीओई अपनी मौजूदा व्यवस्था से अलग हटने को लेकर अनिच्छुक रहा. इस स्थिति में दोनों इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल खिलाड़ियों की फिटनेस संबंधी रणनीति को प्रभावी बनाने के लिए अहम हो सकता है.

    कोविड के दौरान भी बने थे ऐसे हालात
    भारतीय क्रिकेट में सॉफ्ट टिश्यू इंजरी का दौर पहले भी देखने को मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 में कोविड-19 महामारी के दौरान बायो-बबल से बाहर निकलने के बाद कई खिलाड़ियों को चोटों का सामना करना पड़ा था. उस समय दो से तीन महीने में स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया था. इससे पहले 2017 में भी लगभग तीन महीने तक कई खिलाड़ी चोटिल हुए थे. उस दौर में स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच शंकर बसु ने फिटनेस कार्यक्रम में बड़े बदलाव किए थे.

    सीओई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ऑडिट किए गए वित्त वर्ष में बजट में शामिल 57 कैम्प और टूर्नामेंट में से 15 आयोजित नहीं किए गए. इसी अवधि में सेंटर ने अलग-अलग आयु वर्ग और महिला-पुरुष खिलाड़ि 25 हाई-परफॉर्मेंस कैम्प आयोजित किए. पूर्वोत्तर राज्यों के खिलाड़ियों के लिए विशेष कैम्प भी लगाए गए. इसके अलावा स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच, अन्य कोच और मैच अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए. रिपोर्ट में उन 15 कैम्प और टूर्नामेंट के आयोजित नहीं होने के कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं है.

    बीसीसीआई ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बंधे खिलाड़ियों और इंडिया-ए या टारगेटेड कैटेगरी के क्रिकेटरों के लिए ट्रेनिंग ब्लॉक कार्यक्रम भी शुरू किया है. इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की ताकत और क्रिकेटिंग स्किल को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है. रिपोर्ट के अनुसार, 37 खिलाड़ियों ने इस कार्यक्रम का लाभ उठाया. इनमें 11 सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले और 26 इंडिया-ए या टारगेटेड कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे.

  • CG News: 24,99,823 मतदाताओं के नाम कटे, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए चलेगा विशेष अभियान

    CG News: 24,99,823 मतदाताओं के नाम कटे, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए चलेगा विशेष अभियान

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और छूटे हुए पात्र नागरिकों का सत्यापन करने के लिए एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया गया है. भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान की जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में दी.

    उन्होंने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए नामों का भी पुनः सत्यापन किया जाएगा. पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा. वहीं 17 वर्ष से अधिक आयु के युवा भी मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं.

    घर-घर पहुचेंगे BLO
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 24.99 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं. इनमें लगभग 6.42 लाख मृत मतदाता और 19,13,540 अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं. वहीं सूची में 2 लाख 35 हजार 994 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं. अब एक महीने तक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का दोबारा सत्यापन करेंगे और पात्रता के अनुसार मतदाता सूची से छूटे नाम जोड़ने की प्रक्रिया में मदद करेंगे.

    मतदान केंद्रों और शिक्षण संस्थानों में लगेंगे विशेष शिविर
    अभियान के तहत हर सप्ताह बुधवार और गुरुवार को मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे. इसके अलावा शुक्रवार और शनिवार को स्कूल-कॉलेजों में मतदाता पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा. आईटीआई, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में भी शिविर लगेंगे. संस्थानों के इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से युवाओं को मतदाता पंजीकरण के प्रति जागरूक किया जाएगा. बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को फॉर्म-6 के आवेदन प्राप्त करने और क्षेत्र सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मतदाता सूची राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ साझा करेंगे.

    ऐसे कर सकेंगे आवेदन
    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नागरिक ECINET मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऑफलाइन आवेदन के लिए संबंधित मतदान केंद्र के बूथ लेवल अधिकारी को फॉर्म-6 जमा किया जा सकता है.
    पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ECINET ऐप पर ‘Book a Call with BLO’ सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करके भी सहायता प्राप्त की जा सकती है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने सभी पात्र नागरिकों से अभियान का लाभ उठाने और मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित कराने की अपील की.

  • अमेरिका में ‘गोल्डन केज’ में फंसे भारतीय कर्मचारी! TCS-Infosys समेत 8 कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन पर रोक

    अमेरिका में ‘गोल्डन केज’ में फंसे भारतीय कर्मचारी! TCS-Infosys समेत 8 कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन पर रोक

    नई दिल्ली
     अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव ने एक लाख से ज्यादा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को परेशानी में डाल दिया है. फेडरल अथॉरिटीज ने इंफोसिस और टीसीएस समेत कई प्रमुख कंपनियों को PERM एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है. लेबर सेक्रेटरी ने इन दिग्गज कंपनियों पर वीजा धोखाधड़ी और लेबर सर्टिफिकेशन प्रोसेस के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. इस वजह से एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों प्रोफेशनल्स के लिए परमानेंट रेजीडेंसी का रास्ता अचानक बंद हो गया है. यह फैसला मुख्य रूप से अमेरिकी वर्कर्स के अधिकारों को बचाने के लिए लिया गया है. यह बैन माइक्रोसॉफ्ट और अडोबी पर भी लागू हुआ है। 

    माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B फ्रॉड के आरोपों को नकारा, कहा- 80% आवेदन मौजूदा कर्मचारियों के लिए

    माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B वीजा सिस्टम के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज किया है. कंपनी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में दाखिल करीब 6,000 H-1B आवेदनों में 80% मौजूदा कर्मचारियों के स्टेटस बढ़ाने या बदलने के लिए थे। 

    कंपनी के मुताबिक इन आवेदनों का इस्तेमाल नए लोगों को नौकरी देने के लिए नहीं किया गया. बाकी आवेदन ऐसे कर्मचारियों के लिए थे जो पहले से अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे थे और माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े। 

    Microsoft ने कहा कि ये कर्मचारी उसके अमेरिकी वर्कफोर्स का करीब 1% हैं. यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस ऐलान के कुछ घंटे बाद आया जिसमें माइक्रोसॉफ्ट को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया वाले एक सरकारी कार्यक्रम से निलंबित करने की बात कही गई थी। 

    ‘गोल्डन केज’ में कैसे फंस गए हजारों भारतीय टेक वर्कर्स?

        सस्पेंशन के कारण कंपनियां नए पर्म एप्लिकेशन फाइल नहीं कर सकती हैं. पेंडिंग सर्टिफिकेशन भी आगे नहीं बढ़ेंगे। 

    इससे ग्रीन कार्ड की लाइन वहीं रुक गई है. एच-4 वीजा वाले जीवनसाथियों के वर्क ऑथराइजेशन पर खतरा मंडराने लगा है. उम्र पूरी कर रहे बच्चों को डिपोर्टेशन का डर सता रहा है। 

    ग्रीन कार्ड बैन से क्या पड़ेगा असर?
        इस बैन का आर्थिक असर सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने वाला है. फंसी हुई ग्रीन कार्ड एप्लिकेशन वाले टेक वर्कर्स आसानी से कंपनियां नहीं बदल सकते। 
        वे नया प्रमोशन या टेक्निकल रोल भी स्वीकार नहीं कर सकते. ऐसा करने पर उनके कई सालों के फाइलिंग टाइमलाइन को रीसेट करना पड़ेगा। 
        ये इंजीनियर्स अपने मौजूदा रोल्स में लॉक हो गए हैं. परिवारों के लिए घर खरीदना या बच्चों की शिक्षा का फैसला लेना रिस्की हो गया है. उनका भविष्य अब प्रशासनिक अपीलों पर निर्भर है। 

    सबसे पहले समझिए आखिर PERM क्या है?
    बता दें कि यह अमेरिका में स्थायी निवास प्रक्रिया का एक बेहद अहम और शुरुआती चरण है। इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉंसर करती हैं।

    बात अब इसके नियम की करें तो, इस प्रक्रिया के तहत श्रम विभाग को यह प्रमाणित करना होता है कि किसी खास नौकरी के लिए पर्याप्त अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कंपनी किसी विदेशी नागरिक को रख रही है।

    अब जानिए कंपनियों पर क्यों लगाई गई रोक?
    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ये बड़ी कंपनियां इस प्रोग्राम का दुरुपयोग कर रही हैं। अमेरिकी स्थानीय नागरिकों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी कामगारों खासकर H-1B वीजाधारकों को कम वेतन पर रखा जा रहा है। प्रशासन का तर्क है कि इससे अमेरिकी युवाओं के रोजगार पर असर पड़ रहा है।

    अब जानिए भारतीयों पर इसका क्या असर होगा?
    इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय, जो मुख्य रूप से H-1B वीजा पर वहां नौकरी कर रहे हैं और लंबे समय से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह एक बड़ा झटका है। इसका कारण है कि H-1B एक अस्थायी वर्क वीजा है, जिसकी एक तय समयसीमा होती है।

    इसके इतर, अमेरिका में हमेशा के लिए बसने के लिए PERM सर्टिफिकेट बेहद अहम सीढ़ी है। ऐसे में अब इस रोक के बाद, इन 8 कंपनियों में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड की फाइलें आगे नहीं बढ़ पाएंगी।

    नौकरी तो कर सकते हैं, लेकिन बस नहीं सकते
    अच्छा, ऐसा भी नहीं है कि इस प्रतिबंध के बाद भारतीय या फिर किसी भी देश के वैसे कर्मचारी जो कि अमेरिका में रहते हैं, उनके वहां रहने में दिक्कतें आएंगी। राहत की बात यह है कि इस बैन से कर्मचारियों का मौजूदा H-1B वीजा तुरंत रद नहीं हुआ है।

    इस बात में कोई दोराय नहीं है कि वे अभी कानूनी रूप से अमेरिका में रहकर अपनी नौकरी कर सकते हैं। लेकिन, उनकी परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए अटक गई है।

    अब क्या करेंगे भारतीय पेशेवर?
    देखिए, चूंकि भारत के लाखों आईटी पेशेवर विशेषकर टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL जैसे संस्थानों के कर्मचारी अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए बरसों-बरस का लंबा इंतजार करते हैं, ऐसे में इस रास्ते के बंद होने से उनके भविष्य पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। उन्हें अब अमेरिकी वीजा नियमों के तहत अपने वर्क वीजा को बार-बार रिन्यू कराना पड़ेगा और लंबे समय तक अस्थायी स्थिति में रहना होगा।

    दूसरी तरफ मुश्किल बात यह भी है कि कंपनियों के लिए अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को रोकना और उन्हें स्थायी भविष्य का भरोसा देना कठिन हो जाएगा। इससे कई पेशेवर मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो उन्हें एक दिन अमेरिका छोड़कर वापस लौटना पड़ सकता है।

    आईटी सेक्टर पर इस बड़े फैसले के बाद अब आगे क्या विकल्प बचते हैं?
    यह बैन इमिग्रेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे ऑफशोर कंसल्टिंग स्ट्रक्चर पर अमेरिकी सरकार की निगरानी काफी बढ़ गई है. प्रभावित आईटी कंपनियां अब इसके कानूनी उपाय तलाश रही हैं। 

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय टेक टैलेंट अब दूसरे देशों का रुख कर सकता है. इसके साथ ही भारत के टेक इकोसिस्टम में वापसी की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. ग्रीन कार्ड रास्तों पर निर्भर रहना अब रिस्की हो गया है। 

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ी चिंता, 60 लाख पेड़ों की कटाई के दावे पर MP हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ी चिंता, 60 लाख पेड़ों की कटाई के दावे पर MP हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    याचिका में दावा किया है कि परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है और करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई होगी।

    कोर्ट ने रिपोर्ट में बताई गई कथित अनियमितताओं, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और उस पर राज्य सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है।

    चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने ये निर्देश दिए। जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने जनहित याचिका दायर की है और गुरुवार को स्वयं अपना पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

    केन-बेतवा परियोजना पर कोर्ट ने क्या पूछा
        CEC की रिपोर्ट में परियोजना से जुड़ी कौन-कौन सी अनियमितताएं बताई गई हैं?
        सुप्रीम कोर्ट में परियोजना से संबंधित कार्यवाही की वर्तमान स्थिति क्या है?
        CEC की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है?

    वन्यजीवों और घड़ियाल अभयारण्य पर असर की आशंका
    याचिका में कहा है कि परियोजना के लिए होने वाले जलभराव से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इससे बाघ, तेंदुआ, गिद्ध सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के गलियारों पर असर पड़ने की आशंका है।

    याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की CEC ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्थायी समिति ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पर्याप्त आंकलन नहीं किया।

    याचिका में इसका स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की गई है।

    60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा
    याचिका में वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान बताया है।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे बुंदेलखंड के पर्यावरण, वर्षा चक्र और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही जल संकट और सूखे की समस्या से प्रभावित रहा है।

    याचिका में वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, कई आधिकारिक एजेंसियों ने रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटियों की ओर संकेत किया है।

    नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की विशेषज्ञ समिति की ओर से स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराने की कथित मांग को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है।

    आदिवासियों और ग्रामीणों पर दबाव का आरोप
    याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सैकड़ों आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने छोटे बच्चों को गोद में लेकर प्रतीकात्मक ‘चित्ता आंदोलन’ के जरिए विरोध जताया।

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर दबाव बनाया। राशन, पानी और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने तथा गांवों में आवाजाही प्रतिबंधित करने जैसी कार्रवाई के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

    1980 के दशक में हुई थी परियोजना की परिकल्पना
    केन-बेतवा लिंक परियोजना की परिकल्पना 1980 के दशक में की गई थी। वर्ष 2014 में केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाया गया।

    8 दिसंबर 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना के वित्त पोषण और क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया है।

    परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है।

    परियोजना से मध्यप्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों को सिंचाई और पेयजल सुविधा मिलने का दावा किया है। हालांकि, जनहित याचिका में इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने केंद्र से CEC की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही की स्थिति पेश करने को कहा है।

     

  • वन्यजीव सप्ताह में युवाओं की अनूठी पहल, कला के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने की अपील

    वन्यजीव सप्ताह में युवाओं की अनूठी पहल, कला के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने की अपील

    कला और कल्पनाशीलता से युवाओं ने दिया वन्यजीव संरक्षण का संदेश

    वन्यजीव सप्ताह का समापन, कला और रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों ने दिखाई पर्यावरण के प्रति जागरूकता

    रायपुर
     वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने वाली युवा प्रतिभाओं को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन के दंडकारण्य सभागार में पुरस्कृत किया गया। वन्यजीव सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में कला और ज्ञान आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

              वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा रायपुर वनमंडल द्वारा कलिंगा विश्वविद्यालय के हरित समूह एवं प्राणीशास्त्र विभाग के सहयोग से 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया गया। ‘जुड़ते प्राकृतिक आवास, फलते-फूलते वन्यजीव’ की थीम पर आयोजित इस सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के जरिए प्रकृति और जैव विविधता संरक्षण का महत्व समझा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे।

               सप्ताहभर चले आयोजन में कागज की आकृतियां और घोंसलों के प्रतिरूप बनाने, बीजगोलक (सीड बॉल) निर्माण, वन्यजीव छायाचित्रण तथा प्रकृति भ्रमण जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

             शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता में कलिंगा विश्वविद्यालय के देवेश मिंज, सिद्धांत नागपुरे और वर्षा साहू क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे। निबंध प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय की श्रेया साहू, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उपरवारा की शैल्या साहू और पीएम स्वामी आत्मानंद विद्यालय माना कैंप के आकाश दास ने क्रमशः प्रथम तीन स्थान प्राप्त किए। पीएम जवाहर नवोदय विद्यालय माना कैंप की हेमा और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गनोद की दीपिका साहू को सांत्वना पुरस्कार मिला। वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं और प्रकृति आधारित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने तथा जैव विविधता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर दिया।

  • राजस्थान में लिवर मरीजों के लिए बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की समिति तैयार करेगी इलाज का खाका

    राजस्थान में लिवर मरीजों के लिए बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की समिति तैयार करेगी इलाज का खाका

     उदयपुर
     लिवर की बीमारी की समय पर पहचान और बेहतर इलाज के लिए शुरू किया गया जन आरोग्य लिवर क्लीनिक अब प्रदेशभर में विस्तार की राह पर है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसके लिए छह विशेषज्ञों की समिति गठित की है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार माथुर को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में क्लीनिक शुरू करने के साथ ही मरीजों की जांच, उपचार और नियमित निगरानी की व्यवस्था का खाका तैयार करेगी।

    मरीजों की बनेगी लिवर रोग रजिस्ट्री : चिकित्सा शिक्षा आयुक्त
    चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल की ओर से 5 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, समिति लिवर रोगों की पहचान, इलाज और मरीजों की निगरानी की व्यवस्था तैयार करेगी। इसके लिए राज्य लिवर रोग रजिस्ट्री बनाई जाएगी, जिसमें मरीजों और उनकी बीमारी से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज होगी। इससे प्रदेश में लिवर रोगों की स्थिति और इलाज की जरूरत वाले क्षेत्रों का आकलन किया जा सकेगा।

    शोध के लिए बनेगा जैव बैंक
    लिवर रोग से जुड़े नमूनों और जरूरी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए जैव बैंक विकसित किया जाएगा। इससे बीमारी पर शोध और नए उपचार की दिशा में काम करने में मदद मिलेगी। समिति मौजूदा क्लीनिकों को बेहतर बनाने और प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में जन आरोग्य लिवर क्लीनिक शुरू करने की योजना भी तैयार करेगी।

    छह विशेषज्ञों की समिति
    डॉ. माथुर की अध्यक्षता वाली समिति में कोटा के डॉ. अनिल शर्मा, जोधपुर के डॉ. साबिर हुसैन, बीकानेर की डॉ. विनीता चौधरी और अजमेर के डॉ. राज मणि सदस्य हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर के डॉ. के.के. शर्मा संयोजक एवं समन्वयक होंगे।

    “लिवर की बीमारी का इलाज तभी आसान है, जब उसका पता समय रहते चल जाए। जन आरोग्य लिवर क्लीनिक इसी सोच के साथ मरीजों तक जांच, सलाह और जरूरी उपचार पहुंचाने की पहल है।”
    -डॉ. विपिन माथुर, अध्यक्ष, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

  • कॉल रिकॉर्डिंग से मीटिंग नोट्स तक, क्रेडिट कार्ड जैसा AI डिवाइस Plaud सेल में हुआ सस्ता

    कॉल रिकॉर्डिंग से मीटिंग नोट्स तक, क्रेडिट कार्ड जैसा AI डिवाइस Plaud सेल में हुआ सस्ता

    दिवाली पर अगर इस बार किसी को ऐसा गैजेट गिफ्ट करना चाहते हैं जो सिर्फ दिखने में स्मार्ट न हो, बल्कि रोजमर्रा के काम भी आए, तो AI की दुनिया से एक दिलचस्प विकल्प सामने आया है. AI नोट लेने वाले गैजेट बनाने वाली कंपनी Plaud ने भारत में दिवाली के लिए अपने चार डिवाइस पर खास ऑफर का ऐलान किया है. इस ऑफर में कंपनी का सबसे महंगा Plaud Note Pro भी ₹4,000 सस्ता मिल रहा है.

    कंपनी के मुताबिक, यह ऑफर 8 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. खास बात यह है कि Plaud का यह गैजेट सिर्फ आवाज रिकॉर्ड नहीं करता. रिकॉर्ड की गई बातचीत को AI टेक्स्ट में बदलता है, उसकी समरी बनाता है और जरूरी बातों को अलग करके सामने रख सकता है. यानी मीटिंग में सामने बैठे व्यक्ति की बात सुनते हुए हर लाइन लिखने की जरूरत काफी कम हो सकती है.

    ₹13,990 से शुरू हुई Plaud की दिवाली सेल
    Plaud के चार डिवाइस इस ऑफर का हिस्सा हैं. Plaud Note Pro की कीमत ऑफर में ₹16,990 रखी गई है. Plaud NotePin S ₹15,990 में, Plaud Note ₹14,990 में और Plaud Note Pin ₹13,990 में मिलेगा.

    कंपनी की मौजूदा भारतीय वेबसाइट पर इन डिवाइस की कीमतें क्रमशः ₹20,990, ₹19,990, ₹16,990 और ₹16,990 हैं. यानी ऑफर के दौरान Note Pro और NotePin S पर ₹4,000 तक की बचत हो सकती है. Plaud Note पर ₹2,000 और NotePin पर ₹3,000 तक कम कीमत मिल रही है.

    यह ऑफर ऐसे समय आया है जब भारत में दिवाली से पहले ऑनलाइन शॉपिंग सीजन शुरू हो रहा है. Amazon की Great Indian Festival सेल भी 8 अक्टूबर से शुरू हो रही है और इसमें Plaud के AI नोट लेने वाले डिवाइस भी ऑफर में शामिल हैं.

    आखिर Plaud है क्या?
    पहली नजर में Plaud Note Pro किसी छोटे रिकॉर्डर या पुराने जमाने के डिक्टाफोन जैसा लग सकता है. लेकिन इसके अंदर का सिस्टम काफी अलग है. इसका काम सिर्फ आवाज को रिकॉर्ड करके रखना नहीं है. इसका असली काम रिकॉर्ड हुई बातचीत को उपयोगी जानकारी में बदलना है.

    मसलन, आपने किसी क्लाइंट के साथ 45 मिनट की मीटिंग की. इस दौरान आपने कई बातें सुनीं, कुछ सवाल पूछे और सामने वाले ने कई काम बताए. मीटिंग खत्म होने के बाद आपको पूरी बातचीत दोबारा सुनने की जरूरत पड़ सकती है.

    Plaud का सिस्टम इसी जगह काम आता है. रिकॉर्डिंग को AI ट्रांसक्रिप्ट में बदला जा सकता है और फिर उससे सारांश, जरूरी बातें और आगे किए जाने वाले काम निकाले जा सकते हैं. कंपनी के अनुसार उसका AI सिस्टम 112 भाषाओं में ट्रांसक्रिप्शन, स्पीकर की पहचान और अलग-अलग तरह के सारांश बनाने में सक्षम है. यानी यह सिर्फ रिकॉर्डर नहीं है. इसे एक तरह का डिजिटल नोट असिस्टेंट समझा जा सकता है.

    पत्रकार, छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए क्यों काम का?
    इस गैजेट का सबसे बड़ा इस्तेमाल उन लोगों के लिए है जिनका काम बातचीत पर टिका है. पत्रकारों के लिए इंटरव्यू इसका सबसे सीधा उदाहरण है. इंटरव्यू के दौरान लगातार नोट्स लिखने के बजाय पत्रकार बातचीत पर ध्यान दे सकता है और बाद में ट्रांसक्रिप्ट से जरूरी हिस्से निकाल सकता है.

    इसी तरह कॉरपोरेट मीटिंग, क्लाइंट कॉल, सेल्स मीटिंग, रिसर्च, लेक्चर या इंटरव्यू में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. Plaud ने भारत में लॉन्च के समय भी अपने डिवाइस को प्रोफेशनल्स, बिजनेस लीडर्स, सेल्स टीम, रिसर्चर्स, पत्रकारों और क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर पेश किया था.

    Plaud Note Pro में ऐसा क्या खास है?
    चारों डिवाइस में सबसे ज्यादा फीचर Plaud Note Pro में मिलते हैं. यह क्रेडिट कार्ड के करीब आकार का डिवाइस है और इसमें चार माइक्रोफोन के साथ आवाज रिकॉर्ड करने की सुविधा दी गई है. कंपनी के अनुसार इसका ऑडियो पिकअप करीब 5 मीटर तक है.

    इसमें एक AMOLED डिस्प्ले भी है. इसका इस्तेमाल फोन कॉल और आमने-सामने की मीटिंग दोनों के लिए किया जा सकता है. कंपनी के मुताबिक इसकी 500mAh बैटरी Enhance Mode में 30 घंटे और Endurance Mode में 50 घंटे तक लगातार रिकॉर्डिंग कर सकती है. इसमें 64GB स्टोरेज दिया गया है.

    यानी अगर किसी को रोज कई मीटिंग करनी पड़ती हैं तो Note Pro सबसे ज्यादा फीचर वाला विकल्प है. हालांकि इसकी सामान्य कीमत ₹20,990 है, इसलिए ₹16,990 का दिवाली ऑफर इसे पहले के मुकाबले ज्यादा दिलचस्प बनाता है.

    NotePin S उन लोगों के लिए है जिन्हें छोटा और पहनने वाला गैजेट चाहिए
    Plaud का दूसरा बड़ा डिवाइस NotePin S है. इसका डिजाइन अलग है. इसे कपड़ों पर पिन किया जा सकता है या लैनयार्ड और रिस्टबैंड के साथ पहना जा सकता है.

    इसमें सबसे खास चीज एक फिजिकल रिकॉर्ड बटन है. इसे लंबे समय तक दबाकर रिकॉर्डिंग शुरू की जा सकती है, जबकि छोटा प्रेस करके बातचीत के किसी खास हिस्से को हाईलाइट किया जा सकता है. बाद में AI को यह समझने में मदद मिलती है कि बातचीत का कौन सा हिस्सा ज्यादा महत्वपूर्ण था.

    NotePin S का वजन करीब 17.4 ग्राम है और इसमें 64GB स्टोरेज के साथ करीब 20 घंटे तक रिकॉर्डिंग का दावा किया गया है.

    एक बात ध्यान रखना जरूरी है
    AI रिकॉर्डर खरीदना सिर्फ हार्डवेयर खरीदना नहीं है. इस तरह के डिवाइस का असली फायदा उसके AI सॉफ्टवेयर से आता है. Plaud में भी रिकॉर्डिंग को ट्रांसक्रिप्ट और सारांश में बदलने के लिए उसका AI सिस्टम इस्तेमाल होता है.

    कंपनी की वेबसाइट के अनुसार हर महीने 300 मिनट का AI ट्रांसक्रिप्शन Starter Plan में मिलता है. ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को दूसरे प्लान की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए सिर्फ डिवाइस की कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा

  • 45 की उम्र में भी त्वचा दिखेगी जवां? घर पर बनाएं मुल्तानी मिट्टी का नेचुरल फेस पैक

    45 की उम्र में भी त्वचा दिखेगी जवां? घर पर बनाएं मुल्तानी मिट्टी का नेचुरल फेस पैक

     उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर टैनिंग, झाइयां, फाइन लाइन्स और ओपन पोर्स की समस्या होना आम बात है. लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल और प्रदूषण की वजह से कई महिलाओं को उम्र से पहले ये दिक्कत होने लगती है. अगर आपकी स्किन भी चमक खो चुकी है तो इसके लिए महंगे ब्यूटी पार्लर जाकर फेशियल कराने या केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स लगाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. बल्कि किचन की कुछ प्राकृतिक चीजों से आप अपनी खोई हुई सुंदरता वापस पा सकती हैं. यहां हम आपको मुल्तानी मिट्टी में टमाटर का जूस और एलोवेरा से बनने वाला फेस पैक बता रहे हैं जो स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है.

    मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी को खींचकर चेहरे को टाइट करती है. एलोवेरा जेल गहराई से मॉइश्चराइज करके झुर्रियों को मिटाता है और टमाटर में मौजूद लाइकोपीन व विटामिन-C जिद्दी टैनिंग और काले धब्बों को साफ करके गालों पर प्राकृतिक गुलाबी निखार लाता है. हफ्ते में 2 बार इसे लगाने से 45 की उम्र में भी त्वचा 25 जैसी खिली-खिली और जवां दिखने लगती है. आइए जानते हैं इसे बनाने और लगाने का सही तरीका.

    सामग्री:
    1 बड़ा चम्मच मुल्तानी मिट्टी पाउडर

    1 बड़ा चम्मच ताजा एलोवेरा जेल (या स्टोर-बॉस प्योर जेल)

    1 बड़ा चम्मच ताजा टमाटर का रस (छानकर बीज अलग किया हुआ)

    1/2 छोटा चम्मच गुलाब जल (पेस्ट को स्मूथ बनाने के लिए)

    बनाने का तरीका
    एक कटोरी में 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें. इसमें 1 चम्मच एलोवेरा जेल, 1 चम्मच ताजा टमाटर का रस और थोड़ा-सा गुलाब जल मिलाएं.

    सभी चीजों को चम्मच की मदद से अच्छे से फेंट लें ताकि कोई गुठली न रहे और एक स्मूथ पैक तैयार हो जाए.

    अपना चेहरा माइल्ड फेस वॉश से धोकर सुखा लें. अब इस पैक को चेहरे और गर्दन पर नीचे से ऊपर की तरफ एक समान लगाएं.

    इसे 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर लगा रहने दें जब तक कि यह 80% सूख न जाए. (पूरा सूखने न दें, हल्का गीला रहने पर ही धो लें).

    चेहरे पर पानी छिड़ककर 1 मिनट हल्के हाथों से गोलाकार में मसाज करें और सादे पानी से धो लें. इसके बाद एलोवेरा जेल या हल्का मॉइश्चराइजर लगा लें. हफ्ते में 2 बार इसका इस्तेमाल करें.