Author: NewseDay

  • यूपी में ब्याज और अर्थदंड माफी योजना-2026 लागू, पुराने बकायेदारों को राहत

    यूपी में ब्याज और अर्थदंड माफी योजना-2026 लागू, पुराने बकायेदारों को राहत

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत विभिन्न कर कानूनों के अंतर्गत 31 दिसंबर 2025 तक सृजित बकायों पर ब्याज और अर्थदंड माफ करने का निर्णय लिया गया है। यह छूट 3 महीने तक लागू रहेगी। योजना के दायरे में बिक्री कर, केंद्रीय बिक्री कर, व्यापार कर, मूल्य संवर्धित कर (वैट) समेत कई कर कानूनों के अंतर्गत आने वाले पुराने बकाये शामिल होंगे।

    कई पुराने कर कानूनों के बकाये होंगे शामिल

    योजना के तहत उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम-1948, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम-1979, उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम-1995, उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम-2007 और उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम-2008 के अंतर्गत सृजित बकायों को शामिल किया गया है। इसके अलावा मनोरंजन कर से संबंधित नियमावली और उत्तर प्रदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली-1997 से जुड़े मामलों को भी योजना के दायरे में रखा गया है।

    ब्याज और अर्थदंड से मिलेगी राहत

    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि निर्धारित तारीख तक सृजित बकायों पर लगने वाले ब्याज और अर्थदंड को माफ करने के लिए यह योजना लागू की जा रही है। इससे संबंधित कर कानूनों के अंतर्गत बकाया रखने वाले करदाताओं को राहत मिलने का रास्ता खुलेगा। उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 के जरिए पुराने कर विवादों और बकायों के निस्तारण को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा।

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, सालाना 3 साड़ियां देने की तैयारी

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, सालाना 3 साड़ियां देने की तैयारी

    योगी सरकार अब आंगनबाड़ी कर्मियों को हर साल देगी तीन साड़ियां
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी
     
    3.80 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिलेगा लाभ
     
    अब दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी, अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार
     
    प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से 19.02 करोड़ रुपये होंगे खर्च
    लखनऊ

     योगी सरकार ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को हर साल तीन साड़ियां देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अभी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को साल में दो साड़ियां मिलती हैं। नई व्यवस्था से प्रदेश की 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। इस पर राज्य सरकार करीब 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
     
    कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। इनके लिए 1,90,145 कार्यकत्रियों और इतनी ही सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। सभी स्वीकृत पदों के आधार पर कुल 3,80,290 कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक-एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
     
    अतिरिक्त साड़ी का खर्च उठाएगी राज्य सरकार
    वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी वाली योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तीसरी साड़ी राज्य सरकार अपने खर्च पर देगी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये निर्धारित किए गए हैं। कुल अनुमानित व्यय 19,01,45,000 रुपये होगा।
     
    नियमित इस्तेमाल और धुलाई की परेशानी होगी दूर
    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में काम करना होता है। नियमित इस्तेमाल, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और साड़ी के अचानक गंदा या खराब होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला किया गया है।
     
    प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इन सेवाओं के संचालन में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की अहम भूमिका है।

  • सम्राट चौधरी के निर्देश, डायल-112 का रिस्पांस टाइम घटेगा और सोशल मीडिया पर बढ़ेगी निगरानी

    सम्राट चौधरी के निर्देश, डायल-112 का रिस्पांस टाइम घटेगा और सोशल मीडिया पर बढ़ेगी निगरानी

    पटना
    बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके तहत अपराधियों की जिलावार और थानावार सूची तैयार कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। आदतन अपराधियों और समाज में अशांति फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) के तहत भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।

    इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।

    आदतन अपराधियों पर पुलिस की रहेगी विशेष नजर
    बैठक में अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों की निगरानी को लेकर विशेष रणनीति बनाने पर जोर दिया गया।

    जिलावार और थानावार सूची तैयार होने से पुलिस को अपने क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों पर नजर रखने और उनके खिलाफ समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

    आदतन अपराधियों और शांति व्यवस्था के लिए खतरा बनने वाले तत्वों के विरुद्ध CCA के तहत कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया। इसका उद्देश्य अपराध पर नियंत्रण के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

    डायल-112 का रिस्पांस टाइम घटाने पर जोर
    कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 की कार्यक्षमता बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिकायत या आपात सूचना मिलने पर पुलिस कम से कम समय में मौके पर पहुंचे

    रिस्पांस टाइम घटाने से आपात स्थितियों में लोगों को जल्द सहायता उपलब्ध कराने और पुलिस की त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

    सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ाने का निर्देश
    बैठक में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री और उससे कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखते हुए कानून के दायरे में जरूरी कार्रवाई की जाए।

    सोशल मीडिया पर भ्रामक या अशांति फैलाने वाली सामग्री के मामलों में समय रहते कार्रवाई करना भी पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

    प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों पर होगी सख्ती
    प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने और गड़बड़ी में शामिल लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    बैठक में कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए पुलिस और संबंधित अधिकारियों को अपराध नियंत्रण, आपातकालीन सहायता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए

  • पश्चिमी यूपी में 12 अक्टूबर से होगी धान खरीद

    पश्चिमी यूपी में 12 अक्टूबर से होगी धान खरीद

    लखनऊ
    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत 12 अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान खरीद शुरू होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवंबर से धान खरीद होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी 2027 तक धान खरीद होगी। केंद्र सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि भी की है। धान (कॉमन) का एमएसपी 2441 और (ग्रेड ए) का 2461 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है।

    65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य, खोले जाएंगे 4500 क्रय केंद्र
    खाद्य व रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि उप्र ने पिछली बार भी सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान क्रय किया था। इस बार इसमें और वृद्धि की गई है। 8 क्रय एजेंसियों से 4500 क्रय केंद्रों के माध्यम से 65 लाख मीट्रिक टन खरीद होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को 48 घंटे के भीतर खाते में भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। धान खरीद के लिए बोरे की कमी नहीं होगी। 80 हजार बोरे की व्यवस्था हो गई है। आज शाम तक एक लाख और बोरे की व्यवस्था हो जाएगी।

    पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ के इन जनपदों में 12 अक्टूबर से होगी खरीद
    पश्चिम उत्तर प्रदेश के संभागों में 12 अक्टूबर से धान खरीद शुरू होगी, जो 15 फरवरी 2027 तक चलेगी। यह खरीद पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली,आगरा, अलीगढ़, झांसी संभाग में होगी। वहीं लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जनपद में भी धान खरीद इसी अवधि में होगी।

    पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के इन जनपदों में पहली नवंबर से शुरू होगी खरीद
    पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों में पहली नवम्बर से धान खरीद शुरू होगी। यह खरीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर व प्रयागराज संभाग में होगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में भी पहली नवंबर से खरीद होगी, जो 28 फरवरी 2026 तक चलेगी।  

    करीब 14 हजार किसानों ने करा लिया पंजीकरण
    सरकार की धान क्रय नीति पर विश्वास जताते हुए लगभग 14 हजार किसानों ने खरीद के लिए पंजीकरण करा लिया है। 9 अक्टूबर (दोपहर दो बजे) तक करीब 13,943 किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीकरण कर लिया है। वहीं किसानों की फॉर्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) के आधार पर धान क्रय किया जाएगा

  • बाड़मेर से जोधपुर SI प्रमोशन का टेस्ट देने पहुंचे ASI दुर्गाराम की मौत, फिजिकल टेस्ट के दौरान हुआ हादसा

    बाड़मेर से जोधपुर SI प्रमोशन का टेस्ट देने पहुंचे ASI दुर्गाराम की मौत, फिजिकल टेस्ट के दौरान हुआ हादसा

    जोधपुर
    राजस्थान के जोधपुर से बड़ी खबर सामने आई है। एसआई पद पर प्रमोशन के लिए फिजिकल टेस्ट देने आए एएसआई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक एएसआई दुर्गाराम (50) बाड़मेर जिले के नेतराड़ गांव के रहने वाले थे। वे शुक्रवार सुबह मंडोर स्थित राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रमोशन के लिए आयोजित फिजिकल परीक्षा देने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि दो किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के बाद उनके सीने में अचानक दर्द उठा। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को जोधपुर के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है।

    जानकारी के अनुसार एएसआई दुर्गाराम शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे फिजिकल टेस्ट में शामिल होने के लिए जोधपुर के मंडोर स्थित राजस्थान पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे थे। यहां एसआई पद पर प्रमोशन के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। दुर्गाराम ने परीक्षा के तहत दो किलोमीटर की दौड़ पूरी कर ली थी। इसके बाद उन्हें शारीरिक परीक्षा के अन्य चरणों में शामिल होना था। दौड़ पूरी करने के कुछ समय बाद दुर्गाराम की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।

    सुबह करीब 8:30 बजे उनके सीने में तेज दर्द हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी हालत बिगड़ती देख उन्हें तुरंत उपचार के लिए नजदीकी मंदिर हॉस्पिटल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान ही उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके चलते उनकी मौत हो गई।

    प्रमोशन के लिए आए थे दुर्गाराम
    एएसआई दुर्गाराम बाड़मेर जिले के नेतराड़ गांव के रहने वाले थे और वर्तमान में वे गिराब पुलिस थाने में एएसआई के पद पर कार्यरत थे। वे एसआई पद पर प्रमोशन पाने के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने जोधपुर आए थे। परीक्षा के दौरान अचानक हुई इस घटना से पुलिस महकमे में शोक का माहौल है। एएसआई दुर्गाराम की मौत की सूचना मिलते ही पैतृक गांव नेतराड़ में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • योगी कैबिनेट ने 39 प्रस्तावों पर लगाई मुहर, विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दी नई रफ्तार

    योगी कैबिनेट ने 39 प्रस्तावों पर लगाई मुहर, विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दी नई रफ्तार

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक में विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि, रोजगार, तकनीक और जनकल्याण से जुड़े 39 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण फैसलों के साथ प्रदेश को ‘विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के संकल्प को दोहराया। कैबिनेट ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही भदोही का नाम संत रविदासनगर भदोही करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई।

    तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन (यूपी-एआईएम) की स्थापना को मंजूरी दी। इसके साथ ही प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार का उद्देश्य सरकारी खरीद में प्रदेश के स्टार्टअप्स को अवसर उपलब्ध कराते हुए नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।

    कृषि क्षेत्र में कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान क्रय नीति निर्धारित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। इससे आगामी धान खरीद व्यवस्था को निर्धारित नीति के अनुरूप संचालित किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। वहीं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल भवन विनियम-2026 लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में भवन निर्माण और विकास की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और मानकीकृत किया जा सकेगा। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके अलावा मैनपुरी में राज्य मार्ग संख्या-84 को चार लेन में चौड़ा करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।

  • ₹20 की बोतल के लिए वसूले ₹50, पटना उपभोक्ता आयोग ने थिएटर और कंपनी पर लगाया जुर्माना

    ₹20 की बोतल के लिए वसूले ₹50, पटना उपभोक्ता आयोग ने थिएटर और कंपनी पर लगाया जुर्माना

    पटना
    बिहार की राजधानी पटना में सिनेमा हॉल के अंदर खाद्य सामग्रियों और पानी की बोतलों पर ली जाने वाली मनमानी कीमत के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट ने सख्त कदम उठाया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने सिनेपोलिस थिएटर और कोका-कोला कंपनी पर दोहरी मूल्य प्रणाली (ड्यूअल एमआरपी) अपनाने के लिए 85 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। आयोग ने कहा कि दर्शकों को बाहर से पानी लाने से रोककर अंदर महंगे दामों पर उत्पाद खरीदने के लिए विवश करना पूरी तरह गैर-कानूनी और उपभोक्ता अधिकारों का हनन है। अदालत के इस फैसले से थिएटर्स में होने वाली मनमानी वसूली पर लगाम लगेगी।

    20 की बोतल 50 में बेचना पड़ा भारी
    ये मामला 23 सितंबर 2016 का है, जब एक परिवादी सिनेपोलिस थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे थे। थिएटर प्रशासन ने बाहर से पानी ले जाने पर प्रतिबंध लगा रखा था, जिसके कारण परिवादी को मजबूरी में हॉल के अंदर से पानी खरीदना पड़ा। खुले बाजार में जो पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर 20 रुपये में मिलता है, उसके लिए हॉल में 50 रुपये वसूले गए।

    85 हजार रुपये जुर्माने का आदेश
    पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए इस कृत्य को अनुचित और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार माना। अदालत ने सिनेपोलिस और कोका-कोला कंपनी को भुगतान करने का निर्देश जारी किया।

    • उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति: परिवादी को मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी।
    • वाद व्यय: केस लड़ने में हुए खर्च के तौर पर उपभोक्ता को 10 हजार रुपये दिए जाएंगे।
    • कल्याण कोष में जमा: 50 हजार रुपये की बड़ी राशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करानी होगी।
    • भुगतान की समय-सीमा: 45 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन न करने पर निर्धारित राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लागू होगा।

    दोहरी कीमत वसूलने पर पूर्ण रोक
    उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि खुले बाजार की प्रचलित दर से अधिक पर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर या कोई अन्य उत्पाद नहीं बेचा जा सकता। इसके अलावा, बोतलों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) साफ और पठनीय रूप से लिखा होना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि आम ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली न हो सके।

    उपभोक्ता मंत्रालय को कार्रवाई के निर्देश
    आयोग ने इस तरह के अनुचित व्यापार व्यवहार को जड़ से खत्म करने के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग और उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय को भी पत्र भेजा है। आयोग ने दोनों विभागों को सिनेमा हॉलों और मॉल में चल रही मनमानी दोहरी कीमत प्रणाली को रोकने के लिए पूरे राज्य में कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

  • लखनऊ में 265 करोड़ से बनेगा आधुनिक इंटीग्रेटेड बस टर्मिनल, यात्रियों को मिलेगा एयरपोर्ट जैसा अनुभव

    लखनऊ में 265 करोड़ से बनेगा आधुनिक इंटीग्रेटेड बस टर्मिनल, यात्रियों को मिलेगा एयरपोर्ट जैसा अनुभव

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में लखनऊ की वृन्दावन योजना स्थित पी-4 पार्किंग में एकीकृत सिटी बस टर्मिनल और वाणिज्यिक क्षेत्र सुविधाओं का पीपीपी मोड पर विकास कराए जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना की कुल लागत करीब 265 करोड़ रुपये होगी। इससे शहर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए अतिरिक्त टर्मिनल उपलब्ध होगा और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस टर्मिनल को इस तरह विकसित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को एयरपोर्ट जैसा अनुभव मिल सके।

    7.06 एकड़ में बनेगा समर्पित टर्मिनल
    नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान में लखनऊ में 116 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन दुबग्गा डिपो से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 300 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया भी चल रही है। प्रस्तावित बसों के संचालन के लिए अतिरिक्त समर्पित टर्मिनल की आवश्यकता को देखते यह निर्णय लिया गया है। परियोजना का क्रियान्वयन नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा किया जाएगा। परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत में 60 करोड़ रुपये बस टर्मिनल और 205 करोड़ रुपये वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे। इसमें भूमि की लागत शामिल नहीं है। परियोजना का कुल क्षेत्रफल लगभग 7.06 एकड़ है।

    बस टर्मिनल में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
    टर्मिनल में बस-वे, बस पार्किंग, इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मरम्मत सुविधाएं, कर्मचारियों के विश्राम कक्ष, प्रशासनिक कार्यालय और सुरक्षा कक्ष बनाए जाएंगे। यात्रियों के लिए टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, प्रतीक्षालय और सामान रखने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा परिसर में रेस्तरां, कॉफी शॉप, फास्ट फूड आउटलेट, व्यावसायिक दुकानें, मेडिकल स्टोर, बैंक, एटीएम, सार्वजनिक शौचालय, वाटर एटीएम, टैक्सी स्टैंड और सार्वजनिक पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। अग्निशमन व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा होगी।

    निर्माण के बाद निदेशालय को निःशुल्क हस्तांतरण
    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, विकासकर्ता को डिजाइन, ड्राइंग और स्पेसिफिकेशन की अंतिम मंजूरी नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा दी जाएगी। विकासकर्ता बस टर्मिनल का निर्माण करने के बाद उसे नगरीय परिवहन निदेशालय को निःशुल्क हस्तांतरित करेगा। हालांकि, टर्मिनल और सहायक सुविधाओं के संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी विकासकर्ता के पास रहेगी। बस टर्मिनल का रख-रखाव 35 वर्ष और वाणिज्यिक सुविधाओं से संबंधित अवस्थापना का रख-रखाव 90 वर्ष तक करना होगा। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत परियोजना के लिए आमंत्रित निविदा में चार कंपनियों ने भाग लिया था। इनमें सबसे अधिक बोली लगाने वाली ओबेक्स लिमिटेड को परियोजना आवंटित करने का प्रस्ताव है।

  • सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को कैबिनेट की मंजूरी

    सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को कैबिनेट की मंजूरी

    लखनऊ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (एसवीपीएसटीपीजेड) विकास योजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश को ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जनपदों को आच्छादित करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इससे युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर देश-विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

    उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार होगा कुशल कार्यबल

    उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं, जो देश के कुल लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 प्रतिशत हैं। प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 60 प्रतिशत तथा निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं। उद्योगों की बढ़ती मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और युवाओं को व्यापक स्तर पर रोजगार से जोड़ने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    प्रथम चरण में पांच केंद्र, नौ जोन में हब एवं स्पोक मॉडल

    प्रदेश के सभी जनपदों को नौ जोन में विभाजित कर हब एवं स्पोक मॉडल पर कौशल विकास एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से विभिन्न उद्योगों, बाजार क्षेत्रों एवं विभागों की मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं का आकलन कर रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा लखनऊ में, सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर कानपुर में, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) द्वारा गोरखपुर में, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से गौतमबुद्ध नगर में तथा बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा झांसी में एक-एक केंद्र स्थापित किया जाएगा।

    जोन-1: गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़।

    जोन-2: सहारनपुर मंडल तथा बुलंदशहर, बागपत एवं मेरठ।

    जोन-3: मुरादाबाद एवं बरेली मंडल।

    जोन-4: आगरा एवं अलीगढ़ मंडल।

    जोन-5: लखनऊ एवं अयोध्या मंडल।

    जोन-6: कानपुर एवं प्रयागराज मंडल।

    जोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल एवं झांसी मंडल।

    जोन-8: वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल।

    जोन-9: गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल।

    10 से 25 एकड़ में विकसित होंगे केंद्र, मिलेगी फोर लेन सड़क संपर्क सुविधा

    प्रत्येक केंद्र की स्थापना के लिए 10 से 25 एकड़ तक की उपयुक्त एवं भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए निकटवर्ती राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो वर्ष के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। केंद्रों का विकास एवं संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल अथवा शासकीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा।

    देशी-विदेशी भाषाओं सहित तकनीकी एवं गैर-तकनीकी प्रशिक्षण

    योजना के अंतर्गत मानविकी एवं वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था होगी। देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप आवश्यकता आधारित भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

    प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा तथा परिसर में ही सेवायोजन कार्यालय एवं प्लेसमेंट सेल की व्यवस्था की जाएगी। देश और विदेश में नियोजन के क्षेत्र में कार्यरत मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    तीन वर्षों में होगा 1,725 करोड़ रुपये का व्यय

    परियोजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। निजी विकासकर्ताओं एवं प्रशिक्षण प्रदाताओं को आवश्यकता के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला एवं परियोजना स्तर पर समन्वय और निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत परियोजनाओं की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता तथा रोजगार संबंधी गतिविधियों का अनुश्रवण किया जाएगा। उद्योगों, संबंधित विभागों एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच समन्वय स्थापित कर योजना के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कौशल प्रशिक्षण एवं सेवायोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी सुविधाओं के उपयोग की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार के चयन का प्रावधान किया गया है।

  • देवघर, दुमका और गोड्डा के यात्रियों को राहत, जसीडीह रेल बाईपास से ट्रेनों को मिलेगा नया रास्ता

    देवघर, दुमका और गोड्डा के यात्रियों को राहत, जसीडीह रेल बाईपास से ट्रेनों को मिलेगा नया रास्ता

    देवघर
     हावड़ा-दिल्ली मेन रेल लाइन पर नई रेल कनेक्टिविटी के तहत जसीडीह रेल बाईपास का शुक्रवार को गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर नई रेल लाइन पर स्पेशल ट्रेन को सांसद के साथ पूर्व रेलवे की जीएम चेतना नंद सिंह (या संबंधित अधिकारी) एवं डीआरएम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस मौके पर सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि जसीडीह रेल बाईपास से एक नए रूट का विकल्प मिला है। अब शंकरपुर स्टेशन पर यार्ड विकसित किया जाना चाहिए, जिससे जसीडीह स्टेशन पर दबाव घटेगा और इंजन के रिवर्सल (दिशा बदलने) का झंझट समाप्त हो जाएगा।

    सांसद ने कहा कि यह पिछड़ा इलाका आज तेजी से रेल कनेक्टिविटी में आगे बढ़ रहा है और इसके लिए रेल बाईपास बेहद जरूरी था।

    उन्होंने जामा और हंसडीहा रेल बाईपास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देवघर अब गोड्डा रेल लाइन से सीधा जुड़ गया है। जल्द ही गोड्डा-पाकुड़ रेल लाइन को कैबिनेट से स्वीकृति मिल जाएगी।

    सांसद ने यह भी कहा कि हंसडीहा के आसपास मालगाड़ियों (फ्रेट) के लिए दो-तीन स्टेशन विकसित किए जाने चाहिए ताकि कोयले की डंपिंग हो सके। इसके अलावा झाझा-जसीडीह के बीच तुलसीटांड़ के पास माल ढुलाई के लिए मल्टी-मॉडल हब बनाया जाना चाहिए।

    उल्लेखनीय है कि बिहार, बंगाल और संताल परगना क्षेत्र के पहले जसीडीह रेल बाईपास पर ट्रेनों का आवागमन जल्द ही शुरू होने वाला है। संताल परगना पहला ऐसा क्षेत्र है जहां रेल बाईपास का जाल बिछाया जा रहा है, जिसकी पहली कड़ी जसीडीह रेल बाईपास है।

    इस रेल बाईपास से संताल परगना के सुदूर इलाकों—गोड्डा, दुमका तथा भागलपुर-बांका को नया मार्ग मिल गया है। जसीडीह रेल बाईपास देवघर लिंक केबिन से 4.8 किमी का नया रेल ट्रैक है, जिस पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों का परिचालन होगा। इससे रांची व हावड़ा जाने वाली ट्रेनों का लगभग एक घंटा समय बचेगा।

    देवघर, दुमका, गोड्डा और बांका से खुलकर हावड़ा, रांची, धनबाद, गिरिडीह तथा कोडरमा की ओर जाने और लौटने वाली ट्रेनों को अब जसीडीह स्टेशन पर इंजन बदलने (रिवर्सल) की आवश्यकता नहीं होगी। रेलवे बोर्ड से अंतिम अनुमति मिलते ही इस नए रूट पर नियमित परिचालन शुरू हो जाएगा।