Author: NewseDay

  • लखनऊ के नौसेना संग्रहालय को मिलेगी नई पहचान, 2027 तक विस्तार का लक्ष्य; छात्रों को सस्ते टिकट पर एंट्री

    लखनऊ के नौसेना संग्रहालय को मिलेगी नई पहचान, 2027 तक विस्तार का लक्ष्य; छात्रों को सस्ते टिकट पर एंट्री

    लखनऊ स्थित नौसेना शौर्य संग्रहालय का होगा विस्तार, 6.8 एकड़ में होगा वाटर बॉडी का विकास

    योगी कैबिनेट ने तीसरे चरण की परियोजना को दी मंजूरी, संग्रहालय के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा एलडीए

    नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल गैलरी होंगे आकर्षण

    छात्रों को रियायती दर पर मिलेगा प्रवेश, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

    युवाओं को राष्ट्रीय विरासत से जोड़ता है पर्यटन- जयवीर सिंह

    प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करेःं जयवीर सिंह

    लखनऊ, 

    लखनऊ में पर्यटन को नया आयाम देने के लिए विकसित किए जा रहे नौसेना शौर्य संग्रहालय का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में संग्रहालय के तीसरे चरण के तहत वाटर बॉडी विकसित करने के लिए करीब 6.8 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही संग्रहालय परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपने का भी निर्णय लिया गया।

    वाटर बॉडी विकसित करने के लिए एलडीए संबंधित 6.8 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को एक लाख रुपये की टोकन मनी पर उपलब्ध कराएगा। परियोजना के तहत नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियां, बोटिंग, लाइट एंड साउंड शो के साथ जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से जुड़ी प्रदर्शनियां विकसित की जाएंगी। इससे नौसेना शौर्य संग्रहालय को एक ऐसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां लोग देश के समुद्री इतिहास और नौसेना की तकनीक को करीब से जानने के साथ मनोरंजन का भी आनंद ले सकेंगे।

    इतिहास, विज्ञान और तकनीक से रूबरू होंगे पर्यटक
    उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग भारतीय नौसेना के सहयोग से नौसेना शौर्य संग्रहालय विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को देश की समुद्री विरासत और नौसेना की सामरिक ताकत से रूबरू कराने के साथ अनुभवात्मक व ज्ञान आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है। संग्रहालय में नौसेना के उपकरणों, समुद्री इतिहास और देश की रक्षा क्षमताओं की झलक देखने को मिलेगी। डिजिटल तकनीक, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और सिमुलेशन के जरिये पर्यटक नौसेना की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे।

    'संग्रहालय विस्तार से बढ़ेंगे पर्यटन और रोजगार'
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जो लोगों में जिज्ञासा पैदा करने के साथ युवाओं को देश की राष्ट्रीय विरासत से जोड़ें। अनुभवात्मक और ज्ञान आधारित पर्यटन के जरिए विद्यार्थियों के लिए इतिहास, विज्ञान और तकनीक को अधिक रोचक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नौसेना शौर्य संग्रहालय के विस्तार से परिवारों को लखनऊ घूमने का एक नया विकल्प मिलेगा। साथ ही पर्यटन से जुड़े कारोबार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।'

    मई में हुआ था पहले चरण का उद्घाटन
    परियोजना के पहले चरण के तहत विकसित नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन 30 मई 2026 को केंद्रीय रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया था। वाटिका में भारतीय नौसेना की ओर से उपलब्ध कराए गए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के हिस्से, नौसैनिक तोपें, लंगर और प्रोपेलर प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से पर्यटक समुद्र से दूर स्थित लखनऊ में भी भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली और उसकी सामरिक क्षमताओं को करीब से समझ सकते हैं।

    आधुनिक तकनीक से रूबरू कराएगा एक्सपीरियंस सेंटर
    परियोजना के तहत प्रस्तावित क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर में भारत की समुद्री विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यहां डिजिटल गैलरी, इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां और सिमुलेशन विकसित किए जाएंगे। इनके जरिए प्राचीन समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक नौसैनिक अभियानों और स्वदेशी रक्षा तकनीक तक की यात्रा को दर्शाया जाएगा। केंद्र में भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और बचाव अभियानों में भूमिका की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त यहां एक्वेरियम विकसित करने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों और शोध में रुचि रखने वाले युवाओं को समुद्री जीवन तथा उससे जुड़ी तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा।

    वाटर बॉडी में बोटिंग और लाइट एंड साउंड शो
    परियोजना के तीसरे चरण में विकसित होने वाली वाटर बॉडी संग्रहालय परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। यहां नौसेना के जहाजों की प्रतिकृतियों के साथ बोटिंग की सुविधा विकसित की जाएगी। लाइट एंड साउंड शो तथा जलीय जीवन और समुद्री जैव विविधता से संबंधित प्रदर्शनियां भी प्रस्तावित हैं। इससे संग्रहालय को शैक्षणिक भ्रमण के साथ परिवारों के मनोरंजन के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकेगा।

    69.10 करोड़ की परियोजना, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
    संग्रहालय भवन, नौसेना शौर्य वाटिका और क्यूरेशन से जुड़े कार्यों के लिए अब तक करीब 69.10 करोड़ रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस तीन चरणों वाली परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था भी होगी। विद्यार्थियों और स्कूली बच्चों के लिए रियायती दरों पर प्रवेश की व्यवस्था होगी। इससे स्कूलों के शैक्षणिक भ्रमण को प्रोत्साहन मिलने और विद्यार्थियों को इतिहास, विज्ञान, तकनीक तथा राष्ट्रीय सेवा से जुड़े विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

    पूरे परिसर का संचालन करेगा एलडीए
    नौसेना शौर्य वाटिका के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी एलडीए संभालेगा। क्यूरेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर और वाटर बॉडी का निर्माण पूरा होने के बाद उनका संचालन भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाएगा। इससे पूरे परिसर में रखरखाव, सुरक्षा, टिकट और पर्यटक सुविधाओं का प्रबंधन एक ही एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा।

  • CM मोहन यादव का ग्लोबल प्लान, मध्यप्रदेश में ₹19,477 करोड़ के फार्मा निवेश पर फोकस

    CM मोहन यादव का ग्लोबल प्लान, मध्यप्रदेश में ₹19,477 करोड़ के फार्मा निवेश पर फोकस

    भोपाल
     एमपी ने ग्लोबल निवेश की अगली बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। सीएम मोहन यादव ने मुंबई में सात देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन्हें GIS-2027 में पार्टनर कंट्री बनने का न्योता दिया। इसी दौरान फार्मा उद्योग के दिग्गजों के साथ बैठक में पिछले 18 महीनों के 19,477 करोड़ के प्रस्तावित निवेश और 18,646 संभावित रोजगार का खाका सामने रखा गया।

    GIS-2027 में सात देशों की भागीदारी पर जोर
    जापान, मेक्सिको, रूस, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों से चर्चा में सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश की वैश्विक साझेदारी अब ठोस परियोजनाओं पर आधारित होगी। जनवरी 2027 में भोपाल में होने वाली GIS के जरिए प्रदेश निवेश और व्यापारिक रिश्तों को और विस्तार देना चाहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश प्रस्तावों की असली सफलता उनके जमीन पर उतरने से तय होगी।

    फार्मा में 19,477 करोड़ के प्रस्ताव मिले
    फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 18 महीनों में 54 निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें करीब 19,477 करोड़ का निवेश और 18,646 रोजगार की संभावना है। इनमें 34 इकाइयों के करीब 12,306 करोड़ के प्रस्तावों के लिए जमीन आवंटित होने और 14 इकाइयों में उत्पादन शुरू होने की जानकारी दी गई।

    मेडिकल डिवाइस पार्क में 17 इकाइयां शुरू
    उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क में 57 इकाइयों को आवंटन दिया गया है, जबकि 17 इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। यहां करीब 2,374.86 करोड़ के निवेश और 9,625 रोजगार की संभावना बताई गई। रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां फार्मा, बायोटेक और केमिकल सेक्टर को प्राथमिकता मिलेगी।

    पीथमपुर से उज्जैन तक विदेशी निवेश
    मुख्यमंत्री ने ब्रिटेन की हेलियॉन के पीथमपुर में करीब 2,000 करोड़, जापान के टोप्पन समूह के करीब 950 करोड़ और दक्षिण कोरिया की ईसीडीएस के उज्जैन में करीब 780 करोड़ के प्रस्तावों का उल्लेख किया। प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से ज्यादा API एवं बल्क ड्रग निर्माता होने की जानकारी भी दी गई।

    R&D और एक्सपोर्ट पर भी फोकस
    उद्योग संवर्धन नीति-2025 के तहत फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस को फोकस सेक्टर बनाया गया है। पात्र निवेश पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन, R&D खर्च पर 50 प्रतिशत सहायता और टेस्टिंग व क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए वित्तीय सहयोग का प्रावधान बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल दवा बनाने तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश में API, वैक्सीन, इंजेक्टेबल, बायोटेक, मेडिकल डिवाइस, रिसर्च, टेस्टिंग और निर्यात की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की तैयारी है।

    8.5 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश का दावा
    मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025 की GIS के बाद मध्यप्रदेश में ₹8.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि GIS-2027 में भी सरकार का जोर घोषणाओं से ज्यादा उनके क्रियान्वयन पर रहेगा। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को 2028 के उज्जैन सिंहस्थ में आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय प्रदेश है और उसका स्वभाव दुनिया को जोड़ना है।

  • भदोही को फिर संत रविदास के नाम से जाना जाएगा? योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद बढ़ी चर्चा

    भदोही को फिर संत रविदास के नाम से जाना जाएगा? योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद बढ़ी चर्चा

    भदोही को फिर मिलेगी संत रविदास के नाम से पहचान, योगी कैबिनेट की मुहर
     
    सपा सरकार ने हटाया था संत रविदास का नाम, अब संत रविदासनगर भदोही होगा नाम
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर
     
    संत रविदास के सम्मान के साथ भार राज की ऐतिहासिक विरासत भी रहेगी बरकरार
     
    दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने का सियासी संदेश
     
    लखनऊ

    भदोही जिले को एक बार फिर संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में जिले का नाम 'संत रविदासनगर भदोही' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। समाजवादी पार्टी की सरकार में जिले के नाम से संत रविदास का नाम हटाकर केवल भदोही कर दिया गया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम दोबारा जोड़ने के साथ भदोही की ऐतिहासिक पहचान भी बरकरार रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। इसे दलित और राजभर समाज, दोनों को साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
     
    कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जिले का नाम संत रविदासनगर भदोही होगा। सरकार ने भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सुधार में संत रविदास के योगदान को इस निर्णय का आधार बनाया है। नए नाम में संत रविदास के सम्मान के साथ भदोही की पहचान भी शामिल रहेगी।
     
    सपा सरकार में हटाया गया था संत रविदास का नाम
    भदोही के नामकरण का राजनीतिक इतिहास रहा है। वर्ष 1997 में मायावती सरकार ने जिले का नाम संत रविदास नगर किया था। वर्ष 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने जिले का नाम बदलकर केवल भदोही कर दिया था। अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम फिर शामिल करने का निर्णय लिया है।
     
    दलित और राजभर समाज को संदेश
    संत रविदास दलित समाज की आस्था और सामाजिक चेतना के प्रमुख प्रतीक हैं। वहीं भदोही की ऐतिहासिक पहचान भार राज से जुड़ी मानी जाती है। राजभर समाज इस विरासत को अपनी परंपरा से जोड़कर देखता है। ऐसे में जिले के नए नाम में संत रविदास और भदोही, दोनों को स्थान देने का राजनीतिक महत्व है। इसे दोनों समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
     
    राजस्व संहिता के तहत होगा नाम परिवर्तन

    प्रदेश सरकार के अनुसार, नाम परिवर्तन का निर्णय उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत लिया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर किसी राजस्व क्षेत्र का नामकरण कर सकती है। प्रस्ताव को केंद्र सरकार के 11 सितंबर 1953 के संबंधित परिपत्र के अनुरूप भी बताया गया है।

  • Relief for women ahead of Diwali: Yogi government to provide free gas cylinders to Ujjwala beneficiaries.

    Relief for women ahead of Diwali: Yogi government to provide free gas cylinders to Ujjwala beneficiaries.

    दीपावली से पहले उज्ज्वला लाभार्थियों को योगी सरकार की सौगात, मिलेगा मुफ्त सिलेंडर
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव मंजूर
     
    दीपावली और होली पर एक-एक मुफ्त सिलेंडर रिफिल देने की योजना जारी रहेगी
     
    अक्टूबर से दिसंबर तक पहला चरण, जनवरी से मार्च के बीच दूसरा चरण
     
    योजना पर 2142.78 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार, आधार प्रमाणीकरण जरूरी
     
     लखनऊ

    दीपावली से पहले योगी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में दीपावली और होली पर एक-एक मुफ्त एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने की योजना को जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर रिफिल मिलेंगे। इस पर राज्य सरकार 2142.78 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
     
    कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि गरीब परिवारों को रसोई गैस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मंत्रिपरिषद ने योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहला मुफ्त रिफिल अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच दीपावली के अवसर पर और दूसरा जनवरी से मार्च 2027 के बीच होली के अवसर पर दिया जाएगा।
     
    आधार से जुड़ा बैंक खाता होना जरूरी
    योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े होंगे और आधार प्रमाणीकरण पूरा होगा। सरकार ने पात्रता के लिए यह शर्त निर्धारित की है।
     
    पिछले वर्षों की व्यवस्था रहेगी जारी
    योगी सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में भी दीपावली और होली पर उज्ज्वला लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है। अब चालू वित्तीय वर्ष में भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार, इससे गरीब परिवारों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ेगा और महिलाओं तथा बच्चों को परंपरागत ईंधन के धुएं से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।

  • योगी कैबिनेट ने एसएएफ विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को दी मंजूरी, बड़े निवेश और हरित रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    योगी कैबिनेट ने एसएएफ विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को दी मंजूरी, बड़े निवेश और हरित रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026’ लागू करने को मंजूरी दी गई।

    नीति का उद्देश्य विमानन क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, निजी निवेश एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना और प्रदेश में हरित रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इसमें कृषि अवशेष, नगरीय अपशिष्ट और अखाद्य तिलहनों जैसे स्थानीय फीडस्टॉक से एसएएफ उत्पादन को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में नई मूल्य श्रृंखला विकसित करने और किसानों की आय में विविधता लाने पर भी जोर दिया गया है।

    उत्तर प्रदेश में धान की भूसी, गेहूं का भूसा और गन्ने की बगास जैसे कृषि अवशेष बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनसे पायरोलिसिस और गैसीफिकेशन जैसी तकनीकों के माध्यम से एसएएफ का उत्पादन किया जा सकता है। गन्ना उत्पादन और एथेनॉल निर्माण में प्रदेश की अग्रणी स्थिति इसे द्वितीय पीढ़ी के जैव ईंधन और अल्कोहल टू जेट एसएएफ तकनीकों के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है।

    ₹200 करोड़ से अधिक निवेश वाली इकाइयों को प्रोत्साहन
    नीति में एसएएफ इकाइयों को निवेश के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा गया है। ₹200-500 करोड़ तक पूंजी निवेश वाली इकाइयां वृहद, ₹500-1,500 करोड़ तक वाली मेगा और ₹1,500 करोड़ से अधिक निवेश वाली इकाइयां अल्ट्रा मेगा श्रेणी में होंगी। इन इकाइयों को स्टांप ड्यूटी में छूट/प्रतिपूर्ति, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार एवं विकास शुल्क में छूट, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी, 10 वर्षों तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट, कौशल विकास सब्सिडी, पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति सहित विभिन्न प्रोत्साहन दिए जाएंगे। जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड पैकेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए भी प्रावधान किया गया है। भूमि आवंटन की स्थिति में फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी भी मिलेगी।

    पांच वर्ष प्रभावी रहेगी नीति
    एसएएफ इकाइयों को वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकृति और वितरण के लिए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। आवेदनों के मूल्यांकन के लिए निदेशक, यूपीनेडा के स्तर पर मूल्यांकन समिति गठित की जाएगी। यह नीति लागू होने की तिथि से पांच वर्ष तक अथवा नई नीति के लागू होने तक प्रभावी रहेगी।

  • मैनपुरी में 37.86 किमी मार्ग होगा चार लेन, योगी 328.67 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

    मैनपुरी में 37.86 किमी मार्ग होगा चार लेन, योगी 328.67 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में मैनपुरी जिले के शिकोहाबाद-भोगांव राज्य मार्ग संख्या-84 के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य की पुनरीक्षित प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत घिरोर से भोगांव तक 31.30 किलोमीटर मार्ग को चार लेन में विकसित करने और 6.56 किलोमीटर लंबे घिरोर बाईपास का निर्माण किया जाएगा। कुल 37.86 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की पुनरीक्षित लागत 328.67 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

    जाम की समस्या होगी दूर

    यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (दिल्ली-कोलकाता मार्ग) पर शिकोहाबाद की आबादी से शुरू होकर मैनपुरी में राज्य मार्ग संख्या-83 को पार करते हुए भोगांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-91 (दिल्ली-कानपुर मार्ग) से जुड़ता है। आगरा से लखनऊ, कानपुर और कन्नौज की ओर जाने वाला भारी यातायात इसी मार्ग से गुजरता है। यातायात का दबाव अधिक होने के कारण यहां अक्सर जाम की स्थिति बनती थी। मार्ग के चार लेन में चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है।

    उपज मंडी तक पहुंचाने में किसानों को होगी आसानी

    मार्ग के विकास से आसपास के किसानों को अपनी कृषि उपज मंडी स्थल तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही क्षेत्रीय लोगों को जिला मुख्यालय आने-जाने में भी सहूलियत होगी। सड़क की क्षमता बढ़ने से यातायात के दबाव को कम करने और क्षेत्र में आवागमन व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

  • यूपी में 15 अक्टूबर से धान खरीद शुरू, 65 लाख टन खरीद का लक्ष्य; 48 घंटे में होगा भुगतान

    यूपी में 15 अक्टूबर से धान खरीद शुरू, 65 लाख टन खरीद का लक्ष्य; 48 घंटे में होगा भुगतान

    लखनऊ
     योगी आदित्यनाथ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष के लिए मक्का, बाजरा और ज्वार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है। इन्हें 31 दिसंबर तक खरीदने के लिए 455 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। किसानों को धान बेचने के 48 घंटे के अंदर भुगतान किया जाएगा। इस प्रस्ताव को शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पास किया गया।

    योगी आदित्यनाथ सरकार ने मोटे अनाज की क्रय नीति को मंजूरी दी गई। सरकार ने पिछले वर्ष से 10 रुपये बढ़ाकर मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। बाजरा का समर्थन मूल्य 2775 से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल, बाजरा के मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

    हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 324 रुपये बढ़ाकर 4023 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। ज्वार की मालदांडी किस्म का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। कैबिनेट ने मक्का के लिए 25 जिलों में 75 केंद्र खोल 15 हजार टन खरीदने का लक्ष्य रखा है। 33 जिलों में 300 केंद्र खोल 2.20 लाख टन बाजरा खरीदने का लक्ष्य है। 13 जिलों के 80 केंद्रों के माध्यम से 50 हजार टन ज्वार खरीदा जाएगा।

    अनाज खरीद का भुगतान किसानों को आधार से जुड़े और एनपीसीआइ से मैप्ड बैंक खाते में किया जाएगा। किसानों को आनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। क्रय केंद्रों पर ई-पाप मशीन से बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद कंप्यूटराइज्ड खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर अनाज खरीदा जाएगा।

    धान क्रय का कार्यक्रम घोषित
    योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने 15 अक्टूबर से वेस्ट यूपी में धान की खरीद को मंजूरी दी है। प्रदेश में 15 अक्टूबर से 15 फरवरी तक धान खरीद होगी। एक नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद होगी, जोकि 28 फरवरी तक होगी। सरकार ने 65 लाख मिट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आठ क्रय एजेंसियां निर्धारित की गई हैं जोकि 4500 क्रय केंद्रों पर खरीद करेंगी। सरकार ने PCF, PCU, UPSS, मंडी परिषद, FPO, FPC, NCCF और नैफेड को खरीद की जिम्मेदारी दी है।

     

  • Train Cancelled: राजधानी, मगध और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस रद्द, दिल्ली जाने से पहले चेक करें स्टेटस

    Train Cancelled: राजधानी, मगध और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस रद्द, दिल्ली जाने से पहले चेक करें स्टेटस

    आरा(भोजपुर)
    दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे आरा और भोजपुर के यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर रेलवे ने दिल्ली की ओर जाने वाली चार प्रमुख ट्रेनों का परिचालन रद्द करने का निर्णय लिया है।

    इनमें राजधानी एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों के रद्द रहने से यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    आरा जंक्शन से सफर करने वालों पर पड़ेगा असर
    दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले आरा जंक्शन से दिल्ली की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को अब दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।

    रेलवे के इस फैसले का असर केवल आरा ही नहीं, बल्कि भोजपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों से दिल्ली जाने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।

    दिल्ली बिहार से आने-जाने वाले यात्रियों का प्रमुख गंतव्य है। ऐसे में चार प्रमुख ट्रेनों का परिचालन रद्द होने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। खासकर पहले से टिकट बुक करा चुके यात्रियों के लिए ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी होगा।

    राजधानी, मगध और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस भी रद्द
    रेलवे के निर्णय के तहत राजधानी एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस का परिचालन प्रभावित रहेगा। इन ट्रेनों से दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    त्योहारों, नौकरी, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के सिलसिले में दिल्ली जाने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा का समय और साधन दोबारा तय करना पड़ सकता है। यात्रियों को दूसरी ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता और उनके परिचालन की स्थिति भी जांचनी चाहिए।

    पूर्व मध्य रेलवे ने दी फैसले की जानकारी
    हाजीपुर स्थित पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने ट्रेनों के परिचालन को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मद्देनजर रेलवे की ओर से यह निर्णय लिया गया है।

    रेलवे के अनुसार, इसके तहत राजधानी एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस का परिचालन रद्द रहेगा। हालांकि, यात्रियों को संबंधित ट्रेन की तारीख और परिचालन से जुड़ी आधिकारिक सूचना की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

    स्टेशन जाने से पहले जरूर जांच लें ट्रेन का स्टेटस
    रेलवे ने यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी है। इससे स्टेशन पहुंचने के बाद होने वाली अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है।

    दिल्ली जाने वाले यात्री रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) या रेलवे हेल्पलाइन के माध्यम से ट्रेन का स्टेटस जांच सकते हैं। साथ ही, वैकल्पिक ट्रेनों की उपलब्धता की जानकारी लेकर ही यात्रा की योजना बनाना बेहतर होगा।

  • त्योहारी सीजन में ट्रेन यात्रियों की बल्ले-बल्ले, मंडोर एक्सप्रेस में बढ़ेंगे AC कोच; साबरमती-दिल्ली स्पेशल ट्रेन शुरू

    त्योहारी सीजन में ट्रेन यात्रियों की बल्ले-बल्ले, मंडोर एक्सप्रेस में बढ़ेंगे AC कोच; साबरमती-दिल्ली स्पेशल ट्रेन शुरू

    रेवाड़ी.

    आगामी त्योहारों के मौसम में यात्रियों की बढ़ती भीड़ और अतिरिक्त यात्री यातायात को ध्यान में रखते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

    यात्रियों की सुविधा और आरामदायक सफर को सुनिश्चित करने के लिए ये फैसला लिया गया है। जोधपुर-दिल्ली-जोधपुर मंडोर एक्सप्रेस में डिब्बों की अस्थाई बढ़ोतरी की गई है। साथ ही, साबरमती से दिल्ली के बीच एक विशेष आरक्षित ट्रेन चलाने की भी घोषणा की गई है।

    कब से शुरू होगी यह सुविधा?
    उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन अमित सुदर्शन ने बताया कि ट्रेन संख्या 22491/22492, जोधपुर-दिल्ली-जोधपुर मंडोर एक्सप्रेस में वातानुकूलित (AC) श्रेणी के दो अतिरिक्त डिब्बे जोड़े जा रहे हैं। इसमें एक सेकंड एसी (2nd AC) और एक थर्ड एसी इकोनॉमी (3rd AC Economy) श्रेणी का कोच शामिल है।

  • बूंदी में विकास कार्यों की समीक्षा, पेयजल योजनाओं को गति देने के साथ साइबर थाने का किया निरीक्षण

    बूंदी में विकास कार्यों की समीक्षा, पेयजल योजनाओं को गति देने के साथ साइबर थाने का किया निरीक्षण

    जयपुर
     मुख्य सचिव  वी. निवास ने शुक्रवार को बूंदी जिला कलक्ट्रेट सभागार में जल संचय-जल संवर्धन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान, सिंचाई तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की विभिन्न पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के विभिन्न चरणों में हुए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अभियान के तहत वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों का उपवन संरक्षक को स्वयं नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की पेयजल परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कर आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने हिण्डोली-नैनवां, गरड़दा और नवनेरा पेयजल परियोजनाओं सहित ईआरसीपी के तहत संचालित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न परियोजनाओं में संवेदकों के लंबित भुगतान संबंधी प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कर कार्यों को गति देने को कहा।

    जल संचय-जल संवर्धन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने, कार्यों का नियमित निरीक्षण करने तथा गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत गांवों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता और सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की भी जानकारी ली।

    मुख्य सचिव ने किया साइबर थाने का निरीक्षण
    मुख्य सचिव  वी. निवास ने शुक्रवार को बूंदी साइबर पुलिस थाने का निरीक्षण कर साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने थाने के स्वागत कक्ष और अनुसंधान कक्ष का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    मुख्य सचिव ने साइबर थाने में दर्ज प्रकरणों के निस्तारण, अनुसंधान, आरोपियों की गिरफ्तारी, कार्यप्रणाली तथा विभिन्न पोर्टलों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय तथा समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान से पीड़ितों की मेहनत की कमाई बचाई जा सकती है।

    इस दौरान संभागीय आयुक्त व कोटा जिला कलक्टर  पीयूष समारिया, पुलिस महानिरीक्षक कोटा  हरेन्द्र महावर, जिला कलक्टर  हरफूल सिंह यादव, जिला पुलिस अधीक्षक  अवनीश कुमार शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर  एच.डी. सिंह, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चारू, अतिरिक्त जिला कलक्टर (सीलिंग)  रमेश देव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।