Author: NewseDay

  • कोर्ट पेशी के बाद पूर्व DIG भुल्लर का बयान, सवालों पर बोले- ‘अभी कुछ नहीं कह सकता’

    कोर्ट पेशी के बाद पूर्व DIG भुल्लर का बयान, सवालों पर बोले- ‘अभी कुछ नहीं कह सकता’

    चंडीगढ़.

    पिछले करीब एक साल से जेल में बंद पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर वीरवार को चंडीगढ़ कोर्ट में रो पड़े थे और शुक्रवार को फिर से उन्हें पेश किया गया तो कोर्ट से बाहर आकर बोले कि वे अभी कुछ नहीं कह सकते।

    ईडी ने भी भुल्लर को कोर्ट में पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट हासिल किए थे। अब मनी लाॅन्ड्रिंग की जांच के लिए ईडी भुल्लर को हिरासत में ले सकती है। इससे पहले वीरवार को भुल्लर और कृष्णु के वकीलों ने शिकायतकर्ता आकाश बत्ता का क्राॅस एग्जामिनेशन किया था। भुल्लर ने जज के आगे कहा था कि शिकायतकर्ता आकाश बत्ता सार्वजनिक मंचों पर उन्हें बदनाम कर रहा है। उसने कई बार उनके चरित्र पर अंगुलियां उठाई, जिस कारण उन्हें समाज में शर्मसार होना पड़ रहा है।

    भुल्लर ने कहा कि उनके घर भी बहू-बेटी हैं। रिश्वत मामले में भुल्लर के बिचौलिए कृष्णु शारदा को कोर्ट में पेश किया गया था। इस दौरान भुल्लर और कृष्णु के वकीलों ने शिकायतकर्ता आकाश बत्ता का क्राॅस एग्जामिनेशन किया। मामले में आकाश गवाही दे चुके हैं और अब बचाव पक्ष के वकील सवाल-जवाब कर रहे हैं। इससे पहले बत्ता ने सीबीआई जज के आगे दोनों आरोपितों के खिलाफ खुलकर गवाही दी थी।

    घर से मिले थे करोड़ों रुपये कैश, सोना
    भुल्लर को पिछले साल 16 अक्टूबर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वह मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता से आठ लाख रुपये रिश्वत मांग रहे थे। उन्हें किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिया जा रहा था। बत्ता ने जब इस बारे में सीबीआइ को शिकायत दी तो जांच एजेंसी ने भुल्लर और कृष्णु को गिरफ्तार कर लिया था। भुल्लर के सेक्टर-40 स्थित घर से सीबीआइ को साढ़े सात कराेड़ रुपये कैश और करीब ढाई किलो सोना मिला था।

  • ‘रणबाली’ का ट्रेलर रिलीज, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म में दिखेगा एक्शन-रोमांस

    ‘रणबाली’ का ट्रेलर रिलीज, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म में दिखेगा एक्शन-रोमांस

    विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म 'रणबाली' 16 अक्टूबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. राहुल सांकृत्यायन के डायरेक्शन में बनी यह एक्शन फिल्म आजादी से पहले के भारत की पृष्ठभूमि में एक बहादुर योद्धा की कहानी दिखाती है. रिलीज से पहले, मेकर्स ने फिल्म से जुड़ा ट्रेलर बीते दिन जारी कर दिया है.

    3 मिनट 56 सेकंड लंबे इस ट्रेलर में एक ऐसी दुनिया दिखाई गई है, जहां लोग ब्रिटिश जालिम हुकूमत के तहत पीड़ित हैं. जब गरीब लोग अकाल से जूझ रहे होते हैं, तो देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त एक योद्धा अपने लोगों को बचाने का बीड़ा उठाता है और तमाम मुश्किलों के बावजूद एक जबरदस्त लड़ाई की तैयारी करता है.

    रणबाली का ट्रेलर रिव्यू
    ट्रेलर में कहानी का बड़ा दायरा साफ दिखता है, और प्रोडक्शन वैल्यू व विजुअल्स कहानी के अनुरूप हैं. हालांकि, एडिटिंग में कोई खास हाई पॉइंट नहीं है, और कभी-कभी कुछ घिसे-पिटे तरीके भी नजर आते हैं. इसके अलावा, 'एक ही' रक्षक (मसीहा) का कॉन्सेप्ट और आध्यात्मिक जागृति का संकेत कुछ हद तक घिसा-पिटा लगता है.

    ट्रेलर देखकर ये पता चलता है कि फिल्म जरूरत से ज्यादा ड्रामैटिक लगती है. हाल ही में नानी की फिल्म 'द पैराडाइज' में भी ऐसा ही देखा गया था, जो बहुत शोर-शराबे वाली थी और उसमें कोई गहराई नहीं थी. 'रणबाली' के ट्रेलर में भारतीयों की अंग्रेजों द्वारा बेरहमी से हत्या होते हुए भी दिखाया गया है. जो थोड़े विचलित भी करते हैं. लेकिन, ऐसा लगता है कि दर्शकों में भावनाएं जगाने के लिए यह जबरदस्ती किया गया है. जब हिंसा का इस्तेमाल सिर्फ चौंकाने के लिए किया जाता है, तो उसका असर कम हो जाता है और वह दर्शकों में वैसी भावनाएं नहीं जगा पाती जैसी उम्मीद की जाती है. हाल के सालों में कई फिल्मों में इसी तरह हिंसा का इस्तेमाल किया गया है, और अब तो यह दर्शकों को असंवेदनशील बनाने की हद तक पहुंच गया है.

    हालांकि, फाइनल कट या रिलीज होने तक पहले कहानी और किरदारों के विकास का गहराई से विश्लेषण करना जल्दबाजी होगी.

    रश्मिका-विजय का दिखेगा रोमांस
    विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी केमिस्ट्री दिखाएंगे, और उनके फैन्स को फिल्म के एक्शन के साथ रोमांस का मेल पसंद आने की उम्मीद है. साथ ही, 'द ममी' के एक्टर अर्नोल्ड वोस्लो मुख्य विलेन की भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि वह फिल्म के असली विलेन वाले किरदार को कितनी प्रभावी ढंग से निभाते हैं.

    यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर
    'रणबाली' 19वीं सदी के दक्षिण भारत पर आधारित है और एक निडर योद्धा की कहानी है जो अपने लोगों को भूख और शोषण से पीड़ित देखने के बाद ब्रिटिश औपनिवेशिक दमन के खिलाफ आवाज उठाता है. अपनी पत्नी जयाम्मा के साथ मिलकर, रणबाली बेरहम ब्रिटिश कमिश्नर सर थियोडोर हेक्टर के खिलाफ जबरदस्त प्रतिरोध का नेतृत्व करता है; वह अपनी कम्युनिटी की रक्षा के लिए औपनिवेशिक अनाज की सप्लाई पर छापे मारता है और गुरिल्ला हमले करता है.

    विजय और रश्मिका का वर्क फ्रंट
    विजय देवरकोंडा 'राउडी जनार्दन' में भी नजर आएंगे, जो रवि किरण कोला द्वारा निर्देशित एक एक्शन ड्रामा है और जिसमें कीर्ति सुरेश भी उनके साथ हैं. शुरुआत में यह फिल्म दिसंबर 2026 में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई नया अपडेट नहीं आया है.

    एक्टर ने 'हाय नन्ना' के डायरेक्टर शौर्युव के साथ भी एक प्रोजेक्ट की घोषणा की है. फिलहाल 'VDxShouryuv' नाम वाली यह फिल्म एक रोमांटिक-एक्शन फिल्म बताई जा रही है, जिसके गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक हेशम अब्दुल वहाब ने तैयार किए हैं.

    वहीं, रश्मिका मंदाना रविंद्र पुल्ले के डायरेक्शन में बन रही एक्शन फिल्म 'म्यसा' (Mysaa) में मुख्य भूमिका निभाएंगी. यह फिल्म 27 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली है. ऐसी भी चर्चा है कि वह अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'राका' (Raaka) का हिस्सा होंगी, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.

  • लिनेश साहू केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, धर्मांतरण के दबाव के आरोपों के बीच पत्नी समेत ससुराल वालों को सजा

    लिनेश साहू केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, धर्मांतरण के दबाव के आरोपों के बीच पत्नी समेत ससुराल वालों को सजा

    धमतरी.

    धमतरी में नया इतिहास रचा गया है. धर्मांतरण के दबाव में एक युवक ने जान दे दी थी. मामले में कोर्ट ने युवक की पत्नी के साथ सास-ससुर और दोनों सालियों को दोषी पाते हुए पांच-पांच साल का कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ पांच-पांच सौ रुपए का अर्थदंड लगाया है.

    पूरा मामला अर्जुनी थाना क्षेत्र के पोटियाडीह गांव का है. 6 सितंबर 2024 को लिनेश साहू नाम के युवक ने आत्महत्या कर ली थी. आरोप है कि लिनेश की पत्नी, उसके सास-ससुर और दो सालियां लगातार ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे. लिनेश बार-बार मना करता रहा, लेकिन दबाव खत्म नहीं हुआ. तंग आकर उसने पहले वाट्सअप-इंस्टाग्राम में स्टेट्स रखकर सारी समस्या बताई, फिर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी, और अब घटना के लगभग एक साल बाद अप सत्र न्यायाधीश अर्चना भास्कर ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

    कोर्ट ने पत्नी करुणा बाई साहू के साथ ससुर राजकुमार साहू, सास गौरी साहू, सालियां किरण और कनिष्का साहू को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल का कठोर कारावास और पांच-पांच सौ रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है. मामले में लोक अभियोजक गीतेश प्रजापति थे.

  • नए दौर में भारत की नई पहचान, CM मोहन यादव ने पीएम मोदी के नेतृत्व को बताया अहम

    नए दौर में भारत की नई पहचान, CM मोहन यादव ने पीएम मोदी के नेतृत्व को बताया अहम

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत प्रवेश कर चुका है नए दौर में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम में बच्चों ने रंगोली से किया राष्ट्र के प्रति अपने भावों का प्रकटीकरण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टी.टी. नगर स्टेडियम में किया कार्यक्रम को संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण भारत, नए दौर में प्रवेश कर चुका है। मध्यप्रदेश भी तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मोत्सव को पूरे एक माह तक सेवा संकल्प अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम में विशाल और आकर्षक रंगोलियां तैयार की गईं। रंगोली के माध्यम से बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और राष्ट्र के प्रति अपने भावों का प्रकटीकरण किया है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'सेवा के रंग-राष्ट्र के संग' कार्यक्रम के अंतर्गत मानव रंगोली निर्माण कार्यक्रम को टीटी नगर स्टेडियम में  संबोधित कर रहे थे।

    भारत के नक्शे के रूप में बनाई मानव रंगोली

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को टी.टी. नगर स्टेडिटम में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर, प्रधानमंत्री मोदी और विकसित भारत के संकल्प पर आधारित विशाल रंगोलियों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत के नक्शे के रूप में बनी मानव रंगोली में शामिल बच्चों के बीच जाकर बैठे और बच्चों से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  इस अवसर पर रंगीन गुब्बारे आसमान में छोड़े। पूरा स्टेडियम भारत माता की जय के नारों से गुंजायमान हो रहा था। स्टेडियम में उपस्थित युवाओं ने देश को @2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए "वी विल डू इट" और  भारत माता की जय के नारों का उद्घोष किया। इस अवसर पर युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था, विद्यार्थी मुख्यमंत्री डॉ यादव से हाथ मिलाने,उनका अभिवादन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने  के लिए आतुर थे।

    एशियन गेम्स : 2026 में हमारे खिलाड़ियों ने उत्कृष्टता सिद्ध की

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने जापान में संपन्न हुए एशियन गेम्स-2026 की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की। मध्यप्रदेश को इस प्रतियोगिता में कुल 11 पदक मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी खिलाड़ियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    रंगोली के माध्यम से दिया 'विकसित भारत-सशक्त भारत' का संदेश

    प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित 'सेवा के रंग-राष्ट्र के संग' विशाल रंगोली कार्यक्रम में बच्चों ने सुंदर रंगोली बनाई हैं। इनके माध्यम से बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत-सशक्त भारत का संदेश दिया है। हमारे प्रतिभाशाली युवा ही कल के भारत का नेतृत्व करेंगे। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, स्थानीय सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, राहुल कोठारी और रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं खिलाड़ी और विद्यार्थी उपस्थित थे।                                           

     

  • 140 करोड़ भारतीयों की ताकत है सामूहिक संकल्प और विश्वास, कैलाश सारंग ने दिया ‘We Will Do It’ का संदेश

    140 करोड़ भारतीयों की ताकत है सामूहिक संकल्प और विश्वास, कैलाश सारंग ने दिया ‘We Will Do It’ का संदेश

    We Will Do It- 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक संकल्प

    विश्वास कैलाश सारंग

    भोपाल

    भारत की विकास यात्रा आज उस मुकाम पर पहुंच चुकी है, जहां दुनिया भारत को केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं बल्कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमता रखने वाली एक सशक्त शक्ति के रूप में देख रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का वी विल डू इट का मंत्र देशवासियों के भीतर नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और बड़े संकल्प का संचार करता है। 7 अक्टूबर को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के सामने भविष्य के भारत की एक ऐसी तस्वीर रखी जिसमें लक्ष्य छोटे नहीं बल्कि विराट हैं। सपने सीमित नहीं बल्कि वैश्विक हैं और उन्हें पूरा करने का विश्वास 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक संकल्प में है।

    प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अब असंभव समझे जाने वाले लक्ष्यों से पीछे हटने वाला नहीं है। वी विल डू इट प्रधानमंत्री जी का यह मंत्र भारत की उस बदलती मानसिकता का प्रतीक है, जिसमें चुनौतियों को बाधा नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखने का आत्मविश्वास पैदा हुआ है। हम कर सकते हैं से आगे बढ़कर हम करके दिखाएंगे का भाव ही इस मंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। प्रधानमंत्री जी ने जिन लक्ष्यों को सामने रखा उनमें 2047 तक विकसित भारत, विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का स्थान, आत्मनिर्भर भारत, भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूना शामिल हैं। हर लक्ष्य के साथ उनका उद्घोष वी विल डू इट देश की सामूहिक संकल्प की इच्छाशक्ति को अभिव्यक्त करता है।

    2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। यह केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बल्कि वर्तमान पीढ़ी के सामने इतिहास रचने का अवसर है। आज की युवा पीढ़ी के सामने यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसा भारत बनाए जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर हो, सामाजिक रूप से सशक्त हो और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता हो।

    प्रधानमंत्री जी ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज सवाल केवल यह नहीं है कि 2047 में भारत को कहां पहुंचना है बल्कि यह है कि उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज से क्या करना है? यही विचार वी विल डू इट को भविष्य के संकल्प से वर्तमान के कर्म से जोड़ता है। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं बल्कि दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाते हुए अपनी क्षमताओं को मजबूत करना है। आज भारत मोबाइल निर्माण से लेकर रक्षा उत्पादन, डिजिटल तकनीक से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर स्टार्टअप इकोसिस्टम तक अनेक क्षेत्रों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। प्रधानमंत्री जी के वी विल डू इट का संदेश इसी आत्मविश्वास को और मजबूत करता है कि भारत केवल दूसरों से सीखने वाला देश नहीं बल्कि दुनिया को सिखाने वाला देश बने। यह आत्मविश्वास उस भारत का है जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ वैश्विक बाजार के लिए भी उत्पादन करने की क्षमता रखता है।

    भारत की विशाल युवा आबादी, प्रतिभा, तकनीकि क्षमता और बड़ा घरेलू बाजार उसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वाभाविक रूप से सक्षम बनाते हैं। मेक इन इंडिया से शुरू हुई सोच अब मेक फॉर द वर्ल्ड की दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत में निर्मित उत्पाद जब दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बनाते हैं तो यह केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं होती बल्कि भारतीय प्रतिभा और सामर्थ्य पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का प्रमाण भी होती है। प्रधानमंत्री जी ने इसी संदर्भ में बड़े लक्ष्यों की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि लक्ष्य बड़ा होगा तो प्रयास भी बड़ा होगा और परिणाम भी असाधारण प्राप्त होंगे।

    प्रधानमंत्री जी के वी विल डू इट मंत्र में भारत की खेल शक्ति के विस्तार का संकल्प भी दिखाई देता है। ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की आकांक्षा नहीं है बल्कि भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आज देश में खेल अधोसंरचना का विस्तार हो रहा है। छोटे शहरों और गांवों से प्रतिभाएं सामने आ रही हैं और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गांव से ग्लोबल तक पहुंचती भारतीय खेल प्रतिभा इस विश्वास को मजबूत करती है कि यदि अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो भारत के युवा किसी भी वैश्विक मंच पर तिरंगे की शान बढ़ा सकते हैं।

    जिस देश ने कभी अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत सीमित संसाधनों के साथ की थी, वही भारत आज चंद्रमा पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी का अंतरिक्ष में भारत की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का संकल्प यह दर्शाता है कि भारत की आकांक्षाएं अब धरती की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं।

    प्रधानमंत्री जी के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उन्होंने इन लक्ष्यों की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी है। उन्होंने देश की 140 करोड़ आबादी को भारत की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। भारत की हर समस्या के समाधान में करोड़ों भारतीयों की क्षमता जुड़ी है। किसान, युवा, महिला, वैज्ञानिक, उद्यमी, श्रमिक, खिलाड़ी, शिक्षक, स्टार्टअप संस्थापक और देश का प्रत्येक नागरिक विकसित भारत की यात्रा का भागीदार है। यही कारण है कि वी विल डू इट में वी सबसे महत्वपूर्ण शब्द है। यह मैं करूंगा का नहीं बल्कि हम करेंगे का सामूहिक मंत्र है।

    भारत के पास युवा शक्ति है, विशाल बाजार है, तकनीकी क्षमता है, लोकतांत्रिक मजबूती है और वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव है। इसलिए आज भारत के सामने छोटे सपने देखने का समय नहीं है बल्कि बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी शक्ति से जुट जाने का समय है। वी विल डू इट की वास्तविक शक्ति केवल इसे बोलने में नहीं बल्कि इसे अपने जीवन और कर्म में उतारने में है। 2047 का विकसित भारत किसी एक सरकार, एक संस्था या एक वर्ग के प्रयास से नहीं बनेगा। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता का संकल्प लेना होगा। एक विद्यार्थी बेहतर शिक्षा का संकल्प ले, युवा नवाचार का संकल्प ले, किसान आधुनिक कृषि का संकल्प ले, उद्योग आत्मनिर्भर उत्पादन का संकल्प लें, खिलाड़ी विश्वस्तरीय प्रदर्शन का संकल्प लें और प्रत्येक नागरिक राष्ट्रहित को अपने व्यक्तिगत कर्तव्य से जोड़े तो सामूहिक रूप से यही छोटे-छोटे संकल्प विकसित भारत की विराट नींव बनेंगे। प्रधानमंत्री जी का वी विल डू इट मंत्र देश की इसी सामूहिक शक्ति को जगाने का प्रयास है।

  • जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं, जनकल्याण को बनाएं अपने कार्य का उद्देश्य : मुख्यमंत्री साय

    जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं, जनकल्याण को बनाएं अपने कार्य का उद्देश्य : मुख्यमंत्री साय

    युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही होगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवाओं से मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय संवाद

    मुख्यमंत्री ने साझा किए अपने संघर्ष, जनसेवा और सार्वजनिक जीवन के अनुभव, युवाओं को दिया निष्ठा और संवेदनशीलता से कार्य करने का मंत्र

    आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण और जिलों में मैदानी अनुभव से शासन की कार्यप्रणाली समझेंगे युवा फेलो

    शिक्षा, कौशल, आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों से युवाओं को सशक्त बना रही राज्य सरकार

    निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर सृजित करना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री साय

    जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं, जनकल्याण को बनाएं अपने कार्य का उद्देश्य : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री साय ने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों से लेकर जनसेवा और सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव उनके साथ साझा किए। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे इस अवसर का उपयोग केवल शासन की कार्यप्रणाली को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और नवीन विचारों के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की शक्ति है। जब यही शक्ति जनकल्याण और समाज की बेहतरी से जुड़ती है तो बड़े परिवर्तन का आधार बनती है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर परिश्रम और प्रत्येक दायित्व का निष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सफलता के साथ आत्मसंतुष्टि भी प्रदान करता है।

    संवाद के दौरान युवा प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री साय से फेलोशिप को लेकर उनकी अपेक्षाओं, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक, प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका और उनके व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन की यात्रा से जुड़े अनेक प्रश्न किए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रश्नों का सहजता और आत्मीयता से जवाब दिया।

    विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति करते हुए विश्व में अपनी सशक्त भूमिका स्थापित कर रहा है। इस यात्रा को और गति देने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है।

    उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को निरंतर निखारें, नए विचारों के साथ आगे आएं और शासन-प्रशासन के साथ कार्य करते हुए जनहित से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए युवाओं के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप सीखने, अनुभव प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को प्रदेश के विकास में उपयोग करने का महत्वपूर्ण मंच है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिलों में कार्य के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझना सबसे महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर ऐसे सुझाव दिए जाएं, जिनसे योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    शिक्षा ने तय की लंबी यात्रा, आज प्रदेश में उपलब्ध हैं प्रतिष्ठित संस्थान

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है। युवा जहां भी अध्ययन करें, वहां से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग अपने समाज और प्रदेश की उन्नति में करें।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं बहुत सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव के विद्यालय में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और बच्चों को बैठने के लिए अपने घर से चटाई अथवा जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी राज्य सरकार सहायता उपलब्ध करा रही है।

    शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल भी जरूरी

    मुख्यमंत्री साय ने युवाओं के लिए शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल को आवश्यक बताते हुए कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। जिलों में लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उनकी क्षमता और कौशल के अनुरूप प्रदेश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध हों तथा वे रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार देने वाले उद्यमी भी बनें।

    निवेश को रोजगार में बदलना सरकार की प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में परिवर्तित करना है। निवेश समझौतों के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जा रही है। 

    अपने हाल के सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, विविध वनोपज और मजबूत औद्योगिक संभावनाएं विकास को नई गति देने में सक्षम हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे नए क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

    भविष्य की तकनीक के लिए युवाओं को तैयार करेगा एआई मिशन

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एआई मिशन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने तथा लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को इस बदलाव में केवल सहभागी ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना राज्य सरकार का प्रयास है।

    मुख्यमंत्री ने सुनाई संघर्ष की कहानी – कम उम्र में ही उठानी पड़ी परिवार की जिम्मेदारी

    युवा फेलो द्वारा जीवन की प्रेरणा के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री साय ने अपने बचपन और संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी भी उन्हें संभालनी पड़ी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के विभिन्न कार्य किए। इन परिस्थितियों ने कम उम्र में ही उन्हें परिश्रम, जिम्मेदारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करना सिखाया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि वे गांव के सरपंच बनेंगे। निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा करने का अवसर मिला। जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का उन्होंने प्रयास किया।

    मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को स्मरण करते हुए उनके धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को अपने लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव उपलब्ध रहना उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रहा है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं। अपने कार्य के केंद्र में जनकल्याण को रखें। इससे मान-सम्मान और आत्मसंतुष्टि तो मिलती ही है, साथ ही प्रदेश, देश और समाज का भी भला होता है।

    36 युवा फेलो समझेंगे शासन और योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन

    इस अवसर पर सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि द्वितीय बैच में चयनित 36 युवा इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र जैसे विविध विषयों की पृष्ठभूमि से आए हैं। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं।

    दो वर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम में कुल पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण तथा 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। प्रारंभिक तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी जिला प्रशासन के साथ जुड़कर योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझेंगे।

    राहुल भगत ने प्रतिभागियों को प्रदेश का विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ पढ़ने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर अपने विचार लिखने के लिए भी प्रेरित किया।

    युवा फेलो ने मुख्यमंत्री के सामने रखीं जिज्ञासाएं

    संवाद के दौरान युवा फेलो ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं रखीं तथा अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, अनुभव और प्रदेश के विकास में योगदान देने की आकांक्षाओं से भी उन्हें अवगत कराया।

    रायपुर की सुनीलिमा भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से फेलोशिप के प्रतिभागियों से उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछा। प्रतिभागी खुशी ने सभी फेलो की ओर से अवसर के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिलों में कार्य करने से प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। जशपुर के प्रतिभागी अंशुल ने अपनी शिक्षा और फेलोशिप से जुड़ने के उद्देश्य की जानकारी देते हुए प्रदेश से बाहर अध्ययन कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का संदेश जानना चाहा।

    मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों की बातों को आत्मीयता से सुना और उन्हें अपने ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग जनसेवा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करने के लिए प्रेरित किया।

    उल्लेखनीय है कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप संचालित की जा रही है। द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के युवा शामिल हैं।

    फेलो प्रशिक्षण और मैदानी कार्य-अनुभव के आधार पर योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण, विभागीय समन्वय तथा जनसेवाओं में सुधार के प्रयासों में सहयोग देंगे। द्वितीय बैच के तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान तथा मैदानी कार्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

    कार्यक्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन होगा आधुनिक, 18 शहरों में चलेंगी 1,725 इलेक्ट्रिक बसें

    उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन होगा आधुनिक, 18 शहरों में चलेंगी 1,725 इलेक्ट्रिक बसें

    योगी कैबिनेट का फैसला: 18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें

    जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, 12 साल की होगी अनुबंध अवधि

    12 मीटर की बस पर 40 लाख और 9 मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान

    आगरा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी समेत 18 शहरों को मिलेगा लाभ

    लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें, वाराणसी में 250 और गोरखपुर में चलेंगी 150 इलेक्ट्रिक बसें

    यूपी में निर्मित बसों की खरीद को मिलेगी वरीयता, रोजगार के नए अवसरों की खुली राह

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    योजना के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में बसें संचालित की जाएंगी। इनमें 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है।

    लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें
    नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के 18 शहरों में जल्द ही 1,725 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें आगरा में 100, मथुरा-वृंदावन में 50, अलीगढ़ में 25, फिरोजाबाद में 25, गाजियाबाद में 100, मेरठ में 100, शाहजहांपुर में 25, बरेली में 25, मुरादाबाद में 25, सहारनपुर में 25, नोएडा (जेवर सहित) में 100, वाराणसी में 250, अयोध्या में 50, लखनऊ में 300, गोरखपुर में 150, कानपुर में 300, प्रयागराज में 50 और झांसी में 25 बसें चलाई जाएंगी।

    निजी ऑपरेटर करेंगे बसों का संचालन
    जीसीसी मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए आवश्यक चार्जर की व्यवस्था, बस चालक एवं तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर ऑपरेटरों को संचालन एवं रखरखाव शुल्क (ओएंडएम फी) का भुगतान किया जाएगा। वहीं, टैरिफ/प्रयोक्ता शुल्क निर्धारण सरकार द्वारा किया जाएगा।

    बसों की खरीद पर मिलेगा अनुदान
    परियोजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस के लिए 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

    निजी निवेश से सेवाओं में सुधार की उम्मीद
    सरकार के अनुसार, निजी निवेश के माध्यम से बस संचालन में सरकारी व्यय का बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। निजी ऑपरेटर दक्षता, समयबद्धता एवं उपभोक्ता संतुष्टि पर विशेष ध्यान देंगे। निजी ऑपरेटरों को प्रतिस्पर्धा के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नवीनतम तकनीक एवं सेवा सुधार लागू होंगे। निजी ऑपरेटर निविदा प्रक्रिया से चयनित होकर अनुबंधित किए जाएंगे और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ प्राप्त होगा।

    प्रदेश में निर्मित बसों को मिलेगी वरीयता
    योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों के खरीद के संबंध में परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित नीति के क्रम में एल-1 के रेट पर उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों के क्रय को वरीयता प्रदान किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्रदेश में बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

  • छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल को मिली सराहना, नीति आयोग की DG निधि छिब्बर ने की प्रशंसा

    छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल को मिली सराहना, नीति आयोग की DG निधि छिब्बर ने की प्रशंसा

    नीति आयोग की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के कार्यों की सराहना की

    राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का सशक्त और स्थायी तंत्र विकसित करने में हरसंभव सहयोग का दिया आश्वासन

    राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, स्टेट सपोर्ट मिशन के कार्यों की हुई समीक्षा

    अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए डेटा आधारित नीति निर्माण, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामोन्मुखी योजनाओं पर विशेष जोर

    रायपुर,
    नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने राज्य में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके वास्तविक परिणामों के आकलन के लिए एक सशक्त एवं स्थायी निगरानी तथा मूल्यांकन तंत्र विकसित करने पर जोर देते हुए इस दिशा में DMEO, नीति आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

    राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ में आज स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने की। इस अवसर पर सचिव, योजना श्री भुवनेश यादव सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री गणेश शंकर मिश्रा

    बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य नीति आयोग एक परामर्शदात्री एवं ज्ञान आधारित संस्था (थिंक टैंक) के रूप में प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा देने के लिए कार्य कर रहा है। आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और विभागीय समन्वय के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं।

    श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तथा उनके प्रभाव और परिणामों का आकलन ठोस आँकड़ों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयोग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए डेटा आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित कर रहा है।

    योजनाओं के मूल्यांकन में IIM रायपुर और IIT भिलाई की विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ

    सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, श्री भुवनेश यादव ने कहा कि राज्य शासन योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दिशा में भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे योजनाओं के मूल्यांकन में आधुनिक तकनीक, शोध आधारित अध्ययन और शैक्षणिक विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन, अंजोर विजन पोर्टल पर भी कार्य जारी

    बैठक में राज्य नीति आयोग की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन इकाई तथा परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं के पायलट मूल्यांकन के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। ये अध्ययन नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा निर्धारित मूल्यांकन ढाँचे पर आधारित हैं।

    राज्य में DMEO के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) तथा डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी एवं समीक्षा के लिए अंजोर विजन पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    यूनिसेफ के सहयोग से विकसित हो रहा बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के विकास के लिए बनेगा प्रभावी आधार

    बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य नीति आयोग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित किया जा रहा है। यह देश में इस दिशा की अग्रणी पहलों में शामिल है। इस सूचकांक के माध्यम से बच्चों तक पहुँचने वाली विभिन्न सेवाओं की उपलब्धता के साथ उनके वास्तविक प्रभाव और परिणामों का भी आकलन किया जाएगा।

    इस पहल से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं समग्र कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी। साथ ही यह निर्धारित करने में भी मदद मिलेगी कि किन जिलों और क्षेत्रों में अधिक ध्यान एवं निवेश की आवश्यकता है। इससे बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकेगा।

    सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी के लिए जिला स्तरीय डैशबोर्ड, परिणाम आधारित बजट की दिशा में पहल

    बैठक में बताया गया कि राज्य नीति आयोग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्रगति का आकलन करने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय फ्रेमवर्क के आधार पर प्रतिवर्ष प्रगति प्रतिवेदन जारी किए जा रहे हैं। जिलों में सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की नियमित निगरानी के लिए विशेष डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है।

    इसके साथ ही राज्य में सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित बजट विश्लेषण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शासकीय व्यय का विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में कितना योगदान है। इसके निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में बजट निर्माण की प्रक्रिया में सतत विकास लक्ष्यों को चरणबद्ध रूप से समाहित कर परिणाम आधारित बजट व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

    छत्तीसगढ़ की पहल सराहनीय, निगरानी एवं मूल्यांकन का स्थायी तंत्र विकसित करना आवश्यक : सुश्री निधि छिब्बर

    महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने राज्य नीति आयोग द्वारा कम समय में किए गए व्यापक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने DMEO के मूल्यांकन ढाँचों को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं।

    उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल उनके क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि उनका वास्तविक लाभ लक्षित हितग्राहियों तक पहुँचे और अपेक्षित परिणाम प्राप्त हों। इसके लिए राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का एक मजबूत, संस्थागत और स्थायी तंत्र विकसित किया जाना आवश्यक है।

    सुश्री छिब्बर ने कहा कि प्रभावी मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन व्यवस्था से योजनाओं की प्रगति का सटीक आकलन करने, कमियों की समय पर पहचान करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए DMEO, नीति आयोग द्वारा हरसंभव तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाएगा।

    बैठक में संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री तीर्थराज अग्रवाल सहित राज्य नीति आयोग के अधिकारी उपस्थित थे।

  • यूपी में महिला सुरक्षा को नई मजबूती, 99 हजार से ज्यादा गांवों में पहुंची महिला बीट पुलिस

    यूपी में महिला सुरक्षा को नई मजबूती, 99 हजार से ज्यादा गांवों में पहुंची महिला बीट पुलिस

    योगी सरकार के मिशन शक्ति अभियान से महिलाएं हुईं सशक्त, 99 हजार से अधिक गांवों तक पहुंची महिला बीट पुलिस 

    – अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण में 2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच

    – 66 हजार से अधिक महिलाओं और बेटियों ने दौड़ में लिया भाग

    –  38.64 लाख से अधिक लोगों की हुई चेकिंग, 1,841 अभियोग किए गये दर्ज

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान के प्रभावी परिणाम सामने आये हैं। मिशन शक्ति अभियान ने जहां एक ओर आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाया, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उन्हे सशक्त बनाया। अभियान के फेज-5 के द्वितीय चरण 19 मार्च-26 से 17 अप्रैल तक प्रदेशभर में करीब 3 लाख स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों की जाचं की गई। इसके अलावा महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं के प्रति जागरूक करने के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया। 

    66 हजार से अधिक महिलाओं और बालिकाओं ने दौड़ में लिया भाग 
    महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की नोडल अधिकारी एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए जागरूकता, संवाद और सख्त कार्रवाई पर एक साथ जोर दे रही है। इसी क्रम में मिशन शक्ति अभियान फेज-5 का द्वितीय चरण प्रदेश भर में संचालित किया गया। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों ने समन्वित रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। अभियान में महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के तहत महिला सुरक्षा को लेकर जनपद स्तर पर 66,441 महिलाओं और बालिकाओं ने आयोजित दौड़ कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 49,437 प्रचार-प्रसार सामग्री वितरित की गई। इनमें 1,930 जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्रेरणादायी महिलाओं ने भी भाग लिया। वहीं, धार्मिक स्थलों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित महिला चौपालों के माध्यम से 15,55,219 लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन सेवाओं से संबंधित जानकारी दी गई। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और जरूरत के समय उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    99 हजार से अधिक गांवों में पहुंची महिला बीट पुलिस
    अभियान के दौरान 1,593 मिशन शक्ति केंद्रों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में 12,51,777 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान 10,05,926 सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइन से संबंधित पम्फलेट वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न ग्राम पंचायतों और वार्डों में बीट पुलिस अधिकारियों ने 45,040 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, बीसी सखी, लेखपाल, एएनएम, आशा वर्कर, ग्राम पंचायत अधिकारियों और रोजगार सेवकों सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने सहयोग किया। इन कार्यक्रमों में 72,820 लोगों सहित जनमानस को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। महिलाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए महिला बीट पुलिस अधिकारियों ने व्यापक स्तर पर भ्रमण किया। अभियान के दौरान महिला बीट अधिकारियों ने 99,377 ग्रामों और वार्डों का दौरा किया। इस दौरान घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता से जोड़ने पर जोर दिया गया। घरेलू विवाद, भरण-पोषण और अन्य समस्याओं से जुड़े मामलों में पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने की पहल की गई।

    2.90 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों की जांच
    महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की निगरानी और चेकिंग भी तेज की गई। 2,90,153 स्कूल-कॉलेजों तथा चौराहों, बाजारों, मॉल, पार्क और भीड़भाड़ वाले स्थानों की जांच की गई। इस कार्रवाई के दौरान 38,64,614 व्यक्तियों की चेकिंग की गई। वहीं 1,841 अभियोग पंजीकृत किए गए, 6276 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 16,85,263 व्यक्तियों को चेतावनी दी गई। 

    अभियान के दौरान 59,897 स्थानों पर पुलिस की गश्त और फुट पेट्रोलिंग की गई। इसके साथ ही महिला अपराधों से जुड़े संवेदनशील स्थलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 39,454 कैमरे अधिष्ठापित कराए गए। राजकीय रेलवे पुलिस ने भी मिशन शक्ति अभियान से संबंधित 4,893 रेलवे स्टेशनों पर 11,226 ट्रेनों में 1,69,201 प्रचार सामग्री वितरित की।

  • MP के पीएम मित्र पार्क में आएगा बड़ा निवेश, टेक्सटाइल इकाई से 3,750 से ज्यादा युवाओं को मिलेगा काम

    MP के पीएम मित्र पार्क में आएगा बड़ा निवेश, टेक्सटाइल इकाई से 3,750 से ज्यादा युवाओं को मिलेगा काम

    भोपाल /मुंबई
     मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुंबई स्थित होटल 'द सेंट रेजिस' में आयोजित 'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से देश की अग्रणी टेक्सटाइल कंपनी 'भिलोसा इंडस्ट्रीज' के प्रबंध निदेशक श्री संदीप जैन ने उच्चस्तरीय बैठक की।

    बैठक के दौरान भिलोसा इंडस्ट्रीज ने पीएम मित्र पार्क (धार) को केंद्र में रखते हुए राज्य में चरणबद्ध रूप से कुल ₹7,500 करोड़ के बड़े निवेश और करीब 3,750 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    पीएम मित्र पार्क, धार में स्थापित होगी अत्याधुनिक इकाई
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ चर्चा में श्री संदीप जैन ने बताया कि कंपनी पीएम मित्र पार्क, धार में टेक्सटाइल निर्माण के लिए 200 एकड़ और सहायक इकाइयों के लिए अतिरिक्त 100 एकड़ (कुल 300 एकड़) भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया में है, जिसका चयन अंतिम चरण में है। कंपनी प्रारंभिक रूप से ₹2,500 करोड़ के पूंजीगत निवेश के साथ कार्य प्रारंभ कर समग्र रूप से ₹7,500 करोड़ का निवेश करेगी। इस परियोजना के तहत वर्ष 2028 से उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

    धार-इंदौर बेल्ट में बनेगा संपूर्ण पॉलिएस्टर इकोसिस्टम
    इस परियोजना के माध्यम से धार-इंदौर क्षेत्र में पॉलिएस्टर यार्न, फाइबर, निटेड फैब्रिक तथा मैन-मेड फाइबर आधारित नॉन-गारमेंट फैब्रिक का एक एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा। इसके अंतर्गत पॉलिएस्टर आधारित मुख्य उद्योगों के साथ-साथ कई सूक्ष्म एवं लघु सहायक इकाइयों को भी गति मिलेगी।

    वैश्विक स्तर पर स्थापित है भिलोसा इंडस्ट्रीज की साख
    उल्लेखनीय है कि भिलोसा इंडस्ट्रीज 13,232 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर के साथ भारतीय पॉलिएस्टर बाजार में लगभग 25% हिस्सेदारी रखने वाली शीर्ष निर्माता कंपनी है। कंपनी के उत्पाद घरेलू बाजार के साथ-साथ दक्षिण अमेरिका, तुर्की, नेपाल सहित कई वैश्विक बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। मध्यप्रदेश में इस संयंत्र की स्थापना से राज्य के निर्यात राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    उद्योगों को हर संभव प्रोत्साहन देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार स्थित 'पीएम मित्र पार्क' विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से परिपूर्ण है, जो टेक्सटाइल उद्योग के लिए देश के सबसे मुफीद केंद्रों में से एक बनकर उभर रहा है। उन्होंने उद्योग समूह को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पॉलिएस्टर आधारित उद्योगों और उनके सहयोगी उपक्रमों के लिए अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं और केंद्रित प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।