Author: NewseDay

  • दिल्ली में बेटियों के लिए नई योजना, रेखा गुप्ता सरकार देगी आर्थिक मजबूती

    दिल्ली में बेटियों के लिए नई योजना, रेखा गुप्ता सरकार देगी आर्थिक मजबूती

    दिल्ली

    दिल्ली की भाजपा सरकार ने लखपति बिटिया योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुआई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही 2008 में लॉन्च की गई लाडली योजना को बंद कर दिया गया है। लखपति बिटिया योजना के तहत ग्रेजुएशन करने के बाद बेटियों को एक लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी महिला केंद्रित योजनाएं चलाई जा चुकी हैं जिनमें प्रतिमाह अथवा सालाना आर्थिक सहायता महिलाओं को दी जाती है। अब दिल्ली में भाजपा सरकार ने बेटियों को एकमुश्त रकम देकर लखपति बनाने की पहल की है।

    कैबिनेट में मुहर के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च तक लाडली योजना बंद कर दी जाएगी और इसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा हर परिवार से दो बिटिया को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। दिल्ली में जन्मी हर बच्ची को इस योजना से जोड़ा जाएगा और ग्रेजुएशन पूरा होने पर मिनिमम एक लाख रुपये दिए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा, 'दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत हर बच्ची को, जो दिल्ली की निवासी है, जिसका परिवार दिल्ली में रहता होगा, घर में दो बच्चियों को इसका लाभ दिया जाएगा। हर बच्ची पर 20-20 हजार रुपये बढ़ाया जाएगा। पहले 36 हजार था, उसे हमने 56 हजार किया है। 12वीं में जाने पर नहीं, हमने मोटिवेट किया है कि ग्रेजुएशन करने पर मैच्योरिटी मिलती है। मेच्योरिटी पर मिनिमम एक लाख रुपये मिलेंगे।'

    दिल्ली लखपति बिटिया योजना की क्या-क्या शर्तें

    मुख्यमंत्री ने योजना की कुछ शर्तों की जानकारी देते हुए बताया कि योजना की लाभार्थी बच्चियों का वैक्सीनेशन होना जरूरी है। मान्यताप्राप्त स्कूल से पढ़ना जरूरी है और यदि 18 साल के उम्र से पहले शादी की जाती है तो लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसकी अनुमानित लागत 160 करोड़ रुपये आएगी, लेकिन यदि इससे अधिक भी लगे तो सरकार फंड को बढ़ाएगी।
    लाडली योजना क्यों बंद

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बेटियों से जुड़ी लाडली योजना 2008 में शुरू हुई थी। बच्ची को अलग-अलग फेज में पैसे दिए जाते थे। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार ने जब पता किया तो सामने आया कि करोड़ों रुपये बैंक के पास अनक्लेम्ड हैं। लाभार्थी को मिले ही नहीं। 1.86 लाख बेटियों को यह पैसा नहीं मिला। सरकार ने उन्हें खोजा। एक साल में ऐसी तीस हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ राशि दी है। अब 41 हजार बच्चियां और मिली हैं जिन्हें लगभग 100 करोड़ का फंड दिया जाएगा।

     

  • संजय मिश्रा ने बाबिल खान की जमकर तारीफ की

    संजय मिश्रा ने बाबिल खान की जमकर तारीफ की

    मुंबई,

     बॉलीवुड के जानेमाने चरित्र अभिनेता संजय मिश्रा ने हाल ही में चैट शो के दौरान अभिनेता बाबिल खान की तारीफ की है। संजय मिश्रा अपनी हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म वध 2 के प्रमोशन के सिलसिले में शो पर मौजूद थे। बातचीत के दौरान जब बाबिल का ज़िक्र आया, तो संजय मिश्रा ने उनकी तुलना उनके दिवंगत पिता और दिग्गज अभिनेता इरफान खान से की, जो अपने आप में बड़ी तारीफ मानी जा रही है।
    संजय मिश्रा ने कहा, “ बबिल बड़ा क्यूट लगता है यार। कभी-कभी वह यंग इरफान भाई, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) वाले लगते हैं।”

    संजय मिश्रा जैसे अनुभवी अभिनेता की यह बात खास मायने रखती है। इरफान खान को भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिना जाता है। ऐसे में बाबिल की तुलना इरफान खान से होना उनके लिए एक बड़ी सराहना है।

     

  • फाजिल्का का अमृतपाल गलती से सीमा पार, पिता बोले- पाकिस्तान में 20 मिनट बाद लौटेगा भारत

    फाजिल्का का अमृतपाल गलती से सीमा पार, पिता बोले- पाकिस्तान में 20 मिनट बाद लौटेगा भारत

    फाजिल्का

    फाजिल्का जिले के जलालाबाद के साथ लगते गांव खैरे की उताड़ का रहने वाला अमृतपाल अब भारत वापिस लौट रहा है। इस बात की पुष्टि उसके पिता जगराज सिंह ने की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान जेल में बंद उसके बेटे से उनकी 20 मिनट बात हुई है।
    फाजिल्का सेक्टर के किसान अमृतपाल की जल्द रिहाई की खबर सामने आ रही है। सरहदी गांव खैरेके उताड़ का किसान अमृतपाल 21 जून, 2025 को अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया था।

    किसान के पिता जगराज सिंह के अनुसार, अमृतपाल खेत में चूहों को बेहोश करने वाली दवा का छिड़काव कर रहा था। दवा के असर और उसके बाद चाय पीने की वजह से उसे चक्कर आने लगे और बेहोशी की हालत में वह गलती से पाक सीमा में दाखिल हो गया। वहां उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में लेकर कंगनपुर के अस्पताल में दाखिल कराया था।
    बीते दिन पाकिस्तान की जेल में बंद पंजाब के 7 लोगों की सजा पूरी होने के बाद रिहाई की गई है, जिनकी अंबेसी बुधवार को क्लीयर हो गई थी। जगराज सिंह के अनुसार अमृतपाल के केस की अंबेसी शुक्रवार को क्लीयर हो चुकी है और किसी भी समय अमृतपाल की रिहाई हो सकती है।

    पंजाब के 7 लोगों की सजा पूरी

    जगराज सिंह के अनुसार अमृतपाल खेत में चूहों को बेहोश करने वाली दवा का छिड़काव कर रहा था। दवा के असर और उसके बाद चाय पीने की वजह से उसे चक्कर आने लगे और बेहोशी की हालत में वह गलती से पाक सीमा में दाखिल हो गया। उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया था। गत दिन पाकिस्तान की जेल में बंद पंजाब के 7 लोगों की सजा पूरी होने के बाद रिहाई की गई है, जिनकी एंबेसी बुधवार को क्लियर हो गई थी।

    जगराज सिंह के अनुसार अमृतपाल के की एंबेसी शुक्रवार को क्लियर हो चुकी है और किसी भी समय अमृतपाल की रिहाई हो सकती है।

    पाक की कोर्ट ने लगाया 50 हजार जुर्माना

    पाकिस्तानी पुलिस ने बॉर्डर क्रॉसिंग का केस दर्ज कर अमृतपाल को कोर्ट में पेश किया था। पाक की कोर्ट ने अमृतपाल को एक महीने के कारावास और 50 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई थी, जो पूरी हो चुकी है। रिहाई की खबर मिलते ही अमृतपाल के परिवार ने इस खबर पर राहत की सांस ली।

    जेल अफसरों की निगरानी में हुई बात

    अमृतपाल के पिता जगराज सिंह के अनुसार 4 फरवरी को अमृतपाल ने पाक जेल से फोन पर जानकारी दी है कि उसकी एंबेसी क्लियर हो चुकी और शीघ्र ही रिहाई की संभावना है। उन्होंने बताया कि पाक जेल में बंद भारतीय कैदियों को जेल अफसरों की निगरानी में परिवार के साथ हर बुधवार को 20 मिनट तक बात करने की इजाजत होती है, इसी के तहत अमृतपाल से उनकी बात हुई है।

    एक महीने की जेल, 50 हजार जुर्माने की सजा
    पाकिस्तानी पुलिस ने बॉर्डर क्रॉसिंग का केस दर्ज कर अमृतपाल को अदालत में पेश किया था। पाक की अदालत ने अमृतपाल को एक महीने के कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी, जो अब पूरी हो चुकी है। पाकिस्तानी वकील सुहैल अंसारी अमृतपाल का केस नि:शुल्क लड़ रहे हैं। उन्होंने हाल ही में किसान से जेल में मुलाकात कर उनका एक 15 सेकेंड का वीडियो परिवार को भेजा था, जिसमें अमृतपाल ने खुद के बिल्कुल ठीक होने की बात कही थी। अमृतपाल की सजा की अवधि और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अब उसकी रिहाई और वतन वापसी का रास्ता साफ होता दिख रहा है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद किसी भी समय उसे बीएसएफ के हवाले किया जा सकता है, जिससे उसके परिवार का लंबा इंतजार खत्म होगा।

    कोट लखपत जेल में बंद है
    अमृतपाल पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद है। उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही भारतीय सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन निरंतर पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में थे। फ्लैग मीटिंग और कूटनीतिक बातचीत के जरिए उसकी रिहाई के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। रिहाई की खबर मिलते ही फाजिल्का सेक्टर में सुरक्षा और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

    परिजनों में खुशी की लहर
    अमृतपाल के परिवार ने इस खबर पर राहत की सांस ली है और उनके स्वागत की भव्य तैयारी शुरू कर दी है। जगराज सिंह के अनुसार 4 फरवरी को अमृतपाल ने पाक जेल से फोन पर जानकारी दी है कि उसकी अंबेसी क्लीयर हो चुकी है और शीघ्र ही रिहाई की संभावना है। उन्होंने बताया कि पाक जेल में बंद भारतीय कैदियों को जेल अफसरों की निगरानी में परिवार के साथ हर बुधवार 20 मिनट बात करने की इजाजत होती है।

  • शर्लिन चोपड़ा का जन्मदिन: मिस आंध्र से ‘प्लेबॉय’ तक, ऐसा रहा उनका सफर

    शर्लिन चोपड़ा का जन्मदिन: मिस आंध्र से ‘प्लेबॉय’ तक, ऐसा रहा उनका सफर

    मुंबई 
     हिंदी सिनेमा में जहां सशक्त मुख्य भूमिकाओं के लिए अभिनेत्रियों की अहमियत बनी रही है, वहीं कुछ बोल्ड अभिनेत्रियों और मॉडलों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। इन कलाकारों ने पारंपरिक अभिनय से इतर अपनी बेबाक छवि और बोल्ड प्रजेंटेशन के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसी कड़ी में नाम आता है शर्लिन चोपड़ा का, जो 11 फरवरी को अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। आज भी वह ओटीटी मंचों पर सक्रिय हैं और अपने बोल्ड दृश्यों के कारण चर्चा में रहती हैं।

     मीडिया में भी उनकी मौजूदगी लगातार बनी रहती है, जिससे वह सुर्खियों में रहती हैं। कम ही लोग जानते हैं कि शर्लिन चोपड़ा को असली पहचान फिल्मों के जरिए नहीं, बल्कि मैग्जीन जगत से मिली। एक प्रतिष्ठित मैग्जीन में उनकी बोल्ड फोटोज ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, जिसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बनीं। यही पहचान आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय करने में भी अहम साबित हुई।

    हैदराबाद में जन्मी शर्लिन को मॉडल बनने का शौक बचपन से था और यही वजह रही कि मात्र 15 साल की उम्र में अभिनेत्री ने मिस आंध्र का खिताब जीता था। मॉडलिंग के बाद अभिनेत्री फिल्मों में काम करने के लिए कई ऑडिशन दिए और साल 2002 में उन्हें तमिल फिल्म वेंडी मब्बू' में काम किया था, जो एरोटिक फिल्म थी। उसी साल, उन्होंने एक तमिल फिल्म 'यूनिवर्सिटी' और एक अंग्रेजी फिल्म 'बीपर' में भी अभिनय किया। तीनों फिल्में पर्दे पर रिलीज हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में अपना बजट भी नहीं निकाल पाई।

    बॉलीवुड में शर्लिन ने एंट्री 2005 में आई फिल्म 'टाइम पास' से की थी। जिसके बाद 'दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर', जवानी दीवानी: ए यूथफुल जॉयराइड', 'नॉटी बॉय','गेम','रकीब', 'रेड स्वस्तिक',और 'दिल बोले हड़िप्पा! जैसी फिल्मों में काम किया। शर्लिन की फिल्में कब आईं और कब चली गईं, किसी को पता नहीं चला, लेकिन साल 2012 में ग्लोबल लेवल पर शर्लिन के नाम की सुनामी आ गई।

    अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा उस समय सुर्खियों में आईं, जब वह प्लेबॉय मैग्जीन के लिए बिना कपड़ों के फोटो शूट कराने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। हालांकि, इस मामले में विवाद तब खड़ा हुआ, जब प्लेबॉय मैग्जीन ने यह कहकर इनकार किया कि उनकी शर्लिन के साथ किसी तरह की प्रत्यक्ष मुलाकात हुई थी। इसके बावजूद बाद में अभिनेत्री का डिजिटल फोटो शूट जारी किया गया।

    डिजिटल फोटो शूट के सामने आते ही व्यापक चर्चा शुरू हो गई और रातो-रात शर्लिन देशभर के अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियां बन गईं। इस घटनाक्रम ने मनोरंजन जगत में खासा हलचल पैदा की।
    मैग्जीन के अलावा शर्लिन चोपड़ा ने रियलिटी शो बिग बॉस-3 में भी हिस्सा लिया था। शो के दौरान उनके पहनावे और बयानों को लेकर भी खूब चर्चा हुई। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि वह अभिनेता अमिताभ बच्चन की बड़ी प्रशंसक हैं और भविष्य में ऐसे ही लंबे कद और मजबूत कद-काठी वाले जीवनसाथी से विवाह करना चाहेंगी।
    शर्लिन चोपड़ा अपने बेबाक बयानों और बोल्ड अंदाज के कारण आज भी अक्सर खबरों में बनी रहती हैं और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय रहती हैं।

  • निकाय विभाग की लापरवाही: स्वच्छ भारत के बजट का उपयोग नहीं, 20 अफसरों पर होगी कार्रवाई

    निकाय विभाग की लापरवाही: स्वच्छ भारत के बजट का उपयोग नहीं, 20 अफसरों पर होगी कार्रवाई

    चंडीगढ़
    हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष बजट को खर्च नहीं कर पाए। अब बजट खर्च न करने में लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारी पर कार्रवाई होगी। हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विभागों की समीक्षा बैठक की थी। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान करीब 100 करोड रुपए स्वच्छ भारत मिशन के तहत खर्च न होने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई थी। 

    अब 20 लापरवाह अधिकारियों पर कभी भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। हरियाणा शहरी निकाय विभाग में स्वच्छ भारत के तहत स्वच्छता की कार्यों से लेकर जागरूकता अभियान प्रचार प्रसार आदि कार्यों पर 100 करोड रुपए खर्च होने थे लेकिन फरवरी आने के बावजूद भी बजट खर्च नहीं हो सका। ऐसे में विभागीय अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री विपुल गोयल ने ऐसे 20 अधिकारियों पर कार्यवाही का ब्योरा बनाने को कहा है जिससे 20 अधिकारियों को चार्जशीट  करके कार्यवाही हो सके। कार्रवाई से बचने के लिए अबाधिकारी भी योजनाएं बनाने में जुट गए हैं।

    राज्य के स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर भी नहीं हो सका काम
    हरियाणा सरकार ने इस बार केंद्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण की तर्ज पर राज्य में स्वच्छ सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया था, लेकिन यह कार्य भी शुरू नहीं हो सका। बीते साल 2 अक्टूबर को इसकी शुरुआत होनी थी। बाद में तय किया गया कि इस कार्य को निकाय और दूसरे विभागों के अधिकारियों के बजाय निकाय थर्ड पार्टी के माध्यम से कराएंगे। लंबे समय से टेंडर की प्रक्रिया अटकी हुई है, इस कारण राज्य का स्वच्छ सर्वेक्षण भी शुरू नहीं हो सका।

  • हादसे ने छीना घर का सहारा: वार्ड पार्षद की मौत से इलाके में मातम, तीन बच्चे हुए अनाथ

    हादसे ने छीना घर का सहारा: वार्ड पार्षद की मौत से इलाके में मातम, तीन बच्चे हुए अनाथ

    सोनपुर

    बिहार के सोनपुर में एक सड़क हादसे में वार्ड सदस्य की मौत हो गई, जिसके बाद भारी हंगामा हुआ। दरअसल, दुधैला बाइपास के पास सीएनजी टेंपो की टक्कर से घायल शाहपुरा दियारा पंचायत के वार्ड सदस्य प्रेम कुमार (32 वर्ष) की पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने एनएच-19 को घंटों जाम रखा, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।

    बाजार से लौटते वक्त हुआ हादसा
    जानकारी के अनुसार, शाहपुरा दियारा पंचायत के वार्ड संख्या-11 के सदस्य प्रेम कुमार पिता जयगोपाल राय शनिवार शाम गौला बाजार से घरेलू सामान खरीदकर बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान दुधैला बाइपास के समीप नयागांव की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित सीएनजी टेंपो ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि उनकी बाइक पास के गड्ढे में जा गिरी। दुर्घटना के बाद चालक टेंपो छोड़कर मौके से फरार हो गया।

    इलाज के दौरान पटना में तोड़ा दम
    परिजनों ने आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल प्रेम कुमार को पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव वापस सोनपुर लाया गया, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। लोगों ने शव के साथ दुधैला बाइपास पर टायर जलाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    अंडरपास और मुआवजे की मांग
    विरोध प्रदर्शन के कारण एनएच-19 पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि दुर्घटना संभावित इस स्थल पर तत्काल अंडरपास का निर्माण कराया जाए। मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता दी जाए।

    पुलिस की कार्रवाई और स्थिति
    हंगामे की सूचना मिलते ही सोनपुर थानाध्यक्ष राजनंदन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम हटवाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश जारी है।

    परिवार में कोहराम
    मृतक प्रेम कुमार पटना में एक चिकित्सक के यहां भी कार्य करते थे और अपने परिवार के मुख्य आधार थे। उनके पीछे दो छोटे पुत्र और एक पुत्री है। इस असमय मौत से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • आचार संहिता लागू, फिर भी सरकार पर नियम तोड़ने का आरोप

    आचार संहिता लागू, फिर भी सरकार पर नियम तोड़ने का आरोप

    रांची

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर नगर निकाय चुनाव को लेकर बड़ा निशाना साधा है। मरांडी ने आज अपने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले छह वर्षों में हेमंत सरकार ने झारखंड के शहरी क्षेत्रों की स्थिति को बदतर बना दिया है।      

    "यह सरकार की नीयत और नाकामी दोनों को उजागर करता है"
    राज्य के 15 नगर निकायों का कार्यकाल 2020 में और शेष नगर निकायों का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया, लेकिन समय पर चुनाव कराने के बजाय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रशासकों के माध्यम से शहरी निकायों को चलाया। इस दौरान भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का एक पूरा तंत्र खड़ा किया गया। साफ-सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसे कार्यों के ठेके झामुमो से जुड़े लोगों को देकर शहरी विकास के नाम पर जमकर लूट की गई और शहरी जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा गया। अदालत की बार-बार की फटकार के बाद सरकार दबाव में आकर चुनाव कराने को मजबूर हुई है। यह सरकार की नीयत और नाकामी दोनों को उजागर करता है।

    "हेमंत सोरेन सरकार को न सिर्फ भ्रष्टाचार का हिसाब देना होगा, बल्कि…"
    मरांडी ने कहा कि हर चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करना और चुनाव खत्म होते ही उन्हें ठंडे बस्ते में डाल देना हेमंत सरकार की पहचान बन चुकी है। शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार नियमों की अनदेखी कर रही है। शहरी जनता सब कुछ देख और समझ रही है। हेमंत सोरेन सरकार को न सिर्फ भ्रष्टाचार का हिसाब देना होगा, बल्कि शहरी नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या का जवाब भी देना पड़ेगा।

     

  • हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला ट्रांसफर, महिला कोच से की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

    हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला ट्रांसफर, महिला कोच से की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

    सोनीपत 

    हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री और हॉकी प्लेयर रह चुके संदीप सिंह से जुड़े छेड़छाड़ और रेप के प्रयास करने के मामले में बड़ा अपडेट आया है। पीड़ित जूनियर महिला कोच की याचिका पर चंडीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल ने इस मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को ट्रांसफर करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया।

    पीड़िता ने आरोप लगाया था कि न्यायाधीश उसके प्रति पक्षपाती थे। अपनी याचिका में पीड़िता ने कहा था कि जज ने उसे केस की फाइल देखने नहीं दी। उसे CRPC की धारा 164 के तहत दिए गए अपने बयान की कॉपी या जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा जज खुद इस केस की सुनवाई कर रहे थे, जबकि वे खुद एक गवाह की सूची में शामिल थे। ऐसे में मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है।

    बता दें कि 26 दिसंबर 2022 को जूनियर महिला कोच ने संदीप सिंह के खिलाफ यौन-उत्पीड़न सहित अन्य आरोप के तहत चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दी थी। जांच के बाद 31 दिसंबर की रात 11 बजे सेक्टर-26 थाने में संदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 354ए, 354बी, 506 के तहत पुलिस ने केस दर्ज किया था।

    इसमें छेड़छाड़, गलत तरीके से कैद करने, आपराधिक धमकी देने और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, हावभाव या कृत्य का इस्तेमाल करने के आरोप थे। पीड़िता की ओर से दी गई शिकायत में बताया था कि मंत्री ने उसे कहा था कि तुम मुझे खुश रखों, मैं तुम्हे खुख रखूंगा। बात न मानने पर ट्रांसफर करा दिया था। हालांकि, संदीप सिंह ने इस आरोपों को पूरी तरह नकार दिया था।

     

  • गोपाल भार्गव का बड़ा खुलासा: दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में शामिल होने का दिया था ऑफर, मैंने कहा- मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं

    गोपाल भार्गव का बड़ा खुलासा: दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में शामिल होने का दिया था ऑफर, मैंने कहा- मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं

    भोपाल/सागर
     मध्य प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक सम्मान को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इसकी वजह बने हैं भाजपा के कद्दावर नेता और रहली विधायक गोपाल भार्गव, जिनका सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान सियासी हलकों में दूर तक गूंज रहा है. सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गोपाल भार्गव ने न सिर्फ अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी नेता को भीतर से तोड़ सकती है. उनके शब्दों में दर्द भी था और अनुभव की गंभीरता भी. जिस तरह उन्होंने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक समय को पार्टी और संगठन को समर्पित करने की बात कही, उसने यह संकेत दिया कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत असंतोष का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल है.

    गोपाल भार्गव बोले-मैं टिकाऊं, बिकाऊं नहीं 

    गोपाल भार्गव ने कहा 'राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है, कई बार सरकार में बात नहीं सुनी जाती तो भी मन टूट जाता है. उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने तो 20 साल संघर्ष किया है, अपनी मांगे रखता रहा, जूझता रहा. लेकिन जब सरकार नहीं मानती तो मन टूट जाता है. मैंने 20 साल मन को बांधे रखा, उस दौरान कई मंत्री यहां तक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहते थे कि गोपालजी बीजेपी में क्या रखा है, कुछ नहीं है, आप तो हमारे पास आ जाओ, मैं आपको किसी अच्छे विभाग का मंत्री बना दूंगा, लेकिन तब मैंने भी कहा दिया था कि  राजा साहब एक बात कहता हूं, ये माल टिकाऊ है बिकाऊ नहीं है. मैं 20 साल विपक्ष में रहा, लेकिन यहां तो लोग 20 महीने में पलटी मार जाते हैं. 

    9 बार के अपराजेय विधायक गोपाल भार्गव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मोहन यादव सरकार की कैबिनेट को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं. वरिष्ठ होने के बावजूद मंत्री पद न मिलना और संगठनात्मक फैसलों में कथित अनदेखी, इन सभी बातों ने उनके शब्दों को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया है. जब उन्होंने कहा कि उन्होंने 20 साल तक कठिन परिस्थितियों में खुद को टिकाए रखा, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते, तो यह सिर्फ आत्मकथा नहीं थी, बल्कि वर्तमान राजनीतिक संस्कृति पर सीधा कटाक्ष था. यही वजह है कि उनका “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” वाला बयान अब सिर्फ एक संवाद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में वैचारिक निष्ठा बनाम अवसरवाद की बहस का प्रतीक बन गया है.

    राजनीति में उपेक्षा का दर्द, अनुभव और योगदान की अनदेखी से गहरी हुई पीड़ा 

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने साफ शब्दों में कहा कि जब किसी जनप्रतिनिधि की बात सरकार या संगठन नहीं सुनता, तो उसका मनोबल टूटता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपेक्षा किसी को भी भीतर से कमजोर कर सकती है. यह बयान उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है, जिससे अक्सर लंबे समय तक सेवा देने वाले वरिष्ठ नेता गुजरते हैं. राजनीति में पद और प्रभाव भले बदलते रहते हों, लेकिन अनुभव और योगदान की अनदेखी गहरी पीड़ा पैदा करती है. भार्गव के शब्दों में यही पीड़ा झलकती है.

    “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” का सियासी संदेश
    गोपाल भार्गव के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया, जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव का जिक्र किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि वे बिकाऊ नहीं हैं. यह टिप्पणी सिर्फ एक घटना का जिक्र नहीं थी, बल्कि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी का सार्वजनिक ऐलान भी थी. भाजपा के भीतर इसे निष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे संगठन के अंदर असंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहा है.

    पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया, अपेक्षित सम्मान नहीं 
    गोपाल भार्गव ने यह भी कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है. उन्होंने कई बार चुनाव जीते, संगठन को मजबूत किया और सरकार में रहते हुए अहम विभागों की जिम्मेदारी निभाई. इसके बावजूद जब अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता, तो पीड़ा स्वाभाविक है. उनका यह बयान भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं की आवाज बनता दिख रहा है, जो खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं.

    भाजपा में वरिष्ठता और अनुभव का सवाल
    गोपाल भार्गव का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वे रहली विधानसभा से लगातार विधायक चुने गए हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं. संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें भाजपा के मजबूत स्तंभों में शामिल करता है.

    जनता ने मेरा साथ दिया 

    गोपाल भार्गव ने कहा 'हमने उस दौरान बहुत कोशिश की है, जब हमारी सरकार आएंगी तो हमने अपने क्षेत्र का विकास करवाएंगे, इस दौरान जनता ने भी मेरा पूरा साथ दिया है, आज जनता के साथ होने से ही क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं.' गोपाल भार्गव का यह बयान अहम माना जा रहा है, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक तरह से उन्होंने न केवल अपनी पीड़ा जाहिर की है, साथ ही यह भी बताया है कि वह पार्टी के प्रति हमेशा वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी से काम करते रहे हैं. 

    गोपाल भार्गव रिकॉर्ड 9वीं बार विधायक 

    गोपाल भार्गव वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा में सबसे सीनियर विधायक हैं, वह सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से लगातार 9वीं बार 2023 में विधायक चुने गए थे. वह 2003 से 2013 तक लगातार अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे, जबकि 15 महीने की कमलनाथ सरकार के दौरान वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं, इसके अलावा 2023 तक वह फिर से मंत्री रहे हैं, लेकिन नई सरकार में उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिली है. बीजेपी में गोपाल भार्गव के प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को अहम माना जाता है. ऐसे में उनका यह बयान फिलहाल चर्चा में बना हुआ है.  

    मोहन कैबिनेट से बाहर रहने की पीड़ा
    मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं मिला. इसके बाद से ही उनके बयानों में नाराजगी के संकेत लगातार दिखाई दे रहे हैं. इससे पहले उनके ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान ने भी राजनीतिक हलचल मचा दी थी. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह असंतोष सिर्फ एक नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर वरिष्ठ और अनुभवी चेहरों की भूमिका को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति को उजागर करता है.

    सियासी हलचल और आगे के संकेत
    गोपाल भार्गव के बयान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है. भाजपा के लिए यह संकेत है कि संगठनात्मक संतुलन और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर दोबारा विचार करने की जरूरत है. वहीं विपक्ष इसे भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष के प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस संदेश को कैसे लेती है.

     

  • कंगना रनोट की बठिंडा कोर्ट पेशी आज, महेंद्र कौर मानहानि केस में सुनवाई और पासपोर्ट पर विचार

    कंगना रनोट की बठिंडा कोर्ट पेशी आज, महेंद्र कौर मानहानि केस में सुनवाई और पासपोर्ट पर विचार

    बठिंडा

    बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट आज बठिंडा जिला कोर्ट में पेश होंगी। यह पेशी माता महेंद्र कौर द्वारा दायर मानहानि मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। आज की सुनवाई में कंगना रनौत के पासपोर्ट जमा करवाने पर विचार किया जा सकता है। 

    यह मामला दिल्ली में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। उस समय कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट डाली थी।

    इस पोस्ट में उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि धरने पर महिलाएं 100-100 रुपये लेकर आती हैं। बठिंडा के गांव बहादुरगढ़ जंडिया निवासी बेबे महिंदर कौर ने इस टिप्पणी को लेकर कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

    कंगना रनौत ने कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को खत्म करने की अपील की थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया।