Author: NewseDay

  • इमरान खान के लिए राहत: अस्पताल में इलाज, परिवार से मिलने की अनुमति भी मिलेगी

    इमरान खान के लिए राहत: अस्पताल में इलाज, परिवार से मिलने की अनुमति भी मिलेगी

    लाहौर 

    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द अस्पताल शिफ्ट किए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक उनकी आंख के इलाज के लिए 21 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आइलिया इंजेक्शन की एक और डोज दी जानी है. उन्हें आंखों के इलाज के लिए रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक इस बार उन्हें रावलपिंडी के अल शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है.

    अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह अस्पताल में कितने दिन रहेंगे. अंतिम फैसला डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इलाज के दौरान या उसके बाद इमरान खान को अपने कुछ करीबी सहयोगियों और जेल में बंद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की अनुमति मिल सकती है. सरकार व्यापक मेडिकल जांच कराने की भी योजना बना रही है. इनमें एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, हृदय संबंधी जांच और पूरे शरीर के ब्लड टेस्ट जैसे प्रमुख परीक्षण शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी टेस्ट के जरिए उनकी सेहत की विस्तृत और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी.
    दुनियाभर में हो रही है इमरान के इलाज की मांग

    इमरान खान को सरकार ने अकेले ही एक कोठरी में बंद कर रखा है, जहां न तो उनसे किसी को मिलने की इजाजत है और न ही वे वहां से निकल सकते हैं. उनसे मिलकर आए उनके वकील ने बताया था कि उनकी आंखों की रोशनी 85 फीसदी तक जा चुकी है और उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं. इसके अलावा उन्हें फ्रिज और टीवी जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं दी गईं जबकि मच्छरों की वजह से वहां सोना तक मुश्किल हो रहा है. वकील ने मांग की थी कि उन्हें टीवी नहीं तो कम से कम किताबें ही दी जाएं, ताकि वे अपना समय बिता सकें. इमरान खान की ये हालत सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उनके समर्थन में रैलियां हुईं और ये अपील की गई कि उनका इलाज हो. दुनिया में क्रिकेट जगत के 12 पूर्व कप्तानों ने मिलकर पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भी लिखी कि इमरान खान को उचित इलाज दिया जाए.
    खराब सेहत को बता रहे सियासी ड्रामा

    वहीं पाकिस्तान के पंजाब की सूचना मंत्री अज्मा बुखारी ने इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सेहत और आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक है. उन्होंने बताया कि खान साहब को जेल में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौष्टिक भोजन और टहलने के लिए अलग स्थान भी शामिल है. अजमा बुखारी ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. उनके मुताबिक इमरान खान एक आंख से घड़ी की सुइयां तक साफ देख सकते हैं. उन्होंने इमरान खान पर निशाना साधते हुए इसे उनका राजनीतिक ड्रामा करार दिया.

  • पंजाबी शादी में 8 करोड़ कैश उड़ाने का दावा, वायरल वीडियो की असली कहानी सामने

    पंजाबी शादी में 8 करोड़ कैश उड़ाने का दावा, वायरल वीडियो की असली कहानी सामने

    चंडीगढ़ 
    शादियों में पैसा उड़ाना बेहद आम बात है. लेकिन आप सोचिए अगर किसी ने अपनी शादी में 8 करोड़ रुपये से कैश उड़ा दिया हो तो… जी हां, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों पंजाबी शादी का एक वीडियो आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें कपल के ऊपर नोटों की बारिश की जा रही है. इसमें दावा किया जा रहा है कि दुल्हे ने दुल्हन पर करीब 8 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश उड़ा दिए हैं. लेकिन इसके पीछे की सच्चाई क्या है आइए जानते हैं…

    हकीकत है कुछ और…

    इसी बीच कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जिससे यह आयोजन कई लोगों के अनुसार कैश पार्टी में बदल गया. हालांकि, दूल्हे के भाई सिकंदर सिंह ने साफ किया है कि शादी के दौरान पैसों की बारिश तो हुई, लेकिन ऑनलाइन हो रहे दावों का आसपास नहीं. उन्होंने बताया कि मेरा भाई ऑस्ट्रेलिया में ट्रक का कारोबार करता है. शादी 14 फरवरी को हुई थी. हमने जमकर पैसे लुटाए लेकिन खर्च लगभग 2 लाख रुपये ही हुए थे.

    सोशल मीडिया ने इसे करोड़ों में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जो गलत है. कार्यक्रम का आयोजन करने वाले इवेंट मैनेजर और डीजे ने भी वायरल हो रहे 8 करोड़ रुपये के दावे को खारिज कर दिया. उनके अनुसार, कुल कैश लगभग 4 लाख रुपये थी, जिसमें कुछ डॉलर के नोट भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि करोड़ रुपये का आंकड़ा कैसे सामने आया और इतना वायरल हो गया. 

    वीडियो में क्या दिख रहा?

    वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा रहा है कि पंजाबी शादी में दुल्हे ने दुल्हन पर नोटों की बारिश कर रहे हैं. ऐसे में दावा यह किया जा रहा है कि इस शादी में कम से कम 8 करोड़ रुपये से अधिक कैश उड़ाए गए हैं, जो बिल्कुल गलत है. दुल्हे के भाई ने साफ कर दिया है कि यह 8 करोड़ रुपये नहीं बल्कि 2 लाख रुपये हैं. इस वीडियो को देख सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हो गए हैं. कपल के ऊपर नोटों की ऐसी बारिश की गई जिसे देखकर आपकी आंखें फटी रह जाएगी.

  • भूपेन बोरा के साथ हिमंत सरमा का कनेक्शन, कांग्रेस पर असर डालने वाली नई चुनौती

    भूपेन बोरा के साथ हिमंत सरमा का कनेक्शन, कांग्रेस पर असर डालने वाली नई चुनौती

    गुवाहाटी 

    असम विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. यह खबर आते ही कांग्रेस में भूचाल मच गया. पार्टी आलाकमान के एक्टिव होने और मान-मनौव्वल के बाद भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस प्रभारी जितेंद्र सिंह ने जरूर कहा कि उन्हें मना लिया गया है और मामले को सुलझा लेंगे, लेकिन लगता है कि बात नहीं बन सकी है. यही वजह है कि अब भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने जा रहे है.

    मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को भपेन बोरा के घर जाकर मुलाकात किया. इसके बाद हिमंत ने मीडिया से कहा कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे.उन्होंने कहा कि बोरा को बीजेपी में लेने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरी झंडी दे दी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया इस मामले में भूपेन बोरा से बात करेंगे. बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा. 

    असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने की बात मीडिया से कह रहे थे, तो उनके बगल में भूपेन बोरा बैठे हुए थे. कांग्रेस को झटका ऐसे समय लगा है, जब प्रियंका गांधी असम के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि हेमंत सरमा और भूपेंद्र बोरा की यारी, असम में कितना पड़ेगी कांग्रेस पर भारी? 

    प्रियंका के दौरे से पहले कांग्रेस को लगा झटका

    कांग्रेस दस साल से असम की सत्ता से बाहर है और बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने के रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में कर ही थी. कांग्रेस अपनी वापसी के लिए असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में सौंप रही है. प्रियंका असम चुनाव के लिए कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं. प्रियंका असम के दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचेंगी. 

    प्रियंका गांधी अपने दो दिवसीय दौरा पर संगठन को सियासी धार देने की है. दोनों दिन प्रदेश नेताओं, जिला अध्यक्षों और फ्रंटल संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में बैठकों करेंगी. मकसद साफ है, पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद सुलझाना,आपसी तालमेल बेहतर करना और उम्मीदवारों के चयन से पहले एकजुट ढांचा तैयार करना. इन कवायद के बीच भूपेन बोरा का कांग्रेस से इस्तीफा और अब बीजेपी के दामन थामने से प्रियंका गांधी के जरिए माहौल बनाने की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है. 

    भूपेन बोरा और हिमंता सरमा से सियासी यारी

    भूपेन बोरा से कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद दूसरे दिन ही असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को उनके घर जाकर मुलाकात की. इसके बाद बोरा के साथ मीडिया के सामने आए उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे. हिमंत सरमा ने कहा कि दिलीप सैकिया भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करेंगे. उनके साथ गुवाहाटी और उत्तर लखीमपुर में कई कांग्रेस नेता भी बीजेपी में शामिल होंगे. वे कांग्रेस में आखिरी मान्यता प्राप्त हिंदू नेता हैं.

    मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने कहा कि भूपेन बोरा को पूरा सम्मान और गरिमा दी जाएगी. बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा क्योंकि यह एक ऐसी पार्टी है जिसमें उनके जैसे कई लोग हैं, जिनके पिता किसी उच्च पद पर नहीं रहे. कांग्रेस अब मुख्यधारा के असमिया लोगों की पार्टी नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि एक सच्चा कांग्रेसी नेता इस बात से दुखी होगा कि उसकी पार्टी चुनाव जीतने के लिए संघर्ष नहीं कर रही है. 

    हिमंत सरमा ने कहा कि मैंने भी यही पीड़ा झेली थी.जब मैं बीजेपी में शामिल होने गया, तब मुझे भी ऐसे फोन आए थे.ये लोग सामंतों की तरह जीते हैं. उन्हें लगता है कि एक फोन करने से फैसला बदल जाएगा. भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल होते हैं तो फिर उनकी और हिमंत की सियासी जोड़ी का मुकाबला कांग्रेस को असम में करना होगा? 

    भूपेन बोरा कौन है और क्या है सियासी आधार

    भूपेन बोरा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं. 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठनात्मक राजनीति में मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं. भूपेन बोरा ऐसे नेता हैं, जिन्होनें जमीनी कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाला नेता माना जाता है.

    भूपेन बोरा का जन्म असम में हुआ और उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और कांग्रेस विचारधारा से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी संगठन में अहम भूमिकाएं निभाते गए. वे चार बार विधायक रहे और आक्रामक राजनीति के लिए पहचाने जाते हैं. एक संगठनकर्ता के रूप में बोरा की पहचान अनुशासित कार्यशैली, कैडर-बेस्ड राजनीति और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति के लिए होती है. 

    कांग्रेस को दोबारा से खड़े करने में रोल अदा किया

    5 साल पहले 2021 में जब असम में लगातार दूसरी बार कांग्रेस को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा था. विधानसभा चुनाव के फौरन बाद जुलाई में दो बार के विधायक रह चुके भूपेन बोरा को असम प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. करीब चार साल साल तक बोरा ने पूरी मेहनत की. उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर पूरे असम में पदयात्रा भी की और हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर नज़र आए.प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने, बूथ-स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और युवाओं व अल्पसंख्यकों को पार्टी से जोड़ने पर खास जोर दिया.

    2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली थी. यात्रा जब गुवाहाटी पहुंची तो प्रशासन ने राहुल गांधी को शहर के अंदर से गुजरने से रोक दिया और बाहर से निकालने को कहा.इससे नाराज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड पर आक्रामक प्रदर्शन किया जिसकी अगुवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा कर रहे थे. उस समय भूपेन बोरा महज प्रदर्शन की औपचारिकता नहीं कर रहे थे बल्कि वाक़ई में आरपार में मूड में थे. 

    भूपेन बोरा ks बीजेपी में जाने से क्या होगा नुकसान

    असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हिमंता सरकार के खिलाफ़ मुहिम चला रही कांग्रेस की रणनीतियों को बड़ा झटका तो लग ही गया है.भूपेन बोरा की पहचान जमीन से जुड़े हुए नेता के साथ प्रभावशाली वक्ता की भी है. ख़ास तौर पर उनमें असम की संस्कृति का जानकार माना जाता है. कांग्रेस के साथ 32 साल तक जुड़े रहे हैं, इतना ही नहीं एक कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय किया है. भूपेन बोरा बीजेपी और असम सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं.

    भूपेन बोरा ने बेरोज़गारी, महंगाई, बाढ़, नागरिकता से जुड़े मुद्दों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं. वो साफ छवि, संगठनात्मक अनुभव और आक्रामक विपक्षी तेवर के नेता माने जाते हैं. असम में कांग्रेस के सबसे अहम चेहरों में उन्हें गिना जाता है. ऐसे में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाना पार्टी के लिए सियासी तौर पर बड़ा झटका है. 

    भूपेन बोरा असम के लखीमपुर से ताल्लुक रखते हैं. वह 2006 से 2016 तक असम विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. भूपेन बोरा ने ऐसे समय में कांग्रेस का साथ छोड़ रहे हैं, जब पार्टी अपनी वापसी के लिए बेताब है. 

  • सद्भाव और एकता का संदेश: मुख्यमंत्री ने सतनाम सद्भाव पदयात्रा का किया शुभारंभ

    सद्भाव और एकता का संदेश: मुख्यमंत्री ने सतनाम सद्भाव पदयात्रा का किया शुभारंभ

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का शुभारंभ किया. उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की.

    मुख्यमंत्री साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी. साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है. पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी.

    कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है. उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी.

    कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब, विधायक ललित चंद्राकर, विधायक मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे.

    गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा. पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है. इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए.

  • जम्मू-कश्मीर ने 67 साल बाद फाइनल में बनाई जगह, बंगाल को 6 विकेट से हराकर किया धमाका

    जम्मू-कश्मीर ने 67 साल बाद फाइनल में बनाई जगह, बंगाल को 6 विकेट से हराकर किया धमाका

      कल्याणी
    भारतीय घरेलू क्रिकेट में बड़ा उलटफेर करते हुए जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रच दिया. 1959-60 में पहली बार रणजी खेलने वाली इस टीम ने 67 साल में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली. सेमीफाइनल में दो बार की पूर्व चैम्पियन बंगाल को 6 विकेट से हराकर जम्मू-कश्मीर ने अपने सफर का सबसे सुनहरा अध्याय लिख दिया.

    आकिब नबी का कहर, बंगाल 99 पर ढेर

    मैच की असली पटकथा तेज गेंदबाज आकिब नबी ने लिखी. उन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर 9 विकेट झटके और बंगाल की दूसरी पारी को 25.1 ओवरों में 99 रन पर समेट दिया. पहली पारी में 328 रन बनाने वाली बंगाल टीम दूसरी पारी में पूरी तरह बिखर गई.

    जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 302 रन बनाए थे, जिससे मुकाबला संतुलन में था. लेकिन नबी की घातक गेंदबाज़ी ने लक्ष्य को 126 तक सीमित कर दिया.

    126 रनों का लक्ष्य, चौथे दिन संयमित पीछा
    तीसरे दिन के खेल समाप्ति तक जम्मू-कश्मीर 43/2 था. चौथे दिन सुबह शुभम पुंडीर (27) और कप्तान परस डोगरा (9) जल्दी आउट हो गए, जिससे थोड़ी घबराहट जरूर हुई.

    लेकिन इसके बाद वंशज शर्मा और अब्दुल समद ने मोर्चा संभाला. दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 55 रन की अहम साझेदारी की.

    वंशज शर्मा (43*) ने धैर्य और तकनीक का बेहतरीन मिश्रण दिखाया. अब्दुल समद (30*) ने आक्रामक अंदाज में मैच खत्म किया. जम्मू-कश्मीर ने 34.4 ओवरों में 126/4 बनाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

    लंबा सफर, अब फाइनल की दहलीज
    जम्मू-कश्मीर 2013-14 सीजन में एक दशक बाद पहली बार नॉकआउट में पहुंचा था, लेकिन तब भी खिताबी रेस दूर थी. इस बार टीम ने न सिर्फ नॉकआउट पार किया, बल्कि फाइनल में प्रवेश कर यह साबित कर दिया कि अब उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता.

    संक्षिप्त स्कोर:
    बंगाल: 328 और 99

    जम्मू-कश्मीर: 302 और 126/4

    जम्मू-कश्मीर की यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और विश्वास की जीत है. अब सबकी नज़रें फाइनल पर टिकी हैं, जहां टीम इतिहास को और भी यादगार बनाने उतरेगी.

  • अरबाज के साथ रिश्ते को लेकर निक्की हुई इमोशनल, परिवार और प्यार के बीच बनी उलझन

    अरबाज के साथ रिश्ते को लेकर निक्की हुई इमोशनल, परिवार और प्यार के बीच बनी उलझन

    मुंबई 

    अरबाज पटेल और निक्की तंबोली इन दिनों द 50 शो में नजर आ रहे हैं. रियलिटी शो में दोनों में कभी प्यार होता है, कभी तकरार.एक टास्क के दौरान दोनों में फिर झगड़ा देखने को मिला. झगड़े के दौरान निक्की इमोशनल हो गईं और अरबाज को लेकर कुछ ऐसा कहा, जिससे फैन्स परेशान हो गए हैं. 

    इमोशनल हुईं निक्की 
    द 50 के लेटेस्ट एपिसोड में निक्की तंबोली की टीम अच्छे से टास्क परफॉर्म नहीं कर पाई और हार का सामना करना पड़ा. लेकिन अरबाज की टीम ने अच्छा परफॉर्म और टास्क जीत गए. अरबाज ने जीत को गर्लफ्रेंड निक्की के साथ सेलिब्रेट नहीं किया. निक्की को अरबाज की इस हरकत पर काफी गुस्सा आया, जिसे उन्होंने बॉयफ्रेंड से जाहिर किया. 

    अरबाज ने भी निक्की को जवाब दिया और कहा कि वो हमेशा उनसे लड़ती रहती हैं. टास्क के दौरान अरबाज को चोट भी पहुंची थी. बॉयफ्रेंड का गुस्सा देखकर निक्की इमोशनल हो जाती हैं. वो दिव्या से कहती हैं कि मैंने इसके लिए परिवार से झगड़ा किया और ये अब भी मुझे बुरा महसूस करा रहा है. हालांकि, बाद में अरबाज ने निक्की से अपनी गलती की माफी मांगी और दोनों का पैचअप हो जाता है. 

    टूटेगा रिश्ता?
    रियलिटी में अकसर कपल का रिश्ता या तो पहले से ज्यादा मजबूत हो जाता है या फिर टूट जाता है. निक्की और अरबाज के बीच झगड़े देखकर फैन्स परेशान हैं, क्योंकि कई दफा ऐसा हुआ जब रियलिटी शो पर जाकर सेलेब्स के रिश्ते टूटे हैं और बाद में उन्हें इस चीज का पछतावा हुआ है. अरबाज और निक्की की लवस्टोरी बिग बॉस मराठी सीजन 5 में शुरू हुई थी. बिग बॉस मराठी के बाद द 50 दूसरा ऐसा रियलिटी शो है, जिसमें दोनों ने साथ में हिस्सा लिया है.

    निक्की के पापा दोनों के रिश्ते के लिए राजी नहीं हैं. लेकिन निक्की ने परिवार के खिलाफ जाकर उनके साथ लिवइन में रहने का फैसला किया. देखते हैं कि शो खत्म होने के बाद दोनों के रिश्ते पहले से बेहतर हो जाते हैं या फिर बिखर जाते हैं. 

  • CG में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 16 मार्च को नतीजे आएंगे, तुलसी-फूलोदेवी नेताम की कार्यकाल समाप्ति 2 अप्रैल

    CG में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 16 मार्च को नतीजे आएंगे, तुलसी-फूलोदेवी नेताम की कार्यकाल समाप्ति 2 अप्रैल

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. 16 मार्च 2026 को देश के अलग-अलग राज्यों से खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की भी दो सीटें हैं, जिन पर चुनाव होगा. राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में सुगबुगाहट पहले से ही शुरू हो चुकी थी. बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखते हुए एक-एक राज्यसभा सीट बीजेपी और कांग्रेस को मिल सकती है. इसके लिए अब सुगबुगाहट और तेज होने वाली है. 

    इन नेताओं का कार्यकाल पूरा 

    छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दोनों नेताओं का कार्यकाल अप्रैल में ही खत्म हो रहा है, ऐसे में मार्च में सीटों को भरने के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे. दोनों नेताओं का कार्यकाल खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, क्योंकि अब एक सीट बीजेपी के खातें में जाने वाली है, ऐसे में बीजेपी के नेता भी सक्रिए हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता भी एक सीट के लिए एक्टिव हो रहे हैं. क्योंकि यह देखना भी दिलचस्प होगा कि बीजेपी और कांग्रेस स्थानीय नेताओं को राज्यसभा भेजेगी या बाहरी नेताओं को भी मौका मिलेगा. 

    छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की 5 सीटें

    राजीव शुक्ला (कांग्रेस) कार्यकाल: 2022–2028

    रंजीत रंजन (कांग्रेस) कार्यकाल: 2022–2028

    फूलो देवी नेताम (कांग्रेस) कार्यकाल: 2020–2026

    केटीएस तुलसी (आईएनसी) कार्यकाल: 2020–2026

    देवेन्द्र प्रताप सिंह (भाजपा) कार्यकाल: 2024–2030

    केटीएस तुलसी का कार्यकाल 2 अप्रैल को होगा समाप्त

    केटीएस तुलसी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। संसद में संवैधानिक और कानूनी मामलों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

    फूलो देवी नेताम का कार्यकाल भी 2 अप्रैल को होगा पूरा

    फूलो देवी नेताम बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं। वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर उनकी मजबूत आवाज रही है। वह भी वर्ष 2020 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। उनका कार्यकाल भी 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

    कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई सदस्यता 3 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

    देशभर की 37 सीटों पर चुनाव होंगे

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इन सीटों में छत्तीसगढ़ की दो सीटें भी हैं, जो अप्रैल 2026 में रिक्त हो रही हैं। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 20 मार्च तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

    छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें 

    बता दें कि छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती है. वर्तमान में कांग्रेस के पास चार और बीजेपी के पास एक सीट है. कांग्रेस से केटीएस तुलसी, फूलोदेवी नेताम, राजीव शुक्ला, रंजीता रंजन हैं, जबकि बीजेपी से देवेंद्र प्रताप सिंह राज्यसभा सांसद हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी के बाद अब राज्यसभा के समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं, जहां छत्तीसगढ़ में बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ सकती है. क्योंकि बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं, इसके अलावा एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं, ऐसे में अब बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या 3 हो सकती है, जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 2 हो सकती है. 

    किन राज्यों में कितनी सीटें खाली?

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं. इसके अलावा तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल से पांच-पांच सीटें रिक्त होंगी. ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव होंगे. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा. 

    इन सीटों का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल से 9 अप्रैल के बीच पूरा हो रहा है. उनके रिटायरमेंट के बाद नए सांसद शपथ लेंगे.

    बिहार के इन दिग्गजों का कार्यकाल खत्म

    बिहार की 5 राज्यसभा सीटें भी अप्रैल में खाली हो रही हैं. रिटायर होने वाले प्रमुख चेहरों में राज्यसभा के उपसभापति और जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह शामिल हैं. इसके साथ ही, मोदी कैबिनेट के मंत्री रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, आरजेडी से अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता भी इसी लिस्ट में हैं. बिहार की इन महत्वपूर्ण सीटों पर नए चेहरों के आने या पुराने सांसदों की वापसी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

    देश के बड़े चेहरे जो होंगे रिटायर

    महाराष्ट्र से शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और रामदास आठवले जैसे बड़े नेता रिटायर हो रहे हैं. तमिलनाडु से एम तंबीदुरै, तिरुचि शिवा और कनिमोझी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. पश्चिम बंगाल से साकेत गोखले और ऋतब्रत बनर्जी जबकि असम से रामेश्वर तेली विदा होंगे. छत्तीसगढ़ से केटीएस तुलसी, हरियाणा से रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी का नाम भी शामिल है. तेलंगाना से कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी भी रिटायर हो रहे हैं. इन सभी के स्थान पर अब नए सांसदों का चुनाव होगा.

  • Gold Price Update: सोने के दामों में भारी गिरावट, निवेशकों के लिए बड़ा अलर्ट

    Gold Price Update: सोने के दामों में भारी गिरावट, निवेशकों के लिए बड़ा अलर्ट

    इंदौर 

    मध्य प्रदेश के सर्राफा बाजारों में आज 18 फरवरी 2026 को सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दाम स्थिर बने हुए हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में आज सुबह नए रेट जारी किए गए हैं। ऐसे में अगर आप शादी-विवाह या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

    जानकारी के मुताबिक आज 22 कैरेट सोना 14,250 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया है, जो बीते दिन 14,390 रुपये प्रति ग्राम था। यानी कीमत में 140 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह 24 कैरेट सोने की कीमत में भी कमी आई है।

    आज 24 कैरेट सोना 14,963 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि कल इसका भाव 15,110 रुपये प्रति ग्राम था। यानी एक ग्राम पर करीब 147 रुपये की गिरावट आई है। अगर 10 ग्राम की बात करें तो आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,49,630 रुपये है, जो कल 1,51,100 रुपये थी। वहीं 8 ग्राम सोना आज 1,19,704 रुपये में मिल रहा है, जबकि बीते दिन इसकी कीमत 1,20,880 रुपये थी।

    वहीं चांदी की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार एक ग्राम चांदी का भाव 265 रुपये पर स्थिर बना हुआ है। इसी तरह एक किलो चांदी का रेट भी 2,65,000 रुपये पर कायम है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और डॉलर की चाल का असर घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव हो सकता है। ऐसे में खरीदारी से पहले ताजा रेट जरूर चेक कर लें।

  • टीम इंडिया में फेरबदल के संकेत! अर्शदीप को मौका, कुलदीप बाहर — प्लेइंग XI पर सस्पेंस खत्म?

    टीम इंडिया में फेरबदल के संकेत! अर्शदीप को मौका, कुलदीप बाहर — प्लेइंग XI पर सस्पेंस खत्म?

    अहमदाबाद
    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लगातार तीन जीत दर्ज कर चुकी भारतीय टीम अब सुपर-8 राउंड में जाने से पहले अपनी लय को और और धार देना चाहती है. इसी क्रम में वो आज (18 फरवरी) को नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ  अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेड‍ियम में खेलने के लिए उतरेगी. भारत ने 15 फरवरी को ही पाकिस्तान को 61 रनों से हराया और यह बात भी साब‍ित की सूर्या एंड कंपनी खिताब जीतने की प्रबल दावेदार है. 

    वहीं अहमदाबाद में जब भारतीय टीम का फोकस नीदरलैंड्स अब टीम का फोकस बड़े स्कोर खड़े करने पर है, क्योंकि अब तक 209 से अधिक का स्कोर नहीं बन पाया है. 

    क्या होगा टी20 वर्ल्ड कप में 300 पार का स्कोर? 
    सवाल यह है क्या भारतीय टीम नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ 300 प्लस का स्कोर बना पाएगी, क्योंकि आज तक टी20 वर्ल्ड कप के इत‍िहास में 300 प्लस का स्कोर नहीं बन पाया है. टी20 वर्ल्ड कप के इत‍िहास में सबसे बड़ा स्कोर श्रीलंका ने 260 साल 2007 में केन्या के ख‍िलाफ बनाया था. वहीं भारत का टी20 वर्ल्ड कप में हाइएस्ट स्कोर 218 है, यह भी 2007 में इंग्लैंड के ख‍िलाफ आया था. 

    अहमदाबाद की पिच, क्या होगी चौकों-छक्कों की बरसात?
    यह मैच अहमदाबाद में शाम 7 बजे से है. जहां रात के मुकाबलों में बड़े स्कोर का ट्रेंड रहा है. पिछले पांच में से चार नाइट मैचों में पहली पारी 210 से ऊपर गई है. ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी करना पसंद कर सकती है, ताकि विपक्ष पर दबाव बनाया जा सके.

    नीदरलैंड्स की चुनौती को हल्के में नहीं ले सकता भारत
    नीदरलैंड्स इस टूर्नामेंट में सिर्फ भाग लेने नहीं आया है. वह पाकिस्तान को लगभग हराने की स्थिति में पहुंचा था और नामीबिया पर जीत दर्ज कर चुका है. टीम यह साबित करना चाहेगी कि वह बड़ी टीमों के लिए सिर्फ अभ्यास मैच नहीं है. वैसे भारत और नीदरलैंड्स के बीच टी20 इत‍िहास में केवल एक ही मुकाबला 2022 में टी20 वर्ल्ड कप में हुआ था, ज‍िसे भारत ने 56 रनों से जीता था. 

    क्या अभ‍िषेक का फॉर्म वापस लौटेगा?
    टूर्नामेंट में अब तक अभिषेक का आगाज निराशाजनक रहा है. गोल्डन डक, फिर बीमारी, फिर चार गेंद में आउट. हालांकि टीम मैनेजमेंट को उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा है और सुपर-8 से पहले एक बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है. दूसरी ओर नीदरलैंड्स शुरुआती ओवरों में ऑफ-स्पिन का इस्तेमाल कर उन्हें फिर से जकड़ने की कोशिश कर सकता है. आर्यन दत्त नई गेंद से यह भूमिका निभाते रहे हैं और यह रणनीति फिर देखने को मिल सकती है.
    कैसा रहेगा टीम इंड‍िया का कॉम्ब‍िनेशन?
    भारतीय टीम की चोट संबंधी चिंताएं लगभग खत्म हो चुकी हैं. तेज पिच को देखते हुए टीम प्रबंधन अतिरिक्त पेस विकल्प के साथ उतर सकता है. ऐसे में अर्शदीप की वापसी और कुलदीप को आराम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. वहीं देखना होगा कि जसप्रीत बुमराह और हार्द‍िक पंड्या को टीम इंड‍िया का मैनेजमेंट आराम देता है नहीं. वैसे स‍ितांशु कोटक किसी भी ख‍िलाड़ी को आराम देने की बात से प्रीमैच कॉन्फ्रेंस में इनकार कर चुके हैं.  नीदरलैंड्स भी अपने तेज गेंदबाजों में रोटेशन करता रहा है और परिस्थितियों के अनुसार अंतिम संयोजन तय करेगा.

    भारत का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स संग मुकाबले से पहले जानें
    भारत ने लिमिटेड-ओवर ICC टूर्नामेंट में लगातार 16 मैच जीते हैं.यह सिलसिला पिछले विश्व कप फाइनल के बाद से जारी है.इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत चारों बार नीदरलैंड्स को हरा चुका है.

    नीदरलैंड्स की संभावित प्लेइंग इलेवन: माइकल लेविट, मैक्स ओ'डॉड,  बास डी लीडे, कॉलिन एकरमैन, स्कॉट एडवर्ड्स (कप्तान और विकेटकीपर), जैक लायन-कैशेट,  लोगान वैन बीक,  आर्यन दत्त,  रोलोफ वैन डेर मर्व, 10 और 11 – काइल क्लेन, फ्रेड क्लासेन और पॉल वैन मीकेरेन में से

    भारत की नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ संभावित प्लेइंग इलेवन: अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पंड्या, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती

  • वेस्ट बैंक में जमीन पर कब्जे को लेकर इजरायल की रणनीति, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध प्रदर्शन किया

    वेस्ट बैंक में जमीन पर कब्जे को लेकर इजरायल की रणनीति, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध प्रदर्शन किया

    तेल अवीव

    इजरायल सरकार ने पश्चिमी तट में जमीन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने के हालिया फैसले की आठ मुस्लिम देशों द्वारा निंदा करने वाले संयुक्त बयान को बेबुनियाद और गुमराह करने वाला बताया है। मंगलवार को तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने पश्चिमी तट में जमीन को सरकारी सम्पति घोषित करने और उनके पंजीकरण और मालिकाना हक के सेटलमेंट के लिए प्रक्रिया को मंजूरी देने के इजरायली सरकार के फैसले की निंदा की।

    मंत्रालय ने आज एक बयान में कहा, 'यह बयान असल में बेबुनियाद और जानबूझकर गुमराह करने वाला है। फिलिस्तीनी अधिकारी ही क्षेत्र सी में गैर-कानूनी जमीन पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे है, जो कानून और मौजूदा समझौतों का उल्लंघन है।' मंत्रालय ने बताया कि इजरायली सरकार ने सिविल और सम्पति कानून के तहत प्रशासनिक कदम को मंजूरी दी है।
    क्या बोला सऊदी अरब

    सऊद अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम कब्जे वाले इलाके में एक नई कानूनी और प्रशासनिक हकीकत को थोपता है, जिससे द्वि-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी अधिकार कमज़ोर होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि फिलिस्तीनी जमीन पर इजरायल का कोई हक नहीं है। मंत्रालय ने इन कदमों को फिलिस्तीनी लोगों के चार जून, 1967 की सीमाओं पर एक आजाद देश बनाने के कानूनी हक पर हमला बताया, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो।
    प्रस्ताव

    उल्लेखनीय है कि इजरायली सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के बड़े इलाकों को अपनी भूमि के तौर पर वर्गीकृत करने की योजना को मंजूरी दी, अगर फिलिस्तीनी मालिकाना हक साबित नहीं कर पाते। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी मंत्रियों बेज़ालेल स्मोट्रिच (वित्त), यारिव लेविन (न्याय), और इजरायल काट्ज (रक्षा) ने रखा था।

    स्मोट्रिच ने इस योजना को 'हमारी सभी जमीनों पर नियंत्रण करने के लिए समाधान क्रांति' का अगला कदम बताया, जबकि लेविन ने इसे इज़रायल के अपने सभी हिस्सों पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया। इस मंजूरी से ज़मीन के मालिकाना हक के समाधान की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई हैं, जो 1967 में वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे के बाद से रुके हुए थे।