Author: NewseDay

  • भजनलाल शर्मा बोले, हमारी सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है

    भजनलाल शर्मा बोले, हमारी सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में आयुर्वेद की जड़ें गहरी हैं, यहां औषधि उत्पादन की अद्भुत क्षमता है। प्रदेश की पहाड़ी, वन, औषधीय पौधे इसके साक्षी हैं कि यहां की भूमि सदियों से आयुर्वेद का केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आयुर्वेद के संवर्धन तथा जनमानस में उसके व्यापक उपयोग के लिए प्राथमिकता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने  राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एक महाविद्यालय के रूप में आरंभ होकर आज देश के प्रमुख डीम्ड टू बी आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो गया है। राजस्थान की धरती पर स्थापित इस संस्थान ने पचास वर्षों में जिस ऊंचाई, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय नेतृत्व को प्राप्त किया है, वह प्रेरणास्पद है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी सेवा – इन चारों स्तंभों पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने पिछले पांच दशकों में नेतृत्व स्थापित किया है।

    देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग
    की प्रमुख भूमिका रही है। आयुर्वेद के माध्यम से हम यह पहले से ही जान लेते हैं कि कौन से महीने में कौन सी बीमारी होगी और उसका उपचार कैसे किया जाए। उन्होंने कहा कि वेदों के साथ हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद के माध्यम से मानव जीवन को समझा है। चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट जी जैसे महान वैद्यों ने इस विद्या को व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में कहा गया है कि स्वस्थ शरीर धर्म का प्रथम साधन है। सुश्रुत को आज पूरा विश्व शल्य चिकित्सा का जनक मानता है।

    प्रधानमंत्री का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’
    शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक अलग आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई। जिससे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराया। इससे न केवल योग, बल्कि पूरी भारतीय चिकित्सा परंपरा को विश्व मंच पर पहचान मिली। आयुर्वेद अनुसंधान में निवेश बढ़ाया गया, आयुर्वेद संस्थानों का विस्तार किया गया।

    आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाना हमारी प्राथमिकता
    शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में आयुर्वेद के लिए नए आयुर्वेद चिकित्सालय, महाविद्यालय एवं डिस्पेंसरी की स्थापना से सुलभ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की गई। स्नातक-स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि, आधुनिक लैब, ड्रग-स्टैंडर्डाइजेशन यूनिट और शिक्षण-फार्मेसी को सुदृढ़ किया गया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद अस्पतालों का विस्तार, पंचकर्म इकाइयों का सुदृढ़ीकरण, दवाखानों का आधुनिकीकरण, शिक्षा एवं अनुसंधान के नए अवसर सहित विभिन्न निर्णयों से आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने एनआईए के लिए जयपुर में जमीन आवंटित करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

    एनआईए की भूमिका से पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद का दीपक प्रज्वलित
    केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रताप राव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्ष की यह यात्रा केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि उन असंख्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, और कर्मयोगियों की अटूट निष्ठा, समर्पण और तपस्या का प्रतीक है, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद के दीपक को प्रज्वलित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोगों की असंतुलित जीवनशैली के कारण मधुमेह, विटामिन बी 12 एवं डी की कमी जैसी अनेक बीमारियां पनप रही हैं। इन बीमारियों के निदान के लिए योग एवं आयुर्वेद महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शक्तिशाली नेतृत्व में हमारी सरकार का विजन स्पष्ट है परंपरा की जड़ों में विज्ञान का संरक्षण और कल्याण की शाखाओं का विस्तार। भारत सरकार का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और संतुलित व्यवस्था का निर्माण करना है। उन्होंने इस वर्ष के बजट में आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान सहित सभी घोषणाओं के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान में आयुष के क्षेत्र में हो रहे उल्लेेखनीय कार्य की भी सराहना की।

    उप मुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना लाकर आयुर्वेद और योग के माध्यम से आरोग्य ग्राम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को आयुर्वेद और योग भारत की देन है। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेशनल आयुष मिशन में वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना के तहत राजस्थान को देश में सर्वाधिक 348 करोड़ रुपए आवंटित किए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनआईए परिसर में नवनिर्मित ओपीडी सुश्रुत भवन का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर विधायक बालमुकुन्द आचार्य, केन्द्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एनसीआईएसएम अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोटेकर, प्रमुख शासन सचिव आयुष सुबीर कुमार, एनआईए कुलपति प्रो. संजीव शर्मा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

  • अमित शाह का आज ऐलान: OTP, लिंक और कॉल धोखाधड़ी पर लगेगा ब्रेक, जानिए क्या होगा नया

    अमित शाह का आज ऐलान: OTP, लिंक और कॉल धोखाधड़ी पर लगेगा ब्रेक, जानिए क्या होगा नया

    नई दिल्ली 

    साइबर स्कैम और ठगी के ईकोसिस्टम को खत्म करने को लेकर एक राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत होने जा रही है. आज यानी 10 फरवरी 2026 को केंद्रीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे. 

    दो दिवसीय चलने वाले इस नेशनल इवेंट का नाम साइबर-सक्षम धोखाधड़ी से निपटना और इसके इकोसिस्टम को ध्वस्त करना है. इस अवसर पर गृह मंत्री CBI अधिकारियों के समारोह की अध्यक्षता करेंगे. साथ ही गृह मंत्री नई साइबर क्राइम ब्रांच का उद्घाटन करेंगे. वे होम मिनिस्ट्री के अंतर्गत I4C के S4C डैशबोर्ड की भी शुरुआत करेंगे. 

    नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 2 दिन चलेगा कार्यक्रम

    यह दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस 10–11 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया जाएगा. इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन सेंट्रल ब्यूरो इनवेस्टीगेशन (CBI) कर रही है, जिसमें गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) का सहयोग भी है.

    S4C क्या है? 

    S4C को सिंपल शब्दों में समझें तो यह एक नेशनल डैशबोर्ड है, जिसका काम साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए तुरंत उसको डिटेक्ट और ट्रैस करना है. 

    S4C, असल में एक शॉर्ट नाम है, जिसका पूरा नाम सस्पेक्ट रजिस्ट्री एंड साइबर क्राइम कॉर्डिनेशनल सिस्टम है. यह एक नेशनल साइबर इंटेलीजेंस एंड मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म, जिसको इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने डेवलप किया है. I4C एजेंसी गृह मंत्रालय के तहत काम करती है.  

    2022 में साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन डिविजन

    सीबीआई साल 2000 से साइबर क्राइम्स की जांच कर रही है और 2022 में साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन डिविजन की शुरुआत की थी. यह केंद्र सरकार और उसके ऑफिस को प्रभावित करने वाले साइबर अपराधों की जांच के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है. ये डिविजन साइबर क्रिमिनल्स और साइबर-सक्षम धोखाधड़ी दोनों से निपटती है. 

    भारत में कई सर्विस डिजिटल काम कर रही हैं

    ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नेशनल कॉन्फ्रेंस ऐसे समय आयोजित होने जा रही है, जब भारत डिजिटल चेजेंस तेजी से हो रहे हैं. बैंकिंग से लेकर कम्युनिकेशन तक तक में बड़े स्तर पर विस्तार हुआ है. वहीं, संगठिग साइबर अपराधी नेटवर्क इस सिस्टम में मौजूद खामियों का मिसयूज कर रहे हैं.

    नेशनल कॉन्फ्रेंस का मकसद क्या है?  

    •     भारत में साइबर-सक्षम धोखाधड़ी बदलते स्वरूप पर समझ विकसित करना. 
    •     साइबर ठगी के इकोसिस्टम के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों का अध्ययन करना. 
    •     फाइनेंशियल पिलर्स (म्यूल खाते और धन शोधन).
    •     टेलिकॉम पिलर (SIM/eSIM और डिजिटल का मिसयूज करना).
    •     ह्यूमन पिलर (साइबर गुलामी और ठगी केंद्रों में तस्करी). 

        कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों, दूरसंचार प्रदाताओं, नियामकों और प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्मों के बीच सहयोग को मजबूत करना है. 
        साइबर स्कैम और धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग, रियल-टाइम फंड ट्रेसिंग, समय पर साक्ष्य संरक्षण और पीड़ितों की बेहतर सुरक्षा के लिए सिस्टम को मजबूत बनाना है. 

    आज से शुरू होने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस का अंतिम उद्देश्य आम लोगों की सुरक्षा, आपराधिक नेटवर्कों को रोकना और भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में विश्वास को बढ़ाना है. 

  • वर्ल्ड कप से बाहर बांग्लादेश को लाहौर का न्योता, जानिए 5 घंटे की मीटिंग का राज

    वर्ल्ड कप से बाहर बांग्लादेश को लाहौर का न्योता, जानिए 5 घंटे की मीटिंग का राज

     ढाका

    शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे (8 फरवरी) बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ‘बुलबुल’ ढाका के हज़रत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में थे. उस वक्त बीसीबी के कुछ अधिकारी सो रहे थे, तो कई को यह भी पता नहीं था कि उनके अध्यक्ष कहां जा रहे हैं.

    बुलबुल की इस अचानक यात्रा की जानकारी बीसीबी के डायरेक्टर्स को तब मिली, जब उनके व्हाट्सऐप ग्रुप पर एक मैसेज आया. मैसेज में बताया गया कि अमीनुल इस्लाम बुलबुल लाहौर के लिए रवाना हो चुके हैं.

    बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो के मुताबिक, बुलबुल ने मैसेज में लिखा, 'इस यात्रा की पुष्टि सिर्फ 90 मिनट पहले हुई है. मैं अभी एयरपोर्ट पर हूं. इतने कम समय में किसी को फोन नहीं कर पाया. बैठक 8 फरवरी को लाहौर समय के अनुसार शाम 4 बजे होगी. मैं 9 फरवरी की शाम तक लौट आऊंगा.'

    हालांकि इस मैसेज से यह तो साफ हो गया कि बुलबुल लाहौर जा रहे हैं, लेकिन उनके अपने बोर्ड के सदस्य भी यह नहीं जान पाए कि आखिर इस दौरे का मकसद क्या है.

    टी20 वर्ल्ड कप विवाद से जुड़ी थी यह यात्रा

    अमीनुल इस्लाम बुलबुल की यह आधी रात की उड़ान आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बड़े विवाद से जुड़ी थी. बांग्लादेश पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है, जबकि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कोलंबो में होने वाला मैच खेलने से इनकार कर दिया था. पाकिस्तान ने यह फैसला बांग्लादेश के समर्थन में लिया था.

    इसी बीच खबरें आईं कि पाकिस्तान अपने फैसले पर यू-टर्न ले सकता है. ऐसे में लाहौर में होने वाली आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की बैठक काफी अहम हो गई. इसी बैठक में अमीनुल इस्लाम बुलबुल की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए.

    सवाल यह था कि क्या बुलबुल पाकिस्तान के समर्थन में वहां पहुंचे थे? या यह किसी तरह की सौदेबाजी का संकेत था? और अगर सौदा हो रहा था, तो किस बात पर?

    यह भी हैरानी की बात रही कि जब कई लोग ज़ूम के जरिए बैठक में शामिल हुए, तो फिर बीसीबी प्रमुख को खुद लाहौर जाकर मौजूद रहने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि बैठक का एजेंडा बांग्लादेश से ज्यादा पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था. खासकर तब, जब बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को वर्ल्ड कप में शामिल कर लिया गया है.

    बांग्लादेश के क्रिकेट अध्यक्ष क्यों पहुंचे

    पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमीनुल इस्लाम बुलबुल रविवार को लाहौर पहुंचे, जहां उन्हें पीसीबी के सीईओ सलमान नसीर ने रिसीव किया. पीसीबी ने सोशल मीडिया पर उनका स्वागत करते हुए एक वीडियो भी साझा किया.

    दरअसल, पाकिस्तान ने 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाला टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार तब किया था, जब बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत आने से मना कर दिया था. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समर्थन से बांग्लादेश ने आईसीसी से अपने मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग की थी.

    आईसीसी ने यह मांग ठुकरा दी और बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया. इसके बाद यह पूरा विवाद और गहरा गया.

     5 घंटे की बैठक, लेकिन फैसला अधूरा

    लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी के बीच करीब 5 घंटे तक चली बैठक के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. पाकिस्तान ने आईसीसी को बताया कि वह भारत के खिलाफ मैच खेलने पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से सलाह के बाद ही करेगा.

    बैठक में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने के बदले तीन शर्तें रखीं—

    1. आईसीसी रेवेन्यू में ज्यादा हिस्सा
    2. भारत-पाक द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली
    3. खिलाड़ियों के बीच अनिवार्य हैंडशेक प्रोटोकॉल

    खबरों के मुताबिक, बुलबुल और पीसीबी प्रमुख नक़वी के बीच अलग से वन-ऑन-वन बैठक भी हुई.

    तो आखिर बैठक में बांग्लादेश क्यों था?

    भले ही बांग्लादेश अब वर्ल्ड कप से बाहर हो चुका है, लेकिन लाहौर बैठक में उसकी मौजूदगी अहम मानी जा रही है. बीसीबी लगातार पाकिस्तान के रुख के साथ खड़ा रहा है और यह मौजूदगी पाकिस्तान की मोलभाव की ताकत बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

    भारत-पाकिस्तान मैच दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले मुकाबलों में से एक है. इससे आईसीसी को ब्रॉडकास्ट, स्पॉन्सरशिप और विज्ञापन से करोड़ों की कमाई होती है. इसका असर बाकी छोटे बोर्ड्स, जैसे बांग्लादेश, की सालाना कमाई पर भी पड़ता है.

    बांग्लादेशी खेल पत्रकार देब चौधरी के मुताबिक, आईसीसी बांग्लादेश के जरिए पाकिस्तान को भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है. अगर यह मैच होता है, तो बांग्लादेश को भी आईसीसी की कमाई में हिस्सा मिल सकता है, जिससे वर्ल्ड कप से बाहर होने का आर्थिक नुकसान कुछ हद तक कम हो जाएगा.

    खेल और राजनीति की जटिल कहानी

    अमीनुल इस्लाम बुलबुल की रात 1 बजे की यह अचानक उड़ान भले ही उनके अपने बोर्ड के लिए रहस्य रही हो, लेकिन इससे यह साफ हो गया कि बांग्लादेश क्रिकेट किस तरह पाकिस्तान के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ गया है.

    यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल और राजनीति को अलग करना आसान नहीं है.

  • अंत्योदय योजना से 40.85 लाख परिवारों को लाभ, प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा

    अंत्योदय योजना से 40.85 लाख परिवारों को लाभ, प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा

    आर्थिक समीक्षा

    प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवार लाभान्वित

    78,510 उचित दर दुकानें संचालित, 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित

    'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित

    लखनऊ
     वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार, गरीब एवं पात्र परिवारों को निःशुल्क और रियायती दरों पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये प्रतिबद्ध है। इस हेतु पात्र परिवारों का चयन कर राशन कार्ड जारी किये गये हैं, जिनको डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश में दिसंबर, 2025 तक कुल 78,510 उचित दर दुकानें संचालित है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र की 67,114 तथा नगरीय क्षेत्र की 11,396 दुकाने हैं। इसमें 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित हैं। राज्य में दिसंबर, 2025 तक जारी कुल 362.35 लाख राशनकार्ड्स में अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख (11.27%) परिवार एवं पात्र गृहस्थी श्रेणी के 321.50 लाख (88 73%) परिवार हैं, जो उक्त अधिनियम के अन्तर्गत आच्छादित हैं।

    वन नेशन वन राशनकार्ड बना संबल
    वर्ष 2020-21 से प्रारम्भ वन नेशन बन राशनकार्ड' योजनान्तर्गत अन्तर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी (उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों द्वारा अन्य राज्यों में प्राप्त किया) की सुविधा से वर्ष 2024-25 में 38.12 लाख राशनकार्ड धारक लाभान्वित हुए, जो योजना प्रारंभ के अग्रिम वर्ष 2021-22 में लाभान्वित 8.88 लाख के सापेक्ष (03 वर्षों में) कई गुना वृद्धि है। वर्ष 2025-26 के अंतर्गत दिसंबर, 2025 तक 28.03 लाख लाभान्वित हुए हैं।

    'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' के तहत 7481 अन्नपूर्णा भवन
    'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 31 जनवरी, 2026 तक कुल 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित कराये गये हैं, जिनमें राशन वितरण के साथ सी एस सी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं। सी. पी. आई आधारित मुद्रास्फीति की दर कोविड के बाद लगातार गिरावट के साथ वर्ष 2025-26 में माह अक्टूबर, 2025 तक (-)1.71 हो गयी, जिसके फलस्वरूप महगाई नियंत्रित हुयी, क्रय शक्ति बढ़ी तथा मांग आधारित अर्थव्यवस्था में सुधार परिलक्षित हुआ। अद्यतन प्रकाशित बहुआयामी गरीबी (हेडकाउंट रेशियो आकलन) वर्ष 2013-14 में 42.59% थी. जो वर्ष 2022-23 में तेजी से घटते हुए 17.40% रह गयी, इस अवधि में प्रदेश के सर्वाधिक 5.94 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये।

  • देहरादून में इस्लामिक इंस्टीट्यूट के लिए जमीन आवंटन पर IMA के पास विवाद, जानिए पूरा मामला

    देहरादून में इस्लामिक इंस्टीट्यूट के लिए जमीन आवंटन पर IMA के पास विवाद, जानिए पूरा मामला

        देहरादून
        देहरादून की राजधानी देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के पास मौजूद करीब 20 एकड़ ज़मीन विवादों में आ गई है. असल में नया विवाद जमीन के ट्रांसफर को लेकर शुरू हुआ है. कथित तौर पर यह जमीन एक इस्लामिक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने के लिए आवंटित की गई थी, जो जांच के दायरे में आ गई है. यह भी आरोप लग रहे हैं कि यहां पर इंस्टीट्यूशन वाला प्लॉट काटकर लोगों को बसाया जा रहा है. 

    कथित तौर पर यह ज़मीन करीब दो दशक पहले उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने अलॉट की थी.

    एजेंसी के मुताबिक, विकासनगर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट विनोद कुमार की शुरुआती जांच के मुताबिक, IMA के पास धौलास इलाके में मौजूद ज़मीन के प्लॉट को अब रहने के मकसद से छोटे-छोटे प्लॉट में बेचा जा रहा है, जिससे मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन की सिक्योरिटी को खतरा है.

    सियासी बयानबाजी तेज…

    पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में सख्त एक्शन लेगी. उन्होंने कहा, "इस मामले से यह साफ है कि ये लोग (कांग्रेस), जो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की बात करते थे, अगर सत्ता में आते तो उसी दिशा में आगे बढ़ते. हम सख्त एक्शन लेंगे."

    मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह मामला 2004 का है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे. उन्होंने कहा, "यह 2004 का पुराना केस है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे. उसके बाद, बीजेपी कई बार सत्ता में आई और वे इस अलॉटमेंट को कैंसल कर सकते थे."

    बीजेपी विधायक और राज्य पार्टी प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स ने एक बार फिर कांग्रेस सरकारों की 'खतरनाक साज़िशों' को सामने ला दिया है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या तिवारी सरकार के दौरान दी गई ज़मीन हरीश रावत की देख-रेख में इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए थी?

    चमोली ने कहा, "बीजेपी के विरोध और 2022 में जनता के कांग्रेस को नकारने की वजह से यह इरादा पूरा नहीं हो सका और अब ज़मीन पर लैंड माफिया कब्ज़ा कर रहे हैं."

     

  • पाकिस्तान ने स्वीकार किया, T20 वर्ल्ड कप में भारत से खेलेगा मुकाबला

    पाकिस्तान ने स्वीकार किया, T20 वर्ल्ड कप में भारत से खेलेगा मुकाबला

     नई दिल्ली
    भारत और पाकिस्तान के बीच आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का बहुप्रतीक्षित मुकाबला 15 फरवरी को तय कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा. पाकिस्तान सरकार ने सोमवार को औपचारिक रूप से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को यह मैच खेलने की अनुमति दे दी, जिससे पिछले कई दिनों से बना गतिरोध समाप्त हो गया.

    प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने आईसीसी, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और अन्य सदस्य देशों के साथ हुई उच्चस्तरीय बातचीत की जानकारी दी. इसके बाद सरकार ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए पाकिस्तान टीम को मैदान में उतरने का निर्देश दिया.

    पाकिस्तान ने पहले अपनी सरकार की सलाह पर भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने की बात कही थी, जिससे पूरे टूर्नामेंट पर संकट के बादल मंडराने लगे थे. हालांकि आईसीसी की सख्ती, बांग्लादेश की अपील और लगातार बातचीत के बाद पाकिस्तान पीछे हटता नजर आया.
    लाहौर मीटिंग के बाद रास्ता साफ

    लाहौर में हुई बैठक कई घंटों तक चली, लेकिन सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की ओर से रखी गई ज्यादातर मांगों पर आईसीसी ने सहमति नहीं जताई. इसके बाद पीसीबी ने बहिष्कार के रुख को नरम किया और अब मैच खेले जाने का रास्ता साफ हो गया है.

    भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा और कमाई वाला मैच माना जाता है. ऐसे में इसके रद्द होने से आईसीसी, ब्रॉडकास्टर्स और सभी सदस्य बोर्डों को भारी नुकसान होता. अब मैच तय समय पर होने से टूर्नामेंट और क्रिकेट इकोसिस्टम को बड़ी राहत मिली है.

    बता दें कि लाहौर में हुई बैठक में पाकिस्तान ने कई शर्त रखी थीं. जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज, भारत-बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय सीरीज. हैंडशेक विवाद औऱ रेवन्यू बढ़ाने की बात कही गई थी. लेकिन आईसीसी ने पाकिस्तान की कोई बात नहीं मानी. आईसीसी ने बस इतना कहा कि वो बांग्लादेश पर कोई आर्थिक एक्शन नहीं लेगा. लेकिन उसने पाकिस्तान की कोई बात मानने से इनकार कर दिया. आखिरकार पाकिस्तान को झुकना पड़ा.

    पाकिस्तान ने कैसे लिया यू-टर्न,पूरी इनसाइड स्टोरी

    पाकिस्तान सरकार ने आखिर कर देर रात यू टर्न लेते हुए भारत के साथ कोलंबो में 15 फरवरी को मैच खेलने के लिए अपनी टीम को निर्देश दे दिया.  पाकिस्तान सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कर अपने यू टर्न के फैसले की वजहें बताई. पाकिस्तान सरकार ने यह भी कहा कि उन्होंने ग्लोबल क्रिकेट के लिए और श्रीलंका और बांग्लादेश का ख्याल रखते हुए भारत के साथ 15 फरवरी को मैच खेलने के लिए अपना मन बनाया.

    पाकिस्तान के माननीय प्रधानमंत्री, श्री शहबाज शरीफ को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष, श्री मोहसिन नकवी ने पीसीबी, आईसीसी के प्रतिनिधियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के बीच उच्च स्तरीय वार्ता के परिणामों के बारे में औपचारिक रूप से जानकारी दी है. 

     पाकिस्तान सरकार ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की ओर से पीसीबी को भेजे गए औपचारिक अनुरोधों, साथ ही श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य सदस्य देशों के समर्थन पत्रों की समीक्षा की है.

    इन पत्रों में हाल की चुनौतियों का समाधान करने के लिए पाकिस्तान के नेतृत्व की मांग की गई थी. सरकार ने बीसीबी अध्यक्ष, श्री अमीनुल इस्लाम के बयान को भी नोट किया है.  हमारे भाईचारे वाले देश द्वारा व्यक्त की गई गहरी आंतरिकता को गर्मजोशी से स्वीकार किया गया है. पाकिस्तान ने दोहराया है कि वह बांग्लादेश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. 

    इसी शाम, प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के राष्ट्रपति, एच.ई. अनुर कुमार दिसानायके के साथ एक टेलीफोन वार्ता की. उनकी गर्म और मित्रवत बातचीत के दौरान, उन्होंने याद किया कि पाकिस्तान और श्रीलंका हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं, खासकर चुनौतीपूर्ण समय में। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से वर्तमान गतिरोध को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए गंभीर विचार करने का अनुरोध किया.

    बहुपक्षीय वार्ता में हासिल किए गए परिणामों और मित्र देशों के अनुरोध को देखते हुए, पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को 15 फरवरी, 2026 को आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में अपने निर्धारित मैच के लिए मैदान में उतरने का निर्देश दिया है.

    इसके अलावा, यह निर्णय क्रिकेट की भावना की रक्षा करने और सभी भाग लेने वाले देशों में इस वैश्विक खेल की निरंतरता का समर्थन करने के उद्देश्य से लिया गया . प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के लोगों ने "मेन इन ग्रीन" को अपनी शुभकामनाएं दी हैं. हमें विश्वास है कि हमारी टीम वैश्विक गौरव के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए खेल भावना और राष्ट्रीय गर्व को मैदान में ले जाएगी.
    बांग्लादेश पर कोई पेनल्टी नहीं

    ICC ने बांग्लादेश के प्रति नरम रुख अपनाने पर सहमति जताई है, क्योंकि टीम ने T20 वर्ल्ड कप के लिए भारत जाने से मना कर दिया था, जिस वजह से इस बड़े टूर्नामेंट में उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया. सोमवार को, दुनिया की गवर्निंग बॉडी ने पुष्टि की कि वह पीछे हटने के बावजूद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर कोई पेनल्टी नहीं लगाएगी.  यह फैसला BCB के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड  के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिसने बांग्लादेश के साथ एकजुटता दिखाते हुए 15 फरवरी को भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की घोषणा की थी. 
    यह सारा ड्रामा किस बारे में था?

    यह सब तब शुरू हुआ जब मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से अलग किया गया जिसके बाद बांग्लादेश ने कड़ा रूख अपनाया और इसको लेकर आईसीसी से शिकायत की, वहीं, बांग्लादेश बोर्ड ने  सुरक्षा मामले को लेकर भारत आने से मना कर दिया. आईसीसी से लाख समझाने के बाद भी बांग्लादेश नहीं माना तो आईसीसी ने उन्हें टी-2- वर्ल्ड कप से अलग कर दिया जिसके बाद पाकिस्तान बोर्ड इस विवाद में कूद गया और पैंतरे बाजी करने लगा. पाकिस्तान ने बॉयकॉट का ड्रामा किया जिसके बाद आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी ने मिलकर इस विवाद को सुलझाया और आखिकार पाकिस्तान बॉयकॉट ड्रामे पर यू-टर्न लिया.

    बांग्लादेश पर कोई एक्शन नहीं लेगा आईसीसी

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को कहा कि भारत में अपने टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार करने पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) पर किसी भी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. विश्व क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ने कहा कि यह फैसला बीसीबी के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) से बातचीत के बाद लिया गया है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मैच के बहिष्कार की घोषणा की थी.

    आईसीसी ने एक बयान में कहा, इस बात पर सहमति बनी है कि मौजूदा मामले में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर कोई भी आर्थिक, खेल संबंधी या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा. यह भी स्वीकार किया गया है कि बीसीबी को, यदि वह चाहे, तो विवाद समाधान समिति (डीआरसी) से संपर्क करने का अधिकार बना रहेगा. यह अधिकार आईसीसी के मौजूदा नियमों के तहत मौजूद है और पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.”

    गौरतलब है कि बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मौजूदा मेगा इवेंट के लिए भारत की यात्रा करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया. विश्व क्रिकेट संस्था ने यह भी कहा कि आपसी समझ के तहत बांग्लादेश 2028 से 2031 के बीच किसी एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेज़बानी भी करेगा.

    आईसीसी के अनुसार, इस समझौते के तहत यह तय किया गया है कि आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2031 से पहले बांग्लादेश एक आईसीसी इवेंट की मेज़बानी करेगा, जो सामान्य आईसीसी मेज़बानी प्रक्रियाओं, समय-सीमा और संचालन संबंधी आवश्यकताओं के अधीन होगा.

    इससे पहले बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम रविवार को पाकिस्तान पहुंचे थे, जहां गतिरोध सुलझाने के प्रयासों के तहत आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ एक वर्चुअल बैठक सहित कई चर्चाएं हुई थीं.

     

  • कानपुर: NICU में नवजात की मौत पर बड़ा कदम, राजा नर्सिंग होम की रजिस्ट्रेशन निरस्तीकरण

    कानपुर: NICU में नवजात की मौत पर बड़ा कदम, राजा नर्सिंग होम की रजिस्ट्रेशन निरस्तीकरण

     कानपुर

    बिठूर के ब्रह्मनगर स्थित राजा नर्सिंग होम में एनआईसीयू के भीतर वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर कराई गई जांच में सामने आया कि अस्पताल में बिना अनुमति के एनआईसीयू यूनिट संचालित की जा रही थी.

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, नर्सिंग होम का पंजीकरण तो था, लेकिन एनआईसीयू संचालन की अनुमति कभी नहीं ली गई. इसके बावजूद परिसर में अवैध रूप से एनआईसीयू चलाया जा रहा था. 

    निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त पाई गई, जो गंभीर सुरक्षा लापरवाही को दर्शाता है. इसके चलते मौके पर ही अवैध एनआईसीयू यूनिट को सील कर दिया गया.

    गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए राजा नर्सिंग होम (पंजीकरण संख्या RMEE2122829) का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर अस्पताल को पूरी तरह बंद करने के आदेश दिए गए हैं. प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस भी जारी किया गया है. आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

    वहीं, पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर बिठूर थाने में अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है. उन्होंने सख्त एक्शन की मांग की है. 

    गौरतलब है कि यह घटना निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करती है. पहली संतान खोने वाले परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय प्रशासन अब अस्पताल की अन्य कमियों की भी फाइल खंगाल रहा है. पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है.

  • विजया एकादशी कब है—12 या 13 फरवरी? जानिए व्रत तिथि, शुभ समय और पूजा का तरीका

    विजया एकादशी कब है—12 या 13 फरवरी? जानिए व्रत तिथि, शुभ समय और पूजा का तरीका

    सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत ही पावन और विशेष मानी जाती है. ये तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित की गई है. एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. साल में 24 एकादशी व्रत पड़ते हैं. हर एक एकादशी व्रत का अपना विशेष महत्व है. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकदशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है.

    विजया एकदशी के दिन व्रत के साथ ही पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. उनसे आशीर्वाद की कामना की जाती है. मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत रखने से शत्रुओं पर विजय मिलती है. इस व्रत की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि श्रीराम ने भी ये व्रत रखा था. हालांकि, इस साल लोगों के मन में विजया एकादशी के व्रत को लेकर संशय है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल 12 या 13 फरवरी किस दिन रखा जाएगा विजया एकादशी का व्रत? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

    विजया एकादशी कब है?
    पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए इस साल विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा और अगले दिन व्रत का पारण किया जाएगा.

    विजया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
    विजया एकदाशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 24 मिनट तक रहेगा.

    विजया एकादशी पूजा विधि
    विजया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. एक वेदी बनाकर उस पर सात अनाज रखें और उसके ऊपर कलश स्थापित करें. कलश पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें. उन्हें पीले फूल, ऋतु फल, तुलसी दल और पंचामृत चढ़ाएं. धूप-दीप, घी का दीपक जलाएं और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. विजया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें. अंत में विष्णु जी की आरती करके पूजा का समापन करें.

     

  • वायरल स्किन फास्टिंग ट्रेंड—फायदा ज्यादा या नुकसान? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

    वायरल स्किन फास्टिंग ट्रेंड—फायदा ज्यादा या नुकसान? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

    सुबह के क्लींजर से लेकर रात के नाइट जेल तक, हम रोज अपनी स्किन को केमिकल प्रोडक्ट्स की कई परतों में दबा देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी स्किन की नेचुरल ग्लो को छीन सकता है?

    ऐसे में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड काफी चर्चा में है। लेकिन सवाल आता है कि क्या वाकई यह फायदा होता है, या सिर्फ एक ट्रेंड है? आइए जानते हैं इसके बारे में।

    क्या है स्किन फास्टिंग?

    स्किन फास्टिंग का मतलब है कुछ दिनों या हफ्तों के लिए अपनी स्किनकेयर रूटीन को बेहद सिंपल कर देना। इस दौरान त्वचा की देखभाल के लिए सिर्फ क्लींजर, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक तरह का डिटॉक्स है, जिसमें स्किन को एक्टिव इंग्रिडिएंट्स से ब्रेक मिलता है और वह खुद को रिपेयर करती है।

    क्यों बढ़ रहा है इसका ट्रेंड?

    आजकल मल्टी-स्टेप रूटीन में ढेर सारे एक्टिव इंग्रेडिएंट्स इस्तेमाल होते हैं, जिससे स्किन का नेचुरल बैरियर कमजोर होने लगता है। ऐसे में स्किन फास्टिंग के दौरान स्किन को रिपेयर होने का मौका मिलता है। साथ ही, कम प्रोडक्ट्स लगाने से स्किन उसे बेहतर अब्जॉर्ब कर पाती है।

    स्किन फास्टिंग के फायदे

        स्किन के नेचुरल बैरियर को रिपेयर करने में मदद करती है।
        इससे स्किन का पीएच बैलेंस बरकरार रहता है और त्वचा में नमी बनी रहती है।
        स्किन फास्टिंग इरिटेशन और सेंसिटिव को कम करने में मदद करती है। यह रोजेसिया से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होती है।
        ज्यादा प्रोडक्ट्स लगाने से होने वाले ब्रेकआउट, कंजेशन और रिएक्शन का खतरा भी कम होता है।
        रेटिनॉल और एक्सफोलिएशन जैसे प्रोडक्ट्स से ब्रेक लेने पर स्किन खुद को रिपेयर कर पाती है।

    क्या हर किसी के लिए सही है?

    स्किन फास्टिंग पर रिसर्च सीमित है। इसलिए हर व्यक्ति पर इसका अलग असर देखने को मिल सकता है, जैसे-

        अगर आपकी स्किन ज्यादा ड्राई है, तो आपको रूखापन या स्किन डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसके कारण स्किन बैरियर डैमेज होने का रिस्क रहता है।
        स्किन फास्टिंग का असर रातों-रात नहीं दिखता। इसलिए अच्छे नतीजों के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।
        एक्ने या हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी परेशानियों के लिए सही ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। ऐसे में स्किन फास्टिंग ज्यादा फायदेमंद साबित नहीं होगी।
        स्किन फास्टिंग के बाद दोबारा एक्टिव इंग्रिडिएंट्स को स्किनकेयर में शामिल करने पर इरिटेशन हो सकती है।
        इसी तरह अचानक कुछ एक्टिव इंग्रिडिएंट्स का इस्तेमाल बंद करने पर भी रिएक्शन होने का खतरा रहता है।

    कुल मिलाकर बात यह है कि स्किन फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, तो कुछ के लिए नुकसानदेह। इसलिए अपनी स्किन की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लें।

     

  • पीली हल्दी के बाद अब ‘नीली हल्दी’ की बारी: सेहत के लिए क्यों मानी जाती है खास?

    पीली हल्दी के बाद अब ‘नीली हल्दी’ की बारी: सेहत के लिए क्यों मानी जाती है खास?

    हल्दी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में गहरा पीला रंग आता है। हम सभी जानते हैं कि पीली हल्दी हमारी रसोई की शान है, क्योंकि यह सेहत और स्किन दोनों के लिए काफी फायदेमंद होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की मिट्टी में एक ऐसी दुर्लभ हल्दी भी उगती है जो पीली नहीं, बल्कि अंदर से

    नीले रंग की होती है?

    जी हां, इसे 'नीला सोना' भी कहा जा सकता है क्योंकि यह सामान्य मसाले से कहीं बढ़कर, एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। आइए, शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से जानते हैं इसके बारे में।

    क्या है नीली हल्दी?

    यह एक बहुत ही दुर्लभ पौधा है जिसे विज्ञान की भाषा में करकुमा कैसिया (Curcuma Caesia) कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे 'काली हल्दी' के नाम से भी जानते हैं। यह सामान्य हल्दी से बिल्कुल अलग दिखती है। जब आप इसकी जड़ को तोड़ते हैं, तो यह अंदर से चमकदार पीली नहीं, बल्कि गहरे नीले या नीले-काले रंग की निकलती है। यह मुख्य रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा इलाकों में ही पाई जाती है।

    क्यों है यह इतनी खास?

    हम जो पीली हल्दी खाते हैं, उसमें 'करक्यूमिन' होता है, जो उसे पीला रंग और स्वाद देता है, लेकिन नीली हल्दी का मामला थोड़ा अलग है। इसमें करक्यूमिन बहुत कम होता है, लेकिन इसमें कपूर और कई तरह के 'एशेंशियल ऑयल्स' भरपूर मात्रा में होते हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है और इसमें कपूर जैसी तेज महक आती है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल खाना पकाने में नहीं, बल्कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में दवा के तौर पर किया जाता है।

    नीली हल्दी के अद्भुत फायदे

    नीली हल्दी को इसके औषधीय गुणों के कारण 'सुपरचार्ज्ड' माना जाता है। सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर इसके कई फायदे हैं:

        जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न या किसी चोट के दर्द में यह बहुत राहत देती है। यह सूजन को कम करने में भी कारगर मानी जाती है।
        इसमें रोगाणुओं से लड़ने की ताकत होती है, जो इन्फेक्शन को दूर रखने और घावों को भरने में मदद करती है।
        पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल खांसी, अस्थमा और छाती में जकड़न जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है।

    इसके अलावा, यह पाचन को भी सुधारती है और पेट की गैस को कम करती है। साथ ही, त्वचा की खुजली, रशेज और छोटे-मोटे घावों पर इसका लेप बहुत फायदेमंद होता है।

    सावधानी भी है जरूरी

    चूंकि, नीली हल्दी में बहुत शक्तिशाली तत्व होते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत संभलकर करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इसे हमेशा कम मात्रा में ही यूज करें। गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में लेने पर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।