Author: NewseDay

  • अरबाज के साथ रिश्ते को लेकर निक्की हुई इमोशनल, परिवार और प्यार के बीच बनी उलझन

    अरबाज के साथ रिश्ते को लेकर निक्की हुई इमोशनल, परिवार और प्यार के बीच बनी उलझन

    मुंबई 

    अरबाज पटेल और निक्की तंबोली इन दिनों द 50 शो में नजर आ रहे हैं. रियलिटी शो में दोनों में कभी प्यार होता है, कभी तकरार.एक टास्क के दौरान दोनों में फिर झगड़ा देखने को मिला. झगड़े के दौरान निक्की इमोशनल हो गईं और अरबाज को लेकर कुछ ऐसा कहा, जिससे फैन्स परेशान हो गए हैं. 

    इमोशनल हुईं निक्की 
    द 50 के लेटेस्ट एपिसोड में निक्की तंबोली की टीम अच्छे से टास्क परफॉर्म नहीं कर पाई और हार का सामना करना पड़ा. लेकिन अरबाज की टीम ने अच्छा परफॉर्म और टास्क जीत गए. अरबाज ने जीत को गर्लफ्रेंड निक्की के साथ सेलिब्रेट नहीं किया. निक्की को अरबाज की इस हरकत पर काफी गुस्सा आया, जिसे उन्होंने बॉयफ्रेंड से जाहिर किया. 

    अरबाज ने भी निक्की को जवाब दिया और कहा कि वो हमेशा उनसे लड़ती रहती हैं. टास्क के दौरान अरबाज को चोट भी पहुंची थी. बॉयफ्रेंड का गुस्सा देखकर निक्की इमोशनल हो जाती हैं. वो दिव्या से कहती हैं कि मैंने इसके लिए परिवार से झगड़ा किया और ये अब भी मुझे बुरा महसूस करा रहा है. हालांकि, बाद में अरबाज ने निक्की से अपनी गलती की माफी मांगी और दोनों का पैचअप हो जाता है. 

    टूटेगा रिश्ता?
    रियलिटी में अकसर कपल का रिश्ता या तो पहले से ज्यादा मजबूत हो जाता है या फिर टूट जाता है. निक्की और अरबाज के बीच झगड़े देखकर फैन्स परेशान हैं, क्योंकि कई दफा ऐसा हुआ जब रियलिटी शो पर जाकर सेलेब्स के रिश्ते टूटे हैं और बाद में उन्हें इस चीज का पछतावा हुआ है. अरबाज और निक्की की लवस्टोरी बिग बॉस मराठी सीजन 5 में शुरू हुई थी. बिग बॉस मराठी के बाद द 50 दूसरा ऐसा रियलिटी शो है, जिसमें दोनों ने साथ में हिस्सा लिया है.

    निक्की के पापा दोनों के रिश्ते के लिए राजी नहीं हैं. लेकिन निक्की ने परिवार के खिलाफ जाकर उनके साथ लिवइन में रहने का फैसला किया. देखते हैं कि शो खत्म होने के बाद दोनों के रिश्ते पहले से बेहतर हो जाते हैं या फिर बिखर जाते हैं. 

  • CG में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 16 मार्च को नतीजे आएंगे, तुलसी-फूलोदेवी नेताम की कार्यकाल समाप्ति 2 अप्रैल

    CG में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 16 मार्च को नतीजे आएंगे, तुलसी-फूलोदेवी नेताम की कार्यकाल समाप्ति 2 अप्रैल

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. 16 मार्च 2026 को देश के अलग-अलग राज्यों से खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की भी दो सीटें हैं, जिन पर चुनाव होगा. राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में सुगबुगाहट पहले से ही शुरू हो चुकी थी. बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखते हुए एक-एक राज्यसभा सीट बीजेपी और कांग्रेस को मिल सकती है. इसके लिए अब सुगबुगाहट और तेज होने वाली है. 

    इन नेताओं का कार्यकाल पूरा 

    छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दोनों नेताओं का कार्यकाल अप्रैल में ही खत्म हो रहा है, ऐसे में मार्च में सीटों को भरने के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे. दोनों नेताओं का कार्यकाल खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, क्योंकि अब एक सीट बीजेपी के खातें में जाने वाली है, ऐसे में बीजेपी के नेता भी सक्रिए हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता भी एक सीट के लिए एक्टिव हो रहे हैं. क्योंकि यह देखना भी दिलचस्प होगा कि बीजेपी और कांग्रेस स्थानीय नेताओं को राज्यसभा भेजेगी या बाहरी नेताओं को भी मौका मिलेगा. 

    छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की 5 सीटें

    राजीव शुक्ला (कांग्रेस) कार्यकाल: 2022–2028

    रंजीत रंजन (कांग्रेस) कार्यकाल: 2022–2028

    फूलो देवी नेताम (कांग्रेस) कार्यकाल: 2020–2026

    केटीएस तुलसी (आईएनसी) कार्यकाल: 2020–2026

    देवेन्द्र प्रताप सिंह (भाजपा) कार्यकाल: 2024–2030

    केटीएस तुलसी का कार्यकाल 2 अप्रैल को होगा समाप्त

    केटीएस तुलसी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। संसद में संवैधानिक और कानूनी मामलों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

    फूलो देवी नेताम का कार्यकाल भी 2 अप्रैल को होगा पूरा

    फूलो देवी नेताम बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं। वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर उनकी मजबूत आवाज रही है। वह भी वर्ष 2020 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। उनका कार्यकाल भी 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

    कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई सदस्यता 3 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

    देशभर की 37 सीटों पर चुनाव होंगे

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इन सीटों में छत्तीसगढ़ की दो सीटें भी हैं, जो अप्रैल 2026 में रिक्त हो रही हैं। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 20 मार्च तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

    छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें 

    बता दें कि छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती है. वर्तमान में कांग्रेस के पास चार और बीजेपी के पास एक सीट है. कांग्रेस से केटीएस तुलसी, फूलोदेवी नेताम, राजीव शुक्ला, रंजीता रंजन हैं, जबकि बीजेपी से देवेंद्र प्रताप सिंह राज्यसभा सांसद हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी के बाद अब राज्यसभा के समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं, जहां छत्तीसगढ़ में बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ सकती है. क्योंकि बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं, इसके अलावा एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं, ऐसे में अब बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या 3 हो सकती है, जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 2 हो सकती है. 

    किन राज्यों में कितनी सीटें खाली?

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं. इसके अलावा तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल से पांच-पांच सीटें रिक्त होंगी. ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव होंगे. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा. 

    इन सीटों का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल से 9 अप्रैल के बीच पूरा हो रहा है. उनके रिटायरमेंट के बाद नए सांसद शपथ लेंगे.

    बिहार के इन दिग्गजों का कार्यकाल खत्म

    बिहार की 5 राज्यसभा सीटें भी अप्रैल में खाली हो रही हैं. रिटायर होने वाले प्रमुख चेहरों में राज्यसभा के उपसभापति और जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह शामिल हैं. इसके साथ ही, मोदी कैबिनेट के मंत्री रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, आरजेडी से अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता भी इसी लिस्ट में हैं. बिहार की इन महत्वपूर्ण सीटों पर नए चेहरों के आने या पुराने सांसदों की वापसी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

    देश के बड़े चेहरे जो होंगे रिटायर

    महाराष्ट्र से शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और रामदास आठवले जैसे बड़े नेता रिटायर हो रहे हैं. तमिलनाडु से एम तंबीदुरै, तिरुचि शिवा और कनिमोझी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. पश्चिम बंगाल से साकेत गोखले और ऋतब्रत बनर्जी जबकि असम से रामेश्वर तेली विदा होंगे. छत्तीसगढ़ से केटीएस तुलसी, हरियाणा से रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी का नाम भी शामिल है. तेलंगाना से कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी भी रिटायर हो रहे हैं. इन सभी के स्थान पर अब नए सांसदों का चुनाव होगा.

  • Gold Price Update: सोने के दामों में भारी गिरावट, निवेशकों के लिए बड़ा अलर्ट

    Gold Price Update: सोने के दामों में भारी गिरावट, निवेशकों के लिए बड़ा अलर्ट

    इंदौर 

    मध्य प्रदेश के सर्राफा बाजारों में आज 18 फरवरी 2026 को सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दाम स्थिर बने हुए हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में आज सुबह नए रेट जारी किए गए हैं। ऐसे में अगर आप शादी-विवाह या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

    जानकारी के मुताबिक आज 22 कैरेट सोना 14,250 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया है, जो बीते दिन 14,390 रुपये प्रति ग्राम था। यानी कीमत में 140 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह 24 कैरेट सोने की कीमत में भी कमी आई है।

    आज 24 कैरेट सोना 14,963 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि कल इसका भाव 15,110 रुपये प्रति ग्राम था। यानी एक ग्राम पर करीब 147 रुपये की गिरावट आई है। अगर 10 ग्राम की बात करें तो आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,49,630 रुपये है, जो कल 1,51,100 रुपये थी। वहीं 8 ग्राम सोना आज 1,19,704 रुपये में मिल रहा है, जबकि बीते दिन इसकी कीमत 1,20,880 रुपये थी।

    वहीं चांदी की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार एक ग्राम चांदी का भाव 265 रुपये पर स्थिर बना हुआ है। इसी तरह एक किलो चांदी का रेट भी 2,65,000 रुपये पर कायम है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और डॉलर की चाल का असर घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव हो सकता है। ऐसे में खरीदारी से पहले ताजा रेट जरूर चेक कर लें।

  • टीम इंडिया में फेरबदल के संकेत! अर्शदीप को मौका, कुलदीप बाहर — प्लेइंग XI पर सस्पेंस खत्म?

    टीम इंडिया में फेरबदल के संकेत! अर्शदीप को मौका, कुलदीप बाहर — प्लेइंग XI पर सस्पेंस खत्म?

    अहमदाबाद
    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लगातार तीन जीत दर्ज कर चुकी भारतीय टीम अब सुपर-8 राउंड में जाने से पहले अपनी लय को और और धार देना चाहती है. इसी क्रम में वो आज (18 फरवरी) को नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ  अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेड‍ियम में खेलने के लिए उतरेगी. भारत ने 15 फरवरी को ही पाकिस्तान को 61 रनों से हराया और यह बात भी साब‍ित की सूर्या एंड कंपनी खिताब जीतने की प्रबल दावेदार है. 

    वहीं अहमदाबाद में जब भारतीय टीम का फोकस नीदरलैंड्स अब टीम का फोकस बड़े स्कोर खड़े करने पर है, क्योंकि अब तक 209 से अधिक का स्कोर नहीं बन पाया है. 

    क्या होगा टी20 वर्ल्ड कप में 300 पार का स्कोर? 
    सवाल यह है क्या भारतीय टीम नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ 300 प्लस का स्कोर बना पाएगी, क्योंकि आज तक टी20 वर्ल्ड कप के इत‍िहास में 300 प्लस का स्कोर नहीं बन पाया है. टी20 वर्ल्ड कप के इत‍िहास में सबसे बड़ा स्कोर श्रीलंका ने 260 साल 2007 में केन्या के ख‍िलाफ बनाया था. वहीं भारत का टी20 वर्ल्ड कप में हाइएस्ट स्कोर 218 है, यह भी 2007 में इंग्लैंड के ख‍िलाफ आया था. 

    अहमदाबाद की पिच, क्या होगी चौकों-छक्कों की बरसात?
    यह मैच अहमदाबाद में शाम 7 बजे से है. जहां रात के मुकाबलों में बड़े स्कोर का ट्रेंड रहा है. पिछले पांच में से चार नाइट मैचों में पहली पारी 210 से ऊपर गई है. ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी करना पसंद कर सकती है, ताकि विपक्ष पर दबाव बनाया जा सके.

    नीदरलैंड्स की चुनौती को हल्के में नहीं ले सकता भारत
    नीदरलैंड्स इस टूर्नामेंट में सिर्फ भाग लेने नहीं आया है. वह पाकिस्तान को लगभग हराने की स्थिति में पहुंचा था और नामीबिया पर जीत दर्ज कर चुका है. टीम यह साबित करना चाहेगी कि वह बड़ी टीमों के लिए सिर्फ अभ्यास मैच नहीं है. वैसे भारत और नीदरलैंड्स के बीच टी20 इत‍िहास में केवल एक ही मुकाबला 2022 में टी20 वर्ल्ड कप में हुआ था, ज‍िसे भारत ने 56 रनों से जीता था. 

    क्या अभ‍िषेक का फॉर्म वापस लौटेगा?
    टूर्नामेंट में अब तक अभिषेक का आगाज निराशाजनक रहा है. गोल्डन डक, फिर बीमारी, फिर चार गेंद में आउट. हालांकि टीम मैनेजमेंट को उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा है और सुपर-8 से पहले एक बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है. दूसरी ओर नीदरलैंड्स शुरुआती ओवरों में ऑफ-स्पिन का इस्तेमाल कर उन्हें फिर से जकड़ने की कोशिश कर सकता है. आर्यन दत्त नई गेंद से यह भूमिका निभाते रहे हैं और यह रणनीति फिर देखने को मिल सकती है.
    कैसा रहेगा टीम इंड‍िया का कॉम्ब‍िनेशन?
    भारतीय टीम की चोट संबंधी चिंताएं लगभग खत्म हो चुकी हैं. तेज पिच को देखते हुए टीम प्रबंधन अतिरिक्त पेस विकल्प के साथ उतर सकता है. ऐसे में अर्शदीप की वापसी और कुलदीप को आराम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. वहीं देखना होगा कि जसप्रीत बुमराह और हार्द‍िक पंड्या को टीम इंड‍िया का मैनेजमेंट आराम देता है नहीं. वैसे स‍ितांशु कोटक किसी भी ख‍िलाड़ी को आराम देने की बात से प्रीमैच कॉन्फ्रेंस में इनकार कर चुके हैं.  नीदरलैंड्स भी अपने तेज गेंदबाजों में रोटेशन करता रहा है और परिस्थितियों के अनुसार अंतिम संयोजन तय करेगा.

    भारत का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स संग मुकाबले से पहले जानें
    भारत ने लिमिटेड-ओवर ICC टूर्नामेंट में लगातार 16 मैच जीते हैं.यह सिलसिला पिछले विश्व कप फाइनल के बाद से जारी है.इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत चारों बार नीदरलैंड्स को हरा चुका है.

    नीदरलैंड्स की संभावित प्लेइंग इलेवन: माइकल लेविट, मैक्स ओ'डॉड,  बास डी लीडे, कॉलिन एकरमैन, स्कॉट एडवर्ड्स (कप्तान और विकेटकीपर), जैक लायन-कैशेट,  लोगान वैन बीक,  आर्यन दत्त,  रोलोफ वैन डेर मर्व, 10 और 11 – काइल क्लेन, फ्रेड क्लासेन और पॉल वैन मीकेरेन में से

    भारत की नीदरलैंड्स के ख‍िलाफ संभावित प्लेइंग इलेवन: अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पंड्या, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती

  • वेस्ट बैंक में जमीन पर कब्जे को लेकर इजरायल की रणनीति, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध प्रदर्शन किया

    वेस्ट बैंक में जमीन पर कब्जे को लेकर इजरायल की रणनीति, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध प्रदर्शन किया

    तेल अवीव

    इजरायल सरकार ने पश्चिमी तट में जमीन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने के हालिया फैसले की आठ मुस्लिम देशों द्वारा निंदा करने वाले संयुक्त बयान को बेबुनियाद और गुमराह करने वाला बताया है। मंगलवार को तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने पश्चिमी तट में जमीन को सरकारी सम्पति घोषित करने और उनके पंजीकरण और मालिकाना हक के सेटलमेंट के लिए प्रक्रिया को मंजूरी देने के इजरायली सरकार के फैसले की निंदा की।

    मंत्रालय ने आज एक बयान में कहा, 'यह बयान असल में बेबुनियाद और जानबूझकर गुमराह करने वाला है। फिलिस्तीनी अधिकारी ही क्षेत्र सी में गैर-कानूनी जमीन पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे है, जो कानून और मौजूदा समझौतों का उल्लंघन है।' मंत्रालय ने बताया कि इजरायली सरकार ने सिविल और सम्पति कानून के तहत प्रशासनिक कदम को मंजूरी दी है।
    क्या बोला सऊदी अरब

    सऊद अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम कब्जे वाले इलाके में एक नई कानूनी और प्रशासनिक हकीकत को थोपता है, जिससे द्वि-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी अधिकार कमज़ोर होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि फिलिस्तीनी जमीन पर इजरायल का कोई हक नहीं है। मंत्रालय ने इन कदमों को फिलिस्तीनी लोगों के चार जून, 1967 की सीमाओं पर एक आजाद देश बनाने के कानूनी हक पर हमला बताया, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो।
    प्रस्ताव

    उल्लेखनीय है कि इजरायली सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के बड़े इलाकों को अपनी भूमि के तौर पर वर्गीकृत करने की योजना को मंजूरी दी, अगर फिलिस्तीनी मालिकाना हक साबित नहीं कर पाते। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी मंत्रियों बेज़ालेल स्मोट्रिच (वित्त), यारिव लेविन (न्याय), और इजरायल काट्ज (रक्षा) ने रखा था।

    स्मोट्रिच ने इस योजना को 'हमारी सभी जमीनों पर नियंत्रण करने के लिए समाधान क्रांति' का अगला कदम बताया, जबकि लेविन ने इसे इज़रायल के अपने सभी हिस्सों पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया। इस मंजूरी से ज़मीन के मालिकाना हक के समाधान की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई हैं, जो 1967 में वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे के बाद से रुके हुए थे।

  • मुकेश सहनी के भरोसेमंद नीतीश द्विवेदी ने पेश किया नया संगठन, बिहार में लंबी यात्रा का ऐलान

    मुकेश सहनी के भरोसेमंद नीतीश द्विवेदी ने पेश किया नया संगठन, बिहार में लंबी यात्रा का ऐलान

    पटना 

    मुकेश सहनी के करीबी माने जाने वाले नीतीश कुमार द्विवेदी ने अब अपनी नई राह चुन ली है. उन्होंने ‘नौजवानों की आवाज’ नाम से एक सामाजिक संगठन बनाने की घोषणा की है. इसी के साथ उन्होंने युवाओं के मुद्दों पर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है.

    पहली बैठक में तय हुई रूपरेखा

    नई संगठन की पहली बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्विवेदी ने की. इस दौरान संगठन के विस्तार और मजबूती पर चर्चा हुई. बैठक में चार अलग-अलग प्रकोष्ठ बनाने का फैसला लिया गया. इसका मकसद युवाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यवस्थित तरीके से काम करना है. संगठन शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास जैसे विषयों पर फोकस करेगा.

    19 महीने में करेंगे 38 जिलों की यात्रा

    नीतीश कुमार द्विवेदी ने घोषणा की कि वह बिहार के 38 जिलों में 19 महीने की यात्रा पर निकलेंगे. इस दौरान वे युवाओं से सीधे संवाद करेंगे. उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान के लिए पहल करेंगे. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भी वह लगातार जनता के बीच रहे. करीब एक लाख लोगों से सीधे मुलाकात की. कई बार 10 दिन तक घर नहीं गए. जहां जगह मिली, वहीं रुक गए.

    पहले भी दिखा चुके हैं बागी तेवर

    नीतीश कुमार द्विवेदी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं. वह पहले भी पार्टी से बागी होकर महराजगंज से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. अब वह अपने संगठन के जरिए युवाओं की आवाज बनने का दावा कर रहे हैं.

    युवाओं की बात प्रशासन तक पहुंचाने का दावा

    उन्होंने कहा कि उनकी टीम गांव-गांव और जिले-जिले जाएगी. युवाओं से सीधा फीडबैक लिया जाएगा. फिर संबंधित विभागों और प्रशासन तक उनकी बात पहुंचाई जाएगी. 

  • उदयपुर हादसा: ओवरटेक की लापरवाही ने छीनी तीन युवा जिंदगियाँ, ऑटो से टकराया वाहन

    उदयपुर हादसा: ओवरटेक की लापरवाही ने छीनी तीन युवा जिंदगियाँ, ऑटो से टकराया वाहन

    उदयपुर
    जिले के कोटड़ा ब्लॉक स्थित मांडवा थाना क्षेत्र में मंगलवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया। कोदरमाल गाँव के पास ओवरटेक करने के प्रयास में एक बाइक बेकाबू होकर ऑटो से जा टकराई। इस भीषण भिड़ंत में तीन युवकों की जान चली गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है। हादसे का मंजर : दो की मौके पर मौत, एक ने अस्पताल में तोड़ा दम पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दो युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था। राहगीरों और पुलिस की मदद से तीसरे गंभीर रूप से घायल युवक को तुरंत कोटड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; इलाज के दौरान उसकी भी सांसें थम गईं।

    मृतकों की पहचान : हादसे का शिकार हुए तीनों युवक कोटड़ा क्षेत्र के ही निवासी थे, हरीश (24) पुत्र मसरू गमार, शंकरलाल (25) पुत्र सुनील खराड़ी, कालाराम (23) पुत्र किसनाराम।

    कैसे हुआ हादसा?
    मांडवा थानाधिकारी निर्मल कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में 'ओवरटेक' हादसे का मुख्य कारण सामने आया है। बाइक सवार युवक मांडवा से कोटड़ा की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने आगे चल रहे एक ऑटो को ओवरटेक करने की कोशिश की। तभी सामने से एक तेज रफ्तार जीप आ गई। जीप से बचने और ऑटो को पार करने की जद्दोजहद में बाइक सीधे ऑटो से जा टकराई।

    पुलिस की कार्रवाई
    हादसे के बाद सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुँचकर खुलवाया। मांडवा थाना पुलिस ने तीनों शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।

    सावधान! आपकी एक गलती जानलेवा है
    यह हादसा उन युवाओं के लिए एक कड़ा सबक है जो सड़कों पर रफ्तार और ओवरटेक को रोमांच समझते हैं। मांडवा-कोटड़ा मार्ग जैसे संकरे और घुमावदार रास्तों पर जरा सी लापरवाही मौत का बुलावा साबित हो सकती है।

  • ‘लिंचिंग करवाना चाहती थीं?’ — रवनीत बिट्टू का प्रियंका गांधी पर दावा, पुराना मामला फिर सुर्खियों में

    ‘लिंचिंग करवाना चाहती थीं?’ — रवनीत बिट्टू का प्रियंका गांधी पर दावा, पुराना मामला फिर सुर्खियों में

    चंडीगढ़ 

    केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला है। बिट्टू ने ऐलान किया है कि वह प्रियंका गांधी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करवाएंगे। यह शिकायत करीब पांच साल पहले किसान आंदोलन के दौरान घटी उस घटना की जांच के लिए होगी, जब बिट्टू को प्रदर्शनकारी किसानों के बीच भेजा गया था और वहां उन पर 'जानलेवा हमला' हुआ था।
    बिट्टू का दावा: 'लिंचिंग' की साजिश थी

    'द ट्रिब्यून' को दिए एक इंटरव्यू में रवनीत बिट्टू ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें प्रियंका गांधी की मंशा पर कोई संदेह नहीं था, बावजूद इसके कि प्रियंका यह अच्छी तरह जानती थीं कि किसान बिट्टू के प्रति कितने आक्रोशित थे।

    बिट्टू ने कहा- मैं इस बात की जांच करवाना चाहता हूं कि आखिर मुझे वहां भेजने के पीछे उनकी मंशा क्या थी। क्या वह कोई बड़ी घटना करवाना चाहती थीं? उस दिन कुछ भी हो सकता था। प्रियंका गांधी की ओर से यह एक हताशा भरा प्रयास था ताकि किसानों के बीच भाजपा विरोधी भावनाओं को और भड़काया जा सके।

    केंद्रीय मंत्री ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि वह और विधायक कुलबीर जीरा उस दिन किसानों की भीड़ द्वारा लगभग 'लिंच' कर दिए गए होते। उन्हें अब आशंका है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने का एक पूर्व-नियोजित 'प्लान और डिजाइन' तैयार किया गया था, ताकि इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदला जा सके।
    राहुल गांधी के 'गद्दार' वाले बयान पर पलटवार

    बिट्टू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उन्हें गद्दार कहे जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस तरह की हल्की बातें करके अपने पद की गरिमा गिराई है। बिट्टू ने सवाल किया कि कांग्रेस में कई ऐसे नेता और सांसद हैं जो दूसरी पार्टियों से आए हैं। तो क्या राहुल गांधी का मतलब है कि उनके साथ मौजूद ऐसे सभी नेता गद्दार हैं?
    कांग्रेस का पलटवार: 'आकाओं को खुश करने की कोशिश'

    पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने बिट्टू के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि बिट्टू द्वारा प्रियंका गांधी को इस विवाद में घसीटना केवल सुर्खियां बटोरने की एक हताश कोशिश है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- सालों बाद बिट्टू की याददाश्त अचानक वापस आ गई है, ठीक उसी वक्त जब उनके राजनीतिक आकाओं ने उन पर शिकंजा कसा है। पंजाब की राजनीति का यह 'फुस हो चुका कारतूस' अब सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है।

    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बिट्टू के आरोपों को बचकानी हरकत बताया। उन्होंने कहा- यह कहना कि प्रियंका गांधी ने उन्हें जबरदस्ती विरोध प्रदर्शन स्थल पर भेजा, हास्यास्पद है। बिट्टू को अपने नए आकाओं की 'गुड बुक्स' में रहने के लिए क्या-क्या करना पड़ रहा है, यह देखकर दुख होता है।

  • नए अवतार में Jawa 42 Ivory: क्लासिक लुक के साथ Royal Enfield को चुनौती

    नए अवतार में Jawa 42 Ivory: क्लासिक लुक के साथ Royal Enfield को चुनौती

     नई दिल्ली
    Jawa 42 Ivory Price & Features: देश की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी जावा येज्डी मोटरसाइकिल ने भारतीय बाजार में अपनी मशहूर बाइक Jawa 42 के कलर लाइन-अप को अपडेट किया है. रेट्रो लुक और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए मशहूर बाइक Jawa 42 अब एक नए रंग के साथ पेश की गई है. कंपनी ने इस बाइक को अब आइवरी शेड में लॉन्च किया है, जो बाइक को एक अलग और प्रीमियम लुक देता है. यह नया रंग उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर लाया गया है, जो क्लासिक स्टाइल के साथ एक्सक्लूसिव फील चाहते हैं.

    जावा 42 के नए आइवरी कलर वेरिएंट की कीमत कीमत 1.85 लाख (एक्स-शोरूम) रुपये रखी गई है. यह अब इस मॉडल का सबसे महंगा कलर वेरिएंट बन गया है. इससे पहले ड्यूल-चैनल एबीएस और अलॉय व्हील वाला वेरिएंट 1.83 लाख रुपये तक जाता था. नई कीमत के साथ यह वेरिएंट सीधे तौर पर प्रीमियम ग्राहकों को टारगेट करता है.
    डिजाइन में क्या है खास

    पेस्टल आइवरी शेड बाइक के फ्रंट फेंडर, हेडलैंप कवर, फ्यूल टैंक, साइड पैनल और रियर फेंडर पर दिया गया है. टैंक पर बड़े और बोल्ड अक्षरों में ‘Forty Two’ लिखा गया है, जबकि साइड पैनल पर ‘42’ का नंबर दिया गया है. यह डिटेल्स इसे बाकी कलर वेरिएंट्स से अलग बनाती हैं. इंजन और अन्य पार्ट्स को ब्लैक पेंट से फिनिश किया गया है, जिससे बाइक को फैक्ट्री कस्टम जैसा लुक मिलता है.

    मैकेनिकल तौर पर नई आइवरी जावा 42 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें 294.7 सीसी का लिक्विड-कूल्ड इंजन मिलता है. जो 27 बीएचपी की पावर और 26.84 न्यूटर मीटर (Nm) का टॉर्क जेनरेट करता है. इंजन के साथ छह-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया है, जिसमें असिस्ट और स्लिपर क्लच की सुविधा भी मिलती है. बाइक डबल क्रैडल फ्रेम पर बनी है और इसमें आगे टेलिस्कोपिक फोर्क तथा पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं. हाई-स्पेक वेरिएंट में अलॉय व्हील मिलते हैं, जबकि ग्राहक वायर-स्पोक रिम्स का विकल्प भी चुन सकते हैं.

    वारंटी और सर्विस सपोर्ट

    Jawa Yezdi की ओनरशिप एश्योरेंस प्रोग्राम के तहत जावा 42 के साथ 4 साल या 50,000 किलोमीटर की स्टैंडर्ड वारंटी दी जाती है. इसके अलावा ग्राहक कुछ और पैसे खर्च कर एक्सटेंडेड वारंटी भी ले सकते हैं. जिसके बाद कुल वारंटी 6 साल तक की हो जाएगी. इसके अलावा बाइक पर 8 साल तक की रोडसाइड असिस्टेंस और 5 साल तक का एएमसी पैकेज भी उपलब्ध है, जो पूरे देश में लागू होता है.
     

  • SC का अहम फैसला: सलवार नाड़ा खोलना अश्लील जरूर है, लेकिन ‘रेप की कोशिश’ नहीं

    SC का अहम फैसला: सलवार नाड़ा खोलना अश्लील जरूर है, लेकिन ‘रेप की कोशिश’ नहीं

     इलाहाबाद
    यौन अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी व्याख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक बेहद विवादित फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी महिला को गलत नीयत से पकड़ना और उसकी सलवार का नाड़ा खोलना महज 'छेड़छाड़' या 'रेप की तैयारी' नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'रेप का प्रयास' (Attempt to Rape) है।

    अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य को कम गंभीर अपराध मानकर आरोपी को हल्की सजा देना न्याय की भावना के खिलाफ है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने इसे केवल महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना था।
    क्या है पूरा मामला?

    मामला काफी गंभीर था, जिसमें आरोपियों ने महिला के साथ न केवल अश्लील हरकतें कीं बल्कि उसके कपड़े उतारने का प्रयास भी किया। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक अजीबोगरीब तर्क देते हुए इसे 'रेप का प्रयास' मानने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि यह कृत्य 'रेप की तैयारी' के अंतर्गत आता है, जिसके लिए सजा कम होती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आक्रोश फैल गया था। महिला अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।
    सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

    हाईकोर्ट के इस विवादास्पद फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। यह कदम एनजीओ 'वी द वुमन' की संस्थापक और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता द्वारा लिखे गए एक पत्र के बाद उठाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के साथ-साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की।
    SC की तीखी टिप्पणी और फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत 'रेप के प्रयास' के मूल और सख्त आरोपों को बहाल कर दिया है। फैसला सुनाते हुए CJI सूर्यकांत ने न्यायिक संवेदनशीलता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि जब कोई न्यायाधीश यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा हो, तो उसे मामले की तथ्यात्मक हकीकत और पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील होना चाहिए।

    बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा, "कोई भी जज या किसी भी अदालत का फैसला तब तक पूर्ण न्याय नहीं कर सकता, जब तक कि वह मुकदमे के तथ्यों की वास्तविकताओं और अदालत का रुख करने वाली पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील न हो।"

    अदालत ने यह भी साफ किया कि न्यायाधीशों का प्रयास न केवल संवैधानिक और कानूनी सिद्धांतों के ठोस अनुप्रयोग पर आधारित होना चाहिए, बल्कि उसमें करुणा और सहानुभूति का भाव भी होना चाहिए। इन स्तंभों के अभाव में न्यायिक संस्थान अपने महत्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पाएंगे।

    सुप्रीम कोर्ट ने केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भविष्य के लिए एक व्यापक सुधार का खाका भी खींचा है। कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में जजों को अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है।

    इसके लिए, सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक और पूर्व जस्टिस अनिरुद्ध बोस से विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का अनुरोध किया है। यह समिति यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों के लिए 'संवेदनशीलता और करुणा' विकसित करने हेतु दिशा-निर्देश तैयार करेगी। अदालत ने यह विशेष निर्देश दिया कि ये दिशा-निर्देश सरल भाषा में होने चाहिए, न कि विदेशी अदालतों के जटिल कानूनी शब्दों से भरे हुए।