Author: NewseDay

  • सदन में बवाल पर बोले योगी: राज्यपाल ही नहीं, मां का भी किया गया अपमान

    सदन में बवाल पर बोले योगी: राज्यपाल ही नहीं, मां का भी किया गया अपमान

    अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमानः योगी

    बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष के आचरण को बताया सनातन के विपरीत

    लखनऊ
     राज्यपाल माननीय आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान शुक्रवार को हुए हंगामे पर विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के आचरण से न केवल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख, बल्कि मातृ शक्ति का भी अपमान हुआ। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष के आचरण को सनातन की परंपरा के विपरीत बताया।
    राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि माननीय राज्यपाल यहां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आई थीं। उनका यह कार्यक्रम अचानक नहीं थोपा गया था, दलीय बैठकों में इसकी चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आप श्रेष्ठ कुल में पैदा हुए, ब्राह्मण हैं, वयोवृद्ध हैं और सदन में वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं, इसीलिए आपकी बात का बुरा नहीं माना जाता, लेकिन यह आचरण उचित नहीं है। आप अपने वक्तव्य में सनातन की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन धर्म की परंपरा में मां की उम्र या अपनी उम्र से बड़ी महिला को मां के समान सम्मान देने का विधान है। इस बारे में महर्षि वेदव्यास ने हमें हजारों साल पहले बताया है। वह सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्याकार हैं। उन्होंने वेदों को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ी को दिया। उनका कार्यकाल पांच हजार वर्ष पूर्व था, तब भारत में सबसे विकसित सभ्यता थी, तब भारत दुनिया को दिशा दिखा रहा था। महर्षि वेदव्यास जी ने कहा था.. ‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया।' यानी मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां  के समान कोई रक्षक नहीं और मां के समान कोई प्रिय नहीं है।

  • पाकिस्तान के खिलाफ मैच में खेलेंगे अभिषेक, वरुण बोले- अब पूरी तरह फिट

    पाकिस्तान के खिलाफ मैच में खेलेंगे अभिषेक, वरुण बोले- अब पूरी तरह फिट

    नई दिल्ली
    भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने कहा है कि पेट के संक्रमण से उबर रहे आक्रामक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले टी20 विश्व कप के महत्वपूर्ण मुकाबले में खेलने के लिए पूरी तरह फिट दिख रहे हैं।

    अभिषेक अस्वस्थ होने के कारण गुरुवार को नामीबिया के खिलाफ मैच में नहीं खेल पाए थे। पेट के संक्रमण के कारण उन्हें दो दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था।

    चक्रवर्ती ने कहा कि यह सलामी बल्लेबाज बेहतर महसूस कर रहा है और उन्हें लगता है कि अगला मैच खेल सकता है। चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह अगला मैच खेलेगा। मुझे उसकी स्थिति के बारे में पूरी तरह नहीं पता। लेकिन मैंने उससे बात की है, वह अच्छी स्थिति में लग रहा है। उसने आज कुछ अभ्यास भी किया। उसने बताया कि वह वापसी की प्रक्रिया में है।’’

    भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस के समय कहा था कि अभिषेक पूरी तरह फिट होने से पहले एक या दो मैच से बाहर रह सकते हैं। अभिषेक की अनुपस्थिति में संजू सैमसन ने ईशान किशन के साथ पारी की शुरुआत की थी।

     

  • सरकार का बड़ा फैसला: IAS अधिकारियों के तबादले, दीपक सक्सेना को आबकारी आयुक्त पद मिला

    सरकार का बड़ा फैसला: IAS अधिकारियों के तबादले, दीपक सक्सेना को आबकारी आयुक्त पद मिला

    भोपाल
     राज्य सरकार ने शुक्रवार आधी रात बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए 11 आईएएस और 4 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. नई लिस्ट के अनुसार, कई अहम विभागों में शीर्ष स्तर पर बदलाव हुआ है. 2009 बैच के मनीष सिंह को दोबारा जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया है, जबकि अब तक जनसंपर्क की कमान संभाल रहे दीपक कुमार सक्सेना को आबकारी आयुक्त ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

    स्वास्थ्य और वन विभाग में अदला-बदली
    अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को वन विभाग से हटाकर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और भोपाल गैस त्रासदी विभाग की कमान सौंपी गई है. उनके पास पर्यावरण विभाग पहले की तरह बना रहेगा, इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा आयुक्त की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी वर्णवाल को दी गई है. वहीं प्रमुख सचिव संदीप यादव को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाकर वन विभाग का मुखिया बनाया गया है. उन्हें प्रवासी भारतीय विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है.

     

    MP में 11 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर

    IAS अधिकारी वर्तमान पदस्थापना नवीन पदस्थापना
    IAS अशोक बर्णवाल (1991) अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, वन विभाग तथा कृषि उत्पादन आयुक्त, मध्य प्रदेश तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, पर्यावरण विभाग एवं पर्यावरण आयुक्त तथा महानिदेशक, एप्को (अतिरिक्त प्रभार) (1) अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा
    (2) अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग तथा कृषि उत्पादन आयुक्त, मध्य प्रदेश तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, पर्यावरण विभाग तथा पर्यावरण आयुक्त तथा महानिदेशक, एप्को तथा आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, मध्य प्रदेश भोपाल (अतिरिक्त प्रभार)
    IAS संदीप यादव (2000) प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग तथा प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, प्रवासी भारतीय विभाग तथा आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, मध्य प्रदेश भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) (1) प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, वन विभाग तथा
    (2) प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन, प्रवासी भारतीय विभाग (अतिरिक्त प्रभार)
    IAS अजय गुप्ता (2009) संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मध्य प्रदेश, भोपाल प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर
    IAS मनीष सिंह (2009) सचिव, मध्य प्रदेश शासन, जेल विभाग तथा सचिव, मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, भोपाल तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (अतिरिक्त प्रभार) (1) आयुक्त, जनसंपर्क मध्य प्रदेश, भोपाल तथा
    (2) सचिव, मध्य प्रदेश शासन, परिवहन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, भोपाल तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश माध्यम (अतिरिक्त प्रभार)
    IAS अभिजीत अग्रवाल (2010) आबकारी आयुक्त, मध्य प्रदेश, ग्वालियर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल
    IAS दीपक कुमार सक्सेना (2010) आयुक्त, जनसंपर्क मध्यप्रदेश, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश माध्यम (अतिरिक्त प्रभार) आबकारी आयुक्त, मध्य प्रदेश, ग्वालियर
    IAS उमाशंकर भार्गव (2011) राज्यपाल के अपर सचिव, राजभवन, भोपाल संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मध्य प्रदेश, भोपाल
    IAS सुनील दुबे (2016) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, भिंड राज्यपाल के उप सचिव, राजभवन, भोपाल
    IAS संघमित्रा गौतम (2016) उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, अलीराजपुर
    IAS नंदा भलावे कुशरे (2019) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, आगर मालवा अपर परियोजना संचालक, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, भोपाल
    IAS कमल सोलंकी (2019) उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन, स्कूल शिक्षा विभाग मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, रायसेन

    3 SAS अधिकारियों का भी तबादला

    • अधिकारी शिवशेखर शुक्ला, भाप्रसे (1994), अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, गृह विभाग तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग तथा आयुक्त-सह-संचालक, स्वराज संस्थान एवं न्यासी सचिव, भारत भवन तथा अपर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग (अतिरिक्त प्रभार) को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, जेल विभाग का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है.
    • अधिकारी अजय गुप्ता, भाप्रसे (2009) द्वारा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का कार्यभार ग्रहण करने पर अधिकारी विशेष गढ़पाले, भाप्रसे (2008) प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर तथा सचिव, मध्य प्रदेश शासन, ऊर्जा विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर (अतिरिक्त प्रभार) केवल प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे.
    • अधिकारी अभिजीत अग्रवाल, भाप्रसे (2010) द्वारा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल का कार्यभार ग्रहण करने पर श्री कुमार पुरुषोत्तम, भाप्रसे (2012) प्रबंध संचालक, कृषि विपणन बोर्ड-सह-आयुक्त, मण्डी, मध्य प्रदेश, भोपाल तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) केवल प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे.

    मनीष सिंह फिर संभालेंगे जनसंपर्क
    सरकार ने 2009 बैच के मनीष सिंह को दोबारा जनसंपर्क विभाग की कमान दी है. वे पहले भी इस विभाग का नेतृत्व कर चुके हैं. उनके पास परिवहन और जेल विभाग पूर्ववत रहेंगे. साथ ही मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम और इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा. जनसंपर्क संभाल रहे दीपक कुमार सक्सेना को अहम जिम्मेदारी देते हुए आबकारी आयुक्त ग्वालियर बनाया गया है. लंबे समय से आबकारी देख रहे अभिजीत अग्रवाल को मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ भोपाल का प्रबंध संचालक बनाकर वापस बुलाया गया है.

    कृषि वर्ष से पहले अहम बदलाव
    किसान कल्याण एवं कृषि विभाग से अजय गुप्ता को ह
    टाकर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर का प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया है. राज्यपाल के अपर सचिव रहे उमाशंकर भार्गव को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का संचालक बनाया गया है. यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्य सरकार वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है. ऐसे में कृषि विभाग में नई प्रशासनिक रणनीति के संकेत माने जा रहे हैं.

    इसके साथ ही भिंड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील दुबे को राज्यपाल का उप सचिव बनाया गया है. जबकि उच्च शिक्षा विभाग की उपसचिव संघमित्रा गौतम को आलीराजपुर जिले का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है. आगर मालवा की सीईओ नंदा भलावे कुशरे को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का परियोजना संचालक बनाया गया है. जबकि कमल सोलंकी को रायसेन जिले का मुख्य कार्यक्रम अधिकारी नियुक्त किया गया है.

    राज्य प्रशासनिक सेवा के भी तबादले
    आईएएस के साथ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में भी फेरबदल किया गया है. शाजापुर के अपर कलेक्टर भुरला सिंह सोलंकी को जिला पंचायत आगर मालवा का सीईओ, मिलिंद कुमार नामदेव को खरगोन और वीर सिंह चौहान को भिंड जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है. जबकि राकेश शर्मा को मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल का मुख्य महाप्रबंधक बनाया गया है.

  • रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक: भारत ने चार बड़ी ताकतों के साथ संतुलन बनाकर दुनिया को चौंकाया

    रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक: भारत ने चार बड़ी ताकतों के साथ संतुलन बनाकर दुनिया को चौंकाया

    नई दिल्ली

    भारत के रक्षा मंत्रालय ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. इससे पहले बीते कुछ महीनों में कई अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. भारत ऐसा अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए कर रहा है. लेकिन, भारत ने अपनी इन रक्षा तैयारियों में अपनी पारंपरिक नीति से अलग एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. वह अब किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. उसने अपनी विदेश नीति की तरह ही रक्षा खरीद नीति में मल्टीपोलर बना दिया है. बीते कुछ महीनों के डेवलपमेंट को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि भारत ने इस नीति में रूस के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे सुपरपावर्स को साधने का काम किया है. तकनीकी रूप से जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है लेकिन वह एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति और सैन्य शक्ति है.

    भारत की इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक वैश्विक पावर पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए पूर्व और पश्चिम दोनों से सर्वश्रेष्ठ तकनीक हासिल करने की है. हाल के महीनों में रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ बड़े सौदों ने न केवल इन देशों को साधने का काम किया है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत किया है.

    रूस के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते

    रूस भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद रक्षा साझेदार बना हुआ है. वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद रूस मौजूदा वक्त में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का संयुक्त उद्यम इसका प्रमुख उदाहरण है. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की दो स्क्वाड्रन इसी साल डिलीवर होने वाले थहैं. इतना ही नहीं गुरुवार को ही रक्षा मंत्रालय ने रूस से 10 हजार करोड़ में एस-400 सिस्टम की मिसाइलें खरीद फैसला किया. इसी तरह रूस के साथ मिलकर ही यूपी के अमेठी में 6 लाख से अधिक AK-203 असॉल्ट राइफलों का स्वदेशी उत्पादन चल रहा है. सरकारी कंपनी एचएएल में Su-30MKI इंजनों का निर्माण भी रूस के सहयोग से चल रहा है. ये सौदे रूस को भारत में स्थायी बाजार देते हैं, जबकि भारत को सस्ती और विश्वसनीय तकनीक मिलती है.

    अमेरिका से मिलेगा हाईटेक तकनीक

    अमेरिका के साथ संबंध खरीदार-विक्रेता से व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच चुके हैं. GE-F414 जेट इंजन सौदा सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू है, जिसमें HAL के साथ 80 फीसदी तकनीक ट्रांसफर की बात चल रही है. यह सुविधा पहले केवल NATO सहयोगियों को मिलती थी. यह सौदा मार्च 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है, जो तेजस MkII और AMCA जैसे स्वदेशी फाइटर को पावर देगा. इसके अलावा, 31 MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन और 6 अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन विमानों की खरीद हिंद महासागर में अभूतपूर्व निगरानी प्रदान करेगी. अमेरिका को भारत एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार मिलता है, जबकि भारत को ‘सबमरीन हंटर’ जैसी उन्नत क्षमता मिलती है.

    रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से 114 राफेल खरीदने को मंजूरी दे दी है.

    फ्रांस बना एक सबसे भरोसेमंद साझेदार

    फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद पश्चिमी साथी साबित हुआ है, जहां तकनीक साझा करने में कोई शर्त नहीं लगाई जाती. 36 राफेल फाइटर की सफल खरीद के बाद रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने गुरुवार को 114 राफेल जेट्स की मंजूरी दी है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है. इनमें से ज्यादातर भारत में निर्मित होंगे, जिसमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी. नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (मरीन) पहले ही क्लियर हैं. स्कॉर्पीन (कलवरी-क्लास) सबमरीन पर सहयोग जारी है, जहां मझगांव डॉक अतिरिक्त यूनिट बना रहा है. फ्रांस को भारत में बड़ा बाजार और सह-उत्पादन मिलता है, जबकि भारत को हाई-परफॉर्मेंस फाइटर और
    जर्मनी के साथ सबमरीन डील

    जर्मनी भारत की अंडरवाटर डोमिनेंस में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. प्रोजेक्ट-75(I) के तहत थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन का सौदा करीब $8-10 बिलियन (70,000-90,000 करोड़) का है. जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यात्रा के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए और मार्च तक यह सौदा फाइनल होने की उम्मीद है. ये सबमरीन मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड में बनेंगी, जिसमें फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी.

  • कामकाज की दुनिया में क्रांति: इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स रखेगी यह कंपनी

    कामकाज की दुनिया में क्रांति: इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स रखेगी यह कंपनी

    डेवलपर्स के लिए टूल बनाने वाली कंपनी StackBlitz ने बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने कहा है कि वह इस साल इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स को काम पर रखेगी. यानी कंपनी की ग्रोथ अब मानव कर्मचारियों से नहीं बल्कि डिजिटल वर्कर्स से होगी. कंपनी के सीईओ का कहना है कि AI एजेंट अब सिर्फ कोडिंग हेल्पर नहीं रहे, बल्कि बिजनेस के एक्टिव योगदानकर्ता बन रहे हैं. यह ट्रेंड आने वाले समय में पूरी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की हायरिंग सोच बदल सकता है. इससे जॉब मार्केट पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.

    StackBlitz के सीईओ एरिक सिमंस ने साफ कहा है कि कंपनी अब पारंपरिक तरीके से टीम नहीं बढ़ाएगी. इंजीनियर, सेल्स और सपोर्ट स्टाफ जोड़ने के बजाय AI सॉफ्टवेयर एजेंट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी. ये एजेंट एक साथ कई काम संभाल सकते हैं और टाइम जोन या काम के घंटों की सीमा में बंधे नहीं होते. कंपनी का मानना है कि डिजिटल एजेंट्स ऑपरेशन को ज्यादा स्केलेबल और तेज बनाते हैं. यह मॉडल लागत घटाने और स्पीड बढ़ाने दोनों में मदद कर सकता है.

    AI एजेंट सिर्फ कोड नहीं, फैसले भी लेंगे

    एरिक सिमंस के मुताबिक AI एजेंट भविष्य में यूजर की तरफ से दूसरे एजेंट्स से बात करेंगे. वे कीमतों पर बातचीत, बुकिंग चेक करना और ऑनलाइन राय बनाना जैसे काम भी कर सकेंगे. उनका कहना है कि लोग अपने AI एजेंट की सलाह पर खरीद, रिजर्व और फैसले लेने लगेंगे. यह AI को एक पर्सनल डिजिटल प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करता है. यानी AI एजेंट यूजर का एक्सटेंशन बनकर काम करेंगे, सिर्फ टूल नहीं रहेंगे.

    AI एजेंट इकोसिस्टम के शुरुआती संकेत

    इस दिशा में शुरुआती उदाहरण भी सामने आ चुके हैं, जैसे ओपनक्लॉ नाम का ओपन सोर्स AI असिस्टेंट. यह व्हाट्सएप, स्लैक और आईमैसेज जैसे प्लेटफॉर्म के भीतर काम कर सकता है और सीमित मानव हस्तक्षेप के साथ एजेंट्स को आपस में समन्वय करने देता है. सिमंस ने सॉफ्टवेयर और SaaS शेयरों में हाल की गिरावट को भी इससे जोड़ा है. उनका मानना है कि जब AI हजारों गुना तेजी से सॉफ्टवेयर बना और बदल सकता है, तो पारंपरिक एक्सपर्ट आधारित मॉडल दबाव में आएंगे. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो कई टेक कंपनियां इसी रास्ते पर चल सकती हैं.

  • सीमा हैदर के आगे झुका गुलाम, जंग में पीछे हटने को हुआ मजबूर

    सीमा हैदर के आगे झुका गुलाम, जंग में पीछे हटने को हुआ मजबूर

    ग्रेटर नोएडा
    चार बच्चों को लेकर पाकिस्तान से भागकर भारत आई सीमा हैदर ने अपने पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर के खिलाफ एक जंग में जीत हासिल करती दिख रही है। दोनों के बीच कानूनी लड़ाई भले ही अभी जारी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों के बीच लंबे समय तक चली कुश्ती में गुलाम हैदर अब हांफ गया है।
     
    चार बच्चों को लेकर पाकिस्तान से भागकर भारत आई सीमा हैदर ने अपने पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर के खिलाफ एक जंग में जीत हासिल करती दिख रही है। दोनों के बीच कानूनी लड़ाई भले ही अभी जारी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों के बीच लंबे समय तक चली कुश्ती में गुलाम हैदर अब हांफ गया है। एक तरफ जहां सीमा हैदर यूट्यूब से होने वाली कमाई से सचिन का ना सिर्फ घर चला रही है, बल्कि नया मकान भी बनवा दिया है तो दूसरी तरफ गुलाम उसे गाली दे-देकर थक चुका है। हैदर ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली है।

    दरअसल, सीमा हैदर के भारत आने के बाद जब वह पकड़ी गई तो मीडिया और सोशल मीडिया में वह बहुत चर्चित हो गई। इस बीच सीमा हैदर के पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर ने भी सोशल मीडिया पर एंट्री मारी। सीमा की तरह वह भी फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर मशहूर हो गया। एक तरफ लोग सीमा की प्रेम कहानी सुनते तो दूसरी तरफ गुलाम हैदर की झुंझलाहट को देखते थे। लाइक्स, कॉमेंट और व्यूज के जरिए होने वाली कमाई ने हैदर को भी एक नया रोजगार दे दिया था।

    गुलाम हर दिन वीडियो बनाने लगा। कभी लाइव आकर तो कभी लंबे-लंबे वीडियो बनाकर व्यूज बटोरने लगा। वह कभी सीमा हैदर को गालियां देता, कभी उसका नाम लेकर थूकता, कभी अपने बच्चों को वापस पाने की तड़प दिखाता, कभी भारत सरकार से बच्चों की वापसी के लिए गुहार लागाता था। इधर से सीमा कुछ कहती तो अगले दिन गुलाम उसका जवाब लेकर हाजिर होता था। सीमा के डांस वीडियो, सचिन के संग रोमांस, सचिन के बच्चे की मां बनने आदि से जुड़े वीडियो पर गुलाम हर दिन यूट्यूब लाइव करने लगा।

    शांत पड़ चुका है गुलाम हैदर
    एक तरफ सीमा के व्यूज बढ़ते चले गए तो दूसरी तरफ एक ही बात को हर दिन दोहराने की वजह से गुलाम हैदर के व्यूज घटने लगे। धीरे-धीरे वह कम वीडियो बनाने लगा और अब पिछले एक महीने से पूरी तरह शांत पड़ चुका है। इंस्टाग्राम, फेसबुक के साथ ही उसने यूट्यूब पर भी आना बंद कर दिया है। गुलाम हैदर आखिरी बार करीब एक महीने पहले यूट्यूब पर लाइव हुआ था और तब उसने सीमा की बजाय बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर अपनी भड़ास निकाली थी। डॉ. नुसरत का हिजाब हटाए जाने से वह बौखलाया हुआ था।

    इधर यूट्यूब की कमाई से सीमा की बल्ले-बल्ले
    एक तरफ जहां गुलाम हैदर शांत पड़ चुका है तो दूसरी तरफ सीमा हैदर पूरी तरह एक व्लॉगर बन चुकी है। बच्चों को पालने से लेकर बाहर जाने, घर के कामकाज से जुड़े वीडियो बनाकर वह यूट्यूब से अच्छी कमाई कर रही है। सीमा ने कभी अपनी कमाई का खुलासा तो नहीं किया लेकिन हाल हमें उसने एक बार फिर कहा कि यूट्यूब की कमाई से ही सचिन का घर चल रहा है और उन्होंने नया मकान भी बनवा लिया है। सचिन दूसरी बार पिता बनने जा रहा है तो सीमा छठे बच्चे को जन्म देने वाली है।

  • तेल लगाने से पहले रुकिए! डैंड्रफ समझकर स्कैल्प की इस समस्या को नज़रअंदाज़ न करें

    तेल लगाने से पहले रुकिए! डैंड्रफ समझकर स्कैल्प की इस समस्या को नज़रअंदाज़ न करें

    अक्सर जब हमारे सिर में खुजली होती है या डैंड्रफ दिखने लगते हैं, तो हम तुरंत तेल या घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं, लेकिन अगर लाख कोशिश के बाद भी इस परेशानी से राहत नहीं मिलता, तो आपको रुकना चाहिए। हो सकता है जिसे आप मामूली डैंड्रफ समझकर इग्नोर कर रहे हैं, वह आपके स्कैल्प से जुड़ी कोई समस्या हो।

    बालों में डैंड्रफ होना एक ऐसी आम समस्या है, जो कभी भी किसी को भी हो सकती है। यह बालों में होने वाली खुजली और सफेद फ्लेक्स का कारण भी है। हम कई बार इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या कभी ड्राई स्कैल्प समझकर शैम्पू-तेल या घरेलू नुस्खे को आजमाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बार यह सिर्फ ड्राईनेस नहीं होता? अगर तमाम कोशिशों के बाद भी यह समस्या बनी रहती है, तो समझ लीजिए आपका स्कैल्प आपको कोई बड़ा संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

    ड्राईनेस और डैंड्रफ की कैसे करें पहचान?

    अक्सर हम सिर में होने वाली खुजली और फ्लेक्स को डैंड्रफ समझ लेते हैं, लेकिन यह 'ड्राई स्कैल्प' भी हो सकता है। इसलिए दोनों के बीच के फर्क को समझना इलाज के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे में नीचे दिए गए कुछ संकेतों से आप इन्हें आसानी से पहचान सकते हैं।

    ड्राई स्कैल्प

    ड्राई स्कैल्प में सफेद फ्लेक्स छोटी और सूखी होती है।
    नमी की कमी के कारण स्कैल्प ड्राई होती है।
    यह अक्सर सर्दियों में या बहुत ज्यादा बाल धोने से होती है।

    डैंड्रफ

    डैंड्रफ में फ्लेक्स बड़ी, चिपचिपी और पीले रंग की होती है।
    इनसे स्कैल्प पर खुजली और रेडनेस भी हो सकती है।
    मैलासेजिया नाम के यीस्ट और स्कैल्प पर ज्यादा ऑयल के कारण डैंड्रफ होता है।
    जिद्दी डैंड्रफ की असली वजह क्या है?

    अगर आपको डैंड्रफ की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है, तो इसके पीछे ये तीन मुख्य कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसकी असली वजह।

    सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस

    बार-बार होने वाले डैंड्रफ की वजह 'सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस' हो सकती है। यह त्वचा की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें स्कैल्प के साथ-साथ आइब्रो, नाक और कानों के पास भी फ्लेक्स, रेडनेस, खुजली और कभी-कभी चिपचिपा भी महसूस हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे जेनेटिक्स, कोई खास दवाइयां, ज्यादा ऑयली स्किन या कमजोर इम्युनिटी।

    वहीं, स्ट्रेस, ठंडा मौसम और ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स भी इसे और बिगाड़ सकते हैं। यह समस्या ज्यादातर पुरुषों, बच्चों और टीनएजर में आम है। अगर आपको भी यह समस्या महसूस होती है, तो इसे डैंड्रफ समझकर नजरअंदाज न करें।

    फंगस का बढ़ना

    डैंड्रफ की असली वजह आपके सिर पर रहने वाला एक छोटा सा यीस्ट होता है, जिसका नाम है मैलासेजिया। यह फंगस हर किसी के सिर पर होता है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह बहुत तेजी से बढ़ने लगता है। इससे सिर की त्वचा में जलन पैदा होती है। हम अक्सर डैंड्रफ होने पर खूब तेल लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन ज्यादा तेल इस फंगस को बढ़ावा देता है।

    इसकी वजह से स्कैल्प की डेड स्किन बहुत तेजी से झड़ने लगती है, जिसे हम डैंड्रफ कहते हैं। इसलिए एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में मॉइस्चराइजर की जगह एंटी-फंगल इंग्रीडिएंट्स मिलाए जाते हैं। इससे राहत पाने के लिए मेडिकेटेड शैम्पू, लोशन या फोम की मदद ले सकते हैं। ध्यान रखें कि बालों की सही साफ-सफाई रखना ही इस फंगस से बचने का सबसे बड़ा तरीका है।

    सोरायसिस

    सोरायसिस का खतरा कभी-कभी जिसे हम डैंड्रफ समझते हैं, वह स्कैल्प सोरायसिस भी हो सकता है। इसमें सिर पर चांदी जैसी मोटी परत जमने लगती है, जिससे खुजली की समस्या पैदा होती है। कई बार यह समस्या आपके माथे के बाहर तक फैल जाती है। दरअसल, इस समस्या का कोई परमानेंट इलाज तो नहीं है, लेकिन सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर आप इसके लक्षणों को कंट्रोल जरूर कर सकते हैं।

     

  • महापड़ाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, खेजड़ी की अवैध कटाई पर बनेगा कड़ा कानून

    महापड़ाव के बाद सरकार का बड़ा फैसला, खेजड़ी की अवैध कटाई पर बनेगा कड़ा कानून

    बीकानेर

    बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के विरोध में पिछले 11 दिनों से जारी महापड़ाव गुरुवार देर शाम समाप्त हो गया। लंबे समय से खेजड़ी संरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे स्थानीय लोगों ने सरकार के फैसले के बाद धरना खत्म करने की घोषणा की।

    12 फरवरी की शाम सरकार की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए धरना स्थल पहुंचा। इसमें मंत्री केके बिश्नोई, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी बिश्नोई, जसवंत बिश्नोई और पब्बाराम बिश्नोई शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद अहम निर्णय लिया गया।

    सरकार ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। राजस्व सचिव की ओर से लिखित आदेश जारी कर सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कटाई पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सख्त निगरानी रखने और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है।

    उल्लेखनीय है कि 5 फरवरी को विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण को लेकर घोषणा की गई थी, जिसके बाद इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खेजड़ी संरक्षण के लिए विशेष कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित विधेयक के जरिए अवैध कटाई पर सख्त प्रावधान, नियमित निरीक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर गंभीर नजर आ रहे हैं। सरकार का कहना है कि मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेजड़ी का विशेष पारिस्थितिक महत्व है और इसे संरक्षित करना प्राथमिकता में शामिल है। सरकार के निर्णय के बाद संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने आभार जताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से खेजड़ी संरक्षण की मांग की जा रही थी और अब सरकार की पहल से सकारात्मक संदेश गया है।

    कब, क्या-क्या हुआ?

    2 फरवरी : पॉलिटेक्निक कॉलेज में विशाल जनसभा के साथ महापड़ाव शुरू। हजारों पर्यावरण प्रेमी देशभर से पहुंचे।
    3 फरवरी : 29 संतों सहित 363 पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे।
    4 फरवरी : आमरण अनशन करने वालों की संख्या 537 पहुंची, महापड़ाव स्थल पर अस्थायी अस्पताल बनाया गया।
    5 फरवरी : संसद और विधानसभा में गूंजी खेजड़ी संरक्षण की आवाज। मुख्यमंत्री का संदेश लेकर प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, आमरण अनशन समाप्त हुआ।
    6 फरवरी : प्रदेशभर में खेजड़ी कटाई पर रोक की मांग पर अड़े पर्यावरण प्रेमी, क्रमिक अनशन शुरू।
    8 फरवरी : संतों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में मुख्यमंत्री से मिला।
    9 फरवरी : महापड़ाव जारी रखने की घोषणा।
    10 फरवरी : शहर में कलश यात्रा निकाली गई।
    11 फरवरी : संतों ने मांग पूरी होने पर महापड़ाव स्थगित करने का शपथ पत्र दिया, मौन जुलूस निकाला।
    12 फरवरी : सरकार के निर्देश जारी होने के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा।

    खेजड़ी संरक्षण कानून की तैयारी, प्रशासन अलर्ट

    राजस्व विभाग के निर्देशों के बाद अब प्रदेशभर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खेजड़ी कटाई रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही विशेष कानून लाकर खेजड़ी संरक्षण को स्थायी रूप से मजबूत किया जाएगा।

  • वाटिका पर 30 करोड़ खर्च करेगी बिहार सरकार, औषधीय पौधे में ढूंढा जाएगा कैंसर का उपचार

    वाटिका पर 30 करोड़ खर्च करेगी बिहार सरकार, औषधीय पौधे में ढूंढा जाएगा कैंसर का उपचार

    भागलपुर.

    जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सूबे का पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जहां हर्बल वाटिका बनेगी। दो माह के अंदर हर्बल वाटिका तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हर्बल वाटिका तैयार होने के बाद छात्र आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच के संबंध पर शोध करेंगे।

    औषधीय पौधों पर अध्ययन कर कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार की संभावनाएं तलाशेंगे। कॉलेज परिसर में बनने वाली हर्बल वाटिका में बीएयू का सहयोग लिया जा रहा है। यह वाटिका बीएयू के वानिकी विभाग के अध्यक्ष की देखरेख में लगाई जा रही है।

    चालीस डिस्मिल जमीन पर लगेगी वाटिका
    मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार ने बताया कि कॉलेज के मुख्य भवन के पीछे, जहां एनिमल हाउस बनाया गया है, वहीं लगभग 40 डिस्मिल खाली जमीन है। इसी जमीन पर हर्बल वाटिका लगाने की योजना है। फार्माकोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जीतेंद्र कुमार ने बताया कि हर्बल वाटिका में एलोवेरा, पुदीना, लेमनग्रास, लौंग, हरसिंगार, सप्तपर्णी, अजवाइन, अश्वगंधा, शतावर, तितराज, कपूर, शंखपुष्पी, शुगर क्योर, पत्थरचूर समेत 100 से अधिक औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यहां लगाया जाने वाला प्रत्येक पौधा किसी न किसी रोग के उपचार में उपयोगी साबित होगा।

    आयुर्वेद एवं एलोपैथी के संबंधों पर होगा शोध

    • इस वाटिका को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और एलोपैथी के संबंध को समझना है। डॉ. जीतेंद्र ने बताया कि यह वाटिका एमबीबीएस एवं फार्माकोलॉजी में पीजी कर रहे छात्रों के लिए बेहतर अनुभव लेकर आएगी। वाटिका की देखरेख की जिम्मेदारी फार्माकोलॉजी विभाग की होगी।
    • फार्माकोलॉजी के छात्र यह अध्ययन करेंगे कि औषधीय पौधों से किस प्रकार की दवाएं बनाई जा सकती हैं। कई अंग्रेजी दवाएं भी औषधीय पौधों से बनती हैं।
    • हृदय रोग के लिए दी जाने वाली दवा डिजिटलिस, फाक्सग्लोव नामक औषधीय पौधे की पत्तियों से बनती है। वहीं, यहां इस बात पर भी शोध होगा कि क्या औषधीय पौधों से कैंसर की दवा बनाई जा सकती है।
  • अगर आप भी पीते हैं बहुत गरम चाय-कॉफी, तो सावधान! एक्सपर्ट्स के मुताबिक बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

    अगर आप भी पीते हैं बहुत गरम चाय-कॉफी, तो सावधान! एक्सपर्ट्स के मुताबिक बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

    क्या आपके दिन की शुरुआत भी कप से निकलती हुई 'गरमा-गरम' भाप वाली चाय या कॉफी के साथ होती है? अगर हां, तो जरा ठहरिए, क्योंकि जिसे आप सुकून का पल समझते हैं, वह असल में आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।

    जी हां, न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे आपकी गरमागरम चीजें पीने की आदत आपको भविष्य में कैंसर के खतरे तक ले जा सकती है।

    चाय या कॉफी नहीं, तापमान है समस्या

    अक्सर लोगों को लगता है कि कुछ खास चीजों से ही कैंसर का रिस्क बढ़ता है, लेकिन लीमा महाजन का साफ कहना है कि समस्या चाय, कॉफी या खाने में नहीं, बल्कि उनके तापमान में है। जी हां, बहुत ज्यादा गरम चीजें पीना या खाना ही असली खतरा है।

    क्या होता है शरीर पर असर?

    जब हम बहुत ज्यादा गर्म खाना खाते हैं या खौलती हुई चाय पीते हैं, तो इससे हमारा फूड पाइप डैमेज होता है। अगर यह लगातार होता रहे, तो इससे 'इसोफेजस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा' नामक बीमारी हो सकती है, जो एक टाइप का कैंसर है।

    क्या कहती है रिसर्च?

    न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो 'इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर' (IARC) ने इसे स्पष्ट रूप से ग्रुप 2A कार्सिनोजेनिक की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा गरम चीजों का सेवन कैंसर पैदा करने वाले कारणों में शामिल है।

    भविष्य के लिए चेतावनी

    यह बीमारी रातों-रात नहीं होती। ऐसा नहीं है कि आज आपने गरम चाय पी और कल आपको कैंसर हो जाएगा, लेकिन अगर आप अपनी इस आदत को नहीं बदलते हैं और लगातार बहुत गरम चीजों का सेवन करते रहते हैं, तो भविष्य में इसके होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, लीमा महाजन का कहना है कि अपनी चाय को थोड़ा ठंडा होने दें और तभी उसका मजा लें।