Author: NewseDay

  • उप पंजीयन विभाग को मिला 30 करोड़ का राजस्व, अंबिकापुर में 5743 रजिस्ट्री

    उप पंजीयन विभाग को मिला 30 करोड़ का राजस्व, अंबिकापुर में 5743 रजिस्ट्री

    अंबिकापुर.

    अंबिकापुर उप पंजीयन विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने के एक माह पहले ही तीस करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व शुल्क प्राप्त किया है. वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अब मात्र एक माह का समय शेष रह गया है. वर्तमान वित्तीय वर्ष में पंजीयक विभाग को शासन से लक्ष्य नहीं मिला है. पंजीयक विभाग के द्वारा गत वित्तीय वर्ष के लक्ष्य को ही मौजूदा वित्तीय वर्ष का लक्ष्य मानते हुए राजस्व प्राप्ति में ताकत झोंक दिया गया है.

    कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उप पंजीयक विभाग में वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक 5743 दस्तावेजों से 30 करोड़ दस लाख 27 हजार 36 रूपए का राजस्व प्राप्त किया है. वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6912 दस्तावेजों से 37 करोड़ 39 लाख 29 हजार 754 रूपए का आय प्राप्त हुआ था. उप पंजीयक अलबर्ट कुजूर के मुताबिक हर रोज दस्तावेजों के लिए 30 से 35 अपाइमेंट आ रहे हैं. इस बार गत वित्तीय वर्ष की तुलना में अधिक राजस्व प्राप्ति का अनुमान है.

  • आधार कार्ड दिखाने की झंझट खत्म? फोटो और QR कोड पर चलेगा काम, नया ऐप बना कारण?

    आधार कार्ड दिखाने की झंझट खत्म? फोटो और QR कोड पर चलेगा काम, नया ऐप बना कारण?

    नई दिल्ली

    आने वाले समय में हो सकता है कि आपके आधार कार्ड पर सिर्फ आपकी फोटो और QR कोड ही दिखाई दें। इसे लेकर खबरें आ रही हैं और कुछ टिप्सटर ने भी इस बारे में X पर पोस्ट किया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में UIDAI फिजिकल आधार कार्ड के डिजाइन में बड़ा बदलाव कर सकता है। ऐसे में आज जिस तरह से आधार कार्ड पर धारक की सारी जानकारी उपलब्ध रहती है, वैसे आगे शायद न हो।

    इसकी एक बड़ी वजह नई आधार ऐप को बताया जा रहा है, जिसे लाने का मकसद लोगों को उनके आधार कार्ड से जु़ड़ी जानकारी पर ज्यादा कंट्रोल देना और फिजिकल कार्ड की जरूरत को खत्म करना है। ऐसे में मौजूदा फिजिकल आधार कार्ड्स इस मकसद में बाधा बन सकते हैं क्योंकि उन पर सारी डिटेल्स मौजूद होती है।

    क्या बदलेगा आधार पर?

    अगर टिप्सटर और बाकी सूत्रों से आ रही खबरें सही साबित होती हैं, तो UIDAI आधार के फिजिकल कार्ड से सभी डिटेल्स को हटा कर, सिर्फ धारक की फोटो और एक QR कोड ही दिखाएगा। ऐसा धारक की प्राइवेसी की रक्षा के लिए और नए आधार ऐप के इस्तेमाल को बढ़ावा देनेे के लिए किया जा सकता है।

    सिर्फ फोटो-QR कोड से क्या फायदा होगा?

    आधार के फिजिकल कार्ड पर फोटो और QR कोड होने से आधार धारक की जानकारी लीक होने का खतरा खत्म हो जाएगा। दरअसल UIDAI ने नए आधार ऐप के जरिए आधार के इस्तेमाल को डिजिटल बना दिया है।

    हालांकि इसके पूरी तरह चलन में आने में समय लग सकता है और कई जगहों पर लोगों से उनका फिजिकल आधार कार्ड ही जमा करना पड़ सकता है। ऐसे में अगर कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा, तो न ही धारक की गैर-जरूरी डिटेल्स लीक होंगी और कार्ड की फिजिकल कॉपी मांगने वालों को भी डिटेल्स वेरिफाई करने के लिए नए आधार ऐप पर शिफ्ट होना होगा।

    इस तरह से कह सकते हैं कि नए तरह के फिजिकल आधार कार्ड बनाकर UIDAI आधार ऐप के इस्तेमाल को पुश कर सकता है।

    नए आधार ऐप से क्या है लिंक?

    आधार के फिजिकल कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड देना, कहीं न कहीं नए आधार ऐप से लिंक हो सकता है। UIDAI ने नए आधार ऐप को भी इसी तरह बनाया है कि यूजर को अपनी सारी आधार डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करनी पड़े। नए ऐप में यूजर आधार का QR कोड शेयर करके अपने आधार से जुड़े काम कर सकता है। सामने वाला भी उस ऐप के जरिए किसी का भी आधार वेरिफाई कर सकता है।

    ऐसे में आधार के फिजिकल कार्ड को शेयर करने की जरूरत खत्म हो जाती है। सरकार ने ऐसा इसलिए भी किया है क्योंकि नॉर्मल आधार कार्ड पर मौजूद ज्यादा डिटेल्स का साइबर फ्रॉड जैसे कामों में गलत इस्तेमाल होता था।

    नया कार्ड बनवाना जरूरी होगा?

    फिलहाल क्योंकि नए डिजाइन वाले आधार कार्ड को लेकर सरकार की ओर से पुख्ता जानकारी नहीं आई है। ऐसे में सिर्फ खबरों के आधार पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।

    हालांकि अगर आप UIDAI का नया आधार ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको शायद नया कार्ड न बनवाना पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि इस ऐप के जरिए आप डिजिटल आधार को किसी के साथ भी शेयर कर सकते हैं।

    इसके साथ ही आधार में किसी तरह के बदलाव या फिर शेयर की जाने वाली जानकारी पर कंट्रोल भी नए UIDAI ऐप के जरिए रखा जा सकता है। ऐसे में हो सकता है कि नए डिजाइन वाला आधार कार्ड सिर्फ उनके लिए हो, जो कि ऐप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं।

  • केंद्र से अनाज की आवाजाही तेज करने की मांग, गेहूं भंडारण की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    केंद्र से अनाज की आवाजाही तेज करने की मांग, गेहूं भंडारण की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    चंडीगढ़.

    पंजाब के अनाज से भरे गोदामों में जगह न होने से टेंशन बढ़ती जा रही हैं, जबकि दूसरी ओर से केंद्र सरकार से मिल रहे ठंडे रिस्पांस के कारण अप्रैल के अंत और मई के पहले हफ्ते तक मुश्किलें बढ़नी तय है। इसका कारण यह है कि मंडियों में आने वाली संभावित 125 लाख टन गेहूं में से 50 लाख टन गेहूं को रखने के लिए जगह नहीं है।

    मंडियों में शेड को भी अगर अंतिम समय में ओपन प्लिंथों में बदल दिया जाए तो भी मुश्किल से 12 से 15 लाख टन जगह ही बन पाएगी। इसको लेकर पंजाब सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से यह मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाने का आग्रह किया है, ताकि 15 फरवरी से लेकर 15 अप्रैल तक अनाज की मूवमेंट को तेज करके गोदामों में जगह बनाई जा सके। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव राहुल तिवारी ने कहा है कि मुख्यमंत्री पहले भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के मंत्री प्रल्हाद जोशी के पास यह मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि आने वाले दिनों में पंजाब से चावल और गेहूं की दूसरे राज्यों में मूवमेंट बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    आज भी मात्र पांच-पांच लाख टन चावल और गेहूं लिया जा रहा है। इससे पंजाब की समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि दो महीने बाद पंजाब की मंडियों में 125 लाख टन गेहूं आने की उम्मीद है। जबकि हमारे पास पिछले साल का ही अभी 50 लाख टन गेहूं पड़ा हुआ है। राहुल तिवारी ने बताया कि 75 लाख टन गेहूं को ओपन प्लिंथ और साइलोज व कवर्ड गोदामों में रखने के लिए हमारे पास क्षमता है, लेकिन हमारी चिंता 50 लाख टन को लेकर है। उन्होंने कहा कि यह छोटी मात्रा नहीं है। यह बहुत बड़ी समस्या है और केंद्र सरकार को पंजाब से कम से कम इन दो महीनों,फरवरी और मार्च में 25 लाख टन से ज्यादा गेहूं यहां से दूसरे राज्यों को भेजने की व्यवस्था करनी होगी। गौरतलब है कि अगर अप्रैल माह तक मूवमेंट न हुई तो 15 अप्रैल के बाद मंडियो में आने वाली फसल को संभालना ही मुश्किल हो जाएगा। खरीद करते समय ढुलाई की समस्या आएगी और ढुलाई न होने से किसानों में रोष फैलना तय है।

    क्यों बढ़ रही है दिक्कत
    गौरतलब है कि देश के अन्य भागों में भी अब गेहूं और चावल उनकी जरूरतों के मुताबिक पैदा होना शुरू हो गया है। पंजाब में यह क्षमता से ज्यादा पैदा हो रहा है। देश में पैदावार 1,000 लाख टन की है जबकि जरूरत 700 लाख टन की है। ऐसे में या तो किसानों को कहकर इन दोनों फसलों का रकबा कम करना होगा या फिर इनका निर्यात खोलना होगा। हालांकि, कई राज्यों ने केंद्र सरकार को यह सुझाव भी दिया है कि जिन लोगों को निशुल्क अनाज मिलता है उसकी मात्रा 40 प्रतिशत बढ़ा दी जाए। इस समय प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं या चावल देने का प्रावधान है, जिसको 7 किलो किया जा सकता है। इससे काफी मात्रा में अनाज गोदामों से निकल सकता है।

  • पार्टिशन के बाद पहली बार किया अरदास, लाहौर के गुरुद्वारा साहिब में 80 साल बाद गूंजी गुरबाणी

    पार्टिशन के बाद पहली बार किया अरदास, लाहौर के गुरुद्वारा साहिब में 80 साल बाद गूंजी गुरबाणी

    चंडीगढ़.

    लाहौर के मॉल रोड स्थित एचिसन कॉलेज परिसर में बने पुरातन गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक सिख शबद कीर्तन आयोजित हुआ व अरदास की गई। इसमें पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा सहित स्थानीय सिख संगत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

    डॉ. तरुणजीत सिंह बुतालिया ने कॉलेज प्रशासन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। वर्ष 1947 के बाद सिख विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारण यह गुरुद्वारा साहिब बंद हो गया था। परंतु इसकी देखरेख कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही। यह विशेष शबद कीर्तन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कॉलेज की आधारशिला 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही और प्रमुख परिवारों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से रखी गई थी।

    1886 में हुई थी कॉलेज की स्थापना
    ज्ञात हो कि कि एचीसन कॉलेज का इतिहास काफी पुराना रहा है। इस कॉलेज की स्थापनी 3 नवंबर, 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही परिवारों और मुख्य घरानों के बच्चों को शिक्षा देने के इरादे से की गई थी। कॉलेज कैंपस में मौजूद  गुरुद्वारे की डिजाइन प्रसिद्ध सिख वास्तुकार राम सिंह ने तैयार की थी। यह उस समय के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े थे, जिसे आज नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के नाम से जाना जाता है

  • गुनाह स्वीकारने के बाद निखिल गुप्ता को कितने साल की सजा? जानें US की मांग

    गुनाह स्वीकारने के बाद निखिल गुप्ता को कितने साल की सजा? जानें US की मांग

    न्यूयॉर्क

    खालिस्तानी आतंकवादी और अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश वाले मामले में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी 54 साल के भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को अमेरिकी अदालत के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। यह कदम उनके पिछले रुख से बिल्कुल उलट है। जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वे लगातार खुद को निर्दोष बता रहे थे। निखिल गुप्ता ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष तीन गंभीर आरोपों में अपना दोष स्वीकार किया है।

    उनके खिलाफ सुपारी देकर हत्या कराने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रचने का आरोप है। उन्होंने इन तीनों में दोष कबूल कर लिया है। कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि अभियोजकों द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों के कारण निखिल गुप्ता के पास अपना गुनाह कबूल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

    इस मामले की सुनवाई 30 मार्च से शुरू होने वाली थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार और वायरटैप की गई बातचीत पेश की जानी थी। इन रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर निखिल गुप्ता को एक हिटमैन के साथ 1,00,000 डॉलर की सुपारी पर बातचीत करते हुए सुना गया था।

    अपना गुनाह कबूल करने के बाद अब निखिल गुप्ता एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल से बच जाएंगे, जिसमें उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती थी। हालांकि सजा का अंतिम निर्णय न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन अमेरिकी सरकार ने गुप्ता के लिए 21 से 24 साल की कैद की सिफारिश की है। सीनियर जिला जज विक्टर मरेरो आने वाले महीनों में सजा सुनाने के लिए औपचारिक सुनवाई की तारीख तय करेंगे।

    इस पूरी साजिश के केंद्र में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारी विकास यादव का नाम भी उछला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यादव ने ही पन्नू की हत्या के समन्वय के लिए गुप्ता को भर्ती किया था। साल 2024 के अंत में यादव के खिलाफ संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वे फिलहाल भारत में हैं।

    भारत सरकार ने पुष्टि की है कि विकास यादव अब सरकारी सेवा में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रत्यर्पण को लेकर फिलहाल कोई सहमति नहीं जताई गई है। भारत की आंतरिक जांच समिति ने स्वीकार किया है कि उक्त अधिकारी के आपराधिक लिंक थे, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
    कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू?

    गुरपतवंत सिंह पन्नू 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) नामक संगठन का जनरल काउंसल है, जो अमेरिका में सक्रिय है। हाल के महीनों में पन्नू ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज किया है, जिसमें अमेरिकी शहरों में खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करना, एयर इंडिया के बहिष्कार के वीडियो जारी करना और भारत विरोधी हरकतों के लिए इनामों की घोषणा करना शामिल है। इन गतिविधियों के कारण भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पन्नू के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित नए मामले दर्ज किए हैं।

  • आज होगा फैसला: T20 वर्ल्ड कप 2026 में कौन करेगा क्वालीफाई, किसका होगा एलिमिनेशन?

    आज होगा फैसला: T20 वर्ल्ड कप 2026 में कौन करेगा क्वालीफाई, किसका होगा एलिमिनेशन?

    नई दिल्ली

    T20 World Cup 2026 super 8 scenario: भारत और श्रीलंका में खेले जा रहे आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 को शुरू हुए 7 दिन बीत चुके हैं। 7 दिन में 21 मुकाबले खेले जा चुके हैं। हर दिन की तरह आज यानी शनिवार 14 फरवरी को भी 3 मैच होने हैं, लेकिन अभी तक एक भी टीम को सुपर 8 का टिकट नहीं मिला है और न ही कोई टीम टूर्नामेंट से आधिकारिक तौर पर एलिमिनेट हुई है। हालांकि, आज यानी 14 फरवरी को एक टीम एलिमिनेट हो जाएगी, जबकि एक टीम को सुपर 8 का टिकट मिल जाएगा। पूरा सिनेरियो क्या है? ये समझ लीजिए।

    दरअसल, आज यानी 14 फरवरी को 3 मुकाबले होने हैं, जिनमें एक मैच आयरलैंड वर्सेस ओमान, दूसरा मैच इंग्लैंड वर्सेस स्कॉटलैंड और तीसरा मैच न्यूजीलैंड वर्सेस साउथ अफ्रीका है। इनमें से एक मैच ऐसा है, जिसमें कोई भी टीम हारे वह टूर्नामेंट से एलिमिनेट हो जाएगी और उसके सुपर 8 में पहुंचने के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे, जबकि एक मैच में जीतने वाली टीम सुपर 8 में अपनी जगह पक्की कर लेगी।

    पहले बात उस मैच की करते हैं, जो कि एलिमिनेटर की तरह है। ये मैच है आयरलैंड वर्सेस ओमान मैच, जो कोलंबो के एसएससी में खेला जाना है। इस मैच में जीतने वाली टीम सुपर 8 की रेस में बनी रहेगी, लेकिन सुपर 8 में पहुंचने के लिए उसे बहुत मेहनत करनी होगी और अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा, जबकि हारने वाली टीम का सफर समाप्त हो जाएगा। हालांकि, उसका एक मुकाबला बाकी रहेगा, जो वह अगले कुछ दिनों में खेलेगी।

    ये दोनों टीमें ग्रुप बी में हैं और पॉइंट्स टेबल में सबसे आखिरी पायदानों पर विराजमान हैं। इस मैच की विजेता टीम टूर्नामेंट में जीवित रहेगी, लेकिन हारने वाली टीम इस ग्रुप में किसी भी स्थिति में टॉप 2 में नहीं जा पाएगी और एलिमिनेट हो जाएगी, क्योंकि हारने वाली टीम ज्यादा से ज्यादा 2 अंकों तक पहुंच सकती है और इस ग्रुप में पहले से ही दो टीमों के 4-4 अंक हो गए हैं। ऐसे में यह मैच खास होगा।

    वहीं, अगर बात करें कि सुपर 8 में कौन सी टीम आज पहुंच सकती है तो इनमें साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड का नाम शामिल है। ग्रुप डी में ये टीमें हैं। दोनों टीमें 2-2 मैच जीत चुकी हैं। एक और मैच जीतकर टीम के खाते में 6 पॉइंट हो जाएंगे और ग्रुप की हालत और टीमों को देखें तो साफ पता चलता है कि 6 अंकों से क्वालिफिकेशन पक्की है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि शायद न हो, क्योंकि 6 या इससे ज्यादा अंक इस ग्रुप में इन दोनों टीमों के अलावा यूएई भी हासिल कर सकती है।

  • कलेक्टर की बैठक में हड़ताल समाप्त का किया ऐलान, पटवारी-आरआई 15 दिन बाद काम पर लौटे

    कलेक्टर की बैठक में हड़ताल समाप्त का किया ऐलान, पटवारी-आरआई 15 दिन बाद काम पर लौटे

    मुंगेली.

    जिले के लोरमी तहसील में पिछले 15 दिनों से चल रहा पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और तहसीलदार के बीच का गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन और हस्तक्षेप के बाद उनके निर्देशन में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों तथा पटवारी-आरआई संगठनों के बीच बैठक आयोजित की, जिसमें आपसी सामंजस्य से समाधान निकाल लिया गया। इसके बाद हड़ताली पटवारी और राजस्व निरीक्षक अपने-अपने कार्य पर लौट आए।

    दरअसल, पटवारी और राजस्व निरीक्षक संघ ने लोरमी तहसील में पदस्थ तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप था कि तहसीलदार द्वारा कार्य के दौरान अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 29 जनवरी से लोरमी तहसील के पटवारी और आरआई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब तीन दिनों के लिए जिला पटवारी–आरआई संघ ने भी समर्थन दे दिया। वहीं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ (नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार) ने तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की स्थिति में जोरदार विरोध दर्ज कराने की बात कही थी। संघ पदाधिकारियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और मांगें रखी थीं। लगातार बढ़ते गतिरोध और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक में सभी पक्षों को विस्तार से सुना गया।

    बैठक में आपसी संवाद, संयम और प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखते हुए कार्य करने पर सहमति बनी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की जो भी जायज मांगें या शिकायतें हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले उन्होंने मीटिंग में राजस्व प्रकरणों के मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए, साथ ही शासन एवं जिला प्रशासन के प्राथमिकता वाले कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

  • कोलार में अड़ीबाजी का आरोपी आखिरकार हिरासत में, पांच हजार रुपए का इनाम था घोषित

    कोलार में अड़ीबाजी का आरोपी आखिरकार हिरासत में, पांच हजार रुपए का इनाम था घोषित

    कोलार में अड़ीबाजी के मामले में फरार आरोपी गिरफ्तार, घोषित किया गया था पांच हजार का इनाम

    भोपाल
    कोलार पुलिस ने मारपीट और अड़ीबाजी के मामले में तीन महीने से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।  जानकारी के अनुसार फरियादी दौलत सिंह धाकड़ (22) पिछले साल नवंबर महीने में सुबह करीब चार बजे अपने एक दोस्त को छोडऩे के लिए प्रियंका नगर कोलार रोड गया था। वापस लौटते समय वंश मेहरा और उसके दो साथियों ने रोक लिया और पूछने लगे कि यहां क्यों आए थे। दौलत ने बताया कि वह अपने दोस्त को छोडऩे आया था। इसके बाद उन्होंने शराब पीने के लिए पांच सौ रुपये की मांग की। दौलत ने जब उन्हें रुपये देने से मना किया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उसके साथ बेल्ट से मारपीट कर दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मारपीट और अड़ीबाजी का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी वंश मेहरा को उसी समय गिरफ्तार कर लिया था, जबकि दो आरोपी भाग निकले थे। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसके बाद से एक विशेष टीम आरोपियों की तलाश में लगाई गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने फरार आरोपी राज पथरोड़ निवासी प्रियंका नगर और शैलेंद्र सेन निवासी गरीब नगर कोलार रोड को गिरफ्तार कर लिया है।

     पत्थर से हमला कर मोबाइल लूटने वाले शातिर बदमाश गिरफ्तार,आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टाप पर हुई वारदात

     पुलिस ने चंद घंटों के भीतर 2 आरोपियों को दबोचा 

    भोपाल। हबीबगंज इलाके में एक युवक पर पत्थर से हमला कर मोबाइल फोन लूटने वाले 2 शातिर बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उस वक्त हुई, जब फरियादी बाइक से उतरकर पैदल अपने घर लौट थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों को दबोच लिया। जानकारी के अनुसार अशोक कुमार तिवारी (41) ई-2 अरेरा कॉलोनी में रहते हैं। गुरुवार की रात वह अपने दोस्त और होटल मालिक अखंड मिश्रा के साथ उनकी बाइक पर बैठकर ग्यारह मील मिसरोद से अपने घर लौट रहे थे। रात करीब बारह बजे अंखड ने उन्हें गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उतारा और अपने घर से लिए निकल गए।बाइक से उतरने के बाद अशोक कुमार पैदल-पैदल अपने घर के लिए जाने लगे। इसी दौरान दो लड़के उनके पास पहुंचे और बगैर किसी बात के गाली-गलौज करने लगे। अशोक उनकी बातों को अनसुना करते हुए आगे बढ़े, तभी एक युवक ने झपट्टा मारकर उनके हाथ से मोबाइल फोन छीनने लगा।अशोक ने जब इसका विरोद किया तो उसके साथी ने पत्थर उठाकर उनके सिर पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। उसके बाद दोनों बदमाश मोबाइल फोन छीनकर भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मारपीट और लूटपाट का मामला दर्ज किया था।सीसीटीवी कैमरों से मिला सुराग मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश में पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और बदमाशों की पहचान के प्रयास किए। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि रात को समय मोबाइल लूटने वाले दो संदेही गणेश मंदिर के पास देखा गया है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें दबोच लिया। पूछताछ करने पर दोनों ने अपने नाम गोलू सनी एंथोनी (33) निवासी मद्रासी कालोनी टीटी नगर और राज विशेष उर्फ बिट्टू (24) निवासी रोहित नगर बावडिय़ा कला शाहपुरा बताया। आरोपी गोलू के खिलाफ टीटी नगर में आठ और राज के खिलाफ मिसरोद थाने में तीन अपराध पहले से दर्ज हैं।

     पैसों की चाहत के चलते दिया वारदात को अंजाम

     पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि दोनों रात के समय तफरी करने के लिए निकले थे। इसी दौरान उनके मन में पैसे कमाने की लालसा हुई तो उन्होंने पैदल जा रहे व्यक्ति के साथ मारपीट कर मोबाइल फोन लूट लिया। वारदात को बाद बदमाशों ने लूटा गया मोबाइल रेलवे पटरी के पास लोहे के पाइप के अंदर छिपा दिया और उसके बाद अपने घर चले गए। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। इनकी रही सराहनीय भूमिका लूटपाट की घटना का खुलासा और आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी संजय चौकसे, एसआई अजय दुबे, अखिलेश त्रिपाठी, शिवभानु सिंह, हेड कांस्टेबल राघवेन्द्र भास्कर, राजकुमार साहू, आरक्षक रामनरेश किरार, कंचन यादव, राकेश भारद्वाज, अरविन्द यादव, नीमेश लोट, अभिषेक मालवीय, पुष्पेन्द्र भदौरिया और शिवशंकर की सराहनीय भूमिका रही है।

  • डिब्रूगढ़ में बना नया इतिहास: हाईवे पर उतरा प्रधानमंत्री का विमान, क्या है आपात लैंडिंग सिस्टम?

    डिब्रूगढ़ में बना नया इतिहास: हाईवे पर उतरा प्रधानमंत्री का विमान, क्या है आपात लैंडिंग सिस्टम?

    डिब्रूगढ़
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम दौरे के तहत डिब्रूगढ़ पहुंच गए हैं. उनके दौरे की शुरुआत बेहद रणनीतिक रही, जब उनका विमान डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर नवनिर्मित इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ELF) पर उतरा. यह पहली बार है कि पीएम का विमान नेशनल हाइवे पर उतरा.

    पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है, जो युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों में भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी.

    प्रधानमंत्री ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे. ₹3,030 करोड़ की लागत से बना यह 6-लेन पुल पूर्वोत्तर का पहला 'एक्स्ट्राडोज्ड' पुल है. इस आधुनिक पुल की मदद से गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच का सफर जो घंटों में तय होता था, अब मात्र 7 मिनट में सिमट जाएगा. इसमें भूकंपरोधी तकनीक और रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है.

    प्रधानमंत्री आईआईएम गुवाहाटी (IIM Guwahati) का उद्घाटन करेंगे, जो क्षेत्र में उच्च शिक्षा के मानक बदलेगा. साथ ही, कामरूप जिले में राष्ट्रीय डेटा केंद्र (National Data Center) का शुभारंभ होगा. 8.5 मेगावाट क्षमता वाला यह केंद्र पूर्वोत्तर की सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से सुरक्षित और सशक्त बनाएगा.

    शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे. इनमें से 100 बसें अकेले गुवाहाटी के लिए होंगी, जबकि बाकी नागपुर, भावनगर और चंडीगढ़ के लिए रवाना की जाएंगी.

    क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (14 फरवरी) असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना के C-130J Super Hercules से लैंड किया. यह सुविधा ऊपरी असम में एक हाईवे स्ट्रिप पर बनाई गई है, जो युद्ध या आपातकाल में लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के लिए वैकल्पिक लैंडिंग की जगह देगी. यह पूर्वोत्तर भारत की रक्षा और रणनीतिक तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम है. 

    ELF क्या है और डिब्रूगढ़ में क्यों खास?

    इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक ऐसा हाईवे स्ट्रिप होता है जहां सामान्य समय में गाड़ियां चलती हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे रनवे में बदलकर विमान उतारे और उड़ाए जा सकते हैं. डिब्रूगढ़ ELF असम के ऊपरी हिस्से में है, जो भारत-चीन सीमा के बहुत करीब है.

    •     भारतीय वायुसेना (IAF) को अगर मुख्य एयरबेस पर हमला हो या क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वैकल्पिक जगह देगी.
    •     विमानों को तैनात करने की सुविधा देगी, जिससे दुश्मन का निशाना लगाना मुश्किल हो जाएगा.
    •     पूर्वी सेक्टर में हवाई ऑपरेशंस की गहराई और जीवित रहने की क्षमता बढ़ाएगी.
    • पहले ही सफल रिहर्सल हो चुकी है
    • इस ELF की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. हाल ही में पूर्ण पैमाने 'रिहर्सल' की गई…

        राफेल और सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान.
        C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट.
        डोर्नियर सर्विलांस विमान.
        एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH).

    ये सभी विमान हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े. 'टच एंड गो' मैन्यूवर्स और कॉम्बैट फॉर्मेशन लैंडिंग भी की गई. हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) का अभ्यास भी हुआ. यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगी.

    प्रधानमंत्री मोदी खुद IAF के C-130J विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे. यह 2021 में उत्तर प्रदेश में बने इसी तरह के स्ट्रिप की तरह होगा, जहां भी उन्होंने विमान से लैंडिंग की थी. यह सेना की क्षमता का प्रदर्शन भी है.

    देशभर में ELF का नेटवर्क

    डिब्रूगढ़ ELF अकेला नहीं है. सड़क परिवहन मंत्रालय और IAF मिलकर देशभर में ऐसे 28 स्थानों की पहचान कर चुके हैं. असम में ही 5 ELF बन रहे हैं. कई पहले से ऑपरेशनल हैं. सभी IAF एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स को आधुनिक बनाया जा चुका है.

    पूर्वोत्तर में अन्य रणनीतिक प्रोजेक्ट्स

    यह सुविधा पूर्वोत्तर की रक्षा को मजबूत करने की बड़ी योजना का हिस्सा है…

    ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे प्रस्तावित अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग – नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच तेज आवाजाही. कई स्ट्रैटेजिक टनल और ऑल-वेदर रोड – बरसात या आपदा में भी कनेक्टिविटी बनी रहे. ये प्रोजेक्ट्स सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर निर्भरता कम करेंगे. सेना की तेज तैनाती सुनिश्चित करेंगे.

    क्यों जरूरी है यह सब?

    पूर्वोत्तर भारत की संवेदनशील सीमाओं (चीन, म्यांमार, बांग्लादेश) के पास है. यहां का इलाका मुश्किल है – नदियां, पहाड़, बाढ़. ये प्रोजेक्ट्स… प्राकृतिक आपदाओं और दुश्मन हमले दोनों से बचाव देंगे. सेना को तेज रिस्पॉन्स और बेहतर लॉजिस्टिक्स देंगे. रक्षा के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी कनेक्टिविटी और विकास लाएंगे.

    डिब्रूगढ़ ELF पूर्वोत्तर की रक्षा रीढ़ को मजबूत करने वाला मील का पत्थर है. यह भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाता है – भूगोल की चुनौतियों को ताकत में बदलना. आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पूर्वोत्तर को और सुरक्षित और विकसित बनाएंगे.

  • प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नियुक्तियां

    प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नियुक्तियां

    परिणाम ही मापदंड, स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ व्यापक सुधारः मुख्यमंत्री योगी 

    इन्सेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि

    वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज के तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हुई

    गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हो रहे एम्स, हर जिले में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा

    प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नियुक्तियां 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर स्पष्ट कहा कि सरकार के लिए घोषणाएं नहीं बल्कि परिणाम ही वास्तविक मापदंड हैं। विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कोई भी बात कहने से पहले यह देखना चाहिए कि उसका परिणाम क्या है। केवल लंबी-चौड़ी बातें करने से क्या लाभ यदि परिणाम शून्य हो? इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों, इन्सेफेलाइटिस पर नियंत्रण, मेडिकल ढांचे के विस्तार और भविष्य की स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था की योजनाओं का विस्तृत उल्लेख किया।

    माफिया की तरह इंसेफेलाइटिस पर भी किया प्रभावी नियंत्रण
    मुख्यमंत्री योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि इन्सेफेलाइटिस की बीमारी के कारण आपके जिले के भी बच्चे काल-कवलित होते थे। आपने इस बीमारी का पूरा दौर देखा है। चार बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, लेकिन उन बच्चों का हाल-चाल लेने कोई नहीं गया। उपचार और सुविधाएं अलग विषय हैं, परंतु संवेदनशीलता भी आवश्यक होती है। आज विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि इन्सेफेलाइटिस से बच्चों को बचाने का जो कार्य हुआ है, उसका श्रेय प्रधानमंत्री जी के गतिशील नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार को जाता है। यह भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की डबल इंजन सरकार की उपलब्धि है। हमने इन्सेफेलाइटिस पर वैसे ही प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है, जैसे प्रदेश में माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई की है। यह सरकार केवल माफिया पर ही नहीं, बल्कि मच्छरों से फैलने वाली घातक बीमारियों पर भी उसी दृढ़ता के साथ नियंत्रण करती है। इन्सेफेलाइटिस इसका एक उदाहरण है।

    बिना भेदभाव सभी को मिल रही चिकित्सा की सुविधा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल
    कॉलेज” की परिकल्पना हमारी सरकार ने आगे बढ़ाई। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हो चुकी है। 81वां मेडिकल कॉलेज अमेठी में प्रारंभ हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुछ नए मेडिकल कॉलेजों पर कार्य प्रगति पर है। प्रदेश में दो एम्स गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हो रहे हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं विकसित की गई हैं। डायलिसिस की सुविधा अब प्रत्येक जिले में निःशुल्क उपलब्ध है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ 46 लाख गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक निधि के संदर्भ में भी हमने लचीलापन दिखाने का प्रयास किया है, ताकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यदि कोई विधायक सिफारिश करते हैं तो बिना किसी भेदभाव के धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। न किसी की जाति देखी जाती है, न मत, न मजहब। हर जरूरतमंद के साथ सरकार खड़ी है। आईसीयू की व्यवस्था के संबंध में एक समय कुछ निजी अस्पतालों के विरुद्ध शिकायतें आई थीं। उस पर जांच कराई गई और संबंधित अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया। किंतु जो मामले लंबित थे, उन्हें पुनः धनराशि उपलब्ध कराई गई। किसी भी प्रकार की सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हर जरूरतमंद को सहायता दी जा रही है।

    42 हजार पैरामेडिक्स की हुई भर्ती
    मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर नियंत्रण आवश्यक है। यदि सरकार सीजीएचएस दरों के अनुसार भुगतान कर रही है, तो अस्पतालों को भी सहयोग करना चाहिए। शेष भुगतान सरकार उपलब्ध कराएगी। यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पैरामेडिकल स्टाफ का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक 41,868 पैरामेडिक्स की भर्ती की जा चुकी है, जिन्होंने विभिन्न संस्थानों में कार्यभार ग्रहण किया है। चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में 4,110 से अधिक भर्तियां हुई हैं। कुल मिलाकर 45,978 नियुक्तियां स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में की गई हैं। सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में आईसीयू, मिनी आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, डायलिसिस यूनिट और ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से आपात चिकित्सा सेवाएं और अधिक सुलभ बनाई गई हैं।

    भविष्य की दिशा में बढ़ रहीं फार्मा गतिविधियां 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की दिशा में सरकार एआई, जीनोमिक्स, टेलीमेडिसिन, मेडटेक और हेल्थटेक पर विशेष ध्यान दे रही है। बजट में भी इन क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश केवल स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा बाजार ही नहीं बनेगा बल्कि फार्मा प्रोडक्शन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। ललितपुर में फार्मा पार्क की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव में देश-विदेश के शीर्ष फार्मा उद्यमियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है, जिससे मेडिकल उपकरण सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दरों पर उपलब्ध हो सकें। इन सभी प्रयासों के माध्यम से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है, और सरकार इस दिशा में निरंतर गति से कार्य कर रही है।