Author: NewseDay

  • पटना के नामी होटलों की रसोई में मिली गंदगी, एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट; कई चीजों के सैंपल जांच को भेजे गए

    पटना के नामी होटलों की रसोई में मिली गंदगी, एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट; कई चीजों के सैंपल जांच को भेजे गए

    पटना
    पर्व के पूर्व गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने को चल रहे अभियान के क्रम में शुक्रवार को राजधानी के पांच बड़े होटलों में खाद्य संरक्षा विभाग की पांच टीमों ने छापेमारी की।

    जांच में इन बड़े होटलों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता व स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए। औचक जांच में रसोई से लेकर भंडारण तक में खामियां मिलीं।

    द पनाश होटल में बिना निर्माण व एक्सपायरी तिथि के पालीथिन में रखा करीब 10 किलो मटन-चिकन और बिना तिथि वाले ब्रेड के छह पैकेट नष्ट कराए गए।

    वहीं, पाटलिपुत्र एक्जोटिका में एक्सपायरी खाद्य सामग्री मिली। गार्गी ग्रैंड और होटल मौर्या में भी खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही सामने आई।

    विभाग ने पांचों होटलों को कमियां दूर करने के लिए 14 दिनों का सुधार नोटिस दिया है। स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की टीम ने होटल गार्गी ग्रैंड, पाटलिपुत्र एक्सोटिका, द पनाश होटल, होटल मौर्या और लेमन ट्री होटल का औचक निरीक्षण किया।

    खाद्य संरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी पांच होटलों को 14 दिनों के भीतर कमियां दूर करनी होंगी। आगे भी औचक निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी।

    पनाश में पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल
    द पनाश होटल के फ्रीजर में पालीथिन में लपेटकर रखा करीब 10 किलो मटन-चिकन मिला। इस पर निर्माण व एक्सपायरी तिथि नहीं थी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 38 के तहत इसे नष्ट कराया गया। बिना तिथि वाले ब्रेड के छह पैकेट भी नष्ट कराए गए।

    पानी की जांच में टीडीएस (टोटल डिसाल्व्ड सालिड्स) 44 मिला। यहां कुल 6,250 रुपये की खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई। होटल गार्गी ग्रैंड की रसोई में शाकाहारी व मांसाहारी भोजन एक साथ रखा मिला। एफएफओ प्रणाली के पालन में भी कमी पाई गई।

    पानी की जांच वर्ष 2024 के बाद नहीं कराई गई थी और कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं थे। यहां से पनीर और अरहर दाल के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। पाटलिपुत्र एक्सोटिका की रसोई में गंदगी, टूटा वेंटिलेटर और कबूतरों की मौजूदगी मिली।

    स्टोर रूम में सामान रखने की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी। बिल पर एफएसएसएआइ नंबर नहीं मिला। होटल से एक्सपायरी के छह किलो राज मिल्क, आठ किलो बेकरी मिक्स, डेढ़ किलो हाइड्रो और 100 ग्राम जीरा सीड नष्ट कराए गए।

    मौर्या में जंग लगा फ्रिज, लेमन ट्री से लिए नमूने
    गांधी मैदान स्थित होटल मौर्या में एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाया जा रहा था, जिसे रोकने का निर्देश दिया गया। फ्रिज में जंग, तापमान का रिकार्ड नहीं होने, खराब ड्रेनेज और बिना ढक्कन वाले डस्टबिन जैसी खामियां भी मिलीं।

    यहां से पनीर और साल्टेड बटर के नमूने लेकर अगमकुआं स्थित प्रयोगशाला भेजे गए। लेमन ट्री होटल से पनीर, चीज, टमाटर सास और लिक्विड सास के नमूने जांच के लिए लिए गए। ड्रेनेज पर लगी जाली को ठीक से ढंकने का निर्देश भी दिया गया।

  • वंदे भारत ट्रेन का हाईस्पीड परीक्षण सफल, रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला ने एक साल में बनाए 2,383 कोच

    वंदे भारत ट्रेन का हाईस्पीड परीक्षण सफल, रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला ने एक साल में बनाए 2,383 कोच

    कोटा
     भारतीय रेलवे ने स्वदेशी रेल तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) में निर्मित 16 कोच वाली नई वंदे भारत चेयर कार ट्रेन का पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल हाईस्पीड परीक्षण किया गया। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) की निगरानी में गुरुवार को मथुरा से कोटा होते हुए नागदा रेलमार्ग पर यह परीक्षण किया गया। इस दौरान उच्च गति पर ट्रेन की कार्यक्षमता, परिचालन दक्षता और संरक्षा से जुड़े तकनीकी मानकों का आकलन किया गया। यह परीक्षण आधुनिक, तेज रफ्तार और स्वदेशी तकनीक से निर्मित ट्रेनों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। परीक्षण के दौरान तेज गति पर ट्रेन के प्रदर्शन और परिचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की निगरानी में हुए इस ट्रायल का उद्देश्य उच्च गति पर ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन करना था। कोटा मंडल में हुआ यह परीक्षण हाईस्पीड ट्रायल के लिए इस रेलखंड की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है।

    कपूरथला फैक्ट्री ने बनाया उत्पादन रिकॉर्ड
    रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला आधुनिक रेल कोच निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के कोच और ट्रेनसेट तैयार किए जा रहे हैं। फैक्ट्री में निर्मित रेल कोच एशिया और अफ्रीका के कई देशों में निर्यात भी किए जा चुके हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय रेल निर्माण बाजार में भारत की पहचान को मजबूती मिली है।

    एक वर्ष में बनाए 2,383 रेल कोच
    फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 2,383 रेल कोच का निर्माण किया। इसे फैक्ट्री का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन बताया गया है। यह उपलब्धि उसकी उत्पादन क्षमता और आधुनिक रेल निर्माण के क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

    स्वदेशी रेल तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
    वंदे भारत ट्रेन का 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल परीक्षण आधुनिक रेल तकनीक, संरक्षा मानकों और स्वदेशी निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि है। यह केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ अभियान के अनुरूप देश में आधुनिक रेल उपकरणों और ट्रेनों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को भी मजबूती देगा।

  • दिल्ली में मार्च रोकने के लिए सुरक्षा घेरा मजबूत, 500-500 महिला जवान यूपी और हरियाणा से पहुंचीं

    दिल्ली में मार्च रोकने के लिए सुरक्षा घेरा मजबूत, 500-500 महिला जवान यूपी और हरियाणा से पहुंचीं

    नई दिल्ली
    चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी है। प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की घटनाओं को देखते हुए यूपी और हरियाणा से एक हजार महिला पुलिसकर्मियों को नई दिल्ली जिले में बुलाया गया है।

    यूपी और हरियाणा से आईं 500-500 महिला जवान
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों राज्यों से 500-500 महिला जवानों की तैनाती की गई है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    प्रदर्शन स्थल पर जरूरत के हिसाब से की गई तैनाती
    सूत्रों के अनुसार, यूपी और हरियाणा से आई महिला पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन स्थलों पर जरूरत के हिसाब से तैनात किया गया है। इसका मकसद प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था से निपटना और पुलिसकर्मियों से होने वाले दुर्व्यवहार पर लगाम लगाना है।

    गृह मंत्री अमित शाह हर स्थिती पर रख रहे अपनी नजर
    आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से शनिवार को बुलाए गए मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के अलावा सीएपीएफ की 220 से अधिक कंपनियां जंतर मंतर समेत बॉर्डर और अन्य इलाकों में तैनात की गई हैं। गृह मंत्री अमित शाह धरने-प्रदर्शन पर अपनी पैनी नजर रखे हुए हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार पल-पल की जानकारी गृह मंत्री और देश के गृह सचिव गोविंद मोहन को दे रहे हैं। योजना है कि किसी प्रदर्शनकारी को जंतर मंतर तक नहीं पहुंचने देना है।

     

  • इंदौर में हाईवोल्टेज ड्रामा: भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट के मामले में TI समेत 7 पुलिसकर्मी निलंबित

    इंदौर में हाईवोल्टेज ड्रामा: भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट के मामले में TI समेत 7 पुलिसकर्मी निलंबित

    इंदौर 
    इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। पुलिसकर्मियों ने थाने के अंदर पंडित और भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। मामला विधायक गोलू शुक्ला के पंडित जयदीप दुबे और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे से जुड़ा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा कार्यकर्ता और विधायक समर्थक थाने पहुंच गए। देर रात तक थाने के बाहर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चलता रहा। 

    हालात को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। शुरुआती जांच के बाद थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह, एक सब-इंस्पेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया।

    पड़ोसियों से विवाद के बाद थाने पहुंचे थे पंडित
    मामले की शुरुआत जयदीप दुबे और उनके पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो मारपीट और अभद्र व्यवहार तक पहुंच गई। घटना के बाद जयदीप ने दोपहर करीब 3 बजे विधायक गोलू शुक्ला को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी।

    इसके बाद विधायक ने एरोड्रम थाने के टीआई वीरेंद्र सिंह कुशवाह से चर्चा की। बताया जा रहा है कि टीआई ने शाम करीब 6 बजे जयदीप को थाने आने के लिए कहा था। इसके बाद जयदीप दुबे अपने साथी और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे के साथ शाम करीब 7 बजे थाने पहुंचे।

    शिकायत सुनने के बजाय की मारपीट 
    आरोप है कि थाने पहुंचने के बाद जयदीप दुबे और पंकज चौबे के साथ कुछ पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की और मारपीट की। दोनों को थाने में ही बैठा लिया गया। घटना की जानकारी बाहर पहुंचने के बाद विधायक समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता थाने पहुंचने लगे।

    रात होते-होते थाने के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ गई। सूत्रों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे तक 500 से 1,000 लोग जमा हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की।

    सीसीटीवी फुटेज से जांच के दावे

    थाने के अंदर हुई घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज की भी चर्चा रही। सूत्रों का दावा है कि थाने में लगे कैमरों में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में क्या दिखाई दे रहा है और उसमें मारपीट के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए फुटेज का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा मामला 
    घटना को लेकर देर रात तक पुलिस थाने के बाहर विरोध जारी रहा। बताया जा रहा है कि मामला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक भी पहुंचा। 

    विधायक गोलू शुक्ला और अन्य नेताओं ने भी वरिष्ठ स्तर पर संपर्क किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले में कार्रवाई की।

    रात करीब 3 बजे डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत और एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और शुरुआती जांच के बाद कार्रवाई की जानकारी दी।

    TI समेत सात पुलिसकर्मी निलंबित

    मामले में एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह और एक सब-इंस्पेक्टर समेत कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। देर रात तक थाने के बाहर समर्थकों की मौजूदगी बनी रही। पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई। 

  • Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

    Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

    क्या आपको Orkut याद है? अगर आप मिलेनियल हैं तो पता ही होगा, लेकिन GenZ के लिए ये नाम नया लग सकता है. बता दें कि इसे सोशल मीडिया का OG प्लेटफॉर्म कहा जाता था. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां दोस्तों के प्रोफाइल देखना, एक-दूसरे की प्रोफाइल पर मैसेज छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ना इंटरनेट का खास एक्सपीरिएंस हुआ करता था.

    फीड की जगह स्क्रैप होते थे. लोग अपने दोस्तों को स्क्रैप लिखते थे, जिनके ज्यादा स्क्रैप होते थे वो पॉपुलर माने जाते थे. अब करीब 12 साल बाद Orkut एक बार फिर चर्चा में है. इसके फाउंडर Orkut Buyukkokten ने लोगों से एक नए सोशल नेटवर्क को बनाने के लिए सपोर्ट मांगा है. उनका मकसद ऐसा इंटरनेट तैयार करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम से ज्यादा अहमियत असली लोगों, दोस्ती और आपसी जुड़ाव को मिले.

    गूगल और Orkut कनेक्शन
    गूगल में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्कुट बायूकॉकटेन ने 2004 में Orkut नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था. इसे गूगल के इंटर्नल प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया गया था. हालांकि Orkut को गूगल ने 2014 में शटडाउन कर दिया, लेकिन Orkut.com के मालिक ऑर्कुट बायूकॉकटेन ही रहे, क्योंकि उन्हीं के पास इसके ट्रेडमार्क और राइट्स हैं.

    यह खबर ऐसे समय आई है, जब Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार कंटेंट, फर्जी प्रोफाइल और एल्गोरिदम के बढ़ते असर को लेकर चर्चा हो रही है. Orkut के फाउंडर का मानना है कि सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने के बजाय उनका ध्यान खींचने और उन्हें ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर केंद्रित हो गया है. ऐसे में वह इंटरनेट को फिर से इंसानों के करीब लाना चाहते हैं.

    बेहद पॉपुलर था Orkut
    Orkut की शुरुआत 2004 में हुई थी और दिलचस्प ये है कि इसके फाउंडर ने अपने ही नाम पर प्लेटफॉर्म का नाम रखा. इसके फाउंडर का नाम भी Orkut है. वो गूगल के इंजीनियर थे. ये भारत और ब्राजील में सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ. 2014 में इसे गूगल ने बंद कर दिया.

    क्या सच में वापस आ रहा है Orkut?
    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Orkut की पुरानी वेबसाइट और उसके पुराने अकाउंट अभी दोबारा शुरू नहीं हुए हैं. फिलहाल इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक अभियान चल रहा है, जिसके जरिए लोगों से पूछा जा रहा है कि क्या वे असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी पर आधारित नया सोशल नेटवर्क चाहते हैं.

    इस अभियान के लिए लोग अपना नाम दर्ज करा सकते हैं और एक सपोर्टर कार्ड भी पा सकते हैं. लेकिन नाम दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि आपका पुराना अकाउंट वापस मिल जाएगा या नए प्लेटफॉर्म पर आपका यूजरनेम सुरक्षित हो गया है. कंपनी ने अभी यह भी नहीं बताया है कि नया सोशल नेटवर्क कब लॉन्च होगा.

    क्यों खास था Orkut?
    Orkut को जनवरी 2004 में लॉन्च किया गया था. इसे Google के इंजीनियर Orkut Buyukkokten ने बनाया था. उस दौर में भारत और ब्राजील जैसे देशों में यह काफी पॉपुलर हुआ. लोग अपनी प्रोफाइल बनाते थे, दोस्तों को जोड़ते थे और अपनी पसंद के सबजेक्ट पर बनी कम्युनिटी में बातचीत करते थे.

    इसकी खासियत सिर्फ दोस्तों की लिस्ट बनाना नहीं थी. यूजर्स एक-दूसरे की प्रोफाइल पर स्क्रैप यानी पब्लिक मैसेज छोड़ सकते थे और अपने दोस्तों के लिए टेस्टिमोनियल लिख सकते थे. कम्युनिटी में लोग फिल्मों, संगीत, कॉलेज, शहरों और अपनी रोजमर्रा की पसंद से जुड़े विषयों पर बातचीत करते थे.

    आज के सोशल मीडिया की तरह हर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होड़ उस समय इतनी बड़ी नहीं थी. Orkut पर लोगों को अपनी पसंद के समूहों में जुड़ने और एक-दूसरे से बातचीत करने का अलग अनुभव मिलता था. हालांकि, समय के साथ Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय हो गए. आखिरकार Google ने सितंबर 2014 में Orkut को बंद कर दिया.

    AI से क्यों परेशान हैं Orkut के संस्थापक?
    Orkut ने अपनी वेबसाइट पर लिखे खुले पत्र में आज के सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सोशल नेटवर्किंग का असली मकसद लोगों को जोड़ना था, लेकिन अब कई प्लेटफॉर्म का जोर यूजर्स का ध्यान बनाए रखने पर है.

    उनके मुताबिक, AI से तैयार पोस्ट, बॉट्स और नकली तस्वीरों या वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल से यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं. सोशल मीडिया की खास बात यही थी कि लोग किसी दूसरे इंसान से जुड़ते थे. अगर यह भरोसा कमजोर होता है, तो ऑनलाइन बातचीत का अनुभव भी बदल सकता है.

    हालांकि, ऑर्कुट AI को पूरी तरह खारिज नहीं करते. उनकी सोच है कि AI का इस्तेमाल लोगों की जगह लेने के बजाय उन्हें नए दोस्त बनाने, पुराने दोस्तों को खोजने और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ने में मदद करने के लिए होना चाहिए. यानी तकनीक का इस्तेमाल इंसानी रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए हो, न कि उनकी जगह लेने के लिए.

    क्या लोग सच में पुराने सोशल मीडिया को मिस कर रहे हैं?
    Orkut की वापसी की चर्चा के पीछे पुरानी यादें जरूर हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है. क्या लोग आज के सोशल मीडिया से थक चुके हैं और ऐसा प्लेटफॉर्म चाहते हैं, जहां उन्हें हर समय ट्रेंडिंग पोस्ट, वायरल वीडियो और एल्गोरिदम से तय होने वाले कंटेंट के बीच न रहना पड़े?

    Orkut की आधिकारिक वेबसाइट पर चल रहे अभियान को दुनिया के कई देशों से समर्थन मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 115 देशों के लोगों से 2.6 लाख से ज्यादा सपोर्ट दर्ज किए जा चुके थे. यह आंकड़ा लोगों की दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि नया सोशल नेटवर्क सफल होगा या सभी पुराने यूजर्स उस पर लौट आएंगे.

    किसी भी नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सिर्फ पुरानी यादें काफी नहीं होंगी. उसे यूजर्स की प्राइवेसी, फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन जैसी चुनौतियों का भी हल निकालना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में इसे इस्तेमाल करने के लिए क्यों चुनेंगे.

    अब आगे क्या होगा?
    फिलहाल Orkut की वापसी को एक शुरुआती पहल के तौर पर देखना सही होगा. संस्थापक लोगों का समर्थन जुटा रहे हैं और एक ऐसे सोशल नेटवर्क की कल्पना पेश कर रहे हैं, जिसमें असली लोग, दोस्ती और कम्युनिटी सबसे अहम हों. फिलहाल ये साफ नहीं है कि इसे लॉन्च किया जाएगा भी या नहीं.

  • मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें, स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता जरूरी: CM मोहन यादव

    मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें, स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता जरूरी: CM मोहन यादव

    शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी सजग हों नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मानसिक स्वास्थ्य दिवस,10 अक्टूबर पर नागरिकों से अपील की है कि सभी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हों और "तनाव मुक्त मध्यप्रदेश- स्वस्थ मन, स्वस्थ समाज और सशक्त मध्यप्रदेश" के निर्माण की दिशा में एक सामाजिक और सामूहिक संकल्प लें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि चिकित्सक  समुदाय और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों को  मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। ये आवश्यक है कि तनाव मुक्त और स्वस्थ मध्यप्रदेश के लिए सम्मिलित प्रयास हों।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज तनाव हमारे जीवन के लिए  एक चुनौती बनता जा रहा है। व्यक्तिगत जीवन, परिवार, कार्यस्थल और समाज में बढ़ता तनाव शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ हमारे संबंधों और जीवन शैली को भी प्रभावित कर रहा है। विशेष रूप से युवाओं में तनाव, अकेलापन, चिंता और भावनात्मक असंतुलन कई चुनौतियों को जन्म दे सकता है और उन्हें नशे, हिंसा जैसी हानिकारक प्रवृत्तियों की ओर भी ले जा सकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर से वर्षभर चलने वाली "तनाव मुक्त मध्यप्रदेश" की पहल को सराहनीय  बताते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को  हमेशा शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हार्टफुलनेस संस्था के स्वयं सेवकों द्वारा कमलेश पटेल (दाजी)के मार्गदर्शन में नि:शुल्क ध्यान और आंतरिक संतुलन की सरल पद्धति लोगों तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। 

  • MP में कहीं आंधी-बारिश तो कहीं तेज धूप, रीवा संभाग में बरसेंगे बादल; पचमढ़ी सबसे ठंडा

    MP में कहीं आंधी-बारिश तो कहीं तेज धूप, रीवा संभाग में बरसेंगे बादल; पचमढ़ी सबसे ठंडा

    भोपाल
    मध्यप्रदेश में
    मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और ट्रफ लाइन के सक्रिय रहने से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की संभावना बनी हुई है। रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के कई शहरों में धूप खिलने की संभावना है। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।मौसम विभाग के अनुसार, बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, दिन के समय गर्मी का असर अब भी बना हुआ है। बड़वानी के तालुन में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    रीवा संभाग में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में धूप
    मानसून की विदाई के बाद भी मौसम प्रणालियों के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है। रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, भोपाल और इंदौर में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।आने वाले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। ऐसे में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक
    हाल के दिनों में हुई बारिश का असर रात के तापमान पर भी पड़ा है। अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई शहरों में रातें अपेक्षाकृत ठंडी हो गई हैं।

    प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान

    पचमढ़ी: 16.4°C

    अमरकंटक: 17.9°C

    इंदौर: 17.9°C

    छिंदवाड़ा: 18.1°C

    कटनी (करौंदी): 18.8°C

    शाजापुर: 19°C

    वहीं, दिन के तापमान में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी जिले के तालुन में सबसे ज्यादा 37 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?
    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश होने की वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसी मौसम प्रणालियां हैं।अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस दौरान सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण मानसून की विदाई के बाद भी कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।इसलिए मानसून खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि प्रदेश में बारिश की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।

    इस बार सामान्य से 4% कम हुई बारिश
    मध्यप्रदेश में जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश का वितरण अलग-अलग रहा।

    पूर्वी मध्यप्रदेश: सामान्य से करीब 4% अधिक बारिश।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश: औसत से करीब 12% कम बारिश।

    जून में बारिश का कोटा 14 प्रतिशत कम रहने से पूरे मानसून सीजन के आंकड़ों पर असर पड़ा। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से काफी हद तक भरपाई हुई, लेकिन शुरुआती सूखे के कारण कुल बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी
    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    इन प्रमुख जिलों में सामान्य से कम बारिश
    इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार सहित कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    आगे कैसा रहेगा मध्यप्रदेश का मौसम?
    मौसम के मौजूदा रुख के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में मौसम साफ रह सकता है। अगले तीन दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप निकलने का अनुमान है।रात के तापमान में गिरावट से सुबह और देर रात हल्की ठंडक महसूस हो सकती है, जबकि दिन में गर्मी बनी रहने की संभावना है। स्थानीय मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए।

     

  • जालंधर में 27 अक्टूबर से हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज, खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगे खास इंतजाम

    जालंधर में 27 अक्टूबर से हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज, खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगे खास इंतजाम

    चंडीगढ़
     पंजाब में होने वाली एशियाई हाकी चैंपियंस ट्राफी के लिए पंजाब सरकार विश्वस्तरीय प्रबंध करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए। टूर्नामेंट का उद्घाटन समारोह 27 अक्टूबर को जालंधर में होगा, जबकि मुकाबले 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक खेले जाएंगे।

    चैंपियनशिप में भारत, चीन, मलेशिया, जापान, बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया की टीमें भाग लेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की समृद्ध हॉकी विरासत को देखते हुए इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को यादगार बनाया जाना चाहिए। इससे प्रदेश को अपनी खेल उपलब्धियों, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    शहरों की सफाई और सौंदर्यीकरण पर जोर
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तैयारियां केवल स्टेडियम तक सीमित नहीं रहेंगी। जालंधर और मोहाली में व्यापक सफाई अभियान चलाने, सार्वजनिक स्थानों का रखरखाव करने और स्टेडियम तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विदेशी खिलाड़ियों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए बेहतर आवास, भोजन, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था करने को भी कहा गया है। होटलों और मैच स्थलों के बीच सुचारु यातायात सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

    विद्यार्थियों की भागीदारी और ट्राफी टूर
    मुख्यमंत्री ने स्कूलों और कालेजों के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले दिखाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिले और वे पंजाब की हॉकी विरासत से जुड़ें। टूर्नामेंट के प्रचार के लिए विशेष रूप से तैयार एसयूवी में ट्रॉफी या उसके मॉडल को प्रदर्शित करते हुए प्रदेशभर में ट्राफी टूर निकालने की योजना भी बनाई जाएगी। आयोजन की तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए विशेष समिति गठित की जाएगी।

     

  • नवरात्रि कलश स्थापना 2026: सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ समय, राहुकाल में भूलकर भी न करें घटस्थापना

    नवरात्रि कलश स्थापना 2026: सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ समय, राहुकाल में भूलकर भी न करें घटस्थापना

    Shardiya Navratri 2026
    शक्ति की उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026, रविवार से आरंभ हो रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय महापर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस दौरान घरों में घटस्थापना (कलश स्थापना), अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं. नवरात्र के पहले दिन सही समय पर कलश स्थापना करना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे माता रानी की विशेष कृपा मिलती है.

    घटस्थापना की तिथि और पंचांग नियम
    हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 की रात 09:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर 2026 की रात 09:30 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, कलश स्थापना 11 अक्टूबर को ही की जाएगी. इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना की जाती है.

    11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
    यदि आप 11 अक्टूबर को कलश स्थापित करने जा रहे हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखें:

    प्रातःकाल मुख्य मुहूर्त:
    समय: सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक
    अवधि: इस बार भक्तों को कलश स्थापना के लिए करीब 4 घंटे लंबा प्रात:काल मुहूर्त मिल रहा है, जो पूजा के लिए अति उत्तम है.

    अभिजित मुहूर्त (दोपहर का शुभ समय):
    समय: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

    महत्व: यदि किन्हीं कारणों से आप सुबह के समय घटस्थापना न कर पाएं, तो इस अभिजित मुहूर्त में भी कलश स्थापित किया जा सकता है.

    शुभ चौघड़िया मुहूर्त (दिन के समय)
    चौघड़िया के अनुसार पूजा या शुभ कार्य करने के लिए ये समय भी बहुत अच्छे माने गए हैं:

    चर (सामान्य): सुबह 07:33 बजे से सुबह 09:00 बजे तक

    लाभ (उत्तम): सुबह 09:00 बजे से सुबह 10:28 बजे तक

    अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 10:28 बजे से सुबह 11:56 बजे तक

    शुभ (उत्तम): दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:51 बजे तक

    इस समय भूलकर भी न करें घटस्थापना (राहुकाल)
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य में राहुकाल का त्याग करना चाहिए. 11 अक्टूबर को राहुकाल शाम 4:34 बजे से शाम 6:01 बजे तक रहेगा. इस समयावधि में कलश स्थापना या कोई भी नया कार्य करने से बचना चाहिए.

    मां दुर्गा का हाथी पर आगमन
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा का पृथ्वी लोक पर आगमन अलग-अलग वाहनों से होता है. इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ रविवार के दिन होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे बेहद शुभ, लाभकारी और उत्तम वर्षा-समृद्धि का प्रतीक माना गया है. वहीं, इस बार व्रत का समापन और मां की विदाई मुर्गे की सवारी पर हो रही है.

  • बिहार में गंगा-गंडक का रौद्र रूप, बाढ़ से 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान; 11 जिले प्रभावित

    बिहार में गंगा-गंडक का रौद्र रूप, बाढ़ से 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान; 11 जिले प्रभावित

     पटना
     गंगा, गंडक, सोन एवं कोसी समेत बिहार की प्रमुख नदियों में कई वर्ष उपरांत रिकॉर्ड पानी आने से राज्य को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। इसमें आधे से अधिक क्षति जल संसाधन विभाग के तटबंधों के टूटने एवं क्षतिग्रस्त होने से हुई है।

    हालांकि, यह नुकसान का प्रारंभिक आकलन है। कई विभागों की अंतिम रिपोर्ट मिलना अभी शेष है। ऐसे में अंतिम आकलन के बाद नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

    बाढ़ का कहर दो चरणों में देखने को मिला। पहले चरण में 26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच बिहार की नदियों के राज्य से बाहर स्थित जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इस दौरान 30 रेनगेज स्थलों पर औसतन 225 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई।

    इसके कारण गंगा नदी ने दानापुर, गांधीघाट, बंकाघाट, पंडारक, सुल्तानगंज और एकचारी में अपने पुराने उच्चतम जलस्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दरधा नदी के कोल्हाचक में भी नया रिकॉर्ड बना।

    दूसरे चरण में 24 से 30 सितंबर के बीच नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश से गंडक नदी में पानी का दबाव काफी बढ़ गया। इस दौरान 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया।

    गंडक नदी ने बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में उच्चतम जलस्तर का नया रिकॉर्ड बनाया। पानी के भारी दबाव के कारण नदी के छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए।

    पहले चरण में 9617 करोड़ की क्षति
    पहले चरण की बाढ़ से 9617 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें जल संसाधन विभाग ने तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने से 5472 करोड़ रुपये की क्षति बताई है।

    आपदा प्रबंधन विभाग ने 2710 करोड़, ग्रामीण कार्य विभाग ने 1062 करोड़, कृषि विभाग ने 270 करोड़, पथ निर्माण विभाग ने 76 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने 27 करोड़ रुपये के नुकसान की सूचना दी है।

    वहीं, दूसरे चरण की बाढ़ से 1054 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन हुआ है। इसमें जल संसाधन विभाग की ओर से 1027.34 करोड़ और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से 26.81 करोड़ रुपये की क्षति बताई गई है। दोनों चरणों के विभागीय आकलन को जोड़ने पर नुकसान की राशि 10,671 करोड़ रुपये होती है।

    तटबंधों की मरम्मत के लिए मांगे करीब 1027 करोड़
    गंडक नदी में तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पश्चिम चंपारण के बगहा-एक, बैरिया और योगापट्टी, गोपालगंज के बैकुंठपुर तथा सारण के मकेर और पानापुर प्रखंड प्रभावित हुए।

    जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत के लिए 28 करोड़ 65 लाख रुपये, चंपारण, तिरहुत एवं अन्य तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए 973 करोड़ 69 लाख रुपये और बाढ़ पूर्व मरम्मत के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की है।

    82 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बाद, 26 की मौत
    बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग ने 11 जिलों में 82 हजार 186 हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने का अनुमान लगाया है।

    खेतों में पानी भरने और फसल डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। फसल क्षति का अंतिम आकलन होने के बाद प्रभावित किसानों को मिलने वाली सहायता का दायरा स्पष्ट होगा।

    दोनों चरणों की बाढ़ में राज्य में कुल 26 लोगों की मौत हुई है। पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 18 लोगों की जान गई। सारण में सर्वाधिक 15 लोगों की मौत हुई है।

    इसके अलावा पश्चिम चंपारण में तीन, मुंगेर में चार, भोजपुर में दो और भागलपुर में दो लोगों की मौत हुई है। राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दे रही है।