Author: NewseDay

  • प्याज के छिलके फेंकने की गलती न करें, पौधों से लेकर किचन तक इन 5 तरीकों से आएंगे काम

    प्याज के छिलके फेंकने की गलती न करें, पौधों से लेकर किचन तक इन 5 तरीकों से आएंगे काम

    सब्जी, दाल या सलाद बनाते समय प्याज हर भारतीय रसोई में रोज इस्तेमाल होता है. लेकिन हम प्याज छीलकर उसके सूखे छिलकों को बिना सोचे-समझे कूड़ेदान में फेंक देते हैं. क्या आप जानते हैं कि प्याज के छिलकों में प्याज से भी ज्यादा एंटी-ऑक्सीडेंट्स, सल्फर, पोटैशियम, कैल्सियम और क्वेर्सेटिन नाम का पाचक तत्व मौजूद होता है.

    ये सूखे छिलके न सिर्फ आपके पौधों के लिए सबसे बेहतरीन प्राकृतिक खाद का काम करते हैं बल्कि सफेद बालों को काला करने, सूप-करी का फ्लेवर बढ़ाने और त्वचा की रंगत सुधारने में कमाल का असर दिखाते हैं. अगर आप प्याज के छिलकों को फेंकने के बजाय इकट्ठा करें तो घर के 5 बड़े काम मुफ्त में हो जाएंगे. आइए जानते हैं प्याज के छिलकों के 5 शानदार इस्तेमाल.

    पौधों के लिए पोटैशियम रिच लिक्विड खाद
    इस्तेमाल: 2 मुट्ठी प्याज के छिलकों को 1 लीटर पानी में डालकर 24 घंटे के लिए ढककर छोड़ दें. 24 घंटे बाद पानी का रंग लाल-भूरा हो जाएगा. इसे छानकर पौधों की जड़ों में डालें. इसमें मौजूद पोटैशियम, आयरन और सल्फर से पौधों में कीड़े नहीं लगते और ढेरों फूल व फल आते हैं.

    सफेद बालों को काला करने का नेचुरल हेयर डाई
    इस्तेमाल: प्याज के छिलकों को कड़ाही में बिना तेल के तब तक भूनें जब तक वे पूरी तरह काले न हो जाएं. अब इस राख को पीसकर पाउडर बना लें. इसमें 1 चम्मच एलोवेरा जेल या नारियल तेल मिलाकर सफेद बालों पर लगाएं. यह बिना किसी केमिकल के बालों को तुरंत नेचुरल काला रंग देता है.

    सूप और करी का रंग व फ्लेवर बढ़ाएं
    इस्तेमाल: वेजिटेबल सूप, स्टू या किसी दाल-ग्रेवी को पकाते समय प्याज के साफ छिलकों को धोकर उबलते समय डाल दें. परोसने से पहले छिलके निकाल लें. इससे सूप या ग्रेवी को खूबसूरत नेचुरल रिच कलर और सोंधा फ्लेवर मिलता है.

    कीड़े-मकौड़ों के लिए नेचुरल पेस्टिसाइड स्प्रे
    इस्तेमाल: प्याज के छिलकों को पानी में 10-15 मिनट उबालें. ठंडा होने पर पानी को स्प्रे बोतल में भरें और 1/2 चम्मच डिशवॉश लिक्विड मिलाएं. इस स्प्रे को पौधों पर छिड़कने से कीड़े, एफिड्स और चींटियां तुरंत भाग जाती हैं.

    इम्युनिटी और गले की खराश के लिए टी
    इस्तेमाल: प्याज के छिलकों को अच्छी तरह धोकर 2 कप पानी में 5-7 मिनट तक उबालें. छानकर इसमें थोड़ा-सा शहद और नींबू का रस मिलाकर पिएं. इसमें मौजूद क्वेर्सेटिन एंटी-ऑक्सीडेंट इम्युनिटी बूस्ट करता है और मौसम बदलने पर होने वाली गले की खराश व सर्दी में राहत देता है.

  • नामांतरण प्रक्रिया हुई आसान, रजिस्ट्री होते ही मंगल सिंह सांडिया के नाम दर्ज हुई जमीन

    नामांतरण प्रक्रिया हुई आसान, रजिस्ट्री होते ही मंगल सिंह सांडिया के नाम दर्ज हुई जमीन

    सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी

    अब नामांतरण के लिए महीनों का इंतजार नहीं, रजिस्ट्री होते ही मंगल सिंह सांडिया का पूरा हुआ काम

    ऑटोम्यूटेशन से मिली बड़ी राहत, तहसील कार्यालय की दौड़भाग और लंबे इंतजार से मिली मुक्ति

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सुधारों से आम नागरिकों का जीवन हो रहा आसान

    रायपुर
    जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करने की परेशानी अब तकनीक आधारित पंजीयन व्यवस्था से दूर हो रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम कोटकखर्रा, पोस्ट लालपुर निवासी श्री मंगल सिंह सांडिया ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पहले जिस नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, इस बार वह रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही पूरा हो गया। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा से उन्हें लंबी प्रक्रिया और अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए इस नई व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी बताया।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं। संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ने वाली ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था इन्हीं सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे नागरिकों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयीन प्रक्रिया पूरी करने और लंबे इंतजार की परेशानी से राहत मिल रही है।

    पहले नामांतरण के लिए महीनों का इंतजार, अब रजिस्ट्री के साथ ही पूरा हुआ काम

    श्री मंगल सिंह सांडिया ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लगता था। कई बार महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। इस दौरान संपत्ति से जुड़े आगे के कार्यों को पूरा करने में भी परेशानी होती थी।

    लेकिन इस बार उनका अनुभव बिल्कुल अलग रहा। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा के कारण रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण हो गया। इससे उन्हें न तो महीनों इंतजार करना पड़ा और न ही नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयों की दौड़भाग करनी पड़ी।

    श्री सांडिया ने इस बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण का काम पूरा हो जाना उनके लिए बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं से आम नागरिकों का समय बचता है और सरकारी कामकाज के प्रति भरोसा भी बढ़ता है।

    ऑटोम्यूटेशन से आसान हुई रजिस्ट्री के बाद की प्रक्रिया

    पंजीयन विभाग द्वारा लागू ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के अंतर्गत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग की संबंधित प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।

    पहले नागरिकों को जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और राजस्व कार्यालयों में प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही कम करने और नामांतरण की प्रक्रिया को तेज बनाने में मदद मिल रही है।

    इस सुधार का विशेष महत्व ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भूमि स्वामियों के लिए है, जिन्हें संपत्ति संबंधी कार्यों के लिए बार-बार तहसील और राजस्व कार्यालय जाना पड़ता था। ऑटोम्यूटेशन से उनका समय बचने के साथ जमीन से जुड़े कार्यों को पूरा करना अधिक सुविधाजनक हो रहा है।

    मुख्यमंत्री और वित्त एवं पंजीयन मंत्री के प्रति जताया आभार

    श्री मंगल सिंह सांडिया ने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने पर खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि नामांतरण की प्रक्रिया में आई तेजी से उन्हें बड़ी सुविधा मिली है।

    श्री सांडिया का अनुभव बताता है कि शासन द्वारा पंजीयन सेवाओं में किए जा रहे तकनीकी सुधारों का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। उनके लिए ऑटोम्यूटेशन केवल एक डिजिटल व्यवस्था नहीं, बल्कि महीनों के इंतजार से मुक्ति और समय पर सरकारी काम पूरा होने की खुशी है।

    सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही सुशासन की कहानियां

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है।

    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मंगल सिंह सांडिया की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। जहां पहले नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब तकनीक आधारित व्यवस्था से रजिस्ट्री के साथ ही संबंधित प्रक्रिया पूरी होने की सुविधा मिल रही है। यह पहल नागरिकों के समय की बचत, कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

  • न्यूजीलैंड की बढ़ी मुश्किलें, हैमस्ट्रिंग और पिंडली की चोट से जूझ रहे ओ’रूर्के भारत दौरे से बाहर

    न्यूजीलैंड की बढ़ी मुश्किलें, हैमस्ट्रिंग और पिंडली की चोट से जूझ रहे ओ’रूर्के भारत दौरे से बाहर

    नई दिल्ली
    भारत के खिलाफ शुरू होने वाली सीरीज से पहले न्यूजीलैंड को एक और बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज विल ओ'रूर्के सीरीज से बाहर हो चुके हैं। 25 साल के ओ'रूर्के बाईं हैमस्ट्रिंग और पिंडली की चोट से जूझ रहे हैं और फिलहाल रिहैब प्रक्रिया में हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुताबिक ओ'रूर्के को आराम दिया जा रहा है। मैनेजमेंट उन्हें लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। दिसंबर-जनवरी में टीम को ऑस्ट्रेलिया में चार टेस्ट मैचों की बेहद अहम सीरीज खेलनी है।

    न्यूजीलैंड के हेड कोच निराश
    न्यूजीलैंड के मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने कहा, 'यह निराशाजनक है कि विल को भारत के खिलाफ घरेलू मैदान पर इतने बड़े दौरे से बाहर होना पड़ा। वह वनडे और टेस्ट दोनों सीरीज में हमारी योजना का हिस्सा थे, लेकिन बातचीत के बाद हम सभी इस बात पर सहमत हुए कि उन्हें चोटों से उबरने के लिए कुछ और समय देना चाहिए। अगले कुछ महीनों में हमारे तेज गेंदबाजी संसाधन बहुत जरूरी होंगे, इसलिए हम विल की वापसी का बेहतर तरीका अपना रहे हैं। हम चाहते हैं कि वह दोबारा मैदान पर उतरने से पहले पूरी तरह फिट हो जाएं। अच्छा होगा कि वह दिसंबर के आखिर में प्लंकेट शील्ड में कैंटरबरी के लिए वापसी कर पाए और अगर सब ठीक रहा तो 9 दिसंबर को पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए तैयार हो जाएंगे।'

    बेंगलुरु टेस्ट में झटके थे 7 विकेट
    विल ओ'रूर्के ने भारत के लिए टेस्ट में दमदार बॉलिंग की थी। 2024 में बेंगलुरु में भारत और न्यूजीलैंड के पहले टेस्ट मैच में उन्होंने कुल 7 विकेट लिए थे। पहली पारी में भारतीय टीम सिर्फ 46 रनों पर ऑलआउट हो गई थी। उसमें ओ'रूर्के 4 विकेट के थे। 14 मैचों के टेस्ट करियर में उनके 49 विकेट हैं।

    ओ'रूर्के का हालिया करियर चोटों से प्रभावित रहा है। वह पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण सात महीने बाहर रहने के बाद इस साल अप्रैल में बांग्लादेश के व्हाइट-बॉल दौरे पर लौटे थे। जून में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ तीनों टेस्ट खेले, लेकिन नॉटिंघम में तीसरे टेस्ट के आखिरी दिन उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई। उसके बाद से उन्होंने कोई मैच नहीं खेला है। अगस्त में ट्रेनिंग के दौरान पिंडली में खिंचाव आने से उनकी वापसी और टल गई।

     

  • अजय देवगन की ‘चौहान’ की शूटिंग शुरू, कारगिल पहुंचते ही एक्शन मोड में आए अभिनेता

    अजय देवगन की ‘चौहान’ की शूटिंग शुरू, कारगिल पहुंचते ही एक्शन मोड में आए अभिनेता

    'दृश्यम: द कन्क्लूजन' की सफलता का आनंद ले रहे अजय देवगन ने अपने अगले प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, अजय देवगन 2027 में भी इसी समय के आसपास एक और फिल्म रिलीज़ करने की योजना बना रहे हैं, और इसके लिए उन्होंने अपनी अगली फिल्म 'चौहान' पर काम शुरू कर दिया है.

    बॉलीवुड हंगामा के अनुसार, देवगन 'चौहान' की शूटिंग के लिए लद्दाख पहुंच गए हैं. एक सूत्र ने पोर्टल को बताया, 'अजय देवगन कारगिल में 'चौहान' की शूटिंग कर रहे हैं. वह कुछ दिन पहले यहां पहुंचे थे और शूटिंग शुरू कर चुके हैं. इस खूबसूरत शहर में कुछ अहम सीन शूट किए जाएंगे. मेकर्स ने पहले ही जरूरी मंजूरी ले ली थी और शूटिंग आसानी से हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए हैं.'

    सूत्र ने आगे कहा, 'कारगिल में काफी ठंड है, और मौसम निश्चित रूप से 'चौहान' के सीन में एक असली एहसास जोड़ेगा.'

    अजय दशकों बाद लद्दाख में शूटिंग कर रहे हैं. इससे पहले, एक्ट ने 2003 में जेपी. दत्ता की वॉर फिल्म 'एलओसी: कारगिल' के लिए इस केंद्र शासित प्रदेश में शूटिंग की थी.

    'चौहान' टीजर कब रिलीज हुआ?
    जून में जारी किए गए 'चौहान' के टीजर में अजय देवगन एक दमदार अवतार में नजर आते हैं. वह पूरी तरह से काले कपड़ों में दिख रहे हैं, जबकि बैकग्राउंड में मशहूर गाना 'जुम्मा चुम्मा दे दे' बज रहा है. टीजर एक असरदार डायलॉग के साथ खत्म होता है, 'पठान से कह देना, चौहान आ रहा है', जिसने फैंस के बीच उत्साह पैदा किया है और ऑनलाइन ध्यान खींचा है.

    'चौहान' का डायरेक्शन नीरज यादव कर रहे हैं और इसे जियो स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले ज्योति देशपांडे, आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं. अजय देवगन की मुख्य भूमिका वाली यह एक्शन ड्रामा फिल्म 1 अक्टूबर, 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.

    अजय देवगन की 'दृश्यम' के बारे में
    'दृश्यम 3' ने अजय देवगन के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की है. 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' की एडवांस बुकिंग 27 सितंबर को शुरू हुई और फिल्म ने रिलीज से पहले ही 27 करोड़ रुपये कमा लिए. रिलीज के पहले दिन इसने पूरे भारत में 66.75 करोड़ रुपये (नेट) कमाए, जो किसी हिंदी फिल्म के लिए तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग थी. फिल्म ने शनिवार को 53.50 करोड़ रुपये कमाए और रविवार को यह कमाई बढ़कर 61 करोड़ रुपये हो गई.

    Sacnilk की ताजा जानकारी के मुताबिक, फिल्म ने गुरुवार को 13 करोड़ रुपये कमाए, जिससे भारत में इसकी कुल नेट कमाई 245.50 करोड़ रुपये हो गई.

  • HCS में 16वीं रैंक लाकर मनमोहन सिंह ने बढ़ाया मोहाली का मान, अब खाकी वर्दी में संभालेंगे DSP की जिम्मेदारी

    HCS में 16वीं रैंक लाकर मनमोहन सिंह ने बढ़ाया मोहाली का मान, अब खाकी वर्दी में संभालेंगे DSP की जिम्मेदारी

     चंडीगढ़
     मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है। मोहाली में रहने वाले मनमोहन सिंह ने इसे सच कर दिखाया है।हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) परीक्षा-2026 के घोषित परिणाम में मनमोहन ने 16वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इस उपलब्धि के साथ अब उनके हरियाणा पुलिस में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बनने की राह बनी है।

    हालांकि, उन्हें मिलने वाला पद अंतिम नियुक्ति और सेवा आवंटन पर निर्भर करेगा। मूल रूप से पंजाब से जुड़े मनमोहन सिंह वर्तमान में मोहाली के एयरोसिटी क्षेत्र में रह रहे हैं।

    16वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया परिवार का गौरव
    दैनिक जागरण से बातचीत में मनमोहन ने कहा मेहनत का कोई विकल्प नहीं शॉर्टकट से बचें। वह चंडीगढ़ में भी 10 वर्ष से अधिक समय बिता चुके हैं। शहर से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है।

    अब हरियाणा की प्रतिष्ठित राज्य सिविल सेवा परीक्षा में 16वीं रैंक हासिल करके उन्होंने अपने परिवार और परिचितों को गौरवान्वित किया है।

    लुधियाना से कुरुक्षेत्र तक की पढ़ाई
    मनमोहन सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा लुधियाना स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी), कुरुक्षेत्र से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की।

    तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि से आने वाले मनमोहन ने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य चुना और उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए। एचसीएस परीक्षा में मिली सफलता उनकी इसी तैयारी और मेहनत का परिणाम है।

    27 जुलाई 1999 को जन्मे मनमोहन के पिता रविंदर सिंह सिविल इंजीनियर हैं और जुबिली ग्रुप में सहायक उपाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। उनकी माता जगविंदर कौर गृहिणी हैं। परिवार ने उनकी शिक्षा और करियर के सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    भंगड़ा और बैडमिंटन का भी शौक
    मनमोहन सिंह की रुचि केवल पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। उन्हें भंगड़ा करने और बैडमिंटन खेलने का भी शौक है। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो इंजीनियरिंग या किसी अन्य पेशेवर डिग्री के बाद सिविल सेवाओं में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

    मनमोहन ने अपनी उपलब्धि से यह संदेश दिया है कि सही लक्ष्य, निरंतर मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़कर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

  • MP OBC Reservation: 14% पर क्यों लौटा आरक्षण? हाईकोर्ट के 159 पेज के फैसले में क्या-क्या कहा गया

    MP OBC Reservation: 14% पर क्यों लौटा आरक्षण? हाईकोर्ट के 159 पेज के फैसले में क्या-क्या कहा गया

     जबलपुर
     मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक पिछड़ेपन, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व और आरक्षण बढ़ाने के लिए पेश किए गए आंकड़ों सहित कई अहम पहलुओं पर विचार किया। अदालत के 159 पृष्ठों के आदेश में स्पष्ट हुआ कि किसी वर्ग को आरक्षण देने का अधिकार और आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने का औचित्य दो अलग-अलग सवाल हैं। इन्हीं कसौटियों पर 27 प्रतिशत आरक्षण को उचित ठहराने के लिए प्रस्तुत आधारों की समीक्षा की गई।

    मामले में याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक सीमा का हवाला देते हुए आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को चुनौती दी, जबकि राज्य सरकार और आरक्षण समर्थकों ने सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा राज्य के नीतिगत अधिकारों के पक्ष में दलीलें रखीं। अंततः हाई कोर्ट ने 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कायम रखी और नियुक्तियों से जुड़े मामलों में भी निर्देश दिए।

    आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बनी प्रमुख आधार
    27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलील थी कि इससे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को भी जोड़ने पर कुल आरक्षण का अनुपात और बढ़ जाता है।

    याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे आगे बढ़ने के लिए असाधारण परिस्थितियों और ठोस संवैधानिक आधार का होना जरूरी है। केवल किसी वर्ग की आबादी अधिक होने के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।

    सरकार ने सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का दिया तर्क
    राज्य सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण के फैसले का बचाव करते हुए ओबीसी वर्ग की सामाजिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में उसकी भागीदारी को आधार बनाया। सरकार का पक्ष था कि पिछड़े वर्गों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है और इसके निर्धारण में राज्य की नीतिगत भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर भी संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया। सरकार की ओर से तर्क रखा गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत दिया गया है। इसलिए इसकी संवैधानिक स्थिति का परीक्षण अन्य आरक्षण प्रावधानों से जुड़े सवालों के समान आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता ने भी सरकार का पक्ष रखा था।

    भाजपा सरकार से पूछा सवाल

    चौधरी ने मध्यप्रदेश के सीएम और भाजपा सरकार से सवाल पूछा है कि वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार OBC के 27% आरक्षण के पक्ष में मजबूत कानूनी आधार क्यों नहीं तैयार कर सकी? अगस्त 2025 में सर्वदलीय बैठक में 27% आरक्षण के समर्थन पर सहमति बनी थी, तो उस सहमति को कानूनी परिणाम में बदलने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? जिन युवाओं ने परीक्षाएं दीं, मेहनत की और वर्षों तक नियुक्तियों का इंतजार किया, उनके भविष्य की जवाबदेही कौन लेगा?

    समीक्षा करें सरकार
    OBC आरक्षण कोई राजनीतिक एहसान नहीं, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का सवाल है। सरकार को अब बयानबाजी से आगे बढ़कर फैसले के कानूनी पहलुओं की समीक्षा करनी चाहिए, उपलब्ध वैधानिक विकल्पों पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए और लंबित भर्तियों पर स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना जनता के सामने रखनी चाहिए। OBC को केवल आश्वासन नहीं, अधिकारों की प्रभावी पैरवी चाहिए। युवाओं को भाषण नहीं, अपने भविष्य का जवाब चाहिए।

    ओबीसी मुद्दे पर क्या बोली एमपी कांग्रेस
    इधर, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकारों की मंशा और ओबीसी आरक्षण को लेकर उनकी भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार की कमजोर पैरवी और आधी-अधूरी जानकारी प्रस्तुत किए जाने के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी जी ने 8 अक्टूबर 2025 को दिल्ल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात की थी और सरकार को समय रहते चेताया था। लेकिन, सरकार नहीं जागी और आखिरकार 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर माननीय हाईकोर्ट का फैसला सामने आया। ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा में सरकार की विफलता ने भाजपा की नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेश की जनता जवाब चाहती है। ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए सरकार ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए?

    आरक्षण समर्थकों ने पिछड़ेपन और अवसरों पर दिया जोर
    27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पक्षकारों ने दलील दी कि ओबीसी वर्ग की सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में उसकी भागीदारी का आकलन किए बिना आरक्षण का प्रतिशत तय नहीं किया जा सकता।

    उनका कहना था कि सामाजिक न्याय की संवैधानिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल सभी को समान अवसर देने की औपचारिक घोषणा करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्गों को वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना भी है। आरक्षण समर्थकों ने इसी आधार पर राज्य सरकार के निर्णय को उचित ठहराने का प्रयास किया।

    पुरानी रिपोर्ट और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल
    मामले में आरक्षण बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए आंकड़ों और आयोगों की रिपोर्ट की प्रासंगिकता भी अहम मुद्दा बनी। वर्ष 2019 के निर्णय में वर्ष 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर निर्भरता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पुरानी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण बढ़ाने के औचित्य पर प्रश्न खड़े किए गए।

    राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श नहीं किए जाने का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान सामने आया। इसके अलावा, बाद में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट का भी परीक्षण हुआ। हाई कोर्ट ने रिपोर्ट के सीमित नमूने और तुलनात्मक आधार की कमी को ध्यान में रखते हुए उसे 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त ठोस आधार नहीं माना।

    हाई कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला
    हाई कोर्ट ने आरक्षण देने के अधिकार और उसके प्रतिशत में वृद्धि के औचित्य के बीच अंतर किया। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर सरकारी सेवाओं में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व को पर्याप्त माना और आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियां स्थापित नहीं पाईं।

    निर्णय में 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था कायम रखी गई। साथ ही, निर्धारित अवधि में 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के आधार पर नियुक्त किए गए कुछ ओबीसी अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को सुरक्षा प्रदान की गई। रोके गए 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को तीन महीने के भीतर नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए।

    इस तरह हाई कोर्ट के फैसले में सामाजिक न्याय के उद्देश्य, पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और आरक्षण की संवैधानिक सीमाओं के बीच संतुलन का सवाल केंद्र में रहा। अदालत ने आरक्षण बढ़ाने के लिए ठोस आंकड़ों और असाधारण परिस्थितियों की आवश्यकता पर जोर देते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को स्वीकार नहीं किया।

  • कच्चे तेल की महंगाई और व्यापारिक दबाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, UN रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर

    कच्चे तेल की महंगाई और व्यापारिक दबाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, UN रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर

    नई दिल्‍ली
     वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक सुस्ती और चीन जैसे दिग्गज देशों की घटती रफ्तार के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के कदम रुकने वाले नहीं हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाला देश बना रहेगा. जहां एक तरफ पड़ोसी देश चीन की विकास दर धीमी पड़ रही है, वहीं भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के दम पर नए रिकॉर्ड बनाने को तैयार है। 

    यूएनसीटीएडी (UNCTAD) की ‘व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र’ के मुताबिक, कच्चे तेल के भारी आयात और वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार जारी रहेगी. रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 (वित्त वर्ष 2027) में भारत की जीडीपी 7.3 फीसदी की दर से बढ़ेगी, जबकि 2027 (वित्त वर्ष 2028) में यह 6.8 फीसदी रह सकती है। 

    चीन-इंडोनेशिया काफी पीछे, एशिया का मुख्य इंजन बना भारत
    रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अकेले एशिया का योगदान 59 फीसदी रहने का अनुमान है. भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है तो चीन की अर्थव्‍यवस्‍था महज 4.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी. इंडोनेशिया आर्थिक विकास दर 5.2 फीसदी रहने का अनुमान है। 

    घरेलू मांग भारत की सबसे बड़ी ताकत
    भारतीय बाजार की सबसे बड़ी खूबी इसका अंदरूनी उपभोग है, जो बाहरी झटकों को आसानी से झेल लेता है. रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत की घरेलू खपत 6.9 फीसदी और अगले वर्ष 5.6 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है. हालांकि, बढ़ती लागत और महंगाई के चलते पिछले वर्षों की तुलना में खत की गति में हल्की नरमी देखी जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद यह आंकड़ा अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और स्थिर है। 

    भारत के डिजिटल मॉडल (DPI) का दुनियाभर में बजा डंका
    संयुक्त राष्ट्र ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और यूपीआई आधारित भुगतान मॉडल की सराहना की है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एक प्रमुख तकनीकी केंद्र के रूप में भी उभर चुका है. भारत ने अपनी डिजिटल तकनीक साझा करने के लिए 23 देशों के साथ समझौते किए हैं, जिनमें से श्रीलंका और यूएई सहित आठ देशों में तकनीकी सहयोग पहले से संचालित हो रहा है. इसके जरिए भारत क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक एकीकरण को नई दिशा दे रहा है। 

    विकासशील देशों की औसत चाल सुस्त
    संयुक्‍त राष्‍ट्री की इस रिपोर्ट में दुनिया भर के आर्थिक हालात को लेकर चिंता भी जताई गई है. यूएनसीटीएडी के अनुसार, 2026 में वैश्विक वृद्धि दर गिरकर 2.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2.9 फीसदी थी. वहीं विकासशील देशों की औसत वृद्धि दर भी 4.7 फीसदी से घटकर 4 फीसदी पर आ सकती है। 

  • आतंकियों के मुकदमे वापस लेने से लेकर पूजा के दिखावे तक, पूर्व डीजीपी ने सपा अध्यक्ष को घेरा

    आतंकियों के मुकदमे वापस लेने से लेकर पूजा के दिखावे तक, पूर्व डीजीपी ने सपा अध्यक्ष को घेरा

    रायपुर

     ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी।

    जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था।

    किसे कितनी मिली अवैध रकम

    रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप।

    देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण।

    चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए।

    जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया।

    विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य।
    शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश

    जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए।
    व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज

    ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है।
    चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका

    1. राम गोपाल अग्रवाल

    राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।

    2. देवेन्द्र सिंह यादव

    भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।

    3. विनोद तिवारी

    विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।

    4. रामप्रताप सिंह

    जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।

    5. चंद्रदेव प्रसाद राय

    तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।

    6. जयप्रकाश मौर्य

    तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।

    7. पियूष कुमार साहू

    पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।

    8. जोगेन्दर सिंह

    जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।

    9. अनुराग चौरसिया

    अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।

    10. दीपेश टांक

    दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।

    11. सुनील कुमार अग्रवाल

    इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।

    12. राहुल मिश्रा

    राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।

     

  • छत्तीसगढ़ के IPS अधिकारी संतोष सिंह की नई पोस्टिंग, दिल्ली मेट्रो में DIG पद की कमान संभाली

    छत्तीसगढ़ के IPS अधिकारी संतोष सिंह की नई पोस्टिंग, दिल्ली मेट्रो में DIG पद की कमान संभाली

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के उप महानिरीक्षक (DIG) का पदभार ग्रहण कर लिया है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात संतोष सिंह अब देश की राजधानी की सुरक्षा लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे। 

    सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक कुशलता में संतोष सिंह का अनुभव काफी समृद्ध रहा है. वे छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे 9 प्रमुख जिलों में एसपी व एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इसके अतिरिक्त वे सुकमा में अतिरिक्त एसपी और दुर्ग में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) के पद पर भी तैनात रहे हैं। 

    दिल्ली में इस नई जिम्मेदारी से ठीक पहले वे हैदराबाद में 'साउथ जोन-2' के डीआईजी के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे. वहां उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में फैले पूर्वी तटीय बंदरगाहों तथा सामरिक व औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की कमान संभाली थी। 

    क्षेत्रीय सुरक्षा और अति-संवेदनशील अवसंरचनाओं की रखवाली के उनके इस विस्तृत अनुभव का लाभ अब दिल्ली मेट्रो को मिलेगा। 

    उल्लेखनीय है कि दिल्ली मेट्रो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की लाइफलाइन है, जो 271 स्टेशनों के जरिए दिल्ली को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पड़ोसी शहरों से जोड़ती है। 
    इस विशाल नेटवर्क ने बीते 17 सितंबर को ही लगभग 82.45 लाख यात्रियों के दैनिक सफर का नया रिकॉर्ड कायम किया है. इतने बड़े पैमाने पर दैनिक आवाजाही वाले इस नेटवर्क की सुरक्षा में संतोष सिंह का अनुभव बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। 

  • कांकेर माओवादी मामले में कोर्ट का फैसला, दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास

    कांकेर माओवादी मामले में कोर्ट का फैसला, दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास

    कांकेर 

    छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले स्थित भानुप्रतापपुर की विशेष एनआईए अदालत ने सुरक्षा बलों को विस्फोटकों से निशाना बनाने की साजिश रचने के मामले में दो लोगों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. विशेष एनआईए न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने दोनों अभियुक्तों पर 2,000-2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता त्रिभुवन शंकर यादव ने की। 

    यह मामला 28 अक्टूबर 2023 का है, जब कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के चिलपरस-नयापारा पहाड़ी के पास सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम गश्त कर रही थी. सर्चिंग के दौरान जंगल के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया. पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान सानू कोमरा और अर्जुन साहू के रूप में हुई। 

    जांच के दौरान खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी प्रतिबंधित माओवादी संगठन की जन मिलिशिया शाखा से जुड़े थे और बारूदी सुरंग या विस्फोटक लगाकर सुरक्षा बलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने की साजिश में शामिल थे. आरोपियों के कब्जे से नौ डेटोनेटर, तार का बंडल, स्विच, प्लास्टिक रस्सी, छर्रों के दो पैकेट, लगभग एक किलोग्राम लोहे के टुकड़े, दो पाइप और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था। 

    पुलिस ने मामला दर्ज कर साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जहां सुनवाई के बाद दोनों को दोषी करार दिया गया। 
    उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले में माओवादी मामलों में न्यायिक कार्रवाई तेजी से चल रही है. जिले में लंबित 36 मामलों में से हाल ही में तीन में फैसले आ चुके हैं, जिससे अब लंबित मामलों की संख्या घटकर 33 रह गई है। 
    इससे पहले सितंबर 2026 में कांकेर अदालत ने स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य प्रभाकर राव और उनकी पत्नी राजे कांगे से जुड़े मामले में निर्णय सुनाया था, जबकि 16 सितंबर 2026 को भानुप्रतापपुर अदालत ने माओवादी आरोपी पोलूराम आंचला को भी 10 साल की सजा सुनाई थी.