Author: NewseDay

  • डिजिटल क्रॉप सर्वे पर सरकार सख्त, मॉनिटरिंग और क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर; 10 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य

    डिजिटल क्रॉप सर्वे पर सरकार सख्त, मॉनिटरिंग और क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर; 10 नवंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

    डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य 10 नवम्बर तक पूरा करें

    कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में कलेक्टरों को दिए निर्देश

    डिजिटल क्रॉप सर्वे की मॉनिटरिंग, त्रुटियों के सुधार और डेटा के क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर

    रायपुर,
     मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति, खसरों की जियो-रेफरेंसिंग, पॉलीगॉन निर्माण, फसल की वास्तविक स्थिति के सत्यापन तथा सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
    राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में अब तक 93.84 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य प्रत्येक खसरे में बोई गई फसल के क्षेत्रफल को वास्तविक स्थिति के आधार पर दर्ज करना है। इसके लिए फसल का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, पॉलीगॉन निर्माण तथा संबंधित जानकारी को डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए।

    10 नवंबर तक पूरा करें सर्वे का शेष कार्य
    मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कलेक्टरों को निर्देश दिए कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य हर हाल में 10 नवंबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन खसरों का नक्शा उपलब्ध नहीं है या जिनकी जियो-रेफरेंसिंग नहीं हुई है, उनकी पहचान कर पॉलीगॉन तैयार किए जाएं और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड की जाए। इसके लिए जिलों में उपलब्ध ग्रामवार डेटा का उपयोग करते हुए शेष खसरों में धान अथवा अन्य फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए। पिछले वर्ष के फसल संबंधी रिकॉर्ड का भी आवश्यकतानुसार संदर्भ लिया जाए।

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सर्वे का कार्य 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, वहां शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। सर्वेयर, पटवारी और राजस्व विभाग के अन्य मैदानी अमले को सक्रिय कर ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे का कार्य केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक फसल स्थिति के आधार पर पूरा होना चाहिए।

    ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं का होगा निराकरण
    मुख्य सचिव ने बताया कि 1 नवंबर से ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में डिजिटल क्रॉप सर्वे से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों को ग्राम सभाओं के आयोजन की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि वे अपनी फसल संबंधी जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति होने पर अपनी आपत्ति और समस्या प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामवार ऐसे किसानों की सूची तैयार की जाए, जिनकी फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन या सुधार किया जाना है। ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाए और आवश्यक सुधारों को रिकॉर्ड में अद्यतन किया जाए। कलेक्टर ग्रामसभा सहित सर्वे की आगे की कार्ययोजना तैयार करें तथा सुधार के लिए प्राप्त आवेदनों और प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

    डेटा की गुणवत्ता और क्रॉस वेरिफिकेशन पर विशेष जोर
    मुख्य सचिव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे में किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधार किया जाए। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड अंतिम रूप से फ्रीज होने के बाद त्रुटियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। प्रत्येक जिले में सर्वे की प्रगति के साथ उसकी गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से धान सहित सभी फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी पात्र फसल क्षेत्र सर्वे से छूटने न पाए।

    विशेष श्रेणी के किसानों का भी होगा पंजीयन
    मुख्य सचिव ने विशेष श्रेणी के किसानों का अलग से पंजीयन कर उनकी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक में अपलोड करने के निर्देश दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत आने वाले किसान, वन क्षेत्रों के ग्रामों से संबंधित किसान, ग्राम कोटवार तथा शासकीय पट्टाधारी किसानों की जानकारी शामिल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों के किसानों का सर्वे और पंजीयन भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर 10 नवंबर तक संबंधित रिपोर्ट अपलोड की जाए। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय जिलों और एफआरए क्षेत्रों में कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पात्र किसानों का पंजीयन और फसल संबंधी विवरण सही तरीके से दर्ज हो। मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे की सफलता के लिए सही डेटा, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सर्वे का कार्य वास्तविक स्थिति के आधार पर पूरा हो तथा किसानों को अपनी समस्याएं रखने और उनमें सुधार कराने का अवसर मिले।बैठक में मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को जल जीवन मिशन के कार्यों की भी समीक्षा करने और संबंधित प्रगति पर आवश्यक ध्यान देने के निर्देश दिए। 

    बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग  श्रीमती फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • प्रभावित परिवारों को शीघ्र मिले नियमानुसार मुआवजा, नुकसान के आकलन और राहत संबंधी कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश

    प्रभावित परिवारों को शीघ्र मिले नियमानुसार मुआवजा, नुकसान के आकलन और राहत संबंधी कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश

    रायपुर

     पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के हाथी प्रभावित ग्राम मरडीह, फुंगी और कुरमंतपारा का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मंत्री  अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों, एसडीएम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  अग्रवाल ने प्रभावित गांवों के भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और हाथियों के कारण उत्पन्न परिस्थितियों तथा उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान और राहत संबंधी कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हाथियों से प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो तथा उनके नुकसान का नियमानुसार आकलन कर मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया प्राथमिकता के साथ पूरी की जाए।

    प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में न हो अनावश्यक विलंब

    मंत्री  राजेश अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हाथियों के कारण हुए नुकसान का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ आकलन किया जाए। प्रभावित परिवारों के प्रकरणों में आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में विभागीय समन्वय बनाए रखते हुए त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।

    मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर शासन पूरी तरह संवेदनशील है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत दिलाने के लिए सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा।

    जनता की सुरक्षा और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहना हमारी प्राथमिकता: मंत्री  अग्रवाल

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी मिलते ही आज मैं स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचा हूं। प्रभावित परिवारों की समस्याओं को समझना और उन्हें समय पर राहत दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। मैंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नुकसान का शीघ्र आकलन कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। जनता की सुरक्षा, प्रभावित परिवारों को राहत और हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़े रहना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के साथ वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय से कार्य करना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    ग्रामीणों से सतर्क रहने और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील

    मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान पूरी सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें तथा वन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की जागरूकता, सतर्कता और प्रशासन के साथ समन्वय से संभावित खतरों को कम किया जा सकता है।

    मंत्री  अग्रवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन और प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान तथा प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा और राहत संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी, एसडीएम, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

  • ​अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में ‘स्कूल केईन्ता’ से जगी उम्मीद

    ​अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में ‘स्कूल केईन्ता’ से जगी उम्मीद

    रायपुर

     जब हौसले मजबूत हों, तो दुर्गम से दुर्गम रास्ते भी सुगम हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर अंचलों में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘स्कूल केईन्ता अभियान’ ने इस बात को सच कर दिखाया है। भौगोलिक विषमताओं और दूरी के कारण जो बच्चे कभी शिक्षा से दूर थे, आज वे अपने ही गाँव में अक्षर ज्ञान प्राप्त कर अपने स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

     ​इस संवेदनशील पहल के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है, वहीं अत्यंत पहुँचविहीन क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक प्राथमिक शालाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।

    ​अब 10 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर बना बीती बात

    संकुल केंद्र गारपा के अंतर्गत आने वाले गाँव घमंडी की कहानी इस बदलाव का जीवंत उदाहरण है। कभी यहाँ के मासूम बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए कोड़ेनार तक लगभग 10 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता था। घने जंगलों, पथरीले रास्तों और लंबी दूरी के कारण बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पाते थे।
    बच्चों और अभिभावकों की इस पीढ़ियों पुरानी समस्या को समझते हुए ज़िला प्रशासन ने गाँव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी की शुरुआत की। वर्तमान में इस विद्यालय में 30 बच्चे पंजीकृत हैं।

    स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे गाँव के ही बच्चों को नियमित अध्ययन से जोड़कर इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में एक नायक की भूमिका निभा रहे हैं। अब बच्चों को शिक्षा पाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। बच्चों को ​शिक्षा के साथ अधिकारों का उपहार मिला। ​गाँव में स्कूल खोलने के साथ-साथ प्रशासन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रशासनिक सुविधाओं को भी उनके द्वार तक पहुँचा रहा है। हाल ही में वैकल्पिक शाला घमंडी के गत वर्ष नामांकित 22 बच्चों को उनके जाति प्रमाण पत्र तैयार कर वितरित किए गए। ​इन आवश्यक दस्तावेजों के मिल जाने से न केवल बच्चों और अभिभावकों में अपार हर्ष है, बल्कि भविष्य में मिलने वाली विभिन्न शासकीय छात्रवृत्तियों, शैक्षणिक योजनाओं और नागरिक सुविधाओं का लाभ उठाने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।

    इस अभियान के माध्यम से 2,000 से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ चुके है। दूरस्थ क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाओं का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। अपने गाँव में पढ़ाई की सुविधा मिलने से अब बच्चों को 10 किमी की थकाऊ यात्रा से मुक्ति मिल गई है।
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    ​एक मिसाल बनता 'स्कूल केईन्ता अभियान'

    ज़िला प्रशासन का यह सतत प्रयास साबित करता है कि यदि प्रतिबद्धता हो, तो अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक भी विकास की किरण पहुँचाई जा सकती है। 'स्कूल केईन्ता अभियान' न केवल बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर शिक्षण व्यवस्था और आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाकर राज्य के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

  • छत्तीसगढ़ कोल लेवी केस: ₹104 करोड़ के लेनदेन को लेकर बड़ा खुलासा, कांग्रेस कार्यालय का नाम आया सामने

    छत्तीसगढ़ कोल लेवी केस: ₹104 करोड़ के लेनदेन को लेकर बड़ा खुलासा, कांग्रेस कार्यालय का नाम आया सामने

    रायपुर

     ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी।

    जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था।

    किसे कितनी मिली अवैध रकम

    रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप।

    देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण।

    चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए।

    जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया।

    विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य।

    राजीव भवन में रकम आने और राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी
    चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने वाले लोगों के बयानों में कैश से भरा बैग राजीव भवन ले जाकर देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात है। देवेंद्र डडसेना, राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और राजीव भवन में उनके कक्ष के पास बैठता था। राजीव भवन में देवेंद्र डउसेना के साथ कार्यरत कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए।

    रूपेंद्र यादव और सोहन साहू ने बताया कि उन्होंने कई बार भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और देवेंद्र डडसेना के कमरे में रखे जाते देखे। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8-10 बैग आने और कई बार उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। सोहन साहू ने एक गाड़ी के नंबर में “0009” अंक होने और सफेद स्विफ्ट डिजायर का जिक्र किया।

    बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के उस हिस्से को बंद करने और कर्मचारियों को वहां से हटाने की बात भी सामने आई है। शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव ने बताया कि राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना उस समय कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने उस हिस्से को बंद किए जाने और बैगों के बारे में बाद में मिली जानकारी भी दी।

    शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश

    जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए।
    व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज

    ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है।
    चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका

    1. राम गोपाल अग्रवाल

    राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।

    2. देवेन्द्र सिंह यादव

    भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।

    3. विनोद तिवारी

    विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।

    4. रामप्रताप सिंह

    जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।

    5. चंद्रदेव प्रसाद राय

    तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।

    6. जयप्रकाश मौर्य

    तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।

    7. पियूष कुमार साहू

    पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।

    8. जोगेन्दर सिंह

    जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।

    9. अनुराग चौरसिया

    अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।

    10. दीपेश टांक

    दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।

    11. सुनील कुमार अग्रवाल

    इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।

    12. राहुल मिश्रा

    राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।

     

  • लोन हो सकते हैं महंगे, लेकिन काबू में आएगी महंगाई! रेपो रेट पर SBI रिसर्च का बड़ा दावा

    लोन हो सकते हैं महंगे, लेकिन काबू में आएगी महंगाई! रेपो रेट पर SBI रिसर्च का बड़ा दावा

     नई दिल्‍ली
    SBI रिसर्च ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से रेपो रेट को लेकर ज्‍यादा अग्रेसिव नजरिया अपनाने का सुझाव दिया है और कहा है कि संभव हो तो दिसंबर तक 50 बेसिस पॉइंट रेपो रेट में बढ़ोतरी करनी चाहिए, क्‍योंकि ग्‍लोबल स्‍तर पर महंगाई तेजी से बढ़ रही है, फाइनेंशियल उथल-पुथल जारी है, कैपिटल की लागत भी बढ़ रही है और मुद्रा भी अस्थिर है।  

    9 अक्‍टूबर को Ecowrap में SBI रिसर्च ने कहा कि अभी के माहौल में रणनीति बदलने की आवश्‍यकता है, जिसमें ब्‍याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी, लिक्विडिटी और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता रोकना शामिल है. इस रिपोर्ट में अगली आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी के इंतजार के बजाय ऑफ सर्किल पॉलिसी एक्शन की भी बात कही गई है। 

    कितनी रहेगी भारत की जीडीपी ग्रोथ? 
    SBI रिसर्च को उम्‍मीद है कि आर्थिक विकास दर लचीला बना रहेगा, जो संभावित 7.5 फीसदी से ज्‍यादा हो सकता है और उनका मानना है कि दिसंबर की पॉलिसी बैठक में ब्‍याज दरों मं बड़ी बढ़ोतरी उचित हो सकती है. हालांकि, रिपोर्ट में इन उपायों को RBI से सिफारिश के तौर पर पेश किया गया है। 

    क्‍यों बढ़ानी चाहिए और रेट? 
    रिपोर्ट में ग्‍लोबल अनिश्चितता में बढ़ोतरी, सरकारी बॉन्‍ड पर मिले ब्‍याज में उतार-चढ़ाव, वस्‍तुओं की आपूार्ति को लेकर चिंताएं और अमेरिकी ब्‍याज दरों के बारे में बदलती उम्‍मीदों की ओर इशारा किया गया है. इन घटनाक्रमों ने वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव तेज कर दिया है. एसबीआई रिसर्च का तर्क है कि उभरते बाजारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि ग्‍लोबल कैपिटल फ्लो अधिक अस्थिर हो जाता है और फंड की लागत और उपलब्धता बिगड़ जाती है। 

    रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि RBI द्वारा हाल ही में की गई ब्याज दर में बदलाव का बॉन्ड यील्ड और विनिमय दर पर प्रभाव सीमित रहा है, क्योंकि बाजारों ने पहले ही इस बदलाव को ध्यान में रख लिया है. इस कारण अगली नीतिगत प्रतिक्रिया का समय और दायरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 

    आरबीआई को एसबीआई रिसर्च ने दिया ये भी सुझाव 
    ब्‍याज दर में बढ़ोतरी के साथ-साथ, एसबीआई रिसर्च ने लिक्विडिटी एटजेस्‍टमेंट फैसिलिटी (LAF) कॉरिडोर को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर सीमित अवधि के लिए उच्च स्तर पर करने का प्रस्ताव दिया है. अभी रेपो रेट 5.5 फीसदी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई अपनी लिक्विडिटी मैनेजमेंट के तहत, MPC के नीतिगत दर पर लिए गए निर्णय से स्वतंत्र रूप से, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और रिवर्स रेपो दरों को समायोजित कर सकता है. इसमें 2013 के टेपर टैंट्रम और 2020 के कोविड-19 संकट के दौरान केंद्रीय बैंक की कार्रवाइयों को वित्तीय तनाव की अवधि के दौरान कॉरिडोर को चौड़ा करने के लिए मिसाल के तौर पर अपडेट किया गया है। 

    इस बड़ी बढ़ोतरी से क्‍या मतलब है?
    ब्‍याज दरों में ज्‍यादा बढ़ोतरी से मॉनिटरी पॉलिसी की विश्वसनीयता को मजबूत करने और महंगाई की आशंकाओं को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे फैमिली और बिजनेस के लिए उधार लेने की लागत भी बढ़ सकती है. उच्च ब्याज दरें, निवेश और लोन की मांग पर दबाव डाल सकती हैं, जबकि सख्त वित्तीय स्थितियां आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। 

    एसबीआई रिसर्च ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन को मजबूत करने, लोन और इक्विटी बाजारों में लॉन्‍गटर्म कैपिटल आकर्षित करने के लिए सरकारी उपायों की भी मांग की है. आखिर में रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि RBI को विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना होगा और लगातार आने वाले झटकों का सामना करना होगा। 

  • माता साहिब हासी देवी को राष्ट्रीय सम्मान, कोलकाता टकसाल में तैयार हुआ ₹200 का विशेष स्मारक सिक्का

    माता साहिब हासी देवी को राष्ट्रीय सम्मान, कोलकाता टकसाल में तैयार हुआ ₹200 का विशेष स्मारक सिक्का

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 22 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार 200 का स्मारक सिक्का जारी करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रायपुर लोकभवन में सिक्के का विमोचन करेंगी। इस मौके पर माता साहिब के सम्मान में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। 35 ग्राम वजन वाले इस सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी सहित चार धातुओं का मिश्रण होगा। इस पहल को सिंधी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

    दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका है। इससे देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों को गर्व महसूस होगा।

    उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को अहम बताया। सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा, कोलकाता टकसाल में बना है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

    राष्ट्रपति के हाथों होगा सिक्के का विमोचन

    22 अक्टूबर को रायपुर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्मारक सिक्के का अनावरण करेंगी। आयोजन में 200 से अधिक विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। सिक्के के साथ विशेष डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी दी गई है। माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    35 ग्राम का सिक्का, 50 प्रतिशत चांदी का इस्तेमाल

    प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत के मुताबिक, स्मारक सिक्के का निर्माण भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में किया जा रहा है। सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा।

    सिक्के में इस्तेमाल होने वाली धातुएं:

    चांदी: 50 प्रतिशत

    तांबा: 40 प्रतिशत

    निकल: 5 प्रतिशत

    जस्ता: 5 प्रतिशत

    धातुओं के इस मिश्रण से तैयार होने वाला सिक्का माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती की स्मृति में जारी किया जाएगा।

    कहां और कैसे होगी सिक्के की बुकिंग?

    शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई के अनुसार, सिक्के के विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, बुकिंग की तारीख, कीमत, उपलब्ध सिक्कों की संख्या और आधिकारिक बिक्री संबंधी विस्तृत जानकारी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए।

    सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

    दरबार के सचिव उदय सांई ने कहा कि किसी सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना समाज के लिए गर्व का विषय है। इससे देश और विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी के वर्षों के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया।

    शदाणी दरबार की परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी हुई है। दरबार के संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे और बाद में हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां प्रज्वलित की गई पवित्र धूनी साहिब आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।

    बुकिंग की भी मिलेगी सुविधा
    संत डॉ. युधिष्ठिर लाल के बेटे और दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की कई इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।

    इसके अलावा कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। उदय सांई ने कहा कि सिंधी समाज के लिए यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

    स्मारक सिक्के के जरिए माता साहिब हासी देवी के योगदान और शदाणी दरबार की पहचान को भी व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है।

    शदाणी दरबार पीठ 300 साल पुराना मठ
    शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे।

    इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब प्रज्वलित की गई, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

    भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी।

    वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल इसके नौवें पीठाधीश्वर हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्य भी किए जाते हैं।

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    विभाजन के बाद रायपुर बना शदाणी परंपरा का प्रमुख केंद्र

    भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ मानव सेवा और समाज कल्याण से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं।

    सिक्के से राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी विरासत को पहचान

    माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का सिंधी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा। रायपुर में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं, इतिहास में रुचि रखने वालों और सिक्का संग्राहकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

  • ओमानी को-पायलट हम्मामी पर गंभीर आरोप, यूएई जांच में ऑस्ट्रेलिया के मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े केंद्र का जिक्र

    ओमानी को-पायलट हम्मामी पर गंभीर आरोप, यूएई जांच में ऑस्ट्रेलिया के मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े केंद्र का जिक्र

     नई दिल्ली
    यूएई के अटॉर्नी जनरल हमाद सैफ अल-शामसी ने फ्लाईदुबई फ्लाइट की घटना से जुड़े नया खुलासा किया है. सितंबर 2026 में दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी पर आरोप है कि उन्होंने विमान का नियंत्रण हासिल कर इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल पर आत्मघाती हमला करने की कोशिश की थी. यात्रियों और चालक दल ने समय रहते उन्हें रोक लिया. जांच में सामने आया कि उसकी कट्टरपंथी विचारधारा का शुरुआती मोड़ ऑस्ट्रेलिया में पड़ा। 

    अल-हम्मामी 2015 से 2017 तक मेलबर्न के आरएमआईटी विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा था. यूएई जांच के अनुसार, 2017 में उसने चरमपंथी साहित्य पढ़ना और ऑनलाइन सामग्री देखना शुरू किया जो आतंकवादी संगठनों और आत्मघाती हमलों के तरीके को बताती थी।  

    वो आरएमआईटी से जुड़े एक मस्जिद में जाता था, जहां उनका परिचय माई सेंटर नाम के केंद्र से जुड़े लोगों से हुआ. उसके बयान के मुताबिक, यह केंद्र एक लेबनानी व्यक्ति अबू हम्जा द्वारा संचालित था. मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी एक संस्था से समर्थन प्राप्त था. इन दावों की अभी जांच चल रही है. इस दौरान उसकी सोच में हिंसा और आतंकवाद की तरफ झुकाव स्पष्ट रूप से बढ़ा। 

    नौकरी और योजना की तैयारी
    उसने स्वीकार किया कि 11 सितंबर 2001 के हमलों से प्रेरित होकर उसने पायलट बनने का फैसला किया. ओमान एयर, रॉयल एयर मोरक्को और फिर फ्लाईदुबई में काम करते हुए उसने दो बार पहले तेल अवीव की उड़ानें भरीं ताकि मार्ग और एयरपोर्ट की जानकारी जुटा सकें. तीसरी उड़ान पर योजना अमल में लाने की कोशिश हुई. जांच में कहा गया कि उन्होंने मानसिक और शारीरिक तैयारी भी की। 

    यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ स्थानों पर कट्टरपंथी विचारधारा युवाओं को प्रभावित कर सकती है. ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में शिक्षा के दौरान बाहरी प्रभावों से व्यक्ति की सोच बदल सकती है. मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी विचारधारा से जुड़े दावों पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि ये लंबे समय तक छिपे रहकर खतरा पैदा कर सकते हैं. एयरलाइन सुरक्षा जांच में ऐसी प्रवृत्तियां नहीं पकड़ी गईं, जो सिस्टम की कमजोरी उजागर करती है। 

    वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव
    यह घटना हवाई यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है. एक व्यक्ति की विचारधारा पूरे विमान और एयरपोर्ट को निशाना बना सकती है. कट्टरपंथी सामग्री का ऑनलाइन प्रसार और कुछ धार्मिक केंद्रों में विचारधारा का प्रचार रोकने की जरूरत है. देशों को आपसी कोयोग बढ़ाकर ऐसे मामलों की निगरानी करनी चाहिए। 

    ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां भी अब उसकी वहां की गतिविधियों की जांच कर रही हैं. यह मामला याद दिलाता है कि घृणा फैलाने वाले प्रचारक और चरमपंथी सामग्री समाज में हिंसा का खतरा पैदा करते हैं. जागरूकता, सख्त स्क्रीनिंग और विचारधारा के प्रसार पर अंकुश जरूरी है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। 

  • ताहिर हुसैन की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली दंगा मामले में अदालत ने ठहराया दोषी; सजा पर फैसला 16 नवंबर को

    ताहिर हुसैन की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली दंगा मामले में अदालत ने ठहराया दोषी; सजा पर फैसला 16 नवंबर को

     नई दिल्ली

    दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर इलाके के एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया. वहीं, अदालत ने इस मामले में शामिल 12 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। 

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत दोषी ठहराया. धारा 147 दंगा करने की सजा से संबंधित है, जबकि धारा 109 उकसाने के बाद अपराध किए जाने और उसकी सजा से जुड़ी है. अदालत ने सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की है। 

    इस मामले में कुल 13 आरोपी थे. इनमें ताहिर हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और मेहक सिंह शामिल थे. इन सभी पर दंगा करने, आवासीय मकान में चोरी और आग या विस्फोटक पदार्थों से नुकसान पहुंचाने समेत कई अपराधों के 
    आरोप थे। 

    ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया गया था
    जुलाई में दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था. उस मामले में अदालत ने उन्हें दुश्मनी बढ़ाने, दंगा करने, हमला करने, आपराधिक बल का इस्तेमाल करने और हत्या का दोषी पाया था। 

    यह मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज FIR से जुड़ा है. इस मामले में नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को निलंबित कर दिया था. फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, कई अन्य घायल हुए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. इसी मामले में मार्च 2023 में दिल्ली की एक अदालत ने ताहिर हुसैन और 10 अन्य के खिलाफ आरोप तय किए थे। 

  • असली नोटों के बीच नकली करेंसी खपाते थे आरोपी, बदायूं पुलिस ने गिरोह की जांच शुरू की

    असली नोटों के बीच नकली करेंसी खपाते थे आरोपी, बदायूं पुलिस ने गिरोह की जांच शुरू की

    बदायूं
    नकली नोट छापकर बाजार में चलाने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से डेढ़ लाख रुपये से अधिक के नकली नोट और नोट छापने के उपकरण बरामद हुए हैं। आरोपियों के चार साथी पहले ही कासगंज जिले की सोरों पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है। अलापुर थाना पुलिस ने थानाध्यक्ष सनी चौधरी के नेतृत्व में मुखबिर की सूचना पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    पकड़े गए आरोपियों की पहचान भसराला गांव निवासी यावर अली पुत्र मकसूद अली और नुरुलहसन पुत्र रहीसुल हसन के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से 500 रुपये के 315 नकली नोट बरामद किए हैं। इनकी कुल कीमत एक लाख 57 हजार 500 रुपये है। इसके अलावा 500 रुपये के छह अधबने नोट और नकली नोट छापने की एक डाई बरामद हुई है। पुलिस को मौके से हरे टेप का एक बंडल, ग्लू स्टिक, एक मोबाइल फोन, दो कटर ब्लेड, एक्सटेंशन बोर्ड और सफेद कागज का एक बंडल भी मिला है।

    असली के साथ नकली नोट मिलाकर खपाते
    पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे काफी समय से नकली नोट तैयार कर रहे थे और उन्हें धीरे-धीरे बाजार में चला रहे थे। इसके लिए नकली नोटों को असली नोटों के साथ आगे-पीछे लगाकर इस्तेमाल करते थे। पुलिस के मुताबिक, यावर अली कासगंज जिले के सोरों थाने में दर्ज एक मामले में वांछित चल रहा था। उसके दो साथी रूपकिशोर उर्फ राजू और गोविंद चार सितंबर को सोरों पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। नुरुलहसन भी पहले अलापुर में नकली नोटों के मामले में पकड़ा गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    डेढ़ लाख के नकली नोट के साथ दो गिरफ्तार
    एसपी सिटी अभिषेक सिंह ने बताया कि नकली नोट छापकर बाजार में चलाने वाले यावर अली और नुरुलहसन को गिरफ्तार किया गया है। यावर अली पर आठ और नुरुलहसन पर नौ मुकदमे दर्ज हैं। आरोपियों के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। इस गिरोह में कौन-कौन लोग काम कर रहे हैं।

  • खैरागढ़ में ‘नमो सेवा’ नाट्य मंचन से दिखा सेवा और समर्पण का संदेश, 500 से अधिक विद्यार्थी हुए शामिल

    खैरागढ़ में ‘नमो सेवा’ नाट्य मंचन से दिखा सेवा और समर्पण का संदेश, 500 से अधिक विद्यार्थी हुए शामिल

    रायपुर : इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में ‘नमो सेवा– अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय भव्य नाट्य मंचन

    500 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में संगीत और नाट्य प्रस्तुति के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सेवा-संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण का किया गया चित्रण

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालय खैरागढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय परिसर-2 में ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ का जिला स्तरीय नाट्य मंचन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संगीत, अभिनय और भावपूर्ण संवादों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन, सार्वजनिक सेवा के अनुभवों और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर आधारित संगीतमय नाटक प्रस्तुत किया।  इस प्रस्तुति में भारतीय कला, संगीत और नाट्य परंपरा के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संदेश को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।  इसके अतिरिक्त भारत के रंग’ की सांस्कृतिक भावभूमि पर आधारित वंदे मातरम की गौरव गाथा पर भरतनाट्यम , कथक की सामूहिक नृत्य प्रस्तुति दी गयी ।

     जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नाटक के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सेवा भाव, कर्तव्यनिष्ठा और समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्रस्तुत किया। संगीत और अभिनय के समन्वय से तैयार इस प्रस्तुति ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का संदेश दिया।

    ‘नमो सेवा–अनकही कहानियां’ के मंचन का प्रमुख उद्देश्य सेवा और समर्पण के विचारों को जनसामान्य तक पहुंचाना तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनसेवा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जनभागीदारी, सामूहिक प्रयास और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों ने सेवा के व्यापक अर्थ को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह जिला स्तरीय कार्यक्रम सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सेवा के मूल्यों को प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को देश के सार्वजनिक जीवन, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को समझने के साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने कला और संस्कृति की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि संगीत एवं नाट्य मंचन जनजागरूकता, सामाजिक सहभागिता और सकारात्मक विचारों के प्रसार के प्रभावी माध्यम हैं।

    इस अवसर पर बिसेसर साहू, घम्मन साहू, शशांक ताम्रकार, जैनेन्द्र जंघेल, श्रीमती नीलिमा गोस्वामी, श्रीमती गिरिजा चंद्राकर, विकेश गुप्ता, रामाधार रजक, भावेश कोचर, गोरेलाल वर्मा, श्रीमती वंदना टांडेकर, आयूब सोलंकी, रूपेंद्र रजक और लखन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।