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  • शिक्षक दिवस पर यूपी के 81 अध्यापकों का सम्मान, गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में जुटेंगे शिक्षक

    शिक्षक दिवस पर यूपी के 81 अध्यापकों का सम्मान, गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में जुटेंगे शिक्षक

    उत्कृष्ट योगदान देने के लिए शिक्षक दिवस पर प्रदेश के 81 अध्यापकों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री

    गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को होगा भव्य समारोह

    बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार, माध्यमिक के 5 शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

    इनमें 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) हैं शामिल   

    पुरस्कार के लिए चयनित अध्यापकों को गोरखपुर में ससम्मान होटलों में ठहराने की व्यवस्था

    गोरखपुर, 
     शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में भविष्य की पीढ़ियों को आकार देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों की भूमिका शिक्षक दिवस पर स्वर्णिम अध्याय में दर्ज हो जाएगी। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विद्यालयों का उचित प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने वाले प्रदेश के कुल 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित करेंगे। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करने का भव्य समारोह गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेशभर के शिक्षकों को विशिष्ट अतिथि की तरह ससम्मान ठहराने की व्यवस्था होटलों में की गई है। 

    समाज के प्रति शिक्षक के समर्पण को प्रतिष्ठित करने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें कुल मिलाकर 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिन शिक्षकों को चयनित किया गया है उनमें से 5 को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को अच्छे शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। साथ ही बेहतर ढंग से समाज में शिक्षा की अलख जगाने के उनके प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।

    पुरस्कार राशि के रूप में मिलेंगे 25 हजार रुपये
    योगी सरकार, राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह के साथ ही पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये भी भेंट करेगी। इसके अलावा सम्मानित शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी। 

    बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को दिया जाएगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
    1. संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला, आगरा)
    2. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौबारा, गजरौला, अमरोहा)
    3. प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पीएम उच्च विद्यालय बेलवा, पयागपुर, बहराइच)
    4. सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र, बलरामपुर)
    5. उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर, भदोही)
    6. रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोइया, हल्दौर, बिजनौर)
    7. किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अंबियापुर, बदायूं)
    8. जूही मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना, बुलंदशहर)
    9. उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर, शहबादगंज, चंदौली)
    10. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद, फर्रुखाबाद)
    11. अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर, गौतमबुद्धनगर)
    12. ज्योत्स्ना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी, राजापुर, गाजियाबाद)
    13. शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा, दहौलाना, हापुड़)
    14. विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर, पिहानी, हरदोई)
    15. पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी, हाथरस)
    16. प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका, बंगरा, झांसी)
    17. डॉ. सुमनलता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी, छिबरामऊ, कन्नौज)
    18. डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरोताहरपुर, ककवन, कानपुर नगर)
    19. सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर, नेवादा, कौशाम्बी)
    20. प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड, बिरधा, ललितपुर)
    21. विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू, गोसाईगंज, लखनऊ)
    22. सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली, घिरोर, मैनपुरी)
    23. प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, हर्रा, सरूरपुर, मेरठ)
    24. सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां, भगतपुर, मुरादाबाद)
    25. आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़, मुज्जफरनगर)
    26. वैलेंटिना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर, नगर क्षेत्र, रामपुर)
    27. अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी, श्रावस्ती)
    28. मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, चोपन, सोनभद्र)
    29. प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज, हसनगंज, उन्नाव)
    30. नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, वाराणसी)
    31. सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु, मरौरी, पीलीभीत)
    32. सुनीत मित्र पांडेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला, नवाबगंज, गोंडा)
    33. अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद, अतरौली, अलीगढ़)
    34. राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय, नसीरपुर छितौना, जहांगीरगंज, अम्बेडकरनगर)
    35. पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, ठेउंगा, सोहावल, अयोध्या)
    36. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर, कोयलसा, आजमगढ़)
    37. अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इब्राहिमाबाद, मुरली छपरा, बलिया)
    38. राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता, त्रिवेदीगंज, बाराबंकी)
    39. हरिशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा, मानिकपुर, चित्रकूट)
    40. ओमवीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पीएम उच्च प्राथमिक विद्यालय पिदौरा, मरेहरा, एटा)
    41. वीरेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा, इटावा)
    42. आनंद कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर, ऐरायां, फतेहपुर)
    43. संतोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय मनिहारी, गाजीपुर)
    44. नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, चुनकी का डेरा, सुमेरपुर, हमीरपुर)
    45. राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव, घुघली, महराजगंज)
    46. संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियांव, मुंगरा बादशाहपुर, जौनपुर)
    47. विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता, रसूलाबाद, कानपुर देहात)
    48. धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला, कासगंज)
    49. प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया, बेहजम, लखीमपुर खीरी)
    50. नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पीएम कम्पोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव, गोरखपुर)
    51. ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलखी, कबरई, महोबा)
    52. अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर, रानीपुर, मऊ)
    53. दयानंद मिश्रा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धि, पहारी, मिर्जापुर)
    54. डॉ. देवेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना, प्रतापगढ़)
    55. रामलखन मौर्या (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिरसा, प्रतापपुर, प्रयागराज)
    56. बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर, गुन्नौर, सम्भल)
    57. अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा, ददरौल, शाहजहांपुर)
    58. दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू प्रथम, कांधला, शामली)
    59. महेश कुमार (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बूड़ा, बर्डपुर, सिद्धार्थनगर)
    60. अतुल शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अडावेनिया ग्रांट, एलिया, सीतापुर)
    61. सत्येंद्र कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय साढापुर, प्रतापपुर कमैचा, सुल्तानपुर)

    माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
    1. रेनू तोमर (प्रधानाचार्य, जवाहर लाल मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज, गाजियाबाद)
    2. डॉ. रमेश प्रताप सिंह (प्रधानाचार्य, उदय प्रताप इंटर कॉलेज, वाराणसी)
    3. गिरिजेश कुमार मल्ल (भाषा अध्यापक, गांधी विद्यालय इंटर कालेज, बछरावां, रायबरेली)
    4. डॉ. अनुज कुमार अग्रवाल (भाषा अध्यापक, राजकीय इंटर कॉलेज, सलेमपुर, कांठ, मुरादाबाद)
    5. महेश्वर प्रसाद त्रिपाठी (भाषा अध्यापक एलपीके इंटर कॉलेज, बसडीला, सरदार नगर, गोरखपुर)
    6. अरुण कुमार ओझा (गणित अध्यापक, हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज, संतकबीरनगर)
    7. डॉ. गौरव वार्ष्णेय (विज्ञान अध्यापक, जैन इंटर कॉलेज, रामपुर)
    8. डॉ. अभिषेक कुमार सिंह (विज्ञान अध्यापक, हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज, संतकबीरनगर)
    9. अमित कुमार शर्मा (विज्ञान अध्यापक, राजकीय इंटर कॉलेज, अनूपपुर, डिबाई, हापुड़)
    10. डॉ० हरिश्चन्द्र यादव (मानविकी अध्यापक, विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज, ज्ञानपुर, भदोही)
    11. अश्वनी कुमार जैन (मानविकी अध्यापक, महावीर दिगम्बर जैन इंटर कॉलेज, फिरोजाबाद)
    12. राजपाल (मानविकी अध्यापक, दरबारी लाल शर्मा इंटर कॉलेज, रिठौरा, बरेली)
    13. डॉ. संजय कुमार सिंह (वाणिज्य अध्यापक, गुलाबराय इंटर कॉलेज, बरेली)
    14. गुणधर लाल जैन (वाणिज्य अध्यापक, एमडी जैन इंटर कॉलेज, आगरा)
    15. प्रकाश नारायण सिंह (कला अध्यापक, बंगाली टोला इंटर कॉलेज, वाराणसी)

    माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिलेगा मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार
    1. डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह (प्रधानाचार्य, पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लखीमपुर खीरी)
    2. विक्रम बहादुर सिंह परिहार (प्रधानाचार्य, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, प्रयागराज)
    3. कल्पना सिंह (प्रधानाचार्य, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, झांसी)
    4. डॉ. आनन्द कुमार (मानविकी अध्यापक, महर्षि दयानन्द विद्यापीठ इंटरमीडिएट कॉलेज, गोविंदपुरम, गाजियाबाद)
    5. विजय पाल (कला अध्यापक, जयनारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बरेली)
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  • UP में OBC युवाओं को मिल रही डिजिटल उड़ान, 31 हजार से अधिक युवाओं ने हासिल की कंप्यूटर ट्रेनिंग

    UP में OBC युवाओं को मिल रही डिजिटल उड़ान, 31 हजार से अधिक युवाओं ने हासिल की कंप्यूटर ट्रेनिंग

    योगी सरकार की डिजिटल पहल, 31 हजार से ज्यादा ओबीसी युवा बन रहे तकनीकी दक्ष

    निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिल रहा रोजगारपरक कौशल बढ़ाने का अवसर

    ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी ले रहे प्रशिक्षण

    नाइलिट से मान्यता प्राप्त संस्थानों के जरिए युवाओं को दी जा रही निःशुल्क तकनीकी शिक्षा

    लखनऊ, 
    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दे रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की निशुल्क ओ-लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवक-युवतियों के लिए तकनीकी शिक्षा का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना के तहत इस वर्ष 31 हजार से ज्यादा प्रशिक्षणार्थी कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की इस पहल से युवाओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल हासिल करने का अवसर मिल रहा है। 

    70 हजार से ज्यादा आये थे आवेदन

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष 31,602 प्रशिक्षणार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। 11 अगस्त से प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें सबसे अधिक आवेदन ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए आये थे। 

    योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवाओं को बिना किसी शुल्क के आधुनिक कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिल रही है। योजना का लाभ उन ओबीसी अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है, जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है। इसके साथ ही इनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम है।

    338 प्रशिक्षण संस्थानों का मजबूत नेटवर्क

    प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 338 प्रशिक्षण संस्थान योजना से जुड़े हैं। इनमें 63 संस्थान केवल ओ-लेवल, 39 सीसीसी और 236 संस्थान दोनों पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इससे प्रदेश के अधिकांश जिलों में युवाओं को अपने नजदीक ही कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करने की सुविधा मिल रही है। सरकार की ओर से ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15 हजार रुपये और सीसीसी के लिए 3,500 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं पर प्रशिक्षण का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

    डिजिटल शिक्षा से रोजगार की ओर बढ़ रहे युवा

    योगी सरकार की यह पहल तकनीकी शिक्षा को गांव और कस्बों तक पहुंचाने के साथ युवाओं को बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण, व्यापक संस्थागत नेटवर्क और बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस योजना को रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में सरकार की एक सराहनीय पहल बना रही है।

    युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना सरकार की प्राथमिकता

    पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस वर्ष 31 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के लिए 338 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को उनके नजदीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।

  • बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत बांटे 3.36 लाख लंच पैकेट

    बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत बांटे 3.36 लाख लंच पैकेट

    बाढ़ प्रभावितों के साथ खड़ी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत 3.36 लाख लंच पैकेट वितरित

    16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, 23 जिलों में लगातार चला राहत-बचाव कार्य

    लगभग 1500 नावों/मोटरबोट्स से दिन-रात जारी है बचाव अभियान, भोजन से स्वास्थ्य तक राहत का पूरा इंतजाम

    5.02 लाख क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए गए

    इंसान से लेकर पशुधन तक मदद के सभी इंतजाम, क्षतिग्रस्त मकानों के लिए सहायता राशि जारी

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत और बचाव अभियान को पूरी ताकत के साथ जारी रखा है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 1,499 नाव एवं मोटरबोट राहत-बचाव में लगाई गई हैं और अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.02 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा चुके हैं।

    23 जिलों में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय
    उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त के मुताबिक 35 जिले अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि 23 जिलों में अब भी इसका असर है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, उन्नाव और वाराणसी में युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य चल रहा है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी और तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
    बचाव अभियान के तहत अब तक बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। जलमग्न क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नावों और मोटरबोट्स का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन बाधित होने के बावजूद राहत टीमों की पहुंच सुनिश्चित की गई है। अब तक 1,499 नावों एवं मोटरबोट्स का प्रयोग किया जा चुका है। इससे बचाव दलों को प्रभावित गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने तथा जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिल रही है।

    प्राथमिकता पर भोजन व्यवस्था कर रही सरकार
    बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इससे प्रभावित परिवारों को आपदा के बीच तत्काल खाद्य सहायता मिल रही है। सभी क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण जरूरत के मुताबिक लगातार जारी है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष जोर
    बाढ़ के बाद दूषित पानी से संक्रमण और जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए योगी सरकार ने स्वास्थ्य और स्वच्छता को भी राहत अभियान का अहम हिस्सा बनाया है। अब तक 5.02 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा 1,067 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए अब तक 1,311 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 201 वर्तमान में संचालित हैं।

    पशुधन और मकानों की क्षति पर सहायता
    योगी सरकार का राहत अभियान केवल लोगों तक सीमित नहीं है। बाढ़ से अब तक 36,287 पशु प्रभावित हुए हैं और उनके लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ से मकान क्षतिग्रस्त होने के 442 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है। राहत-बचाव के साथ क्षति का आकलन और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम लगातार जारी है।

  • श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे उद्घाटन, पीएम और सीएम आवास के लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी

    श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे उद्घाटन, पीएम और सीएम आवास के लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ब्रज क्षेत्र को मुख्यमंत्री योगी देंगे 1051 करोड़ रुपये की 229 योजनाओं की सौगात

    – 540 करोड़ से अधिक की 62 परियोजनाओं का लोकार्पण और 437 करोड़ से अधिक की 167 नई योजनाओं का होगा शिलान्यास

    -आवास योजना के लाभार्थियों को 72 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण करेंगे मुख्यमंत्री

    श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे उद्घाटन, पीएम और सीएम आवास के लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी

     दो दिवसीय मथुरा प्रवास के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन और गो पूजन करेंगे मुख्यमंत्री

    मथुरा
     श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ब्रज क्षेत्र को विकास की नई सौगात देने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री 3 सितंबर को दो दिवसीय प्रवास पर मथुरा आ रहे हैं, जहां वे ब्रजवासियों को करीब 1051 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं का बड़ा उपहार देंगे। इस भव्य समारोह के दौरान 540 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 62 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे और पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही 437 करोड़ रुपये की लागत वाली 167 नई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। समारोह में मुख्यमंत्री पीएम आवास (शहरी) और सीएम आवास (ग्रामीण) योजना के लाभार्थियों को 72 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण करेंगे। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ट्रैक्टर की चाबी, चेक और प्रमाण पत्र भी सौंपेंगे।

    श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का करेंगे लोकार्पण
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दो दिवसीय मथुरा प्रवास विकास और धर्म के अद्भुत संगम का साक्षी बनेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 3 सितंबर को दोपहर में सीएम योगी का राजकीय हेलीकॉप्टर वृंदावन स्थित पवनहंस हेलीपैड पर उतरेगा। वहां से वे गीता शोध संस्थान पहुंचेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री नवनिर्मित और अत्याधुनिक 'श्री स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह' का भव्य लोकार्पण करेंगे। जहां एक हजार लोगों के बैठने की उत्कृष्ट व्यवस्था है।

    संतों से मिलेंगे और बच्चों को कराएंगे अन्नप्राशन संस्कार
    इस कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी प्रो-पुअर प्रदर्शनी का अवलोकन, वृक्षारोपण, संतों से मुलाकात करेंगे और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराएंगे। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व चेक वितरित कर जनसभा को संबोधित करेंगे।  इसके बाद मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कार्यों की प्रगति जानने के लिए अहम समीक्षा बैठक करेंगे।

    'कान्हा भक्ति स्तम्भ मार्ग' का भ्रमण और अवलोकन
    समीक्षा बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री वृंदावन के होटल विवान्ता में 'आज तक' न्यूज चैनल के 'पंचायत आज तक' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। इसके बाद वे वृंदावन में विकसित किए गए भव्य 'कान्हा भक्ति स्तम्भ मार्ग' का भ्रमण और अवलोकन करेंगे। इन कार्यक्रमों के बाद शाम को वे पं. दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा पहुंचेंगे और परिसर स्थित अशोका अतिथि गृह में रात्रि विश्राम करेंगे।

    जन्मभूमि में दर्शन और गो पूजन करेंगे सीएम योगी
    अगले दिन शुक्रवार 4 सितंबर को सुबह सीएम योगी श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे। यहां वे सबसे पहले गो पूजन करेंगे और उसके बाद मुख्य मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन व विशेष पूजन अर्चना करेंगे। इसके पश्चात मुख्यमंत्री प्रस्थान कर जाएंगे।

  • महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 28 लाख से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ बनीं परिवार की आर्थिक ताकत

    महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 28 लाख से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ बनीं परिवार की आर्थिक ताकत

    ‘लखपति दीदी’ बन प्रदेश की 28 लाख से अधिक महिलाएं बनीं परिवार की आर्थिक धुरी

    योगी सरकार के आजीविका मिशन से बदल रही ग्रामीण समृद्धि की तस्वीर

    65 हजार से ज्यादा ग्राम संगठनों और 3,200 से अधिक संकुल स्तरीय संघों ने तैयार किया मजबूत आर्थिक तंत्र

    गरीब ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर उद्यमों से जोड़ रही योगी सरकार

    लखनऊ,
     उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहीं हैं। कभी घर की चारदीवारी और खेती-किसानी में सहयोग तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब बचतकर्ता से उद्यमी और परिवार की सहयोगी से उसकी आर्थिक ताकत बन रही हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को व्यापक आधार दिया है। प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बने हैं और इनमें से 28 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण समृद्धि का नया चेहरा बन गई हैं। यह बदलाव केवल महिलाओं की आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पूंजी, उत्पादन, बाजार और रोजगार का नया चक्र भी खड़ा कर रहा है।

    आजीविका मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका विशाल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि गांवों में विकसित हो रहा सामुदायिक आर्थिक तंत्र है। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ महिलाओं का सफर अब बैंकिंग, ऋण, उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता तक पहुंच गया है। 
    योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की पहली सीढ़ी बनाया है। समूहों से आगे 65,544 ग्राम संगठनों और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का ढांचा खड़ा कर महिलाओं को ऐसा संस्थागत आधार दिया गया है, जो उनकी आजीविका को स्थायित्व और कारोबार को विस्तार दे रहा है।

    बचत की छोटी पूंजी बनी बड़े बदलाव का आधार

    ग्रामीण आजीविका मिशन की बुनियाद सामूहिकता की उस ताकत पर टिकी है, जिसमें महिलाएं संगठित होकर अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाती हैं। स्वयं सहायता समूह में नियमित छोटी बचत से शुरुआत होती है। यही बचत वित्तीय अनुशासन पैदा करती है और आगे बैंक ऋण तथा दूसरे संस्थागत वित्त तक पहुंच का रास्ता खोलती है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था ने उस ग्रामीण महिला के लिए भी उद्यमिता के द्वार खोले हैं, जिसके पास न बड़ी पूंजी थी और न बाजार तक सीधी पहुंच। खेती से जुड़ी गतिविधियों से लेकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और सेवा क्षेत्र तक महिलाएं आय के नए स्रोत विकसित कर रही हैं। इससे उनकी भूमिका परिवार की अतिरिक्त कमाई करने वाली सदस्य से आगे बढ़कर आर्थिक फैसलों में भागीदार की बन रही है।

    28.16 लाख लखपति दीदियां बदलाव की सबसे बड़ी पहचान

    इस परिवर्तन की सबसे सशक्त तस्वीर प्रदेश की 28.16 लाख ‘लखपति दीदियां’ हैं। इन महिलाओं का लखपति बनना महज आय का एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संरचना में आ रहे बदलाव का संकेत है। नियमित और टिकाऊ आमदनी ने महिलाओं को परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए पूंजी तैयार करने की क्षमता भी दी है। महिला की आय बढ़ने का प्रभाव परिवार और गांव दोनों पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर खर्च की क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय बाजार में मांग भी पैदा होती है। यही वजह है कि लखपति दीदी अभियान को केवल महिला सशक्तीकरण के दायरे में देखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नीचे से ऊपर की ओर समृद्धि पैदा करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

    गांव-गांव तक पहुंचा आर्थिक स्वावलंबन का नेटवर्क

    उत्तर प्रदेश में साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से सवा करोड़ परिवारों का जुड़ना मिशन के विस्तार की व्यापकता का बड़ा उदाहरण है। इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण परिवारों को संगठित करने से गांवों में महिलाओं की सामूहिक आर्थिक शक्ति तैयार हुई है। छोटे स्तर पर पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार की जिन चुनौतियों का सामना अकेली महिला के लिए कठिन होता था, योगी सरकार के सहयोग और सामूहिक शक्ति ने उनका समाधान आसान किया है।

    इस मॉडल की विशेषता यह भी है कि गरीब परिवार की आजीविका को चरणबद्ध ढंग से मजबूत किया जाता है। पहले महिला को समूह से जोड़ना, फिर बचत और वित्तीय अनुशासन विकसित करना और उसके बाद ऋण, कौशल, उत्पादन तथा बाजार से जोड़ना, यही क्रम आत्मनिर्भरता की बुनियाद तैयार कर रहा है।

    65,544 ग्राम संगठन बने समूहों की ताकत

    स्वयं सहायता समूहों को दीर्घकालिक और संस्थागत मजबूती देने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का नेटवर्क खड़ा किया गया है। इस व्यवस्था ने गांव की महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के संचालन और आर्थिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी भागीदार बनाया है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्राम संगठन स्थानीय स्तर पर समूहों के बीच समन्वय, वित्तीय अनुशासन और आजीविका गतिविधियों को मजबूती देते हैं, जबकि संकुल स्तरीय संघ उन्हें बड़े बाजार, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। इसी मजबूत ढांचे के सहारे मिशन की ‘आत्मनिर्भर महिला, आदर्श परिवार और समृद्ध संस्था’ की अवधारणा गांवों में मूर्त रूप ले रही है।

  • CM Yogi का युवाओं पर फोकस, जन्माष्टमी से पहले 5 बड़े तोहफों से खुले तरक्की के नए रास्ते

    CM Yogi का युवाओं पर फोकस, जन्माष्टमी से पहले 5 बड़े तोहफों से खुले तरक्की के नए रास्ते

    जन्माष्टमी से पहले योगी ने युवाओं को दिए पांच बड़े उपहार

    आठ दिन में पढ़ाई, तकनीक, नौकरी और रोजगार सुरक्षा से जुड़े पांच बड़े फैसले

    25 लाख टैबलेट खरीदने की मंजूरी, 3.16 लाख छात्रों की शुल्क भरपाई का रास्ता साफ

    मेडिकल इंटर्न का भत्ता 12 से बढ़ाकर 25 हजार, एडीओ पंचायत के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती

    पांचवें उपहार में साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों को 20 से 40 हजार मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा

    लखनऊ
     जन्माष्टमी से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया है। महज आठ दिन के भीतर सरकार ने पांच बड़े फैसले किए हैं, जिनका सीधा संबंध युवाओं की पढ़ाई, तकनीक, सरकारी नौकरी, मानदेय और रोजगार की सुरक्षा से है। 25 लाख टैबलेट की खरीद से लेकर तीन लाख से अधिक छात्रों की अटकी शुल्क भरपाई, मेडिकल इंटर्न का भत्ता दोगुने से अधिक करने और एडीओ पंचायत के आधे पद सीधी भर्ती के लिए खोलने के बाद बुधवार को पांचवां बड़ा फैसला आउटसोर्स कर्मियों के लिए आया। उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम (यूपीकोस) के शुभारंभ के साथ करीब साढ़े तीन लाख कर्मियों के मानदेय, समय पर भुगतान और नौकरी की सुरक्षा का नया ढांचा तैयार कर दिया गया है।

    सरकार का पहला बड़ा फैसला मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर इंटर्नशिप कर रहे युवाओं से जुड़ा है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस व बीडीएस की रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वालों का मासिक भत्ता 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। वर्ष 2021 में इसे 7,500 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया था। अब इसमें एकमुश्त 13 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

    दूसरा उपहार तकनीक से जुड़ा है। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और कौशल विकास समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को ये टैबलेट निशुल्क दिए जाएंगे। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,374.60 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    तीसरा फैसला उन 3,16,057 विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्ष 2025-26 में तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं पा सके थे। सरकार इनके लिए पोर्टल दोबारा खोलेगी। इन विद्यार्थियों के भुगतान पर 551.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    चौथे फैसले से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए नया रास्ता खुला है। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पद अभी तक शत-प्रतिशत प्रोन्नति से भरे जाते थे। सरकार ने व्यवस्था बदलकर 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया है। यानी अब युवाओं को सीधे एडीओ पंचायत बनने का अवसर मिलेगा।

    इन चार फैसलों के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री ने पांचवां और बड़े दायरे वाला उपहार आउटसोर्स कर्मियों को दिया। यूपीकोस के शुभारंभ के साथ आउटसोर्सिंग के पदों को चार श्रेणियों में बांटकर न्यूनतम 20 हजार, 22 हजार, 25 हजार और 40 हजार रुपये मानदेय तय किया गया है। हर महीने की पांच तारीख तक पूरा वेतन सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा। एजेंसी बदलने पर कार्यरत कर्मचारी नहीं बदले जाएंगे और मनमाने ढंग से छंटनी भी नहीं की जा सकेगी।

    इतना ही नहीं, आउटसोर्स कर्मियों को ईपीएफ और ईएसआई के दायरे में लाकर सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। महिला कर्मियों को सवेतन मातृत्व अवकाश और परिवार को इलाज की सुविधा मिलेगी। बैंक सैलरी खाते के जरिए दुर्घटना में मृत्यु अथवा दिव्यांगता पर 40 लाख रुपये तक का कवर भी मिलेगा।

    इस तरह जन्माष्टमी से पहले आठ दिनों में युवाओं के लिए फैसलों का दायरा पढ़ाई से शुरू होकर रोजगार की सुरक्षा तक पहुंचा है। छात्र को शुल्क भरपाई और टैबलेट, मेडिकल इंटर्न को बढ़ा भत्ता, प्रतियोगी युवा को सरकारी नौकरी का नया अवसर और पांचवें उपहार के रूप में साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों को बेहतर मानदेय के साथ नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिली है।

  • मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां

    मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां

    आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय

    उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनने से लाखों कार्मिकों को मिलेगी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा 

    मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए चेक 

    लखनऊ
     योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के लगभग लगभग पांच लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बड़ी सौगात दी है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बाद अब नियोक्ता द्वारा न आउटसोर्स कर्मियों का शोषण हो पाएगा और न ही उनके साथ अन्याय हो पाएगा। पहली बार सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित हुआ। इसके साथ ही इससे सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। पांच साल में रिवीजन होगा। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में नियोक्ता का मनमानापन भी नहीं चल पाएगा। 

    मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी कॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की। यूपी कॉस पोर्टल से आउटसोर्स निगमकर्मियों को बड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके जरिए ऑनलाइन माध्यम से भर्ती व जॉइनिंग प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी। समय पर मानदेय व सरकारी लाभ के साथ ही आउटसोर्स कर्मियों की पूरी जानकारी एक जगह मिलेगी। इससे उपस्थिति की सटीक जानकारी व छुट्टी का प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। यहां शिकायत और समाधान की भी सुविधा होगी। समय पर ईपीएफ अंशदान व ईएसआईसी का लाभ सुनिश्चित होगा। पोर्टल पर विभाग, एजेंसी और आउटसोर्सकर्मियों के लिए एक ही मंच होगा। 

    एमओयू का किया गया हस्तांतरण
    भारतीय स्टेट बैंक के साथ आउटसोर्स कर्मियों को मिलने वाले लाभ व सामाजिक सुरक्षा के लिए एसबीआई के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। 

    मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किये चेक 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में आउटसोर्स कर्मियों को चेक भी वितरित किये। इस दौरान लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। सीएम के हाथों इन्हें मिला चेक- 
    रोहित कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग     
    कसिन खान- रात्रि चौकीदार- सचिवालय प्रशासन विभाग
    सरिता-सफाई कर्मी- सचिवालय प्रशासन विभाग
    आशु कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग
    अरविंद कुमार यादव- वाहन चालक- सचिवालय प्रशासन विभाग
    रामकुमार- माली- सचिवालय प्रशासन विभाग
    जितेंद्र प्रसाद- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
    राजू कन्नौजिया- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
    हंसराज सिंह- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
    दिलीप कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
    अंजनी कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
    नरेंद्र तिवारी- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ ।

  • योगी सरकार का बेटियों की शिक्षा पर बड़ा फोकस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए ₹101.49 करोड़ मंजूर

    योगी सरकार का बेटियों की शिक्षा पर बड़ा फोकस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए ₹101.49 करोड़ मंजूर

    बेटियों की शिक्षा को मजबूत आधार दे रही योगी सरकार, कस्तूरबा विद्यालयों के कायाकल्प के लिए ₹101.49 करोड़ जारी

    – छह प्रमुख निर्माण कार्यों से छात्राओं के आवास, स्वच्छता और सुरक्षा सुविधाओं का होगा विस्तार

    – अतिरिक्त डॉरमेट्री, जर्जर भवन पुनर्निर्माण, टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सेप्टिक टैंक और बाउंड्री वॉल के होंगे निर्माण

    – उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी, जिला स्तर पर समन्वय के निर्देश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने बेटियों की शिक्षा को मजबूत आधार देने की दिशा में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को नई ताकत देने का बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹101.49 करोड़ की धनराशि जारी कर इन विद्यालयों में आवासीय क्षमता, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता साफ किया गया है। अतिरिक्त डॉरमेट्री से लेकर जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण, टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सेप्टिक टैंक और बाउंड्री वॉल तक के छह प्रमुख निर्माण कार्यों के जरिए इन विद्यालयों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त आवासीय शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। 

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी के निर्देशों के क्रम में आगे बढ़ाई गई प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था बनाया गया। स्वीकृत लागत के सापेक्ष निर्धारित धनराशि अवमुक्त कर निर्माण कार्यों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बेटियों की शिक्षा को बेहतर सुविधाओं की मजबूत जमीन देने की यह पहल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को अधिक सुरक्षित और सुविधायुक्त आवासीय शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में योगी सरकार के ठोस प्रयास को रेखांकित करती है।

    – छह प्रमुख निर्माण कार्यों से बढ़ेंगी सुविधाएं
    कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की आवासीय, स्वच्छता और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त डॉरमेट्री, जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण, टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सेप्टिक टैंक और बाउंड्री वॉल के निर्माण कार्य कराए जाएंगे। इससे विद्यालय परिसरों में छात्राओं के रहने की क्षमता बढ़ाने के साथ आवश्यक सुविधाओं का विस्तार होगा।
    अतिरिक्त डॉरमेट्री से आवासीय क्षमता को मजबूती मिलेगी। जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने में सहायक होगा। वहीं टॉयलेट ब्लॉक और सेप्टिक टैंक से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी तथा गार्ड रूम और बाउंड्री वॉल से परिसर की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

    जिलों में समन्वय से आगे बढ़ेगा क्रियान्वयन
    राज्य स्तर से स्वीकृत निर्माण कार्यों को जिला स्तर पर तेजी से शुरू कराने के लिए संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कार्यदायी संस्था से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विद्यालयवार कार्यों की प्रगति को गति देने और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को समय से पूरा कराने में मदद मिलेगी।

    कोट:
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त विद्यालयी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर काम कर रही है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। इन निर्माण कार्यों से छात्राओं को बेहतर शैक्षिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
    – संदीप सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश

  • UPCOS से आउटसोर्स कर्मियों को मजबूत सुरक्षा, नौकरी की निरंतरता और सामाजिक सुरक्षा का भरोसा

    UPCOS से आउटसोर्स कर्मियों को मजबूत सुरक्षा, नौकरी की निरंतरता और सामाजिक सुरक्षा का भरोसा

    नौकरी की सिक्योरिटी, भविष्य की भी चिंता… आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को योगी सरकार का 'सुरक्षा कवच'

    पूरी व्यवस्था को संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम 

    वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में होंगी

    लखनऊ

    नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड सुरक्षित है, उसका वेतन समय पर मिलेगा और जरूरत पड़ने पर उसके अधिकारों की सुनवाई करने वाली कोई व्यवस्था मौजूद है।

    आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने लंबे समय से यही सबसे बड़ी चिंता रही है। वेतन, EPF, ESIC और सेवा संबंधी दूसरी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति रहती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की शुरुआत हुई है।

    एक कर्मचारी, एक डिजिटल व्यवस्था
    UPCOS के जरिए सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। मैनपावर की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार मानव संसाधन की योजना भी बनाई जाएगी।
    भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी, योग्यता और मेरिट आधारित होगी तथा राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

    कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जानकारी एक ही जगह देख सकेगा। वह अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकेगा, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेगा और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी।

    हर महीने 5 तारीख तक वेतन
    नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर पारिश्रमिक से जुड़ा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान है।
    EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाना और नियमित रूप से अंशदान जमा कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा। एजेंसियों को इसका प्रमाण भी निगम को निर्धारित समय में देना होगा। यानी कर्मचारी के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में लाया जा रहा है।

    मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
    आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक लगाई गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपने स्तर से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।

    प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन
    नई व्यवस्था केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। योग्यता, दक्षता और तय मानकों के आधार पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान है।

    मातृत्व अवकाश और वैधानिक सेवा लाभ
    नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल वेतन और नौकरी की बात नहीं की गई है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को भी कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।

    ₹40 लाख तक का दुर्घटना बीमा
    UPCOS के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारी को लगभग ₹40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी।
    इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए ₹10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए ₹5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सुविधा शामिल है।

    कर्मचारी के बाद परिवार की भी चिंता
    इस व्यवस्था की सबसे अलग बात यह है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक की सहायता और कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था की गई है।
    कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।

    बिचौलियों की जगह जवाबदेह व्यवस्था

    UPCOS का बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों और लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 

    3.5 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

    योगी सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। अब इन कर्मचारियों को समय पर वेतन के साथ ही सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की सिक्योरिटी भी मिलेगी।

  • बसों व बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की अधिकारी करें प्रभावी निगरानी: प्रबंध निदेशक

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    मथुरा-वृंदावन व अन्य तीर्थों को जाने वाली बसों और बस स्टेशनों पर परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ की जाए: परिवहन मंत्री

    बसों व बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की अधिकारी करें प्रभावी निगरानी: प्रबंध निदेशक

    लखनऊ
     श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए योगी सरकार ने परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने 4 सितंबर को मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के मद्देनजर बसों और बस स्टेशनों पर सुदृढ़ परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा, लीला स्थली वृंदावन और प्रमुख धार्मिक स्थल गोवर्धन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचेंगे है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन आदि प्रमुख धार्मिक स्थलों में कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था की दृष्टि से आवश्यक सतर्कता बरती जाए। बसों के संचालन के साथ-साथ बस स्टेशनों पर भी विशेष निगरानी रखी जाए।

    यात्री की सुरक्षा को लेकर रहें सतर्क
    परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन सिंह ने सभी क्षेत्रीय और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को सर्तक रहने के लिए कहा है। अधिकारियों से कहा गया है कि अपने-अपने क्षेत्रों के बस स्टेशनों, प्रमुख बस अड्डों और धार्मिक स्थलों को जाने वाले मार्गों पर संचालित बसों में विशेष सतर्कता बरतें।

    साथ ही बसों एवं बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों व वस्तुओं की प्रभावी निगरानी, चेकिंग करने के लिए कहा गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस व प्रशासन देने के लिए कहा।