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  • योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 681 प्रमुख सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, त्योहारों से पहले शुरू होगी कवायद

    योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 681 प्रमुख सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, त्योहारों से पहले शुरू होगी कवायद

     लखनऊ
    यूपी में बारिश और बाढ़ के कारण खराब हुई सड़कों को लेकर योगी सरकार ने अब तेजी से काम करने की तैयारी शुरू कर दी है. आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रदेश के 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं. इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और आवागमन के लिए बेहतर बनाया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों को तत्काल ठीक कर मोटरेबल बनाया जाए. उन्होंने साफ कहा कि अभी बरसात पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए जहां तत्काल मरम्मत जरूरी है, वहां काम किया जाए और बारिश समाप्त होने के बाद जरूरत के मुताबिक सड़क का स्थायी नवीनीकरण कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान सिर्फ गड्ढों में पैचवर्क करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करके जरूरत के अनुसार मरम्मत और नवीनीकरण की कार्रवाई की जाए। 

    त्योहारों से पहले 681 मार्गों पर खास नजर

    आने वाले दिनों में प्रदेश में लगातार पर्व-त्योहार हैं. गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने 681 महत्वपूर्ण मार्गों की पहचान की है. इन मार्गों पर त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण का काम पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है. इन सड़कों पर भीड़ और वाहनों की आवाजाही अधिक रहने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पर्वों के दौरान लोगों को खराब सड़कों के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए। 

    बारिश अभी जारी, इसलिए दो स्तर पर होगा काम
    अधिकारियों का कहना है कि सरकार के सामने फिलहाल एक चुनौती यह भी है कि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश अभी जारी है. ऐसे में किसी सड़क की पूरी तरह स्थायी मरम्मत करना हर जगह संभव नहीं है. इसी वजह से मुख्यमंत्री ने दो स्तर पर काम करने को कहा है. पहले चरण में बारिश से खराब सड़क को तुरंत आवागमन योग्य बनाया जाएगा. जहां गड्ढे हैं या सड़क का हिस्सा टूट गया है, वहां जरूरी मरम्मत की जाएगी. दूसरे चरण में बरसात समाप्त होने के बाद सड़क की स्थिति का दोबारा आकलन किया जाएगा. जहां ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां स्थायी नवीनीकरण कराया जाएगा. इससे फिलहाल लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी और बाद में सड़क को स्थायी रूप से बेहतर किया जा सकेगा। 

    सिर्फ बारिश से ही नहीं टूटीं सड़कें
    समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि प्रदेश में सड़कों के खराब होने की वजह केवल बारिश और बाढ़ नहीं है. कई जगह एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और दूसरी निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है. लगातार भारी वाहनों के चलने से भी कई सड़कों को नुकसान पहुंचा है. अब ऐसे मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे में जिन सड़कों को क्षतिग्रस्त पाया जाएगा, उन्हें चिन्हित करके संबंधित विभाग के लिए गड्ढामुक्ति का लक्ष्य तय किया जाएगा। 

    9 विभागों की 4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में प्रदेश के नौ विभागों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई. अधिकारियों के मुताबिक इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं. मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर गड्ढामुक्ति का काम पूरा होने की जानकारी बैठक में दी गई. बाकी सड़कों पर भी काम चल रहा है. इसके साथ ही बारिश और अन्य कारणों से क्षतिग्रस्त हुए नए मार्गों का सर्वे पूरा होने के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा। 

    30 हजार किमी सड़क के नवीनीकरण का लक्ष्य
    सरकार ने सिर्फ गड्ढे भरने का लक्ष्य नहीं रखा है. जहां सड़क की स्थिति ज्यादा खराब है, वहां नवीनीकरण और विशेष मरम्मत भी कराई जाएगी. बैठक में बताया गया कि करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य रखा गया है. इसमें अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर पर काम होने की जानकारी दी गई. इसी तरह करीब 5 हजार किलोमीटर मार्गों पर विशेष मरम्मत का लक्ष्य है. अब तक करीब 700 किलोमीटर पर विशेष मरम्मत का काम पूरा होने की बात कही गई। 

    स्कूल-अस्पताल वाली सड़कें पहले ठीक होंगी
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सड़क सुधार के लिए प्राथमिकता तय करते समय केवल सड़क की लंबाई नहीं देखी जाए, बल्कि वहां लोगों की जरूरत को भी ध्यान में रखा जाए. उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक आवाजाही वाले स्थानों तक पहुंचने वाली सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए. इसका मतलब साफ है कि जिस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, मरीज, कर्मचारी और आम लोग गुजरते हैं, वहां मरम्मत का काम पहले कराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ी है. इसलिए इसकी खराब स्थिति का असर सीधे लोगों पर पड़ता है. सड़कों की मरम्मत को लेकर अक्सर गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी ध्यान रखने को कहा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क की मरम्मत सिर्फ औपचारिकता के लिए न हो. जहां पैचवर्क से काम चल सकता है वहां उसे किया जाए, लेकिन जहां सड़क का व्यापक नवीनीकरण जरूरी है वहां स्थायी समाधान किया जाए. बारिश खत्म होने के बाद सड़कों की वास्तविक स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। 

    सभी विभाग मिलकर करेंगे काम
    सड़कें केवल लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग विभागों की सड़कें हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया. बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की भी समीक्षा की गई। 

  • शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    बारिश से खराब सड़कों को तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात के बाद नवीनीकरण भी हो: मुख्यमंत्री

    आगामी पर्व-त्योहारों से पहले प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता से गड्ढामुक्त करें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    आगामी पर्वों के लिए 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित, प्राथमिकता के आधार पर होंगे गड्ढामुक्त

    शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    09 विभागों के करीब 4.36 लाख किमी मार्गों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, 50 हजार किमी के गड्ढामुक्ति लक्ष्य पर चल रहा काम

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाने और बरसात के बाद जरूरत के अनुसार उनका नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पर्वों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति का काम केवल पैचवर्क तक सीमित न रहे। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां उसे अभी मोटरेबल बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढामुक्ति के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि गड्ढामुक्ति अभियान में 09 विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। क्षतिग्रस्त मार्गों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब 5 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और ऐसे अन्य स्थानों, जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है, वहां की सड़कों को प्राथमिकता पर लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मार्गों पर तत्काल काम शुरू कराया जाए और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी किए सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।

  • डिजिटल एजुकेशन को नई रफ्तार, योगी सरकार PM e-VIDYA के जरिए घर-घर पहुंचा रही शिक्षा संसाधन

    डिजिटल एजुकेशन को नई रफ्तार, योगी सरकार PM e-VIDYA के जरिए घर-घर पहुंचा रही शिक्षा संसाधन

    डिजिटल शिक्षा को घर-घर पहुंचा रही योगी सरकार, पीएम ई-विद्या पर एक मंच में मिलेंगे पढ़ाई के जरूरी संसाधन

    – एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े आवश्यक संसाधन निःशुल्क उपलब्ध

    – डिजिटल लर्निंग को अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    – एंड्रॉयड और आईओएस दोनों उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है पीएम ई-विद्या ऐप

    – एससीईआरटी के माध्यम से डिजिटल संसाधनों को विद्यार्थियों और शिक्षकों तक पहुंचाने पर जोर

    लखनऊ
     योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल को लगातार विस्तार दे रही है। सरकार का जोर है कि डिजिटल संसाधन विद्यार्थियों की पहुंच से दूर रहने वाली सुविधा न होकर सीखने का सहज, सुलभ और प्रभावी माध्यम बनें। इसी दिशा में पीएम ई-विद्या डिजिटल प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों और शिक्षकों को पढ़ाई से जुड़े आवश्यक संसाधन एक ही मंच पर निःशुल्क उपलब्ध करा रहा है।

    एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के मुताबिक, पीएम ई-विद्या के माध्यम से डिजिटल लर्निंग को व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने और उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों की आसान उपलब्धता विद्यार्थियों के सीखने के अवसरों को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एक ही मंच पर सामग्री उपलब्ध होने से डिजिटल शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावशाली बनाने में मदद मिलेगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भी पीएम ई-विद्या ऐप के बारे में जानकारी साझा की जा रही है, जिससे विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक इससे जुड़ सकें। 

    ज्ञात हो कि योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा नीति का लक्ष्य तकनीक को शिक्षा का विकल्प बनाने के साथ-साथ उसे सीखने की प्रक्रिया का प्रभावी सहयोगी बनाना है। पीएम ई-विद्या इसी सोच को व्यापक डिजिटल पहुंच में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    एक मंच पर पढ़ाई के जरूरी संसाधन
    पीएम ई-विद्या को विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षा के एक उपयोगी मंच के रूप में देखा जा रहा है। इसमें पढ़ाई से जुड़े आवश्यक डिजिटल संसाधनों तक एक ही स्थान से पहुंच बनाने की सुविधा है। इससे विद्यार्थियों को सीखने के लिए अलग-अलग माध्यमों पर निर्भरता कम होगी और डिजिटल सामग्री तक पहुंच अधिक सहज होगी।

    निशुल्क उपलब्ध डिजिटल संसाधन
    पीएम ई-विद्या की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि डिजिटल लर्निंग से जुड़े संसाधन निशुल्क उपलब्ध हैं। इससे विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल माध्यम का उपयोग कर अध्ययन कर सकते हैं। शिक्षक भी उपलब्ध डिजिटल संसाधनों को अपनी कक्षा शिक्षण प्रक्रिया के सहयोगी माध्यम के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

    एंड्रॉयड और आईओएस पर ऐप उपलब्ध
    पीएम ई-विद्या ऐप एंड्रॉयड और आईओएस, दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। एंड्रॉयड उपयोगकर्ता इसे गूगल प्ले स्टोर तथा आईओएस उपयोगकर्ता एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इससे विभिन्न डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने वाले विद्यार्थी और शिक्षक इस मंच से जुड़ सकते हैं।

    कोट:
    योगी सरकार प्रदेश के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल संसाधनों के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। पीएम ई-विद्या जैसे प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाई से जुड़े आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाते हैं। हमारा प्रयास है कि तकनीक का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचे और डिजिटल शिक्षा उनके सीखने का मजबूत माध्यम बने।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसि
    क शिक्षा

    कोट:
    डिजिटल संसाधनों की आसान और निशुल्क उपलब्धता विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए सीखने और सिखाने के नए अवसर खोलती है। पीएम ई-विद्या के माध्यम से एक ही मंच पर शैक्षिक संसाधनों की उपलब्धता से डिजिटल लर्निंग को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। एससीईआरटी एवं विभागीय स्तर पर हमारा प्रयास है कि इन संसाधनों का विद्यालयी शिक्षण में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक

  • यूपी की CM Dashboard Ranking में शाहजहांपुर का दबदबा कायम, रामपुर ने हासिल की दूसरी रैंक

    यूपी की CM Dashboard Ranking में शाहजहांपुर का दबदबा कायम, रामपुर ने हासिल की दूसरी रैंक

    सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में एक बार फिर शाहजहांपुर अव्वल, रामपुर को मिला दूसरा स्थान

    – जनशिकायतों के निस्तारण में मारी बाजी, फीड बैक में भी रहा अव्वल

    – अगस्त की रैंकिंग में रामपुर दूसरे व बरेली तीसरे स्थान पर

    – जन समस्याओं के प्रति सीएम योगी की गंभीरता का दिख रहा असर, प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा निस्तारण

    लखनऊ
     योगी सरकार द्वारा पिछले साढ़े नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अगस्त की रैंकिंग में एक बार फिर शाहजहांपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, रामपुर ने दूसरा और बरेली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। रामपुर, शाहजहांपुर और बरेली के जिलाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है।  

    शाहजहांपुर ने 9.53 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया
    शाहजहांपुर के जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शाहजहांपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही सीएम डैशबोर्ड के जरिये मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अगस्त माह की रैंकिंग में शाहजहांपुर को 10 में से 9.53 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ शाहजहांपुर ने प्रदेशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं रामपुर ने 9.48 अंक हासिल कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

    रामपुर ने 10 में से 9.48 अंक प्राप्त कर बाजी मारी
    रामपुर डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई में सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से जिले की 68 योजनाओं की मॉनीटरिंग की गई। इसमें से 65 कार्यक्रमों में जिले ने ए ग्रेड प्राप्त किया। जिले ने वैकल्पिक ऊर्जा, ऊर्जा, कृषि विभाग, समाज कल्याण, लोक निर्माण विभाग, नियोजन विभाग, ग्राम्य विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पशुपालन, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, मत्स्य विभाग, उद्योग विभाग, सहकारिता एवं सिंचाई के कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए ए श्रेणी प्राप्त की है। सीएम डैशबोर्ड की अगस्त की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.48 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ एक बार फिर रामपुर ने सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा रामपुर पिछले कई माह से सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में टॉप टेन में जिलों में बना हुआ है। वहीं बरेली ने 9.43 अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

    टॉप टेन जिलों में आजमगढ़, पीलीभीत और मैनपुरी ने स्थान प्राप्त किया
    सीएम डैशबोर्ड की अगस्त माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें आजमगढ़ और पीलीभीत ने बराबर-बराबर 9.36 अंक हासिल कर चौथा, मैनपुरी ने 9.34 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह महराजगंज ने 9.27 अंक प्राप्त कर छठवां, अंबेडकरनगर ने 9.26 अंक प्राप्त कर सातवां, सुल्तानपुर ने 9.24 अंक प्राप्त कर आठवां, हरदोई ने 9.23 अंक प्राप्त कर नौवां और सोनभद्र ने 9.21 अंक प्राप्त कर टॉप टेन में जगह बनायी है।

  • UP RISE से चमक रहा यूपी के युवाओं का हुनर, छात्रों ने AI समेत कई क्षेत्रों में पेश किए इनोवेटिव आइडिया

    UP RISE से चमक रहा यूपी के युवाओं का हुनर, छात्रों ने AI समेत कई क्षेत्रों में पेश किए इनोवेटिव आइडिया

    युवाओं के नवाचार को योगी सरकार का प्रोत्साहन, यूपी राइज से हुनर को मिल रहा मंच

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से स्वास्थ्य और सुरक्षा तक छात्रों ने प्रस्तुत किए नए विचार

    लखनऊ स्थित इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में दिखी युवाओं की प्रतिभा 

    इनोवेट8एक्स को पहला, स्कैनविडेंस को दूसरा व मेरिडियन टीम ने हासिल किया तीसरा स्थान

    लखनऊ विश्वविद्यालय में भी आयोजित होगा कार्यक्रम

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में युवाओं के नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार की पहल यूपी राइज छात्रों को अपने नए विचारों को मंच देने का अवसर प्रदान कर रही है। इसी क्रम में लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में आयोजित यूपी राइज कार्यक्रम में छात्रों ने तकनीक आधारित कई नए कारोबारी मॉडल और नवाचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में शॉर्टलिस्ट किए गए आइडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर, सुरक्षा, कृषि, जल गुणवत्ता, रियल एस्टेट और पारंपरिक शिल्प जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल रहे।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कई नए विचार

    कार्यक्रम में ध्रुव एक्स स्काईशील्ड का पोर्टेबल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ड्रोन रोधी रक्षा तंत्र, निदानवाणी का स्वास्थ्य सेवा मंच, मेरिडियन का स्मार्ट पहनने योग्य मुद्रा निगरानी तंत्र और संवेदना का कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मानसिक स्वास्थ्य मंच प्रस्तुत किया गया। स्कैनविडेंस ने चिकित्सकों के लिए रोगी आंकड़ों के विश्लेषण और निदान में सहायक चिकित्सकीय मंच तैयार किया। वहीं जियोक्वेरी लैब ने संपत्ति संबंधी जानकारी, इनोवेट8एक्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी एवं सुरक्षा तंत्र, शिल्पसेतु ने कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने वाला डिजिटल बाजार और एग्रीक्यू ने सटीक कृषि के लिए स्वचालित तंत्र प्रस्तुत किया।

    इनोवेट8एक्स को पहला, स्कैनविडेंस को दूसरा स्थान

    प्रतियोगिता में इनोवेट8एक्स ने प्रथम स्थान हासिल किया। टीम में रमिश अदील, मुस्कान, फराज नदीम, लैबा रहमान, रेहान शेख और फैजान-ए-रजा शामिल रहे। दूसरे स्थान पर स्कैनविडेंस की टीम रही, जिसमें अनस खालिद, अब्दुल मलिक, अली हसन, अलीना फारूकी, अब्दुल रहमान और साहेर जहरा शामिल हैं। तीसरा स्थान मेरिडियन की टीम ने हासिल किया। इसमें इमामा बिन्त अनवर, अरिशा खानम, अब्दुल्ला अशरफ अली,  मोहम्मद सायम अशरफ, एमडी मामूनुर रशीद और हसन अब्बास नियाजी शामिल रहे।

    विशेषज्ञों ने परखी छात्रों की प्रतिभा

    छात्रों के विचारों और प्रस्तुतियों का मूल्यांकन हर्षित देसाई, सिमरन साहनी, पूनम खंडेलवाल और हर्षवर्धन जवेरी ने किया। यूपी राइज के माध्यम से छात्रों को अपने नवाचारों को कारोबारी मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस पहल के माध्यम से छात्रों को बुकमायशो में प्रशिक्षण का अवसर भी मिलेगा। लखनऊ विश्वविद्यालय में भी यूपी राइज कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

  • 1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी

    1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी

    पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धाजंलि, उनके योगदान को किया नमन

    पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की थी पैरवी: मुख्यमंत्री

    1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी

    सीएम ने कहा- गृहमंत्री के रूप में पंत जी ने भाषाई संघर्ष का समाधान कर हिंदी को दिलाया सम्मान

    लखनऊ
     महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देश के पूर्व गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास में योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत जी की पावन जयंती है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से वह पंत जी की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

    काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की पैरवी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत महान अधिवक्ता होने के साथ-साथ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वर्ष 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के खिलाफ जो अभियोग दर्ज किया था, उसके खिलाफ क्रांतिकारियों की पैरवी मजबूती के साथ करने वाले महान नेताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत प्रमुख थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पंत जी को यूपी के प्रीमियर के रूप में चुना गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा देकर स्वाधीनता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी। भारत छोड़ो आंदोलन समेत समय-समय पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न बड़े आंदोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन की नींव रखी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे में इतने बड़े राज्य की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के साथ ही आर्थिक उन्नयन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए उन्होंने काम किया। पंत जी ने अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके द्वारा प्रस्तुत लैंड रिफॉर्म मॉडल भी महत्वपूर्ण रहा। 

    गृहमंत्री के रूप में निभाई अहम भूमिका
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1954 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री बने। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश के भीतर चल रहे भाषाई संघर्ष और समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का सूझ-बूझ के साथ समाधान निकाला। हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • योगी सरकार की बाढ़ पर पैनी नजर, 21,333 लोगों को सुरक्षित निकाला; अब तक जनहानि शून्य

    योगी सरकार की बाढ़ पर पैनी नजर, 21,333 लोगों को सुरक्षित निकाला; अब तक जनहानि शून्य

    योगी सरकार का बाढ़ राहत अभियान जारी, 21,333 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, अब तक जनहानि शून्य

    बाढ़ प्रभावितों को 8.58 लाख लंच पैकेट वितरित किए गए, स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 1,139 मेडिकल टीमें तैनात

    2,304 नाव-मोटरबोट से जारी चलाया गया बचाव अभियान, राहत शरणालयों में मिला प्रभावितों को ठिकाना

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रशासन की सक्रियता और लगातार निगरानी के बीच अब तक 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। वहीं अब तक पशुहानि और जनहानि शून्य दर्ज की गई है।

    वर्तमान में 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत एवं बचाव अभियान के तहत बुधवार को ही 7,903 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अब तक कुल 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत दी गई है। जलभराव और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए 2,304 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा चुका है।

    8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित
    बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए व्यापक अभियान जारी है। अब तक 8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बुधवार को भी 83,545 लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए गए। इसके साथ ही अब तक 1.38 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट वितरित किए गए हैं।

    राहत शरणालयों में 7,581 लोग ले रहे आश्रय
    प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में अब तक 1,343 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। इनमें 7,581 लोग रह रहे हैं।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,139 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 7.09 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट व 2.88 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संक्रमण और जलजनित बीमारियों से बचाने में मदद मिल रही है।

    प्रभावित जिले
    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशांबी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • CM योगी ने पं. गोविंद बल्लभ पंत को किया नमन, राष्ट्र निर्माण में योगदान को बताया अविस्मरणीय

    CM योगी ने पं. गोविंद बल्लभ पंत को किया नमन, राष्ट्र निर्माण में योगदान को बताया अविस्मरणीय

    राष्ट्र निर्माण में पं. गोविंद बल्लभ पंत का योगदान अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि
     
    काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारियों की पैरवी करने वालों में प्रमुख थे पं. पंत
     
    स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री तक निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। लोकभवन प्रांगण में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पं. पंत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रख्यात अधिवक्ता और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत का देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए समर्पित किया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन में पं. पंत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वर्ष 1925 के काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों के विरुद्ध अभियोग दर्ज किया तो उनकी पैरवी करने वाले प्रमुख अधिवक्ताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत भी शामिल थे। उन्होंने अधिवक्ता के रूप में भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पं. पंत को संयुक्त प्रांत का प्रीमियर चुना गया। देश की स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1947 में वह उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय वर्तमान उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास और समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
     
    उन्होंने कहा कि बाद में पं. गोविंद बल्लभ पंत ने राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1954 में वह देश के गृह मंत्री बने और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के भीतर विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का समाधान निकालने और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत का व्यक्तित्व और कृतित्व वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। उनकी जयंती पर प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

  • स्कूलों में बेटियों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील माहौल, आत्मसम्मान से नेतृत्व तक योगी सरकार का खास प्लान

    स्कूलों में बेटियों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील माहौल, आत्मसम्मान से नेतृत्व तक योगी सरकार का खास प्लान

    बेटियों के आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता के लिए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बना रही योगी सरकार

     रूप-रंग और शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाने की प्रवृत्ति को समझेंगे शिक्षक

    सोशल मीडिया के प्रभाव और बॉडी इमेज पर बच्चों से संवाद की होगी तैयारी

    – लैंगिक रूढ़ियों की पहचान और कक्षा में संवेदनशील व्यवहार का होगा अभ्यास

    पॉक्सो अधिनियम और मासिक धर्म स्वास्थ्य से बाल सुरक्षा व गरिमापूर्ण वातावरण पर जोर

    लखनऊ,
    योगी सरकार बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में बच्चों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले संवेदनशील मुद्दों पर शिक्षकों की समझ विकसित की जा रही है। रूप-रंग अथवा शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाना, स्वयं और दूसरों को केवल शरीर या रूप-रंग के आधार पर देखना, अपने शरीर और उसकी क्षमताओं को पहचानना, सोशल मीडिया का प्रभाव तथा लैंगिक रूढ़ियां प्रशिक्षण के प्रमुख विषय हैं। 

    विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंच कार्यक्रम एवं सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए आज से दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हो गया है। व्यापक प्रशिक्षण रूपरेखा में कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार करने का लक्ष्य है। 

    इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के संवेदनशील अनुभवों को समझने और उनके साथ प्रभावी संवाद के लिए तैयार करना है, ताकि विद्यालयों में सुरक्षित, सहभागी और सम्मानजनक वातावरण मजबूत हो तथा हर बालिका आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य की ओर आगे बढ़ सके।

    आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों पर समझ
    प्रशिक्षण में नव-विकसित चार कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के रूप में शामिल किया गया है। इनके माध्यम से रूप-रंग और शारीरिक बनावट के आधार पर चिढ़ाने एवं परेशान करने, शरीर को लेकर बच्चों की धारणाओं, अपने शरीर से जुड़ाव एवं उसकी क्षमताओं तथा सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को समझाया जा रहा है। इन संसाधनों के उपयोग से बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के तरीकों का भी प्रदर्शन होगा। 

    लैंगिक रूढ़ियों पर संवेदनशील संवाद
    प्रशिक्षण में मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया पर काम हो रहा है। एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में बच्चों की बात सुनने, बिना पूर्वधारणा के संवाद करने, सभी आवाजों को महत्व देने और अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। लैंगिक रूढ़ियों की पहचान तथा कॉमिक्स और कक्षा गतिविधियों के माध्यम से इन विषयों पर संवाद का भी अभ्यास हो रहा है। 

    पॉक्सो अधिनियम से बाल सुरक्षा पर जोर
    प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) पर चर्चा के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रमुख संदेशों को स्पष्ट किया गया। मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत करने का प्रयास हुआ। बच्चों और शिक्षकों की कहानियों को एकत्रित, दस्तावेजीकृत और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम होगा। 

    किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा
    दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की समझ विकसित की जाएगी। समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से इसके सत्रों को पाठ्यक्रम तथा किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा। ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों की जानकारी भी दी जाएगी। 

    मासिक धर्म स्वास्थ्य और गरिमा पर चर्चा
    उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य (2026) निर्णय के प्रमुख निहितार्थों पर भी चर्चा होगी। मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालय की जिम्मेदारियों के अंतर्गत सुरक्षित शौचालय, पानी, आवश्यक उत्पाद, निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालयी स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा। 

    कोट:
    योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। रूप-रंग, शारीरिक बनावट, सोशल मीडिया और लैंगिक रूढ़ियों जैसे संवेदनशील विषयों को समझना शिक्षकों के लिए बेहद आवश्यक है। मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को तैयार करने से विद्यालयों में बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और प्रभावी संवाद को मजबूती मिलेगी।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण में बॉडी इमेज, सोशल मीडिया के प्रभाव, लैंगिक रूढ़ियों, बाल सुरक्षा और मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर समझाया जा रहा है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह समझ विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाएगी।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए यूपी सरकार की नई पहल, रेंटल हाउसिंग नीति जल्द; बनी समिति

    अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए यूपी सरकार की नई पहल, रेंटल हाउसिंग नीति जल्द; बनी समिति

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गों के लिए एक नई और विशेष रेंटल हाउसिंग नीति लाने की तैयारी कर रही है. इस नीति का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराना है. आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो नीति का प्रारूप तैयार कर सरकार को अपनी सिफारिशें देगी. प्रस्तावित योजना के तहत जरूरतमंद बुजुर्गों को कम किराये पर मकान उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी. सरकार का मानना है कि वृद्धावस्था में किसी भी वरिष्ठ नागरिक को आवास के लिए भटकना न पड़े और उसे सुरक्षित रहने का विकल्प मिल सके। 

    नीति तैयार करने के लिए बनी 9 सदस्यीय समिति
    आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने नई रेंटल हाउसिंग नीति के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति की अध्यक्षता आवास विभाग के सचिव करेंगे. समिति में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों को सदस्य बनाया गया है. वहीं, आवास बंधु के निदेशक को सदस्य-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह समिति वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं का अध्ययन कर नीति का मसौदा तैयार करेगी और सरकार को अपनी संस्तुतियां सौंपेगी। 

    सभी शहरों में विकसित होगा आवास मॉडल
    सरकार की योजना प्रदेश के विभिन्न शहरों में बुजुर्गों के लिए विशेष आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की है. इन मकानों को जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को किफायती किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा. नीति में सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। 

    बुजुर्गों के लिए पहले से चल रही हैं कई योजनाएं

    उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है. वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पात्र बुजुर्गों को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इसके अलावा लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है। 

    संपत्ति संरक्षण के अधिकार
    राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में 'उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014' में संशोधन को मंजूरी दी है. नए प्रावधानों के तहत यदि संतान या आश्रित रिश्तेदार वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण नहीं करते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे. साथ ही शिकायतों के निस्तारण के लिए 30 दिन की समयसीमा भी तय की गई है।