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  • भोपाल-जबलपुर रोड पर राहत, शहपुरा टोल एक-दो दिन में होगा बंद

    भोपाल-जबलपुर रोड पर राहत, शहपुरा टोल एक-दो दिन में होगा बंद

    जबलपुर
    जबलपुर-भोपाल रोड पर शहपुरा रेलवे ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद डायवर्ट किए गए यातायात को देखते हुए शहपुरा टोल नाका अब एक-दो दिन में बंद किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जब तक शहपुरा का पुल दोबारा बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक टोल कलेक्शन बंद रहेगा। इससे डायवर्ट रूट से गुजरने वाले वाहन चालकों को टोल शुल्क नहीं देना होगा। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि शहपुरा रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है। ऐसे में टोल वसूली को लेकर लोगों में नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब टोल बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और एक-दो दिन में वसूली बंद हो जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।  

    पहले दिए थे निर्देश, फिर भी जारी थी वसूली
    इससे पहले भी लोक निर्माण मंत्री ने शहपुरा टोल को अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद टोल नाके पर वाहनों से शुल्क वसूली जारी रहने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था और पुलिस से भी शिकायत की थी। उस समय टोल नाके के मैनेजर ने कहा था कि उन्हें टोल बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला है। लिखित निर्देश मिलने के बाद वसूली बंद करने की बात कही गई थी। अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पुल बनने तक टोल बंद रहेगा। 

    लोकपथ एप पर बसों की टाइमिंग भी मिलेगी
    राकेश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों की समय सारणी भी आने वाले समय में लोकपथ एप पर उपलब्ध कराई जाएगी। यात्री एप पर देख सकेंगे कि कौन सी बस किस समय और किस स्थान से चलेगी और उसे कहां से लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी लोकपथ एप पर सड़क और मार्ग की जानकारी के साथ पर्यटन स्थल, टोल नाके, अस्पताल और पुलिस थानों की जानकारी उपलब्ध है। बसों की टाइमिंग जुड़ने के बाद यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी। 

  • पेंशनर्स की बड़ी मांग, 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन बहाली पर जोर

    पेंशनर्स की बड़ी मांग, 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन बहाली पर जोर

    नई दिल्‍ली
    8वें वेतन आयोग के तहत तेजी से काम चल रहा है. आए दिन किसी ना किसी शहर में आयोग बैठकें कर रहा है और सैलरी-पेंशन को लेकर कर्मचारियों से बातचीत कर रहा है. इस बीच, कर्मचारियों में फिटमेंट फैक्‍टर, भत्तों और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। 

    आयोग की बैठकों में बड़े मुद्दे फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) है. साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब 'गारंटीड पेंशन' की मांग पर अड़े हुए हैं. आइए जानते हैं रिटायर्ड कर्मचारियों की क्‍या-क्‍या मांगे हैं… 

    पुरानी पेंशन योजना की मांग 
    साल 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई नई पेंशन योजना से देशभर के कर्मचारी संतुष्‍ठ नजर नहीं आ रहे हैं. 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए नोट में कर्मचारी यूनियनों ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा बाजार बेस्‍ड रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके फैमिली के फ्यूचर को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह से नाकाम है. कर्मचारियों की मांग है कि उन्‍हें फिर से पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जाए. सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। 

    45,000 रुपये न्‍यूनतम पेंशन 
    भारत पेंशनर्स समाज (BPS) के तहत पेंशनर्स ने न्‍यूनतम पेंशन की मांग उठाई है. BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।  

    कब लागू हो सकती है सिफारिशें? 
    वेतन आयोग देशभर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी प्रतिनिधियों की बातें सुन रहा है. इन बैठकों में फिटमेंट फैक्‍टर बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दे पर ज्ञापन पेश किया गया है. आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को दे सकता है। 

    रिपोर्ट पेश करने के बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा. इसके बाद यह तय होगा कि क्‍या सरकार पेंशन में तीन गुना बढ़ोतरी करेगी और ओपीएस की मांग मानेगी. 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों को OPS का लाभ मिलेगा या नहीं। 

    क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना 'OPS vs NPS'?
    वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।

    कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी 'परिभाषित लाभ' वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।

    प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?
    अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:

    A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।

    B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।

    C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।

    D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।

    आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें
    वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

    आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।

    8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर 'गारंटीड पेंशन' और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।

  • धान खरीदी 2026-27 की तैयारी शुरू, 360 नए केंद्रों पर व्यवस्थाएं होंगी दुरुस्त

    धान खरीदी 2026-27 की तैयारी शुरू, 360 नए केंद्रों पर व्यवस्थाएं होंगी दुरुस्त

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी व्यवस्था समय पर हो पूरा: खाद्य मंत्री बघेल

    मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा

    किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र, सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

    बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर

     3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था कर रहा विपणन संघ

    अब तक 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त, शेष बारदानों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

    कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में तेजी लाने के निर्देश

    रायपुर, 
    आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में गुरूवार 24 सितंबर को आयोजित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में किसानों की सुविधा, धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, जूट बारदानों की उपलब्धता तथा कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की प्रगति पर की गई।

    बैठक में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा
    बैठक में बताया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

    मंत्रिमंडलीय उप समिति ने नवीन खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप समिति ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसान-केंद्रित हो तथा खरीदी केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था
    धान उपार्जन के लिए बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति ने आवश्यक नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि विपणन संघ द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था की जा रही है।

    अब तक विपणन संघ को 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त हो चुके हैं। उप समिति ने शेष आवश्यक बारदानों की उपलब्धता भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि धान खरीदी के दौरान बारदानों की कमी के कारण उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो।

    कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश
    बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कस्टम मिलिंग की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कस्टम मिलिंग के अंतर्गत कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 37.50 लाख टन चावल जमा किया जा चुका है, जबकि मिलरों द्वारा 51.50 लाख टन चावल जमा किया जाना शेष है।

    कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने शेष चावल की मात्रा को देखते हुए कस्टम मिलिंग एवं चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों से इसकी नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया।

    बैठक में खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक विलास भोसकर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • दीनदयाल उपाध्याय को जयंती पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया याद

    दीनदयाल उपाध्याय को जयंती पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया याद

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

    नवा रायपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

    ‘अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के विचार राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे’—वित्त मंत्री चौधरी

    रायपुर
    अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज नवा रायपुर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    वित्त मंत्री चौधरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनके विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को केंद्र में रखने वाला ‘अंत्योदय’ का उनका विचार आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी है।

    उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा प्रस्तुत की। उनका चिंतन समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की प्रेरणा देता है। चौधरी ने कहा कि ‘अंत्योदय’ जैसे कालजयी विचार के सूत्रधार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और आदर्श राष्ट्र के लिए सतत प्रेरणा बने रहेंगे।

  • Rajasthan Mayor Result: जयपुर में 29, कोटा में 30 वोट से जीत; बीकानेर में कांग्रेस का मेयर

    Rajasthan Mayor Result: जयपुर में 29, कोटा में 30 वोट से जीत; बीकानेर में कांग्रेस का मेयर

    जयपुर
    राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर चुनाव की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। शुक्रवार को जयपुर, जोधपुर और कोटा में हुए चुनाव के साथ प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों के मेयर का फैसला हो गया। इन चुनावों में भाजपा के प्रत्याशियों ने 9 नगर निगमों में जीत दर्ज की, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर चुना गया।

    जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी ने कांग्रेस की सुनीता मावर को 29 वोट से हराया। कोटा में अनुसुईया गोस्वामी ने सुनीता सुमन को 30 वोट से हराया। जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता ने राजेंद्र सोलंकी को 6 वोट से शिकस्त दी।

    इससे पहले अजमेर, अलवर, पाली और उदयपुर में भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए थे। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध मेयर चुने गए, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा प्रत्याशी को 20 वोट से हराया।

    1-अजमेर: भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 और कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले।

    2-उदयपुर: पारस सिंघवी ने 55 वोट हासिल किए और कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले।

    3-अलवर: सुमनलता अग्रवाल को 42 और कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।

    4-पाली: भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर मेयर बनीं। यहां निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले। इसलिए सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी के आधार पर जीत का अंतर 4 वोट रहा।

    5-भरतपुर: यहां निर्विरोध निर्वाचन हुआ और भाजपा की जसवंत कंवर महापौर बनी।

    6—भीलवाड़ा: भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं।

    7-बीकानेर: कांग्रेस के अनिल कल्ला ने 50 वोट हासिल किए तो भाजपा के सुरेंद्र सिंह को 30 वोट मिले।

    8-जयपुर: भाजपा के सुनील कोठारी को 89 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 वोट मिले। कोठारी 29 वोट के अंतर से विजयी रहे।

    9-कोटा: भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी ने 65 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस की सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। यहां जीत का अंतर 30 वोट रहा।

    10-जोधपुर: भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता को 53 और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी को 47 वोट मिले। मेहता ने 6 वोट के अंतर से चुनाव जीता।

    इस तरह 10 नगर निगमों में भाजपा के 9 और कांग्रेस का 1 महापौर है। दस में से सात नगर निगमों में मेयर का चुनाव 21 सितंबर को हो चुका था, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा में चुनाव 25 सितंबर को हुए।

    नगर निगम    विजेता      पार्टी          विजेता को वोट    दूसरे प्रत्याशी को वोट       जीत का अंतर
    जयपुर    सुनील कोठारी    भाजपा        89                     सुनीता मावर 60             29 वोट
    जोधपुर    प्रसन्नचंद मेहता    भाजपा      53                    राजेंद्र सोलंकी 47            6 वोट
    कोटा    अनुसुईया गोस्वामी    भाजपा      65                     सुनीता सुमन 35           30 वोट
    बीकानेर    अनिल कल्ला    कांग्रेस            50                     सुरेंद्र सिंह 30                 20 वोट
    अजमेर    अनामिका शर्मा    भाजपा        43                      किरण गढ़वाल 37           6 वोट
    उदयपुर    पारस सिंघवी    भाजपा            55                    पूनम कुंवर राठौड़ 25         30 वोट
    अलवर    सुमनलता अग्रवाल    भाजपा    42                      कमलेश शर्मा 23             19 वोट
    पाली    नमिता बुबकिया    भाजपा           33                    राजबाला हिंगड़ 29                4 वोट
    भरतपुर    अनुराधा सिंह    भाजपा          निर्विरोध                —                                    निर्विरोध
    भीलवाड़ा    जसवंत कंवर    भाजपा       निर्विरोध                  —                                     निर्विरोध

  • युवा शक्ति और ज्ञान बनेंगे विकास का आधार, 2047 का विजन तैयार

    युवा शक्ति और ज्ञान बनेंगे विकास का आधार, 2047 का विजन तैयार

    विशेष लेख

    "सेवा_संकल्प_अभियान"

    विकसित राज्य @2047: शिक्षा, नवाचार और युवा शक्ति से गढ़ी जा रही स्वर्णिम भारत की नई गाथा

    ज्ञान और युवा शक्ति: विकास का मूल आधार

     रायपुर
            
             ​किसी भी समृद्ध और सर्वसुविधायुक्त राज्य का निर्माण केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं की बौद्धिक क्षमता और कार्यकुशलता से संभव होता है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ प्रदेश के विकास मॉडल के केंद्र में 'GYAN' यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को रखा गया है। युवाओं को आर्थिक और सामाजिक उन्नति का मुख्य आधार मानते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक और परिणामोन्मुख कायाकल्प की शुरुआत की जा चुकी है। अब शिक्षा को केवल औपचारिक डिग्रियों तक सीमित न रखकर आधुनिक उद्योगों की माँग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और व्यावसायिक बनाया जा रहा है।

    उच्च शिक्षा में मिशन मोड: उपलब्धियां और लक्ष्य

             ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत उच्च शिक्षा विभाग पूरी तरह से 'मिशन मोड' में कार्य कर रहा है। 'उच्च शिक्षा मिशन योजना' के सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए वर्तमान में 27.5 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जिसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही, शोध और अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना' का खाका तैयार किया गया है। शिक्षा को जड़ों से जोड़ने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    गुणवत्ता, अवसंरचना और रोजगार के नए अवसर

             ​शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नैक (NAAC) मूल्यांकन पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके तहत पात्र 254 शासकीय महाविद्यालयों में से 200 तथा 09 में से 05 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सफलता से पूर्ण हो चुका है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए शैक्षणिक अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार किया जा रहा है; वर्ष 2025–26 में 08 नए शासकीय महाविद्यालय, 05 नए निजी महाविद्यालय और 03 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। संस्थाओं में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल व क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ये समन्वित प्रयास वर्ष 2047 के स्वर्णिम और विकसित प्रदेश की एक सुदृढ़ नींव रख रहे हैं।

    विष्णु प्रसाद वर्मा
    सहायक संचालक

  • सागर समेत 16 जिलों में तेज बारिश के आसार, 13 में अति भारी अलर्ट

    सागर समेत 16 जिलों में तेज बारिश के आसार, 13 में अति भारी अलर्ट

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और मजबूत दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन बारिश का असर ज्यादा रहेगा। कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक पानी गिर सकता है। बंगाल की खाड़ी में बना अवदाब अब मजबूत मौसमी सिस्टम में बदल गया है। इसके असर से 25 और 26 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर रहेगा। 27 सितंबर को भी कुछ इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद तंत्र आगे बढ़ जाएगा। शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है।

    मानसून विदाई से ठीक पहले बारिश का जोर
    मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर तक रहता है। यानी अब इसकी विदाई में करीब छह दिन बाकी हैं। इससे पहले प्रदेश में लगातार बारिश के दो दौर आ चुके हैं और अब आखिरी सप्ताह में तीसरे मजबूत दौर ने दस्तक दी है।मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार 25 और 26 सितंबर को सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहेगा। 27 सितंबर को भी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद मौसम में बदलाव आने की संभावना है।

    अब भी सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश
    बारिश के नए दौर के बावजूद प्रदेश में सीजन की कुल बारिश अभी सामान्य से पीछे है। अब तक 873.4 मिमी यानी 34.4 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 935.1 मिमी यानी 36.8 इंच है। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 2.4 इंच यानी 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी करीब 2 प्रतिशत है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
    प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इसके उलट कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से काफी नीचे है। हालांकि सितंबर के अंतिम दौर की बारिश से कमी तेजी से घट रही है।

    जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई
    इस मानसून में जून सबसे कमजोर रहा। महीने में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश ने स्थिति संभाली और दोनों महीनों का कोटा पूरा हुआ, लेकिन जून की कमी पूरी तरह नहीं भर सकी। इसी वजह से पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे है। 25-26 सितंबर की बारिश के बाद यह अंतर और कम होने की उम्मीद है। 

    प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

    वहीं, भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश होगी।

    इसके अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के कुछ जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    अतिवृष्टि की संभावना: सतना में 2 दिन स्कूल बंद
    अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए सतना जिले में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने 26 सितंबर को भी नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया है।

    यह आदेश शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय, नवोदय, आईसीएसई सहित सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा।

    अगले 2 दिन असर रहेगा
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में उभर रहा यह स्ट्रॉन्ग हो गया है। इस वजह से 25 और 26 सितंबर को असर ज्यादा रहेगा। 27 को भी तेज बारिश होगी। इसके बाद सिस्टम आगे बढ़ जाएगा।

    मानसून की विदाई को 6 दिन बचे
    एमपी में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक है। यानी, मानसून की विदाई को छह दिन बचे हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से विदाई होने लगेगी। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य बारिश से 2.4 इंच नीचे चल रहा प्रदेश
    IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 873.4 मिमी यानी, 34.4 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.8 इंच (935.1 मिमी) की तुलना में 2.4 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 2% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। गुरुवार को भी आंकड़ा माइनस में दो प्रतिशत रहा।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% कम पानी गिरा है।

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
    IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

     

  • मां को नहीं बताया जापान जा रही हूं, सीमा ने Asian Games में रचा इतिहास; 28 सितंबर को 5000m में उतरेंगी

    मां को नहीं बताया जापान जा रही हूं, सीमा ने Asian Games में रचा इतिहास; 28 सितंबर को 5000m में उतरेंगी

    नई दिल्ली
    हिमाचल प्रदेश के चंबा के छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंची सीमा की कहानी जितनी संघर्ष भरी है, उतनी ही भावुक भी. 10,000 मीटर में कांस्य जीतकर इतिहास रचने वाली 25 साल की इस धाविका ने नागोया जाने की बात अपनी 78 साल की मां तक को नहीं बताई थी. वजह थी मां की चिंता.

    सीमा जानती थीं कि अगर मां को पता चल गया कि बेटी जापान में एशियन गेम्स खेलने जा रही है, तो वह पूरी रात सो नहीं पाएंगी. इसलिए सीमा ने एक छोटा सा 'राज' रखा और मां को यही समझने दिया कि वह हमेशा की तरह बेंगलुरु के ट्रेनिंग कैंप में हैं.

    'मां को बताया तो एक दिन सो नहीं पाएंगी'
    सीमा ने पदक जीतने के बाद अपनी मां के बारे में बताया, 'मेरे पिता नहीं हैं. मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, उनकी उम्र करीब 78 साल है. मेरा जन्म तब हुआ था, जब वह 45 साल की थीं. जब भी मैं बाहर जाती हूं, वह बहुत तनाव में आ जाती हैं. इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियन गेम्स के लिए जापान जा रही हूं.'

    उन्होंने बताया कि मां को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है. ऐसे में ट्रेनिंग कैंप या प्रतियोगिता के लिए बाहर जाते समय सीमा उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं देतीं. परिवार में सिर्फ बड़ी बहन को सब पता रहता है.

    सीमा नागोया रवाना होने से पहले अपनी बड़ी बहन को पूरी जानकारी देकर गई थीं. अब ऐतिहासिक कांस्य जीतने के बाद उम्मीद है कि यह खबर मां तक भी पहुंच गई होगी.

    सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, 'हो सकता है मेरी बहन ने उन्हें बता दिया हो. शायद वे टीवी पर मुझे देख रही हों. वरना मां यही सोच रही होंगी कि मैं अभी बेंगलुरु में हूं.'

    12 साल की उम्र में पिता को खोया, नंगे पैर दौड़ीं
    सीमा का सफर किसी आसान रास्ते की कहानी नहीं है. चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली सीमा ने महज 12 साल की उम्र में पिता को खो दिया था. बचपन में वह नंगे पैर दौड़ती थीं और मवेशी चराती थीं. गांव में जब उन्होंने एथलेटिक्स को करियर बनाने की कोशिश की तो लोगों ने भी सवाल उठाए, लेकिन मां ने बेटी का साथ नहीं छोड़ा.

    आज उसी बेटी ने एशियन गेम्स में भारत के लिए 10,000 मीटर का कांस्य जीतकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा दिया.

    सीमा ने  कांस्य पदक (32:50.05) जीता. वह एशियन गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय हैं. उनसे पहले 2010 के एशियन गेम्स में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक जीता था.

    सीमा के लिए यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा है.

    उन्होंने कहा, 'यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और अपना सपना पूरा किया.'

    सोना जीतने निकली थीं, कांसे से नहीं मानीं
    10,000 मीटर की रेस को सीमा ने बेहद रणनीतिक बताया. उनके मुताबिक खिलाड़ियों की नजर समय पर नहीं, बल्कि पदक पर थी.

    उन्होंने कहा, 'रेस काफी रणनीतिक थी. हर कोई पदक के लिए दौड़ रहा था. मैंने भी सोचा कि मुझे पदक के लिए लड़ना है, क्योंकि यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. हर खिलाड़ी अपने देश के लिए गोल्ड जीतना चाहता है.'

    सीमा भी सोना जीतने के इरादे से उतरी थीं, लेकिन कांस्य से उन्हें संतोष करना पड़ा. हालांकि उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है.

    28 सितंबर को फिर ट्रैक पर उतरेंगी सीमा
    सीमा अब 28 सितंबर को महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में उतरेंगी. 10,000 मीटर का कांस्य जीतने के बाद उनका लक्ष्य साफ है- पदक का रंग बदलना.

    उन्होंने कहा, 'मैंने गोल्ड जीतने के लिए लड़ाई की, लेकिन कांस्य जीता. मैं खुश हूं. अब मेरा अगला इवेंट 28 सितंबर को 5000 मीटर है. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगी और पदक का रंग बदलना चाहूंगी.'

    पिछले साल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत जीत चुकीं सीमा ने अपनी तैयारी का श्रेय कोच स्कॉट साइमन को भी दिया. उनके मुताबिक ओलंपिक चैम्पियनों के साथ ट्रेनिंग ने सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी बढ़ाई है.

    और शायद यही सीमा की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है- जिस बेटी को मां की चिंता से बचाने के लिए अपना ठिकाना छिपाना पड़ा, वही बेटी अब देश के लिए मेडल जीतकर मां तक अपनी खबर पहुंचा रही है.

  • अमित शाह बोले- सपा-बसपा के शासन में कट्टा-बम बनाने की इंडस्ट्री लगती थी, आज यूपी में बन रहे रक्षा उत्पाद

    अमित शाह बोले- सपा-बसपा के शासन में कट्टा-बम बनाने की इंडस्ट्री लगती थी, आज यूपी में बन रहे रक्षा उत्पाद

    सपा सरकार को यूपी से बाहर करना पड़ा था निवेश का कार्यक्रम, योगी ने यूपी को बनाया निवेश का केंद्र: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
     
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ

    योगी सरकार में ऐसा बदला यूपी कि आज एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य तय कर सकता है प्रदेश
     
    अमित शाह बोले- सपा-बसपा के शासन में कट्टा-बम बनाने की इंडस्ट्री लगती थी, आज यूपी में बन रहे रक्षा उत्पाद
     
    वाहन चोरी की जगह वाहन मैन्युफैक्चरिंग और चेन स्नैचिंग की जगह बन रहे मेडिकल डिवाइस पार्क: अमित शाह
     
    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण तोड़ेगा पिछले सभी रिकॉर्ड, निवेश, उत्पादन और बिक्री में होगी बड़ी बढ़ोतरी
     
    ग्रेटर नोएडा

     केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में आए बदलाव के बहाने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर निशाना साधा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना की। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण के शुभारंभ पर उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश सरकार को निवेश का कार्यक्रम प्रदेश से बाहर करना पड़ा था। तब अधिकारी कहते थे कि कानून-व्यवस्था की हालत ऐसी है कि निवेशक यहां आने को तैयार नहीं हैं। आज तस्वीर बदल चुकी है। वही उत्तर प्रदेश भयमुक्त होकर निवेश का केंद्र बन रहा है और देश के विकास के इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है।
     
    शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जमीन पहले भी थी, 24 करोड़ से अधिक की आबादी और मेहनती कारीगर भी थे। कमी उद्योगों के लिए अच्छे माहौल की थी। 2017 में भाजपा की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो माफिया के खिलाफ कार्रवाई हुई और कानून-व्यवस्था बदली। इसी का नतीजा है कि आज निवेशक उत्तर प्रदेश आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव इतना बड़ा है कि उत्तर प्रदेश अब एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
     
    कट्टा-बम की इंडस्ट्री की जगह बन रहे रक्षा उत्पाद: शाह
    पूर्ववर्ती सपा और बसपा सरकारों पर तीखा हमला करते हुए अमित शाह ने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश में अपराध की इंडस्ट्री चलती थी। कट्टा-बम बनाने की इंडस्ट्री लगती थी, वाहन चोरी का कुटीर उद्योग चलता था और चेन स्नैचिंग में युवाओं को हुनर प्राप्त करने का मौका मिलता था। आज करीब 10 साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। कट्टा-बम की इंडस्ट्री की जगह रक्षा उत्पाद बन रहे हैं, वाहन चोरी की जगह वाहन मैन्युफैक्चरिंग हो रही है और चेन स्नैचिंग की जगह मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने सपा-बसपा के समय की गुंडागर्दी को नेस्तनाबूद कर प्रदेश में उद्योग और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाया है।
     
    शाह ने उत्तर प्रदेश के बदलाव को चार चरणों में समझाया। कहा, पहले दुनिया ने देखा कि यूपी बदल रहा है। फिर लोगों ने यहां आने की इच्छा जताई। इसके बाद निवेशक उत्तर प्रदेश आए और अब वे प्रदेश के विकास में भागीदार बनने जा रहे हैं। यही भागीदारी उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की यात्रा को आगे बढ़ाएगी।
     
    डिफेंस कॉरिडोर का जिक्र कर योगी सरकार को सराहा
    अमित शाह ने कहा कि कार्यक्रम में आते समय उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ डिफेंस कॉरिडोर का स्टॉल देखा। झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और कानपुर के छह नोड में रक्षा उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए निवेश आ रहा है। इसके लिए योगी सरकार ने अनुकूल नीतियां बनाने से लेकर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने तक बड़ा काम किया है।
     
    उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन आज करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। उत्तर प्रदेश भी इसमें अपनी भूमिका तेजी से बढ़ा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि यह पाकिस्तान की नींद उड़ा रही है। वहीं अमेठी में बनी एके-203 असॉल्ट राइफल नक्सलियों की नींद उड़ा चुकी है। कभी जिस उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने का साहस नहीं होता था, आज वही रक्षा उत्पादन में अपनी पहचान बना रहा है।
     
    एक्सप्रेसवे ने बढ़ाई रफ्तार, ओडीओपी बना विकास की रीढ़
    शाह ने कहा कि एक्सप्रेसवे और चौतरफा विकास ने उत्तर प्रदेश को प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ाया है। इसके साथ ही योगी सरकार ने प्रदेश के परंपरागत हुनर को सहेजने और आगे बढ़ाने का काम किया। यही हुनर आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के रूप में दिखाई दे रहा है और प्रदेश के विकास की रीढ़ बन चुका है।
     
    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के उत्पादों ने देशभर में अपनी पहचान बनाई है। आने वाले समय में कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक लोगों के लिए उत्तर प्रदेश के उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे।
     
    पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ेगा चौथा संस्करण
    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो को प्रदेश के लिए बड़ा कारोबारी अवसर बताते हुए अमित शाह ने कहा कि यहां देश-दुनिया से सैकड़ों व्यापारी आए हैं। कई व्यापारिक समझौते होने वाले हैं। इसका सीधा असर निवेश, उत्पादन और बिक्री पर पड़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार का ट्रेड शो पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ेगा।
     
    शाह ने कहा कि 2025 का संस्करण प्रभाव का वर्ष साबित हुआ था। पांच लाख से अधिक लोग इसमें पहुंचे थे और 2,400 से अधिक समझौते हुए थे। हजारों करोड़ रुपये के निवेश और व्यापारिक समझौतों का रास्ता खुला था। इस बार की भागीदारी को देखकर लग रहा है कि चौथा संस्करण उससे भी आगे जाएगा।
     
    मेक इन इंडिया की राह को आगे बढ़ा रहा यूपीआईटीएस
    अमित शाह ने कहा कि 12 वर्ष पहले इसी दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया मिशन की घोषणा की थी। इन 12 वर्षों में केंद्र और राज्यों ने मिलकर भारत को उत्पादन, डिजाइन और इनोवेशन का केंद्र बनाने के लिए काम किया है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उसी मेक इन इंडिया की राह को आगे बढ़ाने वाला आयोजन है।
     
    पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दीनदयाल उपाध्याय ने मुक्त व्यापार और मुक्त खेती की अवधारणा सामने रखी थी। आगे चलकर यही सोच पहले अटल बिहारी वाजपेयी और फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास का आधार बनी।
     
    शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास जमीन और मेहनती कारीगरों के साथ अब उद्योगों के लिए अच्छा वातावरण भी है। ट्रेड शो में जुटे कारोबारी और यहां होने वाले समझौते आने वाले दिनों में निवेश, उत्पादन और कारोबार को और गति देंगे। उत्तर प्रदेश के विकास में दुनिया के निवेशक अब भागीदार बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

  • ASI के 450 पदों पर सीधी भर्ती, पंजाब पुलिस में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

    ASI के 450 पदों पर सीधी भर्ती, पंजाब पुलिस में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

    चंडीगढ़ 
    पंजाब सरकार ने पुलिस बल को मजबूत करने के लिए 450 सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) की सीधी भर्ती को मंजूरी दी है। पंजाब सरकार ने इस संदर्भ में एक प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। सरकार के मुताबिक भर्ती पारदर्शी और मेरिट के आधार पर होगी।

    सीएम मान ने कहा कि नई भर्ती से पढ़े-लिखे और योग्य युवाओं को पुलिस विभाग में शामिल होने का अवसर मिलेगा। साथ ही जमीनी स्तर पर पुलिसिंग मजबूत होगी और कानून-व्यवस्था की उभरती चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। 

    मुख्यमंत्री के अनुसार पंजाब पुलिस के पांच कैडरों में एएसआई के 6,810 स्वीकृत पद हैं। चार कैडरों में करीब 70 फीसदी रिक्तियां पदोन्नति से और आर्म्ड कैडर में करीब 90 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाने की संभावना है। इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 450 पदों पर सीधी भर्ती का फैसला किया गया है। संबंधित विभागों को भर्ती की औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    भर्ती और पदोन्नति की योजना तैयार
    6810 एएसआइ पदों का है स्वीकृत कैडर सरकार के अनुसार पंजाब पुलिस के पांच कैडरों में एएसआइ के कुल 6810 स्वीकृत पद हैं। इनमें जिला पुलिस, आर्म्ड पुलिस, ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन, इंटेलिजेंस और टेक्निकल सपोर्ट सर्विस शामिल हैं। सरकार ने मौजूदा और आने वाले समय में संभावित रिक्तियों का विस्तृत आकलन किया है। इसी आधार पर भर्ती और पदोन्नति की योजना तैयार की गई है।

    सरकार के मुताबिक चार कैडरों में करीब 70 प्रतिशत रिक्तियां पदोन्नति के माध्यम से भरी जाने की संभावना है, जबकि आर्म्ड कैडर में यह अनुपात करीब 90 प्रतिशत है। पदोन्नति की जरूरतों को ध्यान में रखने के बाद 450 एएसआइ पदों पर सीधी भर्ती का फैसला किया गया है।

    भर्ती प्रक्रिया में नहीं होगी देरी..
    मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को भर्ती से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी।

    उन्होंने कहा कि मजबूत पुलिस बल केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना भी जरूरी है। सरकार के अनुसार नई भर्ती से पंजाब पुलिस की जमीनी स्तर पर कार्यक्षमता बढ़ेगी और उभरती कानून-व्यवस्था तथा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी

    युवाओं के लिए खास बात: 450 एएसआइ पदों की सीधी भर्ती को मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, आवेदन की तारीख, आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा पैटर्न और आधिकारिक भर्ती विज्ञापन की जानकारी अलग से जारी की जाएगी। इसलिए इच्छुक युवाओं को पंजाब पुलिस की आधिकारिक भर्ती सूचना का इंतजार करना होगा।