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  • अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में नरमी, टैरिफ कटौती के साथ AI पर भी बनेगी सहमति

    अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में नरमी, टैरिफ कटौती के साथ AI पर भी बनेगी सहमति

    वाशिंगटन
    अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा।

    चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा।

    वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर
    ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए।

    एआई पर भी बात होगी
    व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की।

    अन्य समझौते भी हुए
    शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए।

    क्या है टैरिफ विवाद?
    अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई।

    इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।

  • पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या से रायपुर में सनसनी, पति पर आरोप

    पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या से रायपुर में सनसनी, पति पर आरोप

    रायपुर.

    रायपुर में शनिवार देर रात ट्रिपल मर्डर की घटना सामने आई है। पति ने अपनी पत्नी और 2 नाबालिग बच्चों की धारदार चाकू से हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने खुद पर भी चाकू से वार कर लिया, जिससे वह घायल हो गया।

    आरोपी को इलाज के लिए मेकाहारा में भर्ती कराया गया है। मामला माना थाना क्षेत्र के डूमरतराई का है। आरोपी की पहचान भुनेश्वर साहू (34) के रूप में हुई है। वह जिला बालोद का रहने वाला है और डूमरतराई के साहू पारा में किराए के मकान में रहता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पत्नी के कैरेक्टर पर शक के चलते उसने हत्या की है।

    पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या के बाद खुद पर किया वार
    जानकारी के मुताबिक, आरोपी भुनेश्वर साहू ने रात 1:30 बजे विवाद के बाद पहले पत्नी खिलेश्वरी साहू पर हमला किया। इसके बाद उसने दोनों बच्चों आशीष साहू (10) और ज्ञान साहू (8) पर हमला किया। तीनों की मौत के बाद उसने खुद पर भी चाकू से वार किए। पड़ोसियों को घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने पुलिस को सूचित किया। माना पुलिस रात में ही मौके पर पहुंची तो दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। महिला की हालत बेहद गंभीर थी। वहीं पति भी घायल हालत में पड़ा हुआ था। पत्नी को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    सब्जी मंडी में काम करते थे पति-पत्नी
    पुलिस ने बताया का परिवार करीब 2 साल पहले किराए के मकान में रहने आया था। पति और पत्नी सब्जी मंडी में काम करते थे। 2 महीने पहले पति ने काम छोड़ दिया था। पड़ोसियों के मुताबिक चरित्र शंका को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। शनिवार रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था।

    अंबेडकर अस्पताल में आरोपी का इलाज जारी
    पुलिस ने घायल आरोपी को इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया है। उसका इलाज जारी है। जबकि पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मेकाहारा भेज दिया है और घटनास्थल को सील कर दिया गया है। फिलहाल, पुलिस घटना के कारणों और वारदात से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

  • NDTV डिफेंस समिट में राजनाथ सिंह का संदेश, राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा भारत

    NDTV डिफेंस समिट में राजनाथ सिंह का संदेश, राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा भारत

    नई दिल्ली
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब-जब पड़ोसी देश आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, तब-तब भारत आतंकवादियों के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार रहेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत शांति चाहता है। भारत न तो युद्ध चाहता है और न ही किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करना चाहता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।

    समाचार चैनल एनडीटीवी के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पड़ोसी देश कहकर पाकिस्तान की ओर इशारा किया।

    जमीन पर जीत ही युद्ध में जीत का एकमात्र पक्का सबूत
    इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल धीरज सेठ ने कहा है कि टेक्नोलॉजी निश्चित रूप से लड़ाइयों को छोटा कर रही है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह युद्धों को भी छोटा करे। उन्होंने कहा कि जमीन पर जीत ही युद्ध में जीत का एकमात्र पक्का सबूत है। उन्होंने आगे कहा, "आज सोशल मीडिया पर हम दुनिया भर में युद्ध से जुड़ी कई खबरें और बातें देखते हैं। जहां जानकारी और नैरेटिव के जरिए असली लड़ाई की तस्वीर को धुंधला करने की कोशिश की जाती है। इससे अनिश्चितता और भ्रम पैदा होता है।''

    उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि इस सब शोर-शराबे के बीच एक सच्चाई कभी नहीं बदलती। सफलता के लिए जमीन हमेशा एकमात्र ठोस और काम की चीज रहेगी। जीत को हमेशा इलाके के आधार पर मापा गया है, मापा जाता है और मापा जाएगा। उस इलाके पर कब्जा करने, उसे सुरक्षित करने और उसकी रक्षा करने का काम सेना ही करेगी।"

    पाकिस्तान ने बीत कई वर्षों में कई ऐसे आतंकी नेटवर्क को पनाह दी है जिन्होंने भारत में हमले किए हैं। भारत का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि पाकिस्तानी या पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई आतंकी हमले किए हैं।

    आपको बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के मशहूर टूरिस्ट टाउन पहलगाम पर हमला किया। इस हमले में एक नेपाली नागरिक समेत 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में मुजफ्फराबाद, कोटली, बहावलपुर, रावलकोट, चकस्वारी, भीमबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल की जगहों को निशाना बनाया गया।

    राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत बातचीत में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो बातचीत वहीं खत्म हो जाएगी। भारत सहयोग चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय हित की कीमत पर नहीं।"

  • भोपाल में शिक्षकों का बड़ा आंदोलन, नीलम पार्क में हजारों शिक्षक धरने पर बैठे

    भोपाल में शिक्षकों का बड़ा आंदोलन, नीलम पार्क में हजारों शिक्षक धरने पर बैठे

    भोपाल.

    मध्य प्रदेश के शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने के लिए प्रदेश भर के करीब हजार की संख्या में शिक्षक भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया है।

    मोर्चे का कहना है कि मांगों के ठोस निराकरण तक संघर्ष जारी रहेगा। मोर्चा संयोजक एवं राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों से कई बार चर्चा और संवाद हो चुका है, लेकिन अभी तक ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में संयुक्त मोर्चा अब चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।

    TET की अनिवार्यता समाप्त की जाए
    लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की जा रही है। मोर्चे की मांग है कि मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित किया जाए तथा केंद्र सरकार को भेजा जाए।

    प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना हो
    शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि एवं वरिष्ठता की गणना की जाए, ताकि ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में वास्तविक सेवा अवधि का लाभ मिल सके।

    ई-अटेंडेंस व्यवस्था स्वैच्छिक की जाए
    मोर्चे ने शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक करने की मांग की है। मोर्चे का कहना है कि शिक्षकों के विभागीय एवं अन्य शासकीय दायित्वों को देखते हुए व्यवस्था में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

    शिक्षकों की आवाज अब भोपाल से उठेगी- जगदीश यादव
    जगदीश यादव ने कहा कि संयुक्त मोर्चा शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहा है। प्रदेश के विभिन्न संभागों से शिक्षक आंदोलन में शामिल होंगे तथा आगामी कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें मजबूती से पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक वर्षों से अपनी सेवा संबंधी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ज्ञापन, संवाद और चर्चा के बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाना शिक्षकों की मजबूरी है।

    संयुक्त मोर्चा के सभी पदाधिकारी एकजुट
    आंदोलन को सफल बनाने के लिए मोर्चा के संयोजक श्री राकेश दुबे, मनोहर दुबे, परमानंद डेहरिया, राकेश नायक, डी.के. सिंगौर, राकेश पटेल सहित समस्त शिक्षक संगठन के पदाधिकारी प्रदेशभर के शिक्षकों से आंदोलन में सक्रिय सहभागिता की अपील कर रहे हैं। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि 27 सितंबर से भोपाल में शुरू होने वाला अनिश्चितकालीन धरना शिक्षकों की तीनों मांगों के समाधान के लिए सामूहिक संघर्ष का मंच होगा। मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा। शिक्षक पीछे नहीं हटेंगे।

  • PM मोदी ने मन की बात में सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर जनगणना और नशामुक्ति अभियान तक की चर्चा

    PM मोदी ने मन की बात में सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर जनगणना और नशामुक्ति अभियान तक की चर्चा

    नई दिल्ली
     रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 138वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय सेना द्वारा लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार की गई 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद का जवाब मजबूत और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा।

    पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक ने दुनिया के सामने भारत की आतंक-रोधी नीति का एक नया उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि देश कल यानी 28 सितंबर को इस स्ट्राइक की दसवीं वर्षगांठ मनाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया यह देखकर हैरान रह गई थी कि आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के लिए किस तरह बहादुर भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण-रेखा पार की थी।

    'आतंकवादी हमलों का दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब'
    उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के कारण देश लंबे समय से दर्द झेल रहा था और सर्जिकल स्ट्राइक इसी का निर्णायक जवाब था। पिछले दशक में बालाकोट एयरस्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने बार-बार यह संदेश दिया है कि आतंकवादी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले देश में सिलसिलेवार धमाका आम बात थी। 13 सितंबर, 2008 को दिल्ली के सिलसिलेवार धमाकों में कई लोग मारे गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई में 26 नवंबर का हमला हुआ लेकिन अब भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति पर चल रहा है और इसका नतीजा सामने है।

    जनगणना को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?
    प्रधानमंत्री ने जनगणना के संबंध में कहा कि इसका पहला चरण लगभग सभी राज्यों में पूरा हो गया है और 32 करोड़ से ज़्यादा परिवारों का डेटा दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के दूरदराज के और बर्फीले इलाकों में अभी काम चल रहा है।

    पीएम मोदी ने कहा कि इन इलाकों से कई प्रेरणादायक अनुभव सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत चमोली के माणा गांव में 83 साल की पूर्णिमा रावत के साथ हुई। माणा को देश का पहला गांव माना जाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उत्तरकाशी के बागौरी गांव में होमस्टे चलाने वाले हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल तरीके से अपना ब्योरा खुद दर्ज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना सभी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और लोग अपने मोबाइल से ही अपनी और अपने परिवार की जानकारी 17 भाषाओं में दर्ज करा सकते हैं।

    उन्होंने लोगों से ऑनलाइन पोर्टल se.census.gov.in पर जानकारी देने की अपील की और कहा कि पूरी प्रक्रिया में लगभग 20 मिनट लगते हैं और किसी दस्तावेज को अपलोड नहीं करना पड़ता। अब तक 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोगों ने मोबाइल से अपना ब्योरा दर्ज कराया है। नागरिकों के बारे में सही जानकारी देश के भविष्य की सटीक तस्वीर बनाने में मदद करती है।

    पीएम मोदी ने अशोक सिंघल को किया याद
    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की सौवीं जयंती है। उन्होंने कहा कि सिंघल ने अपना पूरा जीवन संस्कृति, समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। 27 सितंबर, 1926 को आगरा में जन्मे अशोक सिंघल ने समाज में रहते हुए भी एक तपस्वी जैसा जीवन जिया। राम जन्मभूमि आंदोलन को उन्होंने जो दिशा और ऊर्जा दी, अयोध्या में भव्य मंदिर उसी का परिणाम है। सिंघल ने सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी।

    सोमनाथ मंदिर को लेकर क्या कहा?
    प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने इस साल की शुरुआत सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के साथ की। उन्होंने बताया कि महमूद गजनवी ने पहली बार 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था, फिर भी यह मंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है। वर्ष 1026 ईस्वी में जब गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था, उसी साल गुजरात के मोढेरा में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर को भी हमला कर नष्ट कर दिया गया था जिसे राजा भीमदेव ने 1025 में बनवाया था।

    पीएम मोदी ने कहा कि मोढेरा सूर्य मंदिर को बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने भी नष्ट कर दिया था। हमारे लिए सूर्य प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरंतरता की प्रेरणा का प्रतीक है, इसीलिए आज मोढेरा न केवल अपने सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता है, बल्कि देश का पहला सूर्य ग्राम यानी सोलर विलेज भी बन गया है। मोढेरा में पर्यटकों के लिए कई आकर्षण और सुविधाओं की शुरूआत की गई है। मकर संक्रांति के बाद जनवरी में मोढेरा नृत्य महोत्सव होता है। इसमें सांस्कृतिक और शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं।

    स्वच्छता अभियान की दिलाई याद
    प्रधानमंत्री ने आगामी 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छता, बापू के जीवन के मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा एक नदी को साफ करने का काम कर रहे हैं। इसी तरह, आंध्र प्रदेश में युवा पुरानी बावड़ियों और कुओं की सफाई कर रहे हैं, जिससे भारत की प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित करने में मदद मिल रही है। मुंबई में कुछ युवा समुद्र तटों को साफ रखने की पहल कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिल्ली में बच्चे और युवा कचरा अलग करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने ते लिए जागरूकता बढ़ा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में विद्यार्थी स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पिकनिक स्थलों के बाजार-क्षेत्रों की सफाई कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों की शुरुआत एक व्यक्ति से होती है और दूसरे लोगों के जुड़ने से आंदोलन बढ़ता जाता है। यही जन- भागीदारी का सार है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

    नशा मुक्त युवा अभियान
    प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा–मुक्त युवा अभियान के तहत देश के लाखों युवाओं ने हाल ही में, नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा की है और इसकी जानकारी दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है। यह अभियान सौ सप्ताह चलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ही देश भर में हजारों शपथ और जागरूकता कार्यक्रम हुए हैं। उन्होंने नशा-मुक्ति का संदेश पहल की सराहना की। इसमें युवा अपनी भाषा और अपने तरीके से इस संदेश का प्रसार करते हैं।

    प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपनी रचनात्मकता का उपयोग करते हुए इस अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि माय भारत मंच पर राष्ट्रगान, नारा लेखन और नुक्कड़ नाटक सहित कई प्रतियोगिताएं की गई हैं। इसी तरह, युवा सोशल मीडिया पर हैशटैग नशामुक्तयुवा का इस्तेमाल करते हुए रचनात्मक सामग्री साझा कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और ध्यान शिविर जैसे कार्यक्रम भी किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से त्योहारी मौसम के बीच, अपने आसपास ऐसे लोगों का सहयोग करने की अपील की जो नशे से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • कल से बैंक हड़ताल, आज रविवार को भी खुले बैंक; 30 सितंबर तक रहेगा असर

    कल से बैंक हड़ताल, आज रविवार को भी खुले बैंक; 30 सितंबर तक रहेगा असर

    भोपाल.

    अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम अटका हुआ है, तो उसे आज ही पूरा कर लें। 5 डे वर्किंग की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी सोमवार से 30 सितंबर तक हड़ताल पर जा रहे हैं।

    इसी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम जनता की सहूलियत के लिए रविवार की छुट्टी होने के बावजूद आज सभी सरकारी बैंकों को खुला रखने का विशेष आदेश दिया है।

    प्रदेश की 7 हजार शाखाओं में कामकाज रहेगा ठप
    इस हड़ताल का असर पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। प्रदेश भर में कुल 7 हजार बैंक शाखाएं हैं, जिनमें अकेले भोपाल की 400, इंदौर की 800 और उज्जैन की 300 ब्रांच शामिल हैं। हड़ताल में मुख्य रूप से स्केल-3 तक के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। हालांकि, स्केल-4 या इससे ऊपर के वरिष्ठ अधिकारी बैंक में मौजूद रहेंगे, लेकिन स्टाफ न होने के कारण वे ग्राहकों को कोई सेवा नहीं दे पाएंगे।

    रविवार को बैंक खोलने का क्या है कारण?
    शनिवार और रविवार को बैंकों की नियमित छुट्टी होती है। इसके बाद सोमवार से लगातार तीन दिन की हड़ताल थी। ऐसे में बैंक लगातार 5 दिनों तक बंद रहते, जिससे हाहाकार मच सकता था। जनता को इसी भारी असुविधा से बचाने के लिए आरबीआई ने रविवार को बैंक शाखाओं के साथ-साथ करेंसी चेस्ट भी चालू रखने का फैसला किया है।

    करोड़ों का लेन-देन होगा प्रभावित
    बैंक कर्मचारियों के काम बंद करने से नकदी जमा करने, पैसे निकालने, चेक क्लियरिंग, पासबुक अपडेट कराने और ड्राफ्ट बनवाने जैसे सभी जरूरी काम पूरी तरह से रुक जाएंगे। हालांकि, राहत की बात यह है कि मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं निर्बाध रूप से काम करती रहेंगी। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में रोजाना लगभग 5500 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेन-देन होता है, जिस पर इस हड़ताल का सीधा असर पड़ेगा। इससे पहले इसी महीने 11 से 13 सितंबर के बीच भी बैंकिंग सेवाएं बाधित रही थीं।

    क्या है '5 डे बैंकिंग वीक' की मांग?
    मौजूदा समय में बैंक कर्मचारियों को महीने के केवल दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। बैंक यूनियनों की एक ही प्रमुख मांग है कि हर शनिवार और रविवार को पूर्ण अवकाश दिया जाए, यानी हफ्ते में केवल 5 दिन ही बैंक खुलें। इसके बदले में कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव रखा है। यूनियनों का तर्क है कि इससे काम के घंटों का नुकसान भी नहीं होगा और कर्मचारियों को राहत भी मिलेगी।

  • जिस आतंक को पाकिस्तान ने पाला, वही बना आफत; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में नंबर-1

    जिस आतंक को पाकिस्तान ने पाला, वही बना आफत; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में नंबर-1

    वशिंगटन
    जब सांप पालोगे तो एक दिन तुमको डसेगा ही', ये पुरानी कहावत इन दिनों पाकिस्तान पर सटीक बैठ रही है। भारत के खिलाफ जहां पाकिस्तान ने सांप यानी आतंकी पाले अब वहीं उसे डंस रहे हैं। ये बात कोई और कोई नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के लोग कह रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने अपने ही मुल्क की सच्चाई दुनिया के सामने लाई। उन्होंने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बताए जाने पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान अब आतंकी संगठनों को लेकर अपनाई गई अपनी पुरानी नीतियों के नतीजे भुगत रहा है।

    'सांप पालोगे तो डसेगा ही…'
    हुसैन हक्कानी ने एक्स पर ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान की स्थिति वाला एक ग्राफिक शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब कोई अपने घर के पीछे सांप पालता है तो एक दिन वही सांप घर के लोगों को भी काट सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने करीब 50 साल पहले चरमपंथी जिहादी संगठनों को हथियार और समर्थन देना शुरू किया था। अब वही पाकिस्तान आतंकवादी हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में सबसे ऊपर है। हक्कानी ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों से कोई सबक सीखने के लिए तैयार है।

    ये बयान इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की 2026 की रिपोर्ट जारी होने के बाद आई हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में पहले स्थान पर रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी 1,139 मौतें हुईं और 1,045 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2025 में सबसे ज्यादा रहा।

    ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान नंबर-1
    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में 8.574 अंक हासिल किए और इस मामले में बुर्किना फासो से आगे रहा। पाकिस्तान हर साल इस इंडेक्स में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल रहा है। हालांकि, 2025 में पहली बार पाकिस्तान इस सूची में नंबर-1 पर पहुंचा। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह लगातार छठा साल है, जब देश में आतंकवाद से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। हालांकि, आतंकवादी घटनाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई। 2024 में पाकिस्तान में 1,098 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2025 में घटकर 1,045 रह गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में किडनैंपिग घटनाओं में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई। 2024 में ऐसी 101 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 655 हो गईं।

    वहीं, दुनियाभर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2025 में आतंकवाद के कारण 5,582 लोगों की मौत हुई, जो 2024 के मुकाबले 28 फीसदी कम है। इसी तरह आतंकवादी हमलों की संख्या भी करीब 22 फीसदी घटकर 2,944 रह गई। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के मुताबिक, 81 देशों में आतंकवाद की स्थिति में सुधार हुआ, जबकि 19 देशों में हालात पहले से खराब हुए।

    बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हाल बेहाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके आतंकवादी गतिविधियों के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में हुए 74 फीसदी से ज्यादा आतंकवादी हमले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हुए। इन दोनों राज्यों में आतंकवाद से जुड़ी करीब 67 फीसदी मौतें भी हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी और इसके बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़े हमले हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) तथा बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की बढ़ती हिंसा ने देश के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

    पाकिस्तान के लिए काल बनी TTP
    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों के पीछे सबसे बड़े संगठनों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी लगातार पांचवें साल पाकिस्तान का सबसे घातक आतंकवादी संगठन रहा। 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से हुई 56 फीसदी मौतों के लिए टीटीपी को जिम्मेदार बताया गया। इस दौरान संगठन ने 595 हमले किए, जिनमें 637 लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले करीब 13 फीसदी ज्यादा है।

    आईईपी ने टीटीपी को 2025 में दुनिया का तीसरा सबसे घातक आतंकवादी संगठन भी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में टीटीपी अकेला ऐसा संगठन था, जिसके कारण होने वाली मौतों में 2025 में बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईईपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में इस्लामिक स्टेट, जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (जेएनआईएम), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अल-शबाब शामिल थे।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में संगठन ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें से ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हुए। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र टीटीपी की आतंकवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    पैसेंजर ट्रेन पर BLA के हमले का जिक्र
    रिपोर्ट में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की बढ़ती गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक के पीछे बीएलए का हाथ था। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादियों ने क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया और इसके बाद एक पैसेंजर ट्रेन पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 442 लोगों को बंधक बनाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना में 21 बंधकों, 4 सैन्यकर्मियों और 33 आतंकवादियों की मौत हुई।

    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के अनुसार, टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में टीटीपी ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में किए गए।

  • ईरान ने रखी 7 दिन में होर्मुज खोलने की शर्त, ट्रंप ने प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य

    ईरान ने रखी 7 दिन में होर्मुज खोलने की शर्त, ट्रंप ने प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य

    वाशिंगटन
    ईरान ने जब सात दिन में होर्मुज को खोलने के लिए अपनी शर्तें रखीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें शिरे से खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज बंद होने से और उसके प्लांट तबाह होने की वजह से ईरान की कमाई बंद हो गई है। ऐसे में ईरान के लोग भूखों मरने लगे हैं। इसीलिए वह होर्मुज खोलने को बेताब हो रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को ऐसे नहीं बख्शेंगे।
    ईरान ने क्या कहा था

    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने के उद्देश्य से पेश किए गए प्रस्ताव के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को ईरान में प्रवेश की अनुमति देने के लिए तैयार है। 'सीबीएस न्यूज' के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' को दिए एक इंटरव्यू में पेज़ेशकियान ने कहा कि अगर अमेरिका रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने और परमाणु वार्ता बहाल करने के ईरान के नए प्रस्ताव पर हामी भरता है, तो ईरान "अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन करेगा।"

    इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह प्रस्ताव दिया था कि व्यापक परमाणु समझौते की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होने के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर घोषित इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    अराघची ने अपने टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित ईरानी मीडिया के साथ बातचीत में कहा, "हमने अमेरिकी राष्ट्रपति की शुरुआती प्रतिक्रिया देखी। हालाँकि, मध्यस्थों के ज़रिए हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है।" ईरानी मंत्री ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई विरोधाभासी बयान दिए हैं।

    ईरानी राजनयिक ने आगे कहा, "हम मध्यस्थों से अंतिम रुख का इंतज़ार कर रहे हैं, और उसी के आधार पर हम अपने फ़ैसले लेंगे।" उन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की दिशा में कोई भी प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका ईरान की शर्तों को पूरा करे।

    जून के मध्य में अमेरिका और ईरान ने शांति समझौता करने की प्रक्रिया शुरू करने के इरादे से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। हालाँकि, तीन हफ़्ते बाद, तनाव का एक नया दौर शुरू हो गया। वाशिंगटन ने तेहरान पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए। फ़िलहाल, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बंद है।

  • पानी के तेज बहाव में बस बहने से बची, CG पुलिस ने 70 यात्रियों को किया सुरक्षित रेस्क्यू

    पानी के तेज बहाव में बस बहने से बची, CG पुलिस ने 70 यात्रियों को किया सुरक्षित रेस्क्यू

    रायपुर.

    राजधानी रायपुर के पास सारागांव में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोल्हान नाले के तेज बहाव में जय अंबे की बस फंस गई. रायपुर से बलौदाबाजार जा रही बस में 70 यात्री सवार थे.

    मार्ग पर पानी के तेज बहाव के कारण सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात थी. बाकी वाहनों की तरह बस को भी आगे जाने से रोका गया, लेकिन चालक ने ब्रेक नहीं लगाया. जानकारी के मुताबिक, विधानसभा थाना क्षेत्र के कोल्हान नाले में पानी के तेज बहाव को देखकर बस में सवार यात्रियों ने चालक को आगे जाने से मना किया. इसके बावजूद वह बस को आगे बढ़ाता गया. आगे से आ रही ट्रकों को रास्ता देने के लिए बस को साइड देना पड़ा. तभी तेज बहाव में बस फंस गई, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया. कुछ  लोगों ने घबराकर खिड़की से बाहर कूदने की तैयारी कर ली थी. स्थिति को संभालते हुए पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने बस के पास पहुंचकर लोगों को बाहर निकाले की प्रक्रिया शुरू की. दाई ओर की खिड़की से यात्रियों को बाहर निकाला गया. रेस्क्यू अभियान में ग्रामीणों ने भी पुलिस की मदद की. सभी 70 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया. पुलिस की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया.

    पुलिस ने बस चालक को हिरासत में ले लिया है. पूछताछ में चालक से पता लगाया जा रहा  कि चेतावनी के बावजूद उसने बस को आगे क्यों बढ़ाया. साथ ही बस परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस समेत अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई. सीएसपी विधानसभा वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि शनिवार को कोल्हान नाले में पानी का बहाव बढ़ा हुआ था. मौके पर मौजूद टीम वाहनों को आगे जाने से रोक रही थी. इसके बावजूद यात्री बस आगे बढ़ गई. ट्रकों की आवाजाही के दौरान बस को साइड करना पड़ा, जिसके बाद वह पानी के बहाव में फंस गई. पुलिस ने तत्काल यात्रियों को खिड़कियों के रास्ते बाहर निकाला. सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया और बस को भी बाहर कर लिया गया. चालक को हिरासत में लिया गया है. मामले में जांच जारी है.

  • 365 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, ब्याज में भी भारी उछाल; जानें क्यों बढ़ रही दुनिया की चिंता

    365 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, ब्याज में भी भारी उछाल; जानें क्यों बढ़ रही दुनिया की चिंता

    नई दिल्ली
    दुनिया कर्ज तले दबती जा रही है और ग्लोबल ऋण अब 365 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. फाइनेंशिय कमेंट्री पब्लिकेशन 'द कोबेसी लेटर' ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) के लेटेस्ट डेटा का हवाला देते हुए ग्लोबल कर्ज के बोझ को उजागर किया है. 2026 की पहली छमाही में इस रिकॉर्ड लेवल तक पहुंचे कर्ज में, सिर्फ छह महीनों में ही 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का उछाल आया है.

    आठ साल में यहां पहुंचा दुनिया का कर्ज
    वैश्विक ऋण (Global Debt) के आईआईएफ चार्ट को देखें, तो साफ पता चलता है कि बीते कई सालों में इसमें लगातार बढ़ोतरी होती गई है. वित्त वर्ष 2018 में लगभग 250 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर अब दुनिया का कर्ज 2026 की पहली छमाही तक ही लगभग 365 ट्रिलियन डॉलर का स्तर छू रहा है.

    कर्ज के आंकड़े में हालिया वृद्धि खासतौर पर उभरते बाजारों में देखने को मिली है. कोबेसी लेटर के मुताबिक, उभरते बाजारों का कर्ज 2026 की पहली छमाही में 6.5 ट्रिलियन डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 110 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इस इजाफे में सरकारों और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों का योगदान सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है.

    रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन को छोड़कर उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में कुल कर्ज लगभग 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दुनिया की सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बाहर बढ़ती वित्तपोषण की जरूरतों को उजागर करता है.

    उभरते बाजार क्यों हैं केंद्र में?
    365 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचे दुनिया के कर्ज में उभरती अर्थव्यवस्थाएं केंद्र में हैं. दरअसल, सरकारों ने पब्लिक खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए कर्ज लेना जारी रखा, जबकि कंपनियों ने भी निवेश और संचालन के वित्तपोषण के लिए कर्ज पर जोर दिया है. अब इसका असर ये हो रहा है कि सरकारों और कंपनियों को अपनी इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा दायित्वों को पूरा करने में लगाना पड़ सकता है.

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उभरते बाजारों के लिए कर्ज की यह समस्या तब और भी जटिल हो सकती है, जब कर्ज विदेशी मुद्राओं में लिया गया हो. घरेलू मुद्रा के कमजोर होने से डॉलर या यूरो में लिए गए कर्ज को चुकाने की स्थानीय मुद्रा लागत बढ़ सकती है.

    सबसे बड़ी चिंता तो ये सता रही
    ग्लोबल कर्ज बढ़ने के बीच सबसे बड़ी चिंताओं पर गौर करें, तो इनमें सिर्फ कर्ज का आंकड़ा नहीं, बल्कि उस कर्ज को चुकाने में कितना खर्च आता है, यह है. Kobeissi Letter में अनुमान जताया गया है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले वर्ष सरकारी ऋण पर 3.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का ब्याज चुकाया और ब्याज का यह आंकड़ा वैश्विक खर्च के अनुमानों से कहीं अधिक रहा. इनमें एआई पर खर्च 2.6 ट्रिलियन डॉलर, डिफेंस पर 3.1 ट्रिलियन डॉलर, क्लीन एनर्जी पर 2.3 ट्रिलियन डॉलर शामिल हैं.

    ये आंकड़े इस तस्वीर को साफ करने के लिए काफी हैं, कि कैसे कर्ज चुकाने की लागत तेजी से सरकारी वित्त पर एक बड़ा बोझ बन गई है. जी7 देशों में वार्षिक सरकारी ब्याज भुगतान में भी भारी वृद्धि हुई है, कोबेसी लेटर के अनुसार इसमें साल-दर-साल 85% का इजाफा हुआ है.

    वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटा
    Global Debt लगातार बढ़ रहा है, खास बात ये है कि वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात महामारी काल के उच्चतम स्तर से नीचे रहने के बावजूद यह ग्रोथ हुई है. हालांकि, अनुपात में दिखने वाला यह सुधार एक महत्वपूर्ण कारक को छिपाता है, महंगाई ने नॉमिनल जीडीपी को ऊपर उठाया है, न कि विश्व में ऋण में व्यापक कमी आई है. हालिया कर्ज के आंकड़े एक महत्वपूर्ण अंतर की ओर इशारा करते हैं. वो ये है कि वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात में 2021 के अपने उच्चतम स्तर से गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि दुनिया ने ऋणमुक्ति हासिल कर ली है.

    कोबेसी लेटर में कहा गया है कि वैश्विक जीडीपी के लगभग 310% के बराबर ऋण भार अभी भी बहुत अधिक है. हालांकि, यह अनुपात कोरोना काल में अपने हाई से करीब 25% नीचे है. लेकिन इस गिरावट का यह अर्थ कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि सरकारों, कंपनियों और परिवारों ने अपने ऋण का काफी हद तक भुगतान कर दिया है.

    एक्सपर्ट ने समझाया पूरा माजरा
    एक्सपर्ट ने इसमें बताया है कि ग्लोबल नॉमिनल जीडीपी में ग्रोथ आंशिक रूप से महंगाई के कारण हुई. इसका गणित समझें, तो जब कीमतें बढ़ती हैं, तो आर्थिक उत्पादन का नॉमिनल मूल्य बढ़ता है, भले ही वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक मात्रा उसी गति से न बढ़े. इससे ऋण-से-जीडीपी अनुपात अधिक प्रबंधनीय लग सकता है. साफ शब्दों में समझें, तो अगर नॉमिनल जीडीपी कर्ज की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती है, तो डॉलर के संदर्भ में विश्व पर अधिक ऋण हो सकता है, जबकि उसका ऋण अनुपात कम हो जाता है.