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  • बंगाल में बदले सियासी समीकरण! ममता-लेफ्ट की बातचीत से विपक्षी एकता की चर्चा तेज

    बंगाल में बदले सियासी समीकरण! ममता-लेफ्ट की बातचीत से विपक्षी एकता की चर्चा तेज

    नई दिल्ली
    ममता बनर्जी की राजनीति एक ही सूत्र पर चलती दिखती है। जरूरत पड़ी तो भाजपा के साथ खड़ी हो गईं, जरूरत पड़ी तो कांग्रेस के साथ चली गईं। अब जरूरत पड़ने पर लेफ्ट की ओर हाथ बढ़ा रही हैं। बंगाल में दशकों तक लेफ्ट को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताने वाली नेता आज उसी लेफ्ट से बात कर रही हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं को पत्र लिखा। पत्र में संयुक्त रणनीति बनाने की बात कही गई। इसके बाद ममता बनर्जी ने उनसे संपर्क किया। दोनों ने फोन पर बात की। चर्चा विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की संभावना पर हुई।

    सेरामपुर की जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा कि अब यह देखने की जरूरत नहीं कि कौन लाल है, कौन नीला है या कौन पीला है। अब हम सब एक हैं। उन्होंने 30 सितंबर की प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक बैठक का भी जिक्र किया और विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने को कहा। बयान साफ है। रंग अब मायने नहीं रखते। लेकिन बंगाल की राजनीति में यह बात नई है। तृणमूल कांग्रेस बनी ही लेफ्ट को हराने के वादे पर थी। ममता बनर्जी सालों तक सीपीआई(एम) की सबसे बड़ी विरोधी रहीं। अब वही नेता लेफ्ट के साथ बैठने को तैयार हैं।

    लेफ्ट विरोध से बनी पहचान
    बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान लेफ्ट फ्रंट के विरोध से बनी। 1998 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और तृणमूल कांग्रेस बनाई। इसके बाद पार्टी लेफ्ट की मुख्य चुनौती बन गई। 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन ने 34 साल पुरानी लेफ्ट सरकार को हराया। ममता मुख्यमंत्री बनीं। लेफ्ट को भारी हार मिली। उसके बाद लंबे समय तक ममता बनर्जी लेफ्ट को बंगाल की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बताती रहीं। सीपीआई(एम) तृणमूल पर हिंसा, मौकापरस्ती और असहिष्णुता के आरोप लगाती रही। दोनों पक्ष सड़क से विधानसभा तक एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे।

    अब उन्हीं दो ताकतों को साथ आने के लिए कहा जा रहा है। पुराने आरोपों का कोई सार्वजनिक हिसाब नहीं हुआ। दशकों की दुश्मनी कैसे खत्म हुई, इसका कोई साफ जवाब भी नहीं दिया गया। जब बंगाल में लेफ्ट पर हमला करना होता है, पुराने आरोप काम आते हैं। जब बड़े विपक्षी मंच की जरूरत होती है, तो लाल, नीला और पीला रंग एक हो जाते हैं

    भाजपा के साथ भी गईं, कांग्रेस के साथ भी
    राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी का सफर बार-बार रुख बदलने का रहा है। 1999 में तृणमूल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हुई। ममता रेल मंत्री बनीं। 2001 में एनडीए छोड़ दिया। 2003 में वाजपेयी सरकार में वापस आईं। 2004 में कोयला और खान मंत्री रहीं। 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में शामिल हुईं और फिर रेल मंत्री बनीं। 2012 में मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई, डीजल की कीमतें बढ़ाने और एलपीजी सब्सिडी सीमित करने जैसे मुद्दों पर समर्थन वापस ले लिया।

    यानी भाजपा कभी गठबंधन साथी रही, कभी दुश्मन। कांग्रेस कभी सहयोगी रही, कभी निशाना। लेफ्ट कभी मुख्य दुश्मन था, अब विपक्षी एकता के नाम पर उससे संपर्क हो रहा है।

    लेफ्ट के सामने उलझन
    सीपीआई(एम) ने साफ कहा है कि यह तृणमूल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं है। पार्टी इसे चुनाव आयोग और एसआईआर जैसे मुद्दों पर विपक्ष को जोड़ने की कोशिश बता रही है। लेकिन बंगाल में लेफ्ट के कार्यकर्ताओं के लिए यह आसान नहीं। दशकों से वे तृणमूल के खिलाफ लड़ते रहे हैं। ऐसे में किसी भी सहयोग से उनके समर्थकों में भ्रम फैल सकता है। पार्टी के वैकल्पिक राजनीति के दावे पर भी असर पड़ सकता है।

    सीपीआई(एम) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा है कि लेफ्ट का भाजपा विरोध नया नहीं है। पार्टी अकेले भी भाजपा से लड़ती रही है। उनके बयान से साफ है कि बंगाल लेफ्ट तृणमूल के साथ किसी समझ को लेकर सतर्क है। यह सतर्कता स्वाभाविक है। तृणमूल की पहचान लेफ्ट को हराकर बनी थी, उसके साथ हाथ मिलाकर नहीं। जो पार्टी खुद को लेफ्ट शासन का विकल्प बताती थी, अब लेफ्ट का सहयोग मांग रही है क्योंकि उसे बड़े राजनीतिक कवर की जरूरत है।

    शुभेंदु अधिकारी का हमला
    बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस नए समीकरण पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी कभी सीपीएम के खिलाफ लड़ती थी, अब उसी की दोस्त बन रही है। तृणमूल कांग्रेस का जन्म सीपीएम के लंबे शासन के खिलाफ हुआ था। आज वही सीपीएम उसकी राजनीतिक साझेदार बन गई है। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की एक घटना का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वोटिंग के दौरान तृणमूल के एक हिस्से और सीपीआई(एम) के अकेले विधायक का रुख एक जैसा रहा। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच बनती समझ का संकेत बताया।

    सिद्धांत या मौजूदा जरूरत?
    अभी तृणमूल और सीपीआई(एम) के बीच कोई पक्का चुनावी गठबंधन घोषित नहीं हुआ है। बातचीत हो रही है। चुनिंदा मुद्दों पर साथ काम करने की अपील की जा रही है। लेकिन बड़ा संदेश पहले से साफ है। ममता बनर्जी की राजनीति में कल के सिद्धांत आज की जरूरत के हिसाब से बदल सकते हैं। जब भाजपा चाहिए थी, एनडीए में गईं। जब कांग्रेस चाहिए थी, यूपीए में गईं। जब लेफ्ट को हराना था, एंटी-लेफ्ट राजनीति को आंदोलन का आधार बनाया। अब बड़े विपक्षी मंच की जरूरत है, तो लेफ्ट के साथ बैठने को तैयार हैं। यह ममता बनर्जी की सुविधा की राजनीति का एक और अध्याय है। इसमें वफादारी बदलती है, दुश्मन साथी बन जाते हैं और सत्ता की जरूरत के हिसाब से विचारधारा को ढाल लिया जाता है।

  • ग्वालियर में एलिवेटेड रोड के किनारे बड़ा हादसा टला, सड़क धंसने से 4 मकानों में दरारें

    ग्वालियर में एलिवेटेड रोड के किनारे बड़ा हादसा टला, सड़क धंसने से 4 मकानों में दरारें

    ग्वालियर.

    ढोली बुआ के पुल वाले क्षेत्र में एलिवेटेड रोड के पिलर खुदाई के चलते स्वर्ण रेखा की दीवार के बेस में डले रैंप को तोड़ दिया गया है। इसके बाद नाले की दीवार के साथ लगी सड़क 100 फीट तक फटने के साथ ही सड़क किनारे के 4 मकानों में दरारें आ गई है।

    वहीं दरारों के लगातार बढ़ने से लोगों में दहशत का माहौल है। हालांकि निगम अधिकारियों ने देर रात ही मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया, लेकिन लोगों को किसी तरह की राहत नहीं मिल सकी।

    शुक्रवार से हुई थी सड़क फटने की शुरुआत
    मौके पर पहुंचे तकनीकी अधिकारियों ने बताया कि दो दिन पहले ही एलिवेटेड रोड के पिलर डालने के लिए स्वर्ण रेखा की दीवार तोड़ कर ग्राउंड बेस रैंप बनाया गया था और इसके बाद क्षेत्र में सड़क की स्थिति प्रभावित हुई । शुक्रवार को सड़क फटने की शुरुआत हो गई थी, जो शनिवार की रात तक दरारें चौड़ी होने से पुन: बढ़ती दिखी। देर शाम तक सड़क में लंबी दरारें आने के साथ ही 04 मकान भी चटकने व दरारें आने से प्रभावित हुए।  इस मामले में नगर निगम ग्वालियर के कमिश्नर संजीव झा ने कहा- सड़क फटने व मकानों में दरारें आने की सूचना पर तत्काल मौके पर आ गया हूं, अभी दरार आने के लिए मौके की स्थिति का आंकलन जारी है। 

    इनके मकानों आई है दरारें –

    • गणेश शाक्य – कमरे/किचन में 
    • लीला शाक्य – आंगन/किचन/बाथरूम में 
    • नारायण कन्नौजिया –  आंगन/लैट-बाथ में
    • शालिनी ढेरे – दीवार की बाउंड्री
  • उज्जैन में विकास को नई रफ्तार, CM डॉ. यादव ने 173 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

    उज्जैन में विकास को नई रफ्तार, CM डॉ. यादव ने 173 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार प्रदेश के समान विकास के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है। उज्जैन (अवंतिका) एक प्राचीन नगर है। यहां का व्यापार व्यवसाय और इसका वैभव ही सदियों से इस नगर का गौरव और पहचान रही है। उज्जैनवासियों ने हर काल में शहर के विकास में सहयोग दिया है और आज भी यहां के लोग विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए स्वैच्छिक योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को महाकाल महालोक, उज्जैन में विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां 173 करोड़ रुपये लागत के 15 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन को जल्द ही मेट्रो ट्रेन की सौगात भी मिलेगी। भोपाल के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट प्रकाशित कर दिया गया है। ग्वालियर नई मेट्रोपॉलियन सिटी के रूप में विकसित होगा साथ ही इसे टेलीकॉम सिटी के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-भोपाल-जबलपुर तक औद्योगिक गलियारा बनने जा रहा है। इससे पूरे प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। हमारी सरकार सेवा भाव से समान रूप से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुगम परिवहन सेवा से प्रदेश में नई परिवहन सेवाएं प्रारंभ की गई हैं। इसके अन्तर्गत यात्री बसें एक नगर से दूसरे नगर तक ही नहीं, बल्कि एक राज्य से दूसरे राज्य तक जाएंगी। उज्जैन में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए उज्जैन दर्शन हेतु 10 नई पीएम ई-बस सेवाओं का शुभारंभ किया गया है।

    कार्यक्रम को उज्जैन सांसद  अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य बालयोगी  उमेशनाथ महाराज, सांसद डॉ. लता वानखेड़े एवं महापौर  मुकेश टटवाल ने भी संबोधित किया।जनप्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उज्जैन का चौमुखी विकास हो रहा है तथा सिंहस्थ के दृष्टिगत नगर को सजाया-संवारा जा रहा है।

    इस अवसर पर मध्यप्रदेश गृह एवं अधोसंरचना निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन, सिंहस्थ प्राधिकरण के अध्यक्ष  जगदीश अग्रवाल, पूर्व विधायक  राजेन्द्रध भारती,  संजय अग्रवाल,  जगदीश पांचाल एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

    उज्जैन में होंगे 173 करोड़ रुपए के विकास कार्य

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन में हुए कार्यक्रम में 15 विकास कार्यों का भूमि -पूजन और लोकार्पण किया। इसमें 12 कार्यों का भूमि-पूजन और 3 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। भूमि-पूजन कार्यों में मुख्य रूप से नगर निगम उज्जैन के 8 बड़े कार्य हैं, जिनमें गौशाला मार्ग से शिप्रा विहार मार्ग निर्माण, महाकाल लोक क्षेत्र में पार्किंग सुविधा,  महाकाल मंदिर परिसर का विकास एवं क्षिप्रा नदी के घाटों का जीर्णोद्धार जैसे कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही उज्जैन स्मार्ट सिटी द्वारा महाकाल मंदिर के पीछे लैंडस्केपिंग, पुलिस विभाग द्वारा चिंतामण जवासिया में पुलिस आवास और उन्हेल में थाना भवन तथा पर्यटन विभाग द्वारा 45 नगरीय वनों का विकास कार्य शामिल है, जिनकी कुल लागत 153.31 करोड़ रुपये है। लोकार्पित किए गए कार्यों में पुलिस आवास अधोसंरचना विकास निगम द्वारा नीलगंगा और उन्हेल में निर्मित पुलिस आवास एवं थाना भवन तथा ऊर्जा विभाग द्वारा बड़नगर में निर्मित 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र शामिल हैं, जिनकी कुल लागत 19.56 करोड़ रुपये है। इन सभी कार्यों से उज्जैन के नागरिकों को अधोसंरचना, सुरक्षा और पर्यटन विकास की बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी।

     

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहडोल में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को उज्जैन से वर्चुअली किया संबोधित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहडोल में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को उज्जैन से वर्चुअली किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस वर्ष सरकार ने पहली बार शहडोल के किसानों का  अन्न कोदो, कुटकी समर्थन मूल्य पर खरीदा है। इस बार भी किसानों का धान भी सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी, किसान किसी प्रकार की चिंता न करें। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराकर आधुनिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन, बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मछली पालन से भी किसानों को जोड़कर किसानों की आय में वृद्धि की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को शहडोल में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम को उज्जैन से वर्चुअली संबोधित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। किसानों और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा सिंचाई का रकबा बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। हर एक खेत तक पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल जिले के ओडीपी उत्पाद क्षेत्र की पहचान हल्दी को जियोटैग मिला है, क्षेत्र में हल्दी का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है। क्षेत्र की कृषि क्षमता को देखते हुए मसाला फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। हल्दी की प्रोसेसिंग और बाजार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जैविक खेती करने वाले किसानों से संवाद किया और शहडोल क्षेत्र के राजाबाग अमरूद, मूंगा, कोदो, कुटकी की प्रसिद्धि का जिक्र करते हुए किसानों को उद्यानिकी फसलों का उत्पादन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की दुर्लभ वनस्पतियों के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की मदद के लिए हर कदम पर खड़ी है। अब तक सरकार किसानों को बिना ब्याज का ऋण साल में दो बार भरने की सुविधा दे रही थी। अब सरकार ने इसे साल में एक ही बार करने का निर्णय लिया है। अब किसान अपनी सुविधा अनुसार साल में कभी भी ऋण की राशि जमा कर सकेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहडोल क्षेत्र में होम-स्टे भी बनाए जायेंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश के जनजातीय बहुल ग्रामों में होम-स्टे विकसित किये जायेंगे। होम-स्टे के लिये राज्य सरकार ने अनुदान की व्यवस्था भी की है, जिससे युवाओं को रोजगार एवं आय के नये अवसर मिलेंगे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार पर्यटन विभाग के माध्यम से होम-स्टे का संचालन भी करवाएगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को अतिरिक्त आमदनी होगी। मुख्यमंत्री ने किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि को अधिक से अधिक अपनाने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, आधुनिक खेती के तौर-तरीकों और विभिन्न कृषि योजनाओं से संबंधित साहित्य का वितरण भी किया गया। महोत्सव के माध्यम से किसानों को कृषि के साथ पशुपालन, उद्यानिकी एवं अन्य गतिविधियों को अपनाकर आय के विविध स्रोत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

    कार्यक्रम में एपेक्स बैंक के अध्यक्ष  महेन्द्र सिंह यादव, विधायक जय सिंह नगर विधानसभा क्षेत्र मती मनीषा सिंह, विधायक ब्यौहारी  शरद कोल, विधायक जैतपुर  जयसिंह मरावी, सीईओ जिला पंचायत  शिवम् प्रजापति, जयपाल सिंह चावड़ा, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  पंचूलाल प्रजापति, कप्तान सिंह,  ब्रजेश प्रताप सिंह,  सुरेश चतुर्वेदी, जिला योजना समिति की सदस्य मती अमिता चपरा,  संतोष लोहानी,  रविकांत त्रिपाठी,  भूपेंद्र मिश्रा, संयुक्त संचालक कृषि  के.एस. यादव, कृषि वैज्ञानिक  मृगेन्द सिंह, डॉ. बी.के. प्रजापति,  भानू प्रताप सिंह, सहित जिले के किसान, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी विभाग के अधिकारी सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

     

  • CEC पर कार्रवाई के लिए चाहिए विशेष बहुमत, जानिए नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक की प्रक्रिया

    CEC पर कार्रवाई के लिए चाहिए विशेष बहुमत, जानिए नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक की प्रक्रिया

     नई दिल्ली
     भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।

    सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में सरकार के सीधे दखल को रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। आजाद भारत के इतिहास में कभी भी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया गया है। हालांकि, इसकी कोशिशें तो हुईं लेकिन ऐसा हो न सका। आइए पीछे के पन्नों को पलटकर देखते हैं…

    1992… टीएन शेषन के खिलाफ मांग
    1992 में वामपंथी दलों ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह कोशिश किसी औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि इसे पेश करने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन नहीं मिल पाया।

    2006… चुनाव आयुक्त नवीन चावला के खिलाफ एनडीए की याचिका
    मार्च 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने राष्ट्रपति को याचिका देकर चुनाव आयुर्त नवीन चावला को हटाने की मांग की।

    2009… नवीन चावला के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश
    2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार और राजनीतिक झुकाव के आरोपों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की। बाद में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार ने इस सिफारिश को खारिज कर दिया।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
    सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से उन संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

    अनुच्छेद 324(5)
    संविधान का अनुच्छेद 324(5) यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।

    अनुच्छेद 124(4)
    अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति का आदेश न हो। यह आदेश संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही जारी किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है।

    साथ ही, यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति को सौंपा जाना चाहिए और यह साबित होना चाहिए कि जज ने दुर्व्यवहार किया है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है।

    सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और उसे पूरा करने के काम में पांच अलग-अलग चरण शामिल हैं।

    पहला चरण… नोटिस जमा करना
    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा के चेयरमैन या लोकसभा के स्पीकर को एक औपचारिक नोटिस दिया जाता है। इस नोटिस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्य का समर्थन जरूरी है।

    दूसरा चरण… जांच समिति का गठन
    अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो पीठासीन अधिकारी हटाने के खास आधारों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक खास समिति बनाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और पीठासीन अधिकारी की राय में कानून के एक जाने-माने जानकार शामिल होने चाहिए।

    तीसरा चरण… जांच और रिपोर्टिंग
    गठित समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी औपचारिक जांच रिपोर्ट चेयरमैन या स्पीकर को सौंपती है।

    चौथा चरण… संसदीय वोटिंग
    अगर जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को साबित हो चुके दुर्व्यवहार या अक्षमता का दोषी पाती है तो मामले को वोटिंग के लिए संसद में लाया जाता है। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है-

    सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और दोनों सदनों में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का बहुमत।

    पांचवां चरण… राष्ट्रपति का आदेश
    अगर हटाने का बिल या प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।
    संसद में मौजूदा संख्या-बल

    मौजूदा संसदीय समीकरणों के तहत संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना किसी भी एक विपक्षी गुट के लिए एक ऐसी गणितीय बाधा है जिसे पार करना नामुमकिन है।

    क्यों है असंभव?
    लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने के लिए विपक्ष की मौजूदा कुल संख्या से कहीं ज्यादा सीटों की जरूरत है। अगर हम बीजेपी की 240 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 300 सदस्य ही बचते हैं। इसलिए 360 तक पहुंचना मुमकिन नहीं है।

    इसी तरह राज्यसभा में 162 के आंकड़े तक पहुंचना गणितीय रूप से सीमित है। अगर हम बीजेपी की 116 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 127 गैर-बीजेपी सदस्य बचते हैं। डीएमके (22 लोकसभा, 8 राज्यसभा) को विपक्षी गठबंधन इंडी के बजाय अन्य की श्रेणी में रखा गया है।

    ऐसे में सवाल उठता है कि संख्याबल में कमी के बावजूद विपक्ष हटाने का प्रस्ताव क्यों ला रहा है?

  • बालाघाट में अवैध खनन पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, हिंसक झड़प में 15 घायल

    बालाघाट में अवैध खनन पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, हिंसक झड़प में 15 घायल

    बालाघाट.

    भरवेली थाना क्षेत्र के ग्राम रट्टा में रविवार को दो गुटों में खूनी संघर्ष हो गया। गांव से होकर बहने वाले नाले से रेत और गिट्टी के अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों ने गांव के दमाहे परिवार के खिलाफ धावा बोल दिया।

    इसमें 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। ग्रामीणों के आक्रोश और खूनी संघर्ष की सूचना मिलते ही पूरा गांव छावनी में बदल गया। मौके पर एएसपी निहित उपाध्याय, सीएसपी मयंक तिवारी, भरवेली टीआई भूपेंद्र पंद्रो, कोतवाली टीआई अजय गुर्जर सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। देर तक माहौल तनावपूर्ण रहा। मौके पर 300 से अधिक पुलिसबल रहा। इसमें एसएएफ की फोर्स भी तैनात की गई। दरअसल, मामला गांव के दमाहे परिवार द्वारा लंबे समय से रेत और गिट्टी के अवैध खनन करने से जुड़ा है। इसके खिलाफ ग्रामीण वर्षों से विरोध दर्ज करा रहे हैं।

  • अनाहत सिंह ने जीता सिल्वर, मलेशिया की शिवसंगरी से फाइनल में 0-3 से मिली हार

    अनाहत सिंह ने जीता सिल्वर, मलेशिया की शिवसंगरी से फाइनल में 0-3 से मिली हार

    नागोया
     भारत की 18 वर्षीय स्कॉश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने रविवार को विमेंस सिंगल्स में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसी के साथ जूनियर वर्ल्ड चैंपियन अनाहत, भारत की पहली विमेंस सिंगल्स सिल्वर मेडलिस्ट बनीं। हालांकि, उन्हें फाइनल में मलेशिया की मौजूदा चैंपियन शिवसंगरी सुब्रमण्यम के हाथों 4-11, 4-11, 7-11 से हार का सामना करना पड़ा।

    इस हार के साथ अनाहत ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने का पहला मौका भी चूक गईं, क्योंकि सिंगल्स इवेंट के विजेता को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए कोटा मिलना तय था, जहां स्कॉश पहली बार शामिल हो रहा है।

    मलेशिया की खिलाड़ी से हारीं अनाहत
    नागोया किंजो फुतो एरिना में प्रतिभाशाली भारतीय खिलाड़ी का मुकाबला मलेशिया की कहीं ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी से था। अनाहत को अपनी प्रतिद्वंद्वी के शानदार खेल का मुकाबला करने में मुश्किल हुई और उन्होंने पहला गेम 4-11 से गंवा दिया। इसके बाद मलेशियाई खिलाड़ी ने अपने मजबूत अटैक और डिफेंस से अगले दो गेम पर भी अपना दबदबा बनाए रखा। अनाहत को कोई खास मौका नहीं मिला और वह दूसरा गेम भी 4-11 के अंतर से हार गईं, जबकि मौजूदा चैंपियन ने शानदार खेल दिखाते हुए तीसरा गेम 11-7 से जीता।

    सेमीफाइनल में किया था कमाल
    अनाहत ने सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर 6 सतोमी वातानाबे को दो गेम से पिछड़ने के बाद हराया था, जिसके साथ वह एशियन गेम्स के विमेंस सिंगल्स स्कॉश फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं। इससे पहले, भारत के अभय सिंह को भी सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। मलेशिया के मौजूदा चैंपियन ईन यो एनजी ने शानदार खेल दिखाते हुए मेंस सिंगल्स स्कॉश फाइनल में भारतीय खिलाड़ी को 11-9, 11-5, 11-5 से मात दी।

    अभय ने जीता सिल्वर मेडल
    रविवार को यह स्कॉश में भारत का दूसरा पदक रहा। अभय, सौरव घोषाल के बाद इस इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। हालांकि, फाइनल में हारने की वजह से अभय एलए 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने से चूक गए।

  • इंदौर में सिटी बस ने मचाया कहर, 4 लोगों को कुचला; 1 की मौत, 3 गंभीर

    इंदौर में सिटी बस ने मचाया कहर, 4 लोगों को कुचला; 1 की मौत, 3 गंभीर

    इंदौर.

    मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के प्रसिद्ध राजबाड़ा क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। रविवार को एक बेकाबू सिटी बस ने राह चलते चार लोगों को जोरदार टक्कर मार दी।

    इस भीषण दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस फिलहाल सभी पीड़ितों की शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    घायलों का उपचार जारी
    एमजी रोड थाना प्रभारी विजय सिसौदिया से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा सिटी बस चालक की गफलत और लापरवाही के कारण घटित हुआ। अनियंत्रित बस अचानक सड़क से गुजर रहे पैदल यात्रियों पर चढ़ गई, जिससे चारों लोग उसकी चपेट में आ गए।

  • तमिलनाडु में RTI को लेकर सियासी घमासान, दबाव के बीच विजय सरकार ने वापस लिया आदेश

    तमिलनाडु में RTI को लेकर सियासी घमासान, दबाव के बीच विजय सरकार ने वापस लिया आदेश

    चेन्नई
    तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) सरकार को कड़े विरोध के बाद आखिरकार अपना एक बड़ा फैसला वापस लेना पड़ा है।

    सरकार ने उस आदेश को रद कर दिया है, जिसके तहत 'पब्लिक डिपार्टमेंट' यानी सार्वजनिक कानून-व्यवस्था विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर करने की कोशिश की गई थी। इस फैसले पर चौतरफा आलोचनाओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

    क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विरोध?
    इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की तरफ से 21 सितंबर 2026 को जारी किए गए सरकारी आदेश के तहत आरटीआई अधिनियम की धारा 24 की उप-धारा (4) का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था विभाग को एक 'खुफिया और सुरक्षा संगठन' मानकर आरटीआई के दायरे से छूट देने का प्रयास किया गया था।

    बता दें कि सार्वजनिक कानून-व्यवस्था के दायरे में कई संवेदनशील विषय आते हैं, जैसे कि पुलिस फायरिंग और हिरासत में हुई मौतों व पुलिस टॉर्चर की जांच रिपोर्ट। सांप्रदायिक और जातिगत संघर्षों से जुड़ी रिपोर्टें और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को वापस लेने के अनुरोध और मानहानि के मामलों से जुड़ी अभियोजन मंजूरी।

    विपक्ष का क्या था तर्क?
    बात अब इस फैसले के विरोध की करें तो आलोचकों और विपक्षी नेताओं का कहना था कि अगर इस विभाग को आरटीआई से बाहर कर दिया जाता, तो जनता से ये तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां छिप जातीं, जिससे पारदर्शी शासन पर सवाल खड़े होते।

    फैसले के विरोध में खुलकर सामने आए विपक्ष
    दूसरी ओर सरकार के इस फैसले के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न दलों के नेता खुलकर विरोध में उतर आए थे। सीपीएम (CPM) सांसद वेंकटेशन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि यह कदम तमिलनाडु को एक पुलिस राज में बदलने की खुली कोशिश है और सरकार को तुरंत यह आदेश वापस लेना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि आरटीआई कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला था, जिसका उद्देश्य देश में 'लोकतांत्रिक जवाबदेही' को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि इस तरह महत्वपूर्ण सूचनाओं को जनता से छिपाना सही मिसाल नहीं है।

    विरोध के बाद राज्य सरकार का यू-टर्न
    गौरतलब है कि शुरुआत में बचाव की मुद्रा अपनाते हुए टीवीके मंत्रियों ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने सफाई दी थी कि इस कदम का उद्देश्य केवल सामुदायिक संघर्षों से जुड़े विवरणों को सुरक्षित रखना था, क्योंकि लोग इसे लेकर लगातार आरटीआई मांग रहे थे। वहीं मंत्री राजमोहन ने कहा था कि सरकार पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है।

    हालांकि, बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनता की नाराजगी को भांपते हुए मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर आम जनता में असंतोष है, तो इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करके पुनर्विचार किया जाएगा। आखिरकार, विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने शासनादेश को रद्द करते हुए अपना यह विवादास्पद फैसला वापस ले लिया है।

  • CG में मेडिकल-डेंटल PG छात्रों की छात्रवृत्ति में इजाफा, आदेश जारी

    CG में मेडिकल-डेंटल PG छात्रों की छात्रवृत्ति में इजाफा, आदेश जारी

    रायपुर.

    मेडिकल और डेंटल के पीजी छात्रों की सालों पुरानी मांग को पूरी करते हुए आखिरकार छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी छात्रवृत्ति में वृद्धि कर ही दी है. शासन ने केवल छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी ही नहीं की है, बल्कि अब तक मेडिकल पीजी छात्रों की तुलना में कम छात्रवृत्ति पाने के दर्द को दूर करते हुए उन्हें समकक्ष ला दिया है. शासन द्वारा तय नई दर एक अक्टूबर 2026 से प्रभावशील होगी.

    छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चिकित्सा शिक्षा से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर शासकीय चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में अध्ययनरत् चिकित्सकों की शिष्या वृत्ति में वृद्धि की है. इस संबंध में विभाग की ओर से 26 सितंबर को आयुक्त, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा को पत्र जारी किया है. इसमें पीजी मेडिकल छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को दी जा रही 67,500 रुपए के स्थान पर 85,050 रुपए, द्वितीय वर्ष के छात्रों को 71,450 रुपए के स्थान पर 90,027 रुपए और तृतीय वर्ष के छात्र को 74,600 रुपए के स्थान पर 93,996 रुपए देने का प्रावधान किया गया है. इसी तरह पीजी डेंटल छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को 53,500 रुपए की जगह 85,050 रुपए, पीजी डेंटल द्वितीय वर्ष के छात्र को 56,700 रुपए की बजाए 90,027 रुपए और पीजी डेंटल तृतीय वर्ष के छात्र को 59,200 रुपए के स्थान पर 93,996 रुपए देने का प्रावधान किया गया है.

    लड़ाई खत्म नहीं हुई, जारी है – जेडीयू अध्यक्ष —
    जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यशवंत सिंह और जेडीए रायपुर अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने छात्रवृद्धि में बढ़ोतरी का स्वागत किया है. इसके साथ उन्होंने दोहराया कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, उनकी 17 सूत्रीय मांग अधूरी है, जिसकी वजह से उनका आंदोलन जारी है.

    पुराने और नए स्टाइपेंड के आधार पर वृद्धि प्रतिशत में —-
    पाठ्यक्रम    पुराना    नया    मासिक वृद्धि    वृद्धि %

    PG मेडिकल प्रथम वर्ष    ₹67,500    ₹85,050    ₹17,550    26.00%
    PG मेडिकल द्वितीय वर्ष    ₹71,450    ₹90,027    ₹18,577    26.00%
    PG मेडिकल तृतीय वर्ष    ₹74,600    ₹93,996    ₹19,396    26.00%
    PG डेंटल प्रथम वर्ष    ₹53,500    ₹85,050    ₹31,550    58.97%
    PG डेंटल द्वितीय वर्ष    ₹56,700    ₹90,027    ₹33,327    58.78%
    PG डेंटल तृतीय वर्ष    ₹59,200    ₹93,996    ₹34,796    58.78%