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  • सिंहस्थ की राह आसान करने आगे आए CM यादव, पैतृक मकान पर खुद चलाई गेती

    सिंहस्थ की राह आसान करने आगे आए CM यादव, पैतृक मकान पर खुद चलाई गेती

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खुद अपने पैतृक मकान पर गेती चलाकर सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए प्रस्तुत किया अद्वितीय उदाहरण

    उज्जैन में खजूर वाली मस्जिद से लेकर जीवाजीगंज थाने तक 32 फ़ीट चौड़ी होगी रोड
    उज्जैनवासियों ने अपना मकान खुद पीछे हटाकर दी अनुकरणीय मिसाल

    उज्जैन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन शहर के अब्दालपुरा क्षेत्र के के मूल निवासी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को अब्दालपुरा स्थित अपने पैतृक मकान में खुद गेती चलाकर सिंहस्थ 2028 के लिए शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य में एक अनूठी मिसाल कायम की है। अब्दालपुरा का मकान नं. 180 एक तरह से उज्जैन के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए हो रहे कार्यों की एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार सुबह 10 बजे अब्दालपुरा पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना कर सड़क चौड़ीकरण कार्य की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने खुद के पैतृक मकान पर गेती चलाई और सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए यह निजी मकान तोड़ने की शुरुआत की।

    हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक बना अब्दालपुरा

    अब्दालपुरा उज्जैन शहर की बहुत पुरानी बस्ती है। यहां पर एक तरफ खजूर वाली मस्जिद है और दूसरे छोर पर जीवाजीगंज थाना है। इसके बीच के 272 मकानों में अधिकांश मकान हिंदू, मुसलमान और बोहरा समुदाय के हैं। यहां सड़क चौड़ीकरण में प्रत्येक समुदाय के लोग खुशी-खुशी इस अभियान से जुड़कर खुद ही अपना मकान तोड़ने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। उज्जैन शहर में हो रहे अनेक आवागमन मार्गों के चौड़ीकरण में यह मार्ग शहरवासियों को विकास में सहभागी बनने की प्रेरणा दे रहा है। यहां के कादर भाई कहते हैं कि सड़क चौड़ीकरण से उनकी सालों पुरानी इच्छा पूरी होने जा रही है। इस सड़क से वाहन निकलना मुश्किल था। अब आवागमन आसान होगा। वे कहते हैं कि इस इलाके में सभी मकानों की चौड़ाई चाहे कम-ज्यादा हो, लेकिन दिलों की गहराई काफी है। इस मार्ग के दोनों तरफ रहने वाले रहवासी सड़क चौड़ीकरण के लिए सहर्ष जगह देने को तैयार हैं। किसी को कोई आपत्ति नहीं है। हर व्यक्ति इस काम में अपनी सहभागिता कर रहा है। मुख्यमंत्री के निजी मकान के पड़ोसी पवन पांचाल कहते हैं कि यह चौड़ीकरण इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। सड़क चौड़ी होने के बाद यहां बनने वाले मकानों और दुकानों की वैल्यू बढ़ जाएगी और व्यापार-व्यवसाय भी बढ़ेगा, रोज़ का आवागमन तो सुगम होगा ही

    सड़क के दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ.यादव की बहन एवं नगर निगम उज्जैन की सभापति श्रीमती कलवाती यादव का मकान है। यह मकान भी सड़क चौड़ीकरण की ज़द में आ रहा है। इसी लाइन में दूध की दुकान चला रहे नरेन्द्र जैन कहते हैं कि सड़क चौड़ीकरण में मुख्यमंत्री और उनके परिवार का मकान भी टूटने से शहर में यह सन्देश जा रहा है कि यहां कोई खास नहीं है। आम हों या ख़ास, महाकाल की नगरी में सब बराबर हैं। सिंहस्थ के कामों में सभी सहभागी बन रहे हैं। सभी के मकान एक लाइन से और समान लंबाई में टूट रहे हैं। इसी गली में रहने वाले पूर्व पार्षद जगदीश पांचाल कहते हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव विकसित उज्जैन का सपना साकार कर रहे हैं। इससे न केवल उज्जैन की तस्वीर बदलेगी, बल्कि सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों लोगों के आवागमन और उनके अच्छे प्रवास की सुविधाएं विकसित होंगी।

    जनहित को समर्पित व्यक्तित्व

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 के लिए जारी विकास एवं निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उज्जैन स्थित अपना पैतृक निवास एवं जन्म स्थान को जनहित के लिए समर्पित कर दिया। धर्मनगरी उज्जैन के विकास और लोक कल्याण के प्रति उनका यह समर्पण सेवा, संवेदनशीलता और जनहित के लिए व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के लोगों ने विकास कार्यों में सहभागी बनकर ख़ुद अपना मकान तोड़ने में सहयोग दिया, ये एक आदर्श उदाहरण है। उज्जैन की आबादी 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ में यहां 40 करोड़ से अधिक लोगों के आने की संभावना है। सिंहस्थ के लिए सबने बहुत योगदान दिया है। उन सभी का धन्यवाद, जिन्होंने बिना भेदभाव के, नि: संकोच सिंहस्थ आयोजन के लिए अपने देवस्थान (पूजा स्थल) तक पीछे कर लिए। यही उज्जैन के लोगों का आदर्श है, इसी से सरकार पर भरोसा बनता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ की तैयारी और नगर सौंदर्यीकरण के लिए उज्जैन के रहवासी स्वेच्छा से अपने पुश्तैनी घरों को तोड़कर सड़क चौड़ीकरण में प्रशासन की सहायता कर रहे हैं। उनका यह योगदान अभिनंदनीय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में रविवार की सुबह एक निजी न्यूज़ चैनल द्वारा राज्य स्तरीय मैराथन का आयोजन किया गया। सुबह की सैर और व्यायाम स्वस्थ शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में मैराथन दौड़ प्रेरणादायी कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मैराथन में सम्मिलित होने वाले सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में आयोजित मैराथन में सहभागिता की तथा झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। प्रतिभागियों के साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया तथा नागरिकजनों को नियमित योग एवं व्यायाम को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा शरीर परमात्मा का अनमोल प्रसाद है, जिसमें जीवन के अनेक रहस्य समाहित हैं। योग और आत्मचिंतन के माध्यम से हम अपने शरीर और जीवन को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रत्येक श्वास हमें जीवन और परमात्मा की उपस्थिति का अहसास कराती है। जन्म और मृत्यु जीवन का शाश्वत सत्य हैं, इसलिए हमें स्वस्थ, सक्रिय और सकारात्मक जीवन जीने का संकल्प लेना चाहिए। मैराथन में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी परमात्मा की कृपा से शिव और विष्णु तत्व के आधार पर सृष्टि के पिंड रूप में आए हैं। पेड़ों से हमें ऑक्सीजन मिलता है और हमसे कार्बन डाई ऑक्साइड लेता है, ये प्रकृति के साथ हमारे संबंध का हिस्सा है। हमें पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक रहना होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पितृपक्ष आरम्भ हो गये हैं, हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि अपने पितरों का आवाह्न कर उन सबके प्रति आत्मीय कृतज्ञता व्यक्त करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीतकर आया, तब जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव लड़ा, फिर प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा और उसके बाद भी जब-जब चुनाव लड़ा, हर चुनाव में मेरे सामने एक बात रही। आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए हमें अपने आचरण और कार्यों से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस दृष्टि से हम सबके समक्ष एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। वे व्यक्तिगत हितों से नितान्त परे रहकर नियम, कानून और सुशासन के लिए आवश्यक सभी विषयों को विशेष प्राथमिकता देते हैं। उनके सार्वजनिक जीवन से हम सबको बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

     

  • बाजार खुलते ही बिकवाली का तूफान, Sensex-Nifty धड़ाम; अरबों रुपये स्वाहा

    बाजार खुलते ही बिकवाली का तूफान, Sensex-Nifty धड़ाम; अरबों रुपये स्वाहा

    मुंबई 

     घरेलू शेयर बाजार के लिए हफ्ते का पहला दिन बेहद खराब साबित हुआ. सोमवार 28 सितंबर को बाजार खुलते ही निवेशकों को तगड़ा झटका लगा. सेंसेक्स शुरुआती मिनटों में ही 850 अंक से ज्यादा नीचे लुढ़क गया. इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग मानी जा रही है. दरअसल अमेरिका ईरान के बीच चल रही तनातनी से कच्चे तेल का भाव 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। 

    कच्चे तेल में लगी आग का असर
    ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. ब्रेंट फ्यूचर्स 2.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 106.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इस महीने में अब तक इसकी कीमतों में लगभग 18 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है. वहीं अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स भी 1.5 प्रतिशत बढ़कर 93.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. कच्चे तेल के इस उबाल ने सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया. सोमवार सुबह गिफ्ट निफ्टी 23,111 अंकों पर था, जिससे साफ हो गया था कि बाजार की शुरुआत बहुत सुस्त रहने वाली है. जैसे ही 9:15 बजे ट्रेडिंग शुरू हुई, हालात तेजी से बिगड़े. महज दो मिनट के भीतर 9:17 बजे सेंसेक्स 512 अंक टूटकर 73,383.70 पर आ गया. गिरावट का ये सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि 9:40 बजे तक सेंसेक्स 870 अंक का गोता लगा चुका था। 

    अमेरिका ईरान के बीच बढ़ा तनाव
    बाजार में मची इस तबाही के पीछे वैश्विक टेंशन मुख्य कारण है. अमेरिका ईरान के बीच शांति वार्ता फिलहाल पूरी तरह से अधर में लटक गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के ईरानी प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. ट्रंप का कहना है कि ईरान सिर्फ समझौता करने के लिए बेताब है. वहीं ईरान का स्पष्ट रुख है कि इस विवाद को केवल कूटनीति से सुलझाया जा सकता है. मध्य पूर्व में हालात तब से ज्यादा खराब हैं जब फरवरी के अंत में अमेरिका इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे. इस युद्ध ने तेल बाजार को पूरी तरह से अनिश्चितता में धकेल दिया है। 

    बाजार खुलते ही Sensex-Nifty में तेज गिरावट
    सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। BSE Sensex शुक्रवार के 73,895.74 के स्तर से 73,734 के आसपास खुला और शुरुआती कारोबार में गिरावट बढ़ गई। कुछ ही देर में सेंसेक्स 73,000 के स्तर से नीचे चला गया और करीब 850 अंक तक फिसलता दिखाई दिया।

    NSE Nifty 50 भी दबाव में रहा। शुक्रवार को 23,140.50 पर बंद हुआ निफ्टी सोमवार को 23,000 के नीचे चला गया। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स करीब 22,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया।

    बैंकिंग और IT शेयरों पर भी दबाव
    बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख सेक्टरों में दिखाई दिया। बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव ने प्रमुख इंडेक्स की गिरावट को और बढ़ाया। इससे पहले भी बाजार में लगातार कमजोरी के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल को प्रमुख चिंता के तौर पर देखा जा रहा था।

    आपके मूल ड्राफ्ट में दिए गए ₹6 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट-कैप घटने के आंकड़े को प्रकाशित करने से पहले उसी समय के BSE market-cap डेटा से दोबारा मिलाना बेहतर रहेगा, क्योंकि शुरुआती कारोबार में यह आंकड़ा लगातार बदलता है।

    क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?
    बाजार की ताजा गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल शामिल है। सोमवार को रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस पहल को खारिज कर दिया, जिसमें संघर्ष खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव शामिल था। इसके बाद तेल बाजार में फिर दबाव बढ़ा।

    Brent crude शुरुआती कारोबार में करीब $106 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी चिंता
    भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। 25 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹3,693.93 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹2,838 करोड़ की खरीदारी की थी। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली भी काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।

    इससे पहले 25 सितंबर को खत्म सप्ताह में Sensex 0.54% और Nifty 0.88% नीचे रहा था। दोनों बेंचमार्क लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए थे।

    विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
    बाजार को कमजोर करने में विदेशी निवेशकों (FII) का भी बड़ा हाथ है. विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 36.94 अरब रुपये (385.54 मिलियन डॉलर) के शेयर बेचे. इस महीने अब तक उन्होंने 1.8 अरब डॉलर की निकासी कर ली है. अगर इस पूरे साल की बात करें तो ये आंकड़ा 25.86 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. इसी भारी बिकवाली की वजह से निफ्टी 50 व बीएसई सेंसेक्स लगातार सात सत्रों तक गिरे थे, जो रिकॉर्ड पर उनकी सबसे लंबी गिरावट में से एक है। 

    शुक्रवार की तेजी पर फिरा पानी
    सोमवार की इस भारी गिरावट ने शुक्रवार की रिकवरी को पूरी तरह से धो दिया. पिछले हफ्ते शुक्रवार को बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली थी. तब बैंकिंग, ऑटो, गैस शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स 315.20 अंक चढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ था. उस दिन निफ्टी ने भी 77.40 अंकों की छलांग लगाई थी. शुक्रवार को एक्सिस बैंक, महिंद्रा, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी. इनमें एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा 2.82 प्रतिशत चढ़ा था. लेकिन सोमवार को खुलते ही इस सारी बढ़त पर पानी फिर गया. निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है, जिससे बाजार में आगे भी काफी उतार-चढ़ाव रहने की आशंका बनी हुई है। 

  • राम मंदिर निर्माण के लिए समाज को एकजुट करने में सिंघल की बड़ी भूमिका: CM साय

    राम मंदिर निर्माण के लिए समाज को एकजुट करने में सिंघल की बड़ी भूमिका: CM साय

    अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए समाज को एकजुट करने में अशोक सिंघल जी का योगदान अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित निरंजन धर्मशाला में अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का संपूर्ण जीवन समाज को संगठित करने, सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहा। वे कुशल संगठनकर्ता थे और समाज की सामूहिक शक्ति पर उनका अटूट विश्वास था। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने तथा भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति चेतना जागृत करने का कार्य किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की आकांक्षा को व्यापक जनभावना से जोड़ने और इसके लिए समाज को एकजुट करने में श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे अनेक पीढ़ियों का संघर्ष, तप, त्याग और समर्पण जुड़ा हुआ है। श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का योगदान भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल्यों के प्रति समाज में जागरूकता और स्वाभिमान का भाव सुदृढ़ करने के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया।

    प्रभु श्रीराम और छत्तीसगढ़ का संबंध अत्यंत आत्मीय : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का संबंध केवल आस्था का नहीं, बल्कि अत्यंत गहरा और आत्मीय है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। वनवास काल में प्रभु श्रीराम ने लंबा समय छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर व्यतीत किया। माता शबरी की अनन्य भक्ति से जुड़ी शिवरीनारायण की धरती सहित प्रदेश के अनेक स्थान आज भी रामायणकालीन स्मृतियों और जनआस्था को संजोए हुए हैं।

    उन्होंने कहा कि इसी आत्मीय संबंध के कारण अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा का अवसर छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष भावनात्मक महत्व रखता था। उस समय पूरे प्रदेश में उत्सव और उल्लास का वातावरण था। छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक सुगंधित चावल अयोध्या भेजकर प्रदेशवासियों ने अपनी श्रद्धा अर्पित की थी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेशवासियों की इसी आस्था को ध्यान में रखते हुए रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम जाकर प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से रामलला के दर्शन कर चुके हैं और यह क्रम निरंतर जारी है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का जन्म शताब्दी वर्ष उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उनके जीवन से परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर है। उनके जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि दृढ़ संकल्प, संगठन और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से व्यापक परिवर्तन की दिशा में कार्य किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के तीन दिवसीय समारोह का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की धरती से होना प्रदेशवासियों के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित संतों को नमन करते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन सदैव समाज को सही दिशा प्रदान करता है।

    इस अवसर पर संत परमात्मानंद जी महाराज, संत युधिष्ठिर लाल जी, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा,  अम्बरीश , टोपलाल वर्मा, राजाराम, कुलवंत सिंह सैनी सहित संतगण,  देश-विदेश से आए पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • तिरुवनंतपुरम ODI में कोहली का जलवा, शतक के साथ बने 10 बड़े रिकॉर्ड

    तिरुवनंतपुरम ODI में कोहली का जलवा, शतक के साथ बने 10 बड़े रिकॉर्ड

     तिरुवनतंपुरम

    भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट से जीत दर्ज की और तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। वेस्टइंडीज ने 295 रन बनाए थे, लेकिन विराट कोहली और शुभमन गिल के शतकों ने भारत के लिए लक्ष्य आसान कर दिया। कोहली ने नाबाद 139 और गिल ने 113 रन की पारी खेली।

    8 विकेट से जीता भारत
    भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में शानदार जीत दर्ज की। तिरुवनंतपुरम में खेले गए मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज को आठ विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। विराट कोहली 139 और गायकवाड़ 13 रन बनाकर नाबाद रहे। विराट कोहली ने 42वें ओवर की तीसरी और चौथी गेंद पर लगातार दो छक्के जड़कर भारत को जीत दिला दी। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 50 गेंद बाकी रहते 296 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया।

    वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में सात विकेट पर 295 रन बनाए। जस्टिन ग्रीव्स ने 101 और जॉन कैंपबेल ने 62 रन बनाए। भारत के लिए कुलदीप यादव ने चार विकेट लिए। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 42 ओवर में दो विकेट पर 296 रन बनाकर मैच जीत लिया। कप्तान शुभमन गिल ने 113 रन की शानदार पारी खेली। वहीं विराट कोहली ने नाबाद 139 रन बनाए। कोहली ने अपनी पारी में 10 चौके और नौ छक्के लगाए। रोहित शर्मा ने भी 32 रन बनाए।

    विराट कोहली ने तिरुवनंतपुरम ओडीआई में तूफानी शतकीय पारी खेल रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी. आइए उन रिकॉर्ड्स और कीर्तिमानों पर एक नजर डालें…

    1. विराट कोहली वनडे इंटरनेशनल में सबसे तेज 15 हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज चुके हैं. कोहली ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को पछाड़ दिया. कोहली ने 303 पारियों और 15950 गेंदों में ये उपलब्धि हासिल की. वहीं सचिन ने 15 हजार ओडीआई रन पूरा करने के लिए 377 पारियां और 17528 गेंदें ली थी। 

    15 हजार ODI रनों का सफर: सचिन vs कोहली
    उम्र: 34 साल 66 दिन vs 37 साल 326 दिन
    पारी: 377 vs 303
    गेंदें: 17528 vs 15950
    डेब्यू से कुल दिन: 6402 बनाम 6614

    2. विराट कोहली वनडे इंटरनेशनल में 15 हजार रनों का आंकड़ा छूने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज हैं. सचिन तेंदुलकर और कोहली के अलावा कोई भी बल्लेबाज वनडे इंटरनेशनल में 15 हजार रनों का आंकड़ा छू नहीं सका. सचिन ने 463 ओडीआई मैच खेलकर 18426 रन बनाए. वहीं कोहली के नाम पर 315 ओडीआई मैचों में 15080 रन दर्ज हैं। 

    3. श्रीलंका के बाद वेस्टइंडीज ऐसी दूसरी टीम है, जिसके खिलाफ विराट कोहली ने ओडीआई क्रिकेट में 10 शतक जड़े हैं. कोहली ने इसी मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ वनडे इंटरनेशनल में 10वां शतक लगाया था. कोहली किसी एक टीम के खिलाफ वनडे इंटरनेशनल में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं। 

    किसी टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा ODI शतक
    10 विराट कोहली बनाम श्रीलंका 
    10 विराट कोहली बनाम वेस्टइंडीज
    9 सचिन तेंदुलकर बनाम ऑस्ट्रेलिया
    9 रोहित शर्मा बनाम ऑस्ट्रेलिया 
    8 विराट कोहली बनाम ऑस्ट्रेलिया
    8 सचिन तेंदुलकर बनाम श्रीलंका

    4. विराट कोहली ने इस मैच में 74 गेंदों पर शतक लगाया, जो वनडे इंटरनेशनल में गेंदों के आधार पर उनका तीसरा सबसे तेज शतक रहा. कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 52 और 61 गेंदों पर ओडीआई शतक लगा चुके हैं। 

    विराट कोहली के सबसे तेज ODI शतक (गेंदों के आधार पर)
    52 बनाम ऑस्ट्रेलिया जयपुर 2013
    61 बनाम ऑस्ट्रेलिया, नागपुर 2013
    74 बनाम वेस्टइंडीज, तिरुवनंतपुरम 2026 
    76 बनाम श्रीलंका, होबार्ट 2012
    76 बनाम श्रीलंका, कोलंबो 2017
    80 बनाम श्रीलंका, गुवाहाटी 2023

    5. विराट कोहली अब लिस्ट-ए क्रिकेट में सर्वाधिक शतक लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर की बराबरी पर पहुंच गए हैं. सचिन ने भी लिस्ट-ए क्रिकेट में 60 शतक ठोके थे. सचिन और कोहली के बाद इंग्लैंड के ग्राहम गूच (44 शतक) का नंबर आता है। 

    लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक
    60 सचिन तेंदुलकर (538 पारी) / विराट कोहली (338 पारी)
    44 ग्राहम गूच (601
    40 ग्रीम हिक (630)
    39 कुमार संगकारा (501)

    6. भारत में इंटरनेशनल क्रिकेट में विराट कोहली का ये 42वां शतक (260 पारी में) रहा. कोहली अब घर पर इंटरनेशनल क्रिकेट में सर्वाधिक शतक जड़ने के मामले में सचिन तेंदुलकर की बराबरी पर पहुंच गए हैं. सचिन ने भी 313 इनिंग्स खेलकर 42 शतक लगाए थे। 

    7. विराट कोहली ने ओडीआई क्रिकेट में एक खास मामले में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग को पछाड़ दिया. पोंटिंग ऑस्ट्रेलिया की उन 111 जीतों का हिस्सा रहे, जिसमें टीम ने टारगेट का पीछा किया. वहीं कोहली अब भारत के लिए ओडीआई रनचेज में 112 जीतों के साथ तीसरे स्थान पर आ गए हैं। 

    रन चेज करते हुए सबसे ज्यादा जीत में शामिल (ODI)
    127 सचिन तेंदुलकर
    116 महेंद्र सिंह धोनी
    112 विराट कोहली
    111 रिकी पोंटिंग
    110 जैक्स कैलिस/ रोहित शर्मा

    8. विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ के गेंदों की जमकर धुनाई की. कोहली ने जोसेफ के खिलाफ इस मैच में कुल 53 रन बटोरे. किसी ओडीआई मैच में कोहली द्वारा एक गेंदबाज के विरुद्ध बनाए गए ये दूसरे सबसे ज्यादा रन रहे। 

    ODI मैच में एक बॉलर के खिलाफ कोहली के सर्वाधिक रन
    54 बनाम ट्रेंट बोल्ट, मोहाली 2016
    53 बनाम अल्जारी जोसेफ, तिरुवनंतपुरम 2026
    45 बनाम विश्व फर्नांडो, कोलंबो (RPS) 2017
    45 बनाम लाहिरू कुमारा, तिरुवनंतपुरम 2023
    45 बनाम प्रेनालेन सुब्रायेन, रांची 2025

    9. विराट कोहली ने पहली बार किसी ओडीआई मैच में 9 छक्के लगाए हैं. इससे पहले उन्होंने साल 2023 में इसी मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ ओडीआई मैच में 8 छक्के लगाए थे। 

    ODI पारी में कोहली के सबसे ज्यादा छक्के
    9 बनाम वेस्टइंडीज, तिरुवनंतपुरम 2026 
    8 बनाम श्रीलंका, तिरुवनंतपुरम 2023
    7 बनाम ऑस्ट्रेलिया, जयपुर 2013
    7 बनाम साउथ अफ्रीका, रांची 2025

    10. विराट कोहली घरेलू वनडे ओडीआई में 7000 रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं. कोहली के नाम अब घरेलू ओडीआई मैचों 7006 रन हो गए हैं. घर पर ओडीआई मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में कोहली के बाद सचिन तेंदुलकर का नंबर आता है. सचिन ने अपने 23 साल के करियर के दौरान भारत में 164 ओडीआई मैच खेलकर 6976 रन बनाए थे। 

     

    विराट कोहली ने जड़ा 55वां वनडे शतक
    भारतीय स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने 74 गेंदों में शतक जड़ा है। यह उनके वनडे करियर का 55वां और इंटरनेशनल क्रिकेट में 86वां शतक है। कोहली ने 38वें ओवर में छक्का लगाकर सैकड़ा पूरा किया।

    भारत को दूसरा झटका
    भारत को दूसरा झटका रोस्टन चेज ने दिया। उन्होंने शुभमन गिल को अपना शिकार बनाया। वह 108 गेंदों में 110 रन बनाकर आउट हो गए। अब विराट कोहली का साथ देने ऋतुराज गायकवाड़ आए हैं।

     गिल का शतक
    भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने 96 गेंदों पर शतक पूरा किया। गिल ने शानदार बल्लेबाजी की और कोहली के साथ साझेदारी जारी रखी। कोहली और गिल के बीच 100+ रनों की साझेदारी हो गई है। 

     कोहली के वनडे में 15000 रन पूरे
    भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने वनडे में 15000 रन पूरे कर लिए हैं। कोहली ऐसा करने वाले सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे भारतीय बल्लेबाज हैं। कोहली ने सबसे तेजी से वनडे में यह उपलब्धि हासिल की है। कोहली ने 303 पारियों में वनडे में 15000 रन पूरे किए हैं। सचिन ने 377 वनडे पारी में 15000 रन पूरे किए थे। यानी कोहली सचिन की तुलना में 74 पारी पहले इस उपलब्धि तक पहुंचे हैं।  

  • ड्रोन से महंगे हथियारों को खतरा, जनरल धीरज सेठ बोले- नई तकनीक के साथ पुराने हथियार भी कारगर

    ड्रोन से महंगे हथियारों को खतरा, जनरल धीरज सेठ बोले- नई तकनीक के साथ पुराने हथियार भी कारगर

     नई दिल्ली
     रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में हथियार और सैन्य उपकरण बनाना नहीं है। भारत के पास ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे वह लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में अपनी सैन्य ताकत को बनाए रख सके। रविवार को यह बात थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने कही। उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे बदलती जरूरतों के अनुसार सैन्य ताकत को ढाल सके और लगातार मजबूत कर सके।

    रुक-रुक कर होने वाले युद्ध
    उन्होंने आज के युद्धों को ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ बताया है। ‘बदलते युद्ध के दौर में आत्मनिर्भरता’ विषय पर बोलते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि युद्ध का स्वरूप, तकनीक और उसकी अवधि तेजी से बदल रही है। इसलिए सैन्य क्षमता के विकास और आत्मनिर्भरता की हमारी सोच को भी लगातार बदलना होगा।

    आर्मी चीफ ने 1971 के युद्ध का किया जिक्र
    साल 1971 में ढाका में हुए ऐतिहासिक आत्मसमर्पण का जिक्र करते हुए जनरल सेठ ने कहा, “पिछली सदी के युद्धों की एक स्पष्ट समाप्ति होती थी। 1971 की वह तस्वीर ऐसा ही एक क्षण थी, जब यह साफ था कि युद्ध समाप्त हो गया है। लेकिन आज के युद्धों में ऐसी स्पष्ट समाप्ति दिखाई नहीं देती। संघर्ष लंबे समय तक चलते हैं और बीच-बीच में भीषण लड़ाई होती रहती है। तकनीक लड़ाइयों की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह युद्धों की अवधि भी कम करे। ये ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ हैं।”

    चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं
    उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता को तैयार करने, विकसित करने, परखने और सेना में शामिल करने में कई वर्ष लगते हैं, जबकि तकनीक बहुत कम समय में बदल जाती है। इसलिए चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि सेना में शामिल होने तक वह तकनीक उपयोगी और आधुनिक बनी रहे।

    सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए क्षमताएं
    उन्होंने कहा, “हर परिस्थिति के लिए एक ही समाधान कारगर नहीं हो सकता। भारतीय सेना समुद्र तल से लेकर अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक और अत्यधिक गर्मी से लेकर शून्य से काफी नीचे के तापमान तक काम करती है। इसलिए हमारी सैन्य क्षमताएं भारत की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, अलग-अलग इलाकों और सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। कुछ सौ डॉलर की कीमत वाला ड्रोन लाखों डॉलर की कीमत वाले सैन्य प्लेटफार्म के लिए खतरा बन सकता है। कम कीमत वाली, स्मार्ट और बड़े पैमाने पर उपलब्ध तकनीक अब बेहद महंगे सैन्य हथियारों और उपकरणों के लिए भी खतरा बन सकती है।”

    कुछ देशों तक सीमित नहीं रही तकनीक
    इसके साथ ही सेनाध्यक्ष ने बताया कि तकनीक अब कुछ देशों या संस्थाओं तक सीमित नहीं रही है। जो तकनीक हमारे पास है, वही हमारे विरोधी के पास भी हो सकती है। इसलिए केवल नई तकनीक हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। असली बढ़त इस बात से मिलेगी कि हम विरोधी से कितनी तेजी से नए समाधान खोजते हैं, खुद को बदलते हैं और उसकी तकनीक का जवाब तैयार करते हैं। हालांकि उन्होंने पुरानी सैन्य प्रणालियों को जल्दबाजी में बेकार मान लेने के प्रति भी आगाह किया।

    पुराने हथियारों को बदलना नहीं
    उन्होंने कहा, “आज के युद्ध दिखा रहे हैं कि पुरानी प्रणालियां भी नई तकनीक के साथ बेहद प्रभावी हो सकती हैं। दशकों पहले विकसित की गई एयर डिफेंस तोपें आधुनिक सेंसर और अग्नि नियंत्रण प्रणाली के साथ ड्रोन और ड्रोन समूहों के खिलाफ प्रभावी हो सकती हैं। इसलिए भविष्य की सैन्य क्षमता का अर्थ हमेशा पुराने हथियारों को बदलना नहीं है। कई बार पुरानी और भरोसेमंद प्रणालियों को नई तकनीक से जोड़कर उन्हें और प्रभावी बनाया जा सकता है।”

    भारत की इन दोनों की जरूरत
    जनरल सेठ ने कहा कि हमें दूर से मार करने की क्षमता और जमीन पर सीधे युद्ध करने की क्षमता, दोनों की आवश्यकता है। लंबी दूरी के हथियार युद्धक्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन जमीन पर कब्जा करने, उसे अपने नियंत्रण में रखने और उसकी रक्षा करने का काम अंततः सैनिक को ही करना होगा। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना को लंबी मारक क्षमता और मजबूत जमीनी क्षमता, दोनों की जरूरत है।”

    इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए ये काम
    सूचना, साइबर और अंतरिक्ष सहित युद्ध के नए क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका के बावजूद थल सेनाध्यक्ष ने कहा, “जमीन पर नियंत्रण ही सफलता का एकमात्र प्रत्यक्ष संकेतक है। जमीन पर नियंत्रण सैनिक ही स्थापित करता है और वही उसकी रक्षा करता है। इसलिए सैन्य क्षमता से जुड़ा हर निर्णय इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए कि वह सैनिक को कितना अधिक सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के केंद्र में योद्धा होना चाहिए। हर सैन्य क्षमता अंततः योद्धा के लिए बनाई जानी चाहिए।”

    हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है आत्मनिर्भरता
    इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए थल सेनाध्यक्ष ने भविष्य की सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए समर्थ की अवधारणा सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंचे हैं। आज 175 में से 159 प्रकार के गोला-बारूद का स्वदेशीकरण हो चुका है। रक्षा उत्पादन में करीब 16,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है। क्षमता हमें लड़ने की सामर्थ्य देती है। योद्धा हमें लड़ने की इच्छाशक्ति देता है। ये सभी मिलकर हमें जीतने की क्षमता देते हैं।

  • बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन का असर, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

    बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन का असर, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली
    देश के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में मानसून के रौद्र रूप के बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को यूपी, दिल्ली, बिहार, पंजाब सहित 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलने की चेतावनी है। इस बीच पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड की भी चेतावनी जारी की गई है। अगर आप यात्रा का प्लान कर रहे हैं तो मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो मुश्किलों में फंस सकते हैं। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश में तेज आंधी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। वहीं, आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में खतरनाक बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस बीच मछुआरों और किसानों को समुद्री इलाकों से दूर हटकर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है। पश्चिम मध्य बंगाल में अगले 24 घंटे फिर से भारी पड़ने वाले हैं।

    वहीं, बंगाल की खाड़ी में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक एक डीप डिप्रेशन बना हुआ है जिससे पूर्वी भारत के लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इसके अलावा दक्षिण छत्तीसगढ़ और ओडिशा में डीप डिप्रेशन की वजह से मौसम बिगड़ने वाला है। उत्तर-पूर्वी असम और आसपास के इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में एक सुस्पष्ट दाब क्षेत्र में बदल गया। तो चलिए आज हम आपलोगों को बताते हैं कि आज यानी 28 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। इसके अलावा हम जिलावार भी मौसम का हाल बता रहे हैं

    देश के 20 राज्यों में प्रचंड बारिश-आंधी की चेतावनी
    मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को देश के 20 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार और केरल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया है। इस बारिश के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है।

    दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा
    दिल्ली(28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की चेतावनी है। वहीं, दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा
    यूपी(28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): बिजनौर, रामपुर, बरेली, मोरादाबाद, लखीमपुर खीरी, बागपत, श्रावस्ती, सहारनपुर, बहराइच, सिद्धार्थ नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, गाजीपुर, मथुरा, अलीगढ़, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और अंबेदकर नगर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलेंगे। । वहीं, इस दौरान लखनऊ में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा
    बिहार(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पश्चिमी चंपारण, पटना, भोजपुर, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और बांका में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है। वहीं, पटना में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
    झारखंड(28-29 सितंबर-तेज बारिश-तूफान की चेतावनी): गुमला, गढ़वा, सिमडेगा, रांची, पश्चिम सिंहभूम, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, साहेबगंज, रामगढ़, हजारीबाग, जमशेदपुर और पलामू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
    उत्तराखंड (28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): हरिद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल में प्रचंड बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, देहरादून में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा
    हिमाचल (28-29 सितंबर-बारिश-तूफान की चेतावनी): मंडी, सोलन, बिलासपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, सिरमौर, कुल्लू और मनाली में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, मनाली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा
    जम्मू-कश्मीर (28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): राजौरी, बारामूला, गांदरबल, डोडा, कठुआ और सांबा में मध्यम से भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी है। वहीं, श्रीनगर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    पश्चिम बंगाल में आज मौसम कैसा रहेगा
    पश्चिम बंगाल(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पुरबा मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, हावड़ा, नादिया, कोलकाता, अलीपुरद्वार, दुर्गापुर और बीरभूम में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, कोलकाता में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पर जाएगा।

    पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा
    पंजाब (28 सितंबर-भारी बारिश और आंधी की संभावना): पठानकोट, लुधियाना, चंडीगढ़, जालंधर, मोगा, मनसा,कपूरथला और पटियाला में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी।

    राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा
    राजस्थान (28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): सवाई माधोपुर, कोटा, पाली, बीकानेर, उदयपुर, जयपुर, अजमेर और भरतपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, जयपुर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    मध्य प्रदेश में आज मौसम कैसा रहेगा
    मध्य प्रदेश (28-29 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो अलर्ट): नरसिंहपुर, देवास, होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, खांडवा, गुना, मुरैना, शेयोपुर, उज्जैन, विदिशा, अशोक नगर, नीमच, उमरिया, छिंदवाड़ा, अशोक नगर और कटनी में मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, भोपाल में आज 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    छत्तीसगढ़ में आज मौसम कैसा रहेगा
    छत्तीसगढ़(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): बिलासपुर, सूरजपुर, रायपुर, धमतरी दुर्ग, बस्तर, महासमुंद और बेमेतरा में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी।

    ओडिशा में आज मौसम कैसा रहेगा
    ओडिशा(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मयूरभंज, भुवनेश्वर, पुरी, क्योंझर, भद्रक, बालासोर, कटक, गजपति, गंजाम, मयूरभंज और झारसपगुड़ा में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है।

  • पश्चिम एशिया संकट से महंगा हुआ तेल-गैस, भारत के आयात बिल और महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव

    पश्चिम एशिया संकट से महंगा हुआ तेल-गैस, भारत के आयात बिल और महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव

    नई दिल्ली
     पश्चिम एशिया में पिछले सात महीनों से जारी युद्ध ने अब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट 28 फरवरी से बंद है, जबकि 10 सितंबर को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब के कच्चे तेल के निर्यात का पश्चिमी रास्ता भी बंद हो गया है। इन रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 109.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, अभी ये 104.2 डॉलर पर हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पर हस्ताक्षर करने के बाद सप्लाई में रुकावट और बढ़ सकती है। ट्रंप ने यूएन में कहा कि अमेरिकी कांग्रेस चुनावों के बाद ईरान के पास या तो पूरी तरह खत्म होने या फिर डील करने का विकल्प है। सात दिनों के भीतर ही ईरान ने संकेत दिया कि वह डील करना पसंद करेगा।

    16-17 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है सप्लाई संकट
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पहले दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती थी। इसमें करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और 50 लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। होर्मुज के रास्ते को आंशिक रूप से बायपास करने के लिए सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल निर्यात कर रहा था। वहीं, यूएई हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन तेल बाहर भेज रहा था। दोनों देश होर्मुज से बाहर तेल पहुंचाने के लिए शटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे, जहां उसे दूसरे जहाजों में ट्रांसफर कर आगे भेजा जा सकता था।

    ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कम से कम 13-14 मिलियन बैरल प्रतिदिन की रुकावट आ सकती है। रूस अभी हर दिन लगभग 3.5 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट करता है। अगर ग्राहम एक्ट लागू किया जाता है और जिन देशों को टारगेट किया गया है, वे मान जाते हैं, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई में रुकावट 16-17 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ सकती है। इस कमी को पूरा करने के लिए कोई दूसरा जरिया नहीं है।

    LNG और पेट्रोलियम उत्पादों पर भी असर
    इस रुकावट का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और एनएनजी पर भी पड़ेगा। एलएनजी को करीब -163 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है और समुद्र के बीच इसे आसानी से दूसरे जहाज में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

    भारत सरकार ने ग्राहम एक्ट को लेकर कहा है कि इसके प्रभाव सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ेगा। मौजूदा हालात को देखते हुए यह चिंता और महत्वपूर्ण हो गई है।

    अमेरिका में भी बढ़ी कीमतों की मार
    ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी से तेहरान पर दबाव तो बनता है, लेकिन इससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी असर पड़ रहा है। इससे ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगातार बंद रखने के रुख के और मजबूत होने की आशंका है।

    अमेरिका में भी इसका असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। 4.30 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं, जो 4 डॉलर प्रति गैलन से अधिक है। जबकि डीज़ल की कीमतें 6.75 डॉलर प्रति गैलन तक बढ़ गई हैं, जिससे चुनावी साल में खेती-बाड़ी के क्षेत्र पर असर पड़ रहा है।

    ग्राहम एक्ट लागू करने से न सिर्फ उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो सकता है जिन्हें निशाना बनाया गया है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी नुकसान हो सकता है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में भी कीमतें बढ़ेंगी। अमेरिका के बेंचमार्क WTI की कीमत पहले ही 27 फरवरी को 67.02 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अब 92.41 डॉलर हो गई है।

    यमन में सऊदी समर्थित बलों को झटका
    इस बीच यमन में सऊदी समर्थित बलों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। हूतियों ने मोचा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है और पेरिम द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इसके अलावा सऊदी अरब के सीमावर्ती शहरों और रियाद पर भी हमले किए गए हैं

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के सीधे सैन्य हस्तक्षेप के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन फिलहाल खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सहायता तक सीमित बताया गया है। तुर्की और पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के समर्थन में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था। इससे पहले 2015 में भी पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियान में सीधे हस्तक्षेप से इनकार किया था।

    भारत पर क्यों बढ़ सकता है दबाव?
    भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन उसने यह खरीद तब की थी जब अमेरिका ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। बाइडेन प्रशासन की 'प्राइस कैप' (कीमत की सीमा) पॉलिसी के तहत रूसी कच्चा तेल खरीदने की इजाजत थी, लेकिन छूट के साथ। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भी समय-समय पर रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए लाइसेंस दिए थे। यह कानून भारत को तब निशाना बना रहा है जब उसने अमेरिकी तेल और गैस की खरीद बढ़ा दी है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, भारत ने 8.2 अरब डॉलर का रूसी कच्चा तेल आयात किया। इस साल अगस्त में अमेरिका LNG आयात का सबसे बड़ा स्रोत भी बनकर उभरा है।

    पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के लिए सीधे तौर पर भी दिख रहा है। भारत के क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 26 फरवरी को 70.61 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 123.67 डॉलर प्रति बैरल बताई जा रही है। इसी अवधि में स्पॉट एलएनजी की कीमतों में करीब 150 फीसदी की वृद्धि हुई है।

    कतर से लंबे समय तक होने वाली सप्लाई बंद होने के बाद से भारत की खरीद में स्पॉट LNG का हिस्सा बढ़ गया है। ऐसे में लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें भारत के आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं।

    राजनीतिक समाधान से ही राहत की उम्मीद
    जब तक कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। अमेरिका और ईरान को 17 जून के मेमोरेंडम पर वापस लौटना होगा। अमेरिका को जोरो एनरिचमेंट (संवर्धन) पर जोर देने की जरूरत नहीं है, NPT गैर-परमाणु हथियार वाले देशों को 3.67% एनरिचमेंट की इजाजत देता है। अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंध हटाने तथा ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज करने के बदले में, ईरान को होर्मुज से आजाद आवाजाही के मामले में लचीलापन दिखाना होगा।

     

     

  • Boeing 737 MAX पर फिर बढ़ी चिंता, सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के बाद डिलीवरी रोकने की मांग

    Boeing 737 MAX पर फिर बढ़ी चिंता, सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के बाद डिलीवरी रोकने की मांग

     वॉशिंगटन
     विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग के 737 MAX विमानों में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी का पता चला है। इसकी वजह से लैंडिंग के दौरान पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस नहीं मिल पाता है।

    कंपनी के डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी है कि यह समस्या कॉकपिट सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी है और तब हो सकती है जब पायलट मिस्ड अप्रोच (लैंडिंग की कोशिश नाकाम होने) के बाद विमान का तय रूट बदलते हैं। ऐसी स्थिति में अगली बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान ऑटोमेटेड नेविगेशन फीचर काम करना बंद कर सकता है।

    बोइंग ने क्या कहा?
    बोइंग ने कहा कि उसने पिछले महीने ही ऑपरेटर्स को इस समस्या के बारे में बता दिया था और वह इसके स्थायी समाधान पर काम कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भेजे एक ईमेल बयान में बोइंग ने कहा, "हमने ऑपरेटर्स के साथ ऐसी स्थितियों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए मौजूदा पायलट प्रक्रियाओं को मजबूत करने वाली जानकारी साझा की। हमारे इंजीनियर इस समस्या को हमेशा के लिए ठीक करने के लिए एक सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम कर रहे हैं।"

    फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) सुरक्षा से जुड़ी संभावित समस्या की समीक्षा कर रहा है। एफएए ने कहा कि उसे कुछ 737 MAX विमानों में लगे फ्लाइट कंप्यूटर के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी समस्या के बारे में जानकारी है।

    एजेंसी ने कहा, "एफएए एक सुधारात्मक कार्रवाई समीक्षा बोर्ड बुलाएगा और अगर सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई करेगा।" एफएए, बोइंग और एयरलाइंस अब यह पता लगा रहे हैं कि प्रभावित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कितनी बड़े पैमाने पर हो रहा है और क्या इस समस्या से सुरक्षा को कोई व्यापक खतरा है।

    विमानों की डिलीवरी पर रोक लगाने की मांग
    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथवेस्ट एयरलाइंस और यूनाइटेड एयरलाइंस ने बोइंग से कहा है कि वे उस सॉफ्टवेयर वाले नए 737 MAX विमानों की डिलीवरी रोक दें, जिनमें यह समस्या है। इसके बजाय उन्होंने पुराने सॉफ्टवेयर वर्शन वाले विमानों की मांग की है।

    इस नई समस्या के कारण MAX विमानों की जांच और बढ़ गई है। अभी यह साफ नहीं है कि इस सॉफ्टवेयर वाले कितने विमान अभी उड़ान भर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बोइंग के 737 MAX प्रोग्राम की रेगुलेटरी और सुरक्षा के लिहाज़ से कड़ी जांच हो रही है।

  • मोजतबा खामेनेई की सेहत पर फिर उठे सवाल, ईरानी धर्मगुरु ने अस्पताल हमले का किया दावा

    मोजतबा खामेनेई की सेहत पर फिर उठे सवाल, ईरानी धर्मगुरु ने अस्पताल हमले का किया दावा

    तेहरान
    28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान संभालने वाले नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (56) को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने कतरी टीवी चैनल 'अल अरबी' को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शुरुआती हमले में घायल होने के बाद मोजतबा को इलाज के लिए तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया और मोजतबा को तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाला गया।

    इस खुलासे के बाद 56 साल के नए सुप्रीम लीडर की सेहत, उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति और उनके सीक्रेट लोकेशन को लेकर दुनिया भर में फिर से चर्चा छिड़ गई है।

    अस्पताल पर बमबारी के बाद मलबे से बचाया गया
    ईरानी धर्मगुरु मोहसिन हैदरी के अनुसार, 28 फरवरी को अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर पर हुए हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    हैदरी ने बताया, "जब दुश्मनों को पता चला कि वे घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं, तो तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और उन्हें मलबे के नीचे से बाहर निकाला गया।"

    इस हमले के बाद से ही मोजतबा किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं और तब से अब तक न तो उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया है और न ही उनका कोई ऑडियो-वीडियो संदेश जारी हुआ है।

    गुप्त कमरे में वोटिंग और 8 मार्च का चुनाव
    असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सचिवालय खुद अमेरिकी और इजरायली हमलों का शिकार बना था, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई गोपनीय रिपोर्ट जलकर खाक हो गई थीं।

    हमले के बाद असेंबली के सदस्यों को बिना जगह बताए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया। वहां सदस्यों ने कागज की पर्चियों पर अपने वोट लिखे।

    मोहसिन हैदरी ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले मोजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखा था, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अली खामेनेई के बेटे को चुनने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

    मोजतबा को 59 में से 50 वोट मिले, जबकि 8 वोट अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को पड़े और 1 सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया।

    हैदरी के मुताबिक, मोजतबा को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें चुना जा रहा है। उन्हें टीवी पर आधिकारिक ऐलान देखने के बाद ही अपने सुप्रीम लीडर बनने का पता चला।

    क्या वाकई जिंदा और स्वस्थ हैं मोजतबा खामेनेई?
    मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग विरोधी दावे किए जा रहे हैं।

    अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे मानते हैं कि मोजतबा मरे नहीं हैं, लेकिन वे बेहद गंभीर रूप से घायल और अधमरे हो चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक उनके शरीर का बायां हिस्सा (हाथ और पैर) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यू यॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इन दावों को खारिज किया। पेजेशकियान ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ 7 घंटे लंबी बैठक की है और वे पूरी तरह से स्वस्थ और शासन चलाने में सक्षम हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता संभालने से पहले किसी भी औपचारिक पद पर न रहने वाले और "शैडो मैन" कहे जाने वाले मोजतबा खामेनेई की लंबे समय से जारी गुमनामी ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशय को और बढ़ा रही है।

  • निकोटीन पाउच और निकोटीन गम में क्या फर्क? सरकार ने अवैध पाउच पर क्यों कसा शिकंजा

    निकोटीन पाउच और निकोटीन गम में क्या फर्क? सरकार ने अवैध पाउच पर क्यों कसा शिकंजा

    नई दिल्ली
    देशभर में खुलेआम बिक रहे 'निकोटीन पाउच' को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बिना मंजूरी के ऑनलाइन और दुकानों पर निकोटीन पाउच बेचने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को आधिकारिक पत्र भेजा है।

    सरकार ने इन अवैध उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने, इन्हें जब्त करने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी के अनुसार, ये निकोटीन पाउच सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं। इन पैकेटों में अत्यधिक मात्रा में लत लगाने वाला निकोटीन होता है।

    बच्चों को जल्दी लग जाती है लत
    बता दें कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये बच्चों तक आसानी से पहुंच रहे हैं, जिससे कम उम्र में ही युवाओं को इसकी खतरनाक लत लगने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए सलाहकार बोर्ड ने साफ सिफारिश की है कि निकोटीन के ऐसे किसी भी नए उत्पाद को बाजार में बेचने की अनुमति न दी जाए।

    गौर करने वाली बात यह है कि लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि अगर सिगरेट छोड़ने के लिए 'निकोटीन गम' का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो 'निकोटीन पाउच' पर पाबंदी क्यों है? आइए हम आपको बताते हैं।

    क्या है निकोटीन गम और निकोटीन पाउच में फर्क?
    इस बात को ऐसे समझिए मंजूरी प्राप्त निकोटीन गम शरीर को निकोटीन की एक नियंत्रित और सुरक्षित खुराक देते हैं, जिससे धीरे-धीरे सिगरेट या तंबाकू की लत छूटने में मदद मिलती है।

    अमेरिकी दवा नियामक संस्था (FDA) ने इनकी सुरक्षा और असरशीलता की पूरी जांच करने के बाद इन्हें सिगरेट छुड़ाने के एक वैध इलाज के तौर पर मंजूरी दी है। इसके साथ यदि डॉक्टर या काउंसलर की सलाह ली जाए, तो सिगरेट छोड़ने की सफलता दर दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है।

    निकोटीन पाउच असुरक्षित और गैर-कानूनी क्यों?
    इसके ठीक उलट, निकोटीन पाउच में  के इन पाउच में भी निकोटीन होता है, लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ये सिगरेट छुड़ाने में असरदार हैं। यही वजह है कि अमेरिकी एफडीए या अन्य प्रमुख स्वास्थ्य नियामकों ने इन्हें इलाज के रूप में कोई मंजूरी नहीं दी है।