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  • 4 साल में 111 सांसद-विधायकों का दल-बदल, जानिए किन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले

    4 साल में 111 सांसद-विधायकों का दल-बदल, जानिए किन राज्यों में सबसे ज्यादा मामले

     नई दिल्ली

    चुनाव जीतने के बाद नेताओं के पार्टी बदलने का सिलसिला जारी है. एक ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला डेटा सामने आया है. इसमें बताया गया है क 2022 से 2026 के बीच 111 सांसदों और विधायकों ने चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदल ली. इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सदस्य और 78 विधायक शामिल हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण के मुताबिक, सबसे ज्यादा दल-बदल के मामले नागालैंड और पश्चिम बंगाल में सामने आए। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस विश्लेषण में अलग-अलग तरह के दल-बदल के मामले शामिल हैं. इनमें सीधे पार्टी बदलना, पार्टियों का विलय, इस्तीफा देने के बाद उपचुनाव जीतना और अयोग्य ठहराए जाने के बाद उपचुनाव जीतना शामिल है. हालांकि, ADR ने साफ किया है कि यह सूची पूरी तरह व्यापक नहीं हो सकती, क्योंकि जनप्रतिनिधियों के पार्टी बदलने का कोई व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध आधिकारिक डेटाबेस नहीं है। 

    नागालैंड में सबसे ज्यादा दल-बदल
    राज्यवार आंकड़ों में नागालैंड सबसे ऊपर है. यहां 32 विधायकों ने पार्टी बदली. इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20, तेलंगाना में 9, गोवा और पंजाब में 8-8, महाराष्ट्र और मेघालय में 6-6 और मणिपुर में 5 मामले सामने आए. नागालैंड और पश्चिम बंगाल को मिलाकर कुल 111 मामलों में करीब 47 फीसदी मामले सामने आए। 

    नागालैंड के 32 मामलों का बड़ा हिस्सा NDPP और NPF के बीच राजनीतिक पुनर्संयोजन से जुड़ा है. रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, NDPP से चुने गए 25 जनप्रतिनिधियों ने पार्टी बदली, जबकि NPF में 32 जनप्रतिनिधि शामिल हुए। 

    पश्चिम बंगाल में सभी 20 मामले लोकसभा सांसदों से जुड़े हैं. ये सभी सांसद पहले AITC यानी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे और बाद में NCPI में चले गए. इन सांसदों ने NCPI के साथ विलय का दावा किया है और यह मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष है। 

    किन पार्टियों से सबसे ज्यादा नेता गए?
    पार्टीवार आंकड़ों में NDPP से सबसे ज्यादा 25 जनप्रतिनिधियों ने पार्टी बदली. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के 20 और कांग्रेस के 19 जनप्रतिनिधियों ने दल बदला. बीआरएस के 9, आम आदमी पार्टी और एनसीपी के 7-7, उद्धव गुट की शिवसेना के 6, जेडीयू के 5 और एनपीपी के 4 जनप्रतिनिधि भी पार्टी बदलने वालों में शामिल हैं.
    NDPP, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस से पार्टी बदलने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या 64 यानी कुल 111 मामलों का करीब 58 फीसदी है। 

    किस पार्टी में पहुंचे सबसे ज्यादा नेता?
    दूसरी तरफ, पार्टी बदलने वाले नेताओं में सबसे ज्यादा 32 एनएमएफ में शामिल हुए. इसके बाद बीजेपी में 29 और एनसीपीआई में 20 जनप्रतिनिधि गए. कांग्रेस को 9, शिवसेना को 8, एनपीपी को 6 और पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल को 4 जनप्रतिनिधि मिले. एनपीएफ, बीजेपी और एनसीपीआई ने मिलकर 111 में से 81 जनप्रतिनिधियों को अपने साथ जोड़ा, जो कुल मामलों का करीब 73 फीसदी है। 

    तेलंगाना, गोवा और महाराष्ट्र में भी बड़ा बदलाव
    तेलंगाना में पार्टी बदलने के सभी 9 मामले BRS के विधायकों से जुड़े हैं. गोवा में कांग्रेस के 8 विधायक BJP में गए. महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) से चुने गए 6 लोकसभा सांसद बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में चले गए। 

    पंजाब में 8 मामले सामने आए, जिनमें 6 राज्यसभा सदस्य और 2 विधायक शामिल हैं. मेघालय में 6, मणिपुर में 5, जबकि अरुणाचल प्रदेश और गुजरात में 4-4 मामले दर्ज हुए. हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में 2-2 तथा कर्नाटक, मध्य प्रदेश, सिक्किम और उत्तर प्रदेश में 1-1 मामला सामने आया. दिल्ली में एक राज्यसभा सदस्य के पार्टी बदलने का मामला दर्ज किया गया है। 

  • सोनमणि बोरा ने गिनाई शहरी विकास की प्राथमिकताएं, शहर की तासीर के अनुरूप योजना पर जोर

    सोनमणि बोरा ने गिनाई शहरी विकास की प्राथमिकताएं, शहर की तासीर के अनुरूप योजना पर जोर

    शहर की तासीर के अनुरूप हो विकास की योजना : सोनमणि बोरा

    नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने हुडको द्वारा नई दिल्ली में आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को किया संबोधित

    केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव तथा हुडको के अधिकारियों से भी मिले, छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी अमल व आगामी रणनीति पर की चर्चा

    रायपुर. 
    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने नई दिल्ली में हुडको (HUDCO) द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (UCF) पर आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों एवं नगरीय निकायों से कार्यशाला में हिस्सा ले रहे प्रतिभागियों से कहा कि शहरों के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहतर नियोजन, क्षमता विकास एवं वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने शहरों की भावी जरुरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर नियोजन, संस्थागत क्षमता विकास एवं उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया।

    प्रमुख सचिव बोरा ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह से नई दिल्ली में भेंट कर राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस और अर्बन चैलेंज फंड की प्रगति, उनके प्रभावी क्रियान्वयन तथा आगामी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने इन योजनाओं के लक्ष्यों की प्राप्ति तथा नगरीय निकायों की क्षमताओं को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया।

    बोरा ने हुडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम के साथ बैठक कर राज्य के नगरीय निकायों के समग्र एवं आवश्यकता आधारित विकास की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में राज्य के नगरीय निकायों की स्थानीय आवश्यकताओं, संभावनाओं एवं विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। औद्योगिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों के लिए उनकी प्रकृति एवं विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा की गई, जिससे नगरीय सेवाओं एवं आधारभूत संरचनाओं का विस्तार स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके।

    बैठक में शहरों की आवश्यकतानुसार फूड पार्क, रेंटल हाउसिंग, पर्यटन संवर्धन, स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) सहित अन्य संभावित विकास के पहलुओं को शहरों की विकास योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं, उनके क्रियान्वयन अनुभवों तथा चुनौतियों का अध्ययन कर राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त पहलुओं को अपनाने एवं राज्य की नीतियों में आवश्यक प्रावधान किये जाने पर भी चर्चा की गई।

    बैठक में हुडको के सीएमडी ने परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) तैयार करने तथा राज्य स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर राज्य व नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का क्षमता विकास करते हुए विशिष्ट परियोजनाओं के चिन्हांकन एवं दस्तावेजीकरण के लिए सहमति प्रदान की। उन्होंने नगरीय परियोजनाओं हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने सहयोग प्रदान करने का भी आश्वासन दिया। बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय स्रोतों के बेहतर उपयोग तथा केंद्र एवं राज्य योजनाओं के माध्यम से वित्तीय अभिसरण (Convergence) की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

  • नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला, 48 घंटे में 19 ने गंवाई जान

    नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला, 48 घंटे में 19 ने गंवाई जान

    कोहिमा
    नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई है. पिछले दो दिनों में अलग-अलग इलाकों से मौत के मामले सामने आए हैं. पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT बनाई है। 

    पुलिस के मुताबिक, मौतें मोकोकचुंग और तुएनसांग जिलों में हुई हैं. मोकोकचुंग में 8 लोगों की मौत हुई है. वहीं, तुएनसांग में 11 लोगों की जान गई है. आशंका है कि इन लोगों ने मिलावटी या अवैध शराब का सेवन किया था। 

     शराब की सप्लाई का पता लगाएगी SIT

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आई बंगलांग चांग को टीम का प्रमुख बनाया गया है. SIT मौतों की वजह का पता लगाएगी. इसके साथ ही संदिग्ध मिलावटी शराब के स्रोत और उसकी सप्लाई चेन की भी जांच होगी। 

    पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ सुराग मिले हैं. हालांकि, अभी इनके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है. पुलिस ने संदिग्ध शराब के सैंपल जांच के लिए गुवाहाटी भेजे हैं. इनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी. इससे मौतों की असली वजह का पता लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने मामले में कई जगह छापेमारी भी की है. कार्रवाई के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया. करीब 3 हजार शराब की बोतलें भी जब्त की गई हैं। 

    जांच में जुटी पुलिस
    वहीं घटना के बाद से पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है और जांच में जुट गई है। जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले पर सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि इन मौतों की जांच करने और मिलावटी शराब के स्रोत और सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) आई. बुंगलांग चांग की अगुवाई में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। इस घटना में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

    फोरेंसिंक जांच के लिए भेजे गए सैंपल
    पुलिस ने बताया कि मौतों की वजह का पता लगाने के लिए सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए गुवाहाटी भेजे गए हैं। पुलिस ने कहा, "हमें कुछ सुराग मिले हैं, लेकिन अभी उनके बारे में जानकारी देना जल्दबाजी होगी।" इन मौतों के बाद, पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की, 19 लोगों को गिरफ्तार किया और लगभग 3,000 शराब की बोतलें ज़ब्त कीं।

    सावधानी बरतने की अपील
    इस मामले में, पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे ऐसी शराब न पिएं जिसकी पहचान न हो, जिस पर कोई लेबल न हो या जिस पर अवैध होने का शक हो। साथ ही, पुलिस ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बता दें कि नागालैंड में 1990 से ही शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना प्रशासन के रवैये पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। शराबबंदी के बावजूद इलाके में जहरीली शराब किस तरह से बेंची या पहुंचाई जा रही थी, यह जांच का विषय है।

    19 लोग गिरफ्तार, करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त
    मौतों के बाद पुलिस ने प्रभावित इलाकों में कई जगह छापेमारी की. इस कार्रवाई के तहत 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया और शराब की करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त की गईं। 

    नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. पुलिस ने लोगों को बिना पहचान, बिना लेबल या संदिग्ध अवैध शराब न पीने की सलाह दी है. अधिकारियों ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत मेडिकल मदद लें।

     लोगों से सावधान रहने की सलाह
    दरअसल, नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. इसके बावजूद राज्य में अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई की आशंका सामने आई है. पुलिस अब इस नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है. पुलिस ने लोगों से अज्ञात या बिना लेबल वाली शराब नहीं पीने की अपील की है. संदिग्ध अवैध शराब से भी दूर रहने को कहा गया है। 

    पुलिस ने बताया कि शराब पीने के बाद चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. शराब की सप्लाई से जुड़े लोगों का पता लगाया जा रहा है।

    जहरीली शराब त्रासदियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी सख्त
    इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शुक्रवार को कई उपाय सुझाए। शीर्ष अदालत ने जहरीली शराब के गैर-कानूनी उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बिठाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।

    न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने महाराष्ट्र विष नियमावली के नियम 18ए और 18बी को रद्द करते हुए कई सुझाव दिए। ये नियम 2011 में मुंबई में जहरीली शराब से हुई एक बड़ी घटना के बाद एक अधिसूचना के जरिए लागू किए गए थे। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अपने फैसले में लिखा, ''इतिहास इस बात का गवाह है कि शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगाने से अक्सर शराब का कारोबार गैर-कानूनी तरीके से होने लगता है, जिससे बिना नियमन वाली और जानलेवा शराब का चलन बढ़ जाता है।''

    न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कई सुझाव भी दिए। इन सुझावों में अवैध शराब की आपूर्ति और मांग शृंखला तोड़ने, राज्य की सीमाओं पर सख्ती बढ़ाने और मेथनॉल के नियमन को कड़ा करने पर जोर दिया गया है। मेथनॉल एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल नकली शराब बनाने में किया जा सकता है। फैसले में कहा गया, ''चूंकि शराब राज्य में बनती भी है और बाहर से भी लाई जाती है, इसलिए इसे लागू करने के कदमों में राज्य की सीमाओं पर कड़ी निगरानी शामिल होनी चाहिए। इस संबंध में, राज्य परिवहन विभाग का सीमाओं पर सतर्क रहना राज्य में शराब की अवैध ढुलाई को नियंत्रित करने में मदद करेगा…।''

    इसमें आगे कहा गया कि राज्य के भीतर शराब की खरीद, निर्माण, ढुलाई, बिक्री और सेवन से जुड़े कानूनों को लागू करना भी जहरीली शराब से होने वाली त्रासदियों को रोकने में अहम साबित होगा। न्यायालय ने कहा, ''राज्य पुलिस, क्रमशः मद्य निषेध विभाग और आबकारी विभाग के साथ मिलकर, स्थानीय शराब बनाने वाले अड्डों की पहचान कर सकती है और उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। ये अड्डे आमतौर पर राज्य के शहरी इलाकों में भीड़-भाड़ वाले या अर्द्ध-औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित होते हैं।''

     

  • छत्तीसगढ़ में सेवा का नया मॉडल: कागजी उलझनों से राहत, सुविधाएं पहुंचेंगी घर तक

    छत्तीसगढ़ में सेवा का नया मॉडल: कागजी उलझनों से राहत, सुविधाएं पहुंचेंगी घर तक

    ​विशेष लेख

    ​"सेवा_संकल्प_अभियान"

    ​कागजी उलझनों से मुक्ति—छत्तीसगढ़ में सेवा का संकल्प पहुँचा आपके द्वार

    रायपुर

    ​छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में वर्षों से किसानों तथा भू-स्वामियों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कागजी दफ्तरों के चक्कर काटने और प्रशासनिक उलझनों से जूझने में बीत जाता था। नामांतरण की एक छोटी-सी अर्जी हो, जमीन का सटीक सीमांकन, प्राकृतिक आपदा के समय फसल बीमा का क्लेम हासिल करना हो या फिर कृषि विकास के लिए बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन लेना हो—हर छोटे-बड़े काम के लिए तहसील, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और पटवारी कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी जटिल प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों का अनुचित हस्तक्षेप, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद की निरंतर बनी रहने वाली चिंता ग्रामीण जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी।

    ​प्रशासनिक पहल: आधुनिक तकनीक से आई सुशासन की नई क्रांति

             ​लेकिन जब प्रदेश प्रशासन ने "सेवा का संकल्प, सेवा पहुँची आपके द्वार" के मूलमंत्र को अपनी कार्यशैली में आत्मसात किया, तो छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन के इतिहास में एक युगपरिवर्तकारी क्रांति की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत प्रशासनिक सोच में आमूलचूल बदलाव लाया गया। अब किसान या भूमि स्वामी को अपनी वाजिब मांगों और भूमि संबंधी सुधारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि शासन का अमला खुद आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक जीपीएस उपकरणों और दक्ष सर्वेयरों की समर्पित टीम लेकर ग्रामीणों के सीधे दरवाजे तक पहुँचा। इस पहल ने न केवल शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाया, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम की।

    ​डिजिटल सर्वेक्षण का विशाल दायरा और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ

              ​प्रशासन के इस दृढ संकल्प और सुनियोजित क्रियान्वयन का ही सुखद नतीजा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 ग्रामों (लगभग 96.37%) में विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

           ​दूसरी ओर, बस्तर संभाग के अत्यंत दुर्गम, वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे नारायणपुर, सुकमा तथा बीजापुर—में भी अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के जरिए शेष बचे गाँवों को मानचित्र पर सटीक रूप से दर्ज करने का काम युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है।

    ​भू-स्वामियों को मिले प्रमुख ऐतिहासिक लाभ

            ​प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याण की इस अनुपम पहल से प्रदेश के लाखों भू-स्वामियों को दशकों पुरानी असुविधाओं से स्थायी मुक्ति मिल चुकी है। डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन के कारण ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी आपसी विवादों तथा कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अद्यतित और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड्स से पूरी राजस्व प्रणाली विश्वसनीय बनी है, जिससे दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।
           ​पूर्णतः त्रुटिरहित और सुधारे गए राजस्व रिकॉर्ड्स के आधार पर अब बैंक किसानों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कृषि ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के सीधा और समय पर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है।

    ​आत्मनिर्भरता और आदर्श राज्य की ओर सुदृढ़ कदम

            ​शत-प्रतिशत डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला देश का आदर्श राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा बढ़ाया गया यह ऐतिहासिक कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान कर रहा है। "सेवा संकल्प अभियान" ने यह साबित कर दिया है कि जब दृढ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मिलन होता है, तो "सेवा पहुँची आपके द्वार" का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर बदलती व्यवस्था की एक जीवंत और सुखद सच्चाई बन जाता है।

    विष्णु प्रसाद वर्मा
    सहायक संचालक

  • Bhopal Master Plan 2047: ग्रोथ कॉरिडोर से मिक्स लैंड यूज तक, जानें ड्राफ्ट में क्या-क्या खास

    Bhopal Master Plan 2047: ग्रोथ कॉरिडोर से मिक्स लैंड यूज तक, जानें ड्राफ्ट में क्या-क्या खास

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। नए मास्टर प्लान में शहर के विकास के साथ पर्यावरण, रोजगार, यातायात और नागरिक सुविधाओं पर खास जोर दिया गया है। अब प्रशासन इस ड्राफ्ट पर जनता से दावे-आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। मास्टर प्लान का ड्राफ्ट चार प्रमुख आधारों पर तैयार किया गया है। इनमें प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण, आधुनिक और नागरिक हितैषी विकास, शहर में जरूरी बदलावों को बढ़ावा देना और रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप प्रकाशित किया गया है। इसमें भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, आसान आवाजाही और आर्थिक विकास के अवसर देने का प्रयास किया गया है।

    51 किलोमीटर का होगा ग्रोथ कॉरिडोर
    मास्टर प्लान में करीब 3000 हेक्टेयर जमीन ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्र सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ेगा। ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवास जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी। यहां मिश्रित उपयोग और ज्यादा घनत्व वाले विकास का प्रस्ताव है। इस कॉरिडोर में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में बदला जा सकेगा। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है।

    एक ही इलाके में मकान और दुकान
    मास्टर प्लान में मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव रखा गया है। यानी सड़क की चौड़ाई के आधार पर कुछ क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के साथ दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य लोगों के घर और काम की जगह के बीच दूरी कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। चौड़ी सड़कों पर स्थित जमीनों के लिए एफएआर और भवन की ऊंचाई को लेकर अधिक छूट देने का प्रस्ताव है। विकास के नियमों को भी आसान बनाने की बात कही गई है।

    हरित क्षेत्र 16 से बढ़कर 27 प्रतिशत
    भोपाल मास्टर प्लान-2005 में हरित क्षेत्र करीब 16 प्रतिशत था। नए भोपाल विकास योजना-2047 में इसे बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को भी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। योजना में भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, जंगल, तालाबों, जलाशयों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

    डिजिटल ट्विन सिटी से होगी निगरानी
    शहर के विकास और निर्माण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य अवैध निर्माण, यातायात और दूसरी शहरी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई करना है। सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की नेटवर्किंग, सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।

    पार्किंग की समस्या दूर करने पर जोर
    मास्टर प्लान में मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे, आरओबी और फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग की व्यवस्था भी की जा सकेगी। बेसमेंट पार्किंग के लिए जमीन के संयुक्त उपयोग की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है।

    भौंरी में बनेगी एजुकेशन हब
    भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ईकेएआई) सिटी विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और एआई से जुड़े संस्थानों को बढ़ावा देना है।

    अनाथ आश्रम, मूक-बधिर विद्यालय, छात्रावास, दिव्यांग विशेष विद्यालय, वृद्धाश्रम और रैन बसेरा जैसी चैरिटेबल गतिविधियों को भी कई तरह के भूमि उपयोग क्षेत्रों में अनुमति देने का प्रस्ताव है।

    45 लाख आबादी के हिसाब से तैयार योजना
    भोपाल विकास योजना-2047 को 1016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। इसमें 254 गांव शामिल हैं और इसे करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। योजना में विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल 61,017.02 हेक्टेयर रखा गया है। अब इस प्रारूप पर प्रशासन जनता से दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर
    मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मेट्रो के तहत भोपाल विकास योजना-2047 के प्रस्ताव में करीब तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है. इसमें निवेश के लिए माहौल बनाने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है. यह ग्रोथ कॉरिडोर एजुकेशन, नॉलेज, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिक्षेत्र के साथ-साथ विभिन्न उपनगरों को भी जोड़ता है। .

    रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे ये रोड
    ग्रोथ कॉरिडोर में नगर के बाहर विभिन्न दिशाओं से आने वाले क्षेत्रीय मार्ग जैसे विदिशा मार्ग, रायसेन मार्ग, नर्मदापुरम मार्ग एवं इन्दौर मार्ग को ग्रोथ कॉरीडोर के जरिए शहर से जोड़ा जाएगा. इसमें मेट्रेपोलिटन क्षेत्र के विभिन्न भागों से बेहतर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया है. ग्रोथ कॉरिडोर एवं इसके रेडियल मार्गों का विकास नगर विकास स्कीम के माध्यम से भोपाल विकास प्राधिकरण करेगा. निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास मार्ग को ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है. ये मार्ग के दोनों ओर 50-50 मीटर भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है। 

    मास्टर प्लान में मिक्स लैंड यूज भी प्रस्तावित
    भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मिक्स लैंड यूज के प्रस्ताव राज्य की टीओडी नीति के अनुरूप आवासीय उपयोग के तहत मार्ग की चौड़ाई के आधार पर मिक्स लैण्ड यूज प्रस्तावित किए गए हैं. जिससे कि वर्क स्पेस और रेजिडेंशियल एरिया में कॉर्डिनेशन हो सके. असीमित एफएआर एवं भवन ऊंचाई नगरीय क्षेत्र की भूमि का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा निवेश मित्र वातावरण तैयार करने के उ‌द्देश्य से मार्ग की चौड़ाई के आधार पर एफएआर का निर्धारण किया गया है। 

    अधिक चौड़े मार्गों पर स्थित भूमियों को एफएआर एवं भवन की ऊंचाई की सीमा से मुक्त रखा गया है. यानि भोपाल में भी अब गगनचुंबी इमारतें होंगी. मास्टर प्लान ड्राफ्ट में भूतल कवरेज को हटाया गया है, जिससे नागरिकों एवं विकासकर्ताओं को लाभ होगा एवं डिजाइन विकल्प उपलब्ध होंगे। 

    शहर की हरियाली बढ़ाने प्लान में ये किए गए उपाय
    भोपाल मास्टर प्लान 2005 में ग्रीन एरिया 16 प्रतिशत था, जिसको बढ़ाकर भोपाल विकास योजना-2047 में लगभग 27 प्रतिशत किया गया है. जो यूआरडीपीएफआई गाइडलाइन के मानकों से कहीं अधिक है. भानपुर खंती के पुर्नविकास के लिए इस पर गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है. इसके अतिरिक्त कॉलोनी स्तर पर भी खुला क्षेत्र 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है. इससे हरित क्षेत्र में अतिरिक्त वृद्धि होगी. इसके अलावा सर्विस एरिया हेतु भी 2 प्रतिशत का क्षेत्रफल रखा जाना आवश्यक होगा। 

    भोपाल मास्टर प्लान के महत्वपूर्ण पाइंट

        शहर में साथ-साथ हो सकते हैं मकान-दुकान, मिक्स लैंड यूज का प्रस्ताव
        भोपाल के ग्रीन एरिया को 16 फीसदी से बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव
        2047 तक 3000 हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित
        पहली बार FAR और ऊंचाई की सीमा मुक्त भवन का प्रावधान, होंगी गगनचुंबी इमारतें.
        भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में एजुकेशन हब और गोल्फ कोर्स भी
        रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे विदिशा-रायसेन-इंदौर रोड
        निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास ग्रीन फील्ड कॉरिडोर 

     

  • सपा प्रवक्ताओं को अखिलेश की दो टूक! ‘आपकी बात तेजी से वायरल होती है, डिबेट से पहले पूरी तैयारी करें’

    सपा प्रवक्ताओं को अखिलेश की दो टूक! ‘आपकी बात तेजी से वायरल होती है, डिबेट से पहले पूरी तैयारी करें’

    लखनऊ 

    समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं की शनिवार को बैठक करीब दो घंटे तक चली. इस बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय और राजकुमार भाटी भी मौजूद रहे. बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को कई अहम नसीहतें दीं। 

    जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कहा कि बिना तैयारी के डिबेट में जाना हास्यास्पद हो जाता है. धर्म और जाति के मुद्दों, जिनसे किसी की भावना आहत हो उनसे बचना है. अखिलेश ने कहा कि बिना तैयारी के नहीं बोलना है। 

    साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण चुप रहना होता है, क्योंकि कई बार चुप रहकर भी बड़ा संदेश दिया जा सकता है। 

    10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती-बिगड़ती: अखिलेश यादव
    अखिलेश यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है. आपकी कही हुई बात तेजी से वायरल होती है. 10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती और बिगड़ती है। 

    आपकी कही हुई बात तेजी से वायरल होती है. 10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती और बिगड़ती है. अखिलेश ने कहा है कि बिना तैयारी के डिबेट में न जाएं. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं की शनिवार को बैठक करीब दो घंटे तक चली. इस बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय और राजकुमार भाटी भी मौजूद रहे। 

    बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को कई अहम नसीहतें दीं. ने कहा कि बिना तैयारी के डिबेट में जाना हास्यास्पद हो जाता है. धर्म और जाति के मुद्दों, जिनसे किसी की भावना आहत हो उनसे बचना है. अखिलेश ने कहा कि बिना तैयारी के नहीं बोलना है। 

    साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण चुप रहना होता है, क्योंकि कई बार चुप रहकर भी बड़ा संदेश दिया जा सकता है. रायबरेली से अखिलेश यादव ने शुरू की रथ यात्रा, कांग्रेस और सपा में ठनी! अखिलेश की 'रथयात्रा' पर भड़की कांग्रेस, अजय राय ने दी ये चुनौतीअखिलेश यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है। 

    आपकी कही हुई बात तेजी से वायरल होती है. 10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती और बिगड़ती है. यादव ने कहा कि पार्टी प्रवक्ता गंभीरता से पार्टी का पक्ष रखें. हर मुद्दे पर जानकारी इकट्ठा करने के बाद ही बयान दें या डिबेट में शामिल हों. इस बीच सपा प्रमुख ने कुछ दिन पहले रायबरेली में कहा था कि हर तरफ पीडीए की हवा चल रही है और यह चुनाव बीजेपी बनाम पीडीए है। 

    इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा. बता दें, अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी 'पीडीए रथयात्रा' की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि हम सकारात्मक राजनीति कर रहे हैं, जबकि BJP नकारात्मक राजनीति करती है. अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश देख रहा है कि पीडीए के आंदोलन से बुलडोजर चलाने वाले बचने वाले नहीं हैं। 

    यादव ने कहा कि पार्टी प्रवक्ता गंभीरता से पार्टी का पक्ष रखें. हर मुद्दे पर जानकारी इकट्ठा करने के बाद ही बयान दें या डिबेट में शामिल हों। 

    इस बीच सपा प्रमुख ने कुछ दिन पहले रायबरेली में कहा था कि हर तरफ पीडीए की हवा चल रही है और यह चुनाव बीजेपी बनाम पीडीए है. इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा. बता दें, अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी 'पीडीए रथयात्रा' की शुरुआत की। 

    उन्होंने कहा कि हम सकारात्मक राजनीति कर रहे हैं, जबकि BJP नकारात्मक राजनीति करती है. अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश देख रहा है कि पीडीए के आंदोलन से बुलडोजर चलाने वाले बचने वाले नहीं हैं. इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा और हमेशा के लिए डिमॉलिश कर देगा। 

  • UP Election Survey: BJP+ को कितनी सीटें, SP+ का क्या हाल? ताजा सर्वे में सामने आया बड़ा अनुमान

    UP Election Survey: BJP+ को कितनी सीटें, SP+ का क्या हाल? ताजा सर्वे में सामने आया बड़ा अनुमान

    लखनऊ 

    यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पिछले नौ सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक चुनावी सर्वे सामने आया है, जिसमें भाजपा की बंपर जीत का अनुमान जताया गया है। इसमें भाजपा गठबंधन 267 सीटों के साथ प्रदेश में फिर से सरकार बना सकता है, जबकि सपा गठबंधन को 132 सीटें मिलने की संभावना है। बसपा को दो और अन्य के खाते में दो सीटें जा सकती हैं।

    न्यूज लीडर और मैटराइज के सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर यह सर्वे किया गया है। इसमें भाजपा गठबंधन को 267 सीटें दी गईं। इसमें से भाजपा को ही अकेले दम पर 246 सीटें मिलती दिख रहीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (S) को नौ, आरएलडी को तीन, निषाद पार्टी को चार और सुभासपा को एक सीट दी गई है। सर्वे में बताया गया है कि अगर आज चुनाव होते हैं तो भाजपा गठबंधन की सरकार बनेगी।

    वहीं, समाजवादी पार्टी गठबंधन को राज्य में महज 132 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। अगर यह सर्वे सच होता है तो सपा के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि उसे लगातार तीसरी बार सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा। इससे पहले सपा 2012-17 तक यूपी में सत्ता में थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। इस बार सपा ही अकेले 125 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस को सात सीटें मिल सकती हैं। सपा और कांग्रेस में पिछले कई दिनों से बयानबाजी भी तेज है। कांग्रेस की ओर से सांसद इमरान मसूद तीखी बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि अब सपा सांसद इकरा हसन भी पलटवार कर रही हैं।

    भाजपा और सपा गठबंधन को कितने फीसदी वोट शेयर का अनुमान
    सर्वे के अनुसार, भाजपा को राज्य में 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है, जबकि सपा गठबंधन को 38 फीसदी वोट मिल सकता है। इस तरह दोनों के बीच छह फीसदी का अंतर रहने की संभावना है, जोकि काफी बड़ा अंतर है। वहीं, बसपा को 0.8 फीसदी और अन्य को दस फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है।

    पिछले दो चुनावों के आंकड़े
    यूपी चुनाव 2022 में भाजपा ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर करीब 41.3 फीसदी रहा था। समाजवादी पार्टी (SP) को 111 सीटें मिलीं और उसका वोट शेयर करीब 32.1 फीसदी था। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) सिर्फ एक सीट जीत सकी, जबकि उसका वोट शेयर करीब 12.9 फीसदी रहा। कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। बीजेपी के सहयोगियों अपना दल (एस) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिलीं। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसका वोट शेयर करीब 39.7 फीसदी था। समाजवादी पार्टी को 47 सीटें, बसपा को 19 सीटें और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं। यानी 2017 से 2022 के बीच बीजेपी की सीटें 57 कम हुईं, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़ा। इसके उलट SP की सीटों में 64 का इजाफा हुआ और उसका वोट शेयर भी करीब 10 प्रतिशत अंक बढ़ा, जबकि बसपा और कांग्रेस दोनों के सीटों तथा वोट शेयर में गिरावट आई।

  • मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव! बढ़ी जमानत राशि, प्रत्याशियों को देना होगा खर्च का लेखा-जोखा

    मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव! बढ़ी जमानत राशि, प्रत्याशियों को देना होगा खर्च का लेखा-जोखा

    भोपाल

    महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षद का चुनाव लड़ने वालों को अब सिक्योरिटी डिपॉजिट (जमानत राशि) के रूप में ज्यादा रकम जमा करनी होगी। अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने महापौर के लिए जमानत राशि 32 हजार रुपए कर दी है, जबकि नपा अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वालों को 24 हजार रुपए जमा करने होंगे।

    इसके साथ ही नामांकन जमा करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब यह अवधि सात दिन से कम नहीं होगी। सातवें दिन अवकाश होने पर अगले कार्यदिवस तक नामांकन जमा किए जा सकेंगे। चुनावी खर्च का हिसाब रखने और प्रस्तुत करने के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किया है। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष के निर्वाचन, नामांकन, जमानत राशि, चुनावी खर्च और पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।

    महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों के चुनाव खर्च के लिए अलग बैंक खाता खोलने और निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करने से संबंधित प्रावधान भी किए गए हैं।

    नामांकन के लिए सात दिन से कम की समय-सीमा नहीं
    संशोधित नियमों के अनुसार महापौर, अध्यक्ष या किसी वार्ड के पार्षद के निर्वाचन के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख, समय और स्थान निर्धारित किया जाएगा। इसकी सूचना प्रकाशित होने के सातवें दिन को नामांकन की अंतिम तारीख माना जाएगा। यदि सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश है तो उसके अगले कार्यदिवस को अंतिम तारीख माना जाएगा।

    एक पद के लिए एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं होंगे
    एक ही पद के निर्वाचन के लिए किसी प्रत्याशी की ओर से दो या अधिक नामांकन-पत्र प्रस्तुत किए जाने पर एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं करेगा।

    चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी
    महापौर, नपा और नपं अध्यक्ष तथा पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित सभी आय-व्यय का रिकॉर्ड रखने के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग और स्वतंत्र खाता खोलना होगा। नामांकन-पत्र पेश करते समय इस खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। चुनाव से संबंधित प्राप्तियों और खर्च का पूरा विवरण इसी खाते के माध्यम से रखना होगा।

    नामांकन से मतगणना तक के खर्च का देना होगा हिसाब
    उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसमें नामांकन-पत्र दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक किया गया संबंधित चुनावी खर्च शामिल होगा। निर्धारित समय में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर उम्मीदवार के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है।

    महापौर-अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल
    संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल की गई है। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 के संबंधित प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    यदि महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन रद्द होने या अन्य कारण से रिक्त होता है, तो इसकी सूचना निर्धारित समय-सीमा में जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।

    चुनावी खर्च का हिसाब नहीं दिया तो हो सकती है कार्रवाई
    यदि कोई उम्मीदवार निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करता है या निर्धारित अवधि में खर्च का हिसाब देने में विफल रहता है, तो राज्य निर्वाचन आयोग उसे निर्धारित अवधि के लिए संबंधित पद का चुनाव लड़ने से निरर्हित कर सकता है।

    खर्च से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे
    महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित खर्च का पूरा हिसाब और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे। अलग बैंक खाते की व्यवस्था से निर्वाचन व्यय से जुड़ी प्राप्तियों और खर्च का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने का प्रावधान किया गया है।

  • PM मोदी-योगी की अहम मुलाकात, PM आवास पर हुई लंबी बैठक; इन मुद्दों पर मंथन

    PM मोदी-योगी की अहम मुलाकात, PM आवास पर हुई लंबी बैठक; इन मुद्दों पर मंथन

    नई दिल्ली/ लखनऊ 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक लंबी बैठक में यूपी चुनाव की रणनीति के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव और एमएलसी चुनाव पर चर्चा हुई। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मोदी और योगी की ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है। क्योंकि यूपी चुनाव से पहले अक्तूबर में यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्तूबर को वोटिंग होगी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि – आपका मार्गदर्शन 'नए उत्तर प्रदेश' के निर्माण हेतु मुझे सदैव नई ऊर्जा देता है। अमूल्य समय प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार प्रधानमंत्री जी। आपको बता दें बीजेपी से अरूण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं डॉ. दिनेश शर्मा अंडमान- निकोबार के उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद पहले ही राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं।

    16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग
    चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। राज्यसभा की 10 सीटों में 8 भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास हैं। अभी तक किसी भी पार्टी ने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

    राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच होने वाली हर मुलाकात का अपना महत्व होता है, खासकर तब जब राज्य में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हों. ऐसे में यह बैठक भी आने वाले समय में पार्टी की दिशा और रणनीति को समझने के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है. फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मुलाकात से जुड़ी कोई और जानकारी सामने आती है या नहीं। 

    यूपी की 11 एमएलसी सीटों पर चुनाव
    इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है। एमएलसी की 11 सीटों में 8 भाजपा और 3 सपा के पास हैं। भाजपा ने 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।

    शाह से मिले थे केशव प्रसाद मौर्य
    आपको बता दें इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मुलाकात की थी। जिसमें यूपी चुनाव और पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी। बैठक के बाद केशव मौर्य ने कहा कि 2027 में तीसरी बार फिर से कमल खिलने जा रहा है। विपक्ष के 70 साल के शासन पर मोदी के 12 साल भारी पड़े।

  • PM मोदी की तारीफ में ऑस्ट्रेलियाई PM ने पढ़े कसीदे, भारत की ऊर्जा पहुंच पर कही बड़ी बात

    PM मोदी की तारीफ में ऑस्ट्रेलियाई PM ने पढ़े कसीदे, भारत की ऊर्जा पहुंच पर कही बड़ी बात

    नई दिल्ली

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत में ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत में जितने लोगों तक एनर्जी की पहुंच बनी है, उतनी किसी भी दशक, क्षेत्र या देश में मानव इतिहास के दौरान नहीं हुई। अल्बनीज ने यह बात एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में कही। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते संबंधों का भी जिक्र किया। अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ अच्छे संबंध हैं और पीएम मोदी ऐसे नेता हैं, जिनके साथ उनके देश ने करीबी रिश्ते विकसित किए हैं।

    एंथनी अल्बनीज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका असर कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ा है, जबकि भारत में सप्लाई काफी हद तक स्थिर बनी रही। इस दौरान ईंधन की कीमतों में भी सीमित बढ़ोतरी हुई।

    अलग-अलग देशों से बढ़ाया आयात
    पीएम मोदी ने इस साल की शुरुआत में भारत की ऊर्जा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा था कि अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है। मोदी ने मई में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बताया था कि भारत पहले 27 देशों से ऊर्जा का आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने कहा कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई जारी रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से बचाना
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत की अर्थव्यवस्था, आपूर्ति व्यवस्था और जरूरी सामान पर असर की सरकार ने समीक्षा भी की थी। इस दौरान आम लोगों और कारोबारियों के लिए सप्लाई में रुकावट कम करने के उपायों पर चर्चा हुई थी। पीएम मोदी ने भारत के बढ़े हुए ऊर्जा आयात स्रोतों को देश की स्थिर ऊर्जा आपूर्ति से जोड़ते हुए यह जानकारी दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी अप्रैल में भारत की तेल खरीद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदना जारी रखे हुए है। इस खरीद में 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है।