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  • मुख्यमंत्री सुगम परिवहन और PM ई-बस सेवा शुरू, CM यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन और PM ई-बस सेवा शुरू, CM यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

    हम जो कहते हैं,करके भी दिखाते हैं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित मांग (शासकीय बसों का संचालन) पूरी होने पर इस स्वर्णिम सौगात के लिए प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि हम जो कहते हैं, वो करके भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' एवं 'पीएम ई-बस सेवा' के जरिए हमने अनंत चतुर्दशी के मंगल अवसर पर प्रदेशवासियों को खुशियों की अनंत सौगात दी है। उन्होंने कहा कि 25 सितम्बर को मध्यप्रदेश के नागरिकों, विशेष रूप से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में रहने वाले हमारे भाई-बहनों के जीवन में सुगम परिवहन से सहज परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले दो दशकों में शासकीय बसों का संचालन बंद होने के कारण हमारे ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा अभाव बना हुआ था। दूर-दराज के कई गांव मुख्य सड़कों से कट गए थे। गांव-देहात के हमारे गरीबों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को आने-जाने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने अपने 'संकल्प पत्र' में भी यह सेवा प्रारंभ करने का उल्लेख किया था। गत दिवस शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ इस सेवा का मंगल आरम्भ करते हुए संकल्प को धरातल पर साकार कर दिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शुक्रवार को राज्यभर में 1,500 बसों से शुरू हुई इस सेवा को हमने वर्ष 2029 तक 15,000 बसों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, ताकि प्रदेश के हर व्यक्ति तक सुगम बस परिवहन की सुविधा पहुंच सके।

     

  • YouTuber मधुमिता के घर बड़ी चोरी, सोशल मीडिया पर दिखाती थीं दौलत; पुलिस खंगाल रही रील्स और CCTV

    YouTuber मधुमिता के घर बड़ी चोरी, सोशल मीडिया पर दिखाती थीं दौलत; पुलिस खंगाल रही रील्स और CCTV

     कन्याकुमारी
    तमिलनाडु के कन्याकुमारी की एक फेमस यूट्यूबर मधुमिता, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी धन दौलत को खूब दिखाया, उसके घर चोरी की घटना सामने आई है। पुलिस के मुताबिक मधुमिता के घर से चोरों ने तकरीबन 900 ग्राम सोने के गहने चुरा लिए। चोरी के गहनों की कीमत 1 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    यूट्यूबर मधुमिता, जो खुद हर महीने सोना खरीदने और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले वीडियो पोस्ट करती थीं, उनके घर चोरी की वारदात चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियोज के जरिए अपनी सम्पत्ति को दिखाना उनके लिए भारी पड़ गया। इससे पहले एक और महिला इन्फ्लुएंसर के घर चोरी की अजीबोगरीब वारदात सामने आई थी। रचना गुर्जर को सोने चांदी के जेवरात और पैसे दिखाना भारी पड़ गया था। रील डालने के बाद रात में आए चोरों ने सोना-चांदी और कैश पर हाथ साफ कर दिया था।

    कब और कैसी हुई चोरी घटना
    कन्याकुमारी में रहने वाली इन्फ्लुएंसर मधुमिता ने अपनी सोने की ज्वेलरी दिखाते हुए और अपने बच्चे पर कैश नोट लुटाते हुए रील्स पोस्ट की थीं। उन्होंने परिवार की शॉपिंग ट्रिप और बाहर घूमने-फिरने के बारे में भी अपडेट पोस्ट किए थे। शायद इन रील्स का मकसद अपने शानदार लाइफस्टाइल से सोशल मीडिया दोस्तों और फॉलोअर्स को प्रभावित करना था, लेकिन इसके चक्कर में परिवार को ₹1 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। चोरों को इससे जानकारी मिली और उन्होंने इसका फायदा उठाया। गुरुवार देर शाम जब परिवार शॉपिंग ट्रिप से घर लौटा, तो उन्हें 120 सॉवरेन सोने की ज्वेलरी, डायमंड ज्वेलरी और 50,000 रुपये का कैश गायब मिला।

    कन्याकुमारी पुलिस जांच में जुटी
    टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार यूट्यूब और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर मधुमिता कन्याकुमारी जिले के हेडक्वार्टर नागरकोइल के पास थमाथुकोनम में रहती हैं। उनके पति विनोद कुमार, एक बिजनेसमैन हैं। शाम को कपड़े खरीदने बाहर गया परिवार जब लौटा तो उन्हें चोरी का पता चला। उन्होंने देखा कि बेडरूम की अलमारी जबरदस्ती खोली गई थी और कीमती सामान गायब था। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और पाया कि चोर घर के पिछले दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर घुसे थे। इंस्पेक्टर जयलक्ष्मी ने कहा कि एसपी ने घटनास्थल का दौरा किया और संदिग्धों का पता लगाने के लिए पांच स्पेशल टीमें बनाई गई हैं।

    रील्स में उड़ाती थीं कैश के बंडल
    पुलिस अब जांच के हिस्से के तौर पर मधुमिता की सोशल मीडिया एक्टिविटी की भी जांच कर रही है। उनकी रील्स और पोस्ट में उन्हें घर पर अपनी ज्वेलरी दिखाते हुए, गद्दे पर फैले कैश के बंडल दिखाते हुए और अपने बच्चे पर पैसे लुटाते हुए देखा जा सकता था। एक जांच अधिकारी ने कहा कि उन्होंने ऐसे वीडियो भी अपलोड किए थे जिनमें दावा किया गया था कि परिवार हर महीने सोना खरीदता है। अन्य रील्स में अक्सर यह पता चलता था कि परिवार कहां घूमने जा रहा है और उनके बाहर जाने का मकसद क्या है। पुलिस के अनुसार, चोरों ने मधुमिता की रील्स पर नजर रखी और घर खाली होने पर चोरी की वारदात को अंजाम दिया।

    शॉपिंग करने गई थीं मधुमिता, चोरों ने घर में कर दी सेंधमारी
    मधुमिता अपने पति विनोदकुमार और बच्चे के साथ कन्याकुमारी जिले के नागरकोइल के पास थम्माथु कोनम इलाके में VIP गार्डन में रहती हैं। घटना वाले दिन वह शॉपिंग के लिए बाहर गई थीं। जब देर रात को घर लौटीं तो उनके घर का पिछला दरवाजा टूटा हुआ था। घर के अंदर बने सीक्रेट लॉकर की जांच करने पर पता चला कि वहां रखे लगभग 118 तोला सोने के गहने और नकदी चोरी हो गए थे। मधुमिता ने तुरंत राजक्कमंगलम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

    सोशल मीडिया पर दिखावा बना मुसीबत
    बता दें कि चोरी की यह घटना मधुमिता द्वारा अपने यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपने घर के पूजा कक्ष में रखे भारी सोने के गहनों और पैसों की गड्डियों का वीडियो शेयर करने के कुछ ही दिनों बाद हुई।

    CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
    जिला पुलिस अधीक्षक अनसुर नागर के आदेश पर चोरों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। चोरी की जगह से फिंगरप्रिंट इकट्ठा करने के लिए फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स को बुलाया गया है और जांच तेज कर दी गई है। चोरी हुए गहनों और कैश की कुल कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी गई है। इलाके से CCTV फुटेज इकट्ठा करने और मोबाइल टावर डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि चोरों तक पहुंचा जा सके।

  • CG बाल आयोग की बड़ी उपलब्धि, ‘रक्षक’ को गोल्ड अवार्ड

    CG बाल आयोग की बड़ी उपलब्धि, ‘रक्षक’ को गोल्ड अवार्ड

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। आयोग के अभिनव नवाचार ‘रक्षक’ कार्यक्रम को देश के प्रतिष्ठित SKOCH गोल्डन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

    बाल अधिकारों के क्षेत्र में यह पुरस्कार पाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि अवार्ड के लिए चयन प्रक्रिया काफी कठोर थी। सर्वप्रथम आयोग की ओर से जूरी के समक्ष ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसके बाद कड़े परीक्षण के उपरांत इसे गोल्ड श्रेणी के लिए चुना गया है। SKOCH गोल्डन अवार्ड प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुनीता नारायण, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुटरेजा, भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व महासचिव भरत लाल की गरिमामयी उपस्थिति में SKOCH ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर द्वारा प्रदान किया गया।

    SKOCH अवार्ड क्या है?
    SKOCH ग्रुप 1997 से कार्यरत देश का एक प्रमुख स्वतंत्र थिंक-टैंक है। यह वर्ष 2003 से सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्रदान करता है, जिसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिना जाता है।

    क्या है ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम?
    ‘रक्षक’ का पूरा नाम Post Graduation Diploma in Protection of Child Rights (PGDPCR) है। यह एक वर्षीय (2 सेमेस्टर) डिप्लोमा कोर्स है, जिसकी न्यूनतम योग्यता स्नातक है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी को देखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रैक्टिकल मॉडल है।

    छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं लेंगे, बल्कि आयोग की संवाद इकाइयों के माध्यम से बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड केयर संस्थानों और स्वैच्छिक संगठनों के साथ सीधे जुड़कर फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर कार्य करेंगे। पाठ्यक्रम में पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम 2015, बाल विवाह एवं बाल श्रम प्रतिषेध, दत्तक ग्रहण कानून, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और पुनर्वास योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में उनके बोर्ड/परिषद की अनुमति से प्रारंभ किया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए बाल संरक्षण, काउंसलिंग और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

  • एंटी-इनकंबेंसी पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, चुनावी रिकॉर्ड पर नजर

    एंटी-इनकंबेंसी पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, चुनावी रिकॉर्ड पर नजर

    नई दिल्ली
    एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ताधारी के खिलाफ माहौल. जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा चुनाव से पहले या फिर चुनाव परिणामों के विश्लेषण में की जाती है. खासतौर पर तब, जब कोई पार्टी चुनाव में अपनी सत्ता न बचा पाई हो. लेकिन, जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, तब से लोकसभा चुनाव ही नहीं, विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा जिस शब्द के इर्द-गिर्द होती है, वह है- प्रो इनकंबेंसी. खासकर उत्तर भारत, और उसमें भी हिंदी पट्टी वाले राज्यों में. राहुल गांधी इसे असाधारण मानते हैं. कहते हैं यह स्वाभाविक नहीं है. ये साजिश है. चुनाव आयुक्तों के खुलासे के बाद यह साबित हो गया है। 

    राहुल गांधी कहते हैं कि देश के बड़े-बड़े राजनेता एंटी-इनकंबेंसी का शिकार बने हैं. चुनाव हारते रहे हैं. लेकिन, मोदी और शाह अपने भाषणों में 50 साल, 30 साल, 15 साल सरकार में बने रहने की बात करते हैं. ऐसा क्या है कि इनके मामले में एंटी-इनकंबेंसी काम नहीं करती. वे इसके पीछे चुनाव आयोग की कथित बेइमानी को दोष देते हैं। 

    DUSU का सबक

    लेकिन, उनका ये लॉजिक हफ्ताभर पहले आए दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव नतीजों (DUSU election results) में धराशायी हो जाता है. जहां कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI चारों पदों पर चारों खाने चित्त हो जाती है. उस ABVP के सामने जो लंबे अरसे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ पर काबिज है। 

    ये भी नहीं कहा जा सकता कि चुनाव में धांधली हुई है. क्योंकि, DUSU के चुनाव तो ज्ञानेश कुमार वाला चुनाव आयोग नहीं करवाता. यानी, तमाम Gen-Z आंदोलन, पेपर लीक के मुद्दे, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बावजूद बीजेपी समर्थित ABVP अपनी बात छात्रों तक पहुंचाने में कामयाब रहता है. और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों की झड़ी लगा देने वाले राहुल गांधी की पार्टी नाकाम. ऐसा इसलिए क्योंकि, सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी से चुनाव नहीं जीता जाता. चुनाव मैनेजमेंट से जीता जाता है. जिसमें उम्मीदवारों का चयन, सत्ता पक्ष के खिलाफ गठबंधन, और भी कई गुणा-भाग काम आता है। 

    दूसरों पर एंटी-इनकंबेंसी मढ़ना भी कला
    कोई जरूरी नहीं कि किसी सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी हो ही. या, उसने ऐसा कुछ बुरा किया हो जिसे एंटी-इनकंबेंसी कहा जा सके. लेकिन, यह विपक्ष की खूबी होती है कि वह सत्ता पक्ष के सिर पर कोई ऐसा ठप्पा मढ़ दे, जो उसे जनविरोधी साबित कर दे. जैसे, 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने काफी हद तक ये नैरेटिव चलाने में कामयाबी हासिल की कि यदि नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आई तो वह संविधान बदल देगी। 

    जहां एंटी-इनकंबेंसी ‘आउट ऑफ कोर्स’ है
    राहुल गांधी अपने भाषण में राजस्थान, हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु जैसे राज्यों का हवाला देते हैं, जहां पहले हर चुनाव में वोटर सत्ताधारी पार्टी को बदल देते थे. लेकिन, बार-बार सत्ता में पार्टियों को बदलना चुनाव की आदर्श स्थिति नहीं है. इसका मतलब यह है कि उनके पास एक स्थायी ऑप्शन नहीं है. वह जल्दी-जल्दी ऊब जाते हैं. ऐसा यूपी, बिहार ही नहीं, देश के कई राज्यों में होता रहा. फिर, वोटरों को जिस भी पार्टी या नेता में उन्हें स्थायी समाधान मिला, उन्होंने लंबे समय तक उन्हें सत्ता सौंप दी। 

    जैसे, गुजरात में नरेंद्र मोदी, मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह, बिहार में नीतीश कुमार, यूपी में योगी आदित्यनाथ, त्रिपुरा में माणिक सरकार, ओडिशा में नवीन पटनायक. ये भी अलग-अलग पार्टियों के नेता था, लेकिन इन्होंने एंटी-इनकंबेंसी को ‘आउट ऑफ कोर्स’ शब्द बना दिया. यूपी में योगी को अगर ‘बुल्डोजर बाबा’ कहा जाता है, तो उसका फायदा उन्हें प्रो-इनकंबेंसी के रूप में मिलता है। 

    कुल मिलाकर, एंटी-इनकंबेंसी एक पेड़ पर लगा हुआ फल है. जिसे नेताओं को चुनाव से पहले मेहनत करके डाली पर चढ़कर तोड़ना होता है. बहुत किस्मत वालों की झोली में ही यह सीधा आकर गिरता है. होशियार सत्ताधारी अपनी एंटी-इनकंबेंसी के इस फल को पेड़ पर ही या तो सड़ा देते हैं, या फिर अपने नैरेटिव के पत्तों में छुपा लेते हैं. राहुल गांधी को एंटी-इनकंबेंसी का फायदा चुनाव से पहले मेहनत और सियासी गणित से हासिल हो सकता है. चुनाव हार गए तो सिर्फ इनकंबेंसी के एंटी बातें ही रह जाती हैं. जो राहुल फिलहाल कर रहे। हैं। 

    हालांकि, बीजेपी ने संविधान बदलने की कोई मंशा जाहिर नहीं की थी, सिवाय उसके कुछेक नेताओं के बयान के. बीजेपी ने बहुत भरोसा दिलाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा. लेकिन, दलित वोटरों ने विपक्ष का नैरेटिव स्वीकार किया, और यूपी जैसे राज्य में बीजेपी को बड़ा नुकसान पहुंचाया। 

    ‘मिस्टर बंटाधार’, ‘जंगल-राज’, ‘माफिया-राज’ का ठप्पा
    अब आते हैं कि यूपी, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की ओर जहां बीजेपी या एनडीए दल लगातार सत्ता पर काबिज हैं. बेशक, इन सरकारों के कई पहलू एंटी-इनकंबेंसी का कारण बन सकते थे. लेकिन, यहां पर बीजेपी और एनडीए दल अपने विरोधियों की पुरानी सरकारों की एंटी-इनकंबेंसी वोटरों के मनमस्तिष्क में ऐसी बैठाई है कि हर चुनाव में सत्ता पक्ष पर हमलावर होने के बजाय विपक्ष अपने खिलाफ नैरेटिव की ही सफाई देता रह जाता है। 

    मध्य प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बहुत बुरी पराजय हुई. चुनाव जीतने वाली उमा भारती ने अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम रख दिया- ‘मिस्टर बंटाधार’. दिग्विजय और कांग्रेस पर यह लेबल इतना बुरा चिपका, कि अगले कई चुनावों तक बीजेपी यही दोहराती रही कि यदि कांग्रेस जीती तो मिस्टर बंटाधार वाला दौर वापस आ जाएगा. ये बिल्कुल वैसा ही है, जैसे बिहार के हर चुनाव में बीजेपी और एनडीए के नेता राजद और लालू के दौर वाले ‘जंगल राज’ की याद दिलाते हैं और यूपी के हर चुनाव में मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी के दौर का ‘माफिया राज’ चर्चा में आ जाता है. और बीजेपी के इस नैरेटिव ने उसकी कांग्रेस, राजद और सपा जैसी पार्टियों को डिफेंसिव बना दिया। 

    चैलेंजर का सरेंडर
    अब आते हैं उस ट्रेंड पर, जहां एंटी-इनकंबेंसी को भुनाना तो छोड़िए, विपक्षी दल के रूप में पार्टियों ने सत्ता पक्ष के आगे सरेंडर ही कर दिया. तमिलनाडु में कांग्रेस की सरकार आखिरी बार 1967 में बनी थी. उसके बाद वह न सिर्फ सत्ता से बाहर हुई, वह चैलेंजर भी नहीं रही. पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस का यही हाल हुआ. 1977 में वामपंथी दलों ने वहां की सत्ता पर ऐसा कब्जा जमाया कि वह कांग्रेस हाशिये से भी बाहर हो गई. गुजरात, ओडिशा जैसे राज्यों में भी कांग्रेस ने अपना वजूद खो दिया। 

  • डीपफेक से कोर्ट तक बढ़ी चुनौती! ग्वालियर में जजों का सम्मेलन, AI और नए कानूनों पर हुई चर्चा

    डीपफेक से कोर्ट तक बढ़ी चुनौती! ग्वालियर में जजों का सम्मेलन, AI और नए कानूनों पर हुई चर्चा

    ग्वालियर 

    ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन का शनिवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि न्यायदान केवल कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है। न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। उनके अनुसार, केवल जानना अमूर्त है, जबकि समझना उस ज्ञान का वास्तविक उपयोग है।

    उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है। सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (बॉम्बे), गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक, रजिस्ट्री के अधिकारी और चारों राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    अनुभव से ज्यादा जरूरी नई परिस्थितियों को समझना

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा किसी निश्चित पाठ्यक्रम या सिलेबस तक सीमित नहीं है। इसका दायरा न्यायाधीश की सोच और समझ पर निर्भर करता है। वर्षों का अनुभव यह बताता है कि अतीत में क्या देखा है, लेकिन सच्ची शिक्षा यह सिखाती है कि अब तक सामने नहीं आई परिस्थितियों से कैसे निपटना है।

    उन्होंने कहा कि समाज लगातार बदल रहा है, इसलिए न्यायपालिका को भी अपने वैचारिक दायरे का विस्तार करते रहना होगा।

    डीपफेक के दौर में असली-नकली साक्ष्य पहचानना चुनौती

    तकनीक के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि आज अदालतों के सामने ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना अधिकांश न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर की शुरुआत में नहीं किया था। सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है।

    उन्होंने कहा कि साक्ष्य कृत्रिम हो सकते हैं और उन्हें अदालत में पेश करने वाले भी तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में न्यायपालिका को आधुनिक डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं को समझना होगा।

    पुराने कानूनों की नई व्याख्या की जरूरत

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि अपराधी जब तकनीक के इस्तेमाल में अधिक सक्षम और शातिर हो रहे हैं, तो न्यायाधीशों को भी दशकों पुराने कानूनों की व्यावहारिक और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या तलाशनी होगी।

    उन्होंने भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश और समाज के सामने जब भी नई चुनौतियां आई हैं, न्यायपालिका ने मजबूती से उनका सामना किया है और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई है।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश, मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक दिनेश चंद्र लाल सहित जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और चारों राज्यों के न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।

    इन मुद्दों पर चल रहा मंथन

    •     न्यायिक शिक्षा को बदलती कानूनी और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर।
    •     जजों को कानून के साथ सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को समझने की जरूरत।
    •     न्यायिक प्रशिक्षण में निष्पक्षता, समानता और संवेदनशीलता को शामिल करने की बात।
    •     जजों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखते रहने की जरूरत।
    •     न्यायिक शिक्षा में Ethics, Logic और Psychology को शामिल करने पर जोर।
    •     DNA रिपोर्ट, वॉयस सैंपल और डिजिटल सबूतों की समझ के लिए तकनीकी प्रशिक्षण जरूरी।
    •     डिजिटल दौर में अपराधों की जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट अहम सबूत।
    •     इलेक्ट्रॉनिक सबूत की विश्वसनीयता समझने के लिए जांच और न्यायिक अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण जरूरी।
    •     फॉरेंसिक लैब, पुलिस जांच और जेल व्यवस्था समझने के लिए ज्यूडिशियल अधिकारियों की फील्ड ट्रेनिंग का सुझाव।
    •     मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का उल्लेख।
    •     Judicial Academy में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर।
    •     ADR और Mediation को बढ़ावा देने की जरूरत।
  • Asian Games: कबड्डी में भारत का स्वर्णिम सफर जारी, फाइनल में ईरान को हराकर रचा बड़ा इतिहास

    Asian Games: कबड्डी में भारत का स्वर्णिम सफर जारी, फाइनल में ईरान को हराकर रचा बड़ा इतिहास

    नागोया

    भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया. भारतीय टीम ने फाइनल में ईरान को हराकर 9वीं बार एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया. कांटे के मुकाबले में भारत ने ईरान को फाइनल में 40-34 से हराया. इससे पहले भारत की महिला टीम ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया. भारत के लिए एशियन गेम्स में आज दिन शानदार रहा. मेंस और विमेंस कबड्डी में भारत ने दो गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास कायम किया. भारत के इस एशियाई खेलों में 4 गोल्ड सहित कुल 28 पदक हो गए हैं और मेडल टैली में भारत 12वें से 10वें नंबर पर पहुंच गया है। 

    भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे हाफ में जोरदार वापसी की. ईरान के खिलाफ पहले हाफ में पिछड़ने के बाद भारत ने आक्रामक खेल दिखाया. और ईरान की टीम को ऑलआउट कर बढ़त बनाई. मैच खत्म होने में जब 10 मिनट बचा था तब भारत ने ईरान पर पांच अंकों की बढ़त बना रखी थी.  ईरानी खेमा भारत की वापसी से दबाव में आ गया. भारत ने इसके बाद बढ़त को मजबूत किया. शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत  लगातार ईरान पर दबाव बढ़ाते रखा। 

    खिताबी मुकाबले के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच जबरदस्त भिड़ंत देखने को मिली. मैच की शुरुआत में ईरान ने आक्रामक खेल दिखाते हुए दबाव बनाया, लेकिन भारतीय टीम ने शानदार वापसी की. भारत ने मुश्किल समय में बेहतरीन सुपर टैकल के दम पर अंक जुटाए और ईरान पर बढ़त बनाई. हालांकि, ईरानी खिलाड़ियों ने पलटवार करते हुए भारत को ऑलआउट कर दिया और 14-13 की बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद भारत ने वापसी के प्रयास जारी रखे, लेकिन पहला हाफ खत्म होने तक ईरान 18-17 से मामूली बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। 

    मैच के आखिरी मिनटों में ईरान ने स्कोर को बराबर करने के प्रयास में कई गलतियां की, जिसका भरपूर फायदा भारतीय टीम को मिला। भारत ने अंत में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताबी मुकाबले में ईरान को 40-34 से हराते हुए लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
    पिछले एशियन गेम्स में भी भारतीय पुरुष टीम ईरान को ही हराकर चैंपियन बनी थी। इससे पहले, महिला कबड्डी टीम ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। फाइनल में देश की बेटियों ने ईरान को कड़े मुकाबले में 37-34 से शिकस्त दी।

    भारतीय टीम ने की धमाकेदार वापसी और जीत लिया गोल्ड मेडल
    यहां से फिर भारतीय खिलाड़ियों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बचे समय में ईरान पर दबदबा बनाए रखा और आखिर में भारत ने ईरान को 40-34 के अंतर से हराकर एशियन गेम्स में अपना 9वां गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की, भारतीय खिलाड़ी जीत के साथ जश्न मनाने लगे. एक बार फिर भारतीय पुरूष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल का इतिहास जीतकर ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया. दर्शक झूम रहे थे. भारत को अबतक एशियन गेम्स में यह चौथा गोल्ड मेडल मिला है। 

    एशियन गेम्स में भारत की कबड्डी टीम का दबदबा
    एशियाई गेम्स में भारत कबड्डी का पावरहाउस रहा है. 1990 में जब से कबड्डी को मेडल वाला खेल बनाया गया है, तब से भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने इस खेल में अपना दबदबा बनाए रखा है और कुल मिलाकर 12 गोल्ड मेडल, 1 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं. पुरुष कबड्डी टीम ने अबतक 9 में से 8 गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की है. ऐसा कर उन्होंने खुद को एशिया की सबसे मजबूत कबड्डी टीम के तौर पर स्थापित किया. हालांकि 2018 में टीम गोल्ड मेडल नहीं जीत पाई, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए हांगझोऊ एशियाई गेम्स में फिर से खिताब अपने नाम किया था। 

    भारत ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को हराकर फाइनल का टिकट कटाया था 
    भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 66-28 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी थी. मैच की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने अपना दबदबा बनाना शुरू कर दिया था. शुरुआती पांच मिनट के भीतर ही भारत ने 7-1 की बढ़त बना ली थी. हालांकि, इसके बाद थाईलैंड के स्टार खिलाड़ी धीरादत चाईसित ने कुछ समय के लिए भारतीय टीम को चुनौती दी. धीरादत ने एक शानदार रेड में तीन अंक हासिल कर भारत को ऑल-आउट कर दिया और अंतर को 14-23 तक ला दिया. धीरादत की इस जुझारू कोशिश के बावजूद भारतीय टीम ने अपनी लय नहीं खोई. हाफ-टाइम तक भारत ने 37-18 से बढ़त बनाए रखी. मैच का दूसरा हाफ पूरी तरह से भारत के नाम रहा. मुकाबले में 11 मिनट शेष रहते ही भारत ने 50 अंकों का आंकड़ा पार कर लिया. थाईलैंड को वापसी का कोई मौका न देते हुए भारत ने मुकाबला 66-28 से अपने नाम कर लिया। 

  • वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा: जितिन प्रसाद

    वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा: जितिन प्रसाद

    इलेक्ट्रॉनिक्स से एआई और सेमीकंडक्टर तक, यूपी बनेगा देश का नंबर-1 टेक्नोलॉजी हब: जितिन प्रसाद

    केंद्रीय मंत्री बोले- उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर, डबल इंजन सरकार के समन्वय से तेज हो रहा बदलाव

    वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा: जितिन प्रसाद

    ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर है। यह बात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 'यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख हब बनाना है और इसके लिए राज्य में तेजी से जरूरी इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।

    जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय वाली डबल इंजन सरकार इस बदलाव को गति दे रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और ट्रेड देश की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण इंजन हैं और उत्तर प्रदेश इनके माध्यम से नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकता है।

    नोएडा से आगे पूरे यूपी में टेक्नोलॉजी का विस्तार

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब प्रयास केवल नोएडा तक निवेश सीमित रखने का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी के अवसर पैदा करने का है। इसका सीधा लाभ राज्य के युवाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सैमसंग और योटा जैसे बड़े निवेश, डाटा सेंटर्स, एआई लैब्स तथा अन्य टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर उत्तर प्रदेश में बन रहे नए इकोसिस्टम की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो।

    असेंबली से कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ेगा यूपी

    जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत अब केवल उत्पादों की असेंबली करने वाला देश नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहल के जरिए देश कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजाइन क्षमता और प्रतिभा को दुनिया पहले से पहचानती है। अब इसी ताकत के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण तथा उन्हें घरेलू और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना इस विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    सरकारी मदद का लाभ लें, लेकिन आत्मनिर्भर बनें उद्योग

    केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी विकास को गति देने का माध्यम हैं, लेकिन उद्योगों की दीर्घकालिक सफलता उनकी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करेगी। सरकार जमीन, नीतियां, मंजूरियां और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उद्योगों को अंततः कॉम्पिटेटिव और सेल्फ सस्टेनिंग बनना होगा।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार उद्योगों की जरूरतों को समझते हुए सक्रिय और गुड गवर्नेंस के साथ काम कर रही है। निवेशकों को सुरक्षित और स्थिर नीतिगत वातावरण देना जरूरी है, ताकि वे लंबी अवधि के फैसले ले सकें।

    एआई से बढ़ेगी एमएसएमई की उत्पादकता

    जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एआई का इस्तेमाल केवल तकनीक अपनाने के लिए नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी, एफिशिएंसी और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एआई के माध्यम से कोई एमएसएमई अपनी लागत कम करता है या उत्पादकता बढ़ाता है तो यही तकनीक का वास्तविक लाभ होगा।

    उन्होंने युवाओं को एआई इनोवेटर्स, रिसचर्स और एडॉप्टर्स के रूप में तैयार करने की जरूरत बताई। साथ ही आईआईटी कानपुर  समेत शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल पर जोर दिया।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए अवसर का यह महत्वपूर्ण दौर है। आने वाले वर्षों की योजना आज से बनानी होगी, ताकि राज्य की युवा पीढ़ी को एक ऐसा इकोसिस्टम मिल सके जो उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस के रूप में स्थापित करे।

    नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर में भी बढ़ेगा जीसीसी का विस्तार: आलोक कुमार

    उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने कहा कि राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पर विशेष फोकस किया जा रहा है। नोएडा में पहले से जीसीसी मौजूद हैं, जबकि कुछ जीसीसी ने लखनऊ में भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई जीसीसी पालिसी और आईटी पॉलिसी के जरिए अब नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में भी अधिक जीसीसी आकर्षित करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में आईबीएम समेत कई आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियां मौजूद हैं। राज्य की जीसीसी और आईटी नीतियों को अन्य राज्यों की नीतियों के अनुरूप मजबूत बनाया गया है तथा आईटी और आईटी एनेबल्ड सर्विसेज (आईटीईएस) को पहले ही इंडस्ट्री स्टेटस प्रदान किया जा चुका है।

  • मुख्यमंत्री ने कहा – संजू देवी की उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए बनेगी प्रेरणा

    मुख्यमंत्री ने कहा – संजू देवी की उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए बनेगी प्रेरणा

    छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी ने बढ़ाया देश-प्रदेश का गौरव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्टार खिलाड़ी संजू देवी से फोन पर की आत्मीय बातचीत, स्वर्णिम सफलता के लिए दी बधाई

    मुख्यमंत्री ने कहा – संजू देवी की उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए बनेगी प्रेरणा

    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ईरान को पराजित कर जीता स्वर्ण पदक

    भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत में कोरबा की संजू देवी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य एवं छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की निवासी सुसंजू देवी को फोन कर इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने सुसंजू देवी से आत्मीय संवाद करते हुए उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि उनकी इस उपलब्धि से पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है।

    मुख्यमंत्री साय ने सुसंजू देवी से कहा कि आपने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और शानदार प्रदर्शन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम सफलता प्रत्येक देशवासी के लिए गर्व का क्षण है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में छत्तीसगढ़ की बेटी की महत्वपूर्ण भागीदारी प्रदेश के लिए विशेष गौरव की बात है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां आज शिक्षा, खेल सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य का परचम लहरा रही हैं। कोरबा की संजू देवी ने अपनी मेहनत और खेल कौशल के बल पर राष्ट्रीय टीम में स्थान बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी सफलता प्रदेश के उन हजारों युवा खिलाड़ियों, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो खेल के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने का सपना देख रहे हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर, प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के गांवों, आदिवासी अंचलों और छोटे शहरों में मौजूद खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिले और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करें।
    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया उपस्थित थे।

    उल्लेखनीय है कि जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में ईरान को पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। भारतीय टीम की इस स्वर्णिम सफलता में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की सुसंजू देवी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुसंजू देवी भारतीय राष्ट्रीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने भारतीय महिला कबड्डी टीम के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ को भी इस शानदार सफलता के लिए बधाई दी और टीम के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय खिलाड़ी आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।

  • चंडालपुर का बदला नाम, ‘चंदनपुर’ की नई पहचान पर मिली मंजूरी

    चंडालपुर का बदला नाम, ‘चंदनपुर’ की नई पहचान पर मिली मंजूरी

    वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, राजपत्र लेकर गांव पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, चंदनपुर को मिली नई पहचान

    राजपत्र की प्रति सौंपकर उप मुख्यमंत्री ने दी बधाई, चंडालपुर अब कहलाएगा ‘चंदनपुर’

    गांव का नाम केवल पहचान नहीं, जनभावनाओं से जुड़ा होता है– उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा 

    गांव के विकास के लिए 11.70 लाख रुपए की घोषणा, दस्तावेजों में नाम बदलने लगेगा विशेष शिविर

    रायपुर, 
     तेज बारिश के बीच शुक्रवार देर रात उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा गांव की नई पहचान का राजपत्र लेकर चंदनपुर पहुंचे। लंबे समय से नाम परिवर्तन की मांग कर रहे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उन्होंने राजपत्र की प्रति सौंपते हुए उन्हें बधाई दी। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण स्वागत के लिए जुटे रहे। मांग पूरी होने की खुशी में ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और उप मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। कबीरधाम जिले के ग्राम चंडालपुर का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर चंदनपुर कर दिया गया है। 

         नाम परिवर्तन की खुशी के बीच उप मुख्यमंत्री ने गांव के विकास कार्यों के लिए सीसी रोड और सामुदायिक भवन के लिए 11.70 लाख रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए विशेष शिविर लगाया जाएगा। इसमें आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों में गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी, ताकि ग्रामीणों को इसके लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। छत्तीसगढ़ शासन ने ग्राम चंदनपुर के नाम परिवर्तन का राजपत्र में विधिवत प्रकाशन कर दिया है। इसके साथ ही गांव का नया नाम अब सरकारी अभिलेखों और शासकीय वेब पोर्टल में स्थायी रूप से दर्ज रहेगा।

         उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ग्रामवासियों की ओर से लंबे समय से गांव का नाम बदलने की मांग की जा रही थी। स्थानीय लोगों की भावना और मांग को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया। इसके बाद मंत्रिमंडल स्तर पर चर्चा हुई, राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई और अंततः राजपत्र में इसका प्रकाशन किया गया। उन्होंने कहा कि राजपत्र में प्रकाशन के बाद अब ‘चंदनपुर’ नाम सरकारी अभिलेखों और संबंधित शासकीय वेब पोर्टलों में दर्ज रहेगा। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे भी अपने दैनिक व्यवहार और बोलचाल में गांव के नए नाम ‘चंदनपुर’ का उपयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां इसी नाम से गांव को जानें और इसकी पहचान आगे भी कायम रहे।

          उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के नाम केवल किसी स्थान की पहचान नहीं होते, बल्कि उनमें स्थानीय इतिहास, संस्कृति, परंपरा और जनभावनाएं भी जुड़ी होती हैं। चंदनपुर नाम से गांव को नई पहचान मिलना ग्रामवासियों की लंबे समय से चली आ रही भावना और मांग के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नाम परिवर्तन से क्षेत्र की स्थानीय पहचान और ग्रामवासियों की भावनाओं को मजबूती मिलेगी।

  • निवाड़ी-टीकमगढ़-छतरपुर में ऑरेंज अलर्ट, MP में भारी बारिश का दौर

    निवाड़ी-टीकमगढ़-छतरपुर में ऑरेंज अलर्ट, MP में भारी बारिश का दौर

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के जिलों में अगले 48 घंटे तेज बारिश का दौर बना रहेगा। IMD (मौसम केंद्र) के अनुसार, शनिवार को जबलपुर-रीवा समेत 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट है। निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    मूसलधार बारिश की चेतावनी को देखते हुए शनिवार को सतना में नर्सरी से कक्षा 8वीं तक और मैहर में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक की सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।

    इसके अलावा भिंड, दतिया, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, मंडला और डिंडौरी में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर में बूंदाबांदी हो सकती है।

    इसी तरह शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर और पन्ना में भी बूंदाबांदी का अनुमान है।

    पूर्वी MP में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम एक बार फिर एक्टिव है। गहरे अवदाब की तीव्रता भले ही लगातार कम हो रही हो, लेकिन इसकी उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में गति और इससे जुड़ी नमी पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।

    इसलिए अगले 48 घंटे विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम नागरिक स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखें। साथ ही नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवागमन से बचें।

    मानसून की विदाई को 5 दिन बचे
    एमपी में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक है। यानी, मानसून की विदाई को पांच दिन बचे हैं। आने वाले दिनों में मानूसन की विदाई होने लगेगी। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य बारिश से 2.2 इंच नीचे चल रहा प्रदेश
    IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी, 34.7 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.9 इंच (937.9 मिमी) की तुलना में 2.2 इंच कम है।

    वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बराबर और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा बराबर है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। शुक्रवार को भी आंकड़ा बराबर पर आ गया।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% कम पानी गिरा है।

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
    IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।