Tag: featured

  • Indian Navy Conference: हिंद महासागर में सुरक्षा पर फोकस, AI-ड्रोन्स की भूमिका पर चर्चा

    Indian Navy Conference: हिंद महासागर में सुरक्षा पर फोकस, AI-ड्रोन्स की भूमिका पर चर्चा

    नई दिल्ली
    नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर्स तीन दिनों तक देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन करेंगे. इसके लिए नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नौसेना भवन में आयोजित की जाएगा. नौसेना का यह सर्वोच्च स्तर का सम्मेलन है. यह केवल नियमित समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि सैन्य और रणनीतिक स्तर पर नौसेना की तैयारियों का व्यापक आकलन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। 

    कांफ्रेंस में नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ ऑपरेशनल तैनाती पर कार्यरत व एरिया कमांडर शामिल होंगे. इनके जरिए समुद्री अभियानों की तैयारियों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर व्यापक चर्चा होगी. साथ ही, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी संस्थागत संवाद किया जाएगा. यह वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स कांफ्रेंस का दूसरा संस्करण है. इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी हैं और समुद्री मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है. ऐसे में यहां भारतीय नौसेना की भूमिका सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रह सकती है। 

    नौसेना के अनुसार, देश के समुद्री हितों की सुरक्षा में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है. खास तौर पर ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के दौरान नौसेना ने जिस तरह समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े हितों की रक्षा के लिए अभियान चलाया है, उसने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे एक भरोसेमंद समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत किया है. भारतीय नौसेना लगातार हाई ऑपरेशनल स्तर पर काम कर रही है. ऐसे में सम्मेलन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण में नौसेना अपनी युद्धक क्षमता और परिचालन तैयारियों को किस तरह और मजबूत कर सकती है। 

    सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना के कमांडरों को संबोधित करेंगे. वह राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण और भारतीय नौसेना से देश की अपेक्षाओं पर अपनी बात रखेंगे. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थल सेनाध्यक्ष भी नौसेना कमांडरों के साथ संवाद करेंगे. इस पहल का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त अभियानों और सैन्य एकीकरण को और मजबूत करना है। 

    सम्मेलन के अगले दो दिनों में नौसेना प्रमुख और नौसेना के कमांडर-इन-चीफ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे. इनमें अभियान, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन और प्रशिक्षण जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं. इसके साथ ही युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. एआई, बड़े आंकड़ों का विश्लेषण, स्वायत्त और बिना चालक वाली प्रणालियां तथा साइबर अभियान जैसे क्षेत्र चर्चा के केंद्र में रहेंगे। 

    नौसेना का जोर अत्याधुनिक तकनीकों को केवल शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करने पर भी रहेगा. इसके लिए आधुनिक युद्ध की नई अवधारणाओं को अपनाने और तकनीकी क्षमता को तेजी से सैन्य ताकत में बदलने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया का आधार नौसेना के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे. इनमें संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार हैं. इन्हीं के जरिए सरकार के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप नौसेना की भविष्य की क्षमता को आकार देने पर जोर रहेगा। 

  • भोपाल का नया मास्टर प्लान आया, मॉल-शोरूम पर रोक; 27% होगा ग्रीन एरिया

    भोपाल का नया मास्टर प्लान आया, मॉल-शोरूम पर रोक; 27% होगा ग्रीन एरिया

    भोपाल
     राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित महानगर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। करीब 21 साल की देरी से आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है।

    नए मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में शोरूम और शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। वहीं, शहर में हरित क्षेत्र को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।भोपाल के मास्टर प्लान 2047 का प्रारूप आखिरकार जारी हो गया है। पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था और उसकी योजना अवधि 2005 तक थी। इसके बाद नया प्लान लागू नहीं हो सका। यानी कानूनी तौर पर तय ही नहीं था कि शहर के किस हिस्से में क्या बन सकता है। 

    विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल भी बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर कर दिया गया है। वर्ष 2005 की विकास योजना में यह क्षेत्रफल 25,351 हेक्टेयर प्रस्तावित था। यानी नए प्रारूप में विकास योग्य क्षेत्र करीब ढाई गुना हो गया है।

    1016 वर्ग किमी में फैलेगा निवेश क्षेत्र, 254 गांव होंगे शामिल
    मास्टर प्लान के नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र का बड़ा विस्तार किया गया है। इसे बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे। इसके साथ ही शहर के विकास को गति देने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर और असीमित एफएआर का प्रावधान भी किया गया है।

    मास्टर प्लान के मसौदे पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन पर विचार के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

    21 साल की देरी से बढ़ी थीं विकास संबंधी जटिलताएं
    भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित था। इस देरी के कारण शहर में निर्माण, भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की जटिलताएं पैदा हुईं। इस मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' ने अभियान चलाकर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद बढ़ गया। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मास्टर प्लान लाने की बात कही थी। अब मसौदा जारी होने के बाद शहर के विकास को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है।

    सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां
        – 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी। ऐसे क्षेत्र में केवल डाक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल जैसी पेशेवर गतिविधियां ही सिर्फ एक मंजिल तक चलाई जा सकेंगी।

        – 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी शोरूम, होटल-कैफे नहीं खुलेंगे। यहां सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी, मेडिकल आदि संचालित किए जा सकेंगे।

        – 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, होटल-कैफे, कोचिंग संस्थान और शोरूम का संचालन किया जा सके।

        – 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर शापिंग काम्प्लेक्स संचालित किया जा सकेगा।

    हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर, व्यवस्थित विकास की तैयारी
    भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विस्तार को प्रमुखता दी गई है। हरित क्षेत्र को 12 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। निवेश क्षेत्र के विस्तार, नए ग्रोथ कॉरिडोर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर नियम तय होने से शहर के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना है।

    मसौदे पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मास्टर प्लान सामने आएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम स्वरूप और उनके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी।

    पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव 51 किलोमीटर के 'ग्रोथ कॉरिडोर' से आएगा, जो शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से जोड़ेगा।

        इस पर BRT यानी सिर्फ बसों के लिए रिजर्व लेन बनेगी, ताकि बसें जाम में न फंसें।
        भविष्य में इसे मेट्रो जैसी सेवा में भी बदला जा सकता है।
        इसके इर्द-गिर्द 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) का कॉन्सेप्ट लगेगा यानी जहां बस या मेट्रो जैसी सुविधा होगी, वहीं आसपास घर, दफ्तर और बाकी जरूरी सुविधाएं भी पास-पास बसाई जाएंगी।
        यह सिर्फ आने-जाने की सड़क नहीं होगी, इसके आसपास होटल, अस्पताल, IT-AI-डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक बाजार, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और शिक्षा संस्थान भी विकसित होंगे।
        पूरे शहर की निगरानी के लिए 'डिजिटल ट्विन सिटी' सिस्टम भी बनेगा, यानी शहर का डिजिटल नक्शा बनाकर अवैध निर्माण या जाम जैसी समस्याएं समय रहते पकड़ी जा सकेंगी।

    18 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो गाड़ी रिपेयर शॉप, शोरूम, ऑडिटोरियम (100 सीट तक), कॉल सेंटर जैसी बड़ी गतिविधियां भी शुरू हो सकती हैं।

    यानी अगर आपका घर संकरी गली में है, तो आसपास सीमित सुविधाएं ही आएंगी। चौड़ी सड़क पर है, तो रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज घर के पास मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। नए आवासीय इलाकों को शुरू से ही इसी सोच के साथ बसाने का प्रस्ताव है, ताकि स्कूल, दुकान, स्वास्थ्य सुविधा और पार्किंग घर के पास ही मिले।

    अगर आप पुराने शहर में रहते हैं और ऊंचाई-सीमा के चलते नई मंजिल नहीं जोड़ पा रहे, तो सरकार आपको 'हेरिटेज TDR' नाम का एक प्रमाणपत्र देगी। यह असल में एक निर्माण करने का हक है, जिसे आप बेच सकते हैं। अगर आप किसी पुरानी अपार्टमेंट सोसाइटी में रहते हैं और 70% पड़ोसी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग तोड़कर नई बनवाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा।

    यह समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल का रोडमैप

        राजधानी की यह विकास योजना (मास्टर प्लान) भोपाल की प्राकृतिक धरोहर- भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। इसमें हरित टीडीआर का बेहतर प्रविधान किया गया है, इससे हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों की क्षतिपूर्ति के साथ विकासकर्ताओं को टीडीआर के जरिये अतिरिक्त विकास की सुविधा भी मिल सकेगी। समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल के संकल्प की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रारूप पर नागरिकगण अपनी आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।

        – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

     

     

  • PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हुआ तो कटेगा ₹10 हजार का चालान, 1 अक्टूबर से शुरू होगी ड्राइव

    PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हुआ तो कटेगा ₹10 हजार का चालान, 1 अक्टूबर से शुरू होगी ड्राइव

    नई दिल्ली

    दिल्ली में गाड़ी चलाते हैं तो 1 अक्टूबर की तारीख याद रख लीजिए. क्योंकि अब सिर्फ गाड़ी का इंजन, ब्रेक और हॉर्न ही नहीं, आपकी जेब में रखा PUC सर्टिफिकेट भी सरकार की नजर में होगा. PUC वैलिड नहीं है तो मुश्किल बढ़ सकती है. दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अक्टूबर से इनवैलिड या एक्सपायर्ड PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों के लिए इंफोर्समेंट ड्राइव (Enforcement Drive) शुरू होगी. यानी सड़क पर निकलने से पहले यह देख लेना जरूरी होगा कि आपकी गाड़ी प्रदूषण जांच में पास है या नहीं। 

    दरअसल, सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की हवा खराब होने लगती है. और इस बार सरकार पहले से ही कड़ी तैयारी में है. दिल्ली ही हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने बुराड़ी में ऐसा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) भी शुरू किया है, जहां सालाना 1 लाख वाहनों की जांच हो सकेगी. मतलब दिल्ली की सड़कों पर अब प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान और कार्रवाई, दोनों पर निगरानी बढ़ने वाली है। 

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के लॉन्च के मौके पर कहा कि, "दिल्ली में 1 अक्टूबर से वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट से जुड़ा इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके तहत वाहनों के PUC certificate की वैधता की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार पूरे साल वायु प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग कदम उठा रही है और यह उसी दिशा में एक और पहल है। 

    सरकार PUC सेंटर्स की निगरानी और उनके काम करने के तरीके को भी ज्यादा इफेक्टिव और भरोसेमंद बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए तकनिकियों में बदलाव किया जाएगा और इसे और भी एडवांस बनाया जाएगा. ताकि PUC सर्टिफिकेट जारी करने के प्रोसेस और उसकी मॉनिटरिंग पर बेहतर नजर रखी जा सके। 

    कैमरों से निगरानी
    मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के सभी PUC सेंटर्स पर कैमरा लगाए जा रहे हैं. इन कैमरों की मदद से यह निगरानी की जाएगी कि PUC सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया सही तरीके से हो रही है या नहीं. सरकार का फोकस PUC सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनाने पर है. इससे उन वाहनों पर भी नजर रखने में मदद मिल सकती है, जिनके प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता खत्म हो चुकी है या जो तय प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतरते। 

    10,000 का चालान
    बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के वाहन चलाते हुए पकड़े जाने की स्थिति में वाहन चालक को मोटी चपत लग सकती है. अधिकारियों का कहना है कि, PUC नियमों का उल्लंघन करने के लिए 10,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है. इसलिए वाहन मालिकों को तत्काल अपने वाहनों के पीयूसी की जांच करनी चाहिए और यदि वैलिडिटी खत्म हो गई है या आने वाले दिनों में समाप्त होने वाली है तो समय से पहले PUC जांच करवा कर सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी है। 

    बुराड़ी में देश का सबसे बड़ा ATS
    रेखा गुप्ता ने बुराड़ी में जिस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया है, उसे उन्होंने देश का सबसे बड़ा ATS बताया है. इस स्टेशन के जरिए बड़ी संख्या में कमर्शियल व्हीकल्स की फिटनेस और पॉल्यूशन से जुड़ी जांच की जाएगी. सरकार के मुताबिक, इससे दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले ज्यादातर कमर्शियल वाहनों की आसानी से जांच की जा सकेगी. बुराड़ी ATS में हर साल 40,000 हैवी मोटर व्हीकल्स और 60,000 लाइट मोटर व्हीकल्स की जांच करने की क्षमता होगी. यानी यह स्टेशन सालाना कुल 1 लाख वाहनों की टेस्टिंग कर सकेगा। 

    ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर पंकज सिंह ने बताया कि बुराड़ी ATS में वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रोसेस के जरिए होगी. इस टेस्टिंग के दौरान ब्रेकिंग इफिसिएन्सी, सस्पेंशन परफॉर्मेंस, हेडलाइट कंडिशन, साइड-स्लिप और इमिशन लेवल जैसे पैरामीटर्स की जांच की जाएगी. इसके अलावा वाहनों के अंडरसाइड की भी जांच की जाएगी. इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम के जरिए यह तय हो सकेगा कि, उक्त वाहन शहर में चलने लायक है या नहीं। 

    दिल्ली सरकार के मुताबिक, बुराड़ी से पहले 3 सितंबर को तेहखंड में भी एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया था. इस ATS में हर साल करीब 72,000 वाहनों की जांच करने की क्षमता है. सरकार अब दिल्ली में ATS और PUC सेंटर्स के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है. एक तरफ ऑटोमेटेड टेस्टिंग के जरिए वाहनों की फिटनेस और इमिशन की जांच की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ PUC सेंटर्स पर कैमरा और टेक्नोलॉजी के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। 

  • 3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर दौरे पर CM साय, निवेशकों के सामने रखेंगे छत्तीसगढ़ का विजन

    3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर दौरे पर CM साय, निवेशकों के सामने रखेंगे छत्तीसगढ़ का विजन

    विदेश मंत्रालय द्वारा सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम 2026 के लिए छत्तीसगढ़ का चयन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

    3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे मुख्यमंत्री श्री साय, SING फोरम 2026 में रखेंगे छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाएं

    एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को वैश्विक मंच पर करेगा छत्तीसगढ़ प्रस्तुत

    कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास में सहयोग की संभावनाओं पर भी होगी चर्चा

    रायपुर
    विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर जाने वाले छत्तीसगढ़ के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में आयोजित होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेगा। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ को अपनी उपलब्धियों, विकास की संभावनाओं और निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही सिंगापुर के व्यापार जगत, उद्यमियों और निवेशकों के साथ भविष्य के सहयोग के लिए नए संबंध स्थापित करने की दिशा में भी पहल होगी।

    SING फोरम 2026 का यह पहला संस्करण है, जिसका आयोजन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रमुख और निवेशक एक मंच पर आएंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करना तथा व्यापार और निवेश के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय फोरम में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक निवेश संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगे। राज्य प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्यमियों के समक्ष रखने के साथ ही दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर संवाद किया जाएगा।

    कौशल विकास और हरित विकास में सहयोग पर रहेगा फोकस

    सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग के साथ वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े अनुभवों एवं संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि यह यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के नए रास्ते खोलने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध विशेषज्ञता, निवेश और नवाचार की संभावनाओं से छत्तीसगढ़ को जोड़कर विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं।

    उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री साय के साथ राज्य प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी)  उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।

  • राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

    राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रतीक बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में देश की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति  मुर्मु ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

    राष्ट्रपति  मुर्मु को मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र सौंपने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री  तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद  महेश कश्यप तथा संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन उपस्थित रहे।

    राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का अवसर

    मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के अवसर पर बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे को अनूठा उदाहरण बताया था। उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।

    ऐसे में बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय परंपराओं और लोक विरासत के लिए विशेष गौरव का अवसर होगी।

    मुरिया दरबार बस्तर की जीवंत सामाजिक परंपरा

    बस्तर दशहरा की परंपराओं में मुरिया दरबार का विशेष महत्व है। यह आयोजन बस्तर की सामाजिक एवं सामुदायिक व्यवस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है। मुरिया दरबार के माध्यम से बस्तर की परंपराओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है।

    बस्तर की संस्कृति और सामाजिक जीवन में मांझी एवं चालकी जैसे पारंपरिक पदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी मांझी और चालकी की सामाजिक जीवन तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया था।

    संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी पहचान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया में है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है।

    उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति  मुर्मु की उपस्थिति से बस्तर की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जाए।

     अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण है। 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति का स्वागत करना पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण होगा।

    बस्तर की संस्कृति से राष्ट्रपति का विशेष जुड़ाव

    महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की संस्कृति और जनजातीय विरासत से विशेष जुड़ाव रहा है। फरवरी 2026 में उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। अपने संबोधन में उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और गुफाओं को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बस्तर की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना आवश्यक है।

    जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित एवं संवर्धित करने और जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया था।

  • लता मंगेशकर जैसी महान विभूति का जन्म इंदौर की धरती पर होना हम सभी के लिए गौरव की बात

    लता मंगेशकर जैसी महान विभूति का जन्म इंदौर की धरती पर होना हम सभी के लिए गौरव की बात

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअली उपस्थिति में आज इंदौर में आयोजित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण सम्मान-2026 से सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक  शान्तनु मोइत्रा को विभूषित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संचालक संस्कृति  एन.पी. नामदेव ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर वर्चुअल रुप से संबोधित करते हुए कहा कि भारत रत्न से सम्मानित लता मंगेशकर के नाम पर स्थापित यह सम्मान अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित सम्मान के समान है। लता जी जैसी महान कलाकार की जन्मस्थली इंदौर होना पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज का यह समारोह जिस महान कलाकार की स्मृति में आयोजित हो रहा है, उनके लिए हम सभी के मन में विशेष श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को देश और दुनिया ने केवल एक गायिका के रूप में नहीं, बल्कि संगीत की एक ऐसी महान विभूति के रूप में स्वीकार किया, जिनके सुरों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति मिलती है।

    भक्ति से देशभक्ति और प्रेम से विरह तक हर भाव को दिया स्वर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लता जी के गीतों को हम भक्ति में भी गुनगुनाते हैं, देशभक्ति में भी स्मरण करते हैं। दोस्ती, मस्ती, प्रेम और विरह जीवन के हर भाव को उन्होंने अपनी मधुर आवाज से अमर कर दिया। उनके गायन में मां सरस्वती की अद्भुत कृपा दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर जी का नाम लेते ही रोम-रोम में एक अलग तरह का रोमांच और आनंद उत्पन्न होता है। उन्होंने 30 से अधिक भाषाओं और बोलियों में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। शास्त्रीय संगीत से लेकर सुगम संगीत, भक्ति संगीत से लेकर लोक संगीत तक उनके गायन की विविधता अद्भुत रही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लता जी के सुरों में कभी विचलन नहीं आया और उनके उच्चारण की शुद्धता भी असाधारण रही। ऐसा प्रतीत होता था मानो साक्षात मां सरस्वती हमारे बीच गा रही हों।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सहित राष्ट्रीय पर्वों पर लता जी के देशभक्ति गीत आज भी लोगों की आंखों में देशप्रेम के भाव से आंसू ला देते हैं। गणेश उत्सव हो अथवा नवरात्रि जैसे पर्व, उनके गीतों के बिना देश के उत्सवों की कल्पना अधूरी सी लगती है।

    शांतनु मोइत्रा की संगीत साधना को सराहा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित  शांतनु मोइत्रा की संगीत साधना की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें प्रदान करते हुए स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि शांतनु मोइत्रा ने अपनी संगीत प्रतिभा से देश के संगीत जगत को समृद्ध किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके चर्चित गीतों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्म खेल खेल में का गीत युवाओं में नई ऊर्जा और आशा का संचार करता है। इसी तरह बावरा मन देखने चला एक सपना जैसी रचना ने श्रोताओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि शांतनु मोइत्रा द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव स्तोत्र और राम-सिया भजन भी उन्हें विशेष रूप से पसंद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली कलाकारों को सम्मानित किया जाना मध्यप्रदेश सरकार के लिए भी गौरव की बात है। मालवा की धरती सदैव प्रतिभाओं को सम्मान देती रही है और यह आयोजन इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

    मध्यप्रदेश सदैव कला और प्रतिभा की धरती रही है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती महाकवि कालिदास और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान रचनाकारों की परंपरा से समृद्ध रही है। साहित्य, संगीत, कला और फिल्म जगत से भी अनेक महान प्रतिभाओं का संबंध मध्यप्रदेश से रहा है। महाकवि कालिदास की मेघदूत से लेकर आधुनिक रचनाधर्मिता तक मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा अत्यंत समृद्ध रही है।

    सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक  शान्तनु मोइत्रा ने कहा कि गीत- संगीत के क्षेत्र में विश्व में अपनी एक विशेष पहचान रखने वाली लता मंगेशकर जी के जन्म दिवस पर, उनकी जन्मस्थली पर, उनके नाम से स्थापित यह सम्मान मिलना बेहद गौरव का पल है। संगीतकार  मोइत्रा ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित किए जाने पर मध्यप्रदेश शासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लता जी के नाम से सम्मानित होना उनके लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने लता जी के साथ स्टूडियो में काम करने का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि चार पंक्तियों के गीत के लिए भी उन्होंने पूरी गंभीरता, तैयारी और समर्पण के साथ काम किया था। उन्होंने कहा कि लता जी से सबसे बड़ी सीख अपने काम के प्रति ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्टता की है। उन्होंने कहा कि आज भी हर गीत बनाते समय मन में यही भाव आता है कि लता जी इसे गातीं तो वह कैसा होता?।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअली उपस्थिति में वर्ष 2026 का राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान सुप्रतिष्ठित संगीत निर्देशक  शान्तनु मोइत्रा (मुंबई) को प्रदान किया गया। अलंकरण के पश्चात संगीत संध्या का आयोजन हुआ जिसमें सचेत-परम्परा एवं उनके दल ने एक से बढ़कर एक मधुर गीतों की प्रस्तुतियां दीं और श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

    गीत-संगीत के इस महत्वपूर्ण आयोजन में जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, संभागायुक्त  भास्कर लाक्षाकार, कलेक्टर  शिवम वर्मा, विधायकगण  रमेश मेंदोला, मती मालिनी गौड़ तथा  मधु वर्मा,  श्रवण सिंह चावड़ा सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

     

  • सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग अलर्ट, UPITS में ऑपरेशन कवच की जानकारी

    सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग अलर्ट, UPITS में ऑपरेशन कवच की जानकारी

    यूपीआईटीएस में दिखा परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा पर जोर, 28 से 30 सितंबर तक चलेगा ऑपरेशन कवच

    योगी सरकार में सुरक्षित और तकनीक आधारित परिवहन को मिल रहा बढ़ावा

    एनसीआर की हवा सुधारने की कवायद, ईओएल वाहनों को अधिकृत स्क्रैप केंद्रों तक पहुंचाए स्वामी: अमृत अभिजात

    बीएस-1 से बीएस-4 वाहनों के लिए परिवर्तन पोर्टल, वाहन स्वामियों से आवेदन की अपील

    52 सेवाएं फेसलेस और 40 ऑटो अप्रूवल, परिवहन विभाग में बढ़ा डिजिटल सुविधा का दायरा

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा
     योगी सरकार के कार्यकाल में परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, सुगम और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में भी देखने को मिल रही है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में परिवहन विभाग ने अपने स्टॉल के माध्यम से विभागीय सेवाओं, सड़क सुरक्षा और वाहन संबंधी नई व्यवस्थाओं की जानकारी दी। यहीं पर परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि सड़क सुरक्षा के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेश में अनधिकृत बसों के विरूद्ध ऑपरेशन कवच अभियान चलाया जाएगा।

    28 से 30 सितंबर तक ऑपरेशन कवच
    परिवहन विभाग की तकनीकी कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ ऑपरेशन कवच के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य परिवहन नियमों के अनुपालन को प्रभावी बनाना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

    एनसीआर के प्रदूषण पर ईओएल वाहनों पर फोकस
    उन्होंने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहनों को अधिकृत स्क्रैप केंद्र पर स्क्रैप कराने की अपील की। एनसीआर के वाहन स्वामियों से पुराने और निर्धारित मानकों के अनुरूप जीवन पूरा कर चुके वाहनों को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने का आग्रह किया, ताकि पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके।

    परिवर्तन पोर्टल से पुराने वाहनों को बदलने का लाभ
    उन्होंने परिवहन विभाग की परिवर्तन योजना की जानकारी देते हुए यूरो मानक बीएस 1,2,3 व 4 वाले वाहनों के स्वामियों से परिवर्तन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की अपील की। वहीं कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए यातायात नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया। लोगों से नियंत्रित गति से वाहन चलाने, दोपहिया पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने, शराब पीकर वाहन न चलाने व ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई।

    परिवहन विभाग ने बताया कि जनसुविधा के लिए उसकी 52 सेवाओं को फेसलेस किया गया है, जबकि 40 सेवाएं ऑटो अप्रूवल मोड में संचालित की जा रही हैं। ट्रेड शो में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी आधुनिक तकनीक और सिमुलेटर के जरिए युवाओं को जानकारी भी दी जा रही है।

  • मिशन रोजगार के तहत 10 दिन में चार बड़े कार्यक्रम, 6,672 युवाओं को मिले सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र

    मिशन रोजगार के तहत 10 दिन में चार बड़े कार्यक्रम, 6,672 युवाओं को मिले सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र

    नियुक्ति पत्र मिला तो छलकी खुशी, अपनी कहानी बताते हुए रुंधा युवाओं का गला
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला पत्र
     
    किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद तो किसी को बच्चे के भविष्य की चिंता से मिली राहत
     
    ससुराल की पहली महिला बनीं सरकारी कर्मचारी, श्रुति बोलीं- गर्भावस्था में भविष्य को लेकर थी चिंता, अब मिला भरोसा
     
    किसान परिवार के आदित्य को मिला प्रदेश की सेवा का मौका, ब्यूटी शाही बोलीं- नौकरी से परिवार की परिस्थितियां भी बदलेंगी
     
    मिशन रोजगार के तहत 10 दिन में चार बड़े कार्यक्रम, 6,672 युवाओं को मिले सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र
     
    लखनऊ

    सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र हाथ में आया तो किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी, किसी को अपने बच्चे के भविष्य की चिंता से राहत मिली। वर्षों की मेहनत के बाद नौकरी मिलने की खुशी साझा करते हुए कुछ अभ्यर्थी भावुक हुए तो बोलते-बोलते गला भी रुंध गया। मौका था सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
     
    मुख्यमंत्री ने 11 नवचयनित अभ्यर्थियों को मंच पर प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी संघर्ष यात्रा और परिवार की परिस्थितियां साझा कीं। उन्होंने चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया।
     
    ससुराल की पहली महिला जिसे मिली सरकारी नौकरी
    लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव ने बताया कि वह अपने ससुराल की पहली महिला हैं, जो सरकारी सेवा में जा रही हैं। गर्भावस्था के दौरान उन्हें भविष्य को लेकर चिंता रहती थी। नियुक्ति मिलने से उन्हें नई उम्मीद और आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।
     
    कुशीनगर के आदित्य सिंह किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में चयन से उन्हें प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही।
     

    गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। सरकारी नौकरी मिलने से वह जनसेवा के साथ परिवार की परिस्थितियों को भी बेहतर कर सकेंगी। अपनी बात रखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
     
    इन 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाने वालों में प्रयागराज के आशुतोष त्रिपाठी, आगरा के ओम बघेल, गाजीपुर के प्रवीण कुमार, प्रतापगढ़ की सुधा, कुशीनगर के आदित्य सिंह, हमीरपुर की नेहा देवी, फतेहपुर की रूपाली गुप्ता, लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव, गोरखपुर की ब्यूटी शाही, गाजीपुर के शुभम कुमार और प्रतापगढ़ के अमित कुमार सिंह शामिल रहे।
     
    10 दिन में 6,672 युवाओं को नियुक्ति पत्र
    मिशन रोजगार के तहत पिछले 10 दिनों में यह
    चौथा बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। 19 सितंबर को लोकभवन में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा, आयुष, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।
     
    20 सितंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल थे।
     
    शिक्षा विभाग में 3,567 को मिली नियुक्ति
    22 सितंबर को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इनमें 1,090 महिलाएं और 2,477 पुरुष शामिल थे। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के पदों पर इनका चयन हुआ।
     
    सोमवार को 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ 19 से 28 सितंबर के बीच हुए चार बड़े कार्यक्रमों में कुल 6,672 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

  • उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार के सहयोग के लिए माना आभार

    उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार के सहयोग के लिए माना आभार

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महाकौशल और जबलपुर क्षेत्र के लिए समग्र विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। संस्कारधानी जबलपुर पर माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद है, जो जल, थल और भू-गर्भ में प्राकृतिक संपदाओं से  संपन्न है। हमारी सरकार ने महाकौशल क्षेत्र को तकनीकी विश्वविद्यालय और आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर की सौगात दी है। राज्य सरकार जबलपुर सहित मंडला , डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी,कटनी, पांढुर्णा, छिन्दवाड़ा और नरसिंहपुर में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। लगभग 25 नई नीतियों के माध्यम से उद्यमियों को अनेक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इस क्षेत्र के उद्यमियों के सपनों को साकार करने के लिए पंख लगाने का कार्य सरकार करेगी। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास के संवाद सभाकक्ष में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स और जबलपुर व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों से क्षेत्र के विकास को लेकर चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव व्यापारी का बंधुओं ने क्षेत्र के विकास के लिए जनहितैषी निर्णयों और प्रदेश में व्यापारी कल्याण बोर्ड गठित करने की पहल के लिए अभिनंदन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल में उद्योग-व्यापार की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। जबलपुर में औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ जल्द ही विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसका ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के पहले जबलपुर अंचल को पूरा लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस प्रकार से ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है, उसी प्रकार से आईटी और माइनिंग सेक्टर में जबलपुर को भी अवसर मिलना चाहिए। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिए इंदौर-भोपाल-जबलपुर को विशेष इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। यह एक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. निवास में हुई चर्चा में उद्यमियों और व्यापारियों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र, मेडिकल यूनिवर्सिटी, माइनिंग सेक्टर, लॉजिस्टिक, होटल इंडस्ट्री, टूरिज्म, ऑटोमोबाइल, अधोसंरचना विकास, एजुकेशन, अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बताया कि हमारी सरकार भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित कर रही है। अब जबलपुर को भी मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की दृष्टिगत रखते हुए जबलपुर के मास्टर प्लान के लिए व्यापारी बंधु अपने सुझाव दें। राज्य सरकार इन्हें मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट में शामिल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संघ ने महाकौशल में लॉजिस्टिक हब विकसित करने के सुझाव पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  कहा कि कटनी जिले में माइनिंग सेक्टर के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए लॉजिस्टिक हब कटनी में बनाने से व्यवसायिक गतिविधियों को अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र में स्थित कान्हा नेशनल पार्क टाइगर सफारी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं का विकास करने के साथ जबलपुर शहर में आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जा रहा है। यहां भी पर्यटक टाइगर को देखकर रोमांचित हो सकेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे व्यापारी बदलते दौर में युवा पीढ़ी को पारंपरिक व्यवसाय में तो दक्ष बनाएं, साथ ही उन्हें नए कार्यों और रोजगार सृजन के प्रकल्पों के लिए भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जबलपुर शहर में डिफेंस प्रोडक्शन, आयरन प्रोडक्शन, माइनिंग, दूध उत्पादन और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार क्षमताएं है। राज्य सरकार गरीब, किसान, युवाओं सहित सभी वर्गों के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर वीरांगना रानी दुर्गावती के जबलपुर अंचल को हर क्षेत्र में नंबर 1 बनाएं।

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जबलपुर और महाकौशल के विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा के प्रसिद्ध भेड़ाघाट के समग्र विकास के लिए 87 करोड़ रुपए की सौगात दी है। जबलपुर को ढाई साल में बहुत कुछ मिला है। राज्य सरकार महाकौशल क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए संकल्पित है। शहरी अधोसंरचनात्मक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए स्वयं पैतृक मकान पर कुदाल चलाकर प्रदेशवासियों के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    उद्योगपति  रवि गुप्ता ने कहा कि जबलपुर और महाकौशल में औद्योगिक विकास को रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता है। किसी क्षेत्र की आर्थिक स्थिति ही विकास को मापने का पैमाना होती है। जबलपुर में विभिन्न सेक्टर्स की इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। संवाद के दौरान व्यापारी संघ के अन्य पदाधिकारियों ने होटल इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने, रेरा नियमों को शिथिल करने, रेडिमेड कॉन्क्रीट मटैरियल को उद्योग का दर्जा देने, वन उत्पादों के प्रसंस्करण, पर्यटन सुविधाओं और रोड नेटवर्क को विस्तार देने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, एमपीआईडीसी के एमडी  चंद्रमौली शुक्ला, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क  मनीष सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव शुरू, राज्यपाल ने किया बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण

    यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव शुरू, राज्यपाल ने किया बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण

    विचारों को उद्यम में बदलने का साहस रखें युवा-  रमेन  डेका

    तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव का शुभारंभ,

    सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण किया राज्यपाल ने

    रायपुर, 
    राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि युवाओ को सिर्फ नौकरी पाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि  अपने विचारों को उद्यम में बदलने का साहस भी रखना चाहिए। एक अच्छा विचार, सही मार्गदर्शन और उपयुक्त तकनीक के साथ आगे बढ़े तो वही नवाचार सफल स्टार्टअप का रूप ले सकता है और आगे चलकर अनेक लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है।

    राज्यपाल डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर रायपुर में छत्तीसगढ़ के युवाओं में नवाचार, उद्यमिता विकास और प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ‘यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर उन्होंने  विश्वविद्यालय में स्थापित  सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण भी किया।

    राज्यपाल ने कहा कि हर क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। देश की बढ़ती आबादी की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ नई तकनीकों और नए प्रयोगों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य के लिए आवश्यक मूलभूत खाद्य पदार्थों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है। जब हमारी खाद्य आवश्यकताएं सुरक्षित होंगी, तभी हम विकास के अन्य क्षेत्रों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवाचार की सबसे बड़ी संभावनाएं हमारे अपने संसाधनों में हैं। कृषि, वनोपज, खाद्य प्रसंस्करण, मिलेट, जैविक खेती, पशुपालन और जनजातीय उत्पादों जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार अवसर हैं। कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि आज ऐसे नवाचारों की आवश्यकता है, जो किसानों की लागत कम करें, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाएं, फसल के नुकसान को कम करें तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और बाजार उपलब्ध कराने में मदद करें। ऐसे नवाचार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं।

    उन्होंने किचन गार्डन और बाड़ी की अवधारणा को फिर से बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

    राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि स्टार्टअप शुरू करने से पहले बाजार का सर्वेक्षण करें और उत्पाद या सेवा की मांग तथा बाजार की संभावनाओं को समझें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसकी स्पष्ट योजना और रोडमैप तैयार करना चाहिए। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं।

    उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए परिश्रम और प्रशिक्षण के साथ बाजार का सर्वेक्षण, प्रबंधन क्षमता और वित्तीय समझ भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के साथ युवाओं को कौशल प्रदान करना आवश्यक है, ताकि वे अपनी पारिवारिक आय बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास में योगदान दे सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और नई शिक्षा नीति में भी कौशल एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है।
    इस अवसर पर डेका ने युवा नवाचारी उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन  भी किया।

    इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव प्रकाश, एनआईटी के डायरेक्टर डॉ समीर बाजपेई, नाबार्ड के अधिकारी, सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।