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  • चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका

    चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना निर्वाचन आयोग (ECI) के नाम पर एकतरफा फैसले लिए।

    वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के सामने यह याचिका रखी। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले को जल्द लिस्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानूनी नियमों के मुताबिक कई सदस्यों वाले कमीशन के फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत से होने चाहिए।

    क्या आरोप लगाया गया?
    विकास सिंह ने कहा, "कई सदस्यों वाले आयोग का मकसद यह था और कानून में भी यही लिखा है कि फैसला सर्वसम्मति से या बहुमत से लिया जाए। अब चुनाव आयोग ने जिस तरह से काम किया है उसे देखते हुए इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या एसआईआर की पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग ने कोई फैसला लिया भी था या नहीं। क्योंकि अगर आयोग ने सर्वसम्मति से फैसला नहीं लिया है तो… कोर्ट ने भी जो फैसला सुनाया है वह इसी आधार पर सुनाया है कि यह आयोग का फैसला है। इसलिए, यह एक गंभीर मामला है।"
    याचिका में क्या मांग की गई?
    इस याचिका में अधिकार-पृच्छा रिट की मांग की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसे काम किए हैं और कर रहे हैं मानो वे अकेले ही उस सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल करने के हकदार हों, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को दी गई है।

    वहीं, राकेश कुमार सिंह की ओर से कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्ता का लगातार केंद्रीकरण हो रहा है, एजेंडा और मीटिंग के मिनट्स (कार्यवृत्त) में देरी या उनकी कमी है, वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए हैं और दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना अपीलें दायर की गई हैं।

    याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार, चुनाव आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए और अगर किसी मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग होती है तो उस मामले का फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाएगा।

  • फ्लू से जूझकर शूटिंग रेंज तक पहुंचीं नीरू, भारत को दिलाया ऐतिहासिक गोल्ड

    फ्लू से जूझकर शूटिंग रेंज तक पहुंचीं नीरू, भारत को दिलाया ऐतिहासिक गोल्ड

    नई दिल्ली
    भारतीय सेना में नायब सूबेदार नीरू ने बारिश से भीगे शूटिंग रेंज और गिरते तापमान के बीच कमाल का संयम दिखाया. फाइनल में चीन की सुन युनोंग ने 26 निशाने साधे, जबकि कुवैत की अब्दुलमलिक हाजर 21 के स्कोर के साथ पीछे रहीं. नीरू ने 28 का स्कोर बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया.
       
    10 दिन पहले फ्लू हुआ था… भोपाल में थीं भर्ती
    भोपाल में एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू को तेज फ्लू हुआ था. बीमारी इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. वह पांच दिन तक खाना तक नहीं खा सकीं. बीमारी को लेकर H1N1 की आशंका भी जताई गई थी.

    ऐसे वक्त में एशियन गेम्स में उतरना भी सवाल था और फॉर्म को लेकर भी संशय था… लेकिन नीरू के निजी कोच और पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज मंशेर सिंह ने उन्हें बीमारी को पीछे छोड़कर सिर्फ टारगेट पर ध्यान देने को कहा.

    नीरू ने वही किया. उन्होंने जीत के बाद कहा, 'मंशेर सर ने सिर्फ इतना कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और टारगेट पर ध्यान दो. मैंने वही किया.'

    … बारिश और ठंड भी नहीं रोक सकी
    मंगलवार को शूटिंग रेंज का मौसम भी आसान नहीं था. लगातार बारिश और खराब विजिबिलिटी ने उड़ते हुए क्ले टारगेट को देखना मुश्किल कर दिया था. तापमान भी नीचे जा रहा था. लेकिन नीरू का निशाना नहीं डगमगाया.

    क्वालिफिकेशन के शुरुआती चार राउंड में उन्होंने 100 में 95 निशाने साधे और बढ़त बना ली. पांचवें राउंड में उन्होंने 23 का स्कोर किया. कुल 118 के स्कोर के साथ वह कतर की बासिल रे के बराबर रहीं और आठ निशानेबाजों वाले फाइनल में पहुंच गईं.
    इसके बाद शुरू हुआ असली इम्तिहान.

    आखिरी पांच निशाने और गोल्ड
    फाइनल में जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, मुश्किल मौसम का असर दूसरे निशानेबाजों पर दिखने लगा. लेकिन नीरू अपनी लय में बनी रहीं.

    आखिरी पांच निशानों से पहले उनके पास चीन की सुन युनोंग पर दो अंक की बढ़त थी. इसी दौरान नीरू को येलो कार्ड भी दिखाया गया. कुछ देर के लिए फैसला विवादित रहा और फिर उन्हें इसका लाभ मिला.

    वापसी के बाद नीरू ने एक बार फिर अपना फोकस दिखाया. आखिरी पांचों टारगेट पर निशाना सटीक लगा.

    28/30…गोल्ड पक्का
    आखिरी टारगेट टूटते ही भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया. भारत के ब्रिटिश कोच और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट पीटर विल्सन ने नीरू को तिरंगे में लपेट लिया. नीरू हालांकि बेहद शांत नजर आईं. जैसे उन्हें पता हो कि अभी कहानी पूरी नहीं हुई है.

    पहले टीम सिल्वर, फिर व्यक्तिगत गोल्ड
    नीरू ने इसी दिन पहले टीम स्पर्धा में भी भारत को सिल्वर दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. नीरू के 118, आशीमा अहलावत के 106 और मनीषा कीर के 104 के स्कोर से भारत का कुल स्कोर 328 रहा.

    चीन ने 346 के स्कोर के साथ गोल्ड जीता, जबकि कुवैत को 325 के साथ ब्रॉन्ज मिला.

    लेकिन दिन का सबसे बड़ा पल नीरू के लिए व्यक्तिगत फाइनल में आया. वह महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में एशियन गेम्स का व्यक्तिगत मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं और भारत के लिए मौजूदा गेम्स में व्यक्तिगत शूटिंग गोल्ड जीतने वाली पहली निशानेबाज भी बनीं.

    2017 में शुरू हुआ सफर
    नीरू का शूटिंग सफर 2017 में मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी पहुंचने के बाद तेजी से आगे बढ़ा. उन्हें उनके चचेरे भाई और 2018 एशियन गेम्स में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा के सिल्वर मेडलिस्ट लक्ष्य श्योराण ने इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया था.

    इसके बाद नीरू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हाल ही में उन्होंने इटली के लोनाटो में ISSF वर्ल्ड कप में ट्रैप का गोल्ड जीतकर इतिहास रचा था. वह इस स्पर्धा में ISSF वर्ल्ड कप का व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं.
    अब एशियन गेम्स का गोल्ड भी उनके नाम है.

    गोल्ड जवानों को समर्पित
    नीरू ने अपनी इस ऐतिहासिक जीत को भारतीय सेना के जवानों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवानों के सामने उनकी उपलब्धि कुछ भी नहीं है.

    उन्होंने 1978 के बैंकॉक एशियन गेम्स में भारत को ट्रैप का पहला गोल्ड दिलाने वाले रणधीर सिंह को भी याद किया. नीरू ने बताया कि रणधीर सिंह हमेशा उन्हें गर्मजोशी से मिलते थे और सलाह देते थे. अब नीरू ने उसी विरासत में अपना नाम जोड़ दिया है.

    लेकिन नीरू की नजर सिर्फ एशियन गेम्स के गोल्ड पर नहीं रुकी है. उनके लिए यह सफर आगे भी जारी है. उनका अगला बड़ा निशाना ओलंपिक है.

  • रूपपुर न्यूक्लियर प्लांट के लिए यूरेनियम की सप्लाई प्रभावित, पाकिस्तान बना अड़चन

    रूपपुर न्यूक्लियर प्लांट के लिए यूरेनियम की सप्लाई प्रभावित, पाकिस्तान बना अड़चन

     ढाका
    जिस पाकिस्तान के लिए भारत से दुश्मनी मोल लेने को तैयार बैठे बांग्लादेश को उसी ने धोखा दे दिया है। बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई प्रभावित हो गई है। इसकी वजह पाकिस्तान है। पाकिस्तान की ओर से एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं मिलने के कारण यूनिट-2 के लिए यूरेनियम लेकर आने वाला कार्गो विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका।

    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने ANI को फोन पर बताया कि रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए यूरेनियम लेकर आने वाले कार्गो विमान के 24 सितंबर को पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली और इसी वजह से यूरेनियम तय समय पर बांग्लादेश नहीं पहुंच सका।

    पाकिस्तान ने एयरस्पेस क्लियरेंस क्यों नहीं दी?
    मंत्री ने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान की ओर से एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं दिए जाने की सही वजह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि यूरेनियम की बांग्लादेश पहुंचने की नई तारीख प्रस्तावित की गई है। रूस की ओर से इसके अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की बात कही गई है।

    एयरपोर्ट पर पूरी तैयारी थी
    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव शेख मोहम्मद तौहिदुल इस्लाम ने भी इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं और अधिकारी विमान का इंतजार कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि रोसाटॉम के संपर्क अधिकारी ने उन्हें बताया कि एयरस्पेस क्लियर नहीं है। इस वजह से यूरेनियम को भेजना संभव नहीं हो सका और अब इसे दोबारा शेड्यूल करना पड़ सकता है। अधिकारी यह भी स्पष्ट नहीं कर सके कि किस देश ने एयरस्पेस को ब्लॉक किया था।

    रूस की रोसाटॉम की मदद से बन रहा है प्लांट
    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसका निर्माण रूस की स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोसाटॉम की तकनीकी मदद से किया जा रहा है और इसकी निगरानी बांग्लादेश एटॉमिक एनर्जी कमीशन कर रहा है।

    यह प्लांट बांग्लादेश के पाबना जिले के ईश्वरडी उपजिला के पाकशी यूनियन में पद्मा नदी के किनारे रूपपुर गांव में बनाया जा रहा है। परियोजना में तीसरी पीढ़ी के दो VVER-1200 रिएक्टर यूनिट बनाए जा रहे हैं। दोनों यूनिट की कुल क्षमता 2,400 मेगावाट बेसलोड बिजली उत्पादन की होगी।

    यूनिट-1 के लिए पहले पहुंच चुका है यूरेनियम
    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-1 के लिए लो-एनरिच्ड यूरेनियम फ्यूल की पहली खेप रूस से बांग्लादेश पहुंच चुकी है। रोसाटॉम के नोवोसिबिर्स्क केमिकल कंसंट्रेट्स प्लांट में तैयार किए गए 164 नए फ्यूल असेंबली को रूस से एक भारी क्षमता वाले रूसी कार्गो विमान के जरिए ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचाया गया था।

    इसके बाद रेडिएशन-शील्डेड कंटेनरों को कड़ी सुरक्षा के बीच ढाका से पाबना के ईश्वरडी स्थित प्लांट तक पहुंचाया गया था। इसके लिए बांग्लादेश सेना और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया गया था। अक्टूबर 2023 में प्लांट साइट पर आधिकारिक हैंडओवर समारोह आयोजित किया गया था।

  • अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों पर जयशंकर बोले, भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझना होगा

    अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों पर जयशंकर बोले, भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझना होगा

    नई दिल्ली
    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों पर दो टूक बयान दिया है. जयशंकर के मुताबिक, जब तक भारत की सुरक्षा चिंताओं, खासकर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों और सहयोगियों का रुख पूरी तरह साफ नहीं होगा, तब तक द्विपक्षीय रिश्तों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है.

    जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित 'एशिया सोसाइटी' में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस दौरान पूर्व अमेरिकी राजनयिक और एशिया सोसाइटी के फेलो डेनियल रसेल ने भारत-अमेरिका संबंधों और पिछले कुछ महीनों में ट्रेड और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछा.

    इस पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि अगर कोई देश भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी करना चाहता है, तो उसे भारत की बुनियादी संवेदनशीलता को समझना होगा.

    'एक पड़ोसी देश के प्रायोजित आतंकवाद का…'
    जयशंकर ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा, 'हमारे लिए जो बात सबसे ज्यादा अहम है, वो आतंकवाद का मुद्दा है. हम दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से हैं, जिन्हें दशकों से एक पड़ोसी देश के प्रायोजित आतंकवाद का सामना करना पड़ा है.'

    भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि अगर भारत के इस सबसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर उसके साझीदार देशों में पर्याप्त समझ, सराहना या संवेदना नहीं होगी, तो ये स्वाभाविक रूप से आपसी संबंधों पर असर डालेगा.

    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से अमेरिका और पाकिस्तान काफी करीब आए हैं. पिछले कुछ समय में अमेरिका के रुख और उसकी पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बढ़ाई गई मुलाकातों पर भारत ने अपनी पैनी नजर रखी है.

    'आपसी तालमेल और समझ बेहतर…'
    जयशंकर ने इस दौरान ये भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते बेहद अहम हैं और वो उम्मीद करते हैं कि ये साझेदारी एक अच्छी दिशा में आगे बढ़ेगी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि हमें जमीनी सच्चदाइयों और उन मुद्दों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए जिनका हम सामना कर रहे हैं. जब तक इन मुद्दों पर आपसी तालमेल और समझ बेहतर नहीं होगी, तब तक रिश्तों में वो मजबूती नहीं आ सकेगी जिसकी उम्मीद की जाती है.

  • अमेरिका में भारतीय दवाओं पर 100% टैरिफ से राहत, जानें किन दवाओं पर शून्य शुल्क

    अमेरिका में भारतीय दवाओं पर 100% टैरिफ से राहत, जानें किन दवाओं पर शून्य शुल्क

    वाशिंगटन
    अमेरिका भारत समेत कई देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कर रहा है। हालांकि ज्यादा टैरिफ लगाने से अमेरिका के लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे टैरिफ से निर्यात करने वाले देश ही नहीं बल्कि अमेरिका को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दवाइयों के मामले में भी यह किसी से छिपा नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ की बात कही थी। हालांकि अब ट्रंप प्रशासन कई खास दवाइयों को मूल्यानुसार शुल्क से छूट देने का विचार कर रहा है। इससे भारत की दवा कंपनियों को भी राहत मिलेगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका भारत सहित 20 देशों से आयात की जाने वाली दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और उनसे जुड़े अवयवों परकोई मूल्यानुसार शुल्क नहीं लगाएगा। विश्व सीमा शुल्क संगठन के अनुसार मूल्यानुसार शुल्क, कर योग्य वस्तुओं के मौद्रिक मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत होता है।

    घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर अमेरिका का जोर
    अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने फेडरल रजिस्टर में इन देशों की सूची प्रकाशित की है। विभाग 29 सितंबर से कुछ पेटेंट प्राप्त दवा आयात और उनसे जुड़े घटकों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को पेटेंट प्राप्त दवाओं, बायोलाजिक्स और उनसे संबंधित अवयवों के आयात पर शुल्क लगाने के संबंध में एक घोषणापत्र जारी किया था।

    कौन सी दवाइयों पर मिलेगी राहत
    शून्य प्रतिशत शुल्क दर के लिए पात्र उत्पादों में दुर्लभ बीमारियों की सभी दवाएं, बांझपन उपचार, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (एडीसी) और पशु औषधियां शामिल हैं। इन दवाओं में इस्तेमाल होने वाले अवयव भी शून्य प्रतिशत शुल्क दर के दायरे में आएंगे।

    भारत के अलावा इन देशों को भी राहत
    भारत के अलावा शून्य शुल्क दर वाली श्रेणी में शामिल अन्य देश अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, उत्तरी मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम हैं।

    नोटिस में कहा गया कि इन देशों से आने वाले पात्र उत्पादों को शून्य प्रतिशत शुल्क का लाभ इसलिए मिल सकता है क्योंकि अमेरिका के साथ उनका इस समय व्यापार और सुरक्षा ढांचा समझौता है या आने वाले दिनों में यह समझौता हो सकता है। यह छूट व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत दवाओं और दवा अवयवों के आयात पर दी जा रही है। एक परिशिष्ट में नामित कंपनियों के लिए यह शुल्क 31 जुलाई से लागू हो चुका है और अन्य दायरे में आने वाली कंपनियों पर यह 29 सितंबर से लागू होगा। वाणिज्य विभाग के नोटिस के अनुसार, जेनेरिक दवा उत्पाद और उनसे जुड़े अवयव धारा 232 के तहत लगने वाले दवा शुल्क के दायरे में नहीं आते हैं।

  • डेढ़ साल बाद पाकिस्तान पहुंचा भारत का बड़ा अधिकारी, SCO बैठक में लेंगे हिस्सा

    डेढ़ साल बाद पाकिस्तान पहुंचा भारत का बड़ा अधिकारी, SCO बैठक में लेंगे हिस्सा

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर के करीब डेढ़ साल बाद भारत ने पहली बार विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को पाकिस्तान भेजा है। भारत ने अतिरिक्त सचिव आलोक डिमरी को पाकिस्तान भेजा है। डिमरी इस समय इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ समन्वयकों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत का रुख साफ रहा है कि आतंकवाद से मुक्त और अनुकूल माहौल में ही द्विपक्षीय बातचीत संभव है। हालांकि, भारत एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच के तहत पाकिस्तान के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।

    कौन हैं आलोक डिमरी?
    आलोक अमिताभ डिमरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक हैं। फिलहाल वह विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के साथ-साथ SCO के राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डिमरी इससे पहले 2019 से 2022 तक किर्गिज गणराज्य में भारत के राजदूत और बाद में ब्रुनेई में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं। विदेश मंत्रालय में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी SCO से जुड़े मामलों को देखना है। इसी जिम्मेदारी के तहत वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो रही एससीओ की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    भारत की ओर से उनकी मौजूदगी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि करीब दो साल बाद नई दिल्ली की ओर से किसी एससीओ बैठक में पाकिस्तान में भागीदारी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत एससीओ के साथ जुड़ना चाहता है और इसी वजह से अपने एससीओ समन्वयक को पाकिस्तान भेजा गया है।

    पाकिस्तान में क्या हो रहा है?
    पाकिस्तान इस सप्ताह सोमवार से बुधवार तक इस्लामाबाद में एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। बैठक में पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत संगठन के कार्यक्रम और अन्य संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

    पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, यह बैठक 2026-27 के लिए एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) की पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत हो रही है। इसमें सदस्य देशों के राष्ट्रीय समन्वयक और एससीओ सचिवालय के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

    बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होनी है:
        पाकिस्तान की अध्यक्षता में एससीओ के कार्यक्रमों की रूपरेखा
        आगामी एससीओ बैठकों और कार्यक्रमों की तैयारियां
        एससीओ सहयोग और समन्वय से जुड़े विभिन्न मुद्दे
        एजेंडे में शामिल अन्य विषय

    पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘विजन को असलियत में बदलना: कनेक्टिविटी, इनोवेशन और साझा समृद्धि’ थीम रखी है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख क्या रहा है?
    भारत सरकार का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। खासकर पहलगाम आतंकी हमले और पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद यह स्थिति और स्पष्ट हुई।

    हालांकि, भारत ने एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच पर पाकिस्तान के साथ भागीदारी से इनकार नहीं किया है। दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल में द्विपक्षीय बातचीत होनी चाहिए, जबकि एससीओ के प्रारूप के तहत भारत पाकिस्तान के साथ जुड़ता रहेगा।

    पाकिस्तान के एससीओ समन्वयक कर रहे हैं बैठक की अध्यक्षता
    अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान के एससीओ राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. एम. फैसल इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। भारत के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी पाकिस्तान में एससीओ की बैठक में नई दिल्ली की करीब दो साल बाद हुई भागीदारी को दर्शाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने की संभावना भी है।

  • AC, TV, फ्रिज खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, 1 अक्टूबर से बढ़ सकती हैं कीमतें

    AC, TV, फ्रिज खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, 1 अक्टूबर से बढ़ सकती हैं कीमतें

    मुंबई 

    फेस्टिव सीजन में अगर आप AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. 1 अक्टूबर से इन प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं. कई बड़ी कंपनियां अक्टूबर से अपने प्रोडक्ट्स के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में हैं. वहीं कुछ कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला पहले ही कर लिया है.

    इसका सबसे ज्यादा असर AC की कीमतों पर देखने को मिल सकता है. कंपनियां AC के दाम करीब 5 से 8 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं. वहीं वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED TV की कीमतों में भी 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हर कंपनी की कीमत बढ़ाने की टाइमिंग अलग हो सकती है. आइए जानते हैं, क्यों बढ़ाए जा रहे हैं दाम?

    क्यों कंपनियां बढ़ा रही हैं कीमत?
    कंपनियों पर कॉपर, एल्युमिनियम, स्टील और प्लास्टिक जैसी चीजों की बढ़ती कीमतों का दबाव है. इसके अलावा सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च भी बढ़ा है. डॉलर में उतार-चढ़ाव और पश्चिमी एशिया में चल रही स्थिति का असर भी कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है.

    जानिए किन कंपनियों ने दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है?
    Blue Star, Godrej Appliances, Haier, Daikin और Super Plastronics जैसी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर चुकी हैं. LG और Bosch Home Comfort ने भी AC की कीमतों में करीब 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की है. Panasonic अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति को देख रही है.

    Haier 1 अक्टूबर से अपने रूम AC की कीमत करीब 5 फीसदी बढ़ाने वाली है. कंपनी ने TV और वॉशिंग मशीन जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स की कीमतों में 2 से 3 फीसदी बढ़ोतरी की भी बात कही है. कंपनी के मुताबिक अगर लागत इसी तरह बढ़ती रही तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ सकती हैं.

    पुराने स्टॉक की वजह से मिलेगी राहत!
    यहां एक राहत वाली बात भी है. कंपनियों और डीलर्स के पास पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद है. ऐसे में फेस्टिव सीजन की शुरुआत में कुछ प्रोडक्ट पुराने दाम पर मिल सकते हैं. Godrej के मुताबिक यह पुराना स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक चल सकता है. यानी दिवाली तक कुछ प्रोडक्ट्स पर पुराने दाम का फायदा मिल सकता है.

    लेकिन दिवाली के बाद नए दाम ज्यादा साफ तौर पर देखने को मिल सकते हैं. खासकर TV की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. इसलिए अगर आप इस फेस्टिव सीजन में कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने का सोच रहे हैं, तो कीमत और ऑफर दोनों को देखकर फैसला करना जरूरी होगा.
     

  • चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: कांग्रेस-AAP के बीच फिर गठबंधन के आसार

    चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: कांग्रेस-AAP के बीच फिर गठबंधन के आसार

    चंडीगढ़
     दिसंबर में प्रस्तावित चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावना बनती दिखाई दे रही है। रविवार को कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति और पाॅलिटिकल अफेयर्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई।

    प्रदेश चुनाव समिति में नगर निगम चुनाव के लिए आप के साथ गठबंधन के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी सहित चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे।

    सूत्रों के अनुसार, प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में सदस्यों से सीधे पूछा गया कि क्या कांग्रेस को नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।

    चर्चा के दौरान अधिकांश सदस्यों ने गठबंधन के प्रस्ताव पर सहमति जताई। अब चुनाव समिति के सदस्यों की राय के बाद प्रस्ताव को पार्टी हाईकमान के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।

    मालूम हो कि पंजाब विधानसभा से पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव होने हैं। साल 2024 का लोकसभा चुनाव भी चंडीगढ़ में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन के तहत ही लड़ा था जिस कारण कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी भाजपा को काफी कम मार्जन से हराने में कामयाब हुए थे।

    जबकि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। पिछले दो मेयर चुनाव भी कांग्रेस और आप एक साथ मिलकर लड़ चुके हैं ।ऐसे में अब फिर से गठबंधन होने पर भाजपा की राह मुश्किल हो जाएगी।

    कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर मंथन की बड़ी वजह वर्ष 2021 का नगर निगम चुनाव है। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव लड़ा था और 35 में से 14 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

    कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने 12 और शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती थी ।कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2021 में भाजपा और कांग्रेस के बीच परंपरागत मुकाबला आप के मैदान में उतरने के बाद त्रिकोणीय हो गया था।

    आप को मिले वोटों का एक हिस्सा ऐसा था, जो विपक्षी वोट के रूप में कांग्रेस के खाते में जा सकता था। कांग्रेस का मानना है कि इस बार तीनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने पर फिर से विपक्षी वोटों का बंटवारा हो सकता है।

    इस बैठक में पार्टी के प्रमुख रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी समेत चुनाव समिति के अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। यह स्पष्ट हुआ कि एकसाथ खड़े होने से ना केवल वोटों का उलझन भंग होगा बल्कि भाजपा की सत्ता-धारण की राह पर भी गहरा असर पड़ेगा। पिछले 2021 के नगर निगम चुनाव की याद ताजा करते हुए यह कहा जा सकता है कि तब भी आम आदमी पार्टी ने पहली बार नगर निगम में भाग लेकर 14 वार्ड जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। कांग्रेस को मात्र आठ सीटें मिलीं और भाजपा एवं शिरोमणि अकाली दल ने क्रमशः बारह और एक-एक सीट जीती। उस समय यह स्पष्ट था कि विपक्षी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण वोट शेयरों का बंटवारा भड़कर हुआ था। उसी तर्क को आज के दौर में उभारा गया है कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तो फिर से वोटों का विखंडन हो सकता है और परिणामस्वरूप भाजपा आसान जीत का दावा कर सकती है। विगत वार्षिक चुनावों में देखा गया कि जब दोनों दल एक साथ खड़े हुए थे, या कुछ प्रमुख वार्ड्स में गठबंधन के बाद हों थे, तो उन्हें काफी मजबूती मिली। 2021 के चुनाव में कुल 29.

    79 प्रतिशत वोट कांग्रेस को मिले, इसके बाद भाजपा के 29.30 प्रतिशत व आम आदमी पार्टी के 27.08 प्रतिशत वोट थे। इसके अतिरिक्त निर्दलीय उम्मीदवारों को 7.10 प्रतिशत और अन्य दलों को 6.26 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस वफादार चेहरे अब इस गठबंधन के तहत नई टिकट रणनीति अपनाने को तैयार हैं और अपने दल बदलों के अनुभव से सबक लेकर विजयी मार्ग पर अग्रसर हैं। अतीत में दिखे संघर्षों के बावजूद, अब दोनों दल यह समझते हैं कि सिर्फ़ ट्रिक-टैको पर टिके रहकर नहीं जीत सकते; बल्कि एक मजबूत और तालमेलपूर्ण गठबंधन योजना बनानी पड़ेगी ताकि विपक्षी दलों के बीच समन्वय हो सके और मतदाताओं के बीच मतभेद को दूर किया जा सके। इसके अलावा, पंजाब विधानसभा चुनाव के बावजूद भी चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव पूर्व होना अनिवार्य है और इस बार भी दोनों दलों के बीच एकजुट होकर कार्य करने की संभावना तेज़ी से बढ़ रही है। कांग्रेस के अंदर भी यह सर्वसम्मति स्पष्ट हो रही है कि 2024 के लोकसभा तथा 2025 के नगर निगम चुनाव में भी दो प्रमुख दलों के बीच एक फ्यूजन की आकांक्षा है। यह मतदाताओं के बीच उम्मीद जगाती है कि दोगली चुनाव लड़ने की बजाए एक सशक्त, संयुक्त मोर्चा प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रकार, चंडीगढ़ में आगामी नगर निगम चुनाव के परिदृश्य में दोनों दलों के बीच गठबंधन संभवतः आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण खबर बनकर सामने आ सकता है।

    कांग्रेस को मिले थे 29 प्रतिशत वोट
    साल 2021 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को आप और भाजपा के मुकाबले कम सीटें मिली थी ।लेकिन सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाली पार्टी कांग्रेस बनी है। निगम चुनाव में कांग्रेस को 29.79 फीसद वोट पड़े हैं।

    दूसरे नंबर पर भाजपा को 29.30 फीसद और तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी को 27.08 फीसद वोट पड़े हैं। निर्दलीय उम्मीदवार को 7.10 फीसद और अन्य को 6.26 फीसद वोट पड़ी हैं।मालूम हाे कि पंजाब में दोनो दल के नेता एक दूसरे का खुलकर विरोध करते हैं ।

     

  • हवाई कनेक्टिविटी में MP की बड़ी छलांग, भोपाल-अयोध्या-शारजाह और इंदौर-बैंकॉक रूट जुड़ेंगे

    हवाई कनेक्टिविटी में MP की बड़ी छलांग, भोपाल-अयोध्या-शारजाह और इंदौर-बैंकॉक रूट जुड़ेंगे

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के हवाई नेटवर्क के विस्तार की दिशा में तीन नई विमान सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। भोपाल से अयोध्या और शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है। वहीं, इंदौर से बैंकॉक के लिए भी विमान सेवा शुरू करने की तैयारी है। फिलहाल इन तीनों शहरों के लिए मध्य प्रदेश से सीधी विमान सेवा उपलब्ध नहीं है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के दौरान भोपाल से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने को लेकर निजी निवेशकों से चर्चा हुई थी। इसके बाद एक निजी विमानन कंपनी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विमान सेवा के क्षेत्र में निवेश का प्रस्ताव रखा। अब राज्य शासन ने इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले उड़ान शुरू करने की तैयारी
    नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद भोपाल और इंदौर से प्रस्तावित उड़ानें शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य इन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले शुरू करने का है।

    नई विमान सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य की विमानन नीति के तहत संबंधित निजी विमानन कंपनी को अनुदान भी दिया जाएगा। इससे नई उड़ानों के संचालन को आर्थिक सहयोग मिलने की उम्मीद है।

    भोपाल को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा
    भोपाल से शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू होने के बाद राजा भोज विमानतल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन वाले हवाई अड्डों की सूची में शामिल हो जाएगा। इसके साथ ही भोपाल से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भरता कम हो सकती है।

    ई-गेट से होगी यात्रियों की क्लीयरेंस
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरपोर्ट पर यात्रियों की क्लीयरेंस प्रक्रिया ई-गेट के माध्यम से पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए इमीग्रेशन और कस्टम विभाग के कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी।

    एयरपोर्ट को कस्टम दर्जा मिलने के बाद लाउंज के पास नया इंटरनेशनल विंग तैयार किया गया है। इस विंग में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच, क्लीयरेंस और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए आठ काउंटर स्थापित किए गए हैं।

    अयोध्या, शारजाह और बैंकॉक से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
    भोपाल से अयोध्या और शारजाह तथा इंदौर से बैंकॉक की सीधी उड़ान शुरू होने पर प्रदेश की धार्मिक, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को विस्तार मिलेगा। खासतौर पर भोपाल से शारजाह और इंदौर से बैंकॉक की उड़ानें प्रदेश के यात्रियों को विदेश यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएंगी।

     

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति लागू करने से इस साल छूट

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति लागू करने से इस साल छूट

    नईदिल्ली 
    सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति को लेकर क्लास 6 के छात्रों को इस साल छूट देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अंतरिम आदेश में सीबीएसई से कहा कि क्लास 6 के मौजूदा छात्रों को एक बार की छूट दी जाए। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत तीन भाषा नीति के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं पहले क्लास 9 और बाद में क्लास 6 के लिए नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देती हैं। मुख्य मुद्दे पर अब छह हफ्ते बाद सुनवाई होगी। उसमें इस सवाल पर भी बात होगी कि अंग्रेजी को विदेशी भाषा माना जाए या नहीं।

    सुनवाई के दौरान सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। उन्होंने बताया कि अदालत के सुझाव पर बोर्ड ने विचार किया और क्लास 6 में इसी साल से नीति लागू करने का फैसला लिया है। मेहता के मुताबिक देश के करीब 28,000 सीबीएसई स्कूलों में से लगभग 99 फीसदी ने नीति अपना ली है। उनके पास किताबें और शिक्षक दोनों हैं। सिर्फ 1.2 फीसदी स्कूल दिक्कत में हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि एनईपी 2020 और एनसीएफ-एसई 2023 में क्लास 6 को ही शुरुआती पड़ाव माना गया है। अगर यह बैच छूट गया, तो बच्चे सीधे क्लास 7 और 8 में उस सीख के बिना पहुंचेंगे, जो नए ढांचे में सोची गई थी।
    सीबीएसई की दलील पर बेंच ने नहीं दिखाई सहमति

    बेंच इससे सहमत नहीं दिखी। उसने कहा कि अप्रैल में सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, इसलिए नीति अप्रैल 2027 से लागू की जाए। तब तक किताबें और शिक्षक भी पूरी तरह मिल जाएंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि वह सीबीएसई की योजना पर रोक नहीं लगा रही। यह बस एक "सॉफ्ट लॉन्च" है, ताकि बच्चे बदलाव से तालमेल बिठा सकें।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और आनंद ग्रोवर ने कहा कि मामला ज्यादा लंबा नहीं खिंचना चाहिए, क्योंकि बच्चों में घबराहट है। उनके मुताबिक करीब तीन लाख छात्र इससे जुड़े हैं और पहले से मानसिक दबाव झेल रहे हैं। बीच सत्र में कुछ नया थोपना उन पर और बोझ डालेगा। ग्रोवर ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय भाषाओं की किताबें अब तक उपलब्ध नहीं हैं। क्लास 9 की कुछ किताबें सिर्फ ऑनलाइन हैं और छपी कॉपी का इंतजार है। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को खासी परेशानी होगी। इस पर बेंच ने याद दिलाया कि कोविड के दौर में बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के आदी हो चुके हैं और मोबाइल पर काम संभाल सकते हैं। उसने याचिकाकर्ताओं को बेहतर वजहें ढूंढने के लिए टोका भी। अदालत ने दिक्कत झेल रहे स्कूलों तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ अफसरों की एक समिति बनाने का सुझाव भी दिया।
    सीबीएसई ने भी कोर्ट में दिए आंकड़े

    सीबीएसई ने कोर्ट को आंकड़े भी दिए। क्लास 6 की तीसरी भाषा की किताबें सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में एनसीईआरटी की वेबसाइट पर मौजूद हैं। इनसे 98 फीसदी से ज्यादा स्कूलों की पसंद पूरी हो जाती है। बाकी भाषाओं के लिए एससीईआरटी की किताबें और संसाधन काम आएंगे। शिक्षकों के मामले में 20,777 स्कूलों के आंकड़े देखें तो 19,386 यानी करीब 93.3 फीसदी स्कूलों में कम से कम दो भारतीय भाषाओं के शिक्षक हैं। इनमें से 3,523 स्कूलों में तीन या उससे ज्यादा भाषाओं के शिक्षक हैं।

    बोर्ड ने यह भी बताया कि 16 सितंबर को पांच सदस्यीय समिति बनी है, जो क्लास 6 से 10 तक इस ढांचे को लागू करने में मदद करेगी और निगरानी भी रखेगी। इसके प्रमुख शिक्षा मंत्रालय के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल हैं। समिति में एनसीईआरटी सचिव राजीव कुमार, सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह, केवीएस की अतिरिक्त आयुक्त चंदना मंडल और एनवीएस के उपायुक्त सोमवीर पूनिया शामिल हैं। नए नियम में तीन में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय होना जरूरी है। क्लास 7, 8 और 9 के जो बच्चे दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे थे, उन्हें सीबीएसई पहले ही राहत दे चुका है। वे अपना मौजूदा कॉम्बिनेशन रख सकते हैं और एक भारतीय भाषा अलग से जोड़ेंगे। इस अतिरिक्त भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर होगा, क्लास 10 की बोर्ड परीक्षा में नहीं।

    गौरतलब है कि कुछ याचिकाकर्ताओं को डर था कि क्लास 10 के स्कूल-स्तर के आकलन में भी रिजल्ट रोके जा सकते हैं। बेंच ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह देखना चाहेगी कि कौन सा स्कूल इंटरनल असेसमेंट के आधार पर किसी बच्चे को रोकता है।