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  • TMC के 4 बैंक अकाउंट रहेंगे फ्रीज, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं दिया

    TMC के 4 बैंक अकाउंट रहेंगे फ्रीज, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं दिया

    कलकत्ता

    तृणमूल कांग्रेस के चार बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से पार्टी को तत्काल राहत नहीं मिली है. शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट ने मामले की मेरिट पर कोई फैसला नहीं दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष में नहीं जाएगा. साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट से मुख्य मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है. यह मामला TMC विधायक विश्वनाथ दास की शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस जांच से जुड़ा है. पुलिस ने इसी जांच के दौरान पार्टी के इंडियन बैंक में मौजूद चार खातों को डेबिट-फ्रीज किया था. पार्टी ने खातों को चलाने की अनुमति मांगी थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम राहत से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। 

    इस सुनवाई के दौरान TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. उन्होंने कहा कि चारों खातों के फ्रीज होने से पार्टी का रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है. उन्होंने अदालत को बताया कि पार्टी के लेखा रिकॉर्ड के मुताबिक सामान्य कामकाज के लिए हर महीने कम से कम 12.15 करोड़ रुपए की जरूरत होती है. उनका तर्क था कि खातों पर रोक से राजनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने मामले में अलग FIR और कई आरोपों से जुड़ी जांच का हवाला दिया. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की मेरिट में जाने से इनकार किया और मुख्य सुनवाई हाईकोर्ट में जल्द करने को कहा। 

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस बी. वराले की पीठ ने TMC की याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार किया. अदालत ने कहा कि मुख्य मामला पहले से कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है. ऐसे में वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहती. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया. यानी चारों खातों को लेकर अंतिम कानूनी फैसला अभी बाकी है। 

    विधायक की शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
    मामला 18 जून 2026 को शुरू हुआ था. TMC विधायक विश्वनाथ दास ने बिधाननगर साइबर अपराध पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में पार्टी के बैंक खातों के जरिए कथित अवैध गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप लगाए गए थे. इसी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई. इसके बाद TMC ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया और बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई को चुनौती दी। 

    ये चार खाते HDFC वाले खातों से अलग हैं
        इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ये चार खाते पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग हैं. HDFC खातों से जुड़े पुराने मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को पार्टी को रोजमर्रा और मासिक खर्च चलाने की अनुमति दी थी. इसके लिए अदालत ने विशेष अधिकारी की निगरानी की व्यवस्था की थी. 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। 

        मौजूदा मामला इंडियन बैंक की हरीश मुखर्जी रोड शाखा में मौजूद चार खातों से जुड़ा है. 27 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन खातों को चलाने के लिए अतिरिक्त अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया है. हालांकि हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई करने को कहा गया है। 

    दोनों पक्षों ने अदालत में क्या दलील दी?
    TMC की ओर से सिंघवी ने कहा कि खातों पर रोक से पार्टी का कामकाज प्रभावित हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि पुराने एचडीएफसी खातों और मौजूदा इंडियन बैंक खातों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए. वहीं राज्य की ओर से तुषार मेहता ने जांच में सामने आए अलग-अलग आरोपों और एक अलग प्राथमिकी का उल्लेख किया. शिकायतकर्ता की ओर से भी खातों के इस्तेमाल को लेकर दलीलें रखी गईं. अदालत ने इन आरोपों पर इस चरण में कोई अंतिम राय नहीं दी. उसने केवल यह तय किया कि मौजूदा स्थिति में वह मामले की मेरिट में नहीं जाएगी. अब मुख्य मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा। 

  • संवाद, वैज्ञानिक आकलन और आपसी सहमति से न्यायपूर्ण एवं स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री  साय

    संवाद, वैज्ञानिक आकलन और आपसी सहमति से न्यायपूर्ण एवं स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली में महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री  मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा।

    बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिव सहित केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बैठक में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी है। इसलिए इसका समाधान भी प्रतिस्पर्धा या टकराव के बजाय सहयोग, विश्वास और सहमति की भावना से निकलना चाहिए।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारा प्रयास ऐसा समाधान निकालने का होना चाहिए जिसमें दोनों राज्यों और वहां के नागरिकों के हित सुरक्षित हों। छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान का पक्षधर है। ऐसा समाधान दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रदेश में स्थित है। राज्य में कृषि, सिंचाई, पेयजल और विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों की विकास आवश्यकताएं महानदी से जुड़ी हुई हैं। इसलिए किसी भी स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन वास्तविक आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके महत्व को भलीभांति समझता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हीराकुंड जलाशय के हितों और उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को  साझी समृद्धि का माध्यम बनाना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच ऐसा तंत्र विकसित हो, जिसमें जल उपलब्धता, आवश्यकता और उपयोग से संबंधित तथ्य पारदर्शी ढंग से साझा हों और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिए जाएं।

    केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की पहल से समाधान की उम्मीद

    मुख्यमंत्री  साय ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह द्वारा की गई पहल का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से आपसी सहमति का रास्ता निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। आज राज्यों के बीच वर्षों से लंबित विषयों को संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास भी सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय एकता की इसी भावना को मजबूत करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच जल संबंधी प्रश्नों का सौहार्दपूर्ण समाधान राज्यों के बीच विश्वास, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय से जटिल विषयों पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का वातावरण बना है।

    संवाद और वैज्ञानिक तथ्यों से निकलेगा टिकाऊ समाधान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी से संबंधित विषय में भावनाओं के साथ वैज्ञानिक तथ्यों का भी उतना ही महत्व है। छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता तथा केंद्रीय जल आयोग के निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी तकनीकी आकलन पर पूरा भरोसा है।

    उन्होंने कहा कि जल उपलब्धता, वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरणीय जरूरतों और दोनों राज्यों की विकास संबंधी आवश्यकताओं का समग्र अध्ययन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। तकनीकी स्तर पर तथ्य स्पष्ट होंगे और राजनीतिक स्तर पर संवाद एवं विश्वास कायम रहेगा तो निश्चित रूप से ऐसा समाधान निकल सकता है, जो दोनों राज्यों को स्वीकार्य हो और आने वाली पीढ़ियों के हित में भी हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के परामर्श और केंद्र सरकार की मध्यस्थता से जो न्यायसंगत एवं व्यावहारिक समाधान सामने आएगा, छत्तीसगढ़ उसे सकारात्मक भावना से आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा।

    बस्तर की तरह दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वय से समाधान की दिशा में बढ़ने का विश्वास

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय के सकारात्मक परिणामों को बस्तर में करीब से देखा है। नक्सलवाद जैसी दशकों पुरानी चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा, विकास और जनविश्वास को साथ लेकर जिस समन्वित दृष्टिकोण से काम किया गया, उससे बस्तर में व्यापक बदलाव आया है।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जटिल और लंबे समय से लंबित विषयों में भी जब स्पष्ट इच्छाशक्ति, निरंतर संवाद और सभी पक्षों के बीच विश्वास हो, तो समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति संभव है। महानदी के विषय पर भी इसी सकारात्मक भावना से दोनों राज्य आगे बढ़ सकते हैं।

    महानदी विवाद नहीं, सहयोग की धारा बने : मुख्यमंत्री  साय

    मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के लोगों के बीच आत्मीय संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों प्रदेशों की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली में अनेक समानताएं हैं।

    उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था और शिवरीनारायण से पुरी तक जुड़े सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी आस्था और संस्कृति हमें जोड़ती है। महानदी भी इसी साझा विरासत और जीवन का हिस्सा है। इसलिए महानदी को विवाद की रेखा नहीं, बल्कि सहयोग, विकास और विश्वास की धारा बनाना हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों की प्राथमिकता अपने किसानों और नागरिकों का हित है। दोनों राज्यों के नेतृत्व को जमीनी आवश्यकताओं की समझ है। इसलिए परस्पर विश्वास के साथ ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है जिसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों के किसानों को लाभ मिले और दोनों राज्यों के विकास की आवश्यकताएं भी पूरी हों।

    तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर संवाद रहेगा जारी

    उल्लेखनीय है कि महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच राजनीतिक एवं तकनीकी स्तर पर संवाद लगातार आगे बढ़ रहा है। इससे पूर्व भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र सरकार के स्तर पर चर्चा हुई है। तकनीकी विषयों के समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है।

    महानदी जल बंटवारे से संबंधित विवाद के समाधान के लिए वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इसके समानांतर आपसी संवाद और तकनीकी विमर्श के माध्यम से दोनों राज्यों के लिए स्वीकार्य समाधान की संभावनाओं पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

    आज की उच्चस्तरीय बैठक को इसी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में सभी पक्षों ने संवाद और तकनीकी विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने तथा महानदी से जुड़े विषयों का पारस्परिक सहमति से स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में सकारात्मक चर्चा की।

    बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • भोपाल में 3 अक्टूबर को गोपालक सम्मेलन, अमित शाह करेंगे अनुदान राशि वितरण; महिलाओं की बढ़ेगी आय

    भोपाल में 3 अक्टूबर को गोपालक सम्मेलन, अमित शाह करेंगे अनुदान राशि वितरण; महिलाओं की बढ़ेगी आय

    सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को आएंगे भोपाल

    राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में पशुपालक दीदियों के सम्मान के साथ विभिन्न विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ व अनुदान राशि का वितरण
    लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आय

    भोपाल 

    ‘सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह 3 अक्टूबर को भोपाल आएंगे। वे भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित ‘राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन' में शामिल होकर उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' के स्वीकृति पत्रों का वितरण करेंगे। इसके साथ ही वे प्रदेशवासियों को डेयरी प्रसंस्करण, दुग्ध संयंत्र और गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला से जुड़ी विभिन्न विकास सौगातों की सौगात देंगे।

    सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शाह 255 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन में बनने वाले नए डेयरी प्लांट का भूमिपूजन करेंगे। इसके अतिरिक्त, 16.80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल में ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' के तहत 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला एंव मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के दुग्ध उत्पादकों को लगभग 12 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी तथा ‘कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी।

    प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के रखरखाव एवं भरण-पोषण के लिए माह जुलाई और अगस्त 2026 की 101 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि ऑनलाइन डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि गौशालाओं में दर्ज गोवंश के समुचित व्यवस्थापन, आहार एवं भरण-पोषण के लिए दी जाती है। राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है।

    महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल

    लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, अतिरिक्त आय के अवसर और पशुपालन की उत्पादकता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाना है।

    प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ‘लखपति गोपालक दीदी योजना’ का संचालन किया जा रहा है। “शून्य पूंजीगत निवेश, अधिकतम आनुवंशिक एवं आर्थिक लाभ” के मूल मंत्र पर आधारित इस योजना से प्रदेश की 2 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। योजना के तहत अवर्णित (नॉन-डिस्क्रिप्ट) नस्ल की गायों और भैंसों मंप उच्च नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को बिना अतिरिक्त खर्च के बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु प्राप्त हो रहे हैं।

    उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन

    उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न होने वाली F1 नस्ल की बछिया अपनी माता की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना अधिक दूध देने में सक्षम होती है। इससे पशुपालक परिवारों को एक लैक्टेशन में प्रति बछिया 50 से 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। पूरे जीवनकाल (5 से 6 लैक्टेशन) के दौरान एक बछिया से लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की जा सकेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार के पास ऐसी 3 से 4 बछियां होती हैं, तो उनका कुल अतिरिक्त आर्थिक लाभ 10 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। यह योजना पशुपालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं की समृद्धि का मुख्य जरिया बना रही है।

     

  • योगी सरकार बनाएगी प्रदेश में करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल, कम लागत वाला पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर मॉडल

    योगी सरकार बनाएगी प्रदेश में करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल, कम लागत वाला पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर मॉडल

    योगी सरकार पीडियाट्रिक ट्रॉमा इंटीग्रेशन से हर साल बचाएगी करीब 1,800 जानें 

    – योगी सरकार ने तैयार किया बाल ट्रॉमा केयर को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप

    – योगी सरकार बनाएगी प्रदेश में करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल, कम लागत वाला पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर मॉडल 

    – बच्चों में ट्रॉमा से होने वाली मौतों को कम करने पर फोकस, त्वरित उपचार और समन्वित देखभाल को बनाया जाएगा आधार

    लखनऊ,
     योगी सरकार ने बच्चों को गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों के बाद समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर को मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल कम लागत वाली एकीकृत ट्रॉमा केयर व्यवस्था विकसित करना है। इसके तहत अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं, एंबुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेफरल सिस्टम को एक साझा नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था से हर साल करीब 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी 12 से 15 प्रतिशत ले जाने का लक्ष्य
    योगी सरकार ने बाल ट्रॉमा को यूनिफाइड इमरजेंसी केयर आर्किटेक्चर विकसित करने की योजना बनायी है। इसका आधार गंभीर रूप से घायल बच्चे को दुर्घटना स्थल से लेकर प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा सेंटर, विशेषज्ञ उपचार और आगे की देखभाल तक हर स्तर पर समयबद्ध और समन्वित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे इलाज में होने वाली देरी और मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम किया जाएगा। वर्तमान में इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी करीब 3 से 5 प्रतिशत है, जबकि एकीकृत ट्रामा केयर के जरिये इसे 12 से 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके तहत प्रदेश में अलग-अलग स्तर की ट्रॉमा सुविधाओं का नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इसमें लेवल-1 का एक, लेवल-2 के 36 और लेवल-3 के 126 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट (आईटीईएमयू) को विकसित किया जाएगा। इससे कुल 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाएं तैयार होंगी और करीब 2,853 नए बेड जुड़ेंगे। इसका मकसद गंभीर रूप से घायल बच्चों को जरूरत के अनुसार जल्द विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है। 

    'गोल्डन ऑवर' में इलाज पर विशेष फोकस
    पीडियाट्रिक ट्रॉमा में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है इसलिए दुर्घटना के बाद तत्काल रिस्पांस, प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उपयुक्त ट्रॉमा सेंटर तक त्वरित रेफरल को एक साथ जोड़ने पर जोर है। इसमें 'गोल्डन ऑवर' के दौरान इलाज उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उचित ट्रॉमा सेंटर तक तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए योगी सरकार करीब 45 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

  • विजय की TVK से हाथ मिला सकती है PMK, BJP से रिश्ते बन रहे सबसे बड़ा पेंच

    विजय की TVK से हाथ मिला सकती है PMK, BJP से रिश्ते बन रहे सबसे बड़ा पेंच

    चेन्नई 

    तमिलनाडु की राजनीति में एक नया सियासी समीकरण आकार लेता दिख रहा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) के बीच बातचीत अब गंभीर दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों पक्षों के बीच संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा चल रही है और मामला अब कैबिनेट में जगह देने तक पहुंच गया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा पेंच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ PMK के रिश्ते का है। किसी भी औपचारिक फैसले से पहले PMK को BJP के साथ अपने समीकरण पर फैसला करना होगा।

    उपचुनाव में PMK ने किसी का साथ नहीं दिया

    PMK ने 2026 का विधानसभा चुनाव AIADMK-BJP गठबंधन के साथ मिलकर लड़ा था। अनबुमणि रामदास के नेतृत्व वाले धड़े को 18 विधानसभा सीटें दी गई थीं और उसने चार सीटों पर जीत हासिल की। लेकिन अब 6 अक्टूबर को होने वाले मदुरंतकम और धरापुरम उपचुनाव में पार्टी ने किसी भी दल को समर्थन नहीं देने का फैसला किया है। खास तौर पर मदुरंतकम में PMK का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां वन्नियार समुदाय के बीच पार्टी के समर्थन से AIADMK को फायदा मिल सकता था, लेकिन TVK यहां मजबूत होती नजर आ रही है। TVK के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, PMK का यह तटस्थ रुख दोनों दलों के बीच चल रही बड़ी राजनीतिक बातचीत का हिस्सा हो सकता है।

    अनबुमणि और विजय के सलाहकार के बीच बातचीत

    रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों दलों के बीच बातचीत मुख्य रूप से PMK नेता अनबुमणि रामदास और सीएम विजय थलपति के राजनीतिक सलाहकार जॉन अरोकीआसामी के जरिए हो रही है। बातचीत से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, दोनों के बीच राजनीतिक संपर्क कोई नया नहीं है।

    2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी अरोकीआसामी ने PMK की राजनीतिक रणनीति पर काम किया था। उस चुनाव में अनबुमणि रामदास को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया था और अभियान का नारा था- ‘मात्रम, मुन्नेत्रम, अनबुमणि’। अब यही राजनीतिक संपर्क संभावित सत्ता-साझेदारी की चर्चा तक पहुंच गया है।

    PMK को विजय कैबिनेट में दो जगह देने का प्रस्ताव?

    रिपोर्ट में TVK सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बातचीत में PMK को विजय सरकार की कैबिनेट में दो जगह देने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार एक कैबिनेट पद अनबुमणि रामदास की पत्नी और विधानसभा में PMK की फ्लोर लीडर सौम्या अनबुमणि को मिल सकता है। दूसरा पद PMK विधायक ए. गणेश कुमार को दिए जाने की चर्चा है।

    हाल के दिनों में उपचुनाव के बाद सौम्या अनबुमणि को कैबिनेट में जगह दिए जाने की चर्चा अलग से भी सामने आई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

    सौम्या अनबुमणि के पास अपना मजबूत चुनावी जनादेश

    सौम्या अनबुमणि इस बातचीत में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार भी लेकर आती हैं। उन्होंने धर्मपुरी विधानसभा सीट पर 93,713 वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी। उन्होंने TVK उम्मीदवार को 20,896 वोटों के अंतर से हराया था। यानी उनके पास खुद का चुनावी जनादेश है, जो संभावित सत्ता-साझेदारी की बातचीत में PMK के लिए अहम हो सकता है।

    विजय की जीत बड़ी, लेकिन बहुमत से अभी दूर

    TVK के लिए PMK को अपने साथ लाने की कोशिश सिर्फ गठबंधन विस्तार का मामला नहीं है। इसके पीछे सरकार में अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत भी है। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने पिछले चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। बहुमत के आंकड़े से वह 10 सीट दूर रह गई थी। इसके बाद छोटी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनी।

    AIADMK विधायकों के इस्तीफों के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी और विजय के पास अपनी स्थिति मजबूत करने का एक और रास्ता खुल गया। TVK के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, उपचुनाव के नतीजे अगली दौर की बातचीत का रुख तय कर सकते हैं। अगर TVK आराम से जीतती है तो विजय ज्यादा मजबूत स्थिति से बातचीत कर पाएंगे। वहीं कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में बाहर से आने वाले हर विधायक की अहमियत बढ़ेगी और PMK की सौदेबाजी की ताकत भी बढ़ सकती है।

    PMK क्यों है विजय के लिए अहम?

    TVK नेताओं के मुताबिक, PMK की सबसे बड़ी ताकत उसका वन्नियार आधार है। यह समुदाय उत्तरी तमिलनाडु के कई महत्वपूर्ण हिस्सों और कुछ अन्य इलाकों में केंद्रित है। तमिलनाडु के दलित मतदाताओं की तुलना में PMK ने वन्नियार समुदाय के बीच दशकों में एक स्पष्ट राजनीतिक आधार तैयार किया है। यही वजह है कि TVK के भीतर PMK को संभावित गठबंधन सहयोगी के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    PMK के आने से VCK के सामने नई मुश्किल

    लेकिन PMK को विजय के गठबंधन में शामिल करना इतना आसान भी नहीं होगा। इसकी वजह TVK का एक अन्य सहयोगी दल विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) है। तमिलनाडु की राजनीति में PMK और VCK के राजनीतिक आधारों के बीच टकराव का इतिहास रहा है। दोनों दलों के समर्थक समुदाय राज्य के कुछ संवेदनशील जातीय विवादों में आमने-सामने भी रहे हैं।

    इसके बावजूद TVK नेताओं का मानना है कि VCK के लिए विजय का साथ छोड़ना मुश्किल होगा। उनका तर्क है कि चुनाव में दलित मतदाताओं के एक हिस्से का समर्थन सीधे विजय की ओर जाता दिखाई दिया है।

    VCK से जुड़े लोगों के मुताबिक, पार्टी के भीतर भी इस संभावना को लेकर जागरूकता है कि उसके पारंपरिक वोटरों के कुछ हिस्से TVK के साथ अलग राजनीतिक रिश्ता बना रहे हैं। VCK पहले ही सरकार में शामिल है और उसके पास कैबिनेट पद भी है।

    PMK आई तो वाम दल भी दूर हो सकते हैं

    विजय के लिए एक दूसरी चुनौती वाम दलों से जुड़ी है। TVK नेताओं को आशंका है कि PMK के औपचारिक रूप से गठबंधन में शामिल होने के बाद कम्युनिस्ट पार्टियां उससे और दूरी बना सकती हैं। यह दूरी पहले ही दिखाई देने लगी है। CPI और CPI(M) ने कहा है कि वे TVK गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और उपचुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ रहे हैं। ऐसे में PMK को साथ लाकर विजय अपनी सरकार को मजबूत तो कर सकते हैं, लेकिन इससे मौजूदा गठबंधन के कुछ सहयोगी असहज भी हो सकते हैं।

    सबसे बड़ा सवाल BJP से रिश्ते का

    अनबुमणि रामदास के लिए सबसे मुश्किल बातचीत शायद विजय, VCK या AIADMK के साथ नहीं, बल्कि BJP के साथ होगी। PMK ने अप्रैल में AIADMK-BJP गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ा था। BJP और PMK का रिश्ता सिर्फ एक चुनाव तक सीमित नहीं है। ऐसे में अगर PMK औपचारिक रूप से विजय के खेमे में जाती है तो यह केवल उपचुनाव के बाद होने वाला स्थानीय राजनीतिक बदलाव नहीं होगा। इससे विपक्षी खेमे के भीतर एक अहम राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

  • 8th Pay Commission में एरियर का पूरा हिसाब, जानें किन कर्मचारियों को ₹3.32 लाख तक का नुकसान

    8th Pay Commission में एरियर का पूरा हिसाब, जानें किन कर्मचारियों को ₹3.32 लाख तक का नुकसान

    नई दिल्ली
     देश के 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी बढ़ी हुई सैलरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) तय समय यानी 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मंत्रियों का एक समूह आयोग की रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। जिसके बाद सरकार आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करेगा। हालांकि, सरकार को रिपोर्ट लागू करने में 3-6 महीने और लग सकते हैं। लेकिन अगर सरकार इसमें देरी करती है, तो कर्मचारियों को भत्तों के रूप में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    सवाल है कि अगर आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के नोटिफिकेशन में 17, 20 या 25 महीने की देरी होती है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को कितना नुकसान हो सकता है?
    कर्मचारियों को कब से कब तक का मिलेगा एरियर?

    संशोधित आठवें वेतन आयोग का मूल वेतन 1 जनवरी 2026 से लागू माना जा रहा है। क्योंकि सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था। इसका मतलब है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से रिपोर्ट की अधिसूचना की तारीख तक का एरियर मिलेगा। पिछली परंपराओं से पता चलता है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को एरियर केवल मूल वेतन पर मिलता है, भत्तों पर नहीं। इन भत्तों में महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TPTA) आदि शामिल हो सकते हैं।
    कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी में जुड़ते हैं कौन-कौन से भत्ते?

    महंगाई भत्ता यानी DA: सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को साल में दो बार DA में बढ़ोतरी मिलती है, जो जनवरी और जून की महंगाई दर पर आधारित होती है। चूंकि DA साल में दो बार बढ़ता है, इसलिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को इस पर एरियर नहीं मिलता है। DA की राशि खुद मूल वेतन के साथ बढ़ती है, जो हर सालाना वेतन वृद्धि के साथ बढ़ती है। लेकिन जब नए वेतन आयोग में वेतन संशोधित किया जाता है, तो कर्मचारियों को नए बढ़े हुए वेतन पर DA मिलता है। इसे जल्दी लागू करने का मतलब है लंबे समय तक ज़्यादा DA मिलना।

    हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA: ग्रॉस सैलरी का एक बड़ा हिस्सा होता है- एचआरए। सातवें वेतन आयोग ने HRA की दरें बेसिक पे का 24% (X शहर के कर्मचारियों के लिए), 16% (Y शहर) और 8% (Z शहर) तय की थीं। जब जनवरी 2024 में DA 50% तक पहुंच गया, तो सरकार ने इन दरों को बढ़ाकर क्रमशः 30%, 20% और 10% कर दिया। चूंकि कर्मचारी की बेसिक पे हर साल सालाना इंक्रीमेंट के साथ बढ़ती है, इसलिए HRA की रकम अपने आप बदल जाती है। इसलिए कर्मचारियों को इस पर कोई एरियर नहीं मिलता। लेकिन ज्यादा फिटमेंट फैक्टर के साथ सैलरी में बदलाव होने पर, HRA की रकम मौजूदा दरों की तुलना में बहुत ज्यादा हो सकती है, जिससे कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है।

    ट्रांसपोर्ट अलाउंस यानी TPTA: सातवें वेतन आयोग में TPTA की अलग-अलग रकम तय की गई है, लेकिन कर्मचारियों को इस पर DA भी मिलता है। चूंकि DA हर छह महीने में बदलता है, इसलिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी बढ़ता है। इसलिए, कर्मचारियों को इस पर एरियर नहीं मिलता। लेकिन TPTA की दरें नए वेतन आयोग में बदली जाती हैं, इसलिए इसे जल्दी लागू करने का मतलब है लंबे समय तक ज्यादा दरें मिलना। ये तीनों अलाउंस लगभग सभी कर्मचारियों के लिए एक जैसे होते हैं। दूसरे कर्मचारियों को भी कुछ तय अलाउंस मिलते हैं, जिन्हें वेतन आयोग में बदला जाता है। हालांकि, उन्हें इन पर एरियर नहीं मिलता।

    लेवल 7 के कर्मचारियों को कितना हो सकता है नुकसान?
    अगर आठवां वेतन आयोग मई 2027, अगस्त 2027 या जनवरी 2028 में लागू होता है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को कितना नुकसान हो सकता है? इन स्थितियों में, उन्हें क्रमशः 17 महीने, 20 महीने और 25 महीने के एरियर का नुकसान होगा। कैलकुलेशन के लिए मान्यताएं इस प्रकार हैं:

    लेवल 7 के कर्मचारी का बेसिक पे- ₹44,900 (7वें वेतन आयोग के अनुसार)

    HRA दर- बेसिक पे का 24% (X शहरों के लिए)

    TPTA = फिक्स्ड TPTA दर (7वें CPC के अनुसार) + DA, यह मानते हुए कि DA मई 2027 तक 65%, अगस्त 2027 तक 67% और जनवरी 2028 तक 70% हो जाएगा।

    8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर = 2.1 (अनुमानित)

    2.1 फिटमेंट फैक्टर पर HRA, TPTA = 2.1 x मौजूदा दरें

    टेबल से समझें कि कर्मचारियों को कितना होगा नुकसान?

     

    सैलरी कंपोनेंट्स वर्तमान राशि
    प्रति माह
    आठवें वेतन आयोग के
    अनुमानित आंकड़े
    रिपोर्ट देरी के कारण
    एरियर में होने वाला नुकसान
    फिटमेंट फैक्टर   2.1x 2.1x
    बेसिक सैलरी ₹44,900 ₹94,290 ₹49,390
    HRA (मूल वेतन का 24%) ₹10,776 ₹22,630 ₹11,854
    ट्रैवल अलाउंस (TPTA रेट) ₹3,600 ₹7,560 ₹3,960
    TPTA (65% DA पर) ₹5,940 ₹7,560 ——
    HRA+TPTA (65% DA पर) ₹16,716 ₹30,190 ₹13,474
    TPTA (67% DA पर) ₹6,012 ₹7,560 ₹13,680
    HRA+TPTA (67% DA पर) ₹16,788 ₹30,190 ₹13,294

    हालांकि, ये आंकड़े अनुमानित हैं। क्योंकि वास्तविक नुकसान का पता तभी चलेगा, जब आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट अधिसूचित की जाएगी।

  • ‘एक्स्प्रेसवे के नाम पर सपाइयों ने भरी अपनी तिजोरी, लूट का जरिया बनाया’, अनिल राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, कहा- शर्म तो उन्हें आती नहीं

    ‘एक्स्प्रेसवे के नाम पर सपाइयों ने भरी अपनी तिजोरी, लूट का जरिया बनाया’, अनिल राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, कहा- शर्म तो उन्हें आती नहीं

    'इमरजेंसी लगाने वालों के साथ गलबहियां करते हैं और ज्ञान लोकतंत्र पर देते हैं', अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर बोला तीखा हमला

    'आपातकाल लगाने वालों के साथ खड़े होकर लोकतंत्र पर ज्ञान देते हैं', मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश पर कसा तंज, कहा- ये दोहरा चरित्र

    'एक्स्प्रेसवे के नाम पर सपाइयों ने भरी अपनी तिजोरी, लूट का जरिया बनाया', अनिल राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, कहा- शर्म तो उन्हें आती नहीं

    ‘लोकतंत्र की बात पर जनता हंसेगी’, आपातकाल से एक्सप्रेसवे तक अखिलेश पर जमकर बरसे दानिश आजाद

    ‘आपातकाल वालों से दोस्ती, फिर लोकतंत्र पर ज्ञान’, मंत्री दानिश आजाद का अखिलेश यादव पर जोरदार पलटवार

    'पत्रकार को जिंदा जलाने वाली सपा आज उनके सम्मान का दिखावा कर रही है', मंत्री दानिश आजाद का अखिलेश पर निशाना; कहा- ऐसी बातों पर हंसी आती है

    ‘जिसने लोकतंत्र का गला घोंटा, अखिलेश उसी के साथ’, अनिल राजभर-दानिश आजाद का सपा पर तीखा वार

    लखनऊ, 
     समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और एक्सप्रेसवे समेत पत्रकारों के सम्मान से जुड़े बयानों पर यूपी सरकार के मंत्री अनिल राजभर और दानिश आजाद अंसारी ने तीखा पलटवार किया है। दोनों मंत्रियों ने सपा-कांग्रेस की नजदीकी और सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। 

    ‘आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस के साथ सपा क्यों?’
    अनिल राजभर ने कहा कि कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का अपमान किया था। उन्होंने सवाल किया कि अगर सपा वास्तव में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करती है तो वह कांग्रेस के साथ राजनीतिक रूप से क्यों चल रही है। उन्होंने सपा के रुख को ‘दोहरा चरित्र’ बताते हुए कहा कि जनता भी इसे देख रही है। 

    'सैफई परिवार के लिए लूट का जरिया बना एक्सप्रेसवे'
    एक्सप्रेसवे पर अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में बनाया गया एक्सप्रेसवे सैफई परिवार के लिए लूट का जरिया बना। इसके विपरीत उन्होंने योगी सरकार में उत्तर प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ बनाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि देश के कुल एक्सप्रेसवे का 56 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।

    पत्रकारों के मुद्दे पर उन्होंने सपा सरकार के दौरान एक पत्रकार को जिंदा जलाए जाने का आरोप लगाया और कहा कि सपा नेताओं पर पत्रकारों से नाम, चैनल और जाति पूछकर दबाव बनाने के आरोप हैं।

    ‘लोकतंत्र की बात पर जनता हंसेगी’
    वही इस मुद्दे पर यूपी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी अखिलेश पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा जब लोकतंत्र की बात करती है तो जनता सिवाय हंसने के कुछ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश पर इमरजेंसी थोपी, उसी के साथ सपा की दोस्ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता की कुर्सी हासिल करने के लिए सपा को अब लोकतंत्र सेनानियों की याद आ रही है।

    योगी सरकार में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है
    एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर दानिश ने गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में एक्सप्रेसवे का रूट अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तय किया गया और जमीनें पहले ही खरीदवा दी गईं।

    'जब सीएम थे तब पत्रकार को जिंदा जला दिया गया था'
    अखिलेश यादव द्वारा पत्रकारों के सम्मान के वादे पर दानिश आजाद ने कहा कि जब वो सीएम थे तब एक पत्रकार को शाहजहांपुर में जिंदा जला दिया गया था। उन्होंने कहा कि आज भी अखिलेश अपनी प्रेस वार्ता में पत्रकारों से जाति पूछकर उनके सवालों का जवाब देते हैं और उन्हें अपमानित करते हैं। जब ऐसे लोग पत्रकारों के सम्मान की बात करते हैं तो उन्हें हंसी आती है। उन्होंने सपा को ‘नकारात्मक एजेंडे’ से घिरी पार्टी बताया।

  • ग्लेशियर तेजी से पिघले तो बढ़ेगा पानी का संकट? स्विट्जरलैंड ने 5 साल में खोई 20% बर्फ

    ग्लेशियर तेजी से पिघले तो बढ़ेगा पानी का संकट? स्विट्जरलैंड ने 5 साल में खोई 20% बर्फ

     नई दिल्ली
       स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर इस साल रिकॉर्ड गर्मी का बड़ा असर पड़ा है. 2026 में देश के ग्लेशियरों ने अपनी 5 फीसदी से ज्यादा बर्फ खो दी. यह जानकारी स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क यानी GLAMOS और स्विस एकेडमी ऑफ साइंसेज की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सर्दियों में बर्फ कम गिरी. इसके बाद गर्मियों में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ी. इससे ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघल गई। 

    पिछले सिर्फ 5 साल में स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर करीब 20 फीसदी बर्फ खो चुके हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हर कुछ साल में नहीं, बल्कि लगातार ऐसे साल आ रहे हैं जब ग्लेशियरों को बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है. इसका असर आगे पानी की सप्लाई पर भी पड़ सकता है, क्योंकि गर्मियों में ग्लेशियरों से निकलने वाला पानी कई जगहों के लिए जरूरी होता है। 

    सर्दियों में कम बर्फ, गर्मियों में ज्यादा गर्मी
    इस साल ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की दो बड़ी वजह रहीं. पहली, सर्दियों में कम बर्फबारी और दूसरी, गर्मियों में रिकॉर्ड गर्मी. ग्लेशियरों पर सर्दियों में जमा होने वाली बर्फ गर्मियों में उनके लिए एक तरह की सुरक्षा का काम करती है. लेकिन इस साल नई बर्फ कम जमा हुई। 

    इसके बाद गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया. मई से सितंबर के बीच गर्म और सूखा मौसम रहा. कई ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी तापमान जमने वाले स्तर से ऊपर रहा. इससे ग्लेशियरों की पुरानी बर्फ भी तेजी से पिघलने लगी. GLAMOS के डायरेक्टर मैथियास हुस के मुताबिक, अब ग्लेशियरों के लिए बहुत ज्यादा बर्फ पिघलने वाले साल बार-बार देखने को मिल रहे हैं. उनके मुताबिक, यह स्थिति चिंता की बात है। 

    एलेट्श ग्लेशियर में सबसे ज्यादा पिघली बर्फ
    स्विट्जरलैंड के सबसे बड़े ग्लेशियर एलेट्श में इस साल अब तक का सबसे ज्यादा पिघलाव दर्ज किया गया. ग्लेशियर डी त्सानफ्लूरॉन की औसत मोटाई भी 4 मीटर से ज्यादा कम हो गई. कुछ छोटे ग्लेशियर इस साल पूरी तरह गायब हो गए. हालांकि 2026 में बर्फ पिघलने की रफ्तार 2022 के रिकॉर्ड से थोड़ी कम रही. साल 2022 में नॉर्थ अफ्रीका से आई धूल बर्फ पर जम गई थी. इससे बर्फ ने सूरज की ज्यादा गर्मी सोखी और तेजी से पिघली। 

    3 महीने में 2.2 ट्रिलियन लीटर पानी पिघला
    वैज्ञानिकों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों से करीब 2.2 ट्रिलियन लीटर पानी पिघला. यह मात्रा स्विट्जरलैंड के घरों में एक साल में इस्तेमाल होने वाले पीने के पानी से 4 गुना से भी ज्यादा है. ग्लेशियरों से इतना पानी निकलने का फिलहाल एक फायदा भी है. गर्मियों में जब पानी कम होता है, तब ग्लेशियरों से पिघलकर आने वाला पानी नदियों और दूसरे जल स्रोतों तक पहुंचता है. इससे पानी की कमी कुछ हद तक कम होती है. लेकिन ग्लेशियर जितने छोटे होते जाएंगे, उनसे मिलने वाला पानी भी कम होता जाएगा. यानी अभी जो फायदा मिल रहा है, वह हमेशा नहीं रहेगा। 

    5 साल में 20% बर्फ खत्म
    पिछले 5 साल में स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर करीब 20 फीसदी बर्फ खो चुके हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह काफी तेज गिरावट है. अगर गर्मी बढ़ने और कम बर्फबारी का सिलसिला जारी रहा, तो ग्लेशियर लगातार छोटे होते जाएंगे. इसका असर सिर्फ पहाड़ों पर नहीं पड़ेगा. ग्लेशियरों से मिलने वाला पानी गर्मियों में कई इलाकों के लिए जरूरी है. इसलिए बर्फ के लगातार कम होने से आने वाले समय में पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। 

  • PPF निवेशकों को झटका या राहत? सरकार ने ब्याज दर पर किया बड़ा ऐलान

    PPF निवेशकों को झटका या राहत? सरकार ने ब्याज दर पर किया बड़ा ऐलान

    नई दिल्ली

    PPF (Public Provident Fund) में निवेश करने वालों के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही में कोई बदलाव नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने स्मॉल सेविंग्स स्कीम (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों की समीक्षा के बाद सभी प्रमुख योजनाओं की दरें पिछली तिमाही के स्तर पर ही रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि PPF पर अक्टूबर-दिसंबर 2026 में भी 7.10% सालाना ब्याज मिलेगा। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (Department of Economic Affairs) ने 30 सितंबर 2026 को Q3 FY2026-27 के लिए यह फैसला जारी किया था। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

    PPF की ब्याज दर लंबे समय से 7.10% पर बनी हुई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भी सरकार ने इसमें कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है, यानी जिन निवेशकों को PPF की दर बढ़ने की उम्मीद थी, उन्हें फिलहाल मौजूदा 7.10% दर से ही संतोष करना होगा। PPF की ब्याज दर हर तिमाही सरकार द्वारा स्मॉल सेविंग्स स्कीम (Small Savings Schemes) की समीक्षा के दौरान तय की जाती है।

    PPF एक लॉन्ग टर्म सेविंग्स स्कीम (Long-Term Savings Scheme) है, जिसकी मूल अवधि 15 साल होती है। इसमें एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.50 लाख जमा किए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति के नाम पर सामान्य तौर पर एक ही PPF अकाउंट रखा जा सकता है। खाता बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से खोला जा सकता है। PPF में निवेश का एक फायदा यह भी है कि खाते को 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। निवेशक एक्सटेंशन के दौरान कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रख सकता है या बिना नए निवेश के भी खाते को जारी रखने का विकल्प चुन सकता है।

    PPF को टैक्स-इफिशिएंट इंवेस्टमेंट (Tax-Efficient Investment) के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलब है कि आपको मिलने वाले रिटर्न पर कम से कम टैक्स लगे, ताकि टैक्स चुकाने के बाद आपके पास ज्यादा से ज्यादा मुनाफा बचे। मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act, 2025) के तहत पात्र निवेश पर सेक्शन 123 के अंतर्गत कुल ₹1.50 लाख तक की डिडक्शन का प्रावधान है, जिसमें PPF भी शामिल है। यह लाभ पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वाले पात्र टैक्सपेयर्स के लिए है। PPF से मिलने वाला ब्याज और मेच्योरिटी अमाउंट भी टैक्स के बाहर (Tax Exemption) है।

    इस तरह PPF को आम तौर पर EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में रखा जाता है। हालांकि, टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit) लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी आय और चुना गया टैक्स रिजीम (New Tax Regime) इन नियमों के तहत पात्र है या नहीं।

    PPF अकाउंट को एक्टिव रखने के लिए हर फाइनेंशियल ईयर कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है। अगर किसी साल न्यूनतम कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं किया जाता है, तो अकाउंट इनएक्टिव (Account Inactive) हो सकता है। इसे दोबारा एक्टिव (Active) कराने के लिए संबंधित नियमों के अनुसार बकाया न्यूनतम डिपॉजिट (Deposit) और पेनॉल्टी (Penalty) का भुगतान करना पड़ता है।

    PPF में पार्शियल विड्रॉल (Partial Withdrawal) की सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित शर्तें लागू होती हैं। सामान्य तौर पर विड्रॉल की सुविधा 7वें फाइनेंशियल ईयर से शुरू होती है। इसलिए यह योजना केवल ब्याज कमाने के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय के फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) के लिए भी इस्तेमाल की जाती है।

    PPF की 15 साल की मूल अवधि पूरी होने के बाद निवेशक के पास खाते को बंद करने या इसे आगे जारी रखने का विकल्प होता है। इस अकाउंट को 5 साल की अवधि के ब्लॉक में एक्सटेंड किया जा सकता है। अगर निवेशक कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखने का विकल्प चुनता है, तो मौजूदा नियमों के अनुसार नए निवेश पर भी ब्याज मिलता रहता है।

    इसलिए, अक्टूबर-दिसंबर 2026 में PPF इंवेस्टर्स के लिए मुख्य अपडेट यही है कि 7.10% की मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लॉन्ग-टर्म (Long-Term) निवेश करने वालों के लिए PPF की ब्याज दर के साथ-साथ इंवेस्टमेंट पीरियड, टैक्स रिजीम और अपने फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) को ध्यान में रखकर फैसला करना जरूरी है।

     

  • सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    अखिलेश के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा, चौधरी भूपेंद्र सिंह और राजभर ने गिनाए पुराने कारनामे

    अखिलेश ने तिजोरी भरने के लिए बनाया था एक्सप्रेसवे: चौधरी भूपेंद्र सिंह

    सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    पीडीए मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी: ओम प्रकाश राजभर

    ‘लोकतंत्र की देते हैं दुहाई और इमरजेंसी वाली कांग्रेस से करते हैं गलबहियां’: भूपेंद्र और राजभर

    लखनऊ, 
     समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर ने कड़ा पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव के बयानों को उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और सपा सरकार के कार्यकाल की याद दिलाते हुए आड़े हाथ लिया।

    लोकतंत्र की दुहाई पर चौधरी भूपेंद्र सिंह का निशाना
    चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार सम्मान राशि देने के ऐलान पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश एक तरफ इमरजेंसी का रोना रोते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी कांग्रेस के साथ गलबहियां कर चुनाव लड़ रहे हैं, जिसने देश पर तानाशाही थोपकर इमरजेंसी लगाने का ऐतिहासिक पाप किया था।

    एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर घेरा
    अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे संबंधी दावों पर चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकाल के दौरान सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण में हुई संगठित लूट जगजाहिर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश के कार्यकाल में केवल एक एक्सप्रेसवे बना, जिसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ। निजी और पारिवारिक तिजोरी भरने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट जानबूझकर बदला गया था, और सपा इस खुली धांधली से मुंह नहीं मोड़ सकती।

    'सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था'
    पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के दावों पर पलटवार करते हुए चौधरी भूपेंद्र सिंह ने शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में एक मंत्री के खिलाफ स्टोरी करने पर पत्रकार को जिंदा जला दिया गया और बाद में अस्पताल में भी उसकी जान लेने की कोशिश हुई।

    उन्होंने आगे कहा कि जब अखिलेश यादव को प्रेस वार्ता में किसी पत्रकार का सवाल पसंद नहीं आता, तो वे उसकी जाति पूछने लगते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकारों को धमकाने, सपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट करने और 'मुर्दाबाद' के उस मामले में अखिलेश की मौजूदगी और उनके इशारे पर पत्रकारों से बर्बरता की गई थी।

    राजभर बोले- अखिलेश की किसी बात का भरोसा नहीं
    कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक विश्वसनीयता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन की विफलता के बाद खुद अखिलेश ने इसे अपनी 'सबसे बड़ी भूल' करार दिया था। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जाकर जनता से कांग्रेस को वोट न देने की अपील की और उसे धोखेबाज बताया। राजभर ने उत्तराखंड उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सपा के 2,200 वोट काटने की वजह से ही कांग्रेस मामूली अंतर से हारी थी।

    इमरजेंसी के इतिहास पर राजभर का वार
    इमरजेंसी का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि रायबरेली से राज नारायण के चुनाव मामले में अदालत द्वारा इंदिरा गांधी को 6 साल के लिए अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी थोपी थी। लाखों नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सलाखों के पीछे डाला गया। राजभर ने सवाल उठाया कि उसी कांग्रेस के साथ खड़े होकर अखिलेश किस मुंह से लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन और सम्मान देने की बात कर रहे हैं।

    PDA मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी
    अखिलेश के 'पीडीए' (PDA) फार्मूले की धज्जियां उड़ाते हुए राजभर ने कहा कि इनके PDA का असली अर्थ है- 'P' से परिवार, 'D' से धनी राम यानी दौलतमंद, और 'A' से अपराधी। राजभर ने सवाल उठाया कि जिन निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना बहाकर, लाठियां खाकर सपा को सींचा, उनके हक को दरकिनार कर केवल धनकुबेरों और अपराधियों को तरजीह दी जा रही है।

    मुस्लिम व अन्य वर्गों के प्रतिनिधित्व पर सवाल
    राजभर ने सपा के भीतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुसलमानों के एकतरफा वोट से सपा विधायक जीतते हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आती है तो मुसलमानों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्हें केवल वोट बैंक और गुलाम बनाकर रखा गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि PDA में पंडित और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी कहां है? एक बार किसी को भेजा गया, उसके बाद उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया।

    डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव पर उठाए सवाल
    राजभर ने डिंपल यादव के पूर्व में हुए निर्विरोध चुनाव का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि उस समय विरोधी प्रत्याशियों को कथित तौर पर अगवा कर जबरन पर्चे वापस कराए गए थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का सरोकार न तो पिछड़ों से है, न दलितों से, न मुसलमानों से और न ही सामान्य वर्ग से, उनकी राजनीति केवल परिवार और निजी स्वार्थ तक सीमित है।