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  • Gen Z का बदला ट्रेंड! शराब पीने वाले युवाओं की संख्या घटी, रिसर्च में सामने आई वजह

    Gen Z का बदला ट्रेंड! शराब पीने वाले युवाओं की संख्या घटी, रिसर्च में सामने आई वजह

    नई दिल्ली
    शराब पीने को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है,  पिछले कुछ सालों में 40 साल से कम उम्र के लोगों में शराब पीने का चलन कम हुआ है, वहीं 50 से 64 साल की उम्र के लोगों में शराब पीने वालों की संख्या बढ़ी है. इतना ही नहीं, इस उम्र के कुछ लोग पहले से ज्यादा शराब पीने लगे हैं। 

    नई स्टडी Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुई है. रिसर्च के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच अमेरिका में शराब पीने वाले युवाओं की संख्या अब कम हो रही है, युवा शराब से दूरी बन रहे हैं, कोरोना महामारी के बाद युवाओं में ये शराब पीने का ट्रेंड कम हो रहा है. रिसर्च में जो आंकड़े बताए गए हैं उनके मुताबिक, 2018 तक अमेरिका में 40 साल से कम उम्र वाले 66 % लोग शराब पीत थे, 2020 में ये आंकड़ा 69 % था, लेकिन 2024 में ये 67 % रह गया है. 40 साल से कम उम्र में जेन- जी यानी 26 से 30 साल की उम्र के युवा भी शामिल हैं. रिसर्च में ये भी बताया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र में शराब पीने का ट्रेंड अब ज्यादा क्यों बढ़ा है। 

    50 की उम्र के बाद क्यों चिंता ज्यादा?
    डॉक्टरों के मुताबिक, 50 से 64 साल की उम्र में शराब का ज्यादा सेवन खास तौर पर चिंता का विषय है. इस उम्र में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है, ज्यादा शराब इन जोखिमों को और बढ़ा सकती है। 

    स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और लिवर विशेषज्ञ डॉ. ब्रायन पी. ली के मुताबिक, इस उम्र के लोग ज्यादा मानसिक तनाव में हैं, इस वजह से वह शराब का सहारा ले रहे हैं. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि 40 से कम उम्र वालों में मानसिक तनाव कम हो गया है, लेकिन 50 प्लस वाले इसको कम करने के लिए शराब ज्यादा पी रहे हैं।   

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो लोग कभी-कभी शराब पीते हैं, उनमें से 53 प्रतिशत लोग अब शराब की खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह संख्या पांच साल पहले केवल 44 प्रतिशत थी. साथ ही, जिन लोगों ने कभी शराब नहीं पी, उनकी संख्या भी 2020 के बाद 3 प्रतिशत बढ़ गई है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर शराब की बिक्री अभी भी बहुत बड़ी है. 2024 में दुनिया भर में शराब की कुल खपत 253 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है. लेकिन इसके बावजूद, इसका विकास बहुत धीमा हो गया है। 

    वहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शराब की खपत 2024 से 2029 के बीच 357 मिलियन लीटर बढ़ने की संभावना है. इससे भारत दुनिया में तेजी से बढ़ने वाला शराब बाजार बन रहा है. हालांकि, यह बदलाव वैश्विक प्रवृत्ति के विपरीत है, जहां युवा वर्ग शराब से दूर हो रहे हैं. रिपोर्ट ने नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला है. शराब की बिक्री में केवल 0.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई और इसका कुल बाजार मूल्य 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, वहीं नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2029 तक यह बाजार 24 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है और 2029 तक यह 10.2 बिलियन लीटर से अधिक हो जाएगा। 

    मानसिक तनाव में शराब लेना बन सकता है आदत
    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक तनाव के समय कुछ लोग शराब को राहत पाने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं होती. धीरे-धीरे शराब तनाव से निपटने की आदत बन सकती है और इसकी मात्रा भी बढ़ सकती है.
    इसलिए अगर कोई व्यक्ति 50 की उम्र के बाद  शराब पीता है या पहले से ज्यादा शराब लेने लगा है, तो इसे सिर्फ आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

    कौन सी शराब खरीदना पसंद कर रहे हैं युवा?
    आज की पीढ़ी केवल सस्ती शराब देखकर ही नहीं खरीद रही है, इसके अलावा भी उनकी कुछ पंसद है, जिस पर उनका फोकस ज्यादा रहता है जैसे…

        ऐसी शराब जिसका टेस्ट अलग हो.
        शराब की क्वालिटी भी अच्छी हो.
        साथ ही कोई खास पहचान हो.

    शराब का बिजनेस आखिर कैसे बढ़ा?
    युवा ने शराब पीना भले ही कम कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद शराब कंपनियों के बिजनेस में तेजी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह यह है कि युवा शराब को कम जरूर पी रहे हैं, लेकिन जब भी पी रहे हैं तो महंगी और क्वालिटी को देखते हुए ही पी रहे हैं. जिसकी वजह से शराब कंपनियों की कमाई आगे बढ़ी है. खास कर इस बदलाव का असर वोदका के अलग-अलग फ्लेवर की पसंद में भी दिख रहा है। 

    इन कंपनियों का प्रर्दशन रहा अच्छा
    युवा की बदलती मांग की वजह से ही रैडिको खेतान, यूनाइटेज स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. यानी Gen Z अब कम शराब जरूर पी रहे हैं, लेकिन बेहतर क्वालिटी और अलग फ्लेवर की शराब पीना पसंद कर रहे हैं। 

  • भावांतर योजना में दूसरे साल भी सोयाबीन खरीदी, 3 अक्टूबर से रजिस्ट्रेशन; ऐसे होगा सत्यापन

    भावांतर योजना में दूसरे साल भी सोयाबीन खरीदी, 3 अक्टूबर से रजिस्ट्रेशन; ऐसे होगा सत्यापन

    भोपाल 

     मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत खरीफ वर्ष 2026 यानी विपणन वर्ष 2026-27 में सोयाबीन फसल के लिए किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। किसान 17 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीयन करा सकेंगे। पंजीयन की प्रक्रिया ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी।

    भावांतर योजना के तहत सोयाबीन किसानों को उनकी उपज के भाव में अंतर की भरपाई के लिए भुगतान किया जाना है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराना जरूरी होगा। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पंजीयन केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

    MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत सोयाबीन किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। यानी किसानों के पास पंजीयन पूरा करने के लिए करीब दो सप्ताह का समय रहेगा। प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना पंजीयन करा लें। पंजीयन के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके अलावा राज्य में बनाए गए पंजीयन केंद्रों पर जाकर भी किसान आवश्यक दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

    MP Soybean Registration 2026 कहां कराया जा सकता है?

    MP Soybean Registration 2026 के लिए किसानों को कई विकल्प दिए गए हैं। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर किसान निःशुल्क पंजीयन करा सकेंगे। इसके अलावा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर भी किसानों के लिए मुफ्त रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर पंजीयन कराने में सुविधा मिलेगी। किसान चाहें तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आधिकारिक ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीयन और उपार्जन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं।

    निजी केंद्रों पर पंजीयन के लिए कितना शुल्क लगेगा?

    MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत किसान एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से भी पंजीयन करा सकते हैं। इन केंद्रों पर प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय और निर्धारित सहकारी केंद्रों पर पंजीयन निःशुल्क कराया जा सकेगा। किसानों को पंजीयन कराने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि केंद्र पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि तो नहीं ली जा रही है।

    MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 पंजीयन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

    MP Soybean Registration 2026 के दौरान किसानों के भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। इसलिए किसान पंजीयन केंद्र पर जाने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। भूमि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और आधार कार्ड की जानकारी सही होना जरूरी है। नाम या अन्य जानकारी में अंतर होने पर पंजीयन प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है। किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अपना मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी पहले से जांच लें, ताकि पंजीयन के दौरान गलत जानकारी दर्ज न हो।

    7.10 लाख किसानों ने कराया था पंजीयन, 1476 करोड़ का भुगतान
    वर्ष 2025-26 में भावांतर योजना के तहत 7.10 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 16.95 लाख टन सोयाबीन खरीदा गया और 1476 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस साल 7 से 10 लाख किसानों के पंजीयन और करीब 20 लाख टन सोयाबीन खरीदी का अनुमान है।

    पंजीयन ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालयों के सुविधा केंद्र और सहकारी समितियों व विपणन संस्थाओं के केंद्रों पर निशुल्क होगा। एमपी ऑनलाइन, सीएससी कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से अधिकतम 50 रुपए शुल्क देकर भी पंजीयन कराया जा सकेगा।

    सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समितियों में होगा। इनका राजस्व विभाग 100% सत्यापन करेगा।

    पंजीयन से पहले बैंक खाते और दस्तावेजों की कराएं जांच
    सोयाबीन के भावांतर पंजीयन से पहले किसान बैंक खाते को आधार और एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक करा लें। मोबाइल नंबर या बायोमेट्रिक अपडेट के लिए जिला/तहसील या डाकघर के आधार केंद्र पर जाएं। पंजीयन के दौरान भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और आईएफएससी कोड सही दर्ज कराएं।

    आधार वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य

    MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 में पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का सत्यापन जरूरी होगा। आधार का वेरिफिकेशन आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाले OTP या बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से किया जा सकता है। पंजीयन तभी मान्य होगा जब किसान के भू-अभिलेख और खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। यदि दोनों जगह नाम में अंतर पाया जाता है तो किसान को तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही पंजीयन को मान्य किया जाएगा। इसलिए किसानों को पंजीयन कराने से पहले अपने आधार और भूमि रिकॉर्ड में दर्ज नाम की जांच कर लेना चाहिए।

    बैंक खाते की जानकारी भी सही रखें

    मध्य प्रदेश सोयाबीन भावांतर योजना 2026 के तहत भुगतान के लिए किसान के आधार लिंक बैंक खाते को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि आधार लिंक खाते में भुगतान करने में किसी तरह की परेशानी आती है तो पंजीयन के दौरान उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकता है। पंजीयन के समय किसान को अपना बैंक खाता नंबर और IFSC कोड देना होगा। बैंक खाता सक्रिय होना चाहिए और उसकी जानकारी सही दर्ज होनी चाहिए। अक्रियाशील बैंक खाते और संयुक्त बैंक खाते स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा Fino, Airtel और Paytm Bank के खाते भी पंजीयन के लिए मान्य नहीं होंगे।
    आधार लिंक बैंक खाते का होगा सत्यापन

    पंजीयन के दौरान किसान के आधार लिंक बैंक खाते की जांच के लिए मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/JIT पोर्टल के माध्यम से 1 रुपये का ट्रांजेक्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य बैंक खाते की जानकारी का सत्यापन करना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक रखें। यदि आधार में मोबाइल नंबर या बायोमेट्रिक जानकारी अपडेट नहीं है तो किसान संबंधित आधार सुविधा केंद्र पर जाकर इसे अपडेट करा सकते हैं। 
    सिकमी और बटाईदार किसानों के लिए अलग व्यवस्था

    सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए पंजीयन की अलग व्यवस्था की गई है। इन श्रेणी के किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समिति और सहकारी विपणन संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर किया जाएगा। इन किसानों की जानकारी का राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा। इसलिए संबंधित किसान पंजीयन के समय अपने आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर जाएं। 

     

  • त्योहारी सीजन से पहले बदला नियम, अब खुली मिठाइयों पर लिखनी होगी अंतिम तिथि

    त्योहारी सीजन से पहले बदला नियम, अब खुली मिठाइयों पर लिखनी होगी अंतिम तिथि

    सहारनपुर
     पितृ पक्ष समाप्त होते ही त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है। नवरात्र के बाद करवाचौथ, अहोई अष्टमी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।

    त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मिठाइयों की गुणवत्ता और उनकी सुरक्षित उपयोग अवधि को लेकर अब व्यवस्था और सख्त की जा रही है।

    15 अक्तूबर से खुली मिठाइयों पर भी निर्माण तिथि (मैन्युफैक्चरिंग डेट) और उपयोग की अंतिम तिथि (यूज बाय डेट) अंकित करना अनिवार्य होगा।

    खुली मिठाइयों पर भी लिखनी होगी एक्सपायरी डेट
    अभी तक शहर की बड़ी से लेकर छोटी मिठाई की दुकानों पर अधिकांश मिठाइयां खुले में रखकर बेची जाती हैं। ग्राहक जिस मिठाई की जितनी मात्रा मांगता है, उसे उसी समय तौलकर डिब्बे में पैक कर दिया जाता है।

    इस तरह की मिठाइयों के पैकेट या डिब्बे पर आमतौर पर निर्माण और उपयोग की तारीख दर्ज नहीं होती। इसके कारण ग्राहक को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि मिठाई कब तैयार की गई थी और उसे कितने समय तक सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है।

    त्योहारी सीजन में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस दौरान दुकानों पर मिठाइयों की बिक्री बढ़ने के साथ बड़ी मात्रा में मिठाइयों का उत्पादन भी होता है। नई व्यवस्था के तहत दुकानदारों को खुली मिठाइयों के संबंध में भी निर्माण और उपयोग की तिथि की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।

    इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग की अवधि के बारे में जानकारी मिल सकेगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि त्योहारी सीजन में मिठाई की दुकानों पर निगरानी बढ़ाई जाती है।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद दुकानदारों के लिए तारीख संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। इसका उद्देश्य मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को जागरूक करना है।

    उन्होंने बताया कि नवरात्र के बाद लगातार त्योहार होने के कारण मिठाई कारोबारियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दीपावली और भाईदूज के आसपास मिठाइयों की बिक्री सबसे अधिक बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में दुकानदारों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करनी होगी। वहीं ग्राहकों को भी मिठाई खरीदते समय निर्माण और उपयोग की तिथि की जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।

     

  • ‘संकल्प-समर्पण-सहयोग’ से सजेगा MP BJP का नया दफ्तर, फरवरी 2027 में गृह प्रवेश

    ‘संकल्प-समर्पण-सहयोग’ से सजेगा MP BJP का नया दफ्तर, फरवरी 2027 में गृह प्रवेश

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जल्द ही अपना नया और अत्याधुनिक प्रदेश मुख्यालय मिलने वाला है। भोपाल के दीनदयाल परिसर में बन रही इस बहुमंजिला इमारत का काम अब अपने अंतिम चरण में है।

    इंटीरियर और फिनिशिंग का काम पूरा होने में करीब चार महीने का समय और लगेगा। माना जा रहा है कि पार्टी फरवरी 2027 में इस भव्य भवन में आधिकारिक रूप से गृह प्रवेश कर लेगी। इसके साथ ही, नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी के रहने के लिए दीपावली तक एक फ्लोर पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा।

    समर्पण दिवस पर हो सकता है गृह प्रवेश
        पुराने दफ्तर की तरह ही यह नया कार्यालय भी जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को समर्पित होगा। सूत्रों की मानें तो 11 फरवरी को पंडित जी की पुण्यतिथि होती है, जिसे भाजपा 'समर्पण दिवस' के रूप में मनाती है (इस दिन कार्यकर्ता पार्टी फंड में अपना योगदान देते हैं)।

    पूरी संभावना है कि इसी दिन या इसके एक-दो दिन पहले नए दफ्तर का लोकार्पण किया जाए। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कुछ दिन पहले हुई एक समीक्षा बैठक में दीपावली तक कम से कम दो फ्लोर रहने और काम करने लायक तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 

    तीन खास हिस्सों में बंटा होगा पूरा परिसर
    यह विशाल कार्यालय मुख्य रूप से तीन अलग-अलग ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम 'संकल्प', 'समर्पण' और 'सहयोग' रखे गए हैं…

        संकल्प (मुख्य कार्यालय): यह 11 से 12 मंजिला मुख्य प्रशासनिक इमारत होगी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष का कक्ष होगा। इसके अलावा यहां मीडिया और सोशल मीडिया का वार रूम तथा उच्च स्तरीय बैठकों के लिए कक्ष बनाए जा रहे हैं।

        समर्पण (पदाधिकारी निवास): चार मंजिला यह ब्लॉक प्रदेश और केंद्रीय नेताओं के ठहरने के लिए होगा। इसमें अतिथियों के लिए योग और अध्ययन कक्ष की भी सुविधा होगी।

        सहयोग (प्रशासनिक ब्लॉक): सात मंजिला इस हिस्से का उपयोग कर्मचारियों के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था के संचालन के लिए किया जाएगा।

    हाई-टेक सुविधाओं और ग्रीन एनर्जी से लैस होगा नया दफ्तर
        लगभग 1.5 एकड़ (65,000 वर्ग फुट) जमीन पर बन रहे इस नए प्रदेश मुख्यालय का कुल बिल्ट-अप एरिया 1.15 लाख से 1.25 लाख वर्ग फुट के बीच होगा। इसे पूरी तरह से भारतीय वास्तु शास्त्र और 'ग्रीन एनर्जी' के कॉन्सेप्ट को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

     

  • ‘No UPI Day’ को लेकर दो गुट आमने-सामने, CTI तैयार तो CAIT पीछे

    ‘No UPI Day’ को लेकर दो गुट आमने-सामने, CTI तैयार तो CAIT पीछे

      नई दिल्ली

    आज  2 अक्टूबर है यानी गांधी जयंती, अगर आप किसी दुकान पर खरीदारी करने के जाएं और वहां पर दुकानदार आपसे कैश मांगे, यानी यूपीआई पेमेंट लेने से मना कर दे, तो परेशान मत होना. दरअसल, सरकार के 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर के विरोध में व्यापिरियों ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाने का ऐलान किया है. हालांकि, इसे लेकर अब व्यापारियों में आपस में ही मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं और वे दो ग्रुप में बंटे हुए नजर आ रहे हैं। 

    ऐसा इसलिए क्योंकि नो यूपीआई डे को लेकर 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने व्यापारियों से गांधी जयंती के दिन UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स ढककर सिर्फ कैश में भुगतान लेने की अपील की है. तो वहीं कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने इससे दूरी बना ली है। 

    CAIT का ऐलान- नहीं होंगे शामिल
    बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई वाली कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि वह 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' नहीं मनाएगी और न ही उसने इसके लिए व्यापारियों से किसी तरह की कोई अपील की है. कैट ने साफ किया है कि संगठन ने इसमें शामिल होने के बारे में कोई फैसला, प्रस्ताव या आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 

    CTI फैसला वापस लेने को तैयार नहीं
    एक ओर जहां कैट इससे दूरी बनाए हुए है, तो वहीं दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने यूपीआई पेमेंट पर MDR लगाने के विरोध में 2 अक्टूबर को No UPI Day मनाने का ऐलान किया है. CTI का कहना है कि व्यापारियों ने अपना फैसला वापस नहीं लिया है. संगठन से जुड़े व्यापारी दिल्ली और पूरे देश में इसे मनाएंगे. इसमें 100 से ज्यादा बड़े व्यापारी संगठन शामिल रहेंगे। 

    सीटीआई को उम्मीद है कि देश भर में 2000 से ज्यादा जगहों पर 'नो UPI डे' मनाया जाएगा. संगठन ने दिल्ली और देश के सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 2 अक्टूबर को अपनी UPI मशीनों को काले कपड़े से ढक लें और सिर्फ कैश में लेन-देन करें। 

    सरकार से UPI MDR हटाने की मांग
    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि सरकार 2000 रुपये से ज्यादा के UPI लेन-देन पर लागू किए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को वापस ले. इसके पीछे बड़ा तर्क देते हुए सीटीआई ने कहा है कि इसका बोझ 6 करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा। 

    इसके साथ ही संगठन की ओर से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर कहा गया कि इससे UPI Payment में 50% की गिरावट आ सकती है. देश में कैश का चलन फिर से बढ़ सकता है। 

    कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज?
    गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है। 

  • भारत के 114 राफेल में स्वदेशी हथियारों की एंट्री, फ्रांस ने दिया इंटीग्रेशन का भरोसा

    भारत के 114 राफेल में स्वदेशी हथियारों की एंट्री, फ्रांस ने दिया इंटीग्रेशन का भरोसा

    नई दिल्ली

    भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है. भारत 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट खरीदने की योजना पर बात कर रहा है. इस सौदे में सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि भारत अपने स्वदेशी हथियार और सिस्टम इन विमानों में आसानी से लगा सके। 

    फ्रांस ने अब साफ संकेत दिया है कि सोर्स कोड की पूरी पहुंच दिए बिना भी कोई तरीका निकाला जा सकता है. फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डोमिनिक टार्डिफ ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की इच्छा को वे समझते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय वायुसेना को ज्यादा स्वतंत्रता और क्षमता देने का रास्ता खोजा जा सकता है. यह बयान तब आया जब दोनों देश तरंग शक्ति अभ्यास में शामिल हैं। 

    आधुनिक लड़ाकू विमानों का सोर्स कोड बहुत संवेदनशील होता है. इसमें मिशन सिस्टम, सेंसर, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियार से जुड़े सॉफ्टवेयर निर्देश होते हैं. पूरा सोर्स कोड देने का मतलब है विमान की अंदरूनी तकनीक को पूरी तरह खोल देना। 

    फ्रांस जैसे देश इसे आसानी से नहीं देते क्योंकि इससे सुरक्षा और व्यावसायिक हित जुड़े होते हैं. भारत चाहता है कि वह अपने बनाए हथियार जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, अस्त्र मिसाइल या अन्य स्वदेशी सिस्टम राफेल पर आसानी से लगा सके. बिना सोर्स कोड के यह काम मुश्किल लगता था. लेकिन अब फ्रांस ने वैकल्पिक तरीका सुझाया है। 

    आईसीडी से कैसे होगा एकीकरण
    एक महत्वपूर्ण विकल्प इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट यानी आईसीडी है. यह दस्तावेज बताता है कि विमान के सिस्टम बाहरी हथियार या सेंसर से कैसे बात करेंगे. भारतीय रक्षा सूत्रों के अनुसार इस इंटरफेस स्तर की जानकारी से स्वदेशी हथियार जोड़े जा सकते हैं। 

    पूरा सोर्स कोड लिए बिना भी संचार स्थापित किया जा सकता है. इससे भारत को ज्यादा स्वायत्तता मिलेगी. फ्रांसीसी अधिकारी ने कहा कि फ्रांसीसी कंपनियां, भारतीय उद्योग और दोनों सरकारें मिलकर इस पर चर्चा कर सकती हैं. भारत पहले 36 राफेल विमान खरीद चुका है। 

    अब 114 और विमानों का प्रस्ताव है जिसमें मेक इन इंडिया का बड़ा हिस्सा होगा. इससे घरेलू विमान निर्माण क्षमता मजबूत होगी. हथियार एकीकरण की मांग इसी बड़े समझौते का हिस्सा है. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्माण और भारतीय उद्योग की भागीदारी भी चर्चा में है। 
    फ्रांस राफेल के अपग्रेडेड वर्जन F4 पर काम कर रहा है. 2030 के दशक में F5 वर्जन लाने की योजना है. F5 में सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और इंजन में सुधार होंगे. भारत अगर अपने हथियार आसानी से लगा सके तो भविष्य में विमान को अपनी जरूरतों के अनुसार अपग्रेड करना आसान होगा। 

    आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वतंत्रता
    यह चर्चा सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक भी है. भारत चाहता है कि आयातित प्लेटफॉर्म पर भी उसकी अपनी क्षमता बनी रहे. स्वदेशी हथियार लगाने से निर्भरता कम होती है और ऑपरेशनल स्वतंत्रता बढ़ती है. फ्रांस ने संप्रभुता और घरेलू उद्योग के महत्व को स्वीकार किया है। 

    लेफ्टिनेंट जनरल टार्डिफ ने कहा कि फ्रांस भी स्वतंत्र फैसले लेने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से मजबूत है. तरंग शक्ति जैसे अभ्यास इसे और गहरा बनाते हैं. अगर आईसीडी जैसे तंत्र से समझौता हो जाता है तो 114 विमानों का सौदा आगे बढ़ सकता है. इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक विमान मिलेंगे और घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। 

    कुल मिलाकर फ्रांस का यह रुख सकारात्मक है. सोर्स कोड की बाधा को पार करने का विकल्प निकलने से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत हो सकते हैं. भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. आगे की बातचीत में तकनीकी विवरण और व्यावसायिक शर्तें तय होंगी। 

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट में बहादुरी दिखाने वाले 4 जांबाजों को सम्मानित करने की तैयारी

    फ्लाईदुबई फ्लाइट में बहादुरी दिखाने वाले 4 जांबाजों को सम्मानित करने की तैयारी

    तेल अवीव 
    दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में बुधवार को कॉकपिट के अंदर चाकू से हमले के बाद बड़ा हादसा होते-होते बच गया. विमान को आपात स्थिति में सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर उतारा गया. विमान में सवार सभी 174 यात्री सुरक्षित बताए गए हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुताबिक विमान के को-पायलट ने कथित तौर पर मुख्य पायलट पर हमला किया और विमान को नीचे गिराने की कोशिश की. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, विमान 30 सेकंड के अंदर करीब 14 हजार फीट नीचे आ गया, जिसके बाद यात्रियों में दहशत फैल गई। 

    भारतीय पायलट ने बचाई 174 यात्रियों की जान 
    हालांकि इन पूरे हालात को संभालने का काम मुख्य पायलट स्मित मच्छार ने किया, जो भारतीय नागरिक हैं. रिपोर्टों के मुताबिक घायल होने के बावजूद उन्होंने विमान को संभालने की कोशिश की. इसी दौरान कई यात्री कॉकपिट की ओर पहुंचे और उन्होंने चालक दल के साथ मिलकर को-पायलट को काबू करने में मदद की. इसके बाद बाकी क्रू ने विमान का नियंत्रण संभाला और सुरक्षित रूप से तबूक में लैंडिंग कराई। 

    इजरायली नागरिकों की जांबाजी 
    विमान में 174 लोग सवार थे, जिनमें करीब 166 इजराइली नागरिक बताए गए हैं. घायल पायलट को तबूक के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है. को-पायलट भी घायल हुआ और उसे अस्पताल ले जाया गया. इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की है. फ्लाईदुबई ने कहा है कि घटना के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. मामले की जांच पूरी होने तक एयरलाइन ने इजरायल आने-जाने वाली उड़ानें अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। 

     भारतीय राजदूत ने कैप्टन स्मित मच्छर के परिवार से मुलाकात की

      विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत ने दुबई में कैप्टन स्मित मच्छर के परिवार से मुलाकात की. उन्होंने भारत सरकार की ओर से उनके कल्याण और सहायता का पूरा आश्वासन दिया. कैप्टन स्मित मच्छर फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में कप्तान थे. उनके सह-पायलट ने उन पर हमला किया जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. हमले का मकसद अभी स्पष्ट नहीं हुआ है. भारत सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है और हर संभव मदद कर रही है। 

    नागरिक उड्डयन मंत्री ने स्मित मच्छर की बहादुरी की तारीफ की
    केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी और साहस की सराहना की. उन्होंने कहा कि उनकी कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली. नायडू ने बताया- हम कैप्टन स्मित की बहादुरी और साहस पर गर्व करते हैं. यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, लेकिन स्मित ने इसे रोकने में बहुत अच्छा काम किया. वे भारतीय हैं इसलिए हमें गर्व है, लेकिन उनके इस काम पर पूरी दुनिया गर्व कर रही है. फ्लाईदुबई विमान की घटना में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

     सर्जरी के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की हालत स्थिर
    दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज पायलट स्मित मच्छार की सर्जरी हो चुकी है और अब उनकी हालत स्थिर है. उन्हें अपने साथी पायलट के हमलों का शिकार होना पड़ा था, जिसमें उन्हें चाकू से गंभीर जख्म आए थे। 

     फ्लाईदुबई कॉकपिट हमले का मंजर, 16 साल के यात्री ने सुनाया किस्सा
    16 साल के यात्री पेलेग इटाली ने फ्लाईदुबई विमान की घटना को याद करते हुए कहा कि तेल अवीव जा रही उड़ान में कॉकपिट में हुए हमले से बचना चमत्कार जैसा लगा. उन्होंने बताया कि हमले ने उन्हें बहुत डरा दिया. पूरे शरीर में सिहरन हो गई और डर से वे बोल भी नहीं पा रहे थे. यह घटना विमान में हवा में हुई थी. सभी यात्री सुरक्षित उतरे, लेकिन उन पलों का आतंक अब भी उनके मन में है। 

     स्मित मच्छार के माता-पिता ने की पीएम मोदी से बात
     तेल अवीव से दुबई जा रही फ्लाइट की हाईजैकिंग वाले कांड में हीरो बने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के माता-पिता से खुद पीएम मोदी ने बात की है. उन्होंने इससे पहले कैप्टन स्मित मच्छार की दिलेरी को भारत के लिए गर्व की बात कहा। 

    स्मित मच्छार के माता-पिता सऊदी के लिए रवाना
      फ्लाईदुबई फ्लाइट के हाईजैक कांड के हीरो बने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज जारी है. इस बीच उनके माता-पिता सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए हैं। 

     

     

  • TMC के 4 बैंक अकाउंट रहेंगे फ्रीज, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं दिया

    TMC के 4 बैंक अकाउंट रहेंगे फ्रीज, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं दिया

    कलकत्ता

    तृणमूल कांग्रेस के चार बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से पार्टी को तत्काल राहत नहीं मिली है. शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट ने मामले की मेरिट पर कोई फैसला नहीं दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष में नहीं जाएगा. साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट से मुख्य मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है. यह मामला TMC विधायक विश्वनाथ दास की शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस जांच से जुड़ा है. पुलिस ने इसी जांच के दौरान पार्टी के इंडियन बैंक में मौजूद चार खातों को डेबिट-फ्रीज किया था. पार्टी ने खातों को चलाने की अनुमति मांगी थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम राहत से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। 

    इस सुनवाई के दौरान TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. उन्होंने कहा कि चारों खातों के फ्रीज होने से पार्टी का रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है. उन्होंने अदालत को बताया कि पार्टी के लेखा रिकॉर्ड के मुताबिक सामान्य कामकाज के लिए हर महीने कम से कम 12.15 करोड़ रुपए की जरूरत होती है. उनका तर्क था कि खातों पर रोक से राजनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने मामले में अलग FIR और कई आरोपों से जुड़ी जांच का हवाला दिया. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की मेरिट में जाने से इनकार किया और मुख्य सुनवाई हाईकोर्ट में जल्द करने को कहा। 

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस बी. वराले की पीठ ने TMC की याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार किया. अदालत ने कहा कि मुख्य मामला पहले से कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है. ऐसे में वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहती. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया. यानी चारों खातों को लेकर अंतिम कानूनी फैसला अभी बाकी है। 

    विधायक की शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
    मामला 18 जून 2026 को शुरू हुआ था. TMC विधायक विश्वनाथ दास ने बिधाननगर साइबर अपराध पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में पार्टी के बैंक खातों के जरिए कथित अवैध गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप लगाए गए थे. इसी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई. इसके बाद TMC ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया और बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई को चुनौती दी। 

    ये चार खाते HDFC वाले खातों से अलग हैं
        इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ये चार खाते पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग हैं. HDFC खातों से जुड़े पुराने मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को पार्टी को रोजमर्रा और मासिक खर्च चलाने की अनुमति दी थी. इसके लिए अदालत ने विशेष अधिकारी की निगरानी की व्यवस्था की थी. 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। 

        मौजूदा मामला इंडियन बैंक की हरीश मुखर्जी रोड शाखा में मौजूद चार खातों से जुड़ा है. 27 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन खातों को चलाने के लिए अतिरिक्त अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया है. हालांकि हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई करने को कहा गया है। 

    दोनों पक्षों ने अदालत में क्या दलील दी?
    TMC की ओर से सिंघवी ने कहा कि खातों पर रोक से पार्टी का कामकाज प्रभावित हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि पुराने एचडीएफसी खातों और मौजूदा इंडियन बैंक खातों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए. वहीं राज्य की ओर से तुषार मेहता ने जांच में सामने आए अलग-अलग आरोपों और एक अलग प्राथमिकी का उल्लेख किया. शिकायतकर्ता की ओर से भी खातों के इस्तेमाल को लेकर दलीलें रखी गईं. अदालत ने इन आरोपों पर इस चरण में कोई अंतिम राय नहीं दी. उसने केवल यह तय किया कि मौजूदा स्थिति में वह मामले की मेरिट में नहीं जाएगी. अब मुख्य मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा। 

  • संवाद, वैज्ञानिक आकलन और आपसी सहमति से न्यायपूर्ण एवं स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री  साय

    संवाद, वैज्ञानिक आकलन और आपसी सहमति से न्यायपूर्ण एवं स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली में महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री  मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा।

    बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिव सहित केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बैठक में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी है। इसलिए इसका समाधान भी प्रतिस्पर्धा या टकराव के बजाय सहयोग, विश्वास और सहमति की भावना से निकलना चाहिए।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारा प्रयास ऐसा समाधान निकालने का होना चाहिए जिसमें दोनों राज्यों और वहां के नागरिकों के हित सुरक्षित हों। छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान का पक्षधर है। ऐसा समाधान दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रदेश में स्थित है। राज्य में कृषि, सिंचाई, पेयजल और विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों की विकास आवश्यकताएं महानदी से जुड़ी हुई हैं। इसलिए किसी भी स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन वास्तविक आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके महत्व को भलीभांति समझता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हीराकुंड जलाशय के हितों और उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को  साझी समृद्धि का माध्यम बनाना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच ऐसा तंत्र विकसित हो, जिसमें जल उपलब्धता, आवश्यकता और उपयोग से संबंधित तथ्य पारदर्शी ढंग से साझा हों और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिए जाएं।

    केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की पहल से समाधान की उम्मीद

    मुख्यमंत्री  साय ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह द्वारा की गई पहल का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से आपसी सहमति का रास्ता निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। आज राज्यों के बीच वर्षों से लंबित विषयों को संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास भी सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय एकता की इसी भावना को मजबूत करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच जल संबंधी प्रश्नों का सौहार्दपूर्ण समाधान राज्यों के बीच विश्वास, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय से जटिल विषयों पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का वातावरण बना है।

    संवाद और वैज्ञानिक तथ्यों से निकलेगा टिकाऊ समाधान

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी से संबंधित विषय में भावनाओं के साथ वैज्ञानिक तथ्यों का भी उतना ही महत्व है। छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता तथा केंद्रीय जल आयोग के निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी तकनीकी आकलन पर पूरा भरोसा है।

    उन्होंने कहा कि जल उपलब्धता, वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरणीय जरूरतों और दोनों राज्यों की विकास संबंधी आवश्यकताओं का समग्र अध्ययन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। तकनीकी स्तर पर तथ्य स्पष्ट होंगे और राजनीतिक स्तर पर संवाद एवं विश्वास कायम रहेगा तो निश्चित रूप से ऐसा समाधान निकल सकता है, जो दोनों राज्यों को स्वीकार्य हो और आने वाली पीढ़ियों के हित में भी हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के परामर्श और केंद्र सरकार की मध्यस्थता से जो न्यायसंगत एवं व्यावहारिक समाधान सामने आएगा, छत्तीसगढ़ उसे सकारात्मक भावना से आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा।

    बस्तर की तरह दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वय से समाधान की दिशा में बढ़ने का विश्वास

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय के सकारात्मक परिणामों को बस्तर में करीब से देखा है। नक्सलवाद जैसी दशकों पुरानी चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा, विकास और जनविश्वास को साथ लेकर जिस समन्वित दृष्टिकोण से काम किया गया, उससे बस्तर में व्यापक बदलाव आया है।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जटिल और लंबे समय से लंबित विषयों में भी जब स्पष्ट इच्छाशक्ति, निरंतर संवाद और सभी पक्षों के बीच विश्वास हो, तो समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति संभव है। महानदी के विषय पर भी इसी सकारात्मक भावना से दोनों राज्य आगे बढ़ सकते हैं।

    महानदी विवाद नहीं, सहयोग की धारा बने : मुख्यमंत्री  साय

    मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के लोगों के बीच आत्मीय संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों प्रदेशों की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली में अनेक समानताएं हैं।

    उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था और शिवरीनारायण से पुरी तक जुड़े सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी आस्था और संस्कृति हमें जोड़ती है। महानदी भी इसी साझा विरासत और जीवन का हिस्सा है। इसलिए महानदी को विवाद की रेखा नहीं, बल्कि सहयोग, विकास और विश्वास की धारा बनाना हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों की प्राथमिकता अपने किसानों और नागरिकों का हित है। दोनों राज्यों के नेतृत्व को जमीनी आवश्यकताओं की समझ है। इसलिए परस्पर विश्वास के साथ ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है जिसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों के किसानों को लाभ मिले और दोनों राज्यों के विकास की आवश्यकताएं भी पूरी हों।

    तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर संवाद रहेगा जारी

    उल्लेखनीय है कि महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच राजनीतिक एवं तकनीकी स्तर पर संवाद लगातार आगे बढ़ रहा है। इससे पूर्व भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र सरकार के स्तर पर चर्चा हुई है। तकनीकी विषयों के समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है।

    महानदी जल बंटवारे से संबंधित विवाद के समाधान के लिए वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इसके समानांतर आपसी संवाद और तकनीकी विमर्श के माध्यम से दोनों राज्यों के लिए स्वीकार्य समाधान की संभावनाओं पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

    आज की उच्चस्तरीय बैठक को इसी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में सभी पक्षों ने संवाद और तकनीकी विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने तथा महानदी से जुड़े विषयों का पारस्परिक सहमति से स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में सकारात्मक चर्चा की।

    बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • भोपाल में 3 अक्टूबर को गोपालक सम्मेलन, अमित शाह करेंगे अनुदान राशि वितरण; महिलाओं की बढ़ेगी आय

    भोपाल में 3 अक्टूबर को गोपालक सम्मेलन, अमित शाह करेंगे अनुदान राशि वितरण; महिलाओं की बढ़ेगी आय

    सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को आएंगे भोपाल

    राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में पशुपालक दीदियों के सम्मान के साथ विभिन्न विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ व अनुदान राशि का वितरण
    लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आय

    भोपाल 

    ‘सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह 3 अक्टूबर को भोपाल आएंगे। वे भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित ‘राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन' में शामिल होकर उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' के स्वीकृति पत्रों का वितरण करेंगे। इसके साथ ही वे प्रदेशवासियों को डेयरी प्रसंस्करण, दुग्ध संयंत्र और गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला से जुड़ी विभिन्न विकास सौगातों की सौगात देंगे।

    सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शाह 255 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन में बनने वाले नए डेयरी प्लांट का भूमिपूजन करेंगे। इसके अतिरिक्त, 16.80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल में ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' के तहत 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला एंव मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के दुग्ध उत्पादकों को लगभग 12 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी तथा ‘कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी।

    प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के रखरखाव एवं भरण-पोषण के लिए माह जुलाई और अगस्त 2026 की 101 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि ऑनलाइन डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि गौशालाओं में दर्ज गोवंश के समुचित व्यवस्थापन, आहार एवं भरण-पोषण के लिए दी जाती है। राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है।

    महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल

    लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, अतिरिक्त आय के अवसर और पशुपालन की उत्पादकता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाना है।

    प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ‘लखपति गोपालक दीदी योजना’ का संचालन किया जा रहा है। “शून्य पूंजीगत निवेश, अधिकतम आनुवंशिक एवं आर्थिक लाभ” के मूल मंत्र पर आधारित इस योजना से प्रदेश की 2 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। योजना के तहत अवर्णित (नॉन-डिस्क्रिप्ट) नस्ल की गायों और भैंसों मंप उच्च नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को बिना अतिरिक्त खर्च के बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु प्राप्त हो रहे हैं।

    उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन

    उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न होने वाली F1 नस्ल की बछिया अपनी माता की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना अधिक दूध देने में सक्षम होती है। इससे पशुपालक परिवारों को एक लैक्टेशन में प्रति बछिया 50 से 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। पूरे जीवनकाल (5 से 6 लैक्टेशन) के दौरान एक बछिया से लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की जा सकेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार के पास ऐसी 3 से 4 बछियां होती हैं, तो उनका कुल अतिरिक्त आर्थिक लाभ 10 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। यह योजना पशुपालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं की समृद्धि का मुख्य जरिया बना रही है।