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  • कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है

    कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और समर्पण का परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश देश की फूड बॉस्केट बन चुका है। परम्परागत खेती से लेकर तकनीकी नवाचार और उद्योग तक विभाग के कर्मचारी-अधिकारी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। प्रदेश में कृषि विभाग सिर्फ डिपार्टमेंट का नाम नहीं यह, डेवलपमेंट का भी नाम है। कृषि में ही मध्यप्रदेश का विकास छुपा है, इस दृष्टि से मध्यप्रदेश की सुख-समृद्धि का रास्ता कृषि विभाग से होकर जाता है। प्रदेश के माथे से बीमारू राज्य का कलंक हटाने में बड़ी भूमिका कृषि विभाग की रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ही टीम है जो सरकार की कृषि योजनाओं और नीतियों को फाईलों से निकालकर खेत की मेढ़ों तक पहुंचाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के पदोन्नत शासकीय सेवकों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अभिनंदन और उनके आभार प्रदर्शन के लिए आयोजित कार्यक्रम को रवींद्र भवन में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक स्वरूप हल भेंटकर तथा फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर ई-विकास, डिजिटल एग्रीकल्चर, भावांतर भुगतान योजना पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया।  

     राज्य सरकार हर कदम पर कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति से उन्हें स्वयं को बहुत संतोष है। यह गर्व की बात है कि पदोन्नति के लिए एक दशक की लंबी प्रतीक्षा के बाद भी विभागीय अमले ने काम के प्रति अपने समर्पण को काम नहीं होने दिया। राज्य सरकार ने एक साथ 3 हजार 357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति का लाभ दिया है। इसमें किसान कल्याण और कृषि विभाग के 1 हजार 725, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 1 हजार 439, कृषि अभियांत्रिकी के 149, बीज प्रमाणीकरण के 36 और बीज निगम के 8 कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इसके साथ ही 44 युवाओं को सहायक वर्ग-3 के रूप में अनुकम्पा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। राज्य सरकार हर कदम पर विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ है।

    प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। उन्होंने पिछले 12 वर्ष के कार्यकाल में कठिन से कठिन फैसले लेकर भारत को नए दौर में पहुंचाया है। जापान में कल ही संपन्न हुए एशियन गेम्स 2026 में पदकों की संख्या के आधार पर भारत को चौथा स्थान हासिल हुआ है। हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में दुनिया की दिग्गज टीमों और उनके खिलाड़ियों को परास्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम जियो और जीने दो के भाव पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं। कृषि के आधार पर हमारी जीवनशैली शाकाहार को प्रोत्साहित करती है। खिलाड़ियों की उपलब्धियों ने दुनिया को बताया है कि शाकाहारी रहते हुए भी शरीर को तंदुरुस्त रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार की ओर से सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी की भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने विभागों के बीच व्यवस्थाओं के संचालन को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया है। इस वर्ष प्रदेश पौने 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन कर देश में प्रथम स्थान पर रहा है।

     अगले वर्ष में 1 लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती की जाएगी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निकट भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति की कोई पेंडेंसी नहीं रहेगी। सभी विभागों में पदोन्नति के लिए डीपीसी हर साल करवाई जाएगी, पदोन्नति से रिक्त पदों को समय से भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया भी लगातार चल रही है। इस वर्ष कृषि विभाग के अंतर्गत मंडी बोर्ड में 600 मंडी निरीक्षक, 50 उपयंत्री, 30 सचिव, 100 डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित कुल 1500 से अधिक पदों पर नयी भर्ती वर्ष 2026 में पूरी कर ली जाएगी। हमारी सरकार ने अब तक 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर युवाओं को नौकरी दी है। अगले वर्ष में 1 लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती करने का लक्ष्य है।

    प्रदेश के अन्नदाता की भावनाओं को भलीभांति समझते हैं किसान पुत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कर्मचारियों की परेशानी को समझा और पदोन्नति देकर उसे दूर भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं किसान पुत्र हैं, वे प्रदेश के अन्नदाता की भावनाओं को भलीभांति समझते हैं। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों की आय दोगुना करने के लिए दृढ़संकल्पित है। मंत्री  कंषाना ने कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से किसान कल्याण के लिए लागू की गईं योजनाओं को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारने का आहवान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अडिगता और स्पष्ट निर्णयों से पदोन्नतियों का रास्ता हुआ साफ

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव  निशांत वरवड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अडिगता और स्पष्ट निर्णयों के फलस्वरूप 10 वर्ष से अधिक समय से बंद पदोन्नतियों का रास्ता साफ हुआ। कृषि विभाग में पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया जारी है। कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाता की समृद्धि के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारी-कर्मचारियों को भी बड़ी सौगात दी है। कृषि विभाग के सभी कर्मचारी कृषक कल्याण वर्ष को सफल बनाने के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। कृषि संचालक  उमाशंकर भार्गव ने सभी अधिकारी-कर्मचारियों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • MP की कृषि ताकत का बढ़ा दबदबा, ‘देश की फूड बास्केट बन चुका मध्यप्रदेश’: CM यादव

    MP की कृषि ताकत का बढ़ा दबदबा, ‘देश की फूड बास्केट बन चुका मध्यप्रदेश’: CM यादव

    मध्यप्रदेश देश की फूड बॉस्केट बन चुका है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कृषि विभाग की टीम कृषि योजनाओं और नीतियों को फाईलों से निकालकर खेत की मेढ़ तक पहुंचाती है
    कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है
    राज्य सरकार ने एक साथ 3 हजार 357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति का लाभ दिया
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विभाग के 44 दिवंगत कर्मचारियों के परिजन को सौंपे अनुकम्पा नियुक्ति के पत्र
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि विभाग ने प्रदेश में किसानों के कल्याण और सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और समर्पण का परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश देश की फूड बॉस्केट बन चुका है। परम्परागत खेती से लेकर तकनीकी नवाचार और उद्योग तक विभाग के कर्मचारी-अधिकारी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। प्रदेश में कृषि विभाग सिर्फ डिपार्टमेंट का नाम नहीं यह, डेवलपमेंट का भी नाम है। कृषि में ही मध्यप्रदेश का विकास छुपा है, इस दृष्टि से मध्यप्रदेश की सुख-समृद्धि का रास्ता कृषि विभाग से होकर जाता है। प्रदेश के माथे से बीमारू राज्य का कलंक हटाने में बड़ी भूमिका कृषि विभाग की रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ही टीम है जो सरकार की कृषि योजनाओं और नीतियों को फाईलों से निकालकर खेत की मेढ़ों तक पहुंचाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के पदोन्नत शासकीय सेवकों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अभिनंदन और उनके आभार प्रदर्शन के लिए आयोजित कार्यक्रम को रवींद्र भवन में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतीक स्वरूप हल भेंटकर तथा फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर ई-विकास, डिजिटल एग्रीकल्चर, भावांतर भुगतान योजना पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया।  

     राज्य सरकार हर कदम पर कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति से उन्हें स्वयं को बहुत संतोष है। यह गर्व की बात है कि पदोन्नति के लिए एक दशक की लंबी प्रतीक्षा के बाद भी विभागीय अमले ने काम के प्रति अपने समर्पण को काम नहीं होने दिया। राज्य सरकार ने एक साथ 3 हजार 357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति का लाभ दिया है। इसमें किसान कल्याण और कृषि विभाग के 1 हजार 725, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 1 हजार 439, कृषि अभियांत्रिकी के 149, बीज प्रमाणीकरण के 36 और बीज निगम के 8 कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इसके साथ ही 44 युवाओं को सहायक वर्ग-3 के रूप में अनुकम्पा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं। राज्य सरकार हर कदम पर विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ है।

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। उन्होंने पिछले 12 वर्ष के कार्यकाल में कठिन से कठिन फैसले लेकर भारत को नए दौर में पहुंचाया है। जापान में कल ही संपन्न हुए एशियन गेम्स 2026 में पदकों की संख्या के आधार पर भारत को चौथा स्थान हासिल हुआ है। हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में दुनिया की दिग्गज टीमों और उनके खिलाड़ियों को परास्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम जियो और जीने दो के भाव पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं। कृषि के आधार पर हमारी जीवनशैली शाकाहार को प्रोत्साहित करती है। खिलाड़ियों की उपलब्धियों ने दुनिया को बताया है कि शाकाहारी रहते हुए भी शरीर को तंदुरुस्त रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार की ओर से सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने विभागों के बीच व्यवस्थाओं के संचालन को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया है। इस वर्ष प्रदेश पौने 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन कर देश में प्रथम स्थान पर रहा है।

     अगले वर्ष में 1 लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती की जाएगी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निकट भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति की कोई पेंडेंसी नहीं रहेगी। सभी विभागों में पदोन्नति के लिए डीपीसी हर साल करवाई जाएगी, पदोन्नति से रिक्त पदों को समय से भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया भी लगातार चल रही है। इस वर्ष कृषि विभाग के अंतर्गत मंडी बोर्ड में 600 मंडी निरीक्षक, 50 उपयंत्री, 30 सचिव, 100 डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित कुल 1500 से अधिक पदों पर नयी भर्ती वर्ष 2026 में पूरी कर ली जाएगी। हमारी सरकार ने अब तक 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर युवाओं को नौकरी दी है। अगले वर्ष में 1 लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती करने का लक्ष्य है।

    प्रदेश के अन्नदाता की भावनाओं को भलीभांति समझते हैं किसान पुत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कर्मचारियों की परेशानी को समझा और पदोन्नति देकर उसे दूर भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं किसान पुत्र हैं, वे प्रदेश के अन्नदाता की भावनाओं को भलीभांति समझते हैं। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों की आय दोगुना करने के लिए दृढ़संकल्पित है। मंत्री कंषाना ने कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से किसान कल्याण के लिए लागू की गईं योजनाओं को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारने का आहवान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अडिगता और स्पष्ट निर्णयों से पदोन्नतियों का रास्ता हुआ साफ

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अडिगता और स्पष्ट निर्णयों के फलस्वरूप 10 वर्ष से अधिक समय से बंद पदोन्नतियों का रास्ता साफ हुआ। कृषि विभाग में पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया जारी है। कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाता की समृद्धि के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारी-कर्मचारियों को भी बड़ी सौगात दी है। कृषि विभाग के सभी कर्मचारी कृषक कल्याण वर्ष को सफल बनाने के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव ने सभी अधिकारी-कर्मचारियों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

     

  • UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    लखनऊ 

    भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। हालांकि इसमें हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में दो ब्राह्मण चेहरे हैं, जबकि एक राजपूत चेहरा भी है। वहीं, दो महिलाओं को भी जगह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रत्याशियों को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। 

    बीजेपी की ओर से जारी सूची में 3 OBC, 2 SC और 3 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें 2 महिलाएं भी हैं. वहीं, उम्मीदवारों में 2 ब्राह्मण और 1 राजपूत शामिल हैं. OBC वर्ग में 1 लोधी, 1 पाल और 1 कुर्मी उम्मीदवार हैं। 

    भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इन आठ नामों की घोषणा की गई। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक अनुभव के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

    धर्मपाल सिंह लोधी बिरादरी से आते हैं. वह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. प्रकाश पाल संगठन में क्षेत्रीय मंत्री हैं और पाल बिरादरी से आते हैं. ओबीसी समुदाय में पाल को गडेरिया बिरादरी माना जाता है. विद्यासागर सोनकर दलित बिरादरी से हैं और पार्टी के अहम पदों पर रह चुके हैं. वह पूर्व MLC और मछलीशहर से पूर्व सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह पार्टी के पूर्व महामंत्री भी हैं. इस लिस्ट में  मंत्री हरदीप पुरी-बीएल वर्मा का नाम नहीं का नाम नहीं आया है। 

    16 अक्टूबर को वोटिंग
    उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10
    सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। चुनाव में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा गठबंधन के पास आठ सीटों पर जीत की स्थिति बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में आठवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

    धर्मपाल सिंह
    धर्मपाल सिंह बरेली के आंवला से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह कई बार विधायक रह चुके हैं और फिलहाल यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पास पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी है। 

    विद्यासागर सोनकर
    विद्यासागर सोनकर जौनपुर और पूर्वी यूपी के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं. वह 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए सैदपुर (SC) से सांसद चुने गए थे। 

    प्रियंका सिंह रावत
    प्रियंका सिंह रावत बीजेपी की पूर्व लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बाराबंकी से जीता था. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को हराया था। 

    राम प्रताप सिंह चौहान
    राम प्रताप सिंह चौहान यूपी बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता हैं. जून 2026 में यूपी बीजेपी में हुए बदलाव के दौरान उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया था. अगस्त 2026 में उन्हें पश्चिमी यूपी के संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई। 

    प्रकाश पाल
    प्रकाश पाल बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता और यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के अध्यक्ष हैं. वह पहले बीजेपी के कानपुर-बुंदेलखंड संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 

    इस बार नए चेहरों को मिला मौका
    इस बार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए सभी नए चेहरों को मौका दिया है. पुराने चेहरों को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है. इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य शामिल हैं. दिनेश शर्मा अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल हैं। 

    सपा का तीसरी सीट पर जोर
    समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पास अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटें जीतने की स्थिति है। हालांकि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी प्रयास कर सकती है, जिससे चुनाव में राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्यसभा चुनाव को अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों की नजर अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे में सेंध लगाने पर भी है।

    मजबूत संख्याबल का संकेत
    भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारकर जहां अपने मजबूत संख्या बल का संकेत दिया है, वहीं उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और सपा की आगे की रणनीति पर हैं। राज्यसभा चुनाव में यदि सभी 10 सीटों पर मुकाबला होता है तो 16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुनावी मैदान को औपचारिक रूप से सजा दिया है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में मौत के बाद बढ़ा विवाद, अभिजीत दीपके पर मर्डर केस को लेकर उठे सवाल

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में मौत के बाद बढ़ा विवाद, अभिजीत दीपके पर मर्डर केस को लेकर उठे सवाल

    मुंबई

    कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर हत्या का मुकदमा चल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिजीत दीपके की रैली में एक बुजुर्ग की मौत के बाद लोग CJP फाउंडर पर बुरी तरह भड़के हुए हैं और हत्या का मुकदमा दर्ज करने की भी मांग कर दी है। दरअसल 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में दीपके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में 75 वर्षीय बुजुर्ग एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह प्रदर्शन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था।

    मृतक बुजुर्ग व्यक्ति की पहचान ठाणे के गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई के रूप में हुई है। शिवाजी पार्क थाने के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें अचानक सीने में दर्द होने लगी। उन्होंने बताया, "पिल्लई शाम करीब साढ़े चार बजे CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शिवाजी पार्क पहुंचे थे। शाम पांच बजे उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके दोस्तों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।" चिकित्सकों ने बताया कि उपचार के दौरान पिल्लई की मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक CJP का विरोध प्रदर्शन करीब चार बजे शुरू हुआ था और उस समय तेज धूप थी। पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुटे और इस प्रतिष्ठित मैदान के आसपास का इलाका हजारों लोगों से भर गया। इस दौरान अराजकता फैल गई और बाद में बाद में बुजुर्ग की मौत हो गई।

    मर्डर केस दर्ज करने की मांग
    बुजुर्ग की मौत के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीजन्स फोरम' ने अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। फोरम ने अधिकारियों से अपील की है कि इस दुखद घटना के लिए सीधे तौर पर अभिजीत दीपके को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए। वहीं स्थानीय वकील और शिवाजी पार्क की निवासी सिद्धि देवलेकर की शिकायत पर पुलिस ने कानूनी शिकंजा भी कसा है। सिद्धि देवलेकर ने CJP नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

    देवलेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बॉम्बे हाईकोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के स्पष्ट आदेशों के तहत शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति खारिज कर दी गई थी। इसके बावजूद CJP नेताओं ने कानून को दरकिनार कर भारी भीड़ जुटाई। उन्होंने एक बयान में कहा, “यह कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था। यह राजनीतिक विरोध के नाम पर कानून और अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाने की कोशिश थी।” शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में CJP के आयोजकों और 400-500 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 189 और 223 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(3) व 135 के तहत FIR दर्ज की है।

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का आंदोलन
    गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कई आपत्तियों को दरकिनार कर फैसले लिए थे। इसके बाद देश के प्रमुख विपक्षी दलों सहित CJP ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP ने मुंबई के बाद दिल्ली में प्रदर्शन का भी ऐलान किया है।

  • ‘SIR में नाम काटने से नहीं रोक सकते…’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग ठुकराई

    ‘SIR में नाम काटने से नहीं रोक सकते…’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग ठुकराई

     मुंबई

    महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं मिली है. अदालत ने वोटर लिस्ट से नाम काटने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। 

    वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) यूथ प्रेसिडेंट सागर रमेश गवाई की तरफ से SIR के खिलाफ ये याचिका दायर की गई थी. याचिका में घर-घर जाकर वेरिफिकेशन (डोर-टू-डोर एन्युमरेशन) के दौरान नियमों की अनदेखी करने और मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए गए हैं। 

    अदालत में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से पेश सीनियर वकील आशुतोष कुंभकोणी ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने अंतरिम निर्देशों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की व्यापक सुनवाई कर रहा है और 8 अक्टूबर को इस पर आगे की सुनवाई होनी है। 

    दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ नेता और वकील प्रकाश अंबेडकर ने इसका विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि पुराना आदेश सिर्फ बिहार चुनाव से जुड़ा था, जबकि उनकी ये याचिका अलग है. प्रकाश अंबेडकर ने कोर्ट से अपील की कि कम से कम महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए ऐसा आदेश दिया जाए कि उनके नाम न काटे जाएं. उन्होंने अदालत से इस पर रोक लगाने की मांग की। 

    सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के कारण HC का रुख
    बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने समानांतर कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहले से ही इस मामले पर विचार कर रही है, तो हाईकोर्ट के लिए इस पर समानांतर सुनवाई करना और कोई आदेश देना सही नहीं होगा. बेंच ने टिप्पणी की कि जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, तो ऐसा कदम उठाना कैसा लगेगा?

    कोर्ट ने ये भी कहा कि 8 अक्टूबर की तारीख आने ही वाली है, इसलिए फिलहाल इस मामले में कोई जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, चुनाव आयोग की अपील पर कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को 3 हफ्ते के लिए टाल दिया है और अब इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर के आसपास होगी। 

    इस बीच, याचिकाकर्ताओं की चिंता ये है कि अगर नामों के कटने का सिलसिला नहीं रुका, तो आगामी चुनावों में कई वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। 

  • सस्ता और किफायती घर देने में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय पहचान, ‘सबके लिए आवास’ मिशन को मिली बड़ी कामयाबी

    सस्ता और किफायती घर देने में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय पहचान, ‘सबके लिए आवास’ मिशन को मिली बड़ी कामयाबी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकार – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    जमीन से लेकर किफायती घर तक प्रभावी व्यवस्था खड़ी करने के प्रयासों को मिला सम्मान – उप मुख्यमंत्री अरुण साव

    ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के लिए भूमि आरक्षण और किफायती आवास उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय सम्मान

    विश्व पर्यावास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में छत्तीसगढ़ पुरस्कृत

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ को मिली राष्ट्रीय पहचान

    निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण से 25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के उपलब्ध हुई जमीन

    रायपुर 
     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। 

    ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी (Affordable Housing in Partnership) के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Best Practice) के लिए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया है।

    विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

    हर पात्र परिवार को पक्का आवास हमारा संकल्प

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA तथा नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की हमारी पहल को मिली यह पहचान राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली का प्रमाण है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि एक परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध हो।

    25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के मिली जमीन

    शहरी क्षेत्रों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सबसे बड़ी चुनौतियों में भूमि की उपलब्धता प्रमुख रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चुनौती के समाधान के लिए निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।

    इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप राज्य में 25 हजार 413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत 17 हजार 790 और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 7 हजार 623 आवास शामिल हैं।

    इस पहल की विशेषता यह है कि कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास केवल शहरों के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन रहे हैं। इससे लाभार्थी परिवारों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा सहित अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

    भूमि से लेकर आवास तक छत्तीसगढ़ ने विकसित की प्रभावी व्यवस्था

    राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एएचपी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा SUDA द्वारा नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे शहरी गरीब परिवारों के लिए किफायती आवास की उपलब्धता को गति मिली है। इसी समग्र कार्यप्रणाली को भारत सरकार ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है।

    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे ठोस प्रयासों की पहचान है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना इसी कार्य का परिणाम है।

    साव ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि शहरों में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध हों। यह राष्ट्रीय सम्मान पूरी टीम को और बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित करने के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।

    ‘सबके लिए आवास’ की दिशा में छत्तीसगढ़ का मजबूत कदम

    राज्य सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन ने एक ओर आवास निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता की बड़ी चुनौती का समाधान किया है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी बनाया है।

    विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली की राष्ट्रीय पहचान है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग, ECI को देना होगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग, ECI को देना होगा जवाब

    नई दिल्ली

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. वह अब भी अपने पद पर बने रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सस्पेंड करने का आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. जी हां, चुनाव आयोग और एसआईआर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज ज्ञानेश कुमार मामले पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। 

    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    दरअसल, चुनाव आयोग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने दलील दी कि अगर अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया तो देश जल उठेगा. याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है। 
    इस पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट सही भी हो सकती है और गलत भी. हम इस मामले को देख रहे हैं. सीजेआई सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली तीन जजों में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। 

    क्या है पूरा विवाद?
    मामला मुख्य रूप से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)से जुड़े फैसलों को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग के कुछ फैसले ऐसे तरीके से लिए गए, जिनमें आयोग के अन्य दो सदस्यों, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति या जानकारी नहीं थी। याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े कई फैसलों और आदेशों को लेकर दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या कम से कम 14 बताई गई है। हालांकि, यह आरोप अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं हुए हैं और निर्वाचन आयोग का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग नामक संवैधानिक संस्था में निहित है। उनका कहना है कि CEC आयोग के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन वे स्वयं पूरे आयोग के स्थान पर निर्णय लेने की शक्ति नहीं रखते।

    याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की?
    पटना निवासी राकेश कुमार सिंह और दिल्ली के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें CEC के कामकाज पर सवाल उठाते हुए विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं की न्यायिक जांच की मांग की गई है। एक याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC पद से निलंबित करने को अंतरिम राहत के तौर पर मांगा गया था। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने SIR तथा उससे जुड़े फैसलों को चुनौती दी है। दूसरी याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल पैदा हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निलंबन क्यों नहीं किया?
    सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि केवल मीडिया रिपोर्टों या आरोपों के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ तत्काल अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने पहले निर्वाचन आयोग से जवाब और संबंधित रिकॉर्ड मांगने का रास्ता चुना है। पीठ ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से कानून के मुताबिक काम करने की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि विवादित फैसले सर्वसम्मति से, बहुमत से या केवल CEC द्वारा लिए गए थे। इससे आगे की सुनवाई में निर्णय प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर महत्वपूर्ण बहस हो सकती है।

    कोर्ट ने दिया अहम संकेत
    सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि यदि यह पाया जाता है कि निर्वाचन आयोग के किसी फैसले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो अदालत उस फैसले पर आगे कार्रवाई कर सकती है। यानी सोमवार का आदेश CEC को क्लीन चिट नहीं है। अदालत ने केवल तत्काल निलंबन जैसी अंतरिम राहत देने से फिलहाल इनकार किया है और मामले में जवाब मांगा है। यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना है, लेकिन उन्हें गलत भी नहीं ठहराया है। मामले की अगली प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के जवाब और अदालत के सामने पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।

    SIR भी विवाद के केंद्र में
    इस पूरे विवाद की एक बड़ी कड़ी मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़ी है। याचिकाकर्ताओं ने SIR की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि यदि यह प्रक्रिया निर्धारित कानूनी अधिकार और प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी, तो उससे जुड़े फैसलों और कदमों को निरस्त किया जाए। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ निर्णय और चुनावी सॉफ्टवेयर या दिशानिर्देशों में किए गए बदलाव आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना किए गए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने पहले कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय होना असामान्य नहीं है और उसके आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं।

    अब आगे क्या होगा?
    सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश के बाद अब निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। खासतौर पर यह स्पष्ट करना होगा कि जिन फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वे किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और उनमें CEC तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की क्या भूमिका थी। अदालत यह भी देख सकती है कि संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानून के तहत आयोग के सामूहिक निर्णय की क्या सीमा है और CEC की अध्यक्षीय भूमिका तथा आयोग की सामूहिक शक्ति के बीच कानूनी अंतर किस तरह लागू होता है।

    ECI से मांगा जवाब
    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि CEC ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे और सुप्रीम कोर्ट ने उनके तत्काल निलंबन का अंतरिम आदेश नहीं दिया है। साथ ही, मामले की न्यायिक जांच जारी रहेगी और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा गया है। इसलिए सोमवार का आदेश मामले का अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि आगे की सुनवाई की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। यानी, ‘CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी’ कहना भी सही नहीं होगा और ‘कोर्ट ने उन्हें निलंबित कर दिया’ कहना भी गलत होगा। सही स्थिति यह है कि अदालत ने तत्काल अंतरिम निलंबन से इनकार करते हुए निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है और आरोपों की जांच का रास्ता खुला रखा है।

    मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम बातें
        मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' के किसी भी बदले हुए वर्शन को मंजूरी नहीं दी है।

        पीठ ने पूछा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित कर दिया जाता है तो निर्वाचन आयोग का कामकाज कौन संभालेगा और “चुनाव कौन कराएगा?” पीठ ने कहा कि किसी भी आदेश से पहले संबंधित पक्षों का जवाब लेना आवश्यक है।

        सीजेआई ने कहा कि कानून अनिवार्य है और कोर्ट उम्मीद करता है कि उसका पालन किया जाएगा। यदि कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो कोर्ट संबंधित फैसलों को निरस्त कर सकता है।

        जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी सवाल किया कि क्या प्रतिवादियों को सुने बिना ऐसा आदेश पारित किया जा सकता है।
        उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि कोई निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था तो कोर्ट उस निर्णय पर रोक लगा सकता है और उसे अधिकारातीत (ultra vires) घोषित कर सकता है। लेकिन केवल इस आधार पर कि सभी फैसले एकतरफा लिए गए थे, प्रतिवादियों को सुने बिना निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

    क्या है मामला?
    कोर्ट वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में यह तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग, जो कई सदस्यों वाली एक संवैधानिक संस्था है, उसे मिली शक्तियों का इस्तेमाल कानून के तहत जरूरी सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा है।

    यह विवाद एक अंग्रेजी अख की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार मतदाता सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

    SC की अहम टिप्पणी
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि संबंधित फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था, तो कोर्ट उन आदेशों को रद्द कर देगा. कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए केंद्र और ECI से जवाब मांगा है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। 

  • मिसरोद के सरकारी स्कूल में बवाल, शिक्षिका पर छात्रों से घर का काम कराने और मारपीट के आरोप

    मिसरोद के सरकारी स्कूल में बवाल, शिक्षिका पर छात्रों से घर का काम कराने और मारपीट के आरोप

    भोपाल

    राजधानी भोपाल के मिसरोद स्थित शासकीय विद्यालय में Z Alpha के छात्र-छात्राओं ने शिक्षिका को हटाने और निलंबित करने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन शुरू कर दिया। विद्यार्थी स्कूल परिसर में धरने पर बैठ गए हैं और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    बच्चों से घर का काम करवाने का आरोप

    प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि शिक्षिका बबिता कुशवाहा कथित रूप से अपने घर से संबंधित काम स्कूल में लेकर आती हैं और बच्चों से वह काम करवाती हैं। विद्यार्थियों का यह भी आरोप है कि काम करने से इनकार करने पर बच्चों के साथ कथित रूप से मारपीट की जाती है।

    मामला भोपाल के मिसरोद सरकारी स्कूल का है जहां Gen Alpha छात्रों ने अपनी ही शिक्षिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और शिक्षिका बबीता कुशवाहा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को प्रदर्शन पर बैठ गए हैं. छात्रों ने स्कूल प्रशासन से दो टूक कहा कि अगर निलंबन नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा. स्टूडेंट्स का कहना है कि बबीता कुशवाह घर का काम कराती हैं काम नहीं करने पर फेल करने की धमकी देती हैं. प्रोजेक्ट के लिए पैसे मांगती हैं पैसे नहीं देने पर पाइप से पिटाई करती हैं। 

    निलंबन की मांग पर अड़े छात्र
    विद्यार्थियों ने कहा कि जब तक शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। छात्रों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।

    शिक्षिका को दूसरी जगह भेजा गया
    विद्यार्थियों के विरोध के बाद शिक्षिका को दूसरी जगह भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं और निलंबन की मांग कर रहे हैं।

    फिलहाल विद्यार्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में जांच और प्रशासन की रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    कार्रवाई न होने तक आंदोलन की चेतावनी
    छात्रों ने शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए स्कूल में धरना शुरू कर दिया. प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपनी शिकायतें स्कूल प्रशासन के सामने रखीं और कहा कि जब तक शिक्षिका के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 

    छात्रों ने लगाए 2500 रुपए लेने के आरोप
    बताया जा रहा है कि 11वीं के छात्रों ने 3 अक्टूबर को प्राचार्य को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग भी की थी. इस आवेदन में उन्होंने लिखा था कि भर्ती परीक्षाओं के दौरान उनसे सफाई कराने, रोल नंबर लिखने और बेंच सही करने जैसे कई काम करवाए जाते हैं. काम कराने के लिए रविवार को भी स्कूल बुलाया गया था. छात्रों ने आरोप लगाए कि मैडम हर महीने प्रोजेक्ट के नाम पर 2500 रुपए मांगती हैं. वह क्लास में पढ़ाती नहीं है बल्कि अपने मोबाइल में लगी रहती है। 

    मामले के सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के सामने भी छात्रों की शिकायतों की जांच कर उचित कदम उठाने की चुनौती है. अब देखना होगा कि छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। 

  • चीतों के लिए खुशखबरी! कूनो में KJP21 ने दिए 5 शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    चीतों के लिए खुशखबरी! कूनो में KJP21 ने दिए 5 शावक, देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

    श्योपुर

    कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है। खास बात यह है कि KJP21 भारतीय धरती पर जन्म लेने के बाद शावकों को जन्म देने वाली तीसरी मादा चीता बन गई है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं।  
      श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से प्रोजेक्ट चीता को लेकर एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सोमवार को यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही देश में अब चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 चीते भारत की धरती पर जन्मे हैं।

    केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इंटरनेट मीडिया 'एक्स' पर नवजात शावकों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया।

    Kuno National Park में तीसरी भारतीय जन्मी मादा चीता बनी मां
    KJP21 भारत में जन्मी उन मादा चीतों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया है। वह मुखी और KGP12 के बाद तीसरी ऐसी मादा चीता है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत में चीता पुनर्स्थापना का लक्ष्य केवल दूसरे देशों से चीतों को लाकर उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है। असली सफलता तब मानी जाएगी, जब यहां पैदा हुई नई पीढ़ी आगे प्रजनन करे और एक स्थिर चीता आबादी विकसित हो। KJP21 का पांच शावकों को जन्म देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    Botswana से आए नर चीते से पैदा हुए पांच शावक
    इन पांच शावकों का जन्म अपने साथ एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाया गया नर चीता है। यानी इन शावकों के जन्म के साथ भारत में Botswanan lineage यानी बोत्सवाना वंशावली की शुरुआत हुई है। यह प्रोजेक्ट चीता के लिए आनुवंशिक विविधता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

    भारत में जन्मी तीसरी मादा चीता ने बढ़ाया कुनबा
    केंद्रीय मंत्री यादव ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा- प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक व आल्हादित कर देने वाला पल! भारत में जन्मी 32 माह की चीता KJP21 ने आज (सोमवार) को कूनो नेशनल पार्क में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। वह भारत में जन्म लेने वाली तीसरी ऐसी मादा चीता है, जिसने यहां शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं।

    वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में चीतों की अगली पीढ़ी तैयार होने की प्रक्रिया और मजबूत हो रही है।

    बोत्सवाना की नई जेनेटिक लाइन की शुरुआत
    इन पांच शावकों के जन्म की एक और खासियत है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। ऐसे में इन शावकों के साथ भारत में बोत्सवाना की जेनेटिक लाइन की भी शुरुआत हुई है। इससे देश में विकसित हो रहे चीता कुनबे में नई आनुवंशिक विविधता जुड़ने की उम्मीद है।

    भारत में जन्मे चीतों का आंकड़ा 40 के पार
    पांच नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में लगातार हो रहे प्रजनन को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन टीम और अन्य कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्मी चीतों की यह नई पीढ़ी देश में चीता पुनर्स्थापना की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।

    चीता पुनर्स्थापना अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय
    भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की उल्लेखनीय यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय है। यह उपलब्धि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिए निरंतर किए जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित करती है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम तथा सभी सहयोगियों को बधाई दी गई है। उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। नन्हे मेहमानों के आगमन से कूनो की धरती पर एक बार फिर प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण की नई उम्मीद ने जन्म लिया है।

  • 7-8 अक्टूबर को रायपुर में लगेगा रोजगार मेला, 8 हजार से ज्यादा नौकरियों के मौके; CM विष्णु देव साय करेंगे शुभारंभ

    7-8 अक्टूबर को रायपुर में लगेगा रोजगार मेला, 8 हजार से ज्यादा नौकरियों के मौके; CM विष्णु देव साय करेंगे शुभारंभ

    राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7-8 अक्टूबर को रायपुर के इंडोर स्टेडियम 

    8 हजार से अधिक पदों पर युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा आयोजन

    तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों की रिक्तियों के लिए युवा कर सकेंगे आवेदन

    रायपुर
    प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में और कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब की अध्यक्षता में आयोजित इस रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक रिक्त पदों पर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

              सचिव कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग ड. बसवराजू  एस. ने बताया कि द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रिक्त पदों के लिए युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इच्छुक युवा erojgar.cg.gov.in (ई-रोजगार पोर्टल) पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं। राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान ऑफर लेटर प्रदान किए जाने की भी तैयारी की गई है। इसके साथ ही रोजगार मेले में आने वाले युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों सहित विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। संबंधित विभागों एवं जिलों को भी युवाओं तक रोजगार मेले की जानकारी पहुंचाने और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

              राज्य शासन द्वारा आयोजित यह रोजगार मेला प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थानों एवं उद्योगों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। शासन ने आयोजन को सफल बनाने तथा अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।