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  • UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर से नया नियम लागू, जानें ₹2,000 से ऊपर ट्रांजैक्शन पर कितना लगेगा MDR

    UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर से नया नियम लागू, जानें ₹2,000 से ऊपर ट्रांजैक्शन पर कितना लगेगा MDR

    नई दिल्ली
    UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए 15 अक्टूबर 2026 से कुछ बदलाव लागू होने जा रहे हैं। नए MDR (Merchant Discount Rate) नियम के तहत कुछ चुनिंदा P2M (Person-to-Merchant) UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों को हर बार अतिरिक्त पैसा देना होगा। MDR मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी पक्ष पर लागू होगा। खास बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M पेमेंट इस नए MDR इंफ्रास्ट्रक्चर से बाहर रहेंगे

    ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर क्या असर होगा?
    कम पैसे के UPI मर्चेंट पेमेंट को नए चार्ज से राहत मिलेगी। ₹2,000 या उससे कम के P2M ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि इनमें से ज्यादातर या तो ₹2,000 से कम हैं या जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आते हैं। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर इस बदलाव का सीधा असर सीमित रहेगा।

    ₹2,000 से ऊपर के P2M पेमेंट पर कितना MDR?
    15 अक्टूबर से एलिजिबल P2M UPI ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4% MDR लागू होगा। यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के बजाय मर्चेंट साइड पर लगाया जाएगा। साथ ही बड़े पेमेंट के लिए एक मैक्सिमम कैप (Maximum Cap) भी रखा गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के UPI पेमेंट पर MDR अधिकतम ₹300 होगा। उदाहरण के लिए ₹1 लाख के पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से ₹400 बनता है, लेकिन कैप की वजह से मर्चेंट से अधिकतम ₹300 ही लिया जाएगा।

    P2M और P2P में क्या अंतर है?
    P2M यानी पर्सन-टू-मर्चेंट का मतलब है, जब कोई व्यक्ति किसी दुकान, बिजनेस या सर्विस प्रोवाइडर को UPI से भुगतान करता है। उदाहरण के लिए किसी दुकान का QR कोड स्कैन करके सामान खरीदने के लिए पैसे देना P2M ट्रांजैक्शन है। वहीं, P2P यानी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजता है। ऐसे UPI ट्रांसफर पर नया MDR लागू नहीं होगा, यानी परिवार या दोस्तों को UPI के जरिए पैसे भेजने पर रकम चाहे जितनी हो, इस नियम के तहत MDR नहीं लगेगा।

    छोटे दुकानदारों को भी देना होगा MDR?
    हर छोटे मर्चेंट पर 0.4% MDR लागू नहीं होगा। P2PM यानी पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट(Person-to-Person-Merchant कैटेगरी में आने वाले छोटे वेंडर्स के लिए जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। इस कैटेगिरी में वे छोटे कारोबारी शामिल हैं, जो QR कोड के जरिए अपने पर्सनल बैंक अकाउंट में UPI पेमेंट लेते हैं और जिनका मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है। खास बात यह है कि इस छूट के लिए GST रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है, यानी पात्रता मर्चेंट के बैंक अकाउंट क्लासिफिकेशन और मंथली कलेक्शन लिमिट पर निर्भर करेगी।

    रेलवेज से लेकर स्टॉक मार्केट तक अलग नियम
    कुछ खास सेक्टर्स के लिए MDR की दर अलग रखी गई है। रेलवेज, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी कैटेगिरी में ₹2,000 से ऊपर के एलिजिबल ट्रांजैक्शन पर 0.4% के बजाय ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR लागू होगा। वहीं, म्युच्युअल फंड्स, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर्स से जुड़े पेमेंट पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

    इस बदलाव का सबसे अहम पहलू यह है कि MDR कस्टूमर फ्री नहीं है। इसलिए आम ग्राहक को UPI पेमेंट करते समय अलग से MDR देने की जरूरत नहीं होगी। वहीं छोटे पेमेंट और P2P ट्रांसफर को नए नियमों से बाहर रखा गया है, जिससे रोजमर्रा के UPI इस्तेमाल पर असर सीमित रहने की उम्मीद है।

     

  • कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान कृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

    स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है।

    अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा

    कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

     

  • ‘अपराधियों के मन में डर पैदा करना होगा’, दिल्ली-NCR में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

    ‘अपराधियों के मन में डर पैदा करना होगा’, दिल्ली-NCR में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

    नई दिल्ली

    दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों में हुई रेप की वारदातों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि अपराधियों के मन में डर पैदा करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक पुलिस अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं करती कि रेप किया तो मारे जाएंगे, तब तक स्थिति नहीं बदलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, हम भारत जैसे देश में हैं। सिर्फ कागज पर बातें लिखना काफी नहीं है। आपको असल में कदम उठाने होंगे।

    कोर्ट ने पुलिस को बिना हिचके सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा, अगर आपको थोड़ा और सख्त या कठोर होना पड़े, तो हिचकिचाएं नहीं। कुछ लोग आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार) को लेकर हंगामा करेंगे, लेकिन आपको अपना फर्ज निभाना होगा। हाल ही के दिनों में दिल्ली एनसीआर में रेप की कई वारदाते सामने आई थीं। इसमें स्लीपर बस में नाबालिग से गैंगरेप की वारदात भी शामिल थी जिसने निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी थी। इसके अलावा कालकाजी इलाके में आस्था कुंज पार्क में लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था। वारदात को अंजाम देने वाले फर्जी पुलिस बनकर आए थे। इन घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।

    क्या वॉर रूम बनाने का कोई प्रावधान है?
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि अपराध रोखने के लिए आप क्या कर रहे हैं। साथ ही पूछा कि क्या दिल्ली में अपराधों की निगरानी के लिए वॉर रूम बनाने का कोई प्रावधान है? कोर्ट ने बताया कि अलग-अलग हाई कोर्ट में ऐसे वॉर रूम बनाए गए हैं। कोर्ट ने National Database on Sexual Offenders के जरिए संदिग्ध और यौन अपराधों में शामिल लोगों की निगरानी पर भी ध्यान देने को कहा। 

    सभी एजेंसियां मिलकर इस मुद्दे पर काम करें- सुप्रीम कोर्ट
    कोर्ट ने कहा कि अगर सभी एजेंसियां मिलकर इस मुद्दे पर काम करें और खास तौर पर ध्यान दें, तो स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह इस मामले के हर पहलू पर गंभीरता से ध्यान दे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि अगले चार हफ्तों में फिर इस तरह की घटनाएं सामने आएं। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों के आसपास की स्थिति पर भी ध्यान देने को कहा। सुनवाई के दौरान कहा गया कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो छात्राओं को परेशान करते हैं और उन्हें लगातार तंग करते हैं।

    जज ने 2012 के निर्भया कांड का किा जिक्र
    कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में हजारों बिना अनुमति वाले खाने-पीने के ठिकाने हैं, जहां असामाजिक तत्व जमा होते हैं। इनमें कुछ जगहों पर शराब भी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई। इस पर जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने 2012 के निर्भया कांड का जिक्र करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी कहीं खाना खाने गए थे और वहां शराब भी पी थी, जिसके बाद अपराध किया गया। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि इन सभी पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    अपराध रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम होगा
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि अपराध रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। केवल कागजों पर योजना बनाने से काम नहीं चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर अपराध रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है तो पीछे नहीं हटना चाहिए। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि लोग आर्टिकल 21 का हवाला देकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन पुलिस की जो जिम्मेदारी है, उसे हर हाल में निभाना होगा। कोर्ट ने कहा कि हमारा मकसद यह होना चाहिए कि रेप और ऐसे दूसरे अपराध पूरी तरह खत्म हों।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस के पास पर्याप्त बल नहीं है तो नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए। पुलिसकर्मियों को उचित ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि इन कदमों को पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा, लेकिन तब तक किसी घटना को रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाने होंगे।

    दिल्ली पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की हिदायत
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। पुलिस को ऐसे समय में खास तौर पर सतर्क रहना होगा। कोर्ट ने कहा कि अपराध होने के बाद आरोपी को पकड़ना और गिरफ्तार करना ही काफी नहीं है। पुलिस का असली काम अपराध को होने से रोकना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस को ऐसा माहौल बनाना होगा कि अपराध करने वाले के मन में डर पैदा हो। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई अपराध करता है तो उसे पकड़ लिया जाएगा, गिरफ्तार कर लिया जाएगा—लेकिन यह समस्या का पूरा समाधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि दिल्ली पुलिस को अपराध होने से पहले उसे रोकने पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

    दिन-रात दिल्ली में कड़ी निगरानी
    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में दिन और रात दोनों समय कड़ी निगरानी रखने को कहा। कोर्ट ने साफ कहा कि जवाबदेही सबसे अहम है और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी।

    2012 निर्भया केस का भी जिक्र
    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया केस का भी जिक्र किया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि उन जगहों पर भी ध्यान दिया जाए जहां बिना अनुमति चल रहे खाने-पीने के ठिकानों पर शराब भी परोसी जाती है। कोर्ट ने कहा कि 2012 की घटना के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपियों ने कहीं खाना और शराब ली थी और उसके बाद अपराध किया था। 

    पार्क और सार्वजनिक जगहों पर रोशनी
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में सभी सार्वजनिक जगहों और पार्कों में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह SG तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि सार्वजनिक जगहों और पार्कों में उचित लाइटिंग की व्यवस्था हो। मालूम हो कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हाल ही रेप के कई मामले सामने आए हैं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।

    अपराधियों के मन में पैदा कीजिए डर- सुप्रीम कोर्ट
    कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आप सख्ती कीजिए। अपराधियों के मन में डर पैदा कीजिए। मानवाधिकार कार्यकर्ता आप पर आर्टिकल 21 के हनन के आरोप लगाएंगे, लेकिन आपको सख्त होना होगा। कोर्ट ने कहा कि समाज की हर महिला हमारी माता है, बहन है। हमें उन्हें सुरक्षित महसूस करवाना होगा। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से घर पर महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं, वैसा ही समाज में भी करना होगा। बस में एक महिला अकेले सफर कर रही है तो उसकी जानकारी आपको होनी चाहिए। आपको उसकी सुरक्षा के लिए सक्रिय होना होगा। 16 नवंबर को अगली सुनवाई।

    हर जगह निगरानी बढ़ाने के आदेश
    कोर्ट ने पुलिस को स्कूल- कॉलेजों से लेकर बस स्टॉप तक, हर जगह निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस से यह भी कहा कि वे पूरे शहर में निगरानी बढ़ाएं और बस स्टॉप, मेट्रो, रेलवे स्टेशन, स्कूल, कॉलेज जैसी जगहों पर ज्यादा ध्यान दें, जहां महिलाओं के साथ अपराधों का खतरा ज्यादा होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि ये दिल्ली पुलिस के लिए बहुत बड़ा काम है और बहुत बड़ी चुनौती होने वाली है लेकिन इसी में पुलिस की सबसे बड़ी जीत है। कोर्ट ने कहा, यह आप सबके सामने एक बहुत बड़ा काम है। यह एक चुनौती है और जिस दिन आप इस चुनौती से पार पा लेंगे, वह डिपार्टमेंट के लिए एक बड़ी जीत होगी।

    'लोग आपसे डरे नहीं'
    सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को नसीहत दी है कि उनका रवैया ऐसा होना चाहिए कि जनता उनसे बात करने में डरे नहीं। वह खुद आगे आकर आपसे मिलें और बात करें। कोर्ट ने कहा, आपका रवैया ऐसा होना चाहिए जिससे आम आदमी को आपसे बात करने का भरोसा मिले।

  • 45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    सहरसा
     पिछड़े कोसी क्षेत्र में आने वाले दिनों में डेयरी से संबंधित कारोबार तेजी से बढ़ेगा। सरकार ने सात निश्चय -3 के तहत एक अरब 26 करोड़ सात लाख की लागत से कोसी दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड के अंतर्गत दही प्लांट, प्रीमियम आईस्क्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन प्लांट, इंस्टैंट मिल्क चिलिंग प्लांट खोलने की योजना है।

    इससे कोसी क्षेत्र में डेयरी व दुग्ध व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के पशुपालक व दुग्ध कारोबारी काफी लाभांवित होंगे, जो पिछड़े कोसी क्षेत्र के विकास का बढ़ा कारण बनेगा।

    नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का भी होगा गठन
    श्वेत क्रांति-2 पहल के तहत डेयरी किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर बल दिया जाएगा।

    इस समिति के गठन होने से सहकारी डेयरी के माध्यम से उपभोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले समितियों का अधिकांश हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचेगा।

    सात निश्चय- 3 से प्राप्त राशि से कोसी प्रमंडल के तीनों जिले में मिल्क चिलिंग प्लांट एवं इंस्टैंट मिल्क चिलिंग सिस्टम की स्थापना होगी। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और इसे खराब होने से बचाया जा सकेगा।

    दुग्ध उत्पादन बढ़ने से सशक्त होगी ग्रामीण महिलाएं

    कोसी प्रमंडल में दुग्ध उत्पादन में जीविका के माध्यम से महिलाएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। कौशिकी जीविका महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी महिलाओं द्वारा संचालित है और सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में अपनी सेवाएं दे रही है।

    वर्तमान में कंपनी से 45,000 दुग्ध उत्पादक जीविका दीदी जुड़ी हुई हैं। यह महिलाएं न केवल दुग्ध उत्पादन करती हैं, बल्कि इसके संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

    यह कंपनी चालू वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन औसतन 76,171 लीटर दूध की खरीद कर रही है महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग कर आधुनिक तकनीकों के साथ अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं।

    सात निश्चय से विभिन्न तरह के प्लांट की स्थापना से इस कंपनी का भी कारोबार तेजी से फल-फूल सकेगा। ऐसी संभावना है।

        कोसी क्षेत्र के विकास में डेयरी व्यवसाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण प्लांट की स्थापना से व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के लोग काफी लाभांवित होंगे। – डॉ. अभिनीत झा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, सहरसा

     

  • उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    प्रयागराज
    प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख रुपये का इनामी आरोपी अरमान अब प्रयागराज पुलिस की कस्टडी में है. करीब साढ़े तीन साल तक गया की जेल में बंद रहने के बाद उसे प्रयागराज लाया गया है. अरमान की अहमियत सिर्फ इस वजह से नहीं है कि उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है, बल्कि पुलिस के मुताबिक वारदात वाले दिन वही बाइक चला रहा था जिस पर बमबाज गुड्डू मुस्लिम बैठा था. इसके अलावा अरमान को अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन का बेहद करीबी बताया जाता रहा है. ऐसे में पुलिस की पूछताछ का फोकस सिर्फ उमेश पाल हत्याकांड तक सीमित रहने के बजाय गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता के लंबे समय से फरार रहने की कड़ी तक पहुंच सकता है। 

    43 महीने बाद खुला एक ऐसा दरवाजा, जिसके पीछे छिपे हैं कई सवाल
    24 फरवरी 2023… प्रयागराज की सड़क पर उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की हत्या हुई. कैमरों में कैद हुई तस्वीरों ने पूरे हत्याकांड को समझने की एक अहम कड़ी पुलिस को दी. बम बरसा रहा था गुड्डू मुस्लिम और बाइक चला रहा था अरमान. वारदात के बाद दोनों उसी बाइक से फरार हुए थे. अरमान अतीक अहमद के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया और बाद में उसकी तलाश में पांच लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ.  लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट इसके बाद आया. जिस अरमान को यूपी पुलिस तीन साल से तलाश रही थी, वह यूपी से बाहर किसी नए नाम या पहचान के साथ नहीं, बल्कि बिहार की गया जेल में बंद था. अब उसे पुलिस प्रयागराज लेकर आ रही है। 

    सबसे बड़ा सवाल, गुड्डू मुस्लिम कहां गया
    उमेश पाल हत्याकांड के बाद कई आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आए, कुछ मुठभेड़ में मारे गए और कुछ के खिलाफ अदालत में कार्रवाई आगे बढ़ी. लेकिन गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. गुड्डू मुस्लिम पर पांच लाख रुपये का इनाम है, जबकि शाइस्ता परवीन पर भी इनामी राशि घोषित की गई थी. पुलिस ने दोनों की तलाश में कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चल सका. अब पुलिस के हाथ ऐसा व्यक्ति लगा है जो गुड्डू मुस्लिम के बेहद करीब रहा था. अरमान ने गुड्डू को अपनी बाइक पर बैठाकर उमेश पाल के घर तक पहुंचा था. यानी पुलिस के सामने अब एक ऐसा आरोपी है जो वारदात से ठीक पहले गुड्डू के साथ था और वारदात के बाद उसके साथ ही वहां से निकला था. यही वजह है कि अरमान की पूछताछ इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। 

    क्या अरमान बता सकता है गुड्डू मुस्लिम का आखिरी ठिकाना 
    पुलिस के लिए पहला बड़ा सवाल यही हो सकता है कि 24 फरवरी 2023 की वारदात के बाद गुड्डू मुस्लिम कहां गया? दोनों साथ भागे थे. ऐसे में पुलिस यह जानना चाहेगी कि वारदात के बाद दोनों के रास्ते कब और कहां अलग हुए. क्या गुड्डू पहले से तय किसी ठिकाने पर पहुंचा था? किसने उसे वहां पहुंचाने में मदद की? क्या उसके पास पहले से सुरक्षित ठिकानों की पूरी सूची थी? क्या फरारी के दौरान उसे किसी ने आर्थिक या लॉजिस्टिक मदद पहुंचाई?

    इन सवालों के जवाब अगर अरमान की पूछताछ में मिलते हैं तो जांच की दिशा एक बार फिर बदल सकती है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरमान के पास वर्तमान में गुड्डू मुस्लिम के बारे में कोई ऐसी जानकारी है या नहीं. यह पुलिस की पूछताछ के बाद ही सामने आएगा. दूसरा बड़ा सवाल हो सकता है कि शाइस्ता की फरारी का नेटवर्क कौन चला रहा था ? अरमान को लेकर एक और बात उसे इस केस में महत्वपूर्ण बनाती है. पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि अरमान शाइस्ता परवीन के बेहद करीब रहता था और उसके मूवमेंट तथा सुरक्षा व्यवस्था में साथ रहता था। 

    गया का ही रहने वाला है अरमान 
    उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी शूटर अरमान बिहार के गया जिला के कठोत्तर तालाब का रहने वाला है. और उमेश पाल के हत्या के बाद अरमान उत्तर प्रदेश से गया आ गया. गया शहर के कटारी तालाब के पास एक अंडा व्यवसाय पर गोली चलाने के पुराने मामले में गया कोर्ट में 27 फरवरी 2023 को आत्मसमर्पण कर दिया. जहां से उसको गया के सेंट्रल जेल में 27 फरवरी 2023 को भेज दिया गया था और अभी तक अरमान गया के सेंट्रल जेल में बंद है. प्रयागराज के धूमनगंज थाना की पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि उमेश पाल का हत्याकांड में शामिल आरोपी बिहार के गया जिला के सेंट्रल जेल में बंद है तो उत्तर प्रदेश की पुलिस गया के सेंट्रल जेल पहुंची और गया के सेंट्रल जेल में बंद अरमान से पूछताछ कर उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल आरोपी अरमान की पहचान की. यूपी पुलिस ने पांच लाख के इनामी हत्याकांड के आरोपी अरमान को अपने साथ उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए अर्जी भी दी. अब पुलिस उसे लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हो चुकी है। 

    परिवार वालों को एनकाउंटर का डर 
    वही उमेश पाल के हत्या के आरोपी अरमान के पिता समीम मलिक ने बताया की मेरा बेटा अरमान उत्तर प्रदेश के उमेश पाल हत्या में शामिल था और वहां से भाग कर वह गया आया . गया में एक पुराने मामले भोलू अंडा वाला के केश में गया कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. मगर तीन -चार साल के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए आई थी. अब हम लोगों को डर लग रहा है की उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को ले जाते समय एनकाउंटर न कर दे क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस आरोपी के हाथ में बंदूक देकर एनकाउंटर कर देती है. उन्होंने कहा कि उमेश पाल के हत्या के चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है और यह पांचवां आरोपी है तो हमें लग रहा है की इसका भी एनकाउंटर न कर दें. उन्होंने कहा कि अरमान उत्तर प्रदेश में एक बर्फ फैक्ट्री में काम करता था मगर वहां से कुछ लोगों ने उसको अतीक अहमद के साथ जुड़ा दिया था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के साथ नहीं रहता था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के बीवी शाहिस्ता और मली भाई के साथ रहता था। 

  • 34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप प्रज्वलन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी, प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट से निखरेगा अयोध्या धाम

    34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप प्रज्वलन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी, प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट से निखरेगा अयोध्या धाम

    अयोध्या

    दीपों की कतारें, रोशनी से जगमगाते मंदिर और सरयू तट पर आस्था का अद्भुत नजारा- अयोध्या एक बार फिर भव्य दीपोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस वर्ष 10वां दीपोत्सव पांच से सात नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। राम की पैड़ी सहित करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में 33 लाख मिट्टी के दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। आयोजन को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपों की निर्बाध रोशनी के लिए 65 लाख बातियों और 55 हजार लीटर तेल की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही दीप प्रज्वलन में इस्तेमाल होने वाली टी-शर्ट, मोमबत्ती, 150 किलो कपूर समेत अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर पांच टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें दीप-सामग्री, स्टेज निर्माण, सजावट और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    राम की पैड़ी से सरयू तट तक दिखेगी दीपों की भव्य छटा

    श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद की ओर से इस बार भी दीपोत्सव का भव्य आयोजन कराया जाएगा। राम की पैड़ी पर विशेष स्टेज तैयार किया जाएगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। दीपों से सजे घाट और रोशनी से नहाए प्रमुख मंदिर अयोध्या धाम की भव्यता को और बढ़ाएंगे। प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। सरयू तट से लेकर विभिन्न घाटों तक रोशनी की विशेष व्यवस्था की जाएगी। दीपों और रोशनी से सजी रामनगरी आस्था के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और विकास की तस्वीर भी प्रस्तुत करेगी।

    34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीपोत्सव की जिम्मेदारी

    दीपोत्सव को सफल बनाने में इस बार 34 हजार वालंटियर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये स्वयंसेवक दीप प्रज्वलन, व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखेंगे। आयोजन में शामिल होने वाले 34 हजार छात्रों के खान-पान की भी व्यवस्था की जा रही है। इससे युवा पीढ़ी को भी इस भव्य आयोजन से जुड़ने और दीपोत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर भी विशेष फोकस

    इस बार दीपोत्सव को पहले से अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाने के साथ सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में दीपों की पंक्तियों, फूलों की सजावट और प्रकाश व्यवस्था की तैयारियां की जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह दीपोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शुरू होगी सामग्री की आपूर्ति

    अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के सीईओ जयेंद्र कुमार ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही आवश्यक सामग्री की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। वालंटियरों के प्रशिक्षण और छात्रों के लिए भोजन व्यवस्था की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।दीपोत्सव अब अयोध्या की पहचान बन चुका है और हर वर्ष देश-विदेश में इसकी चर्चा होती है। 10वें दीपोत्सव को और अधिक भव्य स्वरूप देने की तैयारियों के बीच नवंबर में रामनगरी 33 लाख दीपों की रोशनी से जगमगाने को तैयार है।

  • शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित "सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026" में प्रदेश के युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को नई दिशा, प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव में प्रदेश से 20 हजार से अधिक युवा सहभागिता करेंगे।

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अवसरों की जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं से संवाद कर उनकी आकांक्षाओं, विचारों और अपेक्षाओं को जानेंगे तथा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विकास पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहेंगे।

    जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल तथा कबीर कैफे द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगी।

    विशेषज्ञ देंगे मानसिक स्वास्थ्य और कॅरियर संबंधी मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में आईआईटी मुंबई और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ युवाओं को शिक्षा, तकनीकी विकास, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। एम्स के मनोचिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे।

    17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता

    कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विभाग युवाओं को अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं, अवसरों और गतिविधियों से परिचित कराएंगे।

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर एवं सेडमैप द्वारा स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से संबंधित गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।

     80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में दिखेगी अवसरों और संभावनाओं की तस्वीर

    कॉन्क्लेव में विभागों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और नवोदित उद्यमों के 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। इनमें रोजगार, प्रशिक्षण, कॅरियर, उद्यमिता, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और शासकीय योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी।

    विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, कॅरियर मार्गदर्शन और ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

    विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से विभिन्न नवोदित उद्यम अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। युवा इन नवाचारों के माध्यम से विचार को उत्पाद और उत्पाद को उद्यम में बदलने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने तथा नए विचारों पर कार्य करने के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा।

    उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहन (EV) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां कॉन्क्लेव के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगी। इन क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा।

    कॅरियर से साइबर सुरक्षा तक विविध विषयों पर मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों द्वारा जानकारी दी जाएगी। पुलिस विभाग द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सुरक्षा और युवा संवाद से जुड़े विषयों पर जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

    सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 युवाओं को शिक्षा से कौशल, कौशल से रोजगार, विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा।

     

  • बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की विभीषिका देखी, फिर बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनका दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री का वितरण किया। सीएम यहां स्वास्थ्य शिविर में भी पहुंचे और डॉक्टरों से दवाओं/ व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री कुर्सियों पर बैठे बाढ़ पीड़ित के पास पहुंचे और शासन से मिली राहत सामग्री, अन्न, चिकित्सा आदि सुविधाओं की हकीकत जानी। उन्होंने बच्चों को पास बुलाकर चॉकलेट भी दी। 

    मुख्यमंत्री ने अक्टूबर में आई इस बाढ़ विभीषिका पर चिंता जताई। कहा कि गोमती नदी पर तटबंध बनने से काफी हद तक बाढ़ की विभीषिका को रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक नदी के तट का सर्वे कराते हुए तटबंध बनवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो गांव तटबंध के बाहर रहे, वहां बरसात का पानी निकालने की उचित व्यवस्था हो। तटबंध बनने के बाद नदी का जलस्तर बढ़े तो अंदर का पानी जमा होकर बीमारी न पैदा करे, बल्कि पंपिंग सेट लगाकर बाहर निकाला जाए। सिंचाई विभाग इन कार्यों का प्रस्ताव बनाकर शीर्घ कार्य प्रारंभ कराए, जिससे आने वाले समय में इस त्रासदी को रोक सकें और बाढ़ की विभीषिका पर अंकुश लगाया जा सके। 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन कर जताई चिंता 

    सीएम ने आज सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के फोन आने के बारे में बाढ़ पीड़ितों को अवगत कराया। बाढ़ को लेकर रक्षा मंत्री की चिंता के विषय में भी जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ बचाव में मदद कराने के बारे में भी विमर्श किया। इस पर सीएम ने उन्हें बताया कि सरकार ने इसे स्वीकृत कर दिया है, धनराशि अवमुक्त करते हुए यह कार्य जल्द आगे बढ़ाएंगे। ऐसी पुख्ता व्यवस्था करेंगे तो हर सीजन में तटबंध उपयोगी होगा। बरसात में नदी का पानी उधर नहीं आएगा और इधऱ का पानी पंपिंग सेट के जरिए नदी की तरफ डाल दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि एलडीए ने ग्रीन कॉरिडोर बनवाया है, यह सड़क और सुरक्षा दोनों का काम कर रहा है। इसी तरह तटबंध पर चलने की भी व्यवस्था कराएंगे।

    स्कूल, मैरिज हॉल आदि में रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था करे प्रशासन

    सीएम ने बाढ़ पीड़ितों से अपील की कि संकट की इस घड़ी में हम सभी मिलकर आपदा का सामना करें। गांव से बाहर आए लोगों के लिए खुले में सोने की बजाय स्कूल, मैरिज हॉल में व्यवस्था करें। वहां गर्म भोजन, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार, पशुओं के चारे, भूसा-चोकर की व्यवस्था हो। पशुओं की सुरक्षा व संरक्षण पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि पानी के कारण पशुओं को होने वाली बीमारी से भी बचाव की व्यवस्था की जाए।

    नदियों के जलस्तर में हुई काफी वृद्धि
    मुख्यमंत्री ने अकड़रिया कला गांव में बाढ़ पीड़ितों से संवाद करते हुए कहाकि 10 दिन में 50 से अधिक जनपदों में भारी बारिश हुई है, जिससे तमाम नदियों के जलस्तर में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि में लखनऊ भी था, लेकिन उस दौरान गोमती नदी का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था, लेकिन पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व नेपाल में हुई बारिश के कारण पांच-छह दिन बाद पानी नीचे आने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इस कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर, फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक यह क्षेत्र जल पलावन और बाढ़ से जूझ रहा है। 

    बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है डबल इंजन सरकार 

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि डबल इंजन सरकार आपके साथ खड़ी है। मैं लगातार यहां की स्थिति का आकलन करते हुए इस पर नजर रखा हूं। आज पीड़ित क्षेत्रों में पहुंचकर राहत कार्यों को भी देखा है। हमारे जनप्रतिनिधि निरंतर राहत-बचाव कार्यों में जुटे हैं और प्रशासन के साथ पीड़ितों की हरसंभव मदद कर रहे हैं।  

    हर पीड़ित परिवार के लिए की गई राशन की व्यवस्था 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत-बचाव कार्य के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ से डूबे गांव- मोहल्लों में हर परिवार के लिए सूखा राशन (10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल, एक लीटर रिफाइंड/ सरसों का तेल, नमक, मिर्च, मसाला, बरसाती, बाल्टी, लाई-भूजा, मोमबत्ती, माचिस) आदि उपलब्ध कराया गया है। 
    गाय, बकरी, भैंस, बकरी, घोड़ा आदि पालतू पशुओं के चारे, छोटे बच्चों के दूध, स्वास्थ्य/ पशु चिकित्सालय शिविर के लिए भी प्रशासन को निर्देशित किया गया है। 

    हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध 

    सीएम ने कहा कि हर व्यक्ति की जान बचाना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। बरसात में पानी भरने पर सांप-बिच्छू आदि के काटने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। एंटी रैबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध है। डूबने-आकाशीय बिजली से जनहानि पर परिवार को चार लाख की सहायता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि घर क्षतिग्रस्त होने पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास, जनहानि, पशुहानि और किसानों की फसल के नुकसान पर सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा तत्काल दिलाया जाए, जिससे किसान के साथ सरकार का संबल दिखे। 

    गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की पेट्रोलिंग, चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान तैनात हों 

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि ग्रामीणों के बाहर आने पर रात में गांवों की सुरक्षा के लिए चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी, पुलिस की पेट्रोलिंग हो और वहां पेट्रोमैक्स जलाए जाएं। कैंप में पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था कराई जाए, जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि आपदा पीड़ित चिंतित न हों, सरकार निरंतर राहत सामग्री कराएगी। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि आपदा की घड़ी में सरकार हरसंभव मदद करेगी। सीएम ने सभी के सुखी-स्वस्थ होने की कामना की। 

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधायक योगेश शुक्ल, डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा के नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश अवस्थी आदि मौजूद रहे।

  • रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    नई दिल्ली

     रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के खत्म होने के आसार बन रहे हैं. ऐसा भारत की पहल पर हो रहा है. दरअसल, भारत ने रूस और यूक्रेन को ऐसा ऑफर दिया है जिस पर दोनों देशों ने करीब-करीब सहमति जताई है. यूक्रेन ने कहा है कि युद्ध खत्म कराने के लिए अब तक मिले तमाम प्रस्तावों में यह सबसे बेहतर ऑफर हैं. वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत का ऑफर बहुत अच्छा है. पीएम मोदी लंबे समय से इस जंग को खत्म कराने की बात कह रहे हैं. इस बीच रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए हाल के महीनों में कीव और मॉस्को दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज किए हैं. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा था कि कीव को संभावित युद्ध विराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले, लेकिन भारत का प्रस्ताव सबसे बेहतर है। 

    भारत ने अपने प्रस्ताव में काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की बात कही है. इस पर करीब-करीब सहमति बनती दिख रही है. ऐसे में भारत के इस पहल को उसके शांति के प्रति समर्पण की अवधारणा से जोड़ा जा रहा है. बतौर एक शांतिदूत भारत की तारीफ हो रही है. भारत की इस पहल में एक और रोचक तथ्य है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीब दो साल से इस जंग को खत्म कराने की बात कर रहे हैं. लेकिन, जंग खत्म होने की बजाय बीते कुछ महीनों से और भयानक रूप ले चुकी है. अमेरिका इस जंग को खत्म कराने में बुरी तरह विफल होता दिख रहा है। 

    क्या है भारत का प्रस्ताव
    भारत ने अभी तक अपने प्रस्ताव की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं. लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ किया है कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है. भारत की बातचीत सिर्फ युद्ध रोकने की अपील तक सीमित नहीं है. नई दिल्ली काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज के निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति और एक-दूसरे पर हमले रोकने जैसी व्यवस्थाओं पर दोनों पक्षों से बात कर रहा है. यही भारत के प्रस्ताव की खासियत है. यह सीधे यह तय करने की कोशिश नहीं करता कि रूस को क्या मिलेगा और यूक्रेन को क्या छोड़ना होगा. इसके बजाय उन मुद्दों से शुरुआत की जा रही है जिन पर दोनों देशों के लिए तत्काल राहत जरूरी है। 

    काला सागर इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है. युद्ध के दौरान यहां जहाजों और बंदरगाहों पर हमलों ने व्यापार और अनाज की आपूर्ति को प्रभावित किया है. अगर काला सागर में सुरक्षित नेविगेशन और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था बनती है तो इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक खाद्य और ऊर्जा बाजार को भी इससे राहत मिल सकती है। 

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के मुताबिक कीव को भारत, अमेरिका, तुर्की और मिस्र से युद्धविराम को लेकर प्रस्ताव मिले हैं. उन्होंने भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताया है. यूक्रेन ने ऊर्जा और काला सागर में युद्धविराम पर विचार करने की बात भी कही है. हालांकि कीव चाहता है कि किसी भी युद्धविराम में ऊर्जा और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था भी शामिल हो. यानी अभी इसे रूस और यूक्रेन के बीच अंतिम शांति समझौता कहना जल्दबाजी होगी. फिलहाल भारत ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जो दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ा सके और बड़े युद्धविराम की जमीन तैयार कर सके। 

    भारत की पहल में अमेरिका से क्या अलग है?
    अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में शामिल रहा है. ट्रंप प्रशासन ने भी रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं. सितंबर में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच बातचीत में भी युद्ध खत्म करने और ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग जैसे मुद्दे सामने आए थे. लेकिन अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती है. वह खुद पश्चिमी गठबंधन का प्रमुख हिस्सा है और यूक्रेन को सैन्य तथा राजनीतिक समर्थन देता रहा है. ऐसे में मॉस्को के साथ बातचीत करते समय उसकी भूमिका को रूस अलग नजरिए से देखता है. भारत की स्थिति अलग है. नई दिल्ली के रूस के साथ पुराने और गहरे संबंध हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी भारत के राजनयिक संबंध कायम हैं. भारत ने युद्ध के दौरान रूस से बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया और साथ ही यूक्रेन के साथ भी संपर्क बनाए रखा. यही वजह है कि भारत दोनों पक्षों के बीच ऐसी बातचीत की जगह बना सकता है जिसमें किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय तत्काल मानवीय और आर्थिक मुद्दों से शुरुआत हो। 

    पुतिन ने मोदी के बारे में क्या कहा?
    भारत की पहल को उस समय और महत्व मिला जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति पहल की सार्वजनिक रूप से सराहना की. पुतिन ने कहा कि मोदी लगातार संघर्ष खत्म करने का सवाल उठाते रहे हैं और उनके पास इस समस्या के संभावित समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहली बार युद्ध खत्म कराने की दिशा में अपने प्रयासों को केवल अपील से आगे ले जाने की बात कर रहा है. जयशंकर ने भी साफ कहा है कि भारत अब केवल शांति की वकालत नहीं कर रहा, बल्कि दोनों पक्षों से बातचीत करके कुछ व्यावहारिक मुद्दों पर मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। 

    प्रस्ताव पर सहमति बनी तो भारत के लिए कितनी बड़ी राहत
    अगर भारत की पहल से रूस और यूक्रेन के बीच सीमित युद्धविराम की व्यवस्था बनती है और आगे व्यापक बातचीत का रास्ता खुलता है तो यह भारत की विदेश नीति के लिए बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा. सबसे पहला फायदा यह होगा कि भारत की वह नीति मजबूत होगी जिसमें वह युद्ध के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताता रहा है. प्रधानमंत्री मोदी रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं से लगातार संपर्क में रहे हैं और भारत ने शुरू से कहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। 

    दूसरा फायदा भारत के आर्थिक हितों से जुड़ा है. रूस भारत के लिए ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है. दूसरी तरफ यूरोप और पश्चिमी देशों के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने से भारत को इन दोनों रिश्तों के बीच संतुलन साधना पड़ता है। 

    तीसरा और शायद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत की कूटनीतिक भूमिका सिर्फ संतुलन साधने वाले देश की नहीं रहेगी. अगर दोनों पक्ष किसी भारतीय पहल को बातचीत की शुरुआत के लिए स्वीकार करते हैं तो नई दिल्ली को संकट समाधान में एक सक्रिय मध्यस्थ भूमिका निभाने का अनुभव मिलेगा। 

  • रूस की एंटी-प्लेग लैब में हादसा, कर्मचारी की मौत से हड़कंप; ‘वुहान जैसे हालात’ की चर्चा

    रूस की एंटी-प्लेग लैब में हादसा, कर्मचारी की मौत से हड़कंप; ‘वुहान जैसे हालात’ की चर्चा

    मॉस्को 

    रूस के साइबेरिया क्षेत्र में रहस्यमय इंफेक्शन ने हड़कंप मचा दिया है. यहां की प्रयोगशाला में एक महिला कर्मचारी की संदिग्ध खतरनाक संक्रमण को लेकर अधिकारियों में न सिर्फ चिंता बढ़ गई है बल्कि स्थिति पैनिक हो रही है.  घटना इरकुत्स्क के पास स्थित शेलेखोव के एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई बताई जा रही है, ऐसे में प्लेग के निमोनिक वेरियंट के फैलने की आशंका जताई जा रही है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक प्रयोगशाला में काम करने वाले एक कर्मचारी की मौत हो गई, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है। 

    बताया जा रहा है कि मृतक को ऐसे निमोनिया का पता चला था, जिसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. हालांकि घटना के दौरान वास्तव में कौन-सा संक्रमण या पदार्थ बाहर निकला, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. रूस की संक्रमण नियंत्रण एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर (Rospotrebnadzor) मामले की जांच और स्थिति पर निगरानी रख रही है, लेकिन ज्यादा जानकारी अब भी सामने नहीं आई है. घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। 

    रहस्यमय बीमारी को लेकर मचा हड़कंप 
    सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इरकुत्स्क क्षेत्र, इरकुत्स्क शहर और शेलेखोव की सैनिटरी तथा महामारी संबंधी स्थिति सामान्य और स्थिर है. अभी यह साफ नहीं है कि प्रयोगशाला में हुई दुर्घटना का संक्रमण फैलने से कोई सीधा संबंध है या नहीं. अधिकारी घटना की वजह और रिस्क की जांच कर रहे हैं. इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट से जुड़े इस मामले में मृतक 28 वर्षीय महिला कर्मचारी बताई जा रही है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक उसे ऐसे निमोनिया की शिकायत थी, जिसके संक्रमण की वजह नहीं पता चल सकी है. वहीं  आशंका जताई जा रही थी कि महिला की मौत प्लेग से हो सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुर्यातिया में फिलहाल प्लेग का कोई प्रकोप नहीं है। 

    200 लोग मेडिकल निगरानी में 
    संक्रमण की आशंका के चलते शेलेखोव में उस अस्पताल की निगरानी बढ़ाए जाने की खबर है, जहां कर्मचारी को भर्ती कराया गया था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक करीब 200 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया, जबकि शहर के एक डिलीवरी हॉस्पिटल में भी एहतियाती क्वारंटीन लागू किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट ने कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर मास्क पहनने की सलाह दी है. कंपनी ने कहा कि जिन लोगों का मरीज से करीबी संपर्क था, उनकी निगरानी की जा रही है और अब तक उनमें बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं। 

    क्या हो सकती है ये बीमारी?
    आशंका है कि ये बीमारी निमोनिक प्लेग हो सकती है, तो फेफड़ों को प्रभावित करने वाला गंभीर संक्रमण है और सांस से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए फैल सकता है. हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि मामला प्लेग का ही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्लेग गंभीर बीमारी हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है।