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  • 45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    सहरसा
     पिछड़े कोसी क्षेत्र में आने वाले दिनों में डेयरी से संबंधित कारोबार तेजी से बढ़ेगा। सरकार ने सात निश्चय -3 के तहत एक अरब 26 करोड़ सात लाख की लागत से कोसी दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड के अंतर्गत दही प्लांट, प्रीमियम आईस्क्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन प्लांट, इंस्टैंट मिल्क चिलिंग प्लांट खोलने की योजना है।

    इससे कोसी क्षेत्र में डेयरी व दुग्ध व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के पशुपालक व दुग्ध कारोबारी काफी लाभांवित होंगे, जो पिछड़े कोसी क्षेत्र के विकास का बढ़ा कारण बनेगा।

    नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का भी होगा गठन
    श्वेत क्रांति-2 पहल के तहत डेयरी किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर बल दिया जाएगा।

    इस समिति के गठन होने से सहकारी डेयरी के माध्यम से उपभोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले समितियों का अधिकांश हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचेगा।

    सात निश्चय- 3 से प्राप्त राशि से कोसी प्रमंडल के तीनों जिले में मिल्क चिलिंग प्लांट एवं इंस्टैंट मिल्क चिलिंग सिस्टम की स्थापना होगी। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और इसे खराब होने से बचाया जा सकेगा।

    दुग्ध उत्पादन बढ़ने से सशक्त होगी ग्रामीण महिलाएं

    कोसी प्रमंडल में दुग्ध उत्पादन में जीविका के माध्यम से महिलाएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। कौशिकी जीविका महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी महिलाओं द्वारा संचालित है और सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में अपनी सेवाएं दे रही है।

    वर्तमान में कंपनी से 45,000 दुग्ध उत्पादक जीविका दीदी जुड़ी हुई हैं। यह महिलाएं न केवल दुग्ध उत्पादन करती हैं, बल्कि इसके संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

    यह कंपनी चालू वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन औसतन 76,171 लीटर दूध की खरीद कर रही है महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग कर आधुनिक तकनीकों के साथ अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं।

    सात निश्चय से विभिन्न तरह के प्लांट की स्थापना से इस कंपनी का भी कारोबार तेजी से फल-फूल सकेगा। ऐसी संभावना है।

        कोसी क्षेत्र के विकास में डेयरी व्यवसाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण प्लांट की स्थापना से व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के लोग काफी लाभांवित होंगे। – डॉ. अभिनीत झा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, सहरसा

     

  • उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    उमेश पाल हत्याकांड: अरमान से पूछताछ में खुलेंगे कई राज, गुड्डू मुस्लिम-शाइस्ता परवीन से जुड़े सवालों के जवाब की उम्मीद

    प्रयागराज
    प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख रुपये का इनामी आरोपी अरमान अब प्रयागराज पुलिस की कस्टडी में है. करीब साढ़े तीन साल तक गया की जेल में बंद रहने के बाद उसे प्रयागराज लाया गया है. अरमान की अहमियत सिर्फ इस वजह से नहीं है कि उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है, बल्कि पुलिस के मुताबिक वारदात वाले दिन वही बाइक चला रहा था जिस पर बमबाज गुड्डू मुस्लिम बैठा था. इसके अलावा अरमान को अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन का बेहद करीबी बताया जाता रहा है. ऐसे में पुलिस की पूछताछ का फोकस सिर्फ उमेश पाल हत्याकांड तक सीमित रहने के बजाय गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता के लंबे समय से फरार रहने की कड़ी तक पहुंच सकता है। 

    43 महीने बाद खुला एक ऐसा दरवाजा, जिसके पीछे छिपे हैं कई सवाल
    24 फरवरी 2023… प्रयागराज की सड़क पर उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की हत्या हुई. कैमरों में कैद हुई तस्वीरों ने पूरे हत्याकांड को समझने की एक अहम कड़ी पुलिस को दी. बम बरसा रहा था गुड्डू मुस्लिम और बाइक चला रहा था अरमान. वारदात के बाद दोनों उसी बाइक से फरार हुए थे. अरमान अतीक अहमद के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया और बाद में उसकी तलाश में पांच लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ.  लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट इसके बाद आया. जिस अरमान को यूपी पुलिस तीन साल से तलाश रही थी, वह यूपी से बाहर किसी नए नाम या पहचान के साथ नहीं, बल्कि बिहार की गया जेल में बंद था. अब उसे पुलिस प्रयागराज लेकर आ रही है। 

    सबसे बड़ा सवाल, गुड्डू मुस्लिम कहां गया
    उमेश पाल हत्याकांड के बाद कई आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आए, कुछ मुठभेड़ में मारे गए और कुछ के खिलाफ अदालत में कार्रवाई आगे बढ़ी. लेकिन गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. गुड्डू मुस्लिम पर पांच लाख रुपये का इनाम है, जबकि शाइस्ता परवीन पर भी इनामी राशि घोषित की गई थी. पुलिस ने दोनों की तलाश में कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चल सका. अब पुलिस के हाथ ऐसा व्यक्ति लगा है जो गुड्डू मुस्लिम के बेहद करीब रहा था. अरमान ने गुड्डू को अपनी बाइक पर बैठाकर उमेश पाल के घर तक पहुंचा था. यानी पुलिस के सामने अब एक ऐसा आरोपी है जो वारदात से ठीक पहले गुड्डू के साथ था और वारदात के बाद उसके साथ ही वहां से निकला था. यही वजह है कि अरमान की पूछताछ इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। 

    क्या अरमान बता सकता है गुड्डू मुस्लिम का आखिरी ठिकाना 
    पुलिस के लिए पहला बड़ा सवाल यही हो सकता है कि 24 फरवरी 2023 की वारदात के बाद गुड्डू मुस्लिम कहां गया? दोनों साथ भागे थे. ऐसे में पुलिस यह जानना चाहेगी कि वारदात के बाद दोनों के रास्ते कब और कहां अलग हुए. क्या गुड्डू पहले से तय किसी ठिकाने पर पहुंचा था? किसने उसे वहां पहुंचाने में मदद की? क्या उसके पास पहले से सुरक्षित ठिकानों की पूरी सूची थी? क्या फरारी के दौरान उसे किसी ने आर्थिक या लॉजिस्टिक मदद पहुंचाई?

    इन सवालों के जवाब अगर अरमान की पूछताछ में मिलते हैं तो जांच की दिशा एक बार फिर बदल सकती है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरमान के पास वर्तमान में गुड्डू मुस्लिम के बारे में कोई ऐसी जानकारी है या नहीं. यह पुलिस की पूछताछ के बाद ही सामने आएगा. दूसरा बड़ा सवाल हो सकता है कि शाइस्ता की फरारी का नेटवर्क कौन चला रहा था ? अरमान को लेकर एक और बात उसे इस केस में महत्वपूर्ण बनाती है. पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि अरमान शाइस्ता परवीन के बेहद करीब रहता था और उसके मूवमेंट तथा सुरक्षा व्यवस्था में साथ रहता था। 

    गया का ही रहने वाला है अरमान 
    उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी शूटर अरमान बिहार के गया जिला के कठोत्तर तालाब का रहने वाला है. और उमेश पाल के हत्या के बाद अरमान उत्तर प्रदेश से गया आ गया. गया शहर के कटारी तालाब के पास एक अंडा व्यवसाय पर गोली चलाने के पुराने मामले में गया कोर्ट में 27 फरवरी 2023 को आत्मसमर्पण कर दिया. जहां से उसको गया के सेंट्रल जेल में 27 फरवरी 2023 को भेज दिया गया था और अभी तक अरमान गया के सेंट्रल जेल में बंद है. प्रयागराज के धूमनगंज थाना की पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि उमेश पाल का हत्याकांड में शामिल आरोपी बिहार के गया जिला के सेंट्रल जेल में बंद है तो उत्तर प्रदेश की पुलिस गया के सेंट्रल जेल पहुंची और गया के सेंट्रल जेल में बंद अरमान से पूछताछ कर उमेश पाल के हत्याकांड में शामिल आरोपी अरमान की पहचान की. यूपी पुलिस ने पांच लाख के इनामी हत्याकांड के आरोपी अरमान को अपने साथ उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए अर्जी भी दी. अब पुलिस उसे लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हो चुकी है। 

    परिवार वालों को एनकाउंटर का डर 
    वही उमेश पाल के हत्या के आरोपी अरमान के पिता समीम मलिक ने बताया की मेरा बेटा अरमान उत्तर प्रदेश के उमेश पाल हत्या में शामिल था और वहां से भाग कर वह गया आया . गया में एक पुराने मामले भोलू अंडा वाला के केश में गया कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था. मगर तीन -चार साल के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए आई थी. अब हम लोगों को डर लग रहा है की उत्तर प्रदेश की पुलिस अरमान को ले जाते समय एनकाउंटर न कर दे क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस आरोपी के हाथ में बंदूक देकर एनकाउंटर कर देती है. उन्होंने कहा कि उमेश पाल के हत्या के चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है और यह पांचवां आरोपी है तो हमें लग रहा है की इसका भी एनकाउंटर न कर दें. उन्होंने कहा कि अरमान उत्तर प्रदेश में एक बर्फ फैक्ट्री में काम करता था मगर वहां से कुछ लोगों ने उसको अतीक अहमद के साथ जुड़ा दिया था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के साथ नहीं रहता था. मेरा बेटा अरमान अतीक अहमद के बीवी शाहिस्ता और मली भाई के साथ रहता था। 

  • 34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप प्रज्वलन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी, प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट से निखरेगा अयोध्या धाम

    34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप प्रज्वलन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी, प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट से निखरेगा अयोध्या धाम

    अयोध्या

    दीपों की कतारें, रोशनी से जगमगाते मंदिर और सरयू तट पर आस्था का अद्भुत नजारा- अयोध्या एक बार फिर भव्य दीपोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस वर्ष 10वां दीपोत्सव पांच से सात नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। राम की पैड़ी सहित करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में 33 लाख मिट्टी के दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। आयोजन को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपों की निर्बाध रोशनी के लिए 65 लाख बातियों और 55 हजार लीटर तेल की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही दीप प्रज्वलन में इस्तेमाल होने वाली टी-शर्ट, मोमबत्ती, 150 किलो कपूर समेत अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर पांच टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें दीप-सामग्री, स्टेज निर्माण, सजावट और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    राम की पैड़ी से सरयू तट तक दिखेगी दीपों की भव्य छटा

    श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद की ओर से इस बार भी दीपोत्सव का भव्य आयोजन कराया जाएगा। राम की पैड़ी पर विशेष स्टेज तैयार किया जाएगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। दीपों से सजे घाट और रोशनी से नहाए प्रमुख मंदिर अयोध्या धाम की भव्यता को और बढ़ाएंगे। प्रमुख मंदिरों की एलईडी सजावट की तैयारियां भी आगे बढ़ रही हैं। सरयू तट से लेकर विभिन्न घाटों तक रोशनी की विशेष व्यवस्था की जाएगी। दीपों और रोशनी से सजी रामनगरी आस्था के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और विकास की तस्वीर भी प्रस्तुत करेगी।

    34 हजार वालंटियर संभालेंगे दीपोत्सव की जिम्मेदारी

    दीपोत्सव को सफल बनाने में इस बार 34 हजार वालंटियर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये स्वयंसेवक दीप प्रज्वलन, व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखेंगे। आयोजन में शामिल होने वाले 34 हजार छात्रों के खान-पान की भी व्यवस्था की जा रही है। इससे युवा पीढ़ी को भी इस भव्य आयोजन से जुड़ने और दीपोत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर भी विशेष फोकस

    इस बार दीपोत्सव को पहले से अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाने के साथ सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में दीपों की पंक्तियों, फूलों की सजावट और प्रकाश व्यवस्था की तैयारियां की जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह दीपोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शुरू होगी सामग्री की आपूर्ति

    अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के सीईओ जयेंद्र कुमार ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही आवश्यक सामग्री की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। वालंटियरों के प्रशिक्षण और छात्रों के लिए भोजन व्यवस्था की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।दीपोत्सव अब अयोध्या की पहचान बन चुका है और हर वर्ष देश-विदेश में इसकी चर्चा होती है। 10वें दीपोत्सव को और अधिक भव्य स्वरूप देने की तैयारियों के बीच नवंबर में रामनगरी 33 लाख दीपों की रोशनी से जगमगाने को तैयार है।

  • शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    शिक्षा, कौशल, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार पर होगी विशेष चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित "सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026" में प्रदेश के युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को नई दिशा, प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव में प्रदेश से 20 हजार से अधिक युवा सहभागिता करेंगे।

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अवसरों की जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं से संवाद कर उनकी आकांक्षाओं, विचारों और अपेक्षाओं को जानेंगे तथा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विकास पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहेंगे।

    जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

    कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल तथा कबीर कैफे द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगी।

    विशेषज्ञ देंगे मानसिक स्वास्थ्य और कॅरियर संबंधी मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में आईआईटी मुंबई और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ युवाओं को शिक्षा, तकनीकी विकास, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। एम्स के मनोचिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे।

    17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता

    कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विभाग युवाओं को अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं, अवसरों और गतिविधियों से परिचित कराएंगे।

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर एवं सेडमैप द्वारा स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से संबंधित गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।

     80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में दिखेगी अवसरों और संभावनाओं की तस्वीर

    कॉन्क्लेव में विभागों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और नवोदित उद्यमों के 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। इनमें रोजगार, प्रशिक्षण, कॅरियर, उद्यमिता, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और शासकीय योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी।

    विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, कॅरियर मार्गदर्शन और ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

    विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक

    मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से विभिन्न नवोदित उद्यम अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। युवा इन नवाचारों के माध्यम से विचार को उत्पाद और उत्पाद को उद्यम में बदलने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने तथा नए विचारों पर कार्य करने के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा।

    उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहन (EV) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां कॉन्क्लेव के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगी। इन क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा।

    कॅरियर से साइबर सुरक्षा तक विविध विषयों पर मार्गदर्शन

    कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों द्वारा जानकारी दी जाएगी। पुलिस विभाग द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सुरक्षा और युवा संवाद से जुड़े विषयों पर जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

    सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 युवाओं को शिक्षा से कौशल, कौशल से रोजगार, विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा।

     

  • बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर बातचीत की, दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री वितरित की

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की विभीषिका देखी, फिर बक्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनका दुख-दर्द जाना और राहत सामग्री का वितरण किया। सीएम यहां स्वास्थ्य शिविर में भी पहुंचे और डॉक्टरों से दवाओं/ व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री कुर्सियों पर बैठे बाढ़ पीड़ित के पास पहुंचे और शासन से मिली राहत सामग्री, अन्न, चिकित्सा आदि सुविधाओं की हकीकत जानी। उन्होंने बच्चों को पास बुलाकर चॉकलेट भी दी। 

    मुख्यमंत्री ने अक्टूबर में आई इस बाढ़ विभीषिका पर चिंता जताई। कहा कि गोमती नदी पर तटबंध बनने से काफी हद तक बाढ़ की विभीषिका को रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक नदी के तट का सर्वे कराते हुए तटबंध बनवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो गांव तटबंध के बाहर रहे, वहां बरसात का पानी निकालने की उचित व्यवस्था हो। तटबंध बनने के बाद नदी का जलस्तर बढ़े तो अंदर का पानी जमा होकर बीमारी न पैदा करे, बल्कि पंपिंग सेट लगाकर बाहर निकाला जाए। सिंचाई विभाग इन कार्यों का प्रस्ताव बनाकर शीर्घ कार्य प्रारंभ कराए, जिससे आने वाले समय में इस त्रासदी को रोक सकें और बाढ़ की विभीषिका पर अंकुश लगाया जा सके। 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन कर जताई चिंता 

    सीएम ने आज सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के फोन आने के बारे में बाढ़ पीड़ितों को अवगत कराया। बाढ़ को लेकर रक्षा मंत्री की चिंता के विषय में भी जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनने से बाढ़ बचाव में मदद कराने के बारे में भी विमर्श किया। इस पर सीएम ने उन्हें बताया कि सरकार ने इसे स्वीकृत कर दिया है, धनराशि अवमुक्त करते हुए यह कार्य जल्द आगे बढ़ाएंगे। ऐसी पुख्ता व्यवस्था करेंगे तो हर सीजन में तटबंध उपयोगी होगा। बरसात में नदी का पानी उधर नहीं आएगा और इधऱ का पानी पंपिंग सेट के जरिए नदी की तरफ डाल दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि एलडीए ने ग्रीन कॉरिडोर बनवाया है, यह सड़क और सुरक्षा दोनों का काम कर रहा है। इसी तरह तटबंध पर चलने की भी व्यवस्था कराएंगे।

    स्कूल, मैरिज हॉल आदि में रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था करे प्रशासन

    सीएम ने बाढ़ पीड़ितों से अपील की कि संकट की इस घड़ी में हम सभी मिलकर आपदा का सामना करें। गांव से बाहर आए लोगों के लिए खुले में सोने की बजाय स्कूल, मैरिज हॉल में व्यवस्था करें। वहां गर्म भोजन, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार, पशुओं के चारे, भूसा-चोकर की व्यवस्था हो। पशुओं की सुरक्षा व संरक्षण पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि पानी के कारण पशुओं को होने वाली बीमारी से भी बचाव की व्यवस्था की जाए।

    नदियों के जलस्तर में हुई काफी वृद्धि
    मुख्यमंत्री ने अकड़रिया कला गांव में बाढ़ पीड़ितों से संवाद करते हुए कहाकि 10 दिन में 50 से अधिक जनपदों में भारी बारिश हुई है, जिससे तमाम नदियों के जलस्तर में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि में लखनऊ भी था, लेकिन उस दौरान गोमती नदी का जलस्तर इतना नहीं बढ़ा था, लेकिन पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व नेपाल में हुई बारिश के कारण पांच-छह दिन बाद पानी नीचे आने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इस कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर, फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक यह क्षेत्र जल पलावन और बाढ़ से जूझ रहा है। 

    बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है डबल इंजन सरकार 

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि डबल इंजन सरकार आपके साथ खड़ी है। मैं लगातार यहां की स्थिति का आकलन करते हुए इस पर नजर रखा हूं। आज पीड़ित क्षेत्रों में पहुंचकर राहत कार्यों को भी देखा है। हमारे जनप्रतिनिधि निरंतर राहत-बचाव कार्यों में जुटे हैं और प्रशासन के साथ पीड़ितों की हरसंभव मदद कर रहे हैं।  

    हर पीड़ित परिवार के लिए की गई राशन की व्यवस्था 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत-बचाव कार्य के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ से डूबे गांव- मोहल्लों में हर परिवार के लिए सूखा राशन (10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर दाल, एक लीटर रिफाइंड/ सरसों का तेल, नमक, मिर्च, मसाला, बरसाती, बाल्टी, लाई-भूजा, मोमबत्ती, माचिस) आदि उपलब्ध कराया गया है। 
    गाय, बकरी, भैंस, बकरी, घोड़ा आदि पालतू पशुओं के चारे, छोटे बच्चों के दूध, स्वास्थ्य/ पशु चिकित्सालय शिविर के लिए भी प्रशासन को निर्देशित किया गया है। 

    हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध 

    सीएम ने कहा कि हर व्यक्ति की जान बचाना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। बरसात में पानी भरने पर सांप-बिच्छू आदि के काटने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। एंटी रैबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध है। डूबने-आकाशीय बिजली से जनहानि पर परिवार को चार लाख की सहायता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि घर क्षतिग्रस्त होने पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास, जनहानि, पशुहानि और किसानों की फसल के नुकसान पर सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा तत्काल दिलाया जाए, जिससे किसान के साथ सरकार का संबल दिखे। 

    गांवों की सुरक्षा के लिए पुलिस की पेट्रोलिंग, चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान तैनात हों 

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि ग्रामीणों के बाहर आने पर रात में गांवों की सुरक्षा के लिए चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी, पुलिस की पेट्रोलिंग हो और वहां पेट्रोमैक्स जलाए जाएं। कैंप में पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था कराई जाए, जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि आपदा पीड़ित चिंतित न हों, सरकार निरंतर राहत सामग्री कराएगी। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि आपदा की घड़ी में सरकार हरसंभव मदद करेगी। सीएम ने सभी के सुखी-स्वस्थ होने की कामना की। 

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधायक योगेश शुक्ल, डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा के नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश अवस्थी आदि मौजूद रहे।

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    रूस-यूक्रेन जंग में भारत का मास्टरप्लान! काला सागर से अनाज-ऊर्जा तक, ऐसे तैयार होगा सीजफायर का रास्ता

    नई दिल्ली

     रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के खत्म होने के आसार बन रहे हैं. ऐसा भारत की पहल पर हो रहा है. दरअसल, भारत ने रूस और यूक्रेन को ऐसा ऑफर दिया है जिस पर दोनों देशों ने करीब-करीब सहमति जताई है. यूक्रेन ने कहा है कि युद्ध खत्म कराने के लिए अब तक मिले तमाम प्रस्तावों में यह सबसे बेहतर ऑफर हैं. वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि भारत का ऑफर बहुत अच्छा है. पीएम मोदी लंबे समय से इस जंग को खत्म कराने की बात कह रहे हैं. इस बीच रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए हाल के महीनों में कीव और मॉस्को दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज किए हैं. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा था कि कीव को संभावित युद्ध विराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले, लेकिन भारत का प्रस्ताव सबसे बेहतर है। 

    भारत ने अपने प्रस्ताव में काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की बात कही है. इस पर करीब-करीब सहमति बनती दिख रही है. ऐसे में भारत के इस पहल को उसके शांति के प्रति समर्पण की अवधारणा से जोड़ा जा रहा है. बतौर एक शांतिदूत भारत की तारीफ हो रही है. भारत की इस पहल में एक और रोचक तथ्य है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीब दो साल से इस जंग को खत्म कराने की बात कर रहे हैं. लेकिन, जंग खत्म होने की बजाय बीते कुछ महीनों से और भयानक रूप ले चुकी है. अमेरिका इस जंग को खत्म कराने में बुरी तरह विफल होता दिख रहा है। 

    क्या है भारत का प्रस्ताव
    भारत ने अभी तक अपने प्रस्ताव की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं. लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ किया है कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में है. भारत की बातचीत सिर्फ युद्ध रोकने की अपील तक सीमित नहीं है. नई दिल्ली काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज के निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति और एक-दूसरे पर हमले रोकने जैसी व्यवस्थाओं पर दोनों पक्षों से बात कर रहा है. यही भारत के प्रस्ताव की खासियत है. यह सीधे यह तय करने की कोशिश नहीं करता कि रूस को क्या मिलेगा और यूक्रेन को क्या छोड़ना होगा. इसके बजाय उन मुद्दों से शुरुआत की जा रही है जिन पर दोनों देशों के लिए तत्काल राहत जरूरी है। 

    काला सागर इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है. युद्ध के दौरान यहां जहाजों और बंदरगाहों पर हमलों ने व्यापार और अनाज की आपूर्ति को प्रभावित किया है. अगर काला सागर में सुरक्षित नेविगेशन और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था बनती है तो इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक खाद्य और ऊर्जा बाजार को भी इससे राहत मिल सकती है। 

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के मुताबिक कीव को भारत, अमेरिका, तुर्की और मिस्र से युद्धविराम को लेकर प्रस्ताव मिले हैं. उन्होंने भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताया है. यूक्रेन ने ऊर्जा और काला सागर में युद्धविराम पर विचार करने की बात भी कही है. हालांकि कीव चाहता है कि किसी भी युद्धविराम में ऊर्जा और बंदरगाहों पर हमले रोकने की व्यवस्था भी शामिल हो. यानी अभी इसे रूस और यूक्रेन के बीच अंतिम शांति समझौता कहना जल्दबाजी होगी. फिलहाल भारत ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जो दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ा सके और बड़े युद्धविराम की जमीन तैयार कर सके। 

    भारत की पहल में अमेरिका से क्या अलग है?
    अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में शामिल रहा है. ट्रंप प्रशासन ने भी रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं. सितंबर में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच बातचीत में भी युद्ध खत्म करने और ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग जैसे मुद्दे सामने आए थे. लेकिन अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती है. वह खुद पश्चिमी गठबंधन का प्रमुख हिस्सा है और यूक्रेन को सैन्य तथा राजनीतिक समर्थन देता रहा है. ऐसे में मॉस्को के साथ बातचीत करते समय उसकी भूमिका को रूस अलग नजरिए से देखता है. भारत की स्थिति अलग है. नई दिल्ली के रूस के साथ पुराने और गहरे संबंध हैं, वहीं यूक्रेन के साथ भी भारत के राजनयिक संबंध कायम हैं. भारत ने युद्ध के दौरान रूस से बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया और साथ ही यूक्रेन के साथ भी संपर्क बनाए रखा. यही वजह है कि भारत दोनों पक्षों के बीच ऐसी बातचीत की जगह बना सकता है जिसमें किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय तत्काल मानवीय और आर्थिक मुद्दों से शुरुआत हो। 

    पुतिन ने मोदी के बारे में क्या कहा?
    भारत की पहल को उस समय और महत्व मिला जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति पहल की सार्वजनिक रूप से सराहना की. पुतिन ने कहा कि मोदी लगातार संघर्ष खत्म करने का सवाल उठाते रहे हैं और उनके पास इस समस्या के संभावित समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहली बार युद्ध खत्म कराने की दिशा में अपने प्रयासों को केवल अपील से आगे ले जाने की बात कर रहा है. जयशंकर ने भी साफ कहा है कि भारत अब केवल शांति की वकालत नहीं कर रहा, बल्कि दोनों पक्षों से बातचीत करके कुछ व्यावहारिक मुद्दों पर मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। 

    प्रस्ताव पर सहमति बनी तो भारत के लिए कितनी बड़ी राहत
    अगर भारत की पहल से रूस और यूक्रेन के बीच सीमित युद्धविराम की व्यवस्था बनती है और आगे व्यापक बातचीत का रास्ता खुलता है तो यह भारत की विदेश नीति के लिए बड़ा कूटनीतिक लाभ होगा. सबसे पहला फायदा यह होगा कि भारत की वह नीति मजबूत होगी जिसमें वह युद्ध के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताता रहा है. प्रधानमंत्री मोदी रूस और यूक्रेन दोनों के नेताओं से लगातार संपर्क में रहे हैं और भारत ने शुरू से कहा है कि युद्ध का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। 

    दूसरा फायदा भारत के आर्थिक हितों से जुड़ा है. रूस भारत के लिए ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है. दूसरी तरफ यूरोप और पश्चिमी देशों के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने से भारत को इन दोनों रिश्तों के बीच संतुलन साधना पड़ता है। 

    तीसरा और शायद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत की कूटनीतिक भूमिका सिर्फ संतुलन साधने वाले देश की नहीं रहेगी. अगर दोनों पक्ष किसी भारतीय पहल को बातचीत की शुरुआत के लिए स्वीकार करते हैं तो नई दिल्ली को संकट समाधान में एक सक्रिय मध्यस्थ भूमिका निभाने का अनुभव मिलेगा। 

  • रूस की एंटी-प्लेग लैब में हादसा, कर्मचारी की मौत से हड़कंप; ‘वुहान जैसे हालात’ की चर्चा

    रूस की एंटी-प्लेग लैब में हादसा, कर्मचारी की मौत से हड़कंप; ‘वुहान जैसे हालात’ की चर्चा

    मॉस्को 

    रूस के साइबेरिया क्षेत्र में रहस्यमय इंफेक्शन ने हड़कंप मचा दिया है. यहां की प्रयोगशाला में एक महिला कर्मचारी की संदिग्ध खतरनाक संक्रमण को लेकर अधिकारियों में न सिर्फ चिंता बढ़ गई है बल्कि स्थिति पैनिक हो रही है.  घटना इरकुत्स्क के पास स्थित शेलेखोव के एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई बताई जा रही है, ऐसे में प्लेग के निमोनिक वेरियंट के फैलने की आशंका जताई जा रही है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक प्रयोगशाला में काम करने वाले एक कर्मचारी की मौत हो गई, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है। 

    बताया जा रहा है कि मृतक को ऐसे निमोनिया का पता चला था, जिसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. हालांकि घटना के दौरान वास्तव में कौन-सा संक्रमण या पदार्थ बाहर निकला, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. रूस की संक्रमण नियंत्रण एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर (Rospotrebnadzor) मामले की जांच और स्थिति पर निगरानी रख रही है, लेकिन ज्यादा जानकारी अब भी सामने नहीं आई है. घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। 

    रहस्यमय बीमारी को लेकर मचा हड़कंप 
    सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इरकुत्स्क क्षेत्र, इरकुत्स्क शहर और शेलेखोव की सैनिटरी तथा महामारी संबंधी स्थिति सामान्य और स्थिर है. अभी यह साफ नहीं है कि प्रयोगशाला में हुई दुर्घटना का संक्रमण फैलने से कोई सीधा संबंध है या नहीं. अधिकारी घटना की वजह और रिस्क की जांच कर रहे हैं. इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट से जुड़े इस मामले में मृतक 28 वर्षीय महिला कर्मचारी बताई जा रही है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक उसे ऐसे निमोनिया की शिकायत थी, जिसके संक्रमण की वजह नहीं पता चल सकी है. वहीं  आशंका जताई जा रही थी कि महिला की मौत प्लेग से हो सकती है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुर्यातिया में फिलहाल प्लेग का कोई प्रकोप नहीं है। 

    200 लोग मेडिकल निगरानी में 
    संक्रमण की आशंका के चलते शेलेखोव में उस अस्पताल की निगरानी बढ़ाए जाने की खबर है, जहां कर्मचारी को भर्ती कराया गया था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक करीब 200 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया, जबकि शहर के एक डिलीवरी हॉस्पिटल में भी एहतियाती क्वारंटीन लागू किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट ने कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर मास्क पहनने की सलाह दी है. कंपनी ने कहा कि जिन लोगों का मरीज से करीबी संपर्क था, उनकी निगरानी की जा रही है और अब तक उनमें बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं। 

    क्या हो सकती है ये बीमारी?
    आशंका है कि ये बीमारी निमोनिक प्लेग हो सकती है, तो फेफड़ों को प्रभावित करने वाला गंभीर संक्रमण है और सांस से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए फैल सकता है. हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि मामला प्लेग का ही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्लेग गंभीर बीमारी हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है। 

  • यमन में 106 हवाई हमलों से मचा हड़कंप, सऊदी अरब ने हूतियों पर कसा शिकंजा; बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव

    यमन में 106 हवाई हमलों से मचा हड़कंप, सऊदी अरब ने हूतियों पर कसा शिकंजा; बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव

    बेरूत
     यमन के उत्तरी हिस्से पर शासन करने वाले 'अंसार अल्लाह' आंदोलन ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि उसने पिछले 24 घंटों में उनके इलाके में 106 हवाई हमले किए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा, "पिछले 24 घंटों में, सऊदी लड़ाकू विमानों ने राजधानी सना और अल-जौफ़, ताइज़, अमरान, हज्जा और सादा प्रांतों में आम नागरिकों के ठिकानों पर 106 हवाई और मिसाइल हमले किए हैं।"

    सरी ने आगे कहा कि एफ -15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने यमन के उन इलाकों पर हमले किए जो हूतियों के नियंत्रण में हैं। इससे पहले रविवार को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेनाओं ने उन इलाकों को वापस पाने के लिए एक सैन्य अभियान की घोषणा की जो अभी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं।

    यमनी सेना ने इस अभियान को ‘डॉन ऑफ यमन’ नाम दिया है और उसका सबसे बड़ा लक्ष्य रणनीतिक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है. सेना के मुताबिक इसके लिए जमीन और हवा, दोनों तरफ से कार्रवाई तेज की गई है. सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमनी सेना को जमीन पर एयर कवर दे रहा है और बाब अल-मंदेब के लिए हवाई सुरक्षा भी उपलब्ध करा रहा है। 

    ताइज को घेरने की तैयारी, तुर्बाह पर कब्जा
    तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा रविवार को हुआ। इसके कुछ ही समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा कर दी। तुर्बाह एक अहम सड़क पर स्थित है, जो प्रांतीय राजधानी ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ती है। अदन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र है।

    ताजा हिंसा में भी हजारों लोग प्रभावित
    संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, हालिया हिंसा में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 3,600 से अधिक लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के अनुसार, इस नए संघर्ष के कारण यमन के भीतर 1.45 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संघर्ष के चलते 3,000 से ज्यादा लोग समुद्र पार कर जिबूती भी पहुंच चुके हैं। ऐसे में ताइज़ की ओर हूतियों की नई बढ़त और सऊदी समर्थित सरकार के जवाबी सैन्य अभियान ने यमन में लंबे समय से चले आ रहे संकट को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है।

    सरकारी सेना के लिए तुर्बाह क्यों है अहम?
    पिछले कई वर्षों से तुर्बाह में सरकारी सैनिकों की अहम तैनाती रही है। यहां से वे हूतियों के खिलाफ ताइज की रक्षा करते रहे हैं। ऐसे में शहर का हाथ से निकलना सरकारी बलों के लिए रणनीतिक और सैन्य, दोनों लिहाज से बड़ा नुकसान है। इससे पहले हूतियों ने ताइज के बाहरी इलाकों में कई गांवों और क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। इन लगातार बढ़तों ने विद्रोहियों के लिए ताइज को चारों तरफ से घेरने का रास्ता खोल दिया है। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है।

    लाल सागर के तट पर भी हूतियों की बड़ी बढ़त
    सितंबर की शुरुआत में ईरान समर्थित हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया था। इस अभियान के दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों पर नियंत्रण मिलने के बाद हूतियों का यमन की तरफ से बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हो गया है।

    बाब अल-मंदब पर कब्जा क्यों है इतना अहम?
    बाब अल-मंदब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है। इस संकरे जलमार्ग से दुनिया के करीब 12 फीसदी वैश्विक व्यापार का आवागमन होता है। इसलिए इस इलाके पर किसी भी सशस्त्र समूह का नियंत्रण क्षेत्रीय संघर्ष के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

    यमन सरकार ने शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान
    रविवार को जारी बयान में सऊदी समर्थित यमन सरकार ने कहा कि वह सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी कर रही है। सत्तारूढ़ प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि सैन्य अभियान का लक्ष्य हूतियों के कब्जे में बचे इलाकों को वापस लेना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी सरकार को समर्थन देने की अपील भी की।

    सऊदी अरब ने दिया हूतियों को सीधा संदेश
    अल-अलीमी के एलान के कुछ ही घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमन सरकार की सेनाओं को पूरा सैन्य सहयोग देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि हूतियों के खत्म होने तक सऊदी अरब यमन सरकार की सेनाओं को 'पूरी ऑपरेशनल मदद' देता रहेगा।

    मिसाइल और ड्रोन हमलों से भी बढ़ा तनाव
    अल-मलिकी ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को हूतियों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। हूती पिछले करीब तीन महीने से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। इन हमलों ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

    जुलाई में कैसे फिर भड़की लड़ाई?
    ताजा तनाव की शुरुआत जुलाई के मध्य में हुई। उस समय हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया था। हूतियों का दावा था कि सऊदी अरब ने एक अनधिकृत ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए एयरपोर्ट को निशाना बनाया।

    जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब को बनाया निशाना
    इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब और यमन में सरकारी बलों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। उन्होंने लाल सागर में सऊदी शिपिंग की नाकेबंदी का भी ऐलान किया और सऊदी अरब से जुड़े कई जहाजों को निशाना बनाया। इसके बाद सितंबर में हूतियों ने अपने अभियान को और तेज कर दिया। उन्होंने लाल सागर के तट से तेजी से आगे बढ़ते हुए कई इलाकों पर कब्जा किया। इसे पिछले कई वर्षों में हूतियों की सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त में से एक माना जा रहा है।

    तुर्बाह के हाथ से निकलने का ताइज पर असर
    वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के मुताबिक, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा ताइज प्रांत और ताइज शहर में मोर्चे पर तैनात यमन सरकार समर्थक बलों के लिए सैनिकों और हथियारों समेत जरूरी सामान पहुंचाना बेहद मुश्किल कर सकता है। थिंक टैंक ने रविवार को जारी अपने विश्लेषण में कहा कि सप्लाई रोकना सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका असर इससे भी बड़ा है। तुर्बाह के उत्तर में आने-जाने वाली सभी सड़कों पर नियंत्रण होने का मतलब है कि सरकारी बलों के लिए शहर से पीछे हटने का रास्ता भी बंद हो सकता है।

    2014 से चल रही है यमन की जंग
    यमन का गृहयुद्ध 2014 में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोही अपने उत्तरी गढ़ से आगे बढ़ते हुए राजधानी सना में दाखिल हो गए थे। उन्होंने शहर पर कब्जा कर लिया और यमन की सरकार को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्षों से जारी इस युद्ध ने यमन को दुनिया की सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक के केंद्र में ला दिया है। संघर्ष में अब तक 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 

     

  • कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन को बताया आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम

    कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन को बताया आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम

    भोपाल

    किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव का जिला स्तरीय कार्यक्रम सोमवार को कृषि उपज मंडी, चंगेरा, नीमच में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा जिले से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए नीमच के किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्यकताओं के संबंध में बात की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीमच जिला उन्नत कृषि, आधुनिक खेती एवं कृषि व्यापार के क्षेत्र में प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। जिले में अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी, सतावरी, चिरायता, आंवला, बहेरा और नीम सहित विभिन्न औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। चिया सीड, लहसुन, मेथी एवं धनिया सहित अनेक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं व्यापार में भी नीमच की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ एवं आधारशिला बताया।

    नीमच मंडी की बढ़ती आवक और आय का किया उल्लेख

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीमच कृषि उपज मंडी की कृषि व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि नीमच मंडी ए-ग्रेड मंडी है और औषधीय फसलों के व्यापार के लिए एशिया के प्रमुख केंद्रों में अपनी पहचान रखती है। वर्ष 2023-24 में मंडी में 53.46 लाख क्विंटल कृषि उपज की आवक हुई थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 72 लाख क्विंटल हो गई। इसी अवधि में मंडी की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 34.5 करोड़ रुपये हो गई।

    प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण तथा कृषि के साथ अन्य आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

    सिंचाई परियोजनाओं से बढ़ेगा कृषि क्षेत्र का दायरा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए संचालित परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुरा-मनासा सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना से 212 गांवों की 67 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो सकेगी। इसी प्रकार जावद-नीमच एवं खुमान सिंह शिवाजी सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने से एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जिले में कृषि का रकबा बढ़ेगा तथा बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा।

    चीता परियोजना से पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधीसागर अभयारण्य में चीता परियोजना के आने से नीमच जिले में पर्यटन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नीमच को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

    कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्यपालन पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन एवं मत्स्यपालन को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने तथा गांधीसागर जलाशय सहित जिले में मत्स्य उत्पादन से जुड़े परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

    मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, जावद विधायक  ओमप्रकाश सकलेचा, नीमच विधायक  दिलीप सिंह परिहार, मनासा विधायक  अनिरुद्ध माधव मारू ने संबोधित किया।

    प्रगतिशील किसानों एवं मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

    कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील किसानों  श्याम कारपेंटर,  हरीश पाटीदार,  किशोर कुमार पाटीदार एवं  अनिल धाकड़ को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। महोत्सव में कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक कृषि पद्धतियों, फसल उत्पादन, पशुपालन तथा किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी गई। आयोजन स्थल पर कृषि एवं विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं और कृषि तकनीकों से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई।

    कार्यक्रम में कलेक्टर  हिमांशु चंद्रा, अपर कलेक्टर  बी.एस. कलेश,  जयपाल सिंह चावड़ा, कप्तान सिंह,  कपिल यार्डे,  वंदना खंडेलवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  स्वाति चोपड़ा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, हितग्राही एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

     

  • निवेश के नक्शे पर MP की बड़ी छलांग, SING फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ की FDI प्रतिबद्धताएं

    निवेश के नक्शे पर MP की बड़ी छलांग, SING फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ की FDI प्रतिबद्धताएं

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ ने आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धताएं प्राप्त कीं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस के लिए ₹41,750 करोड़ की एक बड़ी निवेश प्रतिबद्धता शामिल है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने फोरम में राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जहां छत्तीसगढ़ भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सहभागिता कर रहा था।

    यह महत्वपूर्ण निवेश प्रतिबद्धता सिंगापुर मुख्यालय वाली एनर्जी कैपिटल ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आई है, जो छत्तीसगढ़ में 100 मेगावाट क्षमता का एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करेगी। एनर्जी कैपिटल ग्लोबल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऑन-साइट स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर्स का विकास और वित्तपोषण करती है तथा इसकी उपस्थिति सिंगापुर, भारत, मलेशिया, कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में है। मुख्यमंत्री ने फोरम में कंपनी को ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ सौंपा।

    यह निवेश प्रतिबद्धता छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को और गति देती है। राज्य में पहले से ही भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित है। ये परियोजनाएं मिलकर छत्तीसगढ़ को भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।

    एनर्जी कैपिटल ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  स्टानिस्लाव बोरिसोव ने कहा, “एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जिस ऊर्जा, भूमि और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है, वह आज छत्तीसगढ़ में उपलब्ध है। यह एमओयू एक दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है। हम मध्य भारत में सबसे बड़ा एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस विकसित करने, राज्य में अंतरराष्ट्रीय पूंजी और विशेषज्ञता लाने तथा इसके संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं।”

    राज्य को सनस्ट्रीम ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से सोलर क्षेत्र के साथ-साथ संबंधित बैटरी स्टोरेज और कंपोनेंट्स के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव भी प्राप्त हुआ। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ये निवेश प्रतिबद्धताएं छत्तीसगढ़ की नीतियों, संभावनाओं और लोगों के प्रति विश्वास का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य के और करीब ले जाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी के साथ एक फायरसाइड चैट में भी हिस्सा लिया, जिसका संचालन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते हुए उन्होंने कहा, “हम बंद कमरों में चर्चा करके सुधार नहीं लाते। हम सीधे उद्योग जगत से उनकी कठिनाइयों के बारे में पूछते हैं और उसके अनुरूप अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करते हैं। 450 से अधिक सुधार किए जा चुके हैं और यह ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ तब तक नहीं रुकेगी, जब तक लोग स्वयं यह न कहें कि अब और सुधार की आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने कहा कि सुधारों, प्रगतिशील औद्योगिक नीति और सक्रिय सरकार के इस संयोजन के कारण छत्तीसगढ़ को केवल 18 महीनों में ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

    सिंगापुर सरकार के विदेश मंत्रालय तथा व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की राज्य मंत्री सु गैन सियो ह्वांग फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने भारतीय राज्यों के साथ आर्थिक संबंधों को और गहरा करने को सिंगापुर द्वारा दिए जा रहे महत्व को रेखांकित किया। मास्टरकार्ड, आईएचसीएल (ताज होटल्स) और नेस्ले सहित वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

    फोरम के इतर मुख्यमंत्री ने एक्वाटेक और एड्रॉइट ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन चर्चाओं में उद्योगों के लिए अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से संबंधित अधोसंरचना और छत्तीसगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण के व्यापक अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

    मुख्यमंत्री 6 अक्टूबर 2026 को CEO राउंडटेबल में सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और फोरम से बनी निवेश की गति को आगे बढ़ाएंगे।