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  • लौदाबाजार में मंत्री टंक राम वर्मा ने उठाई झाड़ू, बोले- ‘स्वच्छता आदत है, जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी’

    लौदाबाजार में मंत्री टंक राम वर्मा ने उठाई झाड़ू, बोले- ‘स्वच्छता आदत है, जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी’

    सेवा संकल्प अभियान

    स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी – मंत्री टंक राम वर्मा

     बलौदाबाजार में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने हाथों में उठाई झाड़ू

    षष्ठी मंदिर परिसर में चला विशेष स्वच्छता अभियान

    ​रायपुर

           प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के ऐतिहासिक 25 वर्ष पूर्ण होने के सुअवसर पर जारी 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत जिले भर में विविध जनसेवा कार्यक्रमों की धूम है। इसी कड़ी में 'सेवा मेरा योगदान' कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की अगुवाई में बलौदाबाजार स्थित ऐतिहासिक षष्ठी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।
         ​अभियान के दौरान राजस्व मंत्री वर्मा, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों ने स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर सड़कों पर बिखरे कचरे को साफ किया और उसे डस्टबिन में एकत्रित किया।     
           मंत्री वर्मा के इस प्रतीकात्मक पहल ने आमजनों को स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने का एक सशक्त संदेश दिया।
    ​स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनती है।   
     
          राजस्व मंत्री वर्मा ने ​उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 सफल वर्षों के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जा रहा है। स्वच्छता केवल एक दिवस का कार्य नहीं, बल्कि एक आदत है जो धीरे-धीरे हमारे व्यवहार का हिस्सा बनती है। हर्ष का विषय है कि आज इस अभियान के माध्यम से जन-जन में स्वच्छता के प्रति अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिल रही है।
            ​स्वच्छता के इस महाअभियान में कलेक्टर , भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य उपाध्यक्ष, नगर पालिका उपाध्यक्ष सहित विभिन्न वार्डों के पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होकर अपना श्रमदान दिया।

  • मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका, 10 अप्रैल तक करें आवेदन; SIR पर CM मोहन यादव ने किया अलर्ट

    मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका, 10 अप्रैल तक करें आवेदन; SIR पर CM मोहन यादव ने किया अलर्ट

     भोपाल 
    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फार्म छह, घोषणा सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए केवल निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मतदाता सूची को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम की स्थिति को लेकर एक्स पर पोस्ट कर यह बात कही। साथ ही 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवाओं से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की अपील की।

    निर्धारित प्रक्रिया पर विश्वास करें
    सीएम   मोहन यादव ने कहा कि एसआईआर को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फॉर्म 6 और डिक्लेयेरशन सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए सिर्फ निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेरा आग्रह है कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवा अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज कराएं और प्रत्येक नागरिक अपने नाम की भी पुष्टि करे। आइए, अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें।

    विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगा रहे आरोप 
    बता दें मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विपक्षी पार्टियां विरोध कर रहा हैं। इसको लेकर सीजेपी और कांग्रेस पार्टी के नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के सदस्यों वाली एक संवैधानिक संस्था को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कानून के तहत जरूरी सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा हैं। इनके द्वारा एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देकर आरोप लगाया जा रहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 माह के करीब 14 बार मतदात सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई, जिस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा हैं।  

    लोकतंत्र की मजबूती के लिए अद्यतन सूची जरूरी
    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह बेहद जरूरी है कि मतदाता सूची भी अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय हो। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है। प्रत्येक नागरिक मतदाता सूची में अपने नाम की पुष्टि करें। आइए, हम अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें।

    10 अप्रैल तक चलाया जा रहा है विशेष अभियान
    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 10 अप्रैल तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। एक अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वालों के साथ जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गए, उनके नाम जोड़ने के लिए आवेदन लिए जाएंगे।

     

  • DA भुगतान पर पंजाब सरकार घिरी, हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई; कल कहा था- ‘लुका-छिपी नहीं चलेगी’

    DA भुगतान पर पंजाब सरकार घिरी, हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई; कल कहा था- ‘लुका-छिपी नहीं चलेगी’

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के सरकारी मुलाजिमों और पेंशनरों के बकाया DA मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट आज (6 अक्टूबर) फिर सुनवाई करेगा। पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा आज भी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होंगे। उन्हें कोर्ट ने समन किया है।

    सोमवार (5 अक्टूबर) को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है।

    कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाना आपका अधिकार है, लेकिन ट्वीट कर फैसले को चुनौती देंगे तो हम इसकी तारीफ नहीं करेंगे। सरकार खुद के लिए कड़ी कार्रवाई की स्थिति पैदा कर रही है। अब बहुत हो चुका, अब और लुका-छिपी नहीं चल सकती।

    बता दें कि 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को IAS, IPS और IFS अधिकारियों के बराबर लंबित DA/DR देने को कहा था। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि बकाया देने तक सरकार बड़े स्तर पर एडवरटाइजमेंट जैसे खर्च भी बंद करे।

    पहले जानिए कि मुख्य विवाद क्या है?
    पंजाब के मुलाजिम और पेंशनर्स मांग कर रहे हैं कि उन्हें छठे पंजाब पे कमीशन के अनुसार DA केंद्र सरकार के पैटर्न पर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य का टैक्स राजस्व बढ़ा है, इसलिए सरकार को ₹14,200 करोड़ का बकाया एरियर तुरंत ब्याज समेत देना चाहिए।

    इस पर पंजाब सरकार का तर्क है कि 2021 के पे-रूल्स में कोई निश्चित केंद्रीय दर अनिवार्य नहीं है। इतनी बड़ी रकम अचानक जारी करने से राज्य का वित्तीय ढांचा प्रभावित होगा और वह पहले से ही कर्मचारियों को कई केंद्रीय श्रेणियों से ज्यादा वेतन दे रही है।

    अब विवाद की पूरी टाइमलाइन पढ़िए
        8 अप्रैल 2026 (सिंगल बेंच का फैसला):
    हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार उसी दर पर DA/DR जारी करे, जिस दर पर पंजाब में तैनात IAS, IPS अधिकारियों को दिया जाता है। कोर्ट ने इसके लिए 30 जून 2026 तक की डेडलाइन तय की थी।

        3 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डबल बेंच का सख्त आदेश): पंजाब सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज कर दी और आदेश दिया कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित किस्तों का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि देरी होने पर 6% सालाना साधारण ब्याज देना होगा और जब तक भुगतान नहीं होता, सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापनों जैसे गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाए।

        17 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डेडलाइन खत्म): हाई कोर्ट की ओर से दी गई 15 दिनों की डेडलाइन समाप्त हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। इसके विरोध में पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन और अन्य संगठनों ने हड़ताल की चेतावनी दी।

        27 अगस्त 2026 (कर्मचारियों की महा-हड़ताल और सरकार का एक्शन): लंबित DA, एरियर और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारियों ने राज्यव्यापी सामूहिक हड़ताल की। जवाब में भगवंत मान सरकार ने नो वर्क, नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू कर कर्मचारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर दिए।

        1 सितंबर 2026 (सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट): पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की। सरकार ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी रकम का एक साथ भुगतान करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।

        8 से 9 सितंबर 2026 (पेन-डाउन स्ट्राइक और सरकार का झुकना): शो-कॉज नोटिस के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करते हुए पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू कर दी और सामूहिक छुट्टी पर चले गए। चौतरफा दबाव के बाद, 9 सितंबर को सरकार ने सभी कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल स्थगित की।

        11 सितंबर 2026 (हाई कोर्ट का अल्टीमेटम): सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पंजाब सरकार की याचिका (SLP) में 9 तकनीकी आपत्तियां निकाली थीं। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को इन आपत्तियों को दूर करने और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू करवाने के लिए 10 दिन का समय दिया।

        18 से 27 सितंबर 2026 (8% डीए बढ़ोतरी का ऐलान): मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी यूनियनों के बीच एक अहम बैठक हुई। गतिरोध को कम करने के लिए सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में 8% डीए बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया। इससे राज्य में DA 42% से बढ़कर 50% हो गया। हालांकि, पुराने बकाए का मुद्दा अभी भी जस का तस बना रहा।

        5 अक्टूबर 2026 (मुख्य सचिव की पेशी और हाई कोर्ट की फटकार): मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। सरकार ने हलफनामा देकर कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की अपील के स्टेटस को लेकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है और कोर्ट को गुमराह कर रही है। कोर्ट ने नोट किया कि 1 सितंबर को याचिका दायर होने के बावजूद तकनीकी आपत्तियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार सिर्फ समय बिताने की कोशिश कर रही है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से खुद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

  • भोपाल मेट्रो फेज-2 के रूट को लेकर विरोध तेज, भोपाल टॉकीज के पास विधायक ने जताई नाराजगी

    भोपाल मेट्रो फेज-2 के रूट को लेकर विरोध तेज, भोपाल टॉकीज के पास विधायक ने जताई नाराजगी

    भोपाल 

    भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के फेज-2 के रूट पर उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने फिर आपत्ति उठाई है। सोमवार देर रात जब मेट्रो टीम भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान पहुंची और बेरिकेड्स लगाने शुरू किए तो विधायक का पारा चढ़ गया। उन्होंने मेट्रो और पुलिस अफसरों से कहा कि चलो बाहर निकलो, वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा।

    उनकी मेट्रो के कब्रिस्तान में से अंडरग्राउंड रूट निकालने को लेकर नाराजगी थी। देर रात जब पता चला कि मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारी-कर्मचारी कब्रिस्तान के बाहर बेरिकेड्स लगा रहे और मशीनें लेकर पहुंचे तो वे मौके पर पहुंच गए।

    उन्होंने मेट्रो और पुलिस अफसरों से सख्त लहजे में कहा कि कब्रिस्तान को छोड़कर मेट्रो का काम करें। यहां पर सामान लेकर कैसे आए? यह शाही कब्रिस्तान की प्रॉपर्टी है। क्या पहले जानकारी दी थी? या अनुमति है? पुलिस वाले सामने खड़े होकर कब्जा करवा रहे हैं। पहले शाही औकाफ से परमिशन लाना, फिर काम करना।

    बिना अनुमति कोई काम न करें
    समाज के लोगों के साथ विधायक अकील ने कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कोई भी कार्य न किया जाए। सभी मशीनों व सामान को तुरंत मौके से हटाया जाए।

    यह है मेट्रो का फेज-2
    बता दें कि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो दौड़ रही है। अब दूसरे फेज के रूट यानी, सुभाषनगर से करोंद तक तेजी से काम चल रहा है। इसकी कुल लंबाई 16.74 किमी है।

    दूसरे फेस में सुभाषनगर से करोंद की कुल दूरी 9.74 किमी लंबा है, लेकिन 8.77 किमी में होगा। इसमें से 5.38 Km हिस्से में 6 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन बनेंगे, जिस पर 650 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस काम की शुरुआत हो चुकी है। पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा पर स्टेशन बनेंगे।

    वहीं, बाकी 3.39 किलोमीटर रूट अंडरग्राउंड होगा। इसमें 2 मेट्रो स्टेशन भोपाल रेलवे स्टेशन व नादरा बस स्टैंड भी रहेंगे। यह पूरा काम 890 करोड़ रुपए में होगा। इसी रूट को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में सुनवाई भी चल रही है। जिसमें दोनों पक्ष अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं।

    विधायक की यह आपत्ति

    इस मामले में विधायक अकील का कहना है कि यहां हमारे बाप-दादा दफन है। कई कब्र हैं। इसलिए कब्रिस्तान में से मेट्रो कतई न गुजरे। वे पहले भी आपत्तियां लगा चुके हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा के नागरिकों ने किया अभिनंदन, बोले- राजधानी तक पहुंचना हुआ सुगम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा के नागरिकों ने किया अभिनंदन, बोले- राजधानी तक पहुंचना हुआ सुगम

    कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा क्षेत्र के नागरिकों ने किया मुख्यमंत्री निवास में अभिनन्दन

    गाडरवारा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

    स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है।

    अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा

    कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

     

  • 791 किमी सड़कों के लिए कटेंगे 2.89 लाख पेड़? भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

    791 किमी सड़कों के लिए कटेंगे 2.89 लाख पेड़? भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

     भोपाल
    भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।

    सड़क का नेटवर्क, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
     भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।में भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को लेकर पर्यावरणविदों और शहर के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। योजना के तहत 18 से 75 मीटर तक चौड़ी सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण से 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में एनएचएआइ की 16.44 किमी लंबी सड़क के लिए लगभग 6,000 पेड़ काटे गए थे। इस आधार पर देखें तो पूरे 791.42 किमी नेटवर्क के निर्माण से सांकेतिक रूप से करीब 2.89 लाख पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल सकती है। 1,450 रुपए प्रति पेड़ की मुआवजा दर के अनुसार इसका सांकेतिक मूल्य लगभग 42 करोड़ रुपए बनता है। इससे पहले भी बायपास और विभिन्न सड़क परियोजनाओं के नाम पर राजधानी में हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है।

    डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। इस प्रकार की ओवरलैपिंग से व्यावसायिक गतिविधियों को वैधता मिल सकती है। 

    गौरव वैद्य के अनुसार वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव सड़कों का अंतिम रेखांकन, संबंधित मार्गों पर मौजूद वर्तमान वनस्पति की स्थिति, भू-अधिग्रहण की वास्तविक आवश्यकताएं और सड़कों के वास्तविक चौड़ीकरण का विस्तार जैसी बातों पर निर्भर करेगा।30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा।

    धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़भोपाल में काटे जाएंगे 2.89 लाख पेड़। 

    ओवरलैपिंग मार्किंग पर उठे सवाल
    मैनिट भोपाल के डिपार्टमेंट ऑफ आकिटेक्चर एंड प्लानिंग के एचओडी प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। 

    प्रस्तावित सड़क नेटवर्क का ढांचा
    18 मीटर चौड़ी सड़कें- 111
    24 मीटर चौड़ी सड़कें- 103
    30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48
    45 मीटर चौड़ी सड़कें- 17
    60 मीटर चौड़ी सड़कें- 15
    ये नई सड़कें देंगी नया आकार

    09 मीटर- 2 सड़कें
    12 मीटर- 4 सड़कें
    15 मीटर- 2 सड़कें
    70 मीटर- 4 सड़कें
    75 मीटर-6 सडकें

    प्रोजेक्ट भोपाल की हरियाली के लिए खतरा
    पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। वहीं मैनिट के प्रो. डॉ. धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।

    वित्तीय एवं पर्यावरणीय मानक
    एनएचएआइ संदर्भ दरः 365 पेड़ प्रति किलोमीटर
    संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़
    निर्धारित मुआवजा दरः 1,450 रुपए प्रति पेड़
    अनुमानित कुल मुआवजा राशिः लगभग 42 करोड़ रुपए

     

  • 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया हुई तेज, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी-भत्तों से जुड़ी सुविधाओं का जुटाया जा रहा डेटा

    8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया हुई तेज, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी-भत्तों से जुड़ी सुविधाओं का जुटाया जा रहा डेटा

    नई दिल्ली

    8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले अलग-अलग बेनिफिट्स एंड फैसिलिटीज की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग अब इन बेनिफिट्स से रिलेटेड जानकारी का स्टडी करेगा, ताकि कर्मचारियों के सैलरी, अलाउंसेस और अन्य सर्विस बेनिफिट्स की रिव्यू की जा सके।

    फाइनेंसियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉयी ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (CGEGIS) से जुड़ी जानकारी मांगी है। सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने 1 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है। इसमें मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (MoHUA) के तहत आने वाले डिपार्टमेंट्स एंड ऑफिसेज से सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉईज ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम यानी CGEGIS से जुड़ा डेटा मांगा गया है। बता दें कि यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम है, जिसमें इंश्योरेंस कवर के साथ सेविंग्स का प्रोविजन भी होता है।

    दिए गए हैं निर्देश
    CPWD ने रिलेटेड ऑफिसेज से कहा है कि वे तय फॉर्मेट यानी एनेक्सचर-एम (Annexure-M) में यह जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके लिए संबंधित SDG और ADG को निर्देश दिए गए हैं और जानकारी 9 अक्टूबर तक CPWD को भेजनी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि CGEGIS के तहत मिलने वाले लाभ में कोई बदलाव या बढ़ोतरी कर दी गई है। फिलहाल यह सिर्फ जानकारी जुटाने की प्रक्रिया है।

    नवंबर 2025 में बना था 8वां वेतन आयोग
    बता दें कि 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में बनाया था। इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में प्रो. पुलक घोष पार्ट-टाइम मेंबर और पंकज जैन मेंबर-सेक्रेटरी हैं। आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, अलाउंसेस, रिटायरमेंट बेनिफिट्स और दूसरी सर्विस कंडीशंस की रिव्यू कर सरकार को अपनी सिफारिशें देनी हैं।

    सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 15 जून थी
    वेतन आयोग पहले ही कर्मचारियों, पेंशनरों, कर्मचारी संगठनों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सुझाव ले चुका है। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 15 जून 2026 तक बढ़ाई गई थी। अब आयोग अलग-अलग विभागों से जरूरी आंकड़े जुटाने के साथ जमीनी स्तर पर भी बातचीत कर रहा है। आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, अक्टूबर में बेंगलुरु और मुंबई में भी बैठकें प्रस्तावित हैं।

    ऐसे में CGEGIS से जुड़ी जानकारी मांगा जाना कर्मचारियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह सरकारी सेवा से जुड़े लाभों में शामिल है और अब इसकी जानकारी भी 8वें वेतन आयोग के स्टडी का हिस्सा बन रही है। हालांकि, अभी इससे CGEGIS में किसी बदलाव, ज्यादा इंश्योरेंस कवर या एडिशनल बेनिफिट्स की घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल इसे 8वें वेतन आयोग की चल रही डेटा जुटाने और रिव्यू प्रोसेस के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

  • बाढ़ से निपटने और सिंचाई सुधार की दिशा में बड़ा कदम, यूपी में जर्जर जल संरचनाओं का हुआ कायाकल्प

    बाढ़ से निपटने और सिंचाई सुधार की दिशा में बड़ा कदम, यूपी में जर्जर जल संरचनाओं का हुआ कायाकल्प

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में सिंचाई तंत्र को अभेद्य बनाने और बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था को आधुनिक दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जल ही जीवन है' और 'बूंद-बूंद का बेहतर उपयोग' के संकल्प को साकार करते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जर्जर और दशकों पुरानी जल संरचनाओं का कायाकल्प कर दिया है। प्रदेश के प्रमुख बैराजों, बांधों, हेड रेगुलेटरों और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के जर्जर गेटों को न केवल बदला गया है, बल्कि 60 से 70 फीट गहरे पानी के भीतर गेट बदलकर राज्य ने एक अभूतपूर्व तकनीकी कीर्तिमान भी स्थापित किया है।

    ओखला, गोमती और नरौरा बैराज का हुआ आधुनिकीकरण
    सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के अनुसार, लंबे समय से देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके गेटों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। 

    गोमती और हिंडन बैराज: लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट और गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी 8 गेट सफलतापूर्वक बदले जा चुके हैं।

    ओखला व नरौरा बैराज: दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले गए हैं, जबकि बुलंदशहर के नरौरा बैराज के 61 में से 13 गेट बदले जा चुके हैं और 48 पर काम जारी है।

    अन्य प्रमुख संरचनाएं: पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी 4 गेट, एटा के तातारपुर कनेक्टिंग व हेड रेगुलेटर के 20 गेट, और हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज के 8 खराब गेटों को विभाग की बीआईएस/आईएसओ प्रमाणित बरेली व झांसी कार्यशालाओं में निर्मित नए गेटों से बदला गया है।

    70 फीट गहरे पानी के भीतर बदली गई तकनीक, दूर हुई रिसाव की समस्या
    प्रदेश में पहली बार बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर स्थित गेटों को बदलने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली गई।

    गहरे पानी में ऑपरेशन: ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों को पानी के भीतर ही सफलतापूर्वक बदला गया।

    चंद्रप्रभा बांध में रिसाव बंद: चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में 80 फीट गहराई पर स्थित गेटों से हो रहे रिसाव को गोताखोरों की मदद से स्थायी रूप से रोककर खरीफ और आगामी फसलों के लिए पानी सुरक्षित किया गया। 

    संभावित आपदाओं के लिए तैयार रखे गए 'स्पेयर गेट'
    मुख्य अभियंता (यांत्रिक) उपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार केवल वर्तमान संरचनाओं को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावित आपदाओं और आकस्मिक खराबी से निपटने के लिए एडवांस तैयारी कर रही है।
     
    ओखला बैराज, मौदहा (हमीरपुर), लहचूरा (महोबा), खो बैराज (बिजनौर), घाघरा बैराज (बहराइच) और शारदा बैराज (लखीमपुर खीरी) जैसी अति-संवेदनशील जल संरचनाओं के लिए विशेष स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए गेट बदला जा सकेगा और जन-धन की संभावित क्षति को रोकते हुए किसानों को निर्बाध सिंचाई का पानी मिलता रहेगा।  

  • भोपाल में जुटेंगे 20 हजार युवा, CM मोहन यादव बताएंगे रोजगार से AI-रोबोटिक्स तक भविष्य का रोडमैप

    भोपाल में जुटेंगे 20 हजार युवा, CM मोहन यादव बताएंगे रोजगार से AI-रोबोटिक्स तक भविष्य का रोडमैप

    भोपाल 

    भोपाल में 6 अक्टूबर को सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 आयोजित होगा, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओंमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार युवाओं से सीधा संवाद करेंगे।AI, रोबोटिक्स, ड्रोन जैसी भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान।मध्य प्रदेश की युवा शक्ति को रोजगार, कौशल, स्टार्टअप और नई तकनीकों से जोड़ने के लिए सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ.

    मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। कॉन्क्लेव में युवाओं को कॅरियर और रोजगार के नए विकल्पों के साथ ही नवाचार और उभरती तकनीकों की संभावनाओं से भी रूबरू कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रविवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सभी तैयारियां तय समय-सीमा में पूरी करने और युवाओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।कॉन्क्लेव में रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और नई तकनीकों पर विशेष सत्र और गतिविधियां होंगी।

     विशेषज्ञों के साथ शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और स्टार्टअप भी इसमें शामिल होंगे। युवाओं को बदलते जॉब मार्केट, नए कौशल की जरूरत, स्वरोजगार की संभावनाओं और अपने आइडिया को बिजनेस में बदलने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उद्योग, एमएसएमई, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष, पुलिस और साइबर सुरक्षा समेत कई विभाग युवाओं के लिए संचालित योजनाओं और अवसरों की जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर और सेडमैप की ओर से भी स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। 

    इनमें विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, संस्थाओं और स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार, कॅरियर, प्रशिक्षण, अनुसंधान, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। विश्वविद्यालयों की ओर से ड्रोन तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कॅरियर से जुड़े प्रोजेक्ट और प्रस्तुतियां भी होंगी।

    युवा कॉन्क्लेव में भविष्य की तकनीकों को खास जगह दी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और रिसर्च की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा। इसका मकसद युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई तकनीकों और इनोवेशन के क्षेत्र में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करना है।मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से नवोदित उद्यम अपने उत्पाद और नए प्रयोग प्रदर्शित करेंगे। युवा इन स्टार्टअप के जरिए यह समझ सकेंगे कि किसी विचार को उत्पाद, सेवा और सफल उद्यम में कैसे बदला जा सकता है।

     कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन और कौशल विकास के साथ मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग, रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञ जानकारी देंगे। पुलिस विभाग की ओर से महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग और जन-सुरक्षा से जुड़े विषयों पर युवाओं के साथ संवाद किया जाएगा।CM मोहन यादव ने मंडला को दिया 460 करोड़ का तोहफा, टाइगर सफारी-जू से पान की खेती तक कई बड़े ऐलानयुवा कॉन्क्लेव में ज्ञान और मार्गदर्शन के साथ मनोरंजन का भी इंतजाम रहेगा। 

    कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां युवाओं का उत्साह बढ़ाएंगी।सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को संवाद, कौशल, कॅरियर, रोजगार और नवाचार के अवसरों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री डॉ.

    मोहन यादव के साथ 20 हजार से अधिक युवाओं का संवाद और 80 से ज्यादा प्रदर्शनी कक्ष इस आयोजन को प्रदेश के युवा केंद्रित बड़े आयोजनों में शामिल करेगा। सरकार का जोर युवा प्रतिभा और ऊर्जा को सही अवसर देकर विकसित मध्य प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ाने पर है।

  • नर्मदा उद्गम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, अमरकंटक में 11,657 हेक्टेयर में नया शहर; 4 गांवों में खुलेंगे होटल-रिसॉर्ट

    नर्मदा उद्गम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, अमरकंटक में 11,657 हेक्टेयर में नया शहर; 4 गांवों में खुलेंगे होटल-रिसॉर्ट

    अमरकंटक 
    मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा उद्गम स्थल को प्रदूषण से बचाने के लिए अमरकंटक सैटेलाइट सिटी बसाएगी। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने निवेश क्षेत्र का दायरा सात हजार से बढ़ाकर 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा कर दिया है। चार गांवों की जमीन पर होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं बनेंगी। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा।मध्य प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए सरकार यहां एक सुनियोजित नया शहरी क्षेत्र विकसित करेगी। इसके लिए अमरकंटक के निवेश क्षेत्र का दायरा 7 हजार से बढ़ाकर 11,657 हेक्टेयर से अधिक कर दिया गया है।

    नर्मदा उद्गम स्थल की सुरक्षा
    इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हुई थी। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) ने इसके लिए निवेश क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है।

    योजना के तहत पर्यटकों के ठहरने की जगह नर्मदा के उद्गम स्थल से दूर बनाई जाएगी। दुकानें और दूसरी कारोबारी गतिविधियां भी वहां से हटाई जाएंगी। इसका मकसद गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकना है।

    नर्मदा को प्रदूषण से बचाना मकसद
    इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद हुई। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है।

    इसके लिए पर्यटकों की नई बसाहट और व्यावसायिक गतिविधियों को उद्गम स्थल से दूर ले जाने की योजना है, ताकि सीवेज नर्मदा में न पहुंचे। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा। इसमें होटल, सड़क और आवासीय क्षेत्रों की जगह तय की जाएगी।

    इन 4 गांवों में बनेगी सैटेलाइट सिटी
    सैटेलाइट सिटी के लिए चुने गए चार गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत कम बाधाओं के साथ सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी।

    नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है।
    नर्मदा उद्गम (Narmada river origin) का इलाका धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम है। इसी वजह से सरकार वहां सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करना चाहती है। क्या इससे उद्गम पर दबाव घटेगा? योजना का मकसद पर्यटन का बोझ उद्गम से दूर रखना है।

    अमरकंटक सैटेलाइट सिटी कहां बनेगी?
    निवेश क्षेत्र (वह इलाका जिसमें विकास की योजना बनती है) का दायरा बढ़ा है। पहले यह करीब सात हजार हेक्टेयर था। अब यह 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है।

    नई सैटेलाइट सिटी चार गांवों की दो हजार 134.14 हेक्टेयर जमीन पर बसेगी। यह इलाका अमरकंटक के मुख्य संवेदनशील क्षेत्र से दूर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी।

    इन 4 गांवों में बनेगा नया शहर
    अमरकंटक सैटेलाइट सिटी (Amarkantak satellite city) के लिए पोंडी, लालपुर, बरसोत और सेंदुखार गांव चुने गए हैं। इन चारों गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को कम बाधाओं में सुनियोजित शहरी क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी।

    ये आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं। पोंडी सबसे बड़ा हिस्सा है। यहां 999.21 हेक्टेयर जमीन है और आबादी 1,554 है। लालपुर में 447.97 हेक्टेयर जमीन और 810 लोग हैं। बरसोत में 417.14 हेक्टेयर जमीन और 521 लोग हैं। सेंदुखार में 269.80 हेक्टेयर जमीन और सिर्फ 69 लोग हैं। चारों गांवों की कुल आबादी करीब तीन हजार है।

    15 गांव/क्षेत्रीय इकाइयों का मास्टर प्लान
    अमरकंटक के मुख्य क्षेत्र और नई सैटेलाइट सिटी समेत कुल 15 क्षेत्रीय इकाइयों को नए निवेश क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है।

    कृषि भूमि पर कॉटेज और स्विमिंग पूल
    अमरकंटक के विकास के लिए 2020 में मास्टर प्लान में बदलाव कर कृषि भूमि पर ‘कृषि पर्यटन’ को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया था।

    मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत कृषि भूमि पर कॉटेज, कैंपिंग साइट, रेस्टोरेंट, योग-नेचुरोपैथी केंद्र, वेलनेस/आध्यात्मिक केंद्र और स्विमिंग पूल की अनुमति दी गई।

    इसके अलावा गैर-प्रदूषणकारी उद्योग, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।