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  • संगठन में बड़ा बदलाव! BJP ने दिल्ली समेत चार राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों का किया ऐलान

    संगठन में बड़ा बदलाव! BJP ने दिल्ली समेत चार राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों का किया ऐलान

    नई दिल्ली

    बीजेपी संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी ने गुरुवार (28 मई) को चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने का ऐलान किया है. दिल्ली में वीरेंद्र सचदेवा की जगह केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को कमान सौंपी गई है. इसके अलावा, भाजपा ने पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा के नए प्रदेश अध्यक्ष के नामों का ऐलान किया है. इसको लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

    बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

    कौन हैं दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा?
    हर्ष मल्होत्रा बीजेपी के सीनियर नेता और दिल्ली से सांसद हैं. वह अभी तक केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं. लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय मल्होत्रा ने दिल्ली भाजपा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह जनसंपर्क, संगठन क्षमता और विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के लिए जाने जाते हैं।

    अर्चना गुप्ता बनीं हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष
    डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, जबकि सरदार केवल सिंह ढिल्लो को पंजाब और अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    कौन हैं पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष
    केवल सिंह ढिल्लों बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2022 की संगरूर लोकसभा की उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा की उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था. ढिल्लों देश और पंजाब के एक बड़े उद्योगपति हैं. वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी रहे हैं, उन्हें बरनाला के लोग विकास पुरुष के तौर पर जानते हैं, उन्होंने अपनी राजनीति हमेशा विकास के मुद्दे पर लड़ी है, जबकि विरोधी खेमे के नेताओं के साथ कभी भी विवाद की राजनीति में वह नहीं पड़े।

    पंजाब बीजेपी की कमान केवल सिंह ढिल्लों को
    सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वह बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में संगरूर लोकसभा उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था।

    उद्योगपति से नेता तक का सफर
    केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी भी रहे हैं। बरनाला में लोग उन्हें विकास कार्यों के लिए जानते हैं।

    हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में भी नए चेहरे को मौका मिला है। बीजेपी ने अर्चना गुप्ता को हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, अभिषेक देवराय को त्रिपुरा बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है।

  • कांग्रेस में बदलाव तय! डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान, आज होगा सत्ता हस्तांतरण

    कांग्रेस में बदलाव तय! डीके शिवकुमार संभालेंगे कर्नाटक की कमान, आज होगा सत्ता हस्तांतरण

    बेंगलुरु

     कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. सीएम सिद्धारमैया ने मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग में यह ऐलान किया। सिद्धारमैया ने राज्यपाल से मुलाकात के लिए तीन बजे का समय मांगा है. सिद्धारमैया तीन बजे लोकभवन पहुंचकर सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंपेंगे. लेकिन इस बीच एक नया ट्विस्ट आ गया है. राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद ही नहीं हैं. ऐसे में सिद्धारमैया अपना इस्तीफा राज्यपाल के प्राइवेट सेक्रेटरी को सौंपेंगे।

    डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के सीएम, सिद्धारमैया ने प्रस्तावित किया नाम
    कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार की विदाई का वक्त तय हो गया है. सिद्धारमैया शाम तीन बजे लोकभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. सिद्धारमैया ने इस्तीफे से पहले अगले मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा है. डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

    सिद्धारमैया ने सहयोगियों का किया धन्यवाद
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है. सीएम सिद्धारमैया ने सभी मंत्रियों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया और सूबे की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चर्चा की. सीएम ने सहयोगियों को बताया कि पिछले तीन वर्षों में उनकी अगुवाई वाली सरकार ने क्या-क्या किया, कांग्रेस की चुनावी गारंटियां पूरी करने के लिए योजनाएं किस तरह से लागू कीं और सामने आई चुनौतियों से किस तरह पार पाया।

    डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया मिले गले
    इससे पहले, बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आधिकारिक आवास पर अपने कैबिनेट सहयोगियों के लिए नाश्ते की मेजबानी की। इस बैठक में डी.के. शिवकुमार सहित कई अन्य मंत्री शामिल हुए। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई तस्वीरों में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच की दूरियां मिटती दिखीं। एक तस्वीर में सिद्धारमैया शिवकुमार को गले लगाते नजर आ रहे हैं, जबकि एक अन्य तस्वीर में भावी मुख्यमंत्री माने जा रहे शिवकुमार, सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक के दौरान सिद्धारमैया ने शिवकुमार के लिए रास्ता साफ करने और अपने इस्तीफे की घोषणा करने की योजना बनाई थी।

    कांग्रेस हाईकमान का निर्देश और राहुल गांधी की भूमिका
    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए अपना पद छोड़ने को कहा है। पार्टी ने 77 वर्षीय दिग्गज नेता सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट के साथ दिल्ली में कोई अहम भूमिका देने की पेशकश की है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इस प्रस्ताव को तत्काल स्वीकार नहीं किया है।

    राहुल गांधी का संदेश
    बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने का यह संदेश सीधे राहुल गांधी की ओर से आया है। सिद्धारमैया पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अगर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) उन्हें पद छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वह सहर्ष ऐसा करेंगे। इससे पहले मंगलवार को सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाया गया था। वहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल व रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच लगातार अहम बैठकें हुईं।

    राज्यपाल की अनुपस्थिति से इस्तीफे में देरी
    तय कार्यक्रम के अनुसार, सिद्धारमैया को बृहस्पतिवार को ही राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपना था। उन्होंने इसके लिए राजभवन से समय भी मांगा था। हालांकि, राजभवन के सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल व्यक्तिगत कारणों से इंदौर गए हुए हैं और फिलहाल शहर में नहीं हैं।

     शाम तीन बजे लोकभवन जाएंगे सिद्धारमैया
    मुख्यमंत्री सिद्धारमैया शाम तीन बजे लोकभवन जाएंगे. सीएम सिद्धारमैया लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे. राज्यपाल बेंगलुरु में नहीं हैं, ऐसे में वह अपना इस्तीफा राजभवन सचिवालय को सौंपेंगे. गौरतलब है कि राज्यपाल रात के 10.30 बजे निकल गए थे।

    कर्नाटक के प्रभारी एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया से अटकलें न लगाने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक राज्य में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की कोई बैठक नहीं बुलाई गई है और न ही कोई अंतिम निर्णय लिया गया है। आमतौर पर विधायक दल ही अपने नेता (मुख्यमंत्री) का चुनाव करता है।

    समर्थकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं (जश्न और विरोध)
    इस संभावित बदलाव को लेकर राज्य में सियासी पारा काफी चढ़ गया है और दोनों नेताओं के समर्थकों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। डी.के. शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की पक्की होती खबरों के बीच बेंगलुरु और रामनगर सहित राज्य के कई हिस्सों में उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री के पद छोड़ने की अटकलों के बीच उनके समर्थक भारी संख्या में उनके आधिकारिक आवास के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन किया।

    पिछड़ा वर्ग महासंघ की चेतावनी
    कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ ने कांग्रेस और हाईकमान को चेतावनी दी है कि यदि सिद्धारमैया को हटाया गया तो पार्टी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। महासंघ का तर्क है कि कांग्रेस सत्ता में 'अहिंदा' (AHINDA – अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों का कन्नड़ संक्षिप्त नाम) के समर्थन से आई है और पार्टी में सिद्धारमैया के कद का कोई दूसरा नेता नहीं है।

    क्या है 'रोटेशनल सीएम' फॉर्मूला?
    मई 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के बीच कड़ी टक्कर थी। उस समय पार्टी ने शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर विवाद सुलझाया था। उस दौरान ऐसी खबरें थीं कि दोनों नेताओं के बीच 'रोटेशनल चीफ मिनिस्टर' (ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने) के फॉर्मूले पर समझौता हुआ है। 20 नवंबर 2025 को कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा (ढाई साल) समय पूरा कर लिया था, जिसके बाद से ही इस नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई थी। हालांकि, पार्टी ने कभी इस फॉर्मूले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।

     
    गवर्नर राज्य में नहीं फिर भी इस्तीफा दे सकते सिद्धारमैया, जानिए ऑप्शन
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पद से इस्तीफा देने वाले हैं और राज्यपाल बेंगलुरु से बाहर हैं. ऐसे में प्रक्रिया और संविधान के प्रावधान क्या कहते हैं?

  • Meta ने लॉन्च किया नया सब्सक्रिप्शन मॉडल, अब पैसों में मिलेगा WhatsApp-Instagram का एक्स्ट्रा एक्सपीरियंस

    Meta ने लॉन्च किया नया सब्सक्रिप्शन मॉडल, अब पैसों में मिलेगा WhatsApp-Instagram का एक्स्ट्रा एक्सपीरियंस

    मुंबई

    Meta ने दुनिया भर के इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप यूजर्स के लिए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किया है। इसके तहत व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक का पेड प्लान लेने वाले यूजर्स कुछ खास फीचर्स को एक्सेस कर पाएंगे। यह बिल्कुल एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के पेड सब्सक्रिप्शन की तरह है। सभी ऐप्स के प्लस वर्जन में यूजर्स को कई कस्टमाइज करने योग्य फीचर्स मिलेंगे, जो आम यूजर्स को नहीं मिलते हैं। इसे देखकर लग रहा है कि मेटा अब रेवेन्यू के लिए सिर्फ विज्ञापनों पर ही निर्भर नहीं है।

    इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप प्लस
    बुधवार को मेटा ने घोषणा की कि वह अब सभी लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप्स इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और फेसबुक के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान दुनिया भर में शुरू कर रहा है। वहीं, बिजनेस, क्रिएटर्स और Meta AI यूजर्स के लिए नए सब्सक्रिप्शन की टेस्टिंग शुरू कर दी गई है।

    आने वाले हैं और भी सब्सक्रिप्शन
    इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और फेसबुक प्लस के अलावा मेटा और भी सब्सक्रिप्शन लाने की तैयारी में है, जिनकी टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इसमें क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए प्रोफेशनल प्लान और सभी यूजर्स के लिए AI फोकस्ड प्लान शामिल हैं। इन नई टेस्टिंग को Meta One के नाम दिया जाएगा।

    फेसबुक-इंस्टाग्राम के खास फीचर्स

    स्टोरीज के लिए खास फीचर्स-

        इंस्टाग्राम प्लस यूजर्स को यह देखने की सुविधा मिलेगी कि कुल कितने लोगों ने उनकी स्टोरी को दोबारा देखा है।
        साथ ही, स्टोरीज के लिए "Close Friends" ऑप्शन के साथ-साथ अनलिमिटेड ऑडियंस लिस्ट बनाने की सुविधा भी मिलेगी।
        यूजर्स हफ्ते में एक बार किसी स्टोरी को ज्यादा व्यूज पाने के लिए स्पॉट लाइट भी कर पाएंगे।
        स्टोरी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक रख पाएंगे। बिना व्यूवर के तौर पर किसी भी स्टोरी का प्रीव्यू देख पाएंगे।
        अपनी Story Viewer लिस्ट में यह सर्च कर पाएंगे कि कौन देख रहा है।

    अन्य सुविधाएं-

        इसके अलावा, यूजर्स सीधे अपनी प्रोफाइल पर पोस्ट भी कर पाएंगे और बिना अपने फॉलोअर्स की फीड पर दिखे उसे हाईलाइट कर पाएंगे।
        इसके अलावा भी कई फीचर्स हैं। जैसे स्टोरीज के लिए सुपर हार्ट एनिमेटेड रिएक्शन्स, कस्टम ऐप आइकन्स, प्रोफाइल बायो के लिए कस्टमाइजेबल फॉन्ट्स और आपकी प्रोफाइल के लिए एक्स्ट्रा पिन्स का एक्सेस।

    व्हाट्सऐप प्लस में मिलते हैं कुछ अन्य फीचर्स
    फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लस एक जैसे ही फीचर्स ऑफर करता है।हालांकि, WhatsApp Plus कुछ दूसरे फीचर्स भी देता है। जैसे ऐप थीम्स, कस्टम रिंगटोन्स, एक्स्ट्रा पिन चैट्स, लिस्ट कस्टमाइजेशन, प्रीमियम स्टिकर्स और भी बहुत कुछ।

    Instagram Plus और Facebook Plus की कीमत
    कंपनी के अनुसार Instagram Plus और Facebook Plus सब्सक्रिप्शन की कीमत 3.99 डॉलर यानी करीब 384.41 रुपये प्रति माह रखी गई है। वहीं WhatsApp Plus प्लान 2.99 डॉलर यानी करीब 288.07 रुपये प्रति माह में उपलब्ध होगा। Meta की हेड ऑफ प्रोडक्ट नाओमी ग्लाइट ने कहा कि इन सब्सक्रिप्शन प्लान्स के जरिए यूजर्स को एप्स में एक्सप्रेशन और कनेक्टिविटी के नए तरीके मिलेंगे और आगे भी कई मजेदार फीचर्स जोड़े जाएंगे।

    Instagram Plus में मिलेंगे ये खास फीचर्स
    Instagram Plus यूजर्स को कई नए फीचर्स देगा। इसमें यूजर्स देख सकेंगे कि उनकी स्टोरी कितनी बार दोबारा देखी गई। इसके अलावा Close Friends से आगे अनलिमिटेड ऑडियंस लिस्ट बनाने की सुविधा भी मिलेगी। यूजर्स हर हफ्ते एक स्टोरी को अतिरिक्त रीच के लिए Spotlight कर सकेंगे।

    इस प्लान में स्टोरी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक रखने का विकल्प मिलेगा। साथ ही यूजर्स बिना नाम दिखाए किसी की स्टोरी प्रीव्यू कर सकेंगे। इसके अलावा Story Viewer List सर्च, प्रोफाइल हाइलाइट्स में डायरेक्ट पोस्ट, Super Heart रिएक्शन, कस्टम एप आइकन, कस्टम बायो फॉन्ट और अतिरिक्त प्रोफाइल पिन जैसे फीचर्स भी दिए जाएंगे।

    Facebook Plus और WhatsApp Plus में क्या खास?
    Facebook Plus में भी Instagram Plus जैसे प्रोफाइल कस्टमाइजेशन फीचर्स मिलेंगे। इसके साथ Audience Insights, Engagement Tools और सोशल एक्सप्रेशन फीचर्स भी शामिल होंगे। वहीं WhatsApp Plus यूजर्स को एप थीम्स, कस्टम रिंगटोन्स, ज्यादा पिन्ड चैट्स, लिस्ट कस्टमाइजेशन, प्रीमियम स्टिकर्स और बेहतर मैसेजिंग पर्सनलाइजेशन फीचर्स दिए जाएंगे।

    Meta AI के लिए भी आएंगे प्रीमियम प्लान
    रिपोर्ट के मुताबिक Meta अब AI आधारित प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान्स Meta One Plus और Meta One Premium की भी टेस्टिंग कर रहा है। इनकी कीमत क्रमशः 7.99 डॉलर और 19.99 डॉलर प्रति माह होगी। हालांकि सामान्य यूजर्स के लिए Meta AI फ्री रहेगा, लेकिन प्रीमियम यूजर्स को ज्यादा कंप्यूट क्षमता, एडवांस रीजनिंग और इमेज व वीडियो जनरेशन फीचर्स का विस्तार मिलेगा।

    कंपनी आने वाले हफ्तों में अपने AI ग्लासेस इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए भी अतिरिक्त फायदे जोड़ने की तैयारी कर रही है। Meta AI प्लान्स की टेस्टिंग अगले हफ्ते सिंगापुर, ग्वाटेमाला और बोलिविया जैसे बाजारों में शुरू होगी।

    क्रिएटर्स और बिजनेस यूजर्स को भी मिलेगा फायदा
    Meta बिजनेस और क्रिएटर्स के लिए भी नए प्लान्स पर काम कर रही है। Meta One Essential प्लान की कीमत 14.99 डॉलर प्रति माह होगी, जिसमें Verified Badge, Impersonation Protection और Enhanced Linksheets जैसे फीचर्स मिलेंगे।

    वहीं Meta One Advanced प्लान 49.99 डॉलर प्रति माह में आएगा। इसमें Facebook Feed और Search में ज्यादा Visibility, एडवांस Analytics Tools, Audience Insights, Scheduling Tools, बिना पासवर्ड शेयर किए Moderator Access और Original Content के दोबारा इस्तेमाल पर अलर्ट जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।

    ​मेटा की प्रोडक्ट हेड Naomi Gleit ने की घोषणा

    Meta AI सब्सक्रिप्शन प्लान
        इस लॉन्च के साथ ही Meta का कहना है कि वह और भी ज्यादा सब्सक्रिप्शन प्लान की टेस्टिंग शुरू करेगा।
        Meta AI यूजर्स के लिए वह दो प्लान टेस्ट करेगा। Meta One Plus की कीमत 7.99 डॉलर प्रति महीना और Meta One Premium की कीमत 19.99 डॉलर प्रति महीना होगी। इन दोनों में फीचर्स तो एक जैसे ही होंगे, लेकिन प्रीमियम प्लान में ज्यादा कंप्यूट वाली क्वेरीज के लिए ज्यादा कैपेसिटी मिलेगी।

    सब्सक्रिप्शन की कीमत
        Instagram Plus और फेसबुक प्लस के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत एक ही है।
        यूजर्स को हर महीने 3.99-3.99 डॉलर प्रति महीना (लगभग 382 रुपये) देने होंगे।
        वहीं, WhatsApp Plus की कीमत 2.99 डॉलर प्रति महीना (287 रुपये) है।
        सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स को प्रोफाइल कस्टमाइजेशन, सुपर रिएक्शन्स और स्टोरी इनसाइट्स जैसी सुविधाओं का एक्सेस मिलेगा।

  • गर्मी से राहत कब? केरल में लेट पहुंचा मॉनसून, UP में बारिश के संकेत शुरू

    गर्मी से राहत कब? केरल में लेट पहुंचा मॉनसून, UP में बारिश के संकेत शुरू

    नईदिल्ली

    मॉनसून कहां है और कब तक दस्तक देगा। भीषण गर्मी से जूझ रहे उत्तर पश्चिम भारत के राज्यों में यही सवाल जारी है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले संभावनाएं जताई थीं कि 26 मई के आसपास मॉनसून केरल में एंट्री कर सकता है। हालांकि, अब दो दिन गुजर चुके है और बारिश भी जारी है, लेकिन मॉनसून का ऐलान अब तक विभाग ने नहीं किया है।

    विभाग ने यह भी कहा था कि राज्य में इसकी दस्तक में चार दिन की जल्दी या देरी हो सकती है। पिछले साल मॉनसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दी थी।

    क्यों मॉनसून को हुई देरी
    केरल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है, लेकिन संभावनाएं जताई जा रही थीं कि बारिश समय से पहले दस्तक दे सकती हैं। माना जा रहा है कि देरी की वजह मॉनसूनी हवाओं का कमजोर होना है। एक और वजह केरल तट के पास लगातार बारिश नहीं होना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।

    खबरें हैं कि मॉनसूनी हवाओं के कमजोर होने की वजह बंगाल की खाड़ी पर बन रहा चक्रवात है। इसके चलते मॉनसून में देरी हो रही है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि मॉनसून की रफ्तार में आई सुस्ती ज्यादा चिंता की बात नहीं है।

    अभी कहां हैं मॉनसून
    मौसम विभाग के गुरुवार को बताया है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने को लेकर स्थिति अनुकूल बनी हुईं हैं। अगले 2-3 दिनों में मॉनसून अरब सागर, लक्षद्वीप, बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ सकता है।

    भारत में 70 फीसदी से अधिक सालाना बारिश मॉनसून के महीनों में होती है। इसके मद्देनजर इस मौसम को कृषि, पेयजल आपूर्ति, पनबिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन और भूजल पुनर्भरण के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

    दिल्ली कब तक पहुंचेगा मॉनसून
    संभावनाएं जताई जा रही हैं कि मॉनसून 1 जून तक केरल और तमिलनाडु पहुंच सकता है। इन राज्यों में मॉनसून के पहुंचने की सामान्य तारीख है। वहीं, भीषण गर्मी का सामना कर रही राजधानी दिल्ली को मॉनसून की बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। यहां मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 30 जून है। इसके अलावा राजस्थान के कुछ हिस्सों में 25 जून, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 15 जून है।

    यहां हो सकती है बारिश
    IMD का पूर्वानुमान है कि पश्चि
    म और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 से 31 मई तक बारिश के आसार हैं। वहीं, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड में 28 से 30 मई, हिमाचल प्रदेश में 28 और 29 मई को बारिश हो सकती है। बिहार में 28, 29 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 28 मई, ओडिशा में 29 और 30 को बारिश के आसार हैं।

  • बंदर अब्बास से भड़का ईरान, IRGC ने अमेरिकी ठिकानों पर बरसाए हमले

    बंदर अब्बास से भड़का ईरान, IRGC ने अमेरिकी ठिकानों पर बरसाए हमले

       तेहरान
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता लगातार विफल होती नजर आ रही है. इसी बीच ईरानी की IRGC ने दावा किया है कि उसने बंदर अब्बास पोर्ट के पास हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए हमला किया है. उधर, कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह अपने देश की ओर दागी गई मिलाइलों और ड्रोन्स को रोक रहे हैं।

    तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने स्थानीय समयानुसार सुबह 4:50 बजे बंदर अब्बास पोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के बाद एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है. हालांकि,  आईआरजीसी ने ये नहीं बताया कि उसने अमेरिका के किस बेस को निशाना बनाया है।

    IRGC ने अमेरिका को दी चेतावनी

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को सीधे तौर पर बेहद सख्त चेतावनी जारी की है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि इस तरह के हमलों को दोबारा दोहराया गया तो ईरान की तरफ से इससे भी ज्यादा निर्णायक और घातक प्रतिक्रिया दी जाएगी और इसके गंभीर परिणामों के लिए केवल हमलावर जिम्मेदार होगा।

    इस भीषण गोलाबारी का असर अब पड़ोसी देशों पर भी साफ दिखने लगा है. क्षेत्र में बढ़े अचानक खतरे को देखते हुए कुवैत ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपनी एयरस्पेस की ओर दागे जा रहीं मिसाइलों और यूएवी (UAVs) को लगातार इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर रहे हैं।

    बंदर अब्बास पोर्ट के धमाके
    इससे पहले बुधवार रात को अमेरिका ने ईरान के अंदर एक और बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया. रिपोर्ट के अनुसार, लगभग रात 1:30 बजे (स्थानीय समय) ईरान के बंदर अब्बास शहर के पूर्वी हिस्से से तीन धमाकों की आवाजें सुनाई दीं।

    एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सेना ने रात भर ईरान में नए हमले किए, जिसमें एक ऐसे सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया, जिसके बारे में अधिकारियों का मानना ​​था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और कमर्शियल समुद्री आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर रहा था. यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है।

  • ट्विशा केस: केस डायरी देखे बिना मिली थी राहत, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला; गिरिबाला पर गिरफ्तारी का खतरा

    ट्विशा केस: केस डायरी देखे बिना मिली थी राहत, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला; गिरिबाला पर गिरफ्तारी का खतरा

    भोपाल

     भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने बुधवार को कई घंटों की बहस के बाद देर रात आदेश जारी किया। जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। इसी के साथ अब CBI पूर्व जज गिरिबाला को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

    ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने हाईकोर्ट में ​अग्रिम जमानत निरस्त करने की याचिका लगाई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने भी पूर्व जज गिरिबाला पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। बुधवार को दिन में पौने तीन घंटे की बहस के बाद रिजर्व किया गया हाईकोर्ट का ऑर्डर गुरुवार को रात्रि एक बजे के बाद बाहर आया। दरअसल, कोर्ट ने बुधवार को शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ही साफ कर दिया था कि आदेश पारित करेंगे।

    हाईकोर्ट में बुधवार की सुनवाई में सीबीआई ने दोनों मामलों में पक्षकार बनाए जाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया था। मामला ट्विशा सिंह की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है।

    ट्विशा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई, 2026 को ट्विशा की मौत फांसी पर लटकी अवस्था में हुई। बाद में कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भोपाल ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे चुनौती दी गई।

    सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप
    हाई कोर्ट ने कहा कि वाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

    न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 15 मई, 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए आदेश दिया। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।

    पूर्व जज को गिरफ्तार कर सकेगी CBI
    हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा सकेगा। मामले की जांच कर रही CBI उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

    12 मई की रात हुई थी ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत

    12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है।

    24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    आरोपियों ने ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की
    हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। आरोपी ने मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की, जो जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है। मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को पक्षकार बनाना जरूरी है।

    चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं
    कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। इसी बिंदु को अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना और कहा कि इन परिस्थितियों में गहन जांच की आवश्यकता है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाए गए हैं कि सास और पति उस पर गर्भपात का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं।

    कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था।

    व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं आधारों पर अग्रिम जमानत दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और सबूतों की गहराई से जांच करने पर अलग तस्वीर सामने आती है।

    हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर क्या-क्या कहा ?

        जमानत देना मामले की गंभीरता के हिसाब से सही नहीं था।
        ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।
        आरोपी पक्ष चोटों का सही जवाब नहीं दे पाया।
        आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया।
        मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश।
        पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा भी चोटें मिलीं।
        ये चोटें सिर्फ शव उतारने से नहीं हो सकतीं।
        गवाहों ने गर्भपात का दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।
        अग्रिम जमानत केवल खास हालात में दी जानी चाहिए।

    आखिर में क्या बोला हाईकोर्ट?
    अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी। इसी के साथ कोर्ट ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

    CBI और राज्य सरकार की दलीलें
        गर्भावस्था के बाद पति और सास ने ट्विशा पर चरित्र को लेकर शक किया।
        गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका उल्लेख व्हाट्सऐप चैट्स में है।
        ट्विशा ने अपने परिवार को लगातार मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दी थी।
        आरोपी प्रभावशाली हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
        मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ (custodial interrogation) जरूरी है।

    ट्विशा के पिता के वकील की दलीलें
        व्हाट्सऐप चैट्स में स्पष्ट है कि ट्विशा को मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी।
        पति गर्भ में पल रहे बच्चे पर शक करता था और गर्भपात का दबाव डालता था।
        ट्विशा ने कई बार मायके ले जाने की गुहार लगाई थी।
        परिवार को जांच और घटना की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
        ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।
        CCTV फुटेज से छेड़छाड़ और जल्दबाज़ी में जमानत देने का आरोप।

    आरोपी पक्ष की दलीलें
        ट्विशा ने आत्महत्या की थी।
        घटना के बाद उसे तुरंत एम्स ले जाया गया था।
        पुलिस ने उसी दिन मोबाइल और DVR जब्त कर लिए थे, इसलिए सहयोग न करने का आरोप गलत है।
        व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य आरोप पति पर हैं, सास पर नहीं।
        अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए असाधारण परिस्थितियां आवश्यक हैं, जो इस मामले में नहीं हैं।

    आदेश के बाद मामले में क्या हो सकता है?

    1. अग्रिम जमानत खत्म मानी जाएगी
    हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। इसका मतलब है कि अब आरोपी गिरिबाला सिंह को गिरफ्तारी से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं रहेगी।

    2. CBI अब तेजी से आगे की कार्रवाई कर सकती है
    चूंकि मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है, इसलिए एजेंसी आगे कई अहम कदम उठा सकती है। इसमें आरोपी से पूछताछ, हिरासत में पूछताछ, मोबाइल चैट्स और डिजिटल सबूतों की जांच, CCTV फुटेज की पड़ताल, पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का गहराई से विश्लेषण शामिल हो सकता है।

    3. गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है
    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मामला गंभीर है और जांच अभी शुरुआती चरण में है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पक्ष जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसे में CBI आरोपी की गिरफ्तारी कर सकती है।

    4. सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है
    आरोपी पक्ष के पास अब भी सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रहेगा। वे वहां स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल कर सकते हैं। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने और दोबारा जमानत देने की मांग भी कर सकते हैं।

  • भोपाल में मेट्रो विस्तार के लिए बड़ा एक्शन, दुकानों और मकानों को नोटिस जारी

    भोपाल में मेट्रो विस्तार के लिए बड़ा एक्शन, दुकानों और मकानों को नोटिस जारी

    भोपाल
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन की ब्लू लाइन के लिए अब न्यू मार्केट से लगे रोशनपुरा, मालवीय नगर में दुकानों की बड़ी तोड़फोड़ होगी। यहां दरवेश बर्तन भंडार की लाइन और इसके आसपास के क्षेत्र की दुकानों को नोटिस देकर आगाह किया गया है। अगले दो माह में यहां काम शुरू होगा। मेट्रो ट्रेन के इन नोटिस से पूरे क्षेत्र में लोगों में डर है। ये मेट्रो ट्रेन अफसरों से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। यहां सरकारी जमीन है और प्रोजेक्ट की डिजाइन में बदलाव कर दुकानों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

    न्यू मार्केट और मालवीय नगर में स्टेशन की डिजाइन में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। छोटी बड़ी 15 दुकानें इससे प्रभावित होने की स्थिति है। रोशनपुरा मेट्रो स्टेशन कांग्रेस के जवाहर भवन के पास है। इसकी डिजाइन को लेकर कई आपत्तियां आईं। कुछ बड़े कॉम्प्लेक्स इसमें जा रहे थे, जिन्हें डिजाइन बदलकर बचाया गया। मालवीय नगर की ओर बड़ी संख्या में स्लम है।

    जहांगीराबाद बाजार और आवासीय क्षेत्र भी चिंता में
    मेट्रो की तोड़फोड़ से सिर्फ न्यू मार्केट मालवीय नगर ही नहीं, जहांगीराबाद बाजार से लेकर आवासीय क्षेत्र तक चिंता में है। यहां 600 मीटर लंबा हिस्सा मेट्रो के लिए तोड़ा जाएगा। इसमें कई बड़े व्यवसायिक भवन शामिल है। दुकानों के अंदर तक निशान लगाए हुए हैं। 20 मकान भी है, जिन्हें तोड़ा जाएगा। इसके लिए लोगों ने कलेक्ट्रेट से लेकर कोर्ट तक याचिका लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

    रेलवे लाइन के किनारे से हटाई गईं 85 झुग्गिया
    जिला प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में छोला रेलवे लाइन के पास 85 झुग्गियों को हटाया गया। इन्हें हटाने के लिए रेलवे ने प्रक्रिया की थी। जिस जगह झुग्गियां बना ली थी वह रेलवे की जमीन है। यहां हाल में ही तेजी से जमीन पर कब्जा करने के लिए झुग्गियां बनाई जा रही थी। रेलवे ने जिला प्रशासन व नगर निगम की मदद से इन झुग्गियों को हटवाया। इस दौरान पुलिस बल उपस्थित रहा।

    रेलवे के लिए खतरा थी झुग्गियां
    गोविंदपुरा एसडीएम भुवन गुप्ता के अनुसार ये अभी नई झुग्गियां बनी थी। रेलवे की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। इसके साथ ही रेलवे यहां अपनी जमीन को संरक्षित करने फेंसिंग का काम शुरू करने वाला है। मौके पर प्रशासन व पुलिस बल सुबह ही पहुंच गया था। इन झुग्गियों में से अधिकतर में छोटी दुकानें संचालित की जा रही थी। ये लोग पास की ही कॉलोनी के थे। इन्हें हटाया गया। जमीन खाली कराई, अब रेलवे यहां फेंङ्क्षसग कर जमीन को संरक्षित करेगा।

     

  • ईरान संकट से हिली Air India की रणनीति, यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर

    ईरान संकट से हिली Air India की रणनीति, यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर

     नई दिल्ली

    अमेरिका-ईरान युद्ध (US Vs Iran War) के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने से गहराए तेल संकट का बुरा असर तमाम देशों में पड़ा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है और देश में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक की किल्लत देखने को मिली. हालांकि, मोदी सरकार ने तत्काल उठाए गए बड़े कदमों के जरिए इस संकट को कम करने का प्रयास किया।  

    ईरान युद्ध और ईंधन की ऊंची कीमत का असर भारतीय एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी एअर इंडिया (Air India) पर भी पड़ा है और उसे बड़ा फैसला लेना पड़ा है. इसके तहत एयरलाइंस अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या में 22 फीसदी कटौती करेगी।

    जून-जुलाई में पड़ेगा असर
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम में आए उछाल ने जेट फ्यूल महंगा किया है और इसने एयरलाइन कंपनियों का गणित बिगाड़ा है. इसकी वजह से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसे देखते हुए एअर इंडिया ने अचानक जून और जुलाई के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती करने का फैसला किया है।

    Air India ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जबकि वेस्ट एशिया टेंशन के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रुकावट जारी है और एविएशन सेक्टर को लागत में भारी बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा है. जून-जुलाई के लिए कंपनी ने फैसला ले लिया है, जबकि अगस्त के लिए अभी बाकी है।

    ईंधन की आसमान छूती कीमतें और वित्तीय दबाव
    एयर इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, ईरान संघर्ष से पहले विमान ईंधन की कीमत लगभग ₹80,000 प्रति किलोलीटर थी, जो अब बढ़कर ₹1 लाख प्रति किलोलीटर से अधिक हो चुकी है. वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹26,800 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है. ऐसे में इन रूटों पर उड़ानों का संचालन जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था।

    उड़ानों के फेरों में युक्तिसंगत कमी
    एयर इंडिया वर्तमान में प्रति सप्ताह कुल 4,400 उड़ानों का संचालन करता है, जिसमें लगभग 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं. 22 प्रतिशत की इस अस्थायी कटौती से प्रति सप्ताह लगभग 720 घरेलू उड़ानें प्रभावित होंगी. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि चुनिंदा घरेलू मार्गों पर केवल उड़ानों के फेरे कम किए जा रहे हैं।

    कनेक्टिंग फ्लाइट्स की मांग में गिरावट
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती का सीधा असर घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा है. विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्रों के लिए कनेक्टिंग घरेलू उड़ानों की मांग में भारी कमी आई है. मांग का यह असंतुलन भी उड़ानों को युक्तिसंगत बनाने का एक मुख्य कारण बना है।

    प्रभावित यात्रियों के लिए राहत के उपाय
    विमानन कंपनी ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों को पूर्ववत कर दिया जाएगा. इस दौरान प्रभावित होने वाले यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

        वैकल्पिक उड़ान: यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट दी जाएगी.
        तारीख में मुफ्त बदलाव: यात्रा की तिथि बदलने पर कोई पेनल्टी या चेंज फीस नहीं ली जाएगी.
        पूर्ण रिफंड: विकल्प पसंद न आने पर यात्री अपनी टिकट का पूरा पैसा वापस ले सकते हैं.

    एअर इंडिया ने दिया ये बयान
    एअर इंडिया की ओर से पुष्टि करते हुए एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा है कि जेट फ्यूल प्राइस में उछाल के परिचालन पर दबाव जारी है, इसे देखते हुए उड़ानों में कटौती का कदम उठाना पड़ रहा है, लेकिन स्थितियों के स्थिर होते ही उड़ानों की संख्या बहाल की जा सकती है. इससे घरेलू उड़ानों में करीब 10% तक कटौती हो सकती है।

    न सिर्फ एअर इंडिया, बल्कि रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo भी जून और अगस्त के बीच घरेलू उड़ानों में 7% तक कटौती कर सकती है. हालांकि, इंडिगो ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।  

    ऊंचे रह सकते हैं टिकट के दाम
    Iran War के चलते बीते कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और ये एयरलाइंस के सबसे बड़े खर्चों में से एक है, जो आमतौर पर परिचालन लागत का लगभग एक चौथाई होता है।

    इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर खर्च में इजाफा हुआ है और वैश्विक स्तर पर एयरलाइनों को टिकटों की कीमतें बढ़ाने, घाटे वाले रूट्स को बंद करने और उड़ानों की संख्या कम करने के लिए मजबूर हो पड़ा है।

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Jet Fuel की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू हवाई किराया भी ऊंचा रह सकता है. इसके पीछे वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे एयरलाइंस भी प्रभावित होती हैं।

    मौसमी मंदी और भविष्य की रणनीति
    स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद आमतौर पर हवाई यात्रा में कमी आती है। इसे मौसमी मंदी कहा जाता है। इस अवधि में यात्रियों की संख्या घट जाती है, जिससे एयरलाइंस को नुकसान होता है। क्षमता में कटौती करके एयरलाइंस अपनी लागत कम करना चाहती हैं। यह कदम उन्हें वित्तीय दबाव से निपटने में मदद करेगा। एअर इंडिया और इंडिगो दोनों ही इस अवधि में अपनी सेवाओं को अनुकूलित कर रही हैं।

  • ख्वाजा आसिफ का सनसनीखेज बयान: ‘पाकिस्तानी बच्चे गलत इतिहास पढ़ रहे’, पूर्वजों को बताया हिंदू

    ख्वाजा आसिफ का सनसनीखेज बयान: ‘पाकिस्तानी बच्चे गलत इतिहास पढ़ रहे’, पूर्वजों को बताया हिंदू

    इस्लामाबाद

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पाकिस्तान में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान के बच्चों को "गलत इतिहास" पढ़ाया जा रहा है और देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं।

    एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं. पाकिस्तान के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे." उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए।

    ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया. उन्होंने कहा, "हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पूर्वज हिंदू थे. क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?" आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की।

    पाकिस्तानी समाज की सोच बदली गई!
    ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया. उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे. आज पाकिस्तान में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे।

    ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी।

    पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा- आसिफ
    इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था, "मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो." उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा।

    पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है. आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली. अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता "समस्याओं से भरी" हो सकती है।

  • Gold Silver Price Today: चांदी में भारी गिरावट से बाजार में हलचल, इतना सस्ता हुआ 10 ग्राम सोना

    Gold Silver Price Today: चांदी में भारी गिरावट से बाजार में हलचल, इतना सस्ता हुआ 10 ग्राम सोना

    नई दिल्ली
    सोना-चांदी की कीमत (Gold-Silver Price Fall) में तीसरे कारोबारी दिन एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. मंगलवार को रेड जोन में बंद होने के बाद बुधवार को MCX पर वायदा कारोबार की ओपनिंग के कुछ देर बाद अचानक चांदी के दाम में बड़ी गिरावट आ गई और एक झटके में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई. तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी फिसला है और 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट 600 रुपये से ज्यादा घट गया।

    सप्ताह के तीन दिनों में ही अब तक चांदी 5600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हुई है और इस कीमती धातु का भाव 2,71,846 रुपये से गिरकर 2,66,200 रुपये पर आ गया है. वहीं सोना इस ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई लेवल से 46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है।

    MCX पर सोना-चांदी में गिरावट
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को 3 जुलाई वाली चांदी की वायदा कीमत खुलते ही उछली और 2,72,628 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक इस कीमती धातु के दाम में बड़ी गिरावट शुरू हो गई और देखते ही देखते ये अपने पिछले बंद 2,70,628 रुपये से कम होकर झटके में 2,66,200 रुपये पर आ गया. यानी 1 Kg Silver Price 4428 रुपये कम हो गया।

    चांदी की कीमत में इस सप्ताह सिर्फ 3 कारोबारी दिनों में ही अब तक 5646 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. वहीं जनवरी के अपने हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अब चांदी 1,91,128 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है।

    अब दूसरी कीमती धातु सोना की बात करें, तो एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान ये पीली धातु भी फिसली है. अपने पिछले बंद 1,57,616 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम होकर बुधवार को मार्केट ओपन होने के कुछ देर बाद गिरते हुए 1,56,953 रुपये पर आ गया. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाले वायदा सोना (10 Gram 24 Karat Gold Rate) अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से अब 46,031 रुपये कम हो चुका है।    

    दिल्ली में क्या है Gold-Silver का हाल?
    एमसीएक्स के बाद अब घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमत में आए बदलाव पर बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट पिछले बंद 1,57,611 रुपये से गिरकर 1,57,040 रुपये पर आ गया. वहीं चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये मंगलवार के बंद 2,66,213 रुपये प्रति किलो से 4503 रुपये सस्ती होकर 2,61,710 रुपये प्रति किलो पर खुली।

    सोने-चांदी में गिरावट की वजह
    सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे के कारणों को देखें, तो एक बड़ी वजह जियो-पॉलिटिकल तनाव है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बन पा रही है, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, होर्मुज पर चिंता और बढ़ा रहा है. इस बीच टेंशन में इजाफे से डॉलर में तेजी आ रही है और इससे सोना-चांदी पर दबाव बढ़ा है. निवेशकों के मुनाफावसूली करने की वजह से गोल्‍ड-सिल्‍वर के दाम में गिरावट दिखी है।