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  • पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, कहीं बढ़े तो कहीं स्थिर; जानिए आपके शहर में क्या है ताजा रेट

    पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, कहीं बढ़े तो कहीं स्थिर; जानिए आपके शहर में क्या है ताजा रेट

    नई दिल्ली

     पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों का ऐलान आज सुबह 6 बजे हो गया है। राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के रेट में आज फिर कोई बढ़ोतरी नहीं की है। आखिरी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के द्वारा पिछले हफ्ते शनिवार को इजाफा किया गया था। इसके बाद से ही दाम स्थिर बने हुए हैं। इस बीच इंटरनेशनल मार्केट से अच्छी खबर आई है। कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, युद्ध के पूर्व स्तर से यह अब भी काफी अधिक है।

    सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल कहां? 
    26 मई 2026 के रेट के अनुसार हैदराबाद में पेट्रोल सबसे अधिक रेट पर बिक रहा है। इस शहर में लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 115.69 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, डीजल के लिए तिरुअनंतपुरम् में लोगों को 115.49 रुपये प्रति लीटर देने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में पेट्रोल का रेट 98.10 रुपये प्रति लीटर है। जोकि दिल्ली सहित अन्य शहरों की तुलना में काफी कम है। बता दें, भुवनेश्वर में डीजल का रेट 100.92 रुपये प्रति लीटर है।

    देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल का क्या है रेट? 

    दिल्ली – 102.12 रुपये

    मुंबई – 111.18 रुपये

    कोलकाता – 113.47 रुपये

    चेन्नई – 107.77 रुपये

    गुरुग्राम – 102.77 रुपये

    नोएडा – 102.12 रुपये

    बेंगलुरू – 110.93 रुपये

    भुवनेश्वर – 109.92 रुपये

    चंडीगढ़ – 98.10 रुपये

    हैदराबाद – 115.69 रुपये

    जयपुर – 112.66 रुपये

    लखनऊ – 102.05 रुपये

    पटना – 113.35 रुपये

    तिरुअनंतपुरम् – 115.49 रुपये

    डीजल का क्या चल रहा है रेट? 

    नई दिल्ली – 95.20 रुपये

    मुंबई – 97.83 रुपये

    कोलकाता – 99.82 रुपये

    चेन्नई – 99.55 रुपये

    गुरुग्राम – 95.444 रुपये

    नोएडा – 95.56 रुपये

    बेंगलुरू – 98.80 रुपये

    भुवनेश्वर – 100.92 रुपये

    चंडीगढ़ – 86.09 रुपये

    हैदराबाद – 103.82 रुपये

    जयपुर – 97.79 रुपये

    लखनऊ – 95.55 रुपये

    पटना – 99.36 रुपये

    तिरुअनंतपुरम् – 104.40 रुपये

    4 बार हो सका इजाफा 
    मई के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार इजाफा हो गया है। इस दौरान पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 7.5 रुपये बढ़ गया है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद से तेल कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का काफी दबाव था। कीमतों में इजाफे से पहले तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा। जोकि अब 500 करोड़ रुपये से कम हो गया है।

    सरकार ने भी कीमतों को संभालने की बहुत कोशिश की। एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की गई। लेकिन जब इंटरनेशनल मार्केट में स्थिति सामान्य नहीं हुई उसके बाद तेल कंपनियों को यह फैसला लेना पड़ा।

  • पीस डील या नया संघर्ष? ट्रंप के बयान से मचा भूचाल, ईरान के इनकार के बाद बढ़ी जंग की आशंका

    पीस डील या नया संघर्ष? ट्रंप के बयान से मचा भूचाल, ईरान के इनकार के बाद बढ़ी जंग की आशंका

    तेहरान 
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओऱ से ईरान के साथ संभावित समझौते का दावा किए जाने के तुरंत बाद ईरानी मिलिट्री के जुड़ी मीडिया ने उनके बयानों को खारिज कर दिया. ट्रंप ने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए 'मजबूर' हो गया है, लेकिन ईरान ने इसे तथ्यों और झूठ का मिश्रण बताते हुए कहा कि यह तेहरान में विचाराधीन समझौते का सही ड्रॉफ्ट नहीं है। 

    'काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश में ट्रंप'
    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी समाचार एजेंसी फर्स न्यूज ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के बयान "काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश" हैं। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 'Commitment for Commitment' नाम से प्रस्तावित समझौता ईरान में अंतिम मंजूरी के चरण में है, हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. व्हाइट हाउस में वेस्ट एशिया क्राइसिस को लेकर एक अहम बैठक में शामिल होने से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगी पाबंदियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं और समुद्री यातायात सामान्य होने लगा है. यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 

    क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा?
    ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान
    तुरंत बचे हुए बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा. हमारी अभूतपूर्व नौसैनिक नाकेबंदी अब हटाई जा रही है और जलडमरूमध्य में फंसे जहाज अपने घर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि 'अगली सूचना तक कोई धनराशि का आदान-प्रदान नहीं होगा' और कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बन चुकी है। 

    'होर्मुज को फिर खोलने की प्रोसेस ईरान की शर्तों पर'
    हालांकि ईरानी मीडिया ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया ईरान की शर्तों के अनुसार होगी. इसमें जहाजों की निगरानी, निरीक्षण, समुद्री सेवाएं और सुरक्षा संबंधी उपाय शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बिना किसी शुल्क या शर्त के जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने का ट्रंप का दावा गलत है और मसौदा समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। 

    फ्रीज संपत्तियों को जारी करना भी ड्राफ्ट का हिस्सा
    फर्स न्यूज ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अपने परमाणु सामग्री भंडार को नष्ट करेगा. रिपोर्ट के अनुसार, जानकार सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि समझौता ज्ञापन (MoU) में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के ड्राफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को तत्काल जारी करना है. तेहरान का कहना है कि जब तक यह राशि जारी नहीं की जाती, तब तक वह बातचीत के अगले स्टेप में आगे नहीं बढ़ेगा। 

    इसके अलावा लेबनान में पूर्ण युद्धविराम, जो हिज्बुल्लाह के रुख के अनुरूप हो, भी बातचीत का एक अहम मुद्दा बताया गया है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उसकी प्रमुख शर्तें पूरी होंगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किसी भी अंतिम समझौते का आधार ईरान की "रेड लाइन्स" और अमेरिका के प्रति उसका 'पूर्ण अविश्वास' रहेगा। 
     

  • पंजाब कैबिनेट मीटिंग पर सबकी नजर, कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

    पंजाब कैबिनेट मीटिंग पर सबकी नजर, कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

    चंडीगढ़ 

    पंजाब कैबिनेट की एक अहम बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में ग्रुप सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम खत्म करने पर फैसला लिया जा सकता है। इस मीटिंग में ग्रुप-सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम को खत्म करने के फैसले पर मुहर लग सकती है। इसके बाद सरकार अपने सभी विभागों में खुद ही भर्तियां करेगी।

    पंजाब की मौजूदा सरकार शुरू से ही ठेका मुलाजिमों को लेकर गंभीर रही है। 22 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शपथ ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद ही ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के 35 हजार कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव को इस संबंध में मसौदा (ड्राफ्ट बिल) तैयार करने के निर्देश दिए थे।

    फिर 5 सितंबर 2022 को पंजाब कैबिनेट ने संविदा शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी कल्याणकारी नीति को औपचारिक मंजूरी दी। वहीं, 21 फरवरी 2023 को पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में 14,417 संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से नियमित करने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई।

    पंजाब सरकार ने अपने 4 वर्ष के कार्यकाल में कुल 65,264 युवाओं को पक्की सरकारी नौकरियां देने का दावा किया है। सरकार का दावा है कि उसके कार्यकाल के दौरान औसतन 45 युवाओं को प्रतिदिन सरकारी नौकरी मिली है। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर राज्य में करीब साढ़े 5 लाख निजी रोजगार के अवसर भी सृजित किए गए हैं।

  • वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर

    वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं और पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।

    कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव

    वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं।

    प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं।

    अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।

    संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल

    प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

    इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा

    भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है।

    हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ

    वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है।

    इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है।

    सम्मान और सामाजिक स्वीकृति

    वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है।

    नवाचार और सुधार

    राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है।

    यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है।

    मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम—इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है।

    यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

     

  • कर्नाटक में कांग्रेस का बड़ा प्लान! 4 डिप्टी CM और सिद्धारमैया परिवार को बड़ी भूमिका मिलने के आसार

    कर्नाटक में कांग्रेस का बड़ा प्लान! 4 डिप्टी CM और सिद्धारमैया परिवार को बड़ी भूमिका मिलने के आसार

    बेंगलुरु 
    मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलफेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनने जा रही नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आज दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा करेंगे। जिसमें चार डिप्टी सीएम को लेकर भी मंथन होगा।

    पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दरमैया, डीके शिवकुमार और AICC के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक के दौरान राज्यसभा उम्मीदवारों, MLC उम्मीदवारों और मंत्रिमंडल में फेरबदल पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा।

    चार डिप्टी सीएम बनाने की संभावना
    सूत्रों ने आगे बताया कि सिद्दरमैया के मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना कम है। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

    सिद्दरमैया के बेटे को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
    सूत्रों के अनुसार, सिद्दरमैया के बेटे और विधान परिषद के सदस्य यतींद्र को डीके शिवकुमार की कैबिनेट में शामिल किए जाने की पूरी उम्मीद है। उन्हें कोई अहम मंत्रालय मिलने की संभावना है, ताकि सिद्दरमैया की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जा सके।

    कांग्रेस विधायक दल की बैठक की तारीख आज तय की जाएगी जो कि अब महज एक औपचारिकता ही लगती है। इसके बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी।

    कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर होने हैं चुनाव
    कर्नाटक में राज्यसभा की जिन चार सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से कांग्रेस दो सीटें आसानी से जीतती दिख रही है। तीसरी सीट पर भी उसे बढ़त हासिल है, जिसके लिए उसे बस कुछ और वोटों की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि AICC के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला तीन में से दो राज्यसभा सीटों के लिए नामों का पैनल पेश करेंगे, और खड़गे को राज्यसभा में दोबारा मौका दिया जाएगा।

    इसके अलावा, राज्य में विधान परिषद (MLC) की सात सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए भी संभावित नामों का एक पैनल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपा जाएगा।

    राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बीते गुरुवार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने गुरुवार दोपहर तीन बजे लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन राज्यपाल की अनुपस्थिति के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था। आज राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सिद्दरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

    राज्यपाला ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए लिखा, "मैं थावरचंद गहलोत भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।" 

  • योगी सरकार किसानों के लिए पूरी तरह समर्पित, सूर्य प्रताप शाही का बड़ा बयान

    योगी सरकार किसानों के लिए पूरी तरह समर्पित, सूर्य प्रताप शाही का बड़ा बयान

    किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही योगी सरकार: सूर्य प्रताप शाही

    कृषि मंत्री शाही ने कहा कि सपा सरकार की नीतियों से किसान हुए थे निराश, योगी सरकार ने दिया सम्मान और राहत

    कृषि मंत्री बोले, योगी सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों का किया कृषि ऋण माफ

    लखनऊ
     योगी सरकार में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों की गलत नीतियों के कारण प्रदेश का किसान निराश, हताश और आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया था। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और ऐतिहासिक फैसलों के जरिए किसानों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया।

    सीएम योगी ने पहली कैबिनेट में लिया कृषि ऋण माफ करने का ऐतिहासिक फैसला

    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पहली कैबिनेट बैठक में ही 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक सहायता का नहीं था, बल्कि किसानों को सम्मान और आत्मविश्वास लौटाने का माध्यम था। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान, समर्थन मूल्य पर खरीद और उर्वरकों की उपलब्धता जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, जिसके कारण किसान आर्थिक रूप से टूट चुके थे।

    योगी सरकार ने किया गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान

    मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि जब योगी सरकार सत्ता में आई, तब गन्ना किसानों का लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का बकाया भुगतान लंबित था। योगी सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर किसानों का भुगतान सुनिश्चित कराया। उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में गन्ना किसानों को रिकॉर्ड 3 लाख 27 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कराया, जिसमें पूर्ववर्ती सरकार के समय का बकाया भी शामिल है। उन्होंने कहा कि पहले गन्ना किसानों को 3 से 4 वर्षों तक भुगतान के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। दलालों, बिचौलियों और भ्रष्टाचार के कारण किसान परेशान रहते थे लेकिन योगी सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था लागू कर किसानों को समय पर भुगतान दिलाने का काम किया।

  • BJP में नई सियासी हलचल! पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा की नई भूमिका से कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज

    BJP में नई सियासी हलचल! पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा की नई भूमिका से कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज

    नई दिल्ली

    बीजेपी ने एक बार फिर चौंकाते हुए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्‍होत्रा को प्रदेश की कमान सौंप दी है. उन्‍हें द‍िल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया गया है. दिल्ली से पहले बीजेपी ने यूपी में भी भाजपा ने यही फॉर्मूला अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी. यानी अब दो-दो केंद्रीय मंत्री सीधे राज्यों में संगठन की कमान संभाल रहे हैं. इस बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है क‍ि क्या अब मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा. क्‍योंक‍ि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’के सिद्धांत को मानतीहै. ऐसे में मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने का सीधा मतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण कुर्सियां खाली होने वाली हैं। 

    हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. दिल्ली में अगले कुछ समय में होने वाले एमसीडी चुनाव को देखते हुए उनकी न‍ियुक्‍त‍ि काफी मायने रखती है. द‍िल्‍ली में बीजेपी को एक ऐसे जमीन से जुड़े पंजाबी और वैश्य चेहरे की जरूरत थी, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो. केंद्रीय मंत्री को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ने वाली. इसके साथ ही बीजेपी ने पंजाबी चेहरे को मौका देकर पंजाब में भी पैठ बनाने की कोश‍िश की है। 

    ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत
    बीजेपी की कार्यशैली दूसरी पार्टियों से थोड़ी अलग है. बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का नियम बेहद कड़ाई से लागू करती है. पार्टी का इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी नेता को संगठन से सरकार में या सरकार से संगठन में लाया गया है, उसने बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया है। 

    जेपी नड्डा का उदाहरण
    जब जेपी नड्डा को मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी से दूरी बनाई और पार्टी ने सांगठनिक निरंतरता के लिए नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. ठीक यही नियम अब राज्यों के स्तर पर भी लागू होने जा रहा है। 

    उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी
    कुछ समय पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था. तब भी यह सवाल उठा था कि क्या वे दोनों पद संभालेंगे? भाजपा की नीति के अनुसार, जब कोई मंत्री संगठन के पूर्णकालिक काम में उतरता है, तो उसे सरकारी जिम्मेदारी से मुक्त किया जाता है ताकि वह शत-प्रतिशत समय संगठन को दे सके। 

    अब हर्ष मल्‍होत्रा
    अब यही इतिहास दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा के साथ दोहराया जा रहा है. हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी दोनों केंद्रीय मंत्रालयों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. चूंकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संगठन का काम 24 घंटे और 365 दिन का होता है, इसलिए इन दोनों मंत्रियों का कैबिनेट से बाहर होना तय माना जा रहा है. यह कदम ही इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि मोदी कैबिनेट में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री होने वाली है। 

    जब-जब संगठन बदला, तब-तब बदली कैबिनेट
    यदि हम मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के इतिहास और उससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के दौर के इतिहास पर नजर डालें, तो काफी कुछ क्‍ल‍ियर हो जाता है। 

        साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब राजनाथ सिंह सरकार में गृहमंत्री बने. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ा और अमित शाह को संगठन की कमान मिली. इसके बाद संगठन का पूरी तरह कायाकल्प हुआ और कैबिनेट का भी विस्तार हुआ। 

        जुलाई 2021 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया था. उस समय रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे 12 बड़े मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई थी. इनमें से कई नेताओं को बाद में संगठन के काम में लगाया गया था, जबकि भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नए चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिली थी। 

        अटल जी के समय भी कुशाभाऊ ठाकरे और जन कृष्णमूर्ती जैसे संगठन के दिग्गजों को सरकार के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. प्रमोद महाजन और वेंकैया नायडू जैसे नेताओं को कई बार संगठन से सरकार और सरकार से संगठन में भेजा गया। 

     

  • छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ का बड़ा निवेश, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मिलेगी नई पहचान

    छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ का बड़ा निवेश, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मिलेगी नई पहचान

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने, निवेश अनुकूल नीतियों और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने निवास कार्यालय में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटक सुविधाओं के विकास एवं विस्तार तथा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश की प्रतिष्ठित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं और पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में लगातार निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और इसी क्रम में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।

    बैठक के दौरान इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष अपने निवेश प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और बताया कि कंपनी छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना पर कार्य कर रही है, जिसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निवेश से प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

    वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।

    बैठक में यह भी बताया गया कि  पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रास्ते व्यापक रूप से खुले हैं। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक अधोसंरचना, उच्चस्तरीय सुविधाओं और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के माध्यम से विकसित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है। प्रदेश की बेहतर मानसूनी परिस्थितियां, समृद्ध प्राकृतिक संपदा और निवेश अनुकूल नीति पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।

    बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने निवेश प्रोत्साहन नीति तथा उपलब्ध इंसेंटिव्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है अथवा 1000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, तो उसे ‘बी-स्पोक पॉलिसी’ के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन एवं विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

    बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, पर्यटन विभाग सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • ChatGPT Outage: अचानक बंद हुई सेवा से हड़कंप, भारत सहित कई देशों में यूजर्स परेशान

    ChatGPT Outage: अचानक बंद हुई सेवा से हड़कंप, भारत सहित कई देशों में यूजर्स परेशान

    नई दिल्ली

    OpenAI का AI चैटबॉट ChatGPT इस समय भारत समेत दुनिया भर में अचानक ठप हो गया। इस प्लेटफॉर्म के अचानक डाउन होने से हजारों यूजर्स प्रभावित हुए हैं। यूजर्स को लॉगिन, जवाब मिलने और पुरानी चैट को लोड करने में परेशानी आ रही, जिससे कई लोगों का काम बीच में ही रुक गया। ऑनलाइन आउटेज मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर अमेरिका में 4,300 से अधिक यूजर्स ने AI प्लेटफॉर्म के साथ समस्याओं की सूचना दी है। वहीं, भारत में अब तक लगभग 470 शिकायतें दर्ज की गई हैं। लगभग 85%, लोगों ChatGPT का यूज करने में परेशानी हो रही है, जबकि 6 प्रतिशत ने लॉगिन में समस्या बताई है। शेष 6 प्रतिशत ने वेबसाइट के साथ समस्याओं की जानकारी दी है।

    शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे से ही यूजर्स को चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दफ्तर का काम कर रहे प्रोफेशनल्स, कोडिंग सीख रहे इंजीनियर्स और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र जैसे ही अपने सवालों के जवाब के लिए चैटजीपीटी पर गए, उन्हें केवल एक खाली स्क्रीन या फिर एरर मैसेज दिखाई देने लगे। डाउनडिटेक्टर के अनुसार, भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद से सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलीं। चैटजीपीटी ठप होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और लोगों ने अपनी-अपनी दिक्कतों को लेकर शिकायतों की बाढ़ ला दी।

    OpenAI ने भी माना है कि उनके सिस्टम में गड़बड़ी आई है। कंपनी ने अपने स्टेटस पेज पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ यूजर्स को बातचीत करने या जवाब पाने में दिक्कत हो सकती है। कंपनी ने बताया कि उन्होंने समस्या को कम करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और वे इस सुधार पर लगातार नजर रख रहे हैं।

    यूजर्स को हो रही ये परेशानी

    चैटजीपीटी डाउन होने पर यूजर्स को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:

    जवाब नहीं मिल रहा और ऐप हो रहे क्रेश
    जब यूजर कोई सवाल टाइप कर रहा है तो चैटजीपीटी कोई जवाब नहीं दे रहा और स्क्रीन पर केवल ब्लिंक हुआ कर्सर या खाली जगह दिखाई दे रही है। एंड्रॉयड और आईफोन (iOS) दोनों के मोबाइल ऐप्स खुलते ही अपने आप बंद हो रहे हैं या हैंग हो जा रहे हैं।

    पुरानी चैट गायब और लॉगिन में समस्या
    स्क्रीन की बाईं तरफ (Left Side) जहां पुरानी सारी बातचीत और प्रोजेक्ट्स सेव रहते हैं, वह हिस्सा पूरी तरह खाली या सफेद दिखाई दे रहा है। कई यूजर्स अपने अकाउंट से अपने आप लॉगआउट हो गए हैं और जब वे दोबारा लॉगिन करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पेज लोड ही नहीं हो रहा है। वहीं यूजर्स का चैटजीपीटी खुल तो रहा है, लेकिन वह इतना धीमा चल रहा है कि एक छोटा सा जवाब लिखने में भी कई मिनट लगा रहा है।

    चैटजीपीटी के बंद होने से उन यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हुई जिनके रोज के काम इसी पर टिके हैं। चाहे पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स हों, दफ्तर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स या फिर कंटेंट क्रिएटर्स सबके काम पर अचानक ब्रेक लग गया। इससे यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि अब एआई टूल्स की निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

  • सरकारी स्कूलों के 4 लाख शिक्षकों को राहत! MP में 15 दिन अतिरिक्त छुट्टी देने की तैयारी, प्रस्ताव भेजा गया

    सरकारी स्कूलों के 4 लाख शिक्षकों को राहत! MP में 15 दिन अतिरिक्त छुट्टी देने की तैयारी, प्रस्ताव भेजा गया

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के 4 लाख शिक्षकों के लिए खुश खबरी है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियों को 15 दिन और बढ़ाया जा रहा है. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा टीचर्स की छुट्टियों को 15 जून तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. टीचर्स एसोसिएशन द्वारा शिक्षकों की छुट्टियां बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी, जिसे विभागीय मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने हरी झंडी दे दी है. प्रदेश में सरकारी स्कूल स्टूडेंट्स के लिए 23 जून से रीओपन होने जा रहे हैं।

    जनगणना ड्यूटी को अतिरिक्त छुट्टी का बनाया गया आधार
    प्रदेश में सरकारी टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियां 1 मई से 31 मई तक निर्धारित थीं. हालांकि, इस बार गर्मियों की छुट्टियों के दौरान ही 7 मई से हायर सेकंडरी और हाई स्कूल की दूसरी बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुईं, जो 27 मई तक चलीं. इसके अलावा जनगणना भी चलती रही. इसमें अधिकांश शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी. छुट्टियों के दौरान दूसरे सरकारी काम कराए जाने को आधार बनाकर शिक्षक संगठनों द्वारा स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप से मुलाकात की गई और शिक्षकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने की मांग की गई थी. शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर के नेतृत्व में मंत्री को ज्ञापना सौंपा गया था।

    मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने दी हरी झंडी
    उधर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, '' प्रदेश में स्कूली टीचर्स का ग्रीष्मकालीन अवकाश का समय बढ़ाया जा रहा है. शिक्षकों को 15 जून तक का अवकाश दिया जा रहा है. इसके लिए अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने के लिए कहा गया है. जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा.'' उधर विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल के पास इसे भेजा जाएगा. प्रमुख सचिव के अनुमोदन के बाद इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा।

    अब 23 जून को खुलेंगे स्कूल
    प्रदेश में पहले स्कूली शिक्षकों को 2 माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता था, जिसे घटा कर 40 दिन कर दिया गया था. 2024-25 में शिक्षकों की छुट्टियों को 10 दिन और कम कर दिया गया. 2025 के बाद इस साल भी शिक्षकों को 31 दिन का अवकाश दिया गया. हालांकि, अब शिक्षकों के अवकाश को 15 दिन और बढ़ाया जा रहा है. प्रदेश में सरकारी स्कूल अब स्टूडेंट्स के लिए 23 जून को खुलेंगे।