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  • मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी तेज, भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन में शामिल हुए CM मोहन यादव

    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी तेज, भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन में शामिल हुए CM मोहन यादव

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा में दोनों का नामांकन पत्र दाखिल कराया।  दोनों ने भाजपा नेताओं के साथ शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन से पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और दोनों प्रत्याशी भाजपा कार्यालय स्थित शिव एवं हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी नेता विधानसभा के लिए रवाना हुए। नामांकन प्रक्रिया के दौरान विधानसभा परिसर में पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। 

    हमारे प्रत्याशियों ने भरा नामांकन
    सीएम मोहन यादव ने कहा कि आज हमारे दोनों ही राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन भर दिया है। इस दौरान भाजपा की सभी दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस समय हम सभी हर्ष और उल्लास के साथ हैं। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। हमारा राज्य संगठन की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में आता है। हम सबने मिलकर उनका नॉमिनेशन फॉर्म जमा करवाया है। हम सभी वर्गों की सेवा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। 

    नामांकन से पहले बीजेपी दफ्तर में बैठक
    नामांकन दाखिल करने से पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों की एक बैठक बुलाई गई। इसमें दोनों प्रत्याशियों (तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल) के अलावा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में चुनाव की रणनीति और एकजुटता को लेकर चर्चा हुई।

    मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद निकला काफिला
    बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और दोनों उम्मीदवार भाजपा कार्यालय परिसर में स्थित शिव और हनुमान मंदिर पहुंचे। वहां नेताओं ने जीत के लिए पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। इसके बाद करीब 15 से ज्यादा कारों के भारी काफिले के साथ सभी नेता विधानसभा के लिए रवाना हुए।

    जब प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने अंदर गए, तब रिटर्निंग ऑफिसर कक्ष के बाहर भाजपा के कई सीनियर विधायक एकजुट होकर बैठे नजर आए।

    भाजपा एक परिवार की तरह है यहां नेता अभिभावक- चुघ
    भोपाल में मीडिया को संबोधित करते हुए तरुण चुघ ने कहा कि मध्य प्रदेश भारत का दिल है। मप्र जब धड़कता है, समझें भारत धड़क रहा है। मप्र की तरक्की ही विकसित भारत का प्राण है। हम सब भाजपा के कार्यकर्ता हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे यह अवसर दिया।

    उन्होंने आगे कहा, ''पार्टी ने आगे बढ़ने, काम करने व समर्पण का मौका दिया है। पोस्टर, झंडे लगाने का मौका दिया तो झंडे गाड़े। जहां पार्टी नेतृत्व ने भेजा मैंने काम किया है। भाजपा एक परिवार की तरह है। यहां नेता अभिभावक है। आपको पिता की तरह समझाता भी है, मां की तरह दुलार भी करता है। भाई बहनों की तरह हाथ में हाथ देकर चलना भी सिखाता है। यह केवल भाजपा में ही है और कहीं नहीं मिल सकता। पहले भी कार्यकर्ता बोध से काम किया था आगे भी कार्यकर्ता बोध से काम करेंगे। जो संगठन ने कहा मैंने अक्षरश: पालन किया है।''

    पूर्व मंत्री बोले- हमारे पास पूरा बहुमत और समर्थन
    नामांकन के दौरान खुरई से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह का एक बड़ा बयान सामने आया। उन्होंने पार्टी की मजबूत स्थिति पर भरोसा जताते हुए कहा- बीजेपी की तैयारी पूरी है, अगर पार्टी तीसरा कैंडिडेट भी चुनाव मैदान में उतारती है तो भी हमारी जीत तय है। हमारे पास पूरा बहुमत और समर्थन है।

    प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पार्टी के घोषित उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा ने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जिन्होंने जमीन पर रहकर संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है। 

  • बिहार में सुरक्षा विवाद गहराया, लालू-राबड़ी के बाद तेजस्वी यादव ने भी लौटाई सुरक्षा व्यवस्था

    बिहार में सुरक्षा विवाद गहराया, लालू-राबड़ी के बाद तेजस्वी यादव ने भी लौटाई सुरक्षा व्यवस्था

     पटना
    पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी है. तेजस्वी ने राज्य सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बताया है। 

    इससे पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा लौटा दी थी. आरजेडी का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए उनकी सुरक्षा में कटौती की गई है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा और निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया है। 

    आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बयान जारी कर कहा कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बाद अब तेजस्वी ने सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई सुरक्षा को वापस करने का निर्णय लिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विपक्ष के प्रमुख नेताओं को निशाना बना रही है और उनकी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है. पार्टी का कहना है कि लालू यादव लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के बड़े नेता रहे हैं और उन्हें मिलने वाली सुरक्षा में अचानक कटौती कई सवाल खड़े करती है। 

    दरअसल, शुक्रवार को हुई सुरक्षा समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को प्राप्त Z प्लस श्रेणी की सुरक्षा हटा दी गई थी. इसके बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बिहार पुलिस के जवानों को सौंपी गई. हालांकि आरजेडी इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं दिखी और इसे दोनों नेताओं की गरिमा तथा सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया। 

    तेजस्वी ने भी लौटाई सुरक्षा
    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उन्हें पहले की तरह Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी. सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है. इसके अलावा तेजस्वी यादव लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, जनसभाओं और विभिन्न जिलों के दौरों में सक्रिय रहते हैं। 

    उनकी सार्वजनिक गतिविधियों और भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है. हालांकि, लालू-राबड़ी की सुरक्षा हटाने के बाद तेजस्वी ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा हटा दी है. वहीं सुरक्षा समीक्षा का असर तेज प्रताप यादव पर भी पड़ा है. पहले उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती करते हुए केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) या अंगरक्षक उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। 

  • बागवानी और एग्री-बिजनेस में नई पहचान बनाएगा हरियाणा, मुख्यमंत्री सैनी ने रखा विजन

    बागवानी और एग्री-बिजनेस में नई पहचान बनाएगा हरियाणा, मुख्यमंत्री सैनी ने रखा विजन

    हरित क्रांति की तरह बागवानी एवं एग्री-बिजनेस क्रांति का अब नेतृत्व करेगा हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    मुख्यमंत्री ने 2,738 करोड़ रुपये की सतत बागवानी संवर्धन परियोजना का किया शुभारंभ, हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर की रखी आधारशिला

    हरियाणा में 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस बनेंगे, बागवानी के किसान होंगे मालामाल

    जापान के कोची विश्वविद्यालय से हरियाणा के किसानों को मिलेगी अनुसंधान की विश्वस्तरीय तकनीक

    विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण

    चंडीगढ़,
    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में किसान, युवा, महिलाएं और आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हरियाणा को बागवानी, एग्री-बिजनेस, कोल्ड चेन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निर्यात के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिलकर कृषि को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी बनाने, जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लें।

    मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंचकूला में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 2,738 करोड़ रुपये की लागत से जाईका वित्तपोषित सतत बागवानी संवर्धन परियोजना का शुभारंभ तथा हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर का शिलान्यास के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, बल्कि हरियाणा की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ इस दौरान प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद थे। दोनों ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया, साथ ही बागवानी विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जीआईसीए के मुख्य प्रतिनिधि टाकेची टकूरो, फर्स्ट सेकेरट्री फूड एंड एग्रीकल्चर टाकेहिको हयासे तथा ब्रिटिश डिप्टी हाईकमीश्नर ऐलबा स्मीरिग्लयो मौजूद थे। तीनों ने अपने संबोधन में हरियाणा सरकार द्वारा किसान हित में उठाये गये कदमों की तारीफ की।

    उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज का दिन केवल दो परियोजनाओं के शुभारंभ का नहीं, बल्कि हरियाणा के कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नई दिशा तय करने का दिन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा एक बार फिर देश को नई राह दिखाएगा और हरित क्रांति की तरह बागवानी एवं एग्री-बिजनेस क्रांति का नेतृत्व भी करेगा।

    उन्होंने कहा कि हरियाणा ने देश को हरित क्रांति दी थी, लेकिन बदलती जलवायु, गिरते भूजल स्तर, बढ़ती कृषि लागत और छोटी जोत जैसी चुनौतियों को देखते हुए अब कृषि क्षेत्र में नए विकल्प अपनाने की आवश्यकता है। बागवानी, फल, सब्जियां, मसाले, औषधीय पौधे, फूल, मशरूम और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में किसानों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में जलभराव एवं सेम की समस्या के समाधान के लिए बायोड्रेनेज तकनीक का उपयोग करते हुए इस वर्ष 1,000 हेक्टेयर जलभराव प्रभावित भूमि पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे भूमि पुनः कृषि योग्य बन सकेगी। इसके साथ ही भूमिगत जल संरक्षण के लिए शिवालिक एवं अरावली क्षेत्रों में 25 नए जल भंडारण बांध बनाए जाएंगे तथा 25 पुराने बांधों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

    हरियाणा में 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस बनेंगे
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में फलों और सब्जियों का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा खेत से बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। इस चुनौती का समाधान सतत बागवानी संवर्धन परियोजना के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना के तहत 400 बागवानी क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, 500 उत्पादक समूहों को संगठित एवं सशक्त बनाया जाएगा, 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस, 3 फुलफिलमेंट सेंटर तथा 44 रिटेल आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1,000 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा तथा 65,000 एकड़ क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि यह परियोजना खेत से बाजार तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी तथा आधुनिक कोल्ड चेन नेटवर्क किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगा। परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वास्तविक समय निगरानी प्रणाली, मिट्टी एवं जल विश्लेषण, डिजिटल कृषि सलाह, इंटरनेट ऑफ प्लांट्स, भू-स्थानिक तकनीक, ई-मार्केटिंग और आधुनिक पैकेजिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल तथा जापान के कोची विश्वविद्यालय के बीच ज्ञान एवं अनुसंधान के आदान-प्रदान से किसानों को विश्वस्तरीय तकनीकी सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक बड़ा व्यवसाय बन चुकी है, जिसमें ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट सेंसर, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसी तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    नौकरी देने वाले बने युवां
    उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे नौकरी मांगने के बजाय एग्री-बिजनेस, कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उद्योग और निर्यात आधारित उद्यमों के माध्यम से रोजगार सृजनकर्ता बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बागवानी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हरियाणा के निर्माण में महत्वपूर्ण होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर किसानों, एफपीओ, उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कृषि विशेषज्ञों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे 3 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में 75 प्रतिशत से अधिक सुधार होगा तथा कटाई के बाद होने वाले नुकसान में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आएगी। जीएपी, जीएमपी, जीएचपी तथा एचएसीसीपी जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाकर कृषि निर्यात को भी नई गति मिलेगी।

    जापान और भारत के संबंधों का किया जिक्र
    मुख्यमंत्री ने भारत-जापान संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध सदियों पुराने हैं। हरियाणा में वर्तमान में 394 जापानी उद्योग एवं 600 से अधिक जापानी व्यावसायिक प्रतिष्ठान कार्यरत हैं, जो दोनों देशों की मजबूत मित्रता का प्रमाण हैं। उन्होंने जापान सरकार और जीआईसीए का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। 

    पर्यावरण दिवस को लेकर दिया विशेष संदेश
    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार विशेष काम कर रही है। मोरनी में गत दिनों प्राकृतिक खेती के ​लिए भी किसानों और एक कंपनी के बीच एमओयू हुआ है। उन्होंने कि जिस कंपनी के साथ एमओयू हुआ है, उन्होंने 4 हजार एकड़ कृषि भू​मि पर अदरक, मिर्च इत्यादि की खेती करवाने की बात कहीं है, ताकि किसानों की आमदन बढ़ सके। उन्होंने मिडल ईस्ट के देशों में बनी स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किए आहृवान का जिक्र करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है, ताकि ईंधन की बचत हो सके। बकायदा इसके लिए इलेक्ट्रिक बसे खरीदी गई है। स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2026 में 780 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें बेड़े में शामिल की जाएंगी। 

    उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए 1,349 औद्योगिक इकाइयों में से 1,308 इकाइयों में ओसीईएमएस स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए 23 नए सीएएक्यूएमएस भी स्थापित किए जा रहे हैं। यमुना नदी के संरक्षण के लिए 133 एमएलडी क्षमता के 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन हैं, जबकि 7 एसटीपी के उन्नयन और 11 नए एसटीपी के निर्माण की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 147.5 एमएलडी क्षमता के 8 नए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धरती मां के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की भावना को जन-आंदोलन का रूप देना समय की आवश्यकता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने के हो रहे प्रयास: मंत्री श्याम सिंह राणा
    हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नया उत्साह पैदा हुआ है। गांवों, स्कूलों और विभिन्न संस्थाओं में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री राणा ने कहा कि भारत के पास बागवानी और कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद विभिन्न सरकारों ने शासन किया, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप आज देश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश को खाद्यान्न की आवश्यकता पूरी करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन किसानों की मेहनत और कृषि क्षेत्र में हुए सुधारों के कारण आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और प्रदेश में किसानों को विभिन्न फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा भावांतर भरपाई जैसी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है जहां किसानों की समस्याओं और जरूरतों को समझते हुए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

    कृषि मंत्री ने कहा कि फल एवं सब्जियां जल्दी खराब होने वाली उपज हैं, इसलिए उनके सुरक्षित भंडारण और विपणन के लिए आधुनिक कोल्ड चेन अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर की स्थापना की जा रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा तथा फसलोत्तर नुकसान में कमी आएगी। कृषि के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने के महत्वपूर्ण साधन हैं। सरकार इन क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। 

    इस दौरान गृह सचिव सुधीर राजपाल, अ​तिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह, बागवानी विभाग के विभागाध्यक्ष अर्जुन सैनी, मेयर श्याम लाल बंसल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता,

  • पंजाब-चंडीगढ़ में महसूस हुए भूकंप के झटके, अचानक हिली धरती; लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे

    पंजाब-चंडीगढ़ में महसूस हुए भूकंप के झटके, अचानक हिली धरती; लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे

    चंडीगढ़
    पंजाब और चंडीगढ़ में शुक्रवार रात अचानक धरती कांपने से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। रात करीब 10 बजकर 4 मिनट पर आए भूकंप के झटके कई इलाकों में महसूस किए गए। झटके महसूस होते ही लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 दर्ज की गई है। भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास बताया गया है। राहत की बात यह रही कि घटना के बाद किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई।

    भूकंप के झटके महसूस होने के बाद पंजाब और चंडीगढ़ के कई क्षेत्रों में लोग घरों से बाहर निकल आए। रात के समय आए इन झटकों के कारण कुछ लोगों में घबराहट देखी गई। हालांकि झटके ज्यादा देर तक नहीं रहे, लेकिन लोगों ने धरती में कंपन स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय स्तर पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और कई स्थानों पर लोग कुछ समय तक खुले स्थानों में ही रहे।

    कांगड़ा से पंचकूला तक कांपी धरती

    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में में शुक्रवार रात 10 बजकर 4 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 दर्ज की गई. भूकंप का केंद्र धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर दूर बताया गया है। 

    भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. कई इलाकों में कुछ सेकंड तक धरती हिलती महसूस हुई, जिससे लोगों में भय और दहशत का माहौल बन गया. देर रात तक लोग खुले स्थानों पर खड़े दिखाई दिए। 

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भूकंप का असर केवल कांगड़ा तक सीमित नहीं रहा. आसपास के कई जिलों और राज्यों में भी झटके महसूस किए गए। 

    धर्मशाला के पास रहा भूकंप का केंद्र
    भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला क्षेत्र के आसपास दर्ज किया गया है। धर्मशाला और उसके आसपास का इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज होते रहते हैं। इस बार आए झटकों का असर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और चंडीगढ़ तक महसूस किया गया।

    प्रशासनिक और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। न तो किसी बड़े हादसे की सूचना है और न ही किसी संरचनात्मक क्षति की पुष्टि हुई है। अधिकारियों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

    दो महीने पहले भी महसूस हुए थे झटके
    करीब दो महीने पहले भी पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था। रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 5.9 दर्ज की गई थी। उस भूकंप का प्रभाव उत्तर भारत के कई हिस्सों तक महसूस किया गया था।

    विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी की सतह सात प्रमुख और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं और समय-समय पर एक-दूसरे से टकराती या खिसकती हैं। जब प्लेटों के बीच दबाव बढ़ जाता है तो उनमें ऊर्जा जमा होने लगती है। दबाव एक सीमा से अधिक होने पर यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे धरती में कंपन पैदा होता है और भूकंप आता है। यही प्रक्रिया दुनिया के अधिकांश भूकंपों का प्रमुख कारण मानी जाती है।

  • डेरा ब्यास की यात्रा मातम में बदली, ट्रॉला और पिकअप की टक्कर में 8 श्रद्धालुओं की मौत

    डेरा ब्यास की यात्रा मातम में बदली, ट्रॉला और पिकअप की टक्कर में 8 श्रद्धालुओं की मौत

    फिरोजपुर

    पंजाब में फिरोजपुर के ब्लाक ममदोट के जंगा वाला मोड़ पर एक भीषण सड़क हादसे में आठ लोगों की माैत हो गई। सभी श्रद्धालु डेरा ब्यास जा रहे थे। शनिवार सुबह हुए हादसे के बाद माैके पर चीख पुकार मच गई। मृतकों में पांच महिलाएं और दस साल का एक बच्चा शामिल है। 

    डेरा ब्यास जा रहे थे श्रद्धालु
    जानकारी के अनुसार, जलालाबाद से एक महिंद्रा पिकअप गाड़ी मे कई श्रद्धालु डेरा ब्यास दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दाैरान सुबह करीब साढ़े छह बजे जंगा वाला मोड़ पर पिकअप की ट्राले से जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि लोगों को संभलने का माैका ही नहीं मिला। लोग उछलकर आगे के शीशे से टकराए और सड़क पर गिरते गए। एक के बाद एक आठ लाशें बिछ गई।

    कैसे हुआ हादसा
    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्राले वाले की आंख लग गई थी और गाड़ी रांग साइड थी। पिकअप वाले को लगा कि ट्राला रांग साइड आ रहा है तो उसने गाड़ी हल्की मोड़ ली। इसी दाैरान अचानक ट्राले वाले की आंख खुल गई और उसने तुरंत अपनी गाड़ी सीधी कर ली। इसी दाैरान दोनों वाहन आपस में टकरा गए। 

    माैके पर पहुंची पुलिस जांच में जुटी
    लोगों के चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग माैके पर पहुंचे और लोगों को गाड़ी से बाहर निकाला। सूचना के बाद पुलिस भी माैके पर पहुंची और वाहनों को हटाकर रास्ता साफ करवाया।

    माैके पर माैत
    हादसे में महिंद्रा पिकअप में सवार आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई। जबकि 20 के करीब जख्मी हो गए। तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है। जख्मियों को फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिंद्रा पिकअप गाड़ी में खचाखच लोग भरे हुए थे। ये सभी डेरा ब्यास जा रहे थे।

    बड़ी लापरवाही
    वहीं हादसे के बाद सामने आया कि पिकअप में लगभग 30 लोग बैठे थे। गाड़ी की छत और फर्श के बीच में एक विभाजन कर लोगों को भरा गया था। इसके अलावा गाड़ी के पीछे भी लकड़ी के फट्टे लगाकर उसे बढ़ाया गया था और एक सीढ़ी लगा दी गई थी। 

     

  • शिवराज सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला: 8 IPS अधिकारियों को नई जिम्मेदारी, पुलिस विभाग में व्यापक बदलाव

    शिवराज सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला: 8 IPS अधिकारियों को नई जिम्मेदारी, पुलिस विभाग में व्यापक बदलाव

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए कई IPS अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला और नई जगहों पर तैनाती का आदेश जारी कर दिया। इस दौरान राज्यपाल के नाम और निर्देश पर गृह विभाग के अपर सचिव आशीष भार्गव ने भारतीय पुलिस सेवा के 8 अधिकारियों का नवीन पदस्थापना से जुड़ा आदेश जारी किया। जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य शासन निम्नलिखित भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक बताए गए पद एवं स्थान पर पदस्थ किया जाता है।

    नए आदेश के अनुसार अनु बेनीवाल को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ग्वालियर से हटाकर ASP जबलपुर बनाया गया है। जबकि मिनी शुक्ला को अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) नरसिंहगढ़ से हटाकर ADCP (अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त), जोन-2, भोपाल पुलिस बनाया गया है। IPS अधिकारी करणदीप को बालाघाट जिले के बैहर से हटाकर उज्जैन भेजा गया है, वहीं सुजावल जग्गा को धार से हटाकर ग्वालियर भेजा गया है।

    तबादला सूची में सबसे ज्यादा चर्चित नाम IPS दम्पति अनु बेनीवाल और आयुष जाखड़ का रहा। दोनों अफसरों को शिवपुरी से एएसपी के पद पर जबलपुर ट्रांसफर किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा पुलिस तंत्र में बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। बड़ी संख्या में अधिकारियों के स्थानांतरण को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    राजगढ़ एसडीओपी को मिला प्रमोशन
    राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में पदस्थ एसडीओपी मिनी शुक्ला को प्रमोट कर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (जोन-2) भोपाल नगरीय पुलिस बनाया गया है। मिनी शुक्ला का विवाह पिछले वर्ष आईएएस अधिकारी सुमित पांडेय से हुआ था। सुमित पांडेय वर्तमान में भोपाल में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। नई पोस्टिंग के बाद दोनों अधिकारी अब भोपाल में साथ सेवाएं देंगे।

    66 पुलिस अधिकारियों के हुए तबादले
    गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के 66 अधिकारियों के भी तबादले किए हैं। इन्हें विभिन्न जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस इकाइयों में एसपी और उप सेनानी के पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस पूरी सूची में विंध्य क्षेत्र से सबसे प्रमुख नाम आरती सिंह महाजन (SPS 2008 बैच) का है। रीवा जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर लंबे समय से अपनी सशक्त सेवाएं दे रहीं। आरती सिंह महाजन का तबादला अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पी.टी.सी. (पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज), इंदौर के पद पर कर दिया गया है।

    1. सुश्री अनु बेनिवाल, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-ग्वालियर

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-जबलपुर
    2. श्री ओमप्रकाश, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) लांजी, बालाघाट

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जोन-3, इंदौर नगरीय पुलिस
    3. श्री करणदीप, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) बैहर, जिला-बालाघाट

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-उज्जैन
    4. श्री आयुष जाखड, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) करैरा, जिला-शिवपुरी

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-जबलपुर
    5. श्री गौरव पाण्डेय, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) जिला-सिंगरौली

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-सतना
    6. सुश्री मिनी शुक्ला, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) नरसिंहगढ़, जिला-राजगढ

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जोन-2, भोपाल नगरीय पुलिस
    7. श्री राज कृष्णा, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सबलगढ, जिला-मुरैना

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महू इंदौर ग्रामीण
    8. श्री सुजावल जग्गा, भापुसे (आर.आर.-2022)

    वर्तमान पोस्टिंग- नगर पुलिस अधीक्षक, जिला-धार

    नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-ग्वालियर

  • 1.49 करोड़ खाताधारकों ने क्यों छोड़ी अटल पेंशन योजना, RTI से हुआ बड़ा खुलासा

    1.49 करोड़ खाताधारकों ने क्यों छोड़ी अटल पेंशन योजना, RTI से हुआ बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली
    सरकारी पेंशन स्कीम 'अटल पेंशन योजना' की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। 

     सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। 

    RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है। 

    साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ
    योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है। 

    जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत 'डिसकंटिन्यूएशन' जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है। 

    क्या है अटल पेंशन योजना?
    अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक   के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है। 

  • आर्थिक मोर्चे पर खुशखबरी: भारत की GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची, वैश्विक चुनौतियों के बीच भी मजबूत प्रदर्शन

    आर्थिक मोर्चे पर खुशखबरी: भारत की GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची, वैश्विक चुनौतियों के बीच भी मजबूत प्रदर्शन

    नई दिल्‍ली
     भारत की वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रोथ बढ़कर 7.7% हुई। मार्च तिमाही के आंकड़े पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहे। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% हो गई, जो एक साल पहले 7.1% थी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

    वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी। भारत अब नई जीडीपी (GDP) सीरीज के तहत आंकड़े जारी कर रहा है। इसमें महंगाई मापने वाले बास्केट में हालिया बदलाव, 2022-23 को नया आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाना और अपडेटेड बैक-सीरीज डेटा शामिल है। यह सब महामारी के बाद खपत के बदलते पैटर्न और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेज़ी से विस्तार को बेहतर ढंग से समझने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

    मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही. हालांकि, यह इससे पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के 8% के मुकाबले थोड़ी कम है. इसका मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में आई कमी रही. मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जो तीसरी तिमाही में 12.8% पर थी, वह आखिरी तिमाही में गिरकर 7.3% पर आ गई। 

    फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.9% रही GVA ग्रोथ
    ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसकी ग्रोथ रेट 7.9% दर्ज की गई. चौथी तिमाही में भी जीवीए ग्रोथ 7.9% रही, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है. बता दें कि जीवीए से पता चलता है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे खेती, उद्योग) में कुल कितनी असली कमाई या वैल्यू जुड़ी। 

    पूरे साल की यह ग्रोथ सरकार के फरवरी के दूसरे अनुमान 7.6% से भी ज्यादा है। वहीं पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2024-25 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.1% रही थी।

    नॉमिनल जीडीपी में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि
    मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार कायम रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी के 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 318.07 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया था। यह स्पष्ट रूप से 8.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर को रेखांकित करता है। जीडीपी के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। 7.8 प्रतिशत की मजबूत तिमाही वृद्धि और 7.7 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर न सिर्फ भारतीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह देश के लगातार बढ़ते आर्थिक परिदृश्य को भी मजबूती प्रदान करता है। 

    मैन्युफैक्चरिंग में दिखी सुस्ती
        वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। यह तीसरी तिमाही की 8% की ग्रोथ के मुकाबले थोड़ी कम है।

        तिमाही-दर-तिमाही आधार पर विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दर्ज की गई सुस्ती है।

        मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ जहां तीसरी तिमाही में 12.8% के उच्च स्तर पर थी, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गई है।

    GVA ग्रोथ 7.9% रही, नॉमिनल जीडीपी की रफ्तार भी धीमी

        आर्थिक विकास को करीब से दर्शाने वाली ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.9% दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में भी GVA की विकास दर ठीक इतनी ही यानी 7.9% रही।

        दूसरी ओर, अगर मौजूदा बाजार भाव पर आधारित नॉमिनल जीडीपी की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें 8.9% की बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले वित्त वर्ष-25 के 9.7% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से कम है।

    भविष्य का अनुमान: वित्त वर्ष-27 में 6.6% रह सकती है ग्रोथ
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जारी अनुमानों के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

    रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले साल देश की ग्रोथ रेट 110 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.10% घटकर 6.6% पर आ सकती है।

    RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की जीडीपी दर में कमी का अनुमान जताया है. आरबीआई के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है. पहले आरबीआई ने रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी का अनुमान जारी किया था। 

    नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी हुआ डेटा
    सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के जीडीपी आंकड़ों को एक नए बदलाव के साथ पेश किया है। इस बार पूरे साल के डेटा को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट करके जारी किया गया है।

    नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया
    GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है।

    आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर
    समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई।

    1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे
    सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत 'बैक-सीरीज' डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है।

    नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए
    आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट।

    इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है।

    ​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया।

    नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर
    बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को 'फिक्स' मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की 'असली' ग्रोथ दिखाने में मदद करता है।

    उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी।

    वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है।

    बेस ईयर क्यों बदला जाता है?
    समय के साथ बाजार में आ रहे बदलावों, नई तकनीकों और उपभोग के नए तरीकों को जीडीपी की गणना में शामिल करने के लिए आधार वर्ष (Base Year) को बदला जाता है, ताकि आर्थिक विकास के सटीक और सही आंकड़े मिल सकें।

    GVA क्या होता है?
    ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था के प्रमुख सेक्टर्स (जैसे खेती, इंडस्ट्री और सर्विस) में कुल कितना प्रोडक्शन और वैल्यू एडिशन हुआ है। यह जीडीपी में से टैक्स और सब्सिडी के तालमेल को हटाकर देखा जाने वाला शुद्ध पैमाना है।

    इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP
    GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का 'रिपोर्ट कार्ड' भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है।

    दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल
    रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं।

    नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी।

    कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती?

    जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है:

    $GDP = C + G + I + NX$

    C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं।

    G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च।

    I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश।

    NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

  • रुपया हुआ मजबूत, डॉलर पड़ा कमजोर! RBI के बड़े कदम से 50 पैसे की छलांग

    रुपया हुआ मजबूत, डॉलर पड़ा कमजोर! RBI के बड़े कदम से 50 पैसे की छलांग

    नई दिल्ली
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने के बाद आज भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ था। 

    निवेश नियमों में ढील से बढ़ा भरोसा
    रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के नियमों को काफी सरल कर दिया है. इसके साथ ही, अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भी भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है। 

    बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा. 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा बढ़ने और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी खास सुविधाओं से रुपये को बड़ी ताकत मिली है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा जताया कि भारत का 682 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। 

    ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं
    वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक ने बाजार को लेकर अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रखा है, जिससे जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठाए जा सकें। 

    महंगाई और विकास दर के नए अनुमान
    कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं:

        विकास दर (GDP): चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। 

        महंगाई (CPI): खुदरा महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है। 

    वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) आज करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की यह बढ़ती कीमत भारत के आयात बिल के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन आरबीआई के नए सुधारों ने फिलहाल बाजार के डर को दूर कर रुपये को बूम दे दिया है। 

  • निवेशकों को झटका या खरीदारी का मौका? चांदी 8 हजार रुपये लुढ़की, सोने के भाव भी गिरे

    निवेशकों को झटका या खरीदारी का मौका? चांदी 8 हजार रुपये लुढ़की, सोने के भाव भी गिरे

    इंदौर 

    सोना और चांदी की कीमतों में शु्क्रवार को बड़ी गिरावट आई है. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी की कीमत तेजी से गिरी है. सुबह के कारोबार के दौरान ही इन कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट आई थी, जो अभी भी जारी है. चांदी के दाम में आज करीब 8000 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली है। 

    वहीं सोने के दाम में 1400 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है. एमसीएक्‍स पर 5 अगस्‍त फ्यूचर के लिए सोने की कीमत 1400 रुपये से ज्‍यादा टूटकर 1,57,651 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं 3 जुलाई फ्यूचर के लिए चांदी की कीमत करीब 8000 रुपये टूटकर 2,57,900 रुपये प्रति किलो के नीचे पहुंच गई थी। 

    सोने-चांदी में गिरावट ऐसे समय में देखी जा रही है, जब‍ ग्‍लोबल स्‍तर पर तनाव बना हुआ है और कीमती धातुओं में मुनाफावसूली जारी है. आइए जानते हैं किन-किन वजहों से सोने और चांदी के भाव में गिरावट आई है। 

    बुलियन मार्केट में सोने और चांदी का भाव 
    इंडियन बुलियन मार्केट की वेबसाइट के मुताबिक, 4 जून की सुबह की तुलना में आज 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1400 रुपये कम होकर 1,54,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,238 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं 18 कैरेट सोने का भाव 1,15,643 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं चांदी के भाव में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्‍यादा की गिरावट आई है और यह 2,54,950 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। 

    क्‍यों आई सोने और चांदी के भाव में गिरावट? 

        अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर तनाव: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कुछ फेड अधिकारियों के बयानों के बाद यह आशंका बढ़ी है कि ब्‍याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं या आगे बढ़ भी सकती हैं. सोना और चांदी ब्‍याज नहीं देते, इस कारण ऊंची दरों की स्थिति में इसमें खरीदारी कम हो जाती है और तनाव की स्थिति में बिकवाली भी हावी हो जाती है। 

        मुनाफावसूली: सोना और चांदी पिछले महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गए थे. ऐसे में अब कई बड़े फंड मैनेजर और ट्रेडर्स ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दिया है, जिससे बिकवाली बढ़ गई है। 

        डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर: जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं तो निवेशकों का रुझान सुरक्षित धातुओं से हटकर डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ जाता है. इससे सोने-चांदी पर दबाव आता है। 

    वैश्विक स्‍तर पर सोने-चांदी में कमजोरी 
    सोने-चांदी की कीमतें COMEX और अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में भी गिरी हुई हैं. जिसका असर भारत के कमोडिटी मार्केट पर भी पड़ा है. इंटरनेशनल मार्केट में सोना 14 डॉलर प्रति औंस टूटकर 4,491.50  पर आ गया है. जबकि चांदी 1.2 डॉलर या 1.63 फीसदी टूटकर 72.745 डॉलर प्रति औंस पर है।