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  • फरार TMC नेता जहांगीर खान का आखिर हुआ अरेस्ट, नेपाल सीमा के पास STF ने दबोचा

    फरार TMC नेता जहांगीर खान का आखिर हुआ अरेस्ट, नेपाल सीमा के पास STF ने दबोचा

    कोलकत्ता 
    फालता से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को राज्य पुलिस की STF ने गिरफ्तार किया है। उन्हें आज सुबह नेपाल बॉर्डर इलाके से गिरफ्तार किया गया है। काफी दिनों से फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया है।

    जहांगीर खान पर लगे थे कई आरोप
    बंगाल के चुनावी नतीजे आने के बाद से जहांगीर फरार था। उसकी तलाश जारी थी। आखिरकार आज एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से पहले एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई आरोप लगे थे। उन पर बीएलओ को प्रभावित करने और मृतकों के नाम सूची में जोड़ने का आरोप था।

    जहांगीर खान की गिरफ्तारी किस जगह से और कब की गई, इस संबंध में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहांगीर खान की गिरफ्तारी के संबंध में अधिक जानकारी साझा कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक जहांगीर खान फलता विधानसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव के बाद से लापता चल रहा था। 

    पश्चिम बंगाल पुलिस और एसटीएफ को कई मामलों में जहांगीर खान की तलाश थी. जहांगीर खान के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं. एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकड़ने के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया. जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन जब ट्रैक किया गया, एसटीएफ जहांगीर खान तक पहुंच गई। 

    लोगों को धमकाने का भी आरोप
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके बाद चुनाव से पहले इलाके में धमकाने के आरोप भी लगे। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में डुंडी पुलिस स्टेशन भेजा था।

    बता दें कि दक्षिण 24 परगना की फलता सीट से जहांगीर खान टीएमसी के उम्मीदवार थे। चुनाव के वक्त उनपर हिंसा और लोगों को धमकाने का आरोप लगा था। चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायत के बाद इस सीट पर दोबारा चुनाव हुआ और बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। वहीं जहांगीर खान पहले ही हथियार डाल चुके थे। चुनाव में भी वह चौथे नंबर पर खिसक गए। उनपर फलता थाने में धमकी देने, जबरन वसूली, हिंसा, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने समेत सात केस दर्ज हुए थे। वह चुनाव के बाद से ही फरार थे। वहीं एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी थी।

  • झुलसाएगी गर्मी, 44 डिग्री के पार तापमान! पंजाब में हीट वेव चेतावनी, 11 जून से मिल सकती है राहत

    झुलसाएगी गर्मी, 44 डिग्री के पार तापमान! पंजाब में हीट वेव चेतावनी, 11 जून से मिल सकती है राहत

    चंडीगढ़
     पंजाब में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पिछले दिनों हुई बारिश से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन अब एक बार फिर गर्म हवाओं और 'लू' ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में 11 जून तक 'लू' को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

    40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं
    मौसम विभाग के अनुसार, फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, बरनाला और संगरूर जिलों में लू का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बिना किसी जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हालांकि, 11 से 13 जून के बीच पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली समेत कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अगर तापमान की बात करें तो बठिंडा राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं चंडीगढ़ में तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 4 दिनों में तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर और अधिक बढ़ने की संभावना है। 

     11 जून से बदलेगा मौसम

    पंजाब में अगले तीन दिन भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने प्रदेश में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अधिकतम तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि 11 जून से मौसम में बदलाव के आसार हैं। विभाग के अनुसार तेज आंधी चलने से तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है। 12 और 13 जून को भी ऐसे ही मौसम बने रहने की संभावना है।

    रविवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 1.1 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो सामान्य से 1.6 डिग्री अधिक रहा। बठिंडा सबसे गर्म रहा जहां अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा फरीदकोट में 42.5 डिग्री, अबोहर में 42.2 डिग्री और लुधियाना में 42 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई जबकि गुरदासपुर में सबसे कम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। 

  • युद्ध की आहट से डरा दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश, बाजार खुलते ही मची बिकवाली

    युद्ध की आहट से डरा दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश, बाजार खुलते ही मची बिकवाली

    मुंबई 

    जिसका डर था वही हुआ… भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. ईरान और इजरायल के बीच मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले औऱ क्रूड की कीमतों में अचानक तेज उछाल के बीच सेंसेक्स-निफ्टी भी सहमे हुए नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex खुलने के साथ ही करीब 800 अंक फिसल गया, तो नहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty भी 250 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर खुला. इस गिरावट के बीच तमाम बड़ी कंपनियों के शेयर बिखरे हुए नजर आए और हर ओर लाल रंग में कारोबार शुरू हुआ। 

    खुलते ही बिखरे सेंसेक्स-निफ्टी 
    सोमवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,243 की तुलना में 822 अंकों की तेज गिरावट लेकर 73,421 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर अचानक फिसलते हुए 73,318 पर जा पहुंचा. एनएसई के निफ्टी की चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स भी अपने पिछले शुक्रवार के बंद 23,366 की तुलना में 286 अंक फिसलकर 23,080 पर खुला। 

    रिलायंस समेत इन शेयरों में तगड़ी गिरावट 
    शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के बीच कई बड़ी कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बुरी तरह टूट गए. बीएसई लार्जकैप पर नजर डालें, तो Eternal Share (2.50%), TCS Share (2.10%), M&M Share (2.05%), HDFC Bank (1.50%) और Reliance Share (1.25%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे।  

    मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3%), Muthoot Finance Share (2.63%), Godrej Properties Share (2.60%) और UPL Share (2%) की गिरावट में कारोबार कर रहे थे। 

    बाजार में गिरावट के ये कारण
    शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण ईरान-इजरायल के बीच फिर से शुरू हुई तेज जंग है. इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Price) करीब 4 फीसदी की उछाल के साथ 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है. तो वहीं WTI Crude Price भी करीब इतनी ही बढ़त के साथ 94 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। 

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पहले ही कच्चे तेल की कीमतें दुनिया को डरा रही थीं. अब ईरान और इजरायल में नए सिरे से भीषण जंग ने अचानक क्रूड की कीमतों में आग लगा दी है. ईरान ने होर्मुज की तरह ही खास बॉब अल मंदेब समुद्री रूट को बंद करने की धमकी भी दी है। 

  • महेश केवट की एंट्री से बदला चुनावी समीकरण? कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ाबंदी का लिया फैसला

    महेश केवट की एंट्री से बदला चुनावी समीकरण? कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ाबंदी का लिया फैसला

    भोपाल
     मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट पर महेश केवट को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मुकाबला अब पूरी तरह रोचक और प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। भाजपा के इस दांव के बाद कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क हो गई है और अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित पार्टी के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। कांग्रेस ने अपने विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे नामांकन प्रक्रिया में शामिल रहें, ताकि एकजुटता का संदेश दिया जा सके।

    भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी आशंका के मद्देनजर कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ाबंदी करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार पार्टी अपने विधायकों को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू या तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित किसी रिसॉर्ट में ठहरा सकती है। मतदान की तारीख 18 जून तक सभी विधायकों को वहीं रखा जाएगा और फिर सीधे मतदान के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा लाया जाएगा।

    मध्य प्रदेश में शुरू होगा पॉलिटिकल ड्रामा
    देर रात सीएम हाउस में राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर मंत्रणा होती रही. इस दौरान ओबीसी, एससी-एसटी और आदिवासी वर्ग के नामों पर भी विचार किया गया लेकिन अंत में पिछड़ा वर्ग से आने वाले महेश केवट के नाम पर सहमति बन गई. महेश केवट वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं. उनके नाम की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश में पॉलिटिकल ड्रामा निश्चित है क्योंकि कांग्रेस के पास राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए तय मतों से अतिरिक्त विधायक तो हैं, पर कुछ विधायकों को लेकर कांग्रेस संशय में है। 

    बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार से क्यों परेशान हुई कांग्रेस?
    दरअसल, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की राह कुछ मुश्किल नजर आ रही है. उन्हें राज्यसभा भेजने के लिए कांग्रेस के पास चार विधायक ही अतिरिक्त हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम प्राथमिकता वाले 58 मतों की जरूरत होती है. कांग्रेस के विधायक तो 64 हैं, मगर श्योपुर के विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाईकोर्ट की रोक है और सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि वे बीजेपी के साथ हैं। 

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा पहुंचना तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए असीमित संसाधन हैं, लेकिन कांग्रेस अपने जनप्रतिनिधियों के साथ मजबूती से खड़ी है।

    इस बीच मीनाक्षी नटराजन ने भी राजनीतिक संपर्क अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के निवास पर पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान विधायक सचिन यादव भी मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य कांग्रेस विधायकों से भी संपर्क साधा।

    बीजेपी के पास 48 मत अधिक
    राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश भाजपा की राह काफी आसान है. दरअसल, बीजेपी के विधायक 164 हैं, इनमें से 116 मतों के साथ बीजेपी आसानी से अपने दो राज्यसभा सदस्यों को जिता लेगी, जिसके बाद पार्टी के पास 48 मत अतिरिक्त हैं. यहीं पर पॉलिटिकल ड्रामा देखने मिल सकता है. क्योंकि कांग्रेस की निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार के मतों को मिलाकर बीजेपी के पास अतिरिक्त मत 50 हो जाएंगे और तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए उसे सिर्फ 8 सीटों की जरूरत होगी, ऐसे में कांग्रेस को डर है कि बीजेपी कांग्रेसे खेमे में सेंध लगा सकती है। 

    बाड़बंदी के साथ विधायकों को शिफ्ट कर सकती है कांग्रेस
    बीजेपी को राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए 8 सीटों की जरूरत होगी, इसके लिए बीजेपी ने तैयारियां भी जोरों पर की है. यही वजह है कि कांग्रेस खेमे में खलबली मची हुई है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़बंदी कर सकती है और राज्यसभा चुनावों तक उन्हें किसी अन्य राज्य में शिफ्ट भी कर सकती है. हालांकि, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा करते हुए कहा, " कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और राज्यसभा चुनाव में किसी तरह की क्रॉस वोटिंग या असंतोष की स्थिति नहीं है. कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा जाएंगी। 

    कौन हैं बीजेपी के महेश केवट?
    बीजेपी नेता महेश केवट मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिला (ओरछा) से आते हैं. वे वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं, उन्हें हाल ही में 6 मई को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था. वे बीजेपी में पूर्व जिला उपाध्यक्ष टीकमगढ़, पूर्व जिला मंत्री टीकमगढ़ और पूर्व राष्टीय कार्यसमिति सदस्य भी रह चुके हैं. मध्य प्रदेश से महेश केवट के साथ कर्नाटक के उम्मीदवारों की भी घोषणा की गई है। 

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार, अब ट्रंप के सामने नई चुनौती

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार, अब ट्रंप के सामने नई चुनौती

    वॉशिंगटन/तेल अवीव
    हिज्बुल्लाह पर इजरायल के हमले के बाद ईरान ने 8 अप्रैल के बाद पहली बार इजरायल पर मिसाइल हमले किए। जिसके बाद आज सुबह इजरायल ने भी ईरान में जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। इसके बाद एक बार फिर से युद्ध छिड़ने की आशंका काफी तेज हो गई है। इजरायल डिफेंस फोर्स ने कहा है कि कुछ देर पहले इजरायली वायु सेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी आतंकी शासन के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। खास बात ये है कि इजरायल ने तब हमला किया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू से हमला नहीं करने को कहा था इसीलिए सवाल ये हैं कि अगर ये जंग फिर शुरू होता है तो क्या अमेरिका, इजरायल के साथ खड़ा रहेगा?

    इसके अलावा मिसाइलों के आदान प्रदान के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते में मुश्किलें आ सकती हैं। ट्रंप उम्मीद कर रहे थे कि इस मामले को दबाकर रखा जाए। उन्हें उम्मीद होगी कि यह मामला अप्रैल 2024 जैसा ही रहेगा जब इजराइल और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए थे लेकिन कुछ दिनों बाद मामला शांत हो गया और यह बड़े संघर्ष में नहीं बदला जिसकी उस समय चिंता थी। लेकिन इस बार मामला अलग तरीके का है।

    इजरायल-ईरान के बीच क्या टूट गया युद्धविराम?
    डोनाल्ड ट्रंप को अभी भी उम्मीद हो सकती है कि ईरान और इजरायल एक बार फिर से युद्ध में नहीं फंसेगे लेकिन ऐसा होना मुश्किल है। ट्रंप ने कुछ देर पहले ही फाइनेंशियल टाइम्स से कहा था कि वो ईरान युद्ध से जुड़े सारे फैसले वही लेते हैं। ट्रंप ने सोमवार को फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास ईरान के साथ डील मानने के अलावा 'कोई चारा नहीं' होगा। ट्रंप ने कहा 'फैसले मैं ही लेता हूं, सारे फैसले मैं ही लेता हूं, वह फैसले नहीं लेते।' लेकिन इजरायल ने ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर साबित कर दिया है कि ट्रंप सारे फैसले नहीं लेते हैं।

    ईरान-अमेरिका जंग में पिस रही दुनिया, होर्मुज के बाद बाब अल मंडेब बंद करने की धमकी

    FT के मुताबिक ट्रंप ने यह भी कहा कि रविवार को इजरायल पर हुए ईरानी मिसाइल हमले का 'डील पर कोई असर नहीं' पड़ेगा। ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने यह साफ कर दिया होगा कि भले ही ट्रंप इजरायल से शांति बनाए रखना चाह रहे हों लेकिन इजरायल अपनी मर्जी से काम करेगा। इसीलिए ट्रंप के लिए स्थिति काफी मुश्किल होने वाली है। ईरान और इजरायल को फिर से युद्धविराम के लिए मनाना आसान नहीं होगा। इजरायली पीएम नेतन्याहू पहले से ही युद्धविराम समझौतों से नाराज थे। उन्हें युद्धविराम की शर्तें भी पसंद नहीं हैं लेकिन असल सवाल ये है कि क्या ईरान अगर नये सिरे से हमले करता है तो क्या अमेरिका, इजरायल की मदद करेगा?

    ट्रंप अब क्या कर सकते हैं?
    ट्रंप के पास नाजुक युद्धविराम को बचाने का बहुत कम रास्ते बचे हैं। वो अब बेंजामिन नेतन्याहू पर भारी प्रेशर बना सकते हैं कि वो ईरान के अगले हमलों का जवाब ना दें। लेकिन ऐसा होना नामुमकिन की तरह है। इजरायल पर यमन की तरफ से भी हमले किए गये हैं और इजरायल हिज्बुल्लाह पर हमले जारी रखेगा। इसके अलावा ट्रंप अगर युद्ध में फिर से शामिल होता है तो ईरान के हमले मध्य पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर पर फिर से शुरू हो जाएंगे। 8 अप्रैल से चल रहे युद्धविराम के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता फिर से हासिल कर ली है। इसीलिए आगे का रास्ता बहुत मुश्किल नजर रहा है कि युद्धविराम जारी रह सके।
    अभिजात शेखर आजाद

  • कुवैत-बहरीन हमलों के बाद अमेरिका सख्त, ईरानी संपत्तियों के इस्तेमाल की तैयारी

    कुवैत-बहरीन हमलों के बाद अमेरिका सख्त, ईरानी संपत्तियों के इस्तेमाल की तैयारी

    नई दिल्ली
     अमेरिकी प्रशासन ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए ईरानी संपत्तियों को खाड़ी देशों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की लागत का आकलन करने के लिए टीम को निर्देश दिया है। इसके साथ ही वाशिंगटन भविष्य में इस संघर्ष से होने वाले किसी भी विनाश की मरम्मत के लिए भी ईरानी संपत्तियों के उपयोग पर विचार कर रहा है।

    $24 बिलियन की रिहाई पर अटका शांति समझौता
    यह घोषणा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित शांति समझौता अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई 24 बिलियन डॉलर की ईरानी संपत्ति की रिहाई पर निर्भर करता है।

    शुक्रवार को सीएनएन से बात करते हुए रेजई ने इस राशि की रिहाई को विश्वास की अहम परीक्षा और किसी भी व्यापक समझौते की दिशा में एक जरूरी कदम बताया था।

    इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही नाजुक संघर्ष विराम प्रयासों के और उलझने का खतरा पैदा कर दिया है। एक अंतरिम समझौते को सुरक्षित करने के चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद वीकेंड में फिर से लड़ाई भड़क उठी है।

    सैन्य तनाव में वृद्धि और ईरानी ठिकानों पर हमला
    इस बीच पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, समुद्री यातायात के लिए खतरा बने ड्रोनों को इंटरसेप्ट करने के बाद अमेरिकी बलों ने शनिवार तड़के होर्मुज में गोरुक और केशम द्वीप पर ईरानी तटीय रडार प्रतिष्ठानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक जलमार्ग के पास दो और ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराने का भी दावा किया है।

    इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। कुवैती अधिकारियों ने बताया कि सात बैलिस्टिक मिसाइलें रिहायशी इलाकों के ऊपर से गुजरीं, जिससे संपत्ति का नुकसान हुआ लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।

    वहीं बहरीन में सायरन बजने के बाद निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि मिसाइलों ने दोनों देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिकी सेना ने कहा कि छह मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया और सातवीं अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही।

    क्या है ईरान की मांगें?
    अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है ताकि एक ऐसा अंतरिम समझौता हो सके जो शत्रुता को रोक दे और परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर भविष्य की बातचीत का रास्ता खोले। हालांकि, अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है।

    तेहरान अपनी तेल आय के अरबों डॉलर तक पहुंच, कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंधों से राहत, बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अधिक नियंत्रण की मांग कर रहा है।

    इसी बीच मध्यस्थता के प्रयासों के तहत, पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे। ईरानी मीडिया के अनुसार, वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री का अयातुल्ला खामेनेई के लिए एक 'विशेष पत्र' लेकर गए हैं। नकवी की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची सहित कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है।

    ईरान की क्षमता पर राष्ट्रपति ट्रंप का बयान
    यह संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा रहा है, जिन्हें ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध के कारण होने वाले व्यापक आर्थिक व्यवधानों पर घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

    एनबीसी न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ऑपरेशनों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया है, लेकिन उन्होंने माना कि तेहरान के पास अभी भी एक बड़ा शस्त्रागार मौजूद है।

    ट्रंप ने कहा, "उनके पास कुछ मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं। प्रतिशत के हिसाब से मैं कहूंगा कि शायद उनकी मिसाइलों का 21% से 22% हिस्सा। यह बहुत सारी मिसाइलें हैं, लेकिन जब हमने पहली बार हमला किया था, तब के मुकाबले यह बहुत कम है।"

    लेबनान में तनाव
    दक्षिणी लेबनान में एक सैन्य वाहन पर हुए इजरायली हमले में दो सैन्य अधिकारियों और एक सैनिक की मौत हो गई। इजरायली सेना इस घटना की जांच कर रही है।

    ईरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी व्यापक समझौते को लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के बीच संघर्ष विराम से जोड़ दिया है। हालांकि, इजरायल ने साफ किया है कि उसका सैन्य अभियान जारी रहेगा।

    यह जटिल क्षेत्रीय विवाद शांति प्रयासों को और उलझा रहा है। बातचीत रुकी हुई है और युद्ध को तीन महीने पूरे हो चुके हैं, ऐसे में किसी स्थायी समझौते की उम्मीदें फिलहाल अनिश्चित बनी हुई हैं।

  • कीमतें बढ़ीं फिर भी भारत में सबसे सस्ती रसोई गैस, उज्ज्वला उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    कीमतें बढ़ीं फिर भी भारत में सबसे सस्ती रसोई गैस, उज्ज्वला उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    नई दिल्ली
    14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई की लागत बढ़कर 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई है। इससे हर सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है, जिसे सरकार और पब्लिक सेक्टर की मार्केटिंग कंपनियां उठाती हैं।

    कीमतों में यह बढ़ोतरी इंटरनेशनल बेंचमार्क में हुई तेज वृद्धि के कारण हुई है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की वजह से फरवरी से सऊदी अरामको की एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में लगभग 46% की बढ़ोतरी हुई है।

    होर्मुज में सख्ती के बाद बढ़ी कीमत
    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, रुकावट से पहले फरवरी में प्रोपेन-ब्यूटेन के 50:50 मिक्स के लिए ब्लेंडेड सऊदी CP 542.50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था। होर्मुज में मिडिल ईस्ट गल्फ से होने वाले एक्सपोर्ट पर सख्ती के बाद अप्रैल का कॉन्ट्रैक्ट बढ़कर 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया और जून में यह और बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया।

    इसी दौरान प्रोपेन CP में 39 प्रतिशत और ब्यूटेन में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही इम्पोर्ट किए गए मॉलिक्यूल की लैंडेड कॉस्ट भी बढ़ गई, जिससे घरेलू सिलेंडर की इम्पोर्ट-लिंक्ड सप्लाई कॉस्ट 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई।

    दुनिया भर से समसे कम कीमत भारत में
    कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने वाली गैस की कीमतें दुनिया भर में सबसे कम हैं। दिल्ली में आम ग्राहक प्रति सिलिंडर 942 रुपये चुकाते हैं, जो बाजार से जुड़ी कीमत से लगभग 700 रुपये कम है।

    PMUY उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलिंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलता है, जिससे उन्हें असल में 642 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यह उज्ज्वला योजना वाले परिवार की सालाना औसत खपत के बराबर है। 942 रुपये की कीमत पर भी वे अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 45% कम भुगतान करते हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 642 रुपये की प्रभावी कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 60% कम है।

    एक बार फिर बढ़ीं कीमतें
    वेस्ट एशिया संकट की वजह से लागत बढ़ने के कारण, रविवार से घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। मंत्रालय ने बताया कि घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) वित्त वर्ष 2025-26 के आखिर तक 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी।

    केंद्रीय कैबिनेट ने इस मद में मार्केटिंग कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने कहा कि उज्ज्वला ग्राहकों के लिए 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी इस अंडर-रिकवरी के अलावा है और यह 10.58 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन तक पहुंचती है।

    होर्मुज में रुकावट के बावजूद सप्लाई सुरक्षित बनी रही। भारत उन कुछ देशों में से एक था जिन्होंने एनर्जी कार्गो की सप्लाई जारी रखी। इम्पोर्ट में कमी की भरपाई के लिए घरेलू LPG प्रोडक्शन को 60% से ज्यादा बढ़ाकर 52 TMT कर दिया गया।

    सप्लाई के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों को भी शामिल किया गया। साथ ही, सब्सिडी वाली घरेलू LPG की कमर्शियल मार्केट में लीकेज को रोकने के लिए OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन और डायवर्जन-रोधी उपायों को लगभग 90% तक बढ़ाया गया।

    अन्य देशों में गैस सिलिंडर के दाम
    नतीजतन, भारत में सिलेंडर की कीमतें पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं। पाकिस्तान 1,046 रुपये, नेपाल 1,207 रुपये, बांग्लादेश 1,225 रुपये, श्रीलंका 1,241 रुपये, अमेरिका 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया 1,765 रुपये, कनाडा 2,411 रुपये। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सब्सिडी वाले इस संसाधन को बचाने के लिए खाना पकाने के ऐसे तरीकों को अपनाने का आग्रह किया जो ऊर्जा की बचत करते हों।

     

  • किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का साधन बना दुग्ध उत्पादन, पशुपालन को बढ़ावा देने पर जोर

    किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का साधन बना दुग्ध उत्पादन, पशुपालन को बढ़ावा देने पर जोर

    रायपुर.

    प्रदेश के ग्रामीण किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि के साथ ही अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन से ग्रामीणों की आजीविका से जोड़ा गया है। जिले में करीब 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है।

    पशुधन विकास विभाग क जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है।

    देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है। यहां जिले में किसानों को दुग्ध विपणन का कार्य में दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ा गया है। पहले 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित है, वहीं शासन की सहकारिता से समृद्धि की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालक किसानों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है। जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी।

    जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (छक्क्ठ) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।

  • फर्जी लाभार्थियों पर शिकंजा, 63 लाख राशन कार्ड रद्द करने की तैयारी; सरकार ने तेज की कार्रवाई

    फर्जी लाभार्थियों पर शिकंजा, 63 लाख राशन कार्ड रद्द करने की तैयारी; सरकार ने तेज की कार्रवाई

    कोलकत्ता 
    पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के खजाने पर बढ़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करने और सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की खाद्य साथी योजना के तहत मुफ्त और सस्ते अनाज का लाभ ले रहे अपात्र और फर्जी लाभार्थियों को बाहर निकालने का फैसला किया है। गुरुवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, विशेष गहन समीक्षा 2026 (SIR) के नतीजों के आधार पर उन सभी राशन कार्डों को चिह्नित कर डिलीट किया जाएगा जो नियमों के तहत अयोग्य पाए गए हैं।

    आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से जिन 63 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी पहचान की जाएगी और उनके राशन कार्ड तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इसमें एक मानवीय और कानूनी पहलू को भी शामिल किया है। आदेश में कहा गया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं, लेकिन उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है या ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की है उनके राशन कार्ड तब तक एक्टिव रहेंगे जब तक कि उनकी याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कुछ दिनों पहले शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के लिए सरकार ने एक नया आवेदन फॉर्म भी पेश किया है। सरकार को संदेह है कि पिछली सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत लगभग 30 लाख से अधिक अपात्र महिलाएं वित्तीय सहायता ले रही थीं। नई अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य सरकार लगभग दो करोड़ महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देगी। इस योजना पर राज्य सरकार को हर साल करीब 72,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

    इसके विपरीत, पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार लक्ष्मी भंडार योजना को चलाने के लिए सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च करती थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "राज्य का खजाना इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है और राजस्व को तुरंत बढ़ाना मुमकिन नहीं है। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को संभालने के लिए फंड के दुरुपयोग और लीकेज को रोकना बेहद जरूरी है।"

    15,000 करोड़ की लीकेज रोकने की तैयारी
    अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य साथी योजना के तहत सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसके जरिए करीब दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है और किसानों से सीधे धान की खरीद की जाती है। सरकार को अंदेशा है कि टीएमसी (TMC) शासन के दौरान इन योजनाओं में बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए सभी राशन कार्ड धारकों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।

    कैसे होगा सत्यापन?
    पश्चिम बंगाल के सभी एसडीओ और बीडीओ अपने-अपने क्षेत्रों से हटाए गए मतदाताओं की सूची खाद्य विभाग के स्थानीय निरीक्षकों को सौंपेंगे। खाद्य विभाग के अधिकारी उन सभी लोगों के घरों पर जाकर जांच करेंगे जिनके नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद अपात्रों के राशन कार्ड बंद कर दिए जाएंगे। सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरी प्रक्रिया को 15 जून 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है।

    टीएमसी राज में हुए धान घोटाले की भी होगी जांच
    भाजपा सरकार केवल राशन कार्डों की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि टीएमसी शासन के दौरान हुई धान खरीद प्रक्रिया की भी गहराई से जांच करेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "कागजों पर राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में औसतन 55 लाख टन से अधिक धान की खरीद दिखाई है। लेकिन शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि धान से चावल निकालने के लिए राइस मिलों में भेजा गया एक बड़ा हिस्सा कभी राज्य के पास वापस ही नहीं आया। अब इसकी जांच की जाएगी कि क्या कागजों पर दिखाया गया धान वास्तव में खरीदा भी गया था या यह सिर्फ एक कागजी घोटाला था।"

    आपको बता दें कि वर्तमान में केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बंगाल में 6.01 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज देती है। इसके अलावा, राज्य सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है। नई सरकार अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दो करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों में से कितने वास्तव में वास्तविक और जरूरतमंद हैं। धान खरीद घोटाले की आधिकारिक जांच भी जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।

  • निवेशकों को झटका! सोना बिखरा, चांदी ₹16,500 लुढ़की; अमेरिकी असर से कमोडिटी बाजार में हड़कंप

    निवेशकों को झटका! सोना बिखरा, चांदी ₹16,500 लुढ़की; अमेरिकी असर से कमोडिटी बाजार में हड़कंप

    नई दिल्‍ली

    सोना और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान भारी गिरावट आई है. चांदी एक ही झटके में 16,600 रुपये तक टूट चुकी है, जबकि सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है. शु्क्रवार को रात 11.30 बजे कमोडिटी मार्केट के बंद होने तक चांदी के भाव 16,000 से ज्‍यादा टूट चुके थे, जबकि सोने के दाम में भी करीब 4000 रुपये तक की गिरावट आई थी।  

    सोने और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान इतनी भारी गिरावट सिर्फ अमेरिका की वजह से आई है. MCX पर दाम तेजी से गिरने के बाद सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी के भाव में गिरावट आई है. दिल्‍ली से लेकर मुंबई तक सोने-चांदी सस्‍ते हो चुके हैं। 

    MCX पर सोने-चांदी की कीमत 
    मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने के भाव में 3947 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी की कीमत 16,595 रुपये गिरकर 2,48,201 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. सोने-चांदी के भाव में ये गिरावट अमेरकी-ईरान तनाव और फेड रेट बढ़ोतरी की आशंका के बीच आया है। 

    क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में आई ये गिरावट? 
    इंटरनेशलन मार्केट में सोना 3.4 फीसदी तक गिर गया है. अमेरिका में जॉब डाटा अनुमान से बेहतर डेटा आया है. इसका असर बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर पड़ा है. दोनों में तेजी देखी जा रही है, जिससे सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट रही है. 
    वहीं अमेरिका फेडरल बैंक इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई से कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. इससे मंहगाई बढ़ने का खतरा बन गया है. यह भी सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वज है। 

    इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी के भाव 
    अमेरिका में 5 जून को स्पॉट गोल्ड 3.2 फीसदी गिरकर 4,330.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं सिल्वर 7.1 फीसदी गिरकर 68.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. भारत में सोना 2 फीसदी और चांदी करीब 7 फीसदी टूटी है।  

    आपके शहर में सोने की कीमत 

        दिल्‍ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,43,860 रुपये है. 
        चेन्‍नई में 22 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 1,45,525 रुपये है. 
        मुंबई में 22 कैरेट सोने के दाम  ₹1,42,752 है. 
        बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,43,22 रुपये है. 

    17 जून को होगी फेड की बैठक 
    जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिंसंबर ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है.अक्‍टूबर में यह बढ़ोतरी 60 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद दिख रही है. हालांकि, जॉबा डेटा आने से पहले उम्‍मीद थी कि कम से कम इस साल तो इंटरेस्‍ट नहीं बढ़ सकता है. फेड के अधिकारियों की बैठक 16-17 जून को होने वाली है. इस बैठक की अध्यक्षता नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श करेंगे. इस बैठक के बाद फैसले का ऐलान किया जाएगा। 

    (नोट- सोने-चांदी में किसी भी तरह की खरीदारी से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)