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  • ऑनलाइन अटेंडेंस पर सरकार सख्त, अब शिक्षकों के साथ अधिकारियों की हाजिरी भी होगी डिजिटल

    ऑनलाइन अटेंडेंस पर सरकार सख्त, अब शिक्षकों के साथ अधिकारियों की हाजिरी भी होगी डिजिटल

    भोपाल.

    मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने उपस्थिति व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब तक ई-अटेंडेंस (E-Attendance Mandatory) केवल शिक्षकों के लिए लागू थी, लेकिन अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे।

    लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी हमारे शिक्षक प्रणाली के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही अवकाश संबंधी जानकारी भी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य होगा।

    सभी स्तरों पर लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था
    नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि E-Attendance प्रणाली अब स्कूल शिक्षा विभाग के सभी स्तरों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों की उपस्थिति की बेहतर निगरानी करना है। एक जुलाई 2026 से पूरी व्यवस्था डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    इन कार्यालयों में लागू होगा नया नियम
    DPI के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यालयों में लागू रहेगी। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), राज्य शिक्षा केंद्र, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, जिला शिक्षा केंद्र और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को नियमित रूप से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। साथ ही अवकाश से जुड़ी जानकारी भी इसी प्रणाली में अपडेट करनी होगी।

    कार्यालय प्रमुखों की तय की गई जिम्मेदारी
    डीपीआई ने आदेश में संबंधित कार्यालय प्रमुखों और प्रशिक्षण संस्थान प्रमुखों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें। यदि किसी स्तर पर व्यवस्था के पालन में लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

    शिक्षक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
    इस निर्णय का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि संगठन लंबे समय से मांग कर रहा था कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होगी।

  • वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद शुरू, राहत अभियान तेज

    वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद शुरू, राहत अभियान तेज

    नई दिल्ली
    दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

    वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है।

    खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग
    वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है।

    जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें
    बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

    इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

  • मुख्यधारा से जुड़ेंगे पूर्व नक्सली, 5 नक्सल प्रभावित और 2 सरेंडर नक्सलियों को सरकारी नौकरी का तोहफा

    मुख्यधारा से जुड़ेंगे पूर्व नक्सली, 5 नक्सल प्रभावित और 2 सरेंडर नक्सलियों को सरकारी नौकरी का तोहफा

    मोहला.

    मोहला–मानपुर –अंबागढ़ चौकी जिले में शासन की पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नक्सल पीड़ितों को पुनर्वास नीति का लाभ देने एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। 24 जून को कार्यालय कलेक्टर सभागार में जिला स्तरीय नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलवादी पुनर्वास समिति की बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में समिति के अध्यक्ष कलेक्टर तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय पी सिंह, जिला वनमंडलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में पात्र 5 नक्सल पीड़ितों एवं 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों कुल 7 लोगों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत शासकीय सेवा में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा 1 एक नक्सल पीड़ित परिवार को उसके जीवन यापन करने हेतु 15 लाख रुपए प्रदाय किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा समिति के अध्यक्ष के द्वारा नक्सल पीड़ित परिवारों को भी मीटिंग में सम्मिलित किया गया था जिसमें अध्यक्ष के द्वारा सभी पीड़ितों से बात कर उनकी अन्य योजनाओं के संबंध में जानकारी ली एवं उनके आवेदन अनुसार शीघ्र लाभ प्रदाय सनिश्चित करने हेत संबंधित विभाग को आदेश किया जा गया है।

    जिला पुलिस एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास एवं विश्वास का वातावरण निरंतर मजबूत हो रहा है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। शासकीय नौकरी मिलने से लाभार्थियों को स्थायी रोजगार के साथ समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की राह अपनाने वाले आत्म समर्पित माओवादियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है। जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी 31 मार्च 2026 को पूर्ण रूप से नक्सली मुक्त हो चुका है।

  • 8th Pay Commission लागू होने में अभी वक्त, लेकिन कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है बड़ी राहत

    8th Pay Commission लागू होने में अभी वक्त, लेकिन कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है बड़ी राहत

     नई दिल्‍ली

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है। 

    जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। 

    क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद? 
    दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है। 

    अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा। 

    नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है? 
    आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है। 

    फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई। 

    कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है। 

    अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है? 
    केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।  

    अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा? 
    जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

  • इवानोव की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप, पुतिन के करीबी माने जाने वाले अधिकारी को लेकर रहस्य गहराया

    इवानोव की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप, पुतिन के करीबी माने जाने वाले अधिकारी को लेकर रहस्य गहराया

    मॉस्को

     कभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के उत्तराधिकारी समझे जाने वाले सर्गेई इवानोव की मृत्यु हो गई है. सर्गेई इवानोव रूस के रक्षा मंत्री रह चुके थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वे 73 साल के थे। 

    खास बात यह है कि क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव की मौत शुक्रवार को हुई, लेकिन मौत की वजह या अन्य कोई जानकारी नहीं दी. लेकिन क्रेमलिन इसके बारे में कोई डिटेल नहीं दे रहा है. हालांकि पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. रूस समेत सोशल मीडिया में इस बारे में चर्चा हो रही है। 

    पुतिन ने 2001 में इवानोव को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. इवानोव भी रूस की खुफिया एजेंसी KGB के अधिकारी थे. इवानोव वे 2007 तक इस पद पर रहे और चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान कामकाज संभाला, जिसमें उस इलाके की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया गया था। 

    द सोवियत जेम्स बॉन्ड
    लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने KGB में नौकरी की. यहीं पर पुतिन के साथ उनकी दोस्ती हुई. दोनों KGB के लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में साथ काम करते थे. 1998 में जब पुतिन FSB के प्रमुख बने, तो इवानोव उनके डिप्टी बने. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव ने अहम पद संभाले। 

    इन पदों में सुरक्षा परिषद सचिव, रक्षा मंत्री, प्रथम उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शामिल हैं. वे ‘सिलोविकी’ के प्रमुख चेहरे थे. सिलोविकी सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों के शक्तिशाली समूह को कहा जाता है. एक समय उन्हें पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता था. पुतिन के साथ उनका रिश्ता KGB के दिनों से गहरा और विश्वास-आधारित था. पुतिन उन्हें अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद साथियों में गिनते थे. लेकिन जैसा कि राजनीति में होता है जिससे नजदीकी होती है उसी से अविश्वास भी होता है।  

    इवानोव को रूस के सर्कल में सोवियत जेम्स बॉन्ड कहा जाता था. इवानोव के करियर में हुई तरक्की का काफी हद तक श्रेय पुतिन के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को जाता है. दोनों दोस्त पहली बार 1970 के दशक के आखिर में KGB अफसरों के तौर पर मिले थे. दोनों ने सोवियत जासूसी केंद्रों में काम किया. पुतिन पूर्वी जर्मनी में थे और इवानोव की तैनाती फिनलैंड और केन्या में थी। 

    पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब 'ऑल द क्रेमलिन मेन्स' में लिखा, "वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं. आप उन्हें भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह 'द मैट्रिक्स' के एजेंट स्मिथ जैसे हैं, नाम में भी और शक्ल में भी. "1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां FSB (फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस) और SVR (फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें पाने के लिए होड़ कर रही थीं। 

    SVR में इवानोव को यूरोपीय विभाग का पहला डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और 40 साल की उम्र के शुरुआती दौर में ही वह सबसे कम उम्र के जनरलों में से एक बन गए. लेकिन इस एजेंट को पाने की होड़ में जीत FSB की हुई, जब पुतिन उसके प्रमुख बने. 1998 में उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया. जिससे एजेंसी का एनालिटिकल काम मज़बूत हुआ. जब पुतिन प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इवानोव को रूसी सुरक्षा परिषद का प्रमुख नियुक्त किया। 

    इवानोव पुतिन के उत्तराधिकारियों में से थे
    जब 2008 में पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फ़ैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था.  लेकिन पुतिन ने अपने एक और पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को अपनी जगह काम करने के लिए चुना ताकि 2012 में राष्ट्रपति पद पर वापसी कर सकें। 

    इवानोव की महात्वाकांक्षा और पुतिन का डर
    कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इवानोव बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं। 

    इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन के साथ रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर काम किया। 

    2016 में इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया; इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे ज़्यादातर लोग सम्मानजनक रिटायरमेंट के तौर पर देख रहे थे. उन्होंने इस साल की शुरुआत में यह पद छोड़ दिया। 

    यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं। 

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप: रुबियो

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप: रुबियो

    नई दिल्ली/ वॉशिंगटन
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसको लेकर बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की दिशा में काम चल रहा है और उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में यह दौरा हो सकेगा. IANS की रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन डीसी में भारत-अमेरिका संबंधों पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते शानदार दौर में हैं. उन्होंने बताया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छी मुलाकात हुई थी. दोनों देश अब व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। 

    रुबियो ने कहा, ‘हम ट्रेड डील को अंतिम रूप देने से बस कुछ कदम दूर हैं. बातचीत बेहद सकारात्मक रही है. जल्द ही क्वाड की अगली बैठक भी होगी. मैं खुद इस साल के अंत से पहले भारत जाने की उम्मीद करता हूं और अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी करूंगा.’ यदि ट्रंप अगले साल भारत आते हैं तो दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। 

    रुबियो ने कहा- इस साल के अंत में वे भी भारत का दौरा करेंगे
    व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा, मैं साल के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे की तैयारियों के सिलसिले में भारत की यात्रा करूंगा। भारत-अमेरिका के संबंधों को लेकर रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के संबंध मजबूत स्थिति में हैं और जी7 शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई हालिया मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में बेहतरी हुई है।    

    फरवरी 2020 में ट्रंप ने किया था भारत दौरा
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी बार फरवरी 2020 में भारत का दौरा किया था। उस समय उन्होंने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता से पहले अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप रैली को भी संबोधित किया था। साल 2024 में अमेरिकी सत्ता में दोबारा लौटने के बाद भी ट्रंप ने भारत के साथ बेहतर संबंधों को बढ़ावा दिया है और दोनों देश व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ा रहे हैं। 

    राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी में कई समानताएं
    भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका को असीमित संभावनाओं वाले स्वाभाविक साझेदार बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी व्यक्तिगत संबंधों से भी मजबूती मिल रही है। व्हाइट हाउस में आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में गोर ने भारत में अपने पहले छह महीनों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश की विविधता, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अमेरिका के साथ मजबूत होती साझेदारी ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर उनके विश्वास को और मजबूत किया है। 

    अमेरिकी राजदूत ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच करीबी कार्य संबंधों की भी तारीफ करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव बताया। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में गोर ने कहा, 'वे बेहद ऊर्जावान हैं, हर काम में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते हैं और परिणाम देने पर जोर देते हैं। मुझे उनमें और राष्ट्रपति ट्रंप में कई समानताएं दिखाई देती हैं, क्योंकि दोनों ही खुद नेतृत्व करते हुए काम पूरा कराने में विश्वास रखते हैं।' उन्होंने कहा, 'दोनों की सोच काफी हद तक एक जैसी है और दोनों परिणाम देना चाहते हैं।' भविष्य की प्राथमिकताओं पर गोर ने कहा कि उनका ध्यान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने, रक्षा सहयोग का विस्तार करने और पैक्स सिलिका जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर रहेगा। 

    भारत दौरे पर क्या बोले रुबियो?
    जब उनसे ट्रंप के संभावित भारत दौरे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं. उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति भारत जाएंगे. भारत अमेरिका का बेहद करीबी साझेदार और सहयोगी है.’ रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच जितनी करीबी है, उससे ज्यादा शायद ही किसी और नेता के साथ हो. कूटनीति में ऐसे रिश्ते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। 

    ट्रेड डील पर भी जल्द हो सकता है फैसला
    रुबियो के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. अगर यह समझौता पूरा होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई तेजी मिलेगी। 

    मोदी से ट्रंप के अच्छे संबंध
    मार्को रूबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच बहुत जल्द ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। मैं राष्ट्रपति की यात्रा को अंतिम रूप देने के लिए भारत जा रहा हूं। रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं।

    हम साथ मिलकर कर रहें काम
    भारत, अमेरिका और वेनेजुएला से बातचीत कर रहा है। हम सप्लाई बढ़ाने के लिए बहुत मिलकर काम कर रहे हैं। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके पास भारी कच्चे तेल (heavy crude) को रिफाइन करने की क्षमता है। उन्होंने खुद को पीएम मोदी का प्रशंसक बताते हुए कहा कि मोदी ने भारत को ग्लोबल पावर बनाया है।

    ट्रंप आखिरी बार कब आए थे भारत?
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरी बार फरवरी 2020 में भारत की यात्रा की थी। जब ट्रंप ने अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप रैली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाग लिया था, जिसके बाद दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय चर्चा की थी।

     

  • Gold-Silver Crash: रिकॉर्ड गिरावट से खरीदारों की हुई चांदी, जानें जून में क्यों टूटे सोने-चांदी के दाम

    Gold-Silver Crash: रिकॉर्ड गिरावट से खरीदारों की हुई चांदी, जानें जून में क्यों टूटे सोने-चांदी के दाम

    इंदौर 

    जिन लोगों ने जून से पहले सोना-चांदी खरीदा था, उनके लिए जून का महीना अच्‍छा नहीं रहा है, क्‍योंकि इस महीने के दौरान सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट देखने को मिली है. हालांकि, बहुत से निवेशक अब सोने-चांदी पर खरीदारी को लेकर दांव लगा रहे हैं। 

    जून में सोने-चांदी के दाम में भारी गिरावट तब आई है, जब ईरान-अमेरिका जंग खत्‍म हो चुका है और शांति वार्ता शुरू हो चुकी है. ऐसे में सोने-चांदी के दाम में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन फिर भी ये कीमती धातुएं तेजी से नीचे आई हैं. आइए समझते हैं कि इतनी भारी गिरावट क्‍यों आई है…

    जून में सोने-चांदी के दाम में भारी गिरावट
    मल्‍टी कमोडिटी एक्‍सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत में हर 10 ग्राम पर 17,000 रुपये की गिरावट आई है. यह 29 मई से अब तक 10.36 फीसदी की गिरावट है. इसी तरह चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है. जून महीने के दौरान चांदी 51,000 रुपये कम हो गई है यानी इसमें 18.56 फीसदी की गिरावट आई है. इतनी बड़ी गिरावट के बाद निवेशक सोने-चांदी में दांव लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

    सोने-चांदी के दाम में क्‍यों आई इतनी बड़ी गिरावट? 
    ईरान और अमेरिका के बीच जंग रुकने के बाद सोने और चांदी के भाव में तेजी की उम्‍मीद की जा रही थी, लेकिन फिर अमेकिरकी फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से एक बयान के बाद इसके दाम में भारी गिरावट आई. फेडरल रिजर्व के चेरमैन केविन वॉर्श ने संकेत दिया कि इस साल ब्याज दरों में में बढ़ोतरी हो सकती है. इस संकेत के बाद सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली. वहीं कई एक्‍स्‍पर्ट्स भी फेडरलब रिजर्व की अगली मीटिंग में रेट में बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं, जिस कारण सोने-चांदी में लगातार गिरावट देखी जा रही है। 

    इसके अलावा, निवेशकों ने ऊपरी स्‍तरों से सोने और चांदी में बिकवाली की है और सेफ असेट के बजाय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाया है, जिस कारण सोने की गिरावट और भी बड़ी हो चुकी है।  

    अभी तक कितना गिरा सोना और चांदी? 
    जनवरी 2026 में अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से सोना करीब 29% गिर चुका है. यह टूटकर 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे आ चुका है. वहीं, चांदी में 50% से अधिक की गिरावट आई है. यह 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है। 

     

  • वायरल वीडियो से पाकिस्तान पर फिर उठे सवाल, शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में कथित आतंकी मौजूदगी का दावा

    वायरल वीडियो से पाकिस्तान पर फिर उठे सवाल, शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में कथित आतंकी मौजूदगी का दावा

    इस्लामाबाद

    पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट नहीं बल्कि उनके बड़े भाई शाहिद अख्तर का जनाजा है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि नमाज-ए-जनाजा में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उससे जुड़े राजनीतिक संगठन पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। 

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहिद अख्तर का जनाजा इस्लामाबाद के H-8 कब्रिस्तान में हुआ. वायरल वीडियो में पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग के अध्यक्ष इनाम-उर-रहमान समेत कई लोगों के दिखाई देने का दावा किया गया है. सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि वीडियो PMML से जुड़े आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। 

    इनाम-उर-रहमान का नाम पहले भी चर्चा में रहा है. पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग को लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद से जुड़ा राजनीतिक मंच बताया जाता रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल कुछ तस्वीरों में इनाम-उर-रहमान को पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी के साथ भी दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है। 

    हाफिज सईद करीबी थे शामिल 
    शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर के जनाजे में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की पॉलिटिकल पार्टी से जुड़े नेताओं की मौजूदगी देखी गई. जिसमें आतंकी हाफिज सईद के कई करीबी हुए जनाजे में शामिल हुए हैं. पीएमएमएल इस्लामाबाद के अध्यक्ष इनाम-उर-रहमान कम्बोह के शामिल होने की तस्वीरें सामने आई हैं. यह तस्वीरें और वीडियो लश्कर-ए-तैयबा  और पीएमएमएल की तरफ से आधिकारिक रूप से जारी किया गया है. शहीद अख्तर की जनाजे की नमाज पर पाकिस्तान सेंट्रल मुस्लिम लीग इस्लामाबाद के अध्यक्ष इनाम-उर-रहमान कंबोह, उप महासचिव अब्दुल्ला तूर, जोनल महासचिव हाफिज उमर, खिदमत कमेटी के अध्यक्ष अमजद भट्टी और अन्य मित्र उपस्थित थे। 
    कौन-कौन थे शामिल 
    शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में इनाम उर रहमान काम्बोह दिखा था. यह इस्लामाबाद में संगठन का बड़ा चेहरा है. जिसके साथ कई जनाजे में शामिल दूसरे लोग भी लश्कर ए तैयबा से जुड़े हैं. बता दें कि पीएमएमएल पार्टी आतंकी हाफिज सईद के समर्थन से बनी पार्टी मानी जाती है. क्योंकि उसके संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिबंध लग चुका है. ऐसे में पाकिस्तान की राजनीति में एक्टिव रहने के लिए हाफिज सईद के समर्थन से पीएमएमएल को बनाया गया था. लेकिन इस पार्टी से जुड़े लोग जब शोएब अख्तर के जनाजे में पहुंचे तो सवाल उठना लाजिमी है। 

    नेशनल असेंबली के स्पीकर और आतंकी भी जनाजे में शामिल
    इसी बीच पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक भी शोएब अख्तर के घर पहुंचे और शाहिद अख्तर के निधन पर परिवार के प्रति संवेदना जाहिर की. नेशनल असेंबली की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि स्पीकर ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस दुख की घड़ी में हिम्मत देने की कामना की। 

    आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं
    जनाजे में कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोगों की मौजूदगी के दावों ने पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों और उनके राजनीतिक नेटवर्क को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आरोप लगते रहे हैं कि कुछ प्रतिबंधित संगठन अलग-अलग नामों और मंचों के जरिए अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं। 

    बता दें कि शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर की मौत के बाद पाकिस्तान में बड़ी-बड़ी हस्तियों ने दुख जताया है. देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी शोक संदेश भेजा है. जबकि पाकिस्तान की राजनीति से जुड़े दूसरे कई लोग और सेलिब्रिटीज और क्रिकेटर्स ने भी दुख जताया है. लेकिन जनाजे में पीएमएमएल और लश्कर ए तैयबा से जुड़े लोगों के पहुंचने से अब सवाल खड़े हो रहे हैं. क्योंकि पाकिस्तान में शोएब अख्तर बड़ा नाम माने जाते हैं। 

  • अमृतसर में बड़ा धार्मिक समागम आज, CM मान-केजरीवाल रहेंगे मौजूद; हंसराज रघुवंशी के कार्यक्रम को लेकर ट्रैफिक प्लान जारी

    अमृतसर में बड़ा धार्मिक समागम आज, CM मान-केजरीवाल रहेंगे मौजूद; हंसराज रघुवंशी के कार्यक्रम को लेकर ट्रैफिक प्लान जारी

     अमृतसर

    मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आज अमृतसर आएंगे। वे पाइटेक्स ग्राउंड, रंजीत एवेन्यू में आयोजित भगवान शिव के नाम एक शाम कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी भगवान शिव की महिमा का गुणगान करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सनातन सेवा समिति पंजाब तथा पंजाब सरकार के पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है।

    कार्यक्रम शनिवार शाम 6:30 बजे शुरू होगा। संत-महापुरुषों, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजन में प्रवेश सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः निःशुल्क रहेगा।

    कार्यक्रम स्थल पर विशाल मंच और भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने, पेयजल, पार्किंग, चिकित्सा एवं सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

    शुक्रवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सलाहकार दीपक बाली, जिलाधीश दलविंदरजीत सिंह, पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर तथा सनातन सेवा समिति पंजाब के अध्यक्ष विजय शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया और तैयारियों की समीक्षा की। 

    मुख्यमंत्री मान और केजरीवाल करेंगे शिरकत
    राज्य स्तरीय इस कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी विशेष रूप से शामिल होंगे। दोनों नेता भगवान शिव के चरणों में मत्था टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना करेंगे।

    समय पर पहुंचने की अपील
    पंजाब सरकार के अनुसार, इस राज्य स्तरीय धार्मिक समागम का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सहायता सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। आज शाम होने वाले इस समागम को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। आयोजकों ने लोगों से समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

    4 पॉइंट्स में पढ़ें जारी ट्रैफिक एडवाइजरी:-
        एडीसीपी ट्रैफिक अमनदीप कौर ने बताया कि हरतेज अस्पताल से गुमटाला रोड और टी-पॉइंट (इन-आउट बेकरी) से कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मार्ग पर विशेष ट्रैफिक प्रबंधन लागू रहेगा। आम लोगों से अपील की गई है कि अत्यंत आवश्यक कार्य न होने पर इन मार्गों का उपयोग करने से बचें।

        रंजीत एवेन्यू जाने वाले वाहन चालक रतन सिंह चौक, एम.के. होटल रोड, बेस्ट वेस्टर्न रोड और सी-मार्केट टी-पॉइंट से होकर जाने वाले वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें। वहीं, शहर के बाहर से आने वाले लोगों को आईटीआई–आनंद पार्क मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

        कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि प्रमुख चौराहों पर पुलिस कर्मी लगातार निगरानी रखेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने या किसी भी प्रकार की शरारती गतिविधि में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त और तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

        ट्रैफिक पुलिस ने शहरवासियों और श्रद्धालुओं से ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने, निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करने तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों का सहयोग करने की अपील की है। इससे धार्मिक समागम के शांतिपूर्ण संचालन के साथ लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं
    सरकार की ओर से आयोजन स्थल पर पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष प्रबंध किया गया है। आयोजकों ने लोगों से समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

    ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव
    कार्यक्रम के दौरान रंजीत एवेन्यू और आसपास के इलाकों में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहेगा। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार हरतेज अस्पताल से गुमटाला रोड तथा इन-आउट बेकरी टी-पॉइंट से कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया जाएगा।

  • मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा- चिंता मत करिए, सबकी समस्या पर सुनिश्चित होगी प्रभावी कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा- चिंता मत करिए, सबकी समस्या पर सुनिश्चित होगी प्रभावी कार्रवाई

    जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान कराएं अधिकारी: मुख्यमंत्री

    जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने

     मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा- चिंता मत करिए, सबकी समस्या पर सुनिश्चित होगी प्रभावी कार्रवाई

    गोरखपुर
    गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की हर समस्या का शीघ्र समाधान कराएं। लोगों की शिकायतों को संवेदनशीलता से लेकर संतुष्टिप्रद निस्तारण सुनिश्चित कराने में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए। सरकार सबकी समस्या पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।

    जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर लगी कुर्सियों पर बैठे लोगों तक सीएम स्वयं चलकर पहुंचे और सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने सबके प्रार्थना पत्रों को पास में खड़े अधिकारियों को हस्तगत कर समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, सबकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। 

    जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। हृदय रोग से पीड़ित एक महिला से उन्होंने कहा कि इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। सीएम योगी ने जमीन कब्जे से जुड़ी शिकायतों पर अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में त्वरित व कड़े कदम उठाए जाएं। जमीन कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।