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  • बस्तर के विकास को नई रफ्तार, जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं लक्ष्मी राजवाड़े

    बस्तर के विकास को नई रफ्तार, जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं लक्ष्मी राजवाड़े

    नवविकास की राह पर अग्रसर बस्तर :जगरगुण्डा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनी  लक्ष्मी राजवाड़े

    कभी नक्सल प्रभाव का प्रतीक रहे इलाकों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत

    रायपुर
    बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर विकास, विश्वास और जनसहभागिता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे सुदूर अंचलों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आजीविका के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इसी परिवर्तनशील बस्तर की तस्वीर को और सशक्त करने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूर्वर्ती और सिलगेर पहुंचीं।

    विशेष महत्व की बात यह रही कि श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में उनका आगमन विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति का प्रतीक बनकर उभरा।
    दौरे के दौरान मंत्री ने पूर्वर्ती एवं सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया तथा अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय समय बिताया, ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण चर्चा में रहते थे, वहीं आज महिला स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और नई संभावनाओं का सृजन कर रही हैं।

    प्रवास के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा स्थित कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    ग्रामीण महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि पहली बार कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे जगरगुंडा पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संवाद करने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत करने वाली है तथा यह अनुभव कराती है कि विकास की मुख्यधारा अब वास्तव में उनके गांव तक पहुंच चुकी है।

    श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण निर्मित हुआ है। जगरगुंडा, पूर्वर्ती और सिलगेर जैसे क्षेत्रों में आज बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएं बदलते बस्तर की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।

  • राज्यपाल पटेल बोले- विभिन्न राज्यों के लोगों से मजबूत होती है ‘विविधता में एकता’ की भावना

    राज्यपाल पटेल बोले- विभिन्न राज्यों के लोगों से मजबूत होती है ‘विविधता में एकता’ की भावना

    विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल

    हमारी आत्मीयता, साम्यता का मंच स्थापना दिवस
    लोक भवन में मनाया गया पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारत की विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में शक्कर घुल जाती है, उसी तरह से मध्यप्रदेश में बंगाल के मूल निवासी घुल मिल गये हैं। हमारी अनेकता में एकता की आत्मीयता और साम्यता को राज्य स्थापना दिवस के आयोजन साकार करते है। आयोजन के मंच पर हमारी वेशभूषा, गीत, नृत्य में समाई हमारी सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक मिलती है। पश्चिम बंगाल की प्रस्तुतियों में उन्हें गुजरात के गरबा नृत्य और वेशभूषा में असम राज्य की झलक दिखाई दी।

    राज्यपाल पटेल आज लोकभवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के प्रसंग में आयोजित समारोह में सम्मिलित भोपालवासी बंगाली मूल के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न कालीबाड़ियों के सदस्य उपस्थित थे।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़, राष्ट्रीय एकात्मकता को नई शक्ति प्रदाय करने और राज्यों के मध्य परस्पर सांस्कृतिक संवाद, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रयास अद्भुत है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने गत वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। पर्व में सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक दलों और बच्चों की सहभागिता से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मंच प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में 300 बच्चों ने कार्यक्रम में सहभागिता की थी। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को समृद्ध बनाने में बंगाल राज्य का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विगत वर्षों से देश की युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार विकसित भारत निर्माण के लिए युवाओं के साथ संवाद करते हैं। लोक भवन के  आयोजन में 7 से 60 साल के कलाकारों की सहभागिता और महिलाओं की बहुलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बदलते भारत की झलक और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

    कार्यक्रम में श्रीमती सपना गुहा ने स्वागत उद्बोधन में बंगाल की समृद्ध परम्पराओं, सांस्कृतिक विरासत के साथ ग्रामीण जन जीवन की सरलता और सांस्कृतिक छटा की रुपरेखा प्रस्तुत की सांस्कृतिक आयोजन की सूत्रधार श्रीमती महुआ चटर्जी ने “हमारा बंगाल रे” की थीम पर बंगाल के लोकगीत, नृत्य और जन जीवन को बाउल, झूमर, धमाइल, भटयाली लोक संगीत की प्रस्तुति के द्वारा सभागार में पश्चिम बंगाल के जन जीवन को जीवंत कर दिया।

    कार्यक्रम के प्रारम्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का स्थापना दिवस का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया।

    राज्यपाल का कार्यक्रम में बंगाली समाज के सचिव सर्वसलिल चटर्जी, निलॉय घोष ने अभिनन्दन किया। आभार प्रदर्शन डा. एन. बनर्जी ने किया। संचालन सहायक सत्कार अधिकारी सुसृष्टि श्रीवास्तव ने किया।

     

  • CM डॉ. मोहन यादव बोले- शालिगराम जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित किया

    CM डॉ. मोहन यादव बोले- शालिगराम जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित किया

    राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर और अरविंद मोघे सम्मानित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. शालिगराम तोमर राष्ट्र सेवी थे। उन्होंने राष्ट्र की सेवा करने वाले अनेक कार्यकर्ता भी तैयार किए। राष्ट्र सेवा और राष्ट्रसेवियों का निर्माण उनके जीवन का प्रमुख ध्येय था। वे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अनूठा परिवार भाव रखते थे। उनकी कार्य शैली से युवा सहज ही उनके सेवा प्रकल्पों के साथ जुड़ जाते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मानस भवन में स्व. शालिगराम तोमर स्मृति राष्ट्र सेवी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। नवलय संस्था द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर पुणे और अरविंद मोघे को सम्मानित किया गया। दोनों समाज सेवियों ने विद्यार्थी परिषद, श्रमिक कल्याण, वनवासी कल्याण के साथ ही अनेक सामाजिक क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. शालिगराम तोमर ने एक कक्ष के कार्यालय से संगठन से कार्य करते हुए उसे विराट रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। उनके आदर्श जीवन से हजारों लाखों युवाओं ने प्रेरणा ली और सामाजिक क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित समाज सेवियों को बधाई दी और संस्था के उद्देश्यों एवं सम्मान कार्यक्रम की सराहना की। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के जीवन को संवारने में स्व. शालिगराम का समर्पण और सहयोग यादगार रहेगा। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्व. शालिगराम के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाये। सेवानिवृत्त न्यायाधीश और संगठन पदाधिकारी अशोक पांडे ने कहा कि स्व. शालिगराम राष्ट्र सेवा का भाव रखते थे। राज्यसभा सदस्य रजनीश अग्रवाल ने नवलय संस्था को एक प्रेरणापुंज की स्मृति में सम्मान स्थापित करने के लिए बधाई दी। महासमुंद छत्तीसगढ़ से आए डॉ. विमल चोपड़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने सम्मान के लिए चयनित समाज सेवियों देवधर और मोघे को एक लाख रूपए की सम्मान निधि, शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। दोनों समाजसेवियों के प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया गया।

    कार्यक्रम में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, वरिष्ठ समाज सेवी शशि भाई सेठ, विभीषण सिंह, अनेक लोकतंत्र सेनानी, नागरिक और समाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

     

  • सरकारी कर्मचारियों के लिए Good News! 8वें वेतन आयोग से पहले एक और DA बढ़ोतरी की उम्मीद

    सरकारी कर्मचारियों के लिए Good News! 8वें वेतन आयोग से पहले एक और DA बढ़ोतरी की उम्मीद

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनसे जुड़े सभी हितधारक इस समय दो बड़े फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। पहला, महंगाई भत्ते (DA) में संशोधन की घोषणा और दूसरा, 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रही प्रगति। चूंकि 8वां वेतन आयोग अभी विचार-विमर्श के दौर में है, इसलिए मौजूदा 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत जल्द ही एक और डीए में इजाफे की घोषणा हो सकती है। डीए में बढ़ोतरी सेवारत कर्मचारियों और पेंशनर्स को साल में दो बार दी जाती है। आइए, 26 जून 2026 तक के सबसे ताजा अपडेट को समझते हैं…

    DA की चर्चा क्यों हो रही है?
    महंगाई भत्ते में संशोधन साल में दो बार किया जाता है, एक बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में। ऐसा बढ़ती जीवन लागत की भरपाई के लिए किया जाता है और सरकार इसे केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लाभ के लिए प्रदान करती है। यह संशोधन अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत से जुड़ा होता है।

    चूंकि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हुई हैं, कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत ही डीए संशोधन मिलता रहेगा। जुलाई 2026 के डीए संशोधन की आज व्यापक चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि महंगाई और CPI-IW के ट्रेंड एक और इजाफे की ओर इशारा कर रहे हैं।

    महंगाई के लेटेस्ट आंकड़े क्या बताते हैं?
    सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़े साफ दिखाते हैं कि खुदरा महंगाई लगातार ऊंची बनी हुई है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें अब भी अहम वजह बनी हुई हैं। मई 2026 में खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 की तुलना में बढ़ गई। समग्र सीपीआई मुद्रास्फीति मई में 3.93 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 3.48 प्रतिशत से अधिक है।

    ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 3.74 प्रतिशत से बढ़कर 4.25 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी महंगाई 3.16 प्रतिशत से उछलकर 3.53 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य महंगाई भी अप्रैल के 4.20 प्रतिशत के मुकाबले मई में 4.78 प्रतिशत दर्ज की गई।

    महंगाई में खासकर खाने-पीने की कीमतों में आई यह तेजी इस उम्मीद को बल देती है कि सरकार जल्द ही डीए में एक और संशोधन और समायोजन पर विचार कर सकती है। हालांकि, अंतिम वृद्धि का निर्णय सीपीआई-आईडब्ल्यू के आंकड़ों और कैबिनेट की मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।

    अभी कितना महंगाई भत्ता मिल रहा है और कितना बढ़ सकता है?
    सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस समय नवीनतम संशोधन के बाद मूल वेतन का 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। जुलाई 2026 की डीए वृद्धि की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जबकि महीना शुरू होने में बस कुछ ही दिन बाकी हैं।

    मुद्रास्फीति के रुझानों और CPI-IW की गतिविधियों के आधार पर 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद बन रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ा आधिकारिक गणना और केंद्र सरकार के अपडेट के बाद ही तय होगा। यह लाभ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

    8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठनों की क्या मांगें हैं?
    पिछले कुछ महीनों से कर्मचारी संघों, स्टेक होल्डर ग्रुप्स और विभिन्न संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें महंगाई से निपटने के लिए उच्च न्यूनतम वेतन, कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने, भत्तों में संशोधन और भुगतान ढांचे में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। केंद्रीय सरकारी कर्मचारी एवं कामगार परिसंघ ने ज्यादा न्यूनतम वेतन, बेहतर पेंशन लाभ और भत्तों की समीक्षा की बात रखी है।

    ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन ने सैलरी स्ट्रक्चर में संशोधन, विसंगतियों को दूर करने और बेहतर सेवा लाभों की मांग की है। वहीं, नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (NJCA) से जुड़े समूह बेहतर फिटमेंट फैक्टर, वेतन असमानताओं में सुधार और कर्मचारी-हितैषी सुधारों पर जोर दे रहे हैं।

    कर्मचारी समूहों का मानना है कि अगली वेतन संरचना तय करते समय बढ़ती लागत, लगातार बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों का मनोबल, उनकी आजीविका का भविष्य और जीवन-यापन के खर्चों में हो रहे बदलावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया पर ताजा अपडेट
    8वां वेतन आयोग अब विचार-विमर्श के चरण में प्रवेश कर चुका है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद से इसे सात महीने पूरे हो चुके हैं। आयोग सिफारिशें तैयार करने से पहले फीडबैक जुटाने के लिए दिल्ली, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों से मुलाकात कर रहा है।

    हाल ही में 22-23 जून 2026 को लखनऊ में बैठकें हुईं, जिनमें कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों और वेतन संबंधी चिंताओं पर चर्चा की गई। आयोग के ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी विचार-विमर्श जारी रखने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है और फिटमेंट फैक्टर, संशोधित सैलरी मैट्रिक्स, पेंशन सुधार या लागू होने की तारीख को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

  • TMC में बगावत पर ममता बनर्जी सख्त, कहा- पार्टी से गद्दारी मां के साथ धोखे के बराबर

    TMC में बगावत पर ममता बनर्जी सख्त, कहा- पार्टी से गद्दारी मां के साथ धोखे के बराबर

    कलकत्ता

    तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को खरी-खरी सुनाई है. उत्तर कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में ममता ने पार्टी छोड़कर जाने वालों और दल बदलने वाले विधायकों-सांसदों और पार्षदों को 'गद्दार' करार दिया है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को पहचान और सम्मान दिया, मुश्किल समय में उसे छोड़ देना वैसा ही है जैसे कोई अपनी बीमार मां का साथ छोड़ दे। 

    ममता बनर्जी ने कहा, 'जिस मां ने आपको पूरी जिंदगी पाला-पोसा, जब वही मां बीमार पड़ जाए तो उसकी सेवा करने से इनकार कर देना सबसे बड़ा विश्वासघात है. गद्दारों के लिए कोई माफी नहीं है. आज वे खुद को बचा सकते हैं, लेकिन आने वाले समय में जनता भी उनसे हिसाब मांगेगी और पार्टी के कार्यकर्ता भी। 

    मौजूद राजनीतिक माहौल डर और आर्थिक संकट से भरा

    बैठक की शुरुआत में कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए ममता ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को डर और आर्थिक संकट से भरा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार विपक्ष को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा, 'हर तरफ दमन का माहौल है. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. लोग डर के कारण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं. फुटपाथ दुकानदारों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं. कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनके सपने टूट रहे हैं। 

    ममता ने दावा किया कि इस संकट का सामना केवल एकजुट तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पैदा किए गए इस माहौल में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, बीएलओ और जमीनी कैडर ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया है. 'आज जो लोग सत्ता में हैं, उनकी सफलता के पीछे हमारे कार्यकर्ताओं का खून-पसीना और बलिदान है। 

    पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य
    टीएमसी प्रमुख ने दल-बदलने वाले नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने खिलाफ चल रहे मामलों और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम रहे हैं. उन्होंने कहा, 'कुछ लोग सिर्फ खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं. उनमें धैर्य नहीं है. जिनके खिलाफ हम लड़ते रहे, उन्हीं के साथ जाकर खड़े हो गए. अगर वे सीधे भाजपा में चले जाते तो हमें इतनी आपत्ति नहीं होती, लेकिन पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य है। 

    उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो दावा करते हैं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए पार्टी छोड़ी. ममता ने कहा, 'वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए गए हैं, लेकिन अपने ही इलाके में एंट्री नहीं कर पा रहे. वे कार्यकर्ताओं को नहीं, बल्कि अपनी दौलत बचाने गए हैं. क्या वे आपका पैसा वापस लाएंगे? नहीं. उन्होंने धर्म, सांप्रदायिक सौहार्द और मूल्यों तक का सौदा कर दिया है और अब अहंकार के साथ घूम रहे हैं। 

    ममता बनर्जी ने बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी जिन लोगों में समझ बाकी है, वे वापस लौट आएं. उन्होंने कहा, 'जो लोग सोच रहे हैं कि वे इस रास्ते पर चलकर बच जाएंगे, वे अंत में कहीं के नहीं रहेंगे. न इधर के रहेंगे, न उधर के। 

    जमीनी कार्यकर्ताओं को बताया महत्वपूर्ण
    अपने भाषण में ममता ने बार-बार पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, 'कार्यकर्ता नेता बनाते हैं और नेता कार्यकर्ताओं को तैयार करते हैं. मैं हर दिन अपने कार्यकर्ताओं से मिलती हूं और वे मजबूती से हमारे साथ खड़े हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, वे कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान से लाभ उठाकर आज व्यक्तिगत हितों के लिए दल बदल रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमने खून बहाया, संघर्ष किया. जो कठिन समय में हमारे साथ नहीं रहे, अगर वे पार्टी नहीं छोड़ते तो भाजपा हमारे कार्यकर्ताओं पर इतना अत्याचार करने की हिम्मत नहीं करती। 

    ममता ने पुलिस और मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पुलिस का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा.'क्या पुलिस का काम लोगों से कहना है कि गाड़ी लेकर आए हैं, बैठो और उस शैतान के पास चले जाओ? पुलिस का कर्तव्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है। 

    उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को सभाओं और रैलियों की अनुमति नहीं दी जा रही है और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. क्या भाजपा का मतलब 'वन पार्टी, वन नेशन' है? हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 

    ममता बनर्जी ने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विश्वासघात की वजह से उन्होंने अपने दो भाइयों से संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा. उन्होंने कहा कि अभिषेक को लगातार सीआईडी, ईडी और सीबीआई के समन मिलते रहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. "मैं एयरपोर्ट जाती हूं तो भी उन्हें पहले से पता चल जाता है कि मैं कहां जा रही हूं। 

    भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को होने वाली टीएमसी की शहीद दिवस रैली को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा, 'इस रैली का आयोजन आसान नहीं होता, इसमें बहुत मेहनत और संघर्ष लगता है. लेकिन अगर सिर्फ पांच कार्यकर्ता भी आएंगे, तब भी हम यह सभा करेंगे. हमने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया. 21 जुलाई के बाद सभी लोग एकजुट होकर आगे बढ़ें। 

    उन्होंने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे 'संविधान हत्या दिवस' का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि 'आज संविधान और कानून का राज कहां है? लोग पुलिस के जरिए डराए और धमकाए जा रहे हैं. ऐसे समय में केवल जनता और हमारे कार्यकर्ता ही एकजुट होकर इसका मुकाबला कर सकते हैं। 

    ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं और पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है. ऐसे में 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से पहले ममता ने अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की। 

  • Monsoon in MP: 15 जिलों में बारिश से राहत, भोपाल-उज्जैन में जल्द दस्तक; ग्वालियर-चंबल और रीवा-सागर में होगी देरी

    Monsoon in MP: 15 जिलों में बारिश से राहत, भोपाल-उज्जैन में जल्द दस्तक; ग्वालियर-चंबल और रीवा-सागर में होगी देरी

     भोपाल
    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे प्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। संभावना है कि मानसून इसी दौरान भोपाल और उज्जैन संभाग तक पहुंच जाएगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में मानसून सबसे आखिर में दस्तक देगा। इस बीच शुक्रवार को प्रदेश के 45 जिलों में तेज हवा और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

     दो जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना
    मौसम विभाग ने आगर-मालवा और सीहोर में 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की रफ्तार से आंधी और तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर समेत कई जिलों में हल्की से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके विपरीत ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क रहने और धूप निकलने के आसार हैं।

    शाजापुर में सबसे ज्यादा बरसात
    गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई। सबसे अधिक 51 मिमी (दो इंच से ज्यादा) वर्षा शाजापुर में दर्ज की गई, जबकि श्योपुर और बालाघाट में भी करीब आधा इंच पानी गिरा। इंदौर, खंडवा, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, खरगोन और मैहर सहित कई जिलों में तेज हवा के साथ बारिश हुई।

    बारिश से तापमान में आई गिरावट
    लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। खरगोन सबसे ठंडा जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बैतूल, सिवनी, खंडवा, धार और नर्मदापुरम सहित कई जिलों में पारा सामान्य से नीचे रहा। बड़े शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री, इंदौर 33.9 डिग्री, उज्जैन 33.8 डिग्री, जबलपुर 38.1 डिग्री और ग्वालियर 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    15 जिलों में हुई बारिश
    गुरुवार को शाजापुर और नर्मदापुरम में करीब 2 इंच बारिश हुई। श्योपुर, रायसेन और सागर में सवा इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं गुना में 1 इंच, पचमढ़ी में पौन इंच और बालाघाट में करीब आधा इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, बैतूल, राजगढ़, रतलाम, शिवपुरी, मैहर और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहा।

    बिजली गिरने से बुजुर्ग की मौत
    शाजापुर में आकाशीय बिजली गिरने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। वहीं लगातार बारिश को देखते हुए इंदौर के जोखिम वाले पर्यटन स्थलों पर 22 अगस्त तक पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है।

    कई शहरों में तापमान गिरा
    बारिश के बाद प्रदेश के कई शहरों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया। खरगोन सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं भोपाल में 32.8 डिग्री, इंदौर में 33.9 डिग्री, उज्जैन में 33.8 डिग्री, जबलपुर में 38.1 डिग्री और ग्वालियर में सबसे अधिक 40.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    अभी भी सामान्य से कम बारिश
    मानसून की सक्रियता बढ़ने से प्रदेश में वर्षा की कमी कुछ कम हुई है। एक जून से अब तक सामान्य रूप से 91.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 52.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यानी प्रदेश अभी भी सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश पर है। हालांकि 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी, जिससे स्पष्ट है कि हाल की बारिश ने स्थिति में करीब सात प्रतिशत सुधार किया है।

    किन जिलों में कम और कहां ज्यादा बारिश
    अब तक अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, श्योपुर, बुरहानपुर, इंदौर, शाजापुर और सीहोर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    15 जिलों तक पहुंच चुका है मानसून
    अब तक मानसून प्रदेश के 15 जिलों-आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी में प्रवेश कर चुका है। इन जिलों के कई क्षेत्रों में चार इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। 

  • चांदी में भारी गिरावट! 4% से ज्यादा लुढ़के भाव, आखिर चीन का क्या है कनेक्शन?

    चांदी में भारी गिरावट! 4% से ज्यादा लुढ़के भाव, आखिर चीन का क्या है कनेक्शन?

    नई दिल्ली

    भारत के बाजार जहां मुहर्रम की वजह से बंद हैं वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में चांदी के भाव में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। आज यानी शुक्रवार (26 जून) को कॉमेक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कॉमेक्स सिल्वर में और भी तेज बिकवाली देखी गई और यह 4.44 प्रतिशत गिरकर 55.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि इसका पिछला बंद भाव 58.025 डॉलर प्रति औंस था।

    वहीं, कॉमेक्स गोल्ड 44.80 डॉलर यानी 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,002.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान इसने 4,001.20 डॉलर प्रति औंस का निचला स्तर भी छुआ।

    यह गिरावट सोने के लिए लगातार चौथे साप्ताहिक नुकसान की ओर इशारा करती है। हाल के अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कीमतों में दबाव अभी भी बना हुआ है, जिससे निवेशकों का ध्यान फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा पर केंद्रित हो गया है।

    क्यों गिर रहे सोने-चांदी के दाम
    चीन से आई सुस्त मांग की खबर:
    रॉयटर्स की खबर के मुताबिक चीन के हांगकांग के माध्यम से सोने के शुद्ध आयात में मई के दौरान लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक से भौतिक मांग के कमजोर पड़ने का संकेत है। चीन से कम मांग की खबर ने भी वैश्विक सोने के बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।

    महंगाई ने बढ़ाई फेड की चिंता: गुरुवार (25 जून) को जारी आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका में मई के दौरान महंगाई तीन वर्षों में पहली बार 4 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव के चलते बढ़ती ऊर्जा कीमतें रहीं। मुद्रास्फीति में यह तेज वृद्धि उन उम्मीदों को मजबूत करती है कि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त करना जारी रख सकता है।

    फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: फेड अधिकारियों ने भी सतर्क रुख अपनाया है। शिकागो फेड प्रेसिडेंट ऑस्टेन गूल्सबी ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति में कुछ सुधार के बावजूद, मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी ऊंचा बना हुआ है। वहीं, न्यूयॉर्क फेड प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर है।

    CME FedWatch के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर्स अब इस वर्ष तीन ब्याज दर वृद्धि की संभावना जता रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में सितंबर में दर वृद्धि की उम्मीदें तेजी से बढ़ी हैं। ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर पड़ता है, क्योंकि निवेशक उनकी बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

    मजबूत डॉलर ने बढ़ाई कीमतों पर मुश्किल: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त की ओर बढ़ रहा है, जो सोने-चांदी के लिए एक और नकारात्मक संकेत है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है और कीमतों में गिरावट आती है। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती वैश्विक बाजारों में निवेशकों के जोखिम उठाने के रुख को भी प्रभावित करती है।

    जियो-पॉलिटिकल टेंशन का बाजार पर असर: जियो-पॉलिटिकल टेंशन भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने एक जहाज पर हमले की रिपोर्ट के बाद होर्मुज के माध्यम से जहाजों के संरक्षण अभियानों को रोक दिया है। इस घटना ने अमेरिका-ईरान के नाजुक शांति समझौते को लेकर नई अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं। इस तरह की घटनाओं से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बना रहता है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

    अमेरिकी PCE डेटा पर टिकी निगाहें: बाजार सहभागी अब आगामी अमेरिकी PCE (व्यक्तिगत उपभोग व्यय) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह डेटा ब्याज दरों की उम्मीदों और कीमती धातुओं की दिशा के लिए अतिरिक्त संकेत प्रदान कर सकता है। PCE, फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति मापक माना जाता है, इसलिए इसके आंकड़ों का बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

     

  • मध्यप्रदेश राजनीति: निर्मला सप्रे दल-बदल विवाद में कांग्रेस को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने स्पीकर को आदेश देने से किया मना

     जबलपुर
    हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े बहुचर्चित दल-बदल विवाद में कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को इस मामले का शीघ्र निपटारा करने अथवा कोई विशेष निर्देश जारी करने से इन्कार करते हुए याचिका निरस्त कर दी।

    कोर्ट ने साफ किया कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत दायर आवेदन पर विधिसम्मत सुनवाई जारी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। ऐसे में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

    उमंग सिंघार ने दायर की थी याचिका
    दरअसल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि कांग्रेस से निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई कर उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच साझा कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हुईं और व्यवहारिक रूप से भाजपा का समर्थन करती रहीं।

    विधायक सप्रे ने कहा कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली
    वहीं विधायक सप्रे ने जवाब में कहा कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। राज्य शासन ने भी कोर्ट को अवगत कराया कि विधानसभा अध्यक्ष मामले की सुनवाई कर रहे हैं और कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिससे न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़े।

    18 जून को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे सार्वजनिक कर दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, विधायक सप्रे की ओर से अधिवक्ता संजय अग्रवाल तथा याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पैरवी की।

    लंबे समय से लंबित है मामला, अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे : उमंग सिंघार
    हाई कोर्ट जबलपुर द्वारा सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध दलबदल संबंधी मामले में विधानसभा अध्यक्ष को शीघ्र निराकरण के निर्देश के साथ याचिका निरस्त होने के बाद अब कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि लंबे समय से मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट में निर्णय के लिए याचिका लगाई गई थी। नियम कहता है कि अध्यक्ष को आवेदन पर 90 दिनों में निर्णय करना है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई जाएगी।

     

  • Passport Fee Hike: अब पासपोर्ट बनवाने पर ₹2,000 तक ज्यादा खर्च, 1 जुलाई से लागू होंगे नए नियम

    Passport Fee Hike: अब पासपोर्ट बनवाने पर ₹2,000 तक ज्यादा खर्च, 1 जुलाई से लागू होंगे नए नियम

     नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और उससे जुड़ी सर्विस की फीस में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण माने जाने को लेकर बहस चल रही है. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए इसे अगले महीने से ही लागू करने के निर्देश दिए हैं। 

    साल 2012 में आखिरी बार हुआ था फीस में बदलाव
    नए नियमों के तहत 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट के नए शुल्क लागू होंगे. इस बदलाव के तहत अब पासपोर्ट बनवाना दो हजार रुपये तक महंगा पड़ सकता है. इससे पहले साल 2012 में आखिरी बार पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ाई गई थी. इस तरह ये बदलाव 14 साल बाद हुआ है। 

    सरकार ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद नया पासपोर्ट बनवाने, पासपोर्ट रिन्यू कराने और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए संशोधित शुल्क देना होगा. इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची (शेड्यूल-IV) को हटाकर नई शुल्क सूची लागू कर दी जाएगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 1 जुलाई 2026 से सभी पासपोर्ट सेवाओं पर नए शुल्क लागू होंगे। 

    फीस में कितना हुआ बदलाव

    1 जुलाई से पासपोर्ट शुल्क में बदलाव, जानिए अब कितना देना होगा
     
    36 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
    पहले: ₹1,500 → अब: ₹2,500 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,500 → अब: ₹5,000 (तत्काल)

    60 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
    पहले: ₹2,000 → अब: ₹3,500 (नॉर्मल)
    पहले: ₹4,000 → अब: ₹6,000 (तत्काल)

    36 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
    पहले: ₹1,500 → अब: ₹5,000 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,500 → अब: ₹7,500 (तत्काल)

    60 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
    पहले: ₹2,000 → अब: ₹6,000 (नॉर्मल)
    पहले: ₹4,000 → अब: ₹8,500 (तत्काल)

    18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 36 पेज का पासपोर्ट:
    पहले: ₹1,000 → अब: ₹1,750 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,000 → अब: ₹4,250 (तत्काल)

    नाबालिगों का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
    पहले: ₹1,000 → अब: ₹4,250 (नॉर्मल)
    पहले: ₹3,000 → अब: ₹6,750 (तत्काल)

  • ED Action: मंत्री संजीव अरोड़ा की ₹55.57 करोड़ की संपत्ति कुर्क, Hampton Sky Realty और दुबई कनेक्शन की जांच तेज

    ED Action: मंत्री संजीव अरोड़ा की ₹55.57 करोड़ की संपत्ति कुर्क, Hampton Sky Realty और दुबई कनेक्शन की जांच तेज

    लुधियान 

    प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई करते हुए पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ी कंपनी मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (पूर्व नाम-मैसर्स रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) और संबंधित लोगों की 55.57 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क हुई कुर्क। 

    यह कार्रवाई कथित तौर पर मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दुबई की जिन कंपनियों के नाम पर मोबाइल निर्यात के बिल बनाए गए, वे भी कथित रूप से आरोपी पक्ष से जुड़ी हुई थीं।

    ईडी ने इस मामले के मुख्य आरोपी और कंपनी के तत्कालीन चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर को पहले ही गिरफ्तार किया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने संकेत दिया है कि मामले में आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    इन शहरों की संपत्तियां हुईं कुर्क
    ED द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में बैंक खाते,
    फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), जमीन, कमर्शियल स्पेस और आलीशान आवासीय अपार्टमेंट शामिल हैं। ये संपत्तियां लुधियाना, गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हैं और कंपनी, संजीव अरोड़ा तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं।

    कैसे खुला फर्जीवाड़े का यह खेल, जानिए..
        गुरुग्राम में दर्ज FIR से शुरू हुई जांच
    : यह मामला सबसे पहले गुरुग्राम (हरियाणा) के उद्योग विहार थाने में दर्ज एक FIR के बाद सामने आया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं (जो पहले IPC की धारा 420, 467, 471 और 120-B थीं) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया गया था। चूंकि ये मामले PMLA एक्ट के तहत आते हैं, इसलिए ED ने इसकी जांच अपने हाथ में ली थी।  

    कागजों पर बेच डाले ₹157 करोड़ के मोबाइल: ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रियल एस्टेट सेक्टर की इस कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 157 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई थी। इसमें से करीब 102.50 करोड़ रुपए का मोबाइल एक्सपोर्ट दुबई (UAE) की दो कंपनियों मैसर्स फोर्टबेल टेलीकॉम FZCO और मैसर्स ड्रैगन ग्लोबल FZCO को करना दिखाया गया था।  

      शेल कंपनियों का नेटवर्क: एक ही नंबर और ईमेल से खुलीं फर्में: जब ED ने गहराई से जांच की तो पता चला कि जिन स्थानीय सप्लायर्स से मोबाइल खरीदना दिखाया गया था, वे असल में केवल कागजी (शेल) कंपनियां थीं। कई फर्में एक ही मोबाइल नंबर और एक ही ईमेल आईडी पर चल रही थीं। इनका काम सिर्फ फर्जी बिल बनाना और बिना किसी सामान की डिलीवरी के केवल कागजी एंट्री घुमाना था।

        दुबई कनेक्शन भी खुद का ही: ED के मुताबिक, दुबई जिन कंपनियों को मोबाइल का निर्यात दिखाया गया, वे असल में कोई बाहरी कंपनियां नहीं थीं, बल्कि उनका रिमोट कंट्रोल भी इसी आरोपी ग्रुप के हाथों में था। यानी बिना किसी मोबाइल की आवाजाही के सिर्फ कागजों पर करोड़ों का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट चल रहा था।

    ₹102.99 करोड़ की 'अपराध की कमाई
    ED ने अब तक की जांच में इस पूरे घोटाले से हुईअपराध की कमाई की कुल रकम करीब 102.99 करोड़ रुपए आंकी है। एजेंसी ने बीते 9 मई 2026 को इस मामले में धारा 17 के तहत बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया था, जिसके बाद मुख्य आरोपी संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार किया गया था।

    ED का कहना है कि मोबाइल एक्सपोर्ट के नाम पर की गई मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खोली जा चुकी हैं, जबकि इस मामले में लोकल सेल (स्थानीय बिक्री) को लेकर जांच अभी भी जारी है, जिससे कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।