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  • योग अपनाने की अपील: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जन-जन तक योग पहुंचाने का दिया संदेश

    योग अपनाने की अपील: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जन-जन तक योग पहुंचाने का दिया संदेश

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया योग को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

    छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने संभाला पदभार

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और अनुशासित जीवन का आधार है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

    मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अग्रवाल को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में योग आयोग प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार को नई गति देगा तथा योग को गांव-गांव, विद्यालयों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयासों से भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। आज विश्व के 176 से अधिक देश 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाकर भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग और आयुर्वेद को नई दिशा देने के लिए आयुष मंत्रालय का गठन किया तथा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सशक्त बनाने के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद एम्स की स्थापना का आग्रह किया गया है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है, जिससे भविष्य में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बन सकता है।

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

    विधायक किरण सिंह देव ने विश्वास व्यक्त किया कि संजय अग्रवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ योग आयोग प्रदेश के प्रत्येक गांव, शहर और परिवार तक योग की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कार्य करेगा।

    समारोह में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक किरण देव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बड़ी संख्या में योग साधक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • समय पाबंदी के लिए मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल में लगाई जाएंगी बॉयोमेट्रिक मशीन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    समय पाबंदी के लिए मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल में लगाई जाएंगी बॉयोमेट्रिक मशीन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    "स्कूल चलें अभियान के दौरान ही कराएं सांदीपनि विद्यालय भवनों का लोकार्पण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    होम गार्ड्स की कराएं भर्ती, अग्निवीरों को दिया जाएगा सुरक्षा बलों की नियुक्ति में आरक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    समय पाबंदी के लिए मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल में लगाई जाएंगी बॉयोमेट्रिक मशीन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भेल से भूमि वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से करें समन्वय
    यूनियन कार्बाइड की भूमि पर बनेगा भव्य स्मारक
    ग्रामीण क्षेत्रों आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए चलेगा अभियान
    धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों पर धर्मशाला, सराय, अन्न क्षेत्र निर्माण के लिए
    धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को दें प्रोत्साहन
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न प्रासंगिक विषयों की अद्यतन प्रगति एवं आगामी कार्यवाही की समीक्षा बैठक लेकर दिए निर्देश

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य शासन की प्राथमिकता वाले विषयों पर त्वरित कार्यवाही की जाए। अभियान चलाकर लक्ष्य पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन दिनों स्कूल चलो अभियान चल रहा है। 15 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान अधिकाधिक सांदीपनि विद्यालय भवनों को लोकार्पण एवं स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को इसी सत्र में अधिकतम लाभ मिल  सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश का सबसे बड़ा उत्कृष्ट नवाचार है। स्कूल शिक्षा विभाग इसकी राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग के लिए कार्य योजना तैयार करे। उन्होंने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। यहां सती अनुसुईया मंदिर परिसर, सती अनुसुईया मल्टी फैसिलिटी सेंटर और गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर का निर्माण होना है, यह काम तेजी से पूरा कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना के लिए उत्तरप्रदेश सरकार तैयार है। जल्द ही दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री की बैठक में इस परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी धार्मिक महत्व के तीर्थ स्थलों (जैसे माँ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, दतिया, ओरछा, मैहर आदि) में धर्मशाला, सराय, अन्न क्षेत्र, प्याऊ, पेयजल टंकी, अस्पताल एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवन निर्माण के लिए धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया जाए। यह प्रोत्साहन रजिस्ट्री शुल्क में छूट, अनुदान या अन्य रियायत स्वरूप में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मंत्रालय में विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर विभागों की अद्यतन प्रगति एवं आगामी कार्य योजना (कार्यवाही) के संबंध में समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड (भेल) को शासन द्वारा दी गई जमीन की भेल के लिए वर्तमान में अनुपयोगी भूमि उनसे वापस लेने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय से समन्वय कर यह कार्रवाई जल्द से जल्द की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की रासायनिक कचरे से मुक्त भूमि पर एक भव्य स्मारक का निर्माण होना है, इसके लिए एप्को कार्य योजना तैयार करे और वर्तमान में गुजरात के भुज में तैयार म्यूजियम का मौका मुआयना कर भोपाल में भी ऐसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए विधिवत् प्रस्ताव दे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए राज्य के 53 हजार गांवों में अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि इस अभियान व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए गाँव-गाँव शिविर लगाकर ग्रामीणों के पंजीयन किए जाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रकिया को और भी सरल बनाया जाए। ग्रीष्मकाल में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था के लिए पहले से बेहतर तैयारी कर ली जाए। इस वर्ष प्रदेश के किसी भी जिले में पेयजल परिवहन की स्थिति निर्मित नहीं हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में महाकालेश्वर मंदिर की तरह होमगार्ड्स के पदों का सृजन किया जाए और मंदिर समिति के वहन पर इनकी नियुक्ति की जाए। अग्निवीरों को मध्यप्रदेश पुलिस में विशेष सशस्त्र बल (आरक्षक पद) की नियुक्ति में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपर मुख्य सचिव गृह को निर्देशित किया कि वे इस संबंध में अतिशीघ्र कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन की व्यवस्था है कि सभी शासकीय सेवक कार्य दिवसों में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक कार्यालय में रहकर अपने पदेन कार्य  सम्पन्न करें। समय की पाबंदी सबके लिए जरूरी है। राज्य मंत्रालय, विध्याचल एवं सतपुड़ा में  अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तय समय पर उपस्थिति एवं रवानगी के लिए बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभाग अपने-अपने स्कूल चला रहे हैं, इन सभी स्कूलों को युक्तियुक्तकरण किया जाए। सभी वर्गों के छात्रावासों को संयुक्त रूप से एक छात्रावास में परिवर्तित कर विद्यार्थियों को यहां रखा जाए। इससे उनमें समरसता का भाव विकसित होगा। इन्हें समरसता छात्रावास का नाम दिया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट एवं ममलेश्वर के विकास के लिए भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए वन भूमि का उपयोग कर लिया जाए। बताया गया कि इस कार्य के निमित्त भूमि आवंटन की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राम वन गमनपथ परियोजना एवं श्रीकृष्ण पाथेय के निर्माण में तेजी लाएं और इसे समय-सीमा में पूरा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन की दताना-मताना हवाई पट्टी के स्थान पर नवीन हवाई अड्डे के निर्माण कार्य में शीघ्र कार्यवाही की जाए। प्रयास करें कि यहां जल्द से जल्द यहां भूमि-पूजन कर लिया लाए। बताया गया कि नए हवाई अड्डे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए धारा 11 की कार्रवाई भी की जा चुकी है। जल्द ही नवीन हवाई अड्डे निर्माण का भूमि-पूजन करवाया जाएगा।

    बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागों के अधिकारियों को दिए गए लक्ष्यों की जल्द से जल्द पूर्ति के लिए कार्य योजना बनाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

     

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ‘नो रिटर्न’ पॉलिसी के बाद ईरान संग नए युद्ध की आशंका?

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ‘नो रिटर्न’ पॉलिसी के बाद ईरान संग नए युद्ध की आशंका?

    यरुशलम
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना अब गाजा, दक्षिणी लेबनान और सीरिया से पीछे नहीं हटेगी. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ऐलान किया है कि IDF इन तीनों इलाकों में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित समय तक तैनात रहेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका स्थायी युद्धविराम की कोशिशों में जुटा है और कई देश तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। 

    लेकिन इजरायल का जवाब साफ है. पहले सुरक्षा, फिर कूटनीति. इजरायल काट्ज ने कहा कि जब तक इजरायल को अपने नागरिकों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती, तब तक सेना की वापसी का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने ईरान को भी सीधी चेतावनी दी. अगर ईरान या उसके सहयोगी इन सुरक्षा क्षेत्रों पर हमला करते हैं, तो इजरायल "पूरी ताकत" से जवाब देगा। 

    इजरायली शासन की तरफ से इस तरह के विवादित बयान नए नहीं. चाहे वो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हों, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज हों या नेतन्याहू सरकार के अन्य मंत्री, सभी की एक भाषाएं सुनने को मिल जाती हैं. वो इजरायल काट्ज हैं जिन्होंने पूरे लेबनान को जलाने की चेतावनी दी, वो पीएम नेतन्याहू ही हैं जिन्होंने पूरे फिलिस्तीन और ईरान को मिटा देने तक की बात की. तो आइए समझतें हैं कि आखिर लेबनान, गाजा और सीरिया से इजरायली सेना वापसी क्यों नहीं करेगी और नेतन्याहू शासन का प्लान क्या है। 

    गाजा में शुरू जंग लेबनान-ईरान तक फैली
    गाजा में जंग अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुई थी. लेकिन यह बहुत पहले ही साफ हो चुका है कि यह आतंकवाद विरोधी अभियान नहीं रह गया है. इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन के मुताबिक, गाजा के करीब 70 फीसदी हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण है. सरकार का अगला लक्ष्य 100 फीसदी नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है। 

    इजरायल की रणनीति तीन हिस्सों में बंटी हुई है.
    पहला, हमास की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म करना. दूसरा, बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना. तीसरा, सीमा पर स्थायी सुरक्षा बफर बनाना ताकि भविष्य में 7 अक्टूबर जैसा हमला दोबारा न हो. हालांकि इसकी कीमत बहुत भारी रही है. गाजा में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी आबादी विस्थापित हो चुकी है. भोजन, दवाइयों और ईंधन की भारी कमी बनी हुई है. इजरायल का कहना है कि यह दबाव हमास को कमजोर करने के लिए जरूरी है। 

    लेबनान में अब पीछे हटने को तैयार नहीं इजरायल
    दूसरा बड़ा मोर्चा दक्षिणी लेबनान है. मार्च महीने में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया. इसके बाद इजरायल ने जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया. अब रक्षा मंत्री काट्ज का कहना है कि जब तक पूरे लेबनान में हिजबुल्लाह पूरी तरह हथियार नहीं रख देता, तब तक सेना वापस नहीं जाएगी. यानी सिर्फ सीमा से हटना अब इजरायल का लक्ष्य नहीं है. वह चाहता है कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म हो। 

    इस युद्ध में लेबनान को भारी नुकसान हुआ है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक करीब 4,300 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इजरायल के भी 38 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार मारे गए हैं. इसके बावजूद तेल अवीव अपने फैसले पर अड़ा हुआ है। 

    सीरिया में 'लो-नॉइज ऑक्यूपेशन'
    तीसरा मोर्चा सीरिया है. यहां इजरायल की रणनीति थोड़ी अलग है. दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के कमजोर पड़ने के बाद इजरायल ने सीमा से लगे बफर जोन में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है.रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल अब करीब 235 वर्ग किलोमीटर इलाके में प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है. इसमें माउंट हर्मोन से लेकर यरमूक नदी तक का क्षेत्र शामिल बताया जाता है। 

    विशेषज्ञ इसे "लो-नॉइज ऑक्यूपेशन" कहते हैं. यानी इजरायल सीरिया में बिना बड़े युद्ध के धीरे-धीरे जमीन पर पकड़ मजबूत कर रहा है. बताया जाता है कि दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच इजरायल ने सीरिया के भीतर 800 से ज्यादा सैन्य अभियान चलाए. कुछ अभियान सीमा से 60 किलोमीटर से ज्यादा अंदर तक पहुंचे. इजरायल का कहना है कि यह कदम "जिहादी संगठनों" को सीमा से दूर रखने के लिए उठाया गया है। 

    लेबनान-गाजा की जंग में ईरान का क्या रोल?
    गाजा में हमास. लेबनान में हिजबुल्लाह और सीरिया में ईरान समर्थित कई सशस्त्र गुट. इजरायल इन तीनों को ईरान के "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" का हिस्सा मानता है. यही वजह है कि तेल नेतन्याहू शासन इन तीनों मोर्चों को एक साथ देख रहा है. काट्ज ने साफ कहा कि अगर ईरान ने सीधे हमला किया, तो जवाब भी सीधे ईरान को मिलेगा। 

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख दिखाया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान के लोगों या नेतृत्व को निशाना बनाया गया, तो जवाब तुरंत और पूरी ताकत से दिया जाएगा. यानी दोनों देशों की भाषा लगातार आक्रामक होती जा रही है. यही सबसे बड़ी चिंता है। 

    क्या अमेरिका की बात अब नहीं सुन रहा इजरायल?
    अमेरिका लगातार युद्धविराम की कोशिश कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र भी सैन्य वापसी की मांग कर चुका है. लेकिन इजरायल फिलहाल किसी दबाव में झुकता नहीं दिख रहा. काट्ज ने साफ कहा कि इजरायल ने कभी अमेरिका से अपने युद्ध लड़ने को नहीं कहा. इसलिए सुरक्षा से जुड़े फैसले भी वही खुद करेगा. यानी अब इजरायल अपनी स्वतंत्र सुरक्षा नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। 

    इजरायल की नई "नो-एग्जिट डॉक्ट्रिन" पूरे मध्य पूर्व की राजनीति बदल सकती है. अगर सेना लंबे समय तक गाजा, लेबनान और सीरिया में बनी रहती है, तो इन इलाकों का सुरक्षा संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. जितना लंबा सैन्य कब्जा रहेगा, उतना ही ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के साथ टकराव का खतरा बढ़ेगा. यही वजह है कि अब पूरी दुनिया की नजर एक सवाल पर टिकी है कि क्या यह रणनीति इजरायल को सुरक्षा देगी, या फिर पश्चिम एशिया को एक और बड़े युद्ध की तरफ धकेल रही है?

     

  • दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन, 4 महीने बाहरी गाड़ियों की एंट्री बंद, बिना PUC नहीं मिलेगा ईंधन

    दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन, 4 महीने बाहरी गाड़ियों की एंट्री बंद, बिना PUC नहीं मिलेगा ईंधन

    नई दिल्ली

    सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत 1 नवंबर से सरकारी और निजी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, दफ्तरों में एक समय पर केवल 50 % कर्मचारी ही काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को कम करने और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने के उद्देश्य से लागू की जाएगी।

    इसके साथ ही दिल्ली में वाहनों की पार्किंग दरों को दोगुना करने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि पार्किंग शुल्क बढ़ने से लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और सार्वजनिक परिवहन की ओर बढ़ेंगे। सरकार ने सर्दियों के दौरान लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की पाबंदियों को अब पूरे सीजन के लिए लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत GRAP के अलग-अलग चरणों में लगने वाले प्रतिबंध हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक स्वत: प्रभावी रहेंगे।

    दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इन नियमों में पुराने सभी आदेशों को एकीकृत कर एक स्पष्ट, सरल और सख्त व्यवस्था तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था से सरकारी विभागों, संस्थानों और आम लोगों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि अधिसूचना तैयार करते समय पिछले वर्षों के प्रदूषण स्तर, अनुभवों और वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से जारी संशोधित ग्रैप और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों को भी शामिल किया गया है। रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में हर साल नवंबर से फरवरी के बीच प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने ऐसी स्थायी व्यवस्था लागू की है, जिससे हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    सरकारी ऑफिसों की बदलेगी टाइमिंग
    दिल्‍ली में पिछले कई सालों में देखा गया है कि वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण व्‍हीकल्‍स से निकालने वाला धुआं होता है. इसमें निजी वाहनों की भूमिका सबसे ज्‍यादा होती है. इस समस्‍या से निपटने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' सबसे बेहतर उपाय है. ऐसे में दिल्‍ली सरकार ने नवंबर से फरवरी तक पाबंदियों के दिनों में यातायात का दबाव कम करने के लिए ऑफिसों के अलग-अलग समय और घर से काम करने की व्यवस्था भी लागू की गई है. सर्दियों के दौरान, दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले कार्यालयों में सुबह 8:30 बजे से शाम पांच बजे तक काम होगा, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालयों में एक नवंबर से 28 फरवरी के बीच सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक काम होगा। 

    वायु प्रदूषण के दिनों में कुछ ऐसी होती है दिल्‍ली की स्थिति
    प्राइवेट ऑफिसों के लिए 50% वर्क फ्रॉम होम

    दिल्‍ली सरकार के मुताबिक, एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली सरकार और प्राइवेट ऑफिसों में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी मौजूद नहीं रहेंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉर्म होम करेंगे. इससे सड़कों पर वाहनों की संख्‍या काफी कम होने की उम्‍मीद है. हालांकि, जरूरी और इमरजेंसी सर्विस (जैसे अस्पताल, सार्वजनिक यातायात, बिजली, पानी की आपूर्ति, साफ-सफाई, आपदा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण करने वाली एजेंसियों) को इससे छूट दी गई है। 
       
    PUC सर्टिफिकेट दिखाने पर ही मिले पेट्रोल-डीजल 
    रेखा गुप्‍ता सरकार के अनुसार, दिल्ली में सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी/एलपीजी खुदरा दुकानें पूरे साल सिर्फ वैध पीयूसीसी दिखाने पर ही पेट्रोल और डीजल देंगे. बिना वैध प्रमाणपत्र के ईंधन लेते पाए जाने पर वाहनों पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसकी जांच फिजिकल सर्टिफिकेट, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली और 'वाहन' जैसे इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के जरिए की जाएगी। 

    PUC के बिना ईंधन नहीं मिलेगा
    अब पूरे वर्ष पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और LPG पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) होगा। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन वाहनों के पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। साथ ही ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।

    बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक
    नए दिशा-निर्देशों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-6 से कम मानक वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक रहेगी। इसका उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। हालांकि, इस प्रतिबंध से कुछ आवश्यक वाहनों को छूट दी गई है। CNG वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति रहेगी।

    निर्माण गतिविधियां पर रहेगा प्रतिबंध
    नए दिशा-निर्देशों के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण रखा जाएगा। इसके लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़-फोड़ और खुले में होने वाली निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी। सरकार का उद्देश्य निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना है। सर्दियों के महीनों में हवा की गति कम होने और प्रदूषक तत्वों के जमा होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है।

    दफ्तरों में 50% उपस्थिति
    दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में एक समय में केवल 50 % कर्मचारी ही कार्यालय से काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और कार्यालय आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। हालांकि, विभागाध्यक्षों और जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आना होगा। आवश्यक सेवाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए ऐसे कर्मचारियों को इस नियम से अलग रखा गया है।

    पार्किंग शुल्क होगा दोगुना
    नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अधिकृत पार्किंग स्थलों पर अब दोगुना पार्किंग शुल्क लिया जाएगा। इसका उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) द्वारा संचालित पार्किंग स्थलों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। यानी DMRC की पार्किंग में यह बढ़ा हुआ शुल्क लागू नहीं होगा। इसके अलावा, प्रदूषण और यातायात दबाव को कम करने के लिए नगर निगम और दिल्ली सरकार के कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया जाएगा।

  • छत्तीसगढ़ में अवैध खनन पर शिकंजा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई

    छत्तीसगढ़ में अवैध खनन पर शिकंजा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनिज उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

    राजनांदगांव, बालोद, बलरामपुर और सरगुजा में ताबड़तोड़ अभियान, वाहन जब्त और लाखों रुपये का अर्थदंड

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा सख्त और सतत अभियान चलाया जा रहा है। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, पत्थर, मिट्टी एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है तथा नियमानुसार अर्थदंड एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शासन का उद्देश्य प्रदेश के खनिज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है।

    इसी क्रम में राजनांदगांव जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के 52 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इनमें अवैध उत्खनन के 9, परिवहन के 41 तथा भंडारण के 2 प्रकरण शामिल हैं। वहीं डोंगरगढ़ तहसील के ग्राम आसरा में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान नदी में रेत उत्खनन प्रतिबंधित पाया गया तथा मौके पर कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली।

    बालोद जिले के ग्राम कसही में अवैध पत्थर उत्खनन करते पाए जाने पर एक चेन माउंटेन (पीसी-130-7) मशीन को जब्त कर सील किया गया। संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है।

    बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने राजपुर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुर और बसंतपुर में कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक टिपर जब्त किया। वहीं बसंतपुर स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स इकाई में अवैध रूप से भंडारित लगभग 90 घनमीटर रेत भी जब्त कर संचालक को नोटिस जारी किया गया।

    सरगुजा जिले में शिकायतों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध मिट्टी, मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में प्रयुक्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहनों को जब्त किया गया। सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है। संशोधित नियमों के अनुसार अब शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2 हजार रुपये प्रति टन, जो अधिक होगा, के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का बाजार मूल्य भी वसूला जाएगा।

    खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और संयुक्त प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

  • WhatsApp ने Username फीचर को बताया सुरक्षित, फ्रॉड की आशंका पर कंपनी ने दी पूरी सफाई

    WhatsApp ने Username फीचर को बताया सुरक्षित, फ्रॉड की आशंका पर कंपनी ने दी पूरी सफाई

    नई दिल्ली

     व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। 

    हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया
    एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके। 

    फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट
    व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है। 

    व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा। 

    यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी
    व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं। 

    केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब
    इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता। 

    सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका
    सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है। 

    मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी
    सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है। 

    सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

  • Partition Remark: मोहन भागवत ने कहा- सोच-समझकर भारत आए थे लोग, उन्हें शरणार्थी नहीं योद्धा कहें

    Partition Remark: मोहन भागवत ने कहा- सोच-समझकर भारत आए थे लोग, उन्हें शरणार्थी नहीं योद्धा कहें

    नागपुर

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना। 

    भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन 'सिंधु एजुकेशन सोसाइटी' के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें। 

    आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे।

    'उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति'
    मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं।

    जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

    भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो।

    उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय। 

    भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना। 

    RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं। 

    वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

  • पंजाब की महिलाओं को बड़ी सौगात, मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत ₹1100 करोड़ खातों में भेजे गए

    पंजाब की महिलाओं को बड़ी सौगात, मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत ₹1100 करोड़ खातों में भेजे गए

    चंडीगढ़ 

    पंजाब सरकार की मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत पंजीकरण करा चुकी करीब 50 लाख महिलाओं के बैंक खातों में आज से पहली किस्त आ गई। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने धुरी में मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना' की शुरुआत की। 

    मुख्यमंत्री ने योजना का वेब लिंक लॉन्च कर इसका औपचारिक शुभारंभ किया। महिलाओं के खातों में 1100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। योजना के तहत बाद में रजिस्ट्रेशन कराने वाली महिलाओं को भी इस स्कीम का पूरा लाभ मिलेगा। तीन महीने की सम्मान राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लाभार्थियों के मोबाइल पर बैंक की ओर से राशि जमा होने का संदेश आया और तीन महीनों की राशि एक साथ सीधे खातों में ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री का दावा है कि राज्य की 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा।

    योजना के तहत सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से तीन महीने के 3000 रुपये दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 4500 रुपये ट्रांसफर होंगे। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाली पात्र महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। 

    सरकार के अनुसार योजना का लाभ 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की उन महिलाओं को मिलेगा जो पंजाब की स्थायी निवासी और पंजीकृत मतदाता हैं। लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। कई जिलों में अभी भी बैंक खाते खुलवाने और आधार लिंक कराने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने पात्र महिलाओं से जल्द रजिस्ट्रेशन और बैंक संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी करने की अपील की है ताकि उन्हें योजना का लाभ समय पर मिल सके।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी, सरकारी पेंशनभोगी और आयकरदाता परिवारों की महिलाओं को योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। 

  • Stock Market Today: IT स्टॉक्स की दमदार खरीदारी, इन 3 फैक्टर्स से शेयर बाजार में आई बड़ी तेजी

    Stock Market Today: IT स्टॉक्स की दमदार खरीदारी, इन 3 फैक्टर्स से शेयर बाजार में आई बड़ी तेजी

    मुंबई 

     अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कच्चे तेल में गिरावट सेघरेलूशेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन तेजी आई है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक उछल गया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 24,150 के करीब पहुंच गया। सुबह 9.40 बजे सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% तेजी के साथ 77,416.35 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी 143.85 अंक यानी 0.60% ऊपर 24,149.70 अंक पर ट्रेड कर रहा है। रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूत होकर 94.95 पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर तेजी के साथ खुले। देश की दूसरी बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। इसके अलावा एचसीएल टेक, टीसीएस और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2% तक उछल गए। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस के शेयरों में 1% से ज्यादा गिरावट आई और यह बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा।

    ब्रॉडर बाजार का हाल
    ब्रॉडर बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.3% की तेजी आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। वहीं, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में लगभग 1-1% की तेजी आई। एनएसई पर लगभग 1,818 शेयरों में तेजी रही जबकि 586 शेयरों में गिरावट आई और 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

    शेयर बाजार में तेजी के तीन कारण 
    अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को लेकर पॉजिटिव सिग्नल का शेयर बाजार में तेजी के पीछे अहम रोल रहा. कतर ने कहा कि ईरान और अमेरिका ने Hormuz Strait को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 20 फीसदी हिस्से को संभालता है. इसके चलते विदेशी बाजारों में भी तेजी आई, तो गिफ्ट निफ्टी भी रफ्तार में नजर आया. इससे बाजार का सेंटीमेंट सुधरा। 

    दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने बाजार की रफ्तार बढ़ाने में योगदान किया. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं। 

    इनके अलावा आईटी कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बाजार की हीरो साबित हुए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (4.60%), HCL Tech Share (3.80%), TCS SHare (3.05%), Tech Mahindra Share (3%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Coforge Share (4.70%), MPhasis Share (4.50%), Presistent Share (3.60%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे।  

    बैंकिंग शेयर भी चमके
    मार्केट में तेजी के बीच सिर्फ आईटी शेयर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग स्टॉक्स भी चमके. लार्जकैप में शआमिल ICICI Bank Share, HDFC Bank Share, SBI Share करीब 1 फीसदी की तेजी में दिखे. इसके अलावा सनफार्मा, अडानी पोर्ट्स से लेकर ट्रेंट और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे कंपनियों के स्टॉक्स भी ग्रीन जोन में नजर आए। 

    कच्चे तेल में गिरावट
    इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में तेजी से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अभी 1.06 फीसदी नीचे $70.81 प्रति बैरल पर आ ट्रेड कर रहा है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पिछले दो दिनों से कतर की राजधानी दोहा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

  • अमरनाथ यात्रा 2026 का पहला जत्था रवाना, एलजी मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

    अमरनाथ यात्रा 2026 का पहला जत्था रवाना, एलजी मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

     जम्मू
     जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा।

    अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

    ‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’

    पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। 

    जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
    यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। 

    कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला
    यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया। 

    ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी
    इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं। 

    हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़
    प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं। 

    उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की।

    जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की।

    अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है।

    इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।

    भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और कहा कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा किए गए व्यापक प्रबंध श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाएंगे।