Tag: featured

  • छत्तीसगढ़ की लोककला को बड़ा झटका, ‘पंडवानी अम्मा’ तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी-सीएम साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    छत्तीसगढ़ की लोककला को बड़ा झटका, ‘पंडवानी अम्मा’ तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी-सीएम साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की पहचान और पंडवानी लोकगायन शैली की विश्वविख्यात स्तंभ, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने उनके निधन कला व संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

    वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एम्स रायपुर पहुंचकर महान कलाकार के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने न केवल छत्तीसगढ़ की माटी का मान बढ़ाया, बल्कि पंडवानी जैसी लोक विधा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि तंबूरे की थाप पर महाभारत की गाथाओं को जीवंत करने वाली तीजन बाई का जाना लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन है।

    दुनिया भर में दिलाई लोक कला को विशिष्ट पहचान
    सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…
    – Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026

    जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धाजंलि
    इस अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा भी उपस्थित थे। सभी जनप्रतिनिधियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार उनकी स्मृतियों को संजोने और लोक कला के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्षों और सफलता की वह गाथा है जो आने वाले समय में कलाकारों के लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करेगी।

  • शोपियां में आतंकियों पर कसा शिकंजा, सेना-पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन जारी, चार गांव खाली कराए गए

    शोपियां में आतंकियों पर कसा शिकंजा, सेना-पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन जारी, चार गांव खाली कराए गए

    नई दिल्ली
    जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रविवार को भी एनकाउंटर जारी है। सुरक्षा बलों ने शनिवार से ही लश्कर-ए-तैयबा के दो खूंखार आतंकवादियों को घेर रखा है। ये दोनों आतंकी स्थानीय हैं। अभी भी मीमंदर इलाके के एक घने बाग के भीतर घिरे हुए हैं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है ताकि वे भाग न सकें। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार को कुछ अपुष्ट खबरों में दावा किया गया था कि दोनों आतंकी मारे गए हैं, लेकिन रविवार को अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आतंकियों को पकड़ने या उन्हें मार गिराने के लिए ऑपरेशन अभी भी जारी है।

    सुरक्षा बलों की तकनीकी निगरानी के दौरान शुक्रवार को इन दोनों आतंकियों की गतिविधि मीमंदर इलाके में देखी गई थी। शनिवार को जब सेना की एक टीम तलाशी लेते हुए आगे बढ़ी, तो आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मुठभेड़ में बदल गई।

    एक A++ श्रेणी का कमांडर
    खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार फंसे दोनों आतंकियों की पहचान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासियों के रूप में हुई है।

    जाकिर गनी: यह लश्कर-ए-तैयबा का एक खूंखार ऑपरेटिव है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने A++ श्रेणी के आतंकवादियों की सूची में रखा है। जाकिर साल 2024 से घाटी में सक्रिय है और कई आतंकी मामलों में वॉन्टेड है। अक्टूबर 2025 में कुलगाम की एक एनआईए (NIA) अदालत ने उसके खिलाफ उद्घोषणा नोटिस भी जारी किया था।

    लतीफ भट: लतीफ पिछले साल ही इस आतंकी संगठन में शामिल हुआ था और जाकिर के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था।

    विक्टर फोर्स ने संभाला मोर्चा
    गर्मियों के इस मौसम में बागों के घने पत्तों और पेड़ों के कारण सुरक्षा बलों को ब्लाइंड स्पॉट्स का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने मोर्चा संभाला है। इलाके में रोशनी की व्यवस्था की गई है। रात के समय आतंकियों के भागने की कोशिशों को रोकने के लिए पूरे बाग को हाई-बीम लाइटों से रोशन किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शनिवार शाम तक सेना ने आस-पास के चार गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया है, जबकि मुख्य घेराबंदी को और मजबूत कर दिया गया है।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑपरेशन?
    शोपियां जिला ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल श्रृंखला से जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर रहा है। ऐसे में जाकिर गनी और लतीफ भट जैसे स्थानीय कमांडरों को बेअसर करना लश्कर के लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय युवाओं की नई भर्ती को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल, अंतिम रिपोर्ट मिलने तक दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है और सुरक्षा बल बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

  • मोदी कैबिनेट में बड़ा बदलाव जल्द? दिग्गज नेताओं पर टिकी नजरें, BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम भी तैयार

    मोदी कैबिनेट में बड़ा बदलाव जल्द? दिग्गज नेताओं पर टिकी नजरें, BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम भी तैयार

    नई दिल्ली
     मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी नई टीम का खाका तैयार कर चुके हैं. दो जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के बीच एक बहुत अहम बैठक हुई. तीन घंटे तक चली इस सीक्रेट मीटिंग में सरकार और संगठन के नए चेहरों पर मुहर लगी है. यह रिशफल सिर्फ एक सामान्य बदलाव भर नहीं है. इसके पीछे बहुत बड़ी इलेक्शन रणनीति काम कर रही है. कई दिग्गज मंत्रियों की कुर्सी बदल सकती है. संगठन के कई पुराने नेताओं को सरकार में शामिल किया जा सकता है. यह सारी कवायद आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हो रही है. खासकर उन राज्यों पर फोकस है जहां पार्टी को अपना दम दिखाना है. एनडीए के सहयोगियों को भी कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है. आइए जानते हैं कि इस बड़े बदलाव में किन नेताओं के आएंगे ‘बहुत अच्छे दिन। 

    क्या होगा नितिन नवीन की नई टीम का स्ट्रक्चर और रणनीति?
    नितिन नवीन महज 45 साल की उम्र में बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. उनकी नई टीम में कई युवा और फ्रेश चेहरे शामिल होने जा रहे हैं. संगठन के इस नए स्ट्रक्चर में अनुभव और नई पीढ़ी का एक शानदार बैलेंस देखने को मिलेगा. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव और केंद्रीय मीडिया टीम में नियुक्तियों पर अंतिम चर्चा हो रही है. इस नई टीम को क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है. उन राज्यों को सबसे ज्यादा तरजीह मिल रही है जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. पार्टी का पूरा फोकस जमीनी स्तर पर मजबूती लाने पर है। 

    कैबिनेट फेरबदल में किन दिग्गज मंत्रियों का बदल सकता है विभाग?

    •     कैबिनेट रिशफल को लेकर सत्ता के गलियारों में हलचल बहुत तेज है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई केंद्रीय मंत्रियों को अब संगठन में भेजा जा सकता है. वहीं संगठन के कई दिग्गज नेताओं को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। 
    •     मौजूदा कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल का नाम फाइनेंस मिनिस्टर के तौर पर सबसे आगे चल रहा है. गोयल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और उनका बैकग्राउंड देश की इकॉनमी को बहुत अच्छे से समझता है। 
    •     वहीं मौजूदा फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को एजुकेशन मिनिस्ट्री की कमान मिल सकती है. यह एजुकेशन सेक्टर भी सरकार के लिए बहुत अहम है और यहां बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत है। 

    क्या अनुराग ठाकुर की कैबिनेट में होगी एक शानदार वापसी?
    अनुराग सिंह ठाकुर के नाम पर भी दिल्ली में बहुत चर्चा हो रही है. उन्हें फिर से कैबिनेट रैंक के साथ एक बड़ा पोर्टफोलियो दिया जा सकता है. अनुराग का यूथ कनेक्शन उनके फेवर में काम कर रहा है. इसके अलावा पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम भी रेस में है. सरकार इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए बड़े टेक्नोक्रेट्स पर पूरा भरोसा जता सकती है। 

    पंजाब से तरुण चुघ को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उन्हें कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है जिससे पंजाब में पार्टी मजबूत हो. जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी जगह भी नए चेहरों को मौका मिलेगा. इसमें हरदीप पुरी और बीएल वर्मा जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कुछ पुराने मंत्रियों को गवर्नर बनाकर अलग राज्यों में भेजा जा सकता है। 

    एनडीए सहयोगियों और नए चेहरों को मिलेगा कैबिनेट में बड़ा इनाम!

    • मोदी कैबिनेट में एनडीए सहयोगियों को खुश रखने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है. हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए राघव चड्ढा का नाम भी चर्चा में है. उन्हें पंजाब के कोटे से कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. इससे पंजाब में बीजेपी का ग्राफ ऊपर जाएगा। 
    • शिवसेना गुट की ताकत भी लगातार बढ़ रही है. इसके चलते श्रीकांत शिंदे या एकनाथ शिंदे के किसी करीबी नेता को मंत्री पद मिलना लगभग तय है। 
    • जेडीयू चीफ नीतीश कुमार भी केंद्र में अपनी पार्टी के लिए बड़ा रोल चाहते हैं. उनकी डिमांड को देखते हुए जेडीयू का वजन कैबिनेट में बढ़ सकता है। 
    • इसके साथ ही संजय दीना पाटिल को हेल्थ सेक्टर में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. पाटिल को मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर हेल्थ बनाया जा सकता है.

    बीजेपी संसदीय बोर्ड में होने जा रहा है अहम बदलाव

        बीजेपी का संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी है. इसमें 11 सदस्य होते हैं और अब इसका भी पूरा पुनर्गठन हो रहा है. कई बड़े नेताओं को इस कोर बोर्ड में एंट्री मिल सकती है. राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का नाम इसमें सबसे आगे है. उनका ऑर्गेनाइजेशनल स्किल बहुत शानदार है और वे महाराष्ट्र के अहम नेता हैं। 

        पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जीत के रणनीतिकार सुनील बंसल को भी प्रमोट किया जा सकता है. उन्हें नेशनल इलेक्शन प्लानिंग की कमान मिल सकती है. इसके अलावा महाराष्ट्र के नेता देवेंद्र फडणवीस का नाम भी इस लिस्ट में है. उन्हें पश्चिमी भारत के प्रतिनिधित्व के लिए बोर्ड में लाया जा सकता है। 

    शिवराज सिंह चौहान बनेंगे हिंदी हार्टलैंड के सबसे बड़े डिसीजन मेकर!

        संसदीय बोर्ड में मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान के नाम पर भी मुहर लग सकती है. आरएसएस के साथ चर्चा के बाद उनकी दावेदारी बहुत मजबूत हुई है. उन्हें हिंदी पट्टी के राज्यों में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। 

        जेपी संगठन में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक सिस्टम की तर्ज पर बदलाव होने जा रहा है. टॉप नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभारी बनाया जा सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘यह नया बदलाव पूरी तरह से मिशन 2029 को ध्यान में रखकर किया जा रहा है’ .
        राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को उत्तर और पश्चिम भारत की कमान मिल सकती है. सर्बानंद सोनोवाल को नॉर्थईस्ट और के लक्ष्मण को दक्षिण भारत की जिम्मेदारी दी जा सकती है। 

    नेता का नाम संभावित जिम्मेदारी मुख्य कारण
    नितिन नबीन बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा और फ्रेश चेहरों के साथ संगठन का नया स्ट्रक्चर बनाना.
    पीयूष गोयल फाइनेंस मिनिस्टर (संभावित) चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते इकॉनमी की गहरी समझ.
    निर्मला सीतारमण एजुकेशन मिनिस्टर (संभावित) एजुकेशन सेक्टर में बड़े बदलाव और रिफॉर्म्स लागू करना.
    अनुराग ठाकुर कैबिनेट में शानदार वापसी यूथ कनेक्शन और बड़े पोर्टफोलियो के साथ मजबूत दावेदारी.
    शक्तिकांत दास कैबिनेट में नई एंट्री इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए टेक्नोक्रेट चेहरे पर दांव.
    राघव चड्ढा कैबिनेट मंत्री (पंजाब कोटा) पंजाब में बीजेपी का ग्राफ बढ़ाना और पार्टी को मजबूती देना.
    विनोद तावड़े संसदीय बोर्ड में शामिल होने की अटकलें ऑर्गेनाइजेशनल स्किल और महाराष्ट्र-केंद्र के बीच ब्रिज.
    सुनील बंसल संसदीय बोर्ड में प्रमोशन की चर्चा नेशनल इलेक्शन प्लानिंग का जिम्मा और नई रणनीति बनाना.
    शिवराज सिंह चौहान संसदीय बोर्ड में संभावित एंट्री हिंदी पट्टी के राज्यों में फैसले लेने की बड़ी कमान.
    राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी उत्तर-पश्चिम भारत के रीजनल इंचार्ज आरएसएस की तर्ज पर बड़े क्षेत्रों की सीधी निगरानी.
    सर्बानंद सोनोवाल नॉर्थईस्ट के रीजनल इंचार्ज पूर्वोत्तर और आदिवासी बेल्ट में पार्टी को संस्थागत मजबूती देना.
    के लक्ष्मण दक्षिण भारत के रीजनल इंचार्ज आगामी चुनावों से पहले दक्षिण के जातीय समीकरण साधना.
    नीरज सिंह और पूजा पाल यूपी बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष यूपी चुनाव 2027 के लिए जमीनी स्तर पर सोशल आउटरीच बढ़ाना.

    यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी ने तैयार किया है कौन सा नया मास्टरप्लान?

    कैबिनेट रिशफल और संगठन में बदलाव का सीधा असर विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए पार्टी ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है. यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी ने अपने छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया है. 64 सदस्यों की एक नई एग्जीक्यूटिव बॉडी भी बनाई गई है. कोर वोट बैंक को मजबूत करने के लिए गैर-यादव ओबीसी समाज के 25 नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया है। 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह और पूजा पाल को भी बड़ा पद मिला है। 

    बीजेपी का पूरा फोकस अब सोशल और रीजनल इंजीनियरिंग पर है. 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी राज्य चुनावों के लिए इसे एक कोर वॉर रूम की तरह तैयार किया जा रहा है. संसदीय बोर्ड में ओबीसी और महिला चेहरे के तौर पर सुधा यादव अपनी जगह बरकरार रख सकती हैं. अल्पसंख्यक कोटे से इकबाल सिंह लालपुरा और अनुसूचित जाति कोटे से सत्यनारायण जटिया भी अपनी सीट बचा सकते हैं. मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल एक मजबूत इलेक्शन मशीनरी की तरह काम करेगा. पार्टी उन राज्यों पर ज्यादा ताकत लगा रही है जहां उसे अपना पुराना रुतबा वापस पाना है। 

  • राजस्थान से PM मोदी का बड़ा दावा, ‘युद्ध के बीच भारतीय डिप्लोमेसी ने बचाया देश, 40 देशों से मिला तेल’

    राजस्थान से PM मोदी का बड़ा दावा, ‘युद्ध के बीच भारतीय डिप्लोमेसी ने बचाया देश, 40 देशों से मिला तेल’

    जोधपुर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान पहुंचे. PM मोदी ने राजस्थान में कहा कि जंग के चलते पूरी दुनिया पर असर हुआ है. भारत ने सही फैसले लिए, सही रणनीति बनाई और अपनी कूटनीतिक ताकत का सकारात्मक इस्तेमाल किया, और इसी वजह से भारत इस संकट से उबरने में सफल रहा. भारत ने संकट का समय रहते आकलन किया है. पीएम मोदी ने बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान हमने 40 देशों से ईंधन प्राप्त किया। 

    प्रधानमंत्री ने कहा, जब कुछ ताकतें अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रही थीं, तब संकट से निपटने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे थे। PM मोदी ने कहा कि भारत ने संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया आज जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भी उद्घाटन किया गया है। 

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से संकट में थे- PM मोदी
    PM मोदी ने कहा, भारत LPG आयात पर 60% तक निर्भर है. पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने के बाद हम एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन हमारे प्रयासों ने हमें इस संकट से उबरने में मदद की, राजस्थान की इस धरती ने हमें इससे उबरने में मदद की। 

    इसके अलावा PM मोदी ने कहा, राजस्थान में कांग्रेस सरकार के असहयोग के कारण रिफाइनरी का काम ठप पड़ा था, लेकिन राज्य में सत्ता में आने के बाद डबल इंजन वाली सरकार के कारण, हम आज रिफाइनरी का उद्घाटन करने में सफल रहे। 

    राजस्थान को जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो देंगे नई उड़ान
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि राजस्थान हर रोज विकास के नए आयाम छू रहा है। जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो फेज-2 के उदघाटन इसी का उदाहरण है। जोधपुर एयरपोर्ट और जयपुर मेट्रो राजस्थान को नई उड़ान दे रहे हैं।

    अब राजस्थान हरियाणा लाए शेखावाटी के लिए पानी
    पीएम मोदी ने आगे कहा कि अभी भजनलाल शर्मा बड़े भावुक होकर पानी के काम का वर्णन कर रहे थे। राजस्थान हरियाणा दोनों में भाजपा की सरकार है। पहली बार आपसी सहमति से समाधान निकाले गए। हरियाणा और राजस्थान सरकार मिलकर शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाएंगे।

    वसुंधरा राजे के साथ पहले मिलकर किया राजस्थान के पानी का सपना साकार
    पीएम मोदी ने सूर्य उर्जा के बाद पानी के संकट पर बात की। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पानी लाने के लिए हमने पहले भी प्रयास किया और अब भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं गुजरात के रास्ते वसुंधरा राजे के कार्यकाल में राजस्थान का पानी का सपना साकार किया।

    राजस्थान पर सूर्य देवता की कृपा, हमने सोलर पार्क का काम चलाया
    प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान पर सूर्य देवता की कुछ ज्यादा ही कृपा है। लिहाजा यहां इस बात का फायदा उठाते हुए सरकार को विश्वस्तरीय सोलर पार्क बनाने का काम चल रहा ह। यहां पीएम सूर्यघर बिजली योजना के तहत 1.5 लाख से ज्यादा घरों, कुसुम योजना के तहत 65 हजार से ज्यादा सोलर पंप किसानों को दिए गए हैं।

    किसानों को लेकर की बात
    पीएम मोदी ने आगे कहा कि दुनिया में युद्ध और अशांति से हमारे किसानों के लिए भी चुनौतियां पैदा हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद एक यूरिया की बोरी 3000 हजार के ऊपर पहुंच गई। पीएम मोदी ने खाद का जिक्र करते हुए कहा कि जो दुनिया में 3000 की बोरी थी, वो हमने अपने किसानों को 300 रुपए में दे दी।

    तेल कंपनियों को हआ ₹75,000 का घाटा
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में दाम नहीं बढ़ाए गए। अप्रैल से जून तक हमारी सरकारी तेल कंपनियों को ₹75,000 करोड़ का भारी नुकसान हुआ। यह घाटा इतना बड़ा है कि इसमें देश में एक पूरी नई रिफाइनरी खड़ी की जा सकती थी, लेकिन इसकी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई। सरकारी खजाने से तेल कंपनियों के घाटे को कम किया गया

    भारत में नहीं आई सप्लाई की कोई दिक्कत
    पीएम मोदी ने कहा कि भारत में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित नहीं होने दी गई। छोटी-मोटी दिक्कतों को छोड़ दें, तो पूरे देश में सप्लाई पूरी तरह सामान्य और सुचारू रही।

    दूसरे देशों में 40 प्रतिशत तक हुआ पेट्रोल में इजाफा
    पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संकट के दौरान देशों में पेट्रोल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी इजाफा हुआ। हाहाकार मच गया, लेकिन भारत ने फिर भी स्थिरता बनाई रखी। पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर जमकर राजनीति की गई और अफवाहें फैलाई गईं। उनके ये मंसूबे और साजिशें पूरी तरह असफल रहीं।

    युद्ध संकट में एलपीजी उत्पादन की बढ़ाई गई क्षमता
    पीएम मोदी ने बताया कि वैश्विक युद्ध संकट के दौरान देश में रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए कदम उठाया गया। देश की जिन रिफाइनरियों ने अपने इतिहास में कभी एलपीजी (LPG) का उत्पादन नहीं किया था, उन्हें आपातकालीन स्थिति में तुरंत री-कॉन्फ़िगर (तैयार) किया गया।एलपीजी उत्पादन की क्षमता बढ़ाई गई।

    एलपीजी सप्लाई कट गई तो राजस्थान से मिली सीख
    पीएम मोददी ने इस दौरान कहा कि 'अचानक युद्ध के हालातों के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से आने वाली देश की 90 एलपीजी प्रतिशत सप्लाई कट गई, तब राजस्थान की इस धरती की सीख काम आई। हमने तुरंत रिफाइनरी के काम पर फोकस किया और युद्ध स्तर पर घरेलू रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए'।

    राजस्थान की धरती ने चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया: पीएम मोदी
    बालोतरा के पचपदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने राजस्थान के शौर्य और परिश्रम को सलाम किया। पीएम ने इस दौरान वैश्विक स्तर पर हुए युद्ध संकटों का जिक्र करते हुए कहा, ' राजस्थान की धरती ने हमें हर मुश्किल से लड़ना और चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है।

    जोधपुर से शुरू हुई 'उड़ान' योजना से आने वाले दिनों में छोटे शहरों को करेगी एयर कनेक्ट
    जोधपुर में नए टर्मिनल के उद्घाटन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित 'उड़ान' (UDAN) योजना पर बात रखी। उन्होंने कहा कि जोधपुर में संशोधित उड़ान में आने वाले दिनों में छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी देगा।

    राजस्थान में इतनी गर्मी में इतने लोगों को आना भाजपा के प्रयासों पर विश्वास
    बालोतरा के पचपदरा में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की जनता का आभार जताया। पीएम ने कहा, 'राजस्थान की इस भयंकर और भीषण गर्मी में भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना यह साफ दिखाता है कि जनता का भाजपा के प्रयासों और विकास कार्यों पर कितना अटूट विश्वास है।'

    पीएम मोदी के रिमोट दबाकर किया जयपुर मेट्रो फेज -2 सहित विभिन्न योजनाओं का उदघाटन
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालोतरा के पचपदरा में आयोजित मुख्य समारोह के मंच से डिजिटल माध्यम (रिमोट) के जरिए 'जयपुर मेट्रो फेज-2' का भव्य शिलान्यास किया। इसके अलावा बालोतरा में की अन्य कई विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत की। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी सहित प्रदेश की उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी और डॉ. प्रेम चन्द बैरवा मौजूद रहे।

  • पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़े सभी पद; ममता सरकार पर बढ़ा दबाव

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़े सभी पद; ममता सरकार पर बढ़ा दबाव

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद शुरू हुए TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के बुरे दिन खत्म होते नहीं नजर आ रहे. पार्टी विधायक और सांसदों की बगावत के बाद अब बागी गुट ने कोलकाता में पार्टी के हेड ऑफिस पर भी कब्जा जमा लिया. अभी पार्टी दफ्तर पर कब्जे की रार मची ही है, इस बीच ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है. बंगाल टीएमसी के अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर बताया कि वह 3 जून को संभाले गए इस पद को छोड़ रही हैं. चंद्रिमा ने तृणमूल कांग्रेस और उससे जुड़ी संस्थाओं के अलग-अलग बैंक खातों के लिए हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से भी मुक्त किए जाने का अनुरोध किया. इसके अलावा, राज्य की पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की भूमिका से भी इस्तीफा दे दिया है। 

    टीएमसी में मच रही उठापठक के बीच ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार चंद्रिमा का इस तरह अचानक जाना टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। 

     जानकारी के मुताबिक, टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस पत्र में भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल सांगठनिक पदों से मुक्त हो रही हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी 'साइनिंग अथॉरिटी' के पद से भी तत्काल प्रभाव से कदम पीछे खींच लिए हैं। 

    ममता के लिए ये कितना बड़ा झटका?
    चंद्रिमा को ममता का करीबी माना जाता है। वे सरकार से लेकर संगठन तक में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। पार्टी में जारी हालिया उथल-पुथल के बीच भी वे ममता के साथ खड़ी नजर आई थीं। हालांकि, उनके बेटे सौरव बसु को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठक में देखा गया था। तबसे ही कई अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने ममता से दूरी बना ली है।    

    चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा रही हैं और सरकार से लेक संगठन तक में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। 

  • वन्यजीव शिकार पर बड़ी कार्रवाई! नर चीतल के शिकार मामले में सात आरोपी गिरफ्तार

    वन्यजीव शिकार पर बड़ी कार्रवाई! नर चीतल के शिकार मामले में सात आरोपी गिरफ्तार

    वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता

    नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

    सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती

    रायपुर, 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

    मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई
    वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

    शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त
    कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

    सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता
    वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

    वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

  • पंजाब कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा? रंधावा के बयान से बढ़ी हलचल, राहुल गांधी की वापसी का इंतजार

    पंजाब कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा? रंधावा के बयान से बढ़ी हलचल, राहुल गांधी की वापसी का इंतजार

    चंडीगढ़
     पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

    रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस को पसंद करते हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

    दरअसल, विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में दो से तीन दौर की बैठकों में पंजाब के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया।

    चन्नी के करीबी सोर्स के मुताबिक नेता ने भरोसा दिलाया कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश से लौट आएंगे, उसके बाद चन्नी की उनसे मीटिंग करा दी जाएगी। दूसरी तरफ कल शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आए गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर रंधावा ने हाईकमान पर ही सवाल खड़े किए।

    एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा- लीडरशिप को देखना चाहिए कि ऐसी बातें क्यों हो रही हैं। इतने पदाधिकारियों के बावजूद डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा। 3-4 मीटिंग के बाद भी ऐसा होना, यह किसका फेलियर है। इंदिरा गांधी-राजीव गांधी के वक्त 3 जनरल सेक्रेटरी होते थे, अब पता नहीं कितने हैं। सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए ऐसी बातें होती हैं।

    वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी इसको लेकर हरकत में आ गए हैं। वह आज या फिर अगले कुछ ही दिनों में चंडीगढ़ पहुंचकर मौजूदा प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व CM सांसद चरणजीत चन्नी से मुलाकात कर सकते हैं।

    वहीं शुक्रवार को सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने पर पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान को तीखे तेवर दिखाए। शुक्रवार को अपने घर मोरिंडा में 50 से ज्यादा नेता इकट्‌ठे कर हाईकमान का फैसला रिजेक्ट कर दिया।

    चन्नी गुट ने कहा कि एक हफ्ते के बाद वह हाईकमान से मुलाकात करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चन्नी इस वक्त ठीक उसी स्टाइल में पार्टी हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं, जैसे नवजोत सिद्धू ने प्रधान रहते 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटवा दिया था। हालांकि उसके बाद सिद्धू की जगह चन्नी सीएम बन गए।

    पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चन्नी के इस स्टैप से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सड़क पर आ गई है। अब वह हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब होते हैं या नहीं, लेकिन इसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2027 में झेलना ही पड़ेगा।

    इसे देखते हुए कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी आज चंडीगढ़ आ सकते हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए, चन्नी के फैसले से कांग्रेस को क्या फायदा और नुकसान होगा…

    राजा वड़िंग को लेकर बहस तेज
    इसके बावजूद प्रदेश इकाई में असंतोष कम होने के बजाय और खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

    पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजाब कांग्रेस में मौजूदा स्थिति पहले सामने आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के टकराव जैसी बनती जा रही है। अब चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच बढ़ती खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है।
    हालांकि कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब तक लिए गए बड़े संगठनात्मक फैसलों को वापस लेने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में हाल ही में घोषित संगठनात्मक सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इस स्तर पर बदलाव करने से विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    सात जुलाई को विदेश दौरे पर लौटेंगे राहुल गांधी
    सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान कुछ वरिष्ठ नेताओं को चंडीगढ़ भेज सकता है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और सह-प्रभारियों की चन्नी तथा वड़िंग गुट के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर संगठन में बढ़ते विवाद को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा सकती है। पंजाब मामलों के सह प्रभारी सूरज ठाकुर चरणजीत चन्नी से मुलाकात के लिए चंडीगढ़ आ सकते हैं।

     

  • MP में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 9 IPS अधिकारियों का तबादला, भोपाल, सागर और नर्मदापुरम में नए IG नियुक्त

    MP में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 9 IPS अधिकारियों का तबादला, भोपाल, सागर और नर्मदापुरम में नए IG नियुक्त

    भोपाल
     प्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात नौ IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए। रुचिवर्धन मिश्र पुलिस महानिरीक्षक भोपाल ग्रामीण जोन होंगी। वहीं, हरिनारायण चारी अब पुलिस मुख्यालय में एससीआरबी के स्थान पर प्रशासन का दायित्व संभालेंगे‌।

    शहडोल के पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव की जगह कुमार अग्रवाल और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के स्थान पर प्रियंका शुक्ला को भेजा गया है।गृह विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार चंद्रशेखर सोलंकी पुलिस महानिरीक्षक विशेष सत्र बल इंदौर रेंज को पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम जोन बनाया है।

    यशपाल सिंह राजपूत पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर और रामजी श्रीवास्तव सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस अकादमी भौंरी होंगे। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन आदर्श कटियार को दूरसंचार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    वहीं, अनुराग पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन के पास पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल और आइएपीटीसी इंदौर का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद कुमार तिवारी पुलिस अधीक्षक इंदौर रेल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे।

    भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर को मिली नई जिम्मेदारी
    इस फेरबदल में सबसे बड़ा नाम भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र का है. उन्हें अब पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रुचिवर्धन मिश्र को भोपाल (ग्रामीण) जोन की कमान सौंपी गई है. वह अपनी कार्यशैली के लिए भी प्रसिद्ध रहे हैं. चंद्रशेखर सोलंकी नर्मदापुरम जोन के आईजी बनाए गए हैं. वहीं सिमाला प्रसाद को खरगोन रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा मिथिलेश शुक्ला को सागर जोन की कमान मिली है। 

    इन जिलों के बदले गए एसपी (SP)
    गृह विभाग द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार शहडोल और शाजापुर जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदल दिया गया है. प्रियंका शुक्ला को अब शाजापुर का नया एसपी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले के एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

    किस IPS को मिली कौन-सी जिम्मेदारी
    शासन स्तर पर हुए बड़े फेरबदल को आगामी कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। 

    किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी:

    चंद्रशेखर सोलंकी: इन्हें आईजी, नर्मदापुरम ज़ोन की जिम्मेदारी दी गई है.

    मिथिलेश शुक्ला: इन्हें आईजी, सागर जोन का नया कमान संभाला गया है.

    सिमाला प्रसाद: इन्हें डीआईजी (DIG), खरगोन रेंज के पद पर नियुक्त किया गया है.

    भोपाल पुलिस कमिश्नर रहे हरिनारायण चारी मिश्र PHQ में IG (प्रशासन) बने हैं.

    रुचिवर्धन मिश्र को IG, भोपाल (ग्रामीण) जोन की जिम्मेदारी दी गई है.

    प्रियंका शुक्ला को एसपी, शाजापुर की जिम्मेदारी मिली है.

    संजय कुमार अग्रवाल एसपी, शहडोल बनाए गए हैं.

  • भारत ने रोका सिंधु का पानी तो चीन क्यों बना पाकिस्तान की उम्मीद? Indus Water Treaty पर समझिए पूरा मामला

    भारत ने रोका सिंधु का पानी तो चीन क्यों बना पाकिस्तान की उम्मीद? Indus Water Treaty पर समझिए पूरा मामला

    नई दिल्ली

     पाकिस्तान दशकों से सिंधु से अपनी प्यास बुझा रहा था. सिंधु जल समझौते से फायदा उठा रहा था. मगर वह अपनी औकात भूल गया. उसे यह याद नहीं रहा कि सिंधु जल समझौते की चाबी भारत के पास है. पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक करवाकर बहुत बड़ी गलती कर दी. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को दोतरफा मार मारी. पहले तो ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए. उसके बाद सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. भारत ने जब से सिंधु का पानी रोका है, तब से पाकिस्तान की हालत खराब है. वह पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तानी नेताओं के बयान में बार-बार सिंदु का दर्द झलक रहा है. अलग-अलग मंचों पर सिंधु का राग अलाप रहा है. जब इन सबसे भारत पर कोई असर नहीं पड़ा तो पाकिस्तान अब चीन के पल्लू में जा छिपा है. पाकिस्तान ने अबकी बार सिंधु जल विवाद पर सीधे चीन को घसीट लिया है। 

    दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद पुराना है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल सकती. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में चीन का नाम भी जोड़ दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि हिमालय से निकलने वाली नदियां सिर्फ भारत और पाकिस्तान की नहीं हैं, बल्कि चीन भी इनका बड़ा हितधारक है. सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान ने अचानक चीन को इस विवाद में क्यों घसीटा?

    पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है?
    सबसे पहले जानते हैं कि पाकिस्तान ने अब चीन का नाम कैसे और क्यों लिया है. दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां कुदरत की देन हैं. ये नदियां सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती हैं. उनका कहना है कि चीन से भी कई बड़ी नदियां निकलती हैं, इसलिए पानी का मुद्दा पूरी मानवता से जुड़ा है और चीन की भूमिका भी अहम है. यानी पाकिस्तान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है। 

    पाकिस्तान का पूरा बयान क्या है?
    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘चीन के बारे में दो सवाल थे. सबसे पहले हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों का पानी कुदरत की एक बड़ी देन है. हिमालयी नदी प्रणाली अल्लाह की एक नेमत है, जो सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती है. चीन की नदियां भी वहीं से निकलती हैं. इसलिए, यह पूरी इंसानियत की साझा विरासत है. पानी से जुड़े बड़े मुद्दों पर चीन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहेगा, क्योंकि वह सिर्फ़ दक्षिण एशिया (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली नदियों के मामले में ही नहीं, बल्कि हिमालय से चीन और सुदूर पूर्व (हमारे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) की ओर बहने वाली विशाल नदी प्रणालियों के मामले में भी एक अहम पक्षकार है। 

    चीन का नाम क्यों लिया?
    अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान ने चीन का नाम क्यों लिया. तो इसका जवाब सिंपल है- प्रेशर यानी दबाव. जी हां, सिंधु जल पर पाकिस्तान छटपटा रहा है. भारत ने जब से पानी रोका है, तब से वह बिलबिला रहा है. वह हर कोशिश कर रहा है मगर सिंधु का एक कतरा तक नहीं मिल पा रहा है. भारत साफ कर चुका है, पहले आतंकाद रोको, तभी पानी मिलेगा. इसलिए पाकिस्तान इस समय कूटनीतिक दबाव में है. भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मंचों पर घेरा है. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि चीन खुलकर उसके पक्ष में बोले और भारत पर दबाव बने। 

    पाकिस्तान को चीन से क्या उम्मीद
    यह हकीकत है कि चीन बहुत समय से पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है. यूं कहिए कि वह पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसलिए पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसके समर्थन में आवाज उठा सकता है. मगर बीते कुछ समय से भारत-चीन के रिश्ते भी बेहतर हुए हैं. अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन में नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे में पाकिस्तान का चीन खुलकर साथ दे और भारत का विरोध करे, इसकी संभावना बहुत कम है. इसलिए यहां पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है। 

    चीन क्यों नहीं देगा दखल
    भारत-पाकिस्तान के इस सिंधु जल मसले पर चीन के न बोलने की एक और वजह है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का आधार सिंधु जल संधि है. यह समझौता सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इसमें चीन किसी भी रूप में पक्षकार नहीं है. इसलिए चीन चाहकर भी दो देशों के मसले में मौजूदा हालात में न बोलेगा और न दखल देगा. वैसे भी लीगली भी देखें तो सिंधु जल संधि में चीन की कोई भूमिका नहीं है। 

    पाकिस्तान को किस बात का डर?
    पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी संजीवनी से कम नहीं है. पाकिस्तान बहुत हद तक सिंधु के पानी पर जिंदा है. पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. अगर भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का अधिकतम इस्तेमाल करता है या परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता हो सकती है. इस बार तो वैसे भी बाढ़ ने पाकिस्तान को बचा लिया. मगर बाढ़ नहीं आती तो पाकिस्तान में अभी त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा होता। 

    सिंधु जल पर भारत का रुख क्या है?
    सिंधु जल समझौते पर भारत का रुश साफ है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तब तक उसे एक बूंद भी सिंधु का पानी नहीं मिलेगा. भारत का तर्क है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते. भारत यह भी कह चुका है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार सिंधु जल संधि की समीक्षा करने का अधिकार रखता है। 

  • जुलाई में विद्यालयों में चलेगा पर्यावरण संरक्षण महाअभियान, ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ को मिलेगा विस्तार

    जुलाई में विद्यालयों में चलेगा पर्यावरण संरक्षण महाअभियान, ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ को मिलेगा विस्तार

    एक पेड़ मां के नाम 3.0' से हरित चेतना को मिलेगा नया विस्तार, जुलाई में विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान

     'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के जुलाई कैलेंडर के तहत पूरे माह चलेंगी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियां

    – पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, लेखन और जागरूकता कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में विकसित होंगे पर्यावरणीय संस्कार

    प्रत्येक विद्यार्थी बनेगा एक पौधे का संरक्षक, विद्यालयों से समाज तक पहुंचेगा हरित संदेश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रयोगशाला बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के अन्तर्गत जुलाई माह का गतिविधि कैलेंडर जारी किया गया है। जुलाई माह का यह कैलेंडर विद्यालयों में हरित संस्कृति को मजबूत करने और मिशन लाइफ के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    कैलेंडर के अनुसार जुलाई मे पूरे महीने 'स्वस्थ जीवनशैली अपनाना' विषय पर आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सतत जीवनशैली के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है।

    कैलेंडर में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का अभियान बन सके। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों में ऐसे व्यावहारिक संस्कार विकसित करना है, जो उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाए।

    'एक पेड़ मां के नाम 3.0' बनेगा प्रमुख अभियान
    जुलाई माह की सबसे प्रमुख गतिविधि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान होगी। इसके अंतर्गत विद्यालय परिसर, सार्वजनिक स्थलों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को पौधों के वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण का संकल्प भी लें।

    हर छात्र निभाएगा पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी
    कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक लगाए गए पौधे की देखभाल, सिंचाई, संरक्षण और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही विद्यालयों में इको क्लब्स के माध्यम से पौधों की प्रगति की समीक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    रचनात्मक गतिविधियों से बढ़ेगी जागरूकता
    जुलाई के दौरान पोस्टर, स्लोगन, कोलाज, स्वतंत्र लेखन, वाद-विवाद और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रकृति भ्रमण के माध्यम से स्थानीय जैव विविधता, पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया जाएगा। दूसरे शनिवार को विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।