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  • MP और रास अल खैमाह के बीच बढ़ेगा औद्योगिक सहयोग! CM मोहन यादव ने शासक शेख सौद से की चर्चा

    MP और रास अल खैमाह के बीच बढ़ेगा औद्योगिक सहयोग! CM मोहन यादव ने शासक शेख सौद से की चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रस-अल-खैमा के शासक शेख सौद बिन सकर अल कासिमी से की मुलाकात

    मध्यप्रदेश और रास अल खैमाह के बीच निवेश एवं औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर हुई चर्चा

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने दुबई प्रवास के दूसरे दिन संयुक्त अरब अमीरात की सुप्रीम काउंसिल के सदस्य एवं रस-अल-खैमा के शासक शेख सौद बिन सकर अल कासिमी से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण और प्रदेश में उपलब्ध विभिन्न औद्योगिक और व्यवसायिक अवसरों की जानकारी दी।बैठक में मध्यप्रदेश और रस-अल-खैमा के बीच निवेश संवर्धन, औद्योगिक सहयोग, निवेशकों के संपर्क और बाजार पहुंच बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

    विभिन्न क्षेत्रों में निवेश एवं सहयोग की संभावनाओं पर हुई चर्चा

    दोनों प्रमुखों के मध्य सिरेमिक एवं निर्माण सामग्री, फार्मास्यूटिकल्स एवं मेडिकल डिवाइस, पर्यटन एवं आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सेक्टर्स में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इन क्षेत्रों में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दोनों पक्षों के बीच संस्थागत समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।

    निवेशकों को मध्यप्रदेश में भूमि की पहचान, आवश्यक अनुमतियों, अधोसंरचना से जुड़ी सुविधाओं और राज्य-स्तरीय नोडल सहयोग के माध्यम से समयबद्ध सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में भी चर्चा हुई। रस-अल खैमा की कंपनियों एवं संस्थानों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग की संयुक्त रूप से पहचान करने का प्रस्ताव रखा गया।

    रस-अल-खैमा विनिर्माण, सिरेमिक, निर्माण सामग्री, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में स्थापित केंद्र है। वहीं मध्यप्रदेश अपनी केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, उपलब्ध औद्योगिक भूमि, स्थापित अधोसंरचना और सिंगल विंडो सुविधा के माध्यम से निवेशकों को भारतीय बाजार तक प्रभावी पहुंच उपलब्ध करता है। बैठक में दोनों पक्षों की पूरक क्षमताओं के आधार पर सहयोग के अवसरों पर चर्चा हुई।

     

  • आतंकी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, NIA केसों के लिए राज्यों में जल्द बनेंगी स्पेशल कोर्ट

    आतंकी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, NIA केसों के लिए राज्यों में जल्द बनेंगी स्पेशल कोर्ट

     नई दिल्ली
    विशेष एनआईए अ
    दालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से जल्द विशेष अदालतें शुरू करने को कहा, ताकि NIA के मामलों में सुनवाई में देरी न हो। 

    एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को बताया कि कई राज्यों ने इस संबंध में अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है. मतलब इन राज्यों ने अब तक बताया ही नहीं है कि उनके यहां विशेष NIA अदालतें स्थापित की गई हैं या नहीं।  

    सुनवाई के दौरान कर्नाटक के वकील ने बताया कि बेंगलुरु में तीन विशेष अदालतें हैं. और चिकमंगलूर में भी जल्द अदालत शुरू होने वाली है. केरल सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने विशेष अदालतों के लिए जगहों की पहचान कर ली है. राज्य में दो अदालतें स्थापित होनी है. उन्होंने अदालत से दो-तीन महीने का समय मांगा लेकिन CJI ने एक महीने में ही अदालतें शुरू करने को कहा. तमिलनाडु सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में 2 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एक तो कार्यरत भी हैं। 

    तेलंगाना सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में सिर्फ एक विशेष NIA अदालत की जरूरत है. तेलंगाना में NIA के 13 मामले हैं. CJI ने तेलंगाना सरकार को तीन हफ्ते में अदालतें शुरू करने का निर्देश दिया. असम में NIA के 26 मामले हैं. राज्य में एक विशेष अदालत काम कर रही है और दो और अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। 

    CJI ने असम से इस संबंध में चार हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. जम्मू कश्मीर में NIA के 46 मामले हैं और यहां सिर्फ एक विशेष अदालत है. सुरक्षा कारणों से अदालतें जम्मू में बनाने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीन और अदालतों की जरूरत बताई गई। 

    मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि विशेष NIA अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई नहीं होनी चाहिए. ताकि NIA के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके। 

  • नितिन गडकरी बोले- अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से मिला ज्यादा समर्थन, बताया क्यों किया लोगों ने वोट

    नितिन गडकरी बोले- अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से मिला ज्यादा समर्थन, बताया क्यों किया लोगों ने वोट

    नागपुर

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. अब उन्होंने फिर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें शिक्षित क्षेत्रों की तुलना में क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से ज्यादा वोट मिले. गडकरी का यह बयान अब वायरल हो रहा है। 

    नागपुर में बोले गडकरी- पढ़े-लिखे से ज्यादा अपराधी इलाकों से मिले वोट 
    दरअसल नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके चुनाव में पढ़े-लिखे लोगों से ज्यादा अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से उन्हें वोट मिले थे. उन्होंने बताया कि शहर के बड़े और शिक्षित इलाकों में उन्हें कुल मतदान प्रतिशत का लगभग 70-75% वोट मिला, जबकि अपराधी, अंडरवर्ल्ड और रेड इलाकों में उन्हें 92% वोट मिले। 

    मैं उनके काम का समर्थन नहीं करताः गडकरी
    गडकरी ने हंसते हुए कहा कि नागपुर में अंडरवर्ल्ड और असामाजिक कार्य से जुड़े लगभग 99% लोग उनके समर्थक हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे उनके काम या गतिविधियों का समर्थन करते हैं. नितिन गडकरी का कहना है कि उनके सभी लोगों से संबंध हैं लेकिन इसे गलत अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए। 

    गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके उन लोगों से संबंध हैं या वे उनके कामों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि उन इलाकों में सड़कें बनवाने और सामाजिक कार्य करने के कारण वहां के लोगों ने उन्हें वोट दिया. इससे पहले भी नितिन गडकरी के कई बयान चर्चित हुए हैं. वो बिना लाग-लपेट अपनी बात रखने वाले नेता माने जाते हैं.बीते दिनों उन्होंने खुद से कहा था कि बहुत काम कर लिया, अब नई पीढ़ी को मौका मिले। 

  • Asian Games Cricket: 28 सितंबर को उतरेगी टीम इंडिया, भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल या ब्रॉन्ज मेडल मैच में भिड़ंत संभव

    Asian Games Cricket: 28 सितंबर को उतरेगी टीम इंडिया, भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल या ब्रॉन्ज मेडल मैच में भिड़ंत संभव

    नई दिल्ली

    एशियन क्रिकेट काउंसिल ने सोमवार को आने वाले एशियन गेम्स में पुरुषों और महिलाओं के क्रिकेट मुकाबलों का शेड्यूल कन्फर्म किया. सभी क्रिकेट मैच नागोया के पालोमा मिजुहो स्टेडियम में T20 फॉर्मेट में खेले जाएंगे. वहीं भारतीय टीम सीधे क्वार्टर फाइनल खेलेगी. जहां पुरुष टीम का 28 सितंबर को अपने अभियान की शुरुआत करेगी. ड्रॉ के तहत, भारत और पाकिस्तान सिर्फ़ गोल्ड-मेडल मैच या ब्रॉन्ज़-मेडल प्ले-ऑफ़ में ही मिल सकते हैं, दोनों ही मैच 3 अक्टूबर को होने हैं.

    पुरुषों का क्रिकेट शेड्यूल
    ग्रुप

    ग्रुप A: अफ़गानिस्तान, जापान, नेपाल
    ग्रुप B: हॉन्ग कॉन्ग, चीन, मलेशिया, ओमान
    ग्रुप स्टेज

    24 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — अफ़गानिस्तान बनाम जापान
    दोपहर 2:00 बजे — हॉन्ग कॉन्ग बनाम मलेशिया
    25 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — हॉन्ग कॉन्ग बनाम ओमान
    दोपहर 2:00 बजे — अफ़गानिस्तान बनाम नेपाल
    26 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — जापान बनाम नेपाल
    दोपहर 2:00 बजे — मलेशिया बनाम ओमान
    क्वार्टर-फ़ाइनल — 28 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — पाकिस्तान बनाम B2
    दोपहर 2:00 बजे — इंडिया बनाम A2
    क्वार्टर-फ़ाइनल — 29 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — श्रीलंका बनाम A1
    दोपहर 2:00 बजे — बांग्लादेश बनाम B1
    नॉकआउट स्टेज — 1 अक्टूबर

    सुबह 9:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 1
    दोपहर 2:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 2

    मेडल मैच — अक्टूबर 3

    सुबह 9:00 बजे — ब्रॉन्ज़-मेडल मैच
    दोपहर 2:00 बजे — खत्म
    महिला क्रिकेट शेड्यूल
    क्वार्टर-फ़ाइनल

    17 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — बांग्लादेश बनाम चीन
    दोपहर 2:00 बजे — पाकिस्तान बनाम थाईलैंड
    18 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — श्रीलंका बनाम मलेशिया
    दोपहर 2:00 बजे — इंडिया बनाम जापान
    नॉकआउट स्टेज

    20 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 1
    दोपहर 2:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 2
    22 सितंबर

    सुबह 9:00 बजे — ब्रॉन्ज़-मेडल मैच
    दोपहर 2:00 बजे — खत्म

     

  • ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में स्वदेशी तकनीक की अहम भूमिका, एयर मार्शल ने IACCS और ब्रह्मोस का किया जिक्र

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में स्वदेशी तकनीक की अहम भूमिका, एयर मार्शल ने IACCS और ब्रह्मोस का किया जिक्र

     नई दिल्ली  

     सुरक्षा सभा में 'आसमान के रखवाले' सेशन के दौरान एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने खुलकर बात की. वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे एयर मार्शल मिश्र ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में हुई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया। 

    उन्होंने साफ कहा कि भविष्य का युद्ध आज ही चल रहा है. जो लोग सोच रहे थे कि कुछ नहीं हो रहा, वास्तव में लंबी तैयारी, मेहनत और दूरदर्शिता का नतीजा ऑपरेशन सिंदूर में दिख रहा था. भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों के दम पर दुश्मन को करारा जवाब दिया. यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था बल्कि वर्षों की मेहनत, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना के संयुक्त प्रयास का प्रमाण था। 

    एयर मार्शल मिश्र ने सामान्य जीवन के उदाहरण से समझाया कि तकनीक कितनी गहराई तक पहुंच चुकी है. जब आप पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करते हैं तो वह सैटेलाइट के जरिए भारत के बैंक खाते से जुड़ता है, पैसे काटता है और तुरंत जानकारी वापस भेजता है. इसी तरह भविष्य के युद्ध भी रोजमर्रा की जिंदगी की तरह तकनीक पर आधारित होंगे, लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते क्योंकि वे धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं। 

    ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल को सुखोई-30 से दागने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 250- 300 किलोमीटर दूर लक्ष्य को दो मीटर की सटीकता से भेदना भारतीय तकनीक का चमत्कार है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद तकनीक की रफ्तार और तेज हो गई है. अगर हम इसके साथ कदम नहीं मिलाएंगे तो चार-पांच साल में ही हैरान रह जाएंगे। 

    वायुसेना अधिकारी की निरंतर पढ़ाई और सिस्टम का विकास
    एयर मार्शल मिश्र ने नई पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि वायुसेना अधिकारी को परिचालन ड्यूटी निभाते हुए भी सामान्य छात्रों से कहीं ज्यादा पढ़ाई करनी पड़ती है. तकनीक के साथ तालमेल बनाए रखना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन उपकरणों ने हमारे एयर स्पेस की रक्षा की और दुश्मन को नष्ट किया, वे वर्षों की मेहनत का फल थे. वायुसेना को अक्सर सबसे महंगी सेना कहा जाता है क्योंकि इसमें बजट का बड़ा हिस्सा लगता है, लेकिन यह दुनिया की उत्कृष्ट वायुसेनाओं में गिनी जाती है। 

    परिपक्व सिस्टम बनाने में पीढ़ियां लगती हैं. पंद्रह-बीस साल पहले भारतीय वायुसेना के पास ज्यादातर विदेशी रडार थे- रूस, अमेरिका, फ्रांस के. विदेशी विक्रेता से एयर डिफेंस सिस्टम बनवाने पर डेटा साझा करना पड़ता जो सार्वजनिक हो जाता. इसलिए भारतीय वैज्ञानिक, इंजीनियर और वायुसेना के अधिकारियों ने मिलकर पूरी तरह स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस बनाया. इसमें करीब पंद्रह साल लगे। 

    आज देश के हर रडार- सैन्य, नागरिक, सेना और धीरे-धीरे नौसेना के, इस सिस्टम से जुड़े हैं. सात-आठ भूमिगत संचालन केंद्रों से पूरे देश की वायु स्थिति पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर सीमा पर हथियार दागे जा सकते हैं. पहले हर रडार के पास एक व्यक्ति बैठकर स्कोप देखता था। 

    अब डेटा नेटवर्क से सब जुड़ गया है. अलग-अलग देशों के रडारों के डेटा फॉर्मेट को तोड़कर एक सामान्य प्रारूप में लाया गया. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे नागरिक टर्मिनलों के शक्तिशाली रडार भी इसमें शामिल हैं. इंटरनेट प्रोटोकॉल पर कमांड लेकर किसी भी जगह से मिसाइल दागने का आदेश दिया जा सकता है. यह सब एक दिन में नहीं हुआ. वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पायलटों की पीढ़ियों ने असफलताओं से सीखा और फिर से कोशिश की। 

    बालाकोट से सिंदूर तक: रणनीतिक विस्तार और सटीकता का प्रमाण
    एयर मार्शल मिश्र ने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना रणनीतिक दृष्टि से की. बालाकोट के समय भी वायुसेना के पास वही क्षमता थी जो सिंदूर में इस्तेमाल हुई. अंतर संसाधनों की कमी का नहीं बल्कि रणनीति का था. सरकार के निर्णयों पर निर्भर करते हुए प्रतिक्रिया का विस्तार होता गया। 

    उड़ी हमले के बाद बालाकोट, फिर सिंदूर- यह चेतावनी का क्रम था. अगर दुश्मन नहीं मानता तो और बड़ा जवाब दिया जाता है. सिंदूर भी अंतिम नहीं है. तीस अप्रैल 2026 को रिटायर हो चुके एयर मार्शल ने कहा कि जो लोग अभी योजना बना रहे हैं उनके पास हर स्थिति के लिए तैयार योजनाएँ हैं। 

    सटीकता का प्रमाण देते हुए उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी का जिक्र किया. बालाकोट में दो धब्बे दिखे थे. सिंदूर में बहावलपुर और मुरीद के नौ भवनों पर हमले की इमेज में भी वही दो स्पॉट दिखे. लेकिन जमीनी तस्वीरों से साफ हो गया कि कितना विनाशकारी और सटीक हमला हुआ था। 

    बालाकोट में मौसम या अन्य कारणों से जमीनी तस्वीर नहीं आ सकीं इसलिए सबूत कमजोर समझा गया. अब दोनों की तुलना से साबित होता है कि भारतीय वायुसेना का हमला कितना प्रभावी था. सैनिकों को जब 'कोई सबूत नहीं' या 'कौए मार दिए' जैसी बातें सुननी पड़ती हैं तो दर्द होता है, लेकिन वे परिणाम जानते हैं क्योंकि उन्होंने खुद देखा और किया है। 

    लंबी दूरी की क्षमता और वायु शक्ति की खूबियां
    एस-400 सिस्टम से 314 किलोमीटर दूर उड़ते विमान को मार गिराना लगभग विश्व रिकॉर्ड के करीब है. ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल दुनिया की एकमात्र परिचालन सुपरसोनिक एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल है जो पूरी तरह स्वदेशी (रूस-भारत सहयोग से) है। 

    सरगोधा, रहीम यार खान जैसे ठिकानों पर कम से कम दो सौ किलोमीटर दूर से हमला संभव हुआ. वायु शक्ति जमीनी और नौसैनिक शक्ति से अलग है. यह तेज, लंबी दूरी तक पहुंचने वाली, सटीक और गतिशील है. हवा में उड़ान भरने के बाद भी वापस बुलाया जा सकता है जबकि जमीन से दागी मिसाइल एक बार निकलने के बाद नहीं लौटती. ईरान-इजरायल संघर्ष में भी यही देखा गया कि उड़ते विमानों की लचीलापन ज्यादा होती है। 

    स्वदेशीकरण का मतलब संप्रभुता
    एयर मार्शल मिश्र ने स्वदेशीकरण को मेक इन इंडिया या सर्वश्रेष्ठ होने से अलग बताया. उनके अनुसार स्वदेशीकरण संप्रभुता के बराबर है. अगर आप किसी दूसरे देश पर निर्भर हैं तो सीमाओं की रक्षा स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते. पाकिस्तान के कई अमेरिकी मूल के रडार नष्ट होने के बाद मरम्मत के लिए अमेरिकी तकनीशियनों का इंतजार करना पड़ा. इससे सुरक्षा में बड़ा अंतराल पैदा हो गया। 

    अगर रडार स्वदेशी होते तो भारतीय कंपनियां, स्टार्टअप और पीएसयू तुरंत ठीक कर देते. संप्रभुता सिर्फ जमीन, कानून और लोगों तक सीमित नहीं. यह स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता है. युद्ध में अगर मिसाइल बाहर से मँगवानी पड़े और सप्लायर मना कर दे तो फैसला आपके हाथ में नहीं रहता। 
    एलसीए तेजस में देरी को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी देश पूरा विमान अकेले नहीं बनाता. अमेरिका भी कई हिस्से बाहर से लेता है. संप्रभुता पूरे विमान बनाने में नहीं बल्कि उस महत्वपूर्ण पिन या धातु विज्ञान, डिजाइन और गुणवत्ता में है जो पूरे विमान को संभाले। 

    अगर वह पिन विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी लागत पर बन जाए तो संप्रभुता हासिल हो जाती है. पोखरण-2 के बाद प्रतिबंधों ने क्रिटिकल तकनीकें रोक दीं. आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक ताकत बढ़ने के साथ विकास तेज हुआ. डिजाइनर, उत्पादन एजेंसी और उपयोगकर्ता तीनों की जिम्मेदारी है. गलतियां करके सीखना पड़ता है. मारुति से लेकर एलसीए मार्क-1, मार्क-2 तक का सफर तय करना होगा। 

    ड्रोन की भूमिका और भविष्य की तैयारी
    ड्रोन को लेकर एयर मार्शल मिश्र का नजरिया संतुलित था. वे खुद फाइटर पायलट रहे हैं इसलिए ड्रोन को 'बाद का पक्षी' कहते हैं. भारी काम निश्चित पंख वाले विमान ही करते हैं. ईरान-इजरायल संघर्ष के शुरुआती दिनों में अमेरिका और इजरायल रोज सौ फाइटर सॉर्टी उड़ा रहे थे। 

    तीन परमाणु स्थलों पर एक मिशन में 137 विमान शामिल थे. ड्रोन कहां थे? ड्रोन महत्वपूर्ण अंतराल भरते हैं जहां पंख वाला विमान भेजना जोखिम भरा या महंगा हो. उन्हें बड़ी संख्या में बनाया जा सकता है. पायलट का मतलब कॉकपिट में बैठने वाला नहीं बल्कि नियंत्रण करने वाला है. एमक्यू-9 जैसे सिस्टम में बाहरी पायलट हजारों किलोमीटर दूर से उड़ाते हैं. सरकार, अकादमी और कॉर्पोरेट सब मिलकर स्वदेशी ड्रोन बना रहे हैं जो अच्छी बात है। 

    ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि स्वदेशी हथियार न सिर्फ कामयाब हैं बल्कि संप्रभुता का आधार हैं. आईएसीसीएस जैसी प्रणालियां, ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें और लंबी दूरी की क्षमताएं भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाती हैं. भविष्य के युद्ध तकनीक, एकीकरण और स्वतंत्र निर्णय क्षमता पर निर्भर करेंगे। 

    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के शब्दों में, यह सब एक दिन में नहीं हुआ बल्कि पीढ़ियों की मेहनत का फल है. देशवासियों को यह समझना चाहिए कि आसमान की रक्षा चौबीस घंटे, हर सेकंड चल रही है. वह पूरी तरह भारतीय प्रयासों से संभव हो रही है। 

  • सत्य निकेतन हादसे में किसकी गलती? HC ने MCD और बिल्डिंग मालिक दोनों पर उठाए सवाल

    सत्य निकेतन हादसे में किसकी गलती? HC ने MCD और बिल्डिंग मालिक दोनों पर उठाए सवाल

     नई दिल्ली
    दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतों के गिरने के मामले में दाखिल PIL पर सुनवाई की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे. कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी। 

    यह PIL सत्य निकेतन इलाके में कल हुई उस घटना के बाद दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें गिर गई थीं. इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. इमारतों में रहने वाले कई छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है. उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए। 

    हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अधिक गहरे और सार्थक तरीके से काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें गिरीं, उनमें आसपास के DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. कोर्ट ने कहा कि यह आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं देता, जिसके कारण छात्रों को PG का इस्तेमाल करना पड़ता है। 

    HC ने DU से बाहर से आने वाले कितने छात्र उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. कोर्ट ने MCD से पूछा कि क्या PG चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं. MCD को इस बारे में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। 

    इमारतों की अनुमति की जांच और PG हॉस्टल का ऑडिट
    हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराई जाए कि हादसे में गिरी इमारतें वैध अनुमति के साथ बनाई गई थीं या नहीं. अगर इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी तो इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है. कोर्ट ने गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है. इसके साथ ही MCD को PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनका निर्माण संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ है या नहीं. सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर लेते हैं. इस पर HC ने पूछा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट PG के तौर पर किराए पर दिया जा रहा है. कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा देने को भी कहा.

    चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है. जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि हर निर्माण नियमों के अनुसार किया जाए. HC ने कहा कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग होते तो शायद ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था. कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। 

  • MP में निवेश की बंपर संभावनाएं! AI, डिफेंस, फूड प्रोसेसिंग समेत इन सेक्टर्स पर CM मोहन यादव का फोकस

    MP में निवेश की बंपर संभावनाएं! AI, डिफेंस, फूड प्रोसेसिंग समेत इन सेक्टर्स पर CM मोहन यादव का फोकस

    निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब

     AI-डेटा से डिफेंस और फूड प्रोसेसिंग तक हर सेक्टर में अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    25 से ज्यादा नई नीतियां लागू
    1.10 करोड़ से अधिक लोगों को MSME सेक्टर में रोजगार

    भोपाल
    मध्यप्रदेश अब निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। दुबई यात्रा के पहले दिन पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश की दृष्टि से हर क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेक्टर, ड्रोन, डिफेंस और साइंस सिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश के लिए राज्य में अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर क्षेत्र की स्थानीय क्षमता को पहचानकर उसे उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदलना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में जो पहल की है, मध्यप्रदेश में उसे प्रभावी रूप से लागू किया गया है। राज्य सरकार ने कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया है और 25 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़े उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल अधिक अनुकूल हुआ है।

    MSME सेक्टर में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग MSME क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने शासकीय सेवाओं में नई भर्तियां भी लागू की हैं। प्रदेश में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है और निर्यात के क्षेत्र में भी राज्य लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है।उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापार हितैषी नीतियों का उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ स्थानीय उद्यमों को भी विस्तार के अवसर उपलब्ध कराना है। निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे उद्योगों की स्थापना और संचालन दोनों को सुगम बनाया जा सके।

    AI, डेटा, ड्रोन और डिफेंस पर विशेष फोकस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश ने AI, डेटा, ड्रोन और डिफेंस जैसे नए क्षेत्रों को विशेष रूप से प्रमोट किया है। प्रदेश में तीन नए IT पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो रीवा, इंदौर और उज्जैन में बन रहे हैं। इनसे तकनीकी उद्योगों, स्टार्टअप और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।उन्होंने कहा कि प्रदेश में साइंस सिटी भी विकसित की जा रही है। विज्ञान, तकनीक, नवाचार और नई पीढ़ी के कौशल विकास के लिहाज से यह महत्वपूर्ण पहल है।

     जमीन, बिजली, पानी और ग्रीन एनर्जी की पर्याप्त उपलब्धता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति बेहद मजबूत है। प्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक और भूमि, सरप्लस बिजली तथा पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पंप लोड और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता प्रदेश में है।उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए भूमि और संसाधनों के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आवागमन की सुविधा भी जरूरी है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में भी अपनी कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। यही वजह है कि प्रदेश देशभर के निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में दुनिया की सबसे सस्ती बिजली बन रही है। सस्ती बिजली, ग्रीन एनर्जी, पर्याप्त भूमि, पानी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संयोजन प्रदेश को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाता है। इन सुविधाओं और नीतिगत लाभों के आधार पर मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को प्रतिस्पर्धा दे रहा है।

    नीतियां बनीं निवेश की ताकत, लाभ जमीन पर पहुंचा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सरकार ने केवल नीतियां बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि निवेशकों को नीतियों के आधार पर मिलने वाले लाभ प्रभावी रूप से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। व्यापार हितैषी नीतियों के साथ निवेशकों के लिए आवश्यक सुविधाओं और अनुकूल वातावरण का निर्माण किया गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने का परिणाम है कि बड़े उद्योगों की स्थापना तेजी से हो रही है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

    रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से जिला स्तर तक पहुंचेगा उद्योग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करने के नए अवसर तैयार किए गए हैं। इस पहल की देशभर में सराहना हुई है।अब सरकार का फोकस जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और संभावनाओं को चिन्हित कर उन्हें उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसरों में बदला जा रहा है। इससे औद्योगिक विकास बड़े शहरों तक सीमित न रहकर जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा।

    शिक्षा और स्वास्थ्य को रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से प्रदेश में शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी इसी दृष्टिकोण से सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि बेहतर सेवाओं के साथ इस क्षेत्र में भी रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ें।

    भोपाल-इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, चार नए एयरपोर्ट की तैयारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश और पर्यटन के लिए बेहतर एयर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है। प्रदेश में चार और नए एयरपोर्ट विकसित किए जाने की तैयारी है। ग्वालियर और जबलपुर भी एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से तैयार हैं और भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के कारण मध्यप्रदेश देश और दुनिया से तेजी से जुड़ रहा है। इसका सीधा लाभ उद्योग, व्यापार, निवेश और पर्यटन को मिल रहा है।

     महाकाल लोक के बाद पर्यटन में बड़ा उछाल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश के साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी देश का बड़ा प्लेयर बनकर उभरा है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश में करीब 14 करोड़ बाहरी पर्यटकों का आगमन हुआ है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के विस्तार से होटल, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार एवं निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। मध्यप्रदेश अब देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    हर क्षेत्र की क्षमता को निवेश और रोजगार में बदलने का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग से लेकर टेक्सटाइल, IT, AI, डेटा, ड्रोन, डिफेंस और पर्यटन तक प्रत्येक क्षेत्र में उद्योग लगाने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पास पर्याप्त भूमि, बिजली, पानी, ग्रीन एनर्जी, लैंड बैंक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से विकसित हो रही एयर कनेक्टिविटी जैसी ताकतें हैं।उन्होंने कहा कि सरकार ने नीतिगत सुधारों के साथ ऐसा निवेश इकोसिस्टम तैयार किया है, जिसमें स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं को उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश का लक्ष्य स्पष्ट है—प्रदेश की क्षमता को निवेश में, निवेश को उत्पादन में और उत्पादन को रोजगार में बदलना।

  • HC से राहत नहीं, कोर्ट से जेल! स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, 21 सितंबर को अगली सुनवाई

    HC से राहत नहीं, कोर्ट से जेल! स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, 21 सितंबर को अगली सुनवाई

    नई दिल्ली

    एससी-एसटी और पॉक्सो ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को डबल झटका लगा है। एक तरफ उसे निचली अदालत ने उसे 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है तो दूसरी तरफ हाई कोर्ट ने याचिका दायर करके राहत की उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया। स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित कराने के लिए उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जस्टिस नवीन चावला और रविंद्र डुडेजा की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले सोमवार सुबह चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने तत्काल इस पर सुनवाई को सहमति दी थी।

    दूसरी तरफ, अडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह की अदालत ने मारपीट मामले में हिंदुत्ववादी 'इन्फ्लुएंसर' स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने अब भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी है। भारद्वाज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया गया था।

    दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट के आरोप में भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। रविवार को भारद्वाज को एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑनलाइन पेश किया गया था और एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    कैसे गिरफ्तार हुआ स्वतंत्र भारद्वाज
    भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा, 'वह पिछले तीन दिन से हिरासत में है, मैं अनुरोध करता हूं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका आज ही सूचीबद्ध की जाए।' दिल्ली पुलिस ने 5 जून को भारद्वाज को तब गिरफ्तार किया गया जब उसके एक वीडियो की वजह से करीब दो महीने पहले हुई मारपीट की घटना ने अचानक तूल पकड़ लिया। सीजेपी आंदोलन के दौरान भारद्वाज और एक दलित शख्स के बीच मारपीट हुई थी। भारद्वाज ने हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उसने मारपीट करके सिर फोड़ दिया, लेकिन राजनीतिक पहुंच की वजह से बच गया। उसने कहा था, ‘मैंने सिर फोड़ दिया… क्या आप जानते हैं कि यह अपराध किस धारा के तहत आता है? धारा 307। उसे 7 टांके लगे थे।’ इसके बाद सीजेपी और विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद मार्ग थाने पर धरना देकर पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने उसके खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट और पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया था।

    पॉक्सो ऐक्ट में क्यों केस
    शुक्रवार को पुलिस ने नाबालिग छात्रा की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक नई शिकायत दर्ज की। शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी प्राथमिकी में जोड़ी है। पीड़िता ने इससे पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए और छेड़छाड़ कर बनाई गईं तस्वीरें भेजी गईं।

  • सत्य निकेतन हादसे से जागी दिल्ली सरकार, पुराने भवनों में हॉस्टल-नर्सिंग होम को लेकर CM का बड़ा फैसला

    सत्य निकेतन हादसे से जागी दिल्ली सरकार, पुराने भवनों में हॉस्टल-नर्सिंग होम को लेकर CM का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली

    दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में कई लोग घायल भी हो गए. यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई. जो ब्लिडिंग गिरी, उसमें पीजी चलता था. जिसमें कई कॉलेज छात्र रहा करते थे. इस हादसे के बाद दिल्ली की पुरानी इमारतों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं. इधर आज सुबह घटनास्थल पर पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हम अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसी पॉलिसी बना रहे हैं जिसके तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और अपनी सुरक्षा को प्रमाणित करना होगा। 

    सीएम ने आगे कहा कि इसके बिना उन्हें उस जगह पर कोई भी सार्वजनिक सेवा या सुविधा—जैसे PG अकोमोडेशन, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य गतिविधि—चलाने का अधिकार नहीं होगा. इस संबंध में कड़े नियम लागू किए जाएंगे। 

    जिम्मेदार अधिकारी किए जाएंगे सस्पेंड
    दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन के हादसे पर यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा; उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा. सभी अधिकारियों और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़े निर्देश दिए गए हैं; इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। 

    जिम्मेदार अधिकारियों का सस्पेंशन आज हीः सीएम
    सीएम ने यह भी कहा कि हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों के सस्पेंशन के आदेश आज ही जारी कर दिए जाएंगे. हम इन छात्रों के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र को कोई परेशानी न हो. सरकार की ओर से हम सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। 

    मंत्री बोले- स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट अनिवार्य की नीति बनेगी
    दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर कहा, "बचाए गए 12 लोगों में से 6 की मौत हो गई है. बाकी लोगों का इलाज चल रहा है और वे सुरक्षित हैं. आज मुख्यमंत्री ने मेयर और MCD कमिश्नर के साथ बैठक की और निर्देश दिया कि यहां चल रहे PG, हॉस्टल और सार्वजनिक सुविधाओं वाले संस्थानों के लिए स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने वाली नीति तुरंत बनाई जाए. स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट के बिना उन्हें काम करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। 

  • ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’, अवैध शराब मामले में उप मुख्यमंत्री शुक्ल सख्त; अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

    ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’, अवैध शराब मामले में उप मुख्यमंत्री शुक्ल सख्त; अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

    लापरवाही करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अवैध शराब प्रभावितों की स्वास्थ्य सुविधाओं एवं कारवाई की समीक्षा की

    भोपाल

    बंडा क्षेत्र में अवैध व जहरीली शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के मामले में उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बुन्देलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रभावितों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं एवं पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिले में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्णतः रोक लगाई जाए। सभी शराब दुकानों की जांच, उनके स्टॉक की निगरानी और अवैध कारोबार की गहन जांच की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले एवं जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को जिला पुलिस प्रशासन में कसावट और नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी रूप से चलाने के निर्देश दिए।

      कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि अवैध शराब से प्रभावित कुल 84 मरीज वर्तमान में उपचाररत हैं, जिनमें 59 मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में, 17 मरीज जिला चिकित्सालय में, 7 मरीज बंडा सिविल हॉस्पिटल में भर्ती हैं, जबकि 1 गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की हालत अब स्थिर है और सभी के लिए आवश्यक दवाएं, डायलिसिस और जांच की सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। जहरीली शराब के स्रोत की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह शराब बाहर से बनकर सप्लाई हुई है, जिसमें मेथेनॉल की मिलावट पाई गई है।

      पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि प्रकरण मे थाना बण्डा मे पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 20 आरोपियों के विरूद्ध नामजद अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई है जिन पर अवैध लाभ के उद्देश्य से संदिग्ध नकली एवं अवैध शराब के निर्माण, सप्लाई एवं बिक्री से जुड़े होने के संबंध में आरोप हैं। इसके अतिरिक्त थाना विनायका मे भी 10 आरोपियों के विरूद्ध नामजद प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। पुलिस टीमों द्वारा विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश देते हुए 20 नामजद आरोपियों में से अब तक 10 आरोपियों को अभिरक्षा मे लिया गया है जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के स्रोत की जांच एवं संलिप्त अपराधियों की लगातार धर-पकड़ जारी है। डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रभावित मरीजों का उपचार लक्षणों की तीव्रता के अनुसार किया जा रहा है, प्रभावितों के आने की दर में कमी आई है और गंभीर मरीजों का डायलिसिस जारी है।

    बीएमसी में मरीजों का जाना हाल और परिजनों को बंधाया ढांढस

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को पीड़ितों के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। शुक्ल ने बीएमसी के आईसीयू और क्रिटिकल केयर वार्डों में भर्ती उपचाररत मरीजों के पास पहुंचकर उनसे बातचीत की और उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने वहां मौजूद मरीजों के परिजनों से भी चर्चा की, उनका ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस कठिन घड़ी में पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सर्वोत्तम संभव इलाज मुहैया कराया जाए। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम 24 घंटे तैनात रहे और दवाओं व संसाधनों की कोई कमी न होने दी जाए। निरीक्षण के दौरान सागर विधायक शैलेंद्र जैन, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह कमिश्नर अनिल सुचारी, डीआईजी  शशीन्द्र चौहान , कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, बीएमसी के प्रभारी डीन डॉ गंगवानी, इमरजेंसी मेडिसिन से डॉ सौरभ जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

     

    नशामुक्त समाज के लिए ग्रामीणों से की अपील

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भ्रमण के दौरान ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद करते हुए गांवों को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार और समाज को तबाह कर देती है। इसलिए सभी नागरिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नशे की लत से दूर रहें। उन्होंने रेखांकित किया कि क्षेत्र में पूर्व में भी नशामुक्ति के लिए जनसहयोग से प्रयास हुए हैं; भविष्य में भी अवैध नशे के कारोबार पर पूर्ण विराम लगाने और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शासन-प्रशासन पूरी कड़ाई और गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दौरान बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजनिया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश गोमे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी अधिकारी मौजूद रहे।