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  • ब्रिटेन के भविष्य पर बड़ा संकट, स्कॉटलैंड समेत तीन देशों ने अलग होने की तैयारी तेज की

    ब्रिटेन के भविष्य पर बड़ा संकट, स्कॉटलैंड समेत तीन देशों ने अलग होने की तैयारी तेज की

    लंदन
     कार्डिफ में रविवार रात हुए एक सीक्रेट राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे यूनाइटेड किंगडम के भविष्य पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। 'द टेलीग्राफ' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक यूके का इतिहास बदलने वाले एक समझौते पर दस्तखत करने के लिए स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेता एक मंच पर जुट रहे हैं।

    सोमवार को होने वाली इस अभूतपूर्व बैठक में तीनों राष्ट्रों के फर्स्ट मिनिस्टर्स जॉन स्विनी, रून एप आयोवर्थ और मिशेल ओ'नील एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसका सीधा मकसद यूनाइटेड किंगडम को तीन हिस्सों में विभाजित करने और आजादी के लिए नया जनमत संग्रह कराने की राह आसान करना है। 'द टेलीग्राफ' ने बताया है कि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के नेता सोमवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए इकट्ठा होंगे जिसका मकसद यूनाइटेड किंगडम को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करना है।

    राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ब्रिटेन के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड तीनों ही स्थानों पर एक साथ आजादी का समर्थन करने वाली सरकारें सत्ता में हैं। इस त्रिस्तरीय गठबंधन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पर सीधा दबाव बना दिया है। एंडी बर्नहैम कुछ ही दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं और अब वो बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं।

    UK को 3 हिस्सों में बांटने के लिए ऐतिहासिक समझौता
    यह बैठक तब हो रही है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सांसदों से कहा कि अगर आजादी के पक्ष में 'स्पष्ट सहमति' बनती है तो वह एक और स्कॉटिश जनमत संग्रह की मंजूरी देंगे। यह शिखर सम्मेलन डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो दिन बाद होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि वह एक संयुक्त आयरलैंड देखना 'पसंद' करेंगे। शनिवार को डबलिन की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तरी आयरलैंड का रिपब्लिक (आयरलैंड गणराज्य) में शामिल होना 'बहुत अच्छी बात' होगी और पूछा 'यह बुरा कैसे हो सकता है?'

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने तब हस्तक्षेप किया जब राष्ट्रवादी नेताओं ने प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया है जिन्होंने इंग्लैंड में सत्ता के विकेंद्रीकरण को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा है। SNP नेता और स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने दावा किया कि मिस्टर बर्नहम 'इस विचार का सामना कर रहे हैं कि वह यूनाइटेड किंगडम के आखिरी प्रधानमंत्री के तौर पर इतिहास में दर्ज होंगे।'

    चार बड़े मुद्दों पर बन रही सहमति
    कार्डिफ के सेंट डेविड्स होटल में होने जा रही इस बैठक में चारों प्रमुख दलों के नेता 1-अर्थव्यवस्था, 2- ऊर्जा, यूरोपीय संघ (EU) और 3- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ-साथ 4- आत्मनिर्णय के अधिकार पर विस्तृत रोडमैप पेश करेंगे। इसके तहत-

    स्कॉटलैंड और वेल्स- आजादी के बाद यूरोपीय संघ (EU) के स्वतंत्र सदस्य बनने की योजना पर आगे बढ़ेंगे।

    उत्तरी आयरलैंड– रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में विलय के जरिए यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने की राह तलाशेगा।

    स्कॉटिश फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने कहा 'यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मौजूदा स्थिति अब टिकाऊ नहीं है और वेस्टमिंस्टर को एक 'पोस्ट-यूके फ्यूचर' के लिए तैयार रहना होगा।' इस नए गठबंधन ने वेस्टमिंस्टर की नींद उड़ा दी है और अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री बर्नहैम यूके को बिखरने से बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

    टेलीग्राफ ने बताया है कि गुड फ्राइडे एग्रीमेंट की शर्तों के तहत आयरिश पुनर्मिलन के लिए वोटिंग कराने का एक संभावित रास्ता है। इसमें कहा गया है कि अगर ऐसा लगता है कि नॉर्दर्न आयरलैंड के ज्यादातर लोग UK से अलग होने के लिए वोट करेंगे तो जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।

  • मोदी-शी की पहल से रूस-यूक्रेन शांति की उम्मीद, पुतिन ने मध्यस्थता का किया स्वागत

    मोदी-शी की पहल से रूस-यूक्रेन शांति की उम्मीद, पुतिन ने मध्यस्थता का किया स्वागत

     नई दिल्ली
    नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों नेताओं के इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

    पेस्कोव ने कहा, "अपनी द्विपक्षीय बैठकों के दौरान, मोदी और शी चिनफिंग ने यूक्रेन के समाधान में गहरी दिलचस्पी दिखाई और समाधान खोजने में मदद करने के लिए सक्रिय रूप से अपने मध्यस्थता के प्रस्ताव दिए।"

    आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 पर चर्चा
    इसके अलावा, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के कार्यान्वयन सहित घनिष्ठ व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और संस्कृति में सहयोग पर चर्चा हुई।

    इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।

    दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार मुलाकात
    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "बिश्केक में हुई हमारी मुलाकात के दो सप्ताह से भी कम समय बाद दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर बेहद खुशी हुई। आज की मुलाकात में हमने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के बारे में बात की, जिसमें आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 का कार्यान्वयन भी शामिल है। बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई।"

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों सहित आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिन्होंने समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्रभावित किया है।

    इस दौरान पीएम मोदी ने दोहराया कि संघर्षों के समाधान में संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है और कहा कि भारत शांति प्रयासों में सहायता करने के लिए तत्पर है।

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर हर बच्चे तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर हर बच्चे तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

    रायपुर 

     शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा आवश्यक है और इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व को गढ़ते हैं, उन्हें संस्कार और सही दिशा देते हैं तथा उनके माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा के बेसिक स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान एवं प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

    मुख्यमंत्री  साय ने समारोह में जिले के 81 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल, फल, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर बोर्ड एवं महाविद्यालयीन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से गोल्ड मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

    मुख्यमंत्री ने सम्मानित शिक्षकों और विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे देश में गुरु के सम्मान की गौरवशाली परंपरा रही है। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा का प्रभाव केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसीलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा गया है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शिक्षा ज्ञान का वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। शिक्षा व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने के साथ उसमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। शिक्षित और संस्कारित नागरिक ही सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान और शिक्षा की भूमि रहा है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे। हमारी यह समृद्ध ज्ञान परंपरा आज भी हमें प्रेरणा देती है। बदलते समय और नई तकनीकों के दौर में शिक्षा के स्वरूप में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

    हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर देना हमारा संकल्प

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी बच्चा संसाधनों या अवसरों के अभाव में पीछे न रहे। गांव हो या शहर, गरीब हो या संपन्न परिवार – हर बच्चे को अपनी प्रतिभा निखारने, अच्छी शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने के समान अवसर मिलें।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाएं स्थापित हैं। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित हुए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर वातावरण और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर लाइब्रेरी, स्टडी मटेरियल और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नई दिल्ली में भी छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान विद्यार्थी की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें, इसके लिए राज्य सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान कर रही है। हमारा उद्देश्य केवल शिक्षित युवा तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे आत्मविश्वासी, कुशल और सक्षम युवा तैयार करना है जो विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

    बेमेतरा को गौरव पथ और विद्युत सब-स्टेशन की सौगात

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर बेमेतरा जिले के विकास के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बेमेतरा शहर में गौरव पथ के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने तथा ग्राम पंचायत तिवरिया में नवीन विद्युत सब-स्टेशन के निर्माण की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शहरों और गांवों में बेहतर अधोसंरचना का निर्माण विकास की गति को तेज करने के साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगा।

    “मोर गांव मोर पानी” अभियान के उल्लेखनीय कार्यों का हुआ सम्मान

    समारोह में “मोर गांव मोर पानी” महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भू-जल स्तर में सुधार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों को भी सम्मानित किया गया। बेमेतरा जिले को क्रिटिकल जोन से सेमी-क्रिटिकल जोन की दिशा में लाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए जनपद पंचायत बेमेतरा, बेरला एवं नवागढ़ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

    मुख्यमंत्री  साय ने जल संरक्षण को भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। शासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी जुड़ने पर बड़े बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले में किए गए प्रयासों की सराहना की।

    समारोह में प्रबुद्ध नागरिकों एवं समाजसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित “शिक्षक स्मृति” पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

    जनकल्याण और सुशासन के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ गरीब, किसान, महिला और युवा सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास का सपना पूरा किया जा रहा है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है। वहीं तकनीक के उपयोग से शासन की सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, सेवा सेतु और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी पहलों के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सरलता और समयबद्धता के साथ पहुंचे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल युवा शक्ति तथा सशक्त गांवों और शहरों से तैयार होगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में एक दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, विकास और जनकल्याण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया।

    शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माता : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वोपरि रहा है। शिक्षक अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थी का ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।

    उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षकों का ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है।

    शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक : मंत्री  दयाल दास बघेल

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  दयाल दास बघेल ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की शक्ति पैदा करती है। शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दीपक की तरह ज्ञान का प्रकाश फैलाकर बच्चों का भविष्य संवारते हैं।

    मंत्री  बघेल ने सम्मानित सभी शिक्षकों एवं मेधावी विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर विधायक  दीपेश साहू, विधायक  ईश्वर साहू, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष स्वामी राजीव लोचन दास, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष  जितेन्द्र साहू, कलेक्टर सु प्रतिष्ठा ममगाईं, जिला पंचायत अध्यक्ष मती कल्पना योगेश तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

  • देशभर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और कवि होंगे शामिल

    देशभर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और कवि होंगे शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर सोमवार 14 सितंबर को शाम 4 बजे भारत भवन में ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ का शुभारंभ करेंगे। भारतीय भाषाओं की विविधता में निहित भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय एकता की भावना को केंद्र में रखते हुए 14 एवं 15 सितंबर 2026 दो दिवसीय अनुष्ठान का केन्द्रिय विषय ‘मातृभाषा, संस्कृति और भारतीय जीवन-मूल्यों पर संवाद’ रखा गया है। संस्कृति विभाग के वीर भारत न्यास एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान तथा मातृभाषा मंच की सहभागिता रहेगी।

    पहले दिन राष्ट्रभाषा और भाषाई पत्रकारिता पर होगा विमर्श

    मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव राम तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शुभारंभ किए जाने के बाद पहला सत्र शाम 4:30 से 5:30 बजे तक ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर व्याख्यान होगा। इसमें बांग्ला के  स्नेहाशीष सूर, कश्मीरी के  आसिम मोहिउद्दीन अपने विचार रखेंगे, सत्र समन्वयक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू  विजय मनोहर तिवारी करेंगे। दूसरा सत्र शाम 6 से 7:30 बजे तक ‘भाषाई पत्रकारिता, समाज की आवाज़’ विषय पर होगा, जिसमें  जयदीप कर्णिक, वरिष्ठ संपादक  गिरीश उपाध्याय और वरिष्ठ पुरातत्वविद  नारायण व्यास सहभागी होंगे। सत्र का समन्वयक दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक  मुकेश मिश्रा द्वारा किया जायेगा।

    न्यासी सचिव  तिवारी ने बताया कि 14 सितंबर की शाम 7:30 बजे राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें डॉ. कीर्ति काले,  स्वयं वास्तव,  दिनेश दिग्गज,  शैलेन्द्र मधुर,  अज़हर इकबाल तथा  रामायणधर दि्ववेदी काव्य पाठ करेंगे। इसी दिन शाम 4 बजे ‘पूर्वरंग’ में भारतीय भाषाओं एवं बोलियों के गीतों की प्रस्तुति  उमेश तरकसवार एवं साथी, भोपाल द्वारा दी जाएगी।

    15 सितंबर के विमर्श सत्र एवं 'संत राग' प्रस्तुति

    15 सितंबर को पहला सत्र शाम 4 से 5:30 बजे तक ‘डिजिटल युग में मातृभाषाएँ : संकट, संभावना और नई पत्रकारिता’ विषय पर होगा। इसमें उर्दू के वरिष्ठ संपादक  अब्दुल वदूद साजिद, मराठी से सुबह सवेरे के कार्यकारी प्रधान संपादक  अजय बोकिल, असमिया के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक  समुद्रगुप्त कश्यप तथा फाउंडर फ्रेंड्स ऑफ मध्यप्रदेश, यूके के  रोहित दीक्षित विचार रखेंगे। दूसरा सत्र शाम 5:30 से 7 बजे तक ‘भाषा अनेक, भारत एक’ विषय पर होगा, जिसमें मलयालम के  मनोज के. दास,  सतीश के. सिंह,  अनुराग उपाध्याय एवं  मनोज शर्मा सहित अन्य पत्रकार सहभागी होंगे। शाम 7:30 बजे ‘संत राग’ कार्यक्रम में संत कवियों की वाणी की प्रस्तुति सु सुधा रघुरामन, नई दिल्ली द्वारा की जाएगी।

    भाषाई शब्द-चित्र प्रदर्शनी एवं दुर्लभ पुस्तकों का होगा लोकार्पण

     तिवारी ने बताया कि आयोजन स्थल पर शब्द-चित्र और भारतीय भाषाओं से संबंधित प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके साथ ही महर्षि पाणिनि, भोजदेव, महर्षि पतंजलि, भर्तृहरि और सम्राट राजेंद्र चोल सहित भारतीय परंपरा के महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वों तथा ‘युग-युगीन जल’, ‘उड़ चल अपने देश’, ‘अष्टावक्र गीता’, ‘नारद गीता’, ‘गर्भ गीता’, ‘ब्राह्मण गीता’, ‘उत्तर गीता’, ‘परमहंस गीता’, ‘वृत्र गीता’, ‘हंस गीता’, ‘चंद्र गीता’, ‘जानकी गीता’ एवं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिन्दी साहित्य के प्रकाश पुंज जैसी पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा।

    भारतीय सभ्यता की स्मृतियाँ हमारी मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान के माध्यम से भाषाओं में रची साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत और भाषाई पत्रकारिता के योगदान को समझने का प्रयास होगा। हमारा उद्देश्य अतीत की स्मृतियों से साक्षात्कार करते हुए वर्तमान समाज को अपनी सभ्यतागत चेतना से जोड़ना और भविष्य के लिए नई सांस्कृतिक दृष्टि विकसित करना है। इस अनुष्ठान में व्याख्यान, विमर्श, राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, संत कवियों की वाणी, पूर्वरंग तथा प्रदर्शनी सहित विविध कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।

     

  • नई दिल्ली डिक्लेरेशन से BRICS को मिलेगी नई दिशा, PM मोदी ने चीन को दी बधाई

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन से BRICS को मिलेगी नई दिशा, PM मोदी ने चीन को दी बधाई

    नई दिल्ली
    नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि 'ब्रिक्स' सिर्फ देशों का समूह नहीं बल्कि समाधान का इकोसिस्टम है। उन्‍होंने उम्मीद जताई कि 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' साझा विजन को नई दिशा देगा। पीएम ने आयोजन को सफल बनाने के ल‍िए सभी सदस्य देशों का आभार जताया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सम्‍मेलन में शाम‍िल सभी सदस्‍यों का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा क‍ि आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है। आप सबकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती उपयुक्तता, उदारता और समावेशिता का प्रमाण है।

    'ब्रिक्स समाधान का एक इकोसिस्टम'
    पीएम मोदी ने कहा, पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, समाधान का एक इकोसिस्टम है। हम आशा करते हैं इस समिट से उसमें जोड़े गए 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' हमारे साझा विजन और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा। हमें सभी परिणाम को समयबद्ध एक्शन और अंतिम पायदान पर प्रभाव से जोड़ना होगा।
    उन्‍होंने कहा हमारे फ्रेमवर्क फाइल्स से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करें, इसके लिए हम सब मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। अब दुनिया हमसे केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, कंक्रीट पर‍िणाम की अपेक्षा करती है। मुझे विश्वास है कि हम साझा प्रयासों से इन अपेक्षाओं पर जरूर खरे उतरेंगे।

    पीएम मोदी ने अगले होस्ट के तौर पर चीन को दी बधाई
    इस मौके पर पीएम मोदी ने ब्रिक्स के अगले होस्ट के तौर पर चीन को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा, नई दिल्ली समिट को सफल बनाने के लिए मैं आप सभी का और आप सबकी टीम्स का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आप सभी की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना करता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

  • सरकार  गांवों, पंचायतों, कस्बों सभी जगह पहुंचेंगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसें

    सरकार गांवों, पंचायतों, कस्बों सभी जगह पहुंचेंगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसें

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की लाडली बहनें लाभ लेने वाली नहीं बल्कि लाभ कमाने वाली बन रही है। नारी सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं हो सकता है, इसके लिये प्रदेश सरकार दृढ़ संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को आगर-मालवा से प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार से अधिक लाड़ली बहनों को लाड़ली बहना योजना की 40वीं किश्त के रूप में सिंगल क्लिक से 1835 करोड़ रुपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की। इसमें आगर-मालवा जिले की 1 लाख 13 हजार से अधिक लाड़ली बहनें भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

    मुख्यमंत्री ने आगर मालवा जिले को 254 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 50 विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 226 करोड़ रुपए से 33 विकास कार्यों का भूमिपूजन और क़रीब 28 करोड़ रुपए से 17 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने लगभग 118 करोड़ रुपए की लागत से 3 सड़क परियोजनाओं और 19 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाले शासकीय विधि महाविद्यालय का भूमिपूजन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगर में एक बड़ी गौशाला का निर्माण करने और आगर-मालवा जिले के हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मनुष्य की 'जैसी दृष्टि-वैसी सृष्टि'। विकास के लिए मन में संकल्प शक्ति होना जरूरी है और हम इसी संकल्प शक्ति से प्रदेश के विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। हमने नागरिकों से विकास का जो भी वादा किया है, उसे पूरा करके भी दिखाया है। 'सच्चा वादा-पक्का काम' अब यही हमारी सरकार की मुख्य पहचान बन गया है।

    पट्टों की पक्की रजिस्ट्री कराकर पट्टेधारियों को नि:शुल्क देगी सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सितम्बर जनसेवा को समर्पित महीना है। आने वाली 17 सितम्बर से प्रदेश में जनसेवा से जुड़े दो बड़े काम प्रारंभ होने हैं। उन्होंने कहा कि 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन योजना-2026' के तहत हमारी सरकार 17 सितम्बर से एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऐसे सभी 50 लाख से अधिक पट्टेधारियों को, जिनके पास पट्टे तो हैं, परंतु इसकी रजिस्ट्री नहीं है, इन सभी को हमारी सरकार पक्की रजिस्ट्री कराकर नि:शुल्क रूप से पट्टेधारियों को प्रदान करेगी। इन 50 लाख पट्टों की पक्की रजिस्ट्री का शुल्क सरकार अपने खजाने से वहन करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूरे देश में मध्यप्रदेश ही सबसे पहले ऐसा नवाचारी और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है।

    25 सितम्बर से प्रारंभ होगी 'प्रदेश की अपनी सुगम बस सेवा'

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 17 सितम्बर से ही प्रदेश में अगले एक माह (17 अक्टूबर) की अवधि का 'सेवा संकल्प अभियान' प्रारंभ होने जा रहा है। इस अभियान में प्रदेशवासियों को जनसेवा और लोक कल्याण की नई-नई सौगातें दी जायेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान ही 25 सितम्बर (अनंत चतुर्दशी) से 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' का मंगल आरंभ कर 'प्रदेश की अपनी सुगम बस सेवा' की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सुगम बसें प्रदेश के गांव-गांव, पंचायत-पंचायत, कस्बे, ब्लॉक, तहसील सहित सभी छोटे-बड़े नगरों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किमी का रोड़ नेटवर्क उपलब्ध है। प्रदेश में वर्ष 2030 तक 15 हज़ार से अधिक बसें चलाई जायेंगी।

    आशीर्वाद का दीपक जरुर जलाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा भारत अब विश्व के अग्रणी देशों में आ गया है। उनके अबतक के सफल कार्यकाल में हम विश्व की तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' के पहले दिन अर्थात 17 सितम्बर को प्रदेश में एक साथ एक समय पर 58 लाख आशीर्वाद के दीपक जलाये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों और शासकीय योजनाओं का हितलाभ पाने वाले सभी लाभार्थियों से कहा कि वे सब 17 सितम्बर को शाम 7 बजे अपने-अपने घरों और प्रतिष्ठानों में आर्शीवाद का दीपक जलाकर प्रधानमंत्री  मोदी को उनके जन्मदिन का आर्शीवाद रूपी उपहार जरूर दें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की लाड़ली बहनों को तीज और गणेश चतुर्थी की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि बहनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना हमारा लक्ष्य है। हम अपनी बहनों से किया हर वादा पूरी निष्ठा और समर्पण से निभायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहनों के मान सम्मान और सुरक्षा में कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। हमारी सरकार बहनों की आजीविका, स्व रोजगार और इनके आर्थिक स्वावलंबन के लिए सभी प्रबंध कर रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सद्प्रयासों से हमारी बहनें अब सिर्फ़ हितलाभ पाने वाली ही नहीं, अपितु अपना हित स्वयं सृजित करने और लाभ कमाने वाली भी बन रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश की 4 लाख से अधिक बहनें अब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की वित्तीय और तकनीकी मदद और स्व-उद्मशीलता से अब उद्योगपति बन रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिलाओं के हित में लिए किये जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सिर्फ़ आर्थिक सहायता का माध्यम न होकर महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी बहनों के सुखद, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

    समारोह में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री  नागर सिंह चौहान, सांसद  महेन्द्र सिंह सोलंकी, विधायक  माधव सिंह, मधु गहलोत, जिला पंचायत अध्यक्ष मती मुन्नाबाई चैहान, जिलाध्यक्ष  ओम मालवीय सहित जनप्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

     

  • प्रदेश का दूसरा साइंस प्ले पार्क नरसिंहपुर में होगा तैयार, डाइट में 30 लाख से होगा निर्माण

    प्रदेश का दूसरा साइंस प्ले पार्क नरसिंहपुर में होगा तैयार, डाइट में 30 लाख से होगा निर्माण

    नरसिंहपुर.

    जिले के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और प्रयोगात्मक सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल हुई है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के प्रयासों से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) नरसिंहपुर में मध्य प्रदेश के दूसरे साइंस प्ले पार्क की स्थापना की स्वीकृति मिली है।

    डाइट प्राचार्य राजीव किशोर श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की वार्षिक कार्ययोजना 2026-27 के तहत इस पार्क के लिए 30 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

    अध्ययन दल का भोपाल और अलीराजपुर का दौरा
    पार्क की स्थापना की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिए डाइट प्राचार्य के निर्देशन में गठित विज्ञान समिति के अध्ययन भ्रमण दल ने आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल और प्रदेश के पहले साइंस प्ले पार्क डाइट अलीराजपुर का दौरा किया। इस दल में वरिष्ठ व्याख्याता डॉक्टर अलका शर्मा, श्रद्धा शुक्ला, गोविंद बड़कुर, व्याख्याता संजय कुमार शर्मा और उच्च माध्यमिक शिक्षक पी.एस. पटेल शामिल रहे। दल ने राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों आर.के. त्रिपाठी और प्रेमसिंह सिसोदिया के मार्गदर्शन में वहां स्थापित विज्ञान मॉडलों, गतिविधियों और उपलब्ध संसाधनों का गहन अध्ययन किया।

    देखेंगे, छुएंगे, प्रयोग करेंगे और निष्कर्ष निकालेंगे विद्यार्थी
    प्रस्तावित साइंस प्ले पार्क में ऐसी गतिविधियां और मॉडल स्थापित किए जाएंगे, जिनसे विद्यार्थी देखकर, समझकर, छूकर और स्वयं प्रयोग करके विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को सरलता से समझ सकेंगे। इससे विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित न रहकर गतिविधि एवं प्रयोगात्मक अनुभव पर आधारित बनेगी। अध्ययन भ्रमण के बाद डाइट प्रशासन द्वारा 15 दिनों के भीतर साइंस प्ले पार्क की स्थापना की विस्तृत कार्ययोजना राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल को प्रस्तुत की जाएगी। इसमें पार्क के मॉडल, गतिविधियां, आवश्यक संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं का पूर्ण विवरण होगा, जिसके बाद आगे की निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी।

    विद्यार्थी देख, समझकर निष्कर्ष निकाल सकेंगे –
    विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और प्रयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से डाइट नरसिंहपुर में प्रदेश का दूसरा साइंस प्ले पार्क विकसित किया जाएगा। भ्रमण दल के निरीक्षण के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे विद्यार्थी देखकर, समझकर, प्रयोग करके निष्कर्ष निकाल सकेंगे। 
    – राजीव किशोर श्रीवास्तव, प्राचार्य, डाइट नरसिंहपुर

    प्रायोगिक कार्य के प्रति रुचि विकसित होगी –
    जब विद्यार्थी साइंस प्ले पार्क से होकर प्रयोगशाला में प्रवेश करेंगे, तब उनमें प्रायोगिक कार्य के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी। गतिविधि आधारित मॉडल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और तर्क करने की क्षमता बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।
    – गोविंद बड़कुर, वरिष्ठ व्याख्याता एवं भ्रमण दल सदस्य

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह का किया शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह का किया शुभारंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में सदैव मानवाधिकार आयोग का ध्येय वाक्य "हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" चरितार्थ होता रहा है। हमारे वेद वाक्य में यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे अर्थात् जैसे मुझ में है, वैसा ही ब्रह्मांड में है, का भाव समाहित है। हमने सदैव प्रकृति सहित सभी के साथ यही भाव रखा है। सनातन संस्कृति में मनुष्य योनि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हमारे पुण्य कर्म मानव जाति के कल्याण के लिए हमें प्रेरित करते हैं। प्रसन्नता और गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पिछले तीन दशकों से अपने ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा है। यह वाक्य हमारे लोकतंत्र की उस मूलभावना का प्रतीक है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान गरिमा, समान अधिकार और न्याय का समान अवसर प्राप्त हो। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की तीन दशकों की यात्रा मानवाधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए समर्पित रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस पर प्रशासन अकादमी आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अजजा वर्ग के मानवाधिकारों पर केंद्रित स्मारिका एवं त्रैमासिक न्यूज लेटर का किया विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में स्मारिका, आयोग के त्रैमासिक न्यूज लेटर और आयोग की डायरी का विमोचन भी किया। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानवाधिकारों के संरक्षण और शासकीय योजनाओं की उन तक पहुंच विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मिशन कर्मयोगी अंतर्गत श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मिशन कर्मयोगी स्थापना सप्ताह में जनजातीय कार्य विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।

    प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयोग ने यह विश्वास मजबूत किया है कि लोकतंत्र में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की है। मानवता यही है कि सभी के लिए समानता के भाव के साथ कार्य किया जाये। राज्य मानवाधिकार आयोग निष्पक्षता और अपने मूल्यों के आधार पर कार्य करता रहेगा। प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों की सेवा में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी भारतीय संविधान में निहित लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के प्रति पूर्णत: प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री  मोदी जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। कोविड 2019 महामारी के दौर में प्रधानमंत्री  मोदी ने कई देशों के नागरिकों को वैक्सीन उपलब्ध कराई और जियो और जीने दो के भाव को चरितार्थ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में अनेक वीर क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। काकोरी कांड के बाद जब क्रांतिकारी पकड़े गए तो अंग्रेज अफसरों ने उन्हें यातनाएं दीं और कई अमानवीय कृत्य किए। प्रदेश में बालाघाट सहित देश के कई क्षेत्रों में नक्सलवाद की समस्या रही लेकिन तत्कालीन सरकारों ने नक्सलवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हमारी सरकार ने लाल सलाम को देश में सबसे पहले अंतिम सलाम किया। विश्व में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मानवाधिकारों के हनन से वर्तमान में भी कष्ट का वातावरण बना हुआ है।

    जनजातीय समाज का विकास हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्वः जनजातीय कार्य मंत्री  विजय शाह

    मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय समाज का विकास मात्र सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि हम सभी का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आत्मसम्मान नहीं आता, तब तक हमारी विकास यात्रा अधूरी है। मंत्री  शाह ने प्रदेश में मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ नेतृत्व करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता के कारण ही प्रदेश में अंत्योदय की भावना के अनुरूप योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे पहले नक्सल मुक्त हुआ और अब विकास की सौगात नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप प्रदेश में विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह(पीवीटीजी) तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

    मंत्री  शाह ने बताया कि मध्यप्रदेश में जनजातीय विकास के लिए 8 हजार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके माध्यम से जनजातीय वर्ग, विशेष रूप से पीवीटीजी (बैगा, भारिया और सहरिया) को लाभान्वित करने के लिए उनके 14 गांवों में स्कूल, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, पक्के आवास और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा रखने वाले अधिकार ही मानवाधिकार

    आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि-उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। मानव अधिकारों से आशय उस पर्यावरण और परिस्थितियों से होता है, जो मानव को उसके जीवन की रक्षा, व्यक्तित्व के विकास और निर्माण के लिए अनिवार्य होती हैं। किसी व्यक्ति के जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा रखने वाले अधिकार ही मानवाधिकार हैं। आजादी के बाद हमारे संविधान में मानवाधिकारों को प्रस्तावना के साथ ही नागरिकों के मूल अधिकारों के रूप में शीर्ष स्थान दिया गया है। आम नागरिकों में मानवाधिकारों के प्रति जागरुकता लाने के लिए आयोग ने जिले-जिले में जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों का त्वरित निराकरण करने के साथ ही अब तक जनजातीय वर्ग के पीड़ितों को अब तक 6 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं की जानकारी स्थानीय बोली में उपलब्ध कराना आवश्यक है

    ये अधिकारी एवं कर्मचारी हुये सम्मानित

    चिन्हित कुल 27 पुरस्कारों में से आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री  शाह ने 09 अधिकारि/कर्मचारी/कार्यालयों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इनमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले चंबल संभाग के संभागीय उपायुक्त  बृजेश चन्द्र पाण्डेय, उज्जैन संभाग के संभागीय उपायुक्त  गणेश भांवर तथा इंदौर संभाग के संभागीय उपायुक्त  गणेश भांवर शामिल हैं। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले में बड़वानी की सहायक आयुक्त मती रंजना सिंह, जिला डिंडोरी के सहायक आयुक्त  राजेंद्र कुमार जाटव तथा जिला झाबुआ की सहायक आयुक्त मती सुचित्रा बिसेन शामिल रहे। व्यक्तिगत रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली सु साक्षी नरवरिया, शीघ्रलेखक, सु कामिनी कुपासिया, डाटा एंट्री ऑपरेटर और  रामदयाल चौधरी, निज सहायक शामिल हैं।

    जनजातीय समुदायों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

    आयोग के प्रभारी सचिव  मुकेश कुमार वास्तव ने कहा कि 13 सितंबर 1995 को मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई थी। यह आयोग का 32वां स्थापना दिवस है। अनुसूचित जनजाति समुदाय ने प्रकृति और अपने सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को सदियों से संजो कर रखा है। यह उनके अधिकारों के संरक्षण पर गंभीर चिंतन का मंच है। जनजातीय समुदायों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध हैं। कार्यक्रम में मानवाधिकार आयोग, जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

     

  • होर्मुज में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बदली, ईरानी हमलों के बीच कमर्शियल जहाजों के लिए घटाए गए एयर एस्कॉर्ट स्लॉट

    होर्मुज में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बदली, ईरानी हमलों के बीच कमर्शियल जहाजों के लिए घटाए गए एयर एस्कॉर्ट स्लॉट

    वाशिंगटन
     अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टौंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा, खासकर हवाई सुरक्षा के समय को सीमित कर दिया है। यह कदम इस अहम समुद्री रास्ते पर चलने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है।

    फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका मई से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तट के पास वाले रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को हवाई सुरक्षा दे रहा था, जिससे ईरानी हमलों के बावजूद तेल की कुछ शिपमेंट आती-जाती रहीं।

    इस व्यवस्था के तहत, जहाज के मालिक सबसे पहले अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से मंजूरी लेते थे। यह सेंटर जहाजों को कोऑर्डिनेट्स और गुजरने का समय बताता था, जिसके दौरान अमेरिकी विमान उन्हें सुरक्षा देते थे।

    होर्मुज में टैंकरों की हवाई सुरक्षा के समय घटाया
    लेकिन NCAGS द्वारा समुद्री सलाहकारों को भेजे गए ईमेल के हवाले से पता चला है कि सितंबर की शुरुआत में रात भर मिलने वाली सुरक्षा की लंबी अवधि को घटाकर हर दिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट कर दिया गया है। जहाजों को सलाह दी गई है कि वे तय समय पर अपनी यात्रा शुरू करें ताकि उन्हें अमेरिकी सेना से सबसे अच्छी सुरक्षा मिल सके।

    मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों की देखरेख करने वाली यूएस सेंट्रल कमांड ने इन संदेशों को बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया और कहा कि NCAGS के संदेश खुद ही सब कुछ स्पष्ट करते हैं।

    कमर्शियल जहाजों पर बढ़े ईरान के हमले
    यह बदलाव तब हुआ जब कमर्शियल जहाजों पर हमले बढ़ गए। ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने पांच ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ये हमले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी युद्धपोत पर किए गए हमलों के बाद हुए थे।

    यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने भी दुबई और इराक के पास टैंकरों पर ईरान के और हमलों की जानकारी दी। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 70 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर हमले हो चुके हैं।

  • रेलवे स्टेशन पर थूकने-कचरा फैलाने पर कार्रवाई, अब भरना होगा 1000 रुपये जुर्माना

    रेलवे स्टेशन पर थूकने-कचरा फैलाने पर कार्रवाई, अब भरना होगा 1000 रुपये जुर्माना

    भोपाल.

    ट्रेन से सफर करने वालों के लिए एक जरूरी खबर है। रेलवे स्टेशनों पर कचरा फेंकने या थूकने की आदत अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। रेल मंत्रालय ने स्वच्छता नियमों को सख्त करते हुए जुर्माने की रकम बढ़ा दी है। अगर कोई यात्री अब स्टेशन या रेल परिसर में गंदगी फैलाते पकड़ा जाता है, तो उसे 1000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

    14 साल बाद नियमों में हुआ बदलाव
    आपको बता दें कि साल 2012 से रेलवे परिसर में गंदगी फैलाने वालों पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान था। अब पूरे 14 साल बाद रेलवे ने इस नियम की समीक्षा करते हुए बड़ा बदलाव किया है। नई अधिसूचना के तहत इस जुर्माने की राशि को दोगुना कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन ने इन नए नियमों को लागू भी कर दिया है, इसलिए अब सफर के दौरान खास सावधानी बरतने की जरूरत है।

    खानी पड़ेगी कोर्ट की हवा –
    अगर कोई यात्री सोचता है कि वह बहस करके या जुर्माना देने से इनकार करके बच निकलेगा, तो उसके लिए सख्त चेतावनी है। नए नियम साफ कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति मौके पर लगाया गया जुर्माना नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
    ऐसे लोगों को सीधे सक्षम न्यायालय के सामने पेश किया जाएगा। इतना ही नहीं, कोर्ट में मामला जाने पर जज उस व्यक्ति पर 2000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकते हैं।

    स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना है असल मकसद –
    जुर्माने की राशि बढ़ाने के पीछे रेल मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य सिर्फ पैसा वसूलना नहीं है, बल्कि लोगों की आदतों में सुधार लाना है। रेलवे का मानना है कि स्टेशनों और परिसरों की साफ-सफाई व्यवस्था को तभी बेहतर बनाया जा सकता है, जब आम नागरिक भी इसमें सहयोग करें।