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  • आगरा में राजनाथ सिंह का अनोखा अंदाज, चांदी का मुकुट लौटाकर बोले- गरीब बेटी के काम आए

    आगरा में राजनाथ सिंह का अनोखा अंदाज, चांदी का मुकुट लौटाकर बोले- गरीब बेटी के काम आए

     आगरा

    उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने प्रवास के दौरान 'खटीक गर्जना सम्मेलन' में हुए स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. दरअसल, समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया. सम्मान स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री ने मुकुट अपने पास रखने के बजाय उसे समाज को वापस लौटा दिया. चांदी का मुकुट वापस लौटाते समय उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन चांदी का यह मुकुट आपके हवाले करता हूं. किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना. राजनाथ सिंह की इस बात ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। 

    'समाज को बांटने की कोशिश में नहीं आएंगे'
    सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने की कोशिश करते हैं. कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है। 

    उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे. समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. राजनाथ सिंह ने कहा- 'याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे। 

    'सनातन और हिंदू धर्म को जाति के चश्मे से देखने वाले मूल भाव नहीं समझते'

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है. इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है. उन्होंने कहा कि वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है। 

    'खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया'
    राजनाथ सिंह ने खटीक समाज के इतिहास और योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन अपने धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया. यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

    रक्षा मंत्री ने समाज से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समाज की ताकत उसके एकजुट रहने में है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिशों से बचना होगा। 

    सबका लक्ष्य एक—धर्म और राष्ट्र की रक्षा
    हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को नहीं समझ पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म-आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य भी हो सकता है। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना।

    खटीक समाज की तारीफ
    1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जाने लगा, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटीक समाज के कई लोगों ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था।

    खटीक वो, जो खौफ को भी डरा दे
    समय चाहे कोई भी रहा हो, चुनौती कैसी भी रही हो और शत्रु कितना भी शक्तिशाली रहा हो, खटीक समाज ने धर्म और देश के स्वाभिमान की रक्षा से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि खटीक वो है, जो खौफ को भी डरा दे। खटीक वो है, जो खतरे में सबसे आगे खड़ा रहे। खटीक वो है, जो खुद कठिनाई सहकर भी दूसरों की रक्षा करे।

    यूपी तेजी से विकास कर रहा
    आज उत्तर प्रदेश भी डबल इंजन की सरकार के साथ तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे और आए दिन दंगे होते थे।

    अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था यूपी
    उत्तर प्रदेश आज विकास के लिए जाना जा रहा है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है। जो प्रदेश कभी अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था, आज औद्योगिक कॉरिडोर बना रहा है। मेट्रो रेल का नेटवर्क फैला रहा है। अब तो आगरा मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

  • मध्यप्रदेश में फिर बदला मौसम, 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; 23 जिलों में सामान्य से अधिक बरसा पानी

    मध्यप्रदेश में फिर बदला मौसम, 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; 23 जिलों में सामान्य से अधिक बरसा पानी

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। पश्चिमी हिस्से में बने मौसम तंत्र के असर से रविवार को कई जिलों में तेज बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग के कई इलाकों में बारिश का दौर चला। बड़वानी में नदी-नाले और तालाब उफान पर आ गए, जबकि रतलाम, मुरैना, शाजापुर, झाबुआ, खरगोन और खंडवा में भी तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में निम्न दाब क्षेत्र के साथ द्रोणिका सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। जिन इलाकों में पिछले दिनों बारिश की कमी बनी हुई थी, वहां भी अब बारिश का दौर पहुंचा है। सोमवार को उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, गुना और श्योपुर में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, झाबुआ, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, रीवा, सतना, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।

     नदी-नाले उफने, बांध के गेट खुले
    रविवार को बड़वानी के सेंधवा क्षेत्र में रुक-रुककर तेज बारिश होती रही। कई नदी-नालों और तालाबों का जलस्तर बढ़ गया। रलावती का बड़ा तालाब भी ओवरफ्लो हो गया।टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के चार गेट खोलने पड़े। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी उफान पर रही। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद, खंडवा, महू, ओंकारेश्वर और रतलाम में भी तेज बारिश हुई। भोपाल में भी बारिश के असर से जलाशयों में पानी बढ़ा। रविवार रात कलियासोत डैम के तीन गेट खोले गए।

    15 सितंबर से बारिश की रफ्तार घटने के संकेत
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 14 सितंबर को भी पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। निम्न दाब क्षेत्र के राजस्थान-गुजरात की ओर बढ़ने के दौरान पश्चिमी जिलों में इसका असर बना रहेगा। हालांकि 15 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता और दायरा धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। अगले सात दिनों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूबे रविवार को भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। बड़वानी के सेंधवा में नदी-नाले और तालाब उफान पर रहे। रलावती में जिले का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया।

    मुरैना में चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूब गए। दोनों बाबू महाराज मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद और खंडवा में भी मूसलधार बारिश हुई।

    टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के 4 गेट खोल दिए गए। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी उफान पर रही। महू, ओंकारेश्वर, रतलाम समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई।

    32 जिलों में अब भी बारिश की कमी
    प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में स्थिति पिछले सप्ताह की तुलना में सुधरी है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2 से 25 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। पश्चिमी हिस्से में कमी ज्यादा है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7 से 52 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। 

    झोंकेदार हवा से सावधान
    मौसम विभाग ने आगे बताया कि प्रदेश के शेष जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चलेगी. इस दौरान खुले में, टिन शेड, हल्की नुकीली या धारदार वस्तुओं आदि के आसपास न खड़े हों। 

    MP में क्यों बदला मौसम का मिजाज?
    मौसम विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक मजबूत कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के साथ पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. मानसून ट्रफ इस वक्त मध्य प्रदेश के बीच से गुजर रहा है. इसी के चलते प्रदेश में अभी भी बारिश का माहौल बना हुआ है. माना जा रहा है कि इस माह के अंत तक मानसून राज्य से विदा हो सकता है। 

  • बांग्लादेशियों को फर्जी पासपोर्ट दिलाने का खेल! 12 अफसर STF की जांच में, आवेदन से पहले पहुंचता था फोन

    बांग्लादेशियों को फर्जी पासपोर्ट दिलाने का खेल! 12 अफसर STF की जांच में, आवेदन से पहले पहुंचता था फोन

     ग्वालियर
    प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल के 12 पुलिस अधिकारियों व अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो अब STF की रडार पर हैं। साल 2021 में बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने का यह खेल ग्वालियर के डबरा से शुरू हुआ था।

    17 फर्जी पासपोर्ट्स पर एक ही गवाह, एक ही पता और एक ही मोबाइल नंबर होने के बावजूद पुलिस को भनक तक नहीं लगी, जिससे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उस समय ग्वालियर डबरा थाना प्रभारी के रूप में विनायक शुक्ला व थाना पर पासपोर्ट वैरीफिकेशन सेल का इंचार्ज प्रधान आरक्षक भूपेन्द्र गुर्जर हुआ करता था। इन दोनों से एसटीएफ जल्द तलब कर पूछताछ करेगी।

    विदेश मंत्रालय ने 3 साल पहले (2023 में) PHQ को चेताया था
    रैकेट की पैठ भोपाल से डबरा तक फैली हुई थी। विदेश मंत्रालय ने 2023 में ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) को रिपोर्ट भेजकर फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के प्रति आगाह किया था। इसके बाद भी पीएचक्यू से कोई ठोस संदेश जारी नहीं किया गया। जिसका नतीजा यह रहा कि आज इन 70 बांग्लादेशियों के फर्जी दस्तावेज व पासपोर्ट ने पूरे देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

    100 के पार पहुंच सकती है संख्या
    प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट की संख्या 100 के पार जाने की आशंका है। क्योंकि एसटीएफ को कुछ और भी संदिग्ध पासपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही साल 2021-22 और उसके बाद के दो साल में डबरा सहित इन शहरों से जितने पासपोर्ट बने हैं उनमें कई संदिग्ध की श्रेणी में आ रहे हैं।
    एसटीएफ की पांच टीम मध्य प्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं।
    रैकेट का मुख्य नेटवर्क ग्वालियर और भोपाल में सक्रिय था। भोपाल के गोविंदपुरा के एक ही पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट के आवेदन तैयार कर अलग-अलग जिलों के पासपोर्ट सेल में वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाते रहे और पासपोर्ट बनते रहे। इसी तरह दूसरा सबसे बड़ा गढ़ ग्वालियर का डबरा रहा था। यहां से एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के भारतीय दस्तावेज बने और पासपोर्ट तैयार हुए।

    आवेदन आने से पहले ही थाने में बजती थी घंटी- 'अर्जेंट है, जल्दी निकालो'
    स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में खुलासा हुआ है कि संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन वेरिफिकेशन के लिए डबरा थाने पहुंचने से पहले ही वहां फोन आ जाता था। थाने में कहा जाता था आवेदन अर्जेंट है, इसे जल्दी क्लियर करके निकालो। एक फोन कॉल पर पासपोर्ट आनन-फानन में वैरिफिकेशन कर निकाल दिया जाता था।

    अब तक यह चार पकड़े गए
    बांग्लादेशियों के मध्य प्रदेश से फर्जी पासपोर्ट कांड में मास्टर माइंड रियाल चौधरी, जाय चौधरी बरुआ, महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़ा गया प्रियान राय और विप्लव अधिकारी को साउथ दिल्ली से पकड़ा था। अब तक यह चार पकड़े गए हैं। जबकि 08 की तलाश में एसटीएफ की अलग-अलग टीम दबिश दे रही हैं।

    जांच के घेरे में तत्कालीन TI व आरक्षक
    जिस अवधि (2021) में डबरा से ये फर्जी पासपोर्ट वेरीफाई हुए, उस दौरान विनायक शुक्ला (वर्तमान में दतिया में DSP) डबरा थाना प्रभारी थे, जबकि पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल का जिम्मा प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर के पास था। कुछ समय के लिए सुरेंद्र सिंह भी थाना प्रभारी रहे। STF यह पता लगा रही है कि थाने में पहले से फोन कौन करता था और उसे आवेदनों की गुप्त जानकारी कैसे मिलती थी।

    मास्टरमाइंड रियाल चौधरी के खुद के बने थे 4 फर्जी पासपोर्ट
    एसटीएफ और पुलिस की पूछताछ में रैकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रियाल चौधरी के खुद के 4 पासपोर्ट बने हैं और चारों में ही फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे। उसने डबरा के दो स्थानीय दलालों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार, रियाल से पूछताछ के आधार पर 5 अलग-अलग टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी के लिए भेजी गई हैं।

    बौद्ध विहार के एक भिक्षु के तीन अलग-अलग नाम आए थे सामने
    बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने के मामले में खुलासा हुआ है। डबरा के जिस बुद्ध विहार के पते से 17 बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट बने, वहां के भिक्षु के ही तीन अलग-अलग नाम सामने आए हैं। आधार कार्ड में नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय और मठ की दीवार पर रांघप्रिय महाथेरो लिखा है। आधार में रामेश्वर जाटव के पिता का नाम नारायण जाटव और पता दतिया का है। वहीं वोटर आईडी में उनका नाम भंते संघप्रिय और पिता का नाम नारायण दर्ज है। इस पर उनका कहना है कि कुछ दिन पहले ही बौद्ध धर्म अपनाया है। धर्म अपनाने के बाद नाम संघप्रिय रखा गया। इस पर कुछ नहीं कहा कि नया नाम मिलने पर क्या दस्तावेज भी बदल जाते हैं।

    मठों में कौन आया और कौन गया…
    बौद्ध मठ का कोई रिकॉर्ड ही नहीं, इसलिए अब वह जांच के घेरे में हैं। STF की जांच में एक और गंभीर बात सामने आई है। बुद्ध मठों में आने-जाने वाले लोगों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला है। मठ में कौन आया, कहां से आया, कितने दिन रुका और कब चला गया, इसका हिसाब नहीं है। संदेह के आधार पर मठों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    एमपी के बाहर दबिश दे रहीं पांच टीम
    इस मामले में एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट मामले में हमारी पांच टीम मध्यप्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं। साथ ही पांच साल में फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज बनाने से लेकर पासपोर्ट वैरीफिकेशन तक कई विभागों और पुलिस थानों तक यह फाइल पहुंचीं। इनसे जुड़े पुलिस अफसर, पुलिसकर्मी व अन्य विभाग के कर्मचारियों की सूची बनाई है। सभी हमारी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी। कई आरोपियों के दो से तीन दस्तावेज भी मिले हैं।

  • भारत भवन में दो दिवसीय ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ आज से, CM मोहन यादव करेंगे उद्घाटन; भारतीय भाषाओं पर होगी चर्चा

    भारत भवन में दो दिवसीय ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ आज से, CM मोहन यादव करेंगे उद्घाटन; भारतीय भाषाओं पर होगी चर्चा

    भोपाल 

    राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर भारत भवन में सोमवार से दो दिवसीय ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव शाम 4 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। 14 और 15 सितंबर को होने वाले इस आयोजन का मुख्य विषय ‘मातृभाषा, संस्कृति और भारतीय जीवन-मूल्यों पर संवाद’ रखा गया है। कार्यक्रम में देशभर से वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और कवि शामिल होंगे। आयोजन का उद्देश्य भारतीय भाषाओं, बोलियों और उनमें मौजूद साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत पर संवाद करना है। संस्कृति विभाग के वीर भारत न्यास और संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान और मातृभाषा मंच की सहभागिता रहेगी।

    भाषा और पत्रकारिता पर होगी चर्चा
    पहले दिन मुख्यमंत्री के शुभारंभ के बाद शाम 4:30 बजे ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर चर्चा होगी। इसके बाद शाम 6 बजे ‘भाषाई पत्रकारिता, समाज की आवाज’ विषय पर विमर्श होगा। इसमें अलग-अलग भारतीय भाषाओं से जुड़े पत्रकार और विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। शाम 7:30 बजे राष्ट्रीय कवि सम्मेलन होगा। इसमें कीर्ति काले, स्वयं श्रीवास्तव, दिनेश दिग्गज, शैलेन्द्र मधुर, अज़हर इकबाल और रामायणधर द्विवेदी काव्य पाठ करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय भाषाओं और बोलियों के गीतों की प्रस्तुति से होगी।  

    डिजिटल दौर में मातृभाषा पर मंथन
    15 सितंबर को आयोजन में ‘डिजिटल युग में मातृभाषाएँ : संकट, संभावना और नई पत्रकारिता’ विषय पर चर्चा होगी। इसके बाद ‘भाषा अनेक, भारत एक’ विषय पर संवाद होगा। इसमें उर्दू, मराठी, असमिया, मलयालम सहित विभिन्न भाषाओं के पत्रकार और लेखक शामिल होंगे। शाम 7:30 बजे ‘संत राग’ कार्यक्रम में संत कवियों की वाणी की प्रस्तुति होगी। 

    दुर्लभ पुस्तकों की प्रदर्शनी भी
    आयोजन स्थल पर भारतीय भाषाओं और बोलियों से जुड़ी शब्द-चित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा भारतीय परंपरा के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों और विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। आयोजकों के अनुसार भारतीय सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियां मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। इस आयोजन के जरिए भाषाई विरासत, साहित्य और पत्रकारिता के योगदान पर चर्चा के साथ नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 

  • ड्रग्स फ्री डेडलाइन के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई, घोड़ों से पेट्रोलिंग-रात में छापेमारी; 82 पहुंचे जेल

    ड्रग्स फ्री डेडलाइन के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई, घोड़ों से पेट्रोलिंग-रात में छापेमारी; 82 पहुंचे जेल

    चंडीगढ़ 

    चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। शहर में घोड़ों से गश्त के साथ थाना प्रभारी और एरिया डीएसपी रात को भी फील्ड में उतर रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के वीडियो बनाकर मीडिया तक पहुंचाए जा रहे हैं। जंगल एरिया, खंडहरों और श्मशान घाट के पास बनाए गए नशेड़ियों के अड्डों पर माउंटेड पुलिस की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जंगल क्षेत्र से लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास से 10 रुपए के नोट, फॉइल पर लगा चिट्टा, लाइटर और गर्म करने वाले चम्मच बरामद हुए। पुलिस ने छापेमारी के दौरान सरकारी कैमरामैन और पुलिसकर्मियों के मोबाइल से हर गतिविधि की वीडियोग्राफी की, ताकि कोर्ट में केस साबित हो सके।

    82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन चंडीगढ़ पुलिस ने 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए उन्हें जेल भेजा है। वहीं, NDPS एक्ट के तहत 16 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें ड्रग्स की रिकवरी भी हुई है। पुलिस ने ग्राउंड लेवल पर आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। इस मुहिम में केवल थाना प्रभारी और एरिया DSP ही नहीं, बल्कि CRPF की टीम भी साथ है।

    ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार CID विंग को भी पूरी तरह एक्टिव किया गया है। CID की टीम कॉलोनियों में अपने मुखबिरों के जरिए ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार कर रही है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स के साथ-साथ अब स्थानीय पुलिस CRPF के हथियारबंद जवानों को साथ लेकर अलसुबह और देर रात सरप्राइज चेकिंग व रेड कर रही है। शहर में सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए दो या उससे अधिक NDPS केस वाले अपराधियों को PIT-NDPS के तहत एक साल के लिए डिटेन करने की रूपरेखा तैयार की गई है।

    प्रशासक बोले- पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म होगा चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया बीते वीरवार को नगर निगम के कार्यक्रम नशा मुक्त चंडीगढ़ में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म हो सकता है। उन्होंने एरिया पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नशे को रोकने के लिए आगे आने को कहा था।

    पार्षद ने पुलिस के सामने खोली नशे की पोल इसके बाद सिर्फ एक पार्षद जो नगर निगम की डिप्टी मेयर भी हैं, सुमन देवी ने पुलिस को पब्लिक मीटिंग में बताया था कि उनके एरिया में नशा बिक रहा है। उस दौरान डीएसपी और आईटी पार्क थाना प्रभारी मीनी भारद्वाज भी वहीं मौजूद थीं। सुमन देवी ने तीन अलग-अलग वीडियो भी दिखाए थे, जिनमें तीन युवक नशे की हालत में झूम रहे थे।

    समीर को 5 युवकों ने चाकू मारे दो दिन पहले ही न्यू इंदिरा कॉलोनी निवासी समीर को पार्क में पांच युवकों ने चाकू मारे थे। समीर के पिता ने आरोप लगाया कि सभी युवक नशा करते हैं। उन्होंने पुलिस को कई बार बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके भाई पवन, जिसकी थार से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी, उसकी मौत भी नशे के मुद्दे से जुड़ी थी। उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी, ताकि युवा पीढ़ी को बचाया जा सके।

    ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग सेक्टर-49 में ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग मामले में भी राजकुमार ने आरोप लगाया था कि उनके एरिया में नशा बिकता है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर फायरिंग कर दी गई।

  • त्योहारी सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 1.41 लाख पर आया गोल्ड; जानें आपके शहर का भाव

    त्योहारी सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 1.41 लाख पर आया गोल्ड; जानें आपके शहर का भाव

     नई दिल्ली
     आज गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का पावन त्योहार है और इस मौके पर लोग जमकर सोने-चांदी की खरीदारी कर रहे हैं। त्योहारों के इस सीजन में अगर आप भी गहने खरीदने या निवेश का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए आज के ताजा रेट जानना बेहद जरूरी है।

    बता दें कि 14 सितंबर सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी कमोडिटी मार्केट Comex पर सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। वहीं आज गणेश चतुर्थी होने के कारण MCX पर कारोबार नहीं होगा, लेकिन देश भर के सर्राफा बाजार जरूर खुले रहेंगे। चलिए दिल्ली से लेकर मुंबई और आपके शहर तक के भाव पर एक नजर डालते हैं।

    इंटरनेशनल मार्केट धड़ाम हुए दाम
    इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर सोने और चांदी दोनों धातुओं के दाम में गिरावट आई है। Comex पर आंकड़ों की मानें तो खबर लिखे जाने तक सोना 0.79% तक गिरा (Gold Price on Comex) और कीमत 4374.00 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी (Silver Price on Comex) के दाम 0.98% तक गिर गए और ऐसे में कीमत 64.550 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

    दिल्ली में कितना है सोने का भाव?
    दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने का भाव (Gold Price In delhi) करीब ₹15,277 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1,52,770 प्रति 10 ग्राम है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹140,039 प्रति 10 ग्राम के आसपास है। हालांकि ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST जुड़ने के बाद आपकी वास्तविक कीमत इससे ज्यादा हो सकती है। वहीं चांदी (Silver Price In delhi) ₹2,33,860 प्रति किलो पर है।

    मुंबई में कितना है रेट?
    मुंबई में 22 कैरेट सोने का भाव करीब (Gold Price Today) ₹14,287 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1,40,287 प्रति 10 ग्राम है। इस हिसाब से दिल्ली की तुलना में मुंबई में 22 कैरेट सोना करीब ₹150 प्रति 10 ग्राम सस्ता पड़ रहा है। 24 कैरेट सोने का राष्ट्रीय संकेतात्मक भाव करीब ₹1,52,040 प्रति 10 ग्राम है। वहीं मुंबई में चांदी (silver price today) का भाव ₹2,34,260 प्रति किलो है।

    चेन्नई और कोलकाता में क्या भाव?
    चेन्नई में 22 कैरेट सोने का रेट करीब ₹15,195 प्रति ग्राम यानी ₹1,51,950 प्रति 10 ग्राम के आसपास है। वहीं कोलकाता में यह करीब ₹15,199 प्रति ग्राम, यानी लगभग ₹1,51,990 प्रति 10 ग्राम है।

    इंदौर में सोने चांदी का रेट
    इंदौर में 24 कैरेट सोने की कीमत 15,462 रुपये प्रति ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 14,174 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,598 रुपये प्रति ग्राम पर है। जबकि 1 किलो चांदी चेन्नई में 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है।

    लखनऊ में सोने चांदी का रेट
    लखनऊ में आज 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 15,457 रुपये प्रति ग्राम 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 14,169 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड 11,457 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। तो वही 1 किलो चांदी लखनऊ में आज 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है।

    चांदी भी हुई इतनी सस्ती
    सोने के साथ चांदी के भाव में भी गिरावट देखने को मिली है. 14 सितंबर की सुबह चांदी घटकर करीब ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम पर आ गई. पिछले हफ्ते चांदी की कीमत में करीब ₹5,000 की गिरावट दर्ज हुई थी. इंटरनेशनल मार्केट में भी चांदी की कीमत फिसली है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, स्पॉट सिल्वर करीब $64.54 प्रति औंस पर है. इसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। 

    सोने की कीमतों पर एनालिस्ट की राय
    बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, आगे सोने की कीमत पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल के भाव, डॉलर की चाल, महंगाई की उम्मीदों और ग्लोबल तनाव का असर रहेगा. LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर कच्चा तेल सस्ता होता है या अमेरिकी फेड का रुख नरम रहता है, तो सोने की कीमत में फिर तेजी आ सकती है. वहीं, तेल के दाम बढ़ने या फेड के सख्त रुख से सोने में एक बार फिर बिकवाली बढ़ सकती है। 

    शहर सोना/10 ग्राम (24K) सोना/10 ग्राम (22K) सोना/10 ग्राम (18K) चांदी प्रति किलो
    नई दिल्ली ₹152,360 ₹139,663 ₹114,270 233,740
    मुंबई 152,620 ₹139,902 ₹114,465 ₹234,140
    पटना 152,540 ₹139,828 ₹114,468 ₹233,190
    जयपुर ₹153,340 ₹139,395 ₹114,505 ₹234,310
    कानपुर ₹152,517 ₹140,181 ₹114,110 ₹233,920
    लखनऊ ₹152,470 ₹139,181 ₹114,603 ₹233,150

     

     

     

  • मानसून की बेरुखी से बांधों का जलस्तर घटा, पंजाब में बिजली की मांग बढ़ी; मंत्री ने कट को लेकर दिया बड़ा अपडेट

    मानसून की बेरुखी से बांधों का जलस्तर घटा, पंजाब में बिजली की मांग बढ़ी; मंत्री ने कट को लेकर दिया बड़ा अपडेट

    लुधियाना

    लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही।लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब में अब बिजली के लंबे कट नहीं लगेंगे, कल यानी 15 सितंबर से कट लगने बंद हो जाएंगे। प्राइवेट बिजली प्लांट भी सरकार ने ठीक करवाए हैं। इसके लिए करीब 200 सरकारी मुलाजिम लगाए।

    मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा बिजली दी जा रही है। अब 8 घंटे की बजाय किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिजली की डिमांड 3,500 मेगावाट ज्यादा है।

    इधर, बिजली की डिमांड लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) इस समय अलग-अलग स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली पैदा करवा रहा है। कायले की कमी के चलते बिजली की कुल जनरेशन 5,743 मेगावाट तक ही पहुंची है।

    पिछले दिनों के मुकाबले पंजाब में बिजली की जनरेशन तो बढ़ी है, लेकिन डिमांड कम नहीं हो रही है। डिमांड पूरी करने के लिए PSPCL को सीधे केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे बिजली कट लग रहे हैं।

    अघोषित बिजली कटों से परेशान लुधियाना के डाइंग उद्यमियों ने आज चंडीगढ़ रोड के वर्धमान चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी तरफ बिजली कटों को लेकर कांग्रेस पटियाला में PSPCL मुख्यालय के बाहर धरना देगी।

     

    बिजली उत्पादन कहां से कितना हो रहा, जानिए…

    सरकारी थर्मल प्लांट: पंजाब में तीन सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 यूनिट हैं। पहला सरकारी प्लांट रोपड़ में है और यहां चार यूनिट हैं। इन चार यूनिटों की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, जबकि इनमें 487 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है।

    दूसरा प्लांट लहरा मोहब्बत में है। इस प्लांट में भी चार यूनिट हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है, जबकि यहां 801 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। तीसरा प्लांट गोइंदवाल में है और इसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि इसमें 501 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इस तरह सरकारी प्लांटों से कुल उत्पादन 1,786 मेगावाट है। सरकारी दो प्लांट लगभग पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जबकि रोपड़ प्लांट में अभी भी उत्पादन क्षमता से काफी कम है।

    प्राइवेट थर्मल प्लांट: पंजाब में दो प्राइवेट थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,380 मेगावाट बिजली पैदा करने की है। तलवंडी साबो में तीन यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,980 मेगावाट है। सोमवार को तीनों यूनिट ऑपरेशनल हैं और इनसे 1,701 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।

    वहीं, दूसरा प्लांट राजपुरा में है और इसमें दो यूनिट हैं। दोनों की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इन दोनों यूनिटों में आज कुल 1,321 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। दोनों प्राइवेट प्लांटों को मिलाकर 3,022 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।

    हाइड्रो प्रोजेक्ट्स: पंजाब के पास रणजीत सागर डैम इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के अलावा चार और हाइड्रो प्रोजेक्ट हैं। रणजीत सागर डैम की क्षमता 600 मेगावाट बिजली पैदा करने की है, जिसमें दिन के समय कम बिजली पैदा की जा रही है। सोमवार सुबह 9 बजे के करीब चार में से दो टरबाइन चलाई जा रही हैं, जिनसे 240 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।

    शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार: यू.बी.डी.सी. हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर हाउस से 44 मेगावाट, मुकेरियन हाइडल प्रोजेक्ट के अलग-अलग यूनिटों से 193 मेगावाट, आनंदपुर साहिब हाइडल प्रोजेक्ट से 112 मेगावाट व शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है। इस तरह हाइड्रो प्रोजेक्टों से कुल 639 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। रात के समय हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से उत्पादन 830 मेगावाट तक किया जा रहा है।

    सोलर व अन्य प्लांट: पंजाब में बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगे हैं। इनसे बिजली का उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। दिन के समय सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से 350 से 400 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। हालांकि, रात के समय इन प्लांटों से जनरेशन शून्य हो जाती है। सुबह 9 बजे के करीब सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से कुल 341 मेगावाट के करीब बिजली उत्पादन हो रहा है।

    केंद्रीय पूल: पंजाब में बिजली की डिमांड पूरी करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड सीधे तौर पर केंद्रीय पूल पर निर्भर है। पंजाब में जितनी जनरेशन होती है, उसके बाद डिमांड और सप्लाई में जो गैप रहता है, उसे पूरा करने के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीदी जाती है। सोमवार को केंद्रीय पूल से करीब 11 हजार मेगावाट के करीब बिजली खरीदी जा रही है।

    पंजाब में बढ़ी बिजली की मांग

    पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। 

    उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सितंबर में लगातार 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग
    छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा।

    तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। बांधों में पानी की कमी से रणजीत सागर के 300 मेगावाट के दो और यूबीडीसी के 45 मेगावाट के तीन यूनिट बंद हैं।

    चार थर्मलों में चार से 16 दिन का कोयला
    पंजाब के पांच थर्मल प्लांटों में से चार में केवल चार से 16 दिनों का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार दिन राजपुरा में सात दिन लहरा मुहब्बत में 11 दिन और गोइंदवाल में 16 दिनों का स्टॉक है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के अनुसार 1000 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित कोयला खदानों वाले राज्यों के थर्मलों में 30 दिनों का स्टॉक होना चाहिए। पंजाब को कोयला देने वाली खदानें 1300 से 1900 किलोमीटर दूर हैं। मानसून से पहले ऐसे थर्मलों में 21 दिनों का स्टॉक जरूरी माना जाता है। ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से खनन और परिवहन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

    मानसून की बारिश 40 फीसदी कम
    पंजाब में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही है। 402.9 एमएम के मुकाबले 243.5 एमएम बारिश हुई। सितंबर में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है जो 63 फीसदी कम है। अमृतसर में 92 फीसदी बरनाला में 89 बठिंडा में 81 फरीदकोट में 97 फतेहगढ़ साहिब में 74 फिरोजपुर में 96 जालंधर में 84 लुधियाना में 82 मुक्तसर में 83 पटियाला में 70 मोहाली में 72 एसबीएस नगर में 64 और संगरूर में 62 फीसदी बारिश कम हुई। सितंबर में मोगा फाजिल्का मानसा तरनतारन और कपूरथला पूरी तरह सूखे रहे। जुलाई में 26 और अगस्त में 35 फीसदी बारिश कम हुई थी।

    बांधों में घटा जलस्तर
    कम बारिश से प्रमुख बांधों में जलस्तर भी तेजी से घटा है। भाखड़ा में पिछले साल के मुकाबले 32.91 फुट कमी है। 2025 में इसी दिन जलस्तर 1676.89 फुट था जो अब 1643.98 फुट है। पानी की आवक 46708 से घटकर 30199 क्यूसिक रह गई। पौंग में जलस्तर 17.91 फुट कम होकर 1372.24 फुट रह गया है। आवक 34737 से घटकर 10751 क्यूसिक है। रणजीत सागर बांध में जलस्तर 13.05 मीटर घटकर 511.48 मीटर रह गया है। पानी की आवक 18411 से घटकर 5181 क्यूसिक है। इससे हाइडल बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

    उद्योगों में 10 घंटे तक कट
    आपूर्ति में कमी के कारण उद्योगों में 10 घंटे तक के कट लग रहे हैं। जिला मुख्यालयों में चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट हैं। खेतीबाड़ी क्षेत्र को तीन से साढ़े चार घंटे बिजली मिल पा रही है। किसान संगठनों ने आंदोलन का एलान किया है। विपक्षी दल भी सरकार को घेर रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से कोयले की सप्लाई कम हो रही है और पंजाब को केंद्रीय पूल से 1051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।

    पावरकाम पर आर्थिक दबाव
    पंजाब सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का करीब 9650 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें 7550 करोड़ सब्सिडी और 2100 करोड़ सरकारी विभागों के बिल हैं। सब्सिडी में 4000 करोड़ पिछले दो वित्तीय वर्षों का ब्याज समेत बकाया है जबकि 3550 करोड़ चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 का है। जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़ स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़ ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर 125 करोड़ रुपये बकाया हैं। सरकारी विभागों और जरूरी सेवाओं के कनेक्शन काटना आसान नहीं होने से पावरकाम पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

    10 हजार करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी
    बिजली और कोयला खरीद मरम्मत के स्पेयर पार्ट्स तथा वेतन और अन्य खर्चों के भुगतान में दिक्कत के बीच पावरकाम बाजार से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए गैर परिवर्तनीय डिबेंचर और बॉन्ड जारी करने की योजना है। मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां मांगी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज और ब्याज का बोझ करदाताओं और बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पावरकाम पर पहले से करीब 18000 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।

    इंजीनियर्स एसोसिएशन ने बताया 7800 करोड़ के घाटे का खतरा
    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के अनुसार बिजली दरों में कटौती से सालाना सब्सिडी बिल 20500 करोड़ से घटकर करीब 15200 करोड़ रुपये रह गया है। इसके बावजूद सब्सिडी समय पर नहीं मिल रही। उनका कहना है कि हाल के एआरआर में खर्च का अनुमान कम आंका गया जिससे दरें कम तय हुईं। इससे चालू वित्तीय वर्ष में पावरकाम को वास्तविक जरूरत के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

    उत्पादन बढ़ाने की मांग
    एसोसिएशन ने रोपड़ में 800-800 मेगावाट के तीन सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट लगाने और बठिंडा में 250 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार 2020 में ही सरकार को वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली कमी की आशंका बता दी गई थी। 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने भी उत्पादन बढ़ाने की मांग रखी गई लेकिन अभी तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया।

    पावरकाम बोला- जल्द दूर होगी कमी
    पावरकाम के डायरेक्टर जनरेशन पीएस बराड़ का कहना है कि कम बारिश के कारण खेतीबाड़ी से घरेलू क्षेत्र तक बिजली की मांग बढ़ी है। कोयले की सप्लाई तेज करने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है। कोयला उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से खनन प्रभावित हुआ है। जरूरी मरम्मत के बाद बंद यूनिट जल्द चालू किए जाएंगे जिससे बिजली की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। 

     

  • Sahara Refund: ऑनलाइन क्लेम के लिए Aadhaar e-KYC जरूरी, पासबुक/डिपॉजिट सर्टिफिकेट और PAN रखें तैयार; ऐसे मिलेगा पैसा

    Sahara Refund: ऑनलाइन क्लेम के लिए Aadhaar e-KYC जरूरी, पासबुक/डिपॉजिट सर्टिफिकेट और PAN रखें तैयार; ऐसे मिलेगा पैसा

    नई दिल्‍ली
     सहारा समूह मे अपनी कमाई फंसा चुके लाखों निवेशकों के लिए राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल को एक बार फिर एक्टिव कर दिया है. पोर्टल के दोबारा चालू होने से करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच शुरू हो गई है. साथ ही अब अन्‍य लोग भी अपना पैसा वापस पाने के लिए ऑनलाइन क्‍लेम कर सकते हैं. यदि आपका भी पैसा सहारा में अटका हुआ है जान लें कि घर बैठे क्लेम कैसे करें और किन-किन दस्‍तावेजों की जरूरत होगी। 

    सहकारिता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू किए गए इस पोर्टल के जरिए अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है. यह पोर्टल मुख्य रूप से सहारा समूह की चार प्रमुख सोसायटियों, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के पात्र निवेशकों को रिफंड दिलाने के लिए बनाया गया है। 

    सहारा रिफंड पोर्टल पर कैसे दर्ज करें क्‍लेम?

    सहारा रिफंड पोर्टल पर आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान-

        सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in/depositor/#/home) पर जाएं और लॉगिन करें.
        रजिस्ट्रेशन के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के जरिए सत्यापन पूरा करें.
        इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहे ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपनी सदस्यता संख्या, जमा खाता संख्या और सोसायटी का नाम भरें.
        यदि आपने चारों सोसायटियों में पैसा लगाया है, तो सभी दावों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही आवेदन फॉर्म में जोड़ें.
        अंत में जमा राशि के प्रमाण संबंधी कागजात अपलोड कर फॉर्म सबमिट करें. सबमिट होते ही एक रसीद संख्या मिल जाएगी.

    आवेदन की 30 दिन में होगी स्‍क्रूटनी
    ऑनलाइन क्लेम दर्ज होने के बाद सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. सहारा ग्रुप ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज 30 दिनों के भीतर निवेशक के दावों और दस्तावेजों की स्क्रूटनी करेगी. इसके बाद अगले 15 दिनों में सरकारी तंत्र द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी. इस तरह आवेदन की तारीख से कुल 45 दिनों के अंदर आपके दावे के बारे में आपको बता दिया जाएगा. दावा सही पाए जाने पर स्वीकृत रकम सीधे निवेशक के आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। 

    ये कागज रखें तैयार
    रिफंड फॉर्म भरते समय किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेजों को पहले से स्कैन करके रख लें. क्‍लेम के लिए निवेशक का आधार कार्ड, आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ा बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. सहारा सोसाइटी में पैसा जमा करते समय मिली मूल रसीद, पासबुक या निवेश प्रमाणपत्र (बॉन्ड) आदि भी मांगे जा सकते हैं। 

    दस्तावेजों में दर्ज सदस्यता संख्या (Membership Number), अकाउंट नंबर और नाम का सही मिलना चाहिए. यदि मूल जमाकर्ता की मृत्यु हो चुकी है, तो कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी को संबंधित कानूनी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा. नाम या बैंक विवरण में कोई गलती होने पर रिफंड अटक सकता है, इसलिए पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने से पहले अपने सभी कागजात अच्छी तरह जांच लें। 

        सहारा रिफंड आवेदनों की दोबारा जांच, लाखों को मिले पैसे।
        सीआरसीएस पोर्टल पर आधार-मोबाइल से जमाकर्ता पंजीकरण करें।
        फॉर्म भरें, स्कैन कर अपलोड करें, 45 दिन में राशि।

    किन सोसाइटियों में जमा पैसे वापस मिलेंगे?
    सहारा की चार कोऑपरेटिव सोसाइटियों के पात्र जमाकर्ताओं को रिफंड दिया जा रहा है. इनमें शामिल है…

        स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
        सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड
        हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
        सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड

    क्लेम के समय ठगों से सावधान
    रिफंड के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक से जुड़ी जानकारी न दें. अगर आपको क्लेम के लिए आवेदन करना है तो इसके लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें, दूसरी फर्जी वेबसाइट से बचकर रहें, वरना आप ठगी के शिकार हो सकते हैं. 

    सबसे पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन
        ऑनलाइन क्लेम दर्ज करने के लिए सबसे पहले CRCS रिफंड पोर्टल पर जाएं.
        इसके बाद Depositor Registration का विकल्प आएगा, उसपर क्लिक करें.
        फिर आधार के आखिर 4 अंक दर्ज करें.
        इसके साथ ही आधार से लिंक मोबाइल नंबर भी दर्ज करें.
        फिर आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा उससे वेरिफिकेशन पूरा करें.
        इसके बाद आप पोर्टल पर क्लेम का प्रोसेस आगे पूरा कर सकते हैं.

    ऑनलाइन क्लेम कैसे दर्ज करें?
        रजिस्ट्रेशन करने के बाद सबसे पहले Depositor CRCS Refund Portal पर लॉगिन करें.
        इसके बाद अपनी सहारा सोसाइटी का नाम चुनें.
        फिर अकाउंट नंबर, सदस्यता नंबर, रसीद नंबर और जमा राशि की जानकारी भरें.
        इसके बाद आप जमा रसीद या फिर पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करें.
        जब आप सारी जानकारी दर्ज कर देंगे तो पोर्टल पर Cliam Request Form तैयार होगा.
        इसको डाउनलोड करके प्रिंट करें.
        अपनी पासपोर्ट साइज फोटो लगाएं और साइन करें.
        50 हजार से ज्यादा क्लेम करने के लिए पैन नंबर दर्ज करें.
        इसके बाद आप साइड किए गए Claim Request Form को स्कैन करें और पोर्टल पर अपलोड कर दें.
        इसके बाद आवेदन सबमिट कर दें और Claim Request नंबर को अपने पास नोट करके सुरक्षित रखें. 
        अगर आपके आवेदन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है तो पैसे 45 दिन में आ जाता है, जिसकी जानकारी आपको SMS के जरिए मिल जाती है.

    इन चीजों को रखें तैयार
    सहारा की सोसाइटियों में रिफंड क्लेम करने के लिए पहले कुछ चीजों को तैयार रखें इनमें शामिल है…

        सदस्यता नंबर
        अकाउंट नंबर
        पासबुक या रसीद
        जमा प्रमाणपत्र
        आधार से लिंक मोबाइल नंबर (OTP के लिए)
        आधार से लिंक और DBT एक्टिव बैंक अकाउंट
        50 हजार या उससे ज्यादा के क्लेप के लिए PAN कार्ड

     

     

  • पैदाइश पर टिप्पणी से भड़के ओम प्रकाश राजभर, बोले- राजभर समाज में गरीब परिवार में जन्म लेना क्या गुनाह है?

    पैदाइश पर टिप्पणी से भड़के ओम प्रकाश राजभर, बोले- राजभर समाज में गरीब परिवार में जन्म लेना क्या गुनाह है?

    गरीब राजभर समाज में पैदा हुआ, इसलिए मेरी पैदाइश पर टिप्पणी: ओम प्रकाश राजभर
     
    ओम प्रकाश सिंह पर पलटवार, बोले, मैं भी अनर्गल टिप्पणी कर सकता हूं लेकिन माता-पिता का अपमान करना हमारे संस्कार नहीं
     
    सपा पर भी साधा निशाना, कहा, विधानसभा टिकट के लिए अपमान का घूंट पीकर पड़े हैं
     
    लखनऊ

     कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पैदाइश को लेकर की गई टिप्पणी पर सपा नेता ओम प्रकाश सिंह पर तीखा पलटवार किया है। सोशल मीडिया पर उन्हें ‘मित्र ओम प्रकाश सिंह जी’ संबोधित करते हुए राजभर ने कहा कि पिछले दो दिनों से उनका बयान सामने आ रहा है। बयान सुनकर उन्हें हैरानी नहीं हुई, बल्कि ओम प्रकाश सिंह पर तरस आया। उन्होंने कहा कि उनकी पैदाइश पर टिप्पणी इसलिए की गई, क्योंकि वह किसी जमींदार या ऊंची जाति में नहीं, बल्कि बेहद गरीब और असहाय राजभर समाज में पैदा हुए हैं।
     
    राजभर ने कहा कि उन्हें राजभर होने का कभी दुख नहीं रहा। बल्कि इस बात की खुशी है कि जिस समाज में पैदा हुए, उसके लिए कुछ करने की नीयत और हौसला उनके अंदर है। उन्होंने कहा कि चाहें तो वह भी ओम प्रकाश सिंह पर अनर्गल टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन छोटी जाति में पैदा होने के बावजूद राजभर समाज ने किसी व्यक्ति के माता-पिता पर गलत बयानबाजी करना नहीं सिखाया। उन्होंने ओम प्रकाश सिंह के माता-पिता को प्रणाम करते हुए कहा कि कौन कब, कहां, किस कुल और किस जाति में पैदा होगा, यह कोई व्यक्ति तय नहीं करता। इसे परमात्मा तय करते हैं।
     
    इसके बाद राजभर ने सपा और ओम प्रकाश सिंह पर सियासी हमला तेज करते हुए कहा कि शायद वे लोग ईश्वर को नहीं मानते। अगर मानते होते तो भगवान राम, रघुकुल, सूर्यवंश और सनातन का अपमान करने वाली समाजवादी पार्टी में एक विधानसभा टिकट के लिए अपमान का घूंट पीकर नहीं पड़े रहते।
     
    राजभर ने कहा कि वह कर्म करने में विश्वास रखते हैं और कर्म के फल की चिंता नहीं करते। उन्होंने राजभर समाज के साथ पिछड़ों, दलितों और शोषितों की आवाज बुलंद करने का प्रण लिया है और उसी को पूरा करने में लगे हैं। उन्होंने ओम प्रकाश सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें सपा का टिकट चाहिए तो बेशक लें। जनता सब देख रही है। वह उन्हें भी देख रही है और उनकी पार्टी को भी। समय आने पर नतीजा भी जनता ही देगी।
     
    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि ओम प्रकाश सिंह अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगेंगे और वह उनसे माफी की अपेक्षा भी नहीं रखते। लेकिन एक बार अपने माता-पिता को याद करके जरूर सोचें कि उनके जैसे छोटी जाति में पैदा हुए व्यक्ति की पैदाइश को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित है या नहीं।
     
    राजभर ने आखिर में लिखा कि बाकी ईश्वर उनका भला करे। इसके साथ उन्होंने ‘जय श्रीराम’ लिखकर अपनी पोस्ट समाप्त की।

  • हॉकी फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी, जालंधर में शुरू होगी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी; मोहाली में होगा फाइनल

    हॉकी फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी, जालंधर में शुरू होगी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी; मोहाली में होगा फाइनल

    जालंधर

    एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब 2026 की शुरुआत 27 अक्टूबर से जालंधर से होगी। फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को मोहाली में खेला जाएगा। टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान, जापान, मलेशिया, चीन और कोरिया की टीमें हिस्सा लेंगी। ओमान और बांग्लादेश को रिजर्व टीमों के तौर पर रखा। 

    इस दौरान टूर्नामेंट का लोगो भी जारी किया गया। हॉकी इंडिया के खिलाड़ी भी मौजूद रहे। सरकार ने 25 करोड़ 40 लाख रुपए का बजट रखा है। पूरे टूर्नामेंट में दर्शकों की एंट्री फ्री रहेगी। सरकार की तरफ से सभी उचित इंतजाम किए जाएंगे।

    मोहाली में होंगे निर्णायक मुकाबले लीग चरण के बाद टूर्नामेंट के मुकाबले मोहाली में खेले जाएंगे। 4 नवंबर को सेमीफाइनल मुकाबले होंगे। इसके साथ ही तीसरे और चौथे स्थान के लिए भी मुकाबला खेला जाएगा। 5 नवंबर को शाम 7 बजे फाइनल मुकाबला होगा। इसी के साथ एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब 2026 के विजेता का फैसला होगा।

    खिलाड़ियों को इंडस्ट्री व मैदान घुमाएंगे टूर्नामेंट में आने वाले खिलाड़ियों को पंजाब की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से भी रूबरू करवाया जाएगा। उन्हें हॉकी के मैदानों से लेकर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री तक ले जाया जाएगा। साथ ही, उन्हें पंजाब के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। खिलाड़ियों को सरसों का साग और मक्की की रोटी खिलाने के साथ अमृतसर, बाघा बॉर्डर और जलियांवाला बाग भी ले जाने की योजना है। कोशिश रहेगी कि खिलाड़ियों को पंजाब की संस्कृति और विरासत का पूरा अनुभव कराया जाए।

    पुराने हॉकी खिलाड़ी भी सम्मानित होंगे इस टूर्नामेंट में बच्चों पर भी विशेष ध्यान रहेगा। हर मैच के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुराने और दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। पंजाब सरकार अब जूनियर और सीनियर हॉकी लीग आयोजित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके अलावा, हॉकी इंडिया लीग में महिला और पुरुष दोनों वर्गों की पंजाब की टीमें शामिल होंगी।