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  • शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर, भोपाल में होगा राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम

    शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर, भोपाल में होगा राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम

    भोपाल 

    प्रदेश के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव "मुख्यमंत्री स्कूटी योजना" अंतर्गत 19 सितंबर को भोपाल से मेधावी विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण करेंगे। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह आसान होगी। साथ ही, कॉलेज आने-जाने में भी सहूलियत होगी। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर, भोपाल में सुबह 10 बजे से होगा।

    मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है। योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है।

    7,500 से अधिक विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

    योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7,500 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का लाभ मिलेगा।

    योजना में अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुका है लाभ

    मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के संचालन पर अब तक लगभग 246 करोड़ रूपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा की ओर उनकी भागीदारी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।

     

  • लोक आयुक्त संगठन के 50 साल पूरे, सीएम योगी ने गिनाईं सुशासन और तकनीक से बदलाव की उपलब्धियां

    लोक आयुक्त संगठन के 50 साल पूरे, सीएम योगी ने गिनाईं सुशासन और तकनीक से बदलाव की उपलब्धियां

    लखनऊ

    राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर सोमवार को समारोह आयोजित किया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने किया।इस दौरान संगठन की पांच दशक की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में संगठन के गठन से लेकर अब तक की यात्रा, कार्यप्रणाली, शिकायतों की जांच और प्रमुख उपलब्धियों को क्रमवार प्रदर्शित किया गया। यहां बताते चलें कि लोक आयुक्त संगठन भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में अहम भूमिका निभाता है। समारोह में लोक आयुक्त प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

    लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है किसी संस्था से जुड़ा जन विश्वास 

    इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी संस्था से जुड़ा सामान्यजन का विश्वास है। गुड गवर्नेंस आमजन के विश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने सुशासन के लक्ष्यों को भी गिनाया। कहा कि किसी संस्था में सामान्य व्यक्ति बेझिझक आए और नियमानुसार परिणाम को समयबद्ध प्राप्त कर सके। यही हमारी कसौटी होती है। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। साथ ही अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसने का काम भी हो।
     
    जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी 
    सीएम ने कहा कि संस्था के गठन मात्र से समस्या का समाधान नहीं होता। जन-विश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है। संविधान निर्माताओं ने भारत की व्यवस्था के लिए संसदीय लोकतंत्र दिया। यदि जनप्रतिनिधि ने विश्वास खोया तो सरकार गई। 
     
     अनावश्यक शिकायत करने वालों पर कसना होगा शिकंजा 
    सीएम ने आगे कहा कि आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, जनता दर्शन आदि के जरिये जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जाता है। हालांकि, कुछ लोग अनावश्यक शिकायत भी लेकर आते हैं, बताते हैं कि मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, लेकिन किसी के खिलाफ शिकायत करनी है। यदि हम प्रमाण मांगते हैं तो आनाकानी भी होती है। 

    एक अनुभव साझा करते हुए सीएम ने कहा कि एक सज्जन ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उन्होंने कहा कि पूरे जिले के विद्यालयों की जांच की जाए। ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए। किसी संस्था को विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी विश्वास व्यक्त करे कि मेरी समस्या का समाधान होगा।

    तकनीक के कारण अब पीडीएस की शिकायत नहीं 

    सीएम ने कहा कि लोक आयुक्त संगठन ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है। 2017 में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में सबसे अधिक शिकायत खाद्यान्न वितरण की आती थी। जनता दर्शन में 100 में से 60 शिकायतें पीडीएस की होती थी। इससे परेशान होकर लगातार हम बैठक करते थे, फिर हमने तकनीक का प्रयोग किया। ई-पॉस मशीन लगाकर उसे मुख्यालय पर स्क्रीन लगाकर जोड़ दिया। इसके बाद यदि 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में किसी ने कुछ इधर-उधर किया तो तुरंत अलर्ट आ जाता है। इससे हेराफेरी की गुंजाइश शून्य हो गई।

    साढ़े 9 साल में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण

    सीएम ने राजस्व विभाग के मामलों का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 में भूमि संबंधी विवाद, पैमाइश, वरासत, नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। इससे अनावश्यक विवाद होते थे। केवल वरासत से जुड़े लगभग छह लाख मामले लंबित थे। सभी के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। तय किया गया कि लैंड यूज की समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं हुआ तो इसे डीम्ड मान लिया जाएगा, यानी गलत होने पर निस्तारण करने वाले की जवाबदेही तय होगी। साढ़े 9 साल में 34 लाख मामले का निस्तारण हुआ, लेकिन 9 साल में 9 लाख और मामले भी सामने आए। वरासत, पैमाइश आदि की समस्याओं का समाधान किया गया। 

    हर तहसील में दिया गया रोबोट 

    सीएम ने कहा कि पैमाइश में शिकायत मिली कि लेखपाल ने जरीब में थोड़ा इधर-उधर कर दिया है। अब इस समस्या का भी समाधान हो गया। इसके लिए हर तहसील में रोबोट दे दिया है। इतनी पारदर्शिता हुई कि एक इंच भी कोई इधर-उधर नहीं कर सकता।

    टेक्नोलॉजी दिलाएगी शिकायतों के अंबार से मुक्ति 

    सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिकायतों के अंबार का समाधान निकाल सकते हैं। हो सकता है कि लोकसेवक को बचाने का प्रयास होता है, लेकिन शिकायत जब लोक आयुक्त संगठन के पास जाती है तो वह मेरिट के आधार पर समाधान निकालता है। कई बार जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है, उस पर अंकुश जरूरी है।  

    यूपी में 14 सितंबर 1977 को गठित हुआ लोक आयुक्त संगठन 

    सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लगा होगा कि आने वाले समय में नेतृत्व देने वाले लोग ही व्यवस्था में गदर मचा डालेंगे, तब इमरजेंसी के तत्काल बाद बनी पहली सरकार ने लोक आयुक्त संगठन के निर्माण की तरफ कदम बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था। तबसे प्रारंभ हुई संगठन की यह यात्रा न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में नई पहचान, नई आभा के साथ जारी है।

    विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत 

    सीएम ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी ने जनधन अकाउंट खोलने की बात की तो विपक्ष ने खिल्ली उड़ाई। आज जनधन अकाउंट की ताकत सबके सामने है। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में धनराशि जाती है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है। 

    उन्होंने विधवा, निराश्रित, वृद्धजन की बेचारगी को बताते हुए 2017 के पहले मिलने वाली राशि में घूसखोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब यूपी में ऐसा नहीं है। सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार पेंशन दे रही है। व्यवस्था से बिचौलिए समाप्त कर दिए गए।

    इस दौरान लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण आदि मौजूद रहे।

  • चंडीगढ़ में फिल्म शूटिंग होगी आसान, प्रशासन ने शुरू की सिंगल विंडो ऑनलाइन अनुमति; मेकर्स को आकर्षित करने की तैयारी

    चंडीगढ़ में फिल्म शूटिंग होगी आसान, प्रशासन ने शुरू की सिंगल विंडो ऑनलाइन अनुमति; मेकर्स को आकर्षित करने की तैयारी

    चंडीगढ़
     ‘सिटी ब्यूटीफुल’ अब सिर्फ फिल्मों के पर्दे पर नजर आने वाला शहर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माताओं के लिए शूटिंग का पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में प्रशासन कदम बढ़ा रहा है। यहां कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

    अब देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को चंडीगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए प्रशासन ने फिल्म शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया को एक जगह लाया गया और बाद में इसे पूरी तरह ऑनलाइन भी कर दिया गया।

    प्रशासन की कोशिश अब केवल फिल्मों में चंडीगढ़ को दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ को खुद एक ‘फिल्मिंग डेस्टिनेशन’ और सिनेमाई पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की है।

    इसी प्रयास के तहत चंडीगढ़ टूरिज्म ने पहली बार पिछले सप्ताह श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अाफ जम्मू एंड कश्मीर -2026 में हिस्सा लिया और देश-दुनिया के फिल्म निर्माताओं के सामने शहर की फिल्म शूटिंग क्षमता और खूबसूरती को पेश किया।

    चंडीगढ़ में इन फिल्मों की हो चुकी शूटिंग
    क्रम     फिल्म का नाम
    1     धुरंधर
    2     इंडियन-2
    3     जट्ट एन जूलियट
    4     कैरी ऑन जट्टा
    5     द डिप्लोमैट
    6     सैम बहादुर
    7     शेरशाह
    8     फ्लाइंग जट्ट
    9     बेशरम
    10     निक्का जैलदार
    11     जर्सी
    12     लाल सिंह चड्ढा
    13     पिल
    14     दोस्ताना
    15     जीरो डार्क थर्टी

    2004 से फिल्म निर्माताओं के लिए आसान रास्ता
    प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का भी विशेष फोकस है चंडीगढ़ ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में दिखाई दे। चंडीगढ़ में फिल्म और टेलीविजन शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग का फिल्म फैसिलिटेशन सेल वर्ष 2004 से काम कर रहा है।

    पहले फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के लिए अलग-अलग विभागों से एनओसी लेनी पड़ती थी। इसे आसान बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने सिंगल विंडो व्यवस्था शुरू की, जिसके माध्यम से जरूरी अनुमतियां एक ही व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाने लगीं।

    इसके बाद शहर में हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों के साथ टीवी धारावाहिकों की शूटिंग में भी बढ़ोतरी हुई।1 अप्रैल 2022 से शूटिंग की अनुमति की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई।

    फिल्म निर्माता ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अनुमति प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ टूरिज्म की यह व्यवस्था शहर में ‘ईज ऑफ फिल्मिंग’ को मजबूत करने के साथ सिनेमाई पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश का अहम हिस्सा है।

    फिल्मों में चंडीगढ़ की अलग पहचान
    चंडीगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि एक ही शहर में आधुनिक वास्तुकला, सुनियोजित सेक्टर, चौड़ी सड़कें, हरियाली, विरासत स्थल, बाग और प्राकृतिक खूबसूरती के अलग-अलग दृश्य मिल जाते हैं।

    ली कार्बुजिए की वास्तुकला से लेकर सुखना झील, राॅक गार्डन, रोज गार्डन और कैपिटल कॉम्प्लेक्स तक शहर का हर हिस्सा कैमरे के लिए अलग पृष्ठभूमि उपलब्ध कराता है।

    चंडीगढ़ टूरिज्म ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जारी किए गए सिनेमैटिक टूरिज्म ब्रोशर में भी इन्हीं खूबियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया। इसमें शहर की वास्तुकला, सुनियोजित शहरी ढांचे, सांस्कृतिक विरासत, बागों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को फिल्म शूटिंग के लिए संभावित लोकेशन के रूप में पेश किया गया है।

    पर्दे से पर्यटन तक का सफर
    प्रशासन अब फिल्मों में दिखाई देने वाली लोकेशनों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। जिस जगह को दर्शक फिल्म में देखते हैं, उसे वास्तविक जीवन में देखने के लिए पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इस तरह फिल्म शूटिंग से शहर को प्रचार मिलने के साथ होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार चंडीगढ़ की दस्तक
    7 से 10 सितंबर तक श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चंडीगढ़ की पहली भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा है। महोत्सव में 41 देशों की 135 फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

    चंडीगढ़ टूरिज्म ने यहां फिल्म निर्माताओं, प्रोडक्शन हाउस और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शहर में शूटिंग के लिए आमंत्रित किया। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव सैयद आबिद रशीद शाह का कहना है कि चंडीगढ़ की अलग पहचान और खूबसूरती को वैश्विक फिल्म समुदाय तक ले जाना उद्देश्य है।

    प्रशासन चाहता है कि फिल्म निर्माता चंडीगढ़ को केवल कहानी की पृष्ठभूमि के तौर पर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण और सिनेमाई पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में देखें।यानी अब चंडीगढ़ की कहानी सिर्फ फिल्मों में नहीं होगी—प्रशासन चाहता है कि फिल्मों की अगली कहानी भी चंडीगढ़ में लिखी जाए।

  • 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा-संकल्प अभियान

    17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा-संकल्प अभियान

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रज्ज्वलित विकास के दीपक का प्रकाश देशभर में फैल रहा है। यह  मोदी के सेवा और जिम्मेदारी के 25 वर्षों के उजास का प्रतीक है। प्रदेश में सेवा-संकल्प अभियान 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक संचालित होगा। प्रदेशवासी प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस 17 सितम्बर को बड़ी संख्या में दीप प्रज्जवलित कर उनके प्रति आभार प्रदर्शित करेंगे, हमारा प्रयास हो कि इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन का विश्व रिकॉर्ड कायम हो। सेवा संकल्प अभियान का आयोजन ग्राम और नगर स्तर पर अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए उत्साह पूर्वक किया जाये। सभी कार्यक्रमों की पूर्व तैयारी के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर प्रभावी मॉनीटरिंग हो। विभिन्न कार्यक्रमों की व्यवस्था के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों से भी बेहतर समन्वय और सभी संबंधितों की शत्-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम के अंतर्गत जबलपुर में ह्युमन रंगोली का राज्य स्तरीय आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान की प्रदेश में जारी तैयारियों की समत्व भवन में समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल, मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री  प्रहलाद पटेल, मंत्री  राकेश सिंह, मंत्री सु निर्मला भूरिया, मंत्री  विश्वास सारंग,  नागर सिंह चौहान, मंत्री  राकेश शुक्ला, मंत्री  इन्दर सिंह परमार और राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल वर्चुअली शामिल हुए। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई,  केसी गुप्ता,  संजय दुबे,  अनुपम राजन,  संजय शुक्ला,  शिवशेखर शुक्ला तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक से समस्त संभागायुक्त तथा जिला कलेक्टर्स वर्चुअली जुड़े।

    अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों पर हुआ प्रेजेंटेशन

    सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितम्बर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश में दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगी। उज्जैन के महाकाल महालोक सहित प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में शाम 7 बजे एकसाथ दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उज्जैन से कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। प्रदेश के सभी लाभार्थी परिवारों और संस्थाओं को दीप प्रज्जवलन में शामिल किया जाए। इसी दिन सभी स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में रक्तदान शिविर आयोजित होंगे। बैठक में रक्त संग्रह, परिवहन और संग्रहण के लिए आवश्यक व्यवस्था के भी निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय होंगे।

    सेवा-संकल्प अभियान अंतर्गत मेरे सपनों का भारत कार्यक्रम में 19 से 26 सितम्बर तक जिलास्तर पर और 4 व 5 अक्टूबर को राज्यस्तर पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें सभी शासकीय और निजी स्कूल, कॉलेज भागीदारी करेंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार और मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी, स्कूल शिक्षा मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह होंगे।

    नमो सेवा-अनकही कहानियां गतिविधि 19 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक होगी, जिसके अंतर्गत विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी संस्कृति मंत्री  धर्मेन्द्र सिंह लोधी होंगे।

    आंगन मिलन सेवा का आयोजन 26 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक सभी आंगनवाड़ियों में होगा। इसके अंतर्गत बच्चों और माताओं के लिए स्वल्पाहार, खेल सामग्री, पठन सामग्री आदि की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अपील का वीडियो भी आंगनवाड़ी में महिलाओं और बच्चों को दिखाया जाएगा। आंगन मिलन सेवा में स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, एनीमिया और स्वच्छता की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम की राज्य प्रभारी महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया होंगी।

    सेवा की कहानी कार्यक्रम 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक होगा। इसके अंतर्गत केन्द्र/राज्य सरकार की योजनाओं से जिन हितग्राहियों का जीवन बदला है, आभार स्वरूप उनके संदेश जारी किए जाएंगे। कार्यक्रम की राज्य प्रभारी, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी होंगी।

    सेवा ज्योति कलश यात्रा 7 अक्टूबर को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निकाली जाएगी। इसके अंतर्गत जिला विकास पुस्तिकाओं का वितरण और जिले में हुई विकास गतिविधियों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग होंगे।

    वड़नगर (गुजरात)-वाराणसी सेवा यात्रा की अवधि 17 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक रहेगी। प्रदेश के सभी जिलों से यह यात्रा गुजरेगी। कार्यक्रम के प्रभारी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल होंगे।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम 2 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक होगा। इसके अंतर्गत समाज के सभी वर्गों और संस्थाओं की सहभागिता से विभिन्न सेवा गतिविधियां संचालित की जाएंगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह होंगे।

    सेवा सेतु अभियान 2 से 10 अक्टूबर तक होगा। कार्यक्रम में विकास खण्ड स्तर पर और नगरीय निकायों में जोन वार शिविरों का आयोजन किया जाएगा। केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितलाभ पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम से जनविश्वास अभियान को भी जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी उप मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल होंगे।

    सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और अलीराजपुर में 9 और 10 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर जनसहभागिता से ह्युमन रंगोली का निर्माण किया जाएगा। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान होंगे।

    सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रम 12 अक्टूबर को होगा। इसमें में इन्क्यूबेटर्स, स्टार्ट-अप लीडर्स और इनोवेटर्स सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी मंत्री  राकेश शुक्ला, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री होंगे।

    सुशासन सेवा संवाद का कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रदेश के पंच-सरपंच शामिल होंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद पटेल होंगे।

    25 साल-25 कहानियां के अंतर्गत सभी जिलों में गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग के परिवारों को केन्द्र सरकार से प्राप्त होने वाली किट्स भेंट की जाएंगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी उच्च शिक्षा मंत्री  इंदरसिंह परमार होंगे।

    विकसित भारत संकल्प यात्रा इन्फ्लूऐंसर एक्सचेंज कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में आए अन्य राज्यों के सोशल मीडिया इन्फ्लूऐंसर्स प्रदेश के जिलों का भ्रमण करेंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार होंगे।

    बैठक में सेवा सेतु मेगा शिविरों की विकासखण्डवार और जोन वार तैयारी कर अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने प्रतिभागियों के आवागमन, भ्रमण, भोजन आदि की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया।

     

  • फ्यूचर रेडी बार ही रखेगी फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव : सीएम योगी

    फ्यूचर रेडी बार ही रखेगी फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव : सीएम योगी

    लखनऊ

    इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी बनें और न्याय को जमीनी धरातल तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रख सकती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय सभी अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन सहयोग करेगा और 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है।
    उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी पुलिस में 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। व्यवस्था में पारदर्शिता-जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी चुनौती थे। वहीं अब पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 3,000 से बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष की गई है। पहले 10 जनपदों में जिला अदालतें अस्थायी व किराए के भवनों में चलती थीं और अधिवक्ताओं के चैंबर जर्जर थे। अब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चैंबर बनाए जा चुके हैं। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये और अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को आर्थिक सहायता की पात्रता आयु 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषणा की है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के साथ हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का भी अवसर है। उन्होंने आस्था की इस भूमि से प्रदेशवासियों को हिंदी दिवस, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    स्वाधीनता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ता समाज की अहम भूमिका

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह समाज की राय बनाने के साथ उसके विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। स्वाधीनता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन के संचालन, लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती देने और राष्ट्र निर्माण के वर्तमान अभियान तक अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन लंबे समय तक बिखरा रहा। दक्षिण अफ्रीका से अपनी वकालत छोड़कर महात्मा गांधी के आंदोलन की कमान संभालने के बाद इसे नई दिशा और गति मिली। प्रयागराज की धरती भी ऐसे अनेक अधिवक्ताओं की गवाह रही है, जिन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने लंबे समय तक देश और स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी तथा क्रांतिकारियों के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी देश की आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयागराज से जुड़े जीवन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम तट पर स्थित प्रेसिडेंशियल सूट भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति की याद दिलाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रत्येक कुंभ के दौरान प्रयागराज आते थे और माघ मेले में कल्पवास करते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं सोमनाथ पहुंचे थे। राष्ट्र के प्रति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान और संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के तहत काम करते हैं, लेकिन उनके बीच बेहतर समन्वय और संवाद लोकतंत्र को अधिक परिपक्व और मजबूत बनाता है। न्यायपालिका भी विधि के शासन और सुशासन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि न्याय के रथ के बार और बेंच दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। दोनों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय हमेशा बना रहना चाहिए। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी समान महत्व दिया जाता है। मुख्य न्यायाधीश, न्यायपालिका के संरक्षक के रूप में, अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को भी शासन के सामने प्रभावी तरीके से रखते हैं और उनके समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास होता है।

    बार-बेंच के बीच सम्मान, संवाद और समन्वय जरूरी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय प्रशासन के लिए बार और बेंच के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी 2017 से पहले की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। उस समय चुनौती केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि व्यवस्था के दृष्टिकोण, प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी थी। न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 56 जनपदों में सबसे ऊंची इमारतों में पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, पुलिस बैरक या प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। उन्होंने लखनऊ में 2017 में किए गए पुलिस बैरक के अचानक निरीक्षण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वहां दो पुलिसकर्मी रह रहे थे और छत टूटी होने के साथ जाले लगे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों से दिन-रात, सर्दी-गर्मी और बरसात में रक्षक की भूमिका निभाने की अपेक्षा है, उन्हें बुनियादी सुविधाएं देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी बेहद खराब थी। कई अदालतें अस्थायी और किराए के भवनों में संचालित होती थीं। सरकार ने प्रभावी विटनेस प्रोटेक्शन की व्यवस्था मजबूत की है। पहले गवाहों के डर के कारण मुकर जाने से गंभीर आपराधिक मामलों में सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए पुराने और असुरक्षित वाहनों की जगह व्यवस्था को सुरक्षित बनाया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय से व्यवस्था में रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्मेशन के परिणाम सामने आ रहे हैं। सुदृढ़ न्यायपालिका सुशासन की आधारशिला को मजबूत करती है और सुशासन चुनी हुई सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रॉसिक्यूशन कोऑर्डिनेशन से कन्विक्शन रेट में सुधार हुआ है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़कर समय पर चार्जशीट दाखिल करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखने की व्यवस्था की गई है। जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है। न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से अदालतों में गवाही वर्चुअल दर्ज कराने की शुरुआत हुई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन में भी तेजी लाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 जनपदों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के प्रयासों की सराहना की। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे सभी न्यायिक कार्यों के साथ न्यायिक अधिकारियों के आवास, अधिवक्ताओं के चेंबर, स्पोर्ट्स और इंडोर स्टेडियम तथा अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
    उन्होंने बताया कि त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को बढ़ाया गया है और प्रथम चरण में 900 जनपदीय स्तर के न्यायालयों के गठन की मंजूरी दी गई है।

    700 करोड़ से बने अधिवक्ता चेंबर 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चेंबर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। जनपदीय स्तर पर भी एडवोकेट चेंबर के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। कौशांबी, लखनऊ, कासगंज, श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चेंबर बनाए जा चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।

    न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में तीन नए कानून लागू हुए हैं।  इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिवक्ताओं को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की चुनौती थी, लेकिन बार ने जिस तेजी से नए कानूनों को अपनाया, वह सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तभी लोकतंत्र की कसौटी पर खरी उतरती हैं, जब नागरिकों का विश्वास कायम रहे। इसके लिए समय पर न्याय सबसे महत्वपूर्ण है। नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई, भेदभाव रहित व्यवहार और कानून की नजर में समानता का भरोसा होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि संवेदनशील और सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए पारदर्शिता, निर्णयों में सत्यनिष्ठा, संस्थाओं में जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास जरूरी है। बदलते दौर में कानून के सामने साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसी नई चुनौतियां और संभावनाएं सामने हैं। अधिवक्ताओं को टेक्नोलॉजी, बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे परिवर्तनों की गहरी समझ विकसित करनी होगी। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की है। युवा अधिवक्ता केवल सफल लीगल प्रोफेशनल बनने तक सीमित न रहें, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी और समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता की जिम्मेदारी केवल मुकदमे के परिणाम तक सीमित नहीं है। उसके प्रयास किसी व्यक्ति के विश्वास और जीवन की दिशा बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    चैंबर में सुविधाओं के लिए सरकार देगी पूरा सहयोग

    सीएम योगी ने इस दौरान अधिवक्ता भवन की चाबी भी सौंपी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और चैंबर बनाए गए हैं। चैंबर में फर्नीचर और आवश्यक उपकरणों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए न्यायपालिका या बार एसोसिएशन के माध्यम से मुख्य न्यायमूर्ति की ओर से जो प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसमें हर प्रकार का सहयोग करेगी।

    निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं : केशव मौर्य

    उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रयागराज संगम के साथ न्याय की भी भूमि है और यहां के अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं और सरकार के बीच संबंध लोगों को न्याय दिलाने की साझा जिम्मेदारी से जुड़े हैं। आज ईज ऑफ जस्टिस को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक कानून बदले गए हैं। आज अपराधी कानून से डरता है और आम आदमी का कानून पर भरोसा बढ़ा है। सरकार की नीति साफ है कि निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं।
     
    समारोह में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महाधिवक्ता अजय मिश्रा, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।

  • हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को योजना से जोड़ेगी सरकार

    हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को योजना से जोड़ेगी सरकार

    प्रयागराज
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की।
     
    हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
     
    अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है।
     
    इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है।
     
    विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी।
     
    फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।
     
    समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें।

    अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका: मुख्य न्यायाधीश
    इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।
     

  • अमित शाह के UCC ऐलान के बाद JDU एक्टिव, संजय झा गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात; रखेंगे पार्टी का पक्ष

    अमित शाह के UCC ऐलान के बाद JDU एक्टिव, संजय झा गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात; रखेंगे पार्टी का पक्ष

    नईदिल्ली 

    समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार में एनडीए के भीतर शुरू हुई बयानबाजी के बीच जेडीयू ने बड़ा बयान दिया है.जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा UCC के मसले पर जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. बता दें कि अमित शाह के 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने वाले बयान के बाद बिहार में दो अलग-अलग सुर सुनाई दिए. जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा बिहार में UCC किसी कीमत पर लागू नहीं होगा. वहीं सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा अमित शाह ने कहा है तो अच्छी बात होगी, लागू हो सकता है. बताया जा रहा है कि अब इस खींचतान को खत्म करने के लिए संजय झा मोर्चा संभालेंगे। 

    UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद JDU की पहल
    बता दें कि हाल में ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 से पहले भाजपा और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी. इस बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. वहीं जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने साफ-साफ कह दिया था कि जदयू बिहार में यूसीसी किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देगी। 

    लेकिन, अब जब जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व से कहा गया है कि अमित शाह से मुलाकात करके पार्टी अपना पक्ष रखेगी तो इसको डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, जदयू का मानना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना सभी समाजों से बातचीत के फैसला नहीं होना चाहिए. जेडीयू ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करेगी. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जल्द ही अमित शाह से UCC के मसले पर बातचीत करेंगे। 

    संजय झा अमित शाह के सामने रखेंगे पार्टी का पक्ष
    राजीव रंजन के बयान से साफ है कि जेडीयू इस मुद्दे को सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ाना चाहती है. संजय झा की अमित शाह से मुलाकात में बिहार की स्थिति और पार्टी के रुख पर चर्चा होने की संभावना है. बता दें कि जेडीयू पहले ही संकेत दे चुकी है कि संसद में किसी विधेयक का समर्थन करना और उसे अपने राज्य में लागू करने का फैसला करना दो अलग-अलग विषय हैं। 

    बिहार में UCC को लेकर JDU का रुख अलग
    जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने हाल ही में साफ कहा था कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा. उनका कहना था कि पार्टी ने संसद में कानून का समर्थन जरूर किया था, लेकिन उसी समय यह भी स्पष्ट कर दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा. ऐसे में संजय झा की अमित शाह से प्रस्तावित मुलाकात को बिहार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह मुलाकात गठबंधन के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर समन्वय की कोशिश भी हो सकती है। 

  • महंगाई का फिर लगा जोरदार झटका! अगस्त में तेल-बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी

    महंगाई का फिर लगा जोरदार झटका! अगस्त में तेल-बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी

    नई दिल्ली

    भारत में थोक महंगाई (WPI) अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है. जुलाई में यह आंकड़ा 9.78 फीसदी था. यानी एक महीने में थोक महंगाई में 0.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, तैयार सामान और ईंधन-बिजली से जुड़ी कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है. खास बात यह है कि ईंधन और बिजली की महंगाई बाकी प्रमुख श्रेणियों के मुकाबले काफी ज्यादा रही। 

    खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी अगस्त के दौरान दबाव बढ़ा. फूड इंडेक्स में थोक महंगाई अगस्त में 7.05 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी. यानी एक महीने में खाद्य महंगाई में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. महंगाई बढ़ने में मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं और खाद्य उत्पादों का निर्माण जैसी श्रेणियों की अहम भूमिका रही. पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है। 

    मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स में तेजी

    अगस्त में मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की थोक महंगाई 8.37 फीसदी रही. जुलाई में यह 8.29 फीसदी थी. यानी इस श्रेणी में भी महंगाई बढ़ी है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे। 

    फ्यूल-पावर में ज्यादा महंगाई
    थोक महंगाई के आंकड़े में सबसे ज्यादा दबाव फ्यूल और पावर से आया. इस श्रेणी में अगस्त की महंगाई दर 22.93 फीसदी रही. यह दर फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की तुलना में काफी ज्यादा है. मिनरल ऑयल की कीमतों में बदलाव का भी इस श्रेणी पर असर पड़ा है. ईंधन की लागत बढ़ने का असर आगे ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। 

    महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें ये रहीं
    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख चीजों में मिनरल ऑयल, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स का निर्माण, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण शामिल रहे. यानी महंगाई का दबाव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन और औद्योगिक सामान तक कई हिस्सों में कीमतें बढ़ीं। 

    RBI के लिए भी अहम है आंकड़ा
    थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक महंगाई और ब्याज दरों के रुख पर नजर रख रहा है. पिछले महीने मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बेंचमार्क पॉलिसी रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है. केंद्रीय बैंक ने कमजोर और असमान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अल नीनो की स्थिति को महंगाई के लिए जोखिमों में शामिल किया था। 

    आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
    थोक महंगाई सीधे तौर पर आपकी खरीदारी की कीमत तय नहीं करती, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी का असर आगे चलकर कारोबार की लागत और कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. फिलहाल अगस्त के आंकड़ों में फूड, फ्यूल और पावर तथा मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स तीनों में दबाव दिखाई दे रहा है. इसलिए आने वाले महीनों में इन तीनों क्षेत्रों की कीमतों का रुख अहम रहेगा. अगर ईंधन और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो महंगाई पर दबाव भी आगे बना रह सकता है। 

  • आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरों पर खिलेगी मुस्कान, बलरामपुर में शुरू होगी खिलौना दान मुहिम

    आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरों पर खिलेगी मुस्कान, बलरामपुर में शुरू होगी खिलौना दान मुहिम

    रायपुर : बलरामपुर जिले में सेवा और स्नेह का अनूठा संकल्प, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान

    25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’

    कलेक्टर ने जिलेवासियों से खिलौना दान कर बच्चों की खुशियों में सहभागी बनने की अपील

    रायपुर,

    बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे।
    ‘आंगन मिलन सेवा’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे।

    ’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’

    कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं।

    आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला

    कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

    उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है।

    खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव

    बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं।
    जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’  इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर

    ‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा।

    जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं।

    यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।

     

  • बोले मुख्यमंत्री- झूठी और बेवजह शिकायत कर सिस्टम का समय खराब करने वालों पर भी शिकंजा जरूरी

    बोले मुख्यमंत्री- झूठी और बेवजह शिकायत कर सिस्टम का समय खराब करने वालों पर भी शिकंजा जरूरी

     लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है।
     
    मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।
     
    राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने।
     
    उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
     
    भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त
    लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया।
     
    लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास
    उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है।

    चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन
    उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया।
     
    1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत
    संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 लाख 17 हजार 427 रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई। इसमें वर्ष 2018 में सर्वाधिक छह करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिली। पिछले पांच वर्षों में जांच-पड़ताल के बाद 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं।
     
    स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का हुआ विमोचन
    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी और लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी ने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा लघु फिल्म देखी।तिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98