Category: उत्तर प्रदेश

  • तीन साल की भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू, एनजीआरआई की तकनीक से चिन्हित होंगे अन्य उपयुक्त स्थान

    तीन साल की भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू, एनजीआरआई की तकनीक से चिन्हित होंगे अन्य उपयुक्त स्थान

    लखनऊ
     योगी सरकार ने प्रदेश में भूजल संरक्षण और लंबे समय की जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम तेज कर दिया है। इसी कड़ी में गंगा-यमुना दोआब में 1.65 करोड़ रुपये की ‘प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण (एमएआर) परियोजना’ शुरू की गई है। तीन साल की इस परियोजना के तहत बारिश के पानी को जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों (भूमिगत जल भंडार) तक पहुंचाकर भूजल का पुनर्भरण किया जाएगा। परियोजना की सबसे अहम कड़ी कानपुर से प्रयागराज के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी/पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पुराने नदी मार्ग आज भी जमीन के अंदर पानी के आने-जाने में मददगार हो सकते हैं।

    200 किमी लंबी प्राचीन नदी का मिला रास्ता
    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआई) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक के जरिए गंगा-यमुना दोआब के नीचे मौजूद जलभृतों और प्राचीन नदी प्रणालियों का अध्ययन किया है। इसके लिए हवाई भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और बोरहोल लॉगिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

    इस अध्ययन में प्रयागराज से कानपुर के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी यानि पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। आसान भाषा में कहें तो जमीन के नीचे पुराने नदी मार्गों के निशान मिले हैं, जो आज भी भूजल के प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    जलभृतों तक पहुंचेगा बारिश का पानी
    परियोजना का सीधा उद्देश्य बारिश के पानी को बेकार बहने से रोककर उसे जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों तक पहुंचाना है। जलभृत जमीन के नीचे पानी जमा रखने वाली प्राकृतिक परतें होती हैं। इन्हीं से कुओं और नलकूपों के जरिए भूजल मिलता है। वैज्ञानिक अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि बारिश का पानी जमीन के अंदर कहां और किस रास्ते आसानी से पहुंच सकता है। इसी आधार पर पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा।

    छह स्थानों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
    राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के वित्तीय सहयोग से भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा इस परियोजना को लागू किया जा रहा है। इसकी कुल लागत 1.65 करोड़ रुपये और अवधि तीन वर्ष है। पहले चरण में छह स्थानों का चयन किया गया है। यहां पायलट अध्ययन के साथ भूजल पुनर्भरण की संरचनाएं बनाई जाएंगी। इन संरचनाओं के जरिए पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा और इसके परिणामों की लगातार निगरानी की जाएगी।

    पहले परिणाम देखे जाएंगे, फिर बढ़ेगा दायरा
    छह पायलट स्थानों पर यह देखा जाएगा कि पुनर्भरण संरचनाओं से भूजल स्तर पर कितना असर पड़ता है और स्थानीय जलभृत बारिश के पानी को किस तरह ग्रहण करता है। इससे यह भी पता चलेगा कि अलग-अलग स्थानों पर कौन-सी पुनर्भरण व्यवस्था ज्यादा प्रभावी रहती है। पायलट चरण से मिलने वाले परिणामों के आधार पर परियोजना को गंगा-यमुना दोआब के दूसरे उपयुक्त स्थानों तक बढ़ाया जाएगा। इससे भविष्य में बड़े क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

    नदी और भूजल के संबंध की भी होगी निगरानी
    एनजीआरआई के अध्ययन में गंगा और यमुना नदियों तथा जमीन के अंदर मौजूद प्रमुख जलभृतों के बीच हाइड्रोजियोलॉजिकल संबंध के संकेत मिले हैं। प्राचीन नदी मार्ग भी जलभृतों के भीतर भूजल के प्रवाह के महत्वपूर्ण रास्ते हो सकते हैं। इस परियोजना से नदी, बारिश के पानी, भूजल और प्राचीन नदी मार्गों के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। यही जानकारी आगे भूजल संरक्षण की योजनाओं के लिए उपयोगी होगी।

    वैज्ञानिक निगरानी से मजबूत होगी जल सुरक्षा
    नमामि गंगे, अतिरिक्त परियोजना निदेशक प्रभाष कुमार ने कहा कि परियोजना में एनजीआरआई के तकनीकी सहयोग से भूजल की निगरानी, शोध एवं विकास और पुनर्भरण संरचनाओं के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके साथ लोगों को भूजल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।

  • पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    लखनऊ
    Panchayat Sahayak Salary Hike: यूपी के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. अभी तक पंचायत सहायकों को हर महीने 6 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. यानी हर महीने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी. सिर्फ मानदेय ही नहीं, पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी ऐलान किया गया है. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते हटाए गए पंचायत सहायकों को दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है। 

    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई। 

    6 हजार की जगह अब मिलेंगे 9 हजार रुपये
    पंचायत सहायकों को अभी तक 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगी. इस तरह पंचायत सहायकों के मानदेय में सीधे 3 हजार रुपये महीने की बढ़ोतरी होगी. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 50 फीसदी की वृद्धि है. इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा. पंचायत स्तर पर काम करने वाले इन सहायकों के लिए लंबे समय से मानदेय और दूसरी सुविधाओं को लेकर मांगें सामने आती रही हैं. अब सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने के साथ दूसरी मांगों पर भी फैसले किए गए हैं। 

    सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा बढ़ा हुआ मानदेय
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब इसमें बदलाव किया जाएगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके बाद पंचायत सहायकों को मिलने वाला 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. इससे मानदेय भुगतान की व्यवस्था सीधे बैंक खाते से जोड़ दी जाएगी. प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलेगा। 

    प्रधान और पंचायत सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
    पंचायत सहायकों के लिए सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ है. सेवा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. पंचायत सहायक को सेवा से हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी. यानी पंचायत सहायक की सेवा समाप्त करने का फैसला अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर अकेले नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी की भूमिका होगी। 

    आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस
    पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है. सरकार ने बताया है कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कार्रवाई करते हुए जिन पंचायत सहायकों को हटा दिया गया था, उन्हें भी दोबारा बहाल किया जाएगा. इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मानदेय के साथ उनकी सेवा से जुड़े मुद्दे पर भी फैसला लिया है. महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने अहम सुविधा का ऐलान किया है. अब महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान काम से संबंधित परिस्थितियों में राहत मिलेगी. पंचायत स्तर पर काम करने वाली महिला सहायकों के लिए यह सुविधा उनके सेवा लाभों से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है। 

    पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा
    पंचायत सहायकों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा भी देने का फैसला किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा. यानी मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा को भी फैसलों में शामिल किया है. इससे पंचायत सहायकों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता और सुविधा मिलने की व्यवस्था तैयार होगी। 

    बातचीत के बाद हुआ फैसलों का ऐलान
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनके हित में लिए गए फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई. इसमें मानदेय बढ़ाने से लेकर सेवा सुरक्षा, मुकदमे वापस लेने, दोबारा बहाली, महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। 

    पंचायत सहायकों के लिए क्या-क्या बदला?

    – मानदेय 6,000 से बढ़कर 9,000 रुपये प्रतिमाह

    – मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी

    – 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ

    – डीबीटी के जरिए बैंक खाते में भुगतान की तैयारी

    – ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अकेले सेवा से नहीं हटा सकेंगे

    – जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी हटाने का फैसला करेगी

    – आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे

    – कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायक बहाल होंगे

    – महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश

    – पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा

    कई दिनों से दे रहे थे धरना : 
    राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायक कई दिनों से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकरधरने पर डटे हुए थे. सोमवार को ही प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ आरोप था कि वे ग्राम पंचायतों में डिजिटल पोर्टल के संचालन से लेकर हर जरूरी प्रशासनिक काम अकेले संभालते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें महीने का महज 6 हजार रुपये दिया जा रहा है. कर्मचारियों ने इसे सीधी तौर पर 'मजदूरी से भी बदतर शोषण' करार दिया था. पंचायत सहायकों की दो-टूक मांग थी कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए या नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान लागू हो. वहीं सोमवार को सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी धरना स्थल पर पहुंचीं और पंचायत सहायकों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए उनके समर्थन का खुला ऐलान कर दिया था। 

  • साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री

    माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री

    आईएमए गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड बैंक का सीएम योगी ने किया उद्घाटन

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री
     
    प्रदेश में 75 जिले, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हुई : सीएम योगी

    प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही सरकार : सीएम योगी

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। पर, अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है।

    सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय एवं अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।
     
    कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान, डॉक्टर होते थे उनके शिकार
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।

    बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक
    रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

    पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी
    सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।

    आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना की सीएम ने
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा।

    गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया
    मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया सीएम योगी ने : डॉ. शुक्ला
    चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री एवं अन्य अभ्यागतों का स्वागत करते हुए आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि सीएम योगी ने अपने विजन से गोरखपुर और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में गोरखपुर मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने बताया कि आईएमए के 400 यूनिट की क्षमता वाले इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न होने दी जाए। समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह और संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया।

    इस अवसर पर एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, आईएमए गोरखपुर के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. बबिता शुक्ला सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।

    नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
    निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और स्नेह व आशीर्वाद दिया।

     

  • UP में डेयरी किसानों के लिए खुशखबरी, मिनी नंदिनी योजना में 20 नए लाभार्थी शामिल

    UP में डेयरी किसानों के लिए खुशखबरी, मिनी नंदिनी योजना में 20 नए लाभार्थी शामिल

    गोरखपुर
     पशुपालन विभाग के नंद बाबा दुग्ध विकास मिशन योजना (Nand Baba Mission) के अंतर्गत संचालित मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (Mini Nandini Scheme) में पिछले सत्र के 20 और लोगों को शामिल कर लिया गया है। ऐसे में अब लाभार्थियों की संख्या 26 हो गई है। इसमें से छह लोगों ने अपने खर्च पर योजना संचालित करने की सहमति प्रदान की है।

    सत्र 2025-26 में मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में शामिल होने के लिए 42 लोगों ने आवेदन किया था। ई लाटरी के माध्यम से छह लोगों का चयन किया गया। शेष लोगों को प्रतिक्षा सूची में रखा गया था। इसी जुलाई में शासन की ओर से प्रतीक्षारत लोगों को योजना में शामिल करते हुए लाभ देने के आदेश दिए गए।

    अंतिम तिथि 12 सितंबर तक 20 लोगों ने बैंक के सहमति पत्र व निजी व्यवस्था से योजना में शामिल होने की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। छह लोग अपनी निजी व्यवस्था से डेयरी के संचालन की सहमति दिए हैं। इस सत्र में अब योजना के कुल 26 लाभार्थी हो गए हैं।

    यह है योजना
    मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में देसी नस्ल की 10 गाय का पालन करना है। इसे प्रदेश के बाहर से लाना होता है। 23.60 लाख रुपये की योजना में सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। शेष रकम लाभार्थी को स्वयं खर्च करना है। इतने रुपये की उसे बैंक गारंटी देनी होती है या अपने खाते में बैलेंस रखना पड़ता है। अनुदान की राशि दो किस्तों में दी जाती है।

    प्रदेश सरकार दुग्ध विकास को बढ़ावा देने में जुटी है। कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ा जा रहा है। पिछले सत्र के प्रतीक्षा सूची के अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ देने का आदेश दिया गया था। निर्धारित तिथि तक 20 लोगों ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। उन्हें योजना में शामिल कर लिया गया है।

    – डा. धर्मेंद्र पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

  • 12 प्रमुख कार्यक्रमों से गांव से शहर तक पहुंचेगा सेवा का संदेश, 25 लाख लाभार्थियों की सफलता की कहानियां होंगी डिजिटल

    12 प्रमुख कार्यक्रमों से गांव से शहर तक पहुंचेगा सेवा का संदेश, 25 लाख लाभार्थियों की सफलता की कहानियां होंगी डिजिटल

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सेवा, सुशासन, जनकल्याण और विकास की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलेगा। एक माह के अभियान के जरिए योगी सरकार की योजनाओं से लाभान्वित नागरिकों की सफलता की कहानियां सामने लाने के साथ प्रदेशवासियों को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ा जाएगा। अभियान के प्रभारी एवं उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मार्गदर्शन में शासन से जनपद स्तर तक त्रिस्तरीय समन्वय व्यवस्था बनाई गई है।

    अभियान में केंद्र सरकार के 12 वर्षों और राज्य सरकार के 10 वर्षों के विकास कार्यों से आए बदलावों को प्रस्तुत करने पर जोर रहेगा। केंद्र एवं राज्य की योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों का त्रिस्तरीय डेटा बैंक तैयार होगा। कुल 4.19 करोड़ परिवारों और 15.74 करोड़ लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 3.51 करोड़ परिवार व 13.01 करोड़ लाभार्थी तथा शहरी क्षेत्र के 0.68 करोड़ परिवार व 2.73 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं।

    12 कार्यक्रमों से पहुंचेगा सेवा का संदेश
    अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘मेरे सपनों का भारत: चित्र सेवा’, ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’, ‘आंगन मिलन सेवा’, ‘सेवा की कहानी’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ और ‘सुशासन सेवा संवाद’ आयोजित होंगे।

    17 सितंबर को ‘सेवा दिवस-आशीर्वाद का दीया’ से शुरुआत होगी। शाम सात बजे घरों और प्रतिष्ठानों पर दीप प्रज्वलन कर सेवा एवं विकसित भारत के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया जाएगा। अस्पतालों में फल वितरण, रक्तदान शिविर, विश्वकर्मा जयंती पर टूल किट वितरण तथा चयनित विकास एवं अवस्थापना परियोजना स्थलों पर दीप प्रज्वलन होगा।

    ‘मेरे सपनों का भारत: चित्र सेवा’ के तहत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक विद्यालयों में कक्षा 5 से 8 के लिए चित्रकला तथा कक्षा 9 से 12 के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में चित्रकला, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। जिला स्तरीय प्रदर्शनी के बाद 7 अक्टूबर को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी होगी। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री के डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार दिए जाएंगे।

    नुक्कड़ नाटक और डिजिटल कहानियों से जनजागरण
    ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ के तहत प्रत्येक जनपद में 18 से 20 कलाकारों की सांस्कृतिक टोलियां गठित होंगी। प्रत्येक विधानसभा में सात कार्यक्रम होंगे। ग्राम पंचायतों, सामुदायिक केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर 25 से 30 मिनट की प्रस्तुति के जरिए जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास की कहानी पहुंचाई जाएगी।

    ‘सेवा की कहानी’ डिजिटल एवं रील अभियान में 25 लाख लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव पर 60 सेकंड की रील्स तैयार होंगी। आवास, विद्यालय, पंचायत भवन, पुस्तकालय, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इनलैंड पोर्ट, मेट्रो, आरआरटीएस और विश्वविद्यालयों से जुड़ी विकास कहानियां प्रदर्शित की जाएंगी। 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर तीन दिवसीय उत्सव एवं संवाद होगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा दीदियों और उत्कृष्ट लाभार्थी माताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला योजनाओं की जानकारी के साथ हेल्दी बेबी शो, बच्चों को कॉमिक बुक्स, खिलौने, फल-मिठाई, अतिरिक्त पोषाहार एवं सामग्री वितरण होगा।

    सेवा ज्योति कलश यात्रा से विकसित भारत का संकल्प
    7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा-विकसित भारत का संकल्प’ आयोजित होगी। प्रमुख चौराहों पर सेवा कलश स्थापित किए जाएंगे। पैदल, साइकिल और बाइक रैलियों से नागरिक मुख्य आयोजन स्थल पहुंचेंगे। ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’ में 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश की 10 नदियों का जल लेकर 10 टोलियां काशी से वडनगर, गुजरात जाएंगी। मार्ग के जनपदों में चौपाल, जनसंवाद और विकास यात्रा पर आधारित फिल्म प्रदर्शन होंगे।

    ‘सेवा मेरा योगदान’ में नागरिक 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक से जुड़ेंगे। रक्तदान, वृक्षारोपण, स्वच्छता, स्वास्थ्य जांच, गांव गोद लेना, योग-ध्यान, महिला स्वास्थ्य, शिक्षा सहयोग, करियर काउंसलिंग, वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल साक्षरता, अंगदान, पोषण, सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण, साइबर सुरक्षा, फिट इंडिया, दिव्यांगजन सहयोग, मतदाता जागरूकता, वोकल फॉर लोकल और सरकारी योजनाओं की जागरूकता इसमें शामिल हैं। प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम दो स्थलों के कायाकल्प का लक्ष्य है।

    सेवा सेतु शिविरों में मौके पर मिलेंगी योजनाओं की सुविधाएं

    ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत विकासखंड एवं नगरीय निकाय स्तर पर पांच से सात दिवसीय बहुउद्देशीय शिविर होंगे। एक ही स्थान पर योजनाओं की जानकारी, पात्र नागरिकों के आवेदन, पात्रता सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य मेले, प्रत्येक विधानसभा में दिव्यांग कल्याण शिविर और मतदाता पंजीकरण पर भी जोर रहेगा। ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में युवाओं की राष्ट्रीय स्तर के इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में ओरिएंटेशन एवं मोटिवेशन कार्यक्रम होंगे।

    1.25 लाख जनप्रतिनिधि लेंगे विकसित भारत का संकल्प
    17 अक्टूबर को ‘सुशासन सेवा संवाद’ के साथ अभियान का समापन होगा। ग्राम प्रधान, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि सेवा एवं सुशासन के 25 वर्षों के अवसर पर प्रधानमंत्री का सम्मान करेंगे तथा विकसित भारत-2047 का संकल्प लेंगे। लगभग 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों द्वारा संकल्प एवं वंदे मातरम् गायन की योजना है। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर विकास यात्रा दर्शाने वाले लेजर शो होंगे। प्रमुख तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों में महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान प्रस्तावित हैं।
    17 अक्टूबर को ‘सुशासन सेवा संवाद’ के साथ अभियान का समापन होगा। ग्राम प्रधान, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि सेवा एवं सुशासन के 25 वर्षों के अवसर पर प्रधानमंत्री का सम्मान करेंगे तथा विकसित भारत-2047 का संकल्प लेंगे। लगभग 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों द्वारा संकल्प एवं वंदे मातरम् गायन की योजना है। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर विकास यात्रा दर्शाने वाले लेजर शो होंगे। प्रमुख तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों में महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान प्रस्तावित हैं।

  • स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ी रफ्तार, गोरखपुर बन रहा पूर्वांचल का हेल्थ हब

    स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ी रफ्तार, गोरखपुर बन रहा पूर्वांचल का हेल्थ हब

    हेल्थ हब के रूप में विकसित हो रहा गोरखपुर: डॉ. आरपी शुक्ला
     
    आईएमए चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह में वक्ताओं ने गिनाए स्वास्थ्य सेवाओं में आए बदलाव
     
    एम्स आने के बाद पूर्वांचल के साथ बिहार और नेपाल से भी इलाज के लिए पहुंच रहे लोग
     
    गोरखपुर

     आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य सेवाओं को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया है, वह अभूतपूर्व है। गोरखपुर में जापानी इंसेफेलाइटिस सहित विभिन्न बीमारियों का इलाज अब आसानी से मिल रहा है। एम्स आने के बाद गोरखपुर हेल्थ हब के रूप में विकसित हो रहा है।
     
    आईएमए चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह में डॉ. शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने ब्लड बैंक के निदेशक डॉ. अवधेश अग्रवाल और अन्य चिकित्सकों का भी स्वागत करते हुए कहा कि आईएमए के माध्यम से रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी।
     
    डॉ. शुक्ला ने कहा कि मेडिकल छात्रों को दोगुना स्टाइपेंड मिल रहा है। मानसिक दिव्यांगों के लिए संस्थान संचालित हो रहा है। प्रदेश टीबी और कैंसर के इलाज में लगातार प्रगति कर रहा है। सरकारी चिकित्सालयों में रोबोटिक सर्जरी, आधुनिक जांच और अंग प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
     
    पहले डॉक्टरों का होता था अपहरण: विपिन सिंह
    विधायक विपिन सिंह ने कहा कि पहले गोरखपुर में आए दिन डॉक्टरों के अपहरण की घटनाएं होती थीं। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुरक्षा के लिए खड़े हैं। पूर्वांचल के साथ नेपाल और बिहार से भी लोग इलाज के लिए गोरखपुर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर को सजाया और संवारा है। उनके नेतृत्व में हुए विकास के कारण शहर में जमीन की कीमत भी बढ़ी है।
     
    बहुत दिनों की प्रतीक्षा को लगा विराम: महापौर
    महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अभिनंदन करते हुए कहा कि आईएमए के ब्लड सेंटर के शुरू होने से बहुत दिनों की प्रतीक्षा को विराम लगा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सभी का अभिभावक बताते हुए आभार जताया। कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की स्थिति से निकलकर आगे बढ़ा है।

  • ‘सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर’, संजय निषाद का बड़ा राजनीतिक दावा

    ‘सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर’, संजय निषाद का बड़ा राजनीतिक दावा

    सपा पर हमलावर हुए संजय निषाद, बोले- कांग्रेस की बैसाखी भी नहीं जुटा पा रही पार्टी, निषाद समाज भूला नहीं कसरवल कांड

    'हक मांगने पर गोलियां चलवाईं, अब हितैषी बनने का ढोंग'- सपा पर संजय निषाद का वार

    'सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर', संजय निषाद का बड़ा राजनीतिक दावा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने सपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूसरों पर टिप्पणी कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।

    संजय निषाद ने कहा कि जिनके घर शीशे के बने होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। उन्होंने सपा नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टिप्पणी और अफवाह फैलाने के बजाय सपा को अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी को मिलने वाली सीटों की चिंता करने के बजाय सपा पहले कांग्रेस के साथ अपने सीट बंटवारे का फैसला कर ले।

    कांग्रेस की बैसाखी का जुगाड़ नहीं कर पाई सपा

    कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के अपने लोग टूटने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है, जबकि सपा अब तक कांग्रेस की बैसाखी का भी जुगाड़ नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन बराबरी और हिस्सेदारी का गठबंधन है।

    कसरवल कांड पर सपा को घेरा

    संजय निषाद ने कसरवल कांड का जिक्र करते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कसरवल कांड में निषाद समाज के निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवाई गई थीं। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अपने शहीदों का बलिदान और उन पर हुए अत्याचार को कभी नहीं भूला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हक मांगने पर गोलियां चलवाने वाले लोग आज समाज के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज के खून में राजनीति और स्वाभिमान है। यह समाज केवल बराबरी की भागीदारी में विश्वास रखता है। संजय निषाद ने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों से लोहा लेने वाले इस वीर समाज ने कभी किसी के लिए केवल दरी बिछाने की राजनीति नहीं की।

    राजनीतिक भविष्य के सवालों का दिया जवाब

    संजय निषाद ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी या उनके राजनीतिक भविष्य की चिंता करने के बजाय समाजवादी पार्टी को अपना वजूद बचाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि संजय निषाद कहां जाएंगे, बल्कि यह है कि खुद शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव कहां जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी लगातार सिकुड़ रही है, जबकि निषाद पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने “जय निषाद राज” का नारा भी दिया।

  • गन्ना किसानों का पूरा भुगतान, 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान

    गन्ना किसानों का पूरा भुगतान, 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान

    गन्ना किसानों को 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत भुगतान

    पेराई सत्र (2025-26) 

    23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का किया भुगतान, निजी चीनी मिलों ने भी किया शत-प्रतिशत भुगतान 

    योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान 

    निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना है उत्तर प्रदेश 

    पेराई सत्र (2025-26) में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का किया जा चुका भुगतान 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर मॉनीटरिंग की बदौलत पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया। वहीं 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का भुगतान किया। प्रदेश में संचालित राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 में 543.51 करोड़ का भुगतान किया है। निजी चीनी मिलों की ओर से भी किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है।

    गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में शीर्ष पर बना है यूपी 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया। 

    94.86 प्रतिशत से अधिक का भुगतान सुनिश्चित
    वर्तमान पेराई सत्र में भी 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    9 वर्ष में चीनी मिलों ने की 9220 लाख टन गन्ने की पेराई
    गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है। जो इससे पहले के 9 वर्ष की कुल गन्ना पेराई 6168 लाख टन से 3052 लाख टन अधिक है। 9 वर्ष में 879.06 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। 

    सहकारी चीनी मिलों ने किया 100 प्रतिशत भुगतान 
    उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 में सहकारी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के रूप में 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अनूपशहर, बदायूं, बागपत, बेलरायां, बिलासपुर, बीसलपुर, गजरौला, घोसी, कायमगंज, महमूदाबाद, मोरना, नानपारा, नानौता, पूरनपुर, पुवायां, रमाला, सहारनपुर, सरसावां, सठियांव, सेमीखेड़ा, स्नेह रोड, सुल्तानपुर, तिलहर समेत कुल कुल 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। 23 सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता 65375 टीसीडी है। 

    निजी चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान 
    पेराई सत्र 2025-26 में निजी चीनों मिलों ने किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। लखनऊ संभाग की मिलों ने सर्वाधिक 6462.19 करोड़ का भुगतान किया। वहीं मुरादाबाद संभाग की मिलों द्वारा 6398.36 करोड़, सहारनपुर संभाग की चीनी मिलों ने 4799.25 करोड़ का भुगतान किया।   
    संभाग   भुगतान प्रतिशत          भुगतान 
    अयोध्या   100 फीसदी             1212.35 करोड़ 
    बरेली    89.25 फीसदी             2315.74 करोड़ 
    देवरिया 97.86 फीसदी              1016.95 करोड़ 
    देवीपाटन   91.63 फीसदी           2249.01 करोड़ 
    गोरखपुर    93.46 फीसदी            749.97 करोड़ 
    लखनऊ    91.34 फीसदी             6462.19 करोड़ 
    मेरठ     94.09 फीसदी              4227.24 करोड़ 
    मुरादाबाद   98.96 फीसदी          6398.36 करोड़ 
    सहारनपुर   94.64 फीसदी       4799.25 करोड़

  • खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान से जरूरतमंद को मिलता है नया जीवन : मुख्यमंत्री योगी

    खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान से जरूरतमंद को मिलता है नया जीवन : मुख्यमंत्री योगी

    माफिया और मच्छर की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण
     
    खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान से जरूरतमंद को मिलता है नया जीवन : मुख्यमंत्री योगी 

     
    साढ़े नौ वर्ष पहले खुद बीमार था बीआरडी, आज स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र
     
    75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस की सीटें 13,500 के पार
     
    पहले डॉक्टरों के अपहरण और रंगदारी के खिलाफ करना पड़ता था आंदोलन
     
    पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश लगाएं, स्वैच्छिक रक्तदान को दें बढ़ावा
     
     गोरखपुर

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। अब इंसेफेलाइटिस समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी  तारामंडल स्थित सेठ बद्री प्रसाद जायसवाल मेमोरियल हॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था नहीं है। गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है।
     
    उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा। गोरखपुर में आईएमए से 1400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हैं।
     
    एक बेड पर भर्ती रहते थे चार-चार मरीज
    मुख्यमंत्री योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर पंखे, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक का अभाव था। नौ वर्ष पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
     
    उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।
     
    डॉक्टरों के लिए सड़कों पर करना पड़ता था आंदोलन
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।
     
    गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का किया जिक्र
    मुख्यमंत्री योगी ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल और ब्लड बैंक सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू की है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है और एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।
     
    स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं लोग
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
     
    उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।
     
    मशीनों का निरीक्षण कर जानी कार्यप्रणाली
    इससे पहले मुख्यमंत्री योगी ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों का निरीक्षण किया। चिकित्सकों से मशीनों के संचालन, रक्त संग्रह, जांच और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद शिलापट्ट का अनावरण कर ब्लड सेंटर का विधिवत लोकार्पण किया।
     
    नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
    निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और स्नेह व आशीर्वाद दिया।
     
    चिकित्सकों ने किया स्वागत
    कार्यक्रम में डॉ. दिनेश चंद्रा और डॉ. अमरेश सिंह ने मुख्यमंत्री योगी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। डॉ. वाई सिंह ने स्मृति चिह्न भेंट किया। आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ल ने मुख्यमंत्री समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चैरिटेबल ब्लड सेंटर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और जरूरतमंद मरीजों तक रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
     
    कार्यक्रम में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ला व विमलेश पासवान, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्त, आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ल, सचिव डॉ. वाई सिंह, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी एवं आईएमए गोरखपुर के संरक्षक डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. डीके सिंह समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।

  • अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को देंगे सरकारी नौकरी, 19 सितंबर से शुरुआत, पुलिस और होमगार्ड में होंगी 77 हजार भर्तियां

    अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को देंगे सरकारी नौकरी, 19 सितंबर से शुरुआत, पुलिस और होमगार्ड में होंगी 77 हजार भर्तियां

     गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को दी जा रही पेंशन की संख्या भी बढ़ेगी और राशि भी। अभी प्रदेश में 1.10 करोड़ वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को सालाना 12 हजार रुपये पेंशन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा, “बहुत शीघ्र इसकी संख्या भी बढ़ेगी और इसकी राशि भी बढ़ेगी।” इसके साथ ही अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होगी।
     
    मुख्यमंत्री योगी बुधवार को उर्वरक नगर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गोरखपुर में करीब 40 करोड़ रुपये की 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उर्वरक नगर में नवनिर्मित कल्याण मंडपम का फीता काटकर लोकार्पण किया और पौधरोपण कर मंत्रोच्चार के बीच जल अर्पित किया।
     
    सात अक्तूबर से एक सप्ताह लगेंगे कैंप
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोई निराश्रित बुजुर्ग, निराश्रित महिला या दिव्यांगजन हो, उसे इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि आगे उसका गुजर-बसर कैसे होगा। सरकार की पेंशन सुविधा उसका संबल बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष का कार्यकाल सात अक्तूबर को पूरा हो रहा है। सात अक्तूबर से एक सप्ताह तक कैंप लगाए जाएंगे। इनमें सरकार की विभिन्न योजनाओं से छूटे पात्र लोगों को योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गरीब को राशन, आवास, शौचालय और उज्ज्वला योजना के कनेक्शन का लाभ मिल रहा है। गरीब परिवार को प्रधानमंत्री मुफ्त अन्न योजना के माध्यम से राशन की गारंटी है। बेटियों के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उपलब्ध है। सरकार का उद्देश्य गरीबी समाप्त कर गरीब व्यक्ति को सामान्य जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
     
    छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगले छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले प्रदेश में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 19 सितंबर से की जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां यूपी पुलिस और होमगार्ड में होंगी। इससे पहले साढ़े नौ लाख नौजवानों को नौकरी दी जा चुकी है।
     
    उन्होंने कहा कि माध्यमिक, बेसिक और अन्य विद्यालयों में टीजीटी, पीजीटी और बेसिक शिक्षा परिषद के शहरी क्षेत्रों में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति के विज्ञापन जारी हो गए हैं और आवेदन मांगे जाने शुरू हो गए हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले नौकरी निकलती थी तो ‘सैफई सिंडिकेट’ वसूली के लिए निकल पड़ता था। नौकरियों में सौदेबाजी होती थी, न्यायालय से रोक लगती थी और नौजवानों का जीवन और भविष्य प्रभावित होता था।
     
    करीब 40 करोड़ की 119 परियोजनाओं की सौगात
    मुख्यमंत्री योगी ने समारोह में गोरखपुर के विकास से जुड़ी करीब 40 करोड़ रुपये की 119 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से गोरखपुर में हुए विकास कार्यों को भी दिखाया गया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने नकहा पुल, रेलवे ओवरब्रिज, फोरलेन सड़कों, स्पोर्ट्स कॉलेज और सैनिक स्कूल समेत शहर में उपलब्ध हुई सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बरगदवा से नकहा, स्पोर्ट्स कॉलेज और पादरी बाजार होते हुए मोहद्दीपुर तक फोरलेन की सुविधा मिली है। गोरखनाथ से स्पोर्ट्स कॉलेज, फर्टिलाइजर से झुंगिया गेट और असुरन से मेडिकल कॉलेज होते हुए भटहट तक मार्ग फोरलेन हुए हैं।
     
    उन्होंने रुस्तमपुर, आजाद चौक और ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में बने लंबे फ्लाईओवर का भी जिक्र किया। रामगढ़ताल के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
     
    गरीब बेटी की शादी से सम्मेलन तक के काम आएगा मंडपम
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कुछ महीने पहले उर्वरक नगर में जिस स्थान पर डेढ़ से दो मीटर का गड्ढा और कूड़ा-गंदगी थी, वहां अब शानदार कल्याण मंडपम बन गया है। इसमें गरीब परिवार की बेटी की शादी, बच्चे का मुंडन संस्कार, प्रवचन, सम्मेलन और गोरखपुर के विकास से जुड़ी बैठकें भी हो सकेंगी।
     
    उन्होंने कहा कि महानगर में ऐसे स्थान चिह्नित किए गए जहां महंगे होटल नहीं हैं और लोग बड़े बारात घरों का खर्च नहीं उठा सकते। इसके बाद तय किया गया कि कुछ कल्याण मंडपम विधायक निधि, कुछ नगर निगम और कुछ गोरखपुर विकास प्राधिकरण बनाएगा।
     
    उन्होंने बताया कि बाबा गंभीरनाथ वार्ड मानबेला, जंगल तुलसीराम बिछिया, जंगल बेनी माधव और बशारतपुर में बने कल्याण मंडपम का उपयोग शुरू हो चुका है। उर्वरक नगर का मंडपम अब जनता को समर्पित कर दिया गया है। दो अन्य मंडपम निर्माणाधीन हैं और विधायक निधि से एक और स्वीकृत किया गया है। इस तरह महानगर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 कल्याण मंडपम की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया है।
     
    उर्वरक नगर का कल्याण मंडपम करीब 3.09 करोड़ रुपये की लागत से 2461 वर्गमीटर में बनाया गया है। इसमें बड़ा हॉल, मिनी हॉल, चार कमरे, मांगलिक कार्यक्रमों के लिए मंडप, भोजनालय और पार्किंग की व्यवस्था है।
     
    गोरखपुर में 500 से अधिक उद्योग, 50 हजार को नौकरी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अकेले गोरखपुर में 500 से अधिक उद्योग लगे हैं। इनमें करीब 50 हजार नौजवानों को नौकरी मिली है। पहले यहां के युवाओं को रोजगार के लिए पंजाब, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जाना पड़ता था।
     
    उन्होंने कहा कि अब गीडा में गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, मऊ, संतकबीरनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर समेत आसपास के जिलों के नौजवानों को नौकरी मिल रही है। दूसरे राज्यों और देशों से भी युवा यहां आकर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
     
    यूपी अब बीमारू नहीं, ग्रोथ इंजन की निभा रहा भूमिका
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के सामने पहचान का संकट था। अब उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं है और भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी, नए एयरपोर्ट और नए कल-कारखाने प्रदेश की नई पहचान बन रहे हैं।
     
    जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर न बंटें
    मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटने से बचने को कहा। उन्होंने कहा कि बंटेंगे तो कर्फ्यू, दंगा, अराजकता और गुंडागर्दी करने वाले तत्वों को फिर अवसर मिलेगा। साफ नीयत, स्पष्ट नीति और जनता को ध्यान में रखकर सरकार आगे बढ़ती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं।
     
    न्यूनतम मूल्य पर कर सकेंगे आयोजन : महापौर
     महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री योगी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कल्याण मंडपम के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि यहां न्यूनतम मूल्य पर शादी, मुंडन और अन्य मांगलिक व सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।
     
    2017 से पहले हर तीन दिन में बिजली के लिए होता था धरना : धर्मेंद्र
     विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 2017 से पहले गोरखपुर के साथ विकास में भेदभाव किया जाता था। हर तीन दिन में बिजली को लेकर धरना होता था। सड़कें टूटी थीं और कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं थी। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में विकास का मॉडल खड़ा हुआ है। गोरखपुर में करीब दो दर्जन फ्लाईओवर बने हैं और एम्स की सुविधा उपलब्ध हुई है। उन्होंने कल्याण मंडपम के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया।
     
    कार्यक्रम में कैंपियरगंज विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक विपिन सिंह, पिपराइच विधायक महेंद्र पाल सिंह, सहजनवां विधायक प्रदीप शुक्ला, बांसगांव विधायक डॉ. विमलेश पासवान, चौरीचौरा विधायक श्रवण निषाद, भाजपा महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, राजेश गुप्ता, जीडीए बोर्ड सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन त्रिपाठी, दुर्गेश बजाज और पार्षद आनंद कुमार साहनी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। पार्षद आनंद कुमार साहनी ने मुख्यमंत्री योगी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।