Category: उत्तर प्रदेश

  • हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    योगी सरकार के योजनाबद्ध प्रयास से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से रोशन हो रहे यूपी के 8.25 लाख घर

    उत्तर प्रदेश में 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित, सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल हुआ शून्य

    हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    लखनऊ, 
     प्रधानमंत्री सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना ने उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली की तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों की छतों पर सौर संयंत्र लग चुके हैं और कुल 2,769.59 मेगावाट क्षमता स्थापित हो चुकी है, जिससे हर दिन लगभग 1.25 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली बन रही है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश घरेलू छत आधारित (रूफटॉप) सौर ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
       औसतन 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के आधार पर यह उत्पादन ₹6.50 प्रति यूनिट की दर से हर दिन लगभग ₹8.10 करोड़ मूल्य की बिजली के बराबर बैठता है। इस हिसाब से प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब ₹2,956 करोड़ की बचत या आर्थिक लाभ का अनुमान है, जो सीधे आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंच रहा है।

    सवा लाख से अधिक घरों का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक
      प्रधानमंत्री सूर्य घर उपभोक्ता बिल विवरण के अनुसार जून 2026 में प्रदेश के 1,25,262 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक रहा। यानी इन परिवारों को उस महीने बिजली का कोई भुगतान नहीं करना पड़ा या उनके खाते में क्रेडिट दर्ज हुआ। ऋणात्मक बिल की स्थिति तब बनती है, जब उपभोक्ता ग्रिड से ली गई बिजली की तुलना में अधिक बिजली ग्रिड को देता है और यह अतिरिक्त बिजली उसके आगामी बिलों में समायोजित होती है।

    ₹7,300 करोड़ से अधिक की सहायता बनी संबल
       योजना के अंतर्गत प्रदेश के उपभोक्ताओं को अब तक ₹5,400 करोड़ से अधिक की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाभार्थियों को ₹1,900 करोड़ से अधिक का राज्य अनुदान मिला है। कुल ₹7,300 करोड़ से अधिक की इस सहायता ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर संयंत्र लगाना कहीं अधिक सुलभ और किफायती बना दिया है।

    हर साल 36.6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बचत
        स्थापित 2,769.59 मेगावाट क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो करीब 16.5 करोड़ परिपक्व वृक्षों द्वारा एक वर्ष में सोखी जाने वाली कार्बन मात्रा के बराबर है। छत आधारित मॉडल के कारण लगभग 10,617 एकड़ भूमि बड़े भू-आधारित सौर संयंत्रों में लगने से बच रही है और कृषि, आवासीय तथा अन्य उत्पादक उपयोगों के लिए सुरक्षित बनी हुई है।

    85 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार का आधार
      इस योजना से प्रदेश में 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का आधार तैयार हुआ है और स्थापित क्षमता बढ़ने के साथ ये अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। अभियंताओं, तकनीशियनों, विद्युतकर्मियों, सर्वेक्षकों, पर्यवेक्षकों, आपूर्ति एवं परिवहन से जुड़े कर्मियों तथा अनुरक्षण सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं। प्रदेश में 7,750 पंजीकृत सौर विक्रेताओं (वेंडर) का नेटवर्क उपभोक्ताओं तक सर्वेक्षण, डिजाइन, स्थापना, विद्युत संयोजन, निरीक्षण, संयंत्र चालू करने और अनुरक्षण जैसी सेवाएं पहुंचा रहा है।

      इस योजना के क्रियान्वयन की अवधि 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इसी अवधि में आवेदन से लेकर संयंत्र की स्थापना, विद्युत निरीक्षण, नेट मीटरिंग और सब्सिडी भुगतान तक की सभी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। इन चरणों में समय लगता है, इसलिए अंतिम समय का इंतजार करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है।
      इच्छुक घरेलू उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर अथवा अपने विद्युत वितरण निगम के पंजीकृत वेंडर के माध्यम से शीघ्र आवेदन करें, ताकि केंद्र सरकार की सब्सिडी और राज्य सरकार के अतिरिक्त अनुदान का पूरा लाभ समय रहते लिया जा सके। जितनी जल्दी संयंत्र लगेगा, उतने ही अधिक महीनों तक मुफ्त बिजली और बिल में बचत का लाभ मिलेगा।

  • संगीतमय होगा विद्यालय का माहौल, संगीत-तकनीक के संगम से तैयार होंगी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाएं

    संगीतमय होगा विद्यालय का माहौल, संगीत-तकनीक के संगम से तैयार होंगी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाएं

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और रचनात्मकता को भी नई दिशा दे रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा को अधिक प्रभावी, संगीतमय और व्यवस्थित स्वरूप देने की पहल आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अंतर्गत 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की संगीतबद्ध वीडियो सामग्री तैयार की जाएगी। 

    इसी क्रम में बुधवार को राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी), निशातगंज के सभागार में संगीत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की कार्यशाला संपन्न हुई। एसआईईटी के निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र के निर्देशन में हुई कार्यशाला में चयनित प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस पहल से विद्यालयों को एक व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण संगीतमय प्रार्थना सामग्री उपलब्ध कराने के साथ संगीत, तकनीक, अनुशासन और प्रेरक मूल्यों को विद्यालयी वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
     
    सभी विद्यालयों तक पहुंचेंगी संगीतमय प्रार्थनाएं

    एसआईईटी के निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि प्रदेश के सभी विद्यालयों की प्रार्थना सभा में प्रेरणादायक और संगीतमय प्रार्थनाएं हों, यही पहल का मुख्य उद्देश्य है। लखनऊ मंडल की टीम के सहयोग से 12 प्रार्थनाओं की रीयल टाइम शूटिंग और रिकॉर्डिंग की जाएगी। संगीत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के साथ प्रार्थनाओं को स्टूडियो में रिकॉर्ड करने के बाद तकनीकी रूप से संपादित कर अंतिम वीडियो सामग्री तैयार की जाएगी।

    स्टूडियो तकनीक का लाइव डेमो

    कार्यशाला में स्टूडियो रिकॉर्डिंग एवं कराओके तकनीक का लाइव डेमो, लिरिक्स डिस्प्ले सिस्टम और ऑडियो मिक्सिंग तकनीक का प्रस्तुतिकरण किया गया। शिक्षकों को रिकॉर्डिंग प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ समूह गायन का अभ्यास भी कराया गया। कार्यशाला में 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं का परिचय और विद्यालयों में इनके क्रियान्वयन की योजना पर भी चर्चा हुई। 

    डिजिटल मंचों पर उपलब्ध होगी सामग्री

    डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि रिकॉर्डिंग और संपादन के बाद तैयार अंतिम वीडियो सामग्री को यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित अन्य डिजिटल मंचों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यालय और शिक्षक अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका उपयोग प्रार्थना सभा में कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में संभावना होती है और शिक्षक का कार्य उसकी योग्यता को पहचानकर निखारना है। विद्यार्थियों को सही दिशा में निरंतर प्रयास करने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि देश की सेवा पढ़कर करेंगे, पढ़ाकर करेंगे और अच्छा इंसान बनाकर करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का दायित्व पढ़ना और अपने ज्ञान को दूसरे विद्यार्थियों तक पहुंचाना भी है। एसआईईटी का प्रयास विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री को डिजिटल और वीडियो सामग्री के रूप में तैयार कर उन तक पहुंचाना है।

    12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की होगी रिकॉर्डिंग

    इस पहल के अंतर्गत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’, ‘हमको मन की शक्ति देना’, ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘तेरी है जमीन तेरा आसमान’, ‘ओ पालनहारे’, ‘तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो’, ‘तू प्यार का सागर है’, ‘ज्योति से ज्योति जगाते चलो’, ‘बादल पे पांव है’, ‘इंसाफ की डगर पे’, ‘हम होंगे कामयाब’ और ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’ जैसी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं को संगीतबद्ध कर वीडियो रूप में तैयार किया जाएगा। कार्यशाला के बाद संगीत शिक्षकों एवं छात्राओं को एसआईईटी स्टूडियो का भ्रमण कराया गया और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। लखनऊ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने रीयल टाइम रिकॉर्डिंग को लेकर सुझाव दिए। विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार उपस्थित रहे, जबकि प्रशासनिक अधिकारी अजीत सिंह ने कार्यशाला का संचालन किया।

  • जनगणना में मिलेगी परिवार आईडी, 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि होगी संदर्भ तिथि

    जनगणना में मिलेगी परिवार आईडी, 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि होगी संदर्भ तिथि

    लखनऊ 

    जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियां उत्तर प्रदेश में तेज हो गई हैं। 16 से 30 नवंबर तक लोग घर बैठे स्व-गणना कर सकेंगे। इसके बाद एक दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों का ब्योरा दर्ज करेंगे। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे परिवार के सभी सदस्यों का नाम जरूर दर्ज कराएं। नाम छूटने पर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।

    मंगलवार को लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू हुआ। निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि जनगणना का उद्देश्य किसी घर या व्यक्ति को छूटने से बचाना और दोहरी गणना रोकना है। स्व-गणना के बाद परिवार को एक आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के पहुंचने पर दिखाना होगा। ऑनलाइन सुविधा का लाभ न उठा पाने वाले परिवारों का ब्योरा प्रगणक मौके पर दर्ज करेंगे। 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना का संदर्भ समय माना जाएगा। 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण राउंड में जन्म और मृत्यु की जानकारी अपडेट की जा सकेगी।

    इसको गंभीरता से करें…

    अधिकारियों ने जनगणना प्रक्रिया में लगे अफसरो व कर्मियों से कहा कि किराएदार, प्रवासी मजदूर, निर्माण स्थलों पर रहने वाले श्रमिक, छात्रावासों के छात्र, झुग्गी-बस्ती के परिवार, नवविवाहित महिलाएं और हाल में जन्मे बच्चों के नाम छूटने का खतरा अधिक रहता है। परिवारों को नवजात, बुजुर्ग और दिव्यांग सदस्यों का नाम विशेष रूप से जांचना चाहिए।

    सही जानकारी ही दें

    प्रदेश में 4,78,783 गणना ब्लॉक हैं। करीब 5,63,000 प्रगणक और पर्यवेक्षक लगाए जाएंगे। 305 मास्टर ट्रेनर 7,500 फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण देंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से सही जानकारी देने और संदिग्ध व्यक्ति को ब्योरा न देने की अपील की है।

  • जिला अस्पतालों में शुरू होंगी 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट: सीएम योगी

    जिला अस्पतालों में शुरू होंगी 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट: सीएम योगी

    गोरखपुर 

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी खत्म हो गया। साढ़े नौ साल पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहते थे। अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है।

    सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि साढ़े नौ साल पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।

    कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।
     

    बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक

    रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

    पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी

    सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।

    सीएम ने की आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा।

    गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया

    सीएम योगी ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।
    कार्यक्रम को इन्होंने भी किया संबोधित

    समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह और संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया।

  • गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में यूपी नंबर-1, किसानों के भुगतान में भी बड़ी प्रगति

    गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में यूपी नंबर-1, किसानों के भुगतान में भी बड़ी प्रगति

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर मॉनीटरिंग की बदौलत पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया। वहीं 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820 करोड़ का भुगतान किया। प्रदेश में संचालित राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने पेराई सत्र 2025-26 में 543.51 करोड़ का भुगतान किया है।

    निजी चीनी मिलों की ओर से भी किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश निरंतर सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है।

    गन्ना, शीरा और एथेनॉल उत्पादन में शीर्ष पर बना है यूपी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया।

    94.86 प्रतिशत से अधिक का भुगतान सुनिश्चित

    वर्तमान पेराई सत्र में भी 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    9 वर्ष में चीनी मिलों ने की 9220 लाख टन गन्ने की पेराई

    गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है। जो इससे पहले के 9 वर्ष की कुल गन्ना पेराई 6168 लाख टन से 3052 लाख टन अधिक है। 9 वर्ष में 879.06 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।

    सहकारी चीनी मिलों ने किया 100 प्रतिशत भुगतान

    उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 में सहकारी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के रूप में 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अनूपशहर, बदायूं, बागपत, बेलरायां, बिलासपुर, बीसलपुर, गजरौला, घोसी, कायमगंज, महमूदाबाद, मोरना, नानपारा, नानौता, पूरनपुर, पुवायां, रमाला, सहारनपुर, सरसावां, सठियांव, सेमीखेड़ा, स्नेह रोड, सुल्तानपुर, तिलहर समेत कुल कुल 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। 23 सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता 65375 टीसीडी है।

    निजी चीनी मिलों द्वारा किया गया भुगतान

    पेराई सत्र 2025-26 में निजी चीनों मिलों ने किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। लखनऊ संभाग की मिलों ने सर्वाधिक 6462.19 करोड़ का भुगतान किया। वहीं मुरादाबाद संभाग की मिलों द्वारा 6398.36 करोड़, सहारनपुर संभाग की चीनी मिलों ने 4799.25 करोड़ का भुगतान किया।

    संभाग     भुगतान प्रतिशत     भुगतान
    अयोध्या     100 फीसदी     1212.35 करोड़
    बरेली     89.25 फीसदी     2315.74 करोड़
    देवरिया     97.86 फीसदी     1016.95 करोड़
    देवीपाटन     91.63 फीसदी     2249.01 करोड़
    गोरखपुर     93.46 फीसदी     749.97 करोड़
    लखनऊ     91.34 फीसदी     6462.19 करोड़
    मेरठ     94.09 फीसदी     4227.24 करोड़
    मुरादाबाद     98.96 फीसदी     6398.36 करोड़
    सहारनपुर     94.64 फीसदी     4799.25 करोड़

  • किसान संवाद को नई गति, योगी सरकार के सहयोग से गोरखपुर में किसान कारवां 2.0 का आगाज

    किसान संवाद को नई गति, योगी सरकार के सहयोग से गोरखपुर में किसान कारवां 2.0 का आगाज

    गोरखपुर

    उत्तर प्रदेश में किसानों से संवाद और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाने के उद्देश्य से किसान तक और योगी सरकार के सहयोग से किसान कारवां 2.0 की शुरुआत हो गई। बुधवार को गोरखपुर के योगीराज गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में पहले किसान महासम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि और गोरखपुर मंडल के आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

    कार्यक्रम में 1300 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में काला नमक चावल, गन्ने की खेती और कृषि तकनीक पर तीन पैनल चर्चाएं हुईं। विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने खेती की नई संभावनाओं और तकनीक पर विचार साझा किए। किसानों के स्वागत के लिए लोक गायक मनोज मिहिर ने प्रस्तुति दी, जबकि जादूगर सलमान ने जादू के करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया।

    10 कृषि वीर सम्मानित

    कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदेश में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से चयनित 10 कृषि वीरों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। जिसमें दीपक कुशवाहा, अविनाश कुमार, लालजी कुशवाहा, मालती देवी, वेदव्यास सिंह, जय सिंह कुशवाहा, कर्नल के.सी. मिश्रा, आज्ञाराम वर्मा, राजू सिंह और सीमा गुप्ता (ड्रोन दीदी, देवरिया) को सम्मानित किया गया। आज्ञाराम वर्मा के नाम पर गन्ने की एक वैरायटी जारी की गई है। राजू सिंह एफपीओ और शहद उत्पादन से जुड़े हैं।

    किसान परिषद का गठन

    इस अवसर पर 20 सदस्यीय किसान परिषद का गठन भी किया गया। परिषद में हरिशंकर राय, संजय सिंह, नंदलाल चौहान, अजीत श्रीवास्तव, मांधाता सिंह, राज मंगल चौधरी, विवेक सिंह बंटी, इंदू श्रीवास्तव, वीरेंद्र चौरसिया, शत्रुघ्न चंद, राम चेत चौधरी, राम रतन सिंह, राकेश मल्ल, धर्मेंद्र सिंह, संजय नायक, पुष्पा देवी, अविनाश कुमार, धर्मेंद्र पांडे, जयप्रकाश नारायण और सुभाष चंद्र सिंह को शामिल किया गया है। किसान कारवां 2.0 का अगला कार्यक्रम 24 सितंबर को झांसी में आयोजित होगा। इसमें बुंदेलखंड क्षेत्र के किसान और कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे।

  • योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बिजली आपूर्ति सामान्य

    योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बिजली आपूर्ति सामान्य

    लखनऊ

    प्रदेश में विद्युत उपलब्धता को सामान्य बनाए रखने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति की समीक्षा कर फीडबैक लिया और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाएं और जहां से भी बिजली उपलब्ध हो, उसका उपयोग कर आपूर्ति सामान्य रखी जाए।

    अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई और ओबरा-बी की यूनिट-10 का पुनः संचालन शुरू होने से प्रदेश की विद्युत उपलब्धता में औसतन करीब 1300 मेगावाट की वृद्धि हुई है। अगले एक-दो दिनों में एपीजीसी, सिंगरौली की यूनिट-2, टीआरएन एनर्जी की यूनिट-1, घाटमपुर की यूनिट-1 तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयां उपलब्ध हो जाने से लगभग 1,250 मेगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो जाएगी।

    वहीं केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के डायरेक्टर ऑपरेशन शिव एस. दास एवं उनकी टीम के साथ हुई बैठक में अगले पांच वर्षों तक गर्मी के महीनों में पावर बैंकिंग के माध्यम से 500-600 मेगावाट बिजली प्राप्त करने पर सहमति बनी है। वर्तमान में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से पावर बैंकिंग के जरिए औसतन करीब 2400 मेगावाट बिजली पीक आवर्स में प्राप्त की जा रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण थर्मल पावर प्लांटों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा समेत कई परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे प्रदेश को औसतन 1500 से 2000 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद योगी सरकार उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने में जुटी है।

  • देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल, हैकिंग टूल कर रहा था तैयार

    देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल, हैकिंग टूल कर रहा था तैयार

    लखनऊ

     योगी सरकार की अपराध और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यूपी एटीएस ने अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से जुड़े मॉड्यूल पर कार्रवाई करते हुए एक और आतंकी को गिरफ्तार किया है। यूपी एटीएस ने तमिलनाडु एटीएस के सहयोग से कोयंबटूर से मकसूद अली को गिरफ्तार किया। इससे पहले इसी मामले में मुख्य आतंकी मोहम्मद नबील को 12 सितंबर को आजमगढ़ से पकड़ा गया था। 

    लखनऊ लेकर आई यूपी एटीएस

    मकसूद अली (19) मूल रूप से सिद्धार्थनगर जिले के बांसी थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह तमिलनाडु के कोयंबटूर में रह रहा था। यूपी एटीएस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ आई है, जहां संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

    सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बहकाने की कोशिश

    एटीएस के मुताबिक मूल रूप से यूपी के सिद्धार्थनगर का रहने वाला मकसूद अली सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर समूह बनाकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए युवाओं को जोड़ रहा था। उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर मुजाहिद बनने और इसके लिए धन व आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण लेने की योजना से जोड़ा जा रहा था। जांच में इस मॉड्यूल के तार देश के अन्य राज्यों के साथ विदेशी लोगों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।

    पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में आने का दावा
    जांच के दौरान सामने आया कि मकसूद अली देश विरोधी हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के हैंडलरों के संपर्क में आया था। एटीएस के मुताबिक, वह पाकिस्तान के हैंडलरों से संपर्क कर ‘हैकिंग टूल’ तैयार कर रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग की जानकारी उसने ऑनलाइन संसाधनों, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टेलीग्राम और विभिन्न व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए हासिल की।

    ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ के जरिए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश

    मकसूद ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ नाम का एक सेक्योर एप्लीकेशन भी तैयार किया था। इसका मोटो था, ‘एक प्लेटफॉर्म, एक मकसद: यूनिटी, प्लान एंड एक्शन’। जांच में सामने आया कि इसी माध्यम से नबील, मकसूद और अन्य लोग आपस में जुड़े थे। मकसूद के व्हाट्सऐप ग्रुप्स की भी जानकारी सामने आई है। इनमें यूयू एंट्री गेट, यूनाइटेड उम्माह, गजवा-ए-हिंद, टीम ब्लैक हैट और लश्कर-ए-महंदी जैसे समूह शामिल मिले। इन ग्रुप्स में पाकिस्तानी नंबरों वाले संदिग्ध समेत अन्य पाकिस्तानी हैकर भी जुड़े थे। इन ग्रुप्स के जरिए कट्टरपंथी और जिहादी विचारधारा का प्रचार किया जा रहा था।

    एक्यूआईएस से जुड़े होने के सबूत मिले
    मकसूद, मोहम्मद नबील द्वारा बनाए गए ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप से भी जुड़ा था। इस समूह में प्रतिबंधित आतंकी संगठन एक्यूआईएस से संबंधित साहित्य और बम बनाने से जुड़े वीडियो साझा किए जा रहे थे।

  • कार्य की अपेक्षित प्रगति न देख सीएम ने अफसरों को लगाई कड़ी फटकार

    कार्य की अपेक्षित प्रगति न देख सीएम ने अफसरों को लगाई कड़ी फटकार

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार शाम एचएन सिंह चौक से हड़हवा फाटक होते हुए जगेसर पासी चौराहे तक बन रही टूलेन/फोरलेन सड़क का दो स्थानों पर निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्य की अपेक्षित प्रगति न मिलने पर उन्होंने लोक निर्माण विभाग, जल निगम और सेतु निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी और काम में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी त्योहारों से पहले सड़क को हरहाल में आवागमन योग्य बना दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने 495.24 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे एचएन सिंह चौक-जगेसर पासी चौराहा सड़क चौड़ीकरण कार्य का स्मार्ट बाजार के सामने और हड़हवा फाटक के आगे रुककर निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तुत लेआउट मॉडल को देखा और सड़क की लंबाई-चौड़ाई और अब तक निर्माण प्रगति की जानकारी ली। काम की गति तेज न होने को लेकर उन्होंने लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिकारियों पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग करा रहा है जबकि सीवर लाइन डालने का काम जल निगम द्वारा किया जा रहा है। हड़हवा फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण सेतु निगम करा रहा है। उन्होंने तीनों विभागों को काम में और तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि शिथिलता किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान सीएम ने अफसरों से कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे काम के दौरान आवागमन में कोई व्यवधान न हो और आगामी त्योहारों के पहले सड़क आवागमन योग्य बन जाए। उन्होंने जलनिकासी के लिए हेड टू टेल  व्यवस्था का भी निर्देश दिया।

  • पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला, मानदेय में ₹3 हजार बढ़ोतरी

    पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला, मानदेय में ₹3 हजार बढ़ोतरी

    लखनऊ
    प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के लिए कई अहम निर्णय लेने की तैयारी कर ली है। वर्तमान में 6000 रुपये प्रतिमाह मानदेय पाने वाले पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर 9000 रुपये किया जाएगा।

    साथ ही मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से करने, महिला पंचायत सहायकों को नियमानुसार मातृत्व अवकाश देने और पंचायत सहायकों को रखने व हटाने से जुड़े मामलों में जिलाधिकारी की भूमिका सुनिश्चित करने की बात कही गई है। आंदोलन और मांगों से जुड़े मुकदमों की समीक्षा कर नियमानुसार उन्हें वापस लेने की कार्रवाई भी होगी।

    पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की अध्यक्षता में पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए गए। मानदेय में तीन हजार रुपये की मासिक बढ़ोतरी होने से पंचायत सहायकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।

    डीबीटी की व्यवस्था होगी लागू
    प्रदेश में 57 हजार से अधिक पंचायत सहायक हैं। अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि ग्राम प्रधान स्तर से मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति की शिकायतों के समाधान के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति से संबंधित मामलों में जिलाधिकारी की भूमिका व अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।

    महिला पंचायत सहायकों को शासन के नियमों के अनुसार मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा। पंचायत सहायकों के आंदोलन व उनकी मांगों से संबंधित दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर विधिक प्रक्रिया के तहत वापसी की कार्रवाई की जाएगी।

    मंत्री ने कहा कि पंचायत सहायक पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। पंचायतीराज मंत्री की वार्ता के बाद धरना दे रहे पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है।