Category: उत्तर प्रदेश

  • सतत विकास लक्ष्यों को गति देने में यूपी की पहल, स्वास्थ्य-शिक्षा और पोषण पर योगी सरकार का फोकस

    सतत विकास लक्ष्यों को गति देने में यूपी की पहल, स्वास्थ्य-शिक्षा और पोषण पर योगी सरकार का फोकस

    लखनऊ

     सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के क्षेत्रों में योजनाओं को प्रभावी बनाने के साथ डेटा, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में बुधवार को होटल क्लार्क्स अवध में सशक्त भविष्य: शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को गति विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, डिजिटल हेल्थ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल विकास और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

    प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रमुख आधार हैं। सफल प्रयासों और नवाचारों को साझा कर प्रभावी रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। डेटा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के बेहतर उपयोग से योजनाओं के परिणामों को प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के पहले सत्र में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बेहतर परिणामों के लिए डेटा, तकनीक और नवाचार के प्रभावी इस्तेमाल को जरूरी बताया।

    अपर मुख्य सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार लीना जौहरी ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके पॉल ने स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश को मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। पैनल चर्चा में रोकथाम योग्य मौतों, बच्चों में कम वजन और अविकसित शारीरिक विकास जैसी चुनौतियों पर विचार हुआ। स्वास्थ्य ढांचे और डेटा व्यवस्था को एआई से मजबूत करने पर हिमांशु बुराड, पीयूष एंटनी ,डॉ. कनिका अग्रवाल और डॉ आलोक सक्सेना ने विचार साझा किए।

    दूसरे सत्र में शिक्षा और कौशल विकास पर जोर रहा। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सतत विकास लक्ष्यों की आधारशिला बताया। प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरि ओम ने शिक्षा के साथ कौशल विकास को युवाओं के रोजगार और बेहतर अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

    वहीं शंकर नारायणन, विनोद कराटे, सुनील कुमार, प्रेम रंजन सिंह और विष्णुकांत पांडेय ने नामांकन, बच्चों को विद्यालयों में बनाए रखने, डिजिटल कौशल और सीखने के बेहतर परिणामों पर चर्चा की। चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप कौशल, रोजगार और करियर में बदलाव पर प्रो. बलवंत सिंह मेहता, डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, डॉ. अनन्या समाजदार, प्रणव बंसोडे और दीपक कुमार सिंह ने विचार रखे। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को गति देने पर भी मंथन हुआ।

  • दिवंगत अधिवक्ताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी मुख्यमंत्री ने, परिवार को दिया आर्थिक संबल

    दिवंगत अधिवक्ताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी मुख्यमंत्री ने, परिवार को दिया आर्थिक संबल

    गोरखपुर

    हर जरूरतमंद के साथ आत्मिक संवेदना रखते हुए भरपूर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार शाम दिवंगत अधिवक्ताओं आलोक कुमार अस्थाना और संजय सिंह के परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया। दोनों अधिवक्ताओं की 6 सितंबर को आकाशीय बिजली की चपेट में आकर दुखद मृत्यु हो गई थी। गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने दोनों अधिवक्ताओं के घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को 15-15 लाख रुपये के चेक सौंपे।

    कल्याण मंडपम का लोकार्पण करने के बाद मुख्यमंत्री राप्तीनगर विस्तार कॉलोनी में दिवंगत अधिवक्ता आलोक कुमार अस्थाना के घर पहुंचे। यहां उन्होंने स्मृतिशेष अस्थाना के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिजनों को 10 लाख रुपये की धनराशि का चेक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तथा 5 लाख रुपये का चेक अधिवक्ता कल्याण कोष से प्रदान किया। इसके बाद वह शक्ति नगर में दिवंगत अधिवक्ता संजय सिंह के घर गए। उनके चित्र पर पुष्पार्चन कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने संजय सिंह के परिवार को 10 लाख रुपये की राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तथा 5 लाख रुपये की धनराशि अधिवक्ता कल्याण कोष से प्रदान की। उन्होंने दोनों अधिवक्ताओं के परिजनों को आश्वस्त किया कि दुख की इस घड़ी में वह परिवार के साथ हैं। उल्लेखनीय है कि सीएम योगी के निर्देश पर दोनों अधिवक्ताओं के परिजनों को पूर्व में भी 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता आपदा कोष से दी गई थी।

  • पेंशन राशि व पेंशनरों की संख्या में जल्द होगी बढ़ोतरी: मुख्यमंत्री

    पेंशन राशि व पेंशनरों की संख्या में जल्द होगी बढ़ोतरी: मुख्यमंत्री

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। इनमें 77 हजार भर्तियां सिर्फ पुलिस व होमगार्ड विभाग में होंगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है। सीएम ने वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं व दिव्यांगजन को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। जल्द ही पेंशन की धनराशि और लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। विकास व जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है।

    सीएम योगी बुधवार को गोरखपुर के वार्ड नंबर-53 उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गांव या शहर में नागरिकों के जीवन स्तर का पता विकास और वहां उपलब्ध जनोपयोगी सुविधाओं से चलता है। इसके लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। 2017 के बाद गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में कानून का राज सुनिश्चित कर विकास एवं सुविधाओं की नई श्रृंखला खड़ी की गई है। माफिया या तो जेल में है या दूसरे लोक की यात्रा पर जा चुका है। आज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षा तथा पर्व-त्योहारों के लिए बेहतरीन वातावरण की गारंटी है।

    यूपी अब देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन

    मुख्यमंत्री ने सुदृढ़ कानून व्यवस्था के चलते हुए विकास और इससे आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। 2017 के पहले यहां खराब कानून व्यवस्था, लूट-खसोट, अराजकता के कारण कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं करना चाहता था, जबकि आज यहां आने को हर कोई लालायित है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे तेज अर्थव्यवस्था में एक है। यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कल-कारखानों की नई श्रृंखला और सुदृढ़ कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है। 

    अराजकता फैलाना विभाजक राजनीति करने वालों की फितरत
    सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और जन कल्याण से सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में समाज को बांटने वालों से सावधान रहना होगा। विकास समाज की एकजुटता का परिणाम है। यदि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बटेंगे तो बांटने वाले फिर कर्फ्यू-दंगे का माहौल बनाएंगे। असुरक्षा का अंधकार मचाएंगे। अराजकता फैलाना समाज को बांटने वालों की फितरत है। शानदार वर्तमान और बेहतरीन भविष्य के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है। 

    मच्छर व माफिया को समाप्त कर दिलाई नई पहचान

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी और गोरखपुर में 2017 के बाद से दिख रहे बदलाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस, मच्छर व माफिया को समाप्त कर इंफ्रास्ट्रक्चर से गोरखपुर और उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई गई है। पिछली सरकारों के निकम्मेपन से 2017 के पहले तक हर साल इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों मौतें होती थी। तब सपा या कांग्रेस का कोई मंत्री या मुख्यमंत्री गरीबों को देखने बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं आता था। मुझे आंदोलन करना पड़ता था। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने 40 वर्ष की बीमारी को दो वर्ष में समाप्त कर दिया।

    सीएम ने गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने के दोबारा चलने, चहुंओर फोरलेन कनेक्टिविटी, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण, रामगढ़ताल के पर्यटन स्थल बनने, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थिति शानदार बनाने के साथ एम्स की सौगात मिलने का जिक्र कर कहा कि आज गोरखपुर की चमचमाती पहचान से हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति करता है। 2017 के पूर्व गोरखपुर की गंदगी और बीमारी दरअसल सपा व कांग्रेस सरकारों की गंदी मानसिकता का परिणाम थी। 

    अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

    सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में नौजवानों को नौकरी की गारंटी है। हमारी सरकार ने अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। और, चुनाव की घोषणा से पहले, सरकार अगले छह माह में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। 2017 के पहले सरकारी भर्ती निकलने पर सैफई सिंडिकेट वसूली करने निकल पड़ता था। तब नौजवानों का भविष्य खतरे में पड़ता था। हमारी सरकार में गोरखपुर के गीडा में 500 कारखाने लगे, जिससे अकेले गीडा में 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिला और इस क्षेत्र को पलायन से मुक्ति मिली। डबल इंजन की सरकार ने युवाओं के सामने पहचान का संकट भी दूर किया है।

    7 अक्टूबर से विशेष शिविर, मिलेगा योजनाओं का लाभ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिना भेदभाव सबको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। हर पात्र को आवास, शौचालय, राशन, रसोई गैस, बेटियों की पढ़ाई और विवाह से जुड़ी योजनाओं से लाभान्वित किया गया है। योजनाओं में यदि किसी कारण से कोई वंचित रह गया है तो उसे भी संतृप्त करने के लिए एक सप्ताह का विशेष शिविर लगने जा रहा है। यह शिविर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 7 अक्टूबर से लगेगा। 

    सीएम योगी की दूरदर्शिता का परिचायक है कल्याण मंडपम: डॉ. मंगलेश

    समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी जब भी गोरखपुर आते हैं, यहां के लोगों को उनके हाथों कुछ न कुछ सौगात जरूर मिलती है। कल्याण मंडपम आमजन को उत्कृष्ट सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का परिचायक है। एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 2017 के पहले पिछड़े व बीमारू राज्य की पहचान वाले उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास के बेहतरीन मॉडल के रूप में निखार दिया है।

    इस अवसर पर विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, स्थानीय पार्षद आनंद कुमार साहनी, जीडीए बोर्ड के सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन त्रिपाठी, दुर्गेश बजाज, बीरू साहनी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जीडीए बोर्ड के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका अभिनंदन किया। 
     
    मुख्यमंत्री ने फीता काटकर किया कल्याण मंडपम का लोकार्पण, पौधा भी लगाया

    मंचीय कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर कल्याण मंडपम का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंडपम का भ्रमण और निरीक्षण कर यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की जानकारी ली। जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने उन्हें मंडपम की विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने कल्याण मंडपम के परिसर में मौलश्री का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। 

    300 लोगों की क्षमता का है कल्याण मंडपम

    जंगल नकहा नंबर-2 स्थित कल्याण मंडपम का निर्माण 2461 वर्गमीटर भूमि पर 3.09 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक वास्तुकला से सुसज्जित कल्याण मंडपम दो तल में निर्मित है। यहां 300 लोगों की क्षमता के आयोजन हो सकेंगे। यहां हाल, किचन, स्टोर, ऑफिस, चेंज रूम और महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाए गए हैं। परिसर में मुख्य भवन के सामने एक आकर्षक फव्वारा भी बनवाया गया है। कल्याण मंडपम आने वाले वाहनों के लिए परिसर के अंदर ही इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर अलग से पर्याप्त पार्किंग का प्रावधान किया गया है। परिसर में लॉन भी विकसित किया गया है। कल्याण मंडपम में लोगों को रियायती दर पर मांगलिक-सार्वजनिक कार्यक्रम करने की सुविधा मिलेगी।

    नगर निगम के 115 विकास कार्यों का हुआ शिलान्यास

    जंगल नकहा नंबर-2 स्थित कल्याण मंडपम में मुख्यमंत्री ने 28.91 करोड़ रुपये की लागत वाले नगर निगम के 115 विकास कार्यों का शिलान्यास किया। ये कार्य विभिन्न कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं से संबंधित हैं। उन्होंने 11.04 करोड़ रुपये से अधिक के जिन चार कार्यों का लोकार्पण किया उनमें जीडीए की तरफ से बनाए गए कल्याण मंडपम के अलावा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से कराए गए सड़क व नाली निर्माण के तीन कार्य शामिल हैं।

  • पंचायत सहायकों के लिए बड़े ऐलान, मानदेय बढ़ोतरी के साथ मातृत्व अवकाश और कैशलेस इलाज की सुविधा

    पंचायत सहायकों के लिए बड़े ऐलान, मानदेय बढ़ोतरी के साथ मातृत्व अवकाश और कैशलेस इलाज की सुविधा

    पंचायत सहायकों को मुख्यमंत्री योगी की बड़ी सौगात, मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी
     
    छह हजार की जगह अब हर माह मिलेंगे नौ हजार रुपये, 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ
     
    डीबीटी से सीधे खाते में आएगा मानदेय, कैबिनेट से ली जाएगी स्वीकृति
     
    प्रधान और सचिव नहीं हटा सकेंगे, डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ही करेगी फैसला
     
    आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस, हटाए गए पंचायत सहायकों की होगी बहाली
     
    महिलाओं को मातृत्व अवकाश, उपचार के लिए मिलेगी कैशलेस सुविधा
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को बड़ी सौगात दी है। उनके मानदेय में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अभी पंचायत सहायकों को छह हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर नौ हजार रुपये किया जाएगा। इस तरह मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी मिलेगी।
     
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और उन्हें बुलाया। इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।
     
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद नौ हजार रुपये का मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा।
     
    प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे पंचायत सहायक
    पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी।
     
    आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस
    आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। इस दौरान कार्रवाई कर जिन पंचायत सहायकों को हटाया गया है, उन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा।
     
    महिलाओं को मातृत्व अवकाश, कैशलेस इलाज
    महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ भी दिया जाएगा।
     
    मंत्री से वार्ता के बाद धरना समाप्त
    अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत की। प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ वार्ता की गई। इसके बाद पंचायत सहायकों के प्रतिनिधि मंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिए गए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

  • सपा सरकार पर बृजलाल के गंभीर आरोप, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का किया दावा

    सपा सरकार पर बृजलाल के गंभीर आरोप, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का किया दावा

    सपा सरकार की नीतियां थीं ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ : बृजलाल
     
    राज्यसभा सांसद ने पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों पर उठाए सवाल
     
    मुस्लिम बेटियों को अनुदान और कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के फैसले का किया जिक्र
     
    आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का लगाया आरोप
     
    मैनाठेर हिंसा, पीएसी की कंपनियों और खालिद मुजाहिद प्रकरण को लेकर भी सपा को घेरा
     
    लखनऊ

     पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोलते हुए उसकी नीतियों को ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ करार दिया है। उन्होंने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम बेटियों को अनुदान, कब्रिस्तानों की चहारदीवारी, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश और पीएसी की कंपनियों को निष्क्रिय करने समेत कई फैसलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए।
     
    बृजलाल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि सपा सरकार बनते ही केवल मुस्लिम बेटियों को 30 हजार रुपये का अनुदान देने की व्यवस्था की गई। उन्होंने सवाल किया कि पिछड़े, दलित और अन्य वर्गों की बेटियों के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बृजलाल ने इसे सपा सरकार की ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताया।
     
    उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार की प्राथमिकताओं में आतंकवाद से जुड़े मुकदमों को वापस लेना भी शामिल था। बृजलाल ने दावा किया कि 22 जनवरी, पांच मार्च, 15 अप्रैल और 18 अप्रैल 2013 को आतंकवाद से जुड़े 14 मुकदमे वापस लेने की कोशिश की गई। इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण सरकार इसमें सफल नहीं हो सकी और बाद में आरोपियों को सजा हुई।
     
    कब्रिस्तानों की चहारदीवारी पर उठाए सवाल
    बृजलाल ने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के लिए सरकारी धन दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य समुदायों के श्मशान और कब्रगाहों को ऐसी प्राथमिकता नहीं दी गई। दावा किया कि इस फैसले की आड़ में कई स्थानों पर ग्राम समाज और सरकारी जमीन पर कब्जे हुए।
     
    मैनाठेर हिंसा का किया जिक्र

    राज्यसभा सांसद ने छह जुलाई 2011 के मुरादाबाद के मैनाठेर प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान थाना-चौकी और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया तथा तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ पर जानलेवा हमला हुआ। बृजलाल ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद सपा सरकार ने इस प्रकरण से जुड़े मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया और बाद में 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।
     
    पीएसी और एटीएस को लेकर भी साधा निशाना
    बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने पीएसी की 46 कंपनियों को निष्क्रिय किया और एटीएस को भी कमजोर किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पीएसी में भर्ती करने के साथ तीन नई महिला पीएसी बटालियन बनाई हैं।
     
    खालिद मुजाहिद प्रकरण भी उठाया
    पूर्व डीजीपी ने खालिद मुजाहिद की मौत से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार में उनके और 38 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। बृजलाल ने इसे भी ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद यह कार्रवाई समाप्त हुई।
     
    बृजलाल ने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देने की व्यवस्था है। इससे लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश संविधान और उसके अंतर्गत बने कानूनों से चलता है।

  • श्रमदान कर ऐतिहासिक पोखरे की सफाई करने वाले युवाओं की मुख्यमंत्री योगी ने की सराहना

    श्रमदान कर ऐतिहासिक पोखरे की सफाई करने वाले युवाओं की मुख्यमंत्री योगी ने की सराहना

    गोरखपुर

    मां तरकुलहा देवी धाम परिसर स्थित ऐतिहासिक पोखरे के कायाकल्प की उम्मीद जगी है। लंबे समय से पोखरे में जमा जलकुंभी और गंदगी से श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी से दो युवाओं ने निजात दिलाई। गांव भाऊपुर (बंजारी देवी, चौरीचौरा) के युवा अनुपम गुप्ता और करन निषाद ने स्वप्रेरणा से सफाई का बीड़ा उठाया।

    दोनों युवाओं ने पांच सितंबर से प्रतिदिन श्रमदान कर पोखरे से जलकुंभी और गंदगी हटाना शुरू किया। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने भी श्रद्धा और सेवा भाव से किए जा रहे इस कार्य को देखकर युवाओं की सराहना की। वहीं मंदिर ट्रस्ट ने भी उनके सेवा भाव और समर्पण की प्रशंसा की।

    युवाओं की इस पहल की जानकारी शासन तक पहुंची तो बुधवार (16 सितंबर) की सुबह करीब नौ बजे एसडीएम चौरीचौरा ने अनुपम गुप्ता और करन निषाद से फोन पर संपर्क साधा। उन्होंने युवाओं को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलने के लिए बुलाया है। इसके बाद एसडीएम ने दोनों युवाओं को एनेक्सी भवन पहुंचाया। दोनों करीब 10 बजे एनेक्सी भवन पहुंचे।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों युवाओं से मुलाकात की। उनके साथ फोटो खिंचवाई और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने दोनों युवाओं की भूरि भूरि प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने पोखरे की सफाई के लिए उनके द्वारा किए जा रहे श्रमदान और सेवा भाव की सराहना करते हुए उनके योगदान को अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन भी दिया कि मां तरकुलहा देवी धाम के सामने स्थित प्राचीन पोखरे का सुंदरीकरण और स्थायी जीर्णोद्धार जल्द कराया जाएगा।

  • योगी सरकार का बड़ा फैसला, पंचायत सहायकों का मानदेय 50 फीसदी बढ़ा

    योगी सरकार का बड़ा फैसला, पंचायत सहायकों का मानदेय 50 फीसदी बढ़ा

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पंचायत सहायकों को एक साथ कई सौगातें दी हैं। उनके मानदेय में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब सहायकों को प्रधान या सचिव नहीं हटा सकेंगे। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी वापस होंगे। अभी पंचायत सहायकों को छह हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर नौ हजार रुपये किया जाएगा। इस तरह मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी मिलेगी।

    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और उन्हें बुलाया। इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।

    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है। अब कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद नौ हजार रुपये का मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा।

    प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे पंचायत सहायक
    पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी।

    आंदोलन के मुकदमे होंगे वापस
    आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। इस दौरान कार्रवाई कर जिन पंचायत सहायकों को हटाया गया है, उन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा।

    महिलाओं को मातृत्व अवकाश, कैशलेस इलाज
    महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ भी दिया जाएगा।

    मंत्री से वार्ता के बाद धरना समाप्त
    अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत की। प्रतिनिधियों को बुलाकर उनके साथ वार्ता की गई। इसके बाद पंचायत सहायकों के प्रतिनिधि मंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिए गए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस

    सेमीकंडक्टर के ग्लोबल मंच पर यूपी की दस्तक, 17 से 19 सितंबर तक सेमीकॉन इंडिया 2026 का दिल्ली में आयोजन

    सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में यूपी का बड़ा कदम, यशोभूमि में दिखेगा प्रदेश का इकोसिस्टम

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से भविष्य की तैयारी तक होगा उत्तर प्रदेश का फोकस

    यूपी के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दुनिया देखेगी तस्वीर, यशोभूमि में जुटेंगे ग्लोबल दिग्गज

    लखनऊ
    सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अपनी बढ़ती क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने जा रहा है। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि (आईआईसीसी) द्वारका में होगा। इसमें योगी सरकार, उत्तर प्रदेश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नीतिगत सहयोग और भविष्य की तैयारियों को प्रमुखता से सामने रखेगी। कार्यक्रम में दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों, विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, भारतीय उद्योग जगत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों की भागीदारी होगी।

    यूपी के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की होगी प्रस्तुति
    सेमीकॉन इंडिया 2026 में उत्तर प्रदेश की ओर से ऐसे प्रचार वीडियो तैयार किए जाने की योजना है, जिनमें प्रदेश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को दिखाया जाएगा। इसमें मौजूदा बुनियादी ढांचे, नीतिगत सहयोग और भविष्य की तैयारियों को सामने रखा जाएगा। इसके साथ ही यूपी को भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में एक प्रमुख स्थान रखने वाले राज्य के रूप में प्रस्तुत करने पर भी जोर रहेगा।

    आयोजन का मुख्य विषय ‘ट्रांसफॉर्म टुमारो–सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग ग्लोबल सप्लाई चैन्स’ रहेगा। कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन पर चर्चा और प्रदर्शन किया जाएगा।

    500 से ज्यादा प्रदर्शक, 10 राज्य पवेलियन
    सेमीकॉन इंडिया 2026 में 500 से अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे। करीब 2 लाख वर्गफुट क्षेत्र में प्रदर्शनी होगी। कार्यक्रम में 10 स्टेट पवेलियन और 7 कंट्री पवेलियन भी होंगे। इसके अलावा 40 स्टार्टअप के लिए स्टार्टअप पवेलियन तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम में 150 से अधिक वक्ताओं की भागीदारी, राज्य सरकारों के राउंडटेबल, प्रशिक्षण सत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंपोनेंट्स पर अलग ट्रैक और कंट्री राउंडटेबल भी आयोजित किए जाएंगे। इससे अलग-अलग राज्यों, कंपनियों और वैश्विक भागीदारों के बीच संवाद का अवसर मिलेगा।

    यूपी में निवेश और भविष्य की तैयारी पर फोकस
    प्रदेश की भागीदारी का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को व्यापक स्तर पर सामने रखना है। इसके तहत राज्य की मौजूदा सुविधाओं, नीतिगत समर्थन और भविष्य की तैयारियों की जानकारी दी जाएगी।

    ग्लोबल कंपनियों और राज्यों के बीच संवाद
    सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर उद्योग की बदलती जरूरतों, निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन और भविष्य के कार्यबल से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा है। साथ ही भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

  • तीन साल की भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू, एनजीआरआई की तकनीक से चिन्हित होंगे अन्य उपयुक्त स्थान

    तीन साल की भूजल पुनर्भरण परियोजना शुरू, एनजीआरआई की तकनीक से चिन्हित होंगे अन्य उपयुक्त स्थान

    लखनऊ
     योगी सरकार ने प्रदेश में भूजल संरक्षण और लंबे समय की जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम तेज कर दिया है। इसी कड़ी में गंगा-यमुना दोआब में 1.65 करोड़ रुपये की ‘प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण (एमएआर) परियोजना’ शुरू की गई है। तीन साल की इस परियोजना के तहत बारिश के पानी को जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों (भूमिगत जल भंडार) तक पहुंचाकर भूजल का पुनर्भरण किया जाएगा। परियोजना की सबसे अहम कड़ी कानपुर से प्रयागराज के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी/पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पुराने नदी मार्ग आज भी जमीन के अंदर पानी के आने-जाने में मददगार हो सकते हैं।

    200 किमी लंबी प्राचीन नदी का मिला रास्ता
    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआई) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक के जरिए गंगा-यमुना दोआब के नीचे मौजूद जलभृतों और प्राचीन नदी प्रणालियों का अध्ययन किया है। इसके लिए हवाई भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और बोरहोल लॉगिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

    इस अध्ययन में प्रयागराज से कानपुर के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी यानि पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। आसान भाषा में कहें तो जमीन के नीचे पुराने नदी मार्गों के निशान मिले हैं, जो आज भी भूजल के प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    जलभृतों तक पहुंचेगा बारिश का पानी
    परियोजना का सीधा उद्देश्य बारिश के पानी को बेकार बहने से रोककर उसे जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों तक पहुंचाना है। जलभृत जमीन के नीचे पानी जमा रखने वाली प्राकृतिक परतें होती हैं। इन्हीं से कुओं और नलकूपों के जरिए भूजल मिलता है। वैज्ञानिक अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि बारिश का पानी जमीन के अंदर कहां और किस रास्ते आसानी से पहुंच सकता है। इसी आधार पर पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा।

    छह स्थानों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
    राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के वित्तीय सहयोग से भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा इस परियोजना को लागू किया जा रहा है। इसकी कुल लागत 1.65 करोड़ रुपये और अवधि तीन वर्ष है। पहले चरण में छह स्थानों का चयन किया गया है। यहां पायलट अध्ययन के साथ भूजल पुनर्भरण की संरचनाएं बनाई जाएंगी। इन संरचनाओं के जरिए पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा और इसके परिणामों की लगातार निगरानी की जाएगी।

    पहले परिणाम देखे जाएंगे, फिर बढ़ेगा दायरा
    छह पायलट स्थानों पर यह देखा जाएगा कि पुनर्भरण संरचनाओं से भूजल स्तर पर कितना असर पड़ता है और स्थानीय जलभृत बारिश के पानी को किस तरह ग्रहण करता है। इससे यह भी पता चलेगा कि अलग-अलग स्थानों पर कौन-सी पुनर्भरण व्यवस्था ज्यादा प्रभावी रहती है। पायलट चरण से मिलने वाले परिणामों के आधार पर परियोजना को गंगा-यमुना दोआब के दूसरे उपयुक्त स्थानों तक बढ़ाया जाएगा। इससे भविष्य में बड़े क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

    नदी और भूजल के संबंध की भी होगी निगरानी
    एनजीआरआई के अध्ययन में गंगा और यमुना नदियों तथा जमीन के अंदर मौजूद प्रमुख जलभृतों के बीच हाइड्रोजियोलॉजिकल संबंध के संकेत मिले हैं। प्राचीन नदी मार्ग भी जलभृतों के भीतर भूजल के प्रवाह के महत्वपूर्ण रास्ते हो सकते हैं। इस परियोजना से नदी, बारिश के पानी, भूजल और प्राचीन नदी मार्गों के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। यही जानकारी आगे भूजल संरक्षण की योजनाओं के लिए उपयोगी होगी।

    वैज्ञानिक निगरानी से मजबूत होगी जल सुरक्षा
    नमामि गंगे, अतिरिक्त परियोजना निदेशक प्रभाष कुमार ने कहा कि परियोजना में एनजीआरआई के तकनीकी सहयोग से भूजल की निगरानी, शोध एवं विकास और पुनर्भरण संरचनाओं के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके साथ लोगों को भूजल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।

  • पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    पंचायत सहायकों के लिए खुशखबरी! यूपी सरकार ने मानदेय में की 50% बढ़ोतरी

    लखनऊ
    Panchayat Sahayak Salary Hike: यूपी के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. अभी तक पंचायत सहायकों को हर महीने 6 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. यानी हर महीने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी. सिर्फ मानदेय ही नहीं, पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी ऐलान किया गया है. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते हटाए गए पंचायत सहायकों को दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है। 

    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई। 

    6 हजार की जगह अब मिलेंगे 9 हजार रुपये
    पंचायत सहायकों को अभी तक 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगी. इस तरह पंचायत सहायकों के मानदेय में सीधे 3 हजार रुपये महीने की बढ़ोतरी होगी. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 50 फीसदी की वृद्धि है. इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा. पंचायत स्तर पर काम करने वाले इन सहायकों के लिए लंबे समय से मानदेय और दूसरी सुविधाओं को लेकर मांगें सामने आती रही हैं. अब सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने के साथ दूसरी मांगों पर भी फैसले किए गए हैं। 

    सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा बढ़ा हुआ मानदेय
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब इसमें बदलाव किया जाएगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके बाद पंचायत सहायकों को मिलने वाला 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. इससे मानदेय भुगतान की व्यवस्था सीधे बैंक खाते से जोड़ दी जाएगी. प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलेगा। 

    प्रधान और पंचायत सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
    पंचायत सहायकों के लिए सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ है. सेवा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. पंचायत सहायक को सेवा से हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी. यानी पंचायत सहायक की सेवा समाप्त करने का फैसला अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर अकेले नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी की भूमिका होगी। 

    आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस
    पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है. सरकार ने बताया है कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कार्रवाई करते हुए जिन पंचायत सहायकों को हटा दिया गया था, उन्हें भी दोबारा बहाल किया जाएगा. इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मानदेय के साथ उनकी सेवा से जुड़े मुद्दे पर भी फैसला लिया है. महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने अहम सुविधा का ऐलान किया है. अब महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान काम से संबंधित परिस्थितियों में राहत मिलेगी. पंचायत स्तर पर काम करने वाली महिला सहायकों के लिए यह सुविधा उनके सेवा लाभों से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है। 

    पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा
    पंचायत सहायकों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा भी देने का फैसला किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा. यानी मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा को भी फैसलों में शामिल किया है. इससे पंचायत सहायकों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता और सुविधा मिलने की व्यवस्था तैयार होगी। 

    बातचीत के बाद हुआ फैसलों का ऐलान
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनके हित में लिए गए फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई. इसमें मानदेय बढ़ाने से लेकर सेवा सुरक्षा, मुकदमे वापस लेने, दोबारा बहाली, महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। 

    पंचायत सहायकों के लिए क्या-क्या बदला?

    – मानदेय 6,000 से बढ़कर 9,000 रुपये प्रतिमाह

    – मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी

    – 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ

    – डीबीटी के जरिए बैंक खाते में भुगतान की तैयारी

    – ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अकेले सेवा से नहीं हटा सकेंगे

    – जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी हटाने का फैसला करेगी

    – आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे

    – कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायक बहाल होंगे

    – महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश

    – पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा

    कई दिनों से दे रहे थे धरना : 
    राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायक कई दिनों से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकरधरने पर डटे हुए थे. सोमवार को ही प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ आरोप था कि वे ग्राम पंचायतों में डिजिटल पोर्टल के संचालन से लेकर हर जरूरी प्रशासनिक काम अकेले संभालते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें महीने का महज 6 हजार रुपये दिया जा रहा है. कर्मचारियों ने इसे सीधी तौर पर 'मजदूरी से भी बदतर शोषण' करार दिया था. पंचायत सहायकों की दो-टूक मांग थी कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए या नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान लागू हो. वहीं सोमवार को सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी धरना स्थल पर पहुंचीं और पंचायत सहायकों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए उनके समर्थन का खुला ऐलान कर दिया था।