Category: उत्तर प्रदेश

  • ‘यूपी राइज 2026’: इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा

    ‘यूपी राइज 2026’: इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा

    'यूपी राइज 2026': इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा

    – कार्यक्रम में 30 में से 11 बेहतरीन स्टार्टअप आइडियाज हुए शॉर्टलिस्ट, युवाओं ने दिखाई अपनी उद्यमशीलता

    – कुकिंग ऑयल के डिजिटल मार्केटप्लेस 'री-ऑयल' ने जीता प्रथम पुरस्कार, 'स्टडी एप' और 'सोलर स्वीप' रहे रनरअप

    – आंबेडकर विवि में छात्रों को दी गई उ.प्र. सरकार की रोजगारपरक और स्टार्टअप योजनाओं की विस्तृत जानकारी

    आगरा
     उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने के लिए मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. आशु रानी और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक आत्रेय मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस आयोजन में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाकर उन्हें केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' (रोजगार सृजक) बनाना है।

    नवाचार और स्टार्टअप को उत्तर प्रदेश सरकार की उड़ान
    उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निरंतर और धरातलीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम में युवाओं को राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक नीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, यूपी स्टार्टअप फंड, मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना और यूपी स्किल मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसके अलावा कन्या सुमंगला योजना, फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना और महिला सामर्थ्य योजना से जुड़ी नीतियों के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता व आसान सब्सिडी के बारे में भी बताया गया, ताकि युवा बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने स्टार्टअप को एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल सकें।

    विद्यार्थियों के इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज ने खींचा ध्यान
    यूपी राइज की थीम के अनुरूप, आगरा के युवाओं ने अपनी उद्यमशीलता का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन में कुल 30 स्टार्टअप आइडिया आए, जिनमें से 11 बेहतरीन आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें कलाकारों के लिए एआई आधारित मार्केटप्लेस 'Kalaverse', कंस्ट्रक्शन प्लानिंग को आसान बनाने वाला 'Build Easy AI', अनदेखे पर्यटन स्थलों को प्रमोट करने वाला 'Hidden India' और बेकरी के लिए 'Organic floral cream color' जैसे आइडियाज शामिल रहे। वहीं, ई-रिक्शा चालकों की बैटरी समस्या सुलझाने के लिए 'Saathi EV', हस्तशिल्प को बढ़ावा देने वाला 'The Craft Duo' और मंदिर के कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने वाले 'Temple 2 Green' जैसे अनूठे पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट्स ने भी खूब वाहवाही लूटी।

    'री-ऑयल' ने जीता प्रथम पुरस्कार, मेंटर्स ने किया मार्गदर्शन
    जूरी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सामने बेहतरीन प्रेजेंटेशन देकर 'Re-Oil' (इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस) ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। वहीं, छात्रों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने वाले 'Study App' और सोलर पैनल की सफाई के लिए रोबोटिक ब्रश तकनीक वाले 'Solar Sweep' की टीम संयुक्त रूप से रनरअप रही। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए जाने-माने कॉर्पोरेट विशेषज्ञ हर्षित देसाई, कपिल त्रिमाल और विवेक गोयल बतौर मेंटर मौजूद रहे। गौरतलब है कि यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसका अगला पड़ाव 18 सितम्बर 2026 को मथुरा स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में होगा।

    युवाओं के पास असीम क्षमता: कुलपति प्रो. आशु रानी
    विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने विद्यार्थियों के उत्साह और उनके इनोवेटिव आइडियाज की जमकर सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारे छात्र- छात्राओं में नवाचार की असीम क्षमता और संभावनाएं हैं। 'यूपी राइज 2026' जैसे मंच युवाओं को अपनी रचनात्मकता और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। आज के युवा कल के सशक्त 'जॉब क्रिएटर' हैं, जो अपनी सोच से न सिर्फ अपना बल्कि पूरे समाज और प्रदेश का आर्थिक विकास सुनिश्चित करेंगे।

  • चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    15.172 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का होगा निर्माण

    बुंदेलखंड से चित्रकूट धाम तक आसान होगा सफर, पर्यटन को मिलेगी रफ्तार

    लखनऊ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रवेश नियंत्रित छह लेन के इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 1,008.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसमें केंद्र सरकार की किसी तरह की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है।

    15.172 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे

    वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 15.172 किलोमीटर होगी। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर कराया जाएगा। व्यय-वित्त समिति द्वारा पूंजीगत मदों के लिए संशोधित प्रस्ताव की लागत का मूल्यांकन किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माणकर्ता के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

    चित्रकूट धाम तक पहुंच होगी आसान

    चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड के प्रारंभिक बिंदु से चित्रकूट धाम तक आवागमन आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। प्रवेश नियंत्रित छह लेन एक्सप्रेसवे होने से यात्रियों को सुगम और व्यवस्थित सफर का लाभ मिल सकेगा। चित्रकूट धाम धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बुंदेलखंड के विकास में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन

    पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन

    पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन

    योगी कैबिनेट ने दी खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी, यूपी में खिलौना उद्योग को मिलेगी रफ्तार

    कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर योगी सरकार का फोकस

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी गई। इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना, नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना और ट्वॉय क्लस्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। नीति के माध्यम से प्रदेश में खिलौना निर्माण, विपणन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा।

    खिलौना उद्योग में यूपी की मजबूत पहचान
    वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य भारतीय पर्व-त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (HS 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करता है। वाराणसी, झांसी और चित्रकूट अपने जीआई टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह क्षेत्र कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है। खिलौना विनिर्माण एवं विपणन को विकास के प्रमुख क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देकर कुशल, अर्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इससे ट्वॉय क्लस्टरों में रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे।

    नए उद्योगों और मौजूदा इकाइयों को मिलेगा समर्थन
    नीति के तहत खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। नए उद्यमों की स्थापना में सहायता देने के साथ एमएसएमई और बड़े उद्योगों को भी समर्थन दिया जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल क्षेत्रों में खिलौना उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी।

    एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था
    उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 के अंतर्गत एमएसएमई वर्गीकरण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाइयों के साथ वृहद और उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों तथा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एमएसएमई श्रेणी की पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 और उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू उत्तरवर्ती नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे। वहीं, बड़े और उससे उच्च श्रेणी के तहत स्थापित नई इकाइयों तथा विस्तार एवं विविधीकरण करने वाली इकाइयों को प्रस्तावित नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से किया जाएगा।

    निवेश और रोजगार को मिलेगा बल
    नीति के तहत पात्र खिलौना विनिर्माण इकाइयों को निर्धारित प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद प्रदान किए जाएंगे। प्रस्ताव में फ्रंट एंड सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल हैं। इससे प्रदेश में खिलौना उद्योग की स्थापना और विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। नीति का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (एमएसएमई) द्वारा किया जाएगा। बड़े और उससे उच्च श्रेणी के उद्योगों से संबंधित प्रोत्साहनों का क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से होगा।

    पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी नीति
    उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नई नीति के प्रख्यापन तक लागू रहेगी। इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी। हालांकि, भारत सरकार की योजनाओं एवं नीतियों के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन इसके अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकेंगे।

    नीति से होने वाले प्रमुख लाभ
    – प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद।
    – पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहन।
    – खिलौना क्लस्टरों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर।
    – कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक अवसर।
    – एमएसएमई एवं बड़े उद्योगों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन को समर्थन।
    – खिलौना निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा।

  • मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

    मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

    मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

    200 करोड़ से अधिक की लागत, गन्ने के बाद मक्का-धान से भी होगा उत्पादन, हजारों को मिलेगा रोजगार

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मथुरा की बंद छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बताया कि 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाला यह एक्सटेंशन प्लांट साल में 11 महीने संचालित होगा।

    उन्होंने बताया कि यह मिल 19 साल पहले बंद हो गई थी। समाजवादी पार्टी के सरकार के दौरान इसको एक रुपए का भुगतान नहीं किया गया। प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर होगी। गन्ना पेराई का सीजन समाप्त होने के बाद मक्का और धान से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा।

    छाता चीनी मिल की नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 40 मिनट की दूरी को भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां गोदाम और अन्य सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं। परियोजना से क्षेत्र में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

  • योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

    योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

    योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

    निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए 31 साल पुराने वित्तीय अधिकारों में संशोधन

    छोटे-छोटे कामों के लिए उच्च स्तर की मंजूरी का इंतजार नहीं, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आएगी तेजी

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश के अभियंत्रण विभागों में कार्यों के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से निर्माण कार्यों को गति देने और छोटे-छोटे कार्यों के लिए उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

    31 साल पुराने प्रावधानों में होगा संशोधन

    वित्तीय नियम संग्रह खंड-1 में अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन किया गया है। इन अधिकारों में समय-समय पर शासनादेशों के माध्यम से संशोधन और वृद्धि होती रही है। वर्तमान में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के शासनादेश के अनुसार वित्तीय अधिकार निर्धारित हैं। यह व्यवस्था पिछले 31 वर्षों से अधिक समय से लागू है। निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण मौजूदा वित्तीय अधिकारों के तहत कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयां आ रही थीं। छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमोदन लेना पड़ता था, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती थी।

    लोक निर्माण से ग्रामीण अभियंत्रण तक मिलेगा लाभ

    प्रस्ताव के तहत लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा में वृद्धि की जाएगी। इससे अभियंताओं को अपने स्तर पर निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर कार्यों को स्वीकृति देने और आगे बढ़ाने में अधिक सुविधा मिलेगी। निर्माण कार्यों के लिए बार-बार उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की जरूरत कम होने से विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    लागत बढ़ने के बीच जरूरी था बदलाव

    निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में वृद्धि के कारण 1995 में निर्धारित वित्तीय अधिकारों के तहत कार्य कराना कठिन हो रहा था। ऐसे में वित्तीय अधिकारों में संशोधन की जरूरत महसूस की गई। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य निर्माण कार्यों के निष्पादन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस फैसले से प्रदेश में सड़क, सिंचाई, ग्रामीण विकास और अन्य निर्माण परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है। वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा बढ़ने से विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

  • एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

    एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

    एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

    करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद, 2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी

    शेष अवस्थापना सुविधाओं का होगा विकास, सरकारी जमीन की भी होगी सुरक्षा

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लखनऊ स्थित मेसर्स एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूरा किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत हाईटेक टाउनशिप नीति के अंतर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) टेकओवर करेगा। इसके बाद परियोजना को पूर्ण करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

    2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी
    प्रारंभिक अनुमान के अनुसार परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। हालांकि, वास्तविक देनदारी आईआरपी (इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल) प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होगी, जिसके भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।

    5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद
    विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना को सरकारी अभिकरण के माध्यम से पूरा किए जाने से करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। रुकी हुई परियोजना में दोबारा विकास कार्य शुरू कराए जा सकेंगे। हाईटेक टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं और उपयोगिताओं का विकास भी कराया जा सकेगा। इससे परियोजना को पूर्ण कर सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    सरकारी जमीन की होगी सुरक्षा
    प्रस्ताव के तहत बंधक भूमि और ग्राम समाज की भूमि को किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में विनियमित किए जाने के स्थान पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष में विनियमित किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि की रक्षा होगी। साथ ही, भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियों की प्राप्ति की संभावना भी बेहतर हो सकेगी।

    रियल एस्टेट और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
    किसी शासकीय अभिकरण के माध्यम से परियोजना को विकसित किए जाने से होमबायर्स के बीच विश्वास पैदा होगा। परियोजना पूरी होने से रियल एस्टेट क्षेत्र और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।

  • यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

    यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

    यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया विस्तार, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

    श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड करेगी स्मार्ट क्लास की स्थापना, 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत, चरणबद्ध तरीके से होगा विद्यालयों का विकास

    वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की मिल रही सुविधा

    2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को दिए गए टैबलेट, बच्चों को आधुनिक और बेहतर डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने पर योगी सरकार का जोर

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट बैठक में अहम निर्णय लिया है। प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। कैबिनेट ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

    प्रदेश सरकार पहले से ही बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें।

    उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत योगी सरकार ने वर्ष 2021 में की थी और इनका विधिवत संचालन शैक्षिक सत्र 2022-23 से शुरू हुआ। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों को समझने में डिजिटल माध्यमों का लाभ मिल रहा है। अब प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्णय से इस व्यवस्था का और विस्तार होगा।

    300 करोड़ रुपये से होगा स्मार्ट स्कूलों का विकास

    कैबिनेट निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रति विद्यालय 2,07,910 रुपये (सेनेटेज चार्जेज एवं जीएसटी सहित) की प्रस्तावित दर निर्धारित की गई है।

    यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति विद्यालय इससे कम दर प्राप्त होती है, तो स्वीकृत कुल 300 करोड़ रुपये की धनराशि के भीतर अधिक संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

    उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजनान्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कक्षा 6 से 8, में डिजिटल इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्थापित किए जाने हैं।

    परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से बच्चों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी बच्चों को सीखने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराएगी।

    योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के बच्चों को बेहतर, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का लगातार विस्तार इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

  • सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    सिद्धार्थनगर और हरदोई जिले में बनेंगे तीन नए बस स्टेशन, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    शोहरतगढ़, बढ़नी और सवायजपुर में बनेंगे बस अड्डे, राजस्व विभाग से परिवहन विभाग को मिलेगी निशुल्क भूमि

    योगी सरकार ने बढ़ाई परिवहन सुविधाओं की राह, बढ़ेंगे रोजगार और व्यापार के भी अवसर

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के तीन स्थानों पर बस स्टेशनों के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने सिद्धार्थनगर विधानसभा क्षेत्र के शोहरतगढ़, बढ़नी और हरदोई जिले की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की भूमि को परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरण और नामांतरण किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

    परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रस्ताव के अनुसार सिद्धार्थनगर के विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ के कस्बा शोहरतगढ, कस्बा बढ़नी और हरदोई की तहसील सवायजपुर में बस स्टेशन का निर्माण कराया जाना है। इन बस स्टेशनों के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की चिह्नित भूमि परिवहन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

    पर्यटन को भी मिलेगा प्रोत्साहन
    दयाशंकर सिंह ने कहा कि बेहतर परिवहन सुविधा से सामाजिक विकास, जीवन स्तर में सुधार और पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इस बुनियादी ढांचे के तहत सड़क नेटवर्क बेहतर होगा और यातायात संबंधी समस्याओं में कमी आएगी। 

    स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
    इन बस स्टेशनों के बनने से शहर के आस-पास के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही बस स्टेशन परिसर में यात्रियों को सुविधाओं के साथ सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। परियोजना से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने, व्यापार एवं रोजगार के अवसर बढ़ने व स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ होने की बात कही गई।

  • नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

    नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

    नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़

    मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत तीन विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं को पहली किस्त जारी करने की मंजूरी

    भूमि अर्जन के लिए राज्य सरकार देगी 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल, अधिकतम 20 वर्ष की अवधि का प्रावधान

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए शहरों के समग्र विकास के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में सुनियोजित शहरी विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए कुल 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से नए शहरों के विकास, भूमि अर्जन और आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

    सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने पर जोर
    विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने इस विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में बढ़ती शहरी आबादी और आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों के सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित विकास पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से शासनादेश दिनांक 6 अप्रैल 2023 के जरिये मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई थी। योजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों का व्यवस्थित विस्तार करने के साथ आम जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए आवश्यक भूमि अर्जन और संबंधित अवस्थापना सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। इस फैसले से लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली में प्रस्तावित नए शहरों की परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग मिलेगा। इससे शहरी विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और भविष्य की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आधार तैयार होगा।

    भूमि अर्जन के लिए 50 प्रतिशत तक सीड कैपिटल
    मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में दिए जाने का प्रावधान है। यह धनराशि अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास प्राधिकरणों को नए शहरों के लिए आवश्यक भूमि अर्जित करने में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। भूमि अर्जन के बाद संबंधित परियोजनाओं के समग्र एवं समुचित विकास को आगे बढ़ाया जा सकेगा। राज्य सरकार की ओर से सीड कैपिटल उपलब्ध होने से विकास प्राधिकरणों पर भूमि अर्जन का तत्काल वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे नए शहरों की परियोजनाओं को गति देने का रास्ता सुगम होगा।

    लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की परियोजनाओं को 655.76 करोड़ तक की सहायता
    योजना के अंतर्गत लखनऊ, उन्नाव एवं रायबरेली विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल की अधिकतम धनराशि 655.76 करोड़ रुपये अनुमन्य की गई है। इसी के सापेक्ष पहली किस्त के रूप में कुल 380 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस धनराशि को अवमुक्त किए जाने से तीनों विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन और नए शहरों के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ का प्रावधान
    प्रदेश में नए शहरों के समग्र एवं समुचित विकास के लिए वित्ती
    य वर्ष 2026-27 में 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह बजटीय प्रावधान नए शहरों के विकास से संबंधित कार्यों को वित्तीय आधार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से प्रदेश में शहरी विस्तार, भूमि अर्जन और आवासीय सुविधाओं के विकास से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की क्षमता मजबूत होगी। नए शहरों के निर्माण के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    आम जनता को मिलेंगी बेहतर आवासीय सुविधाएं
    मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना का प्रमुख उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के साथ आम जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत भूमि अर्जन और नए शहरों के समग्र विकास को प्रोत्साहन दिया जाता है। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की परियोजनाओं के लिए 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त की मंजूरी से इन क्षेत्रों में नए शहरों के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में आवासीय सुविधाओं और शहरी अवस्थापना के विस्तार के लिए आधार तैयार होगा।

  • स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

    स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

    स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

    हर जिले में खुल सकेंगे तीन स्वचालित परीक्षण केंद्र, मशीनें करेंगी वाहनों की फिटनेस जांच

    एटीएस के लिए जमीन और नेटवर्थ की शर्तों में बड़ी राहत, योगी सरकार ने निवेश का रास्ता किया आसान

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सेहत (फिटनेस) को बेहतर करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के भीतर 'स्वचालित परीक्षण स्टेशन' (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन-एटीएस) स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है। अब गाड़ियों की जांच मशीनों से की जाएगी, जिससे सटीक रिपोर्ट मिलेगी। इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार ने 2 अगस्त 2023 के पुराने सरकारी आदेश को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह एक नई नीति 'राज्य नीति-2026' को पास किया है।

    परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकते हैं। हर सेंटर पर 24 हजार गाड़ियों तक जांच की जाएगी। वहीं पूर्व में सेंटर के लिए 2.5 एकड़ जमीन की शर्तों में भी छूट दी गई है, अब यह 1 एकड़ कर दिया गया है। वहीं एटीएस सेंटर खोलने के लिए पहले 6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ की अनिवार्यता थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इसके अलावा इन सेंटरों को सुचारु रूप से संचालित होने के लिए 6 महीने तक कार्रवाई में भी छूट मिलेगी।

    सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं
    दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की 23 सितंबर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 और 8 मई 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 में अध्याय-11 के तहत स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) का विनियमन एवं नियंत्रण जोड़ा गया है। इन्हीं नवीनतम दिशा-निर्देशों और परिपत्रों को पूर्व में जारी राज्य नीति (2 अगस्त 2023) में समाहित करते हुए नई संशोधित राज्य नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मंत्रिपरिषद के सामने रखा गया था। योगी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव स्वीकृत होने से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार यानी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। प्रस्तावित राज्य नीति अधिसूचित होने की तिथि से ही तत्काल प्रभावी हो जाएगी।

    हर जनपद में एटीएस की स्थापना संभव
    नई नीति के प्रभावी होने के बाद प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्वचालित परीक्षण स्टेशन की जल्द स्थापना संभव होगी। इससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा। यानी एटीएस की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने का रास्ता खुलेगा।

    रोजगार के नए अवसर मिलेंगे
    एटीएस के संचालन के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस तरह स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। वहीं नई व्यवस्था में वाहनों का फिटनेस परीक्षण बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मशीनों के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी ढंग से होगा। इसके साथ ही सड़कों पर केवल पूरी तरह से फिट वाहनों का संचालन सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।