Category: उत्तर प्रदेश

  • वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

    वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

    वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

    लखनऊ, 
     प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी संभावनाओं को विस्तार देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्ल्डफिश उत्तर प्रदेश फिशरीज प्रोजेक्ट सेंटर के संचालन के लिए राज्य सरकार, मत्स्य विभाग और वर्ल्डफिश के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी गई।

    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 13.31 लाख टन मत्स्य उत्पादन हो रहा है। एमओयू के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्य पालकों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है।

  • कोटेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर कुंतल पर 125 रुपये लाभांश

    कोटेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर कुंतल पर 125 रुपये लाभांश

    कोटेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर कुंतल पर 125 रुपये लाभांश

    100 रुपये के आधारभूत लाभांश के बाद अब 25 रुपये और मिलेंगे

    आजीविका होगी आसान, राशन वितरण व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं यानी राशन कोटेदारों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत वितरित होने वाले खाद्यान्न पर कोटेदारों को 25 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त राज्य मार्जिन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के राशन विक्रेताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी आजीविका को मजबूती मिलेगी।

    100 रुपये के आधारभूत लाभांश के बाद और 25 रुपये
    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इससे पहले 1 सितंबर 2026 के आदेश के तहत उचित दर विक्रेताओं के आधारभूत लाभांश को 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति कुंतल किया था। अब इसके अतिरिक्त 25 रुपये प्रति कुंतल का राज्य मार्जिन दिए जाने से कोटेदारों की आय में और बढ़ोतरी होगी। 

    वितरण खर्च से घट रही थी कोटेदारों की बचत
    वर्तमान व्यवस्था में खाद्यान्न की सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के चलते राशन वितरण की प्रक्रिया में कोटेदारों को विभिन्न खर्च वहन करने पड़ते हैं। इसके कारण उनकी मासिक बचत अत्यंत सीमित रह जाती थी। ऐसे में अतिरिक्त राज्य मार्जिन मिलने से उन्हें प्रत्यक्ष वित्तीय राहत मिलेगी और परिवार का भरण-पोषण पहले की तुलना में आसान होगा।

    जुलाई से लागू होगा फैसला, 9 माह में 168.75 करोड़ का खर्च
    कैबिनेट के इस फैसले को जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक 9 माह के लिए राज्य सरकार पर 168.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। पूरे वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित व्यय करीब 225 करोड़ रुपये होगा। प्रदेश में सालाना औसतन 90 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया जाता है।

  • 18 लाख पूर्व सैनिकों को मिलेगा फायदा, 13 जिलों में ECHS पॉलीक्लीनिक के लिए मुफ्त जमीन

    18 लाख पूर्व सैनिकों को मिलेगा फायदा, 13 जिलों में ECHS पॉलीक्लीनिक के लिए मुफ्त जमीन

    पूर्व सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की राह आसान, 13 जिलों में ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक के लिए मुफ्त जमीन

    योगी सरकार की बड़ी पहल, 18 लाख पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य लाभ के लिए बढ़ेगा ईसीएचएस नेटवर्क

    लखनऊ
     योगी सरकार ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत प्रदेश के 13 जिलों में पॉलीक्लीनिक की स्थापना/निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए), सेंट्रल कमांड और भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इससे संबंधित पॉलीक्लीनिक के निर्माण की राह आसान होगी और पूर्व सैनिकों को अपने नजदीक बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

    करीब 18 लाख पूर्व सैनिकों को मिलेगा स्वास्थ्य सुविधा का लाभ
    उत्तर प्रदेश में करीब 18 लाख भूतपूर्व सैनिक हैं। ईसीएचएस के माध्यम से इन्हें बेहतर चिकित्सा लाभ शीघ्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना में लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्रदान करने का प्रयास है। ऐसे में प्रदेश में नए पॉलीक्लीनिक स्थापित होने से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा।

    13 जिलों में पॉलीक्लीनिक के लिए भूमि की जरूरत
    ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक की स्थापना/निर्माण के लिए प्रदेश के 13 जिलों में भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इनमें इटावा, जालौन, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बांदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, देवरिया, सुल्तानपुर, आजमगढ़ और गोंडा शामिल हैं। इन जिलों में ग्राम पंचायतों अथवा स्थानीय प्राधिकरणों की उपलब्ध भूमि को पॉलीक्लीनिक निर्माण के लिए नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने की योजना है।

    केंद्र सरकार की ईसीएचएस योजना से कैशलेस इलाज
    पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग की प्रमुख योजना है। इसे 1 अप्रैल 2003 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ईसीएचएस पॉलीक्लीनिकों, सशस्त्र सेना चिकित्सा सुविधाओं, सरकारी और पैनलबद्ध निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से भूतपूर्व सैनिक पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को नि:शुल्क बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है।

    जमीन मिलने से निर्माण प्रक्रिया होगी आसान
    पॉलीक्लीनिकों के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रस्ताव के तहत ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि को स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए), सेंट्रल कमांड, भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित किया जाना है। इससे चिन्हित जिलों में ईसीएचएस स्वास्थ्य ढांचे को विस्तार देने का रास्ता तैयार होगा।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, अयोध्या में 26 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा NSG केंद्र

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, अयोध्या में 26 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा NSG केंद्र

    अयोध्या में बनेगा एनएसजी का क्षेत्रीय केंद्र, योगी कैबिनेट ने 26 हेक्टेयर भूमि निशुल्क देने को दी मंजूरी

    16.90 करोड़ की भूमि निशुल्क गृह मंत्रालय को हस्तांतरित होगी, राम मंदिर ही नहीं पूरे यूपी की बढ़ेगी सुरक्षा

    आवंटित भूमि का अगले तीन वर्षों में करना होगा उपयोग, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होगी उपयोग

    देश-विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा अहम फैसला

    लखनऊ
    अयोध्या धाम-राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में अयोध्या की तहसील मिल्कीपुर में 26 हेक्टेयर यानी करीब 65 एकड़ बंजर भूमि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए गृह मंत्रालय को निशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे अयोध्या में किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से निपटने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामरिक केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विशिष्ट अतिथियों और पर्यटकों का लगातार आना हो रहा है। ऐसे में क्षेत्र की सुरक्षा संवेदनशीलता भी काफी बढ़ी है। इसी को देखते हुए अयोध्या में एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र की स्थायी तैनाती जरूरी हो गई है।

    कैबिनेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के उपयोग के लिए एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के लिए गृह मंत्रालय के पक्ष में मिल्कीपुर तहसील के ग्राम पूरे लालखां की 26 हेक्टेयर बंजर भूमि निशुल्क हस्तांतरित करने की औपचारिक स्वीकृति प्रदान की है। संबंधित भूमि का बाजार मूल्य 16.90 करोड़ रुपये बताया गया है।

    केवल एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र के लिए होगा भूमि का उपयोग
    हस्तांतरित की जाने वाली भूमि का उपयोग केवल एनएसजी क्षेत्रीय हब की स्थापना के लिए किया जाएगा। इसका किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। भूमि आवंटन को लेकर राजस्व विभाग के शासनादेश में निर्धारित प्रावधानों के तहत अयोध्या की विशेष सुरक्षा संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोच्च महत्व को देखते हुए अपवादस्वरूप शिथिलता प्रदान की गई है।

    यह भी स्पष्ट किया गया है कि आवंटित भूमि का अगले तीन वर्षों की अवधि में प्रस्तावित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किए जाने या भविष्य में इसकी आवश्यकता समाप्त होने की स्थिति में भूमि स्वत: उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के निवर्तन पर वापस आ जाएगी। यानी भूमि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप सुनिश्चित किया जाएगा।

    अयोध्या समेत पूरे प्रदेश की सुरक्षा को मिलेगा मजबूत कवच
    अयोध्या में एनएसजी क्षेत्रीय हब की स्थापना से सिर्फ श्रीराम मंदिर परिसर और अयोध्या क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था ही मजबूत नहीं होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और आस-पास के अति-संवेदनशील एवं सामरिक प्रतिष्ठानों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी एक मजबूत सुरक्षा कवच मिलेगी।

  • यूपी चुनाव से पहले BJP का बूथ मिशन तेज, नितिन नवीन 20 सितंबर को सहारनपुर में करेंगे मंथन

    यूपी चुनाव से पहले BJP का बूथ मिशन तेज, नितिन नवीन 20 सितंबर को सहारनपुर में करेंगे मंथन

    लखनऊ
    यूपी विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी भाजपा के साथ कदमताल करने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए प्रांतवार रोडमैप बनाने की तैयारी है। इसी क्रम में संघ परिवार और भाजपा की समन्वय बैठक बुधवार को राजधानी लखनऊ में होगी। इस बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष सहित अन्य पदाधिकारी भाग लेंगे। वहीं, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी यूपी आ रहे हैं। वह 20 को सहारनपुर में बूथों की नब्ज टटोलेंगे।

    संघ की समन्वय बैठक लखनऊ के बंथरा स्थित रिजार्ट में होगी। इस बैठक में अवध और कानपुर प्रांत के संघ, भाजपा और विचार परिवार के सदस्य संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। दरअसल संघ और भाजपा ने संगठनात्मक रूप से प्रदेश को छह प्रांतों में बांट रखा है। इसके जरिए जहां एक ओर संघ और अखिल भारतीय पदाधिकारी जमीनी फीडबैक लेंगे, वहीं समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा। इस दौरान विचार परिवार के सदस्य संगठनों के पदाधिकारी सरकार और संगठन से जुड़े विषय साझा करेंगे।

    समन्वय बैठक में भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी व प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, अवध और कानपुर क्षेत्र के अध्यक्ष और प्रभारी शामिल होंगे। बैठक में भाग लेने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष मंगलवार की रात ही लखनऊ पहुंच गए। एयरपोर्ट पहुंचने पर पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। वहां से वे पार्टी के राज्य मुख्यालय पहुंचे।

    गोरक्ष-अवध और काशी क्षेत्र को मथेंगे तावड़े
    भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े छह दिनी प्रवास पर आएंगे। वे बुधवार को राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार वे 17 और 18 सितंबर को गोरखपुर में गोरक्ष क्षेत्र की बैठकें करेंगे। उसके बाद अवध क्षेत्र की बैठकें अयोध्या में प्रस्तावित है। फिर काशी क्षेत्र की बैठकें तावड़े प्रयागराज में करेंगे। इन संगठनात्मक बैठकों के जरिए वे जहां क्षेत्रवार जमीनी फीडबैक लेंगे, वहीं चुनावी तैयारियों की रणनीति पर चर्चा भी करेंगे।

    20 को सहारनपुर में नितिन नवीन
    वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए भाजपा अब संगठन की सबसे निचली कड़ी को सीधे सक्रिय करने की तैयारी में है। जिले में होने वाला शक्ति केंद्र संयोजकों का प्रस्तावित सम्मेलन महज संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर पार्टी की तैयारियों को परखने और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने का बड़ा सियासी मंच माना जा रहा है। 20 सितंबर को सहारनपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में पश्चिमी यूपी के करीब 4800 शक्ति केंद्र संयोजकों का जुटना भाजपा के संगठनात्मक नेटवर्क की ताकत का बड़ा प्रदर्शन होगा।

    भाजपा ने बूथ संगठन को मजबूत करने के लिए छह से आठ बूथों को मिलाकर शक्ति केंद्र बनाए हैं। प्रत्येक शक्ति केंद्र का संयोजक बूथ कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, मतदाता संपर्क और पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में सम्मेलन के जरिए पार्टी नेतृत्व को जमीनी फीडबैक हासिल करने का अवसर मिलेगा। बैठक में संगठन की सक्रियता, मतदाता संपर्क और बूथ प्रबंधन की स्थिति पर चर्चा संभावित है। साथ ही कमजोर क्षेत्रों और संगठन की कमियों को चिन्हित कर उन्हें दुरुस्त करने की रणनीति भी बनाई जा सकती है। कार्यक्रम का स्थान और समय अभी तय नहीं हुआ है, जिस पर पार्टी स्तर पर मंथन जारी है।

    4800 शक्ति केंद्र, मजबूत बूथ नेटवर्क
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बूथों को शक्ति केंद्रों में संगठित किया है। एक शक्ति केंद्र के अंतर्गत करीब छह से आठ बूथ आते हैं। इन केंद्रों की जिम्मेदारी संभालने वाले संयोजक पार्टी और बूथ कार्यकर्ताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सम्मेलन में इनकी सक्रियता और जिम्मेदारियों की समीक्षा भी अहम रहेगी।

    जमीनी फीडबैक पर रहेगा जोर
    शक्ति केंद्र संयोजकों से भाजपा नेतृत्व को सीधे जमीनी स्थिति की जानकारी मिलने की उम्मीद है। मतदाता संपर्क, बूथ की सक्रियता और संगठनात्मक कमजोरियों का फीडबैक चुनावी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में होने वाला सम्मेलन संगठन को नीचे तक और सक्रिय करने का संदेश भी देगा।

  • किसानों के लिए बड़ी राहत, 6 लाख तक का लंबी अवधि का ऋण सिर्फ 6% ब्याज पर

    किसानों के लिए बड़ी राहत, 6 लाख तक का लंबी अवधि का ऋण सिर्फ 6% ब्याज पर

    किसानों को छह प्रतिशत ब्याज पर लंबी अवधि के लिए छह लाख तक का ऋण 

    राज्य सरकार द्वारा कृषकों को वितरित ऋणों पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा

    ऋण की किस्तों का भुगतान नियत तिथि पर करने वाले किसानों को ही मिलेगा ब्याज अनुदान

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया।

    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर लंबी अवधि के लिए दिया जाएगा। इससे किसानों को कृषि एवं ग्रामीण जरूरतों के लिए कम ब्याज पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराये जाने हेतु राज्य सरकार द्वारा कृषकों को वितरित ऋणों पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसका आकलन प्रतिवर्ष कृषकों को विगत वर्ष (योजना आरम्भ होने के पश्चात) में दिये गये ऋणों के अवशेष मूलधन व आगामी वर्षों में वितरित ऋणों के आधार पर किया जाएगा। प्रस्तावित योजना में देय 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान उन्हीं ऋणी कृषकों को अनुमन्य होगा, जो नियत देय किस्तों का भुगतान नियत तिथि को करेंगे।

  • यूपी में 15 हजार से ज्यादा शिक्षक पदों पर भर्ती, जानें पूरी डिटेल

    यूपी में 15 हजार से ज्यादा शिक्षक पदों पर भर्ती, जानें पूरी डिटेल

    योगी सरकार में शिक्षक बनने का सुनहरा मौका, यूपी में 15,012 पदों पर भर्ती शुरू

    माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक से लेकर पीजीटी तक के पदों पर विज्ञापन जारी

    897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी, 11,508 सहायक अध्यापक शहरी और 2,607 प्रवक्ता पदों पर होगी भर्ती

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती का बड़ा अवसर उपलब्ध कराया है। आयोग ने सहायक अध्यापक और प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के कुल 15,012 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो महत्वपूर्ण विज्ञापन जारी किए हैं। इससे प्रदेश के हजारों शिक्षित युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा।

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी के 897 रिक्त पदों तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक, शहरी के 11,508 रिक्त पदों का विज्ञापन जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त माध्यमिक शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए भी विज्ञापन प्रकाशित किया गया है।

    15,012 पदों के लिए दो विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया अलग-अलग

    आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के अंतर्गत सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी और सहायक अध्यापक, शहरी के पदों पर भर्ती की जाएगी। इन दोनों श्रेणियों में कुल 12,405 पद शामिल हैं। वहीं विज्ञापन संख्या-06/2026 के तहत प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 पदों पर भर्ती होगी। इस प्रकार दोनों विज्ञापनों के माध्यम से कुल 15,012 रिक्त पदों को भरा जाएगा।

    12,405 सहायक अध्यापक पदों के लिए 16 सितंबर से आवेदन

    सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी एवं सहायक अध्यापक, शहरी के पदों के लिए विज्ञापन के तहत 15 सितंबर, 2026 को विज्ञापन जारी किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन की प्रक्रिया 16 सितंबर, 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर, 2026 होगी। इन पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 3 एवं 4 दिसंबर, 2026 को प्रस्तावित है। भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 11,508 सहायक अध्यापक शहरी के पदों पर चयन किया जाएगा।

    पीजीटी के 2,607 पदों के लिए 18 सितंबर से आवेदन

    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए आयोग ने विज्ञापन जारी किया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर, 2026 से प्रारम्भ होगी। पीजीटी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर, 2026 होगी। प्रवक्ता संवर्ग के पदों के लिए परीक्षा 15 एवं 16 दिसंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी।

    वन टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू

    अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आयोग ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की है। संबंधित पदों के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। इसके बाद ही वे विज्ञापित पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आयोग की ओर से अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय से पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें।

    विस्तृत विज्ञापन पढ़कर ही करें आवेदन

    आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने अभ्यर्थियों से अपील की कि आवेदन करने से पूर्व आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर अपनी पात्रता सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से कोई परामर्श नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित विस्तृत विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, परीक्षा कार्यक्रम एवं अन्य आवश्यक निर्देशों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in का अवलोकन कर सकते हैं।

  • अजमेर-रांची साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का ऐलान, 2 अक्टूबर से शुरू होगा संचालन

    अजमेर-रांची साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का ऐलान, 2 अक्टूबर से शुरू होगा संचालन

    लखनऊ 
    त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी है. इसे देखते हुए रेलवे अलग-अलग रूट पर स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रहा है. इसी कड़ी में अजमेर-रांची-अजमेर के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया गया है. ये ट्रेन यूपी से होकर गुजरेगी तो यूपी के लोगों को भी सीधा फायदा पहुंचाएगी. 

    उत्तर पश्चिम रेलवे की ओर से चलाई जाने वाली ट्रेन नंबर 09619/09620 अजमेर-रांची-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल के संचालन से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी.  ट्रेन पश्चिम मध्य रेलवे के 10 स्टेशनों पर ठहरेगी.

    त्योहारों के समय टिकट मिलना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. ऐसे में इस स्पेशल ट्रेन के संचालन से यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा. अब जानते हैं कि ट्रेन कब से चलेगी, कितने फेरे लगाएगी और रास्ते में कहां-कहां रुकेगी.

    अजमेर से रांची जाने वाली ट्रेन कब चलेगी?

    ट्रेन नंबर 09619 अजमेर-रांची साप्ताहिक स्पेशल 2 अक्टूबर 2026 से 27 नवंबर 2026 तक चलेगी. ट्रेन हर शुक्रवार रात 11:05 बजे अजमेर स्टेशन से रवाना होगी. रास्ते में पश्चिम मध्य रेलवे के कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकने के बाद ट्रेन तीसरे दिन रविवार सुबह 7:30 बजे रांची स्टेशन पहुंचेगी. इस दिशा में ट्रेन के कुल 9 फेरे होंगे.
    इन 10 स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

    अजमेर से रांची जाते समय ट्रेन पश्चिम मध्य रेलवे के इन 10 स्टेशनों पर ठहरेगी:

        सवाई माधोपुर: 03:40 से 04:00 बजे
        सोगरिया: 05:25 से 05:35 बजे
        बारां: 06:18 से 06:20 बजे
        छाबड़ा गुगोर: 07:08 से 07:10 बजे
        रूठियाई जंक्शन: 08:40 से 08:42 बजे
        गुना: 09:10 से 09:20 बजे
        सागर: 12:50 से 12:55 बजे
        दमोह: 13:52 से 13:54 बजे
        कटनी मुड़वारा: 15:40 से 15:50 बजे
        ब्योहारी: 17:35 से 17:40 बजे

    रांची से अजमेर वापसी कब होगी?

    वापसी में ट्रेन नंबर 09620 रांची-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल 4 अक्टूबर 2026 से 29 नवंबर 2026 तक चलेगी. ट्रेन हर रविवार सुबह 10:50 बजे रांची से रवाना होगी. रांची से चलने के बाद ट्रेन ब्योहारी, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, गुना, रूठियाई जंक्शन, छाबड़ा गुगोर, बारां, सोगरिया और सवाई माधोपुर समेत पश्चिम मध्य रेलवे के 10 स्टेशनों पर रुकेगी. इसके बाद ट्रेन तीसरे दिन सोमवार शाम 6:35 बजे अजमेर स्टेशन पहुंचेगी. वापसी दिशा में भी ट्रेन के 9 फेरे होंगे.
    रास्ते में इन स्टेशनों पर भी होगा ठहराव

    अजमेर और रांची के बीच इस स्पेशल ट्रेन का ठहराव सिर्फ पश्चिम मध्य रेलवे के 10 स्टेशनों तक सीमित नहीं है. ट्रेन के पूरे रूट पर किशनगढ़, जयपुर जंक्शन, दुर्गापुरा, सवाई माधोपुर, सोगरिया, बारां, छाबड़ा गुगोर, रूठियाई जंक्शन, गुना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, ब्योहारी, सिंगरौली, ओबरा डैम, चोपन, रेनुकूट, गढ़वा रोड जंक्शन, डाल्टनगंज, बरवाडीह जंक्शन, लातेहार, टोरी, लोहरदगा और पिस्का स्टेशन शामिल हैं.
    त्योहारों में यात्रियों को मिलेगी राहत

    त्योहारी सीजन में ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे की स्पेशल ट्रेन यात्रियों के लिए राहत वाली खबर है. खासकर उन यात्रियों को इसका फायदा मिल सकता है जिन्हें नियमित ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलने में परेशानी हो रही है.

    पश्चिम मध्य रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि त्योहारों के दौरान बढ़ती यात्री मांग को देखते हुए इस पूज स्पेशल ट्रेन का लाभ उठाएं और अपनी यात्रा को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाएं.  
     

     

  • यूपी की दीदियों के उत्पादों की बढ़ेगी वैश्विक पहुंच, गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे 3 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट

    यूपी की दीदियों के उत्पादों की बढ़ेगी वैश्विक पहुंच, गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे 3 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट

    अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां

    अब गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे तीन हजार से अधिक उत्पाद

    ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट के जरिए मंगा सकेंगे स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद

    योगी सरकार में दीदियों को अब मिलेगी ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत

    543 प्रेरणा सरस स्टोर और स्थानीय उत्पादों के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार

    लखनऊ
     प्रदेश की महिलाएं अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए गए हैं। वहीं 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत देने का रास्ता खुला है।
    अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार तक पहुंच सकेंगे। जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्रेरणा सरस स्टोर जहां स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित बिक्री मंच दे रहे हैं, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म उनकी पहुंच गांव और जिले से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं।

    छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा : अरुण कुमार

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए उत्पादन के बाद बाजार तक पहुंच उनकी उद्यमिता की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। योगी सरकार ने इस कड़ी को मजबूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया है। इससे समूहों को केवल उत्पाद तैयार करने के बजाय बाजार की मांग समझकर अपने छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है।

    स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा

    डिजिटल बाजार की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन कार्य शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। खासकर किसी जिले या क्षेत्र विशेष की पहचान वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में यह व्यवस्था मददगार होगी।

    बाजार से जुड़ाव से बनेगी ब्रांड वैल्यू

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बाजार तक पहुंच सिर्फ बिक्री बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्पाद की पहचान और ब्रांड वैल्यू बनाने का अवसर भी है। प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन-ऑफलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, बाजार से जुड़ाव महिलाओं को अपने उत्पादों की मांग समझने और उसी के अनुरूप उत्पादन व विपणन की दिशा तय करने का अवसर देता है। इससे समूहों की गतिविधियां केवल आजीविका तक सीमित न रहकर छोटे उद्यमों का रूप ले सकती हैं।

    लोकल हुनर की ग्लोबल उड़ान

    3,000 से अधिक उत्पादों के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर, मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन विपणन ग्रामीण महिला उद्यमिता के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करते हैं। गांव में तैयार उत्पाद अब गांव में ही बिकने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्टोर से डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की ग्रामीण ‘दीदियों’ के स्थानीय हुनर को बाजार, पहचान और ब्रांड वैल्यू देने के साथ उन्हें लोकल से ग्लोबल कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाने का नया रास्ता तैयार कर रही है।

  • बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र का लड़का है नाबालिग

    बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र का लड़का है नाबालिग

    प्रयागराज
    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नाबालिगों की शादी का रजिस्ट्रेशन होने पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने राज्य के सभी विवाह पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया कि शादी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले दूल्हा और दुल्हन की उम्र की जांच की जाए। यह निर्देश गाजियाबाद में नाबालिग लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन होने के मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। जस्टिस तेज प्रताप तिवारी ने कहा कि नाबालिगों की शादी के रजिस्ट्रेशन के मामले सिर्फ कभी-कभार सामने नहीं आ रहे हैं, बल्कि ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं।

    हाई कोर्ट ने साफ किया कि शादी के दिन अगर दूल्हा या दुल्हन में से कोई भी कानून के मुताबिक नाबालिग है, तो उस शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिकारियों को दोनों की उम्र की जांच भरोसेमंद दस्तावेजों और तय प्रक्रिया के तहत करनी होगी। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र का लड़का नाबालिग माना जाता है।

    हाई कोर्ट का सख्त निर्देश
    अदालत ने कहा कि अगर दस्तावेजों से पता चलता है कि दोनों में से कोई तय उम्र से कम है, तो आवेदन को सामान्य रजिस्ट्रेशन की तरह नहीं लिया जाए। ऐसे मामले की जानकारी तुरंत बाल विवाह निषेध अधिकारी और संबंधित जिले के सक्षम अधिकारी को दी जाए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। मामला उस समय सामने आया जब एक व्यक्ति ने पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामले में हाई कोर्ट का रुख किया। आरोपी के वकील ने दावा किया कि लड़की बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से शादी की थी। शादी के बाद उसका रजिस्ट्रेशन भी हुआ और प्रमाणपत्र जारी किया गया।

    राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट लड़की को नाबालिग मान चुका है। सरकार ने यह भी कहा कि उम्र छिपाकर हासिल किए गए शादी के प्रमाणपत्र से लड़की के बालिग होने की पुष्टि नहीं होती। हाई कोर्ट ने संबंधित विवाह पंजीकरण अधिकारी को तलब कर पूछा कि नाबालिग लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ। अधिकारी ने कहा कि उसने पिछले प्रभारी अधिकारी से कार्यभार संभाला था और उसे इस रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने इस जवाब को गंभीर चिंता का विषय बताया। अदालत ने कहा कि विभागीय निर्देशों में पहले से ही दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि की जांच जरूरी है।