Category: उत्तर प्रदेश

  • यूपी के कारोबारियों को मिला सरकारी खरीद का बड़ा प्लेटफॉर्म, GeM पर एक साल में 1 लाख से ज्यादा नए विक्रेता जुड़े

    यूपी के कारोबारियों को मिला सरकारी खरीद का बड़ा प्लेटफॉर्म, GeM पर एक साल में 1 लाख से ज्यादा नए विक्रेता जुड़े

    योगी सरकार की नीतियों से जेम पर बढ़ी यूपी के कारोबारियों की धमक, एक साल में 1 लाख से अधिक नए विक्रेता जुड़े

    सरकारी खरीद में स्थानीय उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों के पंजीकरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि

    31 मार्च 2026 तक कुल पंजीकृत फर्मों की संख्या 7.86 लाख पहुंची, एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी और महिला फर्मों का 21 फीसदी बढ़ा

    उद्यमिता, एमएसएमई विकास और कारोबारी सुगमता पर जोर के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारियों की भूमिका हो रही और अधिक मजबूत

    लखनऊ
     योगी सरकार की कारोबारी सुगमता, एमएसएमई प्रोत्साहन और स्थानीय उद्यमियों को सरकारी खरीद से जोड़ने की नीतियों का असर अब सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कारोबारियों की सरकारी खरीद व्यवस्था में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में जेम पर पंजीकृत कुल फर्मों की संख्या बढ़कर 7,86,687 पहुंच गई। यह 31 मार्च 2025 को दर्ज 6,85,488 फर्मों के मुकाबले 15 फीसदी अधिक है। यानी एक साल में 1,01,199 नई फर्में जेम से जुड़ीं। सरकारी खरीद के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबारियों की बढ़ती मौजूदगी प्रदेश में छोटे उद्यमों, महिला उद्यमियों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के कारोबार को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। आंकड़े बताते हैं कि कुल पंजीकरण के साथ-साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की भागीदारी में भी तेजी आई है।

    एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी बढ़ा

    जेम पर उत्तर प्रदेश की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) फर्मों का पंजीकरण 31 मार्च 2025 के 1,06,855 से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 1,23,075 हो गया। इस श्रेणी में 16,220 फर्मों की वृद्धि दर्ज की गई, जो 16 फीसदी है। इससे संकेत मिलता है कि प्रदेश के छोटे उद्यम सरकारी खरीद के लिए उपलब्ध डिजिटल बाजार का अधिक लाभ उठा रहे हैं। योगी सरकार की एमएसएमई केंद्रित नीतियों के तहत छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देने, कारोबार के अवसर बढ़ाने और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जेम पर पंजीकरण में यह बढ़ोतरी इसी दिशा में आगे बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

    महिला उद्यमियों की भागीदारी में 21 फीसदी उछाल

    सरकारी खरीद व्यवस्था में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 31 मार्च 2025 को GeM पर कुल 19,418 महिला फर्म पंजीकृत थीं, जिनकी संख्या 31 मार्च 2026 को बढ़कर 23,407 हो गई। एक वर्ष में 3,989 महिला फर्मों का इजाफा हुआ। इस तरह महिला फर्म पंजीकरण में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीद में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर देती है।

    एससी-एसटी फर्मों का पंजीकरण 18 फीसदी बढ़ा

    जेम पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की फर्मों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2025 को 4,890 एससी/एसटी फर्म पंजीकृत थीं। 31 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 5,783 हो गई। इस श्रेणी में 893 फर्मों की बढ़ोतरी हुई, जो 18 फीसदी है। सरकारी खरीद के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन वर्गों की बढ़ती भागीदारी समावेशी कारोबारी अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे छोटे उद्यमों को सरकारी संस्थानों के लिए उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है।

    स्टार्टअप फर्मों की संख्या 21 फीसदी बढ़ी

    प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की बढ़ती सक्रियता भी GeM के आंकड़ों में दिखाई दे रही है। 31 मार्च 2025 को कुल 4,404 स्टार्टअप फर्में पंजीकृत थीं, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 5,350 हो गईं। एक वर्ष में 946 स्टार्टअप फर्मों का इजाफा हुआ। इस श्रेणी में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। स्टार्टअप फर्मों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि नए उद्यम सरकारी संस्थानों के लिए अपने नवाचार, तकनीकी समाधान और सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में निवेश, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के बीच यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है।

    सरकारी खरीद में स्थानीय कारोबारियों के लिए बढ़ते अवसर

    उत्तर प्रदेश में जेम के स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की क्रय नीति छोटे और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उत्तर प्रदेश जेम क्रय नीति-2024 छोटे उद्यमियों के लिए वरदान साबित हुई है। इस नीति के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ छोटे उद्यमियों को भी सरकारी खरीद में भागीदारी का बेहतर अवसर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाई गई इस व्यवस्था की उपयोगिता अब व्यापक स्तर पर दिखाई दे रही है और देश के अन्य हिस्सों में भी इसे अपनाया जा रहा है। यह नीति स्पष्ट रूप से योगी सरकार की उस मंशा को दर्शाती है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ छोटे और स्थानीय उद्यमियों को आगे बढ़ाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर समान रूप से जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में कुल फर्मों के साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में विविध कारोबारी समूहों की भागीदारी बढ़ रही है। 

    एक नजर में जेम पर यूपी की बढ़ती भागीदारी

    श्रेणी| कुल विक्रेता-31 मार्च 2025| कुल विक्रेता-31 मार्च 2026| वृद्धि

    कुल पंजीकृत फर्म| 6,85,488| 7,86,687| 15%
    कुल एमएसई फर्म| 1,06,855| 1,23,075| 16%
    कुल महिला फर्म| 19,418| 23,407| 21%
    कुल एससी/एसटी फर्म| 4,890| 5,783| 18%
    कुल स्टार्टअप फर्म| 4,404| 5,350| 21%

  • यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    'मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा', यूसीसी पर अमित शाह के बयान का भूपेंद्र चौधरी ने किया स्वागत

    महिलाओं के अधिकारों की ढाल बनेगा यूसीसी, भूपेंद्र चौधरी ने किया बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    लखनऊ
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुखता से शामिल किया था और इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का संकल्प पत्र 14 अप्रैल 2024 को जारी किया गया था। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता को शामिल किया था और संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप इसे राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत लागू करने की बात कही थी।

    महिलाओं की समानता की दिशा में मजबूत कदम 'यूसीसी'

    उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती, तब तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार देश में एक आधुनिक, प्रभावी और सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान इसी दिशा में सरकार की मंशा और संकल्प को दर्शाता है।

    पीएम मोदी की गांरटी पर देश को विश्वास

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह के इस वक्तव्य का स्वागत करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो गारंटी है, उस पर देश को विश्वास है और केंद्र सरकार अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो वादे देश की जनता से किए हैं, उन्हें पूरा करने का काम लगातार किया जा रहा है और समान नागरिक संहिता भी उसी संकल्प का हिस्सा है।

    गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी पार्टी के रुख को दोहराते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों और समान न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।

  • रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ, मानदेय के साथ परिवार की सेहत पर जोर

    रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ, मानदेय के साथ परिवार की सेहत पर जोर

    जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है।

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी।

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है।

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।

  • आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाली पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की लगाई जा रही हैं अटकलें

    आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाली पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की लगाई जा रही हैं अटकलें

    लखनऊ
    यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल आज से प्रशासनिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त हो गई हैं। उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या का इस्तीफा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार्य करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उनका इस्तीफा आज 15 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। दिव्या ने 30 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए स्वेच्छा से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। अब उनके अगले कदम पर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास पहुंचा था। दिव्या के पति गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी चार साल पहले 2022 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। गगनदीप सिंह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (आईटीएस) अधिकारी थे।

    यूपी कॉडर की वर्ष 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दिए जाने की जानकारी अपने फेसबुक और एक्स एकाउंट के माध्यम से दी थी। दिव्या को मई 2026 में देवरिया के डीएम के पद से हटाकर राजस्व विभाग में अपेक्षाकृत कम महत्व के विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। वे तभी से असहज बताई जा रही थीं।

    मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती
    आईएएस बनने के बाद मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती मिली थी। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात रहीं। बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी रहीं। संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। बीच में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाली।

    आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई, लाखों की नौकरी छोड़ी
    दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी में 23 नवंबर 1983 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई के बाद आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। गगनदीप के साथ शादी के बाद दोनों लंदन चले गए। जहां एक कंपनी की जॉब की। बाद में लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ देश सेवा के लिए दोनों भारत आ गए और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2021 में पति गगनदीप और 2013 में दिव्या मित्तल ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की।

    मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव?
    दिव्या को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक चर्चा उनके मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की भी है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने मिर्जापुर को ही याद किया था। यहां की एक बुजुर्ग मां को याद किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट लिखा था कि आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोलीं, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।?

  • यूपी में इस बार सामान्य से तीन फीसदी कम रही मानसूनी बारिश, पश्चिमी हिस्से में हुई छह फीसदी अधिक वर्षा

    यूपी में इस बार सामान्य से तीन फीसदी कम रही मानसूनी बारिश, पश्चिमी हिस्से में हुई छह फीसदी अधिक वर्षा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में इस सीजन मानसून की झमाझम बारिश के बाद अब इसकी विदाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लखनऊ के अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय के अनुसार 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाने की संभावना है। इससे पहले पश्चिमी यूपी में 17 सितंबर को एक बार फिर झमाझमा बारिशकी हो सकती है। अब पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।

    48 घंटे आंशिक तेजी के बाद थमेगी बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में कोई बहुत बड़ा सक्रिय मौसम तंत्र मौजूद नहीं है। हालांकि अरब सागर से आ रही नमी के असर से आगामी 48 घंटों के दौरान राज्य में बारिश की गतिविधियों में हल्की आंशिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद मानसूनी बारिश में उत्तरोत्तर कमी आएगी और 19 सितंबर से पश्चिमी यूपी का मौसम शुष्क होने लगेगा।

    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पिछले 72 घंटों में मध्य भारत से गुजरते हुए वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे गुजरात के ऊपर केंद्रित है। मानसून की ट्रफलाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसकी हुई है लेकिन इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति के निकट है। कोई बड़ा सिस्टम न होने के बावजूद केवल नमी के प्रभाव से सीमित और छिटपुट बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं।

    सामान्य से तीन फीसदी का अंतर रहा इस बार
    मौसम विभाग के अनुसार इस सीजन के दौरान यूपी में अब तक 666 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यह सामान्य (685.7 मिमी) से केवल 3 प्रतिशत कम है। वेस्ट यूपी में छह फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वेस्ट यूपी में इस सीजन मानसून ने खूब भिगोया है। यहां सामान्य 628 मिमी की तुलना में 663.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी सामान्य से 6 फीसदी अधिक वर्षा हुई। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 667.5 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य (726.9 मिमी) के मुकाबले 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।

    विदाई से पहले वेस्ट यूपी को भिगो सकता है मानसून
    मेरठ सहित वेस्ट यूपी में विदाई से पहले मानसून एक बार फिर से भिगो सकता है। 17 सितंबर तक पूरे क्षेत्र में अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। आज देर रात से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसे पहले भी वेस्ट यूपी में कुछ हिस्सों में बौछारें और हल्की बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। 19 सितंबर के बाद राजस्थान से मानसून वापसी की प्रक्रिया भी शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी घोषणा कर दी।

    मौसम विभाग के अनुसार सोमवार केा मेरठ में दिन-रात का तापमान क्रमश: 34.1 एवं 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रविवार के सापेक्ष दिन में 0.9 और रात में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। बावजूद इसके दिन-रात के तापमान सामान्य से 0.2 एवं 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड हुए। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक सामान्य के आसपास ही तापमान बने रहने के आसार हैं। सोमवार को मेरठ का एक्यूआई 61 दर्ज हुआ जो संतोषजनक श्रेणी में है।

  • ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर यूपी का बड़ा कदम, नोएडा की 100 ई-बसों से 7.18 लाख से अधिक यात्रियों ने की यात्रा

    ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर यूपी का बड़ा कदम, नोएडा की 100 ई-बसों से 7.18 लाख से अधिक यात्रियों ने की यात्रा

    योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित ई-बसों में अब तक 7.18 लाख से अधिक लोगों ने की यात्रा

    तीनों प्राधिकरणों में 2.24 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, लगातार सेवाओं का हो रहा विस्तार

    जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से ग्रीन मोबिलिटी तक, योगी सरकार के विजन को मिली जमीनी स्तर पर सफलता

    24 घंटे लाइव निगरानी की तैयारी, नोएडा में बनेगा तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों के लिए कमांड सेंटर

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया।

    नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया।

    जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार
    नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।

    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन
    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा।

    यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग
    यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है।

    सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है।

    बॉक्स
    नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी

    यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • मानदेय के साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर, योगी सरकार ने बढ़ाया स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    मानदेय के साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर, योगी सरकार ने बढ़ाया स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है।

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी।

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है।

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।

  • माउंट एवरेस्ट के बाद डॉ. आशा ने महज छह दिन में माउंट एल्ब्रुस और किलिमंजारो को सफलतापूर्वक किया फतह

    माउंट एवरेस्ट के बाद डॉ. आशा ने महज छह दिन में माउंट एल्ब्रुस और किलिमंजारो को सफलतापूर्वक किया फतह

     रेवाड़ी
     भारत की गौरवशाली बेटी 48 वर्षीय डॉ. आशा रेवाड़ी के पुलिस लाइन में रहती हैं l डॉ. आशा के पति अजय सिंह रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। आशा के दो बच्चे हैं एक बेटी (डॉक्टर)और एक बेटा (इंजीनियर) ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए एक उल्लेखनीय पर्वतारोहण उपलब्धि हासिल की है।

    उन्होंने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस का सफल आरोहण किया और इसके बाद अपने अभियान को लगातार जारी रखते हुए 29 अगस्त 2026 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह किया।

    दोनों चोटियों को प्रभावी अभियान अवधि के केवल छह दिनों में फतह किया गया, जबकि दोनों समिट डेट के बीच कैलेंडर के अनुसार आठ दिन का अंतर है, जिसमें यात्रा एवं ट्रांजिट समय शामिल है। यह उपलब्धि उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प, शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और अनुशासन का प्रमाण है।

    माउंट एल्ब्रुस यूरोप की सर्वोच्च चोटी पर की फतेह
    21 अगस्त 2026 को सुबह 09:07 बजे, डॉ. आशा ने 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर यूरोप की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।

    वह अपने साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर शिखर तक पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के संदेश एवं लोगो भी शिखर तक पहुंचाए।

    उनका यह आरोहण केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भावना और महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं प्रगति का संदेश दुनिया की ऊंची चोटियों तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना।

    माउंट किलिमंजारो को भी किया फतेह
    माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई के बाद डॉ. आशा ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान को जारी रखा और तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की ओर प्रस्थान किया।

    29 अगस्त 2026 को सुबह 05:31 बजे, उन्होंने 5,895 मीटर (19,341 फीट) ऊंची उहुरू पीक पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।

    इस प्रकार डॉ. आशा ने यूरोप और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटियों को लगातार एक ही अभियान-यात्रा में सफलतापूर्वक फतह किया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रा और अभियान संबंधी व्यवस्थाएं शामिल थीं, जबकि प्रभावी अभियान अवधि छह दिन रही।

    माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो की लगातार सफल चढ़ाई उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    माउंट एवरेस्ट से यूरोप और अफ्रीका की चोटियों तक
    डॉ. आशा ने वर्ष 2017 में 39 वर्ष की आयु में अपने पहले ही प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। उन्होंने भारत और विश्व की पहली नर्सिंग ऑफिसर के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने की पहचान का दावा किया है और उनकी इस उपलब्धि से जुड़े रिकॉर्ड दावे भी किए गए हैं।

    एक सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने और उसके बाद माउंट एल्ब्रुस तथा माउंट किलिमंजारो को फतह करने तक की उनकी यात्रा जनसेवा, साहस, अनुशासन और पर्वतारोहण उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण है।

    27 वर्षों की सरकारी सेवा
    डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों के अपने जुनून को भी निरंतर आगे बढ़ाया।

    उनकी यात्रा यह शक्तिशाली संदेश देती है कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा किया जा सकता है।

    सेवन समिट्स मिशन 2026–27 की ओर
    माउंट एवरेस्ट, माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह करने के बाद डॉ. आशा अब अपने महत्वाकांक्षी “सेवन समिट्स मिशन 2026–27” की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    उनका अंतिम लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना और एक भारतीय महिला पर्वतारोही एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मी के रूप में एक प्रेरणादायक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करना है।

    एयर पिस्टल शूटिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
    पर्वतारोहण के साथ-साथ डॉ. आशा एक उत्कृष्ट एयर पिस्टल शूटर भी हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की स्पर्धाओं में भाग लेती हैं।

    वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी फिटनेस, एकाग्रता, सटीकता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है।

    शिखर से भी आगे — एक प्रेरणादायक संदेश
    डॉ. आशा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंची है। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है।

    भारतीय तिरंगा, महिला सशक्तिकरण तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश पर्वतों की चोटियों तक पहुंचाकर डॉ. आशा ने पर्वतारोहण को समाज में जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बनाया है।

  • रूट बदलने से बढ़ी 50 किलोमीटर की दूरी, लखनऊ-कानपुर बस का किराया बढ़ सकता है

    रूट बदलने से बढ़ी 50 किलोमीटर की दूरी, लखनऊ-कानपुर बस का किराया बढ़ सकता है

    लखनऊ
    राजधानी से कानपुर का बस से सफर महंगा हो सकता है। वजह जाजमऊ पुल की मरम्मत के चलते तीन माह तक परिवहन निगम की बसों का रूट बदला रहेगा नए रूट के मुताबिक आलमबाग से रवाना होने वाली रोडवेज बसें उन्नाव के आगे गदन खेड़ा, उन्नाव शहर से लालगंज, फतेहपुर होकर कानपुर पहुंचेंगी।

    नए रूट से बसों की दूरी 50 किलोमीटर बढ़ने की संभावना है। रोडवेज प्रशासन बदले रूट का सर्वे कराएगा। इसमें जितने किलोमीटर ज्यादा बस संचालन होगा, उसी आधार पर बस का किराया बढ़ेगा। 50 किलोमीटर की दूरी अधिक होती है तो 60 रुपये किराया ज्यादा पड़ सकता है। फिलहाल अभी किराया ज्यों का त्यों है।

    कानपुर के जाजमऊ गंगा पुल की मरम्मत कार्य 13 सितंबर से 13 दिसंबर तक भारी वाहनों के साथ रोडवेज बसों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। रोडवेज बसें बदले रूट से आवागमन करेंगी, इससे बसों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।

    बदले रूट से दूरी करीब 140 किमी होगी
    लखनऊ से कानपुर जाने वाली बसें गदन खेड़ा चौराहा से रायबरेली रोड से बक्सर पुल के रास्ते फतेहपुर होकर कानपुर की ओर जा सकेंगी। क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया, आलमबाग से कानपुर जाने वाली बसों के रूट तीन माह तक बदले रहेंगे।

    इस दौरान बसों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। डायवर्जन रूट पर जल्द सर्वे कराकर बसों के किराये पर असर पड़ेगा।
    लखनऊ और कानपुर बस डिपो की 80 से ज्यादा साधारण और ई बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों से रोजाना 15 से 20 हजार यात्री सफर करते हैं।

    गंगा पुल की मरम्मत का कार्य तीन माह तक चलेगा। इस दौरान यात्रियों को लंबी दूरी तय करके जेब हल्की करनी पड़ेगी। वर्तमान में लखनऊ से कानपुर की दूरी 90 किलोमीटर है। बदले रूट पर दूरी करीब 140 किमी. होगी।

  • महिला राइडर को टक्कर मारकर फरार हुआ आरोपी गिरफ्तार, गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस में बड़ा एक्शन

    महिला राइडर को टक्कर मारकर फरार हुआ आरोपी गिरफ्तार, गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस में बड़ा एक्शन

    गुरुग्राम 

    गुरुग्राम के हिट एंड रन मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। महिला बाइक राइडर सिया चौहान को टक्कर मारने वाले आरोपी कल्याण बैंसला को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि, इस हादसे का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में है। वहीं गुरुग्राम पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में एफआईआर दर्ज की थी। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास की धारा एफआईआर में जोड़ दी गई है।

    सिया ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए थे सवाल
    बता दें कि इससे पहले गुरुग्राम की महिला बाइक राइडर सिया ने पुलिस के एक्शन पर सवाल उठाए थे। हादसे को लेकर पीड़िता सिया ने बताया कि, उन्हें घुटनों में चोट लगी है। हादसे के समय उन्होंने राइडिंग शूज और राइडिंग ग्लव्स पहन रखे थे, जिसकी वजह से उन्हें चोट कम लगी। उनके मुताबिक, अगर उन्होंने ये सुरक्षा उपकरण नहीं पहने होते तो उनके हाथ पर लगी चोट इतनी गंभीर हो सकती थी कि कंधे की हड्डी भी टूट सकती थी।

    वीडियो फुटेज से मिली सुराग 

    गुरुग्राम पुलिस ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में अभियोग दर्ज किया था। शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित बीएनएस की धारा 281 और 125 के तहत केस दर्ज किया गया था।

    घटना से जुड़े वीडियो फुटेज के गहन विश्लेषण के बाद पुलिस के सामने कार चालक द्वारा सिया की बाइक की तरफ जानबूझकर कार मोड़ने का तथ्य आया। इसके आधार पर मामले में बीएनएस की धारा 109 यानी हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई।

    घटना के बाद फरार था आरोपी
    13 सितंबर को गोल्फ कोर्स रोड पर हुई घटना के बाद कल्याण बैंसला फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर तलाश शुरू की थी और तीन विशेष टीमों का भी गठन किया गया था।

    अब राजस्थान के दौसा से गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से घटना को लेकर पूछताछ करेगी और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    राइडर सिया को मारी टक्कर
    सिया अपनी Aprilia RS 457 बाइक से अन्य राइडरों के साथ जा रही थीं। घटना के बाद इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर प्रसारित हुआ था। बाद में सिया ने भी वीडियो जारी कर कार चालक पर जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया था।

    सिया के अनुसार, कार चालक ने पहले उन्हें रुकने का इशारा किया था। जब वह नहीं रुकीं तो चालक ने कार उनकी बाइक की तरफ मोड़ दी और टक्कर मार दी।

    हत्या के प्रयास की धारा जुड़ी
    पुलिस के अनुसार, मामले में जोड़ी गई बीएनएस की धारा 109 में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वीडियो फुटेज के विश्लेषण के आधार पर यह धारा जोड़ी गई है।

    कल्याण बैंसला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब घटना के पूरे क्रम और वीडियो फुटेज से सामने आए तथ्यों की जांच आगे बढ़ाएगी।

    वहीं सिया ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि, आरोपी न्यूज रिपोर्टर्स को बयान दे रहा है और अपनी बात रख रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने में इतनी देर क्यों कर रही है। सिया ने कहा कि उन्होंने अपनी पोस्ट के कैप्शन में गाड़ी का नंबर भी बताया था। इसके बावजूद पुलिस अब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

    रविवार की है घटना
    दरअसल, यह घटना गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड की है, जिसका वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ था। महिला बाइकर सिया चौहान, अपनी बाइक चला रही थी। तभी एक कार उसका पीछा करने लगी। जब महिला नहीं रुकी तो आरोपी ने बाइकर को टक्कर मार दी। महिला का कैमरा चालू था, ऐसे में यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई थी।