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  • बुजुर्गों के लिए जरूरी खबर! पेंशन अटकी है तो घर बैठे करें ये काम, खाते में आएगा पैसा

    बुजुर्गों के लिए जरूरी खबर! पेंशन अटकी है तो घर बैठे करें ये काम, खाते में आएगा पैसा

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश के लाखों बुजुर्गों के लिए राहत भरी खबर है। योगी सरकार ने बुजुर्गों की पेंशन का नियम बदलते हुए नई किस्त व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके तहत अब तीन महीने की कुल 3,000 रुपये की पेंशन राशि एक साथ मिलने के बजाय दो बराबर किस्तों (1500 और 1500) में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।

    सितंबर 2026 के दूसरे सप्ताह से राज्य के कई जिलों में इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों के खातों में पैसे आने शुरू हो गए हैं। सरकार की ओर से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बुजुर्गों के खातों में पेंशन का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है।

    हालांकि, कई बार देखने में आता है कि सरकार की तरफ से पैसा जारी होने के बावजूद बहुत से बुजुर्गों के बैंक खातों में पेंशन की राशि नहीं पहुंच पाती। ऐसे में बुजुर्ग परेशान होकर दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं।

    UP Old Age Pension 2026 | अगर आपके खाते में भी इस बार पेंशन का पैसा नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे या अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र जाकर कुछ जरूरी काम करा लें, जिससे आपकी रुकी हुई पेंशन तुरंत खाते में आ जाएगी

    आइये सबसे पहले ये समझते हैं कि खाते में पैसा न पहुंचने के क्या कारण हैं-
    खाते में पैसा न आने के मुख्य कारण-
        समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पेंशन का पैसा न अटकने का सबसे बड़ा कारण डॉक्यूमेंट्स का अपडेट न होना है। जैसे कि सरकार ने पेंशन में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। जिन लाभार्थियों ने अभी तक बायोमीट्रिक या ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी नहीं कराया है, उनकी किस्त रोक दी गई है।
        पेंशन का पैसा अब केवल DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मोड से भेजा जाता है। अगर आपका बैंक खाता आपके आधार कार्ड से सीडेड (लिक्ंड) नहीं है, तो पैसा खाते में नहीं आएगा।
        इसके अलावा बैंक खाते में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) मैपिंग एक्टिव न होना भी एक बड़ी वजह है।
        नाम, स्पेलिंग, आईएफएससी कोड या बैंक खाता संख्या में कोई छोटी सी गलती होने पर भी भुगतान अटक जाता है।

    पेंशन न आने पर तुरंत करें ये काम
    1- सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर चेक करें स्टेटस
    सबसे पहले आपको यूपी समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (sspy-up.gov.in) पर जाना होगा। वहां 'वृद्धावस्था पेंशन' वाले सेक्शन में जाकर 'आवेदक लॉगिन' पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर स्टेटस चेक करें। अगर स्टेटस में किसी प्रकार की त्रुटि (Error) दिख रही है, तो उसे तुरंत सही कराएं।

    2. ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करें
    अगर आपका ई-केवाईसी पेंडिंग है, तो इसे बिना देरी किए पूरा करें। इसे आप खुद अपने मोबाइल से पोर्टल पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिए कर सकते हैं। यदि आपके पास स्मार्टफोनन नहीं है, तो नजदीकी सीएससी (जन सेवा केंद्र) पर जाकर बायोमीट्रिक (अंगूठे का निशान) देकर ई-केवाईसी को 5 मिनट में पूरा करा सकते हैं।

    3. बैंक शाखा जाकर आधार और NPCI सीडिंग कराएं
    अगर आपका ई-केवाईसी पहले से पूरा है, फिर भी पैसा नहीं आया, तो अपनी बैंक शाखा में जाएं। वहां जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका खाता Aadhaar Seeded और DBT Enabled है या नहीं। बैंक कर्मचारी से बोलकर अपने खाते को NPCI से तुरंत लिंक करवाएं।

    4. जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क करें
    यदि सारे डॉक्यूमेंट्स सही होने के बावजूद खाते में पैसा नहीं आ रहा है, तो अपने जिले के विकास भवन स्थित 'जिला समाज कल्याण अधिकारी' के कार्यालय में जाएं। वहां अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पेंशन रजिस्ट्रेशन नंबर की फोटोकॉपी के साथ एक आवेदन पत्र जमा करें। अधिकारी आपकी फाइल चेक करके समस्या का तुरंत समाधान कर देंगे।

    बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन सुविधा
    अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई परेशानी आ रही है या आप चलकर दफ्तर नहीं जा सकते, तो उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर कॉल कर सकते हैं।

    कॉल पर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर बताकर आप अपनी पेंशन का स्टेटस जान सकते हैं और शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

    सरकार का कहना है कि किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन बंद नहीं की जाएगी। जैसे ही आप अपनी ई-केवाईसी और बैंक खाते की गड़बड़ी को सही करवा लेंगे, तो आपकी रुकी हुई पुरानी किस्त और नई किस्त दोनों एक साथ आपके खाते में भेज दी जाएंगी। इसलिए बिना देर किए अपनी बैंक डिटेल्स और केवाईसी तुरंत अपडेट करा लें।

     

  • कैबिनेट के अहम फैसले: यूपी में सुरक्षा आधुनिकीकरण के साथ ही जवानों और स्कूली शिक्षा पर फोकस

    कैबिनेट के अहम फैसले: यूपी में सुरक्षा आधुनिकीकरण के साथ ही जवानों और स्कूली शिक्षा पर फोकस

    लखनऊ
     यूपी में सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर जल्द नई सब-मशीनगन से लैस होंगे। शासन ने माननीयों के सुरक्षाकर्मियों को नए असलहे उपलब्ध कराने के लिए 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। गृह विभाग ने इसका आदेश जारी किया है।

    जनप्रतिनिधियों के सुरक्षाकर्मियों के लिए नाइन एमएम की 800 सब-मशीनगन और 2.56 लाख कारतूस खरीदे जाएंगे। एक सब-मशीनगन की कीमत 60 हजार रुपये होगी। पुलिस मुख्यालय से शासन को भेजी गई एक रिपोर्ट के बाद अयोध्या के श्रीराम मंदिर सहित हाईकोर्ट, लोकभवन और मेट्रो स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्नाइपरों की तैनाती की जाएगी। शासन ने तीन स्नाइपर राइफल खरीदने की भी वित्तीय स्वीकृति दी है। एक रायफल की कीमत 10.76 लाख रुपये होगी।

    महिला वाहिनियों के लिए पिस्टल और असाल्ट राइफल
    इसके अलावा पीएसी की नवगठित महिला वाहिनियों को स्वचलित असलहे दिए जाएंगे। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत पीएसी की तीन महिला वाहिनियों के लिए 373 पिस्टल और 90 असाल्ट राइफल खरीदी जाएंगी।

    पीआरडी जवानों का बढ़ेगा ड्यूटी भत्ता
    उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। इसमें प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों का ड्यूटी भत्ता रोजाना 500 से 600 करना शामिल है। इसके अलावा कैशलेस इलाज की सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है। जिसकी संख्या 27 हजार से अधिक बताई जा रही है।

    चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है सरकार
    योगी सरकार पीआरडी जवानों का चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है। 8 मार्च 2019 को 250 से बढ़ाकर 375 रुपये रोजाना किया गया था। इसके बाद 6 जनवरी 2022 को इसे बढ़ाकर 395 रुपये कर दिया गया। 15 अप्रैल 2025 को इसे 500 रुपये कर दिया गया। अब इसमें 100 रुपये और बढ़ाने का प्रस्ताव है।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस
    इसके अलावा वाहनों की फिटनेस के लिए नई नीति, उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति और चित्रकूट एक्सप्रेस का संशोधित प्रस्ताव सहित अन्य शामिल है। कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर करने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है। अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पालीक्लीनिकों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण सेंट्रल कमांड भारत सरकार को मुफ्त दिए जाने का प्रस्ताव है।

    स्कूल को दिए जाएंगे दो-दो लाख रुपये
    बेसिक शिक्षा विभाग के 14 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए आईसीटी लैब के लिए 300 करोड़ रुपये धनराशि देने संबंधी प्रस्ताव भी है। प्रत्येक स्कूल को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।

  • चर्चित IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा स्वीकार, सोशल मीडिया पोस्ट में बयां की अपनी बात

    चर्चित IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा स्वीकार, सोशल मीडिया पोस्ट में बयां की अपनी बात

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और तेजतर्रार 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने मंजूर कर लिया है. निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए उन्होंने 30 अगस्त को यह पद छोड़ने की घोषणा की थी, जो 15 सितंबर से प्रभावी हो गया है।  

    लंदन की नौकरी छोड़ बनी थीं आईएएस
    दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद लंदन में अच्छी नौकरी की थी, लेकिन सब कुछ पाने के बाद भी उन्हें कुछ अधूरा लगा. इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी की. उन्होंने पहले प्रयास में आईपीएस और दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस की सफलता हासिल की. उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर एक कंपनी शुरू की थी। 

    सख्त कार्यशैली और भविष्य की राह
    मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया में डीएम रहीं दिव्या मित्तल की गिनती सख्त और बेबाक अफसरों में होती थी. मिर्जापुर में उन्होंने आजादी के 75 साल बाद पानी की व्यवस्था कराई थी. इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर जयशंकर प्रसाद की पंक्ति "प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो" लिखकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। 

    मामले में सियासत भी
    आपको बता दें कि दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सियासत भी देखने को मिली थी. सपा प्रमुख ने आरोप लगाया था कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है, वहीं कांग्रेस नेता अजय राय ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी. उन्होंने इशारा भी किया था अगर दिव्या मित्तल कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहेंगी तो उसपर विचार किया जाएगा। 

  • कोयला संकट में योगी सरकार ने संभाली बिजली व्यवस्था, तय रोस्टर के अनुसार जारी रही आपूर्ति

    कोयला संकट में योगी सरकार ने संभाली बिजली व्यवस्था, तय रोस्टर के अनुसार जारी रही आपूर्ति

    कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

    1500-2000 मेगावाट की कमी के बावजूद यूपी में आपूर्ति व्यवस्था संभली, जल्द बढ़ेगी उपलब्धता

    करीब 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद

    लखनऊ
     कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है।

    अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

    1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति

    वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है।

    जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली

    रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है।

    योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत

    पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

  • मुख्यमंत्री राहत कोष का बढ़ा दायरा, 2025-26 में 74,531 लाभार्थियों को मिली मदद

    मुख्यमंत्री राहत कोष का बढ़ा दायरा, 2025-26 में 74,531 लाभार्थियों को मिली मदद

    बिना भेदभाव जरूरतमंदों तक पहुंचा मुख्यमंत्री राहत कोष का लाभ

    पांच साल में 2.44 लाख लाभार्थियों को मिली 4,324 करोड़ की सहायता, प्रदेश के सभी मंडलों और जिलों तक पहुंची राहत

    2025-26 में 74,531 लाभार्थियों तक पहुंची मदद, पिछले पांच वर्षों में लाभार्थियों की संख्या में 4.5 गुना वृद्धि

    लखनऊ, 
     आर्थिक विपन्नता, गंभीर बीमारी और विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। इस सहायता का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बिना किसी भेदभाव समभाव से जरूरतमंदों तक राहत पहुंची है। उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में 2,44,263 लाभार्थियों को कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। इस अवधि में वार्षिक लाभार्थियों की संख्या 16,640 से बढ़कर 74,531 हो गई, यानी करीब 4.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई। मंडल और जिला स्तर के आंकड़े भी सहायता के व्यापक भौगोलिक विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

    पांच साल में सहायता का दायरा बढ़ा 
    मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2021-22 में 289.71 करोड़ रुपये की सहायता से 16,640 लाभार्थी लाभान्वित हुए थे। वर्ष 2022-23 में सहायता राशि बढ़कर 572.97 करोड़ रुपये रही और लाभार्थियों की संख्या 31,745 तक पहुंच गई। वर्ष 2023-24 में 1,008.50 करोड़ रुपये की सहायता से 54,473 लाभार्थियों को राहत मिली। वर्ष 2024-25 में सहायता राशि 1,344.94 करोड़ रुपये रही, जो पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में सर्वाधिक है। इसी वर्ष 66,874 लाभार्थियों को सहायता मिली और प्रति लाभार्थी औसत सहायता 2.01 लाख रुपये के उच्चतम स्तर पर रही। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, जबकि लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष प्रति लाभार्थी औसत सहायता 1.49 लाख रुपये रही।

    लाभार्थियों की संख्या में हुआ निरंतर विस्तार
    आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति यह भी सामने आती है कि सहायता राशि में वर्षवार बदलाव के बावजूद लाभार्थियों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि पिछले वर्ष की तुलना में 17.6 प्रतिशत कम रही, लेकिन लाभार्थियों की संख्या 11.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक संख्या में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने का क्रम लगातार जारी रहा।

    बिना भेदभाव सभी मंडलों तक पहुंची राहत
    वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के उपलब्ध रिकॉर्ड के मंडलवार विश्लेषण में लखनऊ मंडल में 19,507, गोरखपुर मंडल में 13,621, प्रयागराज मंडल में 12,019, अयोध्या मंडल में 10,427, वाराणसी में 9,364 और कानपुर में 8,433 लाभार्थियों को सहायता मिली है। देवीपाटन मंडल में 7,201, आजमगढ़ में 6,760, बस्ती में 3,740 और मिर्जापुर में 3,335 लाभार्थी दर्ज हैं। झांसी मंडल में 2,263, चित्रकूट में 1,894, आगरा में 1,617, मुरादाबाद में 1,441 तथा मेरठ में 1,308 लाभार्थी हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि सहायता का वितरण प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हुआ है और जरूरतमंदों तक राहत का दायरा केवल बड़े मंडलों तक सीमित नहीं रहा।

    छोटे जिलों से बड़े जिलों तक पहुंची सहायता
    जिला स्तर के आंकड़ों में लखनऊ में 7,491, प्रयागराज में 6,572, गोरखपुर में 5,463 और कानपुर नगर में 4,890 लाभार्थियों को सहायता मिली है। इसके बाद गोंडा में 3,647, आजमगढ़ में 3,417, प्रतापगढ़ में 3,240, वाराणसी में 3,220, जौनपुर में 3,219 और सीतापुर में 3,192 लाभार्थी दर्ज हैं। कुशीनगर में 3,179, देवरिया में 2,914, बाराबंकी में 2,911, रायबरेली में 2,701 और अयोध्या में 2,246 लाभार्थियों को सहायता मिली है। जिला स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों में बड़े जिलों के साथ-साथ अपेक्षाकृत छोटे जिलों तक भी राहत पहुंचने का क्रम स्पष्ट दिखाई देता है। कम जनसंख्या वाले जिलों में भी जरूरतमंदों तक सहायता पहुंची है। यह वितरण इस बात को रेखांकित करता है कि मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता का दायरा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक विस्तृत रहा है। जिला स्तर के आंकड़े भी व्यापक पहुंच और जरूरतमंदों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की दिशा में जारी प्रयासों की तस्वीर सामने रखते हैं।

    समभाव के साथ जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
    मुख्यमंत्री राहत कोष के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2.44 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिलना और प्रदेश के सभी मंडलों व जिलों तक राहत पहुंचना इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच को रेखांकित करता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे जरूरतमंदों को सहारा देने की यह व्यवस्था जनकल्याण और सामाजिक समभाव की दिशा में महत्वपूर्ण है। आंकड़ों में सहायता के बढ़ते दायरे के साथ यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया है।

  • किताबी ज्ञान के साथ बागवानी के गुर सीखेंगे बच्चे, यूपी के 49 पीएमश्री विद्यालयों को मिलेगा ₹20 हजार

    किताबी ज्ञान के साथ बागवानी के गुर सीखेंगे बच्चे, यूपी के 49 पीएमश्री विद्यालयों को मिलेगा ₹20 हजार

     बांदा
     अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे।

    बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है।

    इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी।

    मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे।

    बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

    आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

        बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।

        स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।

        पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा।

    पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में

    जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा
    बांदा     07     05
    चित्रकूट     07     02
    हमीरपुर     16     04
    महोबा     06     02
    कुल     36     13

  • कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

    कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

    लखनऊ

    कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है।

    अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

    1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति

    वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है।

    जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली

    रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है।

    योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत

    पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

  • पंजाब से बिहार तक फैला नकली सिक्कों का नेटवर्क, रजिस्टर और मोबाइल से खुलेंगे कई राज

    पंजाब से बिहार तक फैला नकली सिक्कों का नेटवर्क, रजिस्टर और मोबाइल से खुलेंगे कई राज

    सहारनपुर
    यूपी के सहारनपुर में पीएनबी बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के नकली नोटों की जांच के बीच ही नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने खलबली मचाई हुई है। इसके सिंडिकेट की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखी गई थी। नकली सिक्कों के इस कारोबार में मुनाफे का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये खर्च होते थे। तैयार सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये तक में बेचे जाते थे।

    कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को कारोबार का आधार बनाया। छह मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के तैयार किए जाने की बात सामने आई है। गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में ही हुई थी। पुलिस का दावा है कि इसी मुलाकात ने सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री खड़ी कर दी।

    सहारनपुर पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। जेल में उसकी मुलाकात हिमांशु से हुई। दोनों जेल से बाहर आए तो संपर्क बना रहा। इसके बाद सहारनपुर में नकली सिक्कों के कारोबार की योजना तैयार हुई और धीरे-धीरे अन्य लोग भी इससे जुड़ते गए।

    अलग-अलग हिस्सों में बंटा था काम
    गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। कोई मशीन और उत्पादन की जिम्मेदारी संभालता था तो कोई तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाता था। तीतरों क्षेत्र में मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया। पुलिस के अनुसार गिरोह में करीब आठ लोग सक्रिय थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तिहाड़ में बनी इस कड़ी ने बाहर निकलने के बाद कितने लोगों को अपने साथ जोड़ा और नेटवर्क किन-किन शहरों तक पहुंचा। पुलिस को मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल इस सवाल का जवाब तलाशने में अहम साबित हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों, एजेंटों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी हैं।

    नेपाल में भी फैक्ट्री लगाने की कोशिश
    पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपे उपकार ने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब वर्षों बाद उसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र यूपी के सहारनपुर में तैयार किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है। पहले सुनार का काम करने वाले उपकार ने सिक्के बनाने की तकनीकी जानकारी को बाद में नकली करेंसी के इस कारोबार में इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया गया था।

    सहारनपुर में तैयार सिक्कों को खपाने के लिए भी नेटवर्क तैयार था। एजेंटों के जरिए माल शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में पंजाब से बिहार और पश्चिमी यूपी तक संपर्क सामने आए हैं। मधुबनी, भदोही और बदायूं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब मोबाइल और रजिस्टरों के जरिए एजेंटों, मशीनों की व्यवस्था और सप्लाई चैन से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ रही है।

    पंजाब से बिहार तक फैला नेटवर्क
    नकली सिक्कों के इस नेटवर्क की पहुंच कई राज्यों तक सामने आई है। मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पंजाब का रहने वाला है। पुलिस जांच में पंजाब के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के मधुबनी, भदोही व बदायूं के नाम सामने आए हैं। पुराने संपर्कों और जेल में हुई मुलाकातों के बाद सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया गया था।

  • केयर इकोनॉमी से यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

    केयर इकोनॉमी से यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों की देखभाल को अब संगठित सेवा क्षेत्र से जोड़कर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा का नया आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई।

    राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार

    समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों व वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। कुशल केयरगिवर्स तैयार करने, उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, समावेशी और टिकाऊ केयर इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है। कार्यशाला व्यापक ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

    12 विभाग मिलकर तय करेंगे आगे की रणनीति

    कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भागीदारी की। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की योजनाओं और संसाधनों को एक साझा रणनीति से जोड़कर केयर सेक्टर को व्यवस्थित रूप देना है। इससे देखभाल के पारंपरिक और अनौपचारिक कार्य को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में पहचान देने की दिशा में काम होगा।

    4 प्रमुख स्तंभों पर हुआ मंथन

    कार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष चर्चा हुई। पहला, घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्यांकन कर उसे पहचान और उचित मूल्य देना। दूसरा, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना। तीसरा, केयर वर्कफोर्स के लिए मानक प्रशिक्षण, प्रमाणन और टिकाऊ रोजगार की व्यवस्था करना। चौथा, सेवाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए पीपीपी मॉडल, बीमा योजनाओं और सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाएं तलाशना।

    केयरगिवर्स को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने पर जोर

    समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने केयर इकोनॉमी को सामाजिक जरूरत के साथ-साथ रोजगार का उभरता हुआ क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए विभागीय समन्वय जरूरी है। प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स तैयार होने से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी और युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रशिक्षण, प्रमाणन और रोजगार की पूरी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

    कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह समेत वित्त, कौशल विकास, स्वास्थ्य और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • युवाओं को नशे से बचाने के लिए योगी सरकार का सख्त संदेश-‘वीडियो सामने आते ही एक्शन’

    युवाओं को नशे से बचाने के लिए योगी सरकार का सख्त संदेश-‘वीडियो सामने आते ही एक्शन’

    लखनऊ
    युवाओं और नाबालिगों को नशे की चपेट में आने से बचाने के लिए योगी सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। सरकार की नीति केवल अवैध और जहरीली शराब पर अंकुश लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र के बच्चों तक शराब की पहुंच रोकने पर भी विशेष जोर है। लखनऊ में नाबालिग को शराब बेचने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही आबकारी विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर यह संदेश साफ कर दिया कि नियमों से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगा।
    सोशल मीडिया एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित होने के बाद सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला आबकारी अधिकारी, लखनऊ ने 11 सितंबर को वीडियो की जांच कराई। जांच में वीडियो विकासनगर थाना क्षेत्र के शुभौली स्थित एक कम्पोजिट दुकान के सेल्समैन की एक व्यक्ति से कहासुनी का पाया गया। वीडियो में सेल्समैन पर नाबालिग बच्चे को शराब बेचने की बात कही जा रही थी।

    तुरंत हटाया गया सेल्समैन, 30 हजार जुर्माना
    जांच के दौरान सेल्समैन का व्यवहार उचित नहीं पाए जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। इसके साथ ही संबंधित कम्पोजिट दुकान के खिलाफ नियमानुसार प्रशमन की कार्रवाई करते हुए 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वीडियो सामने आने के बाद इतनी तेजी से हुई कार्रवाई ने साफ किया कि सरकार नाबालिगों तक नशे की पहुंच रोकने के मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

    यूपी बना देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल
    आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दोबारा आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और पारदर्शी नीतियों के चलते पिछले साढ़े चार वर्षों से अधिक समय से प्रदेश में अवैध या जहरीली शराब की बिक्री का कोई मामला सामने नहीं आया है। आबकारी विभाग देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुका है और इस छवि को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।