Category: उत्तर प्रदेश

  • ‘कोई कानून से ऊपर नहीं’, लोकायुक्त के 50 साल पूरे होने पर CM योगी ने गिनाईं सुशासन की उपलब्धियां

    ‘कोई कानून से ऊपर नहीं’, लोकायुक्त के 50 साल पूरे होने पर CM योगी ने गिनाईं सुशासन की उपलब्धियां

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है।

    उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है।

    मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है।

    जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए।

    साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं।

    मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं।

    ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।

    राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं।

    पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी।

    मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने।

    उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए।

    देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त
    लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया।

    लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास
    उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं।

    चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है।

    चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन
    उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया।
    1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत

    संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई।

    वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 लाख 17 हजार 427 रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई। इसमें वर्ष 2018 में सर्वाधिक छह करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिली। पिछले पांच वर्षों में जांच-पड़ताल के बाद 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं।

    स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का हुआ विमोचन
    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी और लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी ने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा लघु फिल्म देखी।

    कार्यक्रम में लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह और सुरेंद्र कुमार यादव समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे

  • 504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक

    504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया अब तकनीक की नई रफ्तार पकड़ रही है। योगी सरकार राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक को बड़े स्तर पर जमीन पर उतार रही है। प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंचाए जा चुके हैं और इनसे काम भी शुरू हो गया है। वहीं 143 रोवर 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हरदोई के केटीएस (चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र) में दो रोवर लगाए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर से सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यह बदलाव जमीन की पैमाइश को पारंपरिक तरीकों से निकालकर अधिक तेज, सटीक और डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जा रहा है।

    खेत-खलिहान से नक्शे तक, एक ही तकनीक से कई काम
    राजस्व परिषद आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि जीएनएसएस रोवर की तैनाती केवल तहसीलों तक सीमित नहीं है। 350 रोवर सीधे तहसीलों में पहुंचने के बाद फील्ड सर्वेक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके साथ 143 रोवर 10 यूएलबी (शहरी स्थानीय निकाय) की नक्शा परियोजनाओं के लिए लगाए गए हैं। हरदोई के केटीएस को भी दो रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। दूसरी ओर, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर का इस्तेमाल प्रशिक्षण में किया गया और सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यानी राजस्व विभाग में तकनीक के इस्तेमाल के साथ कर्मचारियों को इसके संचालन के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।

    सीएम योगी ने सहारनपुर से रखी थी अभियान की नींव
    कंचन वर्मा ने कहा कि भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए धारा-24 का विशेष महाअभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान को प्रभावी और एक समान तरीके से संचालित करने के लिए राजस्व विभाग ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी जारी की। अब इसी व्यवस्था को आधुनिक सर्वे तकनीक का सहारा मिलने से जमीन से जुड़े कामों में तकनीकी क्षमता बढ़ी है।

    जीएनएसएस रोवर के कई फायदे
    सेंटीमीटर स्तर तक सटीक स्थिति बताता है रोवर
    जीएनएसएस रोवर आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है, जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह लगभग 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक जानकारी दे सकता है। सर्वेक्षक खेत या भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (कोऑर्डिनेट्स) दर्ज करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से दूरी और क्षेत्रफल की गणना की जाती है व डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है।

    जंजीर-फीते से डिजिटल पैमाइश की ओर बढ़ा कदम
    जमीन की पैमाइश के पारंपरिक तरीकों में जंजीर और फीते के इस्तेमाल की तुलना में रोवर तकनीक सर्वेक्षण को अधिक वैज्ञानिक और डिजिटल बना रही है। फील्ड में जुटाए गए डिजिटल निर्देशांकों को जीआईएस और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे तैयार डेटा को सुरक्षित रखना, उसकी गुणवत्ता जांचना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल करना आसान बन रहा है।

    मानवीय चूक की संभावना होगी कम
    रोवर के जरिए भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदु डिजिटल रूप में दर्ज किए जाते हैं। इससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम हो रहा है और गलतियों की संभावना घट रही है। बड़े क्षेत्र में सर्वेक्षण कम समय में पूरा किया जा रहा है और अपेक्षाकृत कम जनशक्ति की जरूरत पड़ रही है। बड़े भूमि सर्वेक्षण और नक्शा परियोजनाओं में इससे समय और लागत बचाने में भी मदद मिलने लगी है।

    फसल को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन की पैमाइश
    कृषि भूमि की पैमाइश में फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। जीएनएसएस रोवर के इस्तेमाल से पारंपरिक तरीके से खेत में बार-बार आवाजाही और लंबी प्रक्रिया की जरूरत कम की जा रही है। सीमा के जरूरी बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक लेकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना पैमाइश करने की सुविधा मिल रही है। किसानों के लिए भी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती जा रही है।

    डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
    रोवर से तैयार डिजिटल डेटा भूमि रिकॉर्ड और नक्शा प्रणालियों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहा है। रिकॉर्ड की गुणवत्ता जांचने और डेटा की ट्रेसबिलिटी बनाए रखने में भी सुविधा है। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग, नक्शा परियोजनाओं और जीआईएस आधारित मैपिंग में इसका इस्तेमाल राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने में सहायता प्रदान कर रहा है।

  • मुख्यमंत्री की प्रदेशवासियों से अपील- ‘वोकल फॉर लोकल’ को बनाएं व्यवहार का हिस्सा

    मुख्यमंत्री की प्रदेशवासियों से अपील- ‘वोकल फॉर लोकल’ को बनाएं व्यवहार का हिस्सा

     

     

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘योगी की पाती’ लिखकर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी और 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गणेश चतुर्थी को सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति संकल्प को सुदृढ़ करने वाला महापर्व बताया। मुख्यमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते हुए प्रदेशवासियों से अपील की कि इसे सिर्फ विचार नहीं, बल्कि व्यवहार का हिस्सा बनाएं।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को संबोधित पाती में लिखा कि प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश शुभत्व एवं मंगल के आराध्य हैं। प्रदेश में युवाओं द्वारा घरों में भगवान गणपति की स्थापना कर श्रद्धा के साथ उनका पूजन किया जाना देख हृदय प्रफुल्लित हो उठता है। सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति अपने संकल्प को सुदृढ़ करने वाले महापर्व गणेश चतुर्थी की सभी को कोटि-कोटि मंगलकामनाएं।

    सीएम ने लिखा कि भगवान गणेश का पर्यावरण और जीवों के साथ गहरा जुड़ाव, उनकी रूप-रचना तथा जीवन-दर्शन, प्रकृति के संरक्षण और संतुलन का संदेश देता है। गज मुख जंगलों और वन्यजीवों का प्रतीक हैं, तो मूषक वाहन भूमि की उर्वरता और कृषि से जुड़ा है। विशाल उदर संपूर्ण ब्रह्मांड को समाहित करने का भाव व्यक्त करता है, जबकि उनके बड़े कान हमें प्रकृति की हर पुकार को सुनने का संदेश देते हैं।

    सीएम ने लिखा कि गणेश चतुर्थी पर पूजा जाने वाला 'एकविंशति पत्र' (21 प्रकार की विशेष पत्तियां) औषधीय पौधों के संरक्षण से जुड़ा है। इस प्रकार गणपति भगवान का चरित्र हमें मानव जीवन और प्रकृति के एक-दूसरे का पूरक होने का संदेश देता है। इसी विराटता को लोकमान्य तिलक ने आस्था से एकता, एकता से जनशक्ति और जनशक्ति से राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला महापर्व बना दिया। गणेशोत्सव के ज्ञान, विवेक और कर्म की भावना सृजन तथा निर्माण के स्वरूप भगवान विश्वकर्मा के पूजन में दिखाई देती है। 17 सितंबर को जब सृष्टि के प्रथम अभियंता भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाएगा, तब कौशल एवं तकनीक के संगम से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प और पुष्ट होगा। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और आधुनिक आधारभूत संरचनाएं नए उत्तर प्रदेश के बढ़ते सामर्थ्य का प्रमाण हैं। किसी प्रदेश का वास्तविक निर्माण केवल बड़े ढांचों से नहीं, वहां के लोगों के हुनर, विचारों की शक्ति और उद्यमिता के साहस से होता है। इसी सोच के साथ हमारी सरकार विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जनपद-एक उत्पाद, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन तथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी पहलों के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों, युवाओं और उद्यमियों को कौशल, उपकरण, वित्त और बाजार से जोड़ने का कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में प्रदेशवासियों से विशेष आग्रह किया कि 'वोकल फॉर लोकल' को केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार का अंग बनाएं। स्थानीय उत्पादों का सम्मान बढ़ेगा तो कारीगरों के हाथों को काम, युवाओं को रोजगार के अवसर और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और हुनर तथा स्थानीय सामर्थ्य पर विश्वास से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

  • बोले मुख्यमंत्री- झूठी और बेवजह शिकायत कर सिस्टम का समय खराब करने वालों पर भी शिकंजा जरूरी

    बोले मुख्यमंत्री- झूठी और बेवजह शिकायत कर सिस्टम का समय खराब करने वालों पर भी शिकंजा जरूरी

     लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है।
     
    मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।
     
    राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने।
     
    उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
     
    भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त
    लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया।
     
    लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास
    उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है।

    चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन
    उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया।
     
    1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत
    संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 लाख 17 हजार 427 रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई। इसमें वर्ष 2018 में सर्वाधिक छह करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिली। पिछले पांच वर्षों में जांच-पड़ताल के बाद 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं।
     
    स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का हुआ विमोचन
    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी और लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी ने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा लघु फिल्म देखी।तिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98

  • यूपी में मेधावी छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, जेम पोर्टल पर खरीद प्रक्रिया शुरू

    यूपी में मेधावी छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, जेम पोर्टल पर खरीद प्रक्रिया शुरू

    लखनऊ
    यूपी सरकार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देगी। दरअसल, महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है। चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा। इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि स्कूटियों की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी।

    प्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे। इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है, ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर और 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह के अनुसार स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी।

    स्कूटी के साथ मिलेगी ये एक्सेसरीज
    हर स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा। स्कूटी के साथ कई एक्सेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर समेत अन्य वस्तुंए भी अनिवार्य है। स्कूटी BS6, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा।

    दिव्यांगजनों के लिए बेहतरीन काम करने वालों को मिलेगा प्राइज
    उधर, दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण और उनके लिए उत्कृष्ट काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योगी सरकार ने राज्य स्तरीय पुरस्कार-2026 की घोषणा की है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

    यह पहल दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए है। राज्य सरकार ने पुरस्कारों के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए बेहतर काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को पहचान देने की व्यवस्था की है। पुरस्कार के लिए इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ 15 सितंबर तक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के निदेशालय लखनऊ में आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने पुरस्कार से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए विभागीय वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर 18001801995 उपलब्ध है।

  • लखनऊ में बनेगा बड़ा मेडिसिटी जोन, 98.5 एकड़ जमीन अधिग्रहण को मिली मंजूरी

    लखनऊ में बनेगा बड़ा मेडिसिटी जोन, 98.5 एकड़ जमीन अधिग्रहण को मिली मंजूरी

    लखनऊ
    राजधानी लखनऊ में बनने जा रही मेडिसटी और विस्तार लेगी। शहीद पथ के पास सुलतानपुर रोड पर वेलनेस सिटी फेज-2 के लिए रास्ता साफ हो गया है। छह गांवों की 98.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए जिलाधिकारी के स्तर से एसआईए अधिसूचना जारी हो गई। भूमि अर्जन अधिनियम के तहत एसआईए यानी सामाजिक समघात निर्धारण की यह प्रारंभिक अधिसूचना है। दूसरे फेज में विस्तार के लिए मोहनलालगंज तहसील के बक्कास, मस्तेमऊ, मलूकपुर ढकवा, चौरहिया, चौरासी, नूरपुर बेहटा गांव के 201 गांटों की कुल 98.51 एकड़ (39.8658 हेक्टेयर) जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी को एसआईए सर्वे 60 दिनों में पूरा कर रिपोर्ट देनी होगी।

    जिलाधिकारी के अनुसार अधिग्रहण शुरू करने से पहले एसआईए कराया जाना अनिवार्य होता है। योजना में सुलतानपुर रोड के पास लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से सुनियोजित विकास और आधुनिक आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वेलनेस सिटी का विस्तार किया जा रहा है। इसके पूर्व मई में योजना के दूसरे चरण के लिए भूमि अर्जन और सर्वे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था। वेलनेस सिटी के फेज-1 के लिए काफी कार्य हो चुका है। जून में लॉटरी का आवंटन किया गया था।

    सबसे बड़ा हेल्थकेयर व मेडिकल जोन होगा
    यह परियोजना लगभग 1,474 एकड़ क्षेत्र में फैली है और इसे 7 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। करीब 150 एकड़ का विशेष अस्पताल क्षेत्र और सुपर-स्पेशलिटी मेडिसिटी बनाई जा रही है, जो मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही दवाओं का शहर में सबसे बड़ा केन्द्र होगा जो अभी तक अमीनाबाद है। कुल क्षेत्रफल का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा (करीब 204 एकड़) पार्कों, ग्रीन बेल्ट और खुली हरियाली के लिए तय किया गया है।

    ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा प्रोजेक्ट
    इस योजना के तहत लगभग 2,935 प्रीमियम आवासीय प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा और यातायात सुगम बनाने के लिए चार नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

    दो साल में बदल जाएगी शहर की सूरत
    लखनऊ विकास प्राधिकरण की वेलनेस सिटी परियोजना का बुनियादी ढांचा और आंतरिक विकास कार्य 2028 तक पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है।चूंकि यह एक विशाल प्रोजेक्ट है, इसलिए इसे अलग-अलग चरणों में तैयार किया जा रहा है। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत स्थानीय किसानों और भू-स्वामियों को पहले चरण की लॉटरी के जरिए विकसित भूखंड आवंटित भी किए जा चुके हैं। सीवेज नेटवर्क, बिजली व्यवस्था, पानी की आपूर्ति और ड्रेनेज सिस्टम जैसे बुनियादी कामों के लिए 225 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया जा चुका है, जिस पर काम शुरू हो रहा है।

  • आगरा में राजनाथ सिंह का अनोखा अंदाज, चांदी का मुकुट लौटाकर बोले- गरीब बेटी के काम आए

    आगरा में राजनाथ सिंह का अनोखा अंदाज, चांदी का मुकुट लौटाकर बोले- गरीब बेटी के काम आए

     आगरा

    उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने प्रवास के दौरान 'खटीक गर्जना सम्मेलन' में हुए स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. दरअसल, समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया. सम्मान स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री ने मुकुट अपने पास रखने के बजाय उसे समाज को वापस लौटा दिया. चांदी का मुकुट वापस लौटाते समय उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन चांदी का यह मुकुट आपके हवाले करता हूं. किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना. राजनाथ सिंह की इस बात ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। 

    'समाज को बांटने की कोशिश में नहीं आएंगे'
    सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने की कोशिश करते हैं. कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है। 

    उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे. समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. राजनाथ सिंह ने कहा- 'याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे। 

    'सनातन और हिंदू धर्म को जाति के चश्मे से देखने वाले मूल भाव नहीं समझते'

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है. इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है. उन्होंने कहा कि वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है। 

    'खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया'
    राजनाथ सिंह ने खटीक समाज के इतिहास और योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन अपने धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया. यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

    रक्षा मंत्री ने समाज से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समाज की ताकत उसके एकजुट रहने में है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिशों से बचना होगा। 

    सबका लक्ष्य एक—धर्म और राष्ट्र की रक्षा
    हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को नहीं समझ पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म-आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य भी हो सकता है। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना।

    खटीक समाज की तारीफ
    1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जाने लगा, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटीक समाज के कई लोगों ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था।

    खटीक वो, जो खौफ को भी डरा दे
    समय चाहे कोई भी रहा हो, चुनौती कैसी भी रही हो और शत्रु कितना भी शक्तिशाली रहा हो, खटीक समाज ने धर्म और देश के स्वाभिमान की रक्षा से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि खटीक वो है, जो खौफ को भी डरा दे। खटीक वो है, जो खतरे में सबसे आगे खड़ा रहे। खटीक वो है, जो खुद कठिनाई सहकर भी दूसरों की रक्षा करे।

    यूपी तेजी से विकास कर रहा
    आज उत्तर प्रदेश भी डबल इंजन की सरकार के साथ तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे और आए दिन दंगे होते थे।

    अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था यूपी
    उत्तर प्रदेश आज विकास के लिए जाना जा रहा है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है। जो प्रदेश कभी अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था, आज औद्योगिक कॉरिडोर बना रहा है। मेट्रो रेल का नेटवर्क फैला रहा है। अब तो आगरा मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

  • काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO विश्वभूषण मिश्र ट्रांसफर, वरखा सिंह बनीं अपर नगर आयुक्त

    काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO विश्वभूषण मिश्र ट्रांसफर, वरखा सिंह बनीं अपर नगर आयुक्त

    वनारस 

    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्र का तबादला कर दिया गया। उन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में उप सचिव बनाया गया है। उन्होंने फरवरी 2024 में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में वायु प्रदूषण से बचाव के लिए धाम परिसर में एयर फिल्टर लगाने की पहल हुई।
    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र का रविवार देर रात तबादला कर दिया गया है। उन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में उप सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वभूषण मिश्र ने 2 फरवरी 2024 को मंदिर के सीईओ का पदभार संभाला था। उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाली।
    अपने कार्यकाल के दौरान, विश्वभूषण मिश्र ने काशी विश्वनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में वायु प्रदूषण से बचाव के लिए धाम परिसर में एयर फिल्टर लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। वर्तमान में धाम परिसर में ये एयर फिल्टर सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं।
    मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कई अन्य कार्यों को लेकर भी उनके कार्यकाल में महत्वपूर्ण पहल की गई थी। इसी तबादला सूची में एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति हुई है। पीसीएस अधिकारी वरखा सिंह को वाराणसी का अपर नगर आयुक्त बनाया गया है। इससे पहले, वरखा सिंह उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ में प्रधान प्रबंधक के पद पर तैनात थीं। उनके स्थानांतरण के बाद, वह अब वाराणसी नगर निगम में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगी।

    विश्वभूषण मिश्र का कार्यकाल और उपलब्धियां
    विश्वभूषण मिश्र ने 2 फरवरी 2024 को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया था। उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक मंदिर प्रशासन की बागडोर संभाली। उनके कार्यकाल में काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया। वायु प्रदूषण से बचाव के लिए धाम परिसर में एयर फिल्टर स्थापित करने का निर्णय भी उनके कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इन एयर फिल्टरों के लगने से धाम परिसर में वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रखने के लिए कई पहल कीं।

    बरखा सिंह की नई जिम्मेदारी
    तबादला सूची में पीसीएस अधिकारी बरखा सिंह को वाराणसी में एक अहम पद दिया गया है। उन्हें वाराणसी का अपर नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी से पहले, वरखा सिंह उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ में प्रधान प्रबंधक के पद पर कार्यरत थीं। अब वह वाराणसी नगर निगम में अपनी नई भूमिका निभाएंगी। यह स्थानांतरण वाराणसी के स्थानीय प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
    विश्वभूषण मिश्र के तबादले के बाद, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंदिर प्रशासन में सीईओ का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। नए अधिकारी के सामने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और बेहतर बनाने की चुनौती होगी। उन्हें मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और धाम में चल रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाना होगा।

  • त्योहारी सीजन में ट्रेन यात्रियों को राहत, तत्काल कोटा बढ़ेगा और दर्जनों स्पेशल ट्रेनें चलेंगी

    त्योहारी सीजन में ट्रेन यात्रियों को राहत, तत्काल कोटा बढ़ेगा और दर्जनों स्पेशल ट्रेनें चलेंगी

    लखनऊ
    दिवाली पर अभी से ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट से परेशान यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर रेलवे प्रशासन ने त्यौहार में तत्काल कोटे की सीटें बढ़ाने का फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजकर अनुमति मांगी गई है। मंजूरी मिलते ही लखनऊ से दिल्ली, मुंबई और हावड़ा रूट की ट्रेनों में तत्काल कोटे की सीटें 6,500 से बढ़ाकर 12,000 से अधिक कर दी जाएंगी। यह बढ़ोतरी पूरी तरह अस्थायी होगी। फिलहाल लखनऊ से दिल्ली जाने वाली लखनऊ मेल, एसी एक्सप्रेस, गोमती और वैशाली एक्सप्रेस, तथा मुंबई जाने वाली पुष्पक, अवध व कुशीनगर एक्सप्रेस में भारी वेटिंग चल रही है। हावड़ा रूट की ट्रेनों का भी यही हाल है।

    दशहरा, दिवाली और छठ पर स्पेशल ट्रेन
    दशहरा, दीपावली और छठ पर्वों पर यात्रियों की भीड़ के मद्देनजर दरभंगा से अहमदाबाद तक पूजा विशेष गाड़ी चलेगी। यह गाड़ी वाराणसी जंक्शन (कैंट) होकर गुजरेगी। पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार ने बताया कि गाड़ी संख्या- 09465 स्पेशल 18, 25 सितम्बर, 2, 9, 16, 23, 30 अक्तूबर, 6, 13, 20 और 27 नवम्बर को हर शुक्रवार अहमदाबाद से रात 8.25 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन रात 11.20 बजे कैंट आएगी।

    यहां से तीसरे दिन सुबह 10.30 बजे दरभंगा पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या-09466 विशेष गाड़ी 21, 28 सितम्बर, 5, 12, 19, 26 अक्तूबर, 2, 9, 16, 23, 30 नवम्बर तथा 2 दिसम्बर को हर सोमवार दरभंगा से भोर में 3 बजे प्रस्थान कर दिन में 1.35 बजे कैंट आएगी। यहां से अहमदाबाद प्रस्थान करेगी।

    त्योहारों पर इन स्पेशल ट्रेनों का भी होगा संचालन
    वहीं, उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज से भी दुर्गापूजा, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा पर ट्रेनों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए स्पेशल ट्रेनों का संचालन होगा। प्रयागराज जंक्शन से उधना के लिए ट्रेन नंबर 04105/04106 विशेष ट्रेन को एक अक्तूबर से 30 नवंबर चलेगी।गुरुवार और रविवार को प्रयागराज से रवाना होगी। प्रयागराज से साबरमती के लिए गाड़ी संख्या 04179/04180 (गाड़ी संख्या 04111/04112 के स्थान पर) तीन अक्तूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को संचालित होगी।प्रयागराज से दादर के लिए गाड़ी संख्या 04139/04140 साप्ताहिक विशेष गाड़ी दो अक्तूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।

    प्रयागराज से वेरावल के लिए गाड़ी संख्या 04173/04174 एक अक्तूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार को संचालित होगी।सूबेदारगंज से वलसाड के लिए गाड़ी संख्या 04119/04120 साप्ताहिक विशेष ट्रेन तीन अक्तूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को चलाई जाएगी।इसी रूट की एक अन्य गाड़ी संख्या 04177/04178 का संचालन छह अक्तूबर से 25 नवंबर के बीच प्रत्येक मंगलवार को होगा।

    सूबेदारगंज से उधना के बीच द्वि-साप्ताहिक विशेष गाड़ी संख्या 04155/04156 आगामी 19 अक्तूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को उपलब्ध रहेगी।इसके अलावा सूबेदारगंज से दादर के लिए गाड़ी संख्या 04175/04176 साप्ताहिक विशेष गाड़ी चार अक्तूबर से 24 नवंबर के बीच प्रत्येक रविवार को तथा सूबेदारगंज से इंदौर के लिए गाड़ी संख्या 04169/04170 – साप्ताहिक विशेष गाड़ी दो अक्तूबर से 28 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को यात्रियों की सेवा के लिए पटरी पर उतरेगी। यह जानकारी उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने दी।

    हरिहर, केवी-जनता एक्स.बदले रास्ते से जाएगी
    वहीं, उत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन (चारबाग) स्टेशन पर कॉनकोर्स निर्माण के लिए लिये गए ब्लॉक की अवधि 15 सितम्बर तक बढ़ा दी गई है। इससे आधा दर्जन से ज्यादा ट्रेनें बदले मार्गों से चलेंगी, जबकि एक गाड़ी को शॉर्ट टर्मिनेट और शॉर्ट ओरिजिनेट किया जाएगा।

    पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सुमित कुमार ने बताया कि 14 और 15 सितम्बर को बनारस-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस उतरेटिया में यात्रा समाप्त करेगी और यहीं से चलाई जाएगी। वहीं, 14 सितम्बर को अप और डाउन साइड की बरौनी-अम्बाला हरिहर एक्सप्रेस, 14 और 15 सितम्बर को बनारस-नई दिल्ली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस (केवी) और इन्हीं तिथियों में बनारस-देहरादून जनता एक्सप्रेस बदले मार्ग उतरेटिया-ट्रांसपोर्ट नगर-आलमनगर के रास्ते चलाई जाएंगी। 14 सितम्बर को गुवाहाटी-ओखा एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग बाराबंकी-मल्हौर-ऐशबाग-कानपुर सेंट्रल के रास्ते चलाई जायेगी।

  • लखनऊ में ड्राइविंग टेस्ट की मैनुअल व्यवस्था खत्म, सेंसर से पकड़ी जाएंगी ड्राइवर की गलतियां

    लखनऊ में ड्राइविंग टेस्ट की मैनुअल व्यवस्था खत्म, सेंसर से पकड़ी जाएंगी ड्राइवर की गलतियां

     लखनऊ
     परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने वालों का सोमवार से वाहन चलाने का टेस्ट ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर मौंदा में होगा। अब टेस्ट की व्यवस्था बदल जाएगी। आवेदकों का ट्रांसपोर्ट नगर व देवा रोड एआरटीओ कार्यालय में ट्रैक पर टेस्ट नहीं होगा।

    ज्ञात हो कि ट्रांसपोर्ट नगर कार्यालय में 2014 में 20 लाख रुपये की लागत से तैयार कराए गए टेस्ट ट्रैक पर अब रिनीवल यानि नवीनीकरण के लिए आने वाले आवेदकों का टेस्ट होगा।

    परिवहन विभाग ने राजधानी में ड्राइविंग टेस्ट की मैनुअल व्यवस्था खत्म कर दिया है। अब कंप्यूटराइज्ड और सेंसर आधारित सिस्टम से नए केंद्र में आटोमेटेड टेस्टिंग होगी। मौंदा केंद्र के ट्रैक पर लगे सेंसर वाहन की गतिविधि और चालक की गलतियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। साथ ही टेस्ट के परिणाम में मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश कम होगी।

    आज से ड्राइविंग टेस्ट शुरू
    राजधानी के पहले ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर का उद्घाटन 30 जून को परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने किया था। अब 14 सितंबर से वहां स्थायी डीएल के लिए ड्राइविंग टेस्ट शुरू किया जा रहा है। शुरुआती योजना में प्रतिदिन 150 आवेदकों के टेस्ट की क्षमता थी, इसे बढ़ाकर 300 टेस्ट प्रतिदिन किया गया था।

    एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया, पहले आवेदक एआरटीओ कार्यालय पहुंचकर दस्तावेज और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ट्रैक पर वाहन चलाकर टेस्ट देते थे।

    अब उन्हें नए आटोमेटेड ट्रैक पर टेस्ट देना होगा। बायोमीट्रिक व अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया एआरटीओ कार्यालय में ही पूरी होगी। उल्लेखनीय है कि मौंदा स्थित नया केंद्र ट्रांसपोर्ट नगर से नादरगंज इंडस्ट्रियल एरिया होकर सेंटर 12 व कानपुर रोड किसान पथ से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।